Download Limitation Act MCQ Set-2 PDF
1. डिक्री और लिखत को रद्द कराने के लिए या संविदा को विखण्डित करने के लिए कितनी अवधि के भीतर वाद संस्थित किया जाना चाहिए-
a. 30 वर्ष
b. 2 वर्ष
c. 3 वर्ष
d. 12 वर्ष
2. जंगम सम्पत्ति सम्बन्धी वाद संस्थित करने की परिसीमा काल कितनी है?
a. 1 वर्ष
b. 2 वर्ष
c. 3 वर्ष
d. 12 वर्ष
3. अपकृत्य सम्बन्धी मामलों में प्रतिकर हेतु वाद लाये जाने की परिसीमा काल कितनी है?
a. एक वर्ष
b. दो वर्ष
c. तीन वर्ष
d. मामले के अनुसार उपर्युक्त सभी
4. किस मामले में उच्चतम न्यायालय ने अभिनिर्धारित किया कि केवल भारतीय मर्यादा अधिनियम, 1963 ही सम्पूर्ण देश के लिए मर्यादा सम्बन्धी सामान्य विधि है 'मर्यादा को अवधि निर्धारित करने वाले अन्य सभी कानून या तो विशेष विधियाँ हैं या फिर स्थानीय। यदि वे विशिष्ट मामलों के लिए समयावधि निर्धारित करती है तो उन्हें विशेष विधियाँ कहा जायेगा -
a. लता कामत बनाम विलास
b. जस्टीनियानो बनाम एण्टोनियो
c. उपर्युक्त (a) एवं (b) दोनों में
d. उपर्युक्त में से कोई नहीं
5. किस मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह अभिनिर्धारित किया कि विशेष परिस्थितियों में परिसीमा अधिनियम, 1963 के वे अन्य प्रावधान भी विशेष या स्थानीय विधियों के अन्तर्गत कार्यवाहियों पर लागू हो सकते हैं जो धारा 29(b) में नहीं गिनाये गये हैं-
a. दीनदयाल बनाम राजाराम
b. बालकृष्ण बनाम श्री डी० एम० संस्थान
c. सिण्डीकेट बैंक बनाम प्रभा डी० नायक
d. केवल (b) में
6. परिसीमा अधिनियम, 1963 में निहित हैं-
a. 32 धाराएं एवं 151 अनुच्छेद
b. 33 धराएं एवं 137 अनुच्छेद
c. 31 धाराएं एवं 137 अनुच्छेद
d. 31 धाराएं तथा कोइ अनुच्छेद नहीं
7. रॉयल चार्टर के अंतर्गत स्थापित न्यायालयों तथा अन्य न्यायालयों में एक समाप्त परिसीमा नियम को लागू करने का सर्वप्रथम प्रयास ऐसे किस अधिनियम के द्वारा किया गया था जो 1862 में प्रवर्तित हुआ था-
a. परिसीमा अधिनियम, 1859
b. परिसीमा अधिनियम, 1843
c. परिसीमा अधिनियम, 1853
d. परिसीमा अधिनियम, 1856
8. परिसीमा अधिनियम, 1963 की निम्नलिखित में से कौन सी धारा "आवेदक" को परिभाषित करती है?
a. धारा 2(a)
b. धारा 2(b)
c. धारा 2(c)
d. धारा 2(d)
9. परिसीमा की अवधि का अर्थ है-
a. किसी भी वाद, अपील अथवा आवेदन के लिए परिसीमा अधिनियम की अनुसूची द्वारा निर्धारित समयावधि
b. परिसीमा अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप गणना की गई परिसीमा की अवधि
c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों
d. उपरोक्त में कोई नहीं
10. परिसीमा अधिनियम की धारा 2(ग) के अनुसार एक विनिमय-पत्र में निम्नलिखित में से क्या सम्मिलित होता है-
a. वचन-पत्र एवं बाँड
b. वचन-पत्र
c. एक हुंडी तथा एक चैक
d. बाँड
11. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 3 निम्नलिखित में से किस पर लागू नहीं होती-
a. अपीलों पर
b. एक अकिंचन के रूप में वाद प्रस्तुत करने की अनुमति हेतु आवेदन पर
c. निष्पादन कार्यवाहियों पर
d. वादों पर
12. परिसीमा अधिनियम के प्रयोजनार्थ एक वाद संस्थित होता है-
I. सामान्य मामले में, जब याचिका समुचित अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की गई हो
II. किसी अकिचन के मामले में, जब एक अकिंचन के रूप में वाद प्रस्तुत करने हेतु अनुमति सम्बन्धी उसका आवेदन प्रस्तुत किया गया हो
III. किसी ऐसी कंपनी, जिसका परिमापन न्यायालय द्वारा किया जा रहा हो, के विरुद्ध एक दावे के मामले में, जब दावाकर्ता पहली बार अपने दावे को सरकारी समापक के समक्ष प्रेषित करता है
उपरोक्त में से क्या सही है?
a. केवल (I)
b. केवल (I) तथा (II)
c. इनमें से कोई नहीं
d. उपरोक्त दोनों
13. सभी परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 3 के अन्तर्गत न्यायालय को परिसीमा के प्रश्न पर विचार करने की आवश्यकता होती है-
a. केवल तब जब प्रतिवादी अपने उत्तरदायित्व को स्वीकार न करें
b. स्वप्रेरणा से, तब भी जब प्रतिवादी ने पतिसीमा को लेकर कोई आपत्ति न की हो
c. केवल तब जब प्रतिवादी के द्वारा उठाई गई परिसीमा सम्बन्धी आपत्ति को स्वोकार किया गया हो
d. केवल तब जब प्रतिवादी दावे का विरोध न कर रहा हो
14. इस अधिनियम के प्रयोजन हेतु किसी अकिंचन के वाद में वाद को किस तिथि पर संस्थित हुआ माना जाएगा?
a. जब बाद पंजीकृत हुआ हो
b. संस्थिति की तिथि का निर्णय न्यायालय को करना होता है
c. जब अंकिचन द्वारा वाद प्रस्तुत करने हेतु अनुमति का आवेदन किया गया हो
d. जब अकिंचन के रूप में वाद प्रस्तुत करने की अनुमति के आवेदन को स्वीकार कर लिया गया हो
15. परिसीमा अधिनियम, 1963 के प्रावधान-
a. आज्ञापक हैं
b. अनुज्ञात्मक हैं
c. निर्देशात्मक हैं
d. विवेकाधीन हैं
16. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 3 के अंतर्गत प्रति-दावा संस्थित हो चुका माना जाएगा-
a. प्रति-दावा प्रस्तुत किए जाने की तिथि पर
b. उस तिथि पर जब वाद, जिसमें प्रति-दावा किया गया हो, प्रस्तुत किया गया हो
c. उपरोक्त (a) तथा (b) में से कोई एक, जो प्रतिवादी के लिए लाभदायक हो
d. उपरोक्त (a) तथा (b) में से कोई एक, जो वादी के लिए लाभदायक हो
17. परिसीमा अधिनियम, 1963 के प्रयोजनार्थ निम्नलिखित में से कौन से दावों को पृथक् बाद माना जाएगा?
