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राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 (THE NATIONAL SECURITY ACT, 1980) |
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(1980 का अधिनियम संख्यांक 65) (ACT NO. 65 OF 1980) |
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इस अधिनियम का संक्षिप्त परिचय क्या है? |
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980। (The National Security Act, 1980) |
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राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 का अधिनियम संख्यांक क्या है? |
1980 का अधिनियम संख्यांक 65। (Act No. 65 Of 1980) |
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राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 को अधिनियमन की तिथि क्या है? |
27 दिसम्बर, 1980। |
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राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 का उद्देश्य क्या है? |
कुछ मामलों में निवारक निरोध का और उससे सम्बद्ध विषयों का उपबन्ध करना। |
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राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 किस वर्ष में संसद् द्वारा अधिनियमित किया गया? |
भारत गणराज्य के इकतीसवें वर्ष में। |
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धारा 1 का विषय क्या है? |
संक्षिप्त नाम और विस्तार। (Short title and extent) |
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धारा 1(1) के अधीन इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम क्या है? |
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980। |
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धारा 1(2) के अधीन राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 का विस्तार कहाँ तक है? |
सम्पूर्ण भारत पर। |
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धारा 1(2) से "जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय" शब्दों का लोप किस अधिनियम द्वारा किया गया? |
2019 के अधिनियम सं० 34 की धारा 95 और पांचवी अनुसूची द्वारा। |
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धारा 1(2) से "जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय" शब्दों का लोप कब से प्रभावी हुआ? |
31-10-2019 से। |
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धारा 2 का विषय क्या है? |
परिभाषाएं। (Definitions) |
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धारा 2(क) का विषय क्या है? |
"समुचित सरकार" (appropriate Government) |
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धारा 2(क) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा किए गए निरोध-आदेश के संबंध में "समुचित सरकार" से क्या अभिप्रेत है? |
केन्द्रीय सरकार। |
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धारा 2(क) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा किए गए निरोध-आदेश के अधीन निरुद्ध व्यक्ति के संबंध में "समुचित सरकार" से क्या अभिप्रेत है? |
केन्द्रीय सरकार। |
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धारा 2(क) के अधीन राज्य सरकार द्वारा किए गए निरोध-आदेश के संबंध में "समुचित सरकार" से क्या अभिप्रेत है? |
ऐसी राज्य सरकार। |
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धारा 2(क) के अधीन राज्य सरकार के अधीनस्थ अधिकारी द्वारा किए गए निरोध-आदेश के संबंध में "समुचित सरकार" से क्या अभिप्रेत है? |
ऐसी राज्य सरकार। |
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धारा 2(क) के अधीन राज्य सरकार द्वारा या उसके अधीनस्थ अधिकारी द्वारा किए गए निरोध-आदेश के अधीन निरुद्ध व्यक्ति के संबंध में "समुचित सरकार" से क्या अभिप्रेत है? |
ऐसी राज्य सरकार। |
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धारा 2(ख) का विषय क्या है? |
"निरोध-आदेश" (detention order) |
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धारा 2(ख) के अधीन "निरोध-आदेश" से क्या अभिप्रेत है? |
धारा 3 के अधीन किया गया कोई आदेश। |
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धारा 2(ग) का विषय क्या है? |
"विदेशी" (foreigner) |
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धारा 2(ग) के अधीन "विदेशी" का क्या अर्थ है? |
वही अर्थ जो विदेशियों विषयक अधिनियम, 1946 में है। |
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धारा 2(ग) के अधीन "विदेशी" की परिभाषा किस अधिनियम से ली गई है? |
विदेशियों विषयक अधिनियम, 1946। |
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धारा 2(घ) का विषय क्या है? |
"व्यक्ति" (person) |
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धारा 2(घ) के अधीन "व्यक्ति" के अन्तर्गत कौन सम्मिलित है? |
कोई विदेशी भी। |
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धारा 2(ङ) का विषय क्या है? |
"राज्य सरकार" (State Government) |
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धारा 2(ङ) के अधीन संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में "राज्य सरकार" से क्या अभिप्रेत है? |
उसका प्रशासक। |
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धारा 3 का विषय क्या है? |
कुछ व्यक्तियों को निरुद्ध करने का आदेश करने की शक्ति। (Power to make orders detaining certain persons) |
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धारा 3(1) के अधीन निरोध-आदेश करने की शक्ति किसे प्राप्त है? |
केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार को। |
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धारा 3(1)(क) के अधीन किसी व्यक्ति को निरुद्ध करने हेतु केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार का समाधान किन आधारों पर होना चाहिए? |
कि उसे भारत की सुरक्षा पर, भारत के विदेशी सरकारों से सम्बन्धों पर या भारत की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली रीति से कार्य करने से रोकने की दृष्टि से ऐसा करना आवश्यक है। |
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धारा 3(1)(क) के अधीन भारत की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली रीति से कार्य करने से रोकने हेतु क्या आदेश किया जा सकता है? |
उस व्यक्ति को निरुद्ध करने का आदेश। |
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धारा 3(1)(ख) के अधीन किसी विदेशी के संबंध में निरोध-आदेश कब किया जा सकता है? |
जब यह समाधान हो जाए कि भारत में उसके उपस्थित बने रहने का विनियमन करने या उसे भारत से बाहर निकालने का इंतजाम करने की दृष्टि से ऐसा करना आवश्यक है। |
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धारा 3(1)(ख) के अधीन किसी विदेशी के संबंध में निरोध-आदेश किस प्रयोजन हेतु किया जा सकता है? |
भारत में उसके उपस्थित बने रहने का विनियमन करने या उसे भारत से बाहर निकालने का इंतजाम करने हेतु। |
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धारा 3(1) के अधीन सरकार क्या आदेश कर सकेगी? |
यह निदेश देते हुए कि उस व्यक्ति को निरुद्ध कर लिया जाए। |
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धारा 3(2) के अधीन किसी व्यक्ति को निरुद्ध करने हेतु केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार का समाधान किन आधारों पर होना चाहिए? |
