धारा 61 से 91 क. अध्याय 7 छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959

धारा 61 से 91 क. अध्याय 7 छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959

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अध्याय 7

भू-सर्वेक्षण तथा भू-राजस्व निर्धारण

क - अधिकारी

"61. छत्तीसगढ़ अधिनियम क्रमांक 6 सन् 2022 द्वारा दिनांक 4-5-2022 विलुप्त

62. आयुक्त, भू-अभिलेख की नियुक्ति.-

राज्य सरकार, आयुक्त भू-अभिलेख की नियुक्ति कर सकेगी, जो राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में जारी किए गये निर्देश के अध्यधीन रहते हुए भू-सर्वेक्षण तथा भू-अभिलेखों का प्रबंधन एवं नियंत्रण करेगा।

63. अपर आयुक्त, भू-अभिलेख की नियुक्ति और उनकी शक्तियां तथा कर्तव्य. -

(1) राज्य सरकार एक या अधिक अपर आयुक्त, भू-अभिलेख की नियुक्ति कर सकेगी।

(2) अपर आयुक्त, भू-अभिलेख ऐसे मामलों में या ऐसे वर्ग के मामलों में जैसे कि राज्य सरकार या आयुक्त, भू-अभिलेख निदेशित करे, ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा जो इस संहिता द्वारा तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति द्वारा अथवा इस संहिता या ऐसी अन्य अधिनियमिति के अधीन बनाये गए किसी नियम द्वारा आयुक्त, भू-अभिलेख को प्रदत्त की गई हैं तथा ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करेगा जो इस संहिता द्वारा या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति द्वारा अथवा इस संहिता या ऐसी अन्य अधिनियमिति के अधीन बनाए गए किसी नियम द्वारा आयुक्त, भू-अभिलेख पर अधिरोपित किये गए हैं और अपर आयुक्त, भू-अभिलेख के सम्बन्ध में, जबकि वह ऐसी शक्तियों का प्रयोग कर रहा हो तथा ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन कर रहा हो, यह समझा जाएगा कि उसे इस संहिता या ऐसी अन्य अधिनियमिति के या उस संहिता या ऐसी अन्य अधिनियमिति के अधीन बनाए गए किसी नियम के प्रयोजनों के लिए आयुक्त, भू-अभिलेख नियुक्त किया गया है।

64. जिला सर्वेक्षण अधिकारी, उप सर्वेक्षण अधिकारी तथा सहायक सर्वेक्षण अधिकारी की नियुक्ति. -

(1) ऐसी भूमियों के संबंध में, जो कि भू-सर्वेक्षण के अध्यधीन हैं,-

(क) जिले का कलेक्टर, जिला सर्वेक्षण अधिकारी होगा;

(ख) जिले का अपर कलेक्टर, कलेक्टर के लिखित आदेश दिये जाने पर आवंटित क्षेत्र के लिये जिला सर्वेक्षण अधिकारी के रूप में कार्य कर सकेगा;

(ग) उपखण्ड का उपखण्ड अधिकारी, उस उपखण्ड के लिए, उप सर्वेक्षण अधिकारी होगा;

(घ) तहसीलदार, अपर तहसीलदार या नायब तहसीलदार अपने-अपने क्षेत्राधिकार के भीतर, सहायक सर्वेक्षण अधिकारी होंगे।

(2) समस्त जिला सर्वेक्षण अधिकारी, आयुक्त भू-अभिलेख के अधीनस्थ होंगे।

(3) जिले में समस्त उप सर्वेक्षण अधिकारी तथा सहायक सर्वेक्षण अधिकारी, जिला सर्वेक्षण अधिकारी के अधीनस्थ होंगे।

(4) उप-खण्ड में समस्त सहायक सर्वेक्षण अधिकारी, उप सर्वेक्षण अधिकारी के अधीनस्थ होंगे।

65. जिला सर्वेक्षण अधिकारी, उप सर्वेक्षण अधिकारी तथा सहायक सर्वेक्षण अधिकारी की शक्तियां –

(1) ऐसी भूमियों के संबंध में, जो कि भू-सर्वेक्षण के अध्यधीन हैं, इस संहिता के अधीन कलेक्टर, उपखण्ड अधिकारी या तहसीलदार की शक्तियां क्रमश: जिला सर्वेक्षण अधिकारी, उप सर्वेक्षण अधिकारी या सहायक सर्वेक्षण अधिकारी में निहित होंगी।

