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1. धारा 25 के अनुसार पथ या जलमार्ग को बन्द करने के लिए पूर्व मंजूरी किसकी आवश्यक है?
a. जिला कलेक्टर की
b. वन संरक्षक की
c. राज्य सरकार या इस निमित्त उसके सम्यक् रूप से प्राधिकृत अधिकारी की
d. ग्राम पंचायत की
2. धारा 26 का विषय क्या है?
a. आरक्षित वनों में प्रवेश
b. आरक्षित वनों में प्रतिषिद्ध कार्य
c. वन अधिकारियों की शक्तियाँ
d. वन अपराधों का विचारण
3. धारा 26(1) के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य आरक्षित वन में प्रतिषिद्ध है?
a. धारा 5 के अधीन प्रतिषिद्ध नई कटाई-सफाई
b. राज्य सरकार की अनुमति से वृक्षारोपण
c. नियमों के अनुसार चराई
d. अनुज्ञा प्राप्त वन-उपज का संग्रह
4. धारा 26(1) के अनुसार आरक्षित वन में प्रतिषिद्ध कार्य करने पर क्या दण्ड है?
a. केवल छह माह तक का कारावास
b. केवल पाँच सौ रुपये तक का जुर्माना
c. वन को हुए नुकसान के प्रतिकर के अतिरिक्त छह माह तक का कारावास या पाँच सौ रुपये तक का जुर्माना या दोनों
d. केवल वन को हुए नुकसान का प्रतिकर
5. धारा 26(2) के अनुसार यह धारा किन कार्यों या अधिकारों पर लागू नहीं होती?
a. सभी प्रकार के कार्यों पर
b. केवल न्यायालय के आदेश से किए गए कार्यों पर
c. वन अधिकारी की लिखित अनुज्ञा या राज्य सरकार के नियमों के अधीन किए गए कार्य तथा धारा 15(2)(ग) या धारा 23 के अधीन सृजित अधिकारों के प्रयोग पर
d. केवल सरकारी कर्मचारियों द्वारा किए गए कार्यों पर
6. धारा 26(3) के अनुसार आरक्षित वन में जानबूझकर या घोर उपेक्षा से आग लगाए जाने पर राज्य सरकार क्या आदेश दे सकती है?
a. वन को अस्थायी रूप से बंद कर सकती है
b. वन या उसके किसी प्रभाग में चरागाह एवं वन-उपज के सभी अधिकारों के प्रयोग को उचित समझी गई अवधि के लिए निलम्बित कर सकती है
c. केवल जुर्माना लगा सकती है
d. वन अधिकारी को निलम्बित कर सकती है
7. धारा 27 का विषय क्या है?
a. आरक्षित वनों में प्रतिषिद्ध कार्य
b. यह घोषित करने की शक्ति कि वन आरक्षित वन नहीं रहा है
c. संरक्षित वन
d. वन अधिकारियों की नियुक्ति
8. धारा 27(1) के अनुसार किसी आरक्षित वन या उसके प्रभाग को आरक्षित वन न रहने का निदेश कौन दे सकता है?
a. वन व्यवस्थापन अधिकारी
b. जिला कलेक्टर
c. राज्य सरकार
d. मुख्य वन संरक्षक
9. धारा 27(1) के अनुसार किसी आरक्षित वन या उसके प्रभाग को आरक्षित वन न रहने का निदेश किस माध्यम से दिया जाएगा?
a. शासनादेश द्वारा
b. परिपत्र द्वारा
c. राजपत्र में अधिसूचना द्वारा
d. न्यायालय के आदेश द्वारा
10. धारा 27(2) के अनुसार अधिसूचना में नियत तारीख से क्या प्रभाव होगा?
a. वन संरक्षित वन बन जाएगा
b. वन या उसका प्रभाग आरक्षित वन नहीं रहेगा
c. वन का स्वामित्व बदल जाएगा
d. वन स्वतः सरकार की संपत्ति नहीं रहेगा
11. धारा 27(2) के अनुसार आरक्षित वन न रहने पर क्या निर्वापित अधिकार पुनर्जीवित हो जाते हैं?
a. हाँ, सभी अधिकार पुनर्जीवित हो जाते हैं
b. केवल स्वामित्व अधिकार पुनर्जीवित होते हैं
c. केवल चरागाह के अधिकार पुनर्जीवित होते हैं
d. नहीं, निर्वापित अधिकार पुनरुज्जीवित नहीं होते
12. धारा 28 का विषय क्या है?
a. आरक्षित वन को समाप्त करने की शक्ति
b. ग्राम वनों का निर्माण
c. संरक्षित वनों की घोषणा
d. वन अधिकारियों की नियुक्ति
13. धारा 28(1) के अनुसार राज्य सरकार ग्राम वन का निर्माण कैसे कर सकती है?
a. किसी निजी वन को अधिग्रहित करके
b. आरक्षित वन की किसी भूमि के अधिकार किसी ग्राम समुदाय को समनुदिष्ट करके तथा ऐसे समनुदेशन को रद्द करके
c. ग्राम पंचायत की भूमि को ग्राम वन घोषित करके
d. किसी भी वन भूमि को ग्राम सभा को हस्तांतरित करके
14. धारा 28(2) के अनुसार राज्य सरकार ग्राम वनों के संबंध में किस उद्देश्य से नियम बना सकती है?
a. केवल वन अधिकारियों की नियुक्ति के लिए
b. केवल वन अपराधों के विचारण के लिए
c. इमारती लकड़ी, अन्य वन-उपज या चरागाह के उपबन्ध तथा वन के संरक्षण, सुधार एवं प्रबन्ध को विनियमित करने के लिए
d. केवल वन भूमि के विक्रय के लिए
15. धारा 28(3) के अनुसार ग्राम वनों पर भारतीय वन अधिनियम, 1927 के कौन-से उपबंध लागू होंगे?
a. केवल दण्ड संबंधी उपबंध
b. केवल वन अधिकारियों से संबंधित उपबंध
c. आरक्षित वनों से संबंधित सभी उपबंध, जहाँ तक वे ग्राम वनों के लिए बनाए गए नियमों से असंगत न हों
d. केवल ग्राम वनों के लिए विशेष रूप से बनाए गए उपबंध
16. धारा 29 का विषय क्या है?
a. ग्राम वनों का निर्माण
b. संरक्षित वन
c. आरक्षित वन
d. वन अपराध
17. धारा 29(1) के अनुसार राज्य सरकार किन भूमियों को संरक्षित वन घोषित कर सकती है?
a. केवल निजी वन भूमि
b. केवल कृषि भूमि
c. ऐसी वन भूमि या बंजर भूमि, जो आरक्षित वन में सम्मिलित नहीं है तथा सरकार की संपत्ति है, या जिस पर सरकार का साम्पत्तिक अधिकार है, या जिसकी संपूर्ण वन-उपज अथवा उसके किसी भाग की सरकार हकदार है
d. केवल ग्राम पंचायत की भूमि
18. धारा 29(2) के अनुसार अधिसूचना में समाविष्ट वन भूमि और बंजर भूमि क्या कहलाती है?
a. आरक्षित वन
b. ग्राम वन
c. संरक्षित वन
d. निजी वन
19. धारा 29(3) के अनुसार संरक्षित वन घोषित करने से पूर्व सामान्यतः क्या आवश्यक है?
