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1. धारा 65 के अनुसार गिरफ्तार व्यक्ति को बन्धपत्र के अनुसार कब उपसंजात होना होगा?
a. 24 घंटे के भीतर
b. सात दिन के भीतर
c. जब और जैसे ही उससे ऐसा करने की अपेक्षा की जाएगी
d. एक मास के भीतर
2. धारा 66 का विषय क्या है?
a. किसी गिरफ्तार व्यक्ति को बन्धपत्र पर निर्मुक्त करने की शक्ति
b. अपराधों का किया जाना निवारित करने की शक्ति
c. वारंट के बिना गिरफ्तार करने की शक्ति
d. दोषपूर्ण अभिग्रहण के लिए दण्ड
3. धारा 66 के अनुसार वन विषयक अपराध का किया जाना निवारित करने का दायित्व किसका है?
a. केवल वन अधिकारी का
b. केवल पुलिस अधिकारी का
c. प्रत्येक वन अधिकारी और पुलिस अधिकारी का
d. केवल मजिस्ट्रेट का
4. धारा 66 के अनुसार वन विषयक अपराध को निवारित करने के लिए कौन हस्तक्षेप कर सकता है?
a. केवल वन अधिकारी
b. केवल पुलिस अधिकारी
c. प्रत्येक वन अधिकारी और पुलिस अधिकारी
d. केवल जिला मजिस्ट्रेट
5. धारा 66 के अनुसार वन अधिकारी और पुलिस अधिकारी किस उद्देश्य से हस्तक्षेप कर सकते हैं?
a. वन-उपज का संग्रहण करने के लिए
b. अपराधी को दण्डित करने के लिए
c. वन विषयक अपराध के किए जाने को निवारित करने के प्रयोजन से
d. वन भूमि का सर्वेक्षण करने के लिए
6. धारा 67 का विषय क्या है?
a. अपराधों का किया जाना निवारित करने की शक्ति
b. अपराधों का संक्षिप्ततः विचारण करने की शक्ति
c. वारंट के बिना गिरफ्तार करने की शक्ति
d. किसी गिरफ्तार व्यक्ति को बन्धपत्र पर निर्मुक्त करने की शक्ति
7. धारा 67 के अनुसार वन विषयक अपराध का संक्षिप्ततः विचारण कौन कर सकता है?
a. केवल उच्च न्यायालय
b. केवल वन अधिकारी
c. जिला मजिस्ट्रेट या राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त विशेषतया सशक्त प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट
d. केवल पुलिस अधिकारी
8. धारा 67 के अनुसार प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट को संक्षिप्त विचारण की शक्ति कौन प्रदान कर सकता है?
a. उच्च न्यायालय
b. राज्य सरकार
c. जिला मजिस्ट्रेट
d. वन विभाग
9. धारा 67 के अनुसार संक्षिप्त विचारण किस संहिता के अधीन किया जाएगा?
a. भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अधीन
b. भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अधीन
c. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023) के अधीन
d. भारतीय वन अधिनियम, 1927 के अधीन
10. धारा 67 के अनुसार किन वन विषयक अपराधों का संक्षिप्ततः विचारण किया जा सकता है?
a. सभी वन विषयक अपराधों का
b. केवल जुर्माने से दण्डनीय अपराधों का
c. जो छह मास से अनधिक कारावास या पाँच सौ रुपए से अनधिक जुर्माने से, या दोनों से दण्डनीय हों
d. केवल आरक्षित वन से संबंधित अपराधों का
11. धारा 67 के अनुसार संक्षिप्त विचारण के लिए अपराध के कारावास की अधिकतम सीमा क्या है?
a. तीन मास से अनधिक
b. छह मास से अनधिक
c. एक वर्ष से अनधिक
d. दो वर्ष से अनधिक
12. धारा 67 के अनुसार संक्षिप्त विचारण के लिए अपराध के जुर्माने की अधिकतम सीमा क्या है?
a. ₹250 से अनधिक
b. ₹500 से अनधिक
c. ₹1,000 से अनधिक
d. ₹5,000 से अनधिक
13. धारा 68 का विषय क्या है?
a. अपराधों का संक्षिप्ततः विचारण करने की शक्ति
b. अपराधों का शमन करने की शक्ति
c. अपराधों का किया जाना निवारित करने की शक्ति
d. वारंट के बिना गिरफ्तार करने की शक्ति
14. धारा 68(1) के अनुसार अपराधों का शमन करने की शक्ति किसके द्वारा प्रदान की जाती है?
a. केन्द्रीय सरकार द्वारा
b. राज्य सरकार द्वारा
c. उच्च न्यायालय द्वारा
d. जिला मजिस्ट्रेट द्वारा
15. धारा 68(1) के अनुसार राज्य सरकार यह शक्ति किस माध्यम से प्रदान करेगी?
a. शासनादेश द्वारा
b. परिपत्र द्वारा
c. राजपत्र में अधिसूचना द्वारा
d. न्यायालय के आदेश द्वारा
16. धारा 68(1)(क) के अनुसार वन अधिकारी किससे प्रतिकर के रूप में धनराशि प्रतिगृहीत कर सकता है?
a. किसी भी व्यक्ति से
b. केवल दोषसिद्ध व्यक्ति से
c. ऐसे व्यक्ति से जिसके विरुद्ध यह युक्तियुक्त संदेह हो कि उसने धारा 62 या धारा 63 से भिन्न कोई वन विषयक अपराध किया है
d. केवल सरकारी कर्मचारी से
17. धारा 68(1)(क) के अनुसार किन अपराधों का शमन नहीं किया जा सकता?
a. सभी वन अपराधों का
b. केवल आरक्षित वन के अपराधों का
c. धारा 62 या धारा 63 में विनिर्दिष्ट अपराधों का
d. केवल संरक्षित वन के अपराधों का
18. धारा 68(1)(क) के अनुसार प्रतिगृहीत धनराशि किस रूप में होगी?
a. जुर्माने के रूप में
b. न्यायालय शुल्क के रूप में
c. अपराध के प्रतिकर के रूप में
d. सुरक्षा राशि के रूप में
19. धारा 68(1)(ख) के अनुसार अभिगृहीत सम्पत्ति कब निर्मुक्त की जा सकती है?
a. जब न्यायालय आदेश दे
b. जब उसके मूल्य का, जैसा अधिकारी द्वारा प्राक्कलित किया गया हो, भुगतान कर दिया जाए
c. जब अपराध सिद्ध न हो
d. जब राज्य सरकार अनुमति दे
20. धारा 68(1)(ख) के अनुसार अभिगृहीत सम्पत्ति का मूल्य कौन प्राक्कलित करेगा?
a. मजिस्ट्रेट
b. जिला कलेक्टर
c. सशक्त वन अधिकारी
d. पुलिस अधिकारी
21. धारा 68(2) के अनुसार प्रतिकर की धनराशि, मूल्य या दोनों के भुगतान पर अभिरक्षा में रखे गए व्यक्ति के साथ क्या किया जाएगा?
a. उसे न्यायालय भेज दिया जाएगा
b. उसे उन्मोचित कर दिया जाएगा
c. उसे कारागार भेज दिया जाएगा
d. उसे पुनः गिरफ्तार किया जाएगा
22. धारा 68(2) के अनुसार प्रतिकर की धनराशि, मूल्य या दोनों के भुगतान पर अभिगृहीत सम्पत्ति के साथ क्या किया जाएगा?
