
इस अध्याय में-
(एक) "खातों की चकबन्दी" से अभिप्रेत है किसी ग्राम में की समस्त या किसी भूमि का ऐसा पुनर्वितरण कि जिससे खेती की सुविधा के लिए भूमिस्वामियों को लगे हुए भू-खण्ड आबंटित हो जाएँ;
(दो) "चकबन्दी अधिकारी" से अभिप्रेत है तहसीलदार की पदश्रेणी से अनिम्न पद श्रेणी का कोई ऐसा राजस्व अधिकारी जिसे इस संहिता के अधीन चकबन्दी अधिकारी की शक्तियों का प्रयोग करने तथा उसके कर्तव्यों का पालन करने के लिए राज्य सरकार द्वारा किसी जिले या किन्हीं जिलों के लिए नियुक्त किया गया हो।
(1) किसी ग्राम के कोई भी दो या अधिक भूमिस्वामी, जो परस्पर मिलकर धारा 221 के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित न्यूनतम क्षेत्रफल से अन्यून भूमि धारण करते हों, अपने खातों की चकबन्दी के लिए चकबन्दी अधिकारी को लिखित आवेदन कर सकेंगे जिसमें ऐसी विशिष्टियाँ कथित की जायेंगी जो कि धारा 221 के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित की जायें।
(2) कलेक्टर स्वप्रेरणा से चकबन्दी अधिकारी को यह निदेश दे सकेगा कि वह किसी ग्राम में खातों की चकबन्दी साध्य होने के बारे में जाँच करे ।
(3) यदि किसी ग्राम के दो-तिहाई भूमिस्वामी अपने खातों की चकबन्दी के लिए आवेदन करें या यदि उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन किए गए किसी आवेदन के सम्बन्ध में जाँच के अनुक्रम में उस ग्राम के दो-तिहाई भूमिस्वामी अपने खातों की चकबन्दी के लिए सहमत होते हुए आवेदन करें तो ऐसा आवेदन उस ग्राम के समस्त भूमिस्वामियों की ओर से किया गया आवेदन समझा जायेगा।
(4) यदि उपधारा (3) के अधीन आने वाले किसी मामले में, खातों की चकबन्दी की किसी स्कीम की पुष्टि कर दी जाये, तो वह उस ग्राम के समस्त भूमिस्वामियों पर तथा किन्हीं भी ऐसे व्यक्तियों पर, जो कि उस भूमि को धारण करने या दखल में लेने के लिए वाद में हकदार हो जायें, आबद्धकर होगी।
(5) यदि किसी अन्य मामले में, खातों की चकबन्दी की किसी स्कीम की पुष्टि कर दी जाये, तो वह आवेदकों पर तथा उन व्यक्तियों पर, जो कि अपने खातों की चकबन्दी के लिए सहमत हो गए हों तथा किन्हीं भी ऐसे व्यक्तियों पर, जो कि उस स्कीम से प्रभावित भूमि को धारण करने या दखल में लेने के लिए बाद में हकदार हो जाएँ, आबद्धकर होगी।
(1) यदि किसी ऐसे आवेदन के प्राप्त होने पर या उस आवेदन पर की जा रही कार्यवाहियों के किसी भी प्रक्रम पर आवेदन को नामंजूर करने, या किसी आवेदक के मामले को, उस पर विचार करने से अपवर्जित किए जाने के लिए अच्छा तथा पर्याप्त कारण प्रतीत होता हो तो चकबन्दी अधिकारी वह आवेदन कलेक्टर को इस सिफारिश के साथ प्रस्तुत कर सकेगा कि उस आवेदन को पूर्णतः या भागतः नामंजूर कर दिया जाये, या यह कि कार्यवाहियाँ मंसूख कर दी जाएँ।
यदि चकबन्दी अधिकारी आवेदन ग्रहण कर लेता है, तो वह उसके सम्बन्ध में उस प्रक्रिया के अनुसार कार्यवाही करेगा जो कि इस संहिता द्वारा या इस संहिता के अधीन अधिकथित है।
