
परक्राम्य लिखित अधिनियम, 1881
The Negotiable Instruments Act, 1881
1. परक्राम्य लिखित अधिनियम कब से प्रवर्तन में है?
a. 1 मार्च, 1982 से
b. 20 मार्च, 1982 से
c. 31 मार्च, 1982 से
d. 14 मार्च, 1982 से
2. वचन पत्र के लिए निम्नलिखित तत्व आवश्यक है-
a. संदाय करने का वचन
b. धनराशि निश्चित होना
c. रचयिता के हस्ताक्षर
d. उपयुक्त सभी
3. बैंकर में क्या सम्मिलित है?
a. डाकघर बचत बैंक
b. बैंककार के तौर पर कार्य करने वाला व्यक्ति
c. (a) और (b) दोनों
d. उपर्युक्त में से कोई नहीं
4 विनिमय-पत्र में साधारणतया पक्षकार होते हैं-
a. पाने वाला
b. ऊपरवाल
c. लेखीवाल
d. उपर्युक्त सभी
5. ड्राफ्ट है-
a. हुण्डी
b. एक विनिमय पत्र
c. वचन पत्र
d. उपर्युक्त सभी
6. सही सुमेलित नहीं है-
a. विनिमय-पत्र -धारा 5
b. वचन-पत्र -धारा 4
c. लेखीवाल -धारा 9
d. चैक -धारा 6
7. जबकि विनिमय-पत्र में या उस पर के किसी पृष्ठांकन में ऊपरवाल के अतिरिक्त किसी व्यक्ति का नाम दिया हुआ है जिसके पास आवश्यकता पड़ने पर लेनगी के लिए माना जाता है तब ऐसा व्यक्ति कहलाता है-
a. ऊपरवाल
b. आदरणार्थ प्रतिग्रहोता
c. प्रतिग्रहीता
d. जिकरीवाल
8. चेक को किस धारा में परिभाषित किया गया है?
a. धारा 4
b. धारा 6
c. धारा 5
d. धारा 8
9. जिकरीवाल का प्रावधान है-
a. धारा 7 में
b. धारा 11 में
c. धारा 9 में
d. धारा 6 में
10. निम्नलिखित में से कौन-वचन पत्र है?
a. मैं वचन देता हूँ कि मैं आगामी जनवरी को 'ख' को 500 रुपये संदत्त करूंगा और अपना काला घोड़ा उसे परिदत्त करूंगा
b. मैं 'ख' आपका 1000 रुपये का देनदार हूँ
c. मैं 'ख' को या उसके आदेशानुसार 500 रुपये संदत्त करने का वचन देता हूँ
d. उपर्युक्त सभी
11. 'सम्यक् अनुक्रम धारक' को परिभाषित है-
a. धारा 9 में
b. धारा 7 में
c. धारा 12 में
d. धारा 11 में
12. संदिग्धार्थी लिखत कहा जाता है-
a. जब लिखत का अर्थ वचन-पत्र और चेक दोनों लगाया जा सकता हे
b. जब लिखत का अर्थ चेक और बैंक ड्राफ्ट दोनों लगाया जा सकता है
c. जब लिखत का अर्थ वचन पत्र या विनिमय पत्र दोनों लगाया जा सकता है
d. उपर्युक्त सभी
13. निरंक पृष्ठांकन (indoresment in blank) कहलाता -
a. जब पृष्ठांकक अपने नाम हस्तांतरित के साथ-साथ विनिर्दिष्ट व्यक्ति को जिसे रकम संदेय है जोड़ देता है
b. जब पृष्ठांकक केवल अपना नाम हस्ताक्षरित करता है
c. (a) एवं (b) दोनों
d. या तो (a) या तो (b)
14. खोये हुए विनिमय-पत्र की दूसरी प्रति पाने का अधिकार धारक को किस धारा में प्राप्त है?
a. धारा 46
b. धारा 45 क
c. धारा 48
d. धारा 45
15. परक्राम्य लिखत अभिप्रेत है-
a. आदेशानुसार देय वचन-पत्र
b. आदेशानुसार देय विनिमय-पत्र
c. आदेशानुसार देय चैक
d. उपर्युक्त सभी
16. प्रसाक्ष्य की अन्तर्वस्तु/अन्तर्वस्तुएं है/हैं?
a. प्रसाक्ष्य करने वाले नोटरी पब्लिक के हस्ताक्षर
b. उस व्यक्ति का नाम जिसके लिए और जिसके विरुद्ध लिखत प्रसाक्ष्यित की गयी है
c. या तो स्वयं लिखत या लिखत को और जिसके ऊपर लिखित या मुद्रित हर बात की अक्षरशः अनुलिपि
d. उपर्युक्त सभी
17. परक्राम्य लिखत परिभाषित है-
a. आदेश 14 में
b. आदेश 11 में
c. आदेश 15 में
d. आदेश 13 में
18. जब कोई वचन-पत्र, विनिमय पत्र या चैक किसी व्यक्ति को इस प्रकार अन्तरित कर दिया जाता है कि वह उसका धारक बन जाता है तब कहा जाता है-
a. अन्तरण
b. अभिहस्तान्तरण
c. परक्रामण
d. उपर्युक्त सभी
19. परक्राम्य लिखत अधिनियम के अन्तर्गत पृष्ठांकन का अर्थ है-
a. लिखत के पिछली तरफ लिखने से है
b. इस आशय से लिखने से है कि उस लिखत में निहित अधिकार अन्तरित कर दिया जाए
c. उपर्युक्त सभी
d. उपर्युक्त में से कोई नहीं
20. परक्राम्य लिखत का परक्रामण करने के लिए कौन सक्षम होते हैं-
a. पृष्ठांकिती
c. पाने वाला
b. लेखोवाल
d. रचयिता
e. उपर्युक्त सभी
21. किसी भी परक्राम्य लिखत का रचयिता प्रतिग्रहीता या पृष्ठांकक कब दायित्व से उन्मोचित हो जाता है-
a. जहाँ परिपक्वता पर धारक या उसके प्रतिनिधि को संदाय कर दिया जाता है
b. जहाँ धारक द्वारा रचयिता, प्रतिगृहोता या पृष्ठांकक को किसी भी रोति से निर्मुक्त कर दिया जाता है
c. जहाँ धारक या उसके अभिकर्ता द्वारा जानबूझकर लिखत पर से पक्षकार का नाम उसे उन्मोचित करने के आशय से रद्द कर देता है
d. उपर्युक्त सभी
22. विनिमय पत्र का अनादर किस प्रकार किया जा सकता है-
a. असेदाय द्वारा
b. अप्रतिग्रहण द्वारा
c. उपर्युक्त (a) एवं (b) दोनों द्वारा
d. उपर्युक्त में से कोई नहीं
23. जब लिखत का अप्रतिग्रहण के कारण या संदाय न करने के कारण अनादृत हो जाता है तब ऐसी लिखत के धारक लिखत के अनादृत होने की सूचना देगा-
a. चेक के ऊपरवाला को
b. विनिमय पत्र के प्रतिग्रहोता को
c. रचयिता को
d. सभी पक्षकारों को
24. अनादर की सूचना देने की रीति किस धारा में दी गयी है-
a. धारा 95 में
b. धारा 94 में
c. धारा 96 में
d. धारा 97 में
25. अनादर की सूचना दी जाती है-
a. धारा 94 में
b. धारा 93 में
c. धारा 95 में
d. धारा 96 में
26. अनादर की सूचना दी जायेगी-
a. केवल लिखित
b. केवल मौखिक
c. लिखित या मौखिक
d. उपर्युक्त सभी रीति से
27. जिस व्यक्ति को अनादर की सूचना दी जानी है, ऐसी सूचना दी जायेगी-
a. उसके प्राधिकृत अभिकर्ता को
b. उसकी मृत्यु की दशा में विधिक प्रतिनिधि को
c. दिवालिया हो जाने की स्थिति में उसके समनुदेशिती को
d. उपर्युक्त सभी
28. निम्न कथनों में असत्य कथन है-
a. अनादर को कोई सूचना तब आवश्यक नहीं है जबकि उसके हकदार पक्षकार को उसके दिये जाने से अभिमुक्ति दे दी गई है
b. जबकि वह पक्षकार जिसे सूचना दी गयी है मर जाता है किन्तु सूचना भेजने वाले पक्षकार को उसकी मृत्यु की जानकारी नहीं है तब वह सूचना पर्याप्त है
c. अनादर की सूचना लिखित या मौखिक दी जा सकती है