(2) राज्य सरकार, इस संहिता के अधीन जिला सर्वेक्षण अधिकारी की समस्त एवं किन्हीं भी शक्तियों को उप सर्वेक्षण अधिकारी या सहायक सर्वेक्षण अधिकारी में निहित कर सकेगी।

ख-भू-सर्वेक्षण

66. भू-सर्वेक्षण की परिभाषा -

"भू-सर्वेक्षण" से अभिप्रेत है निम्नलिखित क्रियाकलापों में से कोई एक या एक से अधिक या समस्त क्रियाकलाप, अर्थात् :-

(1) भूमि का सर्वेक्षण संख्यांकों/भू-खण्ड संख्यांकों में विभाजन, विद्यमान सर्वेक्षण संख्यांकों/भू-खण्ड संख्यांकों को मान्य करना, उन्हें पुनर्गठित करना अथवा नवीन सर्वेक्षण संख्यांक/भू-खण्ड संख्यांक विरचित करना;

(2) भूमि का नक्शा तैयार करना या यथास्थिति, उसका पुनरीक्षण करना या उसमें सुधार करना;

(3) अधिकार अभिलेख तैयार करना;

(4) यथास्थिति, प्रत्येक सर्वेक्षण संख्यांक/भूखण्ड संख्यांक वाली क्षेत्र पुस्तिका (फील्ड बुक) तैयार करना;

(5) कोई अन्य अभिलेख तैयार करना, जैसा कि विहित किया जाये।

67. प्रस्थापित भू-सर्वेक्षण की अधिसूचना. -

(1) जिला सर्वेक्षण अधिकारी, अपने प्रभार के संपूर्ण या किसी भी क्षेत्र में भू-सर्वेक्षण, राजपत्र में उस आशय की एक अधिसूचना प्रकाशित करके, प्रारंभ कर सकेगा।

(2) उपधारा (1) के अधीन अधिसूचित भूमियां, उक्त अधिसूचना की तारीख से, तब तक भू-सर्वेक्षण के अध्यधीन समझी जायेंगी, जब तक कि ऐसे भू-सर्वेक्षण को समाप्त किये जाने की घोषणा करने वाली अधिसूचना, जिला सर्वेक्षण अधिकारी द्वारा जारी न कर दी जाये।

(3) निम्नांकित परिस्थितियों में जिला सर्वेक्षण अधिकारी द्वारा भू-सर्वेक्षण किया जायेगा :-

(क) राज्य शासन के निर्देश पर;

(ख) गत सर्वेक्षण को 30 वर्ष पूर्ण होने पर;

(ग) संदर्भ नक्शा जीर्ण-शीर्ण या अनुपलब्ध होने पर;

(घ) ऐसी अन्य परिस्थितियां, जो जिला सर्वेक्षण अधिकारी उचित समझे।

68. सर्वेक्षण - संख्याकों तथा ग्रामों की विरचना. -

इस संहिता के अधीन बनाये गए नियमों के अध्यधीन रहते हुए, जिला सर्वेक्षण अधिकारी -

(क) उस भूमि का, जिस पर भू-सर्वेक्षण विस्तारित है, माप कर सकेगा और उस पर इतनी संख्या में सर्वेक्षण चिह्न सन्निर्मित कर सकेगा जितने कि आवश्यक हों;

(ख) ऐसी भूमियों को सर्वेक्षण- संख्यांकों में विभाजित कर सकेगा और ऐसे सर्वेक्षण संख्यांकों के ग्रामों के रूप में समूह बना सकेगा; और

(ग) विद्यमान सर्वेक्षण-संख्यांकों को मान्य कर सकेगा, सर्वेक्षण-संख्यांकों को पुनर्गठित कर सकेगा या नवीन सर्वेक्षण संख्यांक विरचित कर सकेगा:

परन्तु इसमें इसके पश्चात् यथा उपबंधित के सिवाय, कृषि प्रयोजनों के लिए उपयोग में लाई जाने वाली भूमि को समाविष्ट करने वाले कोई भी सर्वेक्षण- संख्यांक इसके पश्चात् उस न्यूनतम विस्तार से कम विस्तार के नहीं बनाये जाएंगे जो कि भूमि के विभिन्न वर्गों के लिए विहित किया जाए:

परन्तु यह और भी कि पूर्वोक्त परन्तुक के अधीन विहित की गई सीमा उन सर्वेक्षण- संख्यांकों की दशा में लागू नहीं होगी जो धारा 67 की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना की तारीख के ठीक पूर्व पहले से ही विद्यमान हों।