a. केवल राजपत्र में अधिसूचना
b. केवल वन अधिकारी की रिपोर्ट
c. सरकार एवं निजी व्यक्तियों के अधिकारों के स्वरूप और विस्तार की जांच तथा उनका सर्वेक्षण/बन्दोबस्त अभिलेख या अन्य पर्याप्त रीति से अभिलेखन
d. केवल ग्राम सभा की अनुमति
20. धारा 29(3) के परन्तुक के अनुसार जांच एवं अभिलेख लंबित रहने पर भी राज्य सरकार कब संरक्षित वन घोषित कर सकती है?
a. जब वन अधिकारी अनुशंसा करे
b. जब जांच में विलम्ब से सरकार के अधिकार खतरे में पड़ने की संभावना हो
c. जब ग्राम सभा प्रस्ताव पारित करे
d. जब न्यायालय अनुमति दे
21. धारा 29(3) के परन्तुक के अनुसार जांच लंबित रहने पर संरक्षित वन घोषित करने से व्यक्तियों या समुदायों के विद्यमान अधिकारों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
a. सभी अधिकार समाप्त हो जाएंगे
b. अधिकार स्वतः निलम्बित हो जाएंगे
c. उनके विद्यमान अधिकार कम या प्रभावित नहीं होंगे
d. सभी अधिकार राज्य सरकार को हस्तांतरित हो जाएंगे
22. धारा 30 का विषय क्या है?
a. संरक्षित वन
b. वृक्ष आदि को आरक्षित करने की अधिसूचना निकालने की शक्ति
c. ग्राम वन
d. आरक्षित वन
23. धारा 30 के अनुसार राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा क्या घोषित कर सकती है?
a. केवल संरक्षित वन के वृक्षों या वृक्षों के वर्ग को आरक्षित घोषित कर सकती है
b. केवल वन के किसी प्रभाग को बन्द घोषित कर सकती है
c. केवल कुछ कार्यों को प्रतिषिद्ध कर सकती है
d. उपर्युक्त सभी
24. धारा 30(ख) के अनुसार संरक्षित वन का कोई प्रभाग कितनी अवधि तक बन्द घोषित किया जा सकता है?
a. दस वर्ष से अनधिक
b. बीस वर्ष से अनधिक
c. तीस वर्ष से अनधिक
d. पचास वर्ष से अनधिक
25. धारा 30(ख) के अनुसार वन के किसी प्रभाग को बन्द घोषित करने की शर्त क्या है?
a. वन अधिकारी की अनुमति
b. न्यायालय की स्वीकृति
c. वन का शेष भाग निलम्बित अधिकारों के सम्यक् प्रयोग के लिए पर्याप्त एवं युक्तियुक्त रूप से सुविधाजनक स्थान में हो
d. ग्राम सभा की सहमति
26. धारा 30(ग) के अनुसार संरक्षित वन में निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य प्रतिषिद्ध किया जा सकता है?
a. पत्थर की खुदाई
b. चूना या लकड़ी का कोयला फूंकना
c. वन-उपज का संग्रहण, विनिर्माण या हटाना तथा भूमि तोड़ना या साफ करना
d. उपर्युक्त सभी
27. धारा 31 का विषय क्या है?
a. संरक्षित वन
b. ऐसी अधिसूचना के अनुवाद का आसपास में प्रकाशन
c. वन अधिकारी की शक्तियाँ
d. ग्राम वन
28. धारा 31 के अनुसार धारा 30 के अधीन निकाली गई अधिसूचना का अनुवाद कौन प्रकाशित कराएगा?
a. राज्य सरकार
b. वन अधिकारी
c. कलक्टर
d. वन व्यवस्थापन अधिकारी
29. धारा 31 के अनुसार अधिसूचना का अनुवाद किस भाषा में प्रकाशित कराया जाएगा?
a. हिन्दी भाषा में
b. अंग्रेजी भाषा में
c. स्थानीय जनभाषा में
d. राजभाषा में
30. धारा 31 के अनुसार अधिसूचना का अनुवाद कहाँ प्रकाशित कराया जाएगा?
a. केवल राजपत्र में
b. केवल जिला मुख्यालय में
c. अधिसूचना में समाविष्ट वन के आसपास के प्रत्येक नगर और ग्राम में सहजदृश्य स्थान पर
d. केवल ग्राम पंचायत कार्यालय में
31. धारा 32 का विषय क्या है?
a. संरक्षित वन
b. संरक्षित वनों के बारे में नियम बनाने की शक्ति
c. ग्राम वन
d. वन अपराध
32. धारा 32 के अनुसार संरक्षित वनों के संबंध में नियम बनाने की शक्ति किसके पास है?
a. केंद्र सरकार
b. राज्य सरकार
c. वन अधिकारी
d. कलक्टर
33. धारा 32(क) के अनुसार राज्य सरकार किन विषयों के संबंध में नियम बना सकती है?
a. वृक्षों एवं इमारती लकड़ी की कटाई, चिराई, संपरिवर्तन एवं हटाने तथा वन-उपज के संग्रहण, विनिर्माण एवं हटाने के संबंध में
b. केवल वृक्षों की कटाई के संबंध में
c. केवल वन-उपज के संग्रहण के संबंध में
d. केवल इमारती लकड़ी के हटाने के संबंध में
34. धारा 32(ख) के अनुसार संरक्षित वनों के सामीप्य के नगरों एवं ग्रामों के निवासियों को किस उद्देश्य से अनुज्ञप्तियाँ प्रदान की जा सकती हैं?
a. व्यापार करने के लिए
b. अपने प्रयोग के लिए वृक्ष, इमारती लकड़ी या अन्य वन-उपज लेने के लिए
c. वन भूमि खरीदने के लिए
d. शिकार करने के लिए
35. धारा 32(ग) के अनुसार व्यापार के प्रयोजनों के लिए अनुज्ञप्तियाँ किसे प्रदान की जा सकती हैं?
a. ऐसे व्यक्तियों को जो संरक्षित वनों से वृक्ष, इमारती लकड़ी या वन-उपज गिराते या हटाते हैं
b. केवल सरकारी अधिकारियों को
c. केवल ग्रामवासियों को
d. केवल वन अधिकारियों को
36. धारा 32(छ) के अनुसार राज्य सरकार किन कार्यों के संबंध में नियम बना सकती है?
a. संरक्षित वनों में खेती या अन्य प्रयोजनों के लिए भूमि की कटाई-सफाई और भूमि तोड़ने के संबंध में
b. केवल भवन निर्माण के संबंध में
c. केवल सड़क निर्माण के संबंध में
d. केवल सिंचाई के संबंध में
37. धारा 32(झ) के अनुसार राज्य सरकार किन विषयों के संबंध में नियम बना सकती है?
a. घास काटना और ढोर चराना
b. केवल घास काटना
c. केवल ढोर चराना
d. केवल चारा संग्रहण
38. धारा 32(ञ) के अनुसार राज्य सरकार किन कार्यों के संबंध में नियम बना सकती है?
a. केवल शिकार खेलने के संबंध में
b. केवल मछली पकड़ने के संबंध में
c. शिकार खेलना, गोली चलाना, मछली पकड़ना, जल विषैला करना, पाश या जाल बिछाना तथा जहाँ हाथी परिरक्षण अधिनियम, 1879 प्रवृत्त नहीं है वहाँ हाथियों का वध या पकड़ना
d. केवल हाथियों का वध करने के संबंध में
39. धारा 32(ट) के अनुसार राज्य सरकार किन विषयों के संबंध में नियम बना सकती है?
