
(1) कलेक्टर समय- समय पर, तहसील के ग्रामों को पटवारी हल्कों में विन्यस्त करेगा और किसी भी समय, किसी विद्यमान हल्के की सीमाओं में परिवर्तन कर सकेगा तथा नवीन हल्कों का सृजन कर सकेगा या विद्यमान हल्कों को समाप्त कर सकेगा।
(2) कलेक्टर भू-अभिलेख रखने तथा उनके शुद्धिकरण के लिये और ऐसे अन्य कर्तव्यों के लिए, जैसे कि राज्य सरकार विहित करे, प्रत्येक पटवारी हल्के में एक या अधिक पटवारियों की नियुक्ति करेगा।
(3) किसी प्रथा के अथवा किसी संधि, अनुदान या अन्य लिखत में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किसी भी व्यक्ति को विरासत द्वारा पटवारी के पद का उत्तराधिकारी होने के अधिकार के आधार पर पटवारी बने रहने या पटवारी नियुक्त किये जाने का कोई अधिकार या दावा प्राप्त नहीं होगा।
कलेक्टर, तहसील में के पटवारी हल्कों को राजस्व निरीक्षकों के हल्कों में विन्यस्त करेगा और वह किसी भी समय, किसी विद्यमान हल्के की सीमाओं में परिवर्तन कर सकेगा तथा नवीन हल्कों का सृजन कर सकेगा या विद्यमान हल्कों को समाप्त कर सकेगा।
(1) कलेक्टर प्रत्येक जिले में इतने व्यक्तियों को, जितने कि वह ठीक समझे, राजस्व निरीक्षक, नगर सर्वेक्षक, सहायक नगर सर्वेक्षक तथा मापक (मेजर) इस हेतु से नियुक्ति कर सकेगा कि वे भू-अभिलेख तैयार किए जाने तथा रखे जाने का पर्यवेक्षण करें और ऐसे अन्य कर्तव्यों का, जो कि विहित किए जाएं, पालन करें।
(2) नगर सर्वेक्षक तथा सहायक नगर सर्वेक्षक को, उनके भारसाधन के अधीन आने वाले क्षेत्रों के संबंध में धारा 28 109 110 112, 118 तथा 120 के प्रयोजनों के लिए पटवारी समझा जाएगा।
(1) उस दशा में के सिवाय जबकि राज्य सरकार द्वारा अन्यथा निर्दिष्ट किया जाए, प्रत्येक ग्राम के लिए सर्वेक्षण संख्यांकों या भू-खण्ड संख्यांकों की सीमाओं तथा बंजर भूमियों को दर्शाने वाला एक नक्शा तैयार किया जाएगा जो कि भूमि का नक्शा कहलायेगा ।
(2) प्रत्येक ग्राम की आबादी के लिए एक नक्शा तैयार किया जा सकेगा जिसमें प्राइवेट धारकों द्वारा अधिभोग में रखा गया क्षेत्र तथा वह क्षेत्र, जो ऐसे अधिभोग में न हो, एवं ऐसी अन्य विशिष्टियां जो कि विहित की जाएं, दर्शाई जाएंगी।
(3) यदि राज्य सरकार यह समझे कि किसी ग्राम के मामले में यह आवश्यक है कि उपधारा (2) के अधीन तैयार किए गए नक्शे में उन भू-खण्डों को, जो प्राइवेट धारकों के अधिभोग में हैं, पृथक् से दर्शाया जाए, तो वह कलेक्टर को यह निर्देश दे सकेगी कि वह नक्शे को उस प्रकार तैयार करवाए या पुनरीक्षित करवाए।
(4) यदि कोई ग्राम पंचायत ऐसा संकल्प पारित कर देती है कि प्राइवेट धारकों के अधिभोग में के भू-खण्डों को पृथकतः दर्शाते हुए ग्राम की आबादी का नक्शा तैयार किया जाए और वह सर्वेक्षण संबंधी संक्रियाओं के खर्च के प्रति उतने अनुपात में, जो कि विहित किया जाए, अभिदाय करने के लिए रजामन्द है, तो राज्य सरकार ऐसा नक्शा तैयार कराने का कार्य हाथ में ले सकेगी।
