भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 MCQs Set-8

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

 

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1. धारा 427 किस विषय से सम्बंधित है?

a. संक्षेपत: खारिज न की गई अपीलों की सुनवाई के लिए प्रक्रिया

b. सेशन न्यायालय की गई अपीलें कैसे सुनी जाएंगी

c. अपील न्यायालय की शक्तियां

d. अधीनस्थ अपील न्यायालय के निर्णय

 

2. अपील न्यायालय क्या कर सकता है यदि उसे लगता है कि अपील में हस्तक्षेप करने का पर्याप्त आधार नहीं है?

a. अपील को संक्षेपत: खारिज कर सकता है

b. अपील को स्वीकार कर दोषी ठहरा सकता है

c. अभियुक्त को दोषमुक्त कर सकता है

d. अतिरिक्त जांच का आदेश दे सकता है

 

3. दोषमुक्ति के आदेश से अपील में अपील न्यायालय क्या कर सकता है?

a. केवल आदेश को कायम रख सकता है

b. आदेश को उलट सकता है, अतिरिक्त जांच का आदेश दे सकता है, पुनर्विचार करवा सकता है या अभियुक्त को दोषी ठहरा सकता है

c. केवल दोषी ठहरा सकता है

d. अपील को खारिज कर सकता है

 

4. दोषसिद्धि से अपील में अपील न्यायालय कौन-कौन से निर्णय ले सकता है?

a. निष्कर्ष और दंडादेश को उलट सकता है या कायम रख सकता है

b. दंड के स्वरूप या परिमाण में परिवर्तन कर सकता है, पर दंड बढ़ा नहीं सकता

c. उपरोक्त दोनों

d. कोई भी नहीं

 

5. दंडादेश की वृद्धि के लिए अपील में अपील न्यायालय की क्या शक्तियां हैं?

a. दोषसिद्धि को उलट सकता है या अभियुक्त को दोषमुक्त कर सकता है

b. दंडादेश को कायम रखते हुए निष्कर्ष में परिवर्तन कर सकता है

c. दंड के स्वरूप या परिमाण में परिवर्तन कर सकता है जिससे वृद्धि या कमी हो, परन्तु अधिकतम दंड उस अपराध के लिए अधिक नहीं होगा

d. उपरोक्त सभी

 

6. अपील न्यायालय दंड में वृद्धि तब तक नहीं करेगा जब तक कि—

a. अभियुक्त को दंड की पूरी जानकारी न दी जाए

b. अभियुक्त को उस वृद्धि के विरुद्ध कारण दर्शाने का अवसर न मिल जाए

c. अभियुक्त दोषी ठहराया जाए

d. अभियुक्त से कोई सुनवाई न हो

 

7. अपील में उच्च न्यायालय के आदेश का प्रमाणित करके निचले न्यायालय को भेजा जाना किस से सम्बंधित है?

a. धारा 429

b. धारा 426

c. धारा 425

d. धारा 424

 

8. जब उच्च न्यायालय किसी अपील में निर्णय या आदेश देता है, तो वह उसे किसे प्रमाणित करके भेजेगा?

a. सीधे अभियुक्त को

b. उस न्यायालय को जिसके द्वारा वह निर्णय, दंडादेश या आदेश पारित किया गया था

c. मुख्य न्यायालय को

d. राज्य सरकार को

 

9. यदि निर्णय पारित करने वाला न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से भिन्न न्यायिक मजिस्ट्रेट का हो, तो उच्च न्यायालय का निर्णय या आदेश किसके माध्यम से भेजा जाएगा?

a. सीधे अभियुक्त को

b. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की मार्फत

c. जिला मजिस्ट्रेट की मार्फत

d. लोक अभियोजक की मार्फत

 

10. यदि निर्णय पारित करने वाला न्यायालय कार्यपालक मजिस्ट्रेट का हो, तो उच्च न्यायालय का निर्णय या आदेश किसके माध्यम से भेजा जाएगा?

a. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की मार्फत

b. जिला मजिस्ट्रेट की मार्फत

c. लोक अभियोजक की मार्फत

d. सीधे उस न्यायालय को

 

11. अपील न्यायालय अतिरिक्त साक्ष्य ले सकेगा या उसके लिए जाने का निदेश दे सकेगा किससे सम्बंधित है?

a. धारा 431

b. धारा 432

c. धारा 437

d. धारा 438

 

12. यदि अपील न्यायालय को लगता है कि अतिरिक्त साक्ष्य आवश्यक है तो वह क्या कर सकता है?

a. केवल अतिरिक्त साक्ष्य को अस्वीकार कर सकता है

b. अतिरिक्त साक्ष्य स्वयं ले सकता है या मजिस्ट्रेट/सेशन न्यायालय से लेने का आदेश दे सकता है

c. अतिरिक्त साक्ष्य को विचार में नहीं ले सकता

d. अतिरिक्त साक्ष्य लेने के लिए अभियुक्त की अनुमति लेनी होगी

 

13. जब अतिरिक्त साक्ष्य मजिस्ट्रेट या सेशन न्यायालय द्वारा लिया जाता है तो क्या होगा?

a. उसे सीधे अभियुक्त को भेज दिया जाएगा

b. मजिस्ट्रेट उसे प्रमाणित करके अपील न्यायालय को भेजेगा

c. अतिरिक्त साक्ष्य को नकार दिया जाएगा

d. उसे पुनः सुनवाई के लिए वापिस नहीं भेजा जाएगा

 

14. जहां अपील न्यायालय के न्यायाधीश राय के बारे में समान रूप में विभाजित हों, वहां प्रक्रिया किस से सम्बंधित है?

a. धारा 431

b. धारा432

c. धारा 433

d. धारा 438

 

15. धारा 434 के अनुसार, अपील न्यायालय द्वारा पारित निर्णय या आदेश सामान्यतः क्या माने जाएंगे?

a. अंतरिम

b. संशोधन योग्य

c. अस्थायी

d. अंतिम

 

16. धारा 434 के अंतर्गत, दोषसिद्धि की अपील का अंतिम निपटारा होने के बावजूद, कौन-सी अपीलें अपील न्यायालय द्वारा सुनी जा सकती हैं?

a. सिविल अपीलें

b. दंडादेश में वृद्धि की अपील

c. जमानत याचिकाएं

d. साक्ष्य की पुन: जांच की याचिकाएं

 

17. अपीलों का उपशमन किस से सम्बंधित है ?

a. धारा 435

b. धारा 436

c. धारा 437

d. धारा 438

 

18. धारा 435 के अनुसार, धारा 418 या 419 के अधीन अपील कब अंतिम रूप से उपशमित (abated) हो जाती है?

