संविधियों का निर्वचन (Interpretation of Statutes) MCQs (हिंदी माध्यम)

संविधियों का निर्वचन (Interpretation of Statutes) MCQs (हिंदी माध्यम)

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संविधियों का निर्वचन

INTERPRETATION OF STATUTES

 

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1. निर्वचन का सामान्य सिद्धान्त है:

a. कानून को सम्पूर्ण रूप से पढ़ा जाना चाहिए

b. अर्थान्वयन अमान्य से मान्य करना अच्छा है

c. अर्थान्वयन साहचर्येण ज्ञायते

d. उपर्युक्त सभी

 

2. रिष्टि का नियम/अनिष्ट परिहार नियम/सप्रयोजन अर्थान्वयन उस दशा में लागू किया जाता है जब कानून के:

a. दो अर्थ निकलते हों

b. दो या दो से अधिक अर्थ निकलते हों

c. कोई अर्थ ही निकलता हो

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

3. नासिटर सोसायस (Noscitur a socitis) का अर्थ है :

a. साहचर्य से जानना

b. स्वर्णिम नियम

c. सामंजस्यपूर्ण निर्वचन

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

4. दण्ड कानूनों का कठोर अर्थान्वयन किया जाता है इसका लाभ मिलता है:

a. अभियुक्त को

b. अभियोजन को

c. सभी वादकारियों को

d. उपर्युक्त सभी को

 

5. एक्स विस्सेरिबस एक्टस (Ex visceribus actus) का अर्थ है:

a. कानून का निर्वचन अधिनियम के चारों कोनों के बीच ही किया जाना चाहिए

b. मान्य से अमान्य करना अच्छा है

c. समरूप अभिव्यक्तियाँ समान अर्थ रखती हैं

d. उपर्युक्त सभी

 

6. निर्वचन का प्रथम सिद्धान्त है:

a. स्वर्णिम नियम

b. सजाती अर्थान्वयन

c. शाब्दिक (व्याकरणिक) निर्वचन

d. रिष्टि का नियम

 

7. सर्वाधिक सुरक्षित नियम किस नियम/सिद्धान्त को कहा जाता है?

a. अनिष्ट परिहार नियम को

b. शाब्दिक निर्वचन को

c. स्वर्णिम नियम को

d. रिष्टि के नियम को

 

8. भविष्यलक्षी प्रत्यादेश का सिद्धान्त (Prospective overruling) किस वाद में प्रतिपादित किया गया था?

a. सज्जन सिंह बनाम पंजाब राज्य

b. केशवानन्द बनाम केरल राज्य

c. गोलक नाथ बनाम पंजाब राज्य

d. ए० के० गोपालन बनाम मद्रास राज्य

 

9. अधिनियम का सार महत्वपूर्ण होता है उसका बाह्य स्वरूप नहीं, किस सिद्धान्त से सम्बन्धित है?

a. सार एवं मर्म से

b. आभासी विधायन से

c. राज्य क्षेत्रातीत प्रवर्तन से

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

10. रिष्टि के नियम का प्रतिपादन सर्वप्रथम किया गया था:

a. हेडले के मामले में

b. आर० एम० डी० चमरबाग बनाम भारत संघ

c. कानाई लाल बनाम परिमनिधि

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

11. शाब्दिक या व्याकरणिक निर्वचन (litera legis/litera scripta) के सम्बन्ध में कौन सी गलत है?

a. न्यायालय द्वारा केवल शब्दों, वाक्यों, खण्डों, व्याकरण और पदों से ही अर्थान्वयन किया जाना चाहिये, चाहे न्यायालय के समक्ष इसका परिणाम अव्यवहारिक ही क्यों आये

b. न्यायालय को, साम्या, न्याय शुद्ध अन्तःकरण के सिद्धान्तों को दृष्टिगत रखते हुए, विधि की भाषा में सुधार, संशोधन या परिवर्तन करने का अधिकार है

c. शब्दों को इनके शाब्दिक, व्याकरणिक, साधारण, स्वाभाविक एवं प्रचलित अर्थ में ही समझा जाना चाहिए

d. न्यायपालिका, विधायिका द्वारा निर्मित संविधियों की भाषा में किसी प्रकार का सुधार नहीं कर सकती है।

 

12. दाण्डिक विधि के अर्थान्वयन के सम्बन्ध में, निम्नलिखित कथनों में से कौनसा कथन गलत है?

a. दाण्डिक विधान के संदर्भ में अधिकारिता तथा प्रक्रिया के कानून को उदारता से निर्वचन करना चाहिये

b. अपराध के लिये प्रयुक्त शब्दों में कोई संदिग्धता हो तो उसका लाभ अभियुक्त को दिया जायेगा

c. दाण्डिक विधि का निर्वचन कठोरता से किया जाना चाहिये

d. दाण्डिक विधियों का कभी भी भूतलक्षी प्रवर्तन नहीं हो सकता, अर्थात् इनका प्रवर्तन सदैव भविष्यलक्षी होता है

 

13. जब किसी कानून के एक से अधिक उपबन्ध एक दूसरे के विरुद्ध हो तो न्यायालय उन उपबन्धों का निर्वचन इस प्रकार करने का प्रयास करता है जिससे, यदि सम्भव हो तो, सभी उपबन्धों में सामंजस्य बना रहे एवं कोई उपबन्ध प्रभावहीन हो जाए। यह निर्वचन का आधार है:

a. समन्वयपूर्ण अर्थान्वयन

b. शाब्दिक निर्वचन

c. स्वर्णिम नियम

d. उपर्युक्त सभी

 

14. संशोधन (Amendment) के सम्बन्ध में, निम्नलिखित कथनों में से कौनसा कथन सही है?

a. न्यायपालिका को संशोधन को पुनर्विलोकन करने का अधिकार नहीं है

b. संशोधन को मान्यता देना या अमान्य करना न्यायपालिका के क्षेत्राधिकार का भाग नहीं है

c. संशोधन में संविधि के क्षेत्र में परिवर्तन होता है। इसके उपबंधों का कम या ज्यादा किया जाता है अर्थात् घटाया या जोड़ा जाता है

d. संशोधन के मामलों में निर्वचन के सिद्धान्त लागू नहीं होते हैं

 

15. "अमान्य से मान्य करना अच्छा है" (ut res megis valeat quam pareat) के निर्वचन के सिद्धान्त के सम्बन्ध में, निम्नलिखित कथनों में से कौनसा कथन सही है?

a. जब किसी उपबन्ध के दो निर्वाचन सम्भव हो तब न्यायालय को ऐसा अर्थान्वयन करना चाहिये जो उस प्रयोजनार्थ अनुकूल हो, जिसके लिये संविधि का निर्माण किया गया है, कि ऐसा अर्थ ग्रहण करना चाहिये जिससे कि संविधि के प्रयोजन की पूर्ति में रास्ते में रोड़ा अटके

b. दोनों अर्थान्वयनों में से जिससे विधायिका के उद्देश्यों की प्राप्ति हो, उसे स्वीकार किया जाना चाहिये, जबकि जिससे उद्देश्यों की प्राप्ति हो उसे अस्वीकार किया जाना चाहिये

c. यदि किसी उपबंध के एक से अधिक अर्थ निकलते हैं तो उस अर्थ को स्वीकार करना चाहिये जो प्रयुक्त शब्दों को प्रभावी बनाये, जबकि निष्प्रभावी बनाने वाले अर्थ को अस्वीकार कर देना चाहिये

d. उपर्युक्त सभी

 

16. जब किसी कानून की भाषा संदिग्ध होने के कारण एक से अधिक अर्थ निकलते हों तो न्यायालय लागू करेगा:

a. अमान्य से मान्य करना अच्छा है

b. सामंजस्यपूर्ण निर्वचन

c. सजाति अर्थान्वयन

d. उपर्युक्त सभी

 

17. कर कानून का निर्वचन:

a. कठोरता पूर्वक करना चाहिये

b. सन्देहास्पद स्थिति होने पर इसका लाभ कर-दाता को दिया जाना चाहिये

c. सामान्यतः कर-कानूनों का भूतलक्षी प्रवर्तन नहीं होता है एवं जब तक कि विधायिका का ऐसा स्पष्ट आशय हो, कर कानून का प्रवर्तन भविष्यलक्षी ही होता है

d. उपर्युक्त सभी

 

18. आदेशात्मक संविधि के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों में से कौनसा कथन गलत है?

a. आदेशात्मक संविधियों के निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन करना अनिवार्य होता है

b. आदेशात्मक संविधियों में सामान्यतः 'करेगा' (shall), 'अवश्य करेगा' (must) या 'ऐसा करना विधियुक्त होगा' आदि शब्दावली प्रयुक्त की जाती है

c. आदेशात्मक संविधियों के निर्देशों का सारवान रूप से अनुपालन कर लेना पर्याप्त होता है

d. ऐसी संविधियों का निर्वचन कठोरता से किया जाना आवश्यक होता है

 

19. भारत में विधायिका अपने मूलभूत विधायन सम्बन्धी कार्यों को:

a. प्रत्यायोजित कर सकती है

b. विधायिका के विवेक पर निर्भर

c. मंत्रिपरिषद के विवेक पर निर्भर

d. प्रत्यायोजित नहीं कर सकती है

 

20. निम्नलिखित में से किसका कठोर अर्थान्वयन नहीं किया जा सकता है?

a. कर सम्बन्धी संविधियों का

b. हितप्रद संविधियों का

c. दाण्डिक संविधियों का

d. राजस्व संविधियों का

 

21. संविधान के निर्वचन में उच्चतम न्यायालय ने निम्न सिद्धान्तों की चर्चा की है:

a. सार और मर्म का सिद्धान्त

b. आभासी विधायन का सिद्धान्त

c. भविष्यलक्षी प्रत्यादेश का सिद्धान्त

d. उपर्युक्त सभी

 

22. उपचार हेतु जो प्रयोजनप्रद अर्थान्वयन किया जाता है, उसका किससे सम्बन्ध है?

a. रिष्टि नियम

b. सामंजस्यपूर्ण/समन्वयपूर्ण अर्थान्वयन

c. शाब्दिक अर्थान्वयन नियम

d. स्वर्णिम नियम

 

23. निरसन (Repeal) के सम्बन्ध में, निम्नलिखित कथनों में से कौनसा कथन गलत है?

a. निरसन में न्यायपालिका को पुनर्विलोकन करने का अधिकार नहीं है

b. निरसन में निर्वचन के सिद्धान्त लागू नहीं किये जाते हैं

c. निरसन का मान्य या अमान्य करना न्यायपालिका के कर्तव्य का ही भाग है

d.       निरसन में संविधि का सम्पूर्ण अस्तित्व ही समाप्त हो जाता है

 

24. …………..........का तात्पर्य किसी विशिष्ट विषय-वस्तु पर सम्पूर्ण कानून की विस्तारपूर्वक अभिव्यक्ति करना होता है, जिसमें पूर्ववर्ती सभी विधिक प्रावधानों एवं विषयों से सम्बन्धित सामान्य कानून के नियमों को सम्मिलित करने का प्रयास प्ररूपकार द्वारा किया जाता है।

a. समेकनकारी कानून

b. संशोधनकारी कानून

c. आदेशात्मक कानून

d. संहिताकारी कानून

 

25. "एक वस्तु का स्पष्ट उल्लेख दूसरे का अपवर्जन करता है" कौन से सूत्र पर आधारित है?

a. expressio unius personae vel rel est exclusio alterius

b. Nova constitutio futuris forman imponere debet non praeteritis

c. nallum criman sine lege, nulla peone sine lege

d. contemporanea expositio est fortissima in lege

 

26. भारत अन्य देशों में नैसर्गिक न्याय के कौन से सूत्र मान्यता प्राप्त कर चुके हैं?

a. कोई भी व्यक्ति स्वयं अपने मामले में निर्णायक नहीं हो सकता (nemo judex in causa sua)

b. दूसरे पक्ष को भी सुनने का अवसर दो (audi alteram partem)

c. (a) (b)

d. न तो (a) व न ही (b)

 

27. निम्न कथनों में सत्य कथन है:

a. अधिनियम का सार महत्त्वपूर्ण है उसका बाह्य स्वरूप नहीं

b. यदि विधान प्रत्यक्ष रूप से नहीं बनाया जा सकता तो वह अप्रत्यक्ष रूप से भी नहीं बनाया जा सकता

c. जहाँ किसी केन्द्रीय अधिनियम का किसी विशिष्ट दिन को प्रवर्तन में आना अभिव्यक्त नहीं है वहाँ वह उस दिन को प्रवर्तन में आयेगा जिस दिन को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त होती है

d. उपर्युक्त सभी

 

28. उच्चतम न्यायालय द्वारा कौन से मामले में पंथ निरपेक्षता को संविधान की मूल संरचना का अंग माना गया था?

a. एस० आर० बोम्मई बनाम भारत संघ

b. आई० सी० गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य

c. मिनर्वा मिल्स लि० बनाम भारत संघ

d. केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य

 

29. भारत के संविधान की उद्देशिका के मूल पाठ का उद्देश्य क्या है?

a. सभी व्यक्तियों को मूल अधिकार प्राप्त कराना

b. भारत के नागरिकों के मूल अधिकारों को प्रवृत्त कराना

c. व्यक्ति की गरिमा, राष्ट्र की एकता और अखण्डता को बनाये रखना

d. उपरोक्त सभी

 

30. निम्नलिखित में से किसका उदार अर्थान्वयन नहीं किया जा सकता है?

a. उपचारी संविधियों का

b. असामर्थ्यकारी संविधियों का

c. प्रक्रिया सम्बन्धी संविधियों का

d. हितप्रद संविधियों का

 