(1) यदि धारा 206 के अधीन आवेदन करने वाला भूमिस्वामी खातों की चकबन्दी की कोई ऐसी स्कीम प्रस्तुत करता है जिसके कि सम्बन्ध में पारस्परिक करार हो गया हो, तो चकबन्दी अधिकारी, धारा 221 के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा अधिकथित रीति में, उसकी परीक्षा करेगा और यदि आवश्यक हो तो उसे उपान्तरित करेगा।
(2) यदि आवेदन के साथ कोई स्कीम प्रस्तुत न की जाए, तो चकबन्दी अधिकारी खातों की चकबन्दी के लिए एक स्कीम धारा 221 के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा अधिकथित रीति में तैयार करेगा।
(3) यदि चकबन्दी अधिकारी की यह राय हो कि चकबन्दी की किसी स्कीम के अनुसार भूमि के पुनर्वितरण के परिणामस्वरूप किसी भूमिस्वामी के आबंटन में कोई ऐसा खाता या भूमि आएगी जिसका कि बाजार मूल्य या उत्पादी मूल्य उसके मूल खाते या भूमि के बाजार मूल्य या उत्पादी मूल्य की अपेक्षा कम है, तो उस स्कीम में यह उपबन्ध हो सकेगा कि ऐसे भूमिस्वामी को ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा, जिन्हें चकबन्दी अधिकारी निदेशित करे, प्रतिकर का भुगतान किया जाए।
(4) जब चकबन्दी की स्कीम पूरी हो जाये, तो चकबन्दी अधिकारी, स्कीम के सम्बन्ध में की गई आपत्तियों, यदि कोई हों, पर विचार करने तथा यथासम्भव उनका निराकरण करने के पश्चात्, उस स्कीम को उसकी पुष्टि की जाने के लिए कलेक्टर को प्रस्तुत करेगा।
(5) जब चकबन्दी की स्कीम पूरी हो जाए, और यदि ऐसी स्कीम से प्रभावित समस्त भूमिस्वामी, उस स्कीम के अधीन उन्हें आबन्टित किए गए खातों का कब्जा लेने के लिए सहमत हो जाएं, तो चकबन्दी अधिकारी उनको स्कीम में वर्णित की जाने वाली तारीख से ऐसा कब्जा लेने के लिए अनुज्ञात कर सकेगा।
कलेक्टर, चकबन्दी की स्कीम के सम्बन्ध में की गई आपत्ति या आपत्तियों, यदि कोई हों, पर तथा चकबन्दी अधिकारी की सिफारिश पर विचार करने के पश्चात् या तो स्कीम की, उपान्तरणों के साथ या उपान्तरणों के बिना, पुष्टि कर सकेगा या उसकी पुष्टि करने से इन्कार कर सकेगा। कलेक्टर का विनिश्चय, किसी भी ऐसे आदेश के अध्यधीन रहते हुए जो कि आयुक्त, भू-अभिलेख द्वारा पुनरीक्षण में धारा 50 के अधीन पारित किया जाए, अन्तिम होगा।
(1) चकबन्दी की स्कीम की पुष्टि हो जाने पर, चकबन्दी अधिकारी यदि आवश्यक हो, खातों का सीमांकन करेगा तथा अन्तिम रूप से किए विनिश्चयों को आख्यापित करने की कार्यवाही करेगा और स्कीम के अनुसार खेत का नक्शा, अधिकार अभिलेख, धारा 114 के अधीन विहित अन्य अभिलेख, निस्तार-पत्रक तथा वाजिब उल अर्ज नये तैयार करवाएगा।
(2) उपधारा (1) के अधीन तैयार किए गए नये अभिलेखों के सम्बन्ध में यह समझा जायेगा कि वे यथास्थिति अध्याय 9 या अध्याय 18 के अधीन तैयार किए गए हैं।
