भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 MCQs Set-5

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

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1. कार्यवाहियां शुरु करने के लिए अपेक्षित शर्ते किन धाराओं में वर्णित है ?

a. धारा 211- धारा 221

b. धारा 210 - धारा 222

c. धारा 215 - धारा 225

d. धारा 219 - धारा 226

 

2. मजिस्ट्रेटों द्वारा अपराधों का संज्ञान किस धारा से संबंधित है?

a. धारा 211

b. धारा 210

c. धारा 215

d. धारा 219

 

3. धारा 210 के अनुसार, कौन-से मजिस्ट्रेट किसी भी अपराध का संज्ञान ले सकते हैं?

a. केवल प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट

b. केवल द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट

c. प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट और विशेषतया सशक्त किया गया द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट

d. केवल उच्च न्यायालय

 

4. धारा 210 के अनुसार, मजिस्ट्रेट किस आधार पर अपराध का संज्ञान ले सकता है?

a. केवल पुलिस रिपोर्ट पर

b. परिवाद पर, पुलिस रिपोर्ट पर, या किसी अन्य व्यक्ति से प्राप्त सूचना पर

c. केवल अभियुक्त की स्वीकृति पर

d. केवल अभियोजन पक्ष के आवेदन पर

 

5. धारा 210 के तहत, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट किसे अपराध का संज्ञान लेने के लिए सशक्त कर सकता है?

a. प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट

b. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश

c. ऐसे द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट को जिनकी क्षमता के भीतर है

d. पुलिस अधिकारी

 

6. अभियुक्त के आवेदन पर अंतरण किस धारा से संबंधित है?

a. धारा 219

b. धारा 216

c. धारा 211

d. धारा 220

 

7. धारा 211 के अनुसार, मजिस्ट्रेट द्वारा धारा 210(1)(ग) के तहत संज्ञान लेने की स्थिति में अभियुक्त को क्या अधिकार है?

a. जमानत लेने का

b. किसी अन्य मजिस्ट्रेट से जांच या विचारण कराने का

c. स्वयं मुकदमा समाप्त करने का

d. मजिस्ट्रेट को बदलने की मांग करने का कोई अधिकार नहीं होता

 

8. धारा 211 के अनुसार, अभियुक्त को साक्ष्य लेने से पहले क्या किया जाना आवश्यक है?

a. गवाह बुलाना

b. मजिस्ट्रेट द्वारा अभियुक्त से माफी मांगना

c. अभियुक्त को इत्तिला देना कि वह किसी अन्य मजिस्ट्रेट से जांच या विचारण कराने का हकदार है

d. पुलिस रिपोर्ट पढ़कर सुनाना

 

9. धारा 211 के अनुसार, अंतरित करने योग्य मजिस्ट्रेट को कौन विनिर्दिष्ट करेगा?

a. राज्य सरकार

b. पुलिस अधीक्षक

c. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट

d. अभियोजन अधिकारी

 

10. मामले मजिस्ट्रेटों के हवाले करना किस धारा से संबंधित है?

a. धारा 232

b. धारा 212

c. धारा 121

d. धारा 224 

 

11. धारा 212(1) के अनुसार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट किस स्थिति में किसी मामले को अपने अधीनस्थ मजिस्ट्रेट को सौंप सकता है?

a. आरोप तय होने के बाद

b. पुलिस जांच के बाद

c. अपराध का संज्ञान लेने के पश्चात

d. अभियुक्त की गिरफ्तारी के बाद

 

12. धारा 212(2) के अनुसार, प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट कब मामले को किसी अन्य सक्षम मजिस्ट्रेट को सौंप सकता है?

a. जब वह स्वयं जांच नहीं करना चाहता

b. जब मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट उसे इस निमित्त सशक्त करता है

c. जब अभियुक्त अनुरोध करता है

d. जब पुलिस अधिकारी आदेश दे

 

13. अपराधों का सेशन न्यायालयों द्वारा संज्ञान किस धारा से संबंधित है?

a. धारा 211

b. धारा 213

c. धारा 217

d. धारा 218

 

14. धारा 213 के अनुसार, सेशन न्यायालय कब किसी अपराध का संज्ञान ले सकता है?

a. जब अभियुक्त की स्वीकृति हो

b. जब पुलिस रिपोर्ट दाखिल हो

c. जब मजिस्ट्रेट द्वारा मामला उसे सुपुर्द किया गया हो

d. जब राज्य सरकार आदेश दे

 

15. धारा 214 के तहत, अपर सेशन न्यायाधीश को मामले सौंपने का अधिकार किसके पास है?

a. पुलिस अधीक्षक

b. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट

c. सेशन न्यायाधीश या उच्च न्यायालय

d. अभियोजन अधिकारी

 

16. लोक न्याय के विरुद्ध अपराधों के लिए और साक्ष्य में दिए गए दस्तावेजों से संबंधित अपराधों के लिए लोक सेवकों के विधिपूर्ण प्राधिकार के अवमान के लिए अभियोजन किस धारा से संबंधित है?

a. धारा 215

b. धारा 220

c. धारा 208

d. धारा 218

 

17. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 206 से 223 तक के अधीन दंडनीय अपराधों का संज्ञान किस स्थिति में लिया जा सकता है?

a. मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट पर

b. गवाहों के बयान के बाद

c. संबंधित लोक सेवक द्वारा लिखित परिवाद पर

d. पुलिस रिपोर्ट के आधार पर

 

18. धमकी आदि के मामले में गवाहों के लिए प्रक्रिया धारा से संबंधित है?

a. धारा 215

b. धारा 220

c. धारा 208

d. धारा 216

 

19. राज्य के विरुद्ध अपराधों और ऐसे अपराध को करने के आपराधिक षड्यंत्र के लिए अभियोजन………से संबंधित है?

a. धारा 215

b. धारा 217

c. धारा 208

d. धारा 216

 

20. धारा 217 की उपधारा (1) के अनुसार, राज्य के विरुद्ध अपराधों का संज्ञान लेने के लिए क्या आवश्यक है?

a. मजिस्ट्रेट की मौखिक अनुमति

b. उच्च न्यायालय की अनुमति

c. केंद्रीय या राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी

d. गवाहों का हलफनामा

 

21. धारा 217 के अंतर्गत, भारतीय न्याय संहिता की किस धारा में वर्णित दुष्प्रेरण का संज्ञान केवल पूर्व मंजूरी से लिया जा सकता है?

a. धारा 47

b. धारा 197

c. धारा 353

d. धारा 299

 

22. धारा 217 की उपधारा (2) के अनुसार, धारा 197 या धारा 353(2)/(3) के अधीन दंडनीय अपराधों का संज्ञान कौन दे सकता है?