a. अपीलार्थी की गिरफ़्तारी पर

b. अभियुक्त की मृत्यु पर

c. निर्णय पारित होने पर

d. अपील खारिज होने पर

 

19. क्या जुर्माने के दंडादेश की अपील, अपीलार्थी की मृत्यु के कारण उपशमित होती है?

a. हाँ

b. नहीं

c. केवल उच्च न्यायालय की अनुमति से

d. यदि अभियुक्त जेल में हो

 

20. यदि दोषसिद्धि और कारावास के दंडादेश के विरुद्ध अपील लंबित हो और अपीलार्थी की मृत्यु हो जाए, तो कौन उसकी अपील जारी रखने के लिए आवेदन कर सकता है?

a. कोई भी मित्र

b. सरकारी अधिवक्ता

c. निकट नातेदार

d. मजिस्ट्रेट

 

21. अपीलार्थी की मृत्यु के कितने दिनों के भीतर उसका निकट नातेदार अपील जारी रखने की अनुमति के लिए आवेदन कर सकता है?

a. 60 दिन

b. 30 दिन

c. 90 दिन

d. 15 दिन

 

22. धारा 435 के अनुसार, निम्न में से कौन "निकट नातेदार" की श्रेणी में आता है?

a. पड़ोसी

b. सरकारी कर्मचारी

c. पारंपरिक वंशज

d. न्यायालय के लिपिक

 

23. यदि निकट नातेदार को अपील जारी रखने की अनुमति दे दी जाती है, तो क्या अपील उपशमित मानी जाएगी?

a. हाँ

b. नहीं

c. केवल उच्चतम न्यायालय के आदेश से

d. यदि अभियुक्त पुनः जीवित हो

 

24. उच्च न्यायालय को निर्देश किससे सम्बंधित है ?

a. धारा 435

b. धारा 432

c. धारा 436

d. धारा 438

 

25. पुनरीक्षण की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए अभिलेख मंगाना किससे सम्बंधित है ?

a. धारा 432

b. धारा 435

c. धारा 436

d. धारा 438

 

26. धारा 438 के अंतर्गत, उच्च न्यायालय या सेशन न्यायाधीश किस उद्देश्य से अवर न्यायालय के अभिलेख मंगा सकता है?

a. अभियुक्त की आय की जानकारी के लिए

b. न्यायालय की स्थिति देखने के लिए

c. निष्कर्ष, दंडादेश, आदेश की शुद्धता, वैधता या औचित्य की परीक्षा हेतु

d. गवाहों की संख्या बढ़ाने के लिए

 

27. जब उच्च न्यायालय अभिलेख मंगाता है, तो वह क्या आदेश दे सकता है?

a. अभियुक्त को निलंबित कर दे

b. दंडादेश के निष्पादन को स्थगित कर दे

c. अभियोजन को समाप्त कर दे

d. अभियुक्त को विदेश भेज दे

 

28. यदि अभियुक्त परिरोध में है, तो अभिलेख मंगाने के समय न्यायालय क्या कर सकता है?

a. उसे मृत्यु दंड दे सकता है

b. उसे जमानत देने से मना कर सकता है

c. उसे उसके बंधपत्र या जमानतपत्र पर छोड़ सकता है

d. उसे पुलिस हिरासत में वापस भेज सकता है

 

29. धारा 439 के अनुसार, उच्च न्यायालय या सेशन न्यायाधीश किसे अतिरिक्त जांच करने का निर्देश दे सकता है?

a. जिला मजिस्ट्रेट

b. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट

c. पुलिस अधीक्षक

d. कोई भी व्यक्ति

 

30. धारा 439 के अंतर्गत, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अतिरिक्त जांच किसके माध्यम से करवा सकता है?

a. केवल स्वयं

b. अपने वरिष्ठ मजिस्ट्रेट के द्वारा

c. अपने किसी अधीनस्थ मजिस्ट्रेट के द्वारा

d. किसी पुलिस अधिकारी द्वारा

 

31. सेशन न्यायाधीश की पुनरीक्षण की शक्तियां किससे सम्बंधित है?

a. धारा 440

b. धारा 442

c. धारा 446

d. धारा 448

 

32. धारा 440 के अंतर्गत, यदि किसी कार्यवाही का अभिलेख सेशन न्यायाधीश ने स्वयं मंगवाया है, तो वह किन शक्तियों का प्रयोग कर सकता है?

a. केवल पुनरीक्षण की सीमित शक्तियाँ

b. केवल पुलिस जांच के आदेश

c. धारा 442(1) के अधीन उच्च न्यायालय की सभी शक्तियाँ

d. जमानत रद्द करने की शक्ति

 

33. धारा 440(2) के अनुसार, उपधाराओं में जहाँ "उच्च न्यायालय" लिखा हो, उसका क्या अर्थ माना जाएगा?

a. उच्चतम न्यायालय

b. राज्य सरकार

c. सेशन न्यायाधीश

d. पुलिस अधिकारी

 

34. यदि किसी व्यक्ति द्वारा पुनरीक्षण के लिए आवेदन सेशन न्यायाधीश को दिया गया है, तो उस व्यक्ति के लिए क्या होगा?

a. वह उच्च न्यायालय में पुनः आवेदन कर सकता है

b. उसका केस सर्वोच्च न्यायालय में चला जाएगा

c. सेशन न्यायाधीश का निर्णय अंतिम माना जाएगा

d. उसे पुनरीक्षण का कोई अधिकार नहीं है

 

35. धारा 440 के अंतर्गत पुनरीक्षण की कार्यवाही किसकी प्रेरणा पर उच्च न्यायालय द्वारा नहीं ली जा सकती?

a. लोक अभियोजक की

b. पुलिस निरीक्षक की

c. उस व्यक्ति की जिसने पहले सेशन न्यायाधीश के समक्ष आवेदन किया हो

d. जिला मजिस्ट्रेट की

 

36. अपर सेशन न्यायाधीश की शक्ति किससे सम्बंधित है?

a. धारा 442

b. धारा 441

c. धारा 440

d. धारा 439

 

37. धारा 441 के अंतर्गत, अपर सेशन न्यायाधीश को कौन-सी शक्तियाँ प्राप्त होती हैं?

a. केवल अपील की सुनवाई की शक्ति

b. मजिस्ट्रेट के आदेशों को संशोधित करने की शक्ति

c. सेशन न्यायाधीश की सभी शक्तियाँ (यदि मामला सौंपा गया हो)

d. केवल पुनरीक्षण की शक्ति

 

38. अपर सेशन न्यायाधीश को सेशन न्यायाधीश की शक्तियाँ तब प्राप्त होती हैं जब:

a. वह स्वेच्छा से किसी मामले की सुनवाई शुरू करता है

b. कोई मजिस्ट्रेट उसे निर्देश देता है

c. मामला सेशन न्यायाधीश द्वारा साधारण या विशेष आदेश से उसे सौंपा गया हो

d. राज्य सरकार उसे अधिकृत करे

 