चकबन्दी की स्कीम से प्रभावित भूमिस्वामी, यदि उन्होंने धारा 209 की उपधारा (5) के अधीन कब्जा न लिया हो, स्कीम की पुष्टि होने के ठीक आगामी कृषि वर्ष के प्रारम्भ से उन खातों के कब्जे के लिए हकदार होंगे जो कि स्कीम के अधीन उनको आबन्टित किए गए हों, और चकबन्दी अधिकारी, यदि आवश्यक हो, उनको उन खातों का, जिनके कि वे हकदार हैं, कब्जा वारन्ट द्वारा दिलवाएगा:
परन्तु यदि समस्त भूमिस्वामी सहमत हो जाएँ, तो उन्हें स्कीम की पुष्टि होने के पश्चात्, चकबन्दी अधिकारी द्वारा उनके खातों का कब्जा किसी पूर्वतर तारीख से भी दिलाया जा सकेगा।
(1) इस संहिता में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी भूमिस्वामियों के उनके खातों में के अधिकार, चकबन्दी की किसी ऐसी स्कीम को, जो कि उन पर प्रभाव डालती हो, कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए विनिमय द्वारा या अन्यथा अन्तरणीय होंगे और कोई भी व्यक्ति इस बात का हकदार नहीं होगा कि वह उक्त प्रयोजन के लिए किए गए किसी अन्तरण के सम्बन्ध में, आपत्ति करे या उसमें हस्तक्षेप करे।
(2) चकबन्दी अधिकारी, राज्य सरकार की किसी भूमि को भी विनिमय द्वारा या अन्यथा अन्तरित कर सकेगा, जहाँ कि ऐसा अन्तरण चकबन्दी की किसी स्कीम को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक हो।
तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी-
(क) किसी ऐसे अन्तरण को जिसमें खातों की चकबन्दी की किसी स्कीम को कार्यान्वित करना अन्तर्वलित है, प्रभावान्वित करने के लिए कोई लिखत आवश्यक नहीं होगी और
(ख) किसी भी ऐसी लिखत का, यदि वह निष्पादित की गई हो, रजिस्ट्रीकरण अपेक्षित नहीं होगा।
(1) चकबन्दी अधिकारी, जब तक कि राज्य सरकार पर्याप्त कारणों से अन्यथा निदेशित न करे, स्कीम को कार्यान्वित करने के खर्चे, जो कि धारा 221 के अधीन बनाये गए नियमों के अनुसार निर्धारित किए जायेंगे, उन भूस्वामियों से वसूल करेगा, जिनके कि खाते, खातों की चकबन्दी की स्कीम द्वारा प्रभावित होते हों।
(2) चकबन्दी अधिकारी, उन भूमिस्वामियों के बीच खर्चे का प्रभाजन, जो कि उसका भुगतान करने के दायित्वाधीन हों, ऐसी स्कीम से प्रभावित खातों के उस क्षेत्रफल के अनुसार करेगा जो कि ऐसे भूमिस्वामियों के दखल में है।
कोई रकम, जो धारा 209 की उपधारा (3) के अधीन प्रतिकर के रूप में, या धारा 215 के अधीन खर्च के रूप में देय हो, भू-राजस्व के बकाया के तौर पर वसूल की जा सकेगी।
जब खातों की चकबन्दी के लिए आवेदन धारा 208 के अधीन ग्रहण कर लिया गया हो, तो खातों के विभाजन के लिए कोई भी कार्यवाहियाँ जो चकबन्दी की स्कीम पर प्रभाव डालती हों, प्रारम्भ नहीं की जाएँगी और लम्बित समस्त ऐसी कार्यवाहियाँ चकबन्दी कार्यवाहियों के चालू रहने के दौरान प्रास्थगित रहेंगी।
जब खातों की चकबन्दी के लिए कोई आवेदन ग्रहण कर लिया गया हो, तो किसी ऐसे भूमिस्वामी को, जिस पर स्कीम आबद्धकर होगी, यह शक्ति नहीं होगी कि वह चकबन्दी कार्यवाहियों के चालू रहने के दौरान, अपने मूल खाते या भूमि के किसी भाग को इस प्रकार अन्तरित करे या उसके सम्बन्ध में अन्यथा इस प्रकार कार्यवाही करे कि जिससे चकबन्दी की स्कीम के अधीन किसी अन्य भूमिस्वामी के तत्संबंधी अधिकारों पर प्रभाव पड़े।