a. केवल राज्यपाल

b. केवल सेशन न्यायालय

c. केंद्र सरकार, राज्य सरकार, या जिला मजिस्ट्रेट की पूर्व मंजूरी से

d. किसी भी मजिस्ट्रेट की अनुमति से

 

23. यदि कोई आपराधिक षड्यंत्र ऐसा है जो धारा 215 के अंतर्गत आता है, तो धारा 217 की उपधारा (3) के अनुसार क्या आवश्यक नहीं होगी?

a. पुलिस रिपोर्ट

b. उच्च न्यायालय की स्वीकृति

c. राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट की लिखित सम्मति

d. अभियुक्त का बयान

 

24. धारा 217 की उपधारा (3) में कौन-सा अपराध पूर्व लिखित सम्मति के बिना संज्ञान योग्य नहीं है?

a. हत्या

b. दो वर्ष या उससे अधिक कारावास से दंडनीय अपराध को छोड़कर अन्य षड्यंत्र

c. चोरी

d. अपहरण

 

25. न्यायाधीशों और लोक सेवकों का अभियोजन किस से संबंधित है?

a. धारा 221

b. धारा 220

c. धारा 219

d. धारा 218

 

26. धारा 218 की उपधारा (2) के अनुसार, किस स्थिति में सशस्त्र बल के सदस्य का अभियोजन किया जा सकता है?

a. जब घटना उनकी निजी जिंदगी में हुई हो

b. जब वे अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कार्य कर रहे हों या ऐसा करना तात्पर्यित हो, और केंद्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी हो

c. राज्य सरकार की आदेश से

d. न्यायालय के आदेश से

 

27. धारा 218 में किन अपराधों के लिए सरकार की पूर्व मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी?

a. कोई भी अपराध जो सरकारी दस्तावेज़ को नष्ट करना है

b. अपराध जिनकी धारा 64 76, 68-71, 74-79, 143, 199 या 200 के अंतर्गत BNSS में वर्णना है

c. हत्या या आजीवन कारावास के अपराध

d. लोकायुक्त अधिनियम द्वारा उल्लिखित अपराध

 

28. विवाह के विरुद्ध अपराधों के लिए अभियोजन किस से संबंधित है?

a. धारा 214

b. धारा 219

c. धारा 218

d. धारा 220

 

29. मानहानि के लिए अभियोजन किस से संबंधित है?

a. धारा 214

b. धारा 219

c. धारा 218

d. धारा 222

 

30. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 356 के अधीन दंडनीय अपराध का संज्ञान न्यायालय कब लेगा?

a. जब कोई भी व्यक्ति परिवाद करे

b. जब ऐसा अपराध से व्यथित व्यक्ति द्वारा परिवाद किया गया हो

c. केवल सरकारी अधिकारी की रिपोर्ट पर

d. जब केंद्रीय सरकार अनुमति दे

 

31. धारा 222 के अनुसार, यदि मानहानि का अपराध बालक, विकृत्त चित्त व्यक्ति, या ऐसी महिला के विरुद्ध किया गया है, तो परिवाद किसके द्वारा किया जा सकता है?

a. केवल पीड़ित व्यक्ति द्वारा

b. न्यायालय की अनुमति से कोई अन्य व्यक्ति कर सकता है

c. केवल पुलिस द्वारा

d. कोई परिवाद नहीं किया जा सकता

 

32. जब मानहानि का अपराध राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपाल या मंत्री के लोक कृत्यों के निर्वहन से संबंधित होता है, तब सेशन न्यायालय संज्ञान कैसे ले सकता है?

a. पीड़ित की शिकायत पर ही

b. लोक अभियोजक द्वारा किए गए लिखित परिवाद पर बिना मामला सुपुर्द किए

c. पुलिस की जांच रिपोर्ट पर

d. बिना किसी मंजूरी के स्वतः

 

33. धारा 222 के अनुसार, लोक अभियोजक द्वारा ऐसे परिवाद के लिए पूर्व मंजूरी किससे लेनी होगी?

a. केवल राज्य सरकार से

b. केवल केंद्रीय सरकार से

c. राज्य सरकार या केंद्रीय सरकार से, निर्भर करता है कि आरोपी कौन है

d. किसी से मंजूरी की आवश्यकता नहीं है

 

34. सेशन न्यायालय को धारा 222 के तहत किसी अपराध का संज्ञान कब तक लेना चाहिए?

a. अपराध के घटित होने के बाद कोई सीमा नहीं

b. छह माह के भीतर अपराध के घटित होने की तारीख से

c. एक वर्ष के भीतर

d. तीन महीने के भीतर

 

35. परिवादी की परीक्षा किस से संबंधित है?

a. धारा 222

b. धारा 223

c. धारा 225

d. धारा 224

 

36. जब मजिस्ट्रेट किसी परिवाद पर अपराध का संज्ञान लेता है, तो उसे परिवादी और साक्षियों की परीक्षा कैसे करनी चाहिए?

a. बिना शपथ के मौखिक परीक्षा लेनी चाहिए

b. शपथ पर परीक्षा करनी चाहिए और परीक्षा का सारांश लेखबद्ध करना चाहिए

c. केवल परिवादी की परीक्षा लेनी चाहिए, साक्षियों की नहीं

d. केवल लिखित परिवाद पर ही निर्णय लेना चाहिए

 

37. मजिस्ट्रेट को परिवादी या साक्षियों की परीक्षा नहीं करनी होगी यदि:

a. परिवाद लोक सेवक द्वारा उसके पदीय कर्तव्यों के दौरान किया गया हो

b. परिवाद पुलिस द्वारा किया गया हो

c. मामला सीधे अदालत में चला गया हो

d. अभियुक्त ने माफी मांगी हो

 

38. जब मजिस्ट्रेट मामला धारा 212 के अधीन किसी अन्य मजिस्ट्रेट को सौंप देता है, तो क्या नए मजिस्ट्रेट को परिवादी और साक्षियों की पुनः परीक्षा करनी आवश्यक है?

a. हाँ, हमेशा करनी होगी

b. नहीं, यह आवश्यक नहीं है

c. केवल अभियुक्त की सहमति से

d. केवल गंभीर मामलों में

 

39. यदि किसी ऐसे मजिस्ट्रेट को परिवाद किया जाता है जो उस अपराध का संज्ञान लेने के लिए सक्षम नहीं है, और वह परिवाद लिखित है, तो मजिस्ट्रेट क्या करेगा?

a. परिवाद को स्वीकार कर सुनवाई करेगा

b. परिवाद को समुचित न्यायालय में पेश करने के लिए उस भाव का पृष्ठांकन सहित लौटा देगा

c. परिवाद को नष्ट कर देगा

d. पुलिस को भेज देगा

 