a. उसका अधिहरण कर लिया जाएगा
b. उसे नीलाम कर दिया जाएगा
c. उसे निर्मुक्त कर दिया जाएगा
d. उसे सरकार में निहित कर दिया जाएगा
23. धारा 68(2) के अनुसार प्रतिकर की धनराशि, मूल्य या दोनों के भुगतान के बाद आगे क्या कार्यवाही नहीं की जाएगी?
a. केवल सम्पत्ति के विरुद्ध
b. केवल व्यक्ति के विरुद्ध
c. उस व्यक्ति या उस सम्पत्ति के विरुद्ध कोई आगे की कार्यवाही नहीं की जाएगी
d. केवल न्यायालय की कार्यवाही नहीं की जाएगी
24. धारा 68(3) के अनुसार इस धारा के अधीन शक्ति किस वन अधिकारी को प्रदान की जा सकती है?
a. किसी भी वन अधिकारी को
b. केवल प्रधान मुख्य वन संरक्षक को
c. जो रेंजर से अनिम्न पंक्ति का वन अधिकारी हो और कम से कम सौ रुपए मासिक वेतन पाता हो
d. केवल वन रक्षक को
25. धारा 68(3) के अनुसार इस धारा के अधीन शक्ति प्रदान किए जाने के लिए वन अधिकारी का न्यूनतम मासिक वेतन कितना होना चाहिए?
a. ₹50
b. ₹75
c. ₹100
d. ₹500
26. धारा 68(3) के अनुसार उपधारा (1)(क) के अधीन प्रतिकर के रूप में प्रतिगृहीत धनराशि की अधिकतम सीमा क्या है?
a. ₹25
b. ₹50
c. ₹100
d. ₹500
27. धारा 69 का विषय क्या है?
a. अपराधों का शमन करने की शक्ति
b. यह उपधारणा कि वन-उपज सरकार की है
c. अपराधों का संक्षिप्ततः विचारण करने की शक्ति
d. अपराधों का किया जाना निवारित करने की शक्ति
28. धारा 69 के अनुसार वन-उपज के सरकार की सम्पत्ति होने का प्रश्न कब उठता है?
a. केवल वन-अपराध के विचारण के समय
b. जब भारतीय वन अधिनियम, 1927 के अधीन की गई किसी कार्यवाही में या भारतीय वन अधिनियम, 1927 के अधीन किए गए किसी कार्य के परिणामस्वरूप ऐसा प्रश्न उठता है
c. केवल वन अधिकारी के आदेश पर
d. केवल न्यायालय के निर्देश पर
29. धारा 69 के अनुसार वन-उपज के संबंध में कौन-सी उपधारणा की जाएगी?
a. कि वह निजी सम्पत्ति है
b. कि वह वन अधिकारी की सम्पत्ति है
c. कि वह सरकार की सम्पत्ति है
d. कि वह विवादित सम्पत्ति है
30. धारा 69 के अनुसार वन-उपज के सरकार की सम्पत्ति होने की उपधारणा कब तक लागू रहेगी?
a. जब तक न्यायालय आदेश न दे
b. जब तक वन अधिकारी अनुमति न दे
c. जब तक कि प्रतिकूल साबित न कर दिया जाए
d. केवल विचारण की समाप्ति तक
31. धारा 69 के अनुसार वन-उपज के सरकार की सम्पत्ति होने की उपधारणा किस प्रकार की है?
a. अंतिम उपधारणा
b. खण्डनीय नहीं होने वाली उपधारणा
c. प्रतिकूल सिद्ध किए जाने तक की उपधारणा
d. अस्थायी प्रशासनिक उपधारणा
32. धारा 70 का विषय क्या है?
a. यह उपधारणा कि वन-उपज सरकार की है
b. पशु अतिचार अधिनियम, 1871 का लागू होना
c. अपराधों का शमन करने की शक्ति
d. अपराधों का संक्षिप्ततः विचारण करने की शक्ति
33. धारा 70 के अनुसार किन पशुओं को पशु अतिचार अधिनियम, 1871 की धारा 11 के अर्थ में लोक बागान को नुकसान करने वाला पशु समझा जाएगा?
a. सभी आवारा पशुओं को
b. केवल पालतू पशुओं को
c. आरक्षित वन में या चरागाह के लिए विधिपूर्वक बन्द किए गए संरक्षित वन के किसी प्रभाग में अतिचार करने वाले पशुओं को
d. केवल जंगली पशुओं को
34. धारा 70 के अनुसार संरक्षित वन का कौन-सा प्रभाग इस धारा के अंतर्गत आता है?
a. सम्पूर्ण संरक्षित वन
b. केवल आरक्षित वन
c. जो विधिपूर्वक चरागाह के लिए बन्द किया गया हो
d. केवल ग्राम वन
35. धारा 70 के अनुसार अतिचार करने वाले पशुओं का अभिग्रहण कौन कर सकता है?
a. केवल वन अधिकारी
b. केवल पुलिस अधिकारी
c. वन अधिकारी या पुलिस अधिकारी
d. केवल मजिस्ट्रेट
36. धारा 70 के अनुसार अतिचार करने वाले पशुओं को कौन परिबद्ध कर सकता है?
a. केवल वन अधिकारी
b. केवल पुलिस अधिकारी
c. वन अधिकारी या पुलिस अधिकारी
d. केवल ग्राम पंचायत
37. धारा 70 के अनुसार इस धारा में किस अधिनियम की धारा 11 का उल्लेख है?
a. भारतीय वन अधिनियम, 1927
b. भारतीय न्याय संहिता, 2023
c. पशु अतिचार अधिनियम, 1871 की धारा 11
d. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898
38. धारा 71 का विषय क्या है?
a. पशु अतिचार अधिनियम, 1871 का लागू होना
b. उस नियम के अधीन नियत जुर्मानों को बदलने की शक्ति
c. यह उपधारणा कि वन-उपज सरकार की है
d. अपराधों का शमन करने की शक्ति
39. धारा 71 के अनुसार पशु अतिचार अधिनियम, 1871 की धारा 12 के अधीन नियत जुर्मानों को बदलने की शक्ति किसके पास है?
a. केन्द्रीय सरकार के पास
b. राज्य सरकार के पास
c. जिला मजिस्ट्रेट के पास
d. वन अधिकारी के पास
40. धारा 71 के अनुसार राज्य सरकार यह शक्ति किस माध्यम से प्रयोग करेगी?
a. शासनादेश द्वारा
b. परिपत्र द्वारा
c. राजपत्र में अधिसूचना द्वारा
d. न्यायालय के आदेश द्वारा
41. धारा 71 के अनुसार राज्य सरकार किसके संबंध में निदेश दे सकती है?
a. वन अपराधों के दण्ड के संबंध में
b. कि पशु अतिचार अधिनियम, 1871 की धारा 12 के अधीन नियत जुर्मानों के स्थान पर धारा 70 के अधीन परिबद्ध प्रत्येक पशु के लिए इस धारा में निर्दिष्ट जुर्माना उद्गृहीत किया जाएगा
c. वन अधिकारियों की नियुक्ति के संबंध में
d. आरक्षित वन की सीमाओं के संबंध में
42. धारा 71 के अनुसार धारा 70 के अधीन परिबद्ध प्रत्येक पशु के लिए जुर्माना कौन निर्धारित करेगा?