(5) ऐसा नक्शा भू-सर्वेक्षण के समय जिला सर्वेक्षण अधिकारी द्वारा और समस्त अन्य समयों पर तथा समस्त अन्य परिस्थितियों में कलेक्टर द्वारा यथास्थिति तैयार या पुनरीक्षित किया जाएगा।
(1) प्रत्येक ग्राम एवं नगरीय क्षेत्र के लिए अधिकार- अभिलेख उन नियमों के अनुसार तैयार किया जाएगा तथा रखा जाएगा जो कि इस संबंध में बनाए गए हों और ऐसे अभिलेख में निम्नलिखित विशिष्टियाँ सम्मिलित होंगी-
(क) समस्त भूमिस्वामियों के नाम, उनके द्वारा धारित सर्वेक्षण संख्यांकों या भू-खण्ड संख्यांकों तथा उनके सिंचित या असिंचित क्षेत्रफल सहित;
(ख) समस्त सरकारी पट्टेदारों के नाम, उनके द्वारा धारित सर्वेक्षण संख्यांकों या भू-खण्ड संख्यांकों तथा उनके सिंचित या असिंचित क्षेत्रफल सहित;
(ग) ऐसे व्यक्तियों के अपने-अपने हितों का प्रकार तथा उनकी सीमा और उनसे संलग्न शर्ते या दायित्व यदि कोई हों;.
(घ) ऐसे व्यक्तियों द्वारा देय लगान या भू-राजस्व यदि कोई हो; और
(ङ) ऐसी अन्य विशिष्टियां जो कि विहित की जाएं।
(2) उपधारा (1) में वर्णित अधिकार अभिलेख भू-सर्वेक्षण के दौरान या जब कभी भी राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा, ऐसा निदेश दे, तैयार किया जाएगा।
(1) कोई भी व्यक्ति, जो भूमि में कोई अधिकार या हित विधिपूर्वक अर्जित करता है, अपने द्वारा ऐसा अधिकार अर्जित किए जाने की रिपोर्ट ऐसे अर्जन की तारीख से छह मास के भीतर पटवारी को मौखिक रूप से या लिखित में करेगा, और पटवारी ऐसी रिपोर्ट के लिए लिखित अभिस्वीकृति रिपोर्ट करने वाले व्यक्ति को विहित प्ररूप में तत्काल देगा :
परन्तु जब अधिकार अर्जित करने वाला व्यक्ति अवस्यक हो या अन्यथा निरर्हित हो, तो उसका संरक्षक या ऐसा अन्य व्यक्ति, जो उसकी संपत्ति का भारसाधक हो, पटवारी को ऐसी रिपोर्ट करेगा।
स्पष्टीकरण - एक. - ऊपर वर्णित किए गए अधिकार के अंतर्गत कोई सुखाचार या संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 (1882 का अधिनियम संख्यांक 4 ) की धारा 100 में विनिर्दिष्ट किए गए प्रकार का कोई ऐसा भार, जो बंधक की कोटि में नहीं आता है, नहीं है।
स्पष्टीकरण - दो. - कोई ऐसा व्यक्ति, जिसके कि पक्ष में किसी बंधक का मोचन हो जाए या भुगतान कर दिया जाए या किसी पट्टे का पर्यवसान हो जाए, इस धारा के अर्थ के अंतर्गत अधिकार अर्जित करता है।
स्पष्टीकरण - तीन.- इस अध्याय के प्रयोजन के लिए, शब्द "पटवारी" के अंतर्गत कोई ऐसा व्यक्ति है जिसे इस अध्याय के अधीन पटवारी के कर्तव्यों का पालन करने के लिए नियुक्त किया गया हो।
स्पष्टीकरण- चार. - इस धारा के अधीन पटवारी को दी जाने के लिए अपेक्षित लिखित प्रज्ञापना या तो संदेशवाहक की मार्फत दी जा सकेगी या व्यक्तिश: सौंपी जा सकेगी या रजिस्ट्रीकृत डाक द्वारा भेजी जा सकेगी।