d. अनादर को सूचना डाक द्वारा ठीक पते पर भेजी जाती है और गलत जगह चली जाती है तो ऐसी गलत जगह चली जाने पर वह सूचना अविधिमान्य हो जाती है
29. अनादर की सूचना देना कब आवश्यक नहीं है-
a. जब सूचना पाने हकदार व्यक्ति ऐसी सूचना से अभिमुक्ति दे देता है
b. जब कोई वचन-पत्र परक्राम्य नहीं हो
c. जब भारित पक्षकार को ऐसी सूचना नहीं दिये जाने पर कोई नुकसान नहीं होता है
d. जब लेखीवाल को भारित करने के मामले में संदाय प्रत्यादिष्ट कर दिया जाता है
e. उपर्युक्त सभी
30. अधिनियम का कौन सा प्रावधान 'सम्यक् अनुक्रम में संदाय' के सम्बन्ध में विचार करता है-
a. धारा 9
b. धारा 10
c. धारा 11
d. धारा 12
31. निम्नलिखित में से कौन-सा परक्राम्य लिखत का ऐसा तात्विक परिवर्तन नहीं समझा जावेगा जो उसको शून्य बनाता हो अथवा लिखत को ही उन्योचित करता हो-
a. ब्याज दर में परिवर्तन
b. अन्क्रास्ड चेक को क्रास करना
c. वाहक चेक का आदेश चेक में संपरिवर्तन
d. एक लिपिकीय त्रुटि को सही करने के उद्देश्य से किया गया परिवर्तन
32. अधिनियम का कौन सा प्रावधान अभिकधित करता है कि विदेशी विनिमय पत्र अनादर के लिये प्रसाक्ष्यित होंगे यह ऐसा उस स्थान की विधि द्वारा अपेक्षित है जहाँ वे लिखे गये हैं-
a. धारा 102
b. धारा 101
c. धारा 104
d. धारा 105
33. अधिनियम की धारा 118 के अन्तर्गत उपधारणों में सम्मिलित नहीं है।
a. प्रतिग्रहण के समय के बारे में
b. चेक के धारक ने वह किसी ऋण अथवा अन्य दायित्व के उन्मोचन के लिये प्राप्त किया है
c. तारीख के बारे में
d. पृष्ठांकनों के क्रम के बारे में
34. अधिनियम के अन्तर्गत प्रसाक्ष्य (Protest) की अन्तर्वस्तुएं किस धारा में दी गयी है-
a. धारा 99
b. धारा 102 में
c. धारा 101
b. धारा 103 में
35. प्रसाक्ष्य को परिभाषित किया गया है-
a. धारा 100 में
b. धारा 103
c. धारा 104 में
d. धारा 111 में
36. नोटरी पब्लिक से वचन-पत्र या विनिमय-पत्र को प्रमाणित और टिप्पणित कब कराया जाता है-
a. जब वह अप्रतिग्रहण द्वारा अनादृत हो जाता है
b. जब वह असंदाय द्वारा अनादृत हो जाता है
c. उपर्युक्त दोनों स्थितियों में
d. उपर्युक्त में से कोई नहीं
37. अधिनियम की धारा 117 (ग) के अन्तर्गत चेक के अनादर होने पर लेखीवाल शोध्य रकम पर धारक को ब्याज देगा -
a. 6 प्रतिशत प्रतिवर्ष
b. 25 प्रतिशत प्रतिवर्ष
c. 18 प्रतिशत प्रतिवर्ष
d. 9 प्रतिशत प्रतिवर्ष
38. टिप्पण (Noting) आवश्यक नहीं है
a. वचन-पत्र के अनादृत होने पर
b. विनिमय-पत्र के अनादूत होने पर
c. चैकों के अनादृत होने पर
d. उपर्युक्त सभी
39. परक्राम्य लिखत के बारे में उपधारणाएं किस धारा में की जाती है-
a. धारा 115
b. धारा 116
c. धारा 118
d. धारा 120
40. टिप्पणी करता है-
a. बैंककार
b. धारक
c. नोटरी पब्लिक
d. उपर्युक्त सभी
41. बैंक खाते में धन की अपर्याप्तता इत्यादि के कारण बैंक का अनादर हो जाता है तो धारक व्यक्ति दण्डित किया जाता है-
a. धारा 136 के अन्तर्गत
b. धारा 138 के अन्तर्गत
c. धारा 137 के अन्तर्गत
d. धारा 139 के अन्तर्गत
42. चेक के अनादर होने पर चेक देने वाला दण्डित किया जा सकता है-
a. केवल चेक को धनराशि के दो गुने अर्थदण्ड से
b. केवल दो वर्ष तक के कारावास
c. उक्त अर्थदण्ड एवं कारावास दोनों से
d. उपर्युक्त सभी
43. चेक जारी किये जाने की तिथि से कितने समय के भीतर बैंक में प्रस्तुत कर दिया जाना चाहिए-
a. 6 माह के भीतर
b. 3 माह के भीतर
c. उपर्युक्त (a) एवं (b) दोनों
d. उपर्युक्त में से कोई नहीं
44. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 के प्रावधान लागू होंगे जब कि -
a. चेक जारी किये जाने की तिथि से 3 माह के भीतर बैंक को प्रस्तुत कर दिया गया हो
b. उक्त राशि का भुगतान नोटिस की प्राप्ति के 15 दिन के भीतर करने में असफल रहता है
c. चेक से भुगतान न होने एवं वापसी को सूचना प्राप्ति के 30 दिन के भीतर रकम की मांग किया गया हो
d. उपर्युक्त सभी
45. चेक के अनादर की सूचना प्राप्त होने के कितने दिन के भीतर राशि के संदाय की मांग करनी चाहिए-
a. 60 दिनों के भीतर
b. 30 दिनों के भीतर
c. 15 दिनों के भीतर
d. 90 दिनों के भीतर
46. धारा 118 परक्राम्य लिखत अधिनियम के अन्तर्गत किसकी उपधारणा नहीं की जाएगी?
a. प्रतिफल
b. चेक के धारक ने बैंक किसी ऋण अथवा अन्य दायित्वों के उन्मोचन के लिए प्राप्त किया
c. पृष्ठाकनों के क्रम के बारे में
d. प्रतिग्रहण के समय के बारे में
47. परकाम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अधीन अधिकतम जुर्माना किया जा सकता है-
a. चेक की राशि के दो गुने के बराबर
b. चेक की राशि के बराबर
c. एक लाख रुपये
d. दस हजार रुपये
48. परकाम्य लिखत अधिनियम के अन्तर्गत, एक चेक धारक, चेक की वैधता अवधि के दौरान चेक को कितने बार बैंक में पेश कर सकता है?
a. कितने भी बार
c. तीन बार
b. दो बार
d. केवल एक बार
49. निम्न में से किन परिस्थितियों में परक्राम्य लिखत अधिनियम, की धारा 138 के प्रावधान आकर्षित होंगे?
a. चेक बैंक द्वारा इस टीप के साथ बिना भुगतान लौटाया जाता है कि खाता बन्द हो गया है
b. चेक खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण अनादृत किया जाता है
c. चेक बैंक द्वारा लेखौवाल के भुगतान न करने के निर्देश के कारण बिना भुगतान लौटाया जाता है
d. उपरोक्त सभी परिस्थितियों में
50. परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 139 के अन्तर्गत क्या धारणा बनायी जा सकती है?
a. यह कि चेक किसी ऋण अथवा उत्तरदायित्व के उन्मोचन हेतु लिखा गया है
b. यह कि चेक खाता धारण करने वाले व्यक्ति द्वारा लिखा गया है
c. यह कि चेक यह सुनिश्चित करने के बाद लिखा गया है कि खाते में समुचित राशि उपलब्ध है
d. इनमें से कोई नहीं
51. परक्राम्य लिखत अधिनियम के अन्तर्गत चेक लिखने वाले पर माँग सूचना पत्र की उस पर तामीली के कितने दिवस बाद, चेक लिखने वाले पर वाद कारण उत्पत्र होता है?
