M.P. Accommodation Control Act One Liner PDF
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मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 (The M.P. Accommodation Control Act, 1961) |
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(1961 का क्रमांक 41) (No. 41 of 1961) |
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यह अधिनियम किस नाम से जाना जा सकता है? |
मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961। (The M.P. Accommodation Control Act, 1961) |
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मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 का उद्देश्य क्या है? |
मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 आवासों के किराये, किराए के नियमन एवं नियंत्रण, कुछ श्रेणियों के मकान मालिकों की सद्भावनापूर्ण आवश्यकता के आधार पर बेदखली के मामलों के शीघ्र निपटारे तथा किरायेदारों की बेदखली के विनियमन एवं नियंत्रण और उससे संबंधित मामलों के लिए प्रावधान करता है। |
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मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 का अधिनियम क्रमांक क्या है? |
1961 का क्रमांक 41। (No. 41 of 1961) |
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मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 को राष्ट्रपति की स्वीकृति कब प्राप्त हुई? |
25 दिसंबर, 1961 को। |
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राष्ट्रपति की स्वीकृति पहली बार कहाँ और कब प्रकाशित हुई? |
30 दिसंबर, 1961 को मध्य प्रदेश राजपत्र, असाधारण में प्रकाशित हुई। |
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मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के लंबे शीर्षक में कुछ श्रेणियों के मकान मालिकों की किस आवश्यकता के आधार पर बेदखली के मामलों के शीघ्र निपटारे का प्रावधान है? |
सद्भावनापूर्ण आवश्यकता के आधार पर। |
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मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 का लंबा शीर्षक किस संशोधन द्वारा प्रतिस्थापित किया गया? |
मध्य प्रदेश अधिनियम 16, 1983 द्वारा। |
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प्रतिस्थापित लंबा शीर्षक किस तिथि से प्रभावी हुआ? |
16 अगस्त, 1983 से। |
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मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 सामान्यतः किसकी बेदखली को विनियमित और नियंत्रित करने के लिए प्रावधान करता है? |
आवासों से किरायेदारों की बेदखली को। |
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मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 किन विषयों से संबंधित या उनसे जुड़े अन्य मामलों के लिए भी प्रावधान करता है? |
आवासों के किराये, किराए के नियमन एवं नियंत्रण तथा किरायेदारों की बेदखली से संबंधित या उससे जुड़े अन्य मामलों के लिए। |
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मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 किस संवैधानिक वर्ष में मध्य प्रदेश विधानमंडल द्वारा अधिनियमित किया गया? |
भारत गणराज्य के बारहवें वर्ष में। |
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अध्याय- I (CHAPTER-I) |
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प्रारंभिक (Preliminary) |
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धारा 1 का विषय क्या है? |
संक्षिप्त शीर्षक, विस्तार और प्रारंभ। (Short title, extent and commencement) |
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इस अधिनियम का संक्षिप्त शीर्षक क्या है? |
मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961। |
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मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 किस क्षेत्र में विस्तृत है? |
मध्य प्रदेश के संपूर्ण क्षेत्र में। |
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मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 सर्वप्रथम किन क्षेत्रों में लागू होगा? |
प्रथम अनुसूची में निर्दिष्ट क्षेत्रों में। |
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'अनुसूची' शब्द के स्थान पर 'प्रथम अनुसूची' शब्द किस अधिनियम द्वारा प्रतिस्थापित किया गया? |
मध्य प्रदेश अधिनियम 27, 1983 द्वारा। |
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'प्रथम अनुसूची' शब्द का प्रतिस्थापन किस तिथि से प्रभावी हुआ? |
16 अगस्त, 1983 से। |
