Download The Motor Vehicle Act MCQs Set- 10 PDF
1. “संपत्ति” के अंतर्गत क्या-क्या आते हैं?
a. केवल सड़कें और पुल
b. केवल मोटर यान में वहन किया गया माल
c. सड़कें, पुल, पुलिया, सेतुक, स्तंभ, वृक्ष, मील के पत्थर तथा किसी मोटर यान में वहन किए गए यात्रियों का सामान और माल
d. केवल सरकारी भवन
2. “व्यतिकारी देश”, अधिनियम की किस धारा में परिभाषित है?
a. धारा 145(छ)
b. धारा 145(ज)
c. धारा 145(झ)
d. धारा 146
3. “व्यतिकारी देश” से क्या अभिप्रेत है?
a. कोई भी विदेशी देश
b. केवल पड़ोसी देश
c. ऐसा कोई देश, जो ऐसी व्यतिकारिता के आधार पर, जिसे केंद्रीय द्वारा राजपत्र में इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए व्यतिकारी देश के रूप में अधिसूचित किया जाए
d. केवल संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश
4. “पर-पक्षकार”, अधिनियम की किस धारा में परिभाषित है?
a. धारा 145(ज)
b. धारा 145(झ)
c. धारा 145(ञ)
d. धारा 146
5. धारा 145(झ) के अनुसार “पर-पक्षकार” में कौन शामिल है?
a. केवल सरकार
b. केवल परिवहन यान का चालक
c. केवल सह-कर्मकार
d. सरकार, किसी परिवहन यान का चालक और उसका कोई अन्य सह-कर्मकार भी
6. पर-पक्षकार जोखिमों के विरुद्ध बीमा की आवश्यकता, किस धारा से सम्बंधित हैं?
a. धारा 145
b. धारा 146
c. धारा 147
d. धारा 148
7. धारा 146(1) के अनुसार कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर मोटर यान का उपयोग कब कर सकता है?
a. बिना बीमा के भी
b. केवल पंजीकरण होने पर
c. जब इस अध्याय की अपेक्षाओं के अनुरूप बीमा पालिसी प्रवृत्त हो
d. केवल परमिट होने पर
8. धारा 146(1) के अनुसार किसे बीमा की आवश्यकता से अपवाद दिया गया है?
a. चालक
b. स्वामी
c. यात्री
d. कंडक्टर
9. धारा 146 के अनुसार यदि कोई वाहन खतरनाक या परिसंकटमय माल ले जा रहा है, तो अतिरिक्त रूप से किस अधिनियम के अंतर्गत बीमा आवश्यक होगा?
a. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019
b. लोक दायित्व बीमा अधिनियम, 1991
c. पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986
d. भारतीय न्याय संहिता, 2023
10. धारा 146 के स्पष्टीकरण के अनुसार वेतन पाने वाला कर्मचारी मोटर यान चलाते समय इस धारा का उल्लंघन कब नहीं माना जाएगा?
a. जब उसके पास लाइसेंस हो
b. जब उसे यह ज्ञात न हो कि बीमा पालिसी प्रवृत्त नहीं है
c. जब वाहन सरकारी हो
d. जब चालक नया हो
11. धारा 146(2) के अनुसार किस यान पर इस धारा के उपबंध लागू नहीं होंगे?
a. निजी कार
b. मालवाहक वाहन
c. सरकारी स्वामित्व वाला यान जो गैर-वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जा रहा हो
d. टैक्सी
12. धारा 146(3) के अनुसार समुचित सरकार किन प्राधिकरणों के यानों को इस धारा से छूट दे सकती है?
a. केवल निजी कंपनियां
b. केवल टैक्सी सेवा
c. स्थानीय प्राधिकरण, राज्य परिवहन उपक्रम, सरकार के स्वामित्व वाले यान
d. केवल स्कूल बसें
13. धारा 146(3) के अनुसार छूट देने से पहले क्या आवश्यक है?
a. न्यायालय की अनुमति
b. पुलिस रिपोर्ट
c. निधि की स्थापना और उसका रख-रखाव
d. बीमा कंपनी की अनुमति
14. धारा 146(3) के स्पष्टीकरण के अनुसार “समुचित सरकार” से क्या अभिप्रेत है?
a. केवल केंद्रीय सरकार
b. केवल राज्य सरकार
c. यथास्थिति केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार
d. स्थानीय निकाय
15. यदि कोई वाहन सार्वजनिक स्थान पर बिना वैध बीमा पालिसी के चलाया जाता है, तो यह किस धारा का उल्लंघन होगा?
a. धारा 144
b. धारा 145
c. धारा 146
d. धारा 147
16. धारा 146 के अनुसार कोई व्यक्ति किस स्थिति में किसी अन्य व्यक्ति को वाहन उपयोग करने की अनुमति दे सकता है?
a. बिना बीमा के भी
b. केवल मौखिक अनुमति पर
c. जब वैध बीमा पालिसी प्रवृत्त हो
d. केवल पंजीकरण प्रमाणपत्र होने पर
17. पालिसियों की अपेक्षाएं तथा दायित्व की सीमाएं, किस धारा से सम्बंधित हैं?
a. धारा 145
b. धारा 146
c. धारा 147
d. धारा 148
18. धारा 147(1)(क) के अनुसार वैध बीमा पालिसी किसके द्वारा दी जानी चाहिए?
a. राज्य सरकार
b. न्यायालय
c. प्राधिकृत बीमाकर्ता
d. पुलिस विभाग
19. धारा 147(1)(ख) के अनुसार बीमा पालिसी किन व्यक्तियों को कवर करती है?
a. केवल वाहन स्वामी
b. केवल चालक
c. पालिसी में विनिर्दिष्ट व्यक्ति या वर्ग के व्यक्ति
d. केवल यात्री
20. धारा 147(1)(i) के अनुसार बीमा पालिसी किस स्थिति को कवर करती है?
a. केवल वाहन की मरम्मत
b. व्यक्ति की मृत्यु या शारीरिक क्षति तथा पर-पक्षकार की संपत्ति को नुकसान
c. केवल चालक का वेतन
d. केवल ईंधन व्यय
21. धारा 147(1)(ii) के अनुसार कौन बीमा कवरेज से बाहर है?