कि उसे राज्य की सुरक्षा, लोक व्यवस्था या समुदाय के लिए आवश्यक प्रदायों और सेवाओं को बनाए रखने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली रीति से कार्य करने से निवारित करने की दृष्टि से ऐसा करना आवश्यक है। |
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धारा 3(2) के अधीन राज्य की सुरक्षा, लोक व्यवस्था तथा समुदाय के लिए आवश्यक प्रदायों और सेवाओं को बनाए रखने, पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली रीति से कार्य करने से निवारित करने हेतु क्या आदेश किया जा सकता है? |
उस व्यक्ति को निरुद्ध करने का आदेश। |
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धारा 3(2) के स्पष्टीकरण के प्रयोजनों के लिए "समुदाय के लिए आवश्यक प्रदायों और सेवाओं को बनाए रखने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली रीति से कार्य करना" पद के अन्तर्गत क्या सम्मिलित नहीं है? |
चोरबाजारी निवारण और आवश्यक वस्तु प्रदाय अधिनियम, 1980 की धारा 3(1) के स्पष्टीकरण में परिभाषित "समुदाय के लिए आवश्यक वस्तुओं का प्रदाय बनाए रखने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली किसी रीति से कार्य करना"। |
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धारा 3(2) के स्पष्टीकरण के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 के अधीन निरोध-आदेश किस आधार पर नहीं किया जाएगा? |
जिस आधार पर चोरबाजारी निवारण और आवश्यक वस्तु प्रदाय अधिनियम, 1980 के अधीन निरोध-आदेश किया जा सकता है। |
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धारा 3(3) के अधीन राज्य सरकार जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस आयुक्त को शक्ति कब प्रदान कर सकती है? |
जब उसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर किसी क्षेत्र में विद्यमान या विद्यमान हो सकने वाली परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार का समाधान हो जाए कि ऐसा करना आवश्यक है। |
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धारा 3(3) के अधीन राज्य सरकार किस माध्यम से जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस आयुक्त को शक्ति प्रदान कर सकेगी? |
लिखित आदेश द्वारा। |
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धारा 3(3) के अधीन जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस आयुक्त को कौन-सी शक्ति प्रदान की जा सकती है? |
धारा 3(2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने की शक्ति। |
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धारा 3(3) के अधीन जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस आयुक्त धारा 3(2) की शक्तियों का प्रयोग कब कर सकेगा? |
जब उसका धारा 3(2) में उपबन्धित रूप में समाधान हो जाता है। |
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धारा 3(3) के अधीन राज्य सरकार के आदेश में अवधि कैसी होगी? |
ऐसी अवधि, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए। |
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धारा 3(3) के परन्तुक के अधीन प्रथम बार विनिर्दिष्ट अवधि कितनी हो सकती है? |
तीन मास से अधिक नहीं। |
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धारा 3(3) के परन्तुक के अधीन राज्य सरकार विनिर्दिष्ट अवधि को कैसे बढ़ा सकती है? |
आदेश को समय-समय पर संशोधित करके। |
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धारा 3(3) के परन्तुक के अधीन अवधि एक बार में अधिकतम कितनी बढ़ाई जा सकती है? |
अधिक से अधिक तीन मास तक। |
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धारा 3(4) के अधीन धारा 3(3) में वर्णित अधिकारी द्वारा आदेश किए जाने पर वह किसे रिपोर्ट भेजेगा? |
उस राज्य सरकार को जिसके वह अधीनस्थ है। |
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धारा 3(4) के अधीन रिपोर्ट के साथ क्या भेजा जाएगा? |
आदेश के आधार और ऐसी अन्य विशिष्टियां जो उसकी राय में मामले से संबंधित हैं। |
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धारा 3(4) के अधीन अधिकारी द्वारा किया गया आदेश कितने समय तक प्रवृत्त रहेगा यदि राज्य सरकार अनुमोदन न करे? |
किए जाने की तारीख से बारह दिन से अधिक नहीं। |
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धारा 3(4) के अधीन अधिकारी द्वारा किया गया आदेश कब बारह दिन से अधिक प्रवृत्त रहेगा? |
जब इस बीच राज्य सरकार उसका अनुमोदन कर दे। |
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धारा 3(4) के परन्तुक के अधीन निरोध के आधार कब संसूचित किए जाने पर "बारह दिन" के स्थान पर "बीस दिन" लागू होंगे? |
जब निरोध के आधार, निरोध की तारीख से पांच दिन के पश्चात् किन्तु पन्द्रह दिन के भीतर धारा 8 के अधीन संसूचित किए जाएं। |
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धारा 3(4) के परन्तुक के अधीन "बारह दिन" शब्दों के स्थान पर कौन-से शब्द रखे जाएंगे? |
"बीस दिन"। |
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धारा 3(5) के अधीन राज्य सरकार केन्द्रीय सरकार को रिपोर्ट कब भेजेगी? |
सात दिन के भीतर। |
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धारा 3(5) के अधीन राज्य सरकार केन्द्रीय सरकार को रिपोर्ट कब भेजेगी? |
जब धारा 3 के अधीन कोई आदेश राज्य सरकार द्वारा किया जाता है या अनुमोदित किया जाता है। |
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धारा 3(5) के अधीन रिपोर्ट के साथ क्या भेजा जाएगा? |
वे आधार जिन पर आदेश किया गया है तथा ऐसी अन्य विशिष्टियां जो राज्य सरकार की राय में आदेश की आवश्यकता से संबंधित हैं। |
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धारा 4 का विषय क्या है? |
निरोध-आदेशों का निष्पादन। (Execution of detention orders) |
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धारा 4 के अधीन निरोध-आदेश का निष्पादन कहाँ किया जा सकेगा? |
भारत में किसी भी स्थान पर। |
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धारा 4 के अधीन निरोध-आदेश का निष्पादन किस रीति से किया जा सकेगा? |
उस रीति से जो दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023) में गिरफ्तारी के वारण्टों के निष्पादन के लिए उपबन्धित है। |
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धारा 4 के अधीन निरोध-आदेश के निष्पादन की रीति किस विधि के अनुसार होगी? |
दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023) में गिरफ्तारी के वारण्टों के निष्पादन के लिए उपबन्धित रीति के अनुसार। |
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धारा 5 का विषय क्या है? |
निरोध का स्थान तथा दशाओं का विनियमन करने की शक्ति। (Power to regulate place and conditions of detention) |
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धारा 5 के अधीन यह धारा किन व्यक्तियों पर लागू होती है? |
प्रत्येक व्यक्ति, जिसके विरुद्ध निरोध-आदेश किया गया है। |
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धारा 5(क) के अधीन निरुद्ध व्यक्ति को कहाँ निरुद्ध किया जा सकेगा? |
ऐसे स्थान पर जिसे समुचित सरकार साधारण या विशेष आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे। |
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धारा 5(क) के अधीन निरुद्ध व्यक्ति को किन दशाओं में निरुद्ध किया जा सकेगा? |