a. धारा 30 के अधीन वन के किसी बंद प्रभाग के संरक्षण और प्रबन्ध के संबंध में
b. केवल वन अधिकारियों की नियुक्ति के संबंध में
c. केवल वन अपराधों के विचारण के संबंध में
d. केवल आरक्षित वन घोषित करने के संबंध में
40. धारा 32(ठ) के अनुसार राज्य सरकार किन अधिकारों के संबंध में नियम बना सकती है?
a. धारा 20 में वर्णित अधिकार
b. धारा 23 में वर्णित अधिकार
c. धारा 29 में निर्देशित अधिकार
d. धारा 30 में वर्णित अधिकार
41. धारा 33 का विषय क्या है?
a. संरक्षित वनों के बारे में नियम बनाने की शक्ति
b. धारा 30 के अधीन अधिसूचना या धारा 32 के अधीन बनाए गए नियमों के उल्लंघन में किए गए कार्यों के लिए शास्तियां
c. ग्राम वनों का प्रबंधन
d. आरक्षित वनों में प्रतिषिद्ध कार्य
42. धारा 33(1) के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य दण्डनीय है?
a. धारा 30 के अधीन आरक्षित किसी वृक्ष को गिराना, छोंटना, छाल उतारना या अन्यथा नुकसान पहुँचाना
b. राज्य सरकार की अनुमति से वृक्षारोपण करना
c. नियमों के अनुसार वन-उपज का संग्रहण करना
d. अधिकृत अधिकारी के निर्देश पर वृक्षों की कटाई करना
43. धारा 33(1) के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य दण्डनीय है?
a. धारा 30 के अधीन प्रतिषेध के प्रतिकूल पत्थर की खुदाई करना, चूना या लकड़ी का कोयला फूंकना अथवा वन-उपज का संग्रहण या हटाना
b. अनुज्ञप्ति के अनुसार वन-उपज का संग्रहण
c. राज्य सरकार के नियमों के अनुसार पत्थर की खुदाई
d. अधिकृत अधिकारी की अनुमति से लकड़ी हटाना
44. धारा 33(1) के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य दण्डनीय है?
a. धारा 30 के अधीन प्रतिषेध के प्रतिकूल भूमि को खेती या अन्य प्रयोजन के लिए तोड़ना या साफ करना
b. राज्य सरकार की अनुमति से खेती करना
c. अधिकृत अधिकारी के निर्देशानुसार भूमि समतल करना
d. वन संरक्षण कार्य करना
45. धारा 33(1) के अनुसार अपराध करने पर क्या दण्ड है?
a. केवल छह माह तक का कारावास
b. केवल पाँच सौ रुपये तक का जुर्माना
c. छह माह तक का कारावास या पाँच सौ रुपये तक का जुर्माना या दोनों
d. एक वर्ष तक का कारावास अनिवार्य
46. धारा 33(2) के अनुसार संरक्षित वन में जानबूझकर या घोर उपेक्षा से आग लगाए जाने पर राज्य सरकार क्या आदेश दे सकती है?
a. वन को आरक्षित वन घोषित कर सकती है
b. वन या उसके किसी प्रभाग में चरागाह या वन-उपज के किसी अधिकार के प्रयोग को उचित समझी गई अवधि के लिए निलम्बित कर सकती है
c. केवल जुर्माना लगा सकती है
d. वन अधिकारी को निलम्बित कर सकती है
47. धारा 34 का विषय क्या है?
a. संरक्षित वनों के बारे में नियम बनाने की शक्ति
b. अध्याय 4 की कोई बात कतिपय मामलों में किए गए कार्यों का प्रतिषेध नहीं करेगी
c. संरक्षित वनों में दण्ड
d. ग्राम वन
48. धारा 34 के अनुसार अध्याय 4 के उपबंध किन कार्यों का प्रतिषेध नहीं करते?
a. सभी प्रकार के कार्यों का
b. केवल राज्य सरकार द्वारा किए गए कार्यों का
c. वन अधिकारी की लिखित अनुज्ञा से या धारा 32 के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार किए गए कार्यों का
d. केवल न्यायालय के आदेश से किए गए कार्यों का
49. धारा 34 के अनुसार धारा 29 के अधीन अभिलिखित अधिकारों का प्रयोग कब संरक्षित रहेगा?
a. प्रत्येक स्थिति में
b. केवल राज्य सरकार की अनुमति से
c. जब वह धारा 30 के अधीन बन्द किए गए वन के प्रभाग या धारा 33 के अधीन निलम्बित अधिकारों से संबंधित न हो
d. केवल न्यायालय के आदेश पर
50. धारा 36 का विषय क्या है?
a. विशेष प्रयोजनों के लिए वनों का संरक्षण
b. वनों का प्रबन्ध संभालने की शक्ति
c. संरक्षित वन
d. ग्राम वन
51. धारा 36(1) के अनुसार राज्य सरकार किसी वन या भूमि को वन अधिकारी के नियंत्रण में कब कर सकती है?
a. किसी भी समय बिना सूचना दिए
b. केवल वन अधिकारी की अनुशंसा पर
c. धारा 35 के अधीन विनियम या प्रतिषेध की उपेक्षा या जानबूझकर अवज्ञा होने पर अथवा धारा 35 के अधीन संकर्म के प्रयोजनार्थ आवश्यक होने पर, स्वामी को लिखित सूचना देकर एवं उसके आक्षेपों पर विचार करने के पश्चात्
d. केवल न्यायालय के आदेश पर
52. धारा 36(1) के अनुसार वन या भूमि को वन अधिकारी के नियंत्रण में करने पर राज्य सरकार क्या घोषित कर सकती है?
a. कि वह भूमि ग्राम वन मानी जाएगी
b. कि आरक्षित वनों से संबंधित भारतीय वन अधिनियम, 1927 के सभी या कोई उपबंध ऐसे वन या भूमि पर लागू होंगे
c. कि भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार में निहित होगा
d. कि उस भूमि पर सभी निजी अधिकार समाप्त हो जाएंगे
53. धारा 36(2) के अनुसार ऐसे वन या भूमि के प्रबन्ध से होने वाला शुद्ध लाभ किसे दिया जाएगा?
a. राज्य सरकार को
b. वन अधिकारी को
c. ऐसे वन या भूमि के स्वामी को
d. ग्राम पंचायत को
54. धारा 37 का विषय क्या है?
a. वनों का प्रबन्ध संभालने की शक्ति
b. कुछ अवस्थाओं में वनों का स्वत्वहरण
c. ग्राम वनों का निर्माण
d. संरक्षित वन
55. धारा 37(1) के अनुसार राज्य सरकार वन या भूमि का अर्जन कब कर सकती है?
a. जब वन अधिकारी इसकी अनुशंसा करे
b. जब वह यह समझती है कि वन या भूमि को वन अधिकारी के नियंत्रण में रखने के बजाय लोक प्रयोजन के लिए अर्जित करना उचित है
c. जब ग्राम पंचायत प्रस्ताव पारित करे
d. जब न्यायालय आदेश दे
56. धारा 37(1) के अनुसार वन या भूमि का अर्जन किस अधिनियम के अनुसार किया जाएगा?
a. भारतीय वन अधिनियम, 1927
b. वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980
c. भूमि अर्जन अधिनियम, 1894
d. भारतीय पंजीकरण अधिनियम, 1908
57. धारा 37(2) के अनुसार धारा 35 की अधिसूचना में समाविष्ट वन या भूमि का स्वामी अर्जन की अपेक्षा कब कर सकता है?