a. वन अधिकारी
b. जिला मजिस्ट्रेट
c. राज्य सरकार
d. पुलिस अधिकारी
43. धारा 71 के अनुसार प्रत्येक हाथी के लिए अधिकतम जुर्माना कितना होगा?
a. ₹5
b. ₹10
c. ₹20
d. ₹50
44. धारा 71 के अनुसार प्रत्येक भैंस या ऊंट के लिए अधिकतम जुर्माना कितना होगा?
a. ₹1
b. ₹2
c. ₹5
d. ₹10
45. धारा 71 के अनुसार प्रत्येक घोड़े, खस्सी, पशु, टट्टू, बछेड़े, खच्चर, सांड, बैल, गाय या बछेड़ी के लिए अधिकतम जुर्माना कितना होगा?
a. ₹0.50
b. ₹1
c. ₹2
d. ₹5
46. धारा 71 के अनुसार प्रत्येक बछड़े, गधे, सूअर, मेढ़े, भेड़, मेमने, बकरी या उसके मेमनों के लिए अधिकतम जुर्माना कितना होगा?
a. चार आने
b. आठ आने
c. बारह आने
d. एक रुपया
47. धारा 72 का विषय क्या है?
a. उस नियम के अधीन नियत जुर्मानों को बदलने की शक्ति
b. राज्य सरकार वन अधिकारियों में कतिपय शक्तियां विनिहित कर सकेगी
c. पशु अतिचार अधिनियम, 1871 का लागू होना
d. यह उपधारणा कि वन-उपज सरकार की है
48. धारा 72(1) के अनुसार वन अधिकारियों में शक्तियां विनिहित करने की शक्ति किसके पास है?
a. केन्द्रीय सरकार के पास
b. उच्च न्यायालय के पास
c. राज्य सरकार के पास
d. जिला मजिस्ट्रेट के पास
49. धारा 72(1) के अनुसार राज्य सरकार वन अधिकारी में क्या विनिहित कर सकेगी?
a. केवल सिविल न्यायालय की शक्तियां
b. केवल तलाशी की शक्ति
c. धारा 72(1) में वर्णित सभी शक्तियां या उनमें से कोई शक्ति
d. केवल गिरफ्तारी की शक्ति
50. धारा 72(1)(क) के अनुसार वन अधिकारी को किस भूमि संबंधी शक्ति से विनिहित किया जा सकता है?
a. भूमि अर्जित करने की शक्ति
b. किसी भूमि पर जाने तथा उसका सर्वेक्षण, सीमांकन और नक्शा तैयार करने की शक्ति
c. भूमि बेचने की शक्ति
d. भूमि का स्वामित्व हस्तांतरित करने की शक्ति
51. धारा 72(1)(ख) के अनुसार वन अधिकारी को सिविल न्यायालय की कौन-सी शक्तियां दी जा सकती हैं?
a. निर्णय देने की शक्ति
b. डिक्री पारित करने की शक्ति
c. साक्षियों को हाजिर होने तथा दस्तावेजों और सारवान् वस्तुओं को पेश करने के लिए विवश करने की शक्तियां
d. अपील सुनने की शक्ति
52. धारा 72(1)(ग) के अनुसार वन अधिकारी को किस संहिता के अधीन तलाशी वारंट निकालने की शक्ति दी जा सकती है?
a. भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अधीन
b. भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अधीन
c. दण्ड प्रक्रिया संहिता (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) के अधीन
d. भारतीय वन अधिनियम, 1927 के अधीन
53. धारा 72(1)(घ) के अनुसार वन अधिकारी को जांच संबंधी कौन-सी शक्तियां दी जा सकती हैं?
a. केवल गिरफ्तारी की शक्ति
b. वन विषयक अपराधों की जांच तथा जांच के दौरान साक्ष्य लेने और उसे अभिलिखित करने की शक्ति
c. केवल अधिहरण की शक्ति
d. केवल जुर्माना लगाने की शक्ति
54. धारा 72(2) के अनुसार उपधारा (1)(घ) के अधीन अभिलिखित साक्ष्य कहाँ ग्राह्य होगा?
a. केवल सिविल न्यायालय में
b. केवल वन अधिकारी के समक्ष
c. मजिस्ट्रेट के समक्ष किसी पश्चात्वर्ती विचारण में
d. केवल अपील न्यायालय में
55. धारा 72(2) के अनुसार उपधारा (1)(घ) के अधीन अभिलिखित साक्ष्य कब ग्राह्य होगा?
a. जब वह शपथ पर लिया गया हो
b. जब वह साक्ष्य अभियुक्त व्यक्ति की उपस्थिति में लिया गया हो
c. जब उस पर दो गवाहों के हस्ताक्षर हों
d. जब वन अधिकारी उसे प्रमाणित करे
56. धारा 72(2) के अनुसार अभिलिखित साक्ष्य की ग्राह्यता की शर्त क्या है?
a. साक्ष्य लिखित रूप में हो
b. साक्ष्य शपथ पर लिया गया हो
c. साक्ष्य अभियुक्त व्यक्ति की उपस्थिति में लिया गया हो
d. साक्ष्य पर मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर हों
57. धारा 73 का विषय क्या है?
a. राज्य सरकार वन अधिकारियों में कतिपय शक्तियां विनिहित कर सकेगी
b. वन अधिकारियों को लोक सेवक समझा जाएगा
c. उस नियम के अधीन नियत जुर्मानों को बदलने की शक्ति
d. पशु अतिचार अधिनियम, 1871 का लागू होना
58. धारा 73 के अनुसार किन व्यक्तियों को लोक सेवक समझा जाएगा?
a. केवल रेंजर को
b. केवल वन रक्षक को
c. सभी वन अधिकारियों को
d. वन अधिकारी और पुलिस अधिकारी दोनों को
59. धारा 73 के अनुसार वन अधिकारियों को किस अधिनियम के अर्थान्तर्गत लोक सेवक समझा जाएगा?
a. भारतीय वन अधिनियम, 1927 के अर्थान्तर्गत
b. दण्ड प्रक्रिया संहिता (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023) के अर्थान्तर्गत
c. भारतीय दण्ड संहिता (भारतीय न्याय संहिता, 2023) के अर्थान्तर्गत
d. भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अर्थान्तर्गत
60. धारा 74 का विषय क्या है?
a. वन अधिकारियों को लोक सेवक समझा जाएगा
b. सद्भावपूर्वक किए गए कार्यों के लिए परित्राण
c. राज्य सरकार वन अधिकारियों में कतिपय शक्तियां विनिहित कर सकेगी
d. अपराधों का शमन करने की शक्ति
61. धारा 74 के अनुसार किसके विरुद्ध वाद नहीं चलाया जाएगा?