a. 60 दिवस
b. 45 दिवस
c. 15 दिवस
d. 30 दिवस
52. परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अन्तर्गत परिवाद प्रस्तुत करने की आवश्यकता शर्त है—
a. चेक की समय अवधि समाप्त होने पर प्रस्तुत किया गया
b. चेक खाते में समुचित राशि उपलब्ध न होने से वापस किया गया
c. चेक हस्ताक्षर का मिलान न होने से वापस किया गया
d. यह सभी
53. आदाता द्वारा मांग किये जाने के कितने दिन के भीतर तथा कथित राशि का संदाय कर दिया जाना चाहिए-
a. 30 दिनों के भीतर
b. 15 दिनों के भीतर
c. 60 दिनों के भीतर
d. 45 दिनों के भोलेर
54. अपराध का संज्ञान कोई न्यायालय तभी करेगा
a. ऐसा परिवाद बाद कारण के उत्पन्न होने की तिथि के एक माह के भीतर किया हो
b. जब आदाता या सम्यक् अनुक्रम धारक लिखित परिवाद किया हो
c. उपर्युक्त (a) एवं (b) दोनों
d. उपर्युक्त में से कोई नहीं
55. परक्राम्य लिखत अधिनियम के अन्तर्गत अपराध का संज्ञान कौन लेगा-
a. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
b. द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट
c. प्रथम वर्ग मनिस्ट्रेट
d. कोई भी न्यायालय
56. धारा 138 में दण्डनीय अपराध का विचारण की प्रक्रिया अपनायी जायेगी -
a. वारण्ट मामले के
b. समन मामले के
c. संक्षिप्त विचारण (द० प्र० सं० को धारा 262 से 265)
d. उपर्युक्त में से कोई नहीं
57. अपराध का विचारण कौन कर सकता है-
a. प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट
b. द्वितीय श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट
c. महानगर मजिस्ट्रेट
d. (a) एवं (c)
58. 'क' 'ख' को चेक देता है और चेक अनादृत हो जाती है। 'क' अनादृत होने की सूचना प्राप्त करने की तिथि से 15 दिन के भीतर चेक में उल्लिखित धनराशि का संदाय नहीं करता है, 'ख' 'क' के विरुद्ध परिवाद कितनी अवधि के भीतर दाखिल कर सकता है?
a. 2 मास के भीतर
b. 1 मास के भीतर
c. 3 मास के भीतर
d. 4 मास के भीतर
59. चेक अनादृत होने पर चेक का धारक निम्न में से कहां परिवाद दाखिल करेगा?
a. उस न्यायालय को स्थानीय अधिकारिता में जहां चेक काटने वाले लेखीवाल का बैंक खाता स्थित है
b. उस न्यायालय को स्थानीय अधिकारिता में जहां परिवादी का खाता स्थित है
c. उपर्युक्त (a) या (b)
d. उपर्युक्त (a) एवं (b) दोनों
60. परक्राम्य लिखत (संशोधन) अधिनियम, 2018 द्वारा निम्न में से कौन सी धारा जोड़ी (inserted) गयी है/हैं?
a. केवल धारा 143क
b. केवल धारा 148
c. धारा (a) एवं (b) दोनों
d. धारा 75क एवं 85क
61. परक्राम्य लिखत अधिनियम की किस धारा के अन्तर्गत न्यायालय परिवादी को अंतरिम संदाय का आदेश लेखीवाल को देता है?
a. धारा 144
b. धारा 147
c. धारा 148
d. धारा 143क
62. अन्तरिम प्रतिकर की रकम होगी-
a. चेक को रकम का 20 प्रतिशत
b. चेक की रकम का ती 30 प्रतिशत
c. चेक की रकम का 50 प्रतिशत
d. चेक की रकम का 60 प्रतिशत
63. धारा 143क के अन्तर्गत अंतरिम प्रतिकर किसके द्वारा संदेय होता है?
a. चेक के धारक द्वारा
b. चेक के लेखोवाल द्वारा
c. या तो (a) या तो (b) द्वारा
d. परिवादी द्वारा
64. अधिनियम के अधीन अंतरिम प्रतिकर का संदाय करने के लिए कितनी अवधि विहित है?
a. 90 दिन
b. 60 दिन
c. 30 दिन
d. 15 दिन
65. सत्य विकल्प का चयन कीजिए:
अधिनियम के अन्तर्गत न्यायालय अंतरिम प्रतिकर के संदाय करने का आदेश कब देता है?
a. जब लेखीवाल समन मामले में परिवाद के अभिकथनों का दोषी न होने का अभिवाक् करता है
b. संक्षिप्त विचारण या समन मामले के सिवाय किसी अन्य मामले में आरोप विरचित किये जाने पर
c. जब लेखीवाल संक्षिप्त विचारण में परिवाद में किये गये अभिकथन को अभिवाक् नहीं करता है
d. उपर्युक्त सभी
66 चेक का लेखीवाल विहित समय के भीतर अंतरिम प्रतिकर का संदाय नहीं करता है वहाँ वसूली की जायेगी-
a. भू-राजस्व के बकाये की तरह
b. दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 421 के अधीन जुर्माने की तरह
c. (a) या (b) या दोनों रीति से
d. उपर्युक्त में से कोई नहीं
67. परक्राम्य लिखत (संशोधन) अधिनियम, 2015 के लागू होने से पूर्व चेक अनादर के सभी लम्बित मामले धारा 142(b) के अधीन अधिकारिता रखने वाले न्यायालय को अन्तरित कर दिया जायेगा और वही न्यायालय मामले का विचारण करेगा, किस धारा में कहां है?
a. 142क
b. धारा 141
c. धारा 139
d. धारा 140
68. धारा 143 के अन्तर्गत संक्षिप्त विचारण में अभियुक्त को दण्डित किया जा सकता है-
a. पांच सौ रुपये से अधिक जुर्माना
b. एक वर्ष से अनधिक अवधि का कारावास
c. उपर्युक्त (a) एवं (b) दोनों
d. केवल (a)
69. धारा 143 के अन्तर्गत विचारण कितने समय के भीतर समाप्त किया जाना चाहिए-
a. 4 माह
b. 3 माह
c. 6 माह
d. 7 माह
70. परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अन्तर्गत अभियोजन में प्रतिरक्षा नहीं ले सकता है:
a. परिवादी
b. लेखीवाल
c. बैंककार
d. कम्पनी
71. लेखीवाल धारा 138 के अन्तर्गत अभियोजन में प्रतिरक्षा किस धारा के अन्तर्गत ले सकता है
a. धारा 141
b. धारा 143
c. धारा 145
d. धारा 140
72. कम्पनी को चेक के अनादर के लिए अपराधी किस धारा के अधीन माना जा सकता है:
a. धारा 142
b. धारा 140
c. धारा 148
d. धारा 141
73. कम्पनी अपने अपराध के लिए दायी नहीं होगी जब वह साबित कर देती है कि
a. अपराध के निवारण के लिए सब तत्परता बरती थी
b. अपराध के बारे में उसको जानकारी नहीं थी
c. (a) या (b)
d. न तो (a) नही (b)
74. यदि धारा 138 के अन्तर्गत के कम्पनी द्वारा अपराध किया गया है और ऐसा अपराध निदेशक की सहमति से हुआ है वहां कौन दायी होगा:
a. केवल कम्पनी
b. केवल निदेशक
c. या तो (a) या (b)
d. कम्पनी और निदेशक
75. परकाम्य लिखत अधिनियम के अधीन अपराधों के विचारण के लिए प्रक्रिया किस धारा में दी गयी है-
a. धारा 143
b. धारा 142
c. धारा 144
d. धारा 145
76. अधिनियम में किस धारा के अन्तर्गत परिवादी का अंतरिम प्रतिकर देने का आदेश न्यायालय दे सकता है:
a. धारा 145 क
b. धारा 143 क
c. धारा 146 क
d. धारा 148
77. अंतरिम प्रतिकर परिवादी को कौन देता है:
a. अपीलार्थों
b. चेक का लेखीवाल
c. न्यायालय
d. या तो (b) या (c)
78. अभियुक्त या साक्षी द्वारा समन लेने से इन्कार करने पर न्यायालय घोषित करेगा कि समन की सम्यक् रूप से तामील हो गयी है, यह उपबन्ध किस धारा में है।
a. धारा 144(1)
b. धारा 144(2)
c. धारा 145(3)
d. धारा 146(4)
79. अन्तरिम प्रतिकर का प्रावधान है :
a. निदेशात्मक
b. आबद्धकर
c. आदेशात्मक
d. उपर्युक्त में से कोई नहीं
80. अंतरिम प्रतिकर का ब्याज सहित प्रतिसंदाय परिवादी को कब करना होता है:
a. लेखीवाल के मर जाने पर
b. अभियुक्त के दोषसिद्ध होने पर
c. अभियुक्त (लेखीवाल) के दोषमुक्त हो जाने पर
d. उपरोक्त में से कोई नही
81. बैंक की पर्ची या ज्ञापन चेक के अनादरण के लिए प्रथमदृष्ट्या साक्ष्य है किस धारा में कहा है।
a. धारा 147
b. धारा 146
c. धारा 149
d. धारा 148
82. चेक के अनादर होने के तथ्य की उपधारणा की जायेगी जब न्यायालय में प्रस्तुत की जाती है:
a. बैंक से प्राप्त सूचना
b. बैंक की अनादरण रिपोर्ट
c. बैंक की पर्ची या ज्ञापन जिस पर शासकीय चिन्ह लगा हो कि चेक का अनादर हो गया है
d. उपर्युक्त में से कोई नहीं
83. परिवादी अपना साक्ष्य शपथ पत्र पर दे सकेगा किस धारा में प्रावधान है :
a. धारा 147
b. धारा 145
c. धारा 140
d. धारा 139
84. परक्राम्य लिखत अधिनियम के अधीन दण्डनीय अपराध होता है-
a. संज्ञेय
b. शमनीय
c. असंज्ञेय
d. उपर्युक्त (a)एवं (b) दोनों
85 सही सुमेलित नहीं है-
a. अपराध का संज्ञान -धारा 141
b. चेक अनादर के लिए दण्ड -धारा 138
c. अपराध का शमनीय होना -धारा 147
d. मामले का संक्षिप्त विचारण -धारा 143
86. खाते में धन की अपर्याप्तता के कारण कतिपय चेको के अनादृत होने की दशा में शास्ति के सम्बन्ध में प्रावधान किस अध्याय में किया गया है-
a. अध्याय 14
b. अध्याय 17
c. अध्याय 18
d. अध्याय 16
87. अधिनियम किस धारा के अन्तर्गत न्यायालय चेक का लेखीवाल द्वारा दोषसिद्धि के विरुद्ध की गयी अपील में धनराशि जमा करने का आदेश देता है?