39. धारा 441 के अनुसार, अपर सेशन न्यायाधीश को जो शक्तियाँ प्राप्त होती हैं, वे किस अध्याय के अधीन होती हैं?

a. अध्याय 25

b. अध्याय 29

c. अध्याय 31

d. अध्याय 33

 

40. धारा 441 का मुख्य उद्देश्य किससे संबंधित है?

a. जमानत देने की प्रक्रिया

b. पुनरीक्षण की शक्तियाँ

c. अपीली शक्तियों का हस्तांतरण

d. दंडादेश को निलंबित करना

 

41. क्या अपर सेशन न्यायाधीश को स्वतः सभी सेशन न्यायाधीश की शक्तियाँ प्राप्त होती हैं?

a. हाँ, सभी मामलों में

b. नहीं, जब तक सेशन न्यायाधीश से मामला सौंपा न गया हो

c. केवल आपराधिक मामलों में

d. केवल उच्च न्यायालय की अनुमति से

 

42. उच्च न्यायालय को पुनरीक्षण की शक्ति किस स्थिति में प्राप्त होती है?

a. जब अभियुक्त अपील करता है

b. जब उच्च न्यायालय स्वयं किसी कार्यवाही का अभिलेख मंगवाता है या उसे जानकारी होती है

c. जब निचली अदालत अनुरोध करती है

d. जब पुलिस पुनरीक्षण की मांग करती है

 

43. उच्च न्यायालय पुनरीक्षण के अंतर्गत किन धाराओं के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कर सकता है?

a. केवल धारा 427 और 430

b. केवल धारा 344

c. धारा 427, 430, 431, 432 और 344

d. धारा 433 और 434

 

44. यदि पुनरीक्षण न्यायालय में न्यायाधीशों की राय समान रूप से विभाजित हो जाती है, तो मामले का निपटारा कैसे किया जाएगा?

a. पुनः सुनवाई की जाएगी

b. उच्चतम न्यायालय भेजा जाएगा

c. धारा 433 के अनुसार

d. अभियुक्त को दोषमुक्त किया जाएगा

 

45. किस स्थिति में उच्च न्यायालय पुनरीक्षण के अंतर्गत अभियुक्त या अन्य व्यक्ति के विरुद्ध आदेश पारित नहीं कर सकता?

a. जब अभियुक्त उपस्थित न हो

b. जब अभियुक्त को अपनी प्रतिरक्षा में सुने जाने का अवसर नहीं मिला हो

c. जब निचली अदालत सहमत न हो

d. जब अभियोजन पक्ष अनुपस्थित हो

 

46. आपराधिक मामलों का अन्तरण किस से सम्बंधित है?

a. अध्याय 30

b. अध्याय 33

c. अध्याय 32

d. अध्याय 35

 

47. मामलों और अपीलों को अन्तरित करने की उच्चतम न्यायालय की  शक्ति किससे सम्बंधित है?

a. धारा 446

b. धारा 447

c. धारा 448

d. धारा 449

 

48. मामलों और अपीलों को अन्तरित करने की उच्च न्यायालय की  शक्ति किससे सम्बंधित है?

a. धारा 446

b. धारा 447

c. धारा 448

d. धारा 449

 

49. धारा 447(1) के अनुसार उच्च न्यायालय किन परिस्थितियों में मामला या अपील ‘अन्तरित’ कर सकता है?

a. जब आरोपी कोर्ट में उपस्थित न हो

b. जब असाधारणतः कठिन विधिप्रश्न की संभाव्यता हो

c. जब पुलिस रिपोर्ट लंबित हो

d. जब गवाह कम हों

 

50. धारा 447(1)(क) के अनुसार अंतरण का आधार कौन-सा है?

a. जमानत याचिका लंबित हो

b. अधीनस्थ दंड न्यायालय में ऋजु (निष्पक्ष) और पक्षपातरहित विचारण न हो सकना

c. आरोप गंभीर हो

d. न्यायालय बदलने का आरोपी का निजी अनुरोध

 

51. धारा 447(1)(ii) किससे संबंधित है?

a. मामला मजिस्ट्रेट से सुप्रीम कोर्ट को भेजना

b. समान वरिष्ठ अधिकारिता वाले एक दंड न्यायालय से दूसरे दंड न्यायालय को अंतरण

c. निचली अदालत के न्यायाधीश को बदलना

d. अभियोजन अधिकारी को बदलना

 

52. धारा 447(5) के अनुसार, लोक अभियोजक को सूचना देने के बाद आवेदन पर आदेश कब पारित किया जा सकता है?

a. तुरंत

b. 12 घंटे बाद

c. कम से कम 24 घंटे बाद

d. केवल अगली सुनवाई पर

 

53. एक ही सत्र खंड के दो न्यायालयों के बीच मामले को अंतरित करने के लिए उच्च न्यायालय में आवेदन तभी किया जा सकता है जब:

a. आवेदन सबसे पहले लोकसभा में किया जाए

b. सरकार की अनुमति हो

c. पहले सत्र न्यायाधीश को आवेदन किया गया हो और वह नामंजूर कर दे

d. पुलिस रिपोर्ट पेश की गई हो

 

54. यदि अभियुक्त आवेदन करता है, तो उसे लोक अभियोजक को क्या देना होता है?

a. रिश्वत

b. आवेदन की मौखिक सूचना

c. आवेदन की लिखित सूचना और आधारों की प्रतिलिपि

d. कोर्ट फीस

 

55. मामलों और अपीलों को अन्तरित करने की सेशन न्यायालय की  शक्ति किससे सम्बंधित है?

a. धारा 446

b. धारा 447

c. धारा 448

d. धारा 449

 

56. सेशन न्यायाधीश किस परिस्थिति में किसी दंड न्यायालय से दूसरे दंड न्यायालय को मामला अंतरित कर सकता है?

a. जब पुलिस अनुरोध करे

b. जब वकील आवेदन करे

c. जब न्याय के उद्देश्यों के लिए समीचीन प्रतीत हो

d. जब राज्यपाल की अनुमति हो

 

57. धारा 448 के तहत सेशन न्यायाधीश को आवेदन के संबंध में कौन-सी धारा के उपबंध वैसे ही लागू होते हैं जैसे उच्च न्यायालय के मामले में होते हैं?

a. धारा 439

b. धारा 445

c. धारा 447

d. धारा 449

 

58. धारा 447 की उपधारा (7) में उल्लिखित "राशि" शब्द को धारा 448 में किस प्रकार परिवर्तित किया गया है?