किसी भूमिस्वामी को उस खाते या भूमि में, जो कि चकबन्दी की स्कीम के अनुसरण में उसे आबन्टित की गई हो, वे ही अधिकार प्राप्त होंगे जो कि उसे उसके मूल खाते में प्राप्त थे।
(1) यदि चकबन्दी की स्कीम के अन्तर्गत लाये गये किसी भूमिस्वामी के खाते पर किसी पट्टे, बन्धक या अन्य विल्लंगम का भार विधिमान्यतः है, तो ऐसा पट्टा, बन्धक या अन्य विल्लंगम अन्तरित कर दिया जाएगा और वह स्कीम के अधीन उसे आबटित किए गए खाते से या उसके ऐसे भाग से सम्बद्ध हो जाएगा जिसे चकबन्दी अधिकारी ने, स्कीम तैयार करते समय, किन्हीं ऐसे नियमों के अध्यधीन रहते हुए, जो कि धारा 221 के अधीन बनाए जाएँ, नियत किया हो; और तदुपरि उस भूमि में या उसके प्रति जिस पर से कि पट्टा, बन्धक या अन्य विल्लंगम अन्तरित कर दिया गया है, यथास्थिति पट्टेदार, बन्धकदार या अन्य विल्लंगमदार का कोई अधिकार नहीं रह जाएगा।
(2). उपधारा (1) में या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी चकबन्दी अधिकारी, यदि आवश्यक हो, किसी ऐसे पट्टेदार या बन्धकदार या अन्य विल्लंगमदार को, जो कि कब्जे का हकदार हो उस खाते का या खाते के उस भाग का कब्जा, जिस पर कि उसका पट्टा, बन्धक या अन्य विल्लंगम उपधारा (1) के अधीन अन्तरित हो गया हो, वारन्ट द्वारा दिलाएगा।
(1) राज्य सरकार इस अध्याय के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए नियम बना सकेगी।
(2) विशिष्टतया तथा पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, राज्य सरकार-
(क) धारा 206 को उपधारा (1) के अधीन आवेदन करने वाले व्यक्तियों द्वारा धारण की जाने वाली भूमि का न्यूनतम क्षेत्रफल विहित करते हुए;
(ख) धारा 206 के अधीन किए जाने वाले किसी आवेदन में अन्तर्विष्ट की जाने वालो विशिष्टियों के लिए उपबन्ध करते हुएः
(ग) खातों को चकबन्दी के लिए आवेदनों के सम्बन्ध में कार्यवाही करने में चकबन्दी अधिकारी द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया के लिए और स्कीम की परीक्षा करने या उसे तैयार करने में चकबन्दी अधिकारी की सहायता करने के लिए सलाहकार समिति या पंचायत की नियुक्ति तथा गठन के लिए उपबन्ध करते हुए,
(घ) धारा 209 को उपधारा (3) के अन्तर्गत आने वाले मामलों में दिए जाने वाले प्रतिकर का अवधारण करने के लिए,
(ङ) धारा 215 के अधीन खर्चे के निर्धारण का विनियमन करने के लिए,
(च) चकबन्दी की किसी स्कीम के अधीन लाये गए विभिन्न खातों तथा भूमियों के बाजार मूल्य या उत्पादी मूल्य का अवधारण करने के लिए,
(छ) धारा 220 के अधीन विल्लंगमों तथा पट्टों के अन्तरण के सम्बन्ध में चकबन्दी अधिकारी के मार्गदर्शन के लिए, और
(ज) साधारणतः इस अध्याय के अधीन की समस्त कार्यवाहियों में चकबन्दी अधिकारी तथा अन्य अधिकारियों एवं व्यक्तियों के मार्गदर्शन के लिए, नियम बना सकेगी।