40. यदि परिवाद ऐसे मजिस्ट्रेट को किया जाता है जो उस अपराध का संज्ञान लेने के लिए सक्षम नहीं है, और परिवाद लिखित नहीं है, तो मजिस्ट्रेट क्या करेगा?

a. परिवादी को उचित न्यायालय जाने का निदेश देगा

b. परिवाद को स्वीकार कर सुनवाई करेगा

c. परिवाद को खारिज कर देगा

d. पुलिस को सूचित करेगा

 

41. यदि मजिस्ट्रेट को लगता है कि अभियुक्त उस क्षेत्र से बाहर रहता है जहाँ उसकी अधिकारिता है, तो वह आदेशिका जारी करने को क्या कर सकता है?

a. तुरंत आदेशिका जारी कर सकता है

b. आदेशिका जारी करने को मुल्तवी कर सकता है और मामले की जांच कर सकता है

c. मामले को खारिज कर सकता है

d. सीधे सेशन न्यायालय को भेज सकता है

 

42. मजिस्ट्रेट अन्वेषण के लिए निदेश नहीं देगा यदि—

a. उसे लगता है कि अपराध केवल सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है

b. परिवाद किसी न्यायालय द्वारा नहीं किया गया और धारा 223 के तहत शपथ पर परीक्षा नहीं हुई

c. दोनों a और b

d. यदि मामला मामूली है

 

43. यदि मजिस्ट्रेट को लगता है कि अपराध अनन्यतः सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है, तो वह क्या करेगा?

a. मामले को स्वयं सुनाएगा

b. परिवादी और उसके साक्षियों की शपथ पर परीक्षा करेगा

c. मामले को सीधे उच्च न्यायालय भेजेगा

d. मामले को रद्द कर देगा

 

44. यदि मजिस्ट्रेट को लगता है कि कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है, तो वह क्या करेगा?

a. परिवाद को स्वीकार करेगा

b. परिवाद को खारिज कर देगा और अपने कारण संक्षेप में लिखेगा

c. मामले को उच्च न्यायालय भेज देगा

d. सीधे मामले की सुनवाई करेगा

 

45. मजिस्ट्रेट के समक्ष कार्यवाही का प्रारंभ किस अध्याय से सम्बन्धित है?

a. अध्याय 17

b. अध्याय 16

c. अध्याय 14

d. अध्याय 15

 

46. यदि मजिस्ट्रेट को लगता है कि कार्यवाही के लिए पर्याप्त आधार हैं और मामला समन-मामला प्रतीत होता है, तो वह क्या करेगा?

a. अभियुक्त को गिरफ्तारी वारंट जारी करेगा

b. अभियुक्त को समन जारी करेगा ताकि वह हाजिर हो

c. मामले को उच्च न्यायालय भेज देगा

d. अभियुक्त को माफी देगा

 

47. समन या वारंट कैसे जारी किए जा सकते हैं?

a. केवल लिखित रूप में

b. केवल व्यक्तिगत रूप से

c. इलैक्ट्रानिक माध्यम से भी जारी किए जा सकते हैं

d. केवल टेलीफोन के माध्यम से

 

48. कब तक अभियुक्त के विरुद्ध समन या वारंट जारी नहीं किया जाएगा?

a. जब तक अभियुक्त की गिरफ्तारी न हो जाए

b. जब तक अभियोजन के साक्षियों की सूची फाइल न हो जाए

c. जब तक अभियुक्त न्यायालय में उपस्थित न हो

d. जब तक पुलिस रिपोर्ट न आ जाए

 

49. धारा 227 का प्रावधान किस धारा के उपबंधों पर प्रभाव नहीं डालेगा?

a. धारा 90

b. धारा 212

c. धारा 356

d. धारा 64

 

50. मजिस्ट्रेट का अभियुक्त को वैयक्तिक हाजिरी से अभिमुक्ति दे सकना किस से संम्बन्धित है ?

a. धारा 228

b. धारा 229

c. धारा 230

d. धारा 231

 

51. छोटे अपराधों के मामले मे विशेष समन किससे संम्बन्धित है ?

a. धारा 228

b. धारा 229

c. धारा 230

d. धारा 231

 

52. यदि मजिस्ट्रेट को लगता है कि कोई मामला धारा 283 या 284 के तहत संक्षेप में निपटाया जा सकता है, तो वह अभियुक्त के लिए क्या जारी करेगा?

a. वारंट

b. विशेष समन

c. गिरफ्तारी आदेश

d. जमानत आदेश

 

53. धारा 229 के अनुसार, विशेष समन में विनिर्दिष्ट जुर्माने की अधिकतम राशि कितनी हो सकती है?

a. 1,000 रुपए

b. 2,500 रुपए

c. 5,000 रुपए

d. 10,000 रुपए

 

54.  “छोटे अपराध” से क्या अभिप्रेत है?

a. वह अपराध जिसका जुर्माना केवल 10,000 रुपए तक हो

b. वह अपराध जो केवल पाँच हजार रुपए से अधिक जुर्माने से दंडनीय हो

c. वह अपराध जो केवल पाँच हजार रुपए तक जुर्माने से दंडनीय हो, और मोटरयान अधिनियम, 1988 के अंतर्गत न हो

d. कोई भी अपराध जो जेल की सजा से दंडनीय हो

 

55. राज्य सरकार किसी मजिस्ट्रेट को कब विशेष रूप से शक्तियां दे सकती है?

a. जब मामला गंभीर हो

b. जब मामला धारा 359 के अधीन शमनीय हो या तीन माह तक की जेल या जुर्माने से दंडनीय हो

c. जब जुर्माना पाँच हजार रुपए से अधिक हो

d. जब अभियुक्त फरार हो

 

56. अभियुक्त को पुलिस रिपोर्ट या अन्य दस्तावेजों की प्रतिलिपि देना किससे सम्बंधित है ?

a. धारा 230

b. धारा 245

c. धारा 248

d. धारा 250

 

57. मजिस्ट्रेट अभियुक्त को दस्तावेजों की प्रतिलिपि देने के लिए अधिकतम कितनी अवधि ले सकता है?

a. 7 दिन

b. 14 दिन

c. 21 दिन

d. 30 दिन

 

58. निम्नलिखित में से कौन-से दस्तावेज़ मजिस्ट्रेट अभियुक्त को निःशुल्क देगा?

i. पुलिस रिपोर्ट

ii. धारा 173 के तहत प्रथम इत्तिला रिपोर्ट

iii. धारा 180(3) के तहत अभिलिखित साक्षियों के कथन

iv. धारा 183 के तहत संस्वीकृतियां

v. धारा 193(6) के तहत अन्य दस्तावेज़

a. केवल i, ii, iii

b. केवल i, ii, iv

c. सभी i, ii, iii, iv, v

d. केवल i, iii, v

 

59. सेशन न्यायलय द्वारा विचारणीय अन्य मामलो में अभियुक्त को कथनों और दस्तावेजों की प्रतिलिपियां देना किस से सम्बंधित है ?