a. "पचास हजार रुपए"

b. "दस हजार रुपए से अनधिक की राशि"

c. "अनिश्चित राशि"

d. "पाँच सौ रुपए"

 

59. सेशन न्यायाधीश किससे कोई मामला या अपील वापस ले सकता है?

a. अपर सत्र न्यायाधीश

b. पुलिस अधीक्षक

c. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट

d. राज्यपाल

 

60. क्या सेशन न्यायाधीश उस मामले को वापस मंगा सकता है जिसे उसने स्वयं किसी अन्य न्यायालय को सौंपा हो?

a. नहीं, एक बार सौंपा गया मामला वापस नहीं लिया जा सकता

b. हाँ, जब मामला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को सौंपा गया हो

c. हाँ, जब मामला अपर सेशन न्यायाधीश को सौंपा गया हो

d. केवल उच्च न्यायालय की अनुमति से

 

61. सेशन न्यायाधीश अपर सेशन न्यायाधीश से कोई मामला या अपील कब वापस मंगा सकता है?

a. कभी नहीं

b. विचारण प्रारंभ होने के बाद

c. विचारण या सुनवाई प्रारंभ होने से पूर्व

d. निर्णय के बाद

 

62. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट किससे मामला वापस ले सकता है?

a. जिला न्यायाधीश से

b. सत्र न्यायाधीश से

c. अपने अधीनस्थ किसी मजिस्ट्रेट से

d. पुलिस अधिकारी से

 

63. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा वापस लिया गया मामला किसे सौंपा जा सकता है?

a. केवल पुलिस को

b. किसी सक्षम मजिस्ट्रेट को

c. जिला कलेक्टर को

d. किसी मंत्री को

 

64. क्या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट उस मामले की जांच या विचारण स्वयं कर सकता है जिसे उसने पहले किसी अधीनस्थ मजिस्ट्रेट को सौंपा था?

a. नहीं

b. हाँ

c. केवल उच्च न्यायालय की अनुमति से

d. केवल अभियुक्त की सहमति से

 

65. धारा 450(2) के अनुसार, कोई न्यायिक मजिस्ट्रेट उस मामले को वापस मंगा सकता है जिसे उसने धारा 212(2) के अंतर्गत सौंपा है। वह इसके बाद क्या कर सकता है?

a. केवल उसे खारिज कर सकता है

b. स्वयं जांच या विचारण कर सकता है

c. उच्च न्यायालय को भेज सकता है

d. आरोपी को रिहा कर सकता है

 

66. कार्यपालक मजिस्ट्रेटों द्वारा मामलों का हवाले किया जाना या वापस लिया जाना किससे सम्बंधित है?

a. धारा 446

b. धारा 447

c. धारा 448

d. धारा 451

 

67. धारा 451 के अनुसार, निम्न में से कौन किसी कार्यवाही को अपने अधीनस्थ मजिस्ट्रेट को सौंप सकता है?

a. पुलिस अधीक्षक

b. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट

c. जिला मजिस्ट्रेट या उपखंड मजिस्ट्रेट

d. सत्र न्यायाधीश

 

68. क्या जिला मजिस्ट्रेट अपने अधीनस्थ मजिस्ट्रेट से कोई मामला वापस ले सकता है?

a. नहीं

b. हाँ

c. केवल उच्च न्यायालय की अनुमति से

d. केवल सत्र न्यायाधीश की सहमति से

 

69. कोई मामला वापस लेकर, जिला मजिस्ट्रेट क्या कर सकता है?

a. उसे बंद कर सकता है

b. स्वयं निपटा सकता है या किसी अन्य मजिस्ट्रेट को निर्देशित कर सकता है

c. आरोपी को बरी कर सकता है

d. केवल अगली तारीख दे सकता है

 

70. दंडादेशों का निष्पादन, निलंबन, परिहार और लघुकरण किन धाराओं में वर्णित है ?

a. धारा 453 – 478

b. धारा 452 – 479

c. धारा 451 – 476

d. धारा 453 - 479

 

71. धारा 453 का संबंध किससे है?

a. गिरफ्तारी प्रक्रिया से

b. अपील की सुनवाई से

c. धारा 409 के अधीन मृत्यु दंड की पुष्टि के आदेश के निष्पादन से

d. पुलिस द्वारा साक्ष्य संग्रह से

 

72. धारा 453 के अंतर्गत, जब उच्च न्यायालय मृत्यु दंडादेश की पुष्टि करता है, तो सेशन न्यायालय को क्या करना होता है?

a. आरोपी को रिहा करना

b. पुनः सुनवाई करना

c. वारंट जारी करना या आवश्यक कदम उठाना

d. मामला पुलिस को सौंपना

 

73. मृत्यु दंडादेश की पुष्टि किस न्यायालय द्वारा की जाती है?

a. जिला न्यायालय

b. मजिस्ट्रेट न्यायालय

c. उच्च न्यायालय

d. ग्राम पंचायत

 

74. सेशन न्यायालय को मृत्यु दंडादेश की पुष्टि का आदेश किस धारा के अंतर्गत उच्च न्यायालय से प्राप्त होता है?

a. धारा 401

b. धारा 407

c. धारा 409

d. धारा 411

 

75. धारा 454 का संबंध किससे है?

a. साक्ष्य संग्रह से

b. अपील की सुनवाई से

c. उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए मृत्यु दंडादेश के निष्पादन से

d. मजिस्ट्रेट द्वारा चालान दायर करने से

 

76. धारा 454 के अंतर्गत, मृत्यु दंडादेश किस न्यायालय द्वारा दिया जाता है?

a. जिला न्यायालय

b. सत्र न्यायालय

c. उच्च न्यायालय

d. सर्वोच्च न्यायालय

 

77. जब उच्च न्यायालय मृत्यु दंडादेश देता है, तब इसे लागू करने के लिए किसे आदेश भेजा जाता है?

a. पुलिस अधीक्षक को

b. राज्य सरकार को

c. संबंधित सत्र न्यायालय को

d. जेल अधीक्षक को

 

78. सेशन न्यायालय मृत्यु दंडादेश के निष्पादन के लिए क्या करता है?

a. समीक्षा याचिका दायर करता है

b. आरोपी को जमानत देता है

c. वारंट जारी करता है

d. न्यायिक आयोग गठित करता है

 

79. धारा 454 की प्रक्रिया कब लागू होती है?

a. जब कोई पुलिस केस लंबित हो

b. जब उच्च न्यायालय अपील या पुनरीक्षण में मृत्यु दंड देता है

c. जब मजिस्ट्रेट प्रथम दंड देता है

d. जब राष्ट्रपति क्षमा देता है

 