a. अधिसूचना की तारीख से एक वर्ष के भीतर
b. अधिसूचना की तारीख से अन्यून तीन वर्ष तथा अनधिक बारह वर्ष के भीतर
c. अधिसूचना की तारीख से बीस वर्ष के भीतर
d. किसी भी समय
58. धारा 37(2) के अनुसार स्वामी की अपेक्षा पर राज्य सरकार क्या करेगी?
a. केवल प्रतिकर प्रदान करेगी
b. वन या भूमि को लोक प्रयोजन के लिए अर्जित करेगी
c. वन अधिकारी नियुक्त करेगी
d. अधिसूचना निरस्त कर देगी
59. धारा 38 का विषय क्या है?
a. कुछ अवस्थाओं में वनों का स्वत्वहरण
b. स्वामियों की प्रार्थना पर वनों का संरक्षण
c. ग्राम वनों का निर्माण
d. संरक्षित वन
60. धारा 38(1) के अनुसार भूमि के संबंध में लिखित अभ्यावेदन कौन कर सकता है?
a. केवल राज्य सरकार
b. केवल वन अधिकारी
c. भूमि का स्वामी या एक से अधिक स्वामी होने पर कुल मिलाकर कम से कम दो-तिहाई अंशों के स्वामी
d. केवल ग्राम पंचायत
61. धारा 38(1) के अनुसार अभ्यावेदन में क्या प्रार्थना की जा सकती है?
a. भूमि का अधिग्रहण किया जाए
b. भूमि का प्रबन्ध वन अधिकारी द्वारा आरक्षित या संरक्षित वन के रूप में किया जाए अथवा भारतीय वन अधिनियम, 1927 के सभी या कुछ उपबंध भूमि पर लागू किए जाएँ
c. भूमि को कृषि भूमि घोषित किया जाए
d. भूमि का विक्रय किया जाए
62. धारा 38(2) के अनुसार राज्य सरकार ऐसी भूमि पर क्या कर सकती है?
a. भूमि का अधिग्रहण कर सकती है
b. भूमि को आरक्षित वन घोषित कर सकती है
c. राजपत्र में अधिसूचना द्वारा भारतीय वन अधिनियम, 1927 के ऐसे उपबंध लागू कर सकती है जिन्हें वह परिस्थितियों में उचित तथा आवेदकों द्वारा वांछित समझे
d. केवल वन अधिकारी नियुक्त कर सकती है
63. धारा 39 का विषय क्या है?
a. स्वामियों की प्रार्थना पर वनों का संरक्षण
b. इमारती लकड़ी और अन्य वन-उपज पर शुल्क अधिरोपित करने की शक्ति
c. वन-उपज का अभिवहन
d. वन अधिकारियों की नियुक्ति
64. धारा 39(1) के अनुसार इमारती लकड़ी या वन-उपज पर शुल्क अधिरोपित करने की शक्ति किसके पास है?
a. राज्य सरकार
b. जिला कलेक्टर
c. केन्द्रीय सरकार
d. वन अधिकारी
65. धारा 39(1) के अनुसार केन्द्रीय सरकार शुल्क किस प्रकार अधिरोपित करेगी?
a. कार्यपालिका आदेश द्वारा
b. राजपत्र में अधिसूचना द्वारा घोषित रीति, स्थानों और दरों पर
c. परिपत्र द्वारा
d. संसद के संकल्प द्वारा
66. धारा 39(1) के अनुसार शुल्क किन इमारती लकड़ी या वन-उपज पर उद्गृहीत किया जा सकता है?
a. केवल भारत के बाहर से आयातित वन-उपज पर
b. केवल निजी वन की वन-उपज पर
c. भारतीय वन अधिनियम, 1927 के विस्तार वाले राज्यक्षेत्रों में उत्पन्न तथा जिसके विषय में सरकार को अधिकार प्राप्त है, या उन राज्यक्षेत्रों के बाहर से लाई गई इमारती लकड़ी या वन-उपज पर
d. केवल आरक्षित वन की इमारती लकड़ी पर
67. धारा 39(2) के अनुसार मूल्यानुसार उद्गृहीत किए जाने वाले शुल्क का मूल्य कौन और किस माध्यम से निर्धारित करेगा?
a. राज्य सरकार, शासनादेश द्वारा
b. केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा
c. वन अधिकारी, लिखित आदेश द्वारा
d. संसद, अधिनियम द्वारा
68. धारा 39(3) के अनुसार भारतीय वन अधिनियम, 1927 के प्रवृत्त होने के समय राज्य सरकार द्वारा उद्गृहीत शुल्कों की क्या स्थिति होगी?
a. वे स्वतः समाप्त हो जाएंगे
b. वे अवैध माने जाएंगे
c. वे भारतीय वन अधिनियम, 1927 के उपबंधों के अधीन तथा सम्यक् रूप से उद्गृहीत माने जाएंगे
d. उन्हें पुनः अधिसूचित करना आवश्यक होगा
69. धारा 39(4) के अनुसार राज्य सरकार पूर्व से विधिपूर्ण रूप से उद्गृहीत शुल्क कब तक लगातार उद्गृहीत कर सकती है?
a. पाँच वर्ष तक
b. दस वर्ष तक
c. जब तक संसद द्वारा प्रतिकूल उपबंध न किया जाए
d. अनिश्चितकाल तक बिना किसी शर्त के
70. धारा 39(4) के परन्तुक के अनुसार राज्य सरकार किन प्रकार के विभेदकारी शुल्क का उग्रहण नहीं कर सकती?
a. केवल आयातित वन-उपज पर शुल्क
b. ऐसा शुल्क जो राज्य की और राज्य के बाहर की समरूप इमारती लकड़ी या वन-उपज में, अथवा राज्य के बाहर विभिन्न स्थानों की समरूप इमारती लकड़ी या वन-उपज में भेदभाव करता हो
c. केवल निर्यात शुल्क
d. केवल स्थानीय बाजार शुल्क
71. धारा 40 का विषय क्या है?
a. इमारती लकड़ी और अन्य वन-उपज पर शुल्क अधिरोपित करने की शक्ति
b. सीमा सम्बन्धी उपबन्ध क्रय-धन या स्वामिस्व के सम्बन्ध में लागू नहीं होगा
c. वन-उपज का अभिवहन
d. वन अधिकारियों की नियुक्ति
72. धारा 40 के अनुसार इस अध्याय की कोई बात किस राशि को सीमित नहीं करती?
a. वन अधिकारियों के वेतन को
b. इमारती लकड़ी या अन्य वन-उपज पर क्रय-धन या स्वामिस्व के रूप में प्रभार्य राशि को
c. वन अपराधों पर लगाए जाने वाले जुर्माने को
d. भूमि अर्जन के प्रतिकर को
73. क्या धारा 40 के अनुसार अभिवहन के दौरान उद्गृहीत क्रय-धन या स्वामिस्व भी इस सीमा से अप्रभावित रहेगा?
a. नहीं
b. केवल क्रय-धन अप्रभावित रहेगा
c. केवल स्वामिस्व अप्रभावित रहेगा
d. हाँ, भले ही वह शुल्क की भाँति अभिवहन के दौरान उद्गृहीत किया जाता हो
74. धारा 41 का विषय क्या है?
a. सीमा सम्बन्धी उपबन्ध
b. वन-उपज के अभिवहन को विनियमित करने के लिए नियम बनाने की शक्ति
c. वन-उपज पर शुल्क
d. ग्राम वन
75. धारा 41(1) के अनुसार इमारती लकड़ी के बहाने के विषय में सब नदियों और उनके तटों का नियंत्रण किसमें निहित है?
