
माल-विक्रय अधिनियम, 1930
THE SALE OF GOODS ACT, 1930
1. माल विक्रय अधिनियम, 1930 कब से लागू हुआ था-
a. 1 अप्रैल, 1930 से
b. 1 जुलाई, 1930 से
c. 1 दिसम्बर, 1930 से
d. 31 जनवरी, 1931 से
2. ई-कामर्स पोर्टल के माध्यम से खरीदा गया लैपटाप से सम्बद्ध विक्रय का मूल विवाद प्रशासित होगा-
a. सूचना तकनीकी अधिनियम, 2000 से
b. माल विक्रय अधिनियम, 1930 से
c. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 से
d. ई-कामर्स पोर्टल के प्रयोग के नियम और शर्तों से
3. माल विक्रय अधिनियम, 1930 है-
a. मूल विधि
b. विशेष विधि
c. भागतः मूल और भागतः प्रक्रियात्मक विधि
d. दण्डात्मक विधि
4. माल विक्रय अधिनियम, 1930 सम्बन्धित है-
a. केवल जंगम माल से
b. केवल स्थावर माल से
c. जंगम तथा स्थावर दोनों माल से
d. आभूषण छोड़कर सभी माल से
5. माल विक्रय अधिनियम, 1930 आधारित है-
a. इंग्लिश बिल आफ एक्सचेंज एक्ट, 1882 पर
b. संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 पर
c. इंग्लिश सेल आफ गुड्स एक्ट, 1893 पर
d. भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 पर
6. माल विक्रय अधिनियम, 1930 के अंतर्गत 'माल की बिक्री' क्या उत्पन्न करती है-
a. एक सर्वबंधी अधिकार (जस इन रेम)
b. एक व्यक्तिबंधी अधिकार (जस इन परसोनम )
c. उपरोक्त (क) तथा (ख) दोनों
d. मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करते हुए (क) तथा (ख) में से एक
7. 'भावी माल' को माल विक्रय अधिनियम, 1930 की किस धारा में परिभाषित किया गया है?
a. धारा 2 (5) में
b. धारा 2 (6) में
c. धारा 2 (7) में
d. धारा 2 (8) में
8. माल विक्रय अधिनियम, 1930 की धारा 2 (6) के अंतर्गत 'भावी माल' का अर्थ है-
a. माल, जो अभी अस्तित्व में न आया हो
b. अनिर्धारित माल
c. निर्धारित माल
d. विशिष्ट माल
9. माल का परिदेय अवस्था में होना कहा जाता है-
a. माल इस अवस्था में है कि क्रेता उन्हें लेने के लिए संविदा के तहत बाध्य हो ।
b. माल की ऐसी अवस्था है कि यदि विक्रेता क्रेता होता तो वह उसे ले लेता
c. माल की ऐसी अवस्था जैसा कि एक सामान्य व्यवसाय संव्यवहार में होता
d. उपरोक्त सभी
10. माल विक्रय अधिनियम, 1930 की धारा 2 (7) के अंतर्गत 'माल' का अर्थ है-
a. अनुयोज्य दावा
b. धन
c. (क) तथा (ख) दोनों
d. न (क) न ही (ख)
11. निम्नलिखित में से किसे 'माल' की परिभाषा में सम्मिलित नहीं किया गया है?
a. अनुयोज्य दावा
b. समस्त जंगम संपत्तियाँ
c. उगती हुई फसल
d. घास
12. माल विक्रय अधिनियम, 1930 की धारा 2 (7) के 1 अंतर्गत 'माल' शब्द में शामिल हैं-
a. जंगम तथा स्थावर दोनों संपत्तियाँ
b. प्रत्येक प्रकार की स्थावर संपत्ति, जिसमें अनुप्रयोज्य दावा तथा धन भी शामिल है
c. अनुयोज्य दावा तथा धन को छोड़कर प्रत्येकं प्रकार की जंगम संपत्ति
d. धन सहित समस्त जंगम संपत्तियाँ
13. माल विक्रय अधिनियम, 1930 की धारा 2 (7) के अंतर्गत निम्नलिखित में से क्या माल के अर्थ के अंतर्गत शामिल हैं?
