The Code Of Civil Procedure, 1908 MCQs Set-2

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

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1. अलग-अलग न्यायालयों की अधिकारिता में स्थित स्थावर संपत्ति के सम्बन्ध में वाद की संस्थिति के स्थान का प्रावधान किया गया है-

a. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 20 में

b. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 17 में

c. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 18 में

d. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 19 में

 

2. अलग-अलग शहरों में स्थित संपत्तियों के विभाजन का एक वाद कहाँ संस्थित हो सकता है-

a. ऐसे शहर में संस्थित हो सकता है जहाँ अधिकांश संपत्तियाँ / अधिकतम मूल्य की संपत्तियाँ स्थित हों

b. ऐसे शहर में संस्थित हो सकता है जहाँ प्रतिवादीगण अथवा उनमें से कोई एक निवास करता हो

c. प्रत्येक संपत्ति के लिए पृथक बाद उस शहर में संस्थित होगा जहाँ संपत्ति स्थित हो

d. ऐसे एक शहर में संस्थित हो सकता है जहाँ कोई भी संपत्ति स्थित हो

 

3. जहाँ न्यायालयों की अधिकारिता की स्थानीय सीमाएं अनिश्चित हों, वाद संस्थिति का स्थान सिविल प्रक्रिया संहिता की किस धारा के अनुसार निर्धारित किया जाएगा

a. धारा 17

b. धारा 19

c. धारा 18

d. धारा 16

 

4. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 18 किस स्थान हेतु प्रावधान करती है-

a. किसी स्थावर संपत्ति के सम्बन्ध में वाद की संस्थन का स्थान जहाँ न्यायालयों की अधिकारिता की स्थानीय सीमायें अस्पष्ट हों स्थावर

b. किसी स्थावर संपत्ति के सम्बन्ध में वाद की संस्थन का स्थान जहाँ संपत्ति किसी एक न्यायालय की अधिकारिता में स्थित हो

c. किसी स्थावर संपत्ति के सम्बन्ध में वाद की संस्थन का स्थान जहाँ संपत्ति अलग-अलग न्यायालयों की अधिकारिता में स्थित हो

d. उपरोक्त सभी

 

5. मुम्बई निवासी मोहन दिल्ली में सोहन की पिटाई करता है। सोहन मोहन पर बाद ला सकता है-

a. मुम्बई अथवा दिल्ली में से एक जगह

b. केवल मुम्बई में

c. केवल दिल्ली में

d. इनमें से कोई नहीं

 

6. ख के कब्जे वाली एक स्थावर संपत्ति भोपाल में स्थित है और दोषकर्ता लाभ के लिए निजी तौर पर इंदौर में कार्य करता है। संपत्ति के प्रति दोष के लिए क्षतिपूर्ति प्राप्त करने सम्बन्धी बाद कहाँ संस्थित किया जाएगा-

a. भोपाल अथवा इंदौर में एक जगह

b. भोपाल में

c. इंदौर में

d. इनमें से कहीं नहीं

 

7. मुम्बई निवासी 'क' दिल्ली में 'ख' के लिए अपमानजनक कथन प्रकाशित करता है। 'ख' क्षतिपूर्ति के लिए 'क' के विरूद्ध वाद कहाँ संस्थित कर सकता है?

a. दिल्ली अथवा मुम्बई किसी एक स्थान पर 

b. केवल दिल्ली में'

c. केवल मुम्बई में

d. जहाँ 'ख' स्वयं निवास करता हो

 

8. वाद एक ऐसे न्यायालय में संस्थित किया जाएगा जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमा के अंदर-

a. वादी रहता हो

b. संविदा करने हेतु स्टैम्प पत्र खरीदे गए हों

c. जहाँ बाद कारण आंशिक अथवा पूर्णरूपेण उत्पन्न न हुआ हो

d. जहाँ वाद कारण पूर्णतः अथवा आंशिक तौर पर उत्पन्न हुआ हो

 

9. संविदा भंग की क्षतिपूर्ति हेतु एक बाद किस स्थान पर संस्थित किया जा सकता है-

a. जहाँ संविदा संपन्न की जानी रही हो

b. जहाँ वादी निवास करता हो

c. जहाँ संविदा निष्पादित की गई हो

d. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों 

 

10. वाद संस्थिति के स्थान के प्रति आक्षेप को प्रथम न्यायालय में किसके मर्म के अंतर्गत स्वीकार किया जाएगा-

a. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 20

b. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 22 

c. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 21क

d. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 21 

 

11. निम्नलिखित में से क्या न्यायालय की अधिकारिता का आधार होता है?

a. विषयवस्तु

b. मौद्रिक मूल्य

c. स्थानीय सीमाएं

d. उपरोक्त सभी

 

12. सिविल प्रक्रिया संहिता के किस प्रावधान के अंतर्गत क्षेत्रीय अधिकारिता के अभाव के आधार पर एक बाद में किसी डिक्री को अपास्त करने का अधिकार वर्जित है?

a. धारा 21क

b. धारा 22

c. धारा 21

d. धारा 37

 

13. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 21 सम्बन्धित है-

a. निजी एवं नवाधिकरण अधिकारिता से

b. प्रोबेट एवं संक्षिप्त अधिकारिता से

c. आर्थिक तथा क्षेत्रीय अधिकारिता से

d. विषयवस्तु एवं निजी अधिकारिता से 

 

14. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 21 के अनुसार वाद के स्थान के प्रति आक्षेप को ग्रहण किया जा सकता है?

a. प्रथम न्यायालय के समक्ष यथासंभव शीघ्र अवसर पर 

b. किसी भी समय

c. पहली बार अपील अथवा पुनर्विचार की अवस्था में ग्रहण किया जा सकता है 

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

15. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत वाद स्थान सम्बन्धी अधिकारिता के प्रति आक्षेप को किसी अपीली अथवा पुनरीक्षण न्यायालय द्वारा तब तक स्वीकार नहीं किया जाएगा जब तक ऐसी आपत्ति को-

a. यथासंभव शीघ्र अवसर पर किया गया हो

b. और परिणामस्वरूप न्याय विफल होता रहा हो

c. प्रथम न्यायालय में न ग्रहण किया गया हो

d. जब (a), (b) तथा (c) की शर्तें पूरी की गई हो

 

16. सिविल प्रक्रिया संहिता के किस प्रावधान के अंतर्गत एक उच्च न्यायालय किसी वाद का अन्तरण कर सकता है?

a. धारा 24

b. धारा 15

c. धारा 20

d. धारा 12

 

