भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 MCQs Set-9

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

 

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1. गिरफ्तारी की आशंका करने वाले व्यक्ति की जमानत मंजूर करने के लिए निदेश किससे सम्बंधित है?

a. धारा 472

b. धारा 476

c. धारा 482

d. धारा 480

 

2. यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसे अजमानतीय अपराध के अभियोग में गिरफ्तार किया जा सकता है, तो वह किससे जमानत के लिए आवेदन कर सकता है?

a. पुलिस अधीक्षक से

b. उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय से

c. जिला मजिस्ट्रेट से

d. लोक अभियोजक से

 

3. उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय जमानत के निदेश में कौन-कौन सी शर्तें लगा सकता है?

a. व्यक्ति को पुलिस पूछताछ में उपस्थित रहना होगा

b. व्यक्ति को किसी को तथ्य छिपाने के लिए प्रेरित नहीं करना होगा

c. व्यक्ति भारत बिना न्यायालय की अनुमति छोड़ेगा नहीं

d. उपरोक्त सभी

 

4. यदि व्यक्ति को वारण्ट के बिना गिरफ्तार किया जाता है और वह जमानत देने के लिए तैयार है, तो क्या होगा?

a. उसे जेल में रखा जाएगा

b. उसे जमानत पर छोड़ दिया जाएगा

c. उसे फटकारा जाएगा

d. उसे अदालत में पेश नहीं किया जाएगा

 

5. जमानत के बारे में उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय की विशेष शक्तियां किस से सम्बंधित है?

a. धारा 472

b. धारा 483

c. धारा 482

d. धारा 480

 

6. उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय किसे जमानत पर छोड़ने का निदेश दे सकता है?

a. किसी ऐसे व्यक्ति को, जिस पर अपराध का अभियोग है और जो अभिरक्षा में है

b. केवल उन व्यक्तियों को जिनके खिलाफ कोई केस नहीं है

c. केवल वे व्यक्ति जो अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं होते

d. केवल वे जो मौत की सजा पाए हुए हों

 

7. उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय किस स्थिति में लोक अभियोजक को जमानत आवेदन की सूचना देगा?

a. जब आरोपी किसी भी प्रकार का अपराध करता है

b. जब आरोपी ऐसे अपराध का अभियुक्त हो जो अनन्यतः सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है या आजीवन कारावास दंडनीय हो

c. केवल तभी जब आरोपी निर्दोष हो

d. जब आरोपी जमानत के लिए आवेदन न करे

 

8. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 65 या धारा 70 की उपधारा (2) के अधीन विचारण योग्य अपराधों के मामले में, जमानत आवेदन की सूचना लोक अभियोजक को कितनी अवधि में दी जानी चाहिए?

a. 7 दिन

b. 10 दिन

c. 15 दिन

d. 30 दिन

 

9. उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय जमानत पर छोड़े गए व्यक्ति को क्या कर सकता है?

a. उसे पुनः जमानत दे सकता है

b. उसे गिरफ्तार करने का निदेश दे सकता है और अभिरक्षा के लिए सुपुर्द कर सकता है

c. उसे दोषी ठहरा सकता है

d. उसे परिवीक्षा पर छोड़ सकता है

 

10. इस अध्याय के अधीन निष्पादित प्रत्येक बंधपत्र की रकम कैसे निर्धारित की जाएगी?

a. हमेशा अधिकतम रकम रखी जाएगी

b. मामले की परिस्थितियों का सम्यक् ध्यान रख कर नियत की जाएगी और अत्यधिक नहीं होगी

c. आरोपी की आय के अनुसार निश्चित की जाएगी

d. पुलिस की मर्जी से

 

11. कौन-सा न्यायालय पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट द्वारा अपेक्षित जमानत घटाने का निदेश दे सकता है?

a. जिला न्यायालय

b. उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय

c. सर्वोच्च न्यायालय

d. मजिस्ट्रेट न्यायालय

 

12. अभियुक्त और प्रतिभुओं का बंधपत्र किस से सम्बंधित है?

a. धारा 472

b. धारा 485

c. धारा 482

d. धारा 480

 

13. प्रतिभुओं द्वारा घोषणा किस से सम्बंधित है?

a. धारा 472

b. धारा 485

c. धारा 482

d. धारा 480

 

14. अभिरक्षा से उन्मोचन किस से सम्बंधित है?

a. धारा 487

b. धारा 485

c. धारा 482

d. धारा 480

 

15. प्रतिभुओं का उन्मोचन किस से सम्बंधित है?

a. धारा 487

b. धारा 485

c. धारा 488

d. धारा 489

 

16. बंधपत्र समपहृत से सम्बंधित प्रक्रिया किस धारा में दी गयी है?

a. धारा 485

b. धारा 489

c. धारा 491

d. धारा 492

 

17. यदि बंधपत्र समपड़त हो चुका है, तो न्यायालय क्या करेगा?

a. अभियुक्त को बरी कर देगा

b. बंधपत्र से आबद्ध व्यक्ति से शास्ति देने या कारण बताने को कहेगा

c. अभियुक्त को सजा सुनाएगा

d. बंधपत्र को रद्द कर देगा

 

18. बंधपत्र के समपहरण के पूर्व यदि कोई प्रतिभू मर जाता है, तो क्या होगा?

a. उसकी संपत्ति से शास्ति वसूली जाएगी

b. उसके उत्तराधिकारियों को कारावास होगा

c. उसकी संपत्ति बंधपत्र के दायित्व से मुक्त हो जाएगी

d. नया प्रतिभू नियुक्त किया जाएगा

 

19. यदि शास्ति वसूली योग्य न हो और न दी जाए, तो प्रतिभू के साथ क्या किया जा सकता है?