31. निर्देशात्मक संविधि' के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों के सम्बन्ध में कौन सा कथन गलत है?

a. निर्देशात्मक संविधियों में सामान्यतः 'कर सकता है/सकते हैं (may) अथवा 'जैसा वह वे उचित समझे' आदि शब्दावली का प्रयोग किया जाता है

b. निर्देशात्मक संविधियों का निर्वचन उदारतावादी दृष्टिकोण से किया जाता है

c. निर्देशात्मक संविधियों के निर्देशों का सारवान रूप से अनुपालन कर लेना पर्याप्त होता है

d. निर्देशात्मक संविधियों की अनुपालना नहीं करने की दशा में केवल अनियमितता होती है बल्कि संविधियां अकृत या शून्य हो जाती हैं

 

32. एजुस्डेम जेनेरिस (Ejusdem generis) का अर्थ है:

a. सजाति

b. उसी किस्म का

c. उसी प्रकार का

d. उपर्युक्त सभी

 

33. यदि किसी विधान जिसका साधारण उद्देश्य किसी विशिष्ट कोटि के व्यक्तियों को लाभ पहुँचाता है, में कोई उपबन्ध अस्पष्ट है जिससे उसके दो अर्थ निकलते हो जिनमें से एक उस हित की रक्षा करेगा और दूसरा उसे नष्ट करेगा तो वह अर्थ जो हित की रक्षा करे ठीक अर्थ है। उच्चतम न्यायालय ने इस हितप्रद अर्थान्वयन की व्याख्या की है:

a. मगनीलाल बनाम सुगन चन्द, AIR 1965 SC 101

b. रामधन बनाम पंजाब राज्य, AIR 1961 SC 1559

c. महादेव लाल बनाम महाप्रशासक पश्चिम बंगाल, AIR 1960 SC 936

d. गोविन्द लालजी बनाम राजस्थान राज्य, AIR 1963 SC 1638

 

34.  निर्देशात्मक संविधि (directory statute) के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन सही है?

a. निर्देशात्मक संविधियों के उपबंधों का यथावत पालना करना अनिवार्य नहीं होता है, क्योंकि अनुपालना करना वैकल्पिक या विवेकाधीन होता है

b. निर्देशात्मक संविधियों की अनुपालना नहीं करने से दण्ड या शास्ति का प्रावधान नहीं होता है

c. ऐसी संविधियां व्यक्तिगत हितों को समर्थित करती हैं

d. उपर्युक्त सभी

 

35. निर्वचन के बाह्य सहायकों का प्रयोग कब किया जाता है?

a. जब भाषा संदिग्ध हो

b. जब अन्य आंतरिक सहायक अर्थ स्पष्ट करने में असफल हो जाते हैं

c. जब न्यायालयों द्वारा शब्दों का अर्थान्वयन करने में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिये ऐसे सहायकों की मदद ली जाती है जो कानून के शरीर से परे हैं

d. उपर्युक्त सभी

 

36. कानून में प्रयुक्त शब्दों को कुछ रूपान्तरित कर सही अर्थ जाना जाता है, इसे कहा जाता है:

a. व्याकरणिक नियम

b. स्वर्णिम नियम

c. साहचर्ये ज्ञायते

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

37. जब दो या दो से अधिक ऐसे शब्द जिनकें अर्थ सदृश हो, एक साथ प्रयोग किये जाएं तो उन्हें उनके सजातीय अर्थ में समझा जाना चाहिए। यह किस नियम से सम्बन्धित है:

a. अर्थान्वयन साहयचर्येण ज्ञायते

b. सजाति अर्थान्वयन

c. समरूप अभिव्यक्तियां समान अर्थ रखती हैं

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

38. यदि केन्द्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा निर्मित कानून में अन्तर हैं, क्योंकि संविधान से प्रदत्त किसी अन्य विधायिका के क्षेत्र को आनुषंगिक रूप से स्पर्श कर लिया गया है तो निम्नलिखित सिद्धान्तों में से कौन से सिद्धान्त में इसका उपचार उपलब्ध होगा?

a. ग्रहण या आच्छादन का सिद्धान्त

b. पृथक्करण का सिद्धान्त

c. सार और मर्म का सिद्धान्त

d. आभासी विधान का सिद्धान्त

 

39.  संविधियों का अर्थान्वयन करने का अधिकार किसको प्राप्त नहीं है?

a. जाति पंचायतों को

b. न्यायालयों को

c. अधिकरणों को

d. राज्य की पंचायतों को

 

40. निर्वचन के सहयोगी कौन-कौन होते हैं?

a. न्यायालय और अधिवक्ता

b. संसद और विधानसभा

c. आंतरिक सहयोगी और बाह्य सहयोगी

d. उपर्युक्त सभी

 

41. बंगाल इम्युनिटी कम्पनी लि० बनाम बिहार राज्य इत्यादि, AIR 1955 SC 661 में क्या प्रतिपादित किया गया था?

a. कम्पनी एक विधिक व्यक्ति है

b. किसी प्रकरण के निर्णय उल्टे जा सकते हैं

c. यदि किसी संविधि का कोई भाग असंवैधानिक है तो उसे अवैध घोषित किया जा सकता है

d. उपर्युक्त सभी

 

42. निर्वचन के आंतरिक सहयोगी कौन होते हैं?

a. संविधि के शरीर से परे अन्य सहायक

b. न्यायालय के पीठासीन अधिकारी का निजी सहायक

c. संविधि के भीतर की विषय-वस्तु

d. न्यायालय का पीठासीन अधिकारी एवं अधिवक्ता

 

43. "विशेष अधिनियमति सामान्य अधिनियमित पर अधिभावी प्रभाव रखती हैं" कौन से सूत्र पर आधारित है?

a. ejusdem generis

b. Statutes in pari materia

c. noscitur a sociis

d. generalia specialibus non-derogent

 

44. दण्ड कानून का प्रभाव होता है:

a. भूतलक्षी

b. (a) एवं (b) दोनों

c. भविष्यलक्षी

d. जैसा अधिनियम में वर्णित हो

 

45.  कठोर अर्थान्वयन निम्न में से किस कानून का किया जाता है:

a. दण्ड कानून

b. कर कानून

c. धनीय भार अधिरोपित करने वाले कानून

d. उपर्युक्त सभी

 

46. विधान-मण्डल/संसद द्वारा कार्यपालिका को अपनी विधायी शक्ति प्रत्यायोजित करने का क्या कारण हैं?

a. विधायिका के पास समय की कमी

b. विधायिका के पास तकनीकी ज्ञान की कमी

c. विधि की प्रायोगिकता का परीक्षण

d. उपर्युक्त सभी

 

47. "निर्वचन" (Interpretation) को, प्रचलित भाषा ..............नाम से सम्बोधित किया जाता है।

a. व्याख्या

b. गवेषणा

c. अर्थान्वयन

d.रहस्योद्घाटन

 

48. भारत में प्रत्यायोजित विधान पर नियन्त्रण के बारे में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा कथन सही है?

a. उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय अपने आदेश या रिट द्वारा प्रत्यायोजित विधान को शून्य, निष्प्रभावी शक्ति के बाहर (ultra vires) घोषित कर सकती हैं

b. विधायिका को अधिकार प्राप्त है कि वह प्रत्यायोजित विधान को निरसित, स्वीकृत या अस्वीकृत कर सकती हैं। लेकिन विधायिका को समयाभाव के कारण प्रत्यायोजित विधान पर विचार करने का अवसर नहीं मिलता है

c. कुछ हद तक, प्रत्यायोजित विधान के दोषों और त्रुटियों पर लोकमत, विशेषज्ञों की राय और मिडिया के प्रसार-प्रचार द्वारा भी नियन्त्रण रखा जा सकता है

d. उपर्युक्त सभी

 

49. "साहचर्य से अर्थ जानना" कौन से सूत्र पर आधारित है:

a. noscitur a sociis

b. ejusdem generis

c. Statutes in pari materia

d. generalia specialibus non-derogent

 

50. कानून की पालना की दृष्टि से संविधियों का वर्गीकरण है:

a. आबद्धकारी, आदेशात्मक या आज्ञापक विधि

b. निदेशात्मक या अनुमतिबोधक विधि

c. (a) (b)

d.  तो (a) और ही (b)

 

51. निर्वचन के क्षेत्र में विदेशी निर्णय की सहायता कब ली जा सकती है?

a. जब विदेशी निर्णय, भारत के वर्तमान कानून के विरुद्ध हो

b. जब विदेश का न्यायिक प्रशासन और विधिक व्यवस्था भारत के समरूप हो

c. जब विदेशी निर्णय अन्तर्राष्ट्रीय विधि ओर प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्तों के विरुद्ध हो

d. उपर्युक्त सभी

 

52. उस केन्द्रीय अधिनियम का क्या नाम है, जिसमें शब्दों, वाक्यों, खण्डों को परिभाषित किया गया है?

a. संविधियों का निर्वाचन अधिनियम, 1872

b. राजस्थान साधारण खण्ड अधिनियम

c. विधि शब्दावली, भारत सरकार, विधि मंत्रालय

d. साधारण खण्ड अधिनियम, 1897

 

53. शब्दों का उनका साधारण एवं स्वाभाविक अर्थ प्रदान किया जाये, किस निर्वचन का सामान्य सिद्धान्त है:

a. सजाति अर्थान्वयन

b. व्याकरणिक निर्वचन

c. स्वर्णिम नियम

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

54. "दाण्डिक विधि की व्याख्या की कठोरता सर्वाधिक इस बात पर निर्भर करती है कि वह कानून कितना कठोर है।" यह सूत्र किसके द्वारा प्रतिप्रादित किया गया था?

a. सामण्ड

b. मैक्सवैल

c. बैंथम

d. ब्लैकस्टोन

 

55. 'अवधि' के संदर्भ में, संविधियों को कितने वर्गों में विभक्त किया जा सकता है?

a. आज्ञापक, आदेशात्मक या बाध्यकर; एवं निदेशात्मक या अनुमतिबोधक विधि

b. संहिताकारी, समेकनकारी, घोषणात्मक, समर्थकारी, उपचारी एवं अशक्तकारी विधि

c. अस्थायी एवं स्थायी विधि

d. दाण्डिक संशोधनकारी, व्याख्यात्मक विधिमान्यकारी एवं निरसनकारी विधि

 

56. कौन सा नियम अधिनियम के सारी अस्पष्टता/समस्याओं को समाधान करती है?

a. स्वर्णिम नियम

b. शाब्दिक निर्वचन

c. रिष्टि का नियम

d. सामंजस्यपूर्ण निर्वचन

 

57. निर्वचन के आन्तरिक सहयोगी नहीं है:

a. लघु शीर्षक

b. दीर्घ शीर्षक

c. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

d. धाराओं के शीर्षक

 

58. निर्वचन के बाह्य सहयोगी हैं:

a. दृष्टान्त

b. पाठ्य-पुस्तकें

c. अपवाद एवं व्यावृत्ति खण्ड

d. स्पष्टीकरण

 

59. वसीयत का निर्वचन करते समय किस नियम को दृष्टिगत नहीं रखा जाना चाहिये?

a. वसीयत स्टाम्पयुक्त रजिस्टर्ड होनी आवश्यक है

b. वसीयत के अक्षरों, शब्दों, पदों और भाषा का अर्थान्वयन युक्तियुक्त रूप से करना चाहिये

c. प्रत्यक्ष संदिग्धार्थों को अस्वीकार करना चाहिये

d. दो वसीयतों के असंगत खण्डों में से अंतिम वसीयत का अर्थ लगाया जायेगा

 

60. जब किसी भी उपबन्ध के एक से अधिक अर्थ प्रतीत होते हैं तो वह जो सन्तुलित एवं विवेकी है, प्रभावी होगा। निर्वचन सम्बन्धित है:

a. सजाति अर्थान्वयन

b. समन्वयपूर्ण अर्थान्वयन

c. स्वर्णिम नियम

d. अनिष्ट निवारण नियम

 

61. "न्यायालयों को संविधियों में कमियों की पूर्ति करने का अधिकार नहीं है" के सम्बन्ध में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा कथन गलत है?

a. न्यायालयों का कार्य संविधियों में कमियों की पूर्ति करना नहीं है, बल्कि उनका निर्वचन करना है

b. न्यायालय का कार्यक्षेत्र विधि का अर्थान्वयन करना है कि विधि का निर्माण करना

c. जैसी भी विधि हैं, न्यायाधीशों को उसके अनुरूप ही निर्वचन करना चाहिये। वे अपेक्षाकृत बेहतर विधि की रचना नहीं कर सकते

d. न्यायाधीश संसद की अपीलीय न्यायालय के रूप में कार्य कर सकता है

 

62. आज्ञापक उपबंध किसे कहते हैं?

a. ऐसा विधिक उपबंध जिसकी पालना करनी आबद्धकारी हो

b. ऐसा विधिक उपबन्ध जिसके अधीन पक्षकारों से इसकी पालना करवाना या नहीं करवाना, न्यायालय के विवेक पर निर्भर है

c. ऐसा विधिक उपबंध जिसकी पालना करनी निर्देशात्मक हो

d. ऐसा आदेश जिसमें न्यायालय द्वारा पक्षकारों को आज्ञा दी जाती है

 

63. निम्न कथनों में सत्य कथन है:

a. संविधान के निर्वचन के लिए सामान्य नियम वही है जो अन्य कानूनों के लिए है

b. संविधान का अर्थान्वयन इस प्रकार किया जाना चाहिए जिससे अधिकतम सम्भावित हित प्राप्त किया जा सके

c. आधारभूत ढांचे का सिद्धान्त केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य में प्रतिपादित किया गया था

d. उपर्युक्त सभी

 