80. धारा 455 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

a. पुलिस को गिरफ्तारी का आदेश देना

b. उच्च न्यायालय को अपील सुनने का अधिकार देना

c. मृत्यु दंडादेश के निष्पादन को अपील लंबित रहने तक स्थगित करना

d. मजिस्ट्रेट को जमानत का आदेश देने का अधिकार देना

 

81. यदि किसी व्यक्ति को उच्च न्यायालय द्वारा मृत्यु दंड दिया गया है, और वह संविधान के अनुच्छेद 134(1)(a) या (b) के तहत अपील करता है, तो निष्पादन कब तक रोका जाएगा?

a. जब तक राष्ट्रपति अनुमति न दे

b. जब तक सरकार पुष्टि न करे

c. जब तक अपील की अनुमति की अवधि समाप्त नहीं हो जाती या अपील का निपटारा नहीं हो जाता

d. जब तक आरोपी आत्मसमर्पण न कर दे

 

82. यदि मृत्यु दंडादेश के विरुद्ध अनुच्छेद 132 या 134(1)(c) के तहत प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया गया है, तब उच्च न्यायालय क्या करेगा?

a. तुरंत दंडादेश निष्पादित करेगा

b. अपील स्वीकार करेगा

c. दंडादेश का निष्पादन तब तक रोकेगा जब तक आवेदन का निपटारा न हो जाए या प्रमाणपत्र मिलने के बाद अपील अवधि समाप्त न हो जाए

d. मामला सत्र न्यायालय को सौंप देगा

 

83. यदि दंडादिष्ट व्यक्ति अनुच्छेद 136 के तहत विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल करना चाहता है, तो उच्च न्यायालय क्या कर सकता है?

a. उसे जेल भेज सकता है

b. दंडादेश तुरंत लागू करेगा

c. मृत्यु दंड का निष्पादन एक निर्धारित अवधि तक के लिए मुल्तवी कर सकता है

d. राष्ट्रपति को सूचित करेगा

 

84. धारा 456 किस विषय से संबंधित है?

a. आरोपियों की जमानत से

b. गर्भवती महिला को मृत्यु दंड का लघुकरण करने से

c. अपील की प्रक्रिया से

d. साक्ष्य संग्रह से

 

85. जब किसी गर्भवती महिला को मृत्यु दंडादेश दिया जाता है, तो उच्च न्यायालय क्या कर सकता है?

a. उसे जमानत दे सकता है

b. दंडादेश को आजीवन कारावास में लघुकरण कर सकता है

c. दंडादेश को बरकरार रख सकता है

d. उसे अग्रिम जमानत दे सकता है

 

86. धारा 460 के अनुसार, जब बंदी को जेल में परिरुद्ध किया जाना है, तो वारण्ट किसे सौंपा जाएगा?

a. पुलिस अधीक्षक को

b. मजिस्ट्रेट को

c. जेलर को

d. अभियुक्त के वकील को

 

87. धारा 460 किस प्रक्रिया से संबंधित है?

a. जमानत देने की प्रक्रिया से

b. अपील की प्रक्रिया से

c. कारावास के निष्पादन के लिए वारण्ट सौंपने से

d. साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया से

 

88. धारा 464 किस स्थिति में लागू होती है?

a. जब केवल आजीवन कारावास दिया गया हो

b. जब केवल जुर्माना और उसके व्यतिक्रम पर कारावास का दंडादेश दिया गया हो

c. जब कोई अपराधी फरार हो

d. जब जुर्माना पहले ही अदा कर दिया गया हो

 

89. धारा 464 के अनुसार, न्यायालय जुर्माने की अदायगी के लिए अधिकतम कितने दिनों की मोहलत दे सकता है?

a. 15 दिन

b. 45 दिन

c. 30 दिन

d. 60 दिन

 

90. धारा 464 के अंतर्गत यदि न्यायालय किस्तों में जुर्माना अदा करने की अनुमति देता है, तो पहली किस्त कब तक देनी होगी?

a. आदेश के दिन ही

b. आदेश की तारीख से 30 दिन के भीतर

c. 60 दिन के भीतर

d. किसी भी समय

 

91. यदि जुर्माना या उसकी कोई किस्त तय तिथि तक अदा नहीं की जाती, तो न्यायालय क्या कर सकता है?

a. जुर्माना माफ कर सकता है

b. आरोपी को चेतावनी दे सकता है

c. कारावास का दंडादेश तुरंत निष्पादित करने का आदेश दे सकता है

d. जुर्माने की नई राशि तय कर सकता है

 

92. धारा 464 की उपधारा (2) किस प्रकार के मामलों पर भी लागू होती है?

a. केवल फौजदारी मामलों पर

b. केवल दीवानी मामलों पर

c. ऐसे मामलों में जहाँ कोई राशि देय हो और उसके न मिलने पर कारावास हो सकता हो

d. गिरफ्तारी से संबंधित मामलों पर

 

93. यदि अपराधी बंधपत्र या जमानतपत्र देने में असफल रहता है, तो न्यायालय क्या कर सकता है?

a. उसे छोड़ सकता है

b. जुर्माना आधा कर सकता है

c. तुरंत कारावास का दंडादेश पारित कर सकता है

d. उसे घर भेज सकता है

 

94. धारा 468 के अनुसार, दोषसिद्धि से पहले अभियुक्त द्वारा भोगी गई निरोध की अवधि को क्या किया जाएगा?

a. जुर्माने में जोड़ा जाएगा

b. अनदेखा किया जाएगा

c. कारावास की सजा में समायोजित (मुजरा) किया जाएगा

d. नए मुकदमे के लिए माना जाएगा

 

95. धारा 468 किस प्रकार के कारावास पर लागू होती है?

a. जुर्माने के लिए कारावास

b. केवल आजीवन कारावास

c. किसी अवधि का कारावास, जो जुर्माने के संदाय में व्यतिक्रम के लिए नहीं है

d. केवल महिलाओं के मामलों में

 

96. यदि अभियुक्त को दोषसिद्धि से पहले 3 महीने निरोध में रखा गया था और उसे 1 वर्ष का कारावास मिला, तो उसे और कितनी अवधि की सजा भुगतनी होगी?

a. 1 वर्ष

b. 9 महीने

c. 3 महीने

d. कोई सजा नहीं

 

97. धारा 475 में निर्दिष्ट मामलों में, निरोध की अवधि किस अवधि के विरुद्ध मुजरा की जाएगी?

a. 10 वर्ष

b. 7 वर्ष

c. 14 वर्ष

d. 1 वर्ष

 

98. जब दंडादेश पूर्णतया निष्पादित किया जा चुका हो, तो निष्पादन अधिकारी वारण्ट को किसके पास लौटाएगा?

a. पुलिस थाना

b. वह न्यायालय जिसने वारण्ट जारी किया था

c. अपीलकर्ता के पास

d. जिला प्रशासन

 