17. धारा 24 के अंतर्गत वादों के अन्तरण का सामान्य अधिकार किसे दिया गया है-

a. जिला न्यायालय

b. उच्च न्यायालय

c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों 

d. सर्वोच्च न्यायालय

 

18. सिविल प्रक्रिया संहिता के किंस प्रावधान के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय किसी वाद का अन्तरण कर सकता है?

a. धारा 12

b. धारा 15

c. धारा 25

d. धारा 20

 

19. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 25 निम्नलिखित में से किसके लिए प्रावधान करती है?

a. जिला न्यायालय के वाद अन्तरण करने की शक्ति 

b. आयुक्त के वाद अन्तरण करने की शक्ति

c. सर्वोच्च न्यायालय के वाद अन्तरण करने की शक्ति 

d. उच्च न्यायालय के वाद अन्तरण करने की शक्ति

 

20. वाद अथवा कार्यवाही को एक से दूसरे राज्य में अन्तरित करने का आदेश किसके द्वारा दिया जा सकता है?

a. उच्च न्यायाल

b. संसद

c. केन्द्र सरकार

d. सर्वोच्च न्यायालय

 

21. वाद की संस्थिति हेतु प्रावधान सिविल प्रक्रिया संहिता की किस धारा में दिया गया है?

a. धारा 28

b. धारा 25

c. धारा 26

d. धारा 30

 

22. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 26 के अंतर्गत प्रत्येक वादपत्र में तथ्यों को किसके द्वारा साबित किया गया होना चाहिए-

a. दस्तावेज

b. मौखिक साक्ष्य

c. शपथपत्र

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

23. न्यायालय किसी भी ऐसे व्यक्ति को हाजिर होने हेतु विवश कर सकता है जिसे सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 32 के अंतर्गत समन जारी हुए हों और इस प्रयोजन से जुर्माना लगा सकता है जिसकी अधिकतम राशि होगी-

a. तीन हजार रुपए

b. पाँच हजार रुपए

c. पाँच सौ रुपए

d. एक हजार रुपए

 

24. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 32 के अंतर्गत ऐसे व्यक्ति, जिसे सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 30 के अंतर्गत समन जारी किए जा चुके हों, को हाजिर होने हेतु विवश करने के लिए न्यायालय को अधिकार है-

a. उसकी संपत्ति की कुर्की एवं बिक्री करने का 

b. अधिकतम 5,000 रुपयों का जुर्माना लगाने का

c. उसकी गिरफ्तारी का वारंट जारी करने का

d. उपरोक्त में कोई एक

 

25. सिविल प्रक्रिया संहिता में ब्याज का प्रावधान किस धारा में किया गया है-

a. धारा 35क

b. धारा 35ख

c. धारा 32

d. धारा 34

 

26. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 34 के अंतर्गत न्यायालय डिक्री की तिथि से भुगतान की तिथि अथवा उससे पहले की किसी ऐसी तिथि तक के ब्याज का आदेश दे सकता है जो उसे उचित लगे। ऐसे ब्याज की प्रतिवर्ष अधिकतम दर क्या होगी-

a. 6 प्रतिशत 

b. 12 प्रतिशत

c. 9 प्रतिशत

d. 10 प्रतिशत

 

27. "प्रत्येक पक्ष अपने खर्चे वहन करेगा" इस वाक्य का अर्थ यह है कि-

a. दोनों पक्षों को खर्चों से वंचित किया जाना है।

b. दोनों पक्ष एक दूसरे से खर्च प्राप्त करने के अधिकारी नहीं है

c. दोनों पक्ष एक दूसरे से खर्च प्राप्त करने के अधिकारी हैं।

d. दोनों पक्षों को खर्चों से वंचित नहीं किया जाना है

 

28. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत मिथ्या अथवा तंग करने वाले दावों अथवा प्रतिरक्षा के सम्बन्ध में प्रतिकरात्मक खर्चों का प्रावधान पहली बार संहिता की किस धारा के अंतर्गत किया गया है-

a. धारा 35(क)

b. धारा 34

c. धारा 35

d. धारा 35(ख)

 

29. मिथ्या या तंग करने वाले दावे या प्रतिरक्षाओं के लिए प्रतिकरात्मक खर्चे के रूप में कोई भी न्यायालय जिस रकम के संदाय का आदेश करेगा, वह रकम

a. चार हजार रुपये अथवा उसकी धन संबंधी अधिकारिता की परिसीमा तक की रकम में से, जो भी कम हो

b. पांच हजार रुपये अथवा उसकी धन संबंधी अधिकारिता की परिसीमा तक की रकम में से, जो भी कम हो से अधिक रकम नहीं होगी

c. दो हजार रुपये अथवा उसकी धन संबंधी अधिकारिता की परिसीमा तक की रकम में से, जो भी कम हो

d. तीन हजार रुपये अथवा उसकी धन संबंधी अधिकारिता की परिसीमा तक की रकम में से जो भी कम हो

 

30. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 35क के अंतर्गत प्रतिकरात्मक खर्चों की अधिकतम सीमा क्या है-

a. 10,000 रुपए

b. कोई सीमा नहीं

c. 3,000 रुपए

d. 6,000 रुपए

 

31. निम्नलिखित में से कौन सा आदेश अपील योग्य होता है?

a. धारा 35ख के अंतर्गत आदेश

b. धारा 90 के अंतर्गत आदेश

c. धारा 35 के अंतर्गत आदेश

d. धारा 35क के अंतर्गत आदेश

 

32. सिविल प्रक्रिया संहिता में धारा 35ख को 1976 के संशोधन अधिनियम द्वारा क्या प्रावधान करने हेतु जोड़ा गया है-

a. सामान्य खर्चे

b. प्रकीर्ण खर्चे

c. क्षतिपूरक खर्चे

d. बिलंब करने हेतु खर्चे

 

33. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 35ख के अंतर्गत लागू किए गए खर्चे-

a. वाद में पारित डिक्री में स्वीकार किए गए खर्चों में नहीं जोड़े जाएगें

b. यदि भुगतान न किया गया हो तो उसे व्यक्ति के विरूद्ध निष्पादनीय होंगे जिसपर खर्चे आरोपित किए गए हों

c. वाद में पारित डिक्री में स्वीकार किए गए खर्चे में जोड़ दिए जाएगें

d. केवल (b) एवं (c)

 

