बिहार पुलिस अधिनियम, 2007 वन लाइनर नोट्स

Download Android App    Download iOS App
Note: 1. Use ORG Code: XLVPGR For IOS and Web APP. 2. To Download the PDF it is necessary to download the App. 3. You can Use Only Sigle Device to access the Courses on App

Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

Download Bihar Police Act One Liner Notes PDF

 

बिहार पुलिस अधिनियम, 2007

(BIHAR POLICE ACT, 2007)

 

बिहार पुलिस अधिनियम, 2007 की प्रस्तावना का विषय क्या है?

पुलिस सेवा की स्थापना, प्रबंधन तथा मानव अधिकारों के संरक्षण हेतु अधिनियम।

कानून का प्रथम दायित्व क्या बताया गया है?

व्यक्तियों के मानव अधिकारों का संवर्द्धन एवं उनके सिविल, राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अधिकारों का संरक्षण।

राज्य का संवैधानिक दायित्व क्या है?

अल्पसंख्यकों सहित कमजोर वर्गों के हितों की सुरक्षा हेतु निष्पक्ष एवं सक्षम पुलिस सेवा उपलब्ध कराना।

राज्य को नागरिकों के प्रति क्या आदर करना आवश्यक है?

नागरिकों की प्रजातान्त्रिक भावनाओं का आदर करना।

पुलिस सेवा के लिए आवश्यक गुण क्या बताए गए हैं?

पेशेवर रूप से संगठित, सेवा उन्मुखी, बाहरी प्रभावों से मुक्त एवं कानून के प्रति जवाबदेह होना।

पुलिस की भूमिका के पुनः निर्धारण की आवश्यकता क्यों है?

उभरती सुरक्षा चुनौतियों, सुशासन और मानव अधिकारों के सम्मान के कारण।

पुलिस के किन पहलुओं की पुनः व्याख्या आवश्यक मानी गई है?

पुलिस की भूमिका, कर्तव्य और उत्तरदायित्व।

पुलिस को सशक्त बनाने का उद्देश्य क्या है?

उसे कार्यकुशल, प्रभावी, जनअनुकूल और उत्तरदायी एजेंसी बनाना।

नए कानून की आवश्यकता क्यों बताई गई है?

पुलिस सेवा की स्थापना और प्रबंधन के लिए।

यह अधिनियम किसके द्वारा अधिनियमित किया गया है?

बिहार राज्य विधान मण्डल द्वारा।

यह अधिनियम भारत गणराज्य के किस वर्ष में अधिनियमित हुआ?

अठावनवें वर्ष में।

 

अध्याय-I

(Chapter-I)

प्रारम्भिक

(Preliminary)

धारा 1 का विषय क्या है?

संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारंभ।

(Short title, extent and commencement)

इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम क्या है?

बिहार पुलिस अधिनियम, 2007

 

यह अधिनियम कब से प्रभावी होगा?

30 मार्च, 2007 से।

धारा 1 की उपधारा () में संशोधन किस अधिनियम द्वारा किया गया?

बिहार पुलिस (संशोधन) अधिनियम, 2014 द्वारा।

संशोधन के अनुसार प्रभावी होने की तिथि क्या निर्धारित की गई है?

30 मार्च, 2007

इस अधिनियम का क्षेत्रीय विस्तार कहाँ तक है?

सम्पूर्ण बिहार राज्य में।

धारा 2 का विषय क्या है?

इस धारा में परिभाषाएँ (Definitions) दी गई हैं।

धारा 2() का विषय क्या है?

अधिनियम

(Act)

धारा 2() मेंअधिनियमकी परिभाषा क्या है?

अधिनियमसे तात्पर्य बिहार पुलिस अधिनियम, 2007 है।

धारा 2() का विषय क्या है?

पशु

(“Cattle)

धारा 2() मेंपशुकी परिभाषा क्या है?

पशुमें सींग वाले पशु के अलावा हाथी, ऊट, घोड़ा, गधा, खच्चर, भेड़, बकरी और सूअर शामिल हैं।

धारा 2() का विषय क्या है?

विद्रोह

(“Rebel”)

धारा 2() मेंविद्रोहकी परिभाषा क्या है?

जनसंख्या के किसी समूह या वर्ग द्वारा, भारत के किसी भू-भाग को अलग करने सहित किसी राजनीतिक उद्देश्य से, राज्य के विरुद्ध किया गया सशस्त्र संघर्ष।

धारा 2() का विषय क्या है?

आन्तरिक सुरक्षा

(Internal security)

धारा 2() मेंआन्तरिक सुरक्षाकी परिभाषा क्या है?

राज्य के भीतर विघटनकारी और राष्ट्र-विरोधी ताकतों से राज्य की संप्रभुता और एकता का संरक्षण।

धारा 2() का विषय क्या है?

उग्रवादी गतिविधियाँ

(Militant activity)

धारा 2() मेंउग्रवादी गतिविधियोंकी परिभाषा क्या है?

किसी समूह द्वारा, अपने राजनीतिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए, विस्फोटकों, ज्वलनशील पदार्थों, आग्नेय शस्त्रों या अन्य घातक हथियारों या खतरनाक पदार्थों का प्रयोग करते हुए की जाने वाली हिंसक कार्रवाई।

धारा 2() का विषय क्या है?

संगठित अपराध

(Organized Crimes”)

धारा 2() मेंसंगठित अपराधोंकी परिभाषा क्या है?

व्यक्तियों के किसी समूह या नेटवर्क द्वारा गैर कानूनी लाभ लेने के आशय से हिंसक तरीकों या धमकी या हिंसा का प्रयोग करते हुए किया गया अपराध।

धारा 2() का विषय क्या है?

आतंकवादी गतिविधियाँ

(Terrorist Activities)

धारा 2() मेंआतंकवादी गतिविधियोंकी परिभाषा क्या है?

किसी व्यक्ति या समूह द्वारा समाज में आतंक फैलाने और विधि-सम्मत सरकार को उखाड़ने के उद्देश्य से विस्फोटकों, ज्वलनशील पदार्थों, आग्नेय शस्त्रों, अन्य घातक हथियारों, हानिकारक गैसों या अन्य रसायनों अथवा अन्य खतरनाक पदार्थों का प्रयोग करते हुए की जाने वाली कार्रवाई।

धारा 2() का विषय क्या है?

साइबर अपराध

(Cyber Crimes)

धारा 2() मेंसाइबर अपराधकी परिभाषा क्या है?

सूचना प्रौद्योगिकी आधारभूत ढांचा से संबंधित आपराधिक क्रियाकलाप, गैरकानूनी पहुंच, अवरोध, आंकड़े प्रणाली में हस्तक्षेप, उपकरणों का दुरुपयोग, आईडी की चोरी एवं इलेक्ट्रोनिक कपट।

धारा 2() का विषय क्या है?

नैतिक अधमता

(Moral Turpitude)

धारा 2() मेंनैतिक अधमताकी परिभाषा क्या है?

ऐसा अपराध जिसमें हिंसा, छल, धोखाधड़ी, ड्रग्स या राज्य के विरुद्ध अपराध शामिल हो या ऐसा अपराध जिसमें 3 वर्ष या अधिक की सजा विहित हो।

धारा 2() का विषय क्या है?

सरकार

(“Government)

धारा 2() मेंसरकारकी परिभाषा क्या है?

बिहार राज्य सरकार।

धारा 2() का विषय क्या है?

मुख्य सचिव

(Chief Secretary)

धारा 2() मेंमुख्य सचिवकी परिभाषा क्या है?

सरकार के मुख्य सचिव।

धारा 2() का विषय क्या है?

सार्वजनिक आमोद स्थल और सार्वजनिक मनोरंजन स्थल

(Place of public amusement and public entertainment)

धारा 2() मेंसार्वजनिक आमोद स्थल और सार्वजनिक मनोरंजन स्थलकी परिभाषा क्या है?

ऐसा स्थल जहां जनता शुल्क सहित या बिना शुल्क के प्रवेश कर सकती है, जैसे सिनेमा, थियेटर, विवाह स्थल, स्टेडियम आदि।

धारा 2() का विषय क्या है?

पुलिस जिला

(Police district)

धारा 2() मेंपुलिस जिलाकी परिभाषा क्या है?

अध्याय II के खण्ड 7 के तहत अधिसूचित भू-भाग, जो राजस्व जिला से भिन्न है।

धारा 2() का विषय क्या है?

पुलिस अधिकारी

(“Police officer)

धारा 2() मेंपुलिस अधिकारीकी परिभाषा क्या है?

इस अधिनियम के तहत गठित बिहार पुलिस सेवा का कोई सदस्य।

धारा 2() का विषय क्या है?

सार्वजनिक स्थल

(Public place)

धारा 2() मेंसार्वजनिक स्थलकी परिभाषा क्या है?

ऐसा स्थल जहां जनता प्रवेश कर सकती है, जिसमें सार्वजनिक इमारत, स्मारक भवन एवं उनकी प्रसीमाएं तथा पानी, धुलाई, स्नान या मनोरंजन हेतु सुलभ स्थान शामिल हैं।

धारा 2() का विषय क्या है?

विनियमनों

(Regulation)

धारा 2() मेंविनियमनोंकी परिभाषा क्या है?

बिहार पुलिस अधिनियम, 2007 के अधीन बनाए गए विनियम।

धारा 2() का विषय क्या है?

नियमों

(Rule)

धारा 2() मेंनियमोंकी परिभाषा क्या है?

इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियम।

धारा 2() का विषय क्या है?

मजिस्ट्रेट

(Magistrate)

धारा 2() मेंमजिस्ट्रेटकी परिभाषा क्या है?

दंड प्रक्रिया संहिता (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 ) के अधीन परिकल्पित कार्यपालक मजिस्ट्रेट।

धारा 2() का विषय क्या है?

जिला मजिस्ट्रेट

(District Magistrate)

धारा 2() मेंजिला मजिस्ट्रेटकी परिभाषा क्या है?

सरकार द्वारा एक या एक से अधिक जिलों के लिए नियुक्त जिला मजिस्ट्रेट।

धारा 2() का विषय क्या है?

अनुमंडल मजिस्ट्रेट

(Sub-Divisional Magistrate)

धारा 2() मेंअनुमंडल मजिस्ट्रेटकी परिभाषा क्या है?

सरकार द्वारा एक या एक से अधिक अनुमंडलों के लिए नियुक्त अनुमंडल अधिकारी।

धारा 2() का विषय क्या है?

जिला पुलिस अधीक्षक

(District superintendent of Police)

धारा 2() मेंजिला पुलिस अधीक्षककी परिभाषा क्या है?

सरकार द्वारा नियुक्त सहायक जिला अधीक्षक या अन्य व्यक्ति जो इस अधिनियम के अधीन जिला पुलिस अधीक्षक के कर्तव्यों का निष्पादन करता है, जिसमें रेल जिला भी शामिल है।

धारा 2() का विषय क्या है?

सम्पत्ति

(Property)

धारा 2() मेंसम्पत्तिकी परिभाषा क्या है?

चल-अचल सम्पत्ति, बैंक खाता, निवेश या बहुमूल्य प्रतिभूति।

धारा 2() का विषय क्या है?

जिला

(District)

धारा 2() मेंजिलाकी परिभाषा क्या है?

सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत अधिसूचित राजस्व भू-भाग।

धारा 2() का विषय क्या है?

अधीक्षण की शक्ति

(Power of superintendence)

धारा 2() मेंअधीक्षण की शक्तिकी परिभाषा क्या है?

अनुसंधान से संबंधित कार्यपालक एवं प्रशासनिक मामलों में निदेश, मार्गदर्शन, हिदायत देने तथा प्रशासनिक आदेश को निरस्त, पलटने, मंसूख या पुनरीक्षण करने की शक्ति।

धारा 2() का विषय क्या है?

पद

(Post)

धारा 2() मेंपदोंकी परिभाषा क्या है?

अधीनस्थ पद और पर्यवेक्षीय पद।

धारा 2() का विषय क्या है?

पर्यवेक्षीय पद

(Superintending Post)

धारा 2() मेंपर्यवेक्षीय पदोंकी परिभाषा क्या है?

उप/सहायक पुलिस अधीक्षक और उनसे ऊपर के पद।

धारा 2(कःक) का विषय क्या है?

अधीनस्थ पद

(Subordinating Post)

धारा 2(कःक) मेंअधीनस्थ पदोंकी परिभाषा क्या है?

सहायक पुलिस अधीक्षक अथवा पुलिस उप अधीक्षक के स्तर से नीचे के सदस्य।

धारा 2(खःख) का विषय क्या है?

निर्धारित

(Prescribed)

धारा 2(खःख) मेंनिर्धारितकी परिभाषा क्या है?

नियम, आदेश, परिपत्र, अधिसूचना आदि के माध्यम से सरकार द्वारा निर्धारित।

धारा 2(2) का विषय क्या है?

अपरिभाषित शब्दों और वाक्यांशों का अर्थ

धारा 2(2) में अपरिभाषित शब्दों और वाक्यांशों का आशय क्या होगा?

वही जो सामान्य खंड अधिनियम, 1897, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 )  और भारतीय दंड संहिता, 1860 (भारतीय न्याय संहिता 2023) में दिया गया है।

 

अध्याय-II

(Chapter-II)

पुलिस सेवा का गठन एवं संगठन

(Constitutional and Organisation of Police Service)

धारा 3 का विषय क्या है?

राज्य के लिए पुलिस सेवा

(Police Service of the State)

धारा 3 के अनुसार सम्पूर्ण पुलिस संगठन को क्या माना जायेगा?

सरकार के तहत इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए एक पुलिस सेवा।

धारा 3 के अनुसार पुलिस सेवा के सदस्यों की तैनाती कैसे की जा सकती है?

राज्य में सेवा की विशिष्ट शाखाओं सहित किसी भी शाखा में तैनात किया जा सकता है।

धारा 4 का विषय क्या है?

पुलिस सेवा का गठन

(Constitution of the Police Service)

धारा 4(1) के अनुसार सम्पूर्ण पुलिस संगठन को क्या माना जायेगा?

सरकार के अधीन एक पुलिस सेवा माना जायेगा और औपचारिक रूप से नामांकन किया जायेगा।

धारा 4(1) के अनुसार पुलिस सेवा में किनका समावेश होगा?

अधिकारियों एवं कर्मियों की संख्या तथा विशेष प्रयोजन के लिए पुलिस बल जैसे बिहार सैन्य पुलिस एवं दंगा रोधी मिश्रित बल।

धारा 4(1) के अनुसार पुलिस सेवा का गठन कैसे किया जायेगा?

जैसा कि सरकार द्वारा समय-समय पर आदेश दिया जाये।

धारा 4(2) के अनुसार पुलिस कर्मियों का वेतन, भत्ते और सेवा शर्तें कैसे निर्धारित होंगी?

नियम, अधिसूचना या आदेश द्वारा सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित की जायेंगी।

धारा 5 का विषय क्या है?

महानिदेशक, अपर महानिदेशकों, महानिरीक्षकों, उप एवं सहायक महानिरीक्षकों की नियुक्ति

(Appointment of Director General, Additional Director General, Inspector General, Deputy and Assistant Inspector General)

धारा 5(1) के अनुसार पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति कौन करेगा?

सरकार।

धारा 5(1) के अनुसार पुलिस महानिदेशक क्या करेगा?

निर्धारित शक्तियों का प्रयोग करेगा, कार्यों एवं कर्तव्यों का निर्वहन करेगा और निर्धारित उत्तरदायित्व एवं प्राधिकार प्राप्त करेगा।

धारा 5(2) के अनुसार किन-किन अधिकारियों की नियुक्ति सरकार कर सकती है?

एक या अधिक अपर महानिदेशक तथा आवश्यकतानुसार महानिरीक्षक, उप एवं सहायक महानिरीक्षक।

धारा 6 का विषय क्या है?

पुलिस महानिदेशक का चयन एवं कार्यकाल

(Selection and Tenure of Director General of Police)

धारा 6(1) के अनुसार पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति किन अधिकारियों के पैनल से की जाएगी?

ऐसे अधिकारियों के पैनल से जो पहले से पुलिस महानिदेशक हों या समिति द्वारा प्रोन्नति हेतु योग्य पाए गए हों।

धारा 6(1) के अनुसार समिति द्वारा किन नियमों के अधीन जांच की जाती है?

अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1951 के अधीन बनाए गए नियमों के अधीन।

धारा 6(2) के अनुसार पुलिस महानिदेशक का कार्यकाल कितना होगा?

सामान्यतः दो वर्ष।

धारा 6(2) के अनुसार कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व स्थानांतरण कब किया जा सकता है?

सरकार द्वारा निर्दिष्ट कारणों के आधार पर।

धारा 6(2)() के अनुसार पुलिस महानिदेशक को कब हटाया जा सकता है?

जब वह किसी न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध हो या भ्रष्टाचार/नैतिक अधमता के मामले में आरोपित हो।

धारा 6(2)() के अनुसार पुलिस महानिदेशक को कब हटाया जा सकता है?

जब वह शारीरिक या मानसिक रोग या अन्य कारणों से कर्तव्यों के निर्वहन में असमर्थ हो।

धारा 6(2)() के अनुसार पुलिस महानिदेशक का स्थानांतरण कब किया जा सकता है?

राज्य या केन्द्र सरकार के अधीन उच्चतर पद पर प्रोन्नति होने पर, उसकी सहमति के अधीन।

धारा 6(2)() के अनुसार पुलिस महानिदेशक को कब हटाया जा सकता है?

कर्तव्यों के कारगर निर्वहन के हित में किसी अन्य प्रशासनिक कारण से।

धारा 7 का विषय क्या है?

पुलिस जिले

(Police District)

धारा 7 के अनुसार पुलिस जिला किस प्रकार घोषित किया जाता है?

सरकार द्वारा अधिसूचना के माध्यम से।

धारा 7 के अनुसार पुलिस जिले का पुलिस प्रशासन किसमें निहित होगा?

पुलिस अधीक्षक में।

धारा 7 के अनुसार पुलिस प्रशासन किसके नियंत्रण एवं निदेश के अधीन होगा?

जिला मजिस्ट्रेट के सामान्य नियंत्रण एवं निदेश के अधीन।

धारा 7 के अनुसार पुलिस अधीक्षक की सहायता कौन करता है?

अधिसूचित अपर, सहायक या उप अधीक्षक।

धारा 8 का विषय क्या है?