ऐसी दशाओं में जिन्हें समुचित सरकार साधारण या विशेष आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे। |
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धारा 5(क) के अधीन निरोध की दशाओं में क्या सम्मिलित है? |
भरण-पोषण, अनुशासन तथा अनुशासन भंग करने के लिए दण्ड। |
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धारा 5(क) के अधीन निरोध का स्थान और दशाएं किसके द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएंगी? |
समुचित सरकार द्वारा साधारण या विशेष आदेश से। |
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धारा 5(ख) के अधीन निरुद्ध व्यक्ति को कहाँ हटाया जा सकेगा? |
निरोध के एक स्थान से निरोध के दूसरे स्थान को। |
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धारा 5(ख) के अधीन क्या निरुद्ध व्यक्ति को उसी राज्य में एक स्थान से दूसरे स्थान हटाया जा सकता है? |
हाँ। |
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धारा 5(ख) के अधीन क्या निरुद्ध व्यक्ति को एक राज्य से दूसरे राज्य में हटाया जा सकता है? |
हाँ। |
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धारा 5(ख) के अधीन निरुद्ध व्यक्ति को एक स्थान से दूसरे स्थान हटाने का आदेश कौन करेगा? |
समुचित सरकार। |
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धारा 5 के परन्तुक के अधीन राज्य सरकार एक व्यक्ति को एक राज्य से दूसरे राज्य में कब हटा सकती है? |
अन्य राज्य की सरकार की सम्मति से। |
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धारा 5 के परन्तुक के अधीन क्या राज्य सरकार अन्य राज्य की सरकार की सम्मति के बिना व्यक्ति को दूसरे राज्य में हटाने का आदेश कर सकती है? |
नहीं। |
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धारा 5क का विषय क्या है? |
निरोध के आधारों का पृथक् किया जाना। (Grounds of detention severable) |
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धारा 5क कब लागू होती है? |
जब कोई व्यक्ति धारा 3 के अधीन दो या अधिक आधारों पर किए गए निरोध-आदेश के अनुसरण में निरुद्ध किया गया हो। |
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धारा 5क के अधीन निरोध-आदेश के संबंध में क्या समझा जाएगा? |
कि वह ऐसे आधारों में से प्रत्येक आधार पर अलग-अलग किया गया है। |
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धारा 5क के अधीन यह उपबंध किन निरोध-आदेशों पर लागू होता है? |
राष्ट्रीय सुरक्षा (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 1984 के प्रारम्भ के पूर्व या पश्चात् किए गए निरोध-आदेशों पर। |
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धारा 5क(क) के अधीन निरोध-आदेश केवल किस कारण से अविधिमान्य या अप्रवर्तनीय नहीं समझा जाएगा? |
कि आधारों में से एक या कुछ आधार दोषपूर्ण हैं। |
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धारा 5क(क)(i) के अधीन कौन-सा आधार होने पर भी निरोध-आदेश अविधिमान्य या अप्रवर्तनीय नहीं होगा? |
यदि कोई आधार स्पष्ट नहीं है। |
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धारा 5क(क)(ii) के अधीन कौन-सा आधार होने पर भी निरोध-आदेश अविधिमान्य या अप्रवर्तनीय नहीं होगा? |
यदि कोई आधार विद्यमान नहीं है। |
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धारा 5क(क)(iii) के अधीन कौन-सा आधार होने पर भी निरोध-आदेश अविधिमान्य या अप्रवर्तनीय नहीं होगा? |
यदि कोई आधार सुसंगत नहीं है। |
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धारा 5क(क)(iv) के अधीन कौन-सा आधार होने पर भी निरोध-आदेश अविधिमान्य या अप्रवर्तनीय नहीं होगा? |
यदि कोई आधार उस व्यक्ति से संबद्ध नहीं है या उससे निकटतः संबद्ध नहीं है। |
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धारा 5क(क)(v) के अधीन कौन-सा आधार होने पर भी निरोध-आदेश अविधिमान्य या अप्रवर्तनीय नहीं होगा? |
यदि कोई आधार किसी अन्य कारण से अविधिमान्य है। |
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धारा 5क(क) के अधीन किन परिस्थितियों में यह अभिनिर्धारित करना संभव नहीं माना जाएगा कि सरकार या अधिकारी का समाधान शेष आधारों के प्रति हुआ था? |
जब एक या कुछ आधार दोषपूर्ण हों। |
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धारा 5क(ख) के अधीन निरोध-आदेश करने वाली सरकार या अधिकारी के बारे में क्या समझा जाएगा? |
कि उसने धारा 3 के अधीन अपना समाधान हो जाने के पश्चात् निरोध-आदेश किया था। |
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धारा 5क(ख) के अधीन सरकार या अधिकारी का समाधान किन आधारों के प्रति माना जाएगा? |
शेष आधार या आधारों के प्रति। |
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धारा 6 का विषय क्या है? |
निरोध-आदेशों का कुछ आधारों पर अविधिमान्य या अप्रवर्तनशील न होना। (Detention orders not to be invalid or inoperative on certain grounds) |
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धारा 6 के अधीन निरोध-आदेश केवल किस कारण से अविधिमान्य या अप्रवर्तनशील नहीं होगा? |
कि निरुद्ध व्यक्ति या निरोध का स्थान क्षेत्रीय अधिकारिता की सीमाओं के बाहर है। |
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धारा 6(क) के अधीन निरोध-आदेश कब अविधिमान्य या अप्रवर्तनशील नहीं होगा? |
जब उसके अधीन निरुद्ध किया जाने वाला व्यक्ति आदेश करने वाली सरकार या अधिकारी की क्षेत्रीय अधिकारिता की सीमाओं के बाहर हो। |
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धारा 6(क) के अधीन किसकी क्षेत्रीय अधिकारिता की सीमाओं के बाहर होने पर भी निरोध-आदेश अविधिमान्य या अप्रवर्तनशील नहीं होगा? |
निरुद्ध किए जाने वाले व्यक्ति के। |
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धारा 6(ख) के अधीन निरोध-आदेश कब अविधिमान्य या अप्रवर्तनशील नहीं होगा? |
जब ऐसे व्यक्ति के निरोध का स्थान आदेश करने वाली सरकार या अधिकारी की क्षेत्रीय अधिकारिता की सीमाओं के बाहर हो। |
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धारा 6(ख) के अधीन किसके क्षेत्रीय अधिकारिता की सीमाओं के बाहर होने पर भी निरोध-आदेश अविधिमान्य या अप्रवर्तनशील नहीं होगा? |
निरोध के स्थान के। |
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धारा 7 का विषय क्या है? |
फरार व्यक्तियों के संबंध में शक्तियां। (Powers in relation to absconding persons) |
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धारा 7(1) के अधीन कार्रवाई कब की जा सकती है? |
जब केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार या धारा 3(3) में वर्णित अधिकारी को यह विश्वास करने का कारण हो कि निरोध-आदेश से संबंधित व्यक्ति फरार हो गया है या अपने को छिपा रहा है। |
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धारा 7(1) के अधीन किस स्थिति में कार्रवाई की जाएगी? |
जब निरोध-आदेश का निष्पादन संभव न हो। |
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धारा 7(1) के अधीन किन प्राधिकारियों को शक्ति प्राप्त है? |
केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार या धारा 3(3) में वर्णित अधिकारी को। |
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धारा 7(1)(क) के अधीन लिखित रिपोर्ट किसे दी जाएगी? |
उस महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट को, जो संबंधित स्थान पर अधिकारिता रखता है। |