a. प्रति-दावा
b. मुजरा
c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों
d. इनमें से कोई नहीं
18. मुजरे अथवा प्रतिदावे के तरीके से किसी भी दावे को माना जाएगा-
a. एक ही वाद
b. पृथक् अथवा एक ही वाद हो सकता है
c. एक पृथक् वाद
d. उपरोक्त में कोई नहीं
19. परिसीमा अधिनियम लागू होता है –
a. केवल वादों पर
b. केवल वादों एवं अपीलों पर
c. वादों, अपीलों तथा आवेदनों पर
d. उपरोक्त में किसी पर नहीं
20. यदि परिसीमा की किसी अवधि को परिसीमा की निर्धारित अवधि से बाहर रखा जाना है, तो पक्षकार का तथा परिसीमा अधिनियम, 1963 की किन धाराओं का संतुष्ट होना आवश्यक होता है-
a. 25 से 27
b. 28 से 32
c. 4 से 24
d. उपरोक्त में कोई नहीं
21. कौन सी धारा 'विधि असंभव कार्य करने हेतु बाध्य नहीं करती' के सिद्धान्त पर आधारित है-
a. धारा 5
b. धारा 14
c. धारा 4
d. धारा 15
22. जहाँ किसी वाद, अपील अथवा आवेदन के लिए निर्धारित अवधि उस दिन समाप्त होती हो जिस दिन न्यायालय बंद हो, तो वाद संस्थित किया जा सकेगा, अपील की जा सकेगी या आवेदन किया जा सकेगा-
a. अवकाश के दिन न्यायाधीश के निवास पर
b. जब न्यायालय पुनः खुले
c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों
d. उपरोक्त में कोई नहीं
23. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 5 किस पर लागू होती है-
a. चुनाव याचिकाओं पर
b. अपीलों पर
c. वादों पर
d. इनमें से कोई नहीं
24. परिसीमा अधिनियम, की धारा 5 किस पर लागू नहीं होती-
a. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 31 के अंतर्गत निष्पादन याचिकाओं पर
b. हिन्दू विवाह अधिनियम, 1956 के अन्तर्गत तलाक को याचिकाओं पर
c. वादों पर
d. उपरोक्त सभी
25. परिसीमा अधिनियम का वर्जन लागू होता है-
a. अपील पर
b. वाद पर
c. आवेदन पर
d. उपरोक्त सभी
26. पर्याप्त कारण के आधार पर विलम्ब के लिए माफी का प्रावधान किस धारा के अन्तर्गत किया गया है-
a. धारा 5
b. धारा 9
c. धारा 11
d. धारा 10
27. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 5 के अधीन विलम्ब हेतु माफी की प्रार्थना करने वाले पक्ष को यह स्थापित करना होता है कि वह-
a. उसकी ओर से कोई लापरवाही नहीं हुई है
b. उसकी ओर से सद्भावना की कोई कमी नहीं है
c. सतर्क था
d. उपरोक्त सभी
28. अधिनियम (विहित अवधि का विस्तार) की धारा 5 के प्रावधान निम्नलिखित में से किस पर प्रयोज्य नहीं है一
a. वादों पर
b. अपीलों पर
c. पुनर्विचारों पर
d. आवेदनों पर
29. परिसीमा अधिनियम की धारा 5 के अन्तर्गत विलम्ब की माफी के लिए-
a. विलंब के लिए पर्याप्त कारणों को प्रस्तुत करना होता है
b. एक अधिकार के रूप में दावा किया जा सकता है
c. यह न्यायालय के विवेकाधिकार का मामला होता है
d. उपरोक्त में कोई नहीं
30. निम्नलिखित में से सही कथन को चुनिए-
a. परिसीमा की निर्धारित अवधि के उपरांत प्रस्तुत कोई भी वाद स्वीकार नहीं किया जाएगा
b. परिसीमा की निर्धारित अवधि के उपरान्त प्रस्तुत की गई कोई भी अपील स्वीकार नहीं की जाएगी
c. परिसीमा की निर्धारित अवधि के उपरांत प्रस्तुत कोई भी बाद तभी स्वीकार किया जाएगा जब विलंब के लिए पर्याप्त कारण प्रस्तुत किए गए हों
d. परिसीमा की निर्धारित अवधि के उपरांत प्रस्तुत कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा, भले ही विलंब के लिए पर्याप्त कारण को प्रस्तुत क्यों न किया गया हो
31. अभिकथन (अ) परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 5 न्यायालय को निर्धारित अवधि के बाद प्रस्तुत वाद को स्वीकार करने का अधिकार प्रदान करती है यदि वादी न्यायालय को संतुष्ट कर दे कि वाद संस्थापित न कर पाने के लिए उसके पास पर्याप्त हेतुक मौजूद हैं।
तर्क (त): यदि अपीलकर्ता निर्धारित अवधि के अंदर अपील न प्रस्तुत कर पाने के लिए पर्याप्त कारण नहीं प्रदर्शित करता तो भी एक अपील को निर्धारित अवधि के बाद स्वीकार किया जा सकता है।
कूट:
a. उपरोक्त (अ) तथा (त) दोनों सही हैं तथा (त) (अ) का सही स्पष्टीकरण है
b. उपरोक्त (अ) तथा (त) दोनों सही हैं तथा (त) (अ) का सही स्पष्टीकरण नहीं है
c. (अ) गलत है किन्तु (त) सही है
d. (अ) सही है किन्तु (त) गलत है
32. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 5 लागू होती है-
a. निष्पादन के आवेदन पर
b. उपरोक्त सभी पर
c. वाद पर
d. अपीलों एवं आवेदन पर
33. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 5 के अनुसार परिसीमा की निर्धारित अवधि को किस मामले में आगे नहीं बढ़ाया जा सकता-
a. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 21 के अन्तर्गत किसी आवेदन के मामले में
b. अपील के मामले में
c. आवेदन के मामले में
d. उपरोक्त में कोई नहीं
34. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 5 निम्नलिखित में से किस पर लागू नहीं होती –
a. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 21 के अंतर्गत निष्पादन याचिकाओं पर
b. हिन्दू विवाह अधिनियम, 1956 के अन्तर्गत तलाक की याचिका पर
c. वादों पर
d. उपरोक्त सभी पर
35. विलंब के लिए माफी का आधार क्या है-
a. गरीबी
b. बीमारी
c. निरक्षरता
d. उपरोक्त में कोई नहीं
36. निर्धारित अवधि के विस्तारण के लिए परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 5 के प्रावधान किस पर प्रयोज्य हैं-
a. डिक्री के निष्पादन हेतु किसी आवेदन पर
b. उपरोक्त दोनों पर
c. किसी वाद पर
d. उपरोक्त में कोई नहीं
37. वाद प्रस्तुत करने में होने वाले विलम्ब को-
a. परिसीमा अधिनियम, 1963 के अन्तर्गत माफ किया जा सकता है
b. परिसीमा अधिनियम, 1963 के अनुच्छेद 137 के अन्तर्गत माफ किया जा सकता है
c. परिसीमा अधिनियम, 1963 के अन्तर्गत माफ नहीं किया जा सकता है
d. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 5 के अन्तर्गत माफ किया जा सकता है
e. उपरोक में कोई नहीं
38. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 6 किसे उपलब्ध होती है-
a. प्रतिवादियों को
b. वादियों को
c. वादियों / प्रतिवादियों को
d. उपरोक्त में कोई नहीं
39. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 6 के अन्तर्गत एक अप्राप्तवय में किसे सम्मिलित किया जाता है-
a. गर्भस्थ शिशु को
b. 15 वर्ष से कम आयु वालों को
c. 18 वर्ष से कम आयु वालों को
d. 14 वर्ष से कम आयु वालों को
40. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 6(a) के प्रयोजनार्थ निर्योग्यता के अर्थ में निम्न में से किस कारण से निर्योग्यता उत्पन्न नहीं होती-
a. पागलपन
b. जड़बुद्धिता
c. अप्राप्तवयता
d. दीवालियापन
41. परिसीमा अधिनियम की धारा 6 व्यवस्था करती है कि जहाँ एक वाद इत्यादि संस्थित करने का अधिकारी कोई व्यक्ति, उस समय, जब से निर्धारित अवधि की गणना की जानी है, एक अप्राप्तवय अथवा पगाल अथवा जड़बुद्धि हो, वहाँ उस निर्योग्यता का अंत होने के पश्चात् वह उतने ही समय के अंदर वाद संस्थित या आवेदन कर सकेगा जितना उसे अन्यथा अनुसूची में विनिर्दिष्ट समय के अंतर्गत अनुज्ञात होता -
a. धारा 6 परिसीमा को निरंतरता को नहीं रोकती, बल्कि मात्र परिसीमा की अवधि का विस्तार करती है
b. धारा 6 परिसीमा के नए प्रारम्भिक विन्दु का प्रावधान नहीं करतो
c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों सही हैं
d. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों गलत हैं
42. परिसीमा अधिनियम की धारा 6 निम्नलिखित में से किस मामले में लागू होती है?
a. अप्राप्तवयता
b. बीमारी
c. गरीबी
d. उपरोक में कोई नहीं
43. परिसीमा अधिनियम की धारा 6 के अंतर्गत विधिक निर्योग्यताओं के लिए कौन-कौन से आधारों का प्रावधान किया गया है-
a. पागलपन
b. जडुबुद्धिता
c. अप्राप्तवयता
d. उपरोक सभी
44. जहाँ एक व्यक्ति दो विधिक निर्योग्यताओं से प्रभावित हो अथवा बिना अंतराल के एक के बाद दूसरी निर्योग्यता उत्पन्न होती हो तो वहाँ वाद अथवा आवेदन कब प्रस्तुत किया जा सकता है-
a. जब तक दूसरी निर्योग्यता पूर्णतः समाप्त न हो जाए
b. जब तक पहली निर्योग्यता पूर्णतः समाप्त न हो जाए
c. दोनों निर्योग्यताओं के पूर्णतः समाप्त हो जाने पर
d. उपरोक्त में कोई नहीं
45. यदि किसी वाद के लिए कोई वाद हेतुक उस समय उत्पन्न हुआ हो जब वादी अप्राप्तवय था तो वह वाद संस्थित कर सकता है-
a. स्वयं द्वारा वयस्कता प्राप्त कर लेने के एक वर्ष के अंदर
b. वाद हेतुक की तिथि से परिसीमा द्वारा निर्धारित अवधि के अंदर
c. स्वयं द्वारा वयस्कता प्राप्त कर लेने के बाद परिसीमा द्वारा ऐसे वाद के लिए निर्धारित अवधि के अंदर
d. उपरोक्त में कोई नहीं
46. परिसीमा अधिनियम के अंतर्गत किसी वाद अथवा आवेदन के लिए परिसीमा की अवधि को निर्योग्यता से प्रभावित किसी व्यक्ति की मृत्यु की तिथि से निम्नलिखित में से कितनी अवधि के लिए विस्तारित माना जाएगा-
a. तीन वर्ष
b. एक वर्ष
c. दो वर्ष
d. चार वर्ष
47. जहाँ एक बार समय का चलना प्रारम्भ हो चुका हो, वहाँ बाद की कोई निर्योग्यता अथवा वाद संस्थित करने अथवा आवेदन करने की असमर्थता किस धारा के अन्तर्गत इसे रोक नहीं सकती-
a. धारा 10
b. धारा 11
c. धारा 6
d. धारा 9
48. अधिनियम का कौन सा प्रावधान यह व्यवस्था करता है कि वसूली सम्बन्धी किसी वाद, जिसमे लेनदार की संपदा का प्रशासन-पत्र उसके ऋणी को अनुदत्त कर दिया गया हो वहां ऐसे ऋण को वसूल करने के बाद के परिसीमा काल का चलते रहना तब तक निलम्बित रहेगा जब तक वह प्रशासन चलता रहे-
a. धारा 9
b. धारा 3
c. धारा 5
d. धारा 7
49. निम्नलिखित में से किसके विरुद्ध वाद के मामले में परिसीमा की अवधि आकर्षित नहीं होती -
a. किराएदार
b. न्यासधारी
c. ऋणी
d. बंधकग्राही
50. निम्नलिखित में से किस मामले में परिसीमा अधिनियम की धारा 10 लागू होती है?