a. भूमि से जुड़ी वस्तुएं जिन्हें विक्रय के पूर्व पृथक किए जाने हेतु सहमत हुआ गया है।
b. भूमि का हिस्से वाली वस्तुएं जिन्हें विक्रय के पूर्व पृथक किए जाने हेतु सहमत हुआ गया है।
c. (क) अथवा (ख) में से एक
d. नं (क) न ही (ख)
14. माल विक्रय अधिनियम के अंतर्गत परिदान का अर्थ होता है-
a. एक से दूसरे व्यक्ति को कब्जे का अन्तरण
b. एक से दूसरे व्यक्ति को स्वामित्व का स्वेच्छया अन्तरण
c. एक से दूसरे व्यक्ति को कब्जे का स्वेच्छया अन्तरण
d. उपरोक्त में कोई नहीं
15. माल विक्रय अधिनियम, 1930 के अंतर्गत परिदान हो सकती है-
a. केवल प्रतीकात्मक
b. केवल वास्तविक
c. केवल रचनात्मक
d. उपरोक्त सभी
16. माल विक्रय अधिनियम, 1930 की धारा 2 (11) के अधीन 'संपत्ति' का अर्थ है-
a. माल की साधारण संपत्ति
b. माल में केवल एक विशेष संपत्ति
c. माल में वाणिज्यिक तत्व
d. माल में क्वालिटी तत्व
17. माल विक्रय की संविदा होना समझा जायेगा-
a. यदि पक्षकार संविदा की शर्तों से मौखिक शब्द से सहमत हो
b. यदि संविदा के पक्षकार संविदा की शर्तों को लेखबद्ध करते हैं।
c. यदि पक्षकार के आचरण ऐसा होता है जो यह प्रदर्शित करता है कि विक्रय की संविदा के लिए संविदा कर रहे हैं।
d. उपरोक्त सभी
18. एक संविदा को विक्रय की संविदा कहा जाता है-
a. जब विक्रेता मूल्य के लिए खरीददार को माल में की सम्पत्ति हस्तांतरित करने के लिए, सहमत होता है।
b. जहाँ माल की सम्पत्ति विक्रेता से खरीददार को हस्तांतरित की जाती है।
c. जहाँ एक विक्रेता कुछ शर्तों को पूरा करने पर बेचने के लिए सहमत होता है।
d. उपरोक्त में कोई नहीं
19. माल विक्रय अधिनियम, 1930 की धारा 9 के अंतर्गत निम्नलिखित में से किसका प्रावधान किया गया है?
a. कीमत अभिनिश्चित करना
b. शर्त और वारण्टीन्तरण
c. विक्रय का करार
d. उपरोक्त सभी
20. जहाँ इस निबन्धन पर माल का विक्रय करने का करार है कि कीमत किसी तीसरे व्यक्ति के मूल्यांकन द्वारा नियत की जायेगी और यदि ऐसा व्यक्ति मूल्यांकन करने में विफल रहता है तो-
a. मूल्यांकन विक्रेता द्वारा किया जा सकता है
b. मूल्यांकन क्रेता द्वारा किया जा सकता है
c. मूल्यांकन क्रेता तथा विक्रेता द्वारा संयुक्त रूप से किया जा सकता है।
d. क्रेता तथा विक्रेता मूल्यांकन नहीं कर सकते और संविदा शून्य हो जाती है
21. उत्तर दे कि विक्रय और विक्रय के करार के बीच अन्तर करने में निम्नलिखित में से कौन-सा बिन्दु सही नहीं है-
a. विक्रय में क्रेता को माल में के सामान्यतः सम्पत्ति के हस्तान्तरण को प्रभावित करती है, जबकि विक्रय के करार में किसी भी पक्ष को करार के उस हिस्से को पूरा करने में किसी भी चूक के लिए उपचार देती है।
b. विक्रय में एक व्यक्ति को एक अन्य व्यक्ति के विरुद्ध अधिकार देती है, जबकि विक्रय के करार में एक व्यक्ति को समस्त संसार के विरुद्ध अधिकार देती है।
c. विक्रय में यदि क्रेता माल के लिए भुगतान करने में विफल रहता है तो विक्रेता कीमत के लिए मुकदमा कर सकता है, किन्तु विक्रय के करार में विक्रेता केवल नुकसान के लिए मुकदमा कर सकता है यदि क्रेता माल को स्वीकार करने और भुगतान करने में विफल रहता है।