a. अधिकतम 3 माह के लिए जेल भेजा जा सकता है

b. केवल चेतावनी दी जा सकती है

c. प्रतिभू को हटाकर नया प्रतिभू नियुक्त किया जाएगा

d. उसे प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा 6 माह तक सिविल कारागार में भेजा जा सकता है

 

20. यदि व्यक्ति को ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है जो बंधपत्र की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो क्या उपयोग किया जा सकता है?

a. प्राथमिकी की प्रतिलिपि

b. अभियुक्त का बयान

c. दोषसिद्धि का प्रमाणित निर्णय प्रमाण के रूप में

d. पुलिस रिपोर्ट

 

21. बंधपत्र की किस शर्त में "तत्पश्चात् अंतरित न्यायालय" के समक्ष हाजिर होना सम्मिलित है?

a. सम्पत्ति जप्त करने की शर्त

b. केवल मूल न्यायालय के समक्ष हाजिर होने की शर्त

c. न्यायालय के समक्ष हाजिर होने या सम्पत्ति पेश करने की शर्त

d. गिरफ्तारी की शर्त

 

22. बंधपत्र और जमानतपत्र का रद्दकरण किस से सम्बंधित है?

a. धारा 497

b. धारा 495

c. धारा 498

d. धारा 492

 

23. धारा 492 के अंतर्गत, यदि बंधपत्र की किसी शर्त का उल्लंघन होता है, तो क्या प्रभाव होता है?

a. केवल अभियुक्त का बंधपत्र रद्द होगा

b. केवल प्रतिभू का बंधपत्र रद्द होगा

c. अभियुक्त एवं प्रतिभू, दोनों के बंधपत्र रद्द होंगे

d. बंधपत्र स्वतः वैध रहेगा

 

24. यदि बंधपत्र की शर्त का उल्लंघन होता है और कोई पर्याप्त कारण नहीं होता, तो अभियुक्त को क्या अनुमति नहीं दी जाएगी?

a. पुनः गिरफ्तार किया जाएगा

b. उसे जमानत पर छोड़ा जाएगा

c. केवल अपने ही बंधपत्र पर छोड़ा नहीं जाएगा

d. उसकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी

 

25. यदि किसी न्यायालय या अधिकारी द्वारा बंधपत्र निष्पादित करने के लिए अपेक्षित व्यक्ति बालक (minor) है, तो वह न्यायालय क्या कर सकता है?

a. बालक से ही बंधपत्र निष्पादित करवाएगा

b. बालक को जेल भेज देगा

c. बालक के स्थान पर केवल प्रतिभू या प्रतिभुओं द्वारा निष्पादित बंधपत्र स्वीकार करेगा

d. मामले को स्थगित कर देगा

 

26. धारा 495 के अनुसार, यदि किसी मजिस्ट्रेट द्वारा धारा 491 के अधीन कोई आदेश पारित किया गया है, तो उसकी अपील किस न्यायालय में की जा सकती है?

a. उच्च न्यायालय

b. सत्र न्यायालय (Sessions Court)

c. जिला न्यायालय

d. सर्वोच्च न्यायालय

 

27. कतिपय मुचलकों पर देय रकम का उदग्रहण करने का निदेश देने की शक्ति किस धारा से सम्बंधित है?

a. धारा 496

b. धारा 492

c. धारा 485

d. धारा 489

 

28. धारा 496 के अनुसार, उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय किसे निर्देश दे सकता है कि वह बंधपत्र पर देय रकम को उग्रहित (recover) करे?

a. पुलिस अधीक्षक को

b. अभियोजन अधिकारी को

c. किसी मजिस्ट्रेट को

d. संबंधित वकील को

 

29. सम्पत्ति का व्ययन किस अध्याय से सम्बंधित है?

a. अध्याय 34 

b. अध्याय 35

c. अध्याय 36 

d. अध्याय 37

 

30. यदि प्रस्तुत की गई संपत्ति शीघ्रतया क्षयशील हो, तो न्यायालय क्या कर सकता है?

a. उसे वापस लौटा देता है

b. उसे जप्त कर लेता है

c. उसका विक्रय या अन्यथा व्ययन का आदेश दे सकता है

d. उसे स्थायी संग्रहालय में भेज देता है

 

31. धारा 497 की व्याख्या के अनुसार "संपत्ति" में कौन-कौन सी वस्तुएँ सम्मिलित हैं?

a. केवल दस्तावेज

b. केवल अचल संपत्ति

c. न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किसी भी किस्म की संपत्ति या दस्तावेज, और अपराध से संबंधित या प्रयुक्त संपत्ति

d. केवल नकद संपत्ति

 

32. न्यायालय या मजिस्ट्रेट को उपधारा (1) में निर्दिष्ट संपत्ति का विवरण कितने दिन के भीतर तैयार करना होता है?

a. 7 दिन

b. 10 दिन

c. 14 दिन

d. 30 दिन

 

33. धारा 497 के अनुसार, यदि आवश्यक हो, तो संपत्ति का कौन-सा डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सकता है?

a. ऑडियो रिकॉर्डिंग

b. हस्तलिखित नोट्स

c. फोटो या वीडियो

d. एक्स-रे स्कैन

 

34. उपधारा (4) और (5) के अनुसार, तैयार विवरण, फोटो और वीडियोग्राफी का उपयोग किस रूप में किया जाएगा?

a. केवल FIR के लिए

b. साक्ष्य के रूप मे

c. समाचार रिपोर्ट के लिए

d. किसी के निजी उपयोग के लिए

 

35. फोटो या वीडियो लिए जाने के बाद न्यायालय को संपत्ति के निपटान का आदेश कितने दिनों के भीतर देना होता है?

a. 7 दिन

b. 14 दिन

c. 30 दिन

d. 60 दिन

 

36. विनश्वर सम्पति को बेचने की शक्ति किस धारा से सम्बंधित है?