a. वाहन स्वामी
b. चालक
c. माल यान का निःशुल्क यात्री
d. बीमाकर्ता
22. धारा 147 के स्पष्टीकरण के अनुसार यदि दुर्घटना का कारण सार्वजनिक स्थान पर हुआ कार्य या लोप है, तो क्या दुर्घटना सार्वजनिक स्थान से संबंधित मानी जाएगी?
a. नहीं
b. केवल न्यायालय की अनुमति से
c. हाँ
d. केवल पुलिस रिपोर्ट होने पर
23. धारा 147(2) के अनुसार पर-पक्षकार बीमा के लिए आधार प्रीमियम कौन निर्धारित करेगा?
a. राज्य सरकार
b. बीमा कंपनी
c. केंद्रीय सरकार
d. न्यायालय
24. धारा 147(2) के अनुसार केंद्रीय सरकार किसके परामर्श से आधार प्रीमियम निर्धारित करती है?
a. भारतीय रिज़र्व बैंक
b. राज्य सरकार
c. बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण
d. परिवहन विभाग
25. धारा 147(3) के अनुसार बीमा पालिसी तब तक प्रभावी नहीं होगी जब तक कि क्या जारी न किया जाए?
a. परमिट
b. लाइसेंस
c. बीमा प्रमाणपत्र
d. पंजीकरण प्रमाणपत्र
26. धारा 147(4) के अनुसार मोटर यान (संशोधन) अधिनियम, 2019 से पूर्व जारी बीमा पालिसियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
a. वे स्वतः समाप्त हो जाएंगी
b. उन्हें पुनः जारी करना होगा
c. वे संविदा के अधीन पूर्व निबंधनों के अनुसार जारी रहेंगी
d. वे अमान्य हो जाएंगी
27. धारा 147(5) के अनुसार यदि कवर नोट जारी होने के बाद निर्धारित समय में बीमा पालिसी जारी नहीं होती है, तो बीमाकर्ता को क्या करना होगा?
a. न्यायालय को सूचित करना
b. पुलिस को सूचित करना
c. रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी या अन्य विहित प्राधिकारी को सूचित करना
d. वाहन स्वामी को दंडित करना
28. धारा 147(6) के अनुसार बीमाकर्ता का दायित्व क्या है?
a. केवल प्रीमियम लेना
b. केवल बीमा प्रमाणपत्र जारी करना
c. पालिसी में विनिर्दिष्ट व्यक्ति या वर्ग के व्यक्तियों की क्षतिपूर्ति करना
d. केवल वाहन का निरीक्षण करना
29. व्यतिकारी देश में जारी की गई बीमा की पालिसी की विधिमान्यता किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 146
b. धारा 147
c. धारा 148
d. धारा 149
30. धारा 148 के अनुसार यह प्रावधान कब लागू होता है?
a. जब वाहन भारत में पंजीकृत हो
b. जब वाहन व्यतिकारी देश में पंजीकृत हो
c. जब वाहन बिना बीमा के हो
d. जब वाहन सरकारी हो
31. धारा 148 के अनुसार यदि किसी व्यतिकारी देश में जारी बीमा पालिसी उस देश के बीमा कानून की अपेक्षाओं का पालन करती है, तो भारत में उसका क्या प्रभाव होगा?
a. वह अमान्य मानी जाएगी
b. उसे पुनः पंजीकृत करना होगा
c. वह इस अध्याय की अपेक्षाओं का अनुपालन करने वाली मानी जाएगी
d. वह केवल सीमित अवधि तक मान्य होगी
32. धारा 148 के अनुसार यह प्रावधान किन देशों के बीच लागू होता है?
a. केवल भारत और नेपाल के बीच
b. केवल भारत और भूटान के बीच
c. भारत और किसी व्यतिकारी देश के बीच
d. सभी विदेशी देशों के बीच
33. धारा 148 के अनुसार मोटर यान किस क्षेत्र में संचालित हो सकता है?
a. केवल भारत में
b. केवल व्यतिकारी देश में
c. दोनों देशों के किसी सामान्य मार्ग या क्षेत्र में
d. केवल अंतरराष्ट्रीय सीमा तक
34. धारा 148 के अनुसार यह प्रावधान किस धारा के होते हुए भी लागू होता है?
a. धारा 145
b. धारा 146
c. धारा 147
d. धारा 149
35. धारा 148 के अनुसार यह प्रावधान किन नियमों के अधीन रहेगा?
a. धारा 146 के अधीन बनाए गए नियम
b. धारा 147 के अधीन बनाए गए नियम
c. धारा 164ख के अधीन बनाए गए नियम
d. धारा 200 के अधीन बनाए गए नियम
36. धारा 148 के अनुसार व्यतिकारी देश में जारी बीमा पालिसी कब प्रभावी मानी जाएगी?
a. जब उसका भारत में पुनः पंजीकरण हो जाए
b. जब वह उस देश के बीमा कानून की अपेक्षाओं का पालन करती हो
c. जब उसे केंद्रीय सरकार की स्वीकृति मिल जाए
d. जब वह केवल भारत में जारी की गई हो
37. धारा 148 के अंतर्गत बीमा पालिसी किस क्षेत्र में प्रभावी मानी जाएगी?
a. केवल भारत की सीमा के भीतर
b. केवल व्यतिकारी देश की सीमा के भीतर
c. उस संपूर्ण मार्ग या क्षेत्र में जिसके संबंध में ठहराव किया गया है
d. केवल राष्ट्रीय राजमार्गों पर
38. बीमा कंपनी द्वारा निपटारा और इसके लिए प्रक्रिया किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 147
b. धारा 148
c. धारा 149
d. धारा 150
39. धारा 149(1) के अनुसार दुर्घटना की सूचना प्राप्त होने पर बीमा कंपनी क्या करेगी?
a. दावा अस्वीकार कर देगी
b. जांच समिति गठित करेगी
c. दावों के निपटारे के लिए एक अधिकारी पदाभिहित करेगी
d. सीधे भुगतान कर देगी
40. धारा 149(1) के अनुसार बीमा कंपनी को दुर्घटना की सूचना किस माध्यम से प्राप्त हो सकती है?