64. सजाति अर्थान्वयन (ejusdem generis) का सूत्र किस नियम से सम्बन्धित है?

a. तार्किक अर्थान्वयन

b. स्वर्णिम अर्थान्वयन

c. शाब्दिक अर्थान्वयन

d. हितप्रद अर्थान्वयन

 

65. उदार निर्वचन (liberal interpretation) के सम्बन्ध में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा कथन असत्य है?

a. संविधि का अर्थान्वयन उदारतापूर्वक किया जाता है

b. संविधि के आशय/उद्देश्य/प्रयोजन/लोकहित पर ही अधिक ध्यान दिया जाता है। जबकि इसके शब्दों और भाषा को कोई महत्व नहीं दिया जाता है

c. संविधि का अर्थान्वयन उदारता से किया जाता है, बशर्ते कि संविधि की भाषा इसके उद्देश्य से प्रतिकूल/विरुद्ध हो

d. साम्या, न्याय और शुद्ध-अन्तःकरण के सिद्धान्तों को महत्व दिया जाता है

 

66. प्रत्यायोजित विधायन पर भारत के उच्चतम न्यायालय का सर्वप्रथम प्रकरण है:

a. इन रि दिल्ली लॉज मामला, AIR 1951 SC 352

b. बेनेट कोलमेन बनाम भारत संघ, AIR 1973 SC 106

c. श्री विजय लक्ष्मी राइस मिल्स बनाम आन्ध्र प्रदेश राज्य, AIR 1976 SC 1471

d. सम्राट बनाम बनवारीलाल शर्मा, 1945 AC 14 (24) PC

 

67. वसीयत/इच्छा-पत्र (Will) का निर्वचन करते समय किस नियम को दृष्टिगत रखा जायेगा?

a. वसीयत का अर्थान्वयन सम्पूर्ण वसीयत के सभी उपबन्धों को महत्व देते हुए किया जाना चाहिये

b. वसीयतकर्ता का वास्तविक आशय क्या था

c. वसीयत के विषयों और उद्देश्यों का अर्थ खोजना चाहिये

d. उपरोक्त सभी

 

68. "जब किसी अभिव्यक्ति के अर्थ में कोई संदिग्धता हो तो उसका अर्थ सुनिश्चित करते समय समान विषय-वस्तु से सम्बन्धित पूर्व की किसी संविधि में प्रयुक्त कोई विशिष्ट अभिव्यक्ति से निदेश या संकेत प्राप्त किया जा सकता है।" कौन से सूत्र पर आधारित है?

a. ejusdem generis

b. generalia specialibus non-derogent

c. noscitur a sociis

d. Statutes in pari materia

 

69. प्रत्यायोजित विधायन की शक्ति प्राप्त हो जाने पर किसके द्वारा प्रत्यायोजित विधान निर्मित किया जा सकता है?

a. सरकार

b. प्रशासनिक अधिकारीगण

c. प्राधिकरण

d. उपरोक्त सभी

 

70. निम्नलिखित कथनों में से कौन सा कथन गलत है?

a. भारत में प्रत्यायोजित विधान पर न्यायपालिका का प्रभावी नियन्त्रण है

b. भारत की विधायिका अपने आधारभूत कार्यों को कार्यपालिका को प्रत्यायोजित करने में सक्षम नहीं है

c. भारत में प्रत्यायोजित विधान पर कार्यपालिका का प्रभावी नियन्त्रण है

d. मूल अधिनियम का प्रत्यायोजित खण्ड वैध होना चाहिये तथा प्रत्यायोजित विधायन भी प्रत्यायोजित खण्ड संविधान के अनुकूल होना चाहिये

 

71. क्या न्यायालय द्वारा संविधान के किसी उपबंध को असंवैधानिक घोषित किया जा सकता है?

a. जी हां

b. न्यायालय के विवेक पर निर्भर

c. प्रकरण के तथ्यों एवं परिस्थितियों पर निर्भर

d. जी नहीं

 

72.  "जब तक किसी अपराध के बारे में पहले से ही कोई विधि अस्तित्व में नहीं हो तो उस अपराध को दण्डनीय नहीं माना जा सकता है" कौन से सूत्र पर आधारित है?

a. Nova constitutio futuris forman imponere debet non praeteritis

b. nallum criman sine lege, nulla peone sine lege

c. expressio unius personae vel rel est exclusio alterius

d. contemporanea expositio est fortissima in lege

 

73. "तत्कालीन व्याख्या सर्वोत्तम एवं प्रभावी होती है" कौन से सूत्र पर आधारित है?

a. Nova constitutio futuris forman imponere debet non praeteritis

b. expressio unius personae vel rel est exclusio alterius

c. contemporanea expositio est fortissima in lege

d. nallum criman sine lege, nulla peone sine lege

 

74. यदि किसी संविधि की भाषा से एक से अधिक अर्थ निकलते हों तो कौन से प्रवर्तन/प्रभाव वाला अर्थान्वयन किया जाना चाहिये?

a. भूतलक्षी प्रभाव

b. भविष्यलक्षी प्रभाव

c. जब तक कि किसी संविधि में विनिर्दिष्टतः / आवश्यक विवक्षित रूप से भूतलक्षी प्रभाव देने का उपबंधित नहीं किया गया हो तब तक उसे भविष्यलक्षी प्रवर्तन होने वाली संविधि ही माना जाना चाहिये

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

75. कर-कानून के निर्वचन के सिद्धान्त के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन असत्य है?

a. करारोपण कानून का अर्थान्वयन ऐसे कानून की शब्दावली के अनुरूप अक्षरशः किया जाना चाहिये

b. न्याय हित में, न्यायालयों को सशक्त किया गया हैं कि वे कानून में रह गयी कमियों की पूर्ति कर सकते हैं

c. यदि कानून की भाषा स्पष्ट हो तो परिणामों की परवाह करते हुए शब्दों को प्रभाव देना चाहिये

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

76. जब किसी संविधि के दो उपबंधों में सामंजस्य हो तो उनका अर्थान्वयन कौन से नियम से किया जायेगा?

a. सामंजस्यपूर्ण या समन्वयपूर्ण अर्थान्वयन

b. स्वर्णिम नियम अर्थान्वयन

c. तार्किक अर्थान्वयन

d. शाब्दिक या व्याकरणिक अर्थान्वयन

 

77. निम्न में से किस कानून का प्रभाव भूतलक्षी हो सकता है:

a. प्रक्रिया सम्बन्धी कानून

b. दण्ड विधि

c. (a) एवं (b) दोनों

d. सिविल विधि

 

78. प्रत्यायोजित विधायन के द्वारा निर्मित किये जा सकते हैं:

a. नियम

b. विनियम

c. आदेश, स्कीम एवं अधिसूचना

d. उपरोक्त सभी

 

79. यदि राजस्थान राज्य में शब्दों, वाक्य और खण्डों को परिभाषित करने वाला कोई अधिनियम हैं तो उसका नाम क्या है?

a. इस सम्बन्ध में, कोई अधिनियम नहीं है

b. राजस्थान साधारण खण्ड अधिनियम, 1955

c. साधारण खण्ड अधिनियम, 1897

d. सामान्य नियम (सिविल), 1986

 

80. संविधान के निर्वचन के सम्बन्ध में इस बात को दृष्टिगत रखना चाहिये कि:

a. संविधान का प्रत्येक शब्द संवैधानिक हैं

b. मूल अधिकारों और विधायी प्रविष्टियों का अर्थान्वयन इनके अधिकारधारीगण के पक्ष में, विस्तृत और उदार दृष्टिकोण अपनाते हुए करना चाहिये

c. संविधान के शब्दों की परिधि के भीतर, इसके उपबन्धों का अर्थान्वयन सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों को मूर्तरूप देने के लिये इनमें आये परिवर्तन को दृष्टिगत रखते हुए करना चाहिये

d. उपरोक्त सभी

 

81. हैडन के प्रकरण में अर्थान्वयन के कौन से नियम को प्रतिपादित किया गया है?

a. स्वर्णिम नियम

b. व्याकरणिक अथवा शाब्दिक अर्थान्वयन नियम

c. रिष्टि नियम अथवा दोष परिहार नियम

d. हितप्रद अर्थान्वयन नियम

e. समन्वयपूर्ण अर्थान्वयन नियम

 

82. संसद या विधान-मण्डल द्वारा कार्यपालिका को अपनी विधायी शक्ति प्रत्यायोजित करना क्या कहलाता है?

a. श्रम-विभाजन

b. आभासी विधान

c. सार मर्म (तत्व) का सिद्धान्त

d. प्रत्यायोजित विधान

e. पृथक्करण का सिद्धान्त

 

83. निर्वचन के आन्तरिक सहयोगी है/हैं:

a. उद्देशिका

b. परिभाषा

c. परन्तुक

d. उपर्युक्त सभी

 

84. विधायिका द्वारा निर्मित संविधियों का:

a. भूतलक्षी और भविष्यलक्षी प्रभाव होता है

b. भूतलक्षी प्रभाव होता है

c. भविष्यलक्षी प्रभाव होता है

d. दूरगामी और ऐतिहासिक प्रभाव होता है

 

85. संविधान का निर्वचन करते समय इस बात को ध्यान में रखना चाहिये कि:

a. समाजवादी लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना के लिये नीति-निदेशक तत्वों के अनुरूप ही निर्वचन करना चाहिये, जिससे कि मूल अधिकारों अन्य अधिकारों के बीच टकराव हो

b. यद्यपि नीति-निर्देशक तत्वों को महत्व दिया जाना चाहिये, तथापि ऐसा करने से मूल अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिये

c. मूल अधिकार न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय हैं, जबकि नीति निर्देशक तत्व प्रवर्तनीय नहीं हैं

d. उपरोक्त सभी

 

86. सजाति अर्थान्वयन (ejusdem generis) की आवश्यक शर्तें क्या हैं?

a. संविधि में विशिष्ट शब्दों के समूह का प्रगणन किया जाता है

b. सामान्य शब्द विशिष्ट शब्दों का अनुसरण करते हैं

c. विधायिका का आशय सामान्य शब्दों को व्यापक अर्थ प्रदान करने का नहीं हो

d. उपरोक्त सभी

 

87. ए० के० गोपालन बनाम मद्रास राज्य, ए० आई० आर० 1950 उच्चतम न्यायालय 27 के अनुसार, यद्यपि संविधान के शब्दों का निर्वचन समान सिद्धान्तों के अनुसार किया जाना चाहिये जो साधारण संविधियों पर लागू किये जाते हैं, फिर भी किस बात को सदैव याद रखना चाहिये?

a. संविधान एक ऐसी विरचना है जिसके अन्तर्गत समस्त विधियों का निर्माण किया जाता है

b. विवक्षित शक्तियों; विवक्षित प्रतिषेधः एवं आनुषंगिक या प्रासंगिक शक्तियों के सिद्धान्त

c. दखलकृत क्षेत्र; राज्यक्षेत्रीय सम्बन्ध; एवं भविष्यलक्षी प्रत्यादेश के सिद्धान्त

d. उपरोक्त सभी

 

88. पूर्व निर्णयानुसरण (stare decisis) का क्या अभिप्राय है?

a. प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्त का अनुसरण

b. पूर्व निर्णयों का निर्देशात्मक प्रभाव

c. पूर्व निर्णयों का आबद्धकारी प्रभाव

d. पूर्व निर्णयों का भविष्यलक्षी प्रभाव

 

89. सारवान विधि (उदाहरणार्थ भारतीय दण्ड संहिता, 1860) के सम्बन्ध में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा कथन गलत है:

a. सारवान विधि अधिकारों एवं दायित्वों को परिभाषित कर इनका विवेबना करती हैं

b. सामान्यतः इसका भूतलक्षी प्रवर्तन नहीं हो सकता है

c. सामान्यतः इसका भूतलक्षी प्रवर्तन हो सकता है

d. इसका कठोर निर्वचन किया जाता है

 

90. कोई भी व्यक्ति विधि के ऊपर नहीं है" निहित है:

a. अनुच्छेद 13

b. अनुच्छेद 15

c. अनुच्छेद 16

d. अनुच्छेद 14

 

91. संविधान का "मूल ढाँचा" के सिद्धान्त का प्रतिपादन सर्वप्रथम किस मामले में किया गया था?

a. केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य

b. गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य

c. मिनर्वा मिल्स लि० बनाम भारत संघ

d. एस० आर० बोम्बई बनाम भारत संघ

 

92. उच्चतम न्यायालय द्वारा अपने किस निर्णय में यह अभिनिर्धारित किया गया कि आयकर अधिनियम, 1922 तथा असम कृषि आयकर अधिनियम, 1939 साम्य विषय-वस्तु के होने से धारा 19 को निर्वाचित करने के लिये पूर्व की धारा 22 से सहायता प्राप्त की जा सकती हैं।

a. राज बजरंग बहादुर सिंह बनाम ठकुराइन भक्तराज कौर, 1953 S.C.R. 232

b. असम राज्य बनाम पी० बड्डुआ, AIR 1969 SC 831

c. राजकोट म्युनिसिपल कॉरपोरेशन बनाम गुजरात राज्य, ए० आई० आर० 1997 गुजरात 46

d. टी० एम० ए० फाउण्डेशन बनाम कर्नाटक राज्य, AIR 2003 SC 355

 

93. संविधियों के साधारण नियम के अनुसार, न्यायालयों को संविधियों की निर्वचन शाब्दिक/व्याकरणिक निर्वचन से करनी चाहिये। लेकिन, किन परिस्थितियों में निर्वचन के "स्वर्णिम नियम" को प्रयुक्त किया जा सकता है?