a. किसी भी वन अधिकारी के विरुद्ध
b. किसी भी पुलिस अधिकारी के विरुद्ध
c. भारतीय वन अधिनियम, 1927 के अधीन सद्भावपूर्वक कार्य करने वाले लोक सेवक के विरुद्ध
d. केवल राज्य सरकार के विरुद्ध
62. धारा 74 के अनुसार लोक सेवक को किस प्रकार के कार्य के लिए परित्राण प्राप्त है?
a. सभी प्रकार के कार्यों के लिए
b. केवल न्यायिक कार्यों के लिए
c. भारतीय वन अधिनियम, 1927 के अधीन सद्भावपूर्वक किए गए कार्य के लिए
d. केवल प्रशासनिक कार्यों के लिए
63. धारा 74 के अनुसार सद्भावपूर्वक किए गए कार्य के लिए लोक सेवक के विरुद्ध क्या नहीं चलाया जाएगा?
a. अपील
b. पुनरीक्षण
c. कोई वाद
d. विभागीय जांच
64. धारा 75 का विषय क्या है?
a. सद्भावपूर्वक किए गए कार्यों के लिए परित्राण
b. वन अधिकारी व्यापार नहीं करेंगे
c. वन अधिकारियों को लोक सेवक समझा जाएगा
d. अपराधों का शमन करने की शक्ति
65. धारा 75 के अनुसार राज्य सरकार की लिखित अनुज्ञा के बिना वन अधिकारी क्या नहीं करेगा?
a. वन भूमि का निरीक्षण नहीं करेगा
b. मालिक या अभिकर्ता के रूप में इमारती लकड़ी या अन्य वन-उपज का व्यापार नहीं करेगा
c. अपराधों की जांच नहीं करेगा
d. न्यायालय में साक्ष्य नहीं देगा
66. धारा 75 के अनुसार वन अधिकारी किस रूप में इमारती लकड़ी या अन्य वन-उपज का व्यापार नहीं कर सकता?
a. कर्मचारी के रूप में
b. सलाहकार के रूप में
c. मालिक या अभिकर्ता के रूप में
d. क्रेता के रूप में
67. धारा 75 के अनुसार वन अधिकारी किसकी लिखित अनुज्ञा के बिना व्यापार नहीं कर सकता?
a. केन्द्रीय सरकार की
b. वन विभाग की
c. राज्य सरकार की लिखित अनुज्ञा
d. जिला मजिस्ट्रेट की
68. धारा 75 के अनुसार राज्य सरकार की लिखित अनुज्ञा के बिना वन अधिकारी किसमें हितबद्ध नहीं होगा या नहीं बनेगा?
a. वन अपराध के विचारण में
b. किसी वन के पट्टे में या किसी वन के ठेके में
c. वन संरक्षण समिति में
d. ग्राम वन समिति में
69. धारा 75 के अनुसार वन के पट्टे या ठेके में हितबद्ध होने का निषेध कहाँ लागू होता है?
a. केवल राज्य के भीतर
b. केवल आरक्षित वनों में
c. उन राज्यक्षेत्रों के भीतर और बाहर, जिन पर भारतीय वन अधिनियम, 1927 विस्तारित होता है
d. केवल संरक्षित वनों में
70. धारा 76 का विषय क्या है?
a. वन अधिकारी व्यापार नहीं करेंगे
b. नियम बनाने की अतिरिक्त शक्तियां
c. सद्भावपूर्वक किए गए कार्यों के लिए परित्राण
d. वन अधिकारियों को लोक सेवक समझा जाएगा
71. धारा 76 के अनुसार नियम बनाने की अतिरिक्त शक्ति किसके पास है?
a. केन्द्रीय सरकार के पास
b. उच्च न्यायालय के पास
c. राज्य सरकार के पास
d. जिला मजिस्ट्रेट के पास
72. धारा 76(क) के अनुसार राज्य सरकार किस उद्देश्य से नियम बना सकेगी?
a. वनों को आरक्षित घोषित करने के लिए
b. भारतीय वन अधिनियम, 1927 के अधीन किसी वन अधिकारी की शक्तियों और कर्तव्यों को विहित और सीमित करने के लिए
c. वन अपराधों का विचारण करने के लिए
d. वन भूमि अर्जित करने के लिए
73. धारा 76(ख) के अनुसार राज्य सरकार किसके विनियमन के लिए नियम बना सकेगी?
a. वन अधिकारियों के वेतन के लिए
b. भारतीय वन अधिनियम, 1927 के अधीन जुर्माना और अधिहरण के आगमों में से अधिकारियों और भेदियों को दिए जाने वाले पुरस्कारों के विनियमन के लिए
c. वन भूमि के पट्टे के लिए
d. वन अपराधों की जांच के लिए
74. धारा 76(ग) के अनुसार राज्य सरकार किन वृक्षों और इमारती लकड़ी के संबंध में नियम बना सकेगी?
a. केवल आरक्षित वन के वृक्षों के संबंध में
b. केवल संरक्षित वन के वृक्षों के संबंध में
c. सरकार के उन वृक्षों और इमारती लकड़ी के संबंध में, जो प्राइवेट व्यक्तियों की भूमियों में उगे हुए हैं या उनके अधिभोग में हैं
d. केवल ग्राम वन के वृक्षों के संबंध में
75. धारा 76(ग) के अनुसार राज्य सरकार सरकार के वृक्षों और इमारती लकड़ी के संबंध में किन उद्देश्यों के लिए नियम बना सकेगी?
a. केवल विक्रय के लिए
b. केवल नीलामी के लिए
c. उनके संरक्षण, पुनरुत्पादन और व्ययन के लिए
d. केवल कटाई के लिए
76. धारा 76(घ) के अनुसार राज्य सरकार सामान्यतः किस उद्देश्य से नियम बना सकेगी?
a. केवल वन अधिकारियों की नियुक्ति के लिए
b. केवल वन अपराधों के दण्ड के लिए
c. भारतीय वन अधिनियम, 1927 के उपबंधों को क्रियान्वित करने के लिए
d. केवल वन भूमि के सर्वेक्षण के लिए
77. धारा 77 का विषय क्या है?
a. नियम बनाने की अतिरिक्त शक्तियां
b. नियमों के भंग के लिए शास्तियां
c. वन अधिकारी व्यापार नहीं करेंगे
d. सद्भावपूर्वक किए गए कार्यों के लिए परित्राण
78. धारा 77 के अनुसार यह धारा किन नियमों के उल्लंघन पर लागू होती है?
a. सभी नियमों के उल्लंघन पर
b. केवल धारा 76 के अधीन बनाए गए नियमों पर
c. भारतीय वन अधिनियम, 1927 के अधीन ऐसे नियमों के उल्लंघन पर, जिनके लिए कोई विशेष शास्ति उपबन्धित नहीं है
d. केवल आरक्षित वन से संबंधित नियमों पर
79. धारा 77 के अनुसार नियमों के भंग के लिए अधिकतम कारावास कितना हो सकता है?
a. 15 दिन तक का
b. एक मास तक का
c. तीन मास तक का
d. छह मास तक का
80. धारा 77 के अनुसार नियमों के भंग के लिए अधिकतम जुर्माना कितना हो सकता है?
a. ₹100 तक
b. ₹250 तक
c. ₹500 तक
d. ₹1,000 तक
81. धारा 78 का विषय क्या है?