पुलिस थाने

(Police Station)

धारा 8(1) के अनुसार पुलिस थानों की स्थापना कौन करता है?

सरकार अधिसूचना के माध्यम से।

धारा 8(1) के अनुसार पुलिस थानों की स्थापना किन बातों को ध्यान में रखकर की जाती है?

जनसंख्या, क्षेत्र, अपराध की स्थिति, कानून-व्यवस्था, कार्यभार और दूरी।

धारा 8(2) के अनुसार एक पुलिस सर्किल के तहत कितने पुलिस थाने हो सकते हैं?

दो या अधिक पुलिस थाने।

धारा 8(3) के अनुसार पुलिस थाने का प्रमुख कौन होता है?

थानाध्यक्ष (स्टेशन हाउस ऑफिसर)

धारा 8(3) के अनुसार थानाध्यक्ष का स्तर क्या होगा?

पुलिस अवर निरीक्षक से कम नहीं।

धारा 8(3) के प्रावधानानुसार बड़े पुलिस थानों का पर्यवेक्षण किसके द्वारा किया जा सकता है?

पुलिस निरीक्षक स्तर के अधिकारी द्वारा।

धारा 8(4) के अनुसार पुलिस थाने में कार्मिकों की संख्या कैसे निर्धारित होगी?

राज्य सरकार द्वारा सामान्य या विशेष आदेश से।

धारा 8(5) के अनुसार प्रत्येक पुलिस थाने में क्या स्थापित होगा?

महिला एवं बाल संरक्षण डेस्क।

धारा 8(5) के अनुसार इस डेस्क में किसकी तैनाती की जाएगी?

जहां तक संभव हो महिला पुलिस कार्मिक।

धारा 8(6) के अनुसार पुलिस थाना क्या प्रदर्शित करेगा?

उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों गिरफ्तारी से संबंधित सभी प्रासंगिक जानकारी।

धारा 9 का विषय क्या है?

अनुसूचित जातियों/जनजातियों पर अत्याचार रोकने के लिए थाने

(Police Station to prevent atrocities against Scheduled Castes/Scheduled Tribes)

धारा 9(1) के अनुसार ऐसे पुलिस थानों का गठन कौन करता है?

सरकार अधिसूचना द्वारा।

धारा 9(1) के अनुसार ऐसे थाने किस उद्देश्य से गठित किए जाते हैं?

अनुसूचित जातियों/जनजातियों पर अत्याचार रोकने के लिए।

धारा 9(2) के अनुसार मामलों की जांच कौन करेगा?

पुलिस उप अधीक्षक से नीचे का नहीं अधिकारी।

धारा 10 का विषय क्या है?

अधीनस्थ पदों पर स्थानान्तरण एवं तैनाती

(Transfer and Posting on Subordinate Posts)

धारा 10(1) के अनुसार निरीक्षक से कांस्टेबल स्तर तक के पुलिस कर्मियों की पदस्थापना कौन करता है?

जिला पुलिस अधीक्षक, इकाई प्रमुख और पुलिस महानिदेशक।

धारा 10(1) के अनुसार निरीक्षक से कांस्टेबल स्तर तक के पुलिस कर्मियों का एक जिले में कार्यकाल कितना होगा?

05 वर्ष।

धारा 10(1) के अनुसार रेंज में कार्यकाल कितना होगा?

08 वर्ष।

धारा 10(1) के अनुसार इकाइयों में कुल कार्यकाल कितना होगा?

08 वर्ष।

धारा 10(1) के अनुसार रेंज के भीतर एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरण कौन करता है?

समिति जिसके अध्यक्ष क्षेत्रीय उप महानिरीक्षक/महानिरीक्षक होते हैं।

धारा 10(1) के अनुसार अंतर-क्षेत्रीय स्थानांतरण हेतु समितियों का गठन कौन करता है?

पुलिस महानिदेशक, राज्य सरकार की स्वीकृति के पश्चात।

धारा 10(2) के अनुसार थानाध्यक्ष, सर्किल/अनुमंडल प्रभारी या जिला पुलिस अधीक्षक का न्यूनतम कार्यकाल कितना होगा?

कम से कम 2 वर्ष।

धारा 10(2)() के अनुसार अधिकारी को कब स्थानांतरित किया जा सकता है?

उच्चतर पद पर प्रोन्नति होने पर।

धारा 10(2)() के अनुसार स्थानांतरण कब किया जा सकता है?

दांडिक अपराध में दोषसिद्धि या आरोप लगाए जाने पर।

धारा 10(2)() के अनुसार स्थानांतरण कब किया जा सकता है?

शारीरिक या मानसिक रोग या अन्य कारण से कर्तव्यों के निर्वहन में असमर्थता पर।

धारा 10(2)() के अनुसार स्थानांतरण कब किया जा सकता है?

रिक्ति को भरने की आवश्यकता होने पर।

धारा 10(2)() के अनुसार स्थानांतरण कब किया जा सकता है?

कर्तव्यों के कारगर निर्वहन के हित में अन्य प्रशासनिक कारणों से।

धारा 11 का विषय क्या है?

ग्रामीण पुलिस पर जिला पुलिस अधीक्षक का प्राधिकार

(Authority of District Superintendent of Police over Rural Police)

धारा 11 का मुख्य प्रावधान क्या है?

यह घोषणा करना सरकार के लिए विधि सम्मत होगा कि पुलिस के प्रयोजनों के लिए किसी ग्रामीण पहरेदार या अन्य ग्रामीण पुलिस अधिकारी पर ऐसे किसी प्राधिकार जिसका प्रयोग जिला मजिस्ट्रेट के द्वारा किया जा रहा है या किया जा सकेगा का प्रयोग जिला मजिस्ट्रेट के सामान्य नियंत्रण के अध्यधीन जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा किया जायेगा।

धारा 12 का विषय क्या है?

जिला प्रशासन

(District Administration)

धारा 12(1) के अनुसार दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023)  और अन्य प्रासंगिक अधिनियमों के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट के लिए यह आवश्यक होगा कि वह निम्न मामलों के संबंध में पुलिस के कार्यकरण और जिला प्रशासन की अन्य एजेन्सियों के बीच समन्वय बनाए-

कानून एवं व्यवस्था बनाये रखने,

सामाजिक सुरक्षा कानून को लागू करने,

प्राकृतिक आपदाओं को संभालने तथा भूमि सुधार करने,

किसी आन्तरिक आक्रमण से उत्पन्न स्थिति,

आवश्ययक वस्तुओं की आपूर्ति बनाये रखने को निश्चित करने,

कमजोर एवं निर्धन वर्गो के संरक्षण,

अनुसूचित जाति/जनजाति पर अत्याचार को रोकने,

मानवाधिकारों के संरक्षण, राज्य की विकास परियोजनाओं को पूरा करने, शिकायतों आदि का निवारण।

धारा 12(2) का विषय क्या है?

जानकारी मांगने और आदेश देने की शक्ति

धारा 12(2) के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट किससे जानकारी मांग सकता है?

पुलिस अधीक्षक और अन्य विभागों के विभागाध्यक्षों से।

धारा 12(2) के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट क्या कर सकता है?

समुचित आदेश पारित कर सकता है और लिखित निदेश दे सकता है।

धारा 12(3) का विषय क्या है?

पुलिस बल की तैनाती

धारा 12(3) के अनुसार पुलिस बल की तैनाती का आदेश कौन दे सकता है?

जिला मजिस्ट्रेट या अनुमंडल मजिस्ट्रेट।

धारा 12(3) के अनुसार पुलिस बल की तैनाती किन प्रयोजनों के लिए की जाती है?

कानून एवं व्यवस्था, अल्पसंख्यकों एवं कमजोर वर्गों की सुरक्षा तथा निर्वाचन हेतु।

धारा 12(3) के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट क्या सुनिश्चित करेगा?

सभी विभाग पुलिस अधीक्षक को पूरी सहायता दें।

धारा 13 का विषय क्या है?

रेलवे पुलिस

(Railway Police)

धारा 13(1) के अनुसार विशेष पुलिस जिले का सृजन कौन करता है?

सरकार अधिसूचना द्वारा।

धारा 13(1) के अनुसार विशेष पुलिस जिले में किनकी नियुक्ति की जाती है?

पुलिस अधीक्षक, सहायक/उप पुलिस अधीक्षक एवं अन्य पुलिस अधिकारी।

धारा 13(2) के अनुसार रेलवे पुलिस किसके नियंत्रण में कार्य करेगी?

पुलिस महानिदेशक के नियंत्रण में।

धारा 13(2) के अनुसार रेलवे पुलिस कौन से कार्य करेगी?

रेल प्रशासन से संबंधित एवं राज्य सरकार द्वारा सौंपे गए कार्य।

धारा 13(3) के अनुसार पुलिस अधिकारी किन शक्तियों का प्रयोग कर सकता है?

पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी के समकक्ष शक्तियाँ।

धारा 13(3) के अनुसार ये शक्तियाँ कहाँ प्रयोग की जा सकती हैं?

संबंधित विशेष जिले या उसके किसी भाग में।

धारा 13(4) के अनुसार पुलिस अधिकारी को कहाँ शक्तियाँ प्राप्त होंगी?

राज्य के प्रत्येक भाग में।

धारा 13(4) के अनुसार पुलिस अधिकारी किनके अधीन होगा?

पुलिस अधिकारियों के उत्तरदायित्वों के अधीन।

धारा 13(5) के अनुसार पुलिस अधीक्षक किसे शक्तियाँ प्रत्यायोजित कर सकता है?

सहायक या उप पुलिस अधीक्षक को।

धारा 14 का विषय क्या है?

राज्य आसूचना एवं अपराध जांच विभाग

(The State Intelligence and Crime Investigation Department)

धारा 14 के अनुसार बिहार पुलिस अधिनियम 2007 के प्रावधानों के अनुसरण में कौन सा आसूचना संबंधी विभाग होगा?

एक राज्य आसूचना विभाग होगा।

धारा 14 के अनुसार राज्य आसूचना विभाग का उद्देश्य क्या है?

आसूचना का एकत्रीकरण, समाकलन, विश्लेषण और आदान-प्रदान करना।

अपराध जांच विभाग किन अपराधों की जांच करेगा?

अंतरराज्य, अन्तर-जिला और अन्य विनिर्दिष्ट अपराधों की।

धारा 14 के अनुसार विभागों के प्रमुख की नियुक्ति कौन करेगा?

सरकार।

धारा 14 के अनुसार विभागों के प्रमुख का पद स्तर क्या होगा?

पुलिस महानिरीक्षक के समकक्ष या उससे उच्च स्तर का पुलिस अधिकारी।

धारा 14 के अनुसार अपराध जांच विभाग में विशेष स्कंध क्यों बनाए जाते हैं?

विभिन्न प्रकार के अपराधों से निपटने के लिए जिनकी जांच हेतु ध्यान केन्द्रित करने या विशेष परामर्श की आवश्यकता है।

धारा 14 के अनुसार अपराध जांच विभाग में प्रत्येक स्कंध का प्रमुख कौन होगा?

पुलिस अधीक्षक स्तर का एक अधिकारी।

धारा 14 के अनुसार सरकार को अपराध जांच विभाग और राज्य आसूचना विभाग में नियुक्ति करने की क्या शक्ति है?

आवश्यकतानुसार समुचित संख्या में विभिन्न रैंकों के अधिकारियों की नियुक्ति कर सकती है।

धारा 14 के अनुसार सरकार नियुक्ति करते समय किन बातों को दृष्टिगत रखेगी?

कार्य की मात्रा और प्रकार को।

धारा 15 का विषय क्या है?

तकनीकी एवं सहायक सेवाएं

(Technology and the assistance Services)

धारा 15 के अनुसार सरकार पुलिस सेवा की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए क्या करेगी?

सहायक तकनीकी एजेन्सियों और सेवाओं का सृजन और रख-रखाव करेगी।

धारा 15 के अनुसार सहायक तकनीकी एजेन्सियां और सेवाएं किसके समग्र नियंत्रण में होंगी?

पुलिस महानिदेशक के समग्र नियंत्रण में।

धारा 15(2)() के अंतर्गत किन सेवाओं का सृजन किया जाएगा?

राज्य स्तरीय पूर्ण-सुसज्जित अपराध विज्ञान प्रयोगशाला, प्रत्येक पुलिस रेंज के लिए क्षेत्रीय अपराध विज्ञान प्रयोगशाला और चल अपराध विज्ञान इकाइयों के सदस्य।

धारा 15 के अंतर्गत राज्य स्तरीय अपराध विज्ञान प्रयोगशाला की क्या विशेषता होगी?

वह पूर्ण-सुसज्जित होगी।

धारा 15 के अंतर्गत प्रत्येक पुलिस रेंज के लिए क्या स्थापित किया जाएगा?

एक क्षेत्रीय अपराध विज्ञान प्रयोगशाला।

धारा 15 के अंतर्गत सरकार विज्ञान और प्रावैधिकी के प्रयोग के संबंध में क्या उपाय करेगी?

पुलिस व्यवस्था के सभी पहलुओं में इसके प्रयोग को प्रोत्साहित और बढ़ाने के लिए सभी उपाय करेगी।

धारा 15 के अनुसार सरकार पुलिस दूरसंचार के लिए किन अधिकारियों की नियुक्ति कर सकती है?

एक या अधिक पुलिस दूरसंचार निदेशक।

धारा 15 के अनुसार पुलिस दूरसंचार निदेशक का न्यूनतम पद स्तर क्या होगा?

पुलिस उप महानिरीक्षक से कम नहीं।

धारा 15 के अनुसार पुलिस दूरसंचार निदेशकों की नियुक्ति का क्षेत्र क्या हो सकता है?

पूरे राज्य या उसके किसी भाग के लिए।

धारा 15 के अनुसार पुलिस दूरसंचार निदेशकों की सहायता के लिए किनकी नियुक्ति की जा सकती है?

यथावश्यक संख्या में पुलिस अधीक्षक और पुलिस उप अधीक्षक।

धारा 15 के अनुसार सरकार पुलिस परिवहन के लिए किन अधिकारियों की नियुक्ति कर सकती है?

एक या अधिक पुलिस परिवहन निदेशक।

धारा 15 के अनुसार पुलिस परिवहन निदेशक का न्यूनतम पद स्तर क्या होगा?

पुलिस उप महानिरीक्षक से कम नहीं।

धारा 15 के अनुसार पुलिस परिवहन निदेशकों की नियुक्ति का क्षेत्र क्या हो सकता है?

पूरे राज्य या उसके किसी भाग के लिए।

धारा 15 के अनुसार पुलिस परिवहन निदेशकों की सहायता के लिए किनकी नियुक्ति की जा सकती है?

यथावश्यक संख्या में पुलिस अधीक्षक और पुलिस उप अधीक्षक।

धारा 16 का विषय क्या है?

संचार विभाग

(The communication department)

धारा 16 के अंतर्गत सरकार किस प्रकार के विभाग की स्थापना करेगी?

एक पृथक संचार विभाग।

धारा 16 के अंतर्गत संचार विभाग में किन्हें नियुक्त किया जाएगा?

सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित योग्य एवं अनुभव प्राप्त अधिकारी एवं कार्मिक।

धारा 16 के अंतर्गत संचार विभाग का उद्देश्य क्या है?

जेनरेशन, प्रसारण, अभिग्रहण, संग्रहण और सभी प्रकार के डिजिटल, सनालाग एवं अन्य डाटा में सुधार सुनिश्चित करना।

धारा 16 के अंतर्गत संचार विभाग को किस प्रकार सुसज्जित किया जाएगा?

संचार की सभी आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा।

धारा 17 का विषय क्या है?

राज्य पुलिस अकादमियों के निदेशकों और पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालयों और विद्यालयों के प्राचार्यों की नियुक्ति

(Appointment of Directors of State Police Academy and Police Training Colleges and Schools)

धारा 17 के अंतर्गत सरकार राज्य स्तर पर क्या स्थापित करेगी?

एक पुलिस प्रशिक्षण अकादमी और अन्य प्रशिक्षण संस्थान।

धारा 17 के अंतर्गत प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना का उद्देश्य क्या है?

विभिन्न पदों के पुलिस कर्मियों के प्रशिक्षण के लिए।

धारा 18 का विषय क्या है?

पुलिस कार्मिक द्वारा ली जाने वाली शपथ या घोषणा

(The oath or Affirmation made by the Police Personnel)

धारा 18 के अंतर्गत बिहार पुलिस अधिनियम, 2007 के तहत पंजीकृत पुलिस सेवा के प्रत्येक सदस्य को क्या करना होगा?

नियुक्ति होने पर और प्रशिक्षण पूरा होने पर शपथ लेना या घोषणा करना होगा।

धारा 18 के अंतर्गत पुलिस कार्मिक शपथ या घोषणा कब करेगा?

नियुक्ति होने पर और प्रशिक्षण पूरा होने पर।

धारा 18 के अंतर्गत पुलिस कार्मिक शपथ या घोषणा किसके समक्ष करेगा?

पुलिस अधीक्षक या पुलिस महानिदेशक द्वारा नियुक्त अधिकारी के समक्ष।

धारा 18 के अंतर्गत पुलिस कार्मिक शपथ या घोषणा किस रूप में करेगा?

निर्धारित रूप में।

धारा 19 का विषय क्या है?

विशेष पुलिस अधिकारी

(Special Police Officer)

धारा 19 के अंतर्गत विशेष पुलिस अधिकारी की नियुक्ति के लिए कौन आवेदन कर सकता है?

पुलिस उप अधीक्षक से नीचे के स्तर का नहीं होने वाला कोई पुलिस अधिकारी।

धारा 19 के अंतर्गत विशेष पुलिस अधिकारी की नियुक्ति हेतु आवेदन किसे किया जाता है?

जिला मजिस्ट्रेट को।

धारा 19 के अंतर्गत विशेष पुलिस अधिकारी की नियुक्ति किस उद्देश्य से की जाती है?

पुलिस बल की सहायता के लिए।

धारा 19 के अंतर्गत विशेष पुलिस अधिकारी की नियुक्ति किस अवधि के लिए की जाती है?

नियुक्ति आदेश में विनिर्दिष्ट अवधि के लिए।

धारा 19 के अंतर्गत विशेष पुलिस अधिकारी बनने के लिए आयु सीमा क्या है?  

18 से 50 वर्ष के बीच।

विशेष पुलिस अधिकारी नियुक्त होने पर क्या करेगा?