a. केन्द्रीय सरकार में
b. जिला कलेक्टर में
c. राज्य सरकार में
d. वन अधिकारी में
76. धारा 41(1) के अनुसार थल या जल द्वारा अभिवहन में की इमारती लकड़ी और अन्य वन-उपज का नियंत्रण किसमें निहित है?
a. केन्द्रीय सरकार में
b. राज्य सरकार में
c. वन निगम में
d. ग्राम पंचायत में
77. धारा 41(1) के अनुसार राज्य सरकार किस उद्देश्य से नियम बना सकेगी?
a. वन भूमि के विक्रय के लिए
b. वन अधिकारियों की नियुक्ति के लिए
c. इमारती लकड़ी और अन्य वन-उपज के अभिवहन को विनियमित करने के लिए
d. वन अपराधों के विचारण के लिए
78. धारा 41(2) के अनुसार उपधारा (1) की शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना नियम किन विषयों के लिए बनाए जा सकते हैं?
a. केवल शुल्क निर्धारण के लिए
b. केवल पास जारी करने के लिए
c. उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट विषयों के लिए
d. केवल वन अधिकारियों के कर्तव्यों के लिए
79. धारा 41(2)(क) के अनुसार नियम किन मार्गों को विहित कर सकते हैं?
a. केवल राष्ट्रीय राजमार्गों को
b. केवल जलमार्गों को
c. उन मार्गों को जिनके द्वारा ही इमारती लकड़ी या अन्य वन-उपज का आयात, निर्यात या राज्य के भीतर स्थानांतरण किया जा सकेगा
d. केवल वन मार्गों को
80. धारा 41(2)(ख) के अनुसार किसके बिना इमारती लकड़ी या अन्य वन-उपज का आयात, निर्यात या स्थानांतरण प्रतिषिद्ध किया जा सकता है?
a. वन अधिकारी की मौखिक अनुमति के बिना
b. सम्यक् रूप से प्राधिकृत अधिकारी द्वारा दिए गए पास के बिना या पास की शर्तों के अनुसार अन्यथा
c. ग्राम पंचायत की अनुमति के बिना
d. जिला कलेक्टर की अनुमति के बिना
81. धारा 41(2)(ग) के अनुसार नियम किन बातों के लिए उपबंध कर सकते हैं?
a. केवल पासों के दिए जाने के लिए
b. केवल पासों की वापसी के लिए
c. पासों के दिए जाने, पेश करने, वापस करने तथा उनके लिए फीस के भुगतान के लिए
d. केवल पासों के नवीनीकरण के लिए
82. धारा 41(2)(घ) के अनुसार किन परिस्थितियों में अभिवहन में की इमारती लकड़ी या अन्य वन-उपज को रोका जा सकता है?
a. केवल जब वह बिना पास के हो
b. जब यह विश्वास करने का कारण हो कि उसकी कीमत, शुल्क, फीस, स्वामिस्व या प्रभार के कारण सरकार को धन देय है अथवा उस पर चिह्न लगाना वांछनीय है
c. केवल रात्रि के समय
d. केवल वन अधिकारी के संदेह पर
83. धारा 41(2)(घ) के अनुसार नियम अभिवहन में की इमारती लकड़ी या अन्य वन-उपज के संबंध में किन कार्यों के लिए उपबंध कर सकते हैं?
a. केवल रोक लेने के लिए
b. केवल परीक्षा करने के लिए
c. रोक लेने, रिपोर्ट देने, परीक्षा करने या चिह्नित करने के लिए
d. केवल चिह्नित करने के लिए
84. धारा 41(2)(ङ) के अनुसार नियम किन डिपुओं की स्थापना और विनियमन के लिए उपबंध कर सकते हैं?
a. केवल लकड़ी भंडारण केंद्रों की
b. ऐसे डिपुओं की, जहाँ इमारती लकड़ी या अन्य वन-उपज परीक्षा, धन के भुगतान या चिह्न लगाने हेतु लाई जाएगी
c. केवल सरकारी गोदामों की
d. केवल निजी डिपुओं की
85. धारा 41(2)(ङ) के अनुसार नियम डिपुओं से संबंधित किन शर्तों के लिए उपबंध कर सकते हैं?
a. केवल डिपुओं की स्थापना के लिए
b. केवल डिपुओं की सुरक्षा के लिए
c. इमारती लकड़ी या अन्य वन-उपज को डिपुओं में लाने, संगृहीत करने और हटाने की शर्तों के लिए
d. केवल डिपुओं के किराए के लिए
86. धारा 41(2)(च) के अनुसार नियम किन कार्यों को प्रतिषिद्ध कर सकते हैं?
a. केवल नदी में घास फेंकने को
b. केवल नदी के तट को बाधित करने को
c. इमारती लकड़ी या अन्य वन-उपज के अभिवहन हेतु प्रयुक्त नदी की धारा या तटों को बंद या बाधित करना तथा नदी में घास, झाड़-झंखाड़, शाखाएँ, पत्तियाँ फेंकना या ऐसा अन्य कार्य जिससे नदी बंद या बाधित हो जाए
d. केवल नदी में नाव चलाने को
87. धारा 41(2)(छ) के अनुसार नियम किसके लिए उपबंध कर सकते हैं?
a. केवल नदी की सफाई के लिए
b. नदी की धारा या किनारों की बाधा के निवारण या हटाने तथा उसके खर्च की वसूली के लिए
c. केवल पुल निर्माण के लिए
d. केवल जल संरक्षण के लिए
88. धारा 41(2)(छ) के अनुसार बाधा हटाने का खर्च किससे वसूल किया जा सकता है?
a. राज्य सरकार से
b. वन अधिकारी से
c. उस व्यक्ति से जिसके कार्यों या उपेक्षा के कारण बाधा उत्पन्न हुई है
d. ग्राम पंचायत से
89. धारा 41(2)(ज) के अनुसार विनिर्दिष्ट स्थानीय सीमाओं के भीतर किन कार्यों को पूर्णतः या शर्तों सहित प्रतिषिद्ध किया जा सकता है?
a. केवल इमारती लकड़ी का संपरिवर्तन
b. केवल चिह्न लगाने वाले हथौड़े को रखना
c. लकड़ी की चिराई के लिए गड्ढा बनाना, इमारती लकड़ी का संपरिवर्तन, काटना, जलाना, छिपाना, चिह्न लगाना, चिह्न बदलना या मिटाना तथा चिह्न लगाने वाले हथौड़े या अन्य उपकरण को कब्जे में रखना या साथ ले जाना
d. केवल लकड़ी को जलाना
90. धारा 41(2)(झ) के अनुसार नियम इमारती लकड़ी के लिए किसके प्रयोग को विनियमित कर सकते हैं?
a. वन अधिकारियों के अधिकारों के प्रयोग को
b. सम्पत्ति संबंधी चिह्नों के प्रयोग को
c. अभिवहन मार्गों के प्रयोग को
d. डिपुओं के प्रयोग को
91. धारा 41(2)(झ) के अनुसार नियम किसके रजिस्ट्रीकरण को विनियमित कर सकते हैं?
a. वन अधिकारियों के रजिस्ट्रीकरण को
b. डिपुओं के रजिस्ट्रीकरण को
c. सम्पत्ति संबंधी चिह्नों के रजिस्ट्रीकरण को
d. वाहनों के रजिस्ट्रीकरण को
92. धारा 41(2)(झ) के अनुसार नियम रजिस्ट्रीकरण की प्रभावशीलता के संबंध में क्या विहित कर सकते हैं?
