धारा 203 से 204 अध्याय 15 छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 15

जलोढ़ तथा जल-प्लावन

203. जलोढ़ तथा जल प्लावन -

(1) किसी तट पर बनी जलोढ़ भूमि राज्य सरकार में निहित होगी, किन्तु ऐसे तट से लगी हुई भूमि का भूमिस्वामी, यदि कोई हो, उसके खाते में इस प्रकार बढ़ गई जलोढ़ भूमि का उपयोग भू-राजस्व निर्धारण की चालू अवधि के दौरान तब तक भू-राजस्व का भुगतान किए बिना करने का हकदार होगा जब तक कि उसके खाते में बढ़ गया क्षेत्रफल एक एकड़ से अधिक न हो जाये।

(2) जब किसी खाते में बढ़ गई जलोढ़ भूमि का क्षेत्रफल एक एकड़ से अधिक हो जाये और उपखण्ड अधिकारी को यह प्रतीत हो कि सार्वजनिक सुविधा तथा लोक राजस्व के हितों का सम्यक् ध्यान रखते हुए ऐसी भूमि का निपटारा किया जा सकता है तो वह ऐसे खाते के भूमिस्वामी को ऐसी भूमि भूमिस्वामी अधिकारों में ऐसे प्रीमियम पर देने की प्रस्थापना करेगा जो इस प्रकार बनी भूमि के उचित निर्धारण के बीस गुने से अधिक नहीं होगा। यदि उक्त भूमिस्वामी उस प्रस्थापना को स्वीकार न करे तो उपखण्ड अधिकारी उस भूमि का विहित रीति में निपटारा कर सकेगा।

(3) जहाँ जल-प्लावन द्वारा किसी खाते के क्षेत्रफल में एक एकड़ से अधिक की कमी हो जाये, वहाँ ऐसे खाते के सम्बन्ध में देय भू-राजस्व कम कर दिया जाएगा।

204. निर्धारण करने तथा विवादों को विनिश्चित करने की शक्ति -

(1) उपखण्ड अधिकारी को इस संहिता के अधीन बनाए गए नियमों के अध्यधीन रहते हुए यह शक्ति होगी कि वह भू-राजस्व में ऐसी समस्त वृद्धि तथा कमी को, जो कि इस अध्याय के अधीन अपेक्षित है या अनुज्ञात है, निर्धारित करे।

(2) उपखण्ड अधिकारी को यह भी शक्ति होगी कि वह जलोढ़ भूमि के वितरण से सम्बन्धित किसी भी ऐसे विवाद को, जो ऐसी भूमि का दावा करने वाले विभिन्न भूमिस्वामियों के बीच उद्भूत हो, विनिश्चित करे।

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