निर्धारित प्रशिक्षण प्राप्त करेगा।

धारा 19 के अंतर्गत विशेष पुलिस अधिकारी को प्रशिक्षण के पश्चात क्या प्राप्त होगा?

राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित प्रपत्र में प्रमाण-पत्र।

विशेष पुलिस अधिकारी को कौन-कौन सी शक्तियां प्राप्त होंगी?

वही शक्तियां, विशेषाधिकार तथा उन्मुक्तियां जो एक सामान्य पुलिस अधिकारी को प्राप्त होती हैं।

धारा 19 के अंतर्गत विशेष पुलिस अधिकारी किन कर्तव्यों एवं उत्तरदायित्वों के अधीन होगा?

उन्हीं कर्तव्यों एवं उत्तरदायित्वों के अधीन जो एक सामान्य पुलिस अधिकारी के होते हैं।

धारा 19 के अंतर्गत विशेष पुलिस अधिकारी किन प्राधिकारियों के अधीन होगा?

उन्हीं प्राधिकारियों के अधीन जिनके अधीन एक सामान्य पुलिस अधिकारी होता है।

धारा 20 का विषय क्या है?

व्यक्तियों के लागत पर नियुक्त अतिरिक्त पुलिस अधिकारी

(Employment of Additional Police Officer at the cost of person making request)

धारा 19 के अंतर्गत किसके सामान्य निर्देश के अधीन अतिरिक्त पुलिस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की जाती है?

जिला मजिस्ट्रेट के सामान्य निर्देश के अधीन।

कौन-कौन से अधिकारी अतिरिक्त पुलिस अधिकारियों को प्रतिनियुक्त कर सकते हैं?

पुलिस महानिरीक्षक, उप पुलिस महानिरीक्षक, सहायक पुलिस महानिरीक्षक या जिला अधीक्षक।

अतिरिक्त पुलिस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति किस क्षेत्र में की जा सकती है?

सामान्य पुलिस जिला के भीतर किसी स्थान पर।

अतिरिक्त पुलिस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति किस उद्देश्य से की जाती है?

शांति बनाये रखने के वास्ते।

अतिरिक्त पुलिस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति किसके आवेदन पर की जाती है?

किसी व्यक्ति द्वारा दिये गये आवेदन पर।

अतिरिक्त पुलिस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की अवधि कैसे निर्धारित होती है?

जितना उचित समझा जाय उतने समय के लिए।

अतिरिक्त पुलिस बल किसके आदेश के अधीन कार्य करेगा?

केवल जिला अधीक्षक के आदेश के तहत।

अतिरिक्त पुलिस बल का खर्च कौन वहन करेगा?

आवेदन करने वाला व्यक्ति।

किसे अतिरिक्त पुलिस अधिकारियों को हटाने की मांग करने का अधिकार है?

वह व्यक्ति जिसके आवेदन पर प्रतिनियुक्ति की गयी हो।

अतिरिक्त पुलिस अधिकारियों को हटाने के लिए किसे सूचना दी जाती है?

पुलिस महानिरीक्षक, उप पुलिस महानिरीक्षक, सहायक पुलिस महानिरीक्षक या जिला पुलिस अधीक्षक को।

अतिरिक्त पुलिस अधिकारियों को हटाने के लिए कितनी पूर्व सूचना आवश्यक है?

एक माह की लिखित सूचना।

धारा 21 का विषय क्या है?

रेल एवं अन्य कर्मशालाओं के निकट अतिरिक्त पुलिस बल की नियुक्ति

(Employment of additional police force at Railway and at large work)

किन स्थानों के संदर्भ में धारा 21 लागू होती है?

रेल, नहर या अन्य सार्वजनिक कार्य अथवा विनिर्माण या वाणिज्यिक कारोबार के स्थान पर।

धारा 21 अंतर्गत किस स्थिति में अतिरिक्त पुलिस बल की नियुक्ति की जा सकती है?

जब ऐसे स्थान पर व्यक्तियों के गलत आचरण या उसके समुचित आशंका के कारण आवश्यकता हो।

धारा 21 अंतर्गत किस अधिकारी की संतुष्टि पर अतिरिक्त पुलिस बल की आवश्यकता निर्धारित होती है?

महानिदेशक को ऐसा प्रतीत होने पर।

धारा 21 अंतर्गत अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती किसकी सहमति से की जाती है?

सरकार की सहमति से।

धारा 21 अंतर्गत अतिरिक्त पुलिस बल को कहाँ तैनात किया जा सकता है?

ऐसे कार्य, विनिर्माण या कारोबार के स्थान पर।

धारा 21 अंतर्गत अतिरिक्त पुलिस बल को कितने समय तक नियुक्त किया जा सकता है?

जब तक ऐसी आवश्यकता बनी रहे।

धारा 21 अंतर्गत अतिरिक्त पुलिस बल के भुगतान के संबंध में आदेश देने का अधिकार किसे है?

महानिरीक्षक को।

धारा 21 अंतर्गत भुगतान के लिए आदेश किसे दिया जाता है?

उस व्यक्ति को जो कार्य, विनिर्माण या कारोबार की निधि पर नियंत्रण या अभिरक्षा करता है।

धारा 21 अंतर्गत भुगतान किस प्रकार किया जाएगा?

महानिरीक्षक के आदेशानुसार संबंधित व्यक्ति द्वारा भुगतान करवाया जाएगा।

 

अध्याय-III

(Chapter III)

पुलिस का अधीक्षण एवं प्रशासन

(Superintendence and Administration of Police Force)

धारा 22 का विषय क्या है?

राज्य पुलिस अधीक्षण का राज्य सरकार में निहित होना।

(The superintendence of the state police force to vest in the state government)

राज्य पुलिस का समग्र अधीक्षण एवं नियंत्रण किसमें निहित होता है?

राज्य सरकार में।

धारा 23 का विषय क्या है?

राज्य पुलिस बोर्ड

(The state police Board)

धारा 23 के अंतर्गत राज्य पुलिस बोर्ड की स्थापना कौन करेगा?

राज्य सरकार।

धारा 23 के अंतर्गत राज्य पुलिस बोर्ड की स्थापना कब तक की जाएगी?

इस अधिनियम के लागू होने के छह माह के भीतर।

धारा 23 के अंतर्गत राज्य पुलिस बोर्ड की स्थापना किस उद्देश्य से की जाती है?

इस अध्याय के उपबंधों के अधीन सौंपे गये कार्यों के निष्पादन के लिए।

धारा 24 का विषय क्या है?

राज्य पुलिस बोर्ड की संरचना

(Structure of the State Police Board)

धारा 24 के अंतर्गत राज्य पुलिस बोर्ड में कौन-कौन शामिल होते हैं?

मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और गृह विभाग के प्रभारी सचिव।

धारा 24 के अंतर्गत राज्य पुलिस बोर्ड का अध्यक्ष कौन होता है?

मुख्य सचिव।

धारा 24 के अंतर्गत राज्य पुलिस बोर्ड में सदस्य कौन होता है?

पुलिस महानिदेशक।

धारा 24 के अंतर्गत राज्य पुलिस बोर्ड का सदस्य सचिव कौन होता है?

गृह विभाग के प्रभारी सचिव।

धारा 25 का विषय क्या है?

राज्य पुलिस बोर्ड के कार्य

(Functions of the State Police Board)

राज्य पुलिस बोर्ड का प्रमुख कार्य क्या है?

पुलिस व्यवस्था को कार्यकुशल, कारगर, संवेदनशील एवं जवाबदेह बनाने हेतु नीति विषयक दिशा-निर्देश तैयार करना।

राज्य पुलिस बोर्ड द्वारा दिशा-निर्देश किसके अनुसार तैयार किए जाते हैं?

विधि के अनुसार।

धारा 25 के अंतर्गत पुलिस सेवा के कार्यकरण के मूल्यांकन हेतु क्या किया जाता है?

निष्पादन सूचक की पहचान की जाती है।

धारा 25 के अंतर्गत निष्पादन सूचकों में कौन-कौन से तत्व शामिल होते हैं?

पुलिस अनुसंधान एवं प्रतिक्रिया, जवाबदेही, संशोधनों का उपयोग, मानव अधिकार मानकों का अनुपालन, संचालनात्मक कार्यकुशलता, लोक संतुष्टि और पीड़ित संतुष्टि।

धारा 25 के अंतर्गत राज्य पुलिस बोर्ड द्वारा किन आधारों पर पुलिस सेवा का मूल्यांकन किया जाता है?

पहचान और निर्धारित निष्पादन सूचक तथा उपलब्ध एवं नियंत्रण वाले संसाधनों के विरुद्ध।

धारा 25 के अंतर्गत राज्य पुलिस बोर्ड द्वारा किस स्तर पर पुलिस सेवा के कार्यों की समीक्षा की जाती है?

राज्य में कुल मिलाकर जिलावार पुलिस सेवा के संगठनात्मक कार्यों की।

धारा 25 के अंतर्गत राज्य पुलिस बोर्ड द्वारा समीक्षा के साथ क्या किया जाता है?

संगठनात्मक कार्यों का मूल्यांकन किया जाता है।

धारा 26 का विषय क्या है?

मानव अधिकारों के उल्लंघन की शिकायत

(Complaint of violation of human rights)

किनके विरुद्ध शिकायतों की जांच धारा 26 के अंतर्गत की जाती है?

पुलिस कार्मिकों एवं अधिकारियों के विरुद्ध।

धारा 26 के अंतर्गत किस प्रकार की शिकायतों की जांच की जाती है?

मानव अधिकारों के उल्लंघन, दुष्प्रेरण या ऐसे उल्लंघन के निवारण में लापरवाही से संबंधित शिकायतें।

धारा 26 के अंतर्गत ऐसी शिकायतों की जांच कौन करता है?

राज्य मानवाधिकार आयोग।

धारा 26 के अंतर्गत राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन किस अधिनियम के अंतर्गत किया जाता है?

मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के खंड-21 के तहत।

धारा 26 के अंतर्गत शिकायतों की जांच किस प्रकार की जाती है?

निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार।

धारा 26 के अंतर्गत मानव अधिकारों के उल्लंघन के अतिरिक्त कौन सा अन्य मामला शामिल है?

मानव अधिकारों के उल्लंघन का दुष्प्रेरण।

धारा 26 के अंतर्गत उल्लंघन से संबंधित लापरवाही का क्या आशय है?

ऐसे उल्लंघन के निवारण में लापरवाही।

धारा 27 का विषय क्या है?

पुलिस महानिदेशक की शक्ति एवं उत्तरदायित्व

(Power and Responsibilities of the Director General of Police)

राज्य पुलिस सेवा का मुखिया कौन होता है?

पुलिस महानिदेशक।

पुलिस महानिदेशक का प्रथम उत्तरदायित्व क्या है?

सरकार द्वारा तैयार की गयी नीतियों, स्ट्रेटेजिक योजना और वार्षिक योजना को क्रियाशील करना।

पुलिस महानिदेशक किन योजनाओं को क्रियाशील करता है?

सरकार द्वारा तैयार की गयी नीतियां, स्ट्रेटेजिक योजना और वार्षिक योजना।

पुलिस महानिदेशक का द्वितीय उत्तरदायित्व क्या है?

पुलिस सेवा का संचालन, नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण कराना।

पुलिस महानिदेशक पुलिस सेवा का संचालन, नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण किस उद्देश्य से कराता है?

इसकी कार्यकुशलता, प्रभावकारिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए।

धारा 28 का विषय क्या है?

पुलिस महानिदेशक की मजिस्ट्रेट की शक्ति

(Magisterial power of the Director General of Police)

धारा 28 के अंतर्गत किसे मजिस्ट्रेट की शक्ति प्रदान की गई है?

पुलिस महानिदेशक को।

धारा 28 के अंतर्गत पुलिस महानिदेशक को मजिस्ट्रेट की शक्ति किस क्षेत्र में प्राप्त होती है?

संपूर्ण सामान्य पुलिस जिला में।

धारा 28 के अंतर्गत पुलिस महानिदेशक इन शक्तियों का प्रयोग किसके अधीन करता है?

सरकार द्वारा समय-समय पर अधिरोपित सीमाओं के अधीन।

धारा 29 का विषय क्या है?

दण्ड का प्रावधान

(Provisions of Punishment)

धारा 29  किन उपबंधों के अधीन लागू होती है?

संविधान के अनुच्छेद 311 के उपबंधों एवं सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अधीन।

धारा 29 के अंतर्गत किन अधिकारियों को दण्ड देने की शक्ति प्राप्त है?

पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस उप-महानिरीक्षक और जिला पुलिस अधीक्षक।

धारा 29 के अंतर्गत दण्ड किस श्रेणी के अधिकारियों को दिया जा सकता है?

अधीनस्थ कोटि के पुलिस अधिकारी को।

धारा 29 के अंतर्गत किन परिस्थितियों में अधीनस्थ अधिकारी को बरखास्त, निलंबित या पदावनत किया जा सकता है?

जब वह कर्तव्य का दुरुपयोग करे, निर्वहन में उपेक्षा करे या अयोग्य हो।

धारा 29 के अंतर्गत किन परिस्थितियों में अन्य दण्ड दिए जा सकते हैं?

जब अधिकारी कर्तव्य में लापरवाही या उपेक्षा करे या अपने कार्य से स्वयं को अयोग्य बना ले।

धारा 29 के अंतर्गत क्या इन अधिकारियों को कभी भी दण्ड देने की शक्ति है?

हाँ, किसी भी समय।

धारा 29 के अंतर्गत अधीनस्थ अधिकारी को कौन-कौन से प्रमुख दण्ड दिए जा सकते हैं?

जुर्माना, परिरोध, सदाचार वेतन से वंचन, या प्रतिष्ठित पद/विशेष पारिश्रमिक से वंचन।

धारा 29 के अंतर्गत जुर्माने की अधिकतम सीमा क्या है?

एक माह के वेतन से अधिक नहीं।

धारा 29 के अंतर्गत परिरोध की अधिकतम अवधि क्या है?

पंद्रह दिनों से अधिक नहीं।

धारा 29 के अंतर्गत परिरोध के दौरान कौन-कौन से कार्य कराए जा सकते हैं?

ड्रिल, अतिरिक्त गार्ड, कठोर काम या अन्य कार्य।

धारा 29 के अंतर्गत सदाचार वेतन से वंचन का क्या आशय है?

अच्छे आचरण के लिए मिलने वाले वेतन से वंचित करना।

धारा 29 के अंतर्गत प्रतिष्ठित पद या विशेष पारिश्रमिक के संबंध में क्या दण्ड दिया जा सकता है?

उससे निष्कासन या वंचन।

धारा 29 के अंतर्गत पर्यवेक्षीय कोटि के पुलिस अधिकारियों एवं कार्मिकों का स्थानान्तरण और तैनाती किससे नियंत्रित होती है?

कार्य संचालन नियम और सरकार द्वारा समय-समय पर बनाये गये अन्य नियमों से।

धारा 29 के अंतर्गत अधिकारियों का सामान्य कार्यकाल कितना होता है?

साधारणतः दो वर्ष।

धारा 29 के अंतर्गत क्या अधिकारी को दो वर्ष की अवधि पूर्ण होने से पूर्व स्थानान्तरित किया जा सकता है?

हाँ, निर्दिष्ट परिस्थितियों में।

धारा 29 के अंतर्गत किन परिस्थितियों में अधिकारी को पूर्व अवधि में स्थानान्तरित किया जा सकता है?

उच्चतर पद पर प्रोन्नति होने पर।

धारा 29 के अंतर्गत दोष सिद्धि या आरोप के संबंध में स्थानान्तरण कब संभव है?

जब किसी दांडिक अपराध में दोष सिद्धि हो या न्यायालय द्वारा आरोप लगाया गया हो।

धारा 29 के अंतर्गत अक्षम होने की स्थिति में स्थानान्तरण कब किया जा सकता है?

जब वह शारीरिक या मानसिक रोग या अन्य कारण से कर्तव्यों के निर्वहन में असमर्थ हो।

धारा 29 के अंतर्गत रिक्ति भरने के लिए स्थानान्तरण कब किया जा सकता है?

प्रोन्नति, स्थानान्तरण या सेवा-निवृत्ति से उत्पन्न रिक्ति को भरने हेतु।

धारा 29 के अंतर्गत अन्य किस आधार पर स्थानान्तरण किया जा सकता है?

प्रशासनिक कारणों से जो कर्तव्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के हित में हों।

धारा 30 का विषय क्या है?

स्थानान्तरण एवं तैनाती

(Transfer and Posting)

धारा 30 के अंतर्गत पर्यवेक्षीय कोटि के पुलिस अधिकारियों एवं कार्मिकों का स्थानान्तरण और तैनाती किससे नियंत्रित होती है?

कार्य संचालन नियम और सरकार द्वारा समय-समय पर बनाये गये अन्य नियमों से।

धारा 30 के अंतर्गत अधिकारियों का सामान्य कार्यकाल कितना होता है?

साधारणतः दो वर्ष।

धारा 30 के अंतर्गत क्या अधिकारी को दो वर्ष की अवधि पूर्ण होने से पूर्व स्थानान्तरित किया जा सकता है?

हाँ, निर्दिष्ट परिस्थितियों में।

धारा 30 के अंतर्गत किन परिस्थितियों में अधिकारी को पूर्व अवधि में स्थानान्तरित किया जा सकता है?

उच्चतर पद पर प्रोन्नति होने पर।

धारा 30 के अंतर्गत दोष सिद्धि या आरोप के संबंध में स्थानान्तरण कब संभव है?

जब किसी दांडिक अपराध में दोष सिद्धि हो या न्यायालय द्वारा आरोप लगाया गया हो।

धारा 30 के अंतर्गत अक्षम होने की स्थिति में स्थानान्तरण कब किया जा सकता है?

जब वह शारीरिक या मानसिक रोग या अन्य कारण से कर्तव्यों के निर्वहन में असमर्थ हो।

धारा 30 के अंतर्गत रिक्ति भरने के लिए स्थानान्तरण कब किया जा सकता है?

प्रोन्नति, स्थानान्तरण या सेवा-निवृत्ति से उत्पन्न रिक्ति को भरने हेतु।

धारा 30 के अंतर्गत अन्य किस आधार पर स्थानान्तरण किया जा सकता है?

प्रशासनिक कारणों से जो कर्तव्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के हित में हों।

 

अध्याय-IV

(Chapter-IV)

पुलिस की भूमिका, कार्य, कर्तव्य तथा उत्तरदायित्व

(Role, Function Duties and Responsibilities of Police)

धारा 31 का विषय क्या है?