a. धारा 148
b. धारा 145
c. धारा 147
d. धारा 143
88. परिवादी अपना साक्ष्य देगा-
a. शपथ-पत्र पर
b. शपथ पर
c. बिना शपथ के
d. उपर्युक्त सभी
89. जब कोई कम्पनी द्वारा चेक जारी किया गया है और वह अनादृत हो जाती है तो परिवाद दाखिल किया जायेगा-
a. जिस व्यक्ति ने जारी किया है उसके विरुद्
b. स्वामी के विरुद्ध
c. प्रमोटर के विरुद्ध
d. निदेशक के विरुद्ध
90. निम्न कथनों में सत्य कथन है-
a. कोष की अपर्याप्तता के कारण उत्तर दिनांकित बैंक का अनादर इस धारा के अन्तर्गत अपराध गठित करता है
b. कोष के अभाव के कारण बैंक का अनादर और नोटिस के बावजूद धनराशि का भुगतान करने की असफलता परिवाद के लिए वादहेतुक उत्पन्न करता है
c. चैक में पायी गयी स्याही और लेखीवाल के हस्ताक्षर में प्रयुक्त स्याही में अन्तर चेक जारी करने को सन्देहास्पद बना देता है
d. उपर्युक्त सभी
91. इस अधिनियम के अधीन अपराध को किस धारा के अन्तर्गत शमनीय बनाया गया है?
a. धारा 148
b. धारा 147
c. धारा 142
d. धारा 143
92. परक्राम्य अधिनियम के अधीन अपराध का शमन हो सकता है-
a. केवल विचारण के दौरान
b. केवल अपील के दौरान
c. (a) एवं (b) दोनों
d. न तो (a) न तो (b)
93. इस अधिनियम के अधीन अपराध का संज्ञान प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट ले सकता है-
a. धारा 142 के अन्तर्गत
b. धारा 142 के अन्तर्गत
c. धारा 145 के अन्तर्गत
c. धारा 144 के अन्तर्गत
94. प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट इस माफी नियम के अधीन अपराध का संज्ञान तभी लेगा जब परिवाद-
a. वाद हतुक उत्पन्न होने के धारा 142 के अन्तर्गत छः माह के भीतर किया गया है
b. वाद हेतुक उत्पन्न होने के एक माह के भीतर किया गया है
c. वाद हेतुक उत्पन्न होने के धारा 142 के अन्तर्गत 3 माह के भीतर किया गया है
d. वाद हेतुक उत्पन्न होने के धारा 142 के अन्तर्गत दो माह के भीतर किया गया है
95. धारा 148 के अन्तर्गत अपीलार्थी को कितनी राशि जमा करने का आदेश न्यायालय देता है?
a. जो न्यायालय आदेशित करे
b. चेक की धनराशि का बीस प्रतिशत
c. विचारण न्यायालय द्वारा अधिनिर्णीत जुर्माने या प्रतिकर का बीस प्रतिशत
d. उपर्युक्त में से कोई नहीं
96. धारा 148 के अधीन आदेशित रकम आदेश की तारीख से कितने दिन के भीतर अपीलार्थी द्वारा जमा करना आवश्यक है-
a. 90 दिन
b. 45 दिन
c. 30 दिन
d. 60 दिन
97. धारा 148 के अधीन अपीलार्थी द्वारा न्यायालय में जब्त की गयी राशि किसे देने का निदेश देगा?
a. बैंकर को
b. लेखीवाल को
c. परिवादी को
d. उपर्युक्त किसी को नहीं
98. यदि अपीलार्थी दोषमुक्त हो जाता है तो परिवादी रकम का प्रतिसंदाय ब्याज सहित अपीलार्थी को आदेश की तारीख से कितने दिन के भीतर करेगा?
a. 90 दिन
b. 45 दिन
c. 60 दिन
d. 30 दिन
99. धारा 148 के अधीन राशि जमा करने का आदेश अपील न्यायालय देता है一
a. अपील दाखिल करने के समय
b. अपील दाखिल करने से पूर्व
c. अपील के लम्बित रहने के दौरान
d. उपर्युक्त में से कोई नहीं
100. धारा 148 के अधीन अपील न्यायालय द्वारा आदेशित राशि होगा-
a. धारा 143क के अधीन अंतरिम प्रतिकर के बदले में
b. धारा 143क के अधीन अंतरिम प्रतिकर के अतिरिक्त
c. न तो (a) न ही (b)
d. या तो (a) या तो (b)
101. कौन सा लेखबद्ध लिखत, जिस पर उसके रचयिता द्वारा हस्ताक्षर किए गए हों, एक वचनपत्र होता है?
a. श्री 'ख' मैं आपका एक हजार रुपयों का ऋणी हू
b. श्री 'ख', में अपने विवाह के उपरान्त आपको दस हजार रुपये का भुगतान करूँगा
c. श्री 'ख', मैं माँग पर आपको धन का भुगतान करूंगा
d. श्री 'ख', मैं माँग पर आपको एक हजार रुपए का भुगतान करूंगा
102. एक अपरक्राम्य वचनपत्र के मामले में-
a. अनादर की सूचना आवश्यक नहीं होती
b. इस विषय पर परक्राम्य लिखत अधिनियम मौन है
c. पृष्ठांकन आवश्यक नहीं है
d. अनादर की सूचना देना अनिवार्य होता है
103. ‘क’ निम्नलिखित शतों पर कुछ लिखतों पर हस्ताक्षर करता है। इनमें से कौन सा लिखत परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 4 के अन्तर्गत एक वचनपत्र है?