99. वारण्ट लौटाते समय अधिकारी को क्या करना आवश्यक है?

a. वारण्ट पर दंडादेश की प्रति संलग्न करना

b. स्व-हस्ताक्षर सहित पृष्ठांकन द्वारा निष्पादन की प्रक्रिया प्रमाणित करना

c. दंडादेश के विरुद्ध आपत्ति दर्ज करना

d. वारण्ट को नष्ट करना

 

100. मृत्यु दंडादेश मामलों में दया याचिका से सम्बंधित कौन सी नई धारा जोड़ी गयी है ?

a. धारा 472

b. धारा 475 

c. धारा 478 

d. धारा 473

 

101. धारा 472(1) के अनुसार मृत्यु दंडादेश से सिद्धदोष व्यक्ति दया याचिका कहाँ दाखिल कर सकता है?

a. केवल उच्च न्यायालय में

b. राष्ट्रपति (Art. 72) या राज्यपाल (Art. 161) के समक्ष

c. प्रधानमंत्री के पास

d. गृह मंत्री के पास

 

102. राष्ट्रपति या राज्यपाल के समक्ष दया याचिका कितने दिनों के भीतर दायर की जा सकती है?

a. जेल अधीक्षक द्वारा सूचना दिए जाने की तारीख से 60 दिन के भीतर

b. जेल अधीक्षक द्वारा सूचना दिए जाने की तारीख से 90 दिन के भीतर

c. जेल अधीक्षक द्वारा सूचना दिए जाने की तारीख से 30 दिन के भीतर

d. जेल अधीक्षक द्वारा सूचना दिए जाने की तारीख से 15 दिन के भीतर

 

103. धारा 472(2) के अनुसार दया याचिका पहले किसके पास दाखिल की जानी चाहिए?

a. राष्ट्रपति

b. राज्यपाल

c. सुप्रीम कोर्ट

d. जिला न्यायाधीश

 

104. राज्यपाल द्वारा याचिका निरस्त करने या निपटाने के बाद राष्ट्रपति के पास याचिका कितने दिनों में की जा सकती है?

a. 30 दिन

b. 60 दिन

c. 90 दिन

d. 15 दिन

 

105. यदि एक से अधिक सिद्धदोष व्यक्ति हों, तो जेल अधीक्षक को क्या सुनिश्चित करना होगा?

a. केवल एक व्यक्ति याचिका दे

b. सभी सिद्धदोष 60 दिनों में दया याचिका दाखिल करें

c. केवल सबसे बड़े उम्र वाले व्यक्ति को याचिका देनी चाहिए

d. दया याचिका केवल वकील द्वारा भेजी जाए

 

106. धारा 472(4) के अनुसार, केंद्रीय सरकार दया याचिका मिलने पर क्या करेगी?

a. सीधे राष्ट्रपति को भेज देगी

b. राज्य सरकार से टिप्पणियाँ माँगेगी और मामले पर विचार करेगी

c. केस समाप्त कर देगी

d. जेल अधीक्षक को वापस भेज देगी

 

107. धारा 472(5) के अनुसार, यदि एक से अधिक सिद्धदोष हों तो राष्ट्रपति क्या करेगा?

a. सभी की याचिकाएं अलग-अलग निर्णय करेगा

b. एक को माफ करेगा और बाकी को नहीं

c. सभी दया याचिकाओं का एक साथ निपटान करेगा

d. केवल मुख्य अभियुक्त की याचिका सुनेगा

 

108. राष्ट्रपति के आदेश की सूचना मिलने पर केंद्र सरकार कितने समय में राज्य गृह विभाग और जेल अधीक्षक को सूचित करेगी?

a. 24 घंटे में

b. 48 घंटे में

c. 7 दिन में

d. 10 दिन में

 

109. धारा 472(7) के तहत राष्ट्रपति/राज्यपाल के “विनिश्चय (decision-making process)” पर न्यायालय क्या कर सकता है?

a. जांच कर सकता है

b. अपील सुन सकता है

c. पुनर्विलोकन कर सकता है

d. कोई न्यायिक जांच नहीं कर सकता

 

110. धारा 473 किस विषय से संबंधित है?

a. दंडादेशों का निलम्बन या परिहार करने की शक्ति

b. दंडादेश लघुकरण करने की शक्ति

c. कुछ मामलों में छूट या लघुकरण की शक्तियों पर निर्बन्धन

d. मृत्यु दंडादेशों की दशा में केन्द्रीय सरकार की समवर्ती शक्ति

 

111. धारा 473(1) के अनुसार दंडादेश के निलंबन या परिहार की शक्ति किसके पास है?

a. जिला मजिस्ट्रेट

b. समुचित सरकार

c. हाई कोर्ट

d. जेल अधीक्षक

 

112. धारा 473(1) के तहत परिहार (remission) किस दंड पर लागू हो सकता है?

a. संपूर्ण दंड पर

b. दंड के किसी भाग पर

c. a और b दोनों

d. केवल जुर्माने पर

 

113. धारा 473(2) के अनुसार, समुचित सरकार किससे राय मांग सकती है?

a. गृह मंत्रालय

b. राष्ट्रपति

c. उस न्यायालय के पीठासीन न्यायाधीश से जिसने दोषसिद्धि की या पुष्टि की

d. पुलिस अधीक्षक

 

114. यदि दंडादेश शर्तों पर निलंबित किया गया हो और शर्त पूरी न हो, तो समुचित सरकार क्या कर सकती है?

a. शर्त बदल सकती है

b. निलम्बन/परिहार रद्द कर सकती है

c. दंड कम कर सकती है

d. उच्च न्यायालय से राय ले सकती है

 

115. धारा 473(4) के अनुसार निलम्बन या परिहार की शर्तें कैसी हो सकती हैं?

a. केवल वे शर्तें जिन्हें व्यक्ति पूरा कर सके

b. केवल वे शर्तें जो व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर हों

c. शर्तें जो उसकी इच्छा पर निर्भर हों या न हों

d. केवल प्रशासनिक शर्तें

 

116. धारा 473(5) के अनुसार 18 वर्ष से अधिक आयु वाले व्यक्ति के मामले में याचिका कब स्वीकार होगी?

a. जब व्यक्ति जेल में हो

b. जब याचिका वकील द्वारा दी जाए

c. जब व्यक्ति जमानत पर हो

d. जब निलम्बन की सलाह पुलिस दे

 

117. समुचित सरकार किसे बिना व्यक्ति की सहमति के दंडादेश लघुकरण कर सकती है?

a. केवल मौत के दंड के लिए

b. केवल जुर्माने के लिए

c. दंडादेश प्राप्त व्यक्ति की सहमति के बिना भी कर सकती है

d. केवल सात वर्ष से कम कारावास के लिए

 