a. नियम बनाने की अतिरिक्त शक्तियां
b. नियमों को कब विधि का बल प्राप्त होता है
c. नियमों के भंग के लिए शास्तियां
d. वन अधिकारियों को लोक सेवक समझा जाएगा
82. धारा 78 के अनुसार इस अधिनियम के अधीन बनाए गए सभी नियम कौन बनाएगा?
a. केन्द्रीय सरकार
b. राज्य सरकार
c. संसद
d. उच्च न्यायालय
83. धारा 78 के अनुसार राज्य सरकार द्वारा बनाए गए सभी नियम कहाँ प्रकाशित किए जाएंगे?
a. समाचार पत्र में
b. सरकारी वेबसाइट पर
c. राजपत्र में
d. जिला कार्यालय में
84. धारा 78 के अनुसार राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियम कब विधि के समान प्रभावशील होंगे?
a. बनाए जाने के साथ ही
b. राज्य सरकार की स्वीकृति के बाद
c. राजपत्र में प्रकाशित होने के पश्चात्, जहाँ तक वे भारतीय वन अधिनियम, 1927 से सुसंगत हों
d. न्यायालय की स्वीकृति के बाद
85. धारा 78 के अनुसार नियम किस सीमा तक प्रभावशील होंगे?
a. जहाँ तक वे राज्य सरकार के आदेश से सुसंगत हों
b. जहाँ तक वे भारतीय वन अधिनियम, 1927 से सुसंगत हैं
c. जहाँ तक वे न्यायालय द्वारा अनुमोदित हों
d. जहाँ तक वे वन विभाग द्वारा स्वीकृत हों
86. धारा 78 के अनुसार इस अधिनियम से सुसंगत नियम किस प्रकार प्रभावशील होंगे?
a. मानो वे राज्य सरकार के आदेश हों
b. मानो वे वन विभाग के निर्देश हों
c. मानो वे भारतीय वन अधिनियम, 1927 में अधिनियमित हुए हों
d. मानो वे न्यायालय के आदेश हों
87. धारा 79 का विषय क्या है?
a. नियमों को कब विधि का बल प्राप्त होता है
b. वन अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को सहायता देने के लिए आबद्ध व्यक्ति
c. नियमों के भंग के लिए शास्तियां
d. नियम बनाने की अतिरिक्त शक्तियां
88. धारा 79(1) के अनुसार किन व्यक्तियों पर इस धारा के अधीन सहायता देने का दायित्व है?
a. केवल वन अधिकारियों पर
b. केवल पुलिस अधिकारियों पर
c. प्रत्येक व्यक्ति जो आरक्षित या संरक्षित वन में किसी अधिकार का प्रयोग करता है, या वन-उपज लेने, इमारती लकड़ी काटने, हटाने या ढोर चराने के लिए अनुज्ञात है, या ऐसे वन में नियोजित है, अथवा ऐसे वन से समीपस्थ ग्राम का वह व्यक्ति जो सरकार द्वारा नियोजित है या समुदाय के प्रति सेवाओं के लिए सरकार से उपलब्धियां प्राप्त करता है
d. केवल ग्राम पंचायत के सदस्यों पर
89. धारा 79(1) के अनुसार वन विषयक अपराध के किए जाने या किए जाने के आशय की जानकारी किसे दी जाएगी?
a. ग्राम प्रधान को
b. जिला मजिस्ट्रेट को
c. निकटतम वन अधिकारी या पुलिस अधिकारी को
d. राज्य सरकार को
90. धारा 79(1) के अनुसार वन विषयक अपराध की जानकारी कब दी जाएगी?
a. 24 घंटे के भीतर
b. सात दिन के भीतर
c. अनावश्यक विलम्ब के बिना
d. एक मास के भीतर
91. धारा 79(1)(क) के अनुसार किस अग्नि को बुझाने के लिए तुरन्त कार्यवाही करना अनिवार्य है?
a. किसी भी आग को
b. केवल ग्राम की आग को
c. ऐसे वन में लगी वन अग्नि, जिसके बारे में ज्ञान या जानकारी हो
d. केवल निजी भूमि की आग को
92. धारा 79(1)(ख) के अनुसार वन के सामीप्य की अग्नि के संबंध में क्या कर्तव्य है?
a. उसकी सूचना देना
b. अपनी शक्ति के अनुसार वैध साधनों द्वारा उसे वन में फैलने से रोकने के लिए तुरन्त कार्यवाही करना
c. उसे स्वयं बुझाना आवश्यक नहीं है
d. केवल वन अधिकारी की प्रतीक्षा करना
93. धारा 79(1) के अनुसार क्या वन अधिकारी या पुलिस अधिकारी की अपेक्षा के बिना भी कार्यवाही करनी होगी?
a. नहीं
b. केवल वन अधिकारी के आदेश पर
c. हाँ, चाहे उससे ऐसी अपेक्षा की गई हो या नहीं
d. केवल पुलिस अधिकारी के आदेश पर
94. धारा 79(1)(ग) के अनुसार किस कार्य में वन अधिकारी या पुलिस अधिकारी की सहायता करनी होगी?
a. वृक्षारोपण में
b. वन में वन विषयक अपराध को रोकने में
c. वन सर्वेक्षण में
d. वन उपज की बिक्री में
95. धारा 79(1)(घ) के अनुसार यदि यह विश्वास करने का कारण हो कि वन में वन विषयक अपराध किया गया है, तो किस कार्य में सहायता करनी होगी?
a. केवल अपराध की सूचना देने में
b. अपराधी का पता लगाने और उसे गिरफ्तार करने में
c. केवल साक्ष्य एकत्र करने में
d. केवल न्यायालय में गवाही देने में
96. धारा 79(2) के अनुसार विधिपूर्ण प्रतिहेतु सिद्ध करने का भार किस पर होगा?
a. वन अधिकारी पर
b. पुलिस अधिकारी पर
c. उस व्यक्ति पर जो विधिपूर्ण प्रतिहेतु का दावा करता है
d. राज्य सरकार पर
97. धारा 79(2)(क) के अनुसार कौन-सा कृत्य दण्डनीय है?
a. वन में प्रवेश करना
b. उपधारा (1) द्वारा अपेक्षित जानकारी निकटतम वन अधिकारी या पुलिस अधिकारी को अनावश्यक विलम्ब के बिना न देना
c. वन-उपज एकत्र करना
d. वन में भ्रमण करना
98. धारा 79(2)(ख) के अनुसार कौन-सा कृत्य दण्डनीय है?
a. वन में प्रवेश करना
b. आरक्षित या संरक्षित वन में वन अग्नि को बुझाने के लिए अपेक्षित कार्यवाही न करना
c. वन-उपज का परिवहन करना
d. वन में पशु चराना
99. धारा 79(2)(ग) के अनुसार कौन-सा कृत्य दण्डनीय है?
a. वन की सीमा पार करना
b. वन के सामीप्य की अग्नि को उपधारा (1) के अनुसार वन में फैलने से न रोकना
c. वन में लकड़ी काटना
d. वन अधिकारी से विवाद करना
100. धारा 79(2)(घ) के अनुसार कौन-सा कृत्य दण्डनीय है?