पुलिस की भूमिका, कार्य, कर्तव्य

(Role, Function and Duty of Police)

धारा 31 के अंतर्गत पुलिस का मुख्य दायित्व क्या है?

निष्पक्ष रूप से कानून का समर्थन एवं अनुपालन कराना तथा जीवन, स्वतंत्रता, संपत्ति और मानव अधिकारों की रक्षा करना।

धारा 31 के अंतर्गत पुलिस का लोक व्यवस्था के संबंध में क्या कर्तव्य है?

लोक व्यवस्था को बनाए रखना तथा उसका संवर्धन करना।

धारा 31 के अंतर्गत पुलिस का आंतरिक सुरक्षा के संबंध में क्या कर्तव्य है?

आंतरिक सुरक्षा की रक्षा करना एवं आतंकवादी, उग्रवादी तथा साम्प्रदायिक गतिविधियों को रोकना नियंत्रित करना।

धारा 31 के अंतर्गत सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा के संबंध में क्या कर्तव्य है?

उपद्रव, हिंसा या हमलों से सड़कों, रेलवे, पुलों एवं महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं की रक्षा करना।

धारा 31 के अंतर्गत अपराध निवारण के संबंध में क्या कर्तव्य है?

निवारक कार्रवाई से अपराधों को रोकना एवं अन्य एजेंसियों को सहयोग करना।

धारा 31 के अंतर्गत सूचना प्राप्त होने पर पुलिस का क्या कर्तव्य है?

सभी सूचनाओं को दर्ज करना, पावती देना और तत्काल कार्रवाई करना।

धारा 31 के अंतर्गत शमनीय अपराधों के संबंध में क्या कर्तव्य है?

अपराध दर्ज करना, जांच करना, FIR की प्रति देना तथा अपराधियों की गिरफ्तारी अभियोजन में सहायता करना।

धारा 31 के अंतर्गत सामुदायिक संबंधों के संबंध में क्या कर्तव्य है?

सुरक्षा की भावना उत्पन्न करना, संघर्ष रोकना एवं भाईचारा बढ़ाना।

धारा 31 के अंतर्गत आपदा की स्थिति में पुलिस का क्या कर्तव्य है?

प्रथम प्रतिक्रिया देकर सहायता प्रदान करना तथा राहत पुनर्वास में सहयोग करना।

धारा 31 के अंतर्गत संकटग्रस्त व्यक्तियों के प्रति क्या कर्तव्य है?

शारीरिक या संपत्ति हानि के खतरे वाले व्यक्तियों को सहायता एवं राहत देना।

धारा 31 के अंतर्गत यातायात के संबंध में क्या कर्तव्य है?

व्यक्तियों वाहनों की सुव्यवस्थित आवाजाही सुनिश्चित करना एवं यातायात नियंत्रित करना।

धारा 31 के अंतर्गत आसूचना के संबंध में क्या कर्तव्य है?

लोक शांति, अपराध राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित आसूचना एकत्र करना एवं साझा करना।

धारा 31 के अंतर्गत दावा रहित संपत्ति के संबंध में क्या कर्तव्य है?

उसे कब्जे में लेकर सुरक्षित अभिरक्षा निपटान हेतु कार्रवाई करना।

धारा 31 के अंतर्गत लोक प्राधिकारियों के संबंध में क्या कर्तव्य है?

उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराना।

धारा 31 के अंतर्गत अन्य कर्तव्यों के संबंध में क्या प्रावधान है?

सरकार या सक्षम प्राधिकारी द्वारा दिए गए अन्य कर्तव्यों का निर्वहन करना।

धारा 31 के अंतर्गत रिकॉर्ड संधारण के संबंध में क्या कर्तव्य है?

थाने में आदतन अपराधियों एवं संगठित अपराधियों का रिकॉर्ड रखना और प्रदर्शित करना।

धारा 32 का विषय क्या है?

पुलिस अधिकारियों द्वारा डायरी का रखा जाना

(Maintenance of Diary by the Police Officer)

धारा 32 के अंतर्गत डायरी रखने का कर्तव्य किसका है?

थाना के प्रत्येक प्रभारी अधिकारी का।

धारा 32 के अंतर्गत डायरी किस प्रकार रखी जाती है?

सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित फार्म में।

धारा 32 के अंतर्गत सामान्य डायरी में क्या दर्ज किया जाता है?

सभी सूचनाएं तथा लगाए गए आरोप।

धारा 32 के अंतर्गत डायरी में किन व्यक्तियों का विवरण दर्ज किया जाता है?

गिरफ्तार किए गए सभी व्यक्तियों के नाम।

धारा 32 के अंतर्गत मुखबिर से संबंधित क्या दर्ज किया जाता है?

मुखबिर के नाम एवं अपराध।

धारा 32 के अंतर्गत जब्त सामग्री के संबंध में क्या दर्ज किया जाता है?

कब्जे से लिए गए हथियार, संपत्ति अथवा अन्य सामान।

धारा 32 के अंतर्गत गवाहों के संबंध में क्या दर्ज किया जाता है?

उन गवाहों के नाम जिनकी जांच की गई हो।

धारा 32 के अंतर्गत डायरी के निरीक्षण की शक्ति किसे है?

जिला मजिस्ट्रेट को।

धारा 32 के अंतर्गत जिला मजिस्ट्रेट को क्या अधिकार प्राप्त है?

डायरी की मांग तथा निरीक्षण करने की शक्ति।

धारा 33 का विषय क्या है?

पुलिस के सामाजिक कर्तव्य

(Social duties of the Police)

धारा 33 के अंतर्गत पुलिस का सामान्य सामाजिक कर्तव्य क्या है?

प्रत्येक पुलिस अधिकारी द्वारा निर्दिष्ट सामाजिक कर्तव्यों का पालन करना।

धारा 33 के अंतर्गत जनता के साथ व्यवहार के संबंध में क्या कर्तव्य है?

शालीनता एवं नम्रता से व्यवहार करना।

धारा 33 के अंतर्गत किन व्यक्तियों के प्रति विशेष संवेदनशीलता अपेक्षित है?

वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं एवं बच्चों के प्रति।

धारा 33 के अंतर्गत असहाय व्यक्तियों के प्रति क्या कर्तव्य है?

मार्गदर्शन करना और सहायता देना।

धारा 33 के अंतर्गत किन वर्गों को विशेष सहायता दी जानी चाहिए?

वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं, बच्चे, गरीब, दीनहीन एवं शारीरिक/मानसिक रूप से विकलांग व्यक्ति।

धारा 33 के अंतर्गत अपराध एवं दुर्घटना पीड़ितों के प्रति क्या कर्तव्य है?

उन्हें अपेक्षित सहायता एवं तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना।

धारा 33 के अंतर्गत चिकित्सा सहायता के संबंध में क्या विशेष प्रावधान है?

बिना चिकित्सकीय विधिक औपचारिकताओं के तत्काल सहायता सुनिश्चित करना।

धारा 33 के अंतर्गत मुआवजा संबंधी क्या कर्तव्य है?

पीड़ितों को मुआवजा एवं अन्य कानूनी दावों में सहायता करना।

धारा 33 के अंतर्गत संघर्ष की स्थिति में पुलिस का आचरण कैसा होना चाहिए?

निष्पक्ष एवं मानवाधिकार सिद्धांतों के अनुरूप।

धारा 33 के अंतर्गत कमजोर वर्गों के संबंध में क्या कर्तव्य है?

अल्पसंख्यकों सहित कमजोर वर्गों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना।

धारा 33 के अंतर्गत महिलाओं एवं बच्चों के उत्पीड़न के संबंध में क्या कर्तव्य है?

सार्वजनिक स्थलों एवं परिवहन में उत्पीड़न को रोकना।

धारा 33 के अंतर्गत आपराधिक एवं शोषण के विरुद्ध क्या कर्तव्य है?

जनता को, विशेषकर महिलाओं, बच्चों एवं गरीबों को सहायता प्रदान करना।

धारा 33 के अंतर्गत अभिरक्षा में रखे व्यक्तियों के संबंध में क्या कर्तव्य है?

उन्हें कानूनी रूप से मान्य आहार एवं आश्रय प्रदान करना।

धारा 33 के अंतर्गत कानूनी सहायता के संबंध में क्या कर्तव्य है?

व्यक्तियों को कानूनी सहायता योजना की जानकारी देना एवं प्राधिकारियों को सूचित करना।

धारा 33 के अंतर्गत अन्य कर्तव्यों के संबंध में क्या प्रावधान है?

सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित अन्य कर्तव्यों का पालन करना।

धारा 34 का विषय क्या है?

आकस्मिक परिस्थितियों में कर्तव्य

(Duties in emergent circumstances)

धारा 34(1) के अंतर्गत सरकार को क्या शक्ति प्राप्त है?

राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित कर किसी सेवा को अनिवार्य सेवा घोषित करने की।

धारा 34(1) के अंतर्गत अनिवार्य सेवा किस अवधि के लिए घोषित की जा सकती है?

विनिर्दिष्ट अवधि के लिए।

धारा 34(1) के अंतर्गत अनिवार्य सेवा की अवधि का क्या किया जा सकता है?

आवश्यकता अनुसार अधिसूचना द्वारा समय-समय पर विस्तारित किया जा सकता है।

धारा 34(1) के अंतर्गत सेवा को कैसे घोषित किया जाता है?

राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित कर।

धारा 34(2) के अंतर्गत पुलिस अधिकारी का क्या कर्तव्य है?

वरिष्ठ अधिकारी द्वारा दिए गए आदेश का अनुपालन करना।

धारा 34(2) के अंतर्गत आदेश किस संबंध में होता है?

अधिसूचना में विनिर्दिष्ट सेवा के संबंध में।

धारा 34(2) के अंतर्गत यह कर्तव्य कब तक लागू रहता है?

जब तक उपधारा (1) के तहत की गई घोषणा लागू रहती है।

धारा 35 का विषय क्या है?

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा अधीनस्थ अधिकारी के कर्तव्यों का निर्वहन

(Discharge of duty of any subordinate officer by the senior police officer)

धारा 35 के अंतर्गत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को क्या शक्ति प्राप्त है?

अधीनस्थ अधिकारी को सौंपे गए कर्तव्यों का स्वयं निर्वहन करने की।

धारा 35 के अंतर्गत वरिष्ठ अधिकारी किन कर्तव्यों का निर्वहन कर सकता है?

कानून या विधिवत आदेश द्वारा अधीनस्थ को सौंपे गए कर्तव्य।

धारा 35 के अंतर्गत वरिष्ठ अधिकारी अधीनस्थ के कार्यों में क्या कर सकता है?

सहायता और समर्थन कर सकता है।

धारा 35 के अंतर्गत वरिष्ठ अधिकारी को अधीनस्थ के कार्यों के संबंध में क्या अतिरिक्त शक्ति है?

उनके कार्यों का अधिक्रमण या बचाव कर सकता है।

 

अध्याय-V

(Chapter-V)

जांच में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए अपराधों की प्रभावी जांच

(Effective investigation of offences by using science and technology in investigation)

धारा 36 का विषय क्या है?

विशेष जांच इकाईयों का गठन

(Constitution of special investigation unit)

धारा 36 के अंतर्गत विशेष जांच इकाईयों का गठन कौन कर सकता है?

राज्य सरकार।

धारा 36 के अंतर्गत विशेष जांच इकाईयों का गठन कहाँ किया जाता है?

अपराध प्रभावित क्षेत्रों में।

धारा 36 के अंतर्गत विशेष जांच इकाई का अध्यक्ष किस स्तर का अधिकारी होगा?

राज्य संवर्ग के पुलिस अवर निरीक्षक से नीचे की कोटि का नहीं।

धारा 36 के अंतर्गत विशेष जांच इकाई में कौन-कौन शामिल होंगे?

आर्थिक और जघन्य अपराधों की जांच हेतु आवश्यक संख्या में अधिकारी एवं स्टाफ।

धारा 36 के अंतर्गत इकाई के कर्मियों को अन्य कार्यों में कब लगाया जा सकता है?

केवल पुलिस महानिदेशक की लिखित अनुमति से।

धारा 36 के अंतर्गत सामान्यतः इकाई के कर्मियों के संबंध में क्या प्रावधान है?

उन्हें अन्य कार्यों में नहीं लगाया जाएगा।

धारा 37 का विषय क्या है?

विशेष अपराध जांच इकाईयों में तैनात अधिकारियों का चयन

(Selection of officers deputed in special crime investigation units)

धारा 37 के अंतर्गत विशेष अपराध जांच इकाईयों में अधिकारियों का चयन किस आधार पर किया जाता है?

अभिरुचि, व्यावसायिक दक्षता एवं निष्ठा के आधार पर।

धारा 37 के अंतर्गत अधिकारियों की व्यावसायिक दक्षता कैसे बढ़ाई जाती है?

जांच तकनीक एवं अपराध विज्ञान तकनीक से संबंधित वैज्ञानिक उपस्करों के प्रयोग का प्रशिक्षण देकर।

धारा 38 का विषय क्या है?

विशेष अपराध जांच इकाईयों में तैनात अधिकारियों का कार्यकाल

(Tenure of officers posted in special crime investigation unit)

धारा 38 के अंतर्गत विशेष अपराध जांच इकाईयों में तैनात अधिकारियों का सामान्य कार्यकाल कितना होता है?

सामान्यतः तीन वर्ष।

धारा 38 के अंतर्गत कार्यकाल पूर्ण होने के बाद अधिकारियों के साथ क्या किया जाता है?

उन्हें कानून एवं व्यवस्था तथा अन्य कार्यों में बारी-बारी से लगाया जाता है।

धारा 39 का विषय क्या है?

विशेष अपराध जांच इकाईयों में तैनात अधिकारियों के कार्य

(Functions of the officers posted in special crime investigation units)

धारा 39(1) के अंतर्गत विशेष अपराध जांच इकाईयों के अधिकारी किन मामलों की जांच करते हैं?

हत्या, अपहरण, बलात्कार, डकैती, लूट, दहेज अपराध, धोखाधड़ी, दुर्विनियोजन एवं अन्य आर्थिक अपराध।

धारा 39(1) के अंतर्गत इन अपराधों का निर्धारण कौन करता है?

पुलिस महानिदेशक द्वारा अधिसूचित।

धारा 39(1) के अंतर्गत विशेष अपराध जांच इकाई के अधिकारी और कौन से मामले जांच सकते हैं?

जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा विशेष रूप से सौंपे गए मामले।

धारा 39(2) के अंतर्गत अन्य अपराधों की जांच कौन करता है?

पुलिस थानों में तैनात अन्य स्टाफ।

धारा 40 का विषय क्या है?

विशेष अपराध के मामलों की जांच का पर्यवेक्षण

(Supervision of investigation of cases of special offence)

धारा 40 के अंतर्गत जांच का प्रारंभिक पर्यवेक्षण किसके अधीन होता है?

संबंधित थानाध्यक्ष (स्टेशन हाउस ऑफिसर) के पर्यवेक्षण में।

धारा 40 के अंतर्गत विशेष अपराध जांच मामलों का जिला स्तर पर पर्यवेक्षण कौन करता है?

ऐसा अधिकारी जो पुलिस अपर अधीक्षक से नीचे की कोटि का नहीं होगा।

धारा 40 के अंतर्गत पर्यवेक्षण करने वाला अधिकारी किसे रिपोर्ट करता है?

जिला पुलिस अधीक्षक को सीधे।

धारा 40 के अंतर्गत पर्यवेक्षीय अधिकारी की सहायता कौन करता है?

उप पुलिस अधीक्षक रैंक के अधिकारी।

धारा 40 के अंतर्गत उप पुलिस अधीक्षक की नियुक्ति किस उद्देश्य से की जाती है?

गुणवत्ता पूर्ण जांच सुनिश्चित करने के लिए।

धारा 40 के अंतर्गत छोटे जिलों में पर्यवेक्षण हेतु कौन नियुक्त किया जाता है?

पुलिस उप अधीक्षक की कोटि का अधिकारी।

धारा 40 के अंतर्गत छोटे जिलों में यह व्यवस्था कब लागू होती है?

जब कार्य की मात्रा अपर पुलिस अधीक्षक की तैनाती के लिए पर्याप्त हो।

धारा 41 का विषय क्या है?

विशेष जांच प्रकोष्ठों का सृजन

(Creation of special investigation cell)

धारा 41 के अंतर्गत विशेष जांच प्रकोष्ठों का सृजन कहाँ किया जाता है?

प्रत्येक पुलिस जिला मुख्यालय में।

धारा 41 के अंतर्गत विशेष जांच प्रकोष्ठ किन अपराधों की जांच हेतु बनाए जाते हैं?

आर्थिक अपराधों सहित गंभीर एवं अन्य जटिल अपराधों की जांच आरंभ करने हेतु एक या अधिक विशेष जॉच प्रकोष्ठों का सृजन किया जायेगा

धारा 41 के अंतर्गत प्रकोष्ठों में अधिकारियों एवं कर्मचारियों की संख्या कैसे निर्धारित होती है?

राज्य सरकार द्वारा उचित समझे अनुसार।

धारा 41 के अंतर्गत विशेष जांच प्रकोष्ठ किसके नियंत्रण में कार्य करते हैं?

पुलिस अपर अधीक्षक के सीधे नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण में।

धारा 42 का विषय क्या है?

विशेष जांच प्रकोष्ठ हेतु विशेष रूप से अधिकारियों एवं कर्मचारियों का चयन

(Special selection of officers and staff for special investigation cell)

धारा 42 के अंतर्गत प्रकोष्ठ में तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों के संबंध में क्या प्रावधान है?

प्रकोष्ठ में तैनात किये जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को विशेष रूप से चयनित एवं प्रशिक्षित भी किया जायेगा।

 

धारा 43 का विषय क्या है?

आपराधिक जांच विभाग

(Crime investigation department)

धारा 43 के अंतर्गत अपराध जांच विभाग किन अपराधों की जांच करता है?

अंतर्राज्यीय, अंतर जिला या अन्य गंभीर स्वरूप के अपराधों की।

धारा 43 के अंतर्गत ऐसे अपराधों का निर्धारण कौन करता है?

राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना के माध्यम से।

धारा 43 के अंतर्गत जांच किसके द्वारा सौंपे जाने पर की जाती है?