a. जब संविधि में अर्थ आधारित त्रुटि हो

b. जब संविधि के मूल पाठ से ऐसा अयुक्तियुक्त, असंगत या अर्थहीन परिणाम निकलता हो, जो विधायिका का आशय हो ही नहीं सकता था

c. जब कोई असंगति, निरर्थकता, अस्पष्टता, अयुक्तियुक्तता या अन्याय होता हो या अमुक प्रावधान के एक से अधिक अर्थ निकलते हो

d. (a) या (b) या (c)

 

94. विधि के निरसन का क्या तात्पर्य है?

a. उस विधि के कुछ प्रावधान लोपित कर दिये गये

b. वह विधि अस्तित्व में नहीं रही

c. उस विधि के अमुक उपबंधों को अमुक समय के लिये प्रवृत्त होने से रोक दिया जाता है

d. उस विधि का निलम्बन हो जाता है

 

95. सामंजस्यपूर्ण/समन्वयपूर्ण अर्थान्वयन (Harmo-nious Construction) कौन से प्रसिद्ध सूत्र पर आधारित हैं?

a. संविधि को सम्पूर्ण रूप में पढ़ा जाना चाहिये

b. समरूप अभिव्यक्तियां समान अर्थ रखती हैं

c. विधायिका का आशय स्वयं को ही खण्डित करने का नहीं है

d. तत्कालीन व्याख्या प्रभावी और सर्वोत्तम होती हैं

 

96. प्रत्यायोजित विधायन किस किस्म का विधायन है?

a. विधायी विधायन

b. न्यायपालिकीय विधायन

c. साम्या, न्याय और शुद्द अंतःकरणीय विधायन

d. कार्यपालिकीय विधायन

 

97. भारत में संविधान के अधीन, संविधियों का निर्वचन कौन कर सकता है?

a. केवल उच्चतम न्यायालय

b. सक्षम न्यायालय

c. उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय

d. उच्च न्यायालय और राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत कोई भी निकाय

 

98. संशोधनकारी कानून में विधायिका द्वारा पूर्व अथवा वर्तमान कानून में कोई उपबंध:

a. जोड़ा या निकाला जा सकता है

b. परिवर्तित या परिवर्धित किया जा सकता है

c. (a) (b)

d.  तो (a) ही (b)

 

99. सौजन्यपूर्ण/समन्वयपूर्ण अर्थान्वयन के सम्बन्ध में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा कथन गलत है?

a. संविधि का अर्थान्वयन इस प्रकार से किया जाना चाहिये कि यथासम्भव सभी उपबंधों में सामंजस्य बना रहे उनमें परस्पर टकराव हो

b. संविधि का अर्थान्वयन करते समय इस बात को दृष्टिगत रखना चाहिये कि समरूप अभिव्यक्तियां समान अर्थ रखती है

c.  संविधि का अर्थान्वयन इस प्रकार से करना चाहिये कि कोई भी उपबंध निरर्थक अथवा प्रभावहीन हो

d. संविधि के प्रत्येक उपबंध को इस रूप में पढ़ा जाना चाहिये कि विभिन्न उपबंध एक दूसरे पर निर्भर हैं

 

100. संविधान की "उद्देशिका" की भूमिका के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा कथन सही है?

a. संविधान की उद्देशिका उसके निर्माताओं के आशय की कुंजी है

b. जब संविधान के शब्द संदिग्ध हो या एक से अधिक अर्थ देने वाले हो तब अर्थान्वयन के प्रयोजनार्थ उद्देशिका के प्रति निर्देश किया जा सकता है

c. जब संविधान के अनुच्छेदों की भाषा स्पष्ट और असंदिग्ध हो तब उद्देशिका की आङ ले कर अनुच्छेदों की शब्दावली पर कोई मुलम्मा नहीं चढ़ाया जा सकता है

d. उपरोक्त सभी

 

101. कर विधि का निर्वचन किस विधि की तरह होता है?

a. श्रम विधि की तरह

b. सिविल विधि की तरह

c. दाण्डिक विधि की तरह

d. भूमि-सुधार विधि की तरह

 

102. "न्यायाधीशों का कार्य विधि की घोषणा करना है कि विधि की रचना", निम्नलिखित में से कौन-से सिद्धान्त पर आधारित है?

a. jus dicere and us are

b. casus omisus

c. ut res megis valeat quam paeat

d. jura non remota causa sed proxime spectatur

 

103. क्या भारत में अध्यादेश भी सविधि की परिधि में आते हैं?

a. जी नहीं

b. प्रकरण की परिस्थितियों पर

c. जी हाँ

d. न्यायालय के विवेक पर निर्भर

 

104. प्रक्रियात्मक विधि के सन्दर्भ में, निम्नलखित कथनों में से कौन-सा कथन असत्य है?

a. प्रक्रियात्मक विधि, सारवान विधि को प्रवृत्त करती है

b. इसका भूतलक्षी प्रवर्तन हो सकता है

c. इसका भूतलक्षी प्रवर्तन नहीं हो सकता है

d. उपरोक्त सभी

 

105. निर्वचन की सीमाओं के सम्बन्ध में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा कथन गलत है?

a. न्यायालय विधायिका की दोषपूर्ण अभिव्यक्ति का सुधार नहीं कर सकता है

b. निर्वचन के माध्यम से, जन कल्याण को दृष्टिगत रखते हुए, न्यायाधीश विधि की पुनः रचना कर सकता है

c. न्यायालय विधायिका के तीसरे सदन के रूप में कार्य नहीं कर सकता है

d. न्यायालय संविधियों के किसी भी उपबंध में परिवर्तन, आधुनिकीकरण या सुधार नहीं कर सकता है

 

106. जहाँ संविधि या कानून में प्रयुक्त भाषा के एक से अधिक अर्थ निकलते हों और उसे किसी वर्ग या समूह विशेष के हितों के संरक्षणार्थ निर्मित किया गया हो, वहाँ ऐसे अर्थ को ग्रहण किया जाना चाहिये जो ऐसे वर्ग या समूह के लिये हितकर या लाभदायक हो। इसे संविधियों का कहते हैं।

a. स्वर्णिम नियम का निर्वचन

b. हितप्रद निर्वचन

c. रिष्टि नियम का निर्वचन

d. तार्किक निर्वचन

e. सामंजस्यपूर्ण/समन्वयपूर्ण निर्वचन

 

107. सौजन्यपूर्ण निर्वचन या समन्वयपूर्ण अर्थान्वयन (Harmonious construction) के सम्बन्ध में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा कथन सही है?

a. जब किसी संविधि के दो या अधिक उपबंधों में सामंजस्य नहीं हो तब समन्वयपूर्ण अर्थान्वयन किया जाता है

b. किसी संविधि में विभिन्न प्रावधानों का सही अर्थान्वयन करने के लिये उस संविधि को समग्रतः पढ़ा जाना चाहिए

c. इसे सुसंगत बनाने के प्रयोजनार्थ संविधि के एक उपबंध का अर्थ उसी संविधि के दूसरे उपबंध के संदर्भ में अर्थान्वयन किया जाना चाहिये

d. उपरोक्त सभी

 

108. "संसद द्वारा निर्मित विधियों और राज्य के विधान-मण्डलों द्वारा निर्मित विधियों में असंगति होने की दशा में संसद द्वारा निर्मित विधि अभिभावी होगी" के सूत्र के आधार पर न्यायालयों द्वारा कौन-सा सिद्धान्त स्थापित किया गया है?

a. ग्रहण या आच्छादन का सिद्धान्त

b. सार और मर्म का सिद्धान्त

c. आभासी विधान का सिद्धान्त

d. पृथक्करण का सिद्धान्त

 

109. निम्नलिखित उपधारणाओं में से संविधियों के निर्वचन से सम्बन्धित उपधारणाएं कौन सी हैं?

a. न्यायालयों की स्थापित अधिकारिता को वंचित करने, नवीन सृष्टि करने एवं विस्तारित करने के विरुद्ध उपधारणा

b. अन्तर्राष्ट्रीय विधि के अतिक्रमण के विरुद्ध उपधारणा

c. कानून द्वारा राज्य क्षेत्रातीत प्रवर्तन के विरुद्ध उपधारणा

d. उपरोक्त सभी

 

110. संशोधन विधि किसे कहते हैं?

a. ऐसा विधिक उपबन्ध जो किसी उपबन्ध के सामान्य या विनिर्दिष्ट संदेह या शंका का निवारण करता है

b. ऐसी विधि जो किसी विधि के विद्यमान उपबन्धों को परिवर्तित, उपान्तरित, प्रतिस्थापित, जोड़ने, घटाने. हटाने या लोपित करने का प्रभाव रखती है

c. ऐसी विधि जो किसी विशिष्ट विषय-वस्तु पर सम्पूर्ण विधिक प्रावधानों की विस्तारपूर्वक अभिव्यक्ति करती है

d. ऐसी विधि जिसमें किसी विशिष्ट विषय-वस्तु पर सम्पूर्ण विधिक उपबंधों को एक स्थान पर, एक संविधि में एकत्रित

 

111. कौन से लीडिंग केस में भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा यह अभिनिर्णीत किया गया कि मूल अधिकार सहित संविधान के किसी भी प्रावधान का संशोधन संसद द्वारा भारत के संविधान के अनुच्छेद 368 के द्वारा प्रदत्त संशोधन की शक्ति के अधीन किया जा सकता है, परन्तु ऐसे संशोधन "संविधान के मौलिक ढांचे" (basic structure of the Constitution) को स्पर्श या प्रभावित नहीं कर सकते हैं?

a. केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य, ए० आई० आर० 1973 SC 1461

b. शंकरी प्रसाद बनाम भारत संघ, ए० आई० आर० 1951 SC 458

c. सज्जन सिंह बनाम राजस्थान राज्य, ए० आई० आर० 1965 SC 845

d. आई० सी० गोलक नाथ बनाम पंजाब राज्य, ए० आई० आर० 1967 SC 1643

 

112. 'Delegatus non potest delegare' का क्या अभिप्राय है

a. व्यक्ति स्वयं के पास जो स्वत्व हैं उससे बेहतर स्वत्व आगे अंतरित नहीं कर सकता है

b. तत्कालीन व्याख्या सर्वोत्तम एवं प्रभावी होती हैं

c. प्रत्यायोजित शक्ति को आगे और प्रत्यायोजित नहीं किया जा सकता है

d. विधि को अमान्य से मान्य करना अच्छा है

 

113. दाण्डिक विधि के सम्बन्ध में:

a. दाण्डिक अपराध को अभियुक्त के विरुद्ध साबित करने का भार लोक अभियोजक पर होता है

b. सन्देह का लाभ अभियुक्त को दिया जाता है

c. इसका अर्थान्वयन कठोरता से किया जाना चाहिये और शब्दावली की अक्षरशः व्याख्या की जानी चाहिये

d. दाण्डिक विधि भूतलक्षी होकर, भविष्यलक्षी होनी चाहिये

e. उपरोक्त सभी

 

114. संहिताकारक विधि का क्या अभिप्राय है?

a. ऐसा विधिक उपबन्ध जो किसी उपबन्ध के सामान्य या विनिर्दिष्ट सन्देह या शंका को निवारण करता है

b. ऐसी विधि जो किसी विधि के विद्यमान उपबन्धों को परिवर्तित, उपान्तरित, प्रतिस्थापित, जोड़ने, हटाने या लोपित करने का प्रभाव रखती हैं

c. ऐसी विधि जो किसी विशिष्ट विषय-वस्तु पर सम्पूर्ण विधिक प्रावधानों की विस्तारपूर्वक अभिव्यक्ति करती हैं

d. ऐसी विधि जिसमें किसी विशिष्ट विषय-वस्तु पर सम्पूर्ण विधिक उपबंधों को एक स्थान पर, एक संविधि में एकत्रित किया जाता है

 

115. निर्वचन करने का उद्देश्य क्या होता है?

a. विधायिका का हेतु ज्ञात करना

b. विधायिका का आशय ज्ञात करना

c. विधायिका का प्रयोजन ज्ञात करना

d. उपर्युक्त सभी

 

116. संविधि का निर्वचन किसे कहते हैं?

a. संविधि के शब्दों की व्याख्या करना

b. संविधि के शब्दों को उनका स्वाभाविक और साधारण अर्थ दिया जाना

c. संविधि निर्मित करने के कारणों और उद्देश्यों की जांच करना

d. उपरोक्त में से कोई नहीं

 

117. विधान-मण्डल/संसद द्वारा कार्यपालिका को अपनी विधायी शक्ति प्रत्यायोजित करने के सम्बन्ध में कौन-सा कारण नहीं है?

a. समय की कमी

b. आपातकालीन स्थिति

c. नौकरशाही की दक्षता का परीक्षण

d. विधि की प्रायोगिकता का परीक्षण

e. तकनीकी ज्ञान की कमी

 

118. संविधान के निर्वचन के सम्बन्ध में, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन गलत है?

a. संविधान एक जीवन्त विधि होने के कारण लचीलापन एवं अनुकूलीकरण इसकी जीवन्तता के मुख्य आधार हैं

b. संवैधानिक सिद्धान्तों को सर्वोच्च मान्यता देने के प्रयोजन से उसकी शब्दावली को तोड़ा-मरोड़ा जा सकता है

c. संविधान का संकुचित या पांडित्यपूर्ण निर्वचन नहीं किया जाना चाहिये, बल्कि न्यायालयों द्वारा व्यापक ओर उदारवादी दृष्टिकोण रखना चाहिये

d. यदि संविधान के उपबंधों के एक से अधिक युक्तियुक्त अर्थ निकलते हों तो ऐसे अर्थ वाले अर्थान्वयन को स्वीकार किया जाना चाहिये जिससे संविधान की सार्थकता सुनिश्चित हो

e. संविधान निर्माताओं के आशय को संविधान में प्रयुक्त उपबंधों की शब्दावली में ही ढूंढ़ना चाहिए