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राज्य के अन्य क्षेत्रों में मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 किस प्रकार लागू किया जा सकता है? |
राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना के माध्यम से नियुक्त तिथियों पर। |
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क्या राज्य सरकार विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग प्रारंभ तिथियां नियुक्त कर सकती है? |
हाँ, राज्य सरकार विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग तिथियां नियुक्त कर सकती है। |
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क्या राज्य सरकार मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के विभिन्न प्रावधानों के लिए अलग-अलग प्रारंभ तिथियां नियुक्त कर सकती है? |
हाँ, विभिन्न प्रावधानों के लिए अलग-अलग तिथियां नियुक्त की जा सकती हैं। |
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राज्य सरकार द्वारा अन्य क्षेत्रों में मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 लागू करने के पश्चात प्रथम अनुसूची का क्या प्रभाव होगा? |
प्रथम अनुसूची तदनुसार संशोधित मानी जाएगी। |
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राजपुर जिले के भाटापारा नगरपालिका क्षेत्र में मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 किस अधिसूचना द्वारा लागू किया गया? |
गृह विभाग की अधिसूचना संख्या 1731-1280-11-ए (3) दिनांक 26 अप्रैल, 1962 द्वारा। |
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राजपुर जिले के भाटापारा नगरपालिका क्षेत्र में मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 किस तिथि से लागू हुआ? |
15 मई, 1962 से। |
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राजपुर जिले के भाटापारा नगरपालिका क्षेत्र में मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 लागू करने संबंधी अधिसूचना कहाँ प्रकाशित हुई थी? |
मध्य प्रदेश राजपत्र दिनांक 11 मई, 1962, भाग 1 में। |
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धारा 2 का विषय क्या है? |
परिभाषाएँ। (Definitions) |
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धारा 2(क) का विषय क्या है? |
"आवास" (accommodation) |
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धारा 2(क) के अंतर्गत "आवास" से क्या तात्पर्य है? |
किसी भी भवन या भवन के किसी भाग से, चाहे वह आवासीय हो या गैर-आवासीय। |
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धारा 2(क) के अंतर्गत क्या "आवास" में आवासीय भवन सम्मिलित है? |
हाँ, आवासीय भवन या उसका कोई भाग सम्मिलित है। |
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धारा 2(क) के अंतर्गत क्या "आवास" में गैर-आवासीय भवन सम्मिलित है? |
हाँ, गैर-आवासीय भवन या उसका कोई भाग सम्मिलित है। |
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धारा 2(क) के अंतर्गत क्या "आवास" में कृषि उद्देश्यों के लिए उपयोग में न लाई जा रही भूमि सम्मिलित है? |
हाँ, ऐसी कोई भी भूमि जिसका उपयोग कृषि उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा रहा हो। |
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धारा 2(क) के अंतर्गत "आवास" में किस प्रकार की भूमि सम्मिलित है? |
ऐसी भूमि जिसका उपयोग कृषि उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा रहा हो। |
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धारा 2(क) के अंतर्गत क्या "आवास" में भवन से जुड़े बगीचे सम्मिलित हैं? |
हाँ, यदि वे भवन या भवन के किसी भाग से जुड़े हों। |
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धारा 2(क) के अंतर्गत क्या "आवास" में भवन से जुड़े मैदान सम्मिलित हैं? |
हाँ, यदि वे भवन या भवन के किसी भाग से जुड़े हों। |
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धारा 2(क) के अंतर्गत क्या "आवास" में भवन से जुड़े गैरेज सम्मिलित हैं? |
हाँ, यदि वे भवन या भवन के किसी भाग से जुड़े हों। |
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धारा 2(क) के अंतर्गत क्या "आवास" में भवन से जुड़े बाहरी भवन सम्मिलित हैं? |
हाँ, यदि वे भवन या भवन के किसी भाग से जुड़े हों। |
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धारा 2(क) के अंतर्गत "आवास" में कौन-से उपकरण या साज-सामान सम्मिलित हैं? |
ऐसे उपकरण या साज-सामान जो भवन का अधिक लाभप्रद उपयोग सुनिश्चित करते हों। |
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धारा 2(क) के अंतर्गत क्या भवन में लगाए गए अधिक लाभप्रद उपयोग सुनिश्चित करने वाले उपकरण "आवास" में सम्मिलित हैं? |