a. धारा 509

b. धारा 505

c. धारा 506

d. धारा 502

 

37. मजिस्ट्रेट को संपत्ति बेचने का अधिकार तब भी है जब उसका मूल्य कितने रुपए से कम हो?

a. ₹1,00,000

b. ₹50,000

c. ₹25,000

d. ₹10,000

 

38. क्या मजिस्ट्रेट विक्रय का आदेश कभी भी दे सकता है यदि धारा 505 की शर्तें पूरी हों?

a. नहीं, केवल छह महीने बाद

b. नहीं, केवल उच्च न्यायालय की अनुमति से

c. हाँ, यदि संपत्ति विनश्वर हो और हकदार ज्ञात न हो

d. केवल तब जब संपत्ति विवादास्पद हो

 

39. ऐसी अनियमितताएं, जो किसी विचारण को दूषित नहीं करतीं, का उल्लेख संहिता की किस धारा में किया गया है-

a. धारा 560

b. धारा 506

c. धारा 562

d. धारा 564

 

40. धारा 506 के अनुसार, यदि मजिस्ट्रेट ने जो कार्य किया है वह विधि द्वारा सशक्त नहीं है, तब भी उसकी कार्यवाही क्यों अपास्त नहीं मानी जाएगी?

a. क्योंकि मजिस्ट्रेट की गलती सद्भावपूर्वक की गई हो

b. क्योंकि वह सर्वोच्च न्यायालय का आदेश हो

c. क्योंकि पुलिस ने मंजूरी दी हो

d. क्योंकि मामले में कोई आरोपी न हो

 

41. धारा 506 के अंतर्गत, मजिस्ट्रेट किस प्रकार का वारंट जारी करने में सद्भावपूर्वक गलती कर सकता है लेकिन कार्यवाही अपास्त नहीं मानी जाएगी?

a. गिरफ्तारी वारंट

b. तलाशी वारंट (धारा 97 के अंतर्गत)

c. सम्मन

d. कोई भी वारंट

 

42. निम्नलिखित में से कौन-सा आदेश मजिस्ट्रेट विधि द्वारा सशक्त न होकर भी दे सकता है, जिसकी वजह से कार्यवाही अपास्त नहीं होगी?

a. पुलिस को धारा 174 के अंतर्गत अन्वेषण का आदेश देना

b. अपराधी को दोषी ठहराना

c. पुलिस से पूछताछ करना

d. साक्ष्य को खारिज करना

 

43. मजिस्ट्रेट किस धारा के अंतर्गत मृत्यु- समीक्षा करने का आदेश दे सकता है, यदि वह विधि द्वारा सशक्त न हो, तब भी कार्यवाही अपास्त नहीं मानी जाएगी?

a. धारा 196

b. धारा 207

c. धारा 212

d. धारा 343

 

44. धारा 506 के अनुसार, मजिस्ट्रेट किस प्रकार की क्षमादान दे सकता है जिससे कार्यवाही प्रभावित नहीं होती?

a. धारा 450 के अंतर्गत

b. धारा 343 के अंतर्गत

c. धारा 504 के अंतर्गत

d. धारा 505 के अंतर्गत

 

45. मजिस्ट्रेट किस मामले को वापस मंगाकर स्वयं विचारण कर सकता है, बिना कार्यवाही को दूषित किए?

a. धारा 99 के अंतर्गत

b. धारा 450 के अंतर्गत

c. धारा 207 के अंतर्गत

d. धारा 212 के अंतर्गत

 

46. धारा 506 के अनुसार, किस मामले में संपत्ति का विक्रय किया जा सकता है जिससे कार्यवाही दूषित नहीं मानी जाएगी?

a. केवल धारा 503 के अंतर्गत

b. धारा 504 या धारा 505 के अंतर्गत

c. धारा 506 के अंतर्गत

d. धारा 499 के अंतर्गत

 

47. विचारण दूषित करने वाली अनियमितताओं का उल्लेख किस धारा में किया गया है-

a. धारा 507

b. धारा 506

c. धारा 566

d. धारा 568

 

48. यदि मजिस्ट्रेट संपत्ति को धारा 85 के अंतर्गत कुर्क करता है और उसका विक्रय करता है, जबकि उसके पास विधि द्वारा इस कार्य के लिए सशक्ति नहीं है, तो उसकी कार्यवाही क्या होगी?

a. वैध होगी

b. अपास्त (शून्य) होगी

c. सशर्त वैध होगी

d. केवल न्यायालय के आदेश से मान्य होगी

 

49. मजिस्ट्रेट किस स्थिति में तलाशी वारंट जारी करता है और उसकी कार्यवाही दूषित मानी जाएगी?

a. पुलिस की अनुमति के बिना

b. डाक प्राधिकारी की अभिरक्षा में रखी चीज के लिए, जबकि वह इस कार्य के लिए सशक्त न हो

c. आरोपी की सहमति के बिना

d. यदि वारंट 24 घंटे से अधिक पुराना हो

 

50. धारा 507 के अनुसार, मजिस्ट्रेट द्वारा किस कार्यवाही को दूषित माना जाएगा?

a. भरण-पोषण के लिए आदेश देना

b. पुलिस को आदेश देना

c. साक्ष्य इकट्ठा करना

d. तलाशी वारंट जारी करना

 

51. मजिस्ट्रेट किस प्रकार की प्रतिभूति मांगने पर कार्यवाही दूषित होगी?

a. न्यायालय के लिए

b. परिशान्ति और सदाचार के लिए

c. पुलिस के लिए

d. अभियुक्त के लिए

 

52. धारा 507 के अनुसार, यदि मजिस्ट्रेट किसी अन्य मजिस्ट्रेट द्वारा अभिलिखित कार्यवाही पर धारा 364 के अंतर्गत दंडादेश पारित करता है, तो क्या होगा?