पुलिस महानिदेशक द्वारा।

धारा 44 का विषय क्या है?

विशिष्ट जांच कौशल

(Special investigation skill)

धारा 44 के अंतर्गत अपराध जांच विभाग में किस प्रकार की इकाइयाँ होंगी?

साइबर अपराध, संगठित अपराध, मानव हत्या, आर्थिक अपराध एवं अन्य अपराधों की जांच हेतु विशिष्ट इकाइयाँ।

धारा 44 के अंतर्गत इन इकाइयों का गठन किसके द्वारा किया जाता है?

राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना के माध्यम से।

धारा 45 का विषय क्या है?

अपराध जांच विभाग में अधिकारियों का चयन

(Selection of officers of crime investigation department)

धारा 45 के अंतर्गत अपराध जांच विभाग में अधिकारियों का चयन किन आधारों पर किया जाता है?

अभिरूचि, व्यावसायिक दक्षता, अनुभव एवं निष्ठा के आधार पर।

धारा 45 के अंतर्गत चयन के पश्चात अधिकारियों के लिए क्या प्रावधान है?

उन्हें समुचित प्रशिक्षण दिया जाएगा।

धारा 45 के अंतर्गत अधिकारियों के ज्ञान एवं कौशल का उन्नयन कैसे किया जाता है?

पुनश्चर्या एवं विशिष्ट पाठ्यक्रमों के माध्यम से समय-समय पर।

धारा 46 का विषय क्या है?

अपराध जांच विभाग में तैनात अधिकारियों का कार्यकाल

(Tenure of officers posted in crime investigation department.)

धारा 46 के अंतर्गत अपराध जांच विभाग में तैनात अधिकारियों का सामान्य कार्यकाल कितना होता है?

सामान्यतः तीन वर्ष।

धारा 46 के अंतर्गत क्या अधिकारियों को कार्यकाल पूर्ण होने से पूर्व हटाया जा सकता है?

हाँ, कारणों को लेखबद्ध करने पर।

धारा 46 के अंतर्गत अधिकारियों को कब हटाया जा सकता है?

जब कारणों को लेखबद्ध कर ऐसा करना आवश्यक हो।

धारा 47 का विषय क्या है?

विधिक सलाहकार एवं अपराध विश्लेषक

(Legal advisor and offence analysts.)

धारा 47 के अंतर्गत विधिक सलाहकार एवं अपराध विश्लेषक किस उद्देश्य से नियुक्त किए जाते हैं?

जांच अधिकारियों का मार्गदर्शन, सुझाव देने और सहायता करने के लिए।

धारा 47 के अंतर्गत विधिक सलाहकार एवं अपराध विश्लेषक कहाँ उपलब्ध कराया जाता है?

अपराध जांच विभाग को।

धारा 47 के अंतर्गत विधिक सलाहकार एवं अपराध विश्लेषक की संख्या कैसी होती है?

समुचित संख्या में।

 

अध्याय-VI

(Chapter-VI)

प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं विकास

(Training, research and development)

धारा 48 का विषय क्या है?

प्रशिक्षण नीति

(Training policy)

धारा 48 के अंतर्गत प्रशिक्षण नीति कौन तैयार करेगा?

राज्य सरकार।

धारा 48 के अंतर्गत प्रशिक्षण नीति किन बातों को ध्यान में रखकर तैयार की जाती है?

पुलिस व्यवस्था की वर्तमान एवं प्रत्याशित अपेक्षाओं को ध्यान में रखकर।

धारा 48 के अंतर्गत प्रशिक्षण नीति का स्वरूप क्या है?

प्रशिक्षण-सह-शिक्षा नीति।

धारा 48 के अंतर्गत प्रशिक्षण नीति का उद्देश्य क्या है?

प्रशिक्षण नीति का उद्देश्य पुलिस से संबंधित विषयों की जानकारी प्रदान करना, पुलिस कार्मिकों में व्यावसायिक (professional) कुशलता विकसित करना, सही प्रवृत्ति जागृत करना और संवैधानिक एवं नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देना होगा।

धारा 49 का विषय क्या है?

पुलिस कार्मिक की कुशलता एवं प्रशिक्षण

(Efficiency and training of police personnel)

धारा 49 के अंतर्गत प्रशिक्षण नीति में क्या सुनिश्चित किया जाएगा?

पुलिस कार्मिक अपने कार्यों का कुशलतापूर्वक संपादन करने हेतु पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित हों।

धारा 49 के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भागीदारी का क्या महत्व है?

सफल भागीदारी को पदोन्नति एवं तैनाती से जोड़ा जाएगा।

धारा 49 के अंतर्गत यह प्रावधान किसके द्वारा अधिसूचित ढांचे के अनुसार लागू होता है?

सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित ढांचे के अनुसार।

धारा 49 के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संबंध किनसे जोड़ा जाता है?

विभिन्न रैंकों के पुलिस कार्मिकों की पदोन्नति एवं तैनाती से।

धारा 50 का विषय क्या है?

प्रशिक्षण हेतु बुनियादी ढाँचा एवं क्षमता का सृजन

(Creation of basic infrastructure and capacity development for training)

धारा 50 के अंतर्गत प्रशिक्षण संस्थाओं के बुनियादी ढांचे एवं क्षमता का सृजन और उन्नयन कौन करेगा?

राज्य सरकार।

धारा 50 के अंतर्गत यह सृजन एवं उन्नयन किसके अनुरूप किया जाता है?

विभिन्न कोटियों के पुलिस कार्मिकों की समग्र प्रशिक्षण आवश्यकताओं के अनुरूप।

धारा 50 के अंतर्गत यह कार्य कब-कब किया जाता है?

समय-समय पर।

धारा 51 का विषय क्या है?

अनुसंधान एवं विकास

(Research and development)

धारा 51 के अंतर्गत राज्य पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो की स्थापना कौन कर सकता है?

राज्य सरकार।

धारा 51 के अंतर्गत ब्यूरो की स्थापना किन संसाधनों के उपबंध के साथ की जाती है?

कर्मियों, निधि एवं अन्य संसाधनों के उपबंध के साथ।

धारा 51 के अंतर्गत ब्यूरो का उद्देश्य क्या है?

पुलिस के कार्यकरण एवं कार्य संपादन में सुधार हेतु अनुसंधान एवं विश्लेषण करना।

धारा 51 के अंतर्गत अनुसंधान एवं विश्लेषण किस प्रकार किया जाता है?

उन विषयों और मसलों पर नियमित अनुसंधान एवं विश्लेषण करे जिससे पुलिस के कार्यकरण एवं कार्य संपादन में सुधार हो सके।

धारा 51 के अंतर्गत सरकार को और क्या शक्ति प्राप्त है?

सरकार अन्य प्रतिष्ठित संगठनों एवं संस्थाओं में पुलिस व्यवस्था से सुसंगत विषयों में विशेष अध्ययन एवं अनुसंधान भी प्रायोजित कर सकेगी।

धारा 52 का विषय क्या है?

पुलिस कार्य हेतु तकनीकी सहायता

(Police Task Development Technical Assistance)

धारा 52 के अंतर्गत तकनीकी सहायता प्रदान करने का प्रावधान किसके लिए है?

अपराध की जांच, पता लगाने एवं पुलिस व्यवस्था के अन्य कार्यों के लिए।

धारा 52 के अंतर्गत तकनीक विकसित करने की शक्ति किसे है?

सरकार अपराध की जांच करने एवं पता लगाने और पुलिस व्यवस्था संबंधी अन्य कार्यों में वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहायता हेतु तकनीक विकसित करने के लिए भी समुचित उपाय कर सकेगी।

धारा 53 का विषय क्या है?

राज्य पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के कार्य

(Functions of State Police Research and Development Bureau)

धारा 53 के अंतर्गत राज्य पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के प्रमुख कार्य क्या है?

देश के भीतर या विदेश में अन्य पुलिस संगठनों द्वारा सफलतापूर्वक व्यवहार में लाये गये आधुनिकतम उपकरणों एवं नवीनतम प्राद्योगिकी की जानकारी रखना तथा राज्य पुलिस द्वारा ऐसे उपकरणों एवं प्रौद्योगिकी को अंगीकार किये या अन्यथा काम में लाए जाने के संबंध में मूल्यांकन करना। इनमें ऐसे नवीन उत्पाद, अस्त्र-शस्त्र, दंगा नियंत्रण उपकरण, यातायात नियंत्रण उपकरण, पुलिस परिवहन तथा विभिन्न वैज्ञानिक एवं इलैक्ट्रोनिक उपकरण शामिल हो सकेंगे जो अनुसंधान या पुलिस व्यवस्था विषयक अन्य कार्यों के लिए उपयोगी हों,

भारत सरकार के पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो, अकादमियों, प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संगठनों, संस्थाओं एवं प्रयोगशलाओं और संदर्भित विषयक निजी क्षेत्र के उपक्रमों के साथ संपर्क एवं सहयोग करना,

राज्य में पुलिस व्यवस्था की विशिष्ट एवं उभरती समस्याओं का अध्ययन करना ताकि उनका समाधान एवं उपचारी उपाय किये जा सकें,

पुलिस व्यवस्था की विद्यमान प्रणाली की जॉच करना तथा पुलिस के कार्यकरण को अधिक कुशल एवं प्रतिक्रियाशील बनाने के लिए पुलिस में किये जानेवाले ढांचागत, संस्थागत एवं अन्य आवश्यक परिवर्तनों का सुझाव देना, और

राज्य पुलिस की आधुनिकीकरण एवं प्रशिक्षण नीतियों के प्रभाव का समवर्ती रूप से मूल्यांकन एवं प्रलेखन करना तथा इसके निष्कर्षो की रिपोर्ट पुलिस महानिदेशक एवं सरकार को देना।

 

अध्याय-VII

(Chapter-VII)

(नियंत्रण और अनुशासन)

(CONTROL AND DISCIPLINE)

धारा 54 का विषय क्या है?

विनियम, नियंत्रण एवं अनुशासन

(Regulation control and discipline)

धारा 54 के अंतर्गत नियम, विनियम बनाने या आदेश जारी करने की शक्ति किसे है?

पुलिस महानिदेशक को।

धारा 54 के अंतर्गत यह शक्ति किसके अनुमोदन के अधीन है?

राज्य सरकार के अनुमोदन के अधीन।

धारा 54 के अंतर्गत राज्य सरकार के अनुमोदन के अध्यधीन पुलिस महानिदेशक किसके लिए ऐसे नियम, विनियम बनाएगा अथवा आदेश जारी करेगा जो इस अधिनियम अथवा किसी समय लागू अन्य किसी अधिनियम के प्रतिकूल हों:-

अपराध की रोकथाम एवं जांच;

पुलिस संगठन तथा पुलिस अधिकारियों द्वारा निष्पादित किए गए कार्य का विनियमन एवं निरीक्षण;

पुलिस सेवा को प्रदान किए जाने वाले शस्त्रों, साज-सामान, वस्त्र तथा अन्य साधनों का विवरण एवं मात्रा निर्धारित करना;

सभी रैंकों एवं ग्रेडों के अधिकारियों को ड्यूटियां सौंपना तथा वह तरीका एवं शर्ते निर्धारित करना जिनके अध्यधीन वे अपनी-अपनी शक्तियों एवं कर्तव्यों का प्रयोग एवं निर्वहन करेंगे;

पुलिस द्वारा आसूचना एवं सूचना के संग्रहण एवं संचार को विनियमित करना;

रखे जाने वाले रिकार्ड, रजिस्टर तथा प्रपत्र और विभिन्न पुलिस यूनिटों एवं अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाली विवरणियां निर्धारित करना;

पुलिस को सामान्यतः अधिक कुशल बनाना एवं उनके द्वारा शक्ति के दुरूपयोग तथा कर्तव्यों की उपेक्षा को रोकना।

धारा 55 का विषय क्या है?

नियम एवं विनियम बनाने की शक्ति

(Power to make Rules and Regulations)

धारा 55 के अंतर्गत नियमावली बनाने की शक्ति किसे है?

राज्य सरकार को।

धारा 55 के अंतर्गत नियमावली किस उद्देश्य से बनाई जाती है?

पुलिस का विनियमन, नियंत्रण और अनुशासन के लिए नियमावली बनाएगी;

परन्तु, यह और कि, इस अधिनियम के अधीन नया पुलिस हस्तक, बनाए जाने तक वर्तमान बिहार और उड़ीसा सैन्य पुलिस हस्तक, 1933  और पुलिस हस्तक, तथा विद्यमान नियमवली, विनियम, अधिसूचनाएं, आदेश और परिपत्र लागू रहेंगे, मानो वे इस अधिनियम के अधीन उपबंधित हों।

धारा 56 का विषय क्या है?

पुलिस अधिकारी सदैव ड्यूटी पर

(Police Officer always on duty)

धारा 56(1) के अंतर्गत किन अधिकारियों को सदैव ड्यूटी पर माना जाता है?

जो छुट्टी पर हों और निलंबित हों।

धारा 56(1) के अंतर्गत अधिकारी को किस प्रयोजन हेतु सदैव ड्यूटी पर समझा जाता है?

इस अधिनियम के सभी प्रयोजनों के लिए।

धारा 56(1) के अंतर्गत अधिकारी को कहाँ तैनात किया जा सकता है?

राज्य के किसी भी भाग में।

धारा 56(1) के अंतर्गत अधिकारी को कब तैनात किया जा सकता है?

किसी भी समय।

धारा 57 का विषय क्या है?

पुलिस अधिकारी की तैनाती

(Posting of Police Officer)

धारा 57 के अंतर्गत पुलिस अधिकारी कब तक अपनी ड्यूटी नहीं छोड़ सकता है?

जब तक उसे समुचित रूप से प्राधिकृत किया जाए।

धारा 57 के अंतर्गत पुलिस अधिकारी अपने नियुक्ति या तैनाती स्थल से कब हट सकता है?

केवल समुचित प्राधिकरण प्राप्त होने पर।

धारा 57 के स्पष्टीकरण के अनुसार कब यह माना जाएगा कि अधिकारी ने अपने कर्तव्यों से स्वयं को विमुख कर लिया है?

जब वह अधिकृत छुट्टी समाप्त होने पर बिना तर्कसंगत कारण ड्यूटी पर रिपोर्ट नहीं करता है।

धारा 58 का विषय क्या है?

पुलिस अधिकारी द्वारा कोई अन्य रोजगार नहीं किया जाना

(Police Officer not to engage in other employment)

धारा 58 के अंतर्गत पुलिस अधिकारी को किस बात पर प्रतिबंध है?

अपने कर्तव्यों के अतिरिक्त अन्य रोजगार या लाभ का पद धारण करने पर।

धारा 58 के अंतर्गत यह प्रतिबंध किन पर लागू होता है?

सभी पुलिस अधिकारियों पर।

 

अध्याय-VIII

(Chapter-VIII)

पुलिस की जवाबदेही

(Responsibility of Police)

आचरण के लिये उत्तरदायित्व

(Accountability for conduct)

धारा 59 का विषय क्या है?

जिला उत्तरदायित्व प्राधिकरण

(District Accountability Authority)

धारा 59 के तहत जिला उत्तरदायित्व प्राधिकरण की स्थापना कौन करेगा?

सरकार।

धारा 59 के अनुसार जिला उत्तरदायित्व प्राधिकरण की स्थापना कहाँ की जाएगी?

प्रत्येक जिला में।

धारा 59(1) के अनुसार जिला उत्तरदायित्व प्राधिकरण किन कार्यों के लिए स्थापित किया जाएगा?

धारा 60 में उल्लिखित कार्यों के लिए।

धारा 59(2) के अनुसार जिला उत्तरदायित्व प्राधिकरण के अध्यक्ष कौन होंगे?

जिला मजिस्ट्रेट।

धारा 59(2) के अनुसार जिला उत्तरदायित्व प्राधिकरण का सदस्य कौन होगा?

पुलिस अधीक्षक।

धारा 59(2) के अनुसार जिला उत्तरदायित्व प्राधिकरण का सदस्य सचिव कौन होगा?

वरिष्ठ अपर जिला मजिस्ट्रेट/अपर समाहर्ता।

धारा 60 का विषय क्या है?

जिला उत्तरदायित्व प्राधिकरण के कार्य

(Functions of the District Accountability Authority)

धारा 60(1) के अनुसार जिला उत्तरदायित्व प्राधिकरण क्या करेगा?

निर्दिष्ट कार्य करेगा।

धारा 60(1)() के अनुसार प्राधिकरण का एक कार्य क्या है?

जिला पुलिस अधीक्षक से प्राप्त तिमाही रिपोर्ट के जरिए कदाचार संबंधी विभागीय जांचों अथवा कार्रवाई की स्थिति की मॉनीटरिंग करना।

धारा 60(1)() के अनुसार मॉनीटरिंग किसके माध्यम से की जाएगी?

जिला पुलिस अधीक्षक से समय-समय पर प्राप्त तिमाही रिपोर्ट के जरिए।

धारा 60(1)() के अनुसार किन अधिकारियों के विरुद्ध शिकायतों की मॉनीटरिंग की जाएगी?

सहायक/उप पुलिस अधीक्षक से नीचे के रैंक के अधिकारियों के विरुद्ध।

धारा 60(1)() के अनुसार जांच में अनावश्यक देरी होने पर प्राधिकरण क्या करेगा?

जांच को तेजी से पूरा करने के लिए जिला पुलिस अधीक्षक को उचित सलाह देगा।

धारा 60(2) के अनुसार शिकायतकर्ता कब प्राधिकरण के समक्ष मामला लाता है?

जब विभागीय जांच में असाधारण देरी हो या प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन हो और वह परिणाम से असंतुष्ट हो।

धारा 60(2) के अनुसार प्राधिकरण किन अधिकारियों के विरुद्ध शिकायत पर कार्रवाई कर सकता है?

सहायक उप पुलिस अधीक्षक से नीचे के रैंक के अधिकारियों के विरुद्ध।

धारा 60(2) के अनुसार प्राधिकरण क्या निर्देश दे सकता है?

जिला पुलिस अधीक्षक को जांच किसी अन्य अधिकारी से कराने के निर्देश।

धारा 60 के परन्तु उपबंध के अनुसार उपधारा (1) और (2) का क्या प्रभाव नहीं माना जाएगा?

यह नहीं माना जाएगा कि वे जिला पुलिस अधीक्षक के अनुशासनिक, पर्यवेक्षकीय और प्रशासनिक नियंत्रण का तनुकरण करते हैं।धारा 61 का विषय क्या है?