(2) कोई भी ऐसा व्यक्ति, जो कि उपधारा (1) में निर्दिष्ट किया गया है, अपने द्वारा ऐसे अधिकारों के अर्जन की लिखित रिपोर्ट ऐसे अर्जन की तारीख के छह मास के भीतर, तहसीलदार को भी कर सकेगा।
(1) पटवारी, अधिकार के प्रत्येक ऐसे अर्जन को, जिसकी रिपोर्ट उसे धारा 109 के अधीन की गई हो या जो ऑनलाइन माध्यम या किसी अन्य स्रोत से प्राप्त सूचना पर उसकी जानकारी में आये, उस ऑनलाइन ई-नामांतरण पोर्टल में दर्ज करेगा, जो कि उस प्रयोजन के लिए विहित किया गया है।
(2) यथास्थिति, पटवारी, अधिकार अर्जन संबंधी समस्त ऐसी रिपोर्ट, जो कि उप-धारा (1) के अधीन उसे प्राप्त हुई हो, ऐसी रीति से तथा ऐसे प्ररूप में, जैसा कि विहित किया जाये, राज्य सरकार द्वारा विहित समयावधि में तहसीलदार को प्रज्ञापित करेगा।
(3) धारा 109 के अधीन प्रज्ञापना के प्राप्त होने पर या ऑनलाइन माध्यम से या किसी अन्य स्रोत से ऐसे अधिकार अर्जन की प्रज्ञापना के प्राप्त होने पर, तहसीलदार विहित समयावधि के भीतर, -
(क) ऑनलाइन ई-नामांतरण पोर्टल में नामांतरण की प्रक्रिया प्रारंभ करेगा;
(ख) हितबद्ध समस्त पक्षकारों को नोटिस जारी करेगा;
(ग) आम सूचना या इश्तहार का प्रकाशन कार्यालयीन सूचना पटल संबंधित ग्राम/नगर में निर्धारित स्थान एवं विभागीय वेबपोर्टल पर करेगा।
(4) किसी प्रकरण में आपत्ति प्राप्त होने पर या तहसीलदार को प्रकरण, किसी कारण से विवादित प्रतीत होने पर वह ऑनलाइन ई- नामांतरण पोर्टल से प्रकरण को अपने ई-राजस्व न्यायालय में स्थानांतरित कर पंजीकृत करेगा, अन्यथा प्रकरण में समस्त कार्यवाही ऑनलाइन ई- नामांतरण पोर्टल में की जायेगी।
(5) तहसीलदार, हितबद्ध व्यक्तियों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् तथा ऐसी और जांच, जैसा कि वह आवश्यक समझे, करने के पश्चात्, नामांतरण से संबंधित आदेश पारित करेगा तथा यथास्थिति, ग्राम के खसरे एवं नक्शा सहित ऐसे अन्य सुसंगत भू-अभिलेखों में आवश्यक प्रविष्टि करेगा। पटवारी, विहित समयावधि के भीतर अभिलेख में सुधार कर सत्यापित करेगा, तत्पश्चात् तहसीलदार प्रकरण नस्तीबद्ध करेगा।
(6) धारा 35 में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस धारा के अधीन कोई भी मामला, किसी पक्षकार की अनुपस्थिति में खारिज नहीं किया जायेगा तथा गुणागुण क्रम में निपटाया जायेगा।
(7) पंजीकृत दस्तावेज के आधार पर, किसी भूमि पर नामांतरण के संबंध में इश्तहार का प्रकाशन एवं संबंधित हितबद्ध पक्षकारों को सूचना की तामीली उपरांत, कोई भी आपत्ति प्राप्त नहीं होने या पक्षकारों के अनुपस्थित होने पर, प्रकरण में दस्तावेज के आधार पर समुचित आदेश पारित किये जायेंगे।
(8) इस धारा के अधीन समस्त कार्यवाहियां विहित समयावधि के भीतर पूर्ण की जायेंगी। उस दशा में, जहां मामले, विनिर्दिष्ट कालावधि के भीतर निराकृत नहीं किये जाते हैं, तो तहसीलदार, लंबित मामलों की जानकारी की रिपोर्ट, ऐसे प्ररूप तथा रीति में, जैसा कि विहित किया जाये, कलेक्टर को देगा।