हाँ, ऐसे उपकरण या साज-सामान सम्मिलित हैं। |
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धारा 2(क) के अंतर्गत क्या मकान मालिक द्वारा उपयोग हेतु उपलब्ध कराया गया फर्नीचर "आवास" में सम्मिलित है? |
हाँ, भवन या उसके किसी भाग में उपयोग के लिए उपलब्ध कराया गया फर्नीचर सम्मिलित है। |
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धारा 2(क) के अंतर्गत फर्नीचर कब "आवास" की परिभाषा में सम्मिलित होगा? |
जब वह मकान मालिक द्वारा भवन या भवन के किसी भाग में उपयोग के लिए उपलब्ध कराया गया हो। |
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धारा 2(ख) का विषय क्या है? |
"मकान मालिक" (Landlord) |
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धारा 2(ख) के अंतर्गत "मकान मालिक" से क्या तात्पर्य है? |
ऐसा व्यक्ति जो किसी आवास का किराया प्राप्त कर रहा हो या प्राप्त करने का हकदार हो। |
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धारा 2(ख) के अंतर्गत क्या अपने खाते पर किराया प्राप्त करने वाला व्यक्ति "मकान मालिक" है? |
हाँ, यदि वह किसी आवास का किराया प्राप्त कर रहा हो या प्राप्त करने का हकदार हो। |
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धारा 2(ख) के अंतर्गत क्या किसी अन्य व्यक्ति के खाते पर किराया प्राप्त करने वाला व्यक्ति "मकान मालिक" है? |
हाँ, यदि वह किसी आवास का किराया प्राप्त कर रहा हो या प्राप्त करने का हकदार हो। |
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धारा 2(ख) के अंतर्गत क्या किसी अन्य व्यक्ति की ओर से किराया प्राप्त करने वाला व्यक्ति "मकान मालिक" है? |
हाँ, यदि वह किसी आवास का किराया प्राप्त कर रहा हो या प्राप्त करने का हकदार हो। |
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धारा 2(ख) के अंतर्गत क्या किसी अन्य व्यक्ति के लाभ के लिए किराया प्राप्त करने वाला व्यक्ति "मकान मालिक" है? |
हाँ, यदि वह किसी आवास का किराया प्राप्त कर रहा हो या प्राप्त करने का हकदार हो। |
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धारा 2(ख) के अंतर्गत क्या न्यासी के रूप में किराया प्राप्त करने वाला व्यक्ति "मकान मालिक" है? |
हाँ, यदि वह किसी आवास का किराया प्राप्त कर रहा हो या प्राप्त करने का हकदार हो। |
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धारा 2(ख) के अंतर्गत क्या अभिभावक के रूप में किराया प्राप्त करने वाला व्यक्ति "मकान मालिक" है? |
हाँ, यदि वह किसी आवास का किराया प्राप्त कर रहा हो या प्राप्त करने का हकदार हो। |
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धारा 2(ख) के अंतर्गत क्या प्राप्तकर्ता (रिसीवर) के रूप में किराया प्राप्त करने वाला व्यक्ति "मकान मालिक" है? |
हाँ, यदि वह किसी आवास का किराया प्राप्त कर रहा हो या प्राप्त करने का हकदार हो। |
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धारा 2(ख) के अंतर्गत यदि आवास किरायेदार को किराए पर दिया गया हो तो "मकान मालिक" कौन होगा? |
वह व्यक्ति जो उसका किराया प्राप्त करता हो या प्राप्त करने का हकदार हो। |
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धारा 2(ख) के अंतर्गत क्या समय-समय पर मकान मालिक के अधीन अधिकार प्राप्त करने वाला प्रत्येक गैर-किरायेदार "मकान मालिक" में शामिल है? |
हाँ, प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जो किरायेदार नहीं है और समय-समय पर मकान मालिक के अधीन अधिकार प्राप्त करता है। |
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धारा 2(ख) के अंतर्गत "मकान मालिक" की परिभाषा में कौन-सा व्यक्ति विशेष रूप से शामिल है? |
प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जो किरायेदार नहीं है और जो समय-समय पर मकान मालिक के अधीन अधिकार प्राप्त करता है। |
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धारा 2(ग) का विषय क्या है? |
"वैध वृद्धि" (lawful increase) |
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धारा 2(ग) के अंतर्गत "वैध वृद्धि" से क्या तात्पर्य है? |
मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत अनुमत किराए में वृद्धि। |
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धारा 2(ग) के अंतर्गत किस प्रकार की किराए में वृद्धि को "वैध वृद्धि" कहा गया है? |
मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत अनुमत किराए में वृद्धि। |
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धारा 2(ग) के अंतर्गत क्या प्रत्येक किराए में वृद्धि "वैध वृद्धि" कहलाती है? |