a. रजिस्ट्रीकरण की फीस
b. रजिस्ट्रीकरण की प्रक्रिया
c. वह अवधि जिसके लिए रजिस्ट्रीकरण प्रभावी रहेगा
d. रजिस्ट्रीकरण का स्थान
93. धारा 41(2)(झ) के अनुसार नियम किसी व्यक्ति द्वारा रजिस्ट्रीकृत किए जाने वाले चिह्नों के संबंध में क्या कर सकते हैं?
a. उनकी संख्या बढ़ा सकते हैं
b. उनकी संख्या सीमित कर सकते हैं
c. उन्हें समाप्त कर सकते हैं
d. उनका निःशुल्क पंजीकरण कर सकते हैं
94. धारा 41(2)(झ) के अनुसार नियम रजिस्ट्रीकरण के संबंध में किसके लिए उपबंध कर सकते हैं?
a. केवल रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए
b. केवल रजिस्ट्रीकरण रद्द करने के लिए
c. रजिस्ट्रीकरण के लिए फीसों के उद्ग्रहण के लिए
d. केवल रजिस्ट्रीकरण के नवीनीकरण के लिए
95. धारा 41(3) के अनुसार राज्य सरकार क्या निदेश दे सकती है?
a. धारा 41 के अधीन बनाए गए सभी नियम निरस्त कर सकती है
b. धारा 41 के अधीन बनाया गया कोई नियम इमारती लकड़ी या अन्य वन-उपज के किसी विनिर्दिष्ट वर्ग या किसी विनिर्दिष्ट स्थानीय क्षेत्र को लागू नहीं होगा
c. केवल शुल्क की दरों में परिवर्तन कर सकती है
d. केवल पास जारी करने की प्रक्रिया बदल सकती है
96. धारा 41(3) के अनुसार राज्य सरकार किन पर नियमों की अनुप्रयोगिता समाप्त कर सकती है?
a. सभी प्रकार की इमारती लकड़ी और वन-उपज पर
b. केवल आरक्षित वनों पर
c. इमारती लकड़ी या अन्य वन-उपज के किसी विनिर्दिष्ट वर्ग अथवा किसी विनिर्दिष्ट स्थानीय क्षेत्र पर
d. केवल वन अधिकारियों पर
97. धारा 41क का विषय क्या है?
a. वन-उपज के अभिवहन को विनियमित करने की शक्ति
b. सीमाशुल्क सीमान्तों के पार इमारती लकड़ी के स्थानान्तरण विषयक केन्द्रीय सरकार की शक्तियां
c. वन-उपज पर शुल्क
d. सम्पत्ति संबंधी चिह्न
98. धारा 41क के अनुसार धारा 41 में किसी बात के होते हुए भी नियम बनाने की शक्ति किसके पास है?
a. राज्य सरकार
b. वन अधिकारी
c. केन्द्रीय सरकार
d. जिला कलेक्टर
99. धारा 41क के अनुसार केन्द्रीय सरकार किस उद्देश्य से नियम बना सकेगी?
a. वन अधिकारियों की नियुक्ति के लिए
b. उस मार्ग को विहित करने के लिए जिसके द्वारा ही इमारती लकड़ी या अन्य वन-उपज का आयात, निर्यात या स्थानान्तरण किया जा सके
c. वन-उपज पर शुल्क लगाने के लिए
d. वन अपराधों का विचारण करने के लिए
100. धारा 41क के अनुसार नियम किन सीमाशुल्क सीमान्तों के संबंध में बनाए जा सकते हैं?
a. सभी अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के संबंध में
b. ऐसे सीमाशुल्क सीमान्तों के संबंध में जो केन्द्रीय सरकार द्वारा परिनिश्चित हैं
c. केवल राज्य सीमाओं के संबंध में
d. केवल बंदरगाहों के संबंध में
101. धारा 41क के अनुसार नियम किन राज्यक्षेत्रों के संबंध में लागू होंगे?
a. केवल केंद्र शासित प्रदेशों में
b. केवल आरक्षित वनों में
c. उन राज्यक्षेत्रों के संबंध में जिन पर भारतीय वन अधिनियम, 1927 का विस्तार है
d. केवल सीमावर्ती राज्यों में
102. धारा 41क के अनुसार केन्द्रीय सरकार किन कार्यों के लिए मार्ग विहित कर सकती है?
a. केवल आयात के लिए
b. केवल निर्यात के लिए
c. इमारती लकड़ी या अन्य वन-उपज के आयात, निर्यात या स्थानान्तरण के लिए
d. केवल स्थानान्तरण के लिए
103. धारा 41क के अनुसार धारा 41 के अधीन बनाए गए नियम किसके अधीन प्रभावी होंगे?
a. राज्य सरकार के आदेशों के अधीन
b. धारा 41क के अधीन बनाए गए नियमों के अधीन
c. वन अधिकारी के निर्देशों के अधीन
d. जिला कलेक्टर के आदेशों के अधीन
104. धारा 42 का विषय क्या है?
a. सीमाशुल्क सीमान्तों के पार इमारती लकड़ी के स्थानान्तरण विषयक केन्द्रीय सरकार की शक्तियां
b. धारा 41 के अधीन बनाए गए नियमों के भंग के लिए शास्ति
c. वन-उपज का अभिवहन
d. वन अधिकारियों की शक्तियां
105. धारा 42(1) के अनुसार धारा 41 के अधीन बनाए गए नियमों के उल्लंघन के लिए शास्ति विहित करने की शक्ति किसके पास है?
a. केन्द्रीय सरकार
b. राज्य सरकार
c. वन अधिकारी
d. जिला कलेक्टर
106. धारा 42(1) के अनुसार नियमों के उल्लंघन के लिए अधिकतम कारावास कितना हो सकता है?
a. तीन मास तक
b. छह मास तक
c. एक वर्ष तक
d. दो वर्ष तक
107. धारा 42(1) के अनुसार नियमों के उल्लंघन के लिए अधिकतम जुर्माना कितना हो सकता है?
a. ₹250 तक
b. ₹500 तक
c. ₹1,000 तक
d. ₹5,000 तक
108. धारा 42(2) के अनुसार किन परिस्थितियों में उपधारा (1) में वर्णित शास्तियों से दुगुनी शास्तियां लगाई जा सकती हैं?
a. केवल जब अपराध सूर्यास्त के पश्चात् और सूर्योदय के पूर्व किया गया हो
b. केवल जब अपराधी पूर्व में सिद्धदोष हो चुका हो
c. जब अपराध सूर्यास्त के पश्चात् और सूर्योदय के पूर्व किया गया हो, या विधिपूर्ण प्राधिकारी का प्रतिरोध करने के लिए तैयार करने के पश्चात् किया गया हो, या अपराधी उसी प्रकार के अपराध के लिए पहले सिद्धदोष हो चुका हो
d. केवल जब सरकारी सम्पत्ति को नुकसान हुआ हो
109. धारा 42(2) के अनुसार यदि अपराध सूर्यास्त के पश्चात् और सूर्योदय के पूर्व किया गया हो तो क्या उपबंध किया जा सकता है?
a. केवल जुर्माना लगाया जाएगा
b. केवल कारावास दिया जाएगा
c. धारा 42(1) में वर्णित शास्तियों से दुगुनी शास्तियां लगाई जा सकती हैं
d. अपराध स्वतः संज्ञेय हो जाएगा
110. धारा 42(2) के अनुसार यदि अपराध विधिपूर्ण प्राधिकारी का प्रतिरोध करने के लिए तैयार करने के पश्चात् किया गया हो तो क्या उपबंध किया जा सकता है?