a. अंतर्निहित न्यास
b. विधि के प्रवर्तन से उत्पन्न न्यास
c. किसी विशिष्ट प्रयोजन के लिए न्यस
d. उपरोक्त सभी
51. किसी अपील, पुनर्विलोकन अथवा पुनरीक्षण के लिए परिसीमा की अवधि की गणना किए जाने में डिक्री आदेश, जिसके विरुद्ध अपील की गई हो, की एक प्रतिलिपि प्राप्त करने के लिए अपेक्षित समय को किस धारा के अंतर्गत गणना में सम्मिलित नहीं किया गया-
a. धारा 11(a)
b. धारा 13(c)
c. धारा 14(d)
d. धारा 12(b)
52. किसी अपील के लिए परिसीमा की अवधि की गणना में-
a. निर्णय की घोषणा की तिथि तथा डिक्री को प्रतिलिपि प्राप्त करने के लिए अपेक्षित समय को सम्मिलित नहीं किया जाएगा
b. निर्णय की घोषणा की तिथि को सम्मिलित किया जाएगा
c. निर्णय की घोषणा की तिथि को सम्मिलित नहीं किया जाएगा
d. डिक्री तैयार करने में लगने वाले समय को सम्मिलित किया जाएगा
53. किसी वाद, अपील अथवा आवेदन के लिए परिसीमा की अवधि की गणना में उस दिन को सम्मिलित नहीं किया जाएगा जिस दिन -
a. अपील में निर्णय सुनाया गया हो
b. निर्णय की प्रतिलिपि प्राप्त करने में लगने वाला अपेक्षित समय
c. परिसीमा अवधि की गणना की जानो हो
d. उपरोक्त सभी
54. किसी वाद, अपील अधवा आवेदन के लिए परिसीमा की अवधि की गणना में उस दिन, जब ऐसी अवधि की गणना की जानी हो, को-
a. सम्मिलित किया जाएगा
b. सम्मिलित नहीं किया जाएगा
c. किसी उपयुक्त मामले में न्यायालय द्वारा सम्मिलित नहीं किया जा सकता है
d. उपरोक्त में कोई नहीं
55. अभिकथन कः किसी अपील के लिए परिसीमा की अवधि की गणना किए जाने में उस दिन, जब ऐसी गणना की जानी हो, को सम्मिलित किया जाएगा।
अभिकधन-ख: किसी अपील के लिए परिसीमा की अवधि की गणना किए जाने में निर्णय, जिसके विरुद्ध शिकायत/अपील की जा रही हो, की तिथि तथा डिक्री की प्रतिलिपि प्राप्त करने हेतु अपेक्षित समय को सम्मिलित नहीं किया जाएगा।
a. अभिकथन ख सही है
b. अभिकथनन क सही है
c. दोनों सही हैं
d. दोनों गलत हैं
56. परिसीमा अधिनियम की धारा 12(2) के अंतर्गत 'अपेक्षित समय' का अर्थ है:
a. लगाया गया वास्तविक समय
b. न्यूनतम समय
c. अधिकतम समय
d. पूर्णतः आवश्यक समय
57. निम्नलिखित में से किस परिस्थिति के अंतर्गत वादी को परिसीमा अधिनियम की धारा 14 में प्रावधानित लाभनहीं प्राप्त होंगे?
a. जहाँ किसी सक्षम न्यायालय द्वारा गुणागुण के आधार पर न्याय निर्णयन के उपरांत किसी अन्य सिविल प्रक्रिया का निस्तारण कर दिया गया हो
b. जहाँ कथित न्यायालय की अधिकारिता की आवश्यकतावश किसी अन्य सिविल प्रक्रिया का निस्तारण कर दिया गया हो
c. जहाँ कथित मामले पर विचारण की अधिकारिता में रखने वाले न्यायालय में बादी के द्वारा सद्भावपूर्वक किसी अन्य सिविल प्रक्रिया को कर्मठतापूर्वक अभियोजित किया जा चुका हो
d. उपरोक्त में कोई नहीं
58. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 13 किस मामले में लागू होती है-
a. एक अप्राप्तवय के मामले में
b. एक जड़बुद्धि के मामले में
c. एक अकिंचन के मामले में
d. एक पागल के मामले में
59. बिना अधिकारिता वाले न्यायालय में सद्भावनापूर्वक की गई कार्यवाही में लगने वाले समय को सम्मिलित न किए जाने की व्यवस्था की गई है-
a. धारा 13 के अंतर्गत
b. धारा 17 के अंतर्गत
c. धारा 19 के अंतर्गत
d. धारा 11 के अंतर्गत
60. परिसीमा अधिनियम की धारा 14 के अर्थ के अंतर्गत निम्नलिखित में से क्या 'सम्यक् तत्परता तथा सद्भावपूर्वक' सिविल प्रक्रिया प्रस्तुत किए जाने के समान होता है?
a. कम पाए गए न्यायालय शुल्क की मांग के भुगतान में असफल रहना
b. किसी वाद के मूल्यांकन के निर्णय की त्रुटि
c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों
d. न तो (a) न ही (b)
61. किसी वाद की परिसीमा की अवधि की गणना करते समय अधिकारविहीन न्यायालय के समक्ष किसी अन्य सिविल प्रक्रिया में व्यय किया गया समय बाहर किया जा सकता है यदि-
a. वादी किसी गलत परामर्श से भ्रमित हो गया हो
b. वादी ने उस स्थान को सदाशय से प्राप्त किया हो जहाँ उसे ऐसी कार्यवाही करना अधिक उपयुक्त लगा हो
c. वादी ने सम्यक् तत्परता के साथ सद्भावपूर्वक कार्य किया हो
d. उपरोक्त में कोई नहीं
62. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 14 के अंतर्गत अधिकारिता के दोष को निम्नलिखित में से किससे अवश्य सम्बन्धित होना चाहिए-
a. आर्थिक अधिकारिता
b. विषय-वस्तु अधिकारिता
c. क्षेत्रीय अधिकारिता
d. उपरोक्त में कोई नहीं
63. परिसीमा अधिनियम की धारा 14 को आकर्षित करने के लिए निम्नलिखित में से किस शर्त का पूरा होना अनिवार्य नहीं है-
a. पूर्ववर्ती कार्यवाही को सम्यक् कर्मठता एवं सद्भावपूर्वक अभियोजित किया गया हो
b. पूर्ववर्ती कार्यवाही तथा उत्तरवर्ती कार्यवाही अलग-अलग विवाद्यकों पर आधारित हो सकती हैं
c. दोनों, पूर्ववर्ती तथा उत्तरवर्ती कार्यवाहियाँ सिविल कार्यवाहियों हों जिन्हें एक न्यायालय में एक ही पक्ष द्वारा अभियोजित किया गया हो
d. पूर्ववर्ती कार्यवाही की विफलता अधिकारिता के दोष अथवा उससे मिलते-जुलते अन्य कारणवश रही हो
64. वादी परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 14 के लाभ प्राप्त करने का अधिकारी होता है बशर्ते -
a. यह कि वाद में अधिकारिता के प्रश्न पर पिछले न्यायालय द्वारा विचार न किया गया हो
b. यह कि वादी ने अपने वाद को सम्यक् तत्परता एवं सद्भावपूर्वक अभियोजित अवश्य किया रहा हो
c. उपरोक्त (a) अथवा (b)
d. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों
65. अधिकारिताविहीन न्यायालय में सविश्वासपूर्वक समय की कार्यवाही समिमलित न किए जाने हेतु-
a. कोई वादी या आवेदक, जो किसी अपील का प्रतिरोध कर रहा हो, कार्यवाही का अभियोजन करता हुआ समझा जाएगा
b. पक्षकरों के या वाद हेतुकों के कुसंयोजन को अधिकारिता में त्रुटि जैसी प्रकृति का हेतुक समझा जाएगा
c. उस समय का अपवर्जन करने में, जिसके दौरान कोई पूर्ववर्ती सिविल कार्यवाही लम्बित थी, तब दिन जिस दिन वह कार्यवाही संस्थित की गई और वह दिन, जिस दिन उसका अन्त हुआ, दोनों गिने जाएंगे