d. विक्रय में यदि माल नष्ट हो जाता है तो नुकसान तब तक नहीं होता जब तक कि अन्यथा सहमति क्रेता पर नहीं पड़ती किन्तु विक्रय के करार में यदि माल नष्ट हो जाता है नुकसान तब तक होता है जब तक कि विक्रेता की सहमति न हो।
22. जहाँ किसी संविदा के अधीन माल के मूल्य तीसरे पक्ष द्वारा निर्धारित किया जाना हो जो मूल्यांकन करने में विफल रहता हो, किन्तु माल की आपूर्ति क्रेता को की जा चुकी हो, वहाँ माल विक्रय अधिनियम, 1930 की धारा 10 के अंतर्गत क्रेता-
a. माल के युक्तियुक्त मूल्य के भुगतान हेतु उत्तरदायी होता है।
b. माल के न्यूनतम मूल्य के भुगतान हेतु उत्तरदायी होता है
c. मूल्यांकनकर्ता द्वारा माल के मूल्य का निर्धारण किए जाने तक माल के किसी भी मूल्य के भुगतान हेतु उत्तरदायी नहीं होता
d. माल के अधिकतम खुदरा मूल्य के भुगतान हेतु उत्तरदायी होता है
23. माल विक्रय की एक संविदा हो सकती है-
a. सशर्त
b. पूर्ण
c. अस्थायी
d. उपरोक्त (क) अथवा (ख)
24. माल के किसी विक्रय में, शर्त होती है-
a. मूल्य की सीमा
b. गुणवत्ता की सीमा
c. संविदा के मुख्य प्रयोजन हेतु अनिवार्य अनुबन्ध
d. उपरोक्त में कोई नहीं
25. क्रिसी विशिष्ट माल की बिक्री की संविदा में यदि संविदा के समय पर, विक्रेता की जानकारी में आए बिना, माल नष्ट हो चुका हो, तब-
a. क्रेता के लिए संविदा वैध होती है।
b. क्रेता के विकल्प पर संविदा शून्यकरणीय होती है
c. संविदा दोनों पक्षों के लिए शून्य होती है।
d. संविदा अवैध हो चुकी होती है
26. संविदा के मुख्य प्रयोजन के लिये मर्मभूत वह अनुबन्ध है जिसका भंग उस संविदा को निराकृत मानने का अधिकार पैदा करता है, को किस नाम से जाना जाता है?
a. वारंटी
b. निहित वारंटी
c. शर्त
d. समाश्रित संविदा
27. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
a. शर्तें एवं वारंटियाँ विक्रय की संविदा में अनुबन्ध होती हैं
b. वारंटी के रूप में अनुबन्ध को शर्त नहीं माना जा सकता
c. शर्त संविदा के मुख्य प्रयोजन हेतु अनिवार्य व्यवस्था होती है
d. वारंटी संविदा के मुख्य प्रयोजन का एक सम्पार्श्विक अनुबन्ध है
28. एक प्रकरण में क्रेता ने फोन निर्माता द्वारा एक मोबाइल फोन, बिना किसी जानकारी के कि उसमें हक सम्बन्धी दोष है, खरीदा और उक्त दोष बाद में पता चलता है-
a. क्रेता का उस माल से अपना हक समाप्त हो जायेगा
b. क्रेता क्रय किये गये माल पर अपना हक बनाये रखेगा।
c. क्रेता मूल स्वामी की अपेक्षा किये जाने पर माल वापस कर देगा और विक्रेता से विक्रय धन को वापस लेगा।
d. विक्रेता और माल के स्वामित्व का दावा करने वाले के बीच स्वामित्व सम्बन्धी विवाद का व्यवस्थापन किया जायेगा।
29. विक्रय की संविदा में जब तक कि संविदा में विपरीत आशय न हो-
a. विक्रेता की ओर से कोई विवक्षित वचन नहीं होता कि उसे माल बेचने का अधिकार है।
b. कोई विवक्षित वारण्टी नहीं है कि क्रेता को निर्वाध कब्जे और उपभोग होगा।
c. कोई विवक्षित वारण्टी नहीं है कि माल किसी तीसरे पक्षकार के पक्ष में किसी भी विलगंम यो भार से मुक्त होगा।
d. उपरोक्त सभी परिस्थितियों में एक विवक्षित शर्त और वारण्टी होगी।