a. केवल दावाकर्ता से
b. केवल दुर्घटना सूचना रिपोर्ट से
c. केवल पुलिस से
d. दावाकर्ता से, दुर्घटना सूचना रिपोर्ट से या अन्य किसी माध्यम से
41. धारा 149(2) के अनुसार बीमा कंपनी द्वारा पदाभिहित अधिकारी कितने समय के भीतर दावे के निपटारे के लिए प्रस्थापना कर सकता है?
a. 15 दिन
b. 30 दिन
c. 45 दिन
d. 60 दिन
42. धारा 149(2) के अनुसार बीमा कंपनी की प्रस्थापना किसके समक्ष की जाती है?
a. पुलिस अधिकारी
b. जिला न्यायालय
c. दावा अधिकरण
d. राज्य सरकार
43. धारा 149(2) के अनुसार निपटारे की प्रक्रिया किसके द्वारा विहित की जाती है?
a. राज्य सरकार
b. उच्च न्यायालय
c. बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण
d. केंद्रीय सरकार
44. धारा 149(3)(क) के अनुसार यदि दावाकर्ता बीमा कंपनी की प्रस्थापना स्वीकार कर लेता है, तो क्या होगा?
a. दावा समाप्त हो जाएगा
b. बीमा कंपनी पुनः जांच करेगी
c. दावा अधिकरण समझौते का अभिलेख तैयार करेगा
d. मामला उच्च न्यायालय को भेजा जाएगा
45. धारा 149(3)(क) के अनुसार समझौते का अभिलेख प्राप्त होने के बाद बीमा कंपनी को कितने समय के भीतर भुगतान करना होगा?
a. 15 दिन
b. 30 दिन
c. 45 दिन
d. 60 दिन
46. धारा 149(3)(ख) के अनुसार यदि दावाकर्ता प्रस्थापना को अस्वीकार कर देता है, तो क्या होगा?
a. दावा खारिज कर दिया जाएगा
b. बीमा कंपनी को पुनः प्रस्ताव देना होगा
c. दावा अधिकरण सुनवाई की तारीख निर्धारित करेगा
d. मामला राज्य सरकार को भेजा जाएगा
47. पर-व्यक्ति जोखिमों की बाबत बीमाकृत व्यक्तियों के विरुद्ध निर्णयों और पंचाटों को तुष्ट करने के बीमाकर्ता के कर्तव्य किस धारा से सम्बंधित हैं?
a. धारा 148
b. धारा 149
c. धारा 150
d. धारा 151
48. धारा 150(1) के अनुसार यदि बीमाकृत व्यक्ति के विरुद्ध निर्णय या पंचाट प्राप्त हो जाता है, तो बीमाकर्ता क्या करेगा?
a. दावा अस्वीकार कर देगा
b. केवल आंशिक भुगतान करेगा
c. बीमाकृत राशि की सीमा तक भुगतान करेगा
d. न्यायालय की अनुमति की प्रतीक्षा करेगा
49. धारा 150(1) के अनुसार बीमाकर्ता को भुगतान करना होगा, भले ही—
a. वाहन का पंजीकरण समाप्त हो गया हो
b. बीमाकर्ता पालिसी को शून्य या रद्द करने का हकदार हो
c. चालक अनुपस्थित हो
d. वाहन पुराना हो
50. धारा 150(2) के अनुसार बीमाकर्ता कार्यवाही में किस आधार पर प्रतिवाद कर सकता है?
a. केवल वाहन की आयु के आधार पर
b. केवल दुर्घटना की गंभीरता के आधार पर
c. पालिसी की शर्तों का उल्लंघन, तात्विक तथ्य का अप्रकटन, प्रीमियम का भुगतान न होना
d. केवल वाहन के रंग के आधार पर
51. धारा 150(2) के अनुसार यदि वाहन का उपयोग आयोजित दौड़ या गति परीक्षा में किया गया हो, तो यह किसका उल्लंघन माना जाएगा?
a. यातायात नियमों का
b. न्यायालय के आदेश का
c. पालिसी की शर्त का
d. पंजीकरण प्रमाणपत्र का
52. धारा 150(2) के अनुसार निम्न में से कौन-सा आधार बीमाकर्ता द्वारा प्रतिवाद के लिए मान्य है?
a. चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस न होना
b. चालक का शराब या मादक पदार्थ के प्रभाव में होना
c. पालिसी का तात्विक तथ्य के मिथ्या प्रतिपादन से प्राप्त होना
d. उपर्युक्त सभी
53. धारा 150(3) के अनुसार यदि व्यतिकारी देश के न्यायालय से निर्णय प्राप्त हुआ हो, तो बीमाकर्ता की देयता क्या होगी?
a. समाप्त हो जाएगी
b. आधी रह जाएगी
c. भारत के न्यायालय के निर्णय के समान होगी
d. केवल व्यतिकारी देश में लागू होगी
54. धारा 150(4) के अनुसार बीमा प्रमाणपत्र जारी होने के बाद पालिसी की कुछ शर्तें किन दायित्वों के संबंध में प्रभावहीन हो सकती हैं?
a. धारा 146(1) के दायित्व
b. धारा 147(1)(क) के दायित्व
c. धारा 147(1)(ख) के दायित्व
d. धारा 149(1) के दायित्व
55. धारा 150(6) के अनुसार यदि दावाकर्ता को बीमा कंपनी का नाम ज्ञात नहीं है, तो जानकारी देना किसका कर्तव्य है?
a. पुलिस अधिकारी का
b. दावा अधिकरण का
c. वाहन के चालक का
d. वाहन के स्वामी का
56. धारा 150 के स्पष्टीकरण के अनुसार “पंचाट” से क्या अभिप्रेत है?
a. मध्यस्थता अधिनियम के अधीन पंचाट
b. दावा अधिकरण द्वारा धारा 168 के अधीन किया गया पंचाट
c. उच्च न्यायालय का निर्णय
d. बीमा कंपनी का आदेश
57. धारा 150 के स्पष्टीकरण के अनुसार “दावा अधिकरण” से क्या अभिप्रेत है?