a. वन अधिकारी को सूचना देना
b. वन अपराध को रोकने अथवा अपराधी का पता लगाने और उसे गिरफ्तार करने में सहायता मांगे जाने पर वन अधिकारी या पुलिस अधिकारी की सहायता न करना
c. वन में प्रवेश करना
d. वन में मार्ग बदलना
101. धारा 79(2) के अनुसार इस धारा के उल्लंघन के लिए अधिकतम कारावास कितना हो सकता है?
a. 15 दिन तक का
b. एक मास तक का
c. तीन मास तक का
d. छह मास तक का
102. धारा 79(2) के अनुसार इस धारा के उल्लंघन के लिए अधिकतम जुर्माना कितना हो सकता है?
a. ₹100 तक
b. ₹200 तक
c. ₹500 तक
d. ₹1,000 तक
103. धारा 80 का विषय क्या है?
a. वन अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को सहायता देने के लिए आबद्ध व्यक्ति
b. उन वनों का प्रबन्ध जो सरकार और अन्य व्यक्तियों की संयुक्त सम्पत्ति है
c. नियमों को कब विधि का बल प्राप्त होता है
d. नियमों के भंग के लिए शास्तियां
104. धारा 80(1) के अनुसार यह धारा कब लागू होती है?
a. जब वन केवल सरकार की सम्पत्ति हो
b. जब सरकार और कोई व्यक्ति किसी वन, बंजर भूमि या उसकी पूरी उपज अथवा उसके किसी भाग में संयुक्ततः हितबद्ध हों
c. जब वन केवल निजी व्यक्ति की सम्पत्ति हो
d. जब वन ग्राम पंचायत की सम्पत्ति हो
105. धारा 80(1) के अनुसार संयुक्त हित की स्थिति में राज्य सरकार के पास कौन-कौन से विकल्प हैं?
a. केवल वन का अधिग्रहण करना
b. केवल वन को आरक्षित घोषित करना
c. वन, बंजर भूमि या उपज का प्रबन्ध स्वयं अपने हाथ में लेना या संयुक्त हितबद्ध व्यक्ति द्वारा उसके प्रबन्ध के लिए विनियम बनाना
d. केवल वन को बेच देना
106. धारा 80(1)(क) के अनुसार राज्य सरकार क्या अपने हाथ में ले सकती है?
a. केवल वन-उपज
b. केवल बंजर भूमि
c. वन, बंजर भूमि या उपज का प्रबन्ध
d. केवल वन का स्वामित्व
107. धारा 80(1)(क) के अनुसार राज्य सरकार प्रबन्ध अपने हाथ में लेते समय किसके लिए लेखा देती रहेगी?
a. वन अधिकारी के लिए
b. जिला कलेक्टर के लिए
c. संयुक्त हितबद्ध व्यक्ति को उसके हित के लिए
d. ग्राम पंचायत के लिए
108. धारा 80(1)(ख) के अनुसार राज्य सरकार किसके लिए विनियम बना सकती है?
a. वन अधिकारियों की नियुक्ति के लिए
b. संयुक्ततः हितबद्ध व्यक्ति द्वारा वन, बंजर भूमि या उपज के प्रबन्ध के लिए
c. वन अपराधों के विचारण के लिए
d. वन भूमि के अधिग्रहण के लिए
109. धारा 80(1)(ख) के अनुसार राज्य सरकार किस आधार पर विनियम बना सकती है?
a. जैसा वह उचित समझे
b. जैसा वह वन, बंजर भूमि या उपज के प्रबन्ध तथा उसमें के सभी पक्षकारों के हित में आवश्यक समझे
c. केवल वन अधिकारी की संस्तुति पर
d. केवल न्यायालय के आदेश पर
110. धारा 80(2) के अनुसार राज्य सरकार कब घोषणा कर सकती है कि अध्याय 2 और 4 के उपबन्ध लागू होंगे?
a. जब वन को आरक्षित घोषित किया जाए
b. जब वह उपधारा (1)(क) के अधीन वन, बंजर भूमि या उपज का प्रबन्ध अपने हाथ में लेती है
c. जब वन का अधिग्रहण किया जाए
d. जब वन अधिकारी रिपोर्ट दे
111. धारा 80(2) के अनुसार अध्याय 2 और 4 के उपबन्ध लागू करने की घोषणा किस माध्यम से की जाएगी?
a. शासनादेश द्वारा
b. परिपत्र द्वारा
c. राजपत्र में अधिसूचना द्वारा
d. न्यायालय के आदेश द्वारा
112. धारा 80(2) के अनुसार घोषणा के पश्चात् किन अध्यायों के उपबन्ध लागू होंगे?
a. केवल अध्याय 2
b. केवल अध्याय 4
c. अध्याय 2 और अध्याय 4 के उपबन्ध
d. अध्याय 3 और अध्याय 5 के उपबन्ध
113. धारा 81 का विषय क्या है?
a. उन वनों का प्रबन्ध जो सरकार और अन्य व्यक्तियों की संयुक्त सम्पत्ति है
b. ऐसी सेवा करने में असफलता जिसके लिए सरकारी वन की उपज के किसी अंश का उपभोग किया जाता है
c. वन अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को सहायता देने के लिए आबद्ध व्यक्ति
d. नियमों को कब विधि का बल प्राप्त होता है
114. धारा 81 के अनुसार यह धारा किन व्यक्तियों पर लागू होती है?
a. केवल वन अधिकारियों पर
b. केवल सरकारी कर्मचारियों पर
c. जो सरकार की सम्पत्ति वाले वन या जिस पर सरकार का साम्पत्तिक अधिकार है ऐसे वन की उपज अथवा वन-उपज के उस भाग के अंश के हकदार हैं जिसकी सरकार हकदार है
d. केवल ग्राम पंचायत के सदस्यों पर
115. धारा 81 के अनुसार वन-उपज के अंश का अधिकार किस शर्त पर प्राप्त होता है?
a. केवल राज्य सरकार की अनुमति पर
b. इस शर्त पर कि संबंधित वन से सम्बन्धित सेवा सम्यक् रूप से करता रहे
c. केवल शुल्क के भुगतान पर
d. केवल न्यायालय के आदेश पर
116. धारा 81 के अनुसार वन-उपज का अंश कब अधिहरणीय हो जाएगा?
a. जब वन का अधिग्रहण हो जाए
b. जब राज्य सरकार के समाधानप्रद रूप में यह सिद्ध हो जाए कि संबंधित सेवा अब नहीं की जा रही है
c. जब वन अधिकारी आदेश दे
d. जब न्यायालय आदेश दे
117. धारा 81 के अनुसार सेवा न किए जाने का तथ्य किसके समाधानप्रद रूप में सिद्ध होना चाहिए?
a. वन अधिकारी के
b. जिला मजिस्ट्रेट के
c. राज्य सरकार के
d. पुलिस अधिकारी के
118. धारा 81 के परन्तुक के अनुसार वन-उपज के अंश का अधिहरण कब तक नहीं किया जाएगा?
a. जब तक न्यायालय आदेश न दे
b. जब तक राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त सम्यक् रूप से नियुक्त अधिकारी हकदार व्यक्ति और उसके द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य की सुनवाई न कर ले
c. जब तक वन अधिकारी रिपोर्ट न दे
d. जब तक एक वर्ष न बीत जाए
119. धारा 81 के परन्तुक के अनुसार सुनवाई कौन करेगा?