a. मैं 'ख' को 5,000 रुपए तथा ऐसी समस्त धनराशि भुगतान करने का वचन देता हूँ जो उन्हें बकाया होगी
b. मैं 'ख' को 5,000 रुपए में से उनसे अपनी बकाया राशि को काट कर भुगतान करने का वचन देता हूँ
c. मैं 'ग' के साथ कि करने के दस दिनों के बाद 'ख' को 5,000 रुपए भुगतान करने का वचन देता हूँ
d. मैं 'ख' को अथवा उसके आदेशानुसार माँग पर 500 रुपए भुगतान करने का बचन देता हूँ
104. निम्नलिखित में से क्या एक विनिमय-पत्र नहीं है?
a. अंश (शेयर)
b. माँग-पत्र (डिमाण्ड ड्राफ्ट)
c. उत्तर-दिनांकित चैक (पोस्ट डेटेड चैक)
d. इनमें से कोई नहीं
105. "इलेक्ट्रॉनिक रूप में चैक" शब्द को परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की किस धारा के अंतर्गत परिभाषित किया गया है-
a. धारा 6 (क)
b. धारा 6 (ख)
c. धारा 6 के स्पष्टीकरण 1 (क)
d. इनमें से कोई नहीं
106. परक्राम्य लिखत अधिनियम के अंतर्गत "विनिमय-पत्र" को किस धारा में परिभाषित किया गया है-
a. धारा 5
b. धारा 11
c. धारा 6
d. धारा 7
107. "मैं ख को 500 रुपए तथा अन्य समस्त राशियाँ, जो उन्हें बकाया होंगी, के भुगतान करने का वचन देता हूँ। "यह कैसा लिखत है-
a. वचनपत्र
b. विनिमय-पत्र
c. धारा 17 के अधीन संदिग्धार्थी लिखत
d. इनमें से कोई नहीं
108. परक्राम्य लिखत अधिनियम के अंतर्गत वचनपत्र किस न्यूनतम अवधि के लिए जारी किए जा सकते हैं-
a. 30 दिन
b. 6 माह
c. 1 वर्ष
d. कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं है
109. 'सम्यक अनुक्रम में संदाय' का प्रावधान अधिनियम को किस धारा में किया गया है?
a. धारा 12
b. धारा 10
c. धारा 11
d. धारा 13
110. एक 'बैंक मांग पत्र (बैंक ड्राफ्ट) के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन सी बात सही है?
a. यह एक विनिमय-पत्र होता है
b. यह एक परक्राम्य लिखत नहीं होता
c. यह एक वचन-पत्र होता है
d. यह बहुत कुछ एक बैंक की भाँति होता है
111. परकाम्य लिखत अधिनियम, 1881 के अन्तर्गत ऐसी लेखबद्ध लिखत जिसमें एक निश्चित व्यक्ति को या उसके आदेशानुसार या उस लिखत के वाहक को धन की एक निश्चित राशि संदत्त करने का उसके रचयिता द्वारा हस्ताक्षरित अशर्त वचन, अन्तर्विष्ट हो, होता है-
a. करेंसी नोट (मुद्रा)
b. विनिमय -पत्
c. ट्रॅकेटेड (डिजिटल) बैंक
d. वचन-पत्र
112. परकाम्य लिखत अधिनियम की किस धारा के अन्तर्गत 'सम्यक अनुक्रम धारक' को परिभाषित किया गया है?
a. धारा 12
b. धारा 11
c. धारा 9
d. धारा 8
113. परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 11 के अन्तर्गत भारत में लिखित या रचित और भारत में देय किया गया या भारत में निवासी किसी व्यक्ति पर लिखत वचन-पत्र, विनिमय-पत्र या चेक समझा जायेगा-
a. अन्तर्देशीय लिखत
b. पृष्ठांकन
c. परक्राम्य लिखत
d. विदेशी लिखत
114. 'परक्राम्य लिखत' शब्द को परक्राम्य लिखत अधिनियम की किस धारा के अन्तर्गत परिभाषित किया गया-
a. धारा 2(घ)
b. धारा 11
c. धारा 13
d. धारा 14
115. 'सभी चैक विनिमय-पत्र होते हैं किन्तु सभी विनिमय-पत्र बैंक नहीं होते' यह कथन-
a. सत्य है
b. आंशिक सतय एवं आंशिक असत्य है.
c. असत्य है
d. उपरोक्त में कोई नहीं
116. यदि पृष्ठांकन अपने नाम का हस्ताक्षर करता है लिखत में उल्लिखित धनराशि को किसी विशिष्ट को भुगतान किये जाने का निर्देश जोड़ता है, तो पृष्ठांकन क्या कहलाता है-
a. आंशिक पृष्ठांकन
b. निरंक (शून्य) पृष्ठांकन
c. पूर्ण पृष्ठांकन
d. विशिष्ट पृष्ठांकन
117. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 15 के अनुसार निम्नलिखित में से क्या एक "परक्राम्य लिखत" नहीं है?
a. ऋण-पत्र (लिखत)
b. वचन-पत्र
c. विनिमय-पत्र
d. चैक
118. परक्राम्य लिखत अधिनियम तीन लिखतों, जैसे चैक, विनिमय-पत्र तथा एक अन्य का विशिष्ट उल्लेख करता है। यह तीसरा लिखत कौन सा है-
a. बैंक माँग-पत्र (ड्राफ्ट)
b. वचन-पत्र
c. हुंडी
d. उपरोक्त सभी
119. निम्नलिखित में से क्या एक परक्राम्य लिखत नहीं है-
a. वचन-पत्र
b. हुंडीया
c. चैक
d. इनमे से कोई नहीं
120. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 के अन्तर्गत एक चैक का धारक चैक की वैधता की अवधि के अन्दर इस बैंक के समक्ष कितनी बार प्रस्तुत कर सकता है?
a. केवल एक बार
b. संख्या निर्धारित नहीं है
c. तीन बार
d. दो बार
121. एक व्यक्ति, जो किसी मूल्यवान प्रतिफल के लिए सद्भाव में एक परक्राम्य लिखत प्राप्त करता है, किस नाम से जाना जाता है-
a. अधिकारों का धारक
b. धारक
c. सम्यक अनुक्रम धारक
d. राशि/मूल्य का धारक
122. निम्नलिखित में से क्या एक परक्राम्य लिखत नहीं है?
a. बाँड
b. वचन-पत्र
c. विनिमय-पत्र
d. चैक
123. 'अधूरी लिखत' के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से क्या सही है?
a. यह एक अपूर्ण अथवा निरंक परक्राम्य लिखत होता है
b. यह एक परक्राम्य लिखत नहीं होता
c. यह एक प्रलेखी हुंडी होती है
d. यह एक संदिग्धार्थी लिखत होता है
124. यदि भुगतान की जाने वाली एक बैंक की धनराशि को अंकों तथा शब्दों में अलग-अलग लिखा गया हो तो -
a. ऐसा चैक शून्य होगा
b. ऐसा माना जायेगा कि इसमें परिवर्तन किया गया था
c. शब्दों में लिखी धनराशि को माना जायेगा और भुगतान का आदेश दिया जायेगा
d. इनमें से कोई नहीं
125. परक्राम्य लिखत अधिनियम की किस धारा के अन्तर्गत "लोक अवकाश को स्पष्ट किया गया है?
a. धारा 23
b. धारा 24
c. धारा 22
d. धारा 25
126 परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 26 के प्रावधानों के अनुसार-
a. एक अप्राप्तवय स्वयं सहित सभी पक्षों को बाध्य करने के लिए एक लिखत का लेखन कर सकता है
b. एक अप्राप्तवय किसी भी पक्ष को बाध्य करने के लिए लिखत का लेखन नहीं करेगा
c. एक अप्राप्तवय लिखतों को पृष्ठांकित नहीं करेगा
d. एक अप्राप्तवय स्वयं को छोड़कर सभी पक्षों को बाध्य करने के लिए एक लिखत का लेखन कर सकता है
127. क्या अप्राप्तवय किसी लिखत का लेखन, पृष्ठांकित, सुपुर्द तथा परक्राम्य कर सकता है?
a. केवल तब जब वह इसके परिणामों को समझ सकता हो
b. हाँ, वह स्वयं को छोड़कर सही पक्षों को बाध्य करने के लिए ऐसा कर सकता है.