a. धारा 235

b. धारा 232

c. धारा 231

d. धारा 234

 

60. धारा 231 के अनुसार, किस स्थिति में मजिस्ट्रेट अभियुक्त को निःशुल्क दस्तावेजों की प्रतिलिपि देगा?

a. जब मामला पुलिस रिपोर्ट पर आधारित हो

b. जब मामला अनन्यतः सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय हो

c. जब अभियुक्त दोषी साबित हो चुका हो

d. जब अभियुक्त जमानत पर हो

 

61. मजिस्ट्रेट अभियुक्त को किस दस्तावेज़ या कथनों की प्रतिलिपि निःशुल्क देगा?

i. धारा 223 या 225 के अधीन लेखबद्ध किये गए कथन

ii. धारा 180 या 183 के अधीन कथन और संस्वीकृतियां

iii. अभियोजन द्वारा निर्भर किए गए दस्तावेज़

a. केवल i और ii

b. केवल ii और iii

c. केवल i और iii

d. सभी i, ii और iii

 

62. धारा 231 के तहत, मजिस्ट्रेट किस माध्यम से दस्तावेजों की प्रतिलिपि देने पर विचार कर सकता है?

a. केवल हार्ड कॉपी

b. केवल ऑडियो रिकॉर्डिंग

c. इलेक्ट्रॉनिक प्ररूप (ई-फॉर्मेट)

d. केवल वीडियो

 

63. जब मजिस्ट्रेट को प्रतीत होता है कि अपराध अनन्यतः सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है, तो वह क्या करेगा?

a. मामले को उसी मजिस्ट्रेट के पास रखेगा

b. मामले को पुलिस को भेज देगा

c. धारा 230 या 231 के अनुपालन के बाद मामला सेशन न्यायालय को सुपुर्द करेगा

d. अभियुक्त को तुरंत रिहा कर देगा

 

64. मजिस्ट्रेट मामले के सेशन न्यायालय को सुपुर्द करने की सूचना किसे देगा?

a. अभियुक्त को

b. पुलिस अधीक्षक को

c. लोक अभियोजक को

d. उच्च न्यायालय को

 

65. सेशन न्यायालय को मामला सुपुर्द करने की प्रक्रिया कितनी अवधि के भीतर पूरी करनी होती है?

a. 30 दिन

b. 60 दिन

c. 90 दिन (नब्बे दिनों)

d. 120 दिन

 

66. मजिस्ट्रेट द्वारा 90 दिनों की अवधि में प्रक्रिया पूरी न होने पर, वह अधिकतम कितनी अवधि के लिए विस्तार कर सकता है?

a. 30 दिन

b. 60 दिन

c. 90 दिन

d. 180 दिन (एक सौ अस्सी दिनों)

 

67. अध्याय 18 किससे सम्बन्धित है?

a. आरोप

b. आरोप की अंतर्वस्तु

c. आरोपों का संयोजन

d. उपरोक्त सभी

 

68. यदि अपराध को परिभाषित करने वाली विधि द्वारा उसे कोई विशेष नाम नहीं दिया गया हो, तो आरोप में क्या किया जाएगा?

a. उस अपराध को केवल संक्षेप में लिखा जाएगा

b. उस अपराध की पूरी कानूनी परिभाषा लिखनी होगी

c. अपराध की ऐसी परिभाषा दी जाएगी जिससे अभियुक्त को आरोप की सूचना मिल सके

d. आरोप में केवल धारा का उल्लेख होगा

 

69. आरोपों की अंतर्वस्तु से सम्बंधित धारा कौन सी है ?

a. धारा 234

b. धारा 236

c. धारा 238

d. धारा 240

 

70. आरोप में किस बात का भी उल्लेख किया जाना आवश्यक होता है?

a. अभियुक्त की राय

b. उस विधि और धारा का, जिसके विरुद्ध अपराध किया गया है

c. गवाहों की सूची

d. पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई

 

71. यदि कोई व्यक्ति पूर्व में दोषसिद्ध हो चुका है और अब किसी पश्चात्वर्ती अपराध के लिए वर्धित दंड का पात्र है, तो आरोप में क्या उल्लिखित होगा?

a. केवल वर्तमान अपराध

b. केवल पिछले अपराध का विवरण

c. पूर्व दोषसिद्धि का तथ्य, तिथि और स्थान

d. इनमें से कोई नहीं

 

72. आरोप किस भाषा में लिखा जाएगा?

a. अभियुक्त की भाषा में

b. हिंदी में

c. न्यायालय की भाषा में

d. पुलिस रिपोर्ट की भाषा में

 

73. यदि कोई अभियुक्त भारतीय न्याय संहिता की धारा 118(2) के अंतर्गत आरोपित है, तो यह किसका संकेत है?

a. वह साधारण अपवादों के अंतर्गत आता है

b. धारा 122(2) द्वारा प्रतिबंध लागू नहीं होता

c. उस पर आरोप गलत है

d. उसे दोषमुक्त किया जा चुका है

 

74. क पर ख की हत्या का आरोप है। आरोप उसी स्थिति को दर्शाता है जब—

a. क का कार्य BNS 2023 की धारा 100–101 में हत्या की परिभाषा में आता है

b. साधारण अपवाद लागू होते हैं

c. धारा 101 के सभी अपवाद लागू हो जाते हैं

d. हत्या करना संदेहास्पद है

 

75. क पर आरोप है कि उसने “लोक सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार से प्रस्थापित संपत्ति के विक्रय में बाधा डाली।” यह आरोप—

a. मूल शब्दों में ही लिखा जाना चाहिए

b. परिवर्तित भाषा में लिखा जा सकता है

c. आरोपी की भाषा में लिखा जाना चाहिए

d. कानूनी भाषा का उपयोग आवश्यक नहीं

 

76. समय, स्थान और व्यक्ति के बारे में विशिष्टियां से सम्बंधित धारा कौन सी है?

a. धारा 232

b. धारा 234

c. धारा 235

d. धारा 238

 

77. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 235 के अनुसार, आरोप में किस प्रकार की जानकारी अंतर्विष्ट होनी चाहिए?

a. केवल अपराध का नाम

b. अपराध के समय, स्थान और उससे संबंधित व्यक्ति या वस्तु की पर्याप्त विशिष्टताएं

c. केवल अपराध की धारा

d. केवल अभियुक्त का नाम

 

78. ऐसे मामलों में, जहां अपराध कई तारीखों के बीच किया गया हो, पहली और अंतिम तारीख के बीच का समय अधिकतम कितना हो सकता है?

a. 3 महीने

b. 6 महीने

c. 1 वर्ष

d. 2 वर्ष

 

