भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 MCQs (हिंदी माध्यम)

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भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932

INDIAN PARTNERSHIP ACT, 1932

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1. भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 का अधिनियम संख्यांक क्या है?

a. 10

b. 9

c. 8

d.7

 

2. भारतीय भागीदारी अधिनियम किस दिन से लागू हुआ है?

a. 1 अक्तूबर 1932 

b. 5 अक्तूबर 1932

c. 30 अक्तूबर 1932

d. 10 अक्तूबर 1932

 

3. जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के अधिनियम में 34 की धारा 95 और पांचवी अनुसूची द्वारा (31-10-2019 से) इस अधिनियम में किन शब्दों का लोप किया गया?

a. जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय

b. संम्पूर्ण भारत

c. उपर्युक्त दोनों

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

4. फर्म का कार्य किस धारा में परिभाषित है?

a. धारा 2()

b. धारा 2()

c. धारा 2()

d. धारा 2()

 

5. एक कार्य, जिसे भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 की धारा 2() के अंतर्गत 'फर्म का कार्य', होता है-

a. भागीदारों द्वारा किया गया प्रत्येक कार्य

b. केवल ऐसे कार्य जिससे फर्म के द्वारा या विरुद्ध प्रवर्तनीय कोई अधिकार उद्भूत होता हो

c. ऐसे कार्य जो किसी ऐसे अधिकार को जन्म देते हों जो संस्था द्वारा अथवा उसके विरूद्ध प्रवर्तनीय हों

d. उपरोक्त तीनों में कोई एक

 

6. 'कारबार किस धारा में परिभाषित है?

a. धारा 2()

b. धारा 2()

c. धारा 2()

d. धारा 2()

 

7. भारतीय भागीदारी अधिनियम की धारा 2 () के अंतर्गत 'कारबार' में शामिल होते हैं-

a. प्रत्येक व्यापार तथा उपजीविका

b. प्रत्येक उपजीविका तथा वृत्ति

c. प्रत्येक व्यापार, उपजीविका तथा वृत्ति

d. प्रत्येक व्यापार एवं वृत्ति

 

8. “विहित किस धारा में परिभाषित है?

a. धारा 2()

b. धारा 2()

c. धारा 2()

d. धारा 2()

 

9. पर-व्यक्ति किस धारा में परिभाषित है?

a. धारा 2()

b. धारा 2()

c. धारा 2()

d. धारा 2()

 

10. भागीदारी की प्रकृति किस अध्याय में वर्णित है

a. अध्याय 1

b. अध्याय 2

c. अध्याय 3

d. अध्याय 4

 

11. भागीदारी, “भागीदार", "फर्म" और "फर्म नाम" की परिभाषा किस धारा में वर्णित है?

a. धारा 2

b. धारा 3

c. धारा 4

d. धारा 5

 

12. 'भागीदारी" का अर्थ है-

a. संयुक्त उपक्रम

b. व्यक्तियों के बीच ऐसे कारबार के लाभों में अंश पाने का करार है जो उन सबके द्वारा चलाया जाता है।

c.  कुछ कार्य करने हेतु व्यक्तियों के बीच कसर

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

13. निम्न में से कौन वैध भागीदारी नहीं है-

a. एक संयुक्त हिन्दू परिवार के कर्ता द्वारा एक व्यक्ति के मध्य एक समझौता के बीच चलाया गया व्यवसाय|

b. एक व्यक्ति और एक पूर्णतः विदेशी व्यक्ति के बीच एक समझौता के तहत चलाया गया व्यवसाय

c. एक व्यक्ति द्वारा चलाया गया व्यवसाय जो जब वह अपने कर्मचारियों के बीच बोनस के रूप में प्राप्त लाभ को साझा करता है।

d. उपरोक्त में से कोई नहीं

 

14. निम्नलिखित में से क्या भागीदारी का एक सशक्त किन्तु अपर्याप्त परीक्षण है-

a. लाभों का साझा किया जाना

b. हानियों का साझा किया जाना

c. उपरोक्त में कोई एक

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

15. सामान्य जनता के साथ एक व्यवसाय चलाने के लिए एक भागीदारी सृजन के लिए अपेक्षित व्यक्तियों की न्यूनतम संख्या है-

a. 2

b. 7

c. 21

d. कोई न्यूनतम संख्या अपेक्षित नहीं है।

 

16. सीमित दायित्व भागीदारी अधिनियम, 2008 के प्रवर्तन के बाद-

a. भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 निरसित हो गया है

b. भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 के प्रावधान यथातथ्यतः सीमित दायित्व भागीदारी अधिनियम पर भी लागू होते हैं

c. दोनों ही अधिनियम सह-अस्तित्व में हैं किन्तु भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 के प्रावधान, यदि अन्यथा प्रावधान किया गया हो, सीमित दायित्व भागीदारी अधिनियम, 2008 पर लागू नहीं होते

d. सीमित दायित्व भागीदारी अधिनियम, 2008 केवल महानगरों में प्रयोज्य हैं जैसा कि उसके अंतर्गत परिभाषित किया गया है, तथा भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 शेष देश पर लागू बना हुआ है।

 