c. केवल तब जब यह दोनों पक्षों की साझा सहमति से रचित किया गया हो
d. केवल तब जय यह उसके लिए लाभदायक हो
128. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 29 के अन्तर्गत 'विधिक प्रतिनिधि' शब्द -
a. निष्पादकों अथवा प्रशासक को सम्मिलित नहीं करता
b. केवल प्रशासक को सम्मिलित करता है किन्तु निष्पादकों को सम्मिलित नहीं करता
c. निष्पादकों को सम्मिलित करता है किन्तु प्रशासक को सम्मिलित नहीं करता
d. निष्पादकों अथवा प्रशासक को सम्मिलित करता
129 अधिनियम का कौन सा प्रावधान निर्धारित करता है कि अनादर के लिए विदेशी विनिमय-पत्रों को अवश्य ही प्रसाक्ष्यित किया जाना चाहिए, यदि ऐसा प्रसाक्ष्य उसके आहरण के स्थान की विधि द्वारा अपेक्षित हो?
a. धारा 100
b. धारा 102
c. धारा 104
d. धारा 103
130. परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 100 किससे सम्बन्धित है-
a. प्रभार
b. टिप्पण
c. सूचना
d. प्रसाक्ष्य
131. परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 97 के अन्तर्गत उस पक्ष, जिसे अनादरण की सूचना प्रेषित की गयी हो, की मृत्यु हो चुकी हो, किन्तु सूचना प्रेषित करने वाले पक्ष को उसकी मृत्यु का ज्ञान न हो, तब-
a. सूचना पर्याप्त होती है
b. सूचना विधिक प्रतिनिधि को दी जायेगी
c. सूचना अपर्याप्त होती है
d. इनमें से कोई नहीं
132. धारा 118 के अन्तर्गत उल्लिखित उपधारणाएँ निम्नलिखित में से किसको सम्मिलित नहीं करती-
a. यह उपधारणा कि चैक के धारक ने किसो ऋण अथवा अन्य दायित्व के उन्मोचन के लिए चैक प्राप्त किया है
b. स्वीकृति के समय से सम्बन्धित उपधारणा
c. तिथि के सम्बन्ध में उपधारणा
d. पृष्ठांकन के आदेश के सम्बन्ध में उपधारणा
133. परक्राम्य लिखत अधिनियम की निम्नलिखित धाराओं में से कौन उपधारणा से सम्बन्धित है?
a. धारा 119
b. धारा 137
c. धारा 139
d. उपरोक्त सभी
134. एक परक्राम्य लिखत के प्रयोजन के लिए युक्तियुक्त समय का निर्धारण किये जाने में-
a. केवल बैंकों द्वारा स्वीकृत अवकाश शामिल किये जाते हैं
b. लोक अवकाश शामिल किये जाते हैं
c. लोक अवकाश निकाल दिया जाता है
d. उपरोक्त में कोई नहीं
135. परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 118 के अनुसार एक परक्राम्य लिखत की तिथि के सम्बन्ध में उपधारणा यह है कि ऐसी हर परक्राम्य लिखत जिस पर तारीख पड़ी है, रचित या लिखी गई थी-
a. हो सकता है कि उस तिथि से पूर्व किया गया हो
b. उस तिथि से पूर्व
c. उसी तिथि पर
d. उपरोक्त में कोई नहीं
136. जब तक विपरीत प्रावधान न किये गये हों, परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 निम्नलिखित में से किस उपधारणा को साक्ष्य के विशेष नियम बनाये जाने सम्बन्धी प्रावधान करता है-
a. यह कि एक खो चुका वचन-पत्र, विनिमय-पत्र अथवा चैक सम्यक् रूप से मोहर-युक्त था
b. यह कि परक्राम्य लिखत का प्रत्येक हस्तांतरण इसकी परिपक्वता की तिथि के पूर्व कर दिया गया था
c. यह कि एक तिथि से युक्त प्रत्येक परकाम्य लिखत को उसी तिथि पर रचित अथवा आहरित नहीं किया गया था
d. उपरोक्त सभी
137. परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 एवं 148 की उपधारणाओं के खण्डन के लिए अभियुक्त को-
a. सम्भाव्यता के पूर्णत्व के सिद्धान्त पर उपधारणा का खण्डन कर सकता है
b. प्रत्यक्ष साक्ष्य द्वारा प्रतिफल की अनुपस्थिति को अवश्य प्रमाणित करना चाहिए
c. प्रतिरक्षा में कुछ साक्ष्य अवश्य देने चाहिए
d. प्रतिफल की अनुपस्थिति को समुचित संदेह से परे अवश्य प्रमाणित करना चाहिए
138 विशेषतौर पर रेखांकित (क्रॉस) किये गये चेक के भुगतान का क्या अर्थ होता है?
a. खिड़की पर चैक की राशि का भुगतान
b. वह बैंकर, जिस पर इसे लिखा गया है, एक बैंक के अलावा अन्य किसी को इसका भुगतान नहीं करेंगा
c. आदाता के अभिकर्ता को चैक को राशि का भुगतान किया जाये
d. वह बैंककार, जिस पर वह लिखा गया है, उसका संदाय बैंककार को जिसके पक्ष में वह क्रास किया हुआ है या संग्रह करने के लिए उसके अभिकर्ता को करने अन्यथा न करेगा
139. निम्नलिखित उपधारणाओं में से कौन सी उपधारणा का प्रावधान परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 118 में किया गया है?
a. स्वीकृति के समय को लेकर
b. प्रतिफल को लेकर
c. तिथि को लेकर
d. उपरोक्त सभी
140. अध्याय-17 की धारा 138 से 142 को किस अधिनियम द्वारा परक्राम्य लिखत अधिनियम में शामिल किया गया था-
a. 1988 का अधिनियम संख्या 66
b. 1988 का अधिनियम संख्या 65
c. 1988 का अधिनियम संख्या 67
d. 1988 का अधिनियम संख्या 68
141. 'परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 को धारा.....के अन्तर्गत दाण्डिक दायित्व के निर्धारण के समय आपराधिक मनःस्थिति के लिए कोई स्थान नहीं होता'। यह कथन-
a. गलत है
b. सही
c. आंशिकतौर पर सही है
d. मामले के तथ्यों पर निर्भर करता है
142 परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अन्तर्गत एक न्यायिक मजिस्ट्रेट, वित्तीय मामले, (जे० एम० एफ० सी०) के द्वारा दिये जा सकने वाले अधिकतम अर्थदण्ड की राशि क्या होती है-
a. एक लाख
b. चैक की राशि की दोगुनी राशि
c. बीस हजार
d. दस हजार
143. परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 सम्बन्धित है-
a. सम्यक अनुक्रम में धारक के अधिकारों से
b. धारक के अधिकारों से
c. चैक के अनादर हेतु शास्ति से
d. उपरोक्त में कोई नहीं
144. परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के प्रावधानों को आकर्षित करने के प्रयोजन हेतु एक चैक को किस अवधि के अन्दर बैंक के समक्ष प्रस्तुत किया गया होना चाहिए-
a. बैंक के लेखन की तिथि से 15 दिनों के अन्दर
b. लेखन की तिथि में तीन माह अथवा इसकी वैधता की अवधि, दोनों में जो पहले हो
c. छह माह
d. उपरोक्त में कोई नहीं
145. न्यायालय परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अन्तर्गत दण्डनीय किसी भी अपराध का संज्ञान ग्रहण कर सकता है-
a. स्वप्रेरणा से
b. पुलिस रिपोर्ट पर
c. चेक को पाने के द्वारा लिखित में एक परिवाद प्रस्तुत किये जाने पर
d. उपरोक्त में कोई नहीं
146. निम्नलिखित में से किस परिस्थिति के अन्तर्गत परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 आकर्षित होगी?