79. धारा 236 के अनुसार, अपराध किए जाने की "रीति" का विवरण आरोप में कब आवश्यक होता है?

a. हमेशा आवश्यक होता है

b. तभी, जब धारा 234 और 235 की विशिष्टताएं पर्याप्त सूचना नहीं देतीं

c. केवल तब, जब अभियुक्त स्वयं उसकी मांग करे

d. जब अपराध गंभीर हो

 

80. क पर वस्तु-विशेष की एक स्थान व समय पर चोरी करने का आरोप है। आरोप में—

a. चोरी की रीति अवश्य लिखनी होगी

b. रीति लिखना आवश्यक नहीं है

c. परिभाषा अवश्य लिखनी होगी

d. FIR की भाषा कॉपी करनी होगी

 

81. "क पर ख के साथ छल करने का अभियोग है" — इस स्थिति में क्या आवश्यक होगा?

a. केवल समय और स्थान का उल्लेख

b. केवल अपराध की धारा का उल्लेख

c. वह रीति उपवर्णित करनी होगी जिससे छल किया गया

d. कुछ भी अतिरिक्त नहीं

 

82. क पर मिथ्या साक्ष्य देने का अभियोग है। आरोप में—

a. साक्ष्य की पूरी सूची देनी होगी

b. वह विशेष भाग बताना होगा जो मिथ्या है

c. केवल कोर्ट का नाम लिखना होगा

d. FIR लिखना पर्याप्त है

 

83. क पर आरोप है कि उसने लोक सेवक ख को उसके कार्य में बाधित किया। आरोप में—

a. बाधा की रीति लिखना आवश्यक है

b. केवल बाधा शब्द पर्याप्त है

c. परिभाषा लिखना पर्याप्त है

d. कोई वर्णन आवश्यक नहीं

 

84. "आरोप में प्रयुक्त प्रत्येक शब्द को उस विधि में दिए गए अर्थ में समझा जाएगा" — यह प्रावधान किस धारा में है?

a. धारा 234

b. धारा 236

c. धारा 237

d. धारा 240

 

85. भारतीय न्याय संहिता की धारा 237 के अनुसार, आरोप में प्रयुक्त शब्दों का अर्थ किस आधार पर समझा जाएगा?

a. सामान्य शब्दकोश के अनुसार

b. आम बोलचाल की भाषा के अनुसार

c. उस विधि के अनुसार जिसके अधीन अपराध दंडनीय है

d. अभियुक्त की समझ के अनुसार

 

86. गलतियों का प्रभाव से सम्बंधित धारा कौन सी है?

a. धारा 233

b. धारा 235

c. धारा 238

d. धारा 240

 

87. धारा 238 के अनुसार, आरोप में की गई कोई गलती या लोप तब ही "तात्त्विक" (material) मानी जाएगी, जब:

a. न्यायालय चाहे तो

b. अभियोजन पक्ष को हानि हुई हो

c. अभियुक्त वास्तव में भुलावे में पड़ा हो और न्याय न हो पाया हो

d. गवाहों की उपस्थिति न हो

 

88. यदि “कपटपूर्वक” शब्द आरोप से छूट गया है, लेकिन क इससे भ्रमित नहीं हुआ, तो यह गलती—

a. तात्त्विक मानी जाएगी

b. अतात्त्विक (material नहीं) मानी जाएगी

c. आरोप अमान्य हो जाएगा

d. विचारण पुनः करना पड़ेगा

 

89. क पर 21 जनवरी, 2023 को खुदाबख्श की हत्या करने का आरोप है । वास्तव में हत व्यक्ति का नाम हैदरबख्श था और हत्या की तारीख 20 जनवरी, 2023 थी । क पर कभी भी एक हत्या के अतिरिक्त दूसरी किसी हत्या का आरोप नहीं लगाया गया और उसने मजिस्ट्रेट के समक्ष हुई जांच को सुना था, जिसमें हैदरबख्श के मामले का ही अनन्य रूप से निर्देश किया गया था । न्यायालय इन तथ्यों से यह अनुमान कर सकता है कि-

a. क उससे भुलावे में नहीं पड़ा था और आरोप में यह गलती तात्त्विक नहीं थी ।

b. क उससे भुलावे में पड़ा था और आरोप में यह गलती तात्त्विक थी ।

c. आरोपी निश्चित रूप से भुलावे में पड़ा

d. आरोपी ने पहले से ही उस मामले की जांच सुनी हो

 

90. भारतीय न्याय संहिता की धारा 239 के अनुसार, न्यायालय आरोप में परिवर्तन या परिवर्धन कब कर सकता है?

a. केवल विचारण शुरू होने से पहले

b. केवल विचारण के दौरान

c. निर्णय सुनाए जाने के पूर्व किसी भी समय

d. केवल अभियोजन की अनुमति से

 

91. परिवर्तित या परिवर्धित आरोप को अभियुक्त को कैसे बताया जाना चाहिए?

a. लिखित रूप में प्रदान किया जाए

b. उसके वकील को ईमेल किया जाए

c. अभियुक्त को पढ़कर सुनाया और समझाया जाए

d. केवल न्यायालय की डायरी में अंकित किया जाए

 

92. यदि आरोप में किया गया परिवर्तन ऐसा हो जिससे अभियुक्त या अभियोजक पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता, तो न्यायालय क्या कर सकता है?

a. पुनः जांच का आदेश देगा

b. आरोप खारिज कर देगा

c. विचारण को तुरंत आगे चला सकता है

d. अभियुक्त को रिहा कर देगा

 

93. धारा 240 के अनुसार, यदि आरोप में परिवर्तन या परिवर्धन किया गया है, तो अभियुक्त को क्या अधिकार है?

a. मामले को खारिज करवाने का

b. नए गवाह लाने का

c. पहले से परीक्षित साक्षियों को पुनः बुलाने और उनसे पूछताछ करने का

d. विचारण को समाप्त करने का

 

94. यदि न्यायालय साक्षी को पुनः बुलाने की अनुमति नहीं देता, तो उसे क्या करना होता है?

a. मौखिक रूप से मना कर सकता है

b. कारण लिखित रूप में दर्ज करना होता है

c. उच्च न्यायालय को सूचित करना होता है

d. अभियुक्त को दंड देना होता है

 

95. कब मजिस्ट्रेट सभी आरोपों का एक साथ विचारण कर सकता है?

a. अभियोजन की अनुमति से

b. गवाहों की सहमति से

c. जब अभियुक्त लिखित आवेदन दे और मजिस्ट्रेट को लगे कि इससे प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा

d. जब आरोप साधारण अपराध से संबंधित हों

 

96. सुभिन्न अपराधों के लिए पृथक् आरोप से सम्बंधित धारा कौन सी है?

a. धारा 241

b. धारा 248

c. धारा 245

d. धारा 246

 