69. व्यपवर्तित की गई या विशेष रूप से समनुदेशित की गई भूमि का पृथक् सीमांकन. –

धारा 68 के उपबन्धों के होते हुए भी, जब कृषि भूमि का कोई प्रभाग धारा 172 के उपबन्धों के अधीन किसी कृषि-भिन्न प्रयोजन के लिए व्यपवर्तित किया जाता है, या जब भूमि का कोई प्रभाग धारा 237 के अधीन विशेष रूप से समनुदेशित किया जाता है या जब भूमि के किसी प्रभाग पर कोई निर्धारण धारा 59 की उपधारा (2) के अधीन परिवर्तित किया जाता है तो जिला सर्वेक्षण अधिकारी ऐसे प्रभाग को पृथक सर्वेक्षण- संख्यांक या सर्वेक्षण संख्यांक के उपखण्ड के रुप में गठित कर सकेगा।

70. सर्वेक्षण संख्यांकों को पुनर्क्रमांकित या उप-विभाजित या समामेलित करने की शक्ति. -

(1) जिला सर्वेक्षण अधिकारी, भूमि अधिकारों के अर्जन की दृष्टि से या किसी अन्य कारण से, सर्वेक्षण संख्यांकों को पुनर्क्रमांकित कर सकेगा एवं उन्हें उतने खण्डों में विभाजित कर सकेगा, जितने कि अपेक्षित हों, एवं एक से अधिक सर्वेक्षण संख्यांकों को एकल सर्वेक्षण संख्यांक में समामेलित कर सकेगा।

(2) किसी सर्वेक्षण संख्यांक का विभाजन या किसी सर्वेक्षण संख्यांकों का समामेलन, इस संहिता के अधीन बनाये गये नियमों के अनुसार किया जायेगा।

(3) जब कभी सर्वेक्षण संख्यांकों को पुनर्क्रमांकित किया जाये, तो जिला सर्वेक्षण अधिकारी, इस संहिता के अधीन तैयार किये गये या संधारित किये गये समस्त अभिलेखों में प्रविष्टियों में सुधार करेगा।

71. अभिलेखों में सर्वेक्षण-संख्यांकों तथा उपखण्डों की प्रविष्टि.-

सर्वेक्षण संख्यांकों तथा सर्वेक्षण-संख्यांकों के उपखण्डों का क्षेत्रफल तथा निर्धारण ऐसे अभिलेखों में प्रविष्ट किया जाएगा जो कि विहित किए जाएं।

72. ग्राम की आबादी का अवधारण. -

जिला सर्वेक्षण अधिकारी प्रत्येक बसे हुए ग्राम के मामले में भूमियों में के अधिकारों का सम्यक् ध्यान रखते हुए निवासियों के निवास के लिए या उससे आनुषंगिक प्रयोजनों के लिए आरक्षित किए जाने वाला क्षेत्र अभिनिश्चित तथा अवधारित करेगा और ऐसे क्षेत्र को ग्राम की आबादी समझा जाएगा।

73. ग्रामों को विभाजित या संयोजित करने या उनमें से किसी क्षेत्र को अपवर्जित करने की जिला सर्वेक्षण अधिकारी  की शक्ति. -

जिला सर्वेक्षण अधिकारी इस संहिता के अधीन बनाये गए नियमों के अनुसार किसी एक ग्राम को दो या अधिक ग्राम गठित करने के प्रयोजन से विभाजित कर सकेगा या दो या अधिक ग्रामों को एक ग्राम गठित करने के प्रयोजन से समामेलित कर सकेगा, या किसी ग्राम की सीमाओं को, उनमें किसी ऐसे ग्राम के जो उनके समीप्य में हों, किसी क्षेत्र को सम्मिलित करके अथवा उनमें समाविष्ट किसी क्षेत्र को उनमें से अपवर्जित करके परिवर्तित कर सकेगा।

74. ग्रामों के समूह बनाना. –

प्रत्येक जिले या तहसील के या किसी जिले या तहसील के भाग के उन ग्रामों के, जो उस क्षेत्र में समाविष्ट हों जिसका कि भू-सर्वेक्षण किया जाना है, समूह बनाये जाएंगे और ऐसे समूह बनाने में प्राकृतिक विशेषताओं, कृषिक तथा आर्थिक दशाओं एवं व्यापारिक सुविधाओं तथा संचार साधनों को ध्यान में रखा जाएगा।