17. निम्नलिखित में से कौन एक भागीदारी फर्म के सम्बन्ध में सही नहीं है।

a. एक भागीदारी फर्म कोई भिन्न विधिक व्यक्तित्व नहीं रखता सिवाय करारोपण के उद्देश्य के।

b. एक भागीदारी फर्म भागीदारी की प्रास्थिति से पृथक-पृथक विधिक अस्तित्व है।

c. एक भागीदारी फर्म यदि वह रजिस्टर्ड नहीं है तो वाद ला सकता है और ही उसके विरुद्ध वाद लाया जा सकता है।

d. भागीदार भागीदारी फर्म के खिलाफ कार्यवाही के लिए व्यक्तिगत रूप से एवं संयुक्त रूप से दायी होगा।

 

18. सीमित दायित्व वाली भागीदारी फर्म और एक भागीदारी 14 फर्म समान है, किन्तु भिन्न विधि से शासित होती है-

a. उपरोक्त कथन पूर्णतः सत्य है।

b. उपरोक्त कथन भागतः सत्य है।

c. उपरोक्त कथन पूर्णतः गलत है।

d. उपरोक्त कथन भागतः गलत है।

 

19. भागीदारी फर्म बनता है-

a. जब भागीदार व्यापार करने हेतु भागीदारी फर्म सृजित करने हेतु करार करते हैं।

b. जब भागीदारी फर्म का व्यापार प्रारम्भ होता है।

c. दोनों शर्तें आवश्यक हैं।

d. दोनों में से कोई शर्त आवश्यक नहीं है।

 

20. भागीदारी के अस्तित्व के निर्धारण हेतु परीक्षण तय करने वाला ऐतिहासिक वाद है-

a. ग्रेव बनाम स्मिथ

b. बाँध बनाम कार्वेर

c. ब्लोरियम बनाम पेल

d. कॉक्स बनाम हिकमैन

 

21. निम्नलिखित में से किस मामले में भागीदारी का अस्तित्व है-

a. कई व्यक्तियों ने इस दृष्टिकोण के साथ पुनः विक्रय के लिए संयुक्त रूप से माल खरीदा कि वे संव्यवहार से उत्पन्न होने वाले लाभ को बाँट लेंगे

b. ऐसे व्यक्ति (सह-स्वामी), जो वस्तुओं को स्वयं के बीच बाँटने के प्रयोजन से वस्तुओं की खरीद में संयुक्त प्रवेश करते हैं

c. , तथा सहमत हुए कि एक संयुक्त उपक्रम के लिए उनमें से प्रत्येक 3000 रुपए मूल्य का माल प्रेषित करेगा, उपक्रम के लाभ को उनके अलग-अलग प्रेषण की राशि के अनुसार बाँटा जाएगा

d. एक घर में दो साझा किराएदारों ने इसे किराए पर उठा दिया और किराए को बराबर-बराबर बाँट लिया

 

22. एक भागीदारी फर्म-

a. अपने भागीदारों से पृथक एक विधिक इकाई होती है

b. अपने भागीदारों से पृथक एक विधिक इकाई नहीं होती

c. एक न्यायिक व्यक्ति होती है।

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

23. निम्नलिखित में से क्या भागीदारी का एक अनिवार्य अवयव नहीं है-

a. एक करार का परिणाम

b. कारबार संचालन हेतु संगठन

c. सभी अथवा उनमें से किसी एक के द्वारा सभी के लिए कार्य करने द्वारा संचालित

d. पृथक विधिक इकाई

 

24. भागीदारी अधिनियम की धारा 4 के अनुसार निम्नलिखित में से क्या भागीदारी गठित करने हेतु एक अनिवार्य आवश्यकता नहीं है?

a. कारबार संचालन हेतु एक करार

b. लाभों का बँटवारा

c. हानियों को बँटवारा

d. व्यापार का संचालन सभी अथवा उनमें से किसी एक के द्वारा सभी के लिए

 

25. भारतीय भागीदारी अधिनियम की धारा 5 के अनुसार, भागीदारी का सम्बन्ध उत्पन्न होता है-

a. प्रास्थिति से

b. संविदा से

c. संविधि से

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

26. भागीदारी के अस्तित्व का अवधारण करने का ढंग किस धारा के अंतर्गत दिया गया है-

a. धारा 5

b. धारा 6

c. धारा 9

d. धारा 10

 

27. भागीदारी की अवधारणा की सही आकलन है-:

a. केवल लाभ का बँटवारा

b. लाभ एवं हानि का बँटवारा

c. पारस्परिक अभिकरण

d. पक्षकारों का आशय

 

28. इच्छाधीन भागीदारी किस धारा में वर्णित है?

a. धारा 4

b. धारा 5

c. धारा 7

d. धारा 9

 

29. किसी अनिश्चित अवधि हेतु एक भागीदारी होती है-

a. इच्छाधीन भागीदारी

b. अविभाज्य भागीदारी

c. (a) अथवा (b) में से एक

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

30. जहाँ एक भागीदारी फर्म किसी निश्चित अवधि के लिए गठित की गई हो तथा उस अवधि के समाप्त होने पर फर्म बिना किसी करार के व्यापार को जारी रखती हो तो-

a. नए करार होने तक भागीदारी विस्तारित मानी जाती है।

b. भागीदारी इच्छाधीन भागीदारी बन जाती है।

c. भागीदारी अवैध हो जाती है

d. अवधि की समाप्ति की तिथि पर भागीदारी विघटित हो जाती है और किसी भी भागीदारी को अस्तित्व में रहना नहीं कहा जा सकता

 

31. इच्छाधीन भागीदारी क्या होती है?