a. जिला मजिस्ट्रेट
b. वन अधिकारी
c. राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त सम्यक् रूप से नियुक्त अधिकारी
d. पुलिस अधिकारी
120. धारा 81 के परन्तुक के अनुसार सुनवाई में किसे सुना जाएगा?
a. केवल वन अधिकारी को
b. केवल सरकारी गवाह को
c. अंश के हकदार व्यक्ति को
d. केवल पुलिस अधिकारी को
121. धारा 81 के परन्तुक के अनुसार सुनवाई में किस साक्ष्य पर विचार किया जाएगा?
a. केवल सरकारी अभिलेखों पर
b. केवल वन अधिकारी की रिपोर्ट पर
c. ऐसे साक्ष्य पर जिसे हकदार व्यक्ति सेवा के सम्यक् रूप से किए जाने के प्रमाण में प्रस्तुत करे
d. केवल पुलिस रिपोर्ट पर
122. धारा 82 का विषय क्या है?
a. ऐसी सेवा करने में असफलता जिसके लिए सरकारी वन की उपज के किसी अंश का उपभोग किया जाता है
b. सरकार को शोध्य धन की वसूली
c. उन वनों का प्रबन्ध जो सरकार और अन्य व्यक्तियों की संयुक्त सम्पत्ति है
d. वन अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को सहायता देने के लिए आबद्ध व्यक्ति
123. धारा 82 के अनुसार सरकार को कौन-कौन से धन शोध्य हो सकते हैं?
a. केवल जुर्माने की राशि
b. केवल वन-उपज की कीमत
c. भारतीय वन अधिनियम, 1927 या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन, वन-उपज की कीमत के कारण अथवा वन-उपज के संबंध में भारतीय वन अधिनियम, 1927 के निष्पादन में उपगत व्ययों के कारण देय धन
d. केवल न्यायालय द्वारा अधिरोपित प्रतिकर
124. धारा 82 के अनुसार यदि सरकार को शोध्य धन देय होने पर न दिया जाए तो उसकी वसूली कैसे की जाएगी?
a. सिविल वाद द्वारा
b. आपराधिक कार्यवाही द्वारा
c. तत्समय प्रवृत्त विधि के अनुसार मानो वह भू-राजस्व की बकाया हो
d. केवल नीलामी द्वारा
125. धारा 82 के अनुसार वन-उपज की कीमत के कारण सरकार को देय धन की वसूली किस प्रकार की जाएगी?
a. मानो वह जुर्माना हो
b. मानो वह कर हो
c. मानो वह भू-राजस्व की बकाया हो
d. मानो वह न्यायालय शुल्क हो
126. धारा 82 के अनुसार इस अधिनियम के निष्पादन में उपगत व्ययों के कारण सरकार को देय धन की वसूली किस प्रकार की जाएगी?
a. मानो वह सिविल डिक्री हो
b. मानो वह भू-राजस्व की बकाया हो
c. मानो वह जुर्माना हो
d. मानो वह कर हो
127. धारा 82 के अनुसार सरकार को शोध्य धन की वसूली किस विधि के अनुसार की जाएगी?
a. केवल भारतीय वन अधिनियम, 1927 के अनुसार
b. केवल सिविल प्रक्रिया संहिता के अनुसार
c. तत्समय प्रवृत्त विधि के अनुसार
d. केवल राज्य सरकार के आदेश के अनुसार
128. धारा 83 का विषय क्या है?
a. सरकार को शोध्य धन की वसूली
b. ऐसे धन के लिए वन-उपज पर धारणाधिकार
c. ऐसी सेवा करने में असफलता जिसके लिए सरकारी वन की उपज के किसी अंश का उपभोग किया जाता है
d. नियमों के भंग के लिए शास्तियां
129. धारा 83(1) के अनुसार वन-उपज के लिए या उसके संबंध में देय धन की राशि क्या समझी जाएगी?
a. सरकारी कर
b. न्यायालय शुल्क
c. ऐसी वन-उपज पर प्रथम भार
d. अधिहरण राशि
130. धारा 83(1) के अनुसार वन-उपज पर प्रथम भार कब तक रहेगा?
a. एक मास तक
b. छह मास तक
c. जब तक देय राशि चुका नहीं दी जाती
d. न्यायालय के आदेश तक
131. धारा 83(1) के अनुसार देय राशि के भुगतान तक वन-उपज के संबंध में वन अधिकारी क्या कर सकता है?
a. वन-उपज का अधिहरण कर सकता है
b. वन-उपज को अपने कब्जे में ले सकता है
c. वन-उपज को नष्ट कर सकता है
d. वन-उपज को सरकार में निहित कर सकता है
132. धारा 83(1) के अनुसार वन-उपज को अपने कब्जे में कौन ले सकता है?
a. पुलिस अधिकारी
b. जिला मजिस्ट्रेट
c. वन अधिकारी
d. तहसीलदार
133. धारा 83(2) के अनुसार यदि शोध्य होने पर राशि का भुगतान नहीं किया जाता तो वन अधिकारी क्या कर सकता है?
a. केवल जुर्माना लगा सकता है
b. वन-उपज का लोक नीलाम द्वारा विक्रय कर सकता है
c. वन-उपज को नष्ट कर सकता है
d. केवल न्यायालय को सूचना देगा
134. धारा 83(2) के अनुसार वन-उपज का विक्रय किस प्रकार किया जाएगा?
a. निजी विक्रय द्वारा
b. निविदा द्वारा
c. लोक नीलाम द्वारा
d. प्रत्यक्ष विक्रय द्वारा
135. धारा 83(2) के अनुसार विक्रय के आगमों का प्रथम उपयोग किसके लिए किया जाएगा?
a. वन विभाग के व्यय के लिए
b. नीलामी खर्च के लिए
c. देय राशि के भुगतान के लिए
d. राजकोष में जमा करने के लिए
136. धारा 83(3) के अनुसार विक्रय के पश्चात् यदि कोई अतिशेष बचे तो उसका दावा कितनी अवधि के भीतर किया जाना चाहिए?
a. एक मास के भीतर
b. दो मास के भीतर
c. तीन मास के भीतर
d. छह मास के भीतर
137. धारा 83(3) के अनुसार यदि अतिशेष का दावा दो मास के भीतर नहीं किया जाता तो उसका क्या होगा?
a. वह न्यायालय में जमा होगा
b. वह वन अधिकारी को मिलेगा
c. वह सरकार को समपहृत हो जाएगा
d. वह ग्राम पंचायत को दिया जाएगा
138. धारा 84 का विषय क्या है?
a. ऐसे धन के लिए वन-उपज पर धारणाधिकार
b. भारतीय वन अधिनियम, 1927 के अधीन अपेक्षित भूमि की बाबत यह समझा जाना कि उसकी आवश्यकता भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 के अधीन लोक प्रयोजन के लिए है
c. सरकार को शोध्य धन की वसूली
d. नियमों को कब विधि का बल प्राप्त होता है
139. धारा 84 के अनुसार यह धारा कब लागू होती है?