a. केवल जुर्माना लगाया जाएगा
b. केवल कारावास दिया जाएगा
c. धारा 42(1) में वर्णित शास्तियों से दुगुनी शास्तियां लगाई जा सकती हैं
d. अभियोजन नहीं चलाया जाएगा
111. धारा 42(2) के अनुसार यदि अपराधी उसी प्रकार के अपराध के लिए पूर्व में सिद्धदोष हो चुका हो तो क्या उपबंध किया जा सकता है?
a. केवल चेतावनी दी जाएगी
b. केवल ₹500 का जुर्माना लगाया जाएगा
c. धारा 42(1) में वर्णित शास्तियों से दुगुनी शास्तियां लगाई जा सकती हैं
d. उसे जमानत का अधिकार नहीं होगा
112. धारा 43 का विषय क्या है?
a. धारा 41 के अधीन बनाए गए नियमों के भंग के लिए शास्ति
b. डिपो में रखी वन-उपज को हुए नुकसान के लिए सरकार या वन अधिकारी उत्तरदायी नहीं होंगे
c. वन-उपज का अभिवहन
d. इमारती लकड़ी पर शुल्क
113. धारा 43 के अनुसार धारा 41 के अधीन स्थापित डिपो में रखी इमारती लकड़ी या वन-उपज को हुई हानि या नुकसान के लिए कौन उत्तरदायी नहीं होगी?
a. वन अधिकारी
b. सरकार
c. डिपो का प्रभारी
d. जिला कलेक्टर
114. धारा 43 के अनुसार भारतीय वन अधिनियम, 1927 के प्रयोजनों के लिए अन्यत्र रोक रखी गई इमारती लकड़ी या वन-उपज को हुई हानि या नुकसान के लिए कौन उत्तरदायी नहीं होगी?
a. वन अधिकारी
b. सरकार
c. परिवहनकर्ता
d. डिपो प्रभारी
115. धारा 43 के अनुसार वन अधिकारी सामान्यतः किसके लिए उत्तरदायी नहीं होगा?
a. केवल डिपो में रखी इमारती लकड़ी के लिए
b. केवल वन-उपज के परिवहन के लिए
c. डिपो में रखी या भारतीय वन अधिनियम, 1927 के प्रयोजनों के लिए अन्यत्र रोक रखी गई इमारती लकड़ी या वन-उपज को हुई हानि या नुकसान के लिए
d. केवल सरकारी वन-उपज के लिए
116. धारा 43 के अनुसार वन अधिकारी कब हानि या नुकसान के लिए उत्तरदायी होगा?
a. प्रत्येक स्थिति में
b. केवल प्राकृतिक आपदा की स्थिति में
c. जब वह हानि या नुकसान उपेक्षा, विद्वेष या कपट से करता है
d. केवल डिपो के बाहर हुई हानि के लिए
117. धारा 43 के अनुसार वन अधिकारी की उत्तरदायित्व-मुक्ति का अपवाद क्या है?
a. प्राकृतिक आपदा
b. दुर्घटना
c. उपेक्षा, विद्वेष या कपट से की गई हानि या नुकसान
d. परिवहन में विलम्ब
118. धारा 44 का विषय क्या है?
a. डिपो में रखी वन-उपज को हुए नुकसान के लिए सरकार या वन अधिकारी उत्तरदायी नहीं होंगे
b. डिपो पर दुर्घटना की अवस्था में सब व्यक्ति सहायता करने के लिए आबद्ध होंगे
c. वन-उपज का अभिवहन
d. वन अधिकारियों की शक्तियाँ
119. धारा 44 के अनुसार सहायता देने का दायित्व कब उत्पन्न होता है?
a. जब डिपो में निरीक्षण हो
b. जब किसी डिपो में सम्पत्ति को संकटापन्न करने वाली दुर्घटना या आपात की दशा हो
c. जब वन अधिकारी आदेश दे
d. जब वन-उपज का परिवहन हो
120. धारा 44 के अनुसार सहायता देने के लिए कौन आबद्ध होगा?
a. केवल वन अधिकारी
b. केवल पुलिस अधिकारी
c. ऐसे डिपो में सरकार या किसी प्राइवेट व्यक्ति द्वारा नियोजित प्रत्येक व्यक्ति
d. केवल डिपो का स्वामी
121. धारा 44 के अनुसार सहायता किसे दी जाएगी?
a. केवल डिपो के स्वामी को
b. केवल जिला कलेक्टर को
c. सहायता मांगने वाले किसी वन अधिकारी या पुलिस अधिकारी को
d. केवल ग्राम पंचायत को
122. धारा 44 के अनुसार सहायता किस उद्देश्य से दी जाएगी?
a. डिपो का निरीक्षण कराने के लिए
b. संकट टालने या सम्पत्ति को नुकसान या हानि से बचाने के लिए
c. वन-उपज का विक्रय कराने के लिए
d. डिपो का प्रबन्ध संभालने के लिए
123. धारा 44 के अनुसार सहायता देने का दायित्व किनके द्वारा नियोजित व्यक्तियों पर लागू होता है?
a. केवल सरकार द्वारा नियोजित व्यक्तियों पर
b. केवल निजी व्यक्ति द्वारा नियोजित व्यक्तियों पर
c. सरकार या किसी प्राइवेट व्यक्ति द्वारा नियोजित व्यक्तियों पर
d. केवल वन विभाग के कर्मचारियों पर
124. धारा 45 का विषय क्या है?
a. डिपो पर दुर्घटना की अवस्था में सहायता
b. कतिपय प्रकार की इमारती लकड़ी, जब तक कि उसके बारे में हक साबित नहीं कर दिया जाता, सरकार की सम्पत्ति समझी जाएगी और तदनुसार संगृहीत की जा सकेगी
c. वन-उपज का अभिवहन
d. वन अधिकारियों की शक्तियाँ
125. धारा 45(1) के अनुसार कौन-सी बहती हुई इमारती लकड़ी सरकार की सम्पत्ति समझी जाएगी?
a. केवल चिह्नित इमारती लकड़ी
b. बहती हुई, किनारे से लगी हुई, अटकी हुई या डूबी हुई इमारती लकड़ी, जब तक उस पर अधिकार और हक सिद्ध न कर दिया जाए
c. केवल निजी वन की इमारती लकड़ी
d. केवल आरक्षित वन की इमारती लकड़ी
126. धारा 45(1) के अनुसार किन काष्ठ और इमारती लकड़ी को सरकार की सम्पत्ति समझा जाएगा?
a. जिन पर सरकारी चिह्न लगे हों
b. जिन पर ऐसे चिह्न लगे हों जो धारा 41 के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार रजिस्ट्रीकृत नहीं हैं
c. केवल अचिह्नित इमारती लकड़ी
d. केवल बहती हुई इमारती लकड़ी
127. धारा 45(1) के अनुसार किन चिह्नों वाली इमारती लकड़ी सरकार की सम्पत्ति समझी जाएगी?
a. जिन पर स्पष्ट चिह्न हों
b. जिस पर चिह्न अग्नि द्वारा या अन्यथा मिटाए, बदले या बिगाड़े गए हों
c. जिन पर नया चिह्न लगाया गया हो
d. जिन पर सरकारी मोहर लगी हो
128. धारा 45(1) के अनुसार विनिर्दिष्ट क्षेत्रों में कौन-सी इमारती लकड़ी सरकार की सम्पत्ति समझी जाएगी?