a. जिला न्यायालय
b. उच्च न्यायालय
c. धारा 165 के अधीन गठित दावा अधिकरण
d. उपभोक्ता आयोग
58. धारा 150 के स्पष्टीकरण के अनुसार “पालिसी के निबंधनों के अन्तर्गत आने वाला दायित्व” से क्या अभिप्रेत है?
a. केवल वह दायित्व जो न्यायालय द्वारा निर्धारित किया गया हो
b. ऐसा दायित्व जिसे पालिसी के अन्तर्गत कवर किया गया है या कवर किया होता यदि पालिसी के परिवर्जन या रद्दीकरण का प्रश्न न होता
c. केवल चालक का व्यक्तिगत दायित्व
d. केवल वाहन स्वामी का दायित्व
59. धारा 150 के स्पष्टीकरण के अनुसार “तात्त्विक तथ्य” और “तात्त्विक विशिष्टि” से क्या अभिप्रेत है?
a. केवल वाहन की तकनीकी जानकारी
b. ऐसा तथ्य या विशिष्टि जो बीमाकर्ता के जोखिम स्वीकार करने, प्रीमियम और शर्तों के निर्धारण के विवेक को प्रभावित करे
c. केवल दुर्घटना का विवरण
d. केवल चालक की आयु
60. बीमाकृत के दिवालिया होने पर बीमाकर्ता के विरुद्ध पर-पक्षकार के अधिकार किस धारा से सम्बंधित हैं?
a. धारा 149
b. धारा 150
c. धारा 151
d. धारा 152
61. धारा 151(1) के अनुसार यदि बीमाकृत व्यक्ति दिवालिया हो जाए तो बीमाकर्ता के विरुद्ध उसके अधिकार किसे अंतरित हो जाएंगे?
a. न्यायालय को
b. राज्य सरकार को
c. पर-पक्षकार को
d. बीमाकर्ता को
62. धारा 151(1) के अनुसार यदि बीमाकृत व्यक्ति अपने लेनदारों के साथ प्रशमन या ठहराव कर ले, तो उसके अधिकार किसे प्राप्त होंगे?
a. लेनदारों को
b. बीमाकर्ता को
c. पर-पक्षकार को
d. परिसमापक को
63. धारा 151(1)(ख) के अनुसार यदि बीमाकृत व्यक्ति एक कंपनी है और कंपनी के परिसमापन का आदेश हो जाता है, तो अधिकार किसे अंतरित होंगे?
a. कंपनी के निदेशकों को
b. परिसमापक को
c. पर-पक्षकार को
d. राज्य सरकार को
64. धारा 151(2) के अनुसार यदि मृत ऋणी की संपदा के प्रशासन का आदेश दिया गया हो और किसी दायित्व के लिए बीमा किया गया हो, तो बीमाकर्ता के विरुद्ध अधिकार किसे प्राप्त होंगे?
a. उत्तराधिकारी को
b. ऋणदाता को
c. न्यायालय को
d. बीमाकर्ता को
65. धारा 151(3) के अनुसार बीमा पालिसी की वह शर्त जो अधिकारों को परिवर्तित करने या समाप्त करने का प्रयत्न करती है, दिवालियापन की स्थिति में क्या प्रभाव रखेगी?
a. पूर्णतः प्रभावी होगी
b. आंशिक रूप से प्रभावी होगी
c. केवल न्यायालय की अनुमति से प्रभावी होगी
d. कोई प्रभाव नहीं होगा
66. धारा 151(4) के अनुसार अंतरण के बाद बीमाकर्ता का दायित्व किसके प्रति होगा?
a. केवल बीमाकृत व्यक्ति के प्रति
b. केवल न्यायालय के प्रति
c. पर-पक्षकार के प्रति
d. राज्य सरकार के प्रति
67. धारा 151(4) के अनुसार यदि बीमाकर्ता का दायित्व बीमाकृत व्यक्ति के प्रति अधिक है, तो अतिरिक्त राशि के संबंध में अधिकार किसके पास रहेगा?
a. पर-पक्षकार के पास
b. बीमाकर्ता के पास
c. बीमाकृत व्यक्ति के पास
d. न्यायालय के पास
68. धारा 151(4) के अनुसार उपधारा (1) या (2) के अधीन अंतरण होने पर बीमाकर्ता का पर-पक्षकार के प्रति दायित्व कैसा होगा?
a. बीमाकृत व्यक्ति के प्रति उसके दायित्व से कम होगा
b. बीमाकृत व्यक्ति के प्रति उसके दायित्व के समान होगा
c. केवल न्यायालय द्वारा निर्धारित होगा
d. समाप्त हो जाएगा
69. यदि बीमाकर्ता का बीमाकृत व्यक्ति के प्रति दायित्व, बीमाकृत व्यक्ति के पर-पक्षकार के प्रति दायित्व से अधिक है, तो आधिक्य राशि के संबंध में अधिकार किसके पास रहेगा?
a. पर-पक्षकार के पास
b. बीमाकृत व्यक्ति के पास
c. बीमाकर्ता के पास
d. राज्य सरकार के पास
70. यदि बीमाकृत व्यक्ति का पर-पक्षकार के प्रति दायित्व, बीमाकर्ता के दायित्व से कम है, तो अतिशेष राशि के संबंध में अधिकार किसके पास रहेगा?
a. बीमाकृत व्यक्ति के पास
b. पर-पक्षकार के पास
c. दावा अधिकरण के पास
d. राज्य सरकार के पास
71. बीमा के संबंध में सूचना देने का कर्तव्य किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 150
b. धारा 151
c. धारा 152
d. धारा 153
72. धारा 152(1) के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध पर-पक्षकार द्वारा दावा किया जाता है, तो वह किस बात को बताने से इंकार नहीं कर सकता?
a. वाहन का पंजीकरण
b. चालक का नाम
c. बीमा पालिसी का अस्तित्व और उसकी जानकारी
d. दुर्घटना का स्थान
73. धारा 152(1) के अनुसार जानकारी किसके अनुरोध पर देनी होगी?