a. किसी वसीयती की वसीयत द्वारा उत्पन्न

b. सभी भागीदारों की सहमति से उत्पन्न

c. अस्तित्वावधि के उपबन्ध के बिना की गई भागीदारी

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

32. एक भागीदारी एक इच्छाधीन भागीदारी होती है-

a. जब भागीदारी के लिए किसी अस्तित्वावधि का प्रावधान किया गया हो

b. जब भागीदारी के अवधारण का कोई उपबन्ध किया गया हो

c. उपरोक्त (a) अथवा (b) दोनों सही हैं

d. (a) तथा (b) में से एक सही है

 

33. विशिष्ट भागीदारी किस धारा में वर्णित है?

a. धारा 5

b. धारा 6

c. धारा 7

d. धारा 8

 

34. भागीदारों के साधारण कर्तव्यों का उल्लेख कहाँ किया गया है?

a. अधिनियम की धारा 9 में

b. अधिनियम की धारा 10 में

c. अधिनियम की धारा 11 में

d. अधिनियम की धारा 13 में

 

35. कपट से कारित हानि के लिए क्षतिपूर्ति करने का कर्तव्य किस धारा में वर्णित है?

a. धारा 10

b. धारा 11

c. धारा 12

d. धारा 13

 

36. भागीदारी अधिनियम की धारा 10 के अन्तर्गत सांविधिक कर्त्तव्य का प्रभाव फर्म को उसको धोखाधड़ी से किसी भागीदार द्वारा हुई हानि के लिए फर्म को क्षतिपूर्ति करने के आपराधिक दायित्व के संबंध में भी एक प्रतिनिधिक दायित्व है।

a. सत्य

b. असत्य

c. केवल जब संविधि इस तरह के दायित्व पर विचार करता है।

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

37. किसी भागीदारी में व्यापार अवरोधी करार भारतीय भागीदारी अधिनियम की धारा 11 के अंतर्गत होता है-

a. वैध

b. शून्यकरणीय

c. शून्य

d. अवैध

 

38. राम और श्याम स्टेशनरी के व्यापार में भागीदार थे। राम ने फर्म के लेटर पैड पर अपने घर पर दो बोरे गेहूँ आपूर्ति करने का आदेश प्रेषित किया। भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 के अंतर्गत फर्म का दायित्व क्या होगा?

a. फर्म ऋण के भुगतान हेतु उत्तरदायी नहीं है।

b. फर्म ऋण के भुगतान हेतु उत्तरदायी है।

c. फर्म ऋण के मात्र आधे के भुगतान हेतु उत्तरदायी है

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

39. यदि एक भागीदार भागीदारी फर्म की किसी भी संपत्ति को निजी उपयोग के लिए चुनता है तो इससे क्या उत्पन्न होता है-

a. भागीदार का सिविल दायित्व

b. भागीदार का आपराधिक दायित्व

c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d. उपरोक्त (a) अथवा (b) में से एक

 

40. किसी भागीदारी कारबार की गुडविल भागीदारी की संपत्ति होती है। यह प्रावधान किस धारा के अंतर्गत किया गया है?

a. धारा 14

b. धारा 13

c. धारा 12

d. धारा 11

 

41. 'गुडविल' शब्द का वर्णन करना सरल है किन्तु इसे परिभाषित करना अत्यन्त कठिन है। यह किसका कथन है?

a. लार्ड हर्शेल

b. लार्ड हेल्डेयन

c. लाई मैक नाटेन

d. लार्ड एल्डन

 

42. निम्नलिखित में से कौन सही सुमेलित नहीं है-

a. फर्म की सम्पत्ति का उपयोजन -   धारा 15

b. भागीदारों द्वारा उपार्जित वैयक्तिक लाभधारा 16

c. भागीदारों के अधिकार और कर्तव्यधारा 17

d. भागीदार का फर्म के अभिकर्ता के नाते विवक्षित प्राधिकार -धारा 18

 

43. भारतीय भागीदारी अधिनियम की निम्नलिखित में से कौन सी धारा प्रत्येक भागीदार को एक अभिकर्ता का अधिकार प्रदान करती है?

a. धारा 17

b. धारा 18

c. धारा 19

d. धारा 20

 

44. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

a. भागीदार फर्म का एक अभिकर्ता होता है।

b. भागीदार फर्म का स्वामी होता है।

c. भागीदार फर्म का निदेशक होता है

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

45. निम्नलिखित में से कौन सही सुमेलित नहीं है-

a. भागीदार का फर्म के अभिकर्ता के नाते विवक्षित प्राधिकार -   धारा 19

b. भागीदार फर्म का अभिकर्ता -धारा 20

c.  भागीदार का आपात में प्राधिकारधारा 21

d. फर्म को आबद्ध करने के लिए कार्य करने का ढंगधारा 22

 

46. भागीदारी अधिनियम की धारा 19 के अनुसार भागीदार फर्म के अभिकर्ता के नाते विवक्षित प्राधिकार उसे सशक्त नहीं करता-

a. फर्म द्वारा किये गये किसी दावे का समझौता या त्यागने हेतु

b. फर्म की ओर से फाइल किये गये किसी वाद के प्रत्याहरण हेतु

c. फर्म के विरूद्ध किसी वाद में किसी दायित्व को स्वीकार करने हेतु

d. उपरोक्त सभी

 

47. एक भागीदार के विवक्षित प्राधिकार के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से क्या गलत है-

a. वह फर्म की ओर से किसी वाद में समझौता कर सकता है

b. वह फर्म की स्थावर संपत्तियों को अन्तरित कर सकता है।

c. वह फर्म की ओर से भागीदारी में सम्मिलित हो सकता है

d. उपरोक्त सभी

 

