
(1) छत्तीसगढ़ के लिए एक राजस्व मण्डल होगा, जिसका एक अध्यक्ष होगा।
(2) राज्य सरकार, अध्यक्ष के अलावा इतने सदस्यों की नियुक्ति कर सकेगी, जितनी कि वह ठीक समझे।
(1) मण्डल का प्रधान स्थान ऐसे स्थान पर होगा जिसे राज्य सरकार अधिसूचित आदेश द्वारा, नियत करे।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, मण्डल का अध्यक्ष तथा उसके सदस्य ऐसे अन्य स्थान या स्थानों पर भी बैठक कर सकेंगे जिन्हें मण्डल का अध्यक्ष, राज्य सरकार के अनुमोदन से, नियत करे ।
(1) जब कोई सदस्य अनुपस्थिति के कारण या अन्यथा, अपने पद के कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ है तो राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, किसी व्यक्ति को, तत्समय के लिए मण्डल का सदस्य नियुक्त कर सकेगी।
(2) इस संहिता द्वारा अभिव्यक्त रूप के उपबंधित के सिवाय, मण्डल के अध्यक्ष तथा सदस्यों की सेवा के निबन्धन तथा शर्तें ऐसी होंगी जैसी की विहित की जाएं और विद्यमान मण्डल के अध्यक्ष तथा सदस्यों के लिए राज्य सरकार द्वारा अधिकथित किए गये निबन्धन तथा शर्तें तब तक प्रवृत्त बनी रहेंगी जब तक कि वे इस धारा के अधीन उपान्तरित या अतिष्ठित न कर दी जाएं।
(3) कोई व्यक्ति मण्डल के सदस्य के रूप में नियुक्ति के लिए तब तक अर्हित नहीं होगा, जब तक कि वह-
(क) उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र नहीं है; या
(ख) राजस्व अधिकारी न रह चुका हो, और कलेक्टर की पद श्रेणी से अनिम्न पदं श्रेणी का पद कम से कम पाँच वर्ष तक धारण न कर चुका हो।
मण्डल के सदस्यों को ऐसे वेतन तथा भत्तों का संदाय किया जायेगा जैसे कि राज्य सरकार अवधारित करे और वे वेतन तथा भत्ते राज्य की संचित निधि पर भारित होंगे।
( 1 ) मण्डल ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा जो इस संहिता द्वारा या इस संहिता के अधीन उसे प्रदत्त की गई है तथा ऐसे कृत्यों का निर्वहन करेगा जो इस संहिता द्वारा या इस संहिता के अधीन उसे प्रदत्त किए गए हैं और वह राज्य सरकार के ऐसे कृत्यों का निर्वहन करेगा जिन्हें राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, उस संबंध में विनिर्दिष्ट करे तथा वह ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करेगा जो किसी केन्द्रीय अधिनियम या किसी राज्य अधिनियम द्वारा या उसके अधीन मुख्य राजस्व प्राधिकारी या मुख्य नियंत्रक राजस्व प्राधिकारी को प्रदत्त किए गये हों या प्रदत्त किए जायें।
(2) राज्य सरकार, ऐसी शर्तों के साथ जैसी कि वह अधिरोपित करना ठीक समझे, मण्डल को या मण्डल के किसी सदस्य को, अधिसूचना द्वारा ऐसी अतिरिक्त शक्तियाँ प्रदत्त कर सकेगी या ऐसे अतिरिक्त कृत्य सौंप सकेगी जो तत्समय प्रवृत्त किसी अधिनियमिति द्वारा उसके अधीन राज्य सरकार को समनुदेशित हैं।
मण्डल को ऐसे समस्त मामलों के संबंध में, जो उसकी अपीली या पुनरीक्षण सम्बन्धी अधिकारिता के अध्यधीन हैं, समस्त प्राधिकारियों पर उस सीमा तक अधीक्षण की शक्ति होगी जहाँ तक कि ऐसे प्राधिकारी ऐसे मामलों के संबंध में कार्यवाही करते हैं और वह उनसे विवरणियाँ माँग सकेगा।
मण्डल, अपने एक या एक से अधिक सदस्यों से गठित न्यायपीठों द्वारा मण्डल की शक्तियों तथा कृत्यों का प्रयोग किए जाने हेतु नियम बना सकेगा, और ऐसे न्यायपीठों द्वारा ऐसी शक्तियों या कृत्यों का प्रयोग करते हुए दिए गए समस्त विनिश्चय मण्डल के विनिश्चय समझे जायेंगे।
(1) म. प्र. राजस्व मण्डल के समक्ष दिनांक 31 अक्टूबर, 2002 को संहिता के अंतर्गत विचाराधीन छत्तीसगढ़ राज्य से संबंधित समस्त अपीलें, पुनरीक्षण एवं पुनर्विलोकन के समस्त आवेदन पत्र तथा अन्य समस्त कार्यवाहियां छत्तीसगढ़ राजस्व मण्डल को अन्तरित मानी जायेंगी तथा सुनी एवं विनिश्चित की जायेंगी।
(2) (क) ऐसे सभी मामले जो :-
(एक) कलेक्टर द्वारा पारित आदेश चाहे वह बन्दोबस्त चालू रहने की अवधि में बन्दोबस्त अधिकारी की हैसियत से पारित हों, के विरुद्ध प्रथम अपील जो बोर्ड के समक्ष सुने व विनिश्चय किये जाने हेतु लंबित हों;
(दो) कलेक्टर अथवा उप खण्ड अधिकारी द्वारा पारित आदेश के विरुद्ध द्वितीय अपील जो बोर्ड के समक्ष सुने व विनिश्चय किये जाने हेतु लंबित हों;
(तीन) उप खण्ड अधिकारी के पारित आदेश के विरुद्ध द्वितीय अपील जो कलेक्टर के समक्ष सुने व विनिश्चय किये जाने हेतु लंबित हों; आयुक्त को अन्तरित माने जायेंगे।
(ख) ऐसे समस्त पुनरीक्षण, पुनर्विलोकन एवं अन्य कार्यवाहियाँ जो 23 नवम्बर, 2002 के पश्चात् आयुक्त कार्यालय से बोर्ड को अंतरित हो गये थे और बोर्ड के समक्ष लंबित हैं, अब आयुक्त को अंतरित माने जायेंगे व सुने व विनिश्चय किये जायेंगे;
(ग) किसी भी पक्षकार के आवेदन पर 23 नवम्बर, 2002 के पश्चात् राजस्व मंडल के समक्ष प्रस्तुत व विनिश्चय हेतु लंबित पुनरीक्षण प्रकरण के संबंध में संबंधित पक्षकार द्वारा स्थानांतरण हेतु आवेदन दिये जाने पर ऐसे प्रकरण बोर्ड द्वारा आयुक्त को हस्तांतरित कर दिये जायेंगे।