सिविल न्यायालयों को किसी भी ऐसे अधिकार से, जो अधिकार अभिलेख में अभिलिखित हो, संबंधित किसी भी ऐसे विवाद को विनिश्चित करने की अधिकारिता होगी जिसमें राज्य सरकार पक्षकार न हो।
जब कोई ऐसी दस्तावेज जिसके कि द्वारा किसी ऐसी भूमि, जो कृषि प्रयोजन के लिए उपयोग में लाई जाती है, या जिसके कि संबंध में क्षेत्र पुस्तक तैयार की जा चुकी है, के संबंध में कोई हक या उस पर कोई भार सृजित किया जाना, समनुदेशित किया जाना या निर्वापित किया जाना तात्पर्यित हो, भारतीय रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 ( 1908 का संख्यांक 16 ) के अधीन रजिस्ट्रीकृत की जाती है, तो रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी, उस क्षेत्र पर, जिसमें कि वह भूमि स्थित है, अधिकारिता रखने वाले तहसीलदार को ऐसे प्ररूप में तथा ऐसे समयों पर जैसा कि इस संहिता के अधीन के नियमों द्वारा विहित किया जाए, प्रज्ञापना भेजेगा।
उपखण्ड अधिकारी, किसी भी समय, लेखन संबंधी किन्हीं भी गलतियों को, तथा किन्हीं भी ऐसी गलतियों को, जिनके कि संबंध में हितबद्ध पक्षकार यह स्वीकार करते हों कि वे अधिकार अभिलेख में हुई हैं, शुद्ध कर सकेगा या शुद्ध करवा सकेगा।
प्रत्येक ग्राम एवं नगरीय क्षेत्रों के लिए निम्नलिखित भू-अभिलेख तैयार किये जायेंगे,अर्थात् :-
(क) धारा 107 के अधीन ग्राम/नगरीय क्षेत्र का नक्शा, आबादी का नक्शा तथा भूमि का नक्शा;
(ख) धारा 108 के अधीन अधिकार अभिलेख;
(ग) बी-1, खसरा/नजूल संधारण खसरा या क्षेत्र पुस्तक ऐसे प्ररूप में, जैसा कि विहित किया जाये;
(घ) धारा 114 क के अधीन किसान किताब;
(ङ) धारा 233 के अधीन समस्त दखल रहितं भूमि के ब्यौरे;
(च) धारा 234 के अधीन निस्तार पत्रक;
(छ) धारा 242 के अधीन वाजिब उल अर्ज, यदि कोई हो;
(ज) सीमा एवं सीमा चिह्न संबंधी पंजी;
(झ) व्यपवर्तित की गई भूमि के ब्यौरे;
(ञ) अतिक्रमण पंजी;
(ट) कोई अन्य अभिलेख, जैसा कि विहित किया जाये।
(1) ऐसे प्रत्येक भूमिस्वामी जिसका नाम धारा 114 के अधीन तैयार किए गए खसरे या क्षेत्र पुस्तक में प्रविष्ट है के लिए यह बाध्यकार होगा कि वह किसी ग्राम में के अपने समस्त खातों के बारे में एक किसान किताब रखे जो ऐसी फीस के जैसी कि विहित की जाए, चुकाए जाने पर उसे दी जाएगी।
(2) किसान किताब के दो भाग होंगे, अर्थात् भाग-1 जिसमें खाते पर के अधिकारों तथा खाते पर के विल्लंगमों ( एन्कम्ब्रेन्सेज) का उल्लेख रहेगा तथा भाग -2 जिसमें खाते पर के अधिकार खाते की बाबत भू-राजस्व की वसूली तथा खाते पर के विल्लंगमों का उल्लेख रहेगा और उसमें किसान किताब में निम्नलिखित बातें अन्तर्विष्ट होंगी -
(एक) खसरा या क्षेत्र पुस्तक की उन प्रविष्टियों में से, जो कि किसी भूमिस्वामी के किसी 'खाते से संबंधित हों, ऐसी प्रविष्टियां जो कि विहित की जाएं:
(दो) ऐसे खाते की बाबत भू-राजस्व, सरकारी उधार तथा गैर सरकारी उधार की वसूली के बारे में विशिष्टियां; और