 

119. नागरिक विधि एवं अन्तर्राष्ट्रीय विधि के मध्य विरोधाभास या असंगति हो तो न्यायालयों द्वारा कौन सी विधि प्रवृत्त की जानी चाहिये?

a. अन्तर्राष्ट्रीय विधि

b. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय से निर्देश प्राप्त करना चाहिये

c. नागरिक विधि

d. मामले की परिस्थितियों न्यायालय के विवेक पर निर्भर

 

120. "विधि निकट के हेतुक पर ध्यान देती हैं, दूर के हेतुक पर नहीं" कौन से सूत्र पर आधारित हैं?

a. ignorantia facti excusat ignorantia juris non-excusat

b. ut res megis valeat quam pareat

c. casus omissus

d. jura non-remota cause sed proxima spectatur

 

121. निर्वचन के प्रकार हैं:

a. शाब्दिक निर्वचन (litra legis)

b. उद्देश्यपूर्ण या तार्किक निर्वचन (sententia legis)

c. (a) (b)

d. न तो (a) व न ही (b)

 

122. "तथ्यों का ज्ञान नहीं होना तो क्षम्य हैं लेकिन कानून के ज्ञान से अनभिज्ञा होना क्षम्य नहीं है" कौत्रसे सूत्र पर आधारित है?

a. jura non-remota cause sed proxima spectator

b. ignorantia facti excusat ignorantia juris non-excusat

c. ut res megis valeat quam pareat

d. casus omissus

 

123. न्यायिक पूर्वनिर्णयों का:

a. भूतलक्षी प्रभाव होता है

b. भविष्यलक्षी प्रभाव होता है

c. भूतलक्षी और भविष्यलक्षी प्रभाव होता है

d. उपर्युक्त सभी

 

124. निम्नलिखित में से संविधियों के निर्वचन के "बाह्य सहयोगी" कौन हैं?

a. शब्द-कोश

b. पाठ्ध-पुस्तकें

c. इतिहास ऐतिहासिक पृष्ठिभूमि

d. उपरोक्त सभी

 

125. निर्वचन का मुख्य सिद्धान्त क्या है:

a. शाब्दिक या व्याकरणिक निर्वचन

b. तार्किक निर्वचन

c. न्यायालय का विवेकाधिकारपूर्ण निर्वचन

d. उपरोक्त सभी

 

126. कौन सी विधियों का निर्वचन किया जा सकता है?

a. अधिनियम एवं अध्यादेश

b. नियम, उप-नियम विनियम

c. उपविधि, अधिसूचना, आदेश, जिसे विधिक शक्तियां प्रदत्त हों

d. उपरोक्त सभी

 

127. 'ढंग' (method) के साधन में संविधियों को कितने वर्गों में विभक्त किया जा सकता है?

a. अस्थायी एवं स्थायी विधि

b. संहिताकारी, समेकनकारी, घोषणात्मक, समर्थकारी, उपचारी एवं अशक्तकारी विधि

c. दाण्डिक, कर, संशोधनकारी, व्याख्यात्मक विधिमान्यकारी एवं निरसनकारी विधि।

d. आज्ञापक, आदेशात्मक या बाध्यकर, एवं निदेशात्मक या अनुमतिबोधक विधि

 

128. "न्यायालयों का कार्य संविधियों में कमियों की पूर्ति करना नहीं हैं, बल्कि उनका निर्वचन करना है" कौन से सूत्र पर आधारित हैं?

a. ignorantia facti excusat ignorantia juris non-excusat

b. casus omissus

c. jura non-remota cause sed proxima spectatur

d. ut res megis valeat quam pareat

 

129. "आभासी विधान" (Colourble Legislation) के सिद्धान्त से क्या तात्पर्य है?

a. जब किसी संविधि का एक भाग अविधिमान्य अभिनिर्धारित कर दिया जाता है, जिसे संविधि के अन्य भाग से पृथक् किया जा सकता है, तब केवल पृथक् किया हुआ भाग ही असंवैधानिक घोषित किया जायेगा, जब कि शेष भाग संवैधानिक ही बना रहेगा

b. भारत के राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त संविधान पूर्व विधियां, संविधान लागू होने पर उस मात्रा में शून्य होगी जिस सीमा तक वे मूल अधिकारों के उपबंधों से असंगत हैं; एवं राज्य ऐसी विधि निर्मित नहीं करेगा जो प्रदत्त मूल अधिकारों को छीन लेती हैं या कम कर देती हैं,

c. यदि विधायिका ऐसी परवर्ती विषय-वस्तु पर किसी विधान का निर्माण करती हैं जो उसकी विधायी शक्ति से बाहर है तो अपनी संवैधानिक शक्तियों का अतिक्रमण करके, प्रत्यक्ष, परोक्ष, छद्म अथवा गुप्त तरीके से भी ऐसा नहीं कर सकती हैं

d. जब कोई संविधि सारतः संविधान से प्रदत्त विधायिका की शक्तियों के अन्तर्गत हैं जिसने उसे अधिनियमित किया है तब उसे केवल इस वजह से अविधिमान्य नहीं कहा जा सकता क्योंकि उसने संविधान से प्रदत्त किसी अन्य विधायिका के क्षेत्र को भी आनुषंगिक तौर पर स्पर्श कर लिया है

 

130. "कानून का निर्वचन संविधि के चारों कोनों के बीच (ex visceribus actus) ही किया जाना चाहिये" के सम्बन्ध में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा कथन असत्य है?

a. न्यायालय द्वारा किसी संविधि के अन्य उपबंधों की सहायता से अकक उपबंध का निर्वचन खींचतान करके भी किया जाना स्वीकार्य है

b. संविधि के किसी भी उपबंध का एकाकीपन में अर्थान्वयन नहीं करना चाहिये

c. विधायिका की किसी विशिष्ट अभिव्यक्ति का निर्वचन उसके संदर्भ से पृथक करके नहीं किया जाना चाहिये एवं इसके समग्र भागों से प्राप्त विधायिका के आशय को महत्व देना चाहिये

d. संविधि के उद्देश्य अथवा आत्मा को महत्व देना चाहिये, लेकिन उसे संविधि में उपबंधित भाषा में ढूंढ़ना चाहिये

 

131. भविष्यलक्षी प्रत्यादेश/भविष्यगामी विनिर्णय का 1 सिद्धान्त कौनसे मामले में प्राधिकारिक रूप से उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित किया गया था?

अथवा

उच्चतम न्यायालय द्वारा कौनसे मामले मे यह अभिनिर्धारित किया गया था कि संसद मूल अधिकारों में परिवर्तन नहीं कर सकती है?

a. शंकरी प्रसाद बनाम भारत संघ, ए० आई० आर० 1951 SC 458

b. आई० सी० गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य, ए० आई० आर० 1967 SC 1643

c. सज्जनसिंह बनाम राजस्थान राज्य, ए० आई० आर० 1965 SC 845

d. केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य, ए० आई० आर० 1973 SC 1461

 

132. "भूतलक्षी प्रवर्तन के विरुद्ध अवधारणा" किस किस्म की संविधियों पर लागू नहीं होती हैं?

a. साक्ष्य सम्बन्धी संविधियां पर लागू नहीं होती हैं

b. प्रक्रिया सम्बन्धी संविधियां पर लागू नहीं होती है

c. साक्ष्य अथवा प्रक्रिया सम्बन्धी संविधियों पर लागू नहीं होती हैं, जब तक कि ऐसा स्पष्ट संके हो कि विधायिका का ऐसा आशय नहीं था

d. उपरोक्त में से कोई नहीं

 

133. ..............ऐसा कानून है जो विशिष्ट विषय-वस्तु पर सम्पूर्ण विधिक उपबंधों का एक स्थान पर, आवश्यकता होने पर गौण संशोधन एवं सुधार के रूप में, एक संविधि में एकत्रित करना है।

a. संहिताकारी कानून

b. संशोधनकारी कानून

c. समेकनकारी कानून

d. निदेशात्मक कानून

 

134. क्या किसी संविधि को संक्षिप्त नाम देना और संविधि की उद्देशिका उल्लेखित करना आवश्यक है?

a. जी नहीं; आवश्यक नहीं है

b. केवल राज्य विधान मण्डल द्वारा आवश्यक है

c. जी हाँ, आवश्यक है

d. केवल संसद द्वारा आवश्यक है

 

135. क्या न्यायालयों को संविधियों की कमियों की पूर्ति करने का अधिकार है?

a. जी हाँ

b. प्रकरण की परिस्थितियों पर निर्भर

c. जी नहीं

d. न्यायालय के विवेक पर निर्भर

 

136. निम्नलिखित न्याय निर्णयों में से किसमें यह मार्गदर्शन दिया गया है कि प्रत्यायोजित शक्ति को आगे और प्रत्यायोजन नहीं किया जा सकता है।

a. सम्राट बनाम बनवारीलाल शर्मा, 1945 AC 14 (24) PC

b. बेनेट कोलमेन बनाम भारत संघ, AIR 1973 SC 106

c. श्री विजय लक्ष्मी राइस मिल्स बनाम आन्ध्र प्रदेश राज्य, AIR 1976 SC 1471

d. इन रि दिल्ली लॉज मामला, AIR 1951 SC 352

 

137. न्यायालयों द्वारा संविधान का अर्थान्वयन करते समय कौन-कौन से सिद्धान्तों को दृष्टिगत रखना चाहिये?

a. आभासी विधान; ग्रहण (आच्छादन); सार और मर्म; एवं पृथक्करण के सिद्धान्त

b. विवक्षित शक्तियों; विवक्षित प्रतिषेधः एवं आनुषंगिक या प्रासंगिक शक्तियों के सिद्धान्त

c. दखलकृत क्षेत्र, राज्यक्षेत्रीय सम्बन्धः एवं भविष्यलक्षी प्रत्यादेश के सिद्धान्त

d. उपरोक्त सभी

 

138. किसी संविधि/अधिनियम की उद्देशिका (preamble) का क्या अभिप्राय है?

a. संविधि/अधिनियम के प्रमुख उद्देश्यों का वर्णन

b. विधायिका के मस्तिष्क को खोलने की चाबी

c. निर्वचन की आंतरिक सहयोगी है, बशर्ते कि संविधि/अधिनियम की भाषा अस्पष्ट संदिग्ध हो

d. उपरोक्त सभी

 

139. कर विधि के कठोर निर्वचन का नियम किस किस्म का है?

a. निर्देशात्मक नियम

b. अनुल्लंघनीय नियम

c. आदेशात्मक नियम

d. उदार नियम

 

140. आदेशात्मक संविधि (mandatory statute) के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा कथन सही हैं?

a. आदेशात्मक संविधियों के उपबंधों की यथावत् पालना अनिवार्य हैं, क्योंकि अनुपालना करने हेतु विधिक बाध्यता है

b. अनुपालना नहीं करने की दशा में सामान्यतः दण्ड 14 या शास्ति का प्रावधान होता है

c. ऐसी संविधियों के उल्लंघन करने से अन्याय और बिधि-विरुद्धता होती है

d. उपरोक्त सभी

 

141. पूर्व निर्णयानुसरण (stare decisis) का अभिप्राय है:

a. पूर्ण निर्णयों का आबद्धकारी प्रभाव

b. विशिष्ट उपबंध को सामान्य उपबंध पर प्राथमिकता देना

c. न्यायालयों का कार्य विधायिका की कमियां निकालना नहीं है

d. उपरोक्त में से कोई नहीं

 

142. निम्नलिखित न्याय निर्णयों में से किसमें अभिनिर्धारित किया गया है कि प्रत्यायोजित विधान-शक्ति का धारणकर्ता व्यक्ति या निकाय अपनी इस शक्ति को आगे और उप-प्रत्यायोजित करता है तो यह कृत्य उसकी प्राधिकार की सीमा का उल्लंघन होने के परिणामस्वरूप अविधिमान्य होगा।

a. श्री विजय लक्ष्मी राइस मिल्स बनाम आन्ध्र प्रदेश राज्य, AIR 1976 SC 1471

b. इन रि दिल्ली लॉज मामला, AIR 1951 SC 352

c. बेनेट कोलमेन बनाम भारत संघ, AIR 1973 SC 106

d. सम्राट बनाम बनवारीलाल शर्मा, 1945 AC 14 (24) PC

 

143. कौन से लीडिंग केस में यह प्रतिपादित किया गया था कि संसद को मूल अधिकारों में कमी करने का कोई अधिकार नहीं है?

a. बिशेसरनाथ बनाम आयकर आयुक्त

b. रशीद अहमद बनाम एम० बी० कैराना

c. आर० डी० शेट्टी बनाम इण्टरनेशनल एयरपोर्ट ऑथोरिटी

d. मिनर्वा मिल्स लि० बनाम भारत संघ

 

144. रिष्टि के नियम का प्रतिपादन सन् 1584 में हैडन के प्रकरण में कहाँ पर किया गया था?

a. भारत

b. इंग्लैण्ड

c. अमेरिका

d. फ्रांस

 

145. निम्नलिखित के शीर्षक के सम्बन्ध में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा कथन सही हैं?