97. धारा 241 के उपबंध किन धाराओं पर प्रभाव नहीं डालते?

a. धारा 230 से 233

b. धारा 250 से 253

c. धारा 242, 243, 244 और 246

d. धारा 200, 201, 202 और 203

 

98. यदि किसी व्यक्ति ने एक ही किस्म के अनेक अपराध किए हैं, जो 12 महीनों के भीतर किए गए हैं, तो एक विचारण में अधिकतम कितने अपराधों का आरोप लगाया जा सकता है?

a. 3

b. 10

c. 5

d. कोई सीमा नहीं

 

99. एक ही किस्म के अपराध माने जाते हैं जब:

a. वे एक ही व्यक्ति के विरुद्ध किए गए हों

b. वे भारतीय न्याय संहिता या अन्य विधियों की एक ही धारा के अधीन समान दंड से दंडनीय हों

c. अभियुक्त उन्हें स्वीकार करे

d. अपराध एक ही स्थान पर हुए हों

 

100. जब एक ही संव्यवहार से जुड़े एक से अधिक अपराध एक ही व्यक्ति द्वारा किए गए हों, तो:

a. प्रत्येक अपराध के लिए अलग-अलग विचारण होगा

b. सभी अपराधों के लिए एक ही विचारण में आरोप लगाया जा सकता है

c. केवल पहले अपराध का विचारण होगा

d. अपराधों को एक साथ नहीं जोड़ा जा सकता

 

101. धारा 243 के दृष्टांत के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति घोर उपहति करता है और उसी समय किसी अन्य अपराध का भी आरोपी है, तो:

a. उसे केवल घोर उपहति के लिए आरोपित किया जाएगा

b. दोनों अपराधों के लिए पृथक् आरोप लगाकर एक ही विचारण में चलाया जाएगा

c. अलग-अलग विचारण होंगे

d. दूसरे अपराध की सुनवाई बाद में होगी

 

102. धारा 243 की उपधारा (5) का प्रभाव किस धारा पर नहीं पड़ता?

a. धारा 235

b. धारा 242

c. धारा 9

d. धारा 117

 

103. क ने ख को विधिपूर्ण अभिरक्षा से छुड़ाया और कांस्टेबल ग को घोर उपहति पहुँचाई। क पर किन धाराओं में आरोप लगाया जा सकता है?

a. केवल धारा 121(2)

b. केवल धारा 263

c. धारा 121(2) तथा धारा 263 दोनों

d. कोई भी धारा लागू नहीं

 

104. क दिन में गृहभेदन करता है और उसी घर में ख की पत्नी से बलात्संग करता है। ऐसे में क पर—

a. केवल गृहभेदन का आरोप लगाया जा सकता है

b. केवल बलात्संग का आरोप लगाया जा सकता है

c. गृहभेदन और बलात्संग दोनों के लिए पृथक-पृथक आरोप लगाए जा सकते हैं

d. कोई आरोप नहीं लगाया जा सकता

 

105. यदि क जानती थी कि बालक को अरक्षित स्थान पर डालने से उसकी मृत्यु होना संभाव्य है, और फिर भी ऐसा करती है, तो यह किस मानसिक अवस्था (mental element) का संकेत है?

a. दुर्भाव (Malice)

b. अत्यधिक लापरवाही (Gross Negligence)

c. अनजाने में हुई भूल

d. कोई अपराध नहीं

 

106. यदि एक कार्य के तथ्यों से कई अपराधों में से किसी एक के होने का संदेह हो, तो अभियुक्त पर आरोप कैसे लगाए जा सकते हैं?

a. केवल एक अपराध का आरोप लगाया जाएगा

b. अभियुक्त पर सभी संभावित अपराधों के लिए आरोप लगाए जा सकते हैं और इनमें से किसी एक का भी आरोप लगाया जा सकता है

c. अभियुक्त को दोषमुक्त कर दिया जाएगा

d. केवल सबसे गंभीर अपराध का आरोप लगाया जाएगा

 

107. यदि अभियुक्त पर एक अपराध का आरोप लगाया गया हो लेकिन साक्ष्य से पता चले कि उसने भिन्न अपराध किया है, तो क्या होगा?

a. अभियुक्त को दोषमुक्त कर दिया जाएगा

b. अभियुक्त उस अपराध के लिए दोषसिद्ध किया जा सकता है, भले ही उस पर आरोप न लगाया गया हो

c. नया आरोप लगाने की जरूरत होगी

d. विचारण स्थगित कर दिया जाएगा

 

108. धारा 244 के अनुसार, जब संदेह हो कि किस अपराध की श्रेणी में कार्य आता है, तो अभियुक्त पर कैसे आरोप लगाए जा सकते हैं?

a. केवल चोरी के लिए

b. चोरी, चुराई हुई संपत्ति प्राप्त करने, आपराधिक न्यास भंग, या छल में से किसी एक या सभी के लिए

c. केवल आपराधिक न्यास भंग के लिए

d. केवल छल के लिए

 

109. धारा 246 के तहत, किन व्यक्तियों पर एक साथ आरोप लगाया जा सकता है?

a. वे जिन पर किसी अपराध का अभियोग है और वे जिन पर उस अपराध का दुष्प्रेरण या प्रयत्न करने का अभियोग है।

b. वे जिन पर कोई अपराध नहीं हुआ।

c. वे जिन पर केवल गलतफहमी के कारण आरोप हैं।

d. वे जिन पर विभिन्न प्रकार के अपराध हैं परन्तु वे एक ही समय पर हुए नहीं।

 

110. धारा 247 के अनुसार, जब एक ही व्यक्ति के विरुद्ध एक से अधिक आरोप (शीर्ष) विरचित होते हैं और उनमें से एक या अधिक के लिए दोषसिद्धि होती है, तो क्या किया जा सकता है?

a. अभियोजन अधिकारी या परिवादी न्यायालय की अनुमति से शेष आरोप वापस ले सकता है।

b. अभियोजन अधिकारी बिना न्यायालय की अनुमति के शेष आरोप वापस ले सकता है।

c. न्यायालय बिना किसी की अनुमति के दोषसिद्धि वाले आरोप भी वापस ले सकता है।

d. दोषसिद्धि होने पर सभी आरोपों को स्वतः वापस ले लिया जाएगा।

 

111. सेशन न्यायालय के समक्ष विचारण किस अध्याय से सम्बंधित है?

a. अध्याय 10

b. अध्याय 12

c. अध्याय 15

d. अध्याय 19

 

112. धारा 248 के अनुसार, सेशन न्यायालय के समक्ष प्रत्येक विचारण में अभियोजन का संचालन कौन करेगा?

a. अभियुक्त स्वयं

b. लोक अभियोजक

c. पुलिस अधिकारी

d. न्यायाधीश

 