a. केवल न्यायालय के अनुरोध पर
b. केवल पुलिस अधिकारी के अनुरोध पर
c. दावा करने वाले व्यक्ति या उसकी ओर से
d. केवल बीमाकर्ता के अनुरोध पर
74. धारा 152(1) के अनुसार व्यक्ति को किस दस्तावेज में विनिर्दिष्ट पालिसी की विशिष्टियां बतानी होंगी?
a. पंजीकरण प्रमाणपत्र
b. ड्राइविंग लाइसेंस
c. बीमा प्रमाणपत्र
d. परमिट
75. धारा 152(2) के अनुसार यदि व्यक्ति दिवालिया हो जाए या कंपनी का परिसमापन हो जाए, तो सूचना देने का कर्तव्य किसका होगा?
a. केवल न्यायालय का
b. केवल बीमाकर्ता का
c. संबंधित प्रतिनिधि, न्यासी, परिसमापक या रिसीवर का
d. केवल पुलिस का
76. धारा 152(3) के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को यह अनुमान लगाने का युक्तियुक्त आधार हो कि उसे बीमाकर्ता के विरुद्ध अधिकार प्राप्त हो गए हैं, तो सूचना देने का कर्तव्य किसका होगा?
a. वाहन स्वामी का
b. बीमाकर्ता का
c. दावा अधिकरण का
d. राज्य सरकार का
77. धारा 152(4) के अनुसार सूचना देने के कर्तव्य में क्या शामिल है?
a. केवल मौखिक सूचना देना
b. केवल प्रीमियम की जानकारी देना
c. बीमा संविदा और दस्तावेजों का निरीक्षण व प्रतियां देना
d. केवल बीमा प्रमाणपत्र दिखाना
78. धारा 152 के अंतर्गत सूचना देने के कर्तव्य में निम्न में से कौन-कौन से दस्तावेज शामिल हो सकते हैं?
a. बीमा संविदा
b. प्रीमियम की रसीदें
c. अन्य संबंधित दस्तावेज
d. उपर्युक्त सभी
79. बीमाकर्ता और बीमाकृत व्यक्तियों के बीच समझौता किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 151
b. धारा 152
c. धारा 153
d. धारा 154
80. धारा 153(1) के अनुसार बीमाकर्ता द्वारा किया गया समझौता कब तक विधिमान्य नहीं होगा?
a. जब तक न्यायालय की अनुमति न मिल जाए
b. जब तक बीमाकर्ता हस्ताक्षर न कर दे
c. जब तक पर-व्यक्ति समझौते का पक्षकार न हो
d. जब तक पुलिस सत्यापन न हो जाए
81. धारा 153(1) के अनुसार समझौता किस प्रकार के दावे के संबंध में किया जाता है?
a. वाहन पंजीकरण के दावे के संबंध में
b. धारा 147(1)(ख) में निर्दिष्ट दायित्व के संबंध में पर-व्यक्ति के दावे के संबंध में
c. ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण के संबंध में
d. कर भुगतान के संबंध में
82. धारा 153(2) के अनुसार समझौते की जांच कौन करेगा कि वह सद्भाविक है या नहीं?
a. बीमाकर्ता
b. पुलिस अधिकारी
c. दावा अधिकरण
d. राज्य सरकार
83. धारा 153(2) के अनुसार प्रतिकर किसके अनुसार दिया जाना चाहिए?
a. धारा 147(1) के अनुसार
b. धारा 150(1) के अनुसार
c. धारा 164(1) में निर्दिष्ट संदाय अनुसूची के अनुसार
d. धारा 168(1) के अनुसार
84. धारा 153(3) के अनुसार यदि बीमाकृत व्यक्ति दिवालिया हो जाता है, तो बीमाकर्ता और बीमाकृत व्यक्ति के बीच किया गया करार किस पर प्रभाव नहीं डालेगा?
a. बीमाकर्ता के अधिकारों पर
b. राज्य सरकार के अधिकारों पर
c. पर-व्यक्ति के अधिकारों पर
d. न्यायालय के अधिकारों पर
85. धारा 153(3) के अनुसार दिवालियापन या परिसमापन के बाद बीमाकृत व्यक्ति द्वारा किया गया अधित्यजन या समनुदेशन किसके लिए प्रभावी नहीं होगा?
a. बीमाकर्ता के अधिकार समाप्त करने के लिए
b. पर-व्यक्ति के अधिकारों को विफल करने के लिए
c. न्यायालय के आदेश को समाप्त करने के लिए
d. पंजीकरण रद्द करने के लिए
86. धारा 153 के अनुसार यदि पर-व्यक्ति समझौते का पक्षकार नहीं है, तो वह समझौता क्या होगा?
a. पूर्णतः वैध होगा
b. आंशिक रूप से वैध होगा
c. विधिमान्य नहीं होगा
d. केवल न्यायालय की अनुमति से वैध होगा
87. धारा 151, धारा 152 और धारा 153 के संबंध में व्यावृत्ति किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 152
b. धारा 153
c. धारा 154
d. धारा 155
88. धारा 154(1) के अनुसार “पर-व्यक्ति के प्रति दायित्व” में किसका दायित्व शामिल नहीं होगा?
a. बीमाकृत व्यक्ति का पर-व्यक्ति के प्रति दायित्व
b. वाहन स्वामी का दायित्व
c. किसी अन्य बीमा पालिसी के अधीन बीमाकर्ता के रूप में उस व्यक्ति का दायित्व
d. चालक का दायित्व
89. धारा 154 के अनुसार “पर-व्यक्ति के प्रति दायित्व” की अवधारणा किन धाराओं के प्रयोजन के लिए प्रयुक्त होती है?
a. धारा 148, 149 और 150
b. धारा 150, 151 और 152
c. धारा 151, 152 और 153
d. धारा 152, 153 और 154
90. धारा 154(2) के अनुसार धारा 151, 152 और 153 के उपबंध कब लागू नहीं होंगे?
a. जब बीमा पालिसी समाप्त हो जाए
b. जब वाहन का पंजीकरण रद्द हो जाए
c. जब कंपनी का स्वैच्छिक परिसमापन पुनर्गठन या समामेलन के लिए हो
d. जब दावा अधिकरण का गठन न हुआ हो
91. धारा 154 के अनुसार “पर-व्यक्ति के प्रति दायित्व” में कौन-सा दायित्व शामिल होगा?