(तीन) ऐसी अन्य विशिष्टियाँ जो विहित की जाएं।
(3) खसरा या क्षेत्र पुस्तक तथा किसान किताब में अन्तर्विष्ट प्रविष्टियों में कोई अन्तर होने की दशा में तहसीलदार, स्वप्रेरणा से या उस संबंध में उसको आवेदन किया जाने पर तथा ऐसी जांच जैसी कि वह उचित समझे, करने के पश्चात् उस अन्तर के संबंध में विनिश्चय कर सकेगा तथा तहसीलदार का विनिश्चय अन्तिम होगा।
(1) उपखण्ड अधिकारी, स्वप्रेरणा से या व्यथित व्यक्ति के आवेदन पर, किसान- किताब तथा अधिकार अभिलेख को छोड़कर, धारा 114 के अधीन तैयार किये गये भू-अभिलेखों में, अप्राधिकृत प्रविष्टियों को सम्मिलित करते हुए गलत या अशुद्ध प्रविष्टि को ऐसी जांच, जैसा
कि वह उचित समझे, करने के पश्चात्, शुद्ध कर सकेगा और ऐसी शुद्धियां, उसके द्वारा अभिप्रमाणित की जायेंगी:
परन्तु यह कि कलेक्टर की लिखित मंजूरी के बिना, पांच वर्ष की कालावधि के पूर्व की किसी प्रविष्टि को शुद्ध करने की कार्रवाई प्रारंभ नहीं की जायेगी।
(2) उपधारा (1) के अधीन कोई आदेश, -
(क) संबंधित तहसीलदार से लिखित रिपोर्ट प्राप्त किये;
(ख) सभी हितबद्ध पक्षकारों को सुनवाई का अवसर दिये; बिना पारित नहीं किया जायेगा :
परन्तु यदि सरकार का हित निहित है, तो उपखण्ड अधिकारी, मामले को कलेक्टर को प्रस्तुत करेगा।
(3) उपधारा (2) के अधीन मामले के प्राप्त होने पर, कलेक्टर, ऐसी जांच करेगा और ऐसा आदेश पारित करेगा, जैसा कि वह उचित समझे।
116. 1[***]
(1. छत्तीसगढ़ अधिनियम क्रमांक 6 सन् 2022 द्वारा दिनांक 4-5-2022 से विलुप्त)
भू-अभिलेखों में इस अध्याय के अधीन की गई समस्त प्रविष्टियों के बारे में यह उपधारणा की जाएगी कि वे सही हैं जब तक कि तत्प्रतिकूल साबित न कर दिया जाए।
(1) कोई ऐसा व्यक्ति जिसके अधिकारों, हित या दायित्वों का इस अध्याय के अधीन के किसी अभिलेख या रजिस्टर में प्रविष्ट किया जाना अपेक्षित हो या जो उसमें प्रविष्ट किए जा चुके हों, किसी ऐसे राजस्व अधिकारी, राजस्व निरीक्षक या पटवारी की, जो अभिलेख या रजिस्टर का संकलन करने या उसका पुनरीक्षण करने में लगा हो, लिखित अध्यपेक्षा पर इस बात के लिए आबद्ध होगा कि वह उस अभिलेख या रजिस्टर के सही संकलन या पुनरीक्षण के लिए आवश्यक समस्त ऐसी जानकारी में या उसके कब्जे या अधिकार में हों, ऐसी अध्यपेक्षा की जाने की तारीख से एक मास के भीतर उसके निरीक्षण के लिए दें या पेश करे।
(2) वह राजस्व अधिकारी, राजस्व निरीक्षक या पटवारी जिसको उपधारा (1) के अधीन कोई जानकारी दी गई हो या जिसके समक्ष उक्त उपधारा के अधीन कोई दस्तावेज पेश की गई हो, उस व्यक्ति को, जिसने ऐसी जानकारी दी हो या ऐसी दस्तावेज पेश की गई हो, उसकी लिखित अभिस्वीकृति तुरन्त देगा और किसी ऐसी दस्तावेज पर उसके पेश किए जाने की तारीख संबंधी तथ्य का उल्लेख करते हुए, एक टीप अपने हस्ताक्षर से पृष्ठांकित करेगा।