a. केवल चिह्नित इमारती लकड़ी
b. केवल बहती हुई इमारती लकड़ी
c. सभी अचिह्नित काष्ठ और इमारती लकड़ी
d. केवल आरक्षित वन की इमारती लकड़ी
129. धारा 45(1) के अनुसार उपधारा (1) में वर्णित इमारती लकड़ी कब तक सरकार की सम्पत्ति समझी जाएगी?
a. एक वर्ष तक
b. जब तक कोई व्यक्ति इस अध्याय में यथा उपबन्धित रीति से उस पर अपना अधिकार और हक सिद्ध न कर दे
c. पाँच वर्ष तक
d. स्थायी रूप से
130. धारा 45(1) के अनुसार अचिह्नित काष्ठ और इमारती लकड़ी के लिए क्षेत्र कौन विनिर्दिष्ट करता है?
a. केन्द्रीय सरकार
b. वन अधिकारी
c. राज्य सरकार
d. जिला कलेक्टर
131. धारा 45(2) के अनुसार उपधारा (1) में वर्णित इमारती लकड़ी को कौन संगृहीत कर सकता है?
a. केवल वन अधिकारी
b. कोई वन अधिकारी या अन्य व्यक्ति, जो धारा 51 के अधीन बनाए गए नियमों के आधार पर उसे संगृहीत करने का हकदार है
c. केवल जिला कलेक्टर
d. कोई भी व्यक्ति
132. धारा 45(2) के अनुसार संगृहीत इमारती लकड़ी को कहाँ लाया जा सकता है?
a. किसी भी निजी गोदाम में
b. ऐसे डिपो में जिसे वन अधिकारी बहती हुई इमारती लकड़ी की प्राप्ति के लिए अधिसूचित करे
c. केवल जिला मुख्यालय में
d. केवल वन विभाग के कार्यालय में
133. धारा 45(2) के अनुसार बहती हुई इमारती लकड़ी की प्राप्ति के लिए डिपो कौन अधिसूचित करता है?
a. राज्य सरकार
b. केन्द्रीय सरकार
c. वन अधिकारी
d. जिला कलेक्टर
134. धारा 45(3) के अनुसार इमारती लकड़ी के किसी वर्ग को इस धारा के उपबंधों से छूट देने की शक्ति किसके पास है?
a. केन्द्रीय सरकार
b. राज्य सरकार
c. वन अधिकारी
d. जिला कलेक्टर
135. धारा 45(3) के अनुसार इमारती लकड़ी के किसी वर्ग को छूट किस माध्यम से दी जाती है?
a. शासनादेश द्वारा
b. परिपत्र द्वारा
c. राजपत्र में अधिसूचना द्वारा
d. न्यायालय के आदेश द्वारा
136. धारा 46 का विषय क्या है?
a. बहती हुई इमारती लकड़ी के दावेदारों को सूचना
b. इमारती लकड़ी का संग्रहण
c. वन-उपज का अभिवहन
d. डिपो का प्रबंधन
137. धारा 46 के अनुसार किस धारा के अधीन संगृहीत इमारती लकड़ी की लोक सूचना दी जाती है?
a. धारा 41 के अधीन
b. धारा 43 के अधीन
c. धारा 45 के अधीन
d. धारा 51 के अधीन
138. धारा 46 के अनुसार संगृहीत इमारती लकड़ी की लोक सूचना कौन देगा?
a. राज्य सरकार
b. जिला कलेक्टर
c. वन अधिकारी
d. पुलिस अधिकारी
139. धारा 46 के अनुसार संगृहीत इमारती लकड़ी की लोक सूचना कब दी जाएगी?
a. केवल वर्ष में एक बार
b. केवल आवश्यकता पड़ने पर
c. समय-समय पर
d. प्रत्येक माह
140. धारा 46 के अनुसार लोक सूचना में क्या अन्तर्विष्ट होगा?
a. इमारती लकड़ी का मूल्य
b. इमारती लकड़ी का वर्णन
c. डिपो का नाम
d. वन अधिकारी का नाम
141. धारा 46 के अनुसार लोक सूचना में दावेदार से क्या अपेक्षा की जाएगी?
a. मौखिक दावा प्रस्तुत करने की
b. स्वामित्व प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने की
c. अपने दावे का लिखित कथन प्रस्तुत करने की
d. न्यायालय में वाद दायर करने की
142. धारा 46 के अनुसार दावे का लिखित कथन किसके द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा?
a. वन अधिकारी द्वारा
b. राज्य सरकार द्वारा
c. इमारती लकड़ी पर दावा करने वाले किसी व्यक्ति द्वारा
d. जिला कलेक्टर द्वारा
143. धारा 46 के अनुसार दावे का लिखित कथन किस अवधि के भीतर प्रस्तुत किया जाएगा?
a. सूचना की तारीख से एक मास के भीतर
b. सूचना की तारीख से दो मास से अन्यून कालावधि के भीतर
c. सूचना की तारीख से छह मास के भीतर
d. सूचना की तारीख से एक वर्ष के भीतर
144. धारा 47 का विषय क्या है?
a. बहती हुई इमारती लकड़ी के दावेदारों को सूचना
b. ऐसी इमारती लकड़ी पर किए गए दावे के बारे में प्रक्रिया
c. वन-उपज का अभिवहन
d. वन अपराध
145. धारा 47(1) के अनुसार दावे का लिखित कथन प्रस्तुत होने पर वन अधिकारी क्या करेगा?
a. दावे को तत्काल स्वीकार करेगा
b. दावे को तत्काल खारिज करेगा
c. वह उचित समझी जाने वाली जांच करेगा
d. दावे को न्यायालय भेज देगा
146. धारा 47(1) के अनुसार जांच के पश्चात् वन अधिकारी को अपने कारणों का क्या करना होगा?
a. राज्य सरकार को भेजना होगा
b. मौखिक रूप से बताना होगा
c. उन्हें अभिलिखित करना होगा
d. न्यायालय को सौंपना होगा
147. धारा 47(1) के अनुसार कारण अभिलिखित करने के पश्चात् वन अधिकारी क्या कर सकता है?
a. केवल दावे को स्वीकार कर सकता है
b. केवल दावे को खारिज कर सकता है
c. दावे को खारिज कर सकता है या इमारती लकड़ी का परिदान दावेदार को कर सकता है
d. केवल न्यायालय को भेज सकता है
148. धारा 47(1) के अनुसार वन अधिकारी इमारती लकड़ी का परिदान किसे कर सकता है?
a. राज्य सरकार को
b. वन विभाग को
c. दावेदार को
d. जिला कलेक्टर को
149. धारा 47(2) के अनुसार यदि एक से अधिक व्यक्तियों द्वारा इमारती लकड़ी पर दावा किया जाए तो वन अधिकारी क्या कर सकता है?
a. सभी दावेदारों में बराबर बाँट देगा
b. इमारती लकड़ी ऐसे व्यक्ति को परिदत्त कर सकता है जिसे वह उसका हकदार समझता है
c. इमारती लकड़ी को नष्ट कर देगा
d. केवल राज्य सरकार को भेज देगा
150. धारा 47(2) के अनुसार यदि एक से अधिक दावेदार हों तो वन अधिकारी दावेदारों को कहाँ निर्देशित कर सकता है?
a. उच्च न्यायालय को
b. राजस्व न्यायालय को
c. सिविल न्यायालयों को
d. ग्राम पंचायत को
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