118. मृत्यु दंडादेश को समुचित सरकार किस दंड में लघुकरण कर सकती है?

a. सात वर्ष के कारावास में

b. आजीवन कारावास में

c. तीन वर्ष के कारावास में

d. जुर्माने में

 

119. आजीवन कारावास के दंडादेश को समुचित सरकार किस अवधि के लिए कम कर सकती है?

a. तीन वर्ष से कम की अवधि के लिए

b. सात वर्ष से अधिक की अवधि के लिए

c. सात वर्ष से अन्यून की अवधि के कारावास के लिए

d. जुर्माने के लिए

 

120. सात वर्ष या उससे अधिक की कारावास की अवधि के दंडादेश को कम से कम कितने वर्ष के कारावास के लिए लघुकरण किया जा सकता है?

a. एक वर्ष से कम

b. दो वर्ष से कम

c. तीन वर्ष से कम नहीं

d. पांच वर्ष से कम

 

121. सात वर्ष से कम की कारावास की अवधि वाले दंडादेश को समुचित सरकार किस दंड में लघुकरण कर सकती है?

a. आजीवन कारावास में

b. मृत्यु दंड में

c. जुर्माने में

d. तीन वर्ष के कारावास में

 

122. कठोर कारावास के दंडादेश को समुचित सरकार किस प्रकार के कारावास में लघुकरण कर सकती है?

a. आजीवन कारावास में

b. साधारण कारावास में, जिसकी अवधि उस दंडादेश की अवधि के भीतर हो

c. जुर्माने में

d. तीन वर्ष के कारावास में

 

123. धारा 473 में दी गई शक्तियों के बावजूद, कौन से दंडादेश के मामले में व्यक्ति को कारावास से तब तक नहीं छोड़ा जाएगा जब तक उसने चौदह वर्ष का कारावास पूरा न कर लिया हो?

a. सात वर्ष के कारावास के दंडादेश में

b. आजीवन कारावास के दंडादेश में

c. जुर्माने के दंडादेश में

d. तीन वर्ष के कारावास के दंडादेश में

 

124. धारा 475 के अनुसार आजीवन कारावास कब दिया जाता है?

a. जब मृत्यु दंड विधि द्वारा उपबंधित दंडों में से एक है

b. जब जुर्माने का आदेश दिया जाता है

c. जब तीन वर्ष से कम की कैद होती है

d. जब दंडादेश लघुकरण किया जाता है

 

125. धारा 474 के तहत मृत्यु दंडादेश को आजीवन कारावास में लघुकरण किया गया व्यक्ति को कब छोड़ा जा सकता है?

a. तुरंत

b. दस वर्ष बाद

c. चौदह वर्ष का कारावास पूरा करने के बाद

d. किसी भी समय

 

126. मृत्यु दंडादेश के मामलों में धारा 473 और 474 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कौन कर सकता है?

a. केवल राज्य सरकार

b. केवल केन्द्रीय सरकार

c. राज्य सरकार और केन्द्रीय सरकार दोनों

d. केवल उच्च न्यायालय

 

127. धारा 476 के अनुसार केन्द्रीय सरकार को कौन सी शक्ति प्राप्त होती है?

a. केवल जुर्माने कम करने की

b. मृत्यु दंडादेश के मामलों में धारा 473 और 474 की शक्तियों का प्रयोग करने की

c. केवल निलम्बन करने की

d. केवल याचिका सुनने की

 

128. जमानत और बंधपत्रों के बारे में उपबंध किस अध्याय से सम्बंधित है?

a. अध्याय 35

b. अध्याय 36

c. अध्याय 37

d. अध्याय 38

 

129. जमानत और बंधपत्रों के बारे में उपबंध किन धाराओं के समूह से सम्बंधित है?

a. धारा 478 से 496

b. धारा 476 से 496

c. धारा 478 से 498

d. धारा 473 से 495

 

130. किसी जमानतीय अपराध में जमानत एक अधिकार के रूप में स्वीकृत की जाती है-

a. किसी पुलिस अधिकारी द्वारा

b. न्यायालय द्वारा

c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों द्वारा

d. उपरोक्त (a)अथवा (b) में से एक के द्वारा

 

131. 'जमानत' शब्द किसी अभियुक्त अथवा गिरफ्तार व्यक्ति की सशर्त रिहाई को इंगित करता है-

a. अन्वेषण के दौरान पुलिस द्वारा, किन्तु जाँच के दौरान मजिस्ट्रेट द्वारा नहीं

b. जाँच के दौरान मजिस्ट्रेट द्वारा, किन्तु विचारण के दौरान न्यायालय द्वारा नहीं

c. विचारण के दौरान न्यायालय द्वारा, किन्तु पुनर्विचार के - दौरान नहीं

d. पुलिस, मजिस्ट्रेट अथवा न्यायालय द्वारा अन्वेषण, जाँच अथवा विचारण के दौरान

 

132. धारा 478 के प्रयोजनार्थं एक गिरफ्तार व्यक्ति को-

a. एक निर्धन व्यक्ति माना गया है यदि वह अपनी गिरफ्तारी के तुरंत बाद जमानत देने में असमर्थ हो

b. एक निर्धन व्यक्ति माना गया है यदि वह अपनी गिरफ्तारी के एक सप्ताह में जमानत देने में असमर्थ हो

c. न्यायालय ऐसी कोई धारणा नहीं बनाएगा 

d. ऐसी धारणा बनाने का कोई प्रश्न ही नहीं है क्योंकि अपराध जमानतीय है तथा व्यक्ति को जमानत पर रिहा कर दिया जाएगा भले ही वह प्रतिभूति प्रस्तुत करने में असमर्थ हो

 

133. जब अजमानतीय अपराध के अभियुक्त से भिन्न कोई व्यक्ति पुलिस थाने के अधिकारी द्वारा वारण्ट के बिना गिरफ्तार किया जाता है और वह जमानत देने के लिए तैयार होता है, तो उसे क्या किया जाएगा?

a. उसे तुरंत जेल में भेजा जाएगा

b. उसे जमानत पर छोड़ दिया जाएगा

c. उसे बिना किसी शर्त के रिहा किया जाएगा

d. उसे फटकार लगाई जाएगी

 

134. यदि कोई व्यक्ति जमानत देने में असमर्थ है तो पुलिस अधिकारी या न्यायालय क्या कर सकता है?

a. उसे जेल भेज सकता है

b. उसे बिना किसी कार्रवाई के छोड़ सकता है

c. उसे प्रतिभुओं रहित बंधपत्र निष्पादित करने पर उन्मोचित कर सकता है

d. उसे जुर्माने के भुगतान के लिए कह सकता है

 