 धारा 61 का विषय क्या है?

जिला उत्तरदायित्व प्राधिकरण की रिपोर्ट

(Report of the District Accountability Authority)

धारा 61(1) के अनुसार जिला उत्तरदायित्व प्राधिकरण को कौन-सी रिपोर्ट तैयार करनी होती है?

वार्षिक रिपोर्ट।

धारा 61(1) के अनुसार वार्षिक रिपोर्ट कब तक तैयार की जाएगी?

प्रत्येक कैलेंडर वर्ष के समाप्त होने से पहले।

धारा 61(1) के अनुसार वार्षिक रिपोर्ट किसके समक्ष प्रस्तुत की जाएगी?

सरकार के समक्ष।

धारा 61(1) के अनुसार वार्षिक रिपोर्ट में क्या शामिल होगा?

अन्य बातों के साथ-साथ निर्दिष्ट विवरण।

धारा 61(1)() के अनुसार रिपोर्ट में क्या शामिल होगा?

वर्ष के दौरान सरकार एवं जिला पुलिस अधीक्षकों को अग्रेषित कदाचार के मामलों की संख्या और प्रकार।

धारा 61(1)() के अनुसार रिपोर्ट में क्या शामिल होगा?

वर्ष के दौरान मॉनीटर किए गए मामलों की संख्या और प्रकार।

धारा 61(1)() के अनुसार रिपोर्ट में क्या शामिल होगा?

शिकायतकर्ताओं द्वारा विभागीय जांच से असंतुष्ट होकर भेजे गए कदाचार के मामलों की संख्या एवं प्रकार।

धारा 61(1)() के अनुसार रिपोर्ट में क्या शामिल होगा?

() में संदर्भित मामलों में पुलिस को आगे की कार्रवाई हेतु जारी सलाह या निर्देशों की संख्या और प्रकार।

धारा 61(1)(.) के अनुसार रिपोर्ट में क्या शामिल होगा?

पुलिस की जवाबदेही बढ़ाने के उपायों से संबंधित सिफारिश।

धारा 62 का विषय क्या है?

शिकायतकर्ता के अधिकार

(Right of the complainant)

धारा 62(1) के अनुसार शिकायतकर्ता अपनी शिकायत कहाँ दर्ज कर सकता है?

विभागीय पुलिस प्राधिकारियों या जिला उत्तरदायित्व प्राधिकरण के पास।

धारा 62(1) के अनुसार शिकायत किस संबंध में की जा सकती है?

पुलिस कार्मिकों के कदाचार के संबंध में।

धारा 62(1) के परन्तु उपबंध के अनुसार कब शिकायत पर विचार नहीं किया जाएगा?

जब शिकायत की विषय वस्तु की जांच किसी अन्य आयोग या न्यायालय द्वारा की जा रही हो।

धारा 62(1) के परन्तु उपबंध के अनुसार कौन ऐसी शिकायत पर विचार नहीं करेगा?

आयोग या जिला प्राधिकरण।

धारा 62(2) के अनुसार शिकायतकर्ता को क्या अधिकार प्राप्त है?

जांच की प्रगति की सूचना समय-समय पर प्राप्त करने का अधिकार।

धारा 62(2) के अनुसार जांच पूर्ण होने पर शिकायतकर्ता को क्या सूचना दी जाएगी?

जांच के निष्कर्षों और मामले में अंतिम कार्रवाई की सूचना।

धारा 63 का विषय क्या है?

सद्भावनापूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण

(Protection of action taken in good faith)

धारा 63 के अनुसार किस प्रकार के कार्यों के लिए संरक्षण प्रदान किया गया है?

इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार सद्भावनापूर्वक किए गए या किए जाने वाले कार्यों के लिए।

धारा 63 के अनुसार किनके विरुद्ध मुकदमा या अन्य कानूनी कार्रवाई स्वीकार्य नहीं होगी?

राज्य सरकार के विरुद्ध।

धारा 63 के अनुसार किन अन्य निकायों को संरक्षण प्राप्त है?

राज्य पुलिस बोर्ड।

धारा 63 के अनुसार किन पुलिस निकायों को संरक्षण प्राप्त है?

किसी पुलिस अधिकारी या पुलिस उत्तरदायित्व प्राधिकरण।

धारा 63 के अनुसार पुलिस उत्तरदायित्व प्राधिकरण के किन व्यक्तियों को संरक्षण प्राप्त है?

इसके सदस्य एवं कर्मचारी।

धारा 63 के अनुसार किन व्यक्तियों को अतिरिक्त रूप से संरक्षण प्राप्त है?

बोर्ड या प्राधिकरण के निर्देशन में कार्य कर रहे व्यक्ति।

धारा 63 के अनुसार जिला स्तर पर किनको संरक्षण प्राप्त है?

जिला उत्तरदायित्व प्राधिकरण के सदस्य एवं कर्मचारी।

धारा 63 के अनुसार संरक्षण का स्वरूप क्या है?

उनके विरुद्ध कोई मुकदमा या अन्य कानूनी कार्रवाई स्वीकार्य नहीं होगी।

धारा 64 का विषय क्या है?

अशांत या खतरनाक जिलों में अतिरिक्त पुलिस रखना

(Deputing additional police in disturbed or turbulent districts)

धारा 64(1) के अनुसार सरकार किन परिस्थितियों में क्षेत्र को अशांत या खतरनाक घोषित कर सकती है?

जब क्षेत्र अशांत या खतरनाक स्थिति में पाया जाए या निवासियों के आचरण से पुलिस की संख्या बढ़ाना समीचीन हो।

धारा 64(1) के अनुसार घोषणा किस क्षेत्र के लिए की जा सकती है?

सरकार के प्राधिकार के अधीन आने वाले किसी क्षेत्र के लिए।

धारा 64(2) के अनुसार अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने का अधिकार किसे है?

सरकार की स्वीकृति से पुलिस महानिदेशक या सरकार द्वारा प्राधिकृत अन्य अधिकारी को।

धारा 64(2) के अनुसार अतिरिक्त पुलिस बल कहाँ तैनात किया जाएगा?

उद्घोषणा में विनिर्दिष्ट क्षेत्र में।

धारा 64(2) के अनुसार अतिरिक्त पुलिस बल किसके अतिरिक्त होगा?

साधारणतया नियत बल के अतिरिक्त।

धारा 64(3) के अनुसार अतिरिक्त पुलिस बल की लागत कौन वहन करेगा?

उद्घोषणा में वर्णित क्षेत्र के निवासी।

धारा 64(3) के अनुसार लागत वहन किसके अधीन होगा?

उपधारा (5) के उपबंधों के अध्यधीन।

धारा 64(4) के अनुसार लागत का प्रभाजन कौन करेगा?

जिला मजिस्ट्रेट।

धारा 64(4) के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट किस आधार पर लागत का प्रभाजन करेगा?

निवासियों के अलग-अलग साधनों के आधार पर।

धारा 64(4) के अनुसार लागत किन निवासियों में विभाजित की जाएगी?

जो उसे वहन करने के भागी हों और जिन्हें छूट दी गई हो।

धारा 64(4) के अनुसार प्रभाजन से पूर्व क्या किया जाएगा?

जिला मजिस्ट्रेट द्वारा उचित समझी जाने वाली जांच।

धारा 64(5) के अनुसार लागत से छूट देने का अधिकार किसे है?

सरकार को।

धारा 64(5) के अनुसार छूट किन्हें दी जा सकती है?

निवासियों में से किसी व्यक्ति, वर्ग या समुदाय को।

धारा 64(6) के अनुसार उद्घोषणा में क्या उल्लेखित किया जाएगा?

उसकी लागू रहने की अवधि।

धारा 64(6) के अनुसार उद्घोषणा के संबंध में सरकार क्या कर सकती है?

इसे वापस ले सकती है या आगे की अवधि के लिए जारी रख सकती है।

धारा 64 के स्पष्टीकरण के अनुसार "निवासी" में कौन शामिल हैं?

भूमि या अचल संपत्ति धारण करने वाले व्यक्ति, उनके एजेंट या सेवक।

धारा 64 के स्पष्टीकरण के अनुसार "निवासी" में कौन-से भूस्वामी शामिल हैं?

जो रैयतों या दखलकारों से सीधे लगान वसूल करते हों, चाहे वे क्षेत्र में रहते हों या नहीं।

धारा 64 के स्पष्टीकरण के अनुसार "निवासी" में और कौन शामिल हैं?

उस क्षेत्र के वास्तविक निवासी, चाहे वे भूस्वामी हों या नहीं।

धारा 65 का विषय क्या है?

निवासियों अथवा भूमि में हितबद्ध व्यक्तियों के कदाचार से उपहत व्यक्तियों को प्रतिकर प्रदान करना

(Providing compensation to the persons suffering from the conduct of the resident or persons having interest in land)

धारा 65(1) के अनुसार यह प्रावधान किस क्षेत्र पर लागू होता है?

ऐसे क्षेत्र पर जहाँ धारा 64 के अंतर्गत उद्घोषणा लागू हो।

धारा 65(1) के अनुसार प्रतिकर कब दिया जा सकता है?

जब निवासियों के कदाचार से मृत्यु, गंभीर उपहति या संपत्ति की हानि/क्षति हुई हो।

धारा 65(1) के अनुसार प्रतिकर के लिए आवेदन कौन कर सकता है?

ऐसा व्यक्ति जो कदाचार से उपहत होने का दावा करता हो।

धारा 65(1) के अनुसार आवेदन किसे दिया जाएगा?

जिला मजिस्ट्रेट या अनुमंडल मजिस्ट्रेट को।

धारा 65(1) के अनुसार आवेदन की समय-सीमा क्या है?

क्षति की तारीख से एक माह के भीतर या निर्धारित कम अवधि के भीतर।

धारा 65(2) के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट क्या करेगा?

आवश्यक जांच के बाद सरकार की स्वीकृति से कार्रवाई करेगा।

धारा 65(2) के अनुसार यह कार्रवाई कब की जा सकती है?

चाहे अतिरिक्त पुलिस बल धारा 64 के अंतर्गत रखा गया हो या नहीं।

धारा 65(2)() के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट क्या घोषित करेगा?

उन व्यक्तियों की घोषणा करेगा जिन्हें कदाचार से क्षति हुई हो।

धारा 65(2)() के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट क्या निर्धारित करेगा?

प्रतिकर की राशि और उसके वितरण की रीति।

धारा 65(2)() के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट क्या निर्धारित करेगा?

निवासियों द्वारा भुगतान किए जाने वाले अनुपात का निर्धारण।

धारा 65(2) के अनुसार किन निवासियों पर भुगतान का दायित्व होगा?

जिन्हें उपधारा (3) के अंतर्गत छूट दी गई हो।

धारा 65(2) के परन्तु उपबंध के अनुसार घोषणा/निर्धारण कब नहीं किया जाएगा?

जब तक यह संतोष हो कि क्षति दंगे या गैरकानूनी सभा से हुई है और पीड़ित दोषमुक्त है।

धारा 65(3) के अनुसार प्रतिकर भुगतान से छूट देने का अधिकार किसे है?

सरकार को।

धारा 65(3) के अनुसार छूट किन्हें दी जा सकती है?

किसी व्यक्ति या निवासियों के वर्ग/समुदाय को।

धारा 65(4) के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट के आदेश की स्थिति क्या है?

प्रमंडल आयुक्त या सरकार द्वारा पुनरीक्षण के अधीन अंतिम होगा।

धारा 65(5) के अनुसार प्रतिकर से संबंधित सिविल वाद का क्या प्रावधान है?

कोई सिविल वाद चलाने योग्य नहीं होगा।

धारा 65(6) के स्पष्टीकरण के अनुसार "निवासी" का क्या अर्थ है?

वही जो धारा 64 में दिया गया है।

 

अध्याय-IX

(Chapter-IX)

सामान्य अपराध, दण्ड तथा उत्तरदायित्व, गलियों तथा सार्वजनिक स्थानों में व्यवस्था

(Common offence, punishment and responsibilities. Arrangements in lane and public places)

धारा 66 का विषय क्या है?

जन सभाओं तथा जुलूसों का विनियमन

(Regulations of public meetings and processions)

धारा 66(1) के अनुसार किसका कर्तव्य निर्धारित किया गया है?

जनसभा या जुलूस आयोजित करने का इरादा रखने वाले व्यक्ति का।

धारा 66(1) के अनुसार किसे सूचना देना आवश्यक है?

संबंधित पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को।

धारा 66(1) के अनुसार सूचना किस रूप में दी जाएगी?

लिखित रूप में।

धारा 66(1) के अनुसार सूचना किन मामलों में दी जाएगी?

सड़क, गली या आम रास्ते पर जुलूस या सार्वजनिक स्थल पर सभा के आयोजन हेतु।

धारा 66(2)() के अनुसार किस रैंक का अधिकारी संचालन का निर्देश दे सकता है?

कम से कम सहायक उप पुलिस अधीक्षक रैंक का अधिकारी।

धारा 66(2)() के अनुसार अधिकारी क्या निर्देश दे सकता है?

सभाओं और जुलूसों के संचालन का निर्देश।

धारा 66(2)() के अनुसार अधिकारी क्या निर्धारित कर सकता है?

जुलूस के गुजरने का मार्ग और समय।

धारा 66(2)() के अनुसार कब लाइसेंस के लिए आवेदन करने की अपेक्षा की जाएगी?

जब जनसभा या जुलूस से शांति भंग होने की संभावना हो।

धारा 66(2)() के अनुसार यह राय किसकी होगी?

जिला मजिस्ट्रेट या अनुमंडल मजिस्ट्रेट की।

धारा 66(2)() के अनुसार किसे आवेदन करने की अपेक्षा की जाएगी?

जनसभा आयोजित/बुलाने वाले या जुलूस का निर्देशन/प्रोत्साहन करने वाले व्यक्तियों से।

धारा 66(2)() के अनुसार अपेक्षा किस माध्यम से की जाएगी?

सामान्य या विशेष नोटिस द्वारा।

धारा 66(2)() के अनुसार लाइसेंस कौन जारी कर सकता है?

संबंधित अधिकारी।

धारा 66(2)() के अनुसार लाइसेंस में क्या विनिर्दिष्ट होगा?

लाइसेंसधारकों का नाम और शर्तें।

धारा 66(2)() के अनुसार लाइसेंस देने के लिए क्या शुल्क लिया जाएगा?

कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

धारा 66(2)() के अनुसार अधिकारी क्या विनियमित कर सकता है?

गलियों में संगीत बजाने की सीमा, विशेषकर त्योहारों और समारोहों के अवसर पर।

धारा 67 का विषय क्या है?

निर्धारित शर्तों का उल्लंघन करने वाली सभाएं और जुलूस

(Assembly and procession violating certain conditions)

धारा 67(1) के अनुसार किसे सभा या जुलूस को रोकने का अधिकार है?

मजिस्ट्रेट या जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा प्राधिकृत कम-से-कम अवर निरीक्षक रैंक का पुलिस अधिकारी।

धारा 67(1) के अनुसार सभा या जुलूस को कब रोका जा सकता है?

जब वह धारा 66(1) और (2) के अंतर्गत निर्धारित शर्तों का उल्लंघन करे।

धारा 67(1) के अनुसार अधिकारी क्या आदेश दे सकता है?

जुलूस के विसर्जन का आदेश।

धारा 67(2) के अनुसार किस स्थिति में सभा या जुलूस को गैर-कानूनी माना जाएगा?

धारा 66(1) के आदेश की उपेक्षा या पालन से इंकार किया जाए।

धारा 68 का विषय क्या है?

माइक्रोफोन आदि के उपयोग पर निषेध, प्रतिबंध, विनियमन या शर्तें लगाने की शक्ति

(The power to forbid, impose ban, regulate or impose condition on playing of microphone, etc)

धारा 68(1) के अनुसार आदेश जारी करने का अधिकार किन्हें है?

जिला मजिस्ट्रेट, जिला पुलिस अधीक्षक, अनुमंडल मजिस्ट्रेट, मजिस्ट्रेट, अनुमंडल पुलिस अधिकारी या पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को।

धारा 68(1) के अनुसार आदेश किन उद्देश्यों के लिए जारी किया जा सकता है?

लोगों के क्षोभ या स्वास्थ्य की क्षति को रोकने या शांति एवं प्रशांति बनाए रखने के लिए।

धारा 68(1) के अनुसार आदेश द्वारा क्या किया जा सकता है?

माइक्रोफोन, लाउडस्पीकर या अन्य ध्वनि विस्तारक के उपयोग का निषेध, प्रतिबंध, विनियमन या शर्तें लगाना।

धारा 68(1) के अनुसार आदेश कहाँ लागू किया जा सकता है?

अधिकारिता वाले किसी क्षेत्र में या किसी वाहन पर।

धारा 68(2) के अनुसार सरकार क्या कर सकती है?

आदेश को उपान्तरित, फेर-बदल या रद्द कर सकती है।

धारा 68(2) के अनुसार सरकार यह कार्य कब कर सकती है?

स्वप्रेरणा से या व्यथित व्यक्ति के अभ्यावेदन पर।

धारा 68(3) के अनुसार कौन अधिकारी अनुपालन सुनिश्चित करेगा?

कम से कम अवर निरीक्षक रैंक का पुलिस अधिकारी।

धारा 68(3) के अनुसार अधिकारी क्या कर सकता है?

आवश्यक कदम उठा सकता है या यथोचित बल का प्रयोग कर सकता है।

धारा 68(3) के अनुसार अधिकारी क्या जब्त कर सकता है?

उल्लंघन में उपयोग किए जा रहे माइक्रोफोन, लाउडस्पीकर या अन्य उपकरण।

धारा 68(4) के अनुसार पुलिस अधिकारी क्या अतिरिक्त जब्त कर सकता है?

वह वाहन जिस पर उपकरण रखा या ले जाया जा रहा हो।

धारा 68(4) के परन्तु उपबंध के अनुसार वाहन कब छोड़ा जा सकता है?

बांड निष्पादित करने पर।

धारा 68(4) के परन्तु उपबंध के अनुसार बांड की राशि क्या है?

पाँच हजार रुपये से अधिक नहीं।

धारा 68(4) के परन्तु उपबंध के अनुसार बांड की शर्त क्या होगी?

जांच/विचारण में वाहन प्रस्तुत करना और निर्देश मिलने पर अभ्यर्पित करना।

धारा 68(5) के अनुसार उल्लंघन करने पर दंड क्या है?