a. बैंक द्वारा बिना भुगतान के इस आधार पर चैक वापस किया जाना कि लेखीवाल द्वारा भुगतान पर रोक लगा दी गयी है
b. अपर्याप्त निधियों के कारण चैक का अनादरण होना
c. बैंक द्वारा बिना भुगतान के इस आधार पर चैक वापस किया जाना कि खाता बन्द हो चुका है
d. उपरोक्त सभी परिस्थितियों में
147. लेखीवाल के खातों में निधियों की अपर्याप्तता के कारण चैकों के अनादरण के अपराध किस दण्ड से दण्डनीय है-
a. ऐसो अवधि के लिए कारावास, जो छह माह तक हो सकती है, अथवा अर्थदण्ड, जो पाँच सौ रुपये हो सकता है, अथवा दोनों से
b. ऐसो अवधि के लिए कारावास, जो एक वर्ष तक हो सकती है, अथवा अर्थदण्ड, जो चैक की राशि के बराबर हो सकता है, अथवा दोनों से
c. ऐसी अवधि के लिए कारावास, जो दो वर्ष तक हो सकती है, अथवा अर्थदण्ड, जो चैंक की राशि की दोगुनी राशि हो सकती है, अथवा दोनों से
d. ऐसी अवधि के लिए कारावास, जो पाँच वर्ष तक हो सकती है अथवा अर्थदण्ड, जो पाँच हजार रुपये हो सकता है, अथवा दोनों से
148. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 139 के अंतर्गत प्रावधान की गई उपधारणा किससे सम्बन्धित
a. यह कि चेक अभियुक्त द्वारा हस्ताक्षरित की गई
b. यह कि चेक किसी ऋण के उन्मोचन में जारी की गई थी
c. यह कि चेक बैंकर द्वारा अनादरित हो गई थी
d. यह कि चेक बैंकिग किस्तों के अन्तर्गत वैध है
149. " परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अन्तर्गत अपराध का संज्ञान ग्रहण किये जाने हेतु परिवाद करने का अधिकार किसे प्राप्त है?
a. केवल बैंक के धारक को
b. लोकहित भावना रखने वाले किसी भी नागरिक को
c. आदाता बैंक
d. उपरोक्त सभी
150. परक्राम्य लिखत अधिनियम के अंतर्गत माँग की सूचना तामील होने तथा लेखीवाल के भुगतान करने में असफल रहने के कितने दिनों के बाद वाद हेतुक उत्पन्न होता है?
a. 15 दिन
b. 45 दिन
c. 60 दिन
d. 30 दिन
151. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138" के अन्तर्गत अपने बैंक से चेक के अनादरण की सूचना प्राप्त होने पर चेक को पाने वाले के द्वारा लेखीवाल को लिखित में एक माँग की नोटिस किस अवधि के अन्दर दी जानी होती है-
a. 30 दिन
b. 60 दिन
c. 15 दिन
d. उपरोक्त में कोई नहीं
152. परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अधीन निम्नलिखित में से कौन सा परन्तुक खण्ड चेक के भुगतान में विफलता की स्थिति में 15 दिनों की नोटिस दिए जाने की मांग करता है?
a. खण्ड (ग)
b. खण्ड (ख)
c. खण्ड (क)
d. खण्ड (घ)
153. परक्रम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 चेक को तीन माह की अवधि के अंदर बैंक के समक्ष प्रस्तुत किए जाने तथा उसके अनादत होने की स्थिति में दण्डात्मक प्रावधान करती है। यह अवधि क्या है:
a. उस तिथि से जिस पर इसे लिखा गया हो अथवा इसकी वैधता को अवधि, दोनों में जो पहले हो
b. उस तिथि से जिस पर चेक को पाने वाले द्वारा माँग को गई हो
c. केवल उस विधि से जिस पर चेक आहरित की गई
d. उस तिथि से जिस पर चेक को पाने वाले की माँग को स्वीकार किया गया हो
154. लेखीवाल के द्वारा जारी चेक के अनादृत हो जाने पर वाद हेतुक कब उत्पन्न होता है?
a. माँग पत्र पर प्राप्त होने के 15 दिनों के अंदर चेक को पाने वाले को चेक की राशि का भुगतान करने में असफल रहने की तिथि पर
b. बैंक से चेक के बिना भुगतान के त्रापस होने की सूचना प्राप्त होने की तिथि पर
c. उस तिथि पर जिस पर चेक को पाने वाले के द्वारा लेखीवाल को सूचना जारी की गई हो
d. उपरोक्त में से कोई नहीं
155. बैंक पर्ची प्रस्तुत किए जाने पर किसी चेक के अनादरण सम्बन्धी उपधारणा:
a. खण्डनीय होती है
b. अखण्डनीय होता है
c. निर्णायक साक्ष्य होता है
d. उपरोक्त में कोई नहीं
156. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अन्तर्गत अभियोजन में यह एक प्रतिरक्षा नहीं होगी कि:
a. यह कि चेक को जारी करते समय लेखीवाल के पास यह विश्वास करने का कोई कारण उपलब्ध नहीं था कि प्रस्तुत पर चैक का अनादरण हो सकता है
b. यह कि चेक को किसी ऋण अथवा दायित्व के उन्मोचन हेतु जारी नहीं किया गया था
c. यह कि चेक को लिखने की तिथि से छह माह अथवा इसकी वैधता की अवधि, दोनों में जो पहले हो, के अंदर बैंक के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया
d. चेक पर उसके हस्ताक्षर नहीं है
157. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 181 की कौन सी धारा इस प्रतिरक्षा को सम्मिलित नहीं करती कि "चेक को जारी करते समय लेखीवाल के पास यह विश्वास करने का कोई कारण उपलब्ध नहीं था कि अधिनियम की धारा 138 में उल्लिखित कारणोंवश प्रस्तुत पर चेक का अनादरण हो सकता है"?
a. धारा 137
b. धारा 140
c. धारा 139
d. धारा 142
158. यदि धारा 138 के अंतर्गत किसी अपराध के लिए अभियोजन में यह दृश्य कि लेखीवाल के पास चेक जारी करते समय यह विश्वास करने का कोई कारण उपलब्ध नहीं था वह बेक प्रस्तुति पर अनादरित हो सकती है
a. एक प्रतिरक्षा होगी
b. धारा 139 के अंतर्गत उपधारणा को निरस्त करने हेतु पर्याप्त होगी
c. प्रक्रिया को जारी करने से इंकार करने का एक आधार होगा
d. एक प्रतिरक्षा नहीं होगी
159. परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 141 का सम्बन्ध निम्नलिखित में से किसके द्वारा कारित अपराधों से है:
a. केवल व्यक्ति
b. सरकारी कर्मचारियों
c. कम्पनिया
d. व्यक्ति एवं कंपनियों दोनों
160. अपर्याप्त निधियों के कारण चेक के भुगतान न होने पर बैंक के लेखीवाल के रूप में परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत किसे अभियोजित किया जा सकता है।
a. एक संस्था को
b. एक मनुष्य/व्यक्ति को
c. किसी निगमित संस्था को
d. उपरोक्त सभी को
161. यदि परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत अपराध करने वाला व्यक्ति एक कंपनी हो तो अपराध के लिए निम्नलिखित में से किसे दोषी माना जाएगा:
a. ऐसा व्यक्ति जो कंपनी के साथ-साथ कंपनी के व्यवसाय के संचालन का प्रभारी एवं उत्तरदायी रहा हो
b. कंपनी, अपने नाम में
c. कंपनी का निदेशक, जिसे केन्द्र सरकार द्वारा नामित किया गया हो
d. ऐसा व्यक्ति, जो अपराध किए जाने के समय पर प्रभारी रहा हो तथा कंपनी के व्यवसाय के संचालन हेतु उत्तरदायी रहा हो, न कि कम्पनी
162. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 141 के प्रयोजनार्थ 'कंपनी' का अर्थ है:
a. व्यक्तियों के अन्य संगम
b. कोई भी निगमित निगाय
c. एक फर्म
d. उपरोक्त सभी
163. परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 141 के प्रयोजनों के लिए कंपनी का अर्थ में क्या शामिल नहीं होता:
a. एक निगमित निकाय
b. व्यक्तियों का एक संगम
c. एक फर्म
d. एक एकल-स्वामित्व वाली संस्था
164. परक्राम्य लिखत अधिनियम की कौन सी धारा यह प्रावधान करती है कि "जहाँ किसी व्यक्ति को, यथास्थिति, केन्द्र सरकार अथवा राज्य सरकार, जैसा भी मामला हो, में कोई पद अथवा नियोजन धारण करने के कारण किसी कंपनी के निदेशक के रूप में नामित किया गया हो, वहाँ उसे कंपनी द्वारा अधिनियम की धारा 138 के अन्तर्गत किए गए एक अपराध के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जाएगा"?