34. सिविल प्रक्रिया संहिता में डिक्री तथा आदेशों के निष्पादन को शासित करने वाले सिद्धांतों पर चर्चा कहाँ की गई है-

a. धारा 148क

b. धारा 148 से 1538

c. धारा 36 से 74 (मौलिक विधि) तथा आदेश 21 (प्रक्रिया

सम्बन्धी प्रावधान)

d. धारा 36 से 74 (प्रक्रिया सम्बन्धी प्रावधानं) तथा आदेश 21 (मुख्य)

 

35. डिक्री पारित करने वाले न्यायालय' को सिविल प्रक्रिया संहिता की किस धारा में परिभाषित किया गया है-

a. धारा 2(2)

b. धारा 2(3)

c. धारा 37

d. धारा 38

 

36. किसी डिक्री का निष्पादन कर सकता है-

a. जिला न्यायाधीश

b. डिक्री पारित करने वाला न्यायालय अथवा वह न्यायालय जिसे निष्पादन हेतु डिक्री प्रेषित की गई हो

c. आयुक्त

d. डिक्री पारित करने वाला न्यायालय

 

37. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत किसी डिक्री का निष्पादन किसके द्वारा किया जा सकता है-

a. जिलाधीश

b. उप-जिलाधीश

c. तहसीलदार

d. डिक्री पारित करने वाला न्यायालय

 

38. निष्पादन हेतु किसी डिक्री को नहीं भेजा जा सकता

a. भारत के बाहर केन्द्र सरकार द्वारा स्थापित अधिकृत न्यायालय को

b. किसी विदेशी न्यायालय को

c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d. न (a) न ही (b)

 

39. निम्नलिखित न्यायालय के समक्ष डिक्री के निष्पादन हेतु आवेदन प्रस्तुत की गई है-

a. जिला न्यायालय

b. प्रतिवादी के अस्थाई निवास वाले स्थानीय अधिकारिता के न्यायालय

c. डिक्री पारित करने वाले न्यायालय

d. वह न्यायालय जहाँ निष्पादन संपत्ति स्थानीय अधिकारिता के अंतर्गत उपलब्ध हो

 

40. डिक्री के निष्पादन हेतु आवेदन को एक से दूसरे न्यायालय में स्थानान्तरित किया जा सकता है यदि-

a. किसी पक्ष को लगता हो कि न्यायालय की ओर से न्याय देने में विलंब किए जाने की संभावना है।

b. यदि वादी उस न्यायालय की अधिकारिता से बाहर जा चुका हो जिसने डिक्री पारित की थी

c. यहाँ शामिल नहीं है

d. प्रतिवादी उस न्यायालय की अधिकारिता में निवास अथवा व्यापार करता हो जहाँ डिक्री को निष्पादन के लिए स्थानान्तरित किया जाना है

 

41. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 39 के प्रावधान-

a. आज्ञापक हैं न कि अनुज्ञेय

b. आज्ञापक तथा विवेकाधीन हैं

c. अनुज्ञात्मक हैं न कि आज्ञापक

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

42. डिक्री का निष्पादन करने में अक्षम न्यायालय होता है-

a. जिलाधीश का न्यायालय

b. डिक्री पारित करने वाला न्यायालय

c. न्यायालय जिसके पास इसे निष्पादन हेतु भेजा गया हो 

d. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों 

 

43. जहाँ निष्पादन के लिए एक डिक्री को किसी अन्य राज्य के न्यायालय को प्रेषित किया जाना हो वहाँ इसे किसके द्वारा प्रेषित किया जाता है-

a. डिक्री पारित करने वाला न्यायालय 

b. उच्च न्यायालय

c. जिला न्यायालय

d. उच्च न्यायालय की सहमति से डिक्री पारित करने वा न्यायालय

 

44. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है-न्यायालय, जिसने डिक्री पारित की है, इसे किसी अन्य सक्षम न्यायालय को स्थानान्तरित कर सकता है यदि -

a. निर्णीत ऋणी पश्चातवर्ती न्यायालय की अधिकारिता में व्यापार संचालित करता हो

b. निर्णीत ऋणी के पास पूर्ववर्ती न्यायालय की अधिकारिता में डिक्री की पूर्ति करने हेतु पर्याप्त कोई संपत्ति मौजूद न हो किन्तु ऐसी संपत्ति पश्चातवर्ती न्यायालय की अधिकारिता में मौजूद हो

c. डिक्री द्वारा पूर्ववर्ती न्यायालय की अधिकारिता के बाहर स्थित स्थावर संपत्ति की बिक्री का निर्देश दिया गया

d. उपरोक्त सभी

 

45. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 39 के अंतर्गत 'सक्षम अधिकारिता' शब्द संदर्भित करता है-

a. अन्तरिती न्यायालय की धन सम्बन्धी तथा क्षेत्रीय अधिकारिता को

b. अन्तरिती न्यायालय की धन सम्बन्धी अधिकारिता को

c. अन्तरिती न्यायालय की क्षेत्रीय अधिकारिता को

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

46. एक न्यायालय, जिसे निष्पादन हेतु डिक्री अन्तरित की गई हो, निष्पादन के समय?

a. कुर्की का आदेश नहीं दे सकता

b. डिक्री के अन्तरिती के कहने पर निष्पादन का आदेश नहीं दे सकता 

c. डिक्रीधारी निर्णीत ऋणी के विधिक प्रतिनिधि के विरूद्ध डिक्री का निष्पादन नहीं कर सकता

d. निष्पादन हेतु डिक्री को किसी अन्य न्यायालय नहीं भेज सकता

 

47. सिविल प्रक्रिया संहिता में 'आज्ञापत्र' सम्बन्धी प्रावधान किस धारा में किए गए हैं-

a. धारा 46

b. धारा 40

c. धारा 44क

d. धारा 45

 

48. डिक्री पारित करने वाले किसी न्यायालय द्वारा डिक्री के निष्पादन में सक्षम किसी न्यायालय को दिया गया आदेश अथवा निर्देश, ताकि वह निर्णीत ऋणी से सम्बन्धित किसी संपत्ति की कुर्की कर सके, को कहा जाता है-

a. अनुऋणी आदेश

b. मध्यवर्ती आदेश

c. एकसाथ निष्पादन 

d. आज्ञापत्र

                   

49. आज्ञापत्र का अर्थ है

a. आदेश

b. समादेश

c. न्याय प्रार्थना / आदेश 

d. उपरोक्त सभी

 

50. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 46 के अंतर्गत आज्ञापत्र को जारी किया जा सकता है-

a. निर्णीत ऋणी की संपत्ति की कुर्की करने हेतु

b. स्थानीयअधिकारिता के बाहर निवास कर रहे व्यक्तियों समन की तामील करने हेतु,

c. निर्णीत ऋणी पर एक वारंट की तामील करने हेतु 

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

51. निम्नलिखित में से कौन सा प्रावधान डिक्री के उन्मोचन, तुष्टि इत्यादि से सम्बन्धित है?

a. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 47

b. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 46

c. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 48

d. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 49

 

52. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 47 के अंतर्गत निम्न में से कौन सा प्रश्न डिक्री के निष्पादन, उन्मोचन अथवा तुष्टि से सम्बन्धित नहीं है?

a. क्या डिक्री कपटपूर्ण अथवा दुस्संधिपूर्ण है।

b. क्या डिक्री निष्पादन योग्य है

c. क्या डिक्री के निष्पादन में संपत्ति बिक्री योग्य है

d. क्या डिक्री की पूर्ण तुष्टि हो चुकी है

 

53. डिक्री निष्पादन करने वाले न्यायालय के द्वारा निम्न में से किस प्रश्न की अवधारणा की जा सकती है-

a. निष्पादन, उन्मोचन अथवा तुष्टि सम्बन्धी

b. केवल निष्पादन सम्बन्धी

c. केवल उन्मोचन सम्बन्धी

d. केवल आंशिक भुगतान सम्बन्धी

 

54. डिक्री के निष्पादन की कार्यवाही के दौरान यदि प्रश्न यह उठता है कि क्या एक व्यक्ति किसी पक्षकार का प्रतिनिधि है अथवा नहीं तो ऐसे प्रश्न की अवधारणा किसके द्वारा की जाएगी-

a. डिक्री का निष्पादन करने वाले न्यायालय द्वारा

b. डिक्री पारित करने वाले न्यायालय द्वारा

c. अपीली न्यायालय द्वारा

d. एक पृथक वाद द्वारा

 

55. एक निष्पादक न्यायालय निम्नलिखित में से किन प्रश्नों के सम्बन्ध में अवधारणा नहीं कर सकता?

a. डिक्री के संशोधन

b. डिक्री के निष्पा

c. डिक्री के उन्मोचन

d. डिक्री की तुष्टि

 

56. जब एक निर्णीत ऋणी डिक्री की पूर्ण तुष्टि के पूर्व मर जाता है तब-

a. डिक्री का निष्पादन सभी विधिक प्रतिनिधियों के विरूद्ध किया जा सकता है

b. डिक्री का निष्पादन विधिक प्रतिनिधियों के विरूद्ध नहीं   किया जा सकता

c. डिक्री का निष्पादन निर्णीत ऋणी के विधिक प्रतिनिधियों में से किसी भी एक के विरूद्ध पूरी तरह से किया जा सकता है

d. डिक्री का निष्पादन डिक्री धारक की इच्छानुसार विधिक प्रतिनिधियों की किसी भी संख्या के विरूद्ध किया जा सकता है

 

57. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निम्नलिखित में से विधिक प्रतिनिधि का सही अर्थ क्या है? 

a. कोई व्यक्ति जो मृतक की संपदा में दखल रखता हो तथा जहाँ एक पक्षकार उस व्यक्ति पर प्रतिनिधिक हैसियत में वाद प्रस्तुत करता है जिसमें इस प्रकार वादप्रस्तुत किए जाने वाले पक्ष की मृत्य पर संपदा न्यागत होती हो

b. एक व्यक्ति जो विधि के अंतर्गत मृतक की संपदा का प्रतिनिधित्व करता हो.

c. कोई व्यक्ति जो मृतक की संपदा में दखल रखता हो तथा जहाँ किसी पक्षकार पर प्रतिनिधिक हैसियत में वादप्रस्तुत किए गया हो, तो वह व्यक्ति जिसपर इस प्रकार वाद प्रस्तुत किए गए पक्षकार की मृत्यु होने पर संपदा न्यागत होती हो

d. उपरोक्त सभी

 

58. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 51 के अंतर्गत निम्न में से कौन डिक्री के निष्पादन को लागू करने की विधि नहीं है?

a. एक आयोग नियुक्त करने के द्वारा

b. एक रिसीवर नियुक्त करने के द्वारा

c. बिना कुर्की के बिक्री द्वारा

d. गिरफ्तारी तथा निरुद्धि द्वारा

 

59. संहिता की धारा 51 के अनुसार निम्नलिखित में से न्यायालय किसके द्वारा एक डिक्री का निष्पादन आदेश जारी नहीं कर सकता?

a. विशिष्ट तौर पर डिक्री की गई किसी संपत्ति की परिदान द्वारा

b. संपत्ति की कुर्की तथा बिक्री द्वारा

c. रिसीवर नियुक्त करने के द्वारा

d. पक्षकार पर समन तामील द्वारा

 

60. जहां जयपत्र किसी ऐसी अविभक्त संपदा के विभाजन के लिए है, जो शासन को राजस्व के भुगतान हेतु निर्धार्य है, वहां संपदा का विभाजन संबंधित तत्समय प्रवृत्त विधि के अनुसार किसके द्वारा किया जायेगा?

a. कलेक्टर द्वारा

b. नायब तहसीलदार द्वारा

c. नाजिर द्वारा

d. न्यायालय द्वारा नियुक्त कमिश्नर द्वारा

 

61. सिविल प्रक्रिया संहिता में डिक्री के निष्पादन हेतु किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी का प्रावधान है-

a. धारा 55 के अंतर्गत

b. धारा 53 के अंतर्गत

c. धारा 54 के अंतर्गत

d. धारा 56 के अंतर्गत

 

62. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 51 के अनुसार न्यायालय निम्नलिखित में से किन तरीकों से डिक्री के निष्पादन का आदेश नहीं दे सकता?

a. दांपत्य अधिकारों की पुर्नस्थापना हेतु डिक्री, पति/पत्नी में से किसी को सिविल कारावास में भेजने द्वारा

b. संपत्ति की कुर्की एवं बिक्री द्वारा

c. एक रिसीवर नियुक्त करने के द्वारा

d. विशिष्ट रूप से डिक्री की गई संपत्ति की परिदान द्वारा

 

63. सिविल प्रक्रिया संहिता की कौन सी धारा धन सम्बन्धी किसी डिक्री के निष्पादन में महिलाओं की गिरफ्तारी अथवा निरोध का निषेध करती है?

a. धारा 56

b. धारा 55

c. धारा 59

d. धारा 60

 

64. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत किस विवाद से सम्बन्धित किसी डिक्री के सम्बन्ध में किसी महिला को गिरफ्तार तथा सिविल कारावास में निरूद्ध नहीं किया जाएगा-

a. धन-भुगतान सम्बन्धी विवाद

b. पारिवारिक विवाद

c. वैवाहिक विवाद

d. संतानों की वैधता सम्बन्धी विवाद

 

65. महिला के विरुद्ध पारित धन के संदाय की डिक्री निष्पादित नहीं की जा सकती है-

a. यदि महिला की मृत्यु हो जाती है तो उसके विधिक प्रतिनिधियों के विरुद्ध कार्यवाही द्वारा

b. उसकी गिरफ्तारी और कारागार से निरोध द्वारा। 

c. उसकी सम्पत्ति की कुर्की तथा विक्रय द्वारा

d. एक प्रापक की नियुक्ति द्वारा |

 

66. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 56 किसी डिक्री के निष्पादन में किसकी गिरफ्तारी अथवा सिविल कारावास में निरोध को स्पष्टतौर पर प्रतिबंधित करती है-

a. किसी रोगी व्यक्ति की 

b. एक महिला की

c. एक अवयस्क की

d. उपरोक्त सभी

 

67. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निम्नलिखित में से किस आधार पर न्यायालय द्वारा किसी “निर्णीत ऋणी" के विरूद्ध गिरफ्तारी के वारंट को रद्द किया जा सकता है?

a. अपने पुत्र के विवाह में शामिल होने

b. गंभीर बीमारी

c. लोकसभा चुनावों में मतदान 

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

68. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 58 के अंतर्गत किसी व्यक्ति, जो निरूद्ध हो, को उसके वारंट में उल्लिखित धनराशि का भुगतान करने पर रिहा कर दिया जाएगा। यह भुगतान किसे किया जाएगा-

a. सिविल कारागार के भारसाधक अधिकारी को

b. न्यायालय द्वारा नियुक्त अधिकारी को

c. न्यायालय को

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

69. जहाँ डिक्री 5000 रुपए से अधिक के भुगतान से सम्बन्धित हो सिविल कारावास की अवधि होगी?

a. एक वर्ष से अनधिक

b. तीन महीने से अनधिक

c. छह महीने से अनधिक

d. नौ महीने से अनधिक

 

70. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 58 के अनुसार किस धनराशि के भुगतान के लिए जारी डिक्री के मामले में सिविल कारावास का आदेश नहीं दिया जा सकता-

a. अधिकतम 2,000 रुपए

b. अधिकतम 500 रुपए

c. अधिकतम 1,000 रुपए

d. अधिकतम 1,500 रुपए

 

71. जहाँ किसी निर्णीत ऋणी को सिविल कारावास में भेज दिया गया हो तो उसे वहाँ से रिहा किया जा सकता है-

a. राज्य सरकार द्वारा किसी छूत का रोग होने पर

b. राज्य सरकार द्वारा किसी गंभीर संक्रामक रोग होने पर

c. सुपुर्द करने वाले न्यायालय अथवा उसके किसी वरिष्ठ न्यायालय द्वारा गंभीर रोग के आधार पर

d. उपरोक्त सभी

 

72. धन के भुगतान सम्बन्धी एक डिक्री के निष्पादन में एक निर्णीत ऋणी को गिरफ्तार किया जाता है और निर्णीत ऋणी डिक्री की राशि तथा खर्चों का भुगतान गिरफ्तार करने वाले अधिकारी को कर देता है। ऐसा अधिकारी-

a. तुरंत उसे रिहा कर देगा 

b. निर्णीत ऋणी को सिविल कारावास भेज देगा 

c. निर्णीत ऋणी को न्यायालय ले जाएगा

d. उससे प्रतिभूति लेकर उसे रिहा कर देगा

 

73. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 60 के अधीन किसी डिक्री के निष्पादन में निम्नलिखित में से कौन सी संपत्ति की कुर्की तथा बिक्री नहीं की जा सकती?

a. निजी सेवाओं को कोई अधिकार

b. पारक्रम्य विलेख

c. आवास अथवा अन्य इमारतें

d. सरकारी प्रतिभूतियाँ

 

74. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत किसी डिक्री के निष्पादन में निम्नलिखित में से कौन सी संपत्ति की कुर्की नहीं की जा सकती?

a. भूमि

b. बहीखाते

c. बैंक नोट

d. चेक

 

75. किसी डिक्री के निष्पादन में निम्नलिखित में से कौन सी संपत्ति कुर्की एवं विक्रय हेतु दायी होती है?

a. भावी भरण-पोषण का अधिकार

b. बहीखाते

c. एक वचनपत्र

d. निजी सेवा के अधिकार

 

76. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत किसी डिक्री के निष्पादन में निम्नलिखित में से कौन सी संपत्ति कुर्की एवं विक्रय हेतु दायी होती है?

a. वचनपत्र

b. आवश्यक पहनने के वस्त्र

c. शिल्पकारों के औजार

d. बहीखाते

 

77. किसी डिक्री के निष्पादन में निम्नलिखित में से किस संपत्ति की कुर्की नहीं की जा सकती-

a. पेंशन

b. वचनपत्र

c. आवास अथवा अन्य भवन

d. हुण्डी

 

78. बहीखाते-

a. किसी डिक्री के निष्पादन में कुर्की एवं विक्रय हेतु दायी होते हैं

b. विधि की दृष्टि में कोई साक्ष्य नहीं होते

c. किसी डिक्री के निष्पादन में कुर्की एवं बिक्री हेतु दायी नहीं होते हैं

d. किसी वाद के निपटारे में इकलौते साक्ष्य हो सकते हैं।

 

79. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 60 के अंतर्गत किसी डिक्री के निष्पादन में निम्नलिखित में से कौन सी संपत्ति कुर्की एवं विक्रय हेतु दायी होती है?

a. बही खाते

b. छात्रवृत्ति एवं पेंशन

c. बैंक नोट, चेक, विनिमय पत्र

d. खाना पकाने के बर्तन, बिस्तर एवं पहनने के वस्त्र

 

80. क्या पहनने के आवश्यक वस्त्र किसी डिक्री के निष्पादन

हेतु कुर्की करने के दायी होते हैं?

a. न्यायालय के विवेक पर है

b. उपरोक्त में कोई नहीं

c. हाँ

d. नहीं

 

81. भरण पोषण की किसी डिक्री के निष्पादन में किसी व्यक्ति के वेतन को किस सीमा तक कुर्क किया जा सकता है-

a. दो-तिहाई

b. आधा

c. एक-चौथाई-

d. एक-तिहाई

 