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धारा 7(1)(क) के अधीन रिपोर्ट किस तथ्य के संबंध में दी जाएगी? |
कि निरोध-आदेश से संबंधित व्यक्ति फरार हो गया है या अपने को छिपा रहा है। |
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धारा 7(1)(क) के अधीन किस स्थान के मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट दी जाएगी? |
जहां उक्त व्यक्ति मामूली तौर पर निवास करता है। |
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धारा 7(1)(ख) के अधीन आदेश किस माध्यम से जारी किया जाएगा? |
राजपत्र में अधिसूचित आदेश द्वारा। |
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धारा 7(1)(ख) के अधीन व्यक्ति को क्या निदेश दिया जा सकेगा? |
कि वह विनिर्दिष्ट अधिकारी के समक्ष विनिर्दिष्ट स्थान पर और विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर हाजिर हो। |
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धारा 7(1)(ख) के अधीन हाजिर होने का स्थान और अवधि किसमें विनिर्दिष्ट होगी? |
आदेश में। |
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धारा 7(2) के अधीन किन धाराओं के उपबंध लागू होंगे? |
दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 82, 83, 84 और 85 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 84, 85, 87 और 88) के उपबंध। |
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धारा 7(2) के अधीन दण्ड प्रक्रिया संहिता/भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के उपबंध कब लागू होंगे? |
जब धारा 7 (1)(क) के अधीन किसी व्यक्ति के विरुद्ध रिपोर्ट कर दी गई हो। |
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धारा 7(2) के अधीन दण्ड प्रक्रिया संहिता/भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के उपबंध किसके संबंध में लागू होंगे? |
ऐसे व्यक्ति और उसकी संपत्ति के संबंध में। |
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धारा 7(2) के अधीन निरोध-आदेश को किसके समान माना जाएगा? |
मानो उसे निरुद्ध करने का आदेश मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किया गया वारण्ट हो। |
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धारा 7(3) के अधीन कौन दंडनीय होगा? |
वह व्यक्ति, जो धारा 7(1)(ख) के अधीन जारी आदेश का अनुपालन करने में असफल रहता है। |
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धारा 7(3) के अधीन दंड से बचने हेतु व्यक्ति को क्या साबित करना होगा? |
कि आदेश का अनुपालन करना उसके लिए संभव नहीं था। |
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धारा 7(3) के अधीन व्यक्ति को और क्या साबित करना होगा? |
कि उसने आदेश में वर्णित अधिकारी को विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर अनुपालन असम्भव होने के कारण और अपने पते-ठिकाने की सूचना दे दी थी। |
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धारा 7(3) के अधीन आदेश के अनुपालन में असफल रहने पर कितनी सजा है? |
एक वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों। |
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धारा 7(4) किसके बावजूद लागू होती है? |
दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023) में किसी बात के होते हुए भी। |
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धारा 7(4) के अधीन कौन-सा अपराध संज्ञेय होगा? |
धारा 7 (3) के अधीन प्रत्येक अपराध। |
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धारा 8 का विषय क्या है? |
आदेश से प्रभावित व्यक्ति को निरोध-आदेश के आधारों का प्रकट किया जाना। (Grounds of order of detention to be disclosed to persons affected by the order) |
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धारा 8(1) के अधीन निरोध-आदेश के आधार कौन संसूचित करेगा? |
आदेश करने वाला प्राधिकारी। |
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धारा 8(1) के अधीन निरोध-आदेश के आधार कब संसूचित किए जाएंगे? |
यथाशक्य शीघ्र। |
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धारा 8(1) के अधीन सामान्यतः निरोध-आदेश के आधार कितने समय के भीतर संसूचित किए जाएंगे? |
निरोध की तारीख से पांच दिन के भीतर। |
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धारा 8(1) के अधीन असाधारण परिस्थितियों में निरोध-आदेश के आधार कितने समय के भीतर संसूचित किए जा सकते हैं? |
निरोध की तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर। |
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धारा 8(1) के अधीन पन्द्रह दिन के भीतर आधार संसूचित करने के लिए क्या आवश्यक है? |
असाधारण परिस्थितियां और लेखबद्ध कारण। |
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धारा 8(1) के अधीन निरुद्ध व्यक्ति को क्या संसूचित किया जाएगा? |
वे आधार जिन पर निरोध-आदेश किया गया है। |
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धारा 8(1) के अधीन निरुद्ध व्यक्ति को कौन-सा अवसर दिया जाएगा? |
समुचित सरकार से आदेश के विरुद्ध अभ्यावेदन करने का शीघ्रतम अवसर। |
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धारा 8(1) के अधीन अभ्यावेदन किसके समक्ष किया जाएगा? |
समुचित सरकार के समक्ष। |
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धारा 8(2) के अधीन धारा 8(1) की कोई बात प्राधिकारी से क्या अपेक्षा नहीं करेगी? |
ऐसे तथ्य प्रकट करने की, जिन्हें वह लोक हित के विरुद्ध समझता है। |
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धारा 8(2) के अधीन कौन-से तथ्य प्रकट नहीं किए जाएंगे? |
वे तथ्य, जिन्हें प्राधिकारी लोक हित के विरुद्ध समझता है। |
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धारा 9 का विषय क्या है? |
सलाहकार बोर्डों का गठन। (Constitution of Advisory Boards) |
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धारा 9(1) के अधीन सलाहकार बोर्डों का गठन कौन करेगा? |
केंद्रीय सरकार और प्रत्येक राज्य सरकार। |
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धारा 9(1) के अधीन सलाहकार बोर्डों का गठन कब किया जाएगा? |
जब भी आवश्यकता हो। |
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धारा 9(1) के अधीन सलाहकार बोर्डों का गठन किस प्रयोजन हेतु किया जाएगा? |
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 के प्रयोजनों के लिए। |
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धारा 9(1) के अधीन कितने सलाहकार बोर्ड गठित किए जा सकते हैं? |
एक या अधिक। |
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धारा 9(2) के अधीन प्रत्येक सलाहकार बोर्ड में कितने व्यक्ति होंगे? |
तीन व्यक्ति। |
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धारा 9(2) के अधीन सलाहकार बोर्ड किन व्यक्तियों से मिलकर गठित होगा? |
ऐसे व्यक्तियों से जो किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हैं, रह चुके हैं या नियुक्त किए जाने के लिए अर्हित हैं। |
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धारा 9(2) के अधीन सलाहकार बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति कौन करेगा? |
समुचित सरकार। |
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धारा 9(3) के अधीन सलाहकार बोर्ड का अध्यक्ष कौन नियुक्त करेगा? |
समुचित सरकार। |
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धारा 9(3) के अधीन अध्यक्ष किसे नियुक्त किया जाएगा? |