एक हजार रुपये तक का जुर्माना।

धारा 68(5) के अनुसार न्यायालय क्या आदेश दे सकता है?

जब्त उपकरण या वाहन के अभ्यर्पण का निर्देश।

धारा 69 का विषय क्या है?

सार्वजनिक सड़कों पर व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश

(Instructions to maintain order on public streets)

धारा 69 के अनुसार निर्देश देने का अधिकार किसे है?

जिला पुलिस अधीक्षक या उनके द्वारा प्राधिकृत अन्य पुलिस अधिकारी को।

धारा 69 के अनुसार निर्देश किस प्रकार दिए जा सकते हैं?

सामान्य या विशेष आदेश द्वारा।

धारा 69 के अनुसार निर्देश किस उद्देश्य से दिए जाते हैं?

व्यक्तियों की बाधा, चोट, परेशानी तथा प्रदूषण को रोकने के लिए।

धारा 69 के अनुसार निर्देश कहाँ लागू होते हैं?

सार्वजनिक सड़कों, गलियों, आम रास्तों या किसी सार्वजनिक स्थल पर।

धारा 70 का विषय क्या है?

आदेशों अथवा निर्देशों की अवज्ञा करने के लिए दण्ड

(Punishment for contravening orders or instructions)

धारा 70 के अनुसार किन धाराओं के आदेशों का उल्लंघन दंडनीय है?

धारा 69 और 71 के तहत जारी कानूनी आदेशों का।

धारा 70 के अनुसार उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जा सकती है?

उसे गिरफ्तार किया जा सकेगा।

धारा 70 के अनुसार दंड क्या है?

दस हजार रुपये तक का जुर्माना।

धारा 71 का विषय क्या है?

सार्वजनिक स्थलों को आरक्षित करने तथा अवरोध खड़ा करने की शक्ति

(The power to resolve a public place and to raise barricades)

धारा 71(1) के अनुसार सार्वजनिक स्थल को आरक्षित करने का अधिकार किसे है?

जिला मजिस्ट्रेट को।

धारा 71(1) के अनुसार सार्वजनिक स्थल को किस माध्यम से आरक्षित किया जाएगा?

सार्वजनिक सूचना के माध्यम से।

धारा 71(1) के अनुसार आरक्षण किस प्रकार का होगा?

अस्थायी रूप से।

धारा 71(1) के अनुसार आरक्षित क्षेत्र में क्या प्रतिबंध लगाया जा सकता है?

विनिर्दिष्ट शर्तों को छोड़कर लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध।

धारा 71(2)() के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट किसे प्राधिकृत कर सकता है?

किसी पुलिस अधिकारी को।

धारा 71(2)() के अनुसार पुलिस अधिकारी क्या स्थापित कर सकता है?

मार्गों एवं गलियों में बैरियर एवं अन्य आवश्यक ढांचे।

धारा 71(2)() के अनुसार स्थापना का उद्देश्य क्या है?

वाहनों की जांच-पड़ताल करना या उल्लंघन रोकना।

धारा 71(2)() के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट क्या निर्धारित करेगा?

राहगीरों की सुरक्षा हेतु आवश्यक कदम।

धारा 71(2)() के अनुसार अस्थायी ढांचों के संबंध में क्या प्रावधान है?

उद्देश्य की पूर्ति के पश्चात उन्हें हटा दिया जाएगा।

धारा 72 का विषय क्या है?

पुलिस कार्य में रूकावट

(Obstruction in police duty)

धारा 72 के अनुसार कौन-सा कार्य दंडनीय है?

पुलिस अधिकारी के कर्तव्य निर्वहन में रूकावट पैदा करना।

धारा 72 के अनुसार दंड क्या है?

दोष सिद्धि पर अधिक-से-अधिक पाँच हजार रूपये तक के जुर्माने या अधिक से अधिक तीन माह की साधारण कैद या दोनों की सजा दी जा सकती है।

धारा 73 का विषय क्या है?

पुलिस वर्दी का अनधिकृत प्रयोग

(Unauthorised use of Police Uniform)

धारा 73 के अनुसार कौन व्यक्ति इस प्रावधान के अंतर्गत आता है?

जो पुलिस सेवा का सदस्य नहीं है।

धारा 73 के अनुसार अनुमति किससे प्राप्त करनी आवश्यक है?

सरकार द्वारा इस उद्देश्य के लिए प्राधिकृत अधिकारी से।

धारा 73 के अनुसार कौन-सा कार्य दंडनीय है?

बिना अनुमति पुलिस वर्दी या उससे मिलती-जुलती वेशभूषा धारण करना।

धारा 73 के अनुसार किन वेशभूषाओं पर प्रतिबंध है?

जो पुलिस वर्दी जैसी दिखती हो या जिस पर पुलिस वर्दी का विशेष चिन्ह हो।

धारा 73 के अनुसार दंड क्या है?

दोष सिद्धि पर अधिक-से-अधिक छह मास का साधारण कारावास अथवा अधिक-से-अधिक दस हजार रूपये तक के जुर्माना या दोनो की सजा दी जाएगी।

धारा 74 का विषय क्या है?

अदावाकृत सम्पत्ति को पुलिस अधिकारियों द्वारा प्रभार में ले लिया जाएगा और मजिस्ट्रेट के आदेशों के अध्यधीन उसका निपटान करेगा।
(The charge of unclaimed property shall be taken over by the Police Officer and shall be disposed off under the order of the Magistrate)

धारा 74 के अनुसार अदावाकृत सम्पत्ति को प्रभार में लेने का कर्तव्य किसका है?

प्रत्येक पुलिस अधिकारी का।

धारा 74 के अनुसार पुलिस अधिकारी क्या करेगा? 

अदावाकृत सम्पत्ति को अपने प्रभार में लेगा।

धारा 74 के अनुसार पुलिस अधिकारी को आगे क्या करना होगा?

उसकी सूची बनाकर जिला मजिस्ट्रेट को देगा।

धारा 74 के अनुसार सम्पत्ति के निपटान के संबंध में कौन मार्गदर्शन देगा?

जिला मजिस्ट्रेट।

धारा 74 के अनुसार पुलिस अधिकारी किसके आदेशों से मार्गदर्शित होंगे? 

जिला मजिस्ट्रेट के आदेशों से।

धारा 75 का विषय क्या है?

मजिस्ट्रेट द्वारा सम्पत्ति निरोध में रखना और उद्घोषणा जारी करना

(The District Magistrate may keep the property in his charge and issue proclamation)

धारा 75(1) के अनुसार सम्पत्ति निरोध में रखने का अधिकार किसे है?

जिला मजिस्ट्रेट को।

धारा 75(1) के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट क्या जारी कर सकता है?

उद्घोषणा।

धारा 75(1) के अनुसार उद्घोषणा में क्या विनिर्दिष्ट किया जाएगा?

वस्तुएँ और उनका स्वामित्व।

धारा 75(1) के अनुसार उद्घोषणा के माध्यम से किससे अपेक्षा की जाएगी?

जो व्यक्ति दावा करता हो।

धारा 75(1) के अनुसार दावा करने वाले को क्या करना होगा?

उपस्थित होकर अपना अधिकार सिद्ध करना होगा।

धारा 75(1) के अनुसार दावा प्रस्तुत करने की समय-सीमा क्या है?

उद्घोषणा की तारीख से छह माह के भीतर।

धारा 75(2) के अनुसार किस संहिता के प्रावधान लागू होंगे?

दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 457  (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 417 के प्रावधान।

धारा 76 का विषय क्या है?

यदि कोई दावा करने वाले आए तो सम्पत्ति का अधिहरण करना

(Confiscation of property when no claimant comes forward)

धारा 76(1) के अनुसार सम्पत्ति का क्या किया जाएगा यदि कोई दावा करे?

उसका अधिहरण या विक्रय किया जाएगा।

धारा 76(1) के अनुसार दावा कब तक किया जाना चाहिए?

अनुमत अवधि के भीतर।

धारा 76(1) के अनुसार यदि सम्पत्ति पहले से नहीं बेची गई हो तो क्या होगा?

उसकी बिक्री की जा सकती है।

धारा 76(1) के अनुसार बिक्री किसके आदेश से की जाएगी?

जिला मजिस्ट्रेट के आदेशों के अंतर्गत।

धारा 76(2) के अनुसार बेची गई सम्पत्ति के विक्रय आगम का क्या होगा?

सरकार के निपटान के अधीन होगा।

धारा 76(2) के अनुसार किस अन्य बिक्री से प्राप्त आगम भी सरकार के अधीन होगा?

धारा 26 के अंतर्गत की गई बिक्री से प्राप्त आगम।

धारा 77 का विषय क्या है?

पुलिस अधिकारी रहने पर नियुक्ति प्रमाण पत्र आदि को डिलीवर करने से मना करना

(Refusal to deliver certificate of appointment etc. on ceasing to be a police officer)

धारा 77 के अनुसार यह प्रावधान किन पर लागू होता है?

जो व्यक्ति पुलिस अधिकारी रहा हो।

धारा 77 के अनुसार कौन-सी वस्तुएँ वापस करना आवश्यक है?

नियुक्ति प्रमाण पत्र, वस्त्र, साज-सामान तथा अन्य साधन सम्पत्ति।

धारा 77 के अनुसार वस्तुएँ किस प्रयोजन हेतु प्रदान की गई होती हैं?

कार्य निष्पादन हेतु।

धारा 77 के अनुसार कौन-सा कार्य दंडनीय है?

उक्त वस्तुओं को वापस करना।

धारा 77 के अनुसार दंड कब दिया जाएगा?

मजिस्ट्रेट द्वारा दोष सिद्ध किए जाने पर।

धारा 77 के अनुसार दंड क्या है?

दस हजार रुपये तक का जुर्माना।

धारा 78 का विषय क्या है?

पुलिस द्वारा किए जाने वाले अपराध

(Offences committed by police)

धारा 78 के अनुसार यह प्रावधान किन पर लागू होता है?

प्रत्येक पुलिस अधिकारी पर।

धारा 78 के अनुसार कर्तव्य की अवहेलना करने पर क्या परिणाम होगा?

दोष सिद्धि पर दंडनीय होगा।

धारा 78 के अनुसार किस प्रकार के नियमों की उपेक्षा दंडनीय है?

सक्षम प्राधिकार द्वारा बनाए गए विधिपूर्ण नियम या विनियम।

धारा 78 के अनुसार बिना अनुमति के अथवा बिना पूर्व सूचना के कर्तव्यों का त्याग कब दंडनीय है?

जब दो माह तक की अवधि के लिए त्याग किया जाए।

धारा 78 के अनुसार छुट्टी के बाद कर्तव्य पर रिपोर्ट करने की स्थिति में क्या होगा?

उचित कारण होने पर दंडनीय होगा।

धारा 78 के अनुसार बिना प्राधिकार अन्य नियोजन में लगना क्या है?

दंडनीय अपराध।

धारा 78 के अनुसार कायरता का दोष क्या है?

दंडनीय अपराध।

धारा 78 के अनुसार अभिरक्षा में व्यक्ति के साथ अनधिकृत व्यक्तिगत हिंसा का क्या परिणाम है?

दंडनीय अपराध।

धारा 78 के अनुसार दंड क्या है?

तीन माह के वेतन तक का जुर्माना या तीन माह तक का कारावास या दोनों।

धारा 78 के अनुसार कारावास किस प्रकार का हो सकता है?

कठोर श्रम के साथ या उसके बिना।

धारा 79 का विषय क्या है?

जनता द्वारा किए जाने वाले अपराध

(Offences committed by public)

धारा 79(1) के अनुसार यह प्रावधान किन क्षेत्रों पर लागू होता है?

जिला मजिस्ट्रेट द्वारा विशेष रूप से अधिसूचित क्षेत्र की सीमा में।

धारा 79(1) के अनुसार अपराध कहाँ किए जाने पर दंडनीय होंगे?

सड़क, गली, आम रास्ते या खुले स्थान पर।

धारा 79(1) के अनुसार अपराध का प्रभाव क्या होना चाहिए?

निवासियों या राहगीरों को असुविधा, रोष या खतरा।

धारा 79(1) के अनुसार दंड क्या है?

पाँच हजार रुपये तक का जुर्माना।

धारा 79(1)() के अनुसार कौन-सा कार्य अपराध है?

पशु को खुला छोड़ना या वाहन/पशु को अनावश्यक समय तक खड़ा रखना या असुविधाजनक ढंग से खड़ा करना।

धारा 79(1)() के अनुसार कौन-सा कार्य अपराध है?

नशे में या उपद्रवी होना।

धारा 79(1)() के अनुसार कौन-सा कार्य अपराध है?

खतरनाक स्थल के चारों ओर बाड़ लगाना या संरक्षण में लापरवाही करना या बाधक स्थिति उत्पन्न करना।

धारा 79(1)() के अनुसार कौन-सा कार्य अपराध है?

बिना अनुमति दीवारों/भवनों को विरूप करना, सूचनाएं चिपकाना या नारे लिखना।

धारा 79(1)(.) के अनुसार कौन-सा कार्य अपराध है?

बिना पर्याप्त कारण सरकारी भवन, भूमि, मैदान या वाहन में प्रवेश करना।

धारा 79(1)() के अनुसार कौन-सा कार्य अपराध है?

अफवाह फैलाना या झूठी चेतावनी देना जिससे सेवाओं को भ्रमित किया जाए।

धारा 79(1)() के अनुसार कौन-सा कार्य अपराध है?

जन चेतावनी प्रणाली को नष्ट या क्षतिग्रस्त करना।

धारा 79(1)() के अनुसार कौन-सा कार्य अपराध है?

आवश्यक सेवा को क्षति पहुंचाकर आतंक फैलाना।

धारा 79(1)() के अनुसार कौन-सा कार्य अपराध है?

सरकारी भवन में प्रदर्शित नोटिस का उल्लंघन करना।

धारा 79(1)() के परन्तु उपबंध के अनुसार संज्ञान कब लिया जाएगा?

पुलिस कार्यालय के प्राधिकृत अधिकारी की शिकायत पर।

धारा 79(1)() के अनुसार कौन-सा कार्य अपराध है?

अभद्र प्रस्ताव, संकेत या पीछा कर महिला को परेशान करना।

धारा 79(1)() के परन्तु उपबंध के अनुसार संज्ञान कब लिया जाएगा?

केवल पीड़ित की शिकायत पर।

धारा 79(2) के अनुसार पुलिस अधिकारी को क्या अधिकार है?

ऐसे व्यक्ति को हिरासत में लेने का।

धारा 79(2) के अनुसार हिरासत में लिए गए व्यक्ति को कब रिहा किया जाएगा?

व्यक्तिगत मुचलका देने पर जमानत पर।

धारा 80 का विषय क्या है?

दिशानिर्देशों एवं सार्वजनिक सूचनाओं को चिपकाने संबंधी प्रक्रिया

(Process regarding affixing guidance and public notices)

धारा 80(1) के अनुसार किन-किन को प्रकाशित किया जाएगा?

सामान्य दिशानिर्देश, विनियम तथा सार्वजनिक सूचनाएं।

धारा 80(1) के अनुसार प्रकाशन कहाँ किया जाएगा?

जिला मजिस्ट्रेट, अनुमंडल, प्रखंड/अंचल एवं पंचायत कार्यालयों में।

धारा 80(1) के अनुसार सूचना कैसे चिपकाई जाएगी?

सुस्पष्ट स्थानों पर प्रतियां लगाकर।

धारा 80(1) के अनुसार अन्य कौन-से माध्यम से प्रकाशन किया जा सकता है?

ड्रम बजाकर, समाचार पत्रों, मीडिया या अन्य साधनों द्वारा।

धारा 80(1) के अनुसार प्रकाशन का निर्णय कौन करेगा?

पुलिस अधीक्षक।

धारा 80(1) के परन्तु उपबंध के अनुसार बिना पूर्व प्रकाशन कब निर्देश जारी किए जा सकते हैं?

जब पुलिस अधीक्षक संतुष्ट हो कि तत्काल प्रभाव जनहित में आवश्यक है।

धारा 80(2) के अनुसार विनियम किसके अधीन होंगे?

निगम या जन स्वास्थ्य/स्थानीय प्राधिकरण के कानून, नियम या उपनियम के अधीन।

धारा 80(2) के अनुसार यह प्रावधान किन मामलों में लागू होगा?

जब विषय पहले से किसी कानून, नियम या उपनियम में विनियमित हो।

धारा 81 का विषय क्या है?

पुलिस अधिकारियों का अभियोजन

(Prosecution of the police officer)

धारा 81 के अनुसार यह प्रावधान कब लागू होता है?

जब अपराधी पुलिस अधिकारी हो।

धारा 81 के अनुसार न्यायालय कब संज्ञान नहीं लेगा?

सरकार की लिखित रिपोर्ट या प्राधिकृत अधिकारी के पूर्व अनुमोदन के बिना।

धारा 81 के अनुसार लिखित रिपोर्ट किसके द्वारा दी जाती है?

सरकार द्वारा।

धारा 81 के अनुसार पूर्व अनुमोदन किसके द्वारा दिया जाता है?

राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत अधिकारी द्वारा।

धारा 82 का विषय क्या है?

अन्य कानूनों के अन्तर्गत अपराधों का अभियोजन

(Prosecution of offences under other laws)

धारा 82 के अनुसार यह प्रावधान किसके अधीन है?

दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 300 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 337) के उपबंधों के अधीन।

धारा 82 के अनुसार इस अधिनियम का क्या प्रभाव नहीं होगा?

किसी व्यक्ति को अन्य विधि के अंतर्गत अभियोजन और दंड से नहीं बचाएगा।

धारा 82 के अनुसार व्यक्ति पर क्या कार्रवाई की जा सकती है?

अन्य विधि के अंतर्गत अभियोजित और दंडित किया जा सकता है।

धारा 83 का विषय क्या है?

कुछ मामलों का संक्षिप्त निपटान

(Summary disposal of certain cases)

धारा 83(1) के अनुसार यह प्रावधान किन धाराओं के अपराधों पर लागू होता है?

धारा 72, 77 और 78 के अंतर्गत दंडनीय अपराधों पर।

धारा 83(1) के अनुसार संज्ञान लेते समय मजिस्ट्रेट क्या कह सकता है?

अभियुक्त को सम्मन में दोषी होने का अभिवचन करने का विकल्प दे सकता है।

धारा 83(1) के अनुसार अभियुक्त कब अभिवचन कर सकता है?