a. लघु शीर्षक में किसी अधिनियम की पहचान के लिये इसका नाम मात्र होता है जिसके अन्त में इसे पारित करने का वर्ष भी जोड़ा जाता है

b. दीर्घ शीर्षक में ऐसे अधिनियम के पश्चात् इसके उद्देश्यों की सामान्य जानकारी दी जाती हैं

c. (a) (b)

d.  तो (a) व न ही (b)

 

146. प्रत्यायोजित विधान में किसके द्वारा अपनी विधायी शक्ति कार्यपालिका को प्रत्यायोजित की जाती हैं?

a. संसद

b. विधान सभा

c. विधान मण्डल

d. (a) या (b) या (c)

 

147. जहाँ वसीयतकर्ता का आशय एक निरपेक्ष सम्पदा का अनुदान करने का है, वहाँ उस सम्पत्ति के स्वामी द्वारा लगाया गया यह प्रतिबंध कि उस सम्पत्ति का विदेशीकरण नहीं किया जायेगा, हालांकि इसको प्रतिकूलता के आधार पर निरसित किया जा सकता है, परन्तु जब प्रतिबन्ध ही वसीयतकर्ता की प्राथमिक शर्त है और जो वसीयत की पूर्णता का द्योतक है तो सम्पत्ति के स्वामी की इच्छा को वेधता का प्रभाव दिया जायेगा। उच्चतम न्यायालय द्वारा उपरोक्त मार्गदर्शन कौन से मामले में दिया गया था?

a. राजकोट म्युनिसिपल कॉरपोरेशन बनाम गुजरात राज्य, ए० आई० आर० 1997 गुजरात 46

b. टी० एम० ए० फाउण्डेशन बनाम कर्नाटक राज्य, AIR 2003 SC 355

c. राज बजरंग बहादुर सिंह बनाम ठकुराइन भक्तराज कौर, 1953 S.C.R. 232

d. असम राज्य बनाम पी० बडुआ, AIR 1969 SC 831

 

148.  कौन से कानून/संविधि को भूतलक्षी प्रभाव नहीं दिया जा सकता है?

a. प्रक्रिया कानून

b. दाण्डिक और कर कानून

c. साक्ष्य कानून

d. परिसीमा कानून

 

149. निम्नलिखित में से संविधियों के निर्वचन के "आंतरिक सहयोगी" कौन नहीं हैं?

a. व्यावृत्ति खण्ड

b. अनुसूची

c. विधायी इतिहास

d. उपरोक्त में से कोई नहीं

 

150. संविधि किसे कहते हैं?

a. विधायिका द्वारा निर्मित लिखित कानून

b. न्यायालय द्वारा घोषित निर्णय

c. प्रत्यायोजित विधान

d. रूढ़िजन्य अलिखित विधि

 

151. कर विधि और दाण्डिक विधि से सम्बन्धित कौन सी आधारभूत बात है?

a. भूतलक्षी होनी चाहिये

b. प्रकरण की परिस्थितियों पर निर्भर है कि भविष्यलक्षी होनी चाहिये या भूतलक्षी

c. भविष्यलक्षी होनी चाहिये

d. उदार निर्वचन किया जाना चाहिये

 

152. प्राचीन विलेखों/दस्तावेजों के निर्वचन के सम्बन्ध में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा कथन गलत हैं?

a. विलेखों/दस्तावेजों के शब्दों का अर्थान्वयन करने के लिये तत्कालीन/समकालीन शब्दों के अर्थानुसार ही निर्वचन किया जाना चाहिये

b. निर्वचन करते समय वर्तमान शब्दावली के अर्थों में अर्थान्वयन नहीं किया जाना चाहिये

c. निर्वचन करते समय वर्तमान शब्दावली के अर्थों में अर्थान्वयन किया जाना चाहिये

d. ऐसे विलेखों/दस्तावेजों के लिये अवधारणा की जाती हैं कि उसमें पश्चात्वर्ती हेर-फेर नहीं किया जा सकता है

 

153. संविधि के तार्किक निर्वचन के कौन-कौन से सिद्धान्त/नियम हैं?

a. सम्पूर्ण विधि को एक साथ पढ़ना, समरूप अभिव्यक्तियों का समान अर्थ होना, अमान्य से मान्य करने का अर्थान्वयन करना बेहतर, स्वर्णित नियम, एवं रिष्टि या अनिष्ट परिहार नियम

b. समन्वयपूर्ण/सामंजस्यपूर्ण अर्थान्वयन; सजाति अर्थान्वयन, साहचर्णेय ज्ञायते अर्थान्वयन, तत्कालीन व्याख्या, एवं एक वस्तु का स्पष्ट उल्लेख दूरी का अपवर्जन

c. हितपद निर्वचन, न्यायालय द्वारा कमियों की पूर्ति नहीं किया जाना, परिणामों पर विचार नहीं करना, उपबंधों को अलग अलग नहीं करना, एवं न्यायाधीश का कार्य विधि का निर्वचन करना/घोषणा करना है, कानून का निर्माण करना नहीं

d. उपरोक्त सभी

 

154. रिष्टि के नियम के सम्बन्ध में यह निष्कर्ष दिया गया कि सामान्य रूप से सभी संविधियों के निर्वचन के लिये निम्नलिखित बातों में से किस बात पर विचार करना चाहिये:

a. विधि की अधिनियमिति के पूर्व सामान्य विधि क्या थी?

b. वह रिष्टि (mischief) या दोष (defect) क्या था, जिसके लिये सामान्य विधि में कोई उपबन्ध नहीं था?

c. संसद ने क्या उपचार संकल्पित किये?

d. उपचार का वास्तविक कारण?

e. उपरोक्त सभी

 

155. अवधि के संदर्भ में संविधियों का वर्गीकरण है:

a. संसद और विधानसभा द्वारा निर्मित विधि

b. अधिनियम और अध्यादेश

c. क्षेत्रीय और अखिल भारतीय विधि

d. स्थायी और अस्थायी विधि

 

156. दुराशय (mens rea) किसे कहते हैं?

a. किसी कृत्य या लोप स्वयं से उस समय तक अपराध गठित नहीं होता है जब तक कि उसे सदोष आशय (mens rea) कारित नहीं किया गया हो

b. किसी अपराध के गठित होने के लिये कार्य (या लोप) और आपराधिक आशय दोनों के साथ-साथ मौजूद होने अनिवार्य है

c. अपराधिक कृत्य करते समय व्यक्ति का मस्तिष्क भी दोषपूर्ण होना चाहिये, क्योंकि शारीरिक कृत्य मस्तिष्क की उपज से ही फलीभूत होता है

d. उपरोक्त सभी

 

157. संविधियों के निर्वचन के "आंतरिक सहयोगी' कौन हैं?

a. संक्षिप्त नाम और विस्तृत नाम

b. उद्देशिका, पार्श्व टिप्पणी, परिभाषा/निर्वाचन खण्ड एवं स्पष्टीकरण

c. पुरन्तुक, अपवाद एवं अनुसूची

d. उपरोक्त सभी

 

158. भूतलक्षी विधि के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा कथन गलत है?

a. सामान्यतः नई विधि भूतलक्षी प्रभाव वाली हो कर भविष्यलक्षी प्रभाव वाली होती है

b. सामान्यतः कर-कानूनों का भूतलक्षी प्रवर्तन होता है

c. अगर किसी विधि को भूतलक्षी प्रभाव दिया जाना हो तो उस संविधि में ऐसे आशय के स्पष्टतः उपबंधित किया जाना चाहिये

d. दाण्डिक विधियों का कभी भी भूतलक्षी प्रवर्तन नहीं हो सकता है

 

159. विधान का कौन सा प्रत्यायोजन प्रतिषिद्ध है?

a. किसी अधिनियम के प्रवर्तन की निर्धारित अवधि से परे उस अवधि का विस्तार करने की शक्ति का प्रत्यायोजन

b. नियम बनाने की शक्तियों का प्रत्यायोजन

c. विनियम बनाने की शक्तियों का प्रत्यायोजन

d. अमुक शर्तों के साथ प्रत्यायोजन

 

160. निरसन (Repeal) के सम्बन्ध में, निम्नलिखित कथनों में से कौनसा कथन सही है?

a. निरसन में संविधि का सम्पूर्ण अस्तित्व ही समाप्त हो जाता है

b. सामान्यतः न्यायपालिका को निरसन में हस्तक्षेप या पुनर्विलोकन करने का अधिकार नहीं है

c. कुछ अस्थायी संविधियां निर्धारित अवधि की समाप्ति पर स्वतः निरसित हो जाती है

d. उपरोक्त सभी

 

161. कौन से न्याय निर्णय में यह अभिनिर्णीत किया गया कि विशेष अधिनियमिति, सामान्य अधिनियमिति पर अधिभावी प्रभाव रखती है?

a. राज बजरंग बहादुर सिह बनाम ठकुराइन भक्तराज कौर, 1953 S.C.R. 232 খালা

b. टी० एम० ए० फाउण्डेशन बनाम कर्नाटक राज्य AIR 2003 SC 355

c. असम राज्य बनाम पी० बडुआ, AIR 1969 SC 831

d. राजकोट म्युनिसिपल कॉरपोरेशन बनाम गुजरात राज्य, ए० आई० आर० 1997 गुजरात 46

 

162. संविधान को किसका दर्जा दिया जाता है:

a. पवित्र ग्रंथ

b. मूल विधि/मूलभूत दस्तावेज

c. सर्वोपरि खण्ड

d. उपरोक्त सभी

 

163. निम्नलिखित कथनों में से कौन सा कथन गलत है?

a. न्यायाधीशों का कार्य विधि की घोषणा या निर्वचन करना है कि विधि की रचना

b. अमान्य से मान्य करना बेहतर है

c. न्यायालयों को संविधियों में कमियों की पूर्ति करने का अधिकार है

d. समरूप अभिव्यक्तियां समान अर्थ रखती हैं

 

164. कौन से कानून का भूतलक्षी प्रवर्तन होगा?

a. परिसीमा से सम्बन्धित कानून

b. प्रक्रिया से सम्बन्धित कानून

c. घोषणात्मक कानून

d. उपरोक्त सभी

 

165. निम्नलिखित कथनों में कौन सा कथन गलत है?

a. नागरिक विधि एवं अन्तर्राष्ट्रीय विधि के मध्य विरोधाभास होने पर न्यायालयों को नागरिक विधि लागू करनी चाहिये

b. प्राइवेट अन्तर्राष्ट्रीय विधि का प्रमुख सामान्य सिद्धान्त यह है कि जिस देश के राज्यक्षेत्र में जो भूमि स्थित हैं, वह उसी देश की विधियों के अध्यधीन होगी

c. नागरिक विधि अन्तर्राष्ट्रीय विधि के मध्य विरोधाभास होने पर न्यायालयों को अन्तर्राष्ट्रीय विधि लागू करनी चाहिये

d. जहाँ तक अधिकारिता से सम्बन्धित उपधारणा का प्रश्न हैं यह अन्तर्राष्ट्रीय विधि के उल्लंघन के विरुद्ध उपधारणा है

 

166. "न्यायाधीश को संसद की अपीलीय न्यायालय के रूप में कार्य नहीं करना चाहिये" किसका उद्धरण है?

a. लार्ड ब्लेकबर्न

b. लार्ड विल्बरफोर्स

c. न्यायार्धीश विल्स

d. फेन्सिस बेन्नियन

 

167. भारत के संविधान के बुनियादी ढांचे में सम्मिलित हैं:

a. संसदीय प्रणाली

b. पंथ निरपेक्षता

c. न्यायिक पुनर्विलोकन

d. मूल अधिकारों का उच्चतम और उच्च न्यायालयों द्वारा प्रवर्तन

e. उपरोक्त सभी

 

168. किसी अधिनियम के कितने शीर्षक होते हैं?

a. लघु शीर्षक

b. दीर्घ शीर्षक

c. सार्वजनिक रूप से प्रचलित शीर्षक

d. (a) (b)

e. (b) (c)

 

169. दाण्डिक विधि और कर विधि के सम्बन्ध में कैसा अर्थान्वयन किया जाना चाहिये?

a. उदार अर्थान्वयन

b. सामान्य अर्थान्वयन

c. विवेकाधीन अर्थान्वयन

d. कठोर अर्थान्वयन

 

170. नैसर्गिक न्याय के सिद्धान्तों के अनुसार, किस तत्व का होना आवश्यक है?

a. प्रभावित व्यक्ति को सूचना देना

b. प्रभावित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देना

c. निष्पक्ष न्यायाधिकरण होना

d. उपरोक्त सभी

 

171. यह कौन से विधिवेत्ता का उद्धरण है कि "न्यायाधीश विधि का निर्माण नहीं कर सकते, चाहे विधि कितनी ही न्यायपूर्ण, असुविधाजनक या कठोर ही क्यों हो।"

a. न्यायाधीश विल्स

b. लार्ड ब्लेकबर्न

c. न्यायाधीश कोक

d. चिपमैन ग्रे

 

172. निर्वचन के बाह्य सहयोगी के रूप में सहायक होते हैं:

a. विधि आयोग की रिपोर्ट

b. शब्द कोष

c. वैधानिक वाद-विवाद

d. जनमत

 

173. "किसी संविधि की भाषा संदिग्ध होने के परिणामस्वरूप यदि उसके एक से अधिक अर्थ निकलते हैं तो उस अर्थ को स्वीकार करना चाहिये जो प्रयुक्त शब्दों को निष्प्रभावी नहीं बना कर उन शब्दों को निष्प्रभावी बना कर उन शब्दों को प्रभावी बनाये, अर्थात् अमान्य से मान्य करना अच्छा है।" कौन से सूत्र पर आधारित हैं?