सलाहकार बोर्ड के सदस्यों में से ऐसे सदस्य को जो किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश है या रह चुका है। |
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धारा 9(3) के अधीन संघ राज्यक्षेत्र के मामले में सलाहकार बोर्ड में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति किसकी पूर्व अनुमति से होगी? |
सम्बन्धित राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से। |
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धारा 9(3) के अधीन संघ राज्यक्षेत्र के मामले में पूर्व अनुमोदन किसका आवश्यक है? |
सम्बन्धित राज्य सरकार का। |
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धारा 10 का विषय क्या है? |
सलाहकार बोर्डों को निर्देश। (Reference to Advisory Boards) |
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धारा 10 किस अपवाद के अधीन लागू होती है? |
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 में अभिव्यक्त रूप से जैसा उपबंधित है उसके सिवाय। |
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धारा 10 के अधीन किन मामलों में सलाहकार बोर्ड को संदर्भ भेजा जाएगा? |
प्रत्येक मामले में जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 के अधीन निरोध का आदेश किया गया है। |
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धारा 10 के अधीन समुचित सरकार किस अवधि के भीतर मामला सलाहकार बोर्ड के समक्ष रखेगी? |
निरोध की तारीख से तीन सप्ताह के भीतर। |
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धारा 10 के अधीन समुचित सरकार किस सलाहकार बोर्ड के समक्ष मामला रखेगी? |
धारा 9 के अधीन अपने द्वारा गठित सलाहकार बोर्ड के समक्ष। |
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धारा 10 के अधीन सलाहकार बोर्ड के समक्ष क्या रखा जाएगा? |
वे आधार, जिन पर निरोध-आदेश किया गया है। |
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धारा 10 के अधीन धारा 3(3) में निर्दिष्ट अधिकारी द्वारा आदेश किए जाने पर क्या सलाहकार बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा? |
उस अधिकारी द्वारा धारा 3(4) के अधीन दी गई रिपोर्ट। |
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धारा 10 के अधीन धारा 3(4) की रिपोर्ट कब सलाहकार बोर्ड के समक्ष रखी जाएगी? |
जब आदेश धारा 3(3) में निर्दिष्ट अधिकारी द्वारा किया गया हो। |
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धारा 11 का विषय क्या है? |
सलाहकार बोर्डों की प्रक्रिया। (Procedure of Advisory Boards) |
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धारा 11(1) के अधीन सलाहकार बोर्ड किस पर विचार करेगा? |
अपने समक्ष रखी गई सामग्री पर। |
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धारा 11(1) के अधीन सलाहकार बोर्ड अतिरिक्त जानकारी किससे मांग सकता है? |
समुचित सरकार से, समुचित सरकार के माध्यम से बुलाए गए किसी व्यक्ति से या संबद्ध व्यक्ति से। |
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धारा 11(1) के अधीन अतिरिक्त जानकारी कब मांगी जा सकती है? |
जब बोर्ड उसे आवश्यक समझे। |
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धारा 11(1) के अधीन सलाहकार बोर्ड संबद्ध व्यक्ति को कब सुनेगा? |
जब वह किसी विशिष्ट मामले में ऐसा आवश्यक समझे अथवा संबद्ध व्यक्ति सुनवाई चाहता हो। |
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धारा 11(1) के अधीन सलाहकार बोर्ड अपनी रिपोर्ट किसे देगा? |
समुचित सरकार को। |
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धारा 11(1) के अधीन सलाहकार बोर्ड अपनी रिपोर्ट कब देगा? |
संबद्ध व्यक्ति के निरोध की तारीख से सात सप्ताह के भीतर। |
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धारा 11(2) के अधीन सलाहकार बोर्ड की रिपोर्ट के अलग भाग में क्या विनिर्दिष्ट किया जाएगा? |
यह राय कि संबद्ध व्यक्ति के निरोध के लिए पर्याप्त कारण है या नहीं। |
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धारा 11(2) के अधीन सलाहकार बोर्ड किस विषय पर अपनी राय देगा? |
संबद्ध व्यक्ति के निरोध के लिए पर्याप्त कारण होने या न होने पर। |
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धारा 11(3) के अधीन सलाहकार बोर्ड के सदस्यों में मतभेद होने पर किसकी राय बोर्ड की राय मानी जाएगी? |
बहुसंख्या की राय। |
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धारा 11(4) के अधीन क्या निरोध-आदेश से प्रभावित व्यक्ति सलाहकार बोर्ड के समक्ष विधि-व्यवसायी द्वारा हाजिर होने का हकदार है? |
नहीं। |
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धारा 11(4) के अधीन विधि-व्यवसायी द्वारा हाजिर होने का अधिकार किस मामले में नहीं होगा? |
सलाहकार बोर्ड को निर्देश से संबंधित किसी मामले में। |
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धारा 11(4) के अधीन सलाहकार बोर्ड की कार्यवाही का स्वरूप क्या होगा? |
गोपनीय। |
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धारा 11(4) के अधीन सलाहकार बोर्ड की रिपोर्ट का कौन-सा भाग गोपनीय नहीं होगा? |
वह भाग जिसमें बोर्ड की राय विनिर्दिष्ट हो। |
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धारा 12 का विषय क्या है? |
सलाहकार बोर्ड की रिपोर्ट पर कार्रवाई। (Action upon the report of the Advisory Board) |
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धारा 12(1) के अधीन समुचित सरकार निरोध-आदेश को कब पुष्ट कर सकेगी? |
जब सलाहकार बोर्ड ने रिपोर्ट दी हो कि उसकी राय में निरोध के लिए पर्याप्त कारण है। |
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धारा 12(1) के अधीन सलाहकार बोर्ड की किस राय पर निरोध-आदेश पुष्ट किया जा सकता है? |
कि संबद्ध व्यक्ति के निरोध के लिए पर्याप्त कारण है। |
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धारा 12(1) के अधीन निरोध-आदेश पुष्ट करने के पश्चात् समुचित सरकार क्या कर सकेगी? |
संबद्ध व्यक्ति को उतनी अवधि तक निरुद्ध रख सकेगी जितनी वह ठीक समझे। |
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धारा 12(1) के अधीन संबद्ध व्यक्ति को कितनी अवधि तक निरुद्ध रखा जा सकेगा? |
उतनी अवधि तक, जितनी समुचित सरकार ठीक समझे। |
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धारा 12(2) के अधीन समुचित सरकार निरोध-आदेश कब वापस ले लेगी? |
जब सलाहकार बोर्ड ने रिपोर्ट दी हो कि उसकी राय में निरोध के लिए पर्याप्त कारण नहीं है। |
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धारा 12(2) के अधीन सलाहकार बोर्ड की किस राय पर निरोध-आदेश वापस लिया जाएगा? |
कि संबद्ध व्यक्ति के निरोध के लिए पर्याप्त कारण नहीं है। |
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धारा 12(2) के अधीन निरोध-आदेश वापस लेने के पश्चात् समुचित सरकार क्या करेगी? |
उस व्यक्ति को तुरन्त छुड़वा देगी। |
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धारा 13 का विषय क्या है? |
निरोध की अधिकतम अवधि। (Maximum period of detention) |
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धारा 13 के अधीन यह धारा किन निरोध-आदेशों पर लागू होती है? |
धारा 12 के अधीन पुष्ट किए गए निरोध-आदेशों पर। |
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धारा 13 के अधीन किसी व्यक्ति को अधिकतम कितनी अवधि तक निरुद्ध रखा जा सकेगा? |