a. कार्यवाही वैध होगी

b. कार्यवाही शून्य (अपास्त) होगी

c. कार्यवाही स्थगित होगी

d. कार्यवाही को अपील के लिए भेजा जाएगा

 

53. धारा 507 में निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य मजिस्ट्रेट विधि द्वारा सशक्त न होकर करे तो कार्यवाही दूषित होगी?

a. अपील का विनिश्चय करना

b. साक्ष्य को स्वीकार करना

c. दोषसिद्धि के लिए सुनवाई करना

d. अपराध का अन्वेषण करना

 

54. मजिस्ट्रेट किस धारा के अंतर्गत पारित आदेश का पुनरीक्षण कर सकता है, जिसके बिना सशक्ति के कार्यवाही दूषित मानी जाएगी?

a. धारा 438

b. धारा 491

c. धारा 210

d. धारा 152

 

55. मजिस्ट्रेट का कार्यवाही दूषित मानी जाएगी यदि वह किस कार्य को करता है?

a. संक्षेप में अपराधी का विचारण करना

b. अपराधी को गिरफ्तार करना

c. गवाहों को बुलाना

d. मामले को सुनवाई के लिए भेजना

 

56. गलत स्थान में कार्यवाही किस धारा से सम्बंधित है?

a. धारा 438

b. धारा 491

c. धारा 508

d. धारा 152

 

57. धारा 508 के अनुसार, किसी दंड न्यायालय का निष्कर्ष, दंडादेश या आदेश कब अपास्त (शून्य) किया जाएगा?

a. जब कार्यवाही पूरी तरह वैध हो

b. जब जांच या विचारण गलत स्थान (सेशन खंड, जिला, उपखंड आदि) में हुआ हो और यह दिखे कि इस गलती के कारण न्याय नहीं हुआ

c. केवल जब उच्च न्यायालय का आदेश हो

d. हमेशा जब कार्यवाही गलत स्थान पर हो

 

58. धारा 508 के अंतर्गत "गलत स्थान" से क्या तात्पर्य है?

a. देश के बाहर

b. कोई भी असंबंधित स्थान

c. गलत सेशन खंड, जिला, उपखंड या अन्य स्थानीय क्षेत्र

d. न्यायालय की बंदी

 

59. यदि न्यायालय को लगता है कि धारा 183 या धारा 316 के उपबंधों का पालन नहीं किया गया है, तो वह क्या कर सकता है?

a. तुरंत कथन को खारिज कर सकता है

b. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 94 के तहत भी साक्ष्य ले सकता है

c. अभियुक्त को दोषी ठहरा सकता है

d. मामले को बंद कर सकता है

 

60. न्यायालय कब ऐसे कथन को ग्रहण कर सकता है जिसमें धारा 183 या 316 का अनुपालन नहीं हुआ हो?

a. जब अभियुक्त की प्रतिरक्षा को कोई हानि न हुई हो और कथन सम्यक रूप से किया गया हो

b. जब अभियुक्त ने कथन दिया हो

c. जब अभियुक्त सहमत हो

d. जब पुलिस ने कथन दर्ज किया हो

 

61. धारा 509 के उपबंध किन न्यायालयों पर लागू होते हैं?

a. केवल प्रथम दृष्टया न्यायालय

b. केवल उच्च न्यायालय

c. अपील, निर्देश और पुनरीक्षण न्यायालयों

d. केवल सुप्रीम कोर्ट

 

62. किस स्थिति में सक्षम न्यायालय का कोई निष्कर्ष, दंडादेश या आदेश अविधिमान्य (अमान्य) माना जाएगा?

a. जब अभियुक्त दोषी साबित हो

b. जब आरोप विरचित न किया गया हो या आरोप में गलती, लोप या अनियमितता हो, और अपील या पुनरीक्षण न्यायालय को लगे कि इस कारण न्याय नहीं हुआ

c. जब अभियोजन पक्ष गवाह पेश न करे

d. जब पुलिस जांच अधूरी हो

 

63. यदि अपील या पुनरीक्षण न्यायालय को लगे कि न्याय नहीं हुआ है क्योंकि आरोप विरचित नहीं किया गया, तो वह क्या कर सकता है?

a. दंडादेश को स्थगित कर सकता है

b. आरोप विरचित करने का आदेश दे सकता है और विचारण पुनः प्रारंभ कर सकता है

c. अभियुक्त को तुरंत बरी कर सकता है

d. पुलिस को पुनः जांच करने का आदेश दे सकता है

 

64. आरोप में गलती, लोप या अनियमितता पाये जाने पर पुनरीक्षण न्यायालय क्या निदेश दे सकता है?

a. दोषसिद्धि कर सकता है

b. पुनः नए विरचित आरोप पर विचारण कराने का आदेश दे सकता है

c. केस बंद कर सकता है

d. अभियुक्त को जमानत पर छोड़ सकता है

 

65. न्यायालय कब तक किसी निष्कर्ष, दंडादेश या आदेश को गलती, लोप या अनियमितता के कारण उलट या परिवर्तित नहीं करेगा?

a. जब तक अभियुक्त सहमत न हो

b. जब तक अपील या पुनरीक्षण न्यायालय को यह न लगे कि उससे वस्तुतः न्याय प्रभावित हुआ है

c. हमेशा

d. जब तक पुलिस की रिपोर्ट सही न हो

 

66. धारा 511 के अनुसार, न्यायालय किसी गलती या अनियमितता को उलटने से पहले क्या विचार करेगा?

a. क्या उक्त आपत्ति पूर्व में उठाई जा सकती थी और उठाई जानी चाहिए थी

b. अभियुक्त की माफी

c. अभियोजन पक्ष की सहमति

d. गवाहों की संख्या

 