d. उपरोक्त सभी
66. परिसीमा की अवधि की गणना करने में जिस अवधि को बाहर किया जा सकता है, में सम्मिलित है-
a. वह अवधि जिसमें ऐसे अपराध के लिए अभियोजन पर एक व्यादेश अथवा आदेश द्वारा रोक लगा दो गई हो
b. वह अवधि जिसमें जमानत पर रिहाई का आरोपी का आवेदन लंबित रहा हो
c. वह समय जिसके दौरान एक व्यक्ति सम्यक् तत्परता, सद्विश्वास से तथा किसी अधिकारिताविहीन न्यायालय में उन्हों तथ्यों पर कोई अन्य अभियोजन करता रहा हो
d. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों
67. वह अवधि, जिसके दौरान कार्यवाही किसी व्यादेश अधवा आदेश के कारण रुकी रही हो, को गणना से बाहर कर दिया जाता है-
a. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 11 के अन्तर्गत
b. परिसीमा अधिनियम 1963 की धारा 15 के अन्तर्गत
c. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 17 के अन्तर्गत
d. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 13 के अन्तर्गत
68. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 15 किस पर लागू नहीं होती-
a. निष्पादन कार्यवाहियों पर
b. वादों पर
c. अपीलों पर
d. उपरोक्त में कोई नहीं
69. ऐसे मामलों, जिनमें वाद संस्थापित किए जाने के पूर्व वैधानिक सूचना जारी किया जाना विधि द्वारा वांछित हो, में एक वाद की संस्थिति पर परिसीमा का क्या प्रभाव होता है?
a. न्यायालय की अनुमति की आवश्यकता होती है
b. कोई प्रभाव नहीं
c. सूचना को निर्धारित अवधि गणना में सम्मिलित नहीं की जाती
d. उपरोक्त में कोई नहीं
70. परिसीमा अधिनियम की किस धारा के अंतर्गत वाद प्रस्तुत करने के अधिकार के उत्पन्न होने के पूर्व मृत्यु हो जाने का प्रभाव का प्रावधान किया गया है?
a. धारा 18
b. धारा 19
c. धारा 16
d. धारा 20
71. वाद प्रस्तुत करने का अधिकार उत्पन्न होने अथवा उसके पूर्व मृत्यु होने का प्रभाव -
a. वाद प्रस्तुत करने के अधिकार को विस्तारित कर देता है
b. न्यायालय को वाद निरस्त करने का सामर्थ्य प्रदान कर देता है
c. वाद प्रस्तुत करने के अधिकार को समाप्त कर देता
d. उपरोक्त में कोई नहीं
72. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 17 द्वारा विचारित कपट किससे सम्बन्धित होता है-
a. वादी का
b. प्रतिवादी का
c. तीसरे पक्ष का
d. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों
73. परिसीमा अधिनियम की धारा 17 अपनी परिधि में किसे सम्मिलित नहीं करती-
a. किसी बाद को
b. उपरोक्त सभी को
c. अपील को
d. निष्पादन के आवेदन को
74. धारा 16 में निहित प्रावधान किस पर प्रयोज्य नहीं होते-
a. स्थावर संपत्ति अथवा विरासत के पद के कब्जे सम्बन्धी बाद
b. अग्रक्रय के अधिकारों को लागू करवाने सम्बन्धी वाद
c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों
d. न (a) न ही (b)
75. परिसीमा अधिनियम की धारा 17 अपनी परिधि में सम्मिलित करती है 一
a. कपट
b. भूल
c. छिपाया जाना
d. उपरोक्त सभी
76. परिसीमा की अवधि के पश्चात् अभिस्वीकृति का -
a. कोई प्रभाव नहीं होता
b. एक स्वतंत्र एवं प्रवर्तनीय संविदा को जन्म देती है
c. न तो (a) न ही (b)
d. उपरोक (a) तथा (b) दोनों
77. यह आवश्यक नहीं है कि परिसीमा अधिनियम की धारा 18 के साथ एक अभिस्वीकृति में भुगतान करने का एक वादा अवश्य शामिल हो अथवा उसे भुगतान करने के लिए वादे बराबर होना चाहिए। यह कथन-
a. गलत है
b. आंशिक सत्य है
c. सत्य है
d. उपरोक्त में कोई नहीं
78. परिसीमा अधिनियम की धारा 18 सम्बन्धित है-
a. अभिस्वीकृति के प्रभाव अथवा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा भुगतान से
b. कपट अथवा 'ग्ल के प्रभाव से
c. विरासत पर ऋण अथवा ब्याज के भुगतान के प्रभाव के
d. लिखित अभिस्वीकृति के प्रभाव से
79. निम्नलिखित में से क्या एक वैध अभिस्वीकृति की अनिवार्यता आवश्यकता नहीं है-
a. इस पर अभिस्वीकृति देने वाले अथवा उसके अधिकृत अभिकर्ता के हस्ताक्षर अवश्य होना चाहिए
b. इसे अवश्य ही उस पक्ष द्वारा व्यक्त किया गया होना चाहिए जिसके विरुद्ध किसी सम्पत्ति अथवा अधिकार का दावा किया गया हो अथवा किसी ऐसे व्यक्ति के माध्यम से जिससे यह अपना स्वामित्व अथवा दायित्व व्युत्पन्न करता हो
c. इसे अवश्य ही परिसीमा की अवधि की समाप्ति के पूर्व व्यक्तु किया गया होना चाहिए
d. इसका लिखित में होना आवश्यक नहीं है
80. अभिस्वीकृति पर परिसीमा की नई अवधि प्रारंभ होती -
a. अभिस्वीकृति का वाद किए जाने की तिथि से
b. परिसीमा को विस्तारित अवधि की समाप्ति की तिथि से
c. अभिस्वीकृति पर हस्ताक्षर किए जाने की तिथि से
d. उपरोक्त में कोई नहीं
81. दायित्व अधीन व्यक्ति के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा व्यक्त अभिस्वीकृति वैध होती है यदि-
a. इसे व्यक्त करने वाला व्यक्ति दायित्व अधीन व्यक्ति का परिचित हो
b. इसे व्यक्त करने वाला व्यक्ति दायित्व अधीन व्यक्ति का अभिकर्ता हो
c. इसे व्यक्त करने वाला व्यकित दायित्व अधीन व्यक्ति का सेवक हो
d. उपरोक्त में कोई नहीं
82. परिसीमा अधिनियम की धारा 18 की उपधारा 2 के प्रावधान के अंतर्गत अभिस्वीकृति की तिथि का मौखिक साक्ष्य अनुज्ञेय है यदि अभिस्वीकृति -
a. अदिनांकित हो
b. अभिस्वीकृति में तिथि परिवर्तित की गई हो
c. दिनांकित हो
d. उपरोक्त सभी
83. एक वाद निर्धारित अवधि के बाद भी परिसीमा के अंदर कहा जा सकता है यदि-
a. यदि प्रतिवादी परिसीमा की अवधि के समाप्त होने के पूर्व वादों के अधिकार के दायित्व को अभिस्वीकृत करले
b. वाद के दोनों पक्षकार समझौते द्वारा इसे अधित्यक्त करने हेतु सहमत हो चुके हों
c. यदि प्रतिवादी नोटिस के प्रत्युत्तर में वादी के संपूर्ण दावे को स्वीकार कर ले
d. यदि प्रतिवादी परिसीमा के आधार पर बादी के दावे पर कोई आपत्ति न प्रस्तुत करे
84. निम्नलिखित में से क्या परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 18 के अंतर्गत दायित्व की अभिस्वीकृति के सम्बन्ध में सही है?