निरोध की तारीख से बारह मास तक। |
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धारा 13 के अधीन अधिकतम निरोध अवधि किस तारीख से गिनी जाएगी? |
निरोध की तारीख से। |
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धारा 13 के परन्तुक के अधीन क्या इस धारा से समुचित सरकार की निरोध-आदेश वापस लेने की शक्ति प्रभावित होगी? |
नहीं। |
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धारा 13 के परन्तुक के अधीन क्या समुचित सरकार निरोध-आदेश को पहले ही किसी समय वापस ले सकती है? |
हाँ। |
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धारा 13 के परन्तुक के अधीन क्या समुचित सरकार निरोध-आदेश को पहले ही किसी समय उपांतरित कर सकती है? |
हाँ। |
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धारा 13 के परन्तुक के अधीन समुचित सरकार की कौन-सी शक्ति अप्रभावित रहेगी? |
निरोध-आदेश को पहले ही किसी समय वापस लेने या उपांतरित करने की शक्ति। |
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धारा 14 का विषय क्या है? |
निरोध-आदेश वापस लेना। (Revocation of detention orders) |
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धारा 14(1) किसके उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना लागू होती है? |
साधारण खण्ड अधिनियम, 1897 की धारा 21 के उपबंधों पर। |
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धारा 14(1)(क) के अधीन धारा 3(3) में वर्णित अधिकारी द्वारा किए गए आदेश को कौन वापस ले सकेगा? |
वह राज्य सरकार जिसके वह अधिकारी अधीनस्थ है या केन्द्रीय सरकार। |
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धारा 14(1)(क) के अधीन धारा 3(3) में वर्णित अधिकारी द्वारा किए गए आदेश को कौन उपांतरित कर सकेगा? |
वह राज्य सरकार जिसके वह अधिकारी अधीनस्थ है या केन्द्रीय सरकार। |
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धारा 14(1)(ख) के अधीन राज्य सरकार द्वारा किए गए आदेश को कौन वापस ले सकेगा? |
केन्द्रीय सरकार। |
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धारा 14(1)(ख) के अधीन राज्य सरकार द्वारा किए गए आदेश को कौन उपांतरित कर सकेगा? |
केन्द्रीय सरकार। |
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धारा 14(2) का विषय क्या है? |
पूर्ववर्ती निरोध-आदेश के पश्चात् दूसरा निरोध-आदेश। |
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धारा 14(2) के अधीन पूर्ववर्ती निरोध-आदेश के अवसान या वापस लिए जाने का क्या प्रभाव होगा? |
उसी व्यक्ति के विरुद्ध धारा 3 के अधीन दूसरे निरोध-आदेश का किया जाना वर्जित नहीं होगा। |
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धारा 14(2) के अधीन "पूर्ववर्ती निरोध-आदेश" से क्या अभिप्रेत है? |
वह निरोध-आदेश जिसका अवसान हो गया हो या जो वापस ले लिया गया हो। |
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धारा 14(2) के अधीन "पश्चात्वर्ती निरोध-आदेश" से क्या अभिप्रेत है? |
धारा 3 के अधीन उसी व्यक्ति के विरुद्ध किया गया दूसरा निरोध-आदेश। |
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धारा 14(2) किन पूर्ववर्ती निरोध-आदेशों पर लागू होती है? |
राष्ट्रीय सुरक्षा (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 1984 के प्रारम्भ के पूर्व या पश्चात् किए गए पूर्ववर्ती निरोध-आदेशों पर। |
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धारा 14(2) के परन्तुक के अधीन अधिकतम अवधि पर सीमा कब लागू होगी? |
जब पूर्ववर्ती निरोध-आदेश के अवसान या वापस लिए जाने के पश्चात् कोई नए तथ्य उत्पन्न नहीं हुए हों। |
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धारा 14(2) के परन्तुक के अधीन नए तथ्य न होने पर पश्चात्वर्ती निरोध-आदेश के अधीन निरोध की अधिकतम अवधि क्या होगी? |
पूर्ववर्ती निरोध-आदेश के अधीन निरोध की तारीख से बारह मास की अवधि के अवसान के परे नहीं। |
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धारा 14(2) के परन्तुक के अधीन अधिकतम अवधि किस तारीख से गिनी जाएगी? |
पूर्ववर्ती निरोध-आदेश के अधीन निरोध की तारीख से। |
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धारा 14(2) के परन्तुक के अधीन क्या नए तथ्य न होने पर बारह मास से अधिक निरोध संभव है? |
नहीं। |
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धारा 14क का विषय क्या है? |
वे परिस्थितियां जिनमें व्यक्तियों को सलाहकार बोर्ड की राय प्राप्त किए बिना, तीन मास से अधिक अवधि के लिए निरोध में रखा जा सकेगा। (Circumstances in which persons may be detained for periods longer than three months without obtaining the opinion of Advisory Boards) |
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धारा 14क(1) किसके बावजूद लागू होती है? |
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 के पूर्वगामी उपबंधों तथा किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकारी के निर्णय, डिक्री या आदेश में किसी बात के होते हुए भी। |
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धारा 14क(1) के अधीन किन व्यक्तियों पर यह धारा लागू होती है? |
जिनके संबंध में 18 जून, 1989 से पहले किसी समय राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 के अधीन निरोध-आदेश किया गया है। |
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धारा 14क(1) के अधीन सलाहकार बोर्ड की राय के बिना निरोध की अवधि कितनी हो सकती है? |
तीन मास से अधिक किन्तु छह मास से अनधिक। |
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धारा 14क(1) के अधीन यह अवधि किस तारीख से गिनी जाएगी? |
निरोध की तारीख से। |
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धारा 14क(1) के अधीन निरोध किस क्षेत्र में की गई गतिविधियों से संबंधित होना चाहिए? |
विक्षुब्ध क्षेत्र में। |
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धारा 14क(1)(i) के अधीन व्यक्ति को किससे निवारित करने की दृष्टि से निरुद्ध किया जा सकता है? |
आतंकवादी और विध्वंसक क्रियाकलापों से निपटने में सरकार के प्रयासों में हस्तक्षेप करने से। |
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धारा 14क(1)(ii)(क) के अधीन व्यक्ति को किस पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली रीति से कार्य करने से निवारित करने हेतु निरुद्ध किया जा सकता है? |
भारत की रक्षा। |
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धारा 14क(1)(ii)(ख) के अधीन व्यक्ति को किस पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली रीति से कार्य करने से निवारित करने हेतु निरुद्ध किया जा सकता है? |
भारत की सुरक्षा। |
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धारा 14क(1)(ii)(ग) के अधीन व्यक्ति को किस पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली रीति से कार्य करने से निवारित करने हेतु निरुद्ध किया जा सकता है? |
राज्य की सुरक्षा। |
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धारा 14क(1)(ii)(घ) के अधीन व्यक्ति को किस पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली रीति से कार्य करने से निवारित करने हेतु निरुद्ध किया जा सकता है? |
लोक व्यवस्था बनाए रखने। |
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धारा 14क(1)(ii)(ङ) के अधीन व्यक्ति को किस पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली रीति से कार्य करने से निवारित करने हेतु निरुद्ध किया जा सकता है? |