67. धारा 511 के अंतर्गत निम्न में से कौन सी कार्यवाही में हुई गलती, लोप या अनियमितता का न्यायालय द्वारा मूल्यांकन किया जाएगा?

a. परिवाद, समन, वारण्ट, उद्घोषणा, आदेश, निर्णय या अन्य कार्यवाही

b. केवल अंतिम निर्णय

c. केवल पुलिस जांच

d. केवल अभियोजन पक्ष की रिपोर्ट

 

68. कुछ अपराधों का संज्ञान करने के लिए परिसीमा किस अध्याय से सम्बंधित है?

a. अध्याय 37

b. अध्याय 38

c. अध्याय 36

d. अध्याय 35

 

69. धारा 514 के अनुसार, कोई न्यायालय अपराध का संज्ञान कब नहीं ले सकता?

a. जब अभियुक्त गिरफ्तार न हुआ हो

b. जब चार्जशीट दाखिल न हुई हो

c. जब अपराध परिसीमा-काल की समाप्ति के बाद हो

d. जब अभियोजन पक्ष गवाह न ला पाए

 

70. यदि कोई अपराध केवल जुर्माने से दंडनीय है, तो उसका परिसीमा-काल कितना होगा?

a. 3 वर्ष

b. 1 वर्ष

c. 6 माह

d. 2 वर्ष

 

71. यदि कोई अपराध 1 वर्ष से अनधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय है, तो परिसीमा-काल क्या होगा?

a. 3 वर्ष

b. 1 वर्ष

c. 6 माह

d. 2 वर्ष

 

72. यदि कोई अपराध 1 वर्ष से अधिक किंतु 3 वर्ष से कम कारावास से दंडनीय है, तो उसका परिसीमा-काल क्या होगा?

a. 6 माह

b. 2 वर्ष

c. 3 वर्ष

d. 1 वर्ष

 

73. धारा 514 के अनुसार, जिन अपराधों का एक साथ विचारण किया जा सकता है, वहाँ परिसीमा-काल किस आधार पर तय होगा?

a. औसत दंड अवधि के आधार पर

b. सबसे हल्के अपराध के आधार पर

c. कठोरतर या कठोरतम दंड से दंडनीय अपराध के आधार पर

d. मजिस्ट्रेट की इच्छा पर

 

74. धारा 515 के अनुसार, सामान्यतः परिसीमा काल किस दिन से प्रारंभ होता है?

a. जब अपराध का आरोप लगाया जाए

b. जब अभियुक्त गिरफ्तार हो

c. अपराध की तारीख से

d. जब न्यायालय संज्ञान ले

 

75. यदि अपराध के किए जाने की जानकारी पीड़ित या पुलिस को नहीं है, तो परिसीमा काल कब प्रारंभ होगा?

a. जब अपराध न्यायालय में पहुंचे

b. जिस दिन पहली बार पीड़ित या पुलिस को अपराध की जानकारी होती है (जो पहले हो)

c. जब गवाह मिल जाए

d. जब एफआईआर दर्ज हो

 

76. यदि यह ज्ञात नहीं हो कि अपराध किसने किया है, तो परिसीमा काल कब प्रारंभ होगा?

a. जब मामला न्यायालय में प्रस्तुत हो

b. जब पीड़ित न्यायालय जाए

c. जिस दिन पहली बार अपराधी का पता चलता है (पीड़ित या पुलिस को – जो पहले हो)

d. जब आरोप पत्र दाखिल हो

 

77. परिसीमा की अवधि की गणना करते समय कौन-सा दिन शामिल नहीं किया जाएगा?

a. अपराध का दिन

b. संज्ञान लेने का दिन

c. अभियोजन की तिथि

d. वह दिन जिस दिन अवधि की गणना प्रारंभ होनी है

 

78. यदि किसी अपराध की जानकारी एक ही दिन पीड़ित और पुलिस दोनों को हो, तो परिसीमा काल किस आधार पर शुरू होगा?

a. जब एफआईआर दर्ज हो

b. जब गिरफ्तारी हो

c. दोनों में से पहले को जानकारी मिलने की तिथि

d. जब अभियुक्त पकड़ा जाए

 

79. धारा 516 के अनुसार, परिसीमा काल की गणना में उस समय को अपवर्जित किया जाएगा जब:

a. अभियुक्त जमानत पर हो

b. अभियोजन विचाराधीन हो और सम्यक तत्परता से चलाया जा रहा हो

c. पुलिस अपराध को अनदेखा कर दे

d. न्यायालय ने आदेश न दिया हो

 

80. सम्यक् तत्परता से चलाए गए अभियोजन के अपवर्जन का लाभ कब नहीं मिलेगा?

a. जब अभियोजन जुर्माने से दंडनीय हो

b. जब अभियोजन गलत न्यायालय में सद्भावपूर्वक न किया गया हो

c. जब अभियोजन उच्च न्यायालय में हो

d. जब अभियुक्त अनुपस्थित हो

 

81. यदि अभियोजन के लिए सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक हो, तो अनुमति प्राप्त करने के समय को:

a. परिसीमा में जोड़ा जाएगा

b. नजरअंदाज किया जाएगा

c. अपवर्जित किया जाएगा

d. डबल गिना जाएगा

 

82. परिसीमा काल की गणना में किन दो तिथियों को अनुमति प्राप्ति के समय में अपवर्जित किया जाएगा?

a. अपराध की तिथि और अनुमति मिलने की तिथि

b. आवेदन की तिथि और आदेश मिलने की तिथि

c. FIR की तिथि और आरोप पत्र की तिथि

d. गिरफ्तारी की तिथि और समन की तिथि

 

83. धारा 516 के अनुसार, कौन-सी स्थिति परिसीमा काल से अपवर्जित की जाएगी?