a. जब कोई व्यक्ति भूमि का दावा करे
b. जब राज्य सरकार को प्रतीत हो कि भारतीय वन अधिनियम, 1927 के प्रयोजनों में से किसी प्रयोजन के लिए कोई भूमि अपेक्षित है
c. जब वन अधिकारी भूमि का सर्वेक्षण करे
d. जब न्यायालय आदेश दे
140. धारा 84 के अनुसार भूमि की आवश्यकता का निर्णय किसके प्रतीत होने पर आधारित है?
a. वन अधिकारी के
b. जिला मजिस्ट्रेट के
c. राज्य सरकार के
d. सिविल न्यायालय के
141. धारा 84 के अनुसार अपेक्षित भूमि के बारे में क्या समझा जाएगा?
a. कि वह सरकारी भूमि है
b. कि उसकी आवश्यकता भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 4 के अर्थ में लोक प्रयोजन के लिए है
c. कि वह आरक्षित वन है
d. कि वह संरक्षित वन है
142. धारा 84 के अनुसार भूमि किस अधिनियम की धारा 4 के अर्थ में लोक प्रयोजन के लिए आवश्यक मानी जाएगी?
a. भारतीय वन अधिनियम, 1927
b. भारतीय दण्ड संहिता, 1860
c. भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 4
d. दण्ड प्रक्रिया संहिता
143. धारा 84 के अनुसार भूमि किस प्रयोजन के लिए अपेक्षित होनी चाहिए?
a. केवल आरक्षित वन बनाने के लिए
b. केवल संरक्षित वन बनाने के लिए
c. भारतीय वन अधिनियम, 1927 के प्रयोजनों में से किसी प्रयोजन के लिए
d. केवल वन विभाग के कार्यालय के लिए
144. धारा 85 का विषय क्या है?
a. सरकार को शोध्य धन की वसूली
b. बन्धपत्र के अधीन शोध्य शास्तियों की वसूली
c. ऐसे धन के लिए वन-उपज पर धारणाधिकार
d. भारतीय वन अधिनियम, 1927 के अधीन अपेक्षित भूमि की बाबत यह समझा जाना कि उसकी आवश्यकता भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 के अधीन लोक प्रयोजन के लिए है
145. धारा 85 के अनुसार यह धारा कब लागू होती है?
a. जब कोई व्यक्ति वन अपराध करता है
b. जब कोई व्यक्ति भारतीय वन अधिनियम, 1927 के किसी उपबंध के अनुसार या उसके अधीन बनाए गए नियमों के अनुपालन में किसी बन्धपत्र या लिखत द्वारा अपने को आबद्ध करता है
c. जब वन अधिकारी किसी सम्पत्ति का अभिग्रहण करता है
d. जब न्यायालय दण्डादेश पारित करता है
146. धारा 85 के अनुसार कोई व्यक्ति बन्धपत्र या लिखत द्वारा किसके पालन के लिए अपने को आबद्ध कर सकता है?
a. केवल धनराशि के भुगतान के लिए
b. केवल वन-उपज के विक्रय के लिए
c. किसी कर्तव्य या कार्य के पालन के लिए
d. केवल न्यायालय के आदेश के पालन के लिए
147. धारा 85 के अनुसार कोई व्यक्ति बन्धपत्र या लिखत द्वारा किस बात की प्रसंविदा कर सकता है?
a. केवल धनराशि जमा करने की
b. वह या वह तथा उसके सेवक और अभिकर्तागण किसी कार्य से प्रविरत रहेंगे
c. केवल वन-उपज बेचने की
d. केवल भूमि हस्तांतरित करने की
148. धारा 85 के अनुसार यह धारा किस अधिनियम की धारा 74 में किसी बात के होते हुए भी लागू होती है?
a. भारतीय वन अधिनियम, 1927
b. भूमि अर्जन अधिनियम, 1894
c. भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 74
d. भारतीय न्याय संहिता, 2023
149. धारा 85 के अनुसार बन्धपत्र या लिखत में वर्णित राशि कब वसूल की जा सकती है?
a. बन्धपत्र के निष्पादन के साथ ही
b. उसकी शर्तों के भंग होने की दशा में
c. न्यायालय की अनुमति के बिना
d. एक वर्ष के बाद
150. धारा 85 के अनुसार शर्तों के भंग होने पर कितनी राशि वसूल की जा सकती है?
a. आधी राशि
b. न्यायालय द्वारा निर्धारित राशि
c. बन्धपत्र या लिखत में वर्णित सम्पूर्ण राशि
d. केवल वास्तविक क्षति के बराबर राशि
151. धारा 85 के अनुसार बन्धपत्र या लिखत में वर्णित राशि किस प्रकार वसूल की जाएगी?
a. सिविल वाद द्वारा
b. मानो वह राशि भू-राजस्व की बकाया हो
c. आपराधिक कार्यवाही द्वारा
d. लोक नीलाम द्वारा
152. धारा 85क का विषय क्या है?
a. बन्धपत्र के अधीन शोध्य शास्तियों की वसूली
b. केन्द्रीय सरकार के अधिकारों के लिए व्यावृत्ति
c. सरकार को शोध्य धन की वसूली
d. ऐसे धन के लिए वन-उपज पर धारणाधिकार
153. धारा 85क के अनुसार इस अधिनियम की कोई बात राज्य सरकार को किस प्रकार की सम्पत्ति के संबंध में आदेश देने या कार्य करने के लिए प्राधिकृत नहीं करेगी?
a. निजी सम्पत्ति के संबंध में
b. सरकारी वन के संबंध में
c. ऐसी सम्पत्ति के संबंध में जो उस राज्य में निहित नहीं हुई है
d. ग्राम वन की सम्पत्ति के संबंध में
154. धारा 85क के अनुसार राज्य सरकार बिना सम्पृक्त सरकार की सम्मति के किनके अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डाल सकती?
a. केवल निजी व्यक्तियों के अधिकारों पर
b. केवल स्थानीय निकायों के अधिकारों पर
c. केन्द्रीय सरकार या किसी अन्य राज्य सरकार के अधिकारों पर
d. केवल वन अधिकारियों के अधिकारों पर
155. धारा 85क के अनुसार केन्द्रीय सरकार या किसी अन्य राज्य सरकार के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के लिए क्या आवश्यक है?
a. राज्यपाल की स्वीकृति
b. उच्च न्यायालय की अनुमति
c. सम्पृक्त सरकार की सम्मति
d. संसद की स्वीकृति
156. धारा 85क के अनुसार इस अधिनियम की कोई बात राज्य सरकार को किस कार्य के लिए प्राधिकृत नहीं करेगी?
a. वन अधिकारियों की नियुक्ति करने के लिए
b. नियम बनाने के लिए
c. सम्पृक्त सरकार की सम्मति के बिना केन्द्रीय सरकार या किसी अन्य राज्य सरकार के अधिकारों पर अन्यथा प्रतिकूल प्रभाव डालने के लिए
d. आरक्षित वन घोषित करने के लिए
157. धारा 86 किस प्रावधान द्वारा निरसित की गई है?
a. भारतीय वन (संशोधन) अधिनियम, 1988 द्वारा
b. निरसन और संशोधन अधिनियम, 1948 की धारा 2 और अनुसूची द्वारा
c. भारतीय वन (संशोधन) अधिनियम, 1976 द्वारा
d. भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 द्वारा
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