ग - भू-राजस्व निर्धारण

75. बन्दोबस्त की परिभाषा. -

राजस्व सर्वेक्षण चालू रहने के दौरान किसी स्थानीय क्षेत्र में की भूमियों पर देय भू-राजस्व अवधारित करने या पुनरीक्षित करने के लिए इस भाग के उपबन्धों के अनुसार की गई संक्रियाओं का परिणाम "बन्दोबस्त" कहलाता है और वह कालावधि, जिसके कि दौरान पुनरीक्षित भू-राजस्व प्रवृत्त रहेगा, "बन्दोबस्त की अवधि" कहलाती है।

76. छत्तीसगढ़ अधिनियम क्रमांक 6 सन् 2022 द्वारा दिनांक 4-5-2022 से विलुप्त।

77. निर्धारण दरों का नियत किया जाना. -

(1) जिला सर्वेक्षण अधिकारी, राज्य शासन द्वारा निर्धारित दर के अनुसार प्रत्येक सर्वेक्षण संख्यांक/भूखण्ड संख्यांक या उनके खण्डों के लिए भू-राजस्व का निर्धारण करेगा।

(2) जहां कोई खाता, कई सर्वेक्षण संख्यांकों/भूखण्ड संख्यांकों से मिलकर बना हो, वहां जिला सर्वेक्षण अधिकारी, प्रत्येक सर्वेक्षण संख्यांक/भूखण्ड के लिए प्रयोज्य भू-राजस्व का पृथक-पृथक निर्धारण करेगा।

78. छत्तीसगढ़ अधिनियम क्रमांक 32 सन् 2013 द्वारा दिनांक 19-8-2013 से विलुप्त

79. छत्तीसगढ़ अधिनियम क्रमांक 6 सन् 2022 द्वारा दिनांक 4-5-2022 से विलुप्त।

80. समस्त भूमियां निर्धारण के दायत्विधीन होंगी. -

जिला सर्वेक्षण अधिकारी को यह शक्ति होगी कि वह किसी भी प्रकार की ऐसी समस्त भूमियों, पर जिन पर भू-राजस्व निर्धारण विस्तारित होता है, उचित निर्धारण करे, चाहे ऐसी भूमियां भू-राजस्व के भुगतान के दायित्वाधीन हो या न हों।

81. निर्धारण के सिद्धान्त -

(1) समस्त भूमियों के उचित निर्धारण की संगणना इस धारा में उपवर्णित किये गए सिद्धान्तों तथा निर्बन्धनों के अनुसार की जाएगी।

(2) विशेषाधिकार प्राप्त निर्बन्धनों पर भूमि धारण करने के किसी भी दावे पर विचार नहीं किया जाएगा।

(3) कृषि भूमि की दशा में, कृषि के लाभों का, पटटों के लिये दिये गए प्रतिफल का, भूमि को विक्रय कीमतों का तथा बन्धकों पर के मूलधनों का, तब कृषि - भिन्न भूमि की दशा में उस प्रयोजन के लिये जिसके लिये वह भूमि धारित है, भूमि के मूल्य का ध्यान रखा जाएगा।

(4) गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए उपयोग की जा रही भूमि का उचित निर्धारण धारा 59 के अधीन बनाये गये नियमों के अनुसार किया जायेगा।

(5) जहां कृषि के प्रयोजन के लिये धारित किसी खाते में उसके धारक द्वारा या धारक के खर्चे से किसी भी समय कोई सुधार किया गया हो, वहां ऐसे खाते का उचित निर्धारण इस प्रकार नियत किया जाएगा मानो कि वह सुधार किया ही नहीं गया हो।

82. भू-राजस्व निर्धारण का प्रभावशील होना. -

जब किसी भूमि के भू-राजस्व का निर्धारण, धारा 77 एवं 81 के अनुसार नियत कर दिया गया हो, तो ऐसा निर्धारण, आगामी राजस्व वर्ष से प्रभावशील होगा तथा इस प्रकार किया गया निर्धारण, जब तक उसे इस संहिता के या किसी अन्य विधि के उपबंधों के अनुसार, परिवर्तित न कर दिया गया हो, प्रभावशील रहेगा।

83. छत्तीसगढ़ अधिनियम क्रमांक 6 सन् 2022 द्वारा दिनांक 4-5-2022 से विलुप्त।

84. अधिकारों को त्यागने वाले भूमि स्वामी को वृद्धि से माफी -

भू-राजस्व निर्धारण  की अवधि के प्रथम वर्ष के दौरान, किसी भी ऐसे भूमि स्वामी को, जो नवीन निर्धारण से असन्तुष्ट हो, कृषि वर्ष प्रारम्भ होने के एक मास पूर्व उसके द्वारा अपने खाते में के अपने अधिकार धारा 173 द्वारा विहित की गई रीति में त्याग देने पर किसी भी ऐसी वृद्धि से, जो उस निर्धारण द्वारा अधिरोपित की गई हो, माफ़ी मिल सकेगी:

परन्तु किसी खाते के केवल ऐसे भाग का या ऐसे खाते का, जो किसी विल्लंगम या भार के अध्यधीन हो, त्यागना अनुज्ञात नहीं किया जाएगा।

85. भू-राजस्व निर्धारण की अवधि. -

(1) जिला सर्वेक्षण अधिकारी के द्वारा की गई निर्धारण की अवधि, सामान्यतः 30 वर्ष की होगी।

(2) विशेष परिस्थितियों में, कारण उल्लिखित करते हुए, राज्य सरकार, संपूर्ण क्षेत्र या किसी क्षेत्र विशेष के लिए भू-राजस्व के निर्धारण में परिवर्तन के निर्देश, 30 वर्ष के पूर्व भी, जिला सर्वेक्षण अधिकारी को दे सकेगी, किन्तु ऐसा निर्देश भी, भू-राजस्व के निर्धारण के 15 वर्ष के पूर्व नहीं दिया जा सकेगा।

(3) किसी भूमि पर किये गये निर्धारण की अवधि समाप्त होने के उपरांत, उस भूमि के भू- राजस्व को पुनरीक्षित करने की अधिकारिता उपखण्ड अधिकारी को होगी।

(4) इस बात के होते हुए भी कि किसी क्षेत्र विशेष में भू-राजस्व निर्धारण की अवधि का अवसान हो चुका है, उसके सम्बन्ध में, यदि नया निर्धारण नहीं किया गया हो तो, यह समझा जायेगा कि भू-राजस्व की दर, आगामी भू-राजस्व निर्धारण तक वही रहेगी।

86. छत्तीसगढ़ अधिनियम क्रमांक 6 सन् 2022 द्वारा दिनांक 4-5-2022 से विलुप्त।

घ- साधारण

87.  छत्तीसगढ़ अधिनियम क्रमांक 6 सन् 2022 द्वारा दिनांक 4-5-2022 से विलुप्त।

88. नक्शे तथा अभिलेख रखने का कर्तव्य जिला सर्वेक्षण अधिकारी को अन्तरित करने की शक्ति -

जब कोई स्थानीय क्षेत्र भू-सर्वेक्षण के अधीन हो तो नक्शे तथा अभिलेख रखने का कर्तव्य, राज्य सरकार के आदेशों के अधीन, कलेक्टर के पास से जिला सर्वेक्षण अधिकारी को अन्तरित किया जा सकेगा जो तदुपरि उन समस्त शक्तियों का प्रयोग करेगा जो अध्याय 9 तथा अध्याय 18 के उपबन्धों में से किसी भी उपबंध में कलेक्टर को प्रदत्त की गई है।

89. गलतियों को ठीक करने की उपखण्ड अधिकारी की शक्ति -

उपखण्ड अधिकारी, भू-सर्वेक्षण बन्द हो जाने के पश्चात् तथा भू-राजस्व निर्धारण की अवधि के दौरान किसी सर्वेक्षण- संख्यांक या खाते के क्षेत्रफल या निर्धारण में की किसी ऐसी गलती को, जो सर्वेक्षण में हुई भूल या गणना करने में हुई भूल के कारण हुई हो, ठीक कर सकेगा:

परन्तु ऐसी गलती को ठीक करने के कारण भू-राजस्व का कोई बकाया देय नहीं हो जाएगा।

90. भू-सर्वेक्षण समाप्त होने के उपरांत कलेक्टर की शक्तियां. -

भू-सर्वेक्षण समाप्त होने के उपरांत धारा 68, 72, 73 एवं 77 के अधीन जिला सर्वेक्षण अधिकारी की शक्तियां, जिला कलेक्टर को होंगी।

91. भू-सर्वेक्षण समाप्त होने के उपरांत तहसीलदार की शक्तियां. -

भू-सर्वेक्षण समाप्त होने के उपरांत धारा 69 एवं 70 के अधीन जिला सर्वेक्षण अधिकारी की शक्तियां, तहसीलदार को होंगी।

91- क. नियम बनाने की शक्ति -

राज्य सरकार, इस संहिता के अधीन साधारणतः भू- सर्वेक्षण या भू-राजस्व निर्धारण के संचालन का विनियमन करने के लिए नियम बना सकेगी।

 

 

 

 

  

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