a. ut res megis valeat quam pareat

b. ignorantia facti excusat ignorantia juris non-excusat

c. jura non-remota cause sed proxima spectatur

d. casus omissus

 

174. विलेखों/दस्तावेजों के निर्वचन के प्रमुख सिद्धान्त क्या हैं?

a. सम्पूर्ण विलेख/दस्तावेज को एक साथ पूर्ण इकाई मान कर पढ़ना चाहिये; एवं इसके रचयिता के आशय का इसके उपबंधों से साधारण स्वाभाविक अर्थ ग्रहण किया जाना चाहिये

b. विलेख/दसतावेज द्वि-अर्थी या संदिग्ध होने की दशा में, एक ऐसा अर्थ जो विलेख/दस्तावेज को प्रभावी बनाता हैं और दूसरा अर्थ जो शून्य कर देता है तो उसको प्रभावी बनाने वाले अर्थ को ग्रहण किया जाना चाहिए

c. संव्यवहार की प्रकृति को विलेख/दस्तावेज के सार और तत्व से जानना चाहिये, एवं विलेख/दस्तावेज के अधीन किये गये कृत्यों को इसकी व्याख्या में सहायक माना जायेगा

d. उपरोक्त सभी

 

175. यदि किसी अचल सम्पति के विलेख के शीर्षक और मुख्य विलेख के शब्दों में असंगति या विरोधाभास हो तो दोनों में से किसको प्राथमिकता दी जानी चाहिये?

a. मुख्य विलेख

b. शीर्षक

c. सजाति अर्थान्वयन

d. साहचर्णेय ज्ञायते अर्थान्वयन

 

176. विशेष अधिनियम और साधारण अधिनियम में विरोधाभास या विसंगति होने पर, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा कथन सही है?

a. विशेष अधिनियम, साधारण अधिनियम पर अधिभावी प्रभाव रखता है

b. जहाँ एक विशेष अधिनियम में ऐसे प्रावधान हैं जो एक पूर्ववर्ती साधारण अधिनियम की विसंगति में है, वहाँ उस साधारण अधिनियम के प्रावधानों को उस उत्तरवर्ती विशिष्ट अधिनियम के प्रावधानों के समक्ष झुकना चाहिये

c. विशेष उपबंधों और सामान्य उपबंधों में विसंगतियाँ या विरोधाभास हो तो विशेष उपबन्ध सामान्य उपबंधों को निरस्त कर देते हैं

d. उपरोक्त सभी

 

177. भारतीय दण्ड संहिता, 1860 में दुराशय (mens rea) को आवश्यक महत्व देते हुए, विभिन्त्र अपराधों को परिभाषित करते समय, विधिक प्रावधानों की भाषा में, किस शब्दावली का प्रयोग किया गया है?

a. जानबूझकर/स्वेच्छापूर्वक

b. बेईमानीपूर्वक कपटपूर्वक/साशय

c. उतावला या लापरवाही द्वारा

d. उपरोक्त सभी

 

178. उच्चतम न्यायालय ने कौन से समादेश (ruling) में यह प्रतिपादित किया कि संविधान के अनुच्छेद 29 एवं 30 का अर्थान्वयन करते समय यह ध्यान में रखना चाहिये कि इसे एकाकीपन में नहीं पढ़ा जाय, उपबंधों को सम्मिलित करने का उद्देश्य पूर्ण हो, अर्थ और प्रयोजन को पूरा करने के लिये समन्वयपूर्ण रूप से पढ़ा जाये, और इसे प्रभावी बनाया जाये।

a. राज बजरंग बहादुर सिंह बनाम ठकुराइन भक्तराज कौर, 1953 S.C.R. 232

b. टी० एम० ए० फाउण्डेशन बनाम कर्नाटक राज्य, AIR 2003 SC 355

c. राजकोट म्युनिसिपल कॉरपोरेशन बनाम गुजरात राज्य, ए० आई० आर० 1997 गुजरात 46

d. असम राज्य बनाम पी० बडुआ, AIR 1969 SC 831

 

179. "न्यायालय को संविधियों में कमियों की पूर्ति करने का अधिकार नहीं है" (casus omissus) के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा कथन सही है?

a. न्यायिक निर्वचन के माध्यम से संविधि की कमियों की पूर्ति नहीं की जा सकती है

b. न्यायालय संविधि के निर्वचन में उसका अर्थान्वयन तो कर सकते हैं, परन्तु निर्वचन से विधि की रचना नहीं कर सकते हैं

c. न्यायालय तार्किक निर्वचन की आड़ ले कर संविधि की कमी की पूर्ति का अधिकार नहीं रखते हैं

d. न्यायालय को संविधि के किसी भी उपबंध का जोड़ तोड़ करने का अधिकार नहीं है

e. उपरोक्त सभी

 

180. 'उद्देश्य' के सन्दर्भ में, संविधियों का वर्गीकरण इस प्रकार है:

a. संहिताकारी, समेकनकारी, घोषणात्मक एवं समर्थकारी विधि

b. उपचारी, अशक्तकारी, दाण्डिक एवं कर विधि

c. संशोधनकारी, व्याख्यात्मक, विधिमान्यकारी निरसनकारी विधि

d. उपरोक्त सभी

 

181. कंर विधि के अर्थान्वयन के समय यदि संदेह की स्थिति उत्पन्न हो जाये तो इसका लाभ किसको दिया जायेगा?

a. राज्य सरकार/केन्द्रीय सरकार को

b. आयकर विभाग को

c. करदाता और जनता को

d. लोक अभियोजक को

 

182. दाण्डिक विधि का अर्थान्वयन करते समय किस बात को दृष्टिगत नहीं रखा जायेगा?

a. दाण्डिक विधि परिस्थितियों के अनुसार भूतलक्षी हो सकती हैं और भविष्यलक्षी भी हो सकती हैं

b. स्पष्ट प्रावधानों के अभाव में अभियुक्त को दण्डित नहीं किया जा सकता है

c. अपराध तभी गठित होता है जब उसके कृत्य या लोप में अभियुक्त का आपराधिक आशय होता है

d. दाण्डिक विधि सुनिश्चित होती हैं, जिसका अर्थान्वयन कठोरता से किया जाता है

 

183. निर्वचन के स्वर्णिम नियम को प्रयुक्त किया जाता है ताकि:

a. संविधि के अवांछित परिणाम को रोका जा सके

b. संविधि का परिणाम संतुलित, विवेकी न्यायसंगत और युक्तियुक्त हो सके

c. संविधि के वास्तविक अभिप्राय एवं निर्वचन के परिणाम और प्रभाव को अधिक महत्व दिया जाता है

d. उपरोक्त सभी

 

184. "संविधान प्रवृत्त होने से पूर्व की एवं पश्चात् की सभी विधियाँ जो संविधान के मूल अधिकारों से विपरीत या असंगत थी या हैं, वे सभी विधियाँ उस मात्रा तक शून्य होंगी" के सूत्र के आधार पर न्यायालयों द्वारा कौन सा सिद्धान्त स्थापित किया गया है?

a. सार और मर्म का सिद्धान्त

b. आभासी विधान का सिद्धान्त

c. पृथक्करण का सिद्धान्त

d. दखलकृत क्षेत्र का सिद्धान्त

e. ग्रहण या आच्छादन का सिद्धान्त

 

185. भविष्यलक्षी प्रत्यादेश (prospective overruling) के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा कथन गलत है?

a. एक निर्णय द्वारा दूसरे निर्णय को भविष्य से निष्प्रभावी किया जाना भविष्यलक्षी प्रत्यादेश कहा जाता है

b. उच्चतम न्यायालय द्वारा आई० सी० गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य, ए० आई० आर० 1967 SC 1643 में भविष्यलक्षी प्रत्यादेश का सिद्धान्त प्रतिपादित किया गया कि मूल अधिकारों को संशोधित करने में संसद सक्षम नहीं है

c. एक निर्णय द्वारा दूसरे निर्णय को भविष्य से प्रभावी/लागू किया जाना भविष्यलक्षी प्रत्यादेश कहा जाता है

d. यह सिद्धान्त केवल भविष्य से प्रवृत्त होगा, इसका भूतलक्षी प्रभाव नहीं होगा

 

186. संविधियों के निर्वचन सम्बन्धी कौन सी उपधारणा नहीं है?

a. विधि के निरसन/निलम्बन बाबत उपधारणा

b. संविधियों की वैधानिकता की उपधारणा, एवं संविधियों के शब्दों/भाषा के सामान्य अर्थान्वयन करने बाबत उपधारणा

c. विधि विहित अधिकारों की सुरक्षा बाबत उपधारणा

d. विधि के परिवर्तन/संशोधन बाबत उपधारणा

 

187. "आप जो कुछ प्रत्यक्ष रूप से नहीं कर सकते उसे अप्रत्यक्ष रूप से भी नहीं कर सकते" के सूत्र के आधार पर न्यायालयों द्वारा कौन सा सिद्धान्त स्थापित किया गया है?

a. सार और मर्म का सिद्धान्त

b. ग्रहण या आच्छादन का सिद्धान्त

c. आभासी विधान का सिद्धान्त

d. पृथक्करण का सिद्धान्त

 

188. यह कौन से विधिवेत्ता का उद्धरण है कि "संहिताकारी कानून का तात्पर्य किसी विशिष्ट विषय-वस्तु पर सम्पूर्ण कानून की विस्तारपूर्वक अभिव्यक्ति करना होता हैं, जिसमें पूर्ववर्ती सभी विधिक प्रावधानों एवं विषयों से सम्बन्धित सामान्य कानून के नियमों को सम्मिलित करने का प्रयास प्ररूपकार द्वारा किया जाता है।

a. सामण्ड

b. ब्लैकस्टोन

c. मैक्सवैल

d. बैंथम

 

189. अधिकारिता से सम्बन्धित कौन सी प्रमुख उपधारणाँ हैं?

a. कानून के राज्य क्षेत्रातीत प्रवर्तन के विरुद्ध उपधारणा

b. कानून द्वारा राज्य को प्रभावित करने के विरुद्ध उपधारणा

c. अन्तर्राष्ट्रीय विधि के उल्लंघन के विरुद्ध उपधारणा

d. न्यायालय की स्थापित अधिकारिता को वंचित करने, नयी अधिकारिता की सृष्टि करने एवं विद्यमान अधिकारिता का विस्तार करने के विरुद्ध उप्रधारणा

e. उपरोक्त सभी

 

190. "यदि किसी अधिनियम का अवैध भाग उसके शेष भाग से (विधायिका के आशय को विफल किये बिना) पृथक् किया जा सकता है, तो केवल उसी भाग को पृथक् किया जायेगा जो असंवैधानिक हैं, जबकि अधिनियम का शेष भाग संवैधानिक बना रहेगा।" के सूत्र के आधार पर न्यायालयों द्वारा कौन सा सिद्धान्त स्थापित किया गया है?

a. सार और मर्म का सिद्धान्त (Doctrine of Pith and Substance)

b. पृथक्करण का सिद्धान्त (Doctrine of Severability)

c. आभासी विधान का सिद्धान्त (Doctrine of Colourable Legislation)

d. ग्रहण या आच्छादन का सिद्धान्त (Doctrine of Eclipse)

 

191. "नवीन विधि का प्रभाव भविष्यलक्षी होना चाहिए" कौनसे सूत्र पर आधारित है?

a. expressio unius personae vel rel est exclusio alterius

b. nallum criman sine lege, nulla peone sine lege

c. nova constitutio futuris forman imponere debet non praeteritis

d. contemporanea expositio est fortissima in lege

 

192. "यदि विधि अधिनियमित करने वाली विधायिका के कार्यक्षेत्र में विधि का मर्म आता है तो इस आधार पर ही विधि को शून्य अथवा अवैध घोषित नहीं किया जायेगा कि वह दूसरी विधायिका के क्षेत्र को भी स्पर्श कर रहा है, जो अधिनियमन करने वाली विधायिका के क्षेत्र के बाहर है" के सूत्र के आधार पर न्यायालयों द्वारा कौन सा सिद्धान्त स्थापित किया गया है?

a. आभासी विधान का सिद्धान्त

b. ग्रहण या आच्छादन का सिद्धान्त

c. सार और मर्म का सिद्धान्त

d. पृथक्करण का सिद्धान्त

 

193. संविधियों के निर्वचन के सिद्धान्त का क्या अभिप्राय है?

a. वह रीति, जिसके द्वारा न्यायालय किसी कानून के शब्दों या उपबंधों का अर्थ स्पष्ट करते हैं

b. वह प्रक्रिया, जिसके द्वारा न्यायालय द्वारा अधिनियम के उद्देश्यों और कारणों का पता लगाया जाता है

c. वह पाठ्यक्रम जिसमें कानून को निर्मित करने की रीति बतायी जाती है

d. उपरोक्त में से कोई नहीं

 

194. अर्थान्वयन साहचर्णेय ज्ञायते (noscitur a sociis) का सूत्र किस नियम से सम्बन्धित है?

a. सामंजस्यपूर्ण/समन्वयपूर्ण अर्थान्वयन नियम

b. रिष्टि नियम

c. स्वर्णिम नियम

d. शाब्दिक अर्थान्वयन नियम

 

195. दाण्डिक विधि के कठोर निर्वचन के आधार है:

a. जब तक कानून की भाषा स्पष्टतः अमुक कार्य या लोप को अपराध के रूप में अभिव्यक्त नहीं करती तब तक वह कार्य या लोप अपराध नहीं माना जायेगा एवं ही अभियुक्त को दण्डित किया जायेगा

b. अपराध के लिये प्रयुक्त शब्दों में कोई संदिग्धता हो तो उसका लाभ अभियुक्त को दिया जायेगा

c. (a) (b)

d.  तो (a) न ही (b)