a. धारा 141(1) का परंतुक (दो)
b. धारा 141 a. का परंतुक (एक)
c. धारा 141 की उपधारा 2
d. उपरोक्त में कोई नहीं
165. यह प्रावधान, कि "महानगर मजिस्ट्रेट अथवा प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट से अवर कोई भी न्यायालय धारा 138 के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा" किस धारा में मौजूद है:
a. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 को धारा 142 के खण्ड (ख) में
b. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 142 के खण्ड (क) में
c. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 143 में
d. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 142 के खण्ड (ग) में
166. परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत अपराध का संज्ञान ऐसे न्यायिक मजिस्ट्रेट (वित्तीय मामलों) द्वारा लिया जा सकता है जिसकी क्षेत्रीय अधिकारिता :
a. वैधानिक नोटिस सुपुर्दगी के स्थान को हो
b. चेक जारी करने के स्थान की हो
c. वह स्थान जहाँ उस बैंक, जिस पर चेक लिखा गया है, के द्वारा चेक का अनादरण किया गया हो
d. वह स्थान जहाँ शिकायतकर्ता ने अपने बैंक द्वारा चेक भुनाने के लिए प्रस्तुत करने का चयन किया हो
167. वाद हेतुक की तिथि से किस अवधि के अंदर न्यायालय के समक्ष एक लिखित परिवाद प्रस्तुत की जानी चाहिए:
a. 15 दिन
b. 90 दिन
c. 30 दिन
d. 45 दिन
168. निम्नलिखित में से कौन सा न्यायालय परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 के अन्तर्गत बैंक के अनादरण सम्बन्धी अपराध के विचारण हेतु सशक्त किया गया है?
a. प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट
b. द्वितीय श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट
c. बैंकिग लोकपाल
d. उपरोक्त में कोई नहीं
169. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत परिवाद प्रस्तुत किए जाने में हुए विलंब को माफ किया जा संकता है:
a. भारतीय परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 138 के अधीन
b. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 137 के अधीन
c. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 141 के अधीन
d. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 142 के अधीन
170. मामलों के संक्षिप्त विचारण के लिए न्यायालय को किस धारा के अन्तर्गत शक्ति प्रदान किए गए हैं।
a. परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 142 के अधीन
b. परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 143 के अधीन
c. परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 137 के अधीन
d. परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 141 के अधीन
171. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 143क के अंतर्गत अंतरिम क्षतिपूर्ति के रूप में प्रदान की जा सकने वाली अधिकतम धनराशि क्या हो सकती है
a. चेक की धनराशि का 15 प्रतिशत
b. चेक की धनराशि का 20 प्रतिशत
c. चेक को धनराशि का 50 प्रतिशत
d. चेक की धनराशि का 25 प्रतिशत
172. परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 143 के अंतर्गत प्रत्येक विचारण यथासंभव शीघ्रता से संपन्न किया जाएगा तथा प्रयास किया जाएगा कि विचारण :
a. परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि से छह माह में पुरा कर लिया जाए
b. परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि से तीन माह में पूरा कर लिया जाए
c. परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि से एक माह में पुरा कर लिया जाए
d. परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि से एक वर्ष में पुरा कर लिया जाए
173. परक्राम्य लिखत अधिनियम की निम्नलिखित धारा में से कौन सी धारा प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट अथवा महानगर मजिस्ट्रेट को निधियों की अपर्याप्तता के कारण चेक के अनादरण सम्बन्धी अपराध पर विचारण करने हेतु सशक्त करता है?
a. धारा 143(5)
b. धारा 143(3)
c. धारा 143(2)
d. धारा 143(1)
174. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत एक अपराध के विचारण में दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 262 तथा 265 के प्रावधान:
a. लागू होंगे
b. लागू नहीं होंगे
c. कभी-कभी लागू होंगे
d. उपरोक्त में कोई नहीं
175. परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अधीन एक अपराध पर संक्षिप्त विचारण किया गया किन्तु न्यायालय ने अभियुक्त को एक वर्ष के कारावास की सजा प्रदान कर दी। यह सजा:
a. अनियमित है
b. केवल अनुचित है
c. केवल अनियमित है
d. वैध है
176. परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अधीन कार्यवाहियों के विरुद्ध कौन-कौन सी प्रतिरक्षा उपलब्ध है?
a. अधिकारिता का अभाव
b. 15 दिनों को विधिक सूचना को अनुपस्थिति
c. विधिक तौर पर प्रवर्तनीय ऋण अथवा दायित्व की अनुपस्थिति
d. उपरोक्त सभी
177. परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत एक अपराध के विरुद्ध की गई परिवाद:
a. अवश्य ही लिखित में होनी चाहिए
b. अवश्य ही मौखिक अथवा लिखित में होनों चाहिए
c. अवश्य ही लिखित में तथा शपथ-पत्र द्वारा समर्थित होनी चाहिए
d. मजिस्ट्रेट के समक्ष मौखिक कचन हो सकती है
178. एक ही संव्यवहार के अधीन जारी किए गए सभी चेकों के अनादरण के लिए की गई परिवाद :
a. अपोषणीय होती है
b. केवल तब जब एक संसूचना प्रेषित की गई हो
c. पोषणीय होती है
d. उपरोक्त (b) तथा (c) दोनों
179. कौन सी धारा यह प्रावधान करती है कि परक्राम्य लिखत अधिनियम के अंतर्गत अपराध शमनीय होते हैं?
a. धारा 147
b. धारा 142
c. धारा 137
d. धारा 148
180. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 147 के अनुसार अधिनियम के अधीन दण्डनीय प्रत्येक अपराध:
a. अशमनीय होता है
b. संज्ञेय होता है
c. शमनीय होता है
d. उपरोक्त (b) तथा (c) दोनों
181. अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत दोषमुक्ति के आदेश के विरुद्ध एक अपील किस न्यायालय में प्रस्तुत की जा सकती है?
a. सत्र न्यायालय अथवा उच्च न्यायालय में से किसी एक
b. उच्च न्यायालय
c. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
d. सत्र न्यायालय
182. नीचे दी गई सूची-1 को सूची-2 से सुमेलित करें तथा नीचे दी गई कूट संख्याओं का उपयोग करते हुए सही उत्तर चुनें:
सूची-1 सूची-2
(प्रावधान) (परक्राम्य अधिनियम की धाराएँ)
(A) अपराधों का संज्ञान 1. धारा 142
(B) बाद पर संक्षिप्त विचारण के न्यायालय के अधिकार 2. धारा 143
(C) प्रतिरक्षाएं जो धार 138 के अंतर्गत किसी भी अभियोजन में अनुमन्य न हो 3. धारा 140
(D) धारक के पक्ष में उपधारणा 4. धारा 139
कूट संख्याएं:
A B C D
a. 4 3 1 2
b. 1 2 3 4
c. 3 4 2 1
d. 2 1 4 3
183. नीचे दी गई सूची-1 को सूची-2 से सुमेलित करें तथा नीचे दी गई कूट संख्याओं का उपयोग करते हुए सही उत्तर चुनें:
सूची-1 सूची-2
(A) अपराधों का संज्ञान 1. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 141
(B) कंपनियों और संस्थाओं द्वारा अपराध 2. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 143
(C) अपर्याप्त निधियों के कारण चेक का अनादरण 3. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 142
(D) वाद पर संक्षिप्त विचारण के न्यायालय के अधिकार 4. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138
कूट संख्याएं
A B C D
a. 1 2 3 4
b. 2 4 1 3
c. 3 1 4 2
d. 4 2 1 3
184. 1988 में परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 में किए गए संशोधन के द्वारा एक महत्वपूर्ण प्रावधान को लागू किया गया जो सम्बन्धित है:
a. सहज परक्राम्यता से
b. सम्यक् अनुक्रम में धारक के विशेषाधिकारों से
c. बैंक ड्राफ्ट (माँगपत्र) से
d. चेक के अनादरण से
185. क्या परकाम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत किसी अपराध के आरोप पर मजिस्ट्रेट एक अन्वेषण का आदेश जारी कर सकता है?
a. नहीं
b. निर्भर करता है
c. हाँ
d. उपरोक्त में कोई नहीं
186. परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अधीन लगाए जा सकने वाले अर्थदण्ड की अधिकतम राशि हो सकती है:
a. 5 हजार रुपये
b. 2 लाख रुपये
c. चेक की धनराशि से दोगुनी धनराशि
d. चेक की धनराशि के बराबर धनराशि