48. विवक्षित प्राधिकार के द्वारा प्रत्येक भागीदार भागीदारी की परिधि तथा उद्देश्यों के अंदर सभी मामलों में अपने द्वारा किए गए कार्यों से अन्य सभी भागीदारों को आबद्ध कर देता है। व्यवसायिक प्रकृति वाली एक सामान्य भागीदारी में निम्नलिखित में से क्या भागीदारों के विवक्षित प्राधिकार के अंतर्गत नहीं आता?

a. यह कि प्रत्येक भागीदार भागीदारी संपत्ति को बंधक रख सकता है अथवा बेच सकता है।

b. यह कि कोई भी भागीदार फर्म के विरूद्ध किसी वाद में दायित्व स्वीकार कर सकता है।

c. यह कि प्रत्येक भागीदार भागीदारी के खाते में धन उधार ले सकता है।

d. यह कि प्रत्येक भागीदार भागीदारी व्यापार के लिए सेवकों को नियुक्त कर सकता है

 

49. एक भागीदार द्वारा व्यापार के सामान्य अनुक्रम के दौरान अपने द्वारा किए गए कार्य द्वारा फर्म को बाध्य करने का अधिकार उसका "विवक्षित प्राधिकार" कहा जाता है। ऐसे प्राधिकार में शामिल नहीं होते-

a. फर्म के माल की विक्रय करना

b. किसी व्यापारिक फर्म में उधार लेना

c. फर्म के साथ व्यापार करने वाले व्यक्तियों के साथ खातों का समाधान करना

d. फर्म की ओर से फाइल किये गये किसी वाद या कार्यवाई का प्रत्याहरण

 

50. निम्नलिखित में से कौन सही सुमेलित नहीं है-

a. भागीदारी की परिभाषा - धारा 4

b. इच्छाधीन भागीदारीधारा 7

c. भागीदार का निष्कासनधारा 33

d. आपातकाल में भागीदार का अधिकार-धारा 23

 

51. यद्यपि एक भागीदार को सूचना पूरे फर्म के लिए सूचना के रूप में काम करता है-

a. सूचना एक भागीदार को दिया गया हो जो सामान्यतः फर्म के व्यवसाय में कार्य करता

b. निष्क्रिय या सुसुप्त भागीदार को सूचना देना भी पर्याप्त होगा

c. फर्म के साथ धोखाधड़ी (छल) करने वाले भागीदार को सूचना फर्म को सूचना नहीं होगा

d. दोनों (a) और (b) सही है।

 

52. भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 की धारा 25 के अंतर्गत फर्म के कार्यों के लिए भागीदारों का दायित्व होता है-

a. संयुक्ततः और पृथक्तः

b. पृथक-पृथक

c. संयुक्ततः अथवा पृथक-पृथक

d. संयुक्त

 

53. निम्नलिखित कथनों में से इंगित करे कि फर्म के अभिकर्ता के रूप में कार्य करने के लिए भागीदार के निहित अधिकार के संबंध में कौन-सा सही है?

a. उसे फर्म के माल या सम्पत्ति बेचने का अधिकार है।

b. उसे फर्म को देय ऋणों का भुगतान प्राप्त करने का अधिकार है।

c. उसे फर्म से संबंधि शीर्षक विलेख जमा करके एक समान बंधक बनाने का अधिकार है।

d. उसे फर्म की ओर से अचल सम्पत्ति अर्जित करने का अधिकार है।

 

54. निम्नलिखित में से कौन सही सुमेलित नहीं है-

a. भागीदार द्वारा स्वीकृतियों का प्रभाव -   धारा 23

b. कार्यकारी भागीदार को दी गई सूचना का प्रभावधारा 24

c. फर्म के कार्यों के लिए भागीदार का दायित्वधारा 25

d. भागीदार का फर्म के अभिकर्ता के नाते विवक्षित प्राधिकार -   धारा 20

 

55. भारतीय भागीदारी अधिनियम के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन सी धारा एक 'गैर-भागीदार' के दायित्व को उत्पन्न करते हुए व्यपदेशन के सिद्धांत को परिभाषित करती है?

a. धारा 28

b. धारा 29

c. धारा 30

d. धारा 31

 

56. अप्राप्तवयों को भागीदारी के फायदों में सम्मिलित करना किस धारा में वर्णित है?

a. धारा 28

b. धारा 29

c. धारा 30

d. धारा 31

 

57. भागीदारी अधिनियम की धारा 30 के अनुसार, "वयस्कता प्राप्त होने के 6 माह के अंदर अथवा यह ज्ञात होने कि वह भागीदारी के फायदों में सम्मिलित हो चुका है, जो भी बाद की तिथि हो, एक अवयस्क भागीदार बनने अथवा बनने का चयन कर सकता है।"

a. ऐसा विकल्प एक लोक सूचना देने के द्वारा प्रयुक्त किया जाता है|

b. यदि वह मौन बना रहता है और ऐसी सूचना देने में विफल रहता है तो ऐसी धारणा है कि वह भागीदार बनना चाहता है तथा कथित 6 माह की अवधि की समाप्ति पर वह फर्म में भागीदार बन जाएगा|

c. यदि वह विकल्प का उपयोग नहीं करता तो उसे फर्म में भागीदार बन चुका माना जाएगा|

d. उपरोक्त सभी सही हैं|

 