a. जब अपराधी भारत में हो

b. जब अपराधी न्यायालय में उपस्थित हो

c. जब अपराधी भारत से अनुपस्थित हो या फरार हो

d. जब अभियुक्त दोषमुक्त हो

 

84. धारा 517 के अनुसार, यदि परिसीमा काल समाप्त होने की तिथि पर न्यायालय बंद हो, तो संज्ञान कब लिया जा सकता है?

a. अगले महीने

b. किसी भी समय

c. न्यायालय के पुनः खुलने वाले दिन

d. जब अभियुक्त उपस्थित हो

 

85. धारा 518 के अनुसार, चालू रहने वाले अपराध की स्थिति में परिसीमा-काल कब प्रारंभ होता है?

a. अपराध की तिथि से

b. जब पुलिस को जानकारी मिलती है

c. हर उस क्षण से जब तक अपराध जारी रहता है

d. न्यायालय में प्रथम सुनवाई की तिथि से

 

86. "चालू रहने वाला अपराध" किसे कहा जाता है?

a. जो बार-बार होता है

b. जो एक बार होता है और समाप्त हो जाता है

c. जो लगातार समय तक बना रहता है

d. जो न्यायालय द्वारा प्रमाणित हो

 

87. नीचे दिए गए में से कौन-सा उदाहरण चालू रहने वाले अपराध का हो सकता है?

a. हत्या

b. एक बार की चोरी

c. अवैध कब्जा जो लगातार जारी हो

d. झूठा हलफनामा देना

 

88. धारा 519 के अनुसार, क्या न्यायालय परिसीमा-काल समाप्त होने के बाद भी किसी अपराध का संज्ञान ले सकता है?

a. नहीं, कभी नहीं

b. हाँ, जब अभियुक्त उपस्थित हो

c. हाँ, यदि विलंब का उचित रूप से स्पष्टीकरण किया गया हो

d. केवल उच्च न्यायालय ऐसा कर सकता है

 

89. परिसीमा-काल की समाप्ति के पश्चात् संज्ञान लेने की अनुमति न्यायालय किस स्थिति में दे सकता है?

a. केवल अभियोजन की अनुशंसा पर

b. जब मामला मीडिया में आए

c. जब न्यायालय को लगता है कि यह न्याय के हित में है

d. जब अपराध संगीन हो

 

90. धारा 519 किन पूर्ववर्ती उपबंधों को अधिकृत रूप से शिथिल करने की अनुमति देता है?

a. अधिकार क्षेत्र संबंधी उपबंधों को

b. केवल संज्ञान प्रक्रिया को

c. इस अध्याय के अंतर्गत आने वाले सभी परिसीमा संबंधी उपबंधों को

d. पुलिस रिपोर्ट के प्रावधानों को

 

91. भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 520 के अनुसार, जब किसी अपराध का विचारण उच्च न्यायालय द्वारा धारा 447 के अधीन न करके अन्यथा किया जाता है, तब वह:

a. सीधे निर्णय दे सकता है बिना किसी प्रक्रिया के

b. मजिस्ट्रेट कोर्ट की प्रक्रिया का पालन करेगा

c. अपनी स्वयं की प्रक्रिया बनाएगा

d. उस प्रक्रिया का अनुपालन करेगा, जिसका अनुपालन सेशन न्यायालय करता यदि वही विचारण करता

 

92. भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 521 के अंतर्गत, जब कोई व्यक्ति किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष लाया जाता है और उस पर ऐसा अपराध आरोपित किया जाता है जिसका विचारण सामान्य न्यायालय या सेना न्यायालय दोनों द्वारा किया जा सकता है, तब मजिस्ट्रेट क्या करेगा?

a. व्यक्ति को तुरंत रिहा कर देगा

b. केवल सिविल कोर्ट को मामला सौंपेगा

c. उस व्यक्ति को कमान ऑफिसर को सौंप देगा, यदि मामला उचित हो

d. सेना न्यायालय को ही हमेशा प्राथमिकता देगा

 

93. सेना न्यायालय के अंतर्गत ऐसा कौन-सा अधिकरण शामिल है?

a. केवल नागरिक न्यायालय

b. केवल उच्च न्यायालय

c. ऐसा अधिकरण जिसकी शक्तियाँ वैसी ही हैं जैसी किसी सेना न्यायालय की होती हैं

d. केवल सत्र न्यायालय

 

94. यदि किसी मजिस्ट्रेट को किसी यूनिट के कमान ऑफिसर से अभियुक्त को सौंपने हेतु लिखित आवेदन प्राप्त होता है, तो मजिस्ट्रेट का क्या कर्तव्य है?

a. तुरंत केस खारिज कर दे

b. उस व्यक्ति को छोड़ दे

c. अभियुक्त को पकड़ने और सुरक्षित रखने के लिए प्रयास करना

d. उच्च न्यायालय को रिपोर्ट करना

 

95. धारा 521 के अनुसार, उच्च न्यायालय कब किसी बंदी को सेना न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का निदेश दे सकता है?

a. जब मजिस्ट्रेट असहमत हो

b. जब बंदी नागरिक अपराध में लिप्त हो

c. जब सेना न्यायालय में कोई मामला लंबित हो और बंदी से संबंधित हो

d. जब पुलिस अनुरोध करे

 

96. भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 522 के अनुसार, प्ररूपों का उपयोग किस अधीनता में किया जा सकता है?

a. अनुच्छेद 226 के अधीन

b. संविधान के अनुच्छेद 227 के अधीन

c. राष्ट्रपति की अनुमति से

d. उच्चतम न्यायालय के आदेश से

 

97. प्ररूपों की व्यवस्था भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की कौन-सी अनुसूची में दी गई है?

a. पहली अनुसूची

b. तीसरी अनुसूची

c. द्वितीय अनुसूची

d. चौथी अनुसूची

 

98. भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 523 के अनुसार, उच्च न्यायालय नियम बना सकता है:

a. बिना किसी अनुमति के

b. केंद्रीय सरकार की अनुमति से

c. राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी से

d. राष्ट्रपति की अनुमति से

 

99. धारा 524 के अनुसार, किन परिस्थितियों में राज्य सरकार कार्यपालक मजिस्ट्रेट को सौंपे गए कर्तव्यों को न्यायिक मजिस्ट्रेट को स्थानांतरित कर सकती है?

a. केवल उच्च न्यायालय के आदेश पर

b. विधान मंडल द्वारा संकल्प पारित किए जाने और उच्च न्यायालय से परामर्श के बाद

c. राज्यपाल की अनुमति से

d. लोकसभा की अनुशंसा पर

 

100. धारा 524 के अंतर्गत यदि अधिसूचना जारी की जाती है, तो धारा 127, 128, 129, 164 और 166 में "कार्यपालक मजिस्ट्रेट" का अर्थ क्या माना जाएगा?

a. पुलिस अधिकारी

b. सत्र न्यायाधीश

c. प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट

d. मुख्य सचिव

 

101. धारा 524 के अंतर्गत निर्देश को परिवर्तित करने के लिए अंतिम अधिसूचना कौन जारी करता है?

a. संसद

b. राज्यपाल

c. राज्य सरकार

d. गृह मंत्रालय

 

102. धारा 524 के तहत, निर्देशों का परिवर्तन किन धाराओं में किया जा सकता है?

a. केवल धारा 127 और 128

b. केवल धारा 164 और 166

c. धारा 127, 128, 129, 164 और 166

d. केवल धारा 129

 

103. धारा 524 के तहत अधिसूचना जारी करने से पहले राज्य सरकार को किससे परामर्श लेना आवश्यक है?

a. मुख्यमंत्री

b. प्रधानमंत्री

c. उच्च न्यायालय

d. गृह सचिव

 

104. धारा 525 के अनुसार, कोई न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट तब किसी मामले की सुनवाई या विचारण नहीं कर सकता जब:

a. वह उस जिले में नियुक्त हो

b. मामला गंभीर अपराध से संबंधित हो

c. वह उस मामले में पक्षकार हो या वैयक्तिक रूप से हितबद्ध हो

d. मामला दूसरे राज्य से संबंधित हो

 

105. यदि कोई न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट किसी मामले में वैयक्तिक रूप से हितबद्ध है, तो वह उस पर विचारण तभी कर सकता है जब:

a. उसे आरोपी की सहमति हो

b. उसे अभियोजन पक्ष की अनुमति हो

c. उसे उस उच्च न्यायालय की अनुमति हो, जहाँ अपील जाती है

d. उसे पुलिस से कोई आदेश प्राप्त हो

 

106. कोई न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट अपने द्वारा पारित किसी आदेश या निर्णय की:

a. पुनः समीक्षा कर सकता है

b. अपील स्वयं सुन सकता है

c. कार्यवाही को रोक सकता है

d. अपील नहीं सुन सकता

 

107. निम्न में से कौन-सी स्थिति "वैयक्तिक रूप से हितबद्ध" मानी नहीं जाएगी?

a. न्यायाधीश ने अपराध स्थान का निरीक्षण किया हो

b. न्यायाधीश आरोपी का पारिवारिक सदस्य हो

c. न्यायाधीश मामले में पक्षकार हो

d. न्यायाधीश ने मामले की निजी लाभ के लिए पैरवी की हो

 

108. धारा 525 के स्पष्टीकरण के अनुसार, क्या कोई न्यायाधीश केवल इस कारण "हितबद्ध" माना जाएगा कि उसने अपराध स्थल का निरीक्षण किया है?

a. हाँ, हमेशा

b. नहीं, जब तक वह अन्य रूप से पक्षकार न हो

c. हाँ, यदि वह मजिस्ट्रेट हो

d. केवल जब पीड़ित पक्ष मांग करे

 

109. धारा 526 के अनुसार, कोई अधिवक्ता मजिस्ट्रेट के रूप में कहाँ नहीं बैठ सकता?

a. उच्च न्यायालय में

b. किसी अन्य राज्य में

c. उस न्यायालय में जहाँ वह विधि-व्यवसाय करता है या उसकी स्थानीय अधिकारिता के अंतर्गत किसी अन्य न्यायालय में

d. किसी विशेष न्यायालय में

 

110. यदि कोई अधिवक्ता किसी मजिस्ट्रेट के न्यायालय में लगातार मुकदमे लड़ रहा है, तो क्या वह उसी न्यायालय में मजिस्ट्रेट के रूप में बैठ सकता है?

a. हाँ, यदि वह नियुक्त हो जाए

b. नहीं, यह निषिद्ध है

c. केवल सरकार की अनुमति से

d. केवल उच्च न्यायालय की स्वीकृति से

 

111. धारा 526 के अंतर्गत जिस न्यायालय में अधिवक्ता विधि-व्यवसाय करता है, वह वहाँ किस रूप में नियुक्त नहीं हो सकता?

a. गवाह के रूप में

b. वकील के रूप में

c. मजिस्ट्रेट के रूप में

d. न्यायालय कर्मी के रूप में

 

112. धारा 527 के अनुसार, कोई लोक सेवक उस संपत्ति के लिए बोली नहीं लगा सकता या उसे नहीं खरीद सकता:

a. यदि वह संपत्ति सरकारी नीलामी में हो

b. यदि वह संपत्ति निजी स्वामित्व की हो

c. यदि वह संपत्ति के विक्रय से संबंधित किसी कर्तव्य का पालन कर रहा हो

d. यदि वह न्यायालय द्वारा अधिकृत हो

 

113. धारा 527 किसके ऊपर लागू होती है?