82. किसी निर्णीत ऋणी की निम्नलिखित में कौन सी संपत्ति कुर्की के लिए दायी होती है-

a. बहीखाते

b. निगमों में शेयर एवं सरकारी प्रतिभूतियाँ

c. किसी महिला के धार्मिक उपयोग सम्बन्धी निजी आभूषण

d. कलाकारों के औजार तथा पशु एवं बीज का अनाज 

 

83. किसी डिक्री के निष्पादन में निम्नलिखित में से कौन सी संपत्ति कुर्की एवं विक्रय हेतु दायी नहीं होती-

a. हुंडियाँ

b. विद्युत

c. धन

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

84. कुर्क की जा सकने वाली संपत्तियाँ हैं-

a. छात्रवृत्ति एवं सरकार द्वारा पेंशनभोगी को दी गई ग्रेच्यूटी (ग) बहीखाते

b. बहीखाते

c. धन, बैंक नोट, चेक, विनिमय पत्र, हुंडियाँ, वचनपत्र

d. उपरोक्त सभी

 

85. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत किसी डिक्री के निष्पादन में निम्नलिखित में से कौन सी संपत्ति कुर्की अथवा विक्रय हेतु दायी होती है?

a. वचनपत्र

b. बहीखाते

c. क्षतिपूर्तियों के लिए वाद लाने का अधिकार

d. व्यक्तिगत सेवा का अधिकार

 

86. भरण-पोषण की किसी डिक्री के निष्पादन में किसी व्यक्ति के वेतन को किस सीमा तक कुर्क किया जा सकता है?

a. वेतन का 2/3

b. वेतन का 1/3

c. पहला एक हजार रुपया तथा शेष का 1/3

d. पहला एक हजार रुपया तथा शेष का 2/3

 

87. जहां डिक्री 5,000 (पांच हजार) रुपये से अधिक धन के संदाय के लिए है, वहां सिविल कारागार में निरोध की अवधि-

a. तीन मास

b. छः सप्ताह

c. एक मास

d. छः सप्ताह

 

88. किसी डिक्री के निष्पादन में निम्नलिखित में से किस प्रकार की संपत्ति कुर्की एवं विक्रय हेतु दायी नहीं होती है?

a. भूमि

b. निजी आभूषण, जिन्हें किसी महिला से अलग नहीं किया जा सकता

c. धन 

d. शेयर

 

89. किसी संपत्ति की कुर्की के वादनिजी अलगाव-

a. डिक्रीधारक की इच्छा पर शून्यकरणीय होता है।

b. निर्णीत ऋणी की इच्छा पर शून्यकरणीय होता है

c. आरम्भतः शून्य होता है

d. कुर्की के अंतर्गत प्रयोज्य सभी दावों के विरूद्ध शून्य होता है

 

90. जहाँ किसी डिक्री के निष्पादन में एक स्थावर संपत्ति को बेचा गया हो तथा ऐसी बिक्री पूरी हो चुकी हो, तब संपत्ति को क्रेता में कब से निहित माना जाएगा-

a. जब बिक्री पूरी हो गई हो

b. जब संपत्ति बेची गई हो

c. जम क्रेता कब्जा प्राप्त कर ले

d. न्यायालय पर निर्भर करता है

 

91. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निष्पादन के लिए निम्नलिखित में से कौन आवेदन प्रस्तुत नहीं कर सकता-

a. एक डिक्री धारक

b. विधिक प्रतिनिधि यदि डिक्री धारक की मृत्यु हो चुकी हो 

c. डिक्रीधारक के अधीन होने का दावा करने वाला व्यक्ति 969

d. निर्णीत ऋणी

 

92. धन सम्बन्धी डिक्री का निष्पादन किस प्रकार किया जा सकता है-

a. निर्णीत ऋणी की किसी संपत्ति की कुर्की तथा बिक्री द्वारा

b. निर्णीत ऋणी की गिरफ्तारी एवं कारावास में अनिश्चित अवधि की निरुद्धि द्वारा

c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों 

d. न (a) न ही (b)

 

93. जहाँ सरकार के राजस्व के भुगतान हेतु आकलन की गई किसी अविभाजित संपदा के बँटवारे की डिक्री हो वहाँ संपदा का बँटवारा तत्कालीन प्रवर्तित विधि के अधीन किसके द्वारा किया जाएगा

a. नायब तहसीलदार

b. नाजिर

c. जिलाधीश

d. न्यायालय द्वारा नियुक्त आयुक्त 

 

94. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 75 सम्बन्धित है

a. अपील के अधिकार से

b. पूर्व न्याय से

c. समन जारी करने की शक्ति 

d. कमीशन निकालने की न्यायालय की शक्ति से

 

95. एक सिविल न्यायालय निम्नलिखित में से किस मामले में कमीशन नहीं निकाल सकता-

a. बँटवारे के निष्पादन हेतु

b. किसी डिक्री के निष्पादन हेतु

c. किसी व्यक्ति के परीक्षण हेतु

d. बहीखातों के परीक्षण हेतु

 

96. न्यायालय किस हेतु कमीशन नहीं निकाल सकता

a. किसी लिपिक वर्गीय कार्यवाही संपन्न करने हेतु

b. किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी हेतु

c. किसी व्यक्ति के परीक्षण हेतु

d. बहीखातों के परीक्षण हेतु

 

97. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत एक न्यायालय कमीशन नहीं निकाल सकता-

a. किसी अंतःकालीन लाभ अथवा क्षति की राशि तय करने हेतु

b. मुद्दों के निर्धारण हेतु

c. किसी विवादग्रस्त मामले को स्पष्ट करने हेतु

d. किसी संपत्ति के बाजार मूल्य को तय करने हेतु

 

98. निम्न में से किस प्रयोजन हेतु कमीशन नहीं निकाला जाता?

a. किसी पक्ष को न्यायालय में हाजिर होने तथा दावे का जवाब देने का आदेश देने हेतु

b. बँटवारा करने हेतु

c. स्थानीय अन्वेषण करने हेतु

d. किसी व्यक्ति के परीक्षण हेतु

 

99. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 75 के अंतर्गत, न्यायालय एक कमीशन नहीं निकाल सकता-

a. संपत्ति की बिक्री करने हेतु जो न्यायालय की अभिरक्षा में नहीं है

b. किसी वैज्ञानिक, तकनीकी अथवा विशेषज्ञता युक्त

अन्वेषण संपन्न करने हेतु

c. किसी व्यक्ति के परीक्षण हेतु

d. बंटवारे हेतु

 