113. धारा 249 के अनुसार, जब अभियुक्त न्यायालय के समक्ष हाजिर होता है या लाया जाता है, तो अभियोजक अपने मामले का कथन कैसे आरंभ करेगा?

a. बिना आरोप बताए सीधे साक्ष्य प्रस्तुत करके।

b. अभियुक्त के विरुद्ध लगाए गए आरोप का वर्णन करते हुए और यह बताते हुए कि वह अभियुक्त के दोष को किस साक्ष्य से साबित करेगा।

c. अभियुक्त को दोषी मानते हुए।

d. अभियोजन का विवरण देने से पहले अभियुक्त से पूछताछ करेगा।

 

114. उन्मोचन से सम्बंधित धारा कौन सी है?

a. धारा 250

b. धारा 252

c. धारा 256

d. धारा 258

 

115. धारा 250 के अनुसार, अभियुक्त उन्मोचन के लिए कब तक आवेदन कर सकता है?

a. सुपुर्दगी की तारीख से 30 दिन के भीतर।

b. सुपुर्दगी की तारीख से 60 दिन के भीतर।

c. मुकदमे के अंतिम दिन तक।

d. कभी भी।

 

116. जब न्यायाधीश अभियुक्त के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं समझता, तो वह क्या कर सकता है?

a. अभियुक्त को दोषी ठहरा सकता है।

b. अभियुक्त को उन्मोचित कर सकता है और कारणों को लिखित में देगा।

c. अभियोजन को और सबूत जुटाने का आदेश देगा।

d. मामले को लंबित रख सकता है।

 

117. आरोप विरचित करना किस धारा से सम्बंधित है ?

a. धारा 255

b. धारा 251

c. धारा 253

d. धारा 252

 

118. धारा 251 के अनुसार, यदि न्यायाधीश को लगता है कि अभियुक्त ने ऐसा अपराध किया है जो अनन्यतः सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय नहीं है, तो क्या कर सकता है?

a. अभियुक्त को दोषी ठहरा सकता है।

b. अभियुक्त के विरुद्ध आरोप विरचित कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष मामले को अंतरित कर सकता है।

c. मामले को तुरंत खारिज कर सकता है।

d. मामले को पुलिस को वापस भेज सकता है।

 

119. धारा 251 के अंतर्गत, यदि अपराध अनन्यतः उसी न्यायालय द्वारा विचारणीय है, तो न्यायाधीश कब तक आरोप लिखित रूप में विरचित करेगा?

a. सुनवाई की पहली तारीख से 30 दिन के भीतर।

b. सुनवाई की पहली तारीख से 60 दिन के भीतर।

c. सुनवाई की पहली तारीख से 90 दिन के भीतर।

d. कोई समय सीमा नहीं।

 

120. जब न्यायाधीश धारा 251(2) के तहत आरोप विरचित करता है, तो अभियुक्त को क्या करना होगा?

a. आरोप पढ़े और समझाए जाएंगे, फिर अभियुक्त से पूछा जाएगा कि क्या वह दोषी है या विचारण चाहता है।

b. अभियुक्त को बिना आरोप बताए दोषी ठहराया जाएगा।

c. अभियुक्त को तुरंत जेल भेज दिया जाएगा।

d. अभियुक्त को जमानत पर छोड़ा जाएगा।

 

121. धारा 251 के अनुसार, आरोप विरचित करने के बाद अभियुक्त को किस माध्यम से आरोप सुनाए जा सकते हैं?

a. केवल लिखित रूप में।

b. केवल श्रव्य (audio) माध्यम से।

c. शारीरिक रूप से या श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधनों द्वारा।

d. आरोप सुनाना आवश्यक नहीं।

 

122. दोषी होने का अभिवचन किस धारा से सम्बंधित है?

a. धारा 256

b. धारा 252

c. धारा 251

d. धारा 250

 

123. धारा 252 के अनुसार, यदि अभियुक्त दोषी होने का अभिवचन करता है, तो न्यायाधीश क्या करेगा?

a. अभियुक्त को तुरंत जेल भेज देगा।

b. अभिवचन को लेखबद्ध करेगा और उसके आधार पर स्वविवेकानुसार दोषसिद्ध कर सकता है।

c. अभियोजन को मामले को वापस लेने का आदेश देगा।

d. अभियुक्त को बिना सुनवाई के बरी कर देगा।

 

124. धारा 253 के अनुसार, यदि अभियुक्त दोषी होने का अभिवचन नहीं करता या विचारण का दावा करता है, तो न्यायाधीश क्या करेगा?

a. अभियुक्त को दोषी ठहरा देगा।

b. साक्षियों की परीक्षा के लिए तारीख नियत करेगा।

c. मामले को तुरंत बंद कर देगा।

d. अभियोजन को मामले को वापस लेने का आदेश देगा।

 

125. धारा 253 के तहत, अभियोजन के आवेदन पर न्यायाधीश किसके लिए आदेशिका जारी कर सकता है?

a. किसी साक्षी को हाजिर होने के लिए।

b. कोई दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने के लिए।

c. दोनों a और b

d. अभियुक्त को दोषी ठहराने के लिए।

 

126. न्यायाधीश प्रतिपरीक्षा के संदर्भ में क्या कर सकता है?

a. प्रतिपरीक्षा को स्थायी रूप से बंद कर सकता है।

b. प्रतिपरीक्षा को तब तक आस्थगित कर सकता है जब तक अन्य साक्षियों की परीक्षा पूरी न हो जाए।

c. अतिरिक्त प्रतिपरीक्षा के लिए किसी साक्षी को पुनः नहीं बुला सकता।

d. प्रतिपरीक्षा की अनुमति देना आवश्यक नहीं।

 

127. दोषमुक्ति किस धारा से सम्बंधित है?

a. धारा 255

b. धारा 256

c. धारा 258

d. धारा 260

 

128. धारा 255 के अनुसार, कब न्यायाधीश दोषमुक्ति का आदेश देगा?

a. जब अभियोजन पक्ष के साक्ष्य पर्याप्त हों।

b. जब अभियोजन का साक्ष्य लेने, अभियुक्त की परीक्षा करने, और दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद न्यायाधीश को लगे कि अभियुक्त ने अपराध नहीं किया है।

c. जब अभियुक्त दोषी होने का अभिवचन करे।

d. जब अभियोजन पक्ष अपने केस को वापस ले ले।

 

129. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि का निर्णय किस धारा से सम्बंधित है ?

a. धारा 256

b. धारा 265

c. धारा 258

d. धारा 268

 

130. धारा 258 के अनुसार, बहस और विधि प्रश्न सुनने के बाद न्यायाधीश मामले में निर्णय कब तक देगा?