58. जो एक सही प्रस्थापना है, जहाँ एक अवयस्क को भागीदारी फर्म के लाभो के लिए सम्मिलित कराया जाता है-

a. अवयस्क फर्म के कृत्यों के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी हैं।

b. अवयस्क का अंश फर्म के कृत्यों के लिए उत्तरदायी है।

c. अवयस्क के पास फर्म के खाते का निरीक्षण और प्रतिलिपि तक पहुँच नहीं हो सकती

d. उपरोक्त में से कोई नहीं

 

59. एक अवयस्क, जिसे भारतीय भागीदारी अधिनियम की धारा 30 (5) के तहत भागीदारी के लाभों में प्रवेश प्राप्त हो चुका हो, वयस्कता प्राप्त करने पर फर्म में बने रहने अथवा उसे छोड़ देने के एक विकल्प का उपयोग करना होता है। यह उपयोग कितने दिनों के अंदर करना होता है-

a. वयस्क होने के 1 माह के अंदर

b. वयस्क होने के 6 माह के अंदर

c. वयस्क होने के 90 दिनों के अंदर

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

60. एक अवयस्क के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से क्या सही नहीं है?

a. वह एक भागीदार नहीं बन सकता

b. उसे भागीदारी के लाभों में प्रविष्ट किया जा सकता है

c. वह फर्म के कार्यों के लिए व्यक्तिगत तौर पर उत्तरदायी होता है

d. वयस्कता प्राप्त होने पर वह भागीदार बनने अथवा बनने का चयन कर सकता है।

 

61. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन उस अवयस्क के लिए सही है, जिसे भागीदारी के लाभ के लिए सम्मिलित कराया गया है-

a. फर्म का एक लेनदार अपने ऋण के लिए फर्म में अवयस्कों के अंश के खिलाफ मुकदमा करता है।

b. ऐसे अवयस्क फर्म के खातों तक पहुँच के लिए भागीदारों पर मुकदमा करते हैं।

c. ऐसे अवयस्क फर्म के लाभ के हिस्सों के लिए भागीदारों पर मुकदमा

d. व्यापार में कुछ गड़बड़ी मिलने पर वह फर्म के विघटन का मामला दर्ज करता है।

 

62. जब एक अवयस्क भागीदार बनने का चयन करता है। तो वह फर्म द्वारा किए गए सभी कार्यों के लिए तृतीय पक्ष के प्रति कब से उत्तरदायी हो जाता है-

a. भागीदारी के फायदों में उसके सम्मिलित किये जाने के समय से

b. वयस्कता प्राप्त होने की तिथि से

c. भागीदार बनने की तिथि से

d. उपरोक्त (b) तथा (c) दोनों

 

63. सही सुमेलित कीजिये-

1. भागीदार का प्रविष्ट किया जाना                A.  धारा 35

2. भागीदार का निवृत्त होना                            B. धारा 34

3. भागीदार का निष्कासन                             C. धारा 33

4. भागीदार का दिवाला                                  D. धारा 32

5. मृत भागीदार की सम्पदा का दायित्व        E. धारा 31

    A B C D E

a. 5 4 3 2 1

b. 4 5 3 2 1

c. 3 2 1 5 4

d. 1 2 3 4 5

 

64. सामान्यतः, किसी भागीदारी फर्म में एक नए भागीदार के प्रविष्टि के लिए किसकी सहमति आवश्यक होती है-

a. भागीदारों के बहुमत की

b. सभी भागीदारों की

c. निष्क्रिय भागीदारों को छोड़कर भागीदारों के बहुमत की

d. फर्म में अधिक अंशों के अंशधारी भागीदारों की

 

65. किसी भागीदारी फर्म में कोई भागीदार नियुक्त हो सकता है-

a. अन्य सब भागीदारों की सम्मति से

b. भागीदारों के अभिव्यक्त करार के अनुसार

c. अन्य सब भागीदारों को अपने निवृत्त होने के आशय की लिखित सूचना देकर

d. उपरोक्त सभी तरीकों से

 

66. किसी एकल स्वामीं की मृत्यु पर उसके वारिस स्वयंमेव ही पुरानी फर्म में भागीदार बन जाते हैं। यह कथन-

a. सही है

b. गलत है

c. आंशिक सत्य है

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

67. एक भागीदारी फर्म निम्नलिखित घटनाओं पर भंग होती है-

a. भागीदार की मृत्यु पर

b. भागीदार के सम्मिलित होने पर

c. उपरोक्त दोनों पर

d. उपरोक्त दोनों में किसी स्थिति में नहीं

 

68. एक भागीदार की निवृत्ति' के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?

a. एक भागीदार अन्य समस्त भागीदारों की सहमति से निवृत्त हो सकता है।

b. एक भागीदार अन्य भागीदारों के अभिव्यक्त करार के अनुसार निवृत्त हो सकता है

c. एक भागीदार किसी भी अन्य भागीदार की सहमति से निवृत्त हो सकता है।

d. जहाँ भागीदारी इच्छाधीन भागीदारी हो, एक भागीदार अन्य समस्त भागीदारों को अपने निवृत्त होने के आशय की एक लिखित सूचना देकर निवृत्त हो सकता है।

 