a. अभिस्वीकृति का लिखित में होना अनिवार्य नहीं होता
b. परिसीमा की अवधि समाप्त होने के बाद अभिस्वीकृति दी जा सकती है
c. अभिस्वीकृति अदिनांकित नहीं हो सकती
d. अभिस्वीकृति संपत्ति के स्वामी व्यक्ति के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को दी जा सकती है
85. परिसीमा की अवधि समाप्त होने के पूर्व, क ने लिखित में ख से ऋण के रूप में बकाया राशि को अभिस्वीकृत कर दिया था तथा इसके भुगतान का वादा किया था। ऐसी किसी अभिस्वीकृति के क्या प्रभाव हैं?
a. परिसीमा को अवधि का छह माह के लिए विस्तार कर दिया जाएगा
b. परिसीमा की अवधि प्रयोज्य नहीं होगी
c. परिसीमा की अवधि पर कोई प्रभाव नहीं
d. ऐसी अभिस्वीकृति की तिथि से परिसीमा की नई अवधि प्रारम्भ होगी
86. परिसीमा अधिनियम की धारा 19 के अन्तर्गत ऋण अथवा ब्याज का आंशिक भुगतान -
a. किसी अन्य अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित परिसीमा की अवधि के अंदर किया गया होना चाहिए
b. अधिनियम के अन्तर्गत परिसीमा की अवधि के अन्दर किया गया होना चाहिए
c. पुनर्भुगतान के लिए निर्धारित अवधि के अन्दर किया गया होना चाहिए
d. उपरोक्त सभी
87. परिसीमा अधिनियम की धारा 18 के अंतर्गत दायित्व की अभिस्वीकृति की तिथि से प्रारम्भ होने वाली परिसीमा की नई अवधि के लिए यह आवश्यक है कि अभिस्वीकृति -
a. अवश्य ही लिखित में हो
b. विहित अवधि की समाप्ति के पूर्व व्यक्त की गई हो
c. उस पक्ष, जिसके विरुद्ध अधिकार का दावा किया हो, के द्वारा हस्ताक्षर की गई हो
d. उपरोक्त सभी
88. किसी वाद की संस्थिति के बाद एक नए प्रतिवादी को प्रतिस्थापित कर दिया जाता है। उसके सम्बन्ध में वाद को संस्थित समझा जाएगा जब-
a. जब वाद संस्थित किया गया हो
b. परिसीमा की नई अवधि की गणना की जानी होगी
c. उसे एक पक्षकार बनाया गया हो
d. इनमें से कोई नहीं
89. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 21 निम्नलिखित में से किस मामले में लागू नहीं होती?
a. पक्षकारों का पक्षान्तरण होने पर
b. एक नए प्रतिवादी को पहली बार जोड़े जाने पर
c. एक नए वादी को पहली बार प्रतिस्थापित किए जाने पर
d. एक नए वादी को पहली बार जोड़े जाने पर
90. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 22 निम्नलिखित में से किस मामले में लागू नहीं होती-
a. एक चालू रहने वाला अपकृत्य के मामले में
b. माल को सदोष निरुद्ध करने के लिए क्षतिपूर्ति सम्बन्धी एक वाद के मामले में
c. संविदा भंग चालू रहने के मामले में
d. उपरोक्त में कोई नहीं
91. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 22 निम्नलिखित में से किस मामले/मामलों को संदर्भित करती है-
a. निरंतर तथा अनुक्रमिक भंग
b. विशिष्ट क्षतिपूर्ति
c. चालू रहने वाली संविदा भंग किया जाना
d. अनुक्रमिक संविदा भंग के मामले में
92. किसी प्रलेख में प्रयुक्त तिथि के लिए परिसीमा के समय की गणना किस कैलेंडर के अनुसार की जाएगी-
a. ग्रिगोरियन कैलेंडर
b. हिन्दू कैलेण्डर
c. इस्लामिक कैलेंडर
d. अंग्रेजी कैलेंडर
93. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 25 के अन्तर्गत सरकार की सम्पत्ति पर सुखाचार के अधिकार सतत् एवं अबाधित उपयोग करते रहने पर उपयोगकर्ता द्वारा अर्जित कर लिए जाते हैं। ऐसा उपयोग कितनी अवधि तक किया जाना आवश्यक है-
a. 30 वर्षों के लिए
b. 60 वर्षों के लिए
c. 12 वर्षों के लिए
d. 20 वर्षों के लिए
94. भारतीय परिसीमा अधिनियम की किस धारा के अंतर्गत विरभोग द्वारा सुखाचार अर्जित करने के लिए समय सीमा का प्रावधान किया गया है?
a. धारा 23
b. धारा 25
c. धारा 26
d. धारा 28
95. परिसीमा अधिनियम, 1963 की कौन सी धारा प्रावधान करती है कि कालावधि व्यतीत हो जाने पर न केवल उपचार वर्जित हो जाता है बल्कि संपत्ति पर अधिकार भी समाप्त हो जाता है?