100. कथन को पूर्ण करें - एक न्यायालय कमीशन जारी नहीं कर सकता है-

a. साक्ष्य एकत्रित करने के लिए।

b. लेखाओं की परीक्षा या समायोजन के लिए।

c. किसी व्यक्ति की परीक्षा के लिए।

d. बंटवारे के लिए।

 

101. यह व्यवस्था कि केन्द्र सरकार द्वारा प्रस्तुत एक वादमें वादी के रूप में नामित किया जाने वाला प्राधिकरण "भारत संघ" होगा, का प्रावधान किस धारा में किया गया है-

a. 77

b. 79क

c. 78

d. 79

 

102. जैसा कि सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 79 में प्रावधान है, केन्द्र सरकार द्वारा प्रस्तुत वादकिस नाम से संस्थित किए जाने चाहिए-

a. भारत के प्रधानमंत्री

b. भारत संघ

c. भारत के राष्ट्रपति

d. भारत के महान्यायवादी

 

103. सरकार अथवा सरकारी पदासीन किसी लोकसेवक के विरूद्ध वादसंस्थित करने हेतु सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 80 के अंतर्गत नोटिस की अवधि क्या होती है-

a. 1 माह

b. 15 दिन

c. 3 माह

d. 2 माह 

 

104. सिविल प्रक्रिया संहिता की किस धारा के अंतर्गत केन्द्र अथवा राज्य सरकार के विरूद्ध वादसंस्थित करने हेतु कम से कम दो महीने पूर्व नोटिस दिए जाने की आवश्यता सम्बन्धी प्रावधान किया गया है?

a. धारा 80

b. धारा 81

c. धारा 50

d. धारा 51

 

105. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

a. तात्कालिक अथवा त्वरित अनुतोष की असंलिप्तता वाला कोई भी वाद मात्र दो महीने की नोटिस दिए बिना केन्द्र सरकार के विरूद्ध संस्थित नहीं किया जा सकता

b. भारत संघ के विरूद्ध एक डिक्री को तबतक निष्पादित नहीं किया जा सकता जब तक यह तीन माह की अवधि पूरी नहीं हो जाती है।

c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों  सही हैं

d. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों  गलत हैं।

 

106. रेलवे से सम्बन्धित एक वाद में वादी अथवा प्रतिवादी के रूप में नामित किया जाने वाला प्राधिकारी कौन होगा-

a. जिले का जिलाधीश

b. भारत संघ

c. रेलवे का महाप्रबंधक 

d. केन्द्र सरकार का कोई सचिव 

 

107. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 80 के प्रावधान--

a. विवेकाधीन हैं

b. उपरोक्त में कोई नहीं

c. आज्ञापक हैं

d. निर्देशात्मक हैं

 

108. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 80 के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन सा एक कथन सही है?

a. न्यायालय की अनुमति से नोटिस तामील किए बिना एक वादसंस्थित किया जा सकता है।

b. अत्यावश्यक अथवा तुरन्त अनुतोष के मामले में जहाँ वाद को बिना नोटिस तामील किए संस्थित करने की अनुमति दी जा चुकी हो, अंतरिम अथवा अन्यथा एकतरफा अनुतोष प्रदान किया जा सकता है

c. धारा 80 के अंतर्गत नोटिस सम्बन्धी आवश्यकता के अनुपालन के बिना कोई वादसंस्थित नहीं किया जा सकता

d. किसी अत्यावश्यक अथवा तुरन्त अनुतोष के मामले में न्यायालय की अनुमति से नोटिस तामील किए बिना एक वाद संस्थित किया जा सकता है।

 

109. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 80 के अंतर्गत नोटिस आज्ञापक होती है जब-

a. वाद किसी सहकारी समिति के विरूद्ध हो

b. वाद सरकार के विरूद्ध हो

c. वाद ग्राम पंचायत के विरूद्ध हो

d. वाद नगर निगम के विरूद्ध हो

 

110. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 80 के प्रावधान किस पर बाध्यकारी हैं-

a. जिला जज के न्यायालय पर

b. उच्च न्यायालय पर

c. सिविल न्यायाधीश के न्यायालय पर

d. उपरोक्त सभी पर

 

111. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 80 किससे सम्बन्धित है?

a. सरकार के विरूद्ध वाद संस्थन के लिए नोटिस कीआवश्यकता से

b. खर्चे सम्बन्धी आदेश से

c. विदेशी निर्णय से,

d. व्यादेश से

 

112. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 80 के अंतर्गत लिखित नोटिस दी जानी चाहिये-

a. केन्द्र सरकार के विरूद्ध मामले में भारत के राष्ट्रपति को

b. रेलवे की संलिप्तता वाले मामले में केन्द्र सरकार के विरूद्ध वाद में रेल सचिव को

c. सरकार के विरूद्ध मामले में केन्द्र सरकार के सचिव को

d. (a) तथा (c) दोनों

 

113. जहां भारत संघ अथवा किसी राज्य के विरुद्ध संबंधित अधिकारी की अधिकारिक हैसियत के अंतर्गत किसी कार्य हेतु धारा 82, दीवानी प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत कोई आज्ञप्ति पारित की जाती है, तो ऐसी किसी आज्ञप्ति पर निष्पादन तब तक जारी नहीं किया जायेग जब तक आज्ञप्ति निम्न में से वर्णित अवधि के लिए अतुष्ट न हो-

a. आज्ञप्ति की तारीख से एक वर्ष

b. आज्ञप्ति की तारीख से दो वर्ष

c. आज्ञप्ति की तारीख से तीन महीना

d. आज्ञप्ति की तारीख से छः महीना

 

114. जहाँ भारत संघ अथवा किसी राज्य के विरूद्ध सम्बद्ध अधिकारी की आधिकारिक क्षमता में किए गए कार्य के विरूद्ध एक डिक्री पारित की गई हो, सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 82 के अंतर्गत, ऐसी किसी भी डिक्री के निष्पादन आदेश तबतक जारी नहीं किए जाएगें जबतक ऐसी डिक्री न्यूनतम निर्धारित अवधि पूरी नहीं हो जाती है। यह अवधि क्या है?

a. डिक्री की तिथि से 1 वर्ष

b. डिक्री की तिथि से 2 वर्ष

c. डिक्री की तिथि से 3 माह

d. डिक्री की तिथि से 6 माह 

 

115. सिविल प्रक्रिया संहिता के किस प्रावधान के अधीन एक राजदूत पर वादसंस्थित किया जा सकता है?