a. बहस पूर्ण होने की तारीख से 15 दिन के भीतर।

b. बहस पूर्ण होने की तारीख से 30 दिन के भीतर, जिसे 45 दिन तक बढ़ाया जा सकता है।

c. बहस पूर्ण होने की तारीख से 60 दिन के भीतर।

d. निर्णय देने की कोई निश्चित अवधि नहीं है।

 

131. न्यायालय उचित कारण न मिलने पर उस व्यक्ति को कितना प्रतिकर देने का आदेश दे सकता है?

a. पाँच हजार रुपये से अधिक नहीं।

b. पाँच हजार रुपये से अधिक, जितनी राशि वह अवधारित करे।

c. दस हजार रुपये निश्चित।

d. कोई प्रतिकर नहीं।

 

132. मजिस्ट्रेटों द्वारा वारण्ट मामलों का विचारण किस अध्याय से सम्बंधित है?

a. अध्याय 20

b. अध्याय 22

c. अध्याय 24

d. अध्याय 23

 

133. धारा 261 का संबंध किस प्रक्रिया की जांच से है?

a. जमानत आदेश जारी करने से

b. आरोप पत्र को खारिज करने से

c. धारा 230 के अनुपालन की पुष्टि करने से

d. पुलिस को निर्देश देने से

 

134. जब अभियुक्त का उन्मोचन किया जाएगा किस अध्याय से सम्बंधित है?

a. धारा 262

b. धारा 265

c. धारा 269

d. धारा 270

 

135. धारा 262 के अनुसार, अभियुक्त उन्मोचन के लिए आवेदन कब कर सकता है?

a. दस्तावेज़ों की प्रतियाँ प्राप्त होने के 30 दिन बाद

b. गिरफ्तारी के दिन

c. धारा 230 के अधीन दस्तावेजों की प्रतियां मिलने की तिथि से 60 दिन के भीतर

d. विचारण की समाप्ति के बाद

 

136. धारा 263 किससे सम्बंधित है?

a. आरोप विरचित करना

b. विचारण की समाप्ति

c. आरोप पत्र को खारिज करने से

d. उपरोक्त सभी

 

137. धारा 263 के अनुसार, मजिस्ट्रेट को आरोप कब तक विरचित करना होता है?

a. विचारण की अंतिम तिथि से 30 दिन के भीतर

b. अभियुक्त की गिरफ्तारी के 90 दिन बाद

c. आरोप की पहली सुनवाई की तिथि से 60 दिन के भीतर

d. पुलिस रिपोर्ट प्राप्त होने के 15 दिन बाद

 

138. यदि अभियुक्त दोषी होने का अभिवाक् करता है, तो मजिस्ट्रेट क्या करेगा?

a. अभियुक्त को तुरंत जेल भेज देगा

b. उस अभिवाक् को लेखबद्ध करेगा और उसके आधार पर दोषसिद्ध कर सकता है

c. अभियुक्त को उच्च न्यायालय भेज देगा

d. अभियुक्त को ज़मानत पर छोड़ देगा

 

139. धारा 264 किससे संबंधित है?

a. साक्ष्य एकत्र करने से

b. जमानत याचिका दायर करने से

c. दोषी होने के अभिवाक् पर दोषसिद्धि से

d. अपील दायर करने की प्रक्रिया से

 

140. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि किससे संबंधित है?

a. धारा 271

b. धारा 272

c. धारा 273

d. धारा 275

 

141. पूर्व दोषसिद्धि के आरोप पर, यदि अभियुक्त स्वीकार नहीं करता कि उसे पहले दोषसिद्ध किया गया था, तो मजिस्ट्रेट क्या करेगा?

a. अभियुक्त को बिना साक्ष्य के दोषसिद्ध करेगा

b. अभियुक्त को दोषसिद्ध करने के पश्चात् पूर्व दोषसिद्धि के बारे में साक्ष्य लेगा और निष्कर्ष अभिलिखित करेगा

c. आरोप वापस लेगा

d. मामले को निपटाने से इनकार करेगा

 

142. धारा 272 के अनुसार, अभियुक्त को कब उन्मोचित किया जा सकता है?

a. आरोप विरचित करने के बाद ही

b. आरोप विरचित किए जाने के पूर्व किसी भी समय

c. केवल परिवादी की उपस्थिति में

d. केवल जब अपराध संज्ञेय हो

 

143. जब कार्यवाही परिवाद पर संस्थित होती है और सुनवाई के दिन परिवादी अनुपस्थित होता है, तब मजिस्ट्रेट क्या कर सकता है?

a. मामले को स्थगित कर सकता है

b. अभियुक्त को उन्मोचित कर सकता है, यदि अपराध का विधिपूर्वक शमन संभव हो या वह संज्ञेय अपराध न हो

c. परिवादी को दंडित कर सकता है

d. अभियुक्त को दोषी ठहरा सकता है

 

144. यदि मजिस्ट्रेट किस धारा के अधीन किसी मामले में यह निष्कर्ष निकालता है कि अभियुक्त दोषी नहीं है, तो वह दोषमुक्ति का आदेश अभिलिखित करेगा?

a. धारा 275

b. धारा 271

c. धारा 273

d. धारा 278

 

145. मजिस्ट्रेट प्रतिकर आदेश में किस प्रकार का दंड भी शामिल कर सकता है?

a. केवल जुर्माना

b. केवल कारावास

c. जुर्माना और तीस दिन तक का साधारण कारावास

d. कोई दंड नहीं

 

146. धारा 273(6) के अनुसार अपील किस स्थिति में की जा सकती है?

a. जब प्रतिकर की राशि ₹1000 से अधिक हो

b. जब प्रतिकर की राशि ₹2000 से अधिक हो

c. जब प्रतिकर की राशि ₹5000 से कम हो

d. जब कोई अभियुक्त दोषी हो

 

147. यदि कोई मामला अपीलनीय नहीं है, तो प्रतिकर कब दिया जाएगा?

a. आदेश के तुरंत बाद

b. आदेश की तारीख से एक माह पूरा होने के बाद

c. पुलिस अनुमति के बाद

d. मजिस्ट्रेट की अगली सुनवाई पर

 

148. मजिस्ट्रेट द्वारा समन मामलों का विचारण किन धाराओं में वर्णित है ?

a. धारा 274-282 

b. धारा 273-280

c. धारा 275-283

d. धारा 270-282

 

149. अभियोग का सारांश बताया जाना किस धारा से सम्बंधित है?

a. धारा 276

b. धारा 274

c. धारा 280

d. धारा 285

 

150. जब समन-मामले में अभियुक्त मजिस्ट्रेट के समक्ष हाजिर होता है, तो मजिस्ट्रेट उसे क्या बताएगा?

a. उसके खिलाफ कोई आरोप नहीं है

b. उस अपराध की विशिष्टियां जिनका उस पर अभियोग है

c. उसकी गिरफ्तारी की तारीख

d. उसकी सजा की संभावना

 

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