a. किसी अन्य बीमा पालिसी के अधीन बीमाकर्ता का दायित्व
b. बीमाकृत व्यक्ति का पर-व्यक्ति के प्रति दायित्व
c. केवल राज्य सरकार का दायित्व
d. केवल न्यायालय का दायित्व
92. धारा 154 मोटर वाहन अधिनियम के किस अध्याय से संबंधित प्रावधानों की व्यावृत्ति को स्पष्ट करती है?
a. पंजीकरण से संबंधित अध्याय
b. परमिट से संबंधित अध्याय
c. मोटर वाहन बीमा से संबंधित अध्याय
d. अपराध एवं दंड से संबंधित अध्याय
93. कतिपय वाद हेतुकों पर मृत्यु का प्रभाव किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 153
b. धारा 154
c. धारा 155
d. धारा 156
94. धारा 155 के अनुसार यह प्रावधान किस अधिनियम की धारा 306 के बावजूद लागू होता है?
a. भारतीय संविदा अधिनियम, 1872
b. भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925
c. भारतीय दंड संहिता, 1860
d. साक्ष्य अधिनियम, 1872
95. धारा 155 के अनुसार यदि बीमा प्रमाणपत्र जिसके पक्ष में जारी हुआ है उसकी मृत्यु हो जाती है, तो क्या होगा?
a. वाद स्वतः समाप्त हो जाएगा
b. बीमा पालिसी निरस्त हो जाएगी
c. वाद हेतुक की उत्तरजीविता समाप्त नहीं होगी
d. दावा अधिकरण का अधिकार समाप्त हो जाएगा
96. धारा 155 के अनुसार मृत्यु कब होने पर यह प्रावधान लागू होगा?
a. बीमा पालिसी जारी होने से पहले
b. घटना घटित होने के बाद
c. वाहन खरीदने से पहले
d. दावा दायर करने से पहले
97. धारा 155 के अनुसार मृत्यु होने पर वाद हेतुक किसके विरुद्ध जारी रह सकता है?
a. केवल बीमाकर्ता के विरुद्ध
b. केवल संपदा के विरुद्ध
c. संपदा या बीमाकर्ता के विरुद्ध
d. केवल राज्य सरकार के विरुद्ध
98. धारा 155 के अनुसार बीमा प्रमाणपत्र किसके पक्ष में जारी होता है?
a. केवल चालक के पक्ष में
b. केवल परिवहन प्राधिकारी के पक्ष में
c. वाहन स्वामी या बीमाकृत व्यक्ति के पक्ष में
d. केवल दावा अधिकरण के पक्ष में
99. बीमा प्रमाणपत्र का प्रभाव किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 154
b. धारा 155
c. धारा 156
d. धारा 157
100. धारा 156 के अनुसार जब बीमाकर्ता बीमा प्रमाणपत्र जारी करता है, तो वह किसके संबंध में जारी किया जाता है?
a. वाहन पंजीकरण
b. ड्राइविंग लाइसेंस
c. बीमा की संविदा
d. परमिट
101. धारा 156(क) के अनुसार यदि प्रमाणपत्र में वर्णित पालिसी बीमाकृत को नहीं दी गई है, तो क्या माना जाएगा?
a. पालिसी अमान्य मानी जाएगी
b. पालिसी निरस्त मानी जाएगी
c. प्रमाणपत्र में वर्णित विशिष्टियों के अनुरूप पालिसी दे दी गई मानी जाएगी
d. नई पालिसी जारी करनी होगी
102. धारा 156(क) के अनुसार यह प्रावधान किन व्यक्तियों के बीच लागू होगा?
a. बीमाकर्ता और बीमाकृत व्यक्ति के बीच
b. बीमाकर्ता और किसी अन्य व्यक्ति के बीच
c. वाहन स्वामी और चालक के बीच
d. दावा अधिकरण और बीमाकर्ता के बीच
103. धारा 156(ख) के अनुसार यदि पालिसी की वास्तविक शर्तें प्रमाणपत्र में दी गई विशिष्टियों से कम अनुकूल हों, तो किसे प्राथमिकता दी जाएगी?
a. पालिसी की वास्तविक शर्तों को
b. बीमाकर्ता के निर्णय को
c. प्रमाणपत्र की विशिष्टियों को
d. दावा अधिकरण के आदेश को
104. धारा 156(ख) के अनुसार यदि पालिसी और प्रमाणपत्र की शर्तों में अंतर हो, तो तीसरे व्यक्ति के लिए कौन-सी शर्तें लागू होंगी?
a. पालिसी में वर्णित शर्तें
b. प्रमाणपत्र में वर्णित शर्तें
c. न्यायालय द्वारा निर्धारित शर्तें
d. बीमाकर्ता द्वारा निर्धारित शर्तें
105. धारा 156 के अनुसार बीमा प्रमाणपत्र का प्रभाव किन व्यक्तियों के बीच लागू नहीं होता?
a. बीमाकर्ता और किसी अन्य व्यक्ति के बीच
b. दावा अधिकरण और बीमाकर्ता के बीच
c. बीमाकर्ता और बीमाकृत व्यक्ति के बीच
d. बीमाकर्ता और पर-पक्षकार के बीच
106. धारा 156 के अनुसार बीमा प्रमाणपत्र में क्या वर्णित होता है?
a. वाहन का पंजीकरण विवरण
b. चालक का विवरण
c. बीमा पालिसी की विशिष्टियां
d. दुर्घटना का विवरण
107. धारा 156 के अनुसार यदि पालिसी और प्रमाणपत्र में अंतर हो, तो किसके हित में प्रमाणपत्र की शर्तों को लागू किया जाएगा?
a. केवल बीमाकर्ता के हित में
b. केवल बीमाकृत व्यक्ति के हित में
c. उन व्यक्तियों के हित में जो बीमाकर्ता के विरुद्ध दावा करते हैं
d. केवल न्यायालय के हित में
108. बीमा के प्रमाणपत्र का अंतरण किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 155
b. धारा 156
c. धारा 157
d. धारा 158
109. धारा 157(1) के अनुसार जब मोटर वाहन का स्वामित्व किसी अन्य व्यक्ति को अंतरित किया जाता है, तो बीमा प्रमाणपत्र क्या माना जाएगा?