(1) कोई भी व्यक्ति, जो विनिर्दिष्ट की गई कालावधि के भीतर धारा 109 द्वारा अपेक्षित की गई रिपोर्ट करने में या धारा 118 द्वारा अपेक्षित की गई जानकारी देने में या दस्तावेज पेश करने में उपेक्षा करेगा, वह तहसीलदार के विवेकाधिकार पर एक हजार रुपए से अनधिक की शास्ति का दायी होगा जो भू-राजस्व की बकाया के तौर पर वसूली योग्य होगी।
(1-क) धारा 112, के अधीन अपेक्षित किये गये अनुसार, यदि रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी धारा 110 के अधीन बनाये गये नियमों के अधीन विहित सूचना एक माह के भीतर नहीं देता है, तो तहसीलदार पांच हजार रुपये से अनधिक अर्थदण्ड अधिरोपित कर सकेगा, जो भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूली योग्य होगा।
(2) धारा 109 के अधीन किसी अधिकार के अर्जन संबंधी किसी ऐसी रिपोर्ट के बारे में, जो विनिर्दिष्ट की गई कालावधि के पश्चात् पटवारी को प्राप्त हुई हो, धारा 110 के उपबन्धों के अनुसार कार्यवाही की जाएगी।
इस संहिता के अधीन बनाए गए नियमों के अध्यधीन रहते हुए कोई भी राजस्व अधिकारी, राजस्व निरीक्षक, मापक या पटवारी कोई नक्शा या रेखांक जो इस अध्याय के अधीन किसी अभिलेख या रजिस्टर के लिए या उसके संबंध में अपेक्षित हो, तैयार करने या पुनरीक्षित करने के प्रयोजन के लिए भूमि के किसी धारक तथा आबादी में स्थित भू-खण्ड के किसी धारक से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह अपनी भूमि या भू-खण्ड की सीमायें बतलाए।
राज्य सरकार इस संहिता के प्रयोजनों के लिए अपेक्षित भू-अभिलेखों के तैयार किए जाने, रखे जाने तथा पुनरीक्षित किए जाने का विनियमन करने के लिए नियम बना सकेगी।
राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि यह अध्याय या इस अध्याय का कोई उपबन्ध किसी विनिर्दिष्ट स्थानीय क्षेत्र को या किन्हीं भूमियों को या ग्रामों या भूमियों के किसी वर्ग को लागू नहीं होगा।
(1) जब तक मध्यभारत, भोपाल, विन्ध्यप्रदेश तथा सिरोंज क्षेत्रों के ग्रामों के लिए धारा 108 के उपबन्धों के अनुसार अधिकार अभिलेख तैयार न हो जाएं, तब तक प्रत्येक ऐसे ग्राम की, उस कृषि वर्ष से, जो कि राज्य सरकार अधिसूचित करे, सम्बन्धित जमाबन्दी या खतौनी को, जहां तक कि उसमें धारा 108 में विनिर्दिष्ट की गई विशिष्टियां अन्तर्विष्ट हों, उस ग्राम के लिए अधिकार अभिलेख समझा जाएगा।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट की गई जमाबन्दी या खतौनी ग्राम में ऐसी रीति में प्रकाशित की जाएगी जैसी कि कलेक्टर द्वारा निर्दिष्ट की जाए।
(3) जमाबन्दी या खतौनी में किसी भी प्रविष्टि के संबंध में आपत्तियां फाइल की जा सकेंगी जो तहसीलदार द्वारा ऐसी रीति में निपटाई जाएंगी जो कि विहित की जाएं।
(4) महाकौशल क्षेत्र के ग्रामों की, कृषि वर्ष 1954-55 की जमाबन्दी को तब तक ऐसे ग्रामों का अधिकार अभिलेख समझा जाता रहेगा जब तक कि धारा 108 के उपबन्धों के अनुसार अधिकार अभिलेख तैयार न हो जाएं।