a. केवल न्यायाधीशों पर

b. केवल पुलिस अधिकारियों पर

c. सभी लोक सेवकों पर जिनका दायित्व संपत्ति के विक्रय से जुड़ा है

d. निजी व्यक्तियों पर

 

114. क्या कोई लोक सेवक, जो संपत्ति के विक्रय की प्रक्रिया से जुड़ा है, अपने रिश्तेदार के नाम से बोली लगा सकता है?

a. हाँ, यदि वह बोली सार्वजनिक हो

b. नहीं, यह भी हितों के टकराव में आता है

c. हाँ, यदि उसने लिखित अनुमति ले ली हो

d. केवल उच्च न्यायालय के निर्देश पर

 

115. धारा 527 के अंतर्गत उल्लंघन की स्थिति में लोक सेवक की कार्रवाई को कैसे देखा जाएगा?

a. वैध और पारदर्शी

b. निष्पक्ष और स्वीकार्य

c. अनुचित और संभावित रूप से भ्रष्टाचार से ग्रस्त

d. कानूनी रूप से स्वीकृत

 

116. उच्च न्यायालय की अन्तर्निहित शक्तियों की व्यावृत्ति का वर्णन किस धारा में किया गया है?

a. धारा 527

b. धारा 528

c. धारा 529

d. धारा 530

 

117. धारा 528 के अनुसार, क्या उच्च न्यायालय की अन्तर्निहित शक्तियों को सीमित करती है?

a. हाँ, पूरी तरह

b. केवल आपराधिक मामलों में

c. नहीं, यह शक्तियों को सीमित नहीं करती

d. केवल राज्य सरकार की अनुमति से

 

118. न्यायालयों पर अधीक्षण का निरंतर प्रयोग करने का उच्च न्यायालय का उच्च न्यायालय का  कर्तव्य किस विषय से सम्बंधित है?

a. धारा 529

b. धारा 524

c. धारा 521 

d. धारा 528

 

119. धारा 529 के अनुसार, उच्च न्यायालय का अधीनस्थ न्यायालयों पर अधीक्षण करने का उद्देश्य क्या है?

a. न्यायाधीशों को नई नियुक्तियाँ देना

b. यह सुनिश्चित करना कि मामले शीघ्र और उचित रूप से निपटाए जाएं

c. पुलिस की कार्यवाही की निगरानी करना

d. राजस्व संग्रहण में सहायता करना

 

120. धारा 529 के अंतर्गत, उच्च न्यायालय किसके न्यायालयों पर अधीक्षण करता है?

a. केवल अधीनस्थ सत्र न्यायालयों पर

b. केवल न्यायिक मजिस्ट्रेटों के न्यायालयों पर

c. अधीनस्थ सत्र न्यायालयों और न्यायिक मजिस्ट्रेटों के न्यायालयों पर

d. केवल उच्च न्यायालय के समकक्ष न्यायालयों पर

 

121. धारा 530 किस नए विषय से सम्बंधित है?

a. अजमानतीय अपराध की दशा में कब जमानत ली जा सकेगी

b. उच्च न्यायालयों के समक्ष विचारण

c. सेना न्यायालय द्वारा विचारणीय व्यक्तियों का कमान आफिसरों को सौंपा जाना

d. इलैक्ट्रानिक पद्धति में विचारण और कार्यवाहियों का किया जाना

 

122. धारा 530 के अनुसार, कौन-कौन सी कार्यवाहियां इलेक्ट्रानिक पद्धति से की जा सकती हैं?

a. केवल समन और वारंट जारी करना

b. केवल साक्षियों की परीक्षा लेना

c. समन और वारंट जारी करना, शिकायतकर्ता और साक्षियों की परीक्षा, साक्ष्य अभिलिखित करना, और अपीलीय कार्यवाहियां

d. केवल न्यायाधीशों की नियुक्ति

 

123. धारा 530 में "इलैक्ट्रानिक पद्धति" का उपयोग किसके माध्यम से किया जाता है?

a. केवल टेलीफोन कॉल के माध्यम से

b. केवल व्यक्तिगत मुलाकात के द्वारा

c. इलेक्ट्रॉनिक सूचना और श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधनों के उपयोग से

d. केवल फैक्स मशीन के माध्यम से

 

124. धारा 530 के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक पद्धति का प्रयोग किस उद्देश्य से किया जा सकता है?

a. केवल दस्तावेजों के प्रबंधन के लिए

b. सभी विचारण और कार्यवाहियों के लिए जिनमें समन, वारंट, साक्ष्य अभिलिखित करना, साक्षियों की परीक्षा, और अपील कार्यवाहियां शामिल हों

c. केवल पुलिस जांच के लिए

d. केवल अभियोजन के लिए

 

125. धारा 530 के अनुसार, क्या समन और वारंट को भी इलैक्ट्रानिक पद्धति से जारी किया जा सकता है?

a. हाँ

b. नहीं

c. केवल विशेष अनुमति के बाद

d. केवल अपीलीय मामलों में

 

126. धारा 531 के अनुसार, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 का क्या प्रभाव होता है?

a. पुरानी संहिताओं को पूरी तरह निरस्त कर देती है

b. केवल नई अपीलों पर लागू होती है

c. निरसन के बावजूद पुराने लंबित मामलों को पुराने नियमों के अनुसार निपटाया जाएगा

d. केवल सत्र न्यायालयों पर लागू होती है

 

127. यदि दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के प्रवृत्त होने के पहले कोई अपील या जांच लंबित हो, तो उसे कैसे निपटाया जाएगा?

a. निपटारा नए नियमों के अनुसार किया जाएगा

b. उसे बंद कर दिया जाएगा

c. पुराने नियमों के अनुसार यथास्थिति चालू रखा जाएगा

d. उच्च न्यायालय के निर्देश पर निपटाया जाएगा

 

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