सुनवाई की निर्धारित तिथि से पहले।

धारा 83(1) के अनुसार अभिवचन किस माध्यम से किया जाएगा?

पंजीकृत पत्र द्वारा।

धारा 83(1) के अनुसार अभियुक्त को क्या जमा करना होगा?

न्यायालय द्वारा निर्धारित राशि।

धारा 83(1) के अनुसार राशि कहाँ जमा की जाएगी?

न्यायालय में।

धारा 83(2) के अनुसार आगे की कार्यवाही कब नहीं होगी?

जब अभियुक्त दोषी होने का अभिवचन कर निर्धारित राशि जमा कर दे।

धारा 83(2) के अनुसार ऐसी स्थिति में क्या परिणाम होगा?

अभियुक्त के विरुद्ध कोई अन्य कार्यवाही नहीं की जाएगी।

धारा 84 का विषय क्या है?

मजिस्ट्रेट द्वारा लगाए गए दण्डों एवं जुर्मानों की वसूली

(Recovery of penalties and fine imposed by the Magistrate)

धारा 84 के अनुसार यह प्रावधान कब लागू होता है?

जब किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष दोष सिद्ध हो।

धारा 84 के अनुसार किन प्रावधानों का अनुप्रयोग होगा?

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 64 से 70 (भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 8(2) से 8(7) ) तथा दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 386 से 389 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 427 से 430) तक।

धारा 84 के अनुसार ये प्रावधान किन पर लागू होंगे?

बिहार पुलिस अधिनियम, 2007 के अंतर्गत लगाए गए दण्डों एवं जुर्मानों पर।

धारा 84 के परन्तु उपबंध के अनुसार यह अपवाद किस धारा के बावजूद है?

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 65 (भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 8(2) ) के बावजूद।

धारा 84 के परन्तु उपबंध के अनुसार यह अपवाद किन धाराओं पर लागू होता है?

बिहार पुलिस अधिनियम, 2007  की धारा 73, 78 और 79 के अंतर्गत लगाए गए जुर्मानों पर।

धारा 84 के परन्तु उपबंध के अनुसार कारावास की अवधि क्या है?

आठ दिन से अधिक नहीं।

धारा 85 का विषय क्या है?

कार्रवाई की सीमा

(Extent of the Action)

धारा 85 के अनुसार न्यायालय कब संज्ञान नहीं लेगा?

दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 468 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 514 )में उपबंधित सीमा अवधि की समाप्ति के पश्चात्।

धारा 85 के अनुसार यह प्रावधान किन अपराधों पर लागू होता है?

इस अध्याय के अंतर्गत किसी भी अपराध पर।

धारा 85 के अनुसार सीमा अवधि की गणना के लिए कौन-से प्रावधान लागू होंगे?

दण्ड प्रक्रिया संहिता के अध्याय XXXVI (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता XXXVIII ) के प्रावधान।

 

अध्याय-X

(Chapter-X)

विविध

(Miscellaneous)

धारा 86 का विषय क्या है?

शुल्क एवं पुरस्कारों का निपटान

(Disposal of fees, rewards, etc.)

धारा 86 के अनुसार किन शुल्कों का निपटान सरकार के जिम्मे होगा?

लाइसेंसों या लिखित अनुमति हेतु सभी शुल्क।

धारा 86 के अनुसार किन राशियों का निपटान सरकार के जिम्मे होगा?

पुलिस अधिकारियों द्वारा सेवाओं के लिए प्राप्त भुगतान की गई राशियां।

धारा 86 के अनुसार किन अन्य प्राप्तियों का निपटान सरकार के जिम्मे होगा?

पुरस्कार, जब्तियां और दण्ड या उनमें हिस्सेदारी।

धारा 86 के अनुसार किन राशियों को अपवाद स्वरूप बाहर रखा गया है?

जो कानूनी रूप से मुखबिरों के रूप में पुलिस अधिकारियों को देय हैं।

धारा 86 के अनुसार स्थानीय प्राधिकारी से संबंधित राशियों का क्या होगा?

वे सरकार के जिम्मे होंगी।

धारा 86 के परन्तु उपबंध के अनुसार पुरस्कार/जब्ती/दण्ड की राशि का वितरण कब किया जा सकता है?

सरकार के अनुमोदन या बनाए गए कानून के तहत।

धारा 86 के परन्तु उपबंध के अनुसार राशि किसके बीच बांटी जा सकती है?

एक या दो अथवा अधिक पुलिस अधिकारियों के बीच।

धारा 87 का विषय क्या है?

आदेशों एवं अधिसूचनाओं का प्रमाण देने की विधि

(Method of proving orders and notifications)

धारा 87 के अनुसार यह प्रावधान किन आदेशों/अधिसूचनाओं पर लागू होता है?

राज्य सरकार, मजिस्ट्रेट या अधिकारी द्वारा जारी/प्रकाशित आदेश या अधिसूचना।

धारा 87 के अनुसार प्रमाण किसके द्वारा दिया जा सकता है?

सरकारी राजपत्र की प्रति या हस्ताक्षरित प्रतिलिपि द्वारा।

धारा 87 के अनुसार प्रतिलिपि किसके द्वारा हस्ताक्षरित होनी चाहिए?

उसी मजिस्ट्रेट या अधिकारी द्वारा।

धारा 87 के अनुसार प्रमाणन कब मान्य होगा?

जब उक्त प्रति या प्रतिलिपि प्रस्तुत की जाए।

धारा 88 का विषय क्या है?

नियमों एवं आदेशों की वैधता

(Procedure of providing certificate to rules and orders)

धारा 88 का प्रावधान किन पर लागू होता है?

बिहार पुलिस अधिनियम, 2007 या उसके तहत बनाए गए नियमों के अंतर्गत बनाए गए नियम, विनियम, आदेश, निर्देशन या अधिसूचना पर।

धारा 88 का प्रावधान किन शर्तों पर लागू होगा?

जब वे अधिनियम के साथ पर्याप्त अनुरूपता रखते हों।

धारा 88 के अनुसार किन-किन कार्यों को शामिल किया गया है?

नियम, विनियम, आदेश, निर्देशन, अधिसूचना, निर्णय, जांच या कार्रवाई।

धारा 88 के अनुसार परिणाम क्या होगा?

उन्हें अवैध, अमान्य या रद्द नहीं समझा जाएगा।

धारा 89 का विषय क्या है?

शक्ति प्रयोग करने में सक्षम पदों की रिक्तियों का प्रभार संभालने वाले अधिकारी

(Officers holding charge of, or succeeding to vacancies competent to exercise powers)

धारा 89 का प्रावधान कब लागू होता है?

जब आयुक्त, मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी का पद रिक्त हो।

धारा 89 के अनुसार कौन अधिकारी शक्तियों का प्रयोग करने में सक्षम होगा?

जो अधिकारी उस पद का प्रभार अस्थायी या स्थायी रूप से संभाल रहा हो या संभालने वाला हो।

धारा 89 के अनुसार किन पदों का उल्लेख किया गया है?

आयुक्त, मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी।

धारा 89 के अनुसार ऐसे अधिकारी को क्या अधिकार प्राप्त होगा?

सभी शक्तियों का प्रयोग करना और सभी कार्य करना।

धारा 89 के अनुसार ये शक्तियाँ किसके समान होंगी?

उस आयुक्त, मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी के समान जिनका पद रिक्त है।

धारा 90 का विषय क्या है?

लाइसेंसों तथा लिखित अनुमति में शर्तों का उल्लेख एवं उनका निरस्तीकरण

(Licenses and permissions to specify conditions, etc., and to be signed)

धारा 90(1) का प्रावधान किन पर लागू होता है?

बिहार पुलिस अधिनियम, 2007 अधिनियम के अंतर्गत जारी प्रत्येक लाइसेंस या लिखित अनुमति पर।

धारा 90(1) के अनुसार लाइसेंस/अनुमति में क्या उल्लेख किया जाएगा?

अवधि एवं स्थान।

धारा 90(1) के अनुसार लाइसेंस/अनुमति में और क्या उल्लेख होगा?

शर्तें और प्रतिबंध।

धारा 90(1) के अनुसार ये शर्तें किसके अधीन होंगी?

जिनके अधीन लाइसेंस या अनुमति जारी की गई है।

धारा 90(1) के अनुसार लाइसेंस/अनुमति कैसे जारी किया जाएगा?

सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर से।

धारा 90(1) के अनुसार शुल्क के संबंध में क्या उल्लेख होगा?

प्रभारित शुल्क का उल्लेख।

धारा 90(2) के अनुसार लाइसेंस/अनुमति को कौन निलंबित या रद्द कर सकता है?

सक्षम पदाधिकारी।

धारा 90(2) के अनुसार लाइसेंस कब निलंबित या रद्द किया जा सकता है?

जब शर्तों/प्रतिबंधों का उल्लंघन हो या धारक संबंधित अपराध का दोषी हो।

धारा 90(3) के अनुसार लाइसेंस रद्द होने पर व्यक्ति की स्थिति क्या होगी?

उसे लाइसेंस विहीन माना जाएगा।

धारा 90(3) के अनुसार कब व्यक्ति को लाइसेंस विहीन माना जाएगा?

जब लाइसेंस निलंबित/रद्द हो या उसकी अवधि समाप्त हो जाए।

धारा 90(3) के अनुसार यह स्थिति कब तक रहेगी?

जब तक निरस्तीकरण आदेश निरस्त हो या लाइसेंस का नवीकरण हो।

धारा 90(4) के अनुसार लाइसेंसधारी का क्या कर्तव्य है?

पुलिस अधिकारी द्वारा मांगे जाने पर लाइसेंस/अनुमति प्रस्तुत करना।

धारा 90 के स्पष्टीकरण के अनुसार उल्लंघन किसके द्वारा माना जाएगा?

नौकर या एजेंट द्वारा किया गया उल्लंघन लाइसेंसधारी द्वारा किया गया माना जाएगा।

धारा 91 का विषय क्या है?

सर्वसाधारण नोटिस देने की विधि

(Public notices how to be given)

धारा 91 के अनुसार सर्वसाधारण नोटिस किस रूप में होना चाहिए?

लिखित रूप में।

धारा 91 के अनुसार नोटिस किसके द्वारा हस्ताक्षरित होना चाहिए?

सक्षम प्राधिकारी द्वारा।

धारा 91 के अनुसार नोटिस कैसे प्रकाशित किया जाएगा?

प्रमुख स्थानों पर प्रतियां चिपकाकर।

धारा 91 के अनुसार नोटिस के प्रकाशन का अन्य तरीका क्या है?

ढोल पीटकर घोषणा करना।

धारा 91 के अनुसार नोटिस किन माध्यमों में प्रकाशित किया जा सकता है?

स्थानीय समाचारपत्रों (हिन्दी, उर्दू या अंग्रेजी) में।

धारा 91 के अनुसार प्रकाशन किन माध्यमों से किया जा सकता है?

एक या अधिक माध्यमों या अन्य उपयुक्त साधनों से।

धारा 91 के परन्तु उपबंध के अनुसार बिना पूर्व प्रकाशन कब निर्देश/विनियम बनाए जा सकते हैं?

जब सक्षम प्राधिकारी संतुष्ट हो कि तत्काल प्रभाव लोकहित में आवश्यक है।

धारा 92 का विषय क्या है?

सक्षम प्राधिकारी की सहमति, उनके हस्ताक्षर से लिखित रूप में दिए जाने पर, प्रमाणित मानी जा सकती है

(Consent, etc., of a competent authority may be proved by writing under his signature)

धारा 92 का प्रावधान कब लागू होता है?

जब किसी कार्य की वैधता सक्षम प्राधिकारी की सहमति, अनुमोदन, घोषणा, मत या संतुष्टि पर निर्भर हो।

धारा 92 के अनुसार सक्षम प्राधिकारी की सहमति किस रूप में होनी चाहिए?

हस्ताक्षरित लिखित दस्तावेज के रूप में।

धारा 92 के अनुसार लिखित दस्तावेज का क्या महत्व है?

यह सहमति, अनुमोदन, घोषणा, मत या संतुष्टि का पर्याप्त साक्ष्य होगा।

धारा 92 के अनुसार यह साक्ष्य किसके प्रति होगा?

दस्तावेज धारक के प्रति।

धारा 93 का विषय क्या है?

नोटिसों पर हस्ताक्षर, मुहर रूप में भी हो सकते हैं

(Signature on notices, etc., may be stamped)

धारा 93 के अनुसार यह प्रावधान किन दस्तावेजों पर लागू होता है?

लाइसेंस, लिखित अनुमति, नोटिस या अन्य दस्तावेज पर।

धारा 93 के अनुसार किन दस्तावेजों को इस प्रावधान से अपवाद किया गया है?

सम्मन, वारंट या सर्च वारंट।

धारा 93 के अनुसार हस्ताक्षर किसके होने चाहिए?

सक्षम प्राधिकारी के।

धारा 93 के अनुसार हस्ताक्षर का कौन-सा रूप मान्य होगा?

मुहर रूप में अंकित हस्ताक्षर।

धारा 93 के अनुसार मुहर रूप में हस्ताक्षर का क्या प्रभाव होगा?

उसे विधिपूर्वक हस्ताक्षरित माना जाएगा।

धारा 94 का विषय क्या है?

नियम बनाने की शक्ति

(Power to make rules)

धारा 94 के अनुसार नियम बनाने का अधिकार किसे है?

सरकार को।

धारा 95 का विषय क्या है?

कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति

(Power to remove difficulties)

धारा 95(1) के अनुसार यह प्रावधान कब लागू होता है?

जब अधिनियम के उपबंधों को लागू करने में कठिनाई उत्पन्न हो।

धारा 95(1) के अनुसार कठिनाई दूर करने का अधिकार किसे है?

सरकार को, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा।

धारा 95(1) के अनुसार उपबंध किस उद्देश्य से किए जाएंगे?

कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक या उचित समझे जाने पर।

धारा 95(2) के अनुसार अधिसूचना के साथ क्या किया जाएगा?

उसे यथाशीघ्र विधानमंडल के समक्ष रखा जाएगा।

धारा 96 का विषय क्या है?

राजपत्र में नियमों एवं विनियमनों की अधिसूचना और उनका प्रस्तुतीकरण।

(Notification and presentation of rules and regulations in the Gazette)

धारा 96() के अनुसार कौन-से नियम/विनियम प्रकाशित किए जाएंगे?

इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए प्रत्येक नियम एवं विनियम।

धारा 96() के अनुसार नियम/विनियम कितने समय के लिए रखे जाएंगे?

कुल तीस दिनों की अवधि के लिए।

धारा 96() के अनुसार संशोधन कब प्रभावी होगा?

जब दोनों सदन संशोधन हेतु सहमत हों।

धारा 96() के अनुसार नियम/विनियम कब निरस्त होंगे?

जब दोनों सदन सहमत हों कि नियम/विनियम बनाए जाएं।

धारा 96() के अनुसार संशोधन या निरस्तीकरण का क्या प्रभाव होगा?

नियम/विनियम संशोधित रूप में प्रभावी होंगे या प्रभावहीन हो जाएंगे।

धारा 96() के अनुसार पूर्व कार्यों पर क्या प्रभाव होगा?

पूर्व में की गई कार्यवाही की वैधता प्रभावित नहीं होगी।

धारा 97 का विषय क्या है?

निरसन एवं व्यावृति

(Repeal and saving)

धारा 97(1) के अनुसार कौन-सा अधिनियम निरस्त किया गया है?

पुलिस अधिनियम, 1861 (जहाँ तक बिहार राज्य से संबंधित हो)

धारा 97(2) के अनुसार कौन-सा अन्य अधिनियम निरस्त किया गया है?

बंगाल सैन्य पुलिस अधिनियम, 1892 (जहाँ तक बिहार राज्य से संबंधित हो)

धारा 97(2) के अनुसार निरसन के बावजूद क्या विद्यमान रहेगा?

सैन्य पुलिस अधिकारी की श्रेणी और ग्रेड।

धारा 97(2) के अनुसार यह व्यवस्था कब तक रहेगी?

जब तक नया बिहार सैन्य पुलिस हस्तक नहीं बनाया जाता।

धारा 97(3) के अनुसार निरसन के बावजूद पूर्व कार्यों की स्थिति क्या होगी?

वे इस अधिनियम के अंतर्गत किए गए कार्य माने जाएंगे।

धारा 97(3) के अनुसार किस शब्द का प्रतिस्थापन किया गया है?

“Rule” के स्थान परAct”

धारा 97(4) के अनुसार निरस्त अधिनियमों के संदर्भों का क्या होगा?

उन्हें इस अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के संदर्भ के रूप में लिया जाएगा।

धारा 98 का विषय क्या है?

मान्यता और संरक्षण

(Recognition and protection)

धारा 98(1) के अनुसार यह प्रावधान किन संशोधनों के बावजूद लागू होता है?

बिहार पुलिस अधिनियम, 2007 की धारा 1() और धारा 97 में किए गए संशोधनों के बावजूद।

धारा 98(1) के अनुसार किन कार्यों को मान्यता दी गई है?

बिहार पुलिस अधिनियम, 2007 के प्रारंभ से पूर्व किए गए कार्य, अधिसूचनाएँ, शक्तियाँ, प्रपत्र, अधिकार-क्षेत्र, दंड, आदेश, नियम और नियुक्तियाँ।

धारा 98(1) के अनुसार इन्हें किस प्रकार माना जाएगा?

बिहार पुलिस अधिनियम, 2007 के अंतर्गत उसी प्रकार जैसे अधिनियम 30.03.2007 से प्रभावी था।

धारा 98(1) के अनुसार इन कार्यों को किस रूप में समझा जाएगा?

बिहार पुलिस अधिनियम, 2007 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में किए गए।

धारा 98(2) के अनुसार इस अधिनियम का क्या प्रभाव नहीं होगा?

पूर्व अधिनियम के अंतर्गत किए गए कार्यों या कार्यवाहियों को प्रभावित नहीं करेगा।

धारा 98 के अनुसार यह धारा किस अधिनियम द्वारा जोड़ी गई है?

बिहार पुलिस (संशोधन) अधिनियम, 2014 द्वारा।

 

Download Bihar Police Act One Liner Notes PDF

 

My Legal Consultants
Free Judiciary Coaching
Free Judiciary Notes
Free Judiciary Mock Tests
Bare Acts