30. निम्नलिखित में से कौन सी धारा विक्रय की प्रत्येक संविदा में एक विवक्षित वारंटी से सम्बन्धित है-
a. धारा 14(क)
b. धारा 14 (ख)
c. धारा 14 (घ)
d. धारा 16 (2)
31. किसी संविदा में शर्तें तथा वारंटियाँ हो सकती हैं-
a. अभिव्यक्त
b. विवक्षित
c. अभिव्यक्त अथवा विवक्षित
d. उपरोक्त में कोई नहीं
32. संविदा में वारण्टी निहित है-
a. संविदा के मुख्य उद्देश्य के लिए आवश्यक है और माल के अस्वीकार करने के अधिकार को जन्म देता है।
b. संविदा के मुख्य प्रयोजन के लिए समपार्शिवक है, इसके उल्लंघन की स्थिति में नुकसान के दावे के बिना।
c. मुख्य उद्देश्य के लिए आवश्यक है और इसका उल्लंघन संविदा को अस्वीकार मानने को जन्म देती है।
d. मुख्य उद्देश्य के लिए समपार्शिवक और इसका उल्लंघन नुकसान के लिए हक दावे को जन्म देती है।
33. माल विक्रय अधिनियम, 1930 की निम्नलिखित धाराओं में से कौन सी धारा 'क्रेता सावधान रहे' (केवियट ऐम्पटर) के सिद्धांत से सम्बन्धित है-
a. धारा 15
b. धारा 16
c. धारा 17
d. धारा 18
34. 'केवियट एम्पटर' शब्द का अर्थ है-
a. माल को दोष रहित होना चाहिए
b. माल का स्वामित्व विक्रय के बाद अंतरित हो जाता है
c. क्रेता को अवगत होने दीजिए (क्रेता सावधान)
d. उपरोक्त में कोई नहीं
35. नमूने द्वारा विक्रय की संविदा में एक विवक्षित शर्त होती है-
a. कि प्रपुंज गुणवत्ता में नमुने के अनुरूप होगा।
b. कि माल किसी भी दोष से मुक्त होगा जो उन्हें अव्यवहारिक बना देगा जो नमूने के उचित जांच पर स्पष्ट नहीं होगा।
c. किं खरीददार के पास नमूने को प्रपुंज की तुलना का उचित अवसर होगा।
d. उपरोक्त सभी
36. माल को तब 'परिदान की अवस्था' में कहा जाता है।
a. अच्छी स्थिति में हो
b. समुचित स्थिति में हो
c. समय पर परिदत्त कर दी गई हो
d. क्रेता संविदा के अधीन परिदान लेने को बाध्य होता है
37. लैटिन सिद्धांत 'नेमो डैट क्वोड नॉन हैबेट' माल विक्रय अधिनियम की किस धारा में निहित है-
a. धारा 27
b. धारा 29
c. धारा 26
d. धारा 28
38. नेमो डैट क्वोड नॉन हैबेट' (कोई भी व्यक्ति स्वयं के स्वामित्व से बेहतर स्वामित्वं अंतरित नहीं कर सकता) किसका एक स्थापित सिद्धांत है-
a. संपत्ति अंतरण के नियम का
b. अपकृत्य विधि के नियम का
c. अपराध विधि के नियम का
d. संविदा के नियम का
39. एक माल विक्रय संविदा में जो उस समय के सम्बन्ध में कोई शर्त नहीं रखता जिसमें संविदा का पालन होना है-
a. ऐसे किसी शर्त का विचार किये बिना नियत समय माल विक्रय संविदा का सार है।
b. संव्यवहार की प्रकृति पक्षकारों के आशय पर निर्भर है अन्यथा संविदा के शर्तों से प्रदर्शित समय सार नहीं हो सकता है।
c. उपरोक्त दोनों सही हैं।
d. उपरोक्त में कोई सही नहीं है।
40. माल विक्रय की संविदा में समय मर्मभूत है-
a. कथन पूर्णतः सत्य है
b. कथन पक्षकारों के बीच करार से शासित होता है
c. कथन पक्षकारों के करार एवं उनके आचरण से निर्धारित किया जायेगा
d. कथन विधि की दृष्टि में गलत है।
41. धारा 41 के अनुसार क्या निर्धारण करने के लिए क्रेता के पास माल के परीक्षण के लिए युक्तियुक्त अवसर अवश्य उपलब्ध होना चाहिए-
a. कि माल परिदान अवस्था में है
b. कि माल व्यवसायिक गुणवत्ता का है.