a. धारा 88क

b. उसपर वादनहीं लाया जा सकता

c. धारा 86

d. धारा 88

 

116. एक व्यक्ति किसी विदेशी देश के विरूद्ध वाद ला सकता है-

a. केंन्द्र अथवा राज्य सरकार की सहमति से

b. भारत के राष्ट्रपति की सहमति से

c. राज्य सरकार की सहमति से

d. केवल केन्द्र सरकार की सहमति से

 

117. एक विदेशी सरकार पर-

a. इस प्रतिबन्ध के साथ मुकदमा दायर हो सकता है कि केन्द्र सरकार ने मौखिक सहमति न्यायालय को प्रदान किया हो

b. इस प्रतिबन्ध के साथ मुकदमा दायर हो सकता है अगर केन्द्र सरकार के सचिव ने लिखित सहमति का सर्टिफिकेट जारी किया हो।

c. मुकदमा नहीं चलाया जा सकता

d. दीवानी न्यायालयों की शक्तियों पर बिना किसी बन्धन के मुकदमा चलाया जा सकता है।

 

118. निम्नलिखित में से क्या सही है-

a. भारत में रह रहे अन्यदेशीय शत्रु कभी वाद प्रस्तुत नहीं कर सकते

b. भारत में रह रहे अन्यदेशीय शत्रु उस राज्य सरकार की अनुमति से वाद प्रस्तुत कर सकते हैं जिसकी अधिकारिता में वे निवास कर रहे हों

c. अन्यदेशीय शत्रु किसी भी न्यायालय में वाद प्रस्तुत कर सकते हैं

d. भारत में रह रहे अन्यदेशीय शत्रु केन्द्र सरकार की अनुमति से वाद प्रस्तुत कर सकते हैं।

 

119. अन्तराभिवाची वाद सम्बन्धी प्रावधान किस धारा में शामिल किया गया है?

a. 87

b. 89

c. 90

d. 88

 

120. अन्तराभिवाची वाद सम्बन्धी प्रावधान निहित हैं-

a. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश XXXIV में

b. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 88 में

c. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश XXXV में 

d. उपरोक्त (b) तथा (c) दोनों में

 

121. अन्तराभिवाची वादसंस्थित किया जा सकता है जब-

a. किसी प्लीडर (अधिवक्ता) के विरूद्ध कोई दावा हो 

b. दावा संपत्ति में दो अथवा अधिक अनाधिकार प्रवेशकर्ताओं के विरूद्ध स्थापित किया गया हो

c. वाद दो अथवा अधिक निर्धन व्यक्तियों के विरूद्ध हो 

d. ऐसा दावा दो अथवा अधिक प्रतिवादियों के विरूद्ध प्रस्तुत किया गया हो जिन्होंने किराएदार के द्वारा वास्तविक भवनस्वामी को खोजने के लिए संपत्ति की परस्पर विरोधी स्वामित्वों को स्थापित किया हो

 

122. किसी 'अन्तराभिवाची वाद' के लिए निम्न में से कौन सी शर्त आवश्यक नहीं है?

a. एक वाद अवश्य लंबित होना चाहिए जिसमें ऋण अथवा विवादित संपत्ति के लिए परस्पर विरोधी दावेदारों के अधिकारों का समुचित अधिनिर्णयन किया जा सके 

b. कोई ऋण अथवा विवादित संपत्ति अवश्य मौजूद होना चाहिए

c. ऋण अथवा विवादित संपत्ति को एक-दूसरे के विरूद्ध दावा करने वाले दो अथवा अधिक व्यक्ति अवश्य

मौजूद होने चाहिए 

d. उपरोक्त सभी

 

123. अन्तराभिवाची वादएक वाद होता है-

a. दो अधिवक्ताओं के बीच

b. ऐसे व्यक्ति द्वारा संस्थापित वाद जिसका विषयवस्तु में कोई हित न हो

c. ऐसे व्यक्ति द्वारा संस्थापित वादजिसका विषयवस्तु में कोई हित हो

d. केन्द्र सरकार के प्लीडर तथा राज्य सरकार के प्लीडर के बीच

 

124. 'A' आभूषणों का एक बक्सा 'B' जो उसके क्षेत्र का एक प्रतिष्ठित व्यक्ति है के पास रखता है। 'C' का अभिवचन है कि आभूषण 'B' ने उससे सदोष अभिप्राप्त किए थे और वह उन्हें 'B' से लेने का दावा करता है। विधिक तौर पर निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प 'B' का होगा।

a. 'A' को आभूषण लौटा दे

b. आभूषण को पुलिस के पास दे दे

c. A' और 'C' के विरुद्ध अंतराभिवाची वाद लाए 

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

125. 'क' अपने आभूषणों के डिब्बे को 'ख' के पास अपने अभिकर्ता के रूप में जमा करता है। 'ग' का आरोप है कि 'क' द्वारा उससे गलत तरीके से आभूषण हासिल किए गए थे और 'ख' से उसका दावा करता है। वहाँ 'ख'-

a. क' तथा 'ग' दोनों के विरूद्ध अन्तराभिवाची वाद प्रस्तुत कर सकता है

b. 'क' तथा 'ग' दोनों के विरूद्ध अन्तराभिवाची वाद

प्रस्तुत नहीं कर सकता

c. 'क' के विरूद्ध अन्तराभिवाची वाद प्रस्तुत कर सकता है

d. 'ग' के विरूद्ध अन्तराभिवाची वाद प्रस्तुत कर सकता है।

 

126. सिविलं प्रक्रिया संहिता की धारा.......में न्यायालय से बाहर विवाद का निपटारा से संबंधित प्रावधान निहित है-

a. 51

b. 151

c. 91

d. 89 

 

127. सिविल प्रक्रिया संहिता में धारा 89 को अन्तःस्थापित किया गया-

a. 1999 

b. 2009

c. 1993 

d. 1998

 

128. सिविल प्रक्रिया संहिता की किस धारा के अधीन न्यायालय किसी विवाद के पक्षकारों को मध्यस्थता के लिए निर्दिष्ट कर सकता है?

a. धारा 87

b. धारा 86A

c. धारा 88 

d. धारा 89

 

129. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 89(1) के अधीन न्यायालय किसी विवाद को निर्दिष्ट कर सकता है-

a. मध्यस्थता अथवा लोक अदालत को

b. पंचाट अथवा समझौता (सुलह)

c. समझौता अथवा मध्यस्थता

d. उपरोक्त सभी

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