a. निरस्त माना जाएगा
b. समाप्त माना जाएगा
c. नए स्वामी के पक्ष में अंतरित माना जाएगा
d. न्यायालय के पास जमा माना जाएगा
110. धारा 157(1) के अनुसार बीमा प्रमाणपत्र और पालिसी का अंतरण कब से प्रभावी माना जाएगा?
a. आवेदन की तिथि से
b. बीमाकर्ता की स्वीकृति की तिथि से
c. स्वामित्व के अंतरण की तारीख से
d. पंजीकरण संशोधन की तिथि से
111. धारा 157 के स्पष्टीकरण के अनुसार समझे गए अंतरण में क्या शामिल होंगे?
a. केवल बीमा प्रमाणपत्र
b. केवल पालिसी के अधिकार
c. केवल पालिसी के दायित्व
d. बीमा प्रमाणपत्र और पालिसी के अधिकार एवं दायित्व
112. धारा 157(2) के अनुसार अंतरिती को बीमाकर्ता को आवेदन कितने दिनों के भीतर करना चाहिए?
a. 7 दिन
b. 14 दिन
c. 30 दिन
d. 45 दिन
113. धारा 157(2) के अनुसार आवेदन किस प्ररूप में किया जाएगा?
a. साधारण प्ररूप में
b. न्यायालय द्वारा निर्धारित प्ररूप में
c. विहित प्ररूप में
d. ऑनलाइन प्ररूप में
114. धारा 157 के अनुसार बीमा प्रमाणपत्र का अंतरण किसके साथ होता है?
a. ड्राइविंग लाइसेंस के साथ
b. पंजीकरण प्रमाणपत्र के साथ
c. मोटर वाहन के स्वामित्व के साथ
d. परमिट के साथ
115. धारा 157 के अनुसार बीमाकर्ता का कर्तव्य क्या है जब अंतरिती आवेदन करता है?
a. नई पालिसी जारी करना
b. आवेदन अस्वीकार करना
c. बीमा प्रमाणपत्र और पालिसी में आवश्यक परिवर्तन करना
d. वाहन का निरीक्षण करना
116. कतिपय मामलों में कतिपय प्रमाणपत्रों, अनुज्ञप्ति और अनुज्ञापत्र का पेश किया जाना किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 156
b. धारा 157
c. धारा 158
d. धारा 159
117. धारा 158(1) के अनुसार सार्वजनिक स्थान पर मोटरयान चलाने वाला व्यक्ति, प्राधिकृत वर्दीधारी पुलिस अधिकारी की मांग पर कौन-सा दस्तावेज पेश करेगा?
a. बीमा प्रमाणपत्र
b. रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र
c. प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र
d. उपर्युक्त सभी
118. धारा 158(1) के अनुसार चालक को कौन-सी अनुज्ञप्ति प्रस्तुत करनी होगी?
a. व्यापार अनुज्ञप्ति
b. चालन अनुज्ञप्ति
c. शस्त्र अनुज्ञप्ति
d. खनन अनुज्ञप्ति
119. धारा 158(1) के अनुसार परिवहन यान की दशा में अतिरिक्त रूप से कौन-से दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे?
a. केवल बीमा प्रमाणपत्र
b. केवल रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र
c. धारा 56 में निर्दिष्ट उपयुक्तता प्रमाणपत्र और अनुज्ञापत्र
d. केवल प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र
120. धारा 158(1) के अंतर्गत इस अधिनियम के अधीन प्रदत्त किया जा सकने वाला कौन-सा दस्तावेज भी प्रस्तुत किया जा सकता है?
a. केवल न्यायालय का आदेश
b. केवल कर रसीद
c. कोई ऐसा प्रमाणपत्र या छूट का प्राधिकार
d. केवल पहचान पत्र
121. धारा 158(1) के खंड (ङ) और (च) किस वर्ष जोड़े गए थे?
a. 2017
b. 2018
c. 2019
d. 2020
122. धारा 158(2) के अनुसार यदि दुर्घटना में किसी व्यक्ति की मृत्यु या शारीरिक क्षति हो जाए और चालक दस्तावेज प्रस्तुत न करे, तो उन्हें कहाँ प्रस्तुत करना होगा?
a. जिला न्यायालय में
b. परिवहन कार्यालय में
c. उस पुलिस थाने में जहाँ दुर्घटना की रिपोर्ट की जाती है
d. बीमा कंपनी के कार्यालय में
123. धारा 158(3) के अनुसार यदि व्यक्ति सात दिनों के भीतर आवश्यक प्रमाणपत्र पुलिस थाने में प्रस्तुत कर देता है, तो क्या होगा?
a. उस पर दोगुना जुर्माना लगेगा
b. उसका लाइसेंस निलंबित होगा
c. उसे अपराध के लिए दोषसिद्ध नहीं ठहराया जाएगा
d. उसका वाहन जब्त कर लिया जाएगा
124. धारा 158(3) में दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कितने दिनों की अवधि दी गई है?
a. 3 दिन
b. 5 दिन
c. 7 दिन
d. 15 दिन
125. धारा 158(4) के अनुसार वाहन स्वामी का कर्तव्य क्या है?
a. वाहन बेच देना
b. पुलिस अधिकारी को आवश्यक सूचना देना
c. बीमा पालिसी रद्द करना
d. न्यायालय में उपस्थित होना
126. धारा 158(5) के अनुसार “बीमा प्रमाणपत्र पेश करना” का क्या अर्थ है?
a. केवल मूल पालिसी प्रस्तुत करना
b. केवल बीमा कंपनी का पत्र प्रस्तुत करना
c. बीमा का सुसंगत प्रमाणपत्र या अन्य प्रमाण प्रस्तुत करना
d. केवल प्रीमियम रसीद प्रस्तुत करना
127. दुर्घटना के संबंध में दी जाने वाली सूचना किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 157
b. धारा 158
c. धारा 159
d. धारा 160
128. धारा 159 के अनुसार दुर्घटना सूचना रिपोर्ट कौन तैयार करेगा?