a. धारा 25
b. धारा 27
c. धारा 24
d. धारा 26
96. सामान्य नियम यह है कि "परिसीमा विधि मात्र उपचार को वर्जित करती है किन्तु स्वयं अधिकार को निर्वापित नहीं करती।" इस नियम का अपवाद निहित है-
a. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 30 में
b. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 27 में
c. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 25 में
d. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 26 में
97. किसी बंधक अथवा अन्य तरीके से स्थावर संपत्ति पर प्रभार के द्वारा सुरक्षित धन के भुगतान हेतु वाद प्रस्तुत करने के लिए परिसीमा की निर्धारित अवधि है -
a. वादग्रस्त धनराशि के बकाया होने से 25 वर्ष
b. वादग्रस्त धनराशि के बकाया होने से 30 वर्ष
c. वादग्रस्त धनराशि के बकाया होने से 12 वर्ष
d. वादग्रस्त धनराशि के बकाया होने से 20 वर्ष
98. ऐसे वाद इत्यादि, जिनके लिए विहित कालावधि भारतीय परिसीमा अधिनियम, 1908 के द्वारा निर्धारित अवधि से कम हो उसे सम्बन्धित प्रावधान निहित हैं-
a. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 32 में
b. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 27 में
c. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 30 में
d. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 27 में
99. अधिनियम का कौन सा प्रावधान किसी विशिष्ट विधि अथवा विधि द्वारा किसी भी वाद, अपील अथवा आवेदन के लिए निर्धारित परिसीमा की अवधि के निर्धारण के प्रयोजन के लिए यह व्यवस्था करता है कि धारा 4 से 24 में निहित प्रावधान केवल उसी सीमा तक, तथा उसी विस्तार तक लागू होंगे जहाँ तक और जिस विस्तार तक उस विशिष्ट अथवा स्थानीय विधि द्वारा वर्जित न किए गए हों?
a. धारा 21
b. धारा 24
c. धारा 29
d. धारा 31
100. परिसीमा अधिनियम लागू होता है-
a. केवल आपराधिक वादों पर
b. आपराधिक तथा सिविल दोनों वादों पर
c. केवल सिविल वादों पर
d. सिविल, आपराधिक तथा सेवा सम्बन्धी मामलों में
101. परिसीमा विधि के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से क्या सही है?
a. परिसीमा विधि अधिकार को समाप्त कर देती हे
b. परिसीमा विधि न्यायेतर उपचार को वर्जित कर देती
c. परिसीमा विधि न्यायिक उपचार को वर्जित कर देती है
d. परिसीमा विधि एक ठोस विधि है
102. परिसीमा विधि मात्र उपचार को वर्जित कर सकती है, किन्तु निम्नलिखित में से किसे समाप्त नहीं करती-
a. अधिकार
b. ऋण
c. संपत्ति
d. वसूली
103. परिसीमा अवधि की समाप्ति -
a. ऋण को समाप्त कर देती है
b. ऋण को अप्रवर्तनीय बना देती है
c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों
d. उपरोक्त में कोई नहीं
104. परिसीमा विधि-
a. एक मौलिक विधि है
b. प्रक्रियात्मक तथा मौलिक दोनों विधि है
c. एक प्रक्रियात्मक विधि है
d. उपरोक्त में कोई नहीं
105. परिसीमा अधिनियम, 1963 का प्रभाव-
a. केवल भावी होता है
b. केवल भूतलक्षी होता है
c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों
d. उपरोक्त में कोई नहीं
106. स्वामित्व पर आधारित स्थावर संपत्ति के कब्जे के लिए एक वाद हेतु परिसीमा की अवधि क्या होती है-
a. उस तिथि से 12 वर्ष जब प्रतिवादी का कब्जा वादी के प्रतिकूल हो जाए
b. कब्जा बेदखली की तिथि से 13 वर्ष
c. कब्जा बेदखली की धमकी की तिथि से 12 वर्ष
d. उपरोक्त में कोई नहीं
107. परिसीमा अधिनियम के अंतर्गत मिथ्या कारावास के लिए प्रतिकर हेतु एक वाद प्रस्तुत किए जाने की परिसीमा अवधि कब प्रारंभ होती है-
a. जब कारावास समाप्त होता हो
b. जब कारावास प्रारम्भ होता हो
c. जब अभियोजन समाप्त होता हो
d. उपरोक्त में कोई नहीं
108. निम्नलिखित में से ऐसा कौन सा मामला है जिसकी प्रस्तुति के लिए कोई अन्य परिसीमा अवधि निर्धारित न किए गए होने की स्थिति में परिसीमा अधिनियम, 1963 के अनुच्छेद 137 के अंतर्गत तीन वर्ष की अवधि निर्धारित की गई है-
a. बाद
b. अपील
c. आवेदन
d. प्रक्रिया
109. परिसीमा अधिनियम, 1963 के अन्तर्गत सर्वोच्च न्यायालय के अलावा किसी अन्य न्यायालय के द्वारा पुनर्विचार के लिए एक आवेदन प्रस्तुत किए जाने हेतु परिसीमा की अवधि क्या होती है-
a. 120 दिन
b. 30 दिन
c. 60 दिन
d. 90 दिन
110. माध्यस्थता आदेश को अपास्त करने के लिए आवेदन प्रस्तुत करना होता है-
a. पंचाट प्रस्तुत करने की जानकारी की तिथि से 30 दिनों के अंदर
b. पंचाट प्रस्तुत करने की जानकारी की तिथि से 60 दिनों के अंदर
c. पंचाट प्रस्तुत करने की नोटिस की तामील की तिथि से 30 दिनों के अंदर
d. पंचाट प्रस्तुत करने की नोटिस की तामील की तिथि से 15 दिनों के अंदर
111. किसी पक्षकार के विधिक प्रतिनिधि को अभिलेख में सम्मिलित किए जाने हेतु एक आवेदन कितने दिनों के अंदर प्रस्तुत किया जाना होता है-
a. मृत्यु के 30 दिनों के अन्दर
b. मृत्यु के 45 दिनों के अन्दर
c. मृत्यु के 15 दिनों के अन्दर
d. मृत्यु के 90 दिनों के अन्दर
112. बंधककर्ता द्वारा एक बंधक स्थावर संपत्ति के मोचन अथवा कब्जे के प्रत्युद्धरणे के लिए वाद किस अवधि के अंदर प्रस्तुत किया जा सकता है-
a. 30 वर्ष
b. 1 वर्ष