समुदाय के लिए आवश्यक प्रदायों और सेवाओं को बनाए रखने। |
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धारा 14क(1) के स्पष्टीकरण 1 के अधीन कौन-से उपबंध लागू होंगे? |
धारा 3(2) के स्पष्टीकरण के उपबंध। |
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धारा 14क(1) के स्पष्टीकरण 1 के अधीन धारा 3(2) का स्पष्टीकरण कैसे लागू होगा? |
उसी प्रकार जैसे वह धारा 3(2) के प्रयोजनों के लिए लागू होता है। |
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धारा 14क(1) के स्पष्टीकरण 2 के अधीन "विक्षुब्ध क्षेत्र" से क्या अभिप्रेत है? |
ऐसा क्षेत्र जो पंजाब विक्षुब्ध क्षेत्र अधिनियम, 1983 या चंडीगढ़ विक्षुब्ध क्षेत्र अधिनियम, 1983 की धारा 3 के अधीन अधिसूचना द्वारा विक्षुब्ध क्षेत्र घोषित किया गया हो। |
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धारा 14क(1) के स्पष्टीकरण 3 के अधीन "आतंकवादी और विध्वंसक क्रियाकलाप" से क्या अभिप्रेत है? |
आतंकवादी और विध्वंसक क्रियाकलाप (निवारण) अध्यादेश, 1987 के अर्थ में "आतंकवादी कार्य" और "विध्वंसक क्रियाकलाप"। |
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धारा 14क(2) के अधीन किन धाराओं पर उपान्तरणों सहित प्रभाव होगा? |
धारा 3, धारा 8 तथा धारा 10 से धारा 14 तक। |
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धारा 14क(2)(क)(i)(क) के अधीन धारा 3(4) के परन्तुक में "दस दिन" के स्थान पर कौन-से शब्द रखे जाएंगे? |
"पन्द्रह दिन"। |
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धारा 14क(2)(क)(i)(ख) के अधीन धारा 3(4) के परन्तुक में "पन्द्रह दिन" के स्थान पर कौन-से शब्द रखे जाएंगे? |
"बीस दिन"। |
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धारा 14क(2)(क)(ii) के अधीन धारा 3(5) में "सात दिन" के स्थान पर कौन-से शब्द रखे जाएंगे? |
"पन्द्रह दिन"। |
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धारा 14क(2)(ख) के अधीन धारा 8(1) में "दस दिन" के स्थान पर कौन-से शब्द रखे जाएंगे? |
"पन्द्रह दिन"। |
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धारा 14क(2)(ग) के अधीन धारा 10 में "तीन सप्ताह के भीतर" के स्थान पर कौन-से शब्द रखे जाएंगे? |
"चार मास और दो सप्ताह के भीतर"। |
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धारा 14क(2)(घ)(i) के अधीन धारा 11(1) में "सात सप्ताह के भीतर" के स्थान पर कौन-से शब्द रखे जाएंगे? |
"पांच मास और तीन सप्ताह"। |
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धारा 14क(2)(घ)(ii) के अधीन धारा 11(2) में "संबद्ध व्यक्ति के निरोध" के स्थान पर कौन-से शब्द रखे जाएंगे? |
"संबद्ध व्यक्ति के निरंतर निरोध"। |
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धारा 14क(2)(ङ) के अधीन धारा 12 में "निरोध के लिए" के स्थान पर कौन-से शब्द रखे जाएंगे? |
"निरंतर निरोध के लिए"। |
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धारा 14क(2)(च) के अधीन धारा 13 में "बारह मास" के स्थान पर कौन-से शब्द रखे जाएंगे? |
"दो वर्ष"। |
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धारा 14क(2)(छ) के अधीन धारा 14(2) के परन्तुक में "बारह मास" के स्थान पर कौन-से शब्द रखे जाएंगे? |
"दो वर्ष"। |
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धारा 15 का विषय क्या है? |
निरुद्ध व्यक्तियों का अस्थायी तौर पर छोड़ा जाना। (Temporary release of persons detained) |
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धारा 15(1) के अधीन निरुद्ध व्यक्ति को अस्थायी रूप से छोड़ने की शक्ति किसे प्राप्त है? |
समुचित सरकार को। |
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धारा 15(1) के अधीन समुचित सरकार कब छोड़े जाने का निदेश दे सकेगी? |
किसी भी समय। |
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धारा 15(1) के अधीन किन व्यक्तियों को छोड़ा जा सकता है? |
निरोध-आदेश के अनुसरण में निरुद्ध व्यक्ति को। |
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धारा 15(1) के अधीन निरुद्ध व्यक्ति को कैसे छोड़ा जा सकता है? |
बिना शर्तों के या विनिर्दिष्ट शर्तों पर। |
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धारा 15(1) के अधीन विनिर्दिष्ट शर्तों के लिए क्या आवश्यक है? |
कि वह व्यक्ति उन्हें स्वीकार करे। |
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धारा 15(1) के अधीन छोड़ा जाना किस अवधि के लिए हो सकता है? |
किसी विनिर्दिष्ट अवधि के लिए। |
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धारा 15(1) के अधीन समुचित सरकार छोड़े जाने को कब रद्द कर सकेगी? |
किसी भी समय। |
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धारा 15(2) के अधीन छोड़े जाने का निदेश देते समय समुचित सरकार क्या अपेक्षा कर सकेगी? |
कि व्यक्ति शर्तों के पालन हेतु प्रतिभुओं सहित या बिना प्रतिभुओं के बंधपत्र निष्पादित करे। |
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धारा 15(2) के अधीन बंधपत्र किस प्रयोजन हेतु निष्पादित कराया जा सकता है? |
निदेश में विनिर्दिष्ट शर्तों के उचित पालन हेतु। |
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धारा 15(2) के अधीन बंधपत्र कैसा हो सकता है? |
प्रतिभुओं सहित या उनके बिना। |
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धारा 15(3) के अधीन छोड़ा गया व्यक्ति किसके समक्ष अपने को अभ्यर्पित करेगा? |
उस प्राधिकारी के समक्ष जो आदेश में विनिर्दिष्ट हो। |
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धारा 15(3) के अधीन छोड़ा गया व्यक्ति कब अपने को अभ्यर्पित करेगा? |
उस समय पर जो आदेश में विनिर्दिष्ट हो। |
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धारा 15(3) के अधीन छोड़ा गया व्यक्ति कहाँ अपने को अभ्यर्पित करेगा? |
उस स्थान पर जो आदेश में विनिर्दिष्ट हो। |
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धारा 15(3) के अधीन समय, स्थान और प्राधिकारी किस आदेश में विनिर्दिष्ट होंगे? |
छोड़े जाने का निदेश देने वाले या छोड़ा जाना रद्द करने वाले आदेश में। |
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धारा 15(4) के अधीन कौन दंडनीय होगा? |
जो व्यक्ति पर्याप्त कारण के बिना धारा 15(3) के अनुसार अपने को अभ्यर्पित करने में असफल रहता है। |
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धारा 15(4) के अधीन अपने को अभ्यर्पित करने में असफल रहने पर कितनी सजा है? |
दो वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों। |
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धारा 15(5) के अधीन बंधपत्र का समपहरण कब घोषित किया जाएगा? |
जब छोड़ा गया व्यक्ति बंधपत्र की किसी शर्त को पूरा करने में असफल रहेगा। |
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धारा 15(5) के अधीन किन शर्तों के उल्लंघन पर बंधपत्र का समपहरण घोषित होगा? |
धारा 15(1) के अधीन अधिरोपित शर्तों पर निष्पादित बंधपत्र की शर्तों के उल्लंघन पर। |
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धारा 15(5) के अधीन बंधपत्र के समपहरण का प्रभाव क्या होगा? |
आबद्ध व्यक्ति उसमें दी गई शास्ति का देनदार होगा। |
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धारा 16 का विषय क्या है? |
सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण। (Protection of action taken in good faith) |
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धारा 16 के अधीन संरक्षण किन कार्यों के लिए उपलब्ध है? |
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए। |
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धारा 16 के अधीन किनके विरुद्ध वाद या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं होगी? |
केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के विरुद्ध। |
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धारा 16 के अधीन किनके विरुद्ध वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं होगी? |
किसी व्यक्ति के विरुद्ध। |
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धारा 16 के अधीन क्या सद्भावपूर्वक की जाने के लिए आशयित कार्यों के लिए भी संरक्षण उपलब्ध है? |
हाँ। |
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धारा 16 के अधीन क्या सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के विरुद्ध वाद किया जा सकता है? |
नहीं। |
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धारा 16 के अधीन क्या सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए किसी व्यक्ति के विरुद्ध अभियोजन किया जा सकता है? |
नहीं। |
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धारा 17 का विषय क्या है? |
अधिनियम का राज्य विधियों के अधीन निरुद्ध व्यक्तियों के संबंध में प्रभावी न होना। (Act not to have effect with respect to detentions under State laws) |
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धारा 17(1) के अधीन राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 की कोई बात किन निरोध-आदेशों पर लागू नहीं होगी? |
राज्य विधि के अधीन किए गए ऐसे निरोध-आदेशों पर जो राष्ट्रीय सुरक्षा अध्यादेश, 1980 के प्रारम्भ के ठीक पूर्व प्रवृत्त हैं। |
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धारा 17(1) के अधीन किन व्यक्तियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 का प्रभाव नहीं होगा? |
ऐसे व्यक्तियों पर जिनके संबंध में राज्य विधि के अधीन किया गया निरोध-आदेश राष्ट्रीय सुरक्षा अध्यादेश, 1980 के प्रारम्भ के ठीक पूर्व प्रवृत्त है। |
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धारा 17(1) के अधीन ऐसे व्यक्ति का निरोध किसके द्वारा शासित होगा? |
राज्य विधि के उपबंधों द्वारा। |
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धारा 17(1) के अधीन "राज्य अध्यादेश" से क्या अभिप्रेत है? |
राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित वह अध्यादेश जिसके अधीन निरोध-आदेश किया गया हो। |
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धारा 17(1)(i) के अधीन राज्य अध्यादेश का स्थान प्रारम्भ के पूर्व किसने लेने पर कौन-सी विधि लागू होगी? |
राज्य विधान-मण्डल द्वारा पारित अधिनियमिति द्वारा स्थान लेने पर वही अधिनियमिति लागू होगी। |
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धारा 17(1)(i) के अधीन राज्य अध्यादेश का स्थान कब अधिनियमिति ने लिया होना चाहिए? |
ऐसे प्रारम्भ के पूर्व। |
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धारा 17(1)(ii) के अधीन राज्य अध्यादेश का स्थान कब अधिनियमिति ने लिया होना चाहिए? |
ऐसे प्रारम्भ के पश्चात्। |
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धारा 17(1)(ii) के अधीन प्रारम्भ के पश्चात् पारित अधिनियमिति का लागू होना किस तक सीमित होना चाहिए? |
राज्य अध्यादेश के अधीन प्रारम्भ के पूर्व किए गए निरोध-आदेशों तक। |
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धारा 17(1) के अधीन ऐसे व्यक्तियों का निरोध किस प्रकार शासित होगा? |
मानो यह अधिनियम अधिनियमित ही न किया गया हो। |
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धारा 17(2) के अधीन क्या धारा 17 उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्ति के विरुद्ध धारा 3 के अधीन निरोध-आदेश करने का वर्जन करती है? |
नहीं। |
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धारा 17(2) के अधीन धारा 3 के अधीन नया निरोध-आदेश कब किया जा सकता है? |
जब पूर्व प्रवृत्त निरोध-आदेश किसी भी कारणवश प्रवृत्त नहीं रह जाता है। |
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धारा 17(2) के अधीन कौन-सा पूर्ववर्ती निरोध-आदेश प्रवृत्त नहीं रहना चाहिए? |
राष्ट्रीय सुरक्षा अध्यादेश, 1980 के प्रारम्भ के ठीक पूर्व प्रवृत्त निरोध-आदेश। |
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धारा 17 के स्पष्टीकरण के अधीन "राज्य विधि" से क्या अभिप्रेत है? |
ऐसी विधि जो धारा 3(2) के आधारों में से किसी या सभी आधारों पर निवारक निरोध का उपबंध करती हो और अध्यादेश के प्रारम्भ के ठीक पूर्व किसी राज्य में प्रवृत्त हो। |
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धारा 17 के स्पष्टीकरण के अधीन "राज्य विधि" किन आधारों पर निवारक निरोध का उपबंध करती है? |
धारा 3(2) के अधीन निरोध-आदेश किए जाने वाले सभी या किसी आधार पर। |
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धारा 18 का विषय क्या है? |
निरसन और व्यावृत्ति। (Repeal and saving) |
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धारा 18(1) के अधीन किसका निरसन किया जाता है? |
राष्ट्रीय सुरक्षा अध्यादेश, 1980 (1980 का 11) का। |
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धारा 18(2) के अधीन निरसन के होते हुए भी उक्त अध्यादेश के अधीन की गई बातों या कार्रवाइयों का क्या प्रभाव होगा? |
वे राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएंगी। |
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धारा 18(2) के अधीन उक्त अध्यादेश के अधीन की गई बातों या कार्रवाइयों को किस प्रकार समझा जाएगा? |
मानो राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980, 23 सितम्बर, 1980 को प्रवृत्त हो गया हो। |
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धारा 18(2) के अधीन किस धारा के अधीन किए गए निर्देश का विशेष उल्लेख किया गया है? |
उक्त अध्यादेश की धारा 10 के अधीन किए गए निर्देश का। |
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धारा 18(2) के अधीन कौन-सा निर्देश लंबित होना चाहिए? |
उक्त अध्यादेश की धारा 10 के अधीन किया गया निर्देश, जो राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त होने की तारीख से ठीक पूर्व किसी सलाहकार बोर्ड के समक्ष लंबित हो। |
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धारा 18(2) के अधीन लंबित मामले में सलाहकार बोर्ड द्वारा कार्रवाई कब चालू रखी जा सकेगी? |
जिस तारीख को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त होती है, उसके पश्चात्। |
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धारा 18(2) के अधीन लंबित मामले में सलाहकार बोर्ड द्वारा कार्रवाई किस प्रकार जारी रखी जा सकेगी? |
मानो ऐसा बोर्ड राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 की धारा 9 के अधीन गठित किया गया हो। |
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धारा 18(2) के अधीन किस बोर्ड को धारा 9 के अधीन गठित माना जाएगा? |
वह सलाहकार बोर्ड जिसके समक्ष उक्त अध्यादेश की धारा 10 के अधीन निर्देश लंबित है। |
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