c. कि माल संविदा के अनुरूप है
d. उपरोक्त सभी
42. एक असंदत्त विक्रेता के अधिकारों को सूचीबद्ध किया गया है-
a. धारा 45
b. धारा 46
c. धारा 47
d. धारा 49
43. असंदत्त विक्रेता के माल को अभिवहन में रोकने का अधिकार होगा जहाँ क्रेता-
a. दिवालिया हो जाए
b. मूल्य का भुगतान करने से इंकार कर दे
c. कपटपूर्ण कार्य करे
d. उपरोक्त सभी
44. असंदत्त विक्रेता अभिवहन में माल को रोकने के अपने अधिकार का उपयोग कर सकता है-
a. माल का वास्तविक कब्जा लेकर
b. परिवहनकर्ता अथवा अन्य उपनिहिती, जिसके कब्जे में माल हो, को अपने दावे की नोटिस देकर
c. उपरोक्त (क) तथा (ख) दोनों
d. उपरोक्त में कोई नहीं
45. क्या अदत्त विक्रेता के द्वारा बाद में मूल्य प्राप्त करने हेतु सहमत होने तथा क्रेता के दिवालिया हो जाने पर माल को अभिवहन में रोका जा सकता है-
a. नहीं
b. हाँ
c. हाँ, न्यायालय के व्यादेश द्वारा रेत
d. उपरोक्त में कोई नहीं
46. एक असंदत्त विक्रेता के निम्नलिखित अधिकारों में से • किस अधिकार का उपयोग केवल क्रेता के दिवालिया होने पर ही किया जा सकता है अन्यथा नहीं-
a. धारणाधिकार
b. पुनः विक्रय का अधिकार
c. अभिवहन में माल रोकने का अधिकार
d. वाद लाने का अधिकार
47. जहाँ एक पारेषिती ने किसी तीसरे व्यक्ति के साथ माल के विक्रय के लिए एक संविदा में प्रवेश किया, लेकिन विक्रय से पहले और विक्रेता की जानकारी के बिना माल को पारगमन में लूट लिया गया था, विक्रय संविदा है-
a. शून्य
b. शून्यकरणीय
c. पारेषिती पर बाध्यकारी
d. दोनों पक्षों पर बाध्यकारी
48. एक विक्रेता, क्रेता को उससे अधिक मात्रा में माल का परिदान करता है, जिसका आदेश दिया गया था, निम्नलिखित में कौन-सा गलत है-
a. क्रेता को पूरे माल को अस्वीकार करने का अधिकार है।
b. क्रेता को पूरा माल स्वीकार करने का अधिकार है।
c. क्रेता को केवल आदेश दिये गये माल को स्वीकार करने और शेष को अस्वीकार करने का अधिकार है।
d. क्रेता पूरे माल को रख सकता है, किन्तु केवल आदेश दिये गये माल के लिए भुगतान कर सकता है।
49. माल विक्रय अधिनियम,1930 की धारा 57 सम्बन्धित है-
a. मूल्य के लिए वाद से
b. अपरिदान के लिए नुकसानी के बाद से
c. माल वापसी के बाद से
d. उपरोक्त में कोई नहीं
50. नीलाम द्वारा माल की किसी विक्रय में जैसे ही घनपात होता है, माल-
a. मूल्य का भुगतान किए जाने पर माल क्रेता की संपत्ति बन जाता है।
b. माल क्रेता की संपत्ति बन जाता है भले ही यह शर्त मौजूद हो कि भुगतान के पूर्व माल को हटाया नहीं जा सकता
c. माल केवल तब क्रेता की संपत्ति बनता है जब ऐसी शर्त मौजूद न हो कि भुगतान के पूर्व माल को हटाया नहीं जा सकता
d. क्रेता की संपत्ति नहीं बनता, हालांकि, निविदाकर्ता को स्वामी के रूप में उसके साथ संव्यवहार करने का अधिकार होता है।
51. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा गलत है, जब माल का विक्रय निलायकर्ता द्वारा की जाती है और क्रेता को हक निर्गमन अच्छा मौका देती है-
a. वह स्वामी की सहमति से माल के कब्जे में है।
b. इसके द्वारा विक्रय माल के वास्तविक स्वामी के सामान्य क्रिया-कलाप की तरह किया जाता है।
c. क्रेता सद्भावपूर्वक विश्वास के साथ किया जाता है।
d. क्रेता को संविदा के समय सूचना नहीं थी कि विक्रेता को विक्रय का अधिकार नहीं था।
52. माल विक्रय अधिनियम, 1930 की धारा 63 के अंतर्गत 'युक्तियुक्त समय' क्या होता है?
a. विधि का प्रश्न
b. तथ्य का प्रश्न
c. विधि तथा तथ्य का मिश्रित प्रश्न
d. उपरोक्त (क) अथवा (ग) में से एक