69. एक भागीदार अपने निवृत्त होने की आशय की सूचना द्वारा निवृत्त हो सकता है, जहाँ-

a. भागीदारी इच्छाधीन भागीदारी हो

b. भागीदारी एक विनिर्दिष्ट अवधि के लिए हो

c. भागीदारों के बीच इसके निर्धारण के लिए एक संविदा की जा चुकी हो

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

70. अधिनियम की धारा 31 के अंतर्गत एक नए भागीदार के रूप में किसी नए व्यक्ति को किस प्रकार प्रविष्ट किया जा सकता है-

a. सभी भागीदारों की आम सहमति से

b. भागीदारों के बीच हुई बहुमत वाली सहमति से

c. प्रबंधक भागीदार की सहमति से

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

71. निम्नलिखित मामलों में से किसके अंतर्गत एक भागीदार फर्म के विघटन के बिना ही अपनी भागीदारी समाप्त कर सकता है-

a. निवृत्ति द्वारा

b. दिवालिया होने पर

c. मृत्यु पर

d. उपरोक्त सभी

 

72. दिवंगत भागीदार की सम्पत्ति है-

a. उनके निधन के बाद किए गए भागीदारों के कृत्यों के लिए उत्तरदायी नहीं।

b. उनकी मृत्यु के बाद किये गये भागीदारों के कृत्यों के लिए उत्तरदायी

c. यदि जीवित भागीदार ऋण का भुगतान करने में असमर्थ है तो उनकी मृत्यु के बाद भागीदारों के कृत्यों के लिए उत्तरदायी

d. उसकी मृत्यु के बाद भागीदारी के कृत्यों के लिए उत्तरदायी यदि तीसरे व्यक्ति को मृत्यु के बारे में पता नहीं है।

 

73. भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 के अंतर्गत जहाँ भागीदारी इच्छाधीन हो, एक भागीदार निवृत्त हो सकता है-

a. अपनी आशय व्यक्त करने वाली मौखिक सूचना देने के द्वारा

b. अपनी आशय व्यक्त करने वाली लिखित सूचना देने के द्वारा

c. बिना सूचना के

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

74. सही सुमेलित कीजिये-    

1. फर्म का विघटन                                  A. धारा 39

2. करार द्वारा विघटन                           B. धारा 40

3. वैवश्यक विघटन                                 C. धारा 41

4. न्यायालय द्वारा विघटन                   D. धारा 44

    A B C D  

a. 4 3 2 1

b. 4 3 2 1

c. 3 2 1 4

d. 1 2 3 4 

 

75. एक भागीदार कारित समय से पूर्व भागीदारी फर्म को विघटित करना चाहता है, निम्नलिखित में से कौन-सा एक ऐसे भागीदार के लिए फर्म के विघटन के लिए एक आदर्श आधार नहीं है-

a. कि भागीदार में से एक भागीदार के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन करने में स्थायी रूप से अक्षम हो गया है।

b. कि अन्य भागीदार ने फर्म में अपना पूरा हित किसी तीसरे पक्ष को हस्तांतरित कर दिया है।

c. कि फर्म का व्यवसाय हानि पर नहीं चलाया सकता।

d. कि विधित व्यवसाय एक भागीदार दूसरे भागीदार की पत्नी के साथ व्यभिचार संबंध में है, जो फर्म के व्यवसाय को प्रभावित करने के लिए आशंकित है।

 

76. निष्क्रिय भागीदार के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है-

a. एक निष्क्रिय भागीदार फर्म के व्यवसाय में रुचि नहीं रखता है।

b. एक निष्क्रिय भागीदार बाहरी व्यक्ति के फर्मों के दायित्व के लिए उत्तरदायी नहीं है।

c. एक निष्क्रिय भागीदार फर्म के लाभ को साझा करने का हकदार है।

d. एक निष्क्रिय भागीदार तो सक्रिय है और ही बाहरी व्यक्ति जानता है।

 

77. फर्म के विघटन का अर्थ होता है-

a. फर्म के कुछ भागीदारों के बीच भागीदारी का विघटन

b. फर्म के दो अथवा अधिक भागीदारों के बीच भागीदारी का विघटन

c. फर्म के सभी भागीदारों के बीच भागीदारी का विघटन

d. उपरोक्त सभी

 

78. एक भागीदारी फर्म विघटित हो सकती है

a. सभी भागीदारों की सहमति से

b. भागीदारों के बीच की गई संविदा के अनुसार

c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d. इनमें से कोई नहीं

 

79. भागीदारों के बीच संविदा के अधीन एक फर्म विघटित होती है-

a. यदि इसका गठन एक निश्चित अवधि हेतु हुआ हो तो निर्धारित अवधि की समाप्ति पर

b. यदि इसका गठन एक अथवा अधिक कार्यों अथवा उपक्रमों को पूरा करने के लिए किया गया हो, तो उसकी पूर्ति पर

c. भागीदार की मृत्यु पर

d. उपरोक्त सभी

 

80. वैवश्यक विघटन का प्रावधान किया गया है-

a. अधिनियम की धारा 39 के अंतर्गत

b. अधिनियम की धारा 41 के अंतर्गत

c. अधिनियम की धारा 40 के अंतर्गत

d. अधिनियम की धारा 44 के अंतर्गत

 

81. यदि एक निर्दोष भागीदार भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 की धारा 44 () के अंधीन किसी फर्म के विघटन की माँग करता है तो उसे न्यायालय को संतुष्ट करना होगा कि-

a. दूसरे भागीदार का आचरण भागीदारी कारवार को संचालित करने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना सम्भाव्य है।

b. भागीदारी फर्म किसी राष्ट्रीयकृत बैंक से लिए गए ऋण का पुनर्भुगतान करने की स्थिति में नहीं है।

c. भागीदारी फर्म द्वारा गत तीन वर्षों में कोई लाभ अर्जित नहीं किया गया है

d. इनमें से कोई नहीं

 