c. 6 वर्ष
d. 3 वर्ष
113. अधिनियम की अनुसूची में लेखों, संविदाओं, घोषणाओं, डिक्रियों, स्थावर संपत्ति सम्बन्धी वादों आदि के लिए उल्लिखित परिसीमा की अवधि है-
a. 4 वर्ष
b. 6 वर्ष
c. 2 वर्ष
d. 3 वर्ष
114. परिसीमा अधिनियम के अन्तर्गत किसी उपशमन को अपास्त करने सम्बन्धी आदेश के लिए एक आवेदन प्रस्तुत करने हेतु परिसीमा की अवधि है-
a. 60 दिन
b. 90 दिन
c. 30 दिन
d. उपरोक्त में कोई नहीं
115. विभाजन सम्बन्धी किसी वाद में पारित डिक्री के निष्पादन के लिए परिसीमा की अवधि कब प्रारम्भ होती है-
a. प्रारम्भिक डिक्री की तिथि से
b. अंतिम डिक्री की तिथि से
c. उस तिथि से जब डिक्री को स्टाम्प पत्र पर सुलिखित किया गया हो
d. उस तिथि से जब अंतिम डिक्री पारित करने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया हो
116. स्वामित्व पर आधारित स्थावर संपत्ति के कब्जे के लिए एक बाद कितनी अवधि में प्रस्तुत किया जा सकता है-
a. बारह वर्ष
b. छह माह
c. एक वर्ष
d. तीन वर्ष
117. ऐसी संपत्ति, जिसे वादी ने पागलपन के दौरान हस्तान्तरित किया हो, के लिए वाद के मामले में परिसीमा की अवधि प्रारम्भ होने का समय वह तिथि होती t-
a. जिस तिथि पर संपत्ति हस्तांतरित की गई हो
b. जब वादी को हस्तान्तरण की जानकारी प्राप्त हुई हो
c. जब वादी मानसिकतौर पर स्वस्थ हो जाए
d. उपरोक्त (a) तथा (c) दोनों
118. एक संयुक्त पारिवारिक संपत्ति से बहिष्कृत किसी व्यक्ति द्वारा उस संपत्ति में हिस्से के अधिकार को लागू करवाने सम्बन्धी किसी वाद के मामले में परिसीमा की अवधि किस तिथि से प्रारम्भ होती है-
a. बहिष्करण की तिथि से
b. उस तिथि से जब वादी को बहिष्करण का ज्ञान हुआ हो
c. उस तिथि से जब वादी कब्जा वापस पाने की अपनी मंशा को सार्वजनिक कर दे
d. वादों को कब्जा प्रदान करने से इंकार किए जाने को तिथि से
119. एक अपील प्रस्तुत करने हेतु परिसीमा की अवधि का प्रारम्भ होता है-
a. डिक्री पर हस्ताक्षर की तिथि से
b. निर्णय की प्रतिलिपि के लिए दिए गए आवेदन की तिथि से
c. निर्णय की तिथि से
d. उपरोक्त में कोई नहीं
120. उच्च न्यायालय के किसी अधीनस्थ न्यायालय द्वारा पारित एक डिक्री से उत्पन्न एक अपील उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए परिसीमा की अवधि डिक्री की तिथि से कितने दिनों की होगी-
a. 30 दिन
b. 60 दिन
c. 90 दिन
d. 1वर्ष
121. किसी प्रतिपाल्य के अभिभावक द्वारा किए गए संपत्ति के अन्तरण को अपास्त करने हेतु वयस्क हो चुके प्रतिपाल्य द्वारा प्रस्तुत वाद को किस तिथि से तीन वर्ष के अंदर प्रस्तुत किया जा सकता है-
a. जिस तिथि पर प्रतिपाल्य वयस्क हुआ हो
b. जिस तिथि पर कब्जाधारक कब्जा देने से इंकार कर दे
c. जिस तिथि को संपत्ति का अंतरण किया गया हो
d. जिस तिथि पर कब्जाधारक को नोटिस तामोल की गई हो
122. सदोष प्राप्त किए गए व्यादेश के कारण होने वाली क्षति की प्रतिकर के लिए वाद प्रस्तुत करने हेतु परिसीमा की अवधि किस तिथि से प्रारम्भ होती है-
a. जिस विधि पर व्यादेश का आवेदन प्रस्तुत किया गया हो
b. जिस तिथि पर व्यादेश के लिए वाद प्रस्तुत किया गया हो
c. जिस तिथि पर व्यादेश प्रापत किया गया हो
d. जिस तिथि पर व्यादेश समाप्त हुआ हो
123. परिसीमा अधिनियम के अनुच्छेद 113 के अंतर्गत एक वाद प्रस्तुत करने के लिए परिसीमा की अवधि क्या होती -
a. 20 वर्ष
b. 2 माह
c. 3 वर्ष
d. 1 वर्ष
124. बंधक संपत्तियों से सम्बन्धित वादों के लिए अधिनियम की अनुसूची में उल्लिखित परिसीमा की निर्धारित अवधि क्या है-
a. 6 वर्ष
b. 8 वर्ष
c. 12 वर्ष
d. 30 वर्ष
125. किसी किराएदार से कब्जा पुनप्राप्ति के लिए एक मकान मालिक के लिए परिसीमा की अवधि क्या होती
a. एक वर्ष
b. दो वर्ष
c. तीन वर्ष
d. बारह वर्ष
126. किसी किराएदार से कब्जा पुनः प्राप्ति हेतु परिसीमा की अवधि किस तिथि से प्रारम्भ होती है-
a. किराएदारी को अवधि समाप्त होने की तिथि से
b. किराएदारी समाप्त होने की नोटिस जारी किए जाने की तिथि से
c. किराएदारी किए जाने की तिथि से
d. इनमें से कोई नहीं
127. एक आज्ञापक व्यादेश स्वीकार करने वाली डिक्री के प्रवर्तन के लिए परिसीमा की अवधि क्या होती है-
a. बारह वर्ष
b. एक वर्ष
c. तीन वर्ष
d. परिसीमा की कोई अवधि निर्धारित नहीं की गई है
128. मोचन निषेध के लिए परिसीमा की अवधि क्या होती है?
a. 3 वर्ष
b. 5 वर्ष
c. 15 वर्ष
d. 30 वर्ष
129. परिसीमा अधिनियम में निर्धारित न्यूनतम परिसीमा अवधि क्या है-
a. 1 माह
b. 30 दिन
c. 10 दिन
d. 20 दिन
130. निम्न में से किस मामले में उच्चतम न्यायालय की पूर्णपीठ ने धारित किया कि यदि कोई व्यक्ति किसी सम्पत्ति पर बिना रोक-टोक के 12 वर्ष तक प्रतिकूल कब्जा रखता है तो उसे सम्पत्ति में मालिकाना हक प्राप्त हो जाता है। स्वामी का बेदखल करने का अधिकार समाप्त हो जाता है-
a. सिडीकेट बैंक बनाम प्रभा डी० नायक, ए० आई० आर० 1968 एस० सी०
b. लता कामत बनाम विलास, ए० आई० आर० 1989 एस० सी०
c. रविन्दर कौर एवं अन्य बनाम मंजीर कौर, 2019 एस० सी०
d. मनोहर लाल बनाम एन० बी० एम० सप्लाई, ए० आई० आर० 1969 एस० सी०
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