 

196. क्या किसी संविधि के उद्देश्यों और कारणों का कथन (statement of objects ans reasons) संविधि के उपबंधों का निर्वचन करने में सहायक सिद्ध हो सकता है?

a. सामान्यतः नहीं

b. लेकिन विधायिका का वास्तविक उद्देश्य ज्ञात करना समीचीन हो तो निर्वचन हेतु सहायक के रूप में प्रयुक्त किया जा सकता है

c. (a) (b)

d. न तो (a) ही (b)

 

197. निर्वचन के बाह्य सहयोगी कौन होते हैं?

a. संविधि के भीतर की विषय-वस्तु

b. न्यायालय के पीठासीन अधिकारी का निजी सहायक

c. संविधि के शरीर से परे अन्य सहायक

d. न्यायालय का पीठासीन अधिकारी एवं अधिवक्ता

 

198. मोटे तौर पर निर्वचन कितने प्रकार से किये जाते हैं?

a. शाब्दिक या व्याकरणमूलक निर्वचन (Literal or grammatical interpretation)

b. तार्किक निर्वचन (Logical interpretation)

c. विवेकाधीन निर्वचन (Discretionary interpretation)

d. (a) (b)

e. बुद्धिमानी द्वारा किया गया निर्वचन (Interpre-tation by wisdom)

 

199. सशर्त विधान" किसे कहते हैं?

a. विधायिका द्वारा संविधियों को प्रवृत्त किये जाने के समय को निर्धारित करने का अधिकार कार्यपालिका पर छोड़ दिया जाता है

b. विधायिका द्वारा संविधियों को प्रवृत्त किये जाने के स्थान को निर्धारित करने का अधिकार कार्यपालिका पर छोड़ दिया जाता है

c. ऐसी संविधियों की आवश्यकता समाप्त हो जाने के पश्चात् इनको वापिस ले लिया जाता है

d. उपरोक्त सभी

 

200. विधियों का समेकन किसे कहते हैं?

a. ऐसी विधि जिसमें किसी विशिष्ट विषय-वस्तु पर सम्पूर्ण विधिक उपबंधों को एक स्थान पर, एक संविधि में एकत्रित किया जाता है

b. ऐसा विधिक उपबन्ध जो किसी उपबन्ध के सामान्य या विनिर्दिष्ट सन्देह या शंका का निवारण करता है

c. ऐसी विधि जो किसी विशिष्ट विषय-वस्तु पर सम्पूर्ण विधिक प्रावधानों की विस्तारपूर्वक अभिव्यक्ति करती हैं

d. ऐसी विधि जो किसी विधि के विद्यमान उपबन्धों को परिवर्तित, उपान्तरित, प्रतिस्थापित, जोड़ने, घटाने, हटाने या लोपित करने का प्रभाव रखती हैं

 

201. क्या न्यायालय द्वारा किसी संविधि या उसके उपबंध को असंवैधानिक घोषित किया जा सकता है?

a. जी नहीं

b. न्यायालय के विवेक पर निर्भर है

c. जी हाँ

d. प्रकरण की परिस्थितियों तथ्यों पर निर्भर है

 

202. निम्नलिखित कथनों में से कौन सा कथन गलत है?

a. सामान्यतः नयी संविधि को भूतलक्षी प्रभाव दिया जाता है

b. जो सामान्य विधि के अधीन अधिकार प्राप्त हैं, उनको निःशक्तकारी विधि प्रतिबंधित या समाप्त करती है

c. जिस विधि को अध्यारोही प्रभाव (overriding effect) दिया गया हैं, वह उन विधियों/विधिक उपबंधों पर अभिभावी रहेगी, जिन पर उसे अध्यारोही बनाया गया है

d. दो असंगत संविधियों या उपबंधों का अर्थान्वयन करते समय उत्तरवर्ती संविधि या उपबंध द्वारा पूर्ववर्ती का निरसन होना माना जायो

 

203. संविधान की उद्देशिका, संविधान के अभिन्न अंग के रूप में:

a. संशोधनीय नहीं है

b. अर्थान्वयन की दृष्टि से महत्वहीन हैं

c. संविधान की नियंत्रक हैं

d. संशोधनीय हैं

 

204. "न्यायालय को संविधियों में कमियों की पूर्ति करने का अधिकार नहीं है", निम्नलिखित में से कौन से सिद्धान्त पर आधारित है?

a. jus decere and jus dare

b. casus omissus

c. ut res megis valeat quam pareat

d.  jura non remota causa sed proxime spectatur

 

205. संविधान में प्रयुक्त शब्द "संशोधन" का निर्वचन करते समय किस बात को दृष्टिगत नहीं रखना चाहिये?

a. संविधान के अन्दर हो इसके "संशोधन" का अर्थान्वयन ढूंढ़ना चाहिये

b. इसके संशोधन का अर्थान्वयन शब्दकोषों आदि बाह्य स्रोत में ढूंढ़ना चाहिये क्योंकि संविधान का उपयोग सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों को मूर्त रूप देने के लिये इनमें आये परिवर्तन को दृष्टिगत रखते हुए किया जाता है

c. इसका प्रयोग केवल संसद द्वारा ही किया जा सकता है

d. उपरोक्त में से कोई नहीं

 

206. निम्नलिखित उपधारणाओं में से संविधियों के निर्वचन से सम्बन्धित उपधारणाएँ कौनसी हैं?

a. विधायिका द्वारा त्रुटि या कमी नहीं रखने की उपधारणा

b. विधायिका द्वारा शब्दों का दुरुपयोग नहीं करने की उपधारणा, एवं विधायिका द्वारा न्यायोचित कार्य करने की उपधारणा

c. विधायिका को विधियों, नियमों, विधिक सिद्धान्तों और न्यायिक निर्णयों का ज्ञान होने की उपधारणा

d. उपरोक्त सभी

 

207. सजाति अर्थान्वयन का अर्थ "उसी प्रकार का" होता है कि अभिव्यक्ति कौन से सूत्र पर आधारित है?

a. Statutes in pari materia

b. generalia specialibus non-derogent

c. ejusdem generis

d. noscitur a sociis

 

208. सर्वोपरि खण्ड (non-obstente clause) उपबंधित करने का प्रयोजन होता है?

a. यह उपबन्ध अन्य किसी उपबन्ध पर अभिभावी होगा और अन्य उपबन्ध कोई परिणाम नहीं निकाल सकेगा

b. जब सर्वोपरि खण्ड एवं अन्य उपबन्धों के मध्य विरोध अथवा असंगति हो तो सर्वोपरि खण्ड अन्य उपबंधों पर अभिभावी रहेगा

c. (a) (b)

d. न तो (a) व न ही (b)

 

209. नैसर्गिक न्याय के नियमों में से एक महत्वपूर्ण नियम यह भी है कि "दूसरे पक्ष को भी सुनवाई का अवसर दो" इस नियम का अपवाद कौन सा है?

a. जो मामले कार्यपालिका या प्रशासनिक आदेश की प्रकृति के होते हैं, उनमें सुनवाई के नियम की अनुपालना आवश्यक नहीं हैं, क्योंकि ऐसे मामले न्यायिक प्रकृति के नहीं माने जाते हैं

b. वे मामले जिनकी विशेष परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए उनमें तुरन्त कार्यवाही की आवश्यकता होती हैं

c. जिन कतिपय मामलों में प्रशासनिक प्राधिकारियों को विशेष विवेकाधिकार प्रदत्त किये गये हैं

d. वे मामले जिनमें सूचना को प्रकट करना लोकहित के प्रतिकूल हो

 

210. प्रारूप में प्रकाशन कराना अनिवार्य है?

a. हरला बनाम राजस्थान राज्य, AIR 1951 SC 467; एवं बी० के० श्रीनिवासन बनाम कर्नाटक राज्य, AIR 1987 SC 1059

b. भोपाल नगरपालिका बनाम एम० हसन, AIR 1972 SC 886

c. सुन्दरजस कन्हैयालाल बनाम कलक्टर, ठाणे, AIR 1930 SC 261

d. उपरोक्त में से कोई नहीं

 

211. निम्नलिखित समादेशों में से किसमें यह अभिनिर्णित किया गया कि जो प्रत्यायोजित विधान शक्ति के बाहर हैं उसे सम्बन्धित विधान-मण्डल के पटल पर रख देने मात्र से विधिमान्य नहीं बन जाता है।

a. बेनेट कोलमेन बनाम भारत संघ, AIR 1973 SC 106

b. इन रि दिल्ली लॉज मामला, AIR 1951 SC 352

c. सम्राट बनाम बनवारीलाल शर्मा, 1945 AC 14 (24) PC

d. श्री विजय लक्ष्मी राइस मिल्स बनाम आन्ध्र प्रदेश राज्य, AIR 1976 SC 1471

 

212. निम्नलिखित अधिनियमों में से कौन सा उपचारी विधि की परिधि में आता है?

a. भारतीय दण्ड संहिता, 1860

b. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872

c. न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948

d. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973

 

213. रिष्टि के नियम का प्रतिपादन कौन से मामले में हुआ था?

a. हिक बनाम रेमण्ड रैंड (1893) AC 22

b. हैडन का मामला (1584) 3 Co. Rep. 7a, p 7b: 76 ER 637

c. हिल बनाम विलियम्स हिल (पार्क लेन) लि० (1949) 2 All ER 452 (HL)

d. उपरोक्त में से कोई नहीं

 

214. "यदि कोई संविधि, जिसका उद्देश्य किसी वर्ग के व्यक्तियों को लाभ पहुंचाना हैं, में कोई प्रावधान अस्पष्ट हैं या उसके दो अर्थ निकलते हैं तो जिन में से एक उस हित का रक्षक हो और दूसरा नाशक हो तो वह अर्थ मान्य होगा जो हित की रक्षा करे। " हितप्रद निर्वचन के बारे में ये विचार किसके द्वारा व्यक्त किये गये हैं?

a. सामण्ड

b. मैक्सवैल

c. ब्लैकस्टोन

d. ग्राह्य पार्कर

 

215. कार्यों की कार्यपालिका को प्रत्यायोजित नहीं कर सकती है।

a. इन रि दिल्ली लॉज मामला, AIR 1951 SC 352

b. बेनेट कोलमेन बनाम भारत संघ, AIR 1973 SC 106

c. श्री विजय लक्ष्मी राइस मिल्स बनाम आन्ध्र प्रदेश राज्य, AIR 1976 SC 1471

d. सम्राट बनाम बनवारीलाल शर्मा, 1945 AC 14 (24) PC

 

216. संविधान में उपबंधित "राज्य के नीति निर्देशक तत्वों की भूमिका" के बारे में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा कथन असत्य है?

a. हालांकि नीति निर्देशक तत्व न्यायालय में प्रवर्तनीय नहीं हैं, फिर भी उन्हें नजरअन्दाज नहीं किया जा सकता है

b. चूंकि नीति निर्देशक तत्वों को संविधान में सम्मिलित किया गया है, अतः उन्हें संविधान के अन्य तत्वों के साथ पढ़ना चाहिये

c. चूंकि नीति निर्देशक तत्व न्यायालयों में प्रवर्तनीय नहीं हैं, उन्हें नजरअन्दाज किया जा सकता है

d. मूल अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के बीच समरसता एवं संतुलन रखा जाने की अत्यन्त आवश्यकता है

 

217. "सार और मर्म (तत्व)" (Pith and Substance) के सिद्धान्त का क्या अभिप्राय है?

a. जब किसी संविधि का एक भाग अविधिमान्य अभिनिर्धारित कर दिया जाता है, जिसे संविधि के अन्य भाग से पृथक् किया जा सकता है, तब केवल पृथक किया हुआ भाग ही असंवैधानिक घोषित किया जायेगा, जब कि शेष भाग संवैधानिक ही बना रहेगा

b. यदि विधायिका ऐसी परवर्ती विषय-वस्तु पर किसी विधान का निर्माण करती हैं जो उसकी विधायी शक्ति से बाहर है तो अपनी संवैधानिक शक्तियों का अतिक्रमण करके, प्रत्यक्ष, परोक्ष, छद्म अथवा गुप्त तरीके से भी ऐसा नहीं कर सकती हैं

c. भारत के राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त संविधान पूर्व विधियां, संविधान लागू होने पर उस मात्रा में शून्य होगी जिस सीमा तक वे मूल अधिकारों के उपबंधों से असंगत हैं; एवं राज्य ऐसी विधि निर्मित नहीं करेगा जो प्रदत्त मूल अधिकारों को छीन लेती हैं या कम कर देती हैं, तो ऐसे उल्लंघन की सीमा तक, ऐसी निर्मित विधि शून्य होगी।

d. जब कोई संविधि सारतः संविधान से प्रदत्त विधायिका की शक्तियों के अन्तर्गत हैं जिसने उसे अधिनियमित किया है तब उसे केवल इस वजह से अविधिमान्य नहीं कहा जा सकता क्योंकि उसने संविधान से प्रदत्त किसी अन्य विधायिका के क्षेत्र को भी आनुषंगिक तौर पर स्पर्श कर लिया है

 

218. 'लोकनीति एक अनियंत्रित घोड़ा है और उसकी सवारी करना खतरनाक है' किसने कहा है:

a. लार्ड मेंगनाटन ने

b. न्यायाधीश बरो

c. मुख्य न्यायाधीश ब्यामोन्ट ने

d. उपरोक्त में से कोई नहीं

 

219. "निर्वचन की कला एक उद्देश्य को दर्शाने की कला है" किसने कहा है?

a. सामण्ड

b. कीटन से

c. फ्रांसिस

d. एलेन

 

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