82. एक फर्म के विघटन का दावा भारतीय भागीदारी अधिनियम की धारा 44 () के अंतर्गत किया जा सकता है जहाँ किसी भागीदार ने भागीदारी फर्म में अपने हित का अन्तरण कर दिया हो-

a. किसी भागीदार को

b. पर व्यक्ति को

c. सभी भागीदारों को

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

83. भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 के अधीन, जहाँ भागीदारी एक इच्छाधीन हो, फर्म का विघटन किसी भी भागीदार द्वारा अपनी आशय की सूचना लिखित में देने के द्वारा किया जा सकता है-

a. सभी अन्य भागीदारों को

b. अन्य भागीदारों के बहुमत को

c. अन्य भागीदारों में से किसी एक को

d. फर्म के निबंधक को

 

84. , तथा एक फर्म में भागीदार हैं। निवृत्त हो जाता है और को एक नए भागीदार के रूप में प्रविष्ट किया जाता है। फर्म ने इस परिवर्तन की कोई लोक सूचना नहीं दी किन्तु फर्म के पुराने नाम से ही अपने व्यापार को जारी रखा। , जो फर्म का एक ग्राहक है, इस परिवर्तन के बाद फर्म के साथ संव्यवहार करता है और फर्म उसकी ऋणी हो जाती है-

a. , , , तथा पर वाद ला सकता है

b. , , तथा पर वाद ला सकता है

c. , , तथा अथवा , खं एवं पर वाद ला सकता है

d. केवल तथा पर वाद ला सकता है।

 

85. निष्क्रिय भागीदार वह भागीदार होता है जिसने

a. व्यापार संचालन में भागीदार के रूप में भाग लिया हो तथा फर्म के कार्य के लिए उत्तरदायी हों

b. व्यापार संचालन में भागीदार के रूप में कभी भी भाग लिया हो तथा फर्म के कार्य के लिए उत्तरदायी हो

c. व्यापार संचालन में भागीदार के रूप में कभी भी भाग लिया हो किन्तु फर्म के कार्य के लिए उत्तरदायी हो

d. जिसे अपनी विशिष्ट प्रास्थिति के कारण व्यापार के हानि से कुछ लेनादेना हो तथा वह लाभ का अधिकारी हो

 

86. फर्मों का रजिस्ट्रीकरण किस अध्याय में वर्णित है

a. अध्याय 7

b. अध्याय 8

c. अध्याय 9

d. अध्याय 10

 

87. एक फर्म का रजिस्ट्रीकरण-

a. अनिवार्य होता है।

b. वांछनीय होता है

c. अनिवार्य नहीं होता

d. निदेशक होता है

 

88. एक भागीदारी फर्म का रजिस्ट्रीकरण आवश्यक होता है-

a. भारतीय निबंधन अधिनियम, 1908 के अधीन

b. कंपनी अधिनियम, 1956 के अधीन

c. भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 के अधीन

d. भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 के अधीन

 

89. एक अरजिस्ट्रीकृत फर्म का भागीदार फर्म अथवा फर्म के किसी अन्य भागीदार पर कैसे अधिकार को लागू करने हेतु वाद नहीं ला सकता-

a. संविदा से उत्पन्न होने वाला अधिकार

b. भागीदारी अधिनियम द्वारा प्रदत्त अधिकार

c. उपरोक्त में (a) अथवा (b)

d. (a) तथा (b) दोनों

 

90. फर्म का रजिस्ट्रीकरण भागीदारी का गठन नहीं करता, किन्तु यह केवल भागीदारी का साक्ष्य होता है-

a. सही है

b. आंशिक सही हैं

c. गलत है

d. आंशिक गलत है।

 

91. रजिस्ट्रारों की नियुक्ति किस धारा में वर्णित है?

a. धारा 56

b. धारा 57

c. धारा 58

d. धारा 59

 

92. भूलों का परिशोधन किस धारा में वर्णित है?

a. धारा 66

b. धारा 64

c. धारा 68

d. धारा 69

 

93. धारा 64 के अनुसार, गलती सुधार (Rectification) कब की जा सकती है?

a. जब दोनों पक्षों की सहमति हो

b. केवल न्यायालय के आदेश पर

c. जब गलती लिखित दस्तावेज़ में हो

d. जब कोई पक्ष सहमत हो

 

94. धारा 64 के तहत सुधार के लिए आवेदन कौन कर सकता है?

a. केवल साझेदार

b. कोई भी पक्ष जिसे गलती से हानि हुई हो

c. फर्म का प्रबंधक

d. सरकारी अधिकारी

 

95. किस केस में यह निर्णय हुआ कि गलती सुधार केवल लिखित अनुबंध में होती है?

a. भारत संघ बनाम आर. गांधी

b. मर्करी कम्युनिकेशंस लिमिटेड बनाम डाक एवं दूरसंचार मंत्रालय

c. प्रेम लता अग्रवाल बनाम भारत संघ

d. मुलिन बनाम रिचर्ड्स

 

96. किस केस में यह बताया गया कि गलती सुधार के लिए स्पष्ट प्रमाण होना आवश्यक है?

a. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बनाम संतोष गुप्ता

b. आर.के. गर्ग बनाम भारत संघ

c. एम.सी. चोकलिंगम बनाम भारत संघ

d. आयकर आयुक्त बनाम डाबर इंडिया लिमिटेड

 

97. धारा 65 के अनुसार, रजिस्टर में संशोधन कब किया जा सकता है?

a. केवल फर्म के निर्णय से

b. न्यायालय के आदेश पर

c. साझेदारों की आम सहमति से

d. सरकारी विभाग के आदेश पर

 

98. किस स्थिति में न्यायालय रजिस्टर में संशोधन का आदेश देता है?

a. जब फर्म के नाम में त्रुटि हो

b. जब फर्म का पंजीकरण रद्द हो

c. जब फर्म के कोई नए सदस्य जुड़ें

d. जब पार्टनरशिप समाप्त हो

 

99. रजिस्टर में संशोधन के लिए आवेदन किसके द्वारा किया जा सकता है?

a. कोई भी पार्टनर

b. केवल फर्म का प्रबंधक

c. केवल सरकारी अधिकारी

d. कोई भी पक्ष जिसे संशोधन से लाभ हो

 

100. किस केस में यह निर्णय हुआ कि रजिस्टर में संशोधन के लिए कोर्ट का आदेश आवश्यक है?

a. शोभा राम बनाम राम कुमार

b. आर.के. गर्ग बनाम भारत संघ

c. .आर. अंतुले बनाम आर.एस. नायक

d. नायर सर्विस सोसायटी लिमिटेड बनाम के.सी. अलेक्जेंडर

 

101. किस केस में यह स्थापित हुआ कि रजिस्टर में संशोधन कोर्ट के आदेश से ही होगा?

a. सीआईटी बनाम सीतलदास तीरथदास

b. मेसर्स XYZ बनाम महाराष्ट्र राज्य

c. शोभा राम बनाम राम कुमार

d. हरिदास बनाम पंजाब राज्य

 

102. धारा 66 के अनुसार, फर्म के रजिस्टर और फाइल किए गए दस्तावेजों का निरीक्षण कौन कर सकता है?

a. केवल साझेदार

b. कोई भी व्यक्ति

c. केवल न्यायालय

d. केवल सरकारी अधिकारी

 

103. किस केस में यह निर्णय हुआ कि फर्म के दस्तावेजों का निरीक्षण जनता के लिए खुला होना चाहिए?

a. शोभा राम बनाम राम कुमार

b. सीआईटी बनाम सीतलदास तीरथदास

c. मेसर्स XYZ बनाम महाराष्ट्र राज्य

d. आर.के. गर्ग बनाम भारत संघ

 

104. किस केस में यह स्थापित हुआ कि फर्म के रजिस्टर का निरीक्षण सार्वजनिक हित में है?

a. मोहनलाल रामचंद बनाम आयकर आयुक्त

b. शोभा राम बनाम राम कुमार

c. नायर सर्विस सोसायटी लिमिटेड बनाम के.सी. अलेक्जेंडर

d. हॉल बनाम बस्ट

 

105. धारा 67 के अनुसार, फर्म के रजिस्टर या फाइल् दस्तावेजों की प्रति किसे दी जानी चाहिए?

a. केवल फर्म के प्रबंधक को

b. किसी भी साझेदार को जो लिखित में आवेदन करे

c. केवल कोर्ट के आदेश पर

d. केवल सरकारी अधिकारियों को

 

106. धारा 68 के अनुसार, साझेदारी में फर्म के संबंध में प्रमाण कौन दे सकता है?

a. केवल साझेदार

b. कोई भी व्यक्ति जो फर्म के कार्य से परिचित हो

c. केवल फर्म का प्रबंधक

d. केवल न्यायालय

 

107. धारा 69 के अनुसार, यदि फर्म का पंजीकरण नहीं होता है तो क्या परिणाम होता है?

a. फर्म की वैधता समाप्त हो जाती है

b. फर्म का कार्य करने का अधिकार सीमित हो जाता है

c. फर्म पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता

d. फर्म को स्वतः पंजीकृत माना जाता है

 

108. धारा 69A के अनुसार, यदि फर्म ने धारा 60, 61, 62 या 63 के तहत आवश्यक पंजीकरण में देरी की तो उस पर क्या लग सकता है?

a. जुर्माना

b. फर्म का पंजीकरण रद्द

c. फर्म को अवैध घोषित किया जाना

d. कोई दंड नहीं

 

109. धारा 70 के तहत झूठा विवरण देने की सजा कितनी हो सकती है?

a. ₹1,000 तक जुर्माना

b. एक वर्ष तक कारावास या जुर्माना या दोनों

c. तीन वर्ष तक कारावास

d. कोई सजा नहीं

 

110. धारा 71 के अनुसार, किसे फर्म रजिस्ट्रेशन नियम बनाने का अधिकार दिया गया है?

a. केंद्र सरकार

b. राज्य सरकार

c. फर्म के पार्टनर

d. न्यायालय

 

111. धारा 74 के अनुसार, पार्टनरशिप अधिनियम की धाराएँ किस तरह से लागू होती हैं?

a. वे अन्य कानूनों के अनुरूप बिना प्रभावित हुए लागू होती हैं

b. वे अन्य कानूनों को पूरी तरह से बदल देती हैं

c. वे केवल साझेदारी की स्थापना के लिए लागू होती हैं

d. वे केवल न्यायालय के आदेश पर लागू होती हैं

 

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