a. दावा अधिकरण
b. बीमा कंपनी
c. पुलिस अधिकारी
d. वाहन स्वामी
129. धारा 159 के अनुसार पुलिस अधिकारी दुर्घटना सूचना रिपोर्ट कब तैयार करेगा?
a. दुर्घटना होने से पूर्व
b. दावा दायर होने के बाद
c. अन्वेषण के दौरान
d. न्यायालय के आदेश पर
130. धारा 159 के अनुसार दुर्घटना सूचना रिपोर्ट किस उद्देश्य से तैयार की जाती है?
a. अपराधी को दंडित करने के लिए
b. वाहन का पंजीकरण रद्द करने के लिए
c. दावे के निपटान को सुकर बनाने के लिए
d. बीमा पालिसी समाप्त करने के लिए
131. धारा 159 के अनुसार दुर्घटना सूचना रिपोर्ट कितने समय के भीतर तैयार की जानी चाहिए?
a. 30 दिन
b. 60 दिन
c. 90 दिन
d. 3 माह
132. धारा 159 के अनुसार दुर्घटना सूचना रिपोर्ट किसे प्रस्तुत की जाती है?
a. राज्य सरकार को
b. बीमा कंपनी को
c. दावा अधिकरण को
d. परिवहन प्राधिकारी को
133. धारा 159 के अनुसार दुर्घटना सूचना रिपोर्ट किस प्ररूप में तैयार की जाएगी?
a. साधारण प्ररूप में
b. न्यायालय द्वारा निर्धारित प्ररूप में
c. विहित प्ररूप और रीति में
d. पुलिस अधिकारी की इच्छानुसार
134. धारा 159 के अनुसार दुर्घटना सूचना रिपोर्ट में क्या शामिल होता है?
a. केवल चालक का नाम
b. केवल वाहन का नंबर
c. दुर्घटना की विशिष्टियां
d. केवल बीमा विवरण
135. धारा 159 के अनुसार दुर्घटना सूचना रिपोर्ट दावा अधिकरण के अतिरिक्त किसे दी जा सकती है?
a. केवल राज्य सरकार को
b. केवल बीमा कंपनी को
c. अन्य विहित अभिकरण को
d. केवल परिवहन विभाग को
136. दुर्घटना में संलिप्त यान की विशिष्टियां प्रस्तुत करने का कर्तव्य किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 158
b. धारा 159
c. धारा 160
d. धारा 161
137. धारा 160 के अनुसार दुर्घटना में संलिप्त वाहन की जानकारी देने का कर्तव्य किसका है?
a. वाहन स्वामी का
b. बीमा कंपनी का
c. रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी या पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी का
d. दावा अधिकरण का
138. धारा 160 के अनुसार जानकारी किसे दी जा सकती है?
a. केवल वाहन स्वामी को
b. केवल चालक को
c. उस व्यक्ति को जो प्रतिकर का दावा करने का हकदार होने का दावा करता है, तथा बीमाकर्ता को
d. केवल न्यायालय को
139. धारा 160 के अनुसार दी जाने वाली जानकारी में क्या शामिल हो सकता है?
a. वाहन के पहचान चिह्न
b. वाहन की अन्य विशिष्टियां
c. चालक या संबंधित व्यक्ति का नाम और पता
d. उपर्युक्त सभी
140. धारा 160 के अनुसार यदि दुर्घटना में संपत्ति को नुकसान हुआ हो, तो क्या जानकारी दी जाएगी?
a. केवल वाहन स्वामी का नाम
b. केवल बीमा पालिसी का विवरण
c. संपत्ति के नुकसान की जानकारी
d. केवल चालक का लाइसेंस नंबर
141. धारा 160 के अनुसार दुर्घटना के समय वाहन का उपयोग करने वाले व्यक्ति की कौन-सी जानकारी दी जाएगी?
a. केवल उसका नाम
b. केवल उसका पता
c. उसका नाम और उसका पता
d. केवल उसका मोबाइल नंबर
142. हिट एंड रन मोटरयान दुर्घटना में प्रतिकर के विशेष उपबंध किस धारा से सम्बंधित हैं?
a. धारा 159
b. धारा 160
c. धारा 161
d. धारा 162
143. धारा 161(1) के अनुसार हिट एंड रन दुर्घटनाओं में प्रतिकर के लिए उपबंध कौन करेगा?
a. राज्य सरकार
b. दावा अधिकरण
c. केंद्रीय सरकार
d. साधारण बीमा परिषद्
144. धारा 161(2)(क) के अनुसार हिट एंड रन दुर्घटना में मृत्यु होने पर कितनी नियत प्रतिकर राशि दी जाएगी?
a. ₹50,000
b. ₹1,00,000
c. ₹2,00,000
d. ₹5,00,000
145. धारा 161(2)(ख) के अनुसार हिट एंड रन दुर्घटना में घोर उपहति (Grievous Hurt) होने पर कितनी नियत प्रतिकर राशि दी जाएगी?
a. ₹25,000
b. ₹50,000
c. ₹1,00,000
d. ₹2,00,000
146. धारा 161(3) के अनुसार हिट एंड रन दुर्घटनाओं के लिए स्कीम कौन अधिसूचित कर सकता है?
a. राज्य सरकार
b. दावा अधिकरण
c. केंद्रीय सरकार
d. उच्च न्यायालय
147. धारा 161(3) के अनुसार स्कीम का प्रशासन कौन कर सकता है?
a. केवल राज्य सरकार
b. केवल साधारण बीमा परिषद्
c. केंद्रीय सरकार या साधारण बीमा परिषद्
d. केवल दावा अधिकरण
148. धारा 161(3) के अनुसार स्कीम में क्या निर्धारित किया जा सकता है?
a. प्रतिकर के लिए आवेदन का प्ररूप
b. आवेदन की रीति और समय
c. आवेदन पर विचार करने की प्रक्रिया
d. उपर्युक्त सभी
149. धारा 161(4)(क) के अनुसार स्कीम के अंतर्गत क्या प्रदान किया जा सकता है?
a. स्थायी प्रतिकर
b. अंतरिम अनुतोष (Interim Relief)
c. दंडात्मक प्रतिकर
d. न्यायिक राहत
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