135. यदि कोई व्यक्ति न्यायालय द्वारा निर्धारित बंधपत्र या जमानतपत्र की शर्तों का पालन नहीं करता है, तो न्यायालय क्या कर सकता है?

a. उसे तुरंत रिहा कर सकता है

b. उसे जमानत पर छोड़ने से इंकार कर सकता है

c. उसे फटकार सकता है, लेकिन जमानत पर छोड़ना होगा

d. उसे जेल में डाल सकता है लेकिन जमानत पर छोड़ सकता है

 

136. यदि कोई व्यक्ति किसी अपराध के लिए निरोध में है, जो मृत्यु दंड या आजीवन कारावास के अंतर्गत नहीं आता, तो उसे अधिकतम कितनी अवधि तक निरुद्ध रखा जा सकता है?

a. उस विधि के तहत निर्दिष्ट अधिकतम कारावास की पूरी अवधि तक

b. उस विधि के तहत निर्दिष्ट अधिकतम कारावास की आधी अवधि तक

c. हमेशा 6 महीने तक

d. अधिकतम 1 वर्ष तक

 

137. यदि निरुद्ध व्यक्ति प्रथमबार का अपराधी हो और पहले दोषसिद्ध न हो, तो उसे न्यायालय कब बंधपत्र पर छोड़ सकता है?

a. जब उसने निर्दिष्ट अधिकतम कारावास की पूरी अवधि तक निरोध भोगा हो

b. जब उसने निर्दिष्ट अधिकतम कारावास की एक-तिहाई विस्तार की अवधि तक निरोध भोगा हो

c. जब पुलिस अनुमति दे

d. जब अभियुक्त की मर्जी हो

 

138. न्यायालय कब निरोध की आधी अवधि से अधिक के लिए निरोध जारी रख सकता है?

a. लोक अभियोजक की सुनवाई और लिखित कारणों के बाद

b. अभियुक्त की मांग पर

c. पुलिस अधिकारी की सलाह से

d. बिना किसी सुनवाई के

 

139. इस धारा के अनुसार, अभियुक्त के द्वारा कार्यवाही में किए गए विलंब की अवधि को जमानत मंजूर करने के लिए निरोध की अवधि में कैसे माना जाएगा?

a. उसे पूरी निरोध अवधि में शामिल किया जाएगा

b. उसे अपवर्जित (छोड़ दिया) जाएगा

c. उसे दोगुना माना जाएगा

d. उसे केवल आधा माना जाएगा

 

140. यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध एक से अधिक अपराध या मामले लंबित हों, तो न्यायालय उसे जमानत कब नहीं देगा?

a. जब तक सभी मामलों का निपटारा न हो

b. जब तक वह अपना बयान न दे

c. जब तक सभी जांच पूरी न हो

d. उपधारा (1) और उसके तीसरे परन्तुक के अधीन रहते हुए

 

141. जेल अधीक्षक किस स्थिति में न्यायालय को लिखित आवेदन करेगा?

a. जब अभियुक्त निरोध की आधी या एक-तिहाई अवधि पूरी कर लेता है

b. जब अभियुक्त दोषी ठहराया जाता है

c. जब अभियुक्त फरार हो जाता है

d. जब अभियुक्त निर्दोष साबित होता है

 

142. अजमानतीय अपराध की दशा में कब जमानत ली जा सकेगी किससे सम्बंधित है?

a. धारा 472

b. धारा 476

c. धारा 478

d. धारा 480

 

143. अजमानतीय अपराध के अभियुक्त व्यक्ति को कब जमानत पर छोड़ा जा सकता है?

a. जब उस पर मृत्यु दंड का दोष लगता है

b. जब उस पर आजीवन कारावास का दोष लगता है

c. जब उस पर ऐसी आशंका न हो कि वह मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध का दोषी हो

d. जब वह अपराधी साबित हो चुका हो

 

144. कौन से व्यक्ति को जमानत पर छोड़ा जा सकता है, भले ही वह खंड (i) या (ii) में वर्णित अपराधों के दायरे में आता हो?

a. बालक, महिला, रोगी या शिथिलांग व्यक्ति

b. कोई भी आरोपी

c. केवल पुरुष

d. पुलिस अधिकारी

 

145. न्यायालय जमानत क्यों इंकार कर सकता है, भले ही अभियुक्त जमानत पर छोड़े जाने के हकदार हो?

a. केवल पुलिस की इच्छा पर

b. जब अभियुक्त की आवश्यकता साक्षियों द्वारा पहचान के लिए हो या 15 दिनों से अधिक पुलिस अभिरक्षा के लिए हो

c. बिना कारण

d. अभियुक्त के अपराध साबित होने तक

 

146. किस स्थिति में लोक अभियोजक को सुनवाई का अवसर दिए बिना जमानत नहीं दी जा सकती?

a. जब अपराध मृत्यु, आजीवन कारावास या 7 वर्ष से अधिक के कारावास का हो

b. जब अपराध कोई गैर-संज्ञेय अपराध हो

c. जब अभियुक्त बालक हो

d. जब अभियुक्त महिला हो

 

147. यदि जमानत पर छोड़े गए अभियुक्त का विचारण 60 दिनों के भीतर पूरा नहीं होता और वह अभिरक्षा में है, तो न्यायालय क्या कर सकता है?

a. उसे उसी हालत में रख सकता है

b. मजिस्ट्रेट की समाधानप्रद जमानत पर छोड़ सकता है जब तक अन्यथा न कहा जाए

c. उसे मृत घोषित कर सकता है

d. उसे तुरन्त रिहा कर सकता है

 

148. विचारण के समाप्त होने से पूर्व और अपील के निपटान से पूर्व, न्यायालय अभियुक्त से क्या अपेक्षा कर सकता है?

a. अभियुक्त को जेल में रखना

b. अभियुक्त से उच्चतर न्यायालय के समक्ष उपसंजात होने के लिए बंधपत्र या जमानतपत्र निष्पादित करने की अपेक्षा करना

c. अभियुक्त को बिना किसी शर्त के रिहा करना

d. अभियुक्त पर नया मुकदमा चलाना

 

149. ऐसे बंधपत्र या जमानतपत्र कितने समय तक प्रभावी रहते हैं?

a. 3 माह

b. 6 माह

c. 1 साल

d. 9 माह

 

150. यदि अभियुक्त उपसंजात होने में असफल रहता है तो क्या होगा?

a. उसे पुनः जमानत मिल जाएगी

b. बंधपत्र समपहृत (forfeited) हो जाएगा और धारा 491 के अधीन प्रक्रिया लागू होगी

c. उसे तुरंत जेल भेज दिया जाएगा बिना किसी प्रक्रिया के

d. उसे मृत घोषित कर दिया जाएगा

 

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