नहीं, केवल मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961के प्रावधानों के तहत अनुमत किराए में वृद्धि। |
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धारा 2(ग) के अंतर्गत "वैध वृद्धि" किसके अधीन अनुमत होनी चाहिए? |
मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अधीन। |
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धारा 2(घ) का विषय क्या है? |
"पट्टा" (lease) |
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धारा 2(घ) के अंतर्गत "पट्टा" में क्या सम्मिलित है? |
उप-पट्टा भी सम्मिलित है। |
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धारा 2(घ) के अंतर्गत क्या "पट्टा" की परिभाषा में उप-पट्टा शामिल है? |
हाँ, उप-पट्टा भी शामिल है। |
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धारा 2(घ) के अंतर्गत "पट्टा" शब्द का विस्तार किस तक किया गया है? |
उप-पट्टा तक। |
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धारा 2(ङ) का विषय क्या है? |
"परिवार का सदस्य" (member of the family) |
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धारा 2(ङ) के अंतर्गत किसी व्यक्ति के "परिवार का सदस्य" से क्या तात्पर्य है? |
पति/पत्नी, पुत्र, अविवाहित पुत्री, पिता, दादा, माता, दादी, भाई, अविवाहित बहन, चाचा, चाचा की पत्नी या विधवा, या भाई का पुत्र या अविवाहित पुत्री जो उसके साथ संयुक्त रूप से रहता हो, या कोई अन्य आश्रित संबंधी। |
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धारा 2(ङ) के अंतर्गत क्या पति या पत्नी परिवार का सदस्य है? |
हाँ, पति/पत्नी परिवार का सदस्य है। |
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धारा 2(ङ) के अंतर्गत क्या पुत्र परिवार का सदस्य है? |
हाँ, पुत्र परिवार का सदस्य है। |
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धारा 2(ङ) के अंतर्गत क्या अविवाहित पुत्री परिवार का सदस्य है? |
हाँ, अविवाहित पुत्री परिवार का सदस्य है। |
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धारा 2(ङ) के अंतर्गत क्या पिता परिवार का सदस्य है? |
हाँ, पिता परिवार का सदस्य है। |
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धारा 2(ङ) के अंतर्गत क्या दादा परिवार का सदस्य है? |
हाँ, दादा परिवार का सदस्य है। |
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धारा 2(ङ) के अंतर्गत क्या माता परिवार का सदस्य है? |
हाँ, माता परिवार का सदस्य है। |
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धारा 2(ङ) के अंतर्गत क्या दादी परिवार का सदस्य है? |
हाँ, दादी परिवार का सदस्य है। |
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धारा 2(ङ) के अंतर्गत क्या भाई परिवार का सदस्य है? |
हाँ, भाई परिवार का सदस्य है। |
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धारा 2(ङ) के अंतर्गत क्या अविवाहित बहन परिवार का सदस्य है? |
हाँ, अविवाहित बहन परिवार का सदस्य है। |
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धारा 2(ङ) के अंतर्गत क्या चाचा परिवार का सदस्य है? |
हाँ, चाचा परिवार का सदस्य है। |
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धारा 2(ङ) के अंतर्गत क्या चाचा की पत्नी या विधवा परिवार का सदस्य है? |
हाँ, चाचा की पत्नी या विधवा परिवार का सदस्य है। |
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धारा 2(ङ) के अंतर्गत क्या भाई का पुत्र परिवार का सदस्य है? |
हाँ, यदि वह उसके साथ संयुक्त रूप से रहता हो। |
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धारा 2(ङ) के अंतर्गत क्या भाई की अविवाहित पुत्री परिवार का सदस्य है? |
हाँ, यदि वह उसके साथ संयुक्त रूप से रहती हो। |
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धारा 2(ङ) के अंतर्गत भाई के पुत्र या अविवाहित पुत्री के परिवार का सदस्य होने के लिए क्या शर्त है? |
उसका संबंधित व्यक्ति के साथ संयुक्त रूप से रहना आवश्यक है। |
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धारा 2(ङ) के अंतर्गत क्या कोई अन्य संबंधी परिवार का सदस्य हो सकता है? |
हाँ, यदि वह उस व्यक्ति पर आश्रित हो। |
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धारा 2(ङ) के अंतर्गत अन्य संबंधी को परिवार का सदस्य मानने की क्या शर्त है? |
उसका उस व्यक्ति पर आश्रित होना। |
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धारा 2(च) का विषय क्या है? |
“किराया नियंत्रण प्राधिकरण” (Rent Controlling Authority) |
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धारा 2(च) के अंतर्गत "किराया नियंत्रण प्राधिकरण" से क्या तात्पर्य है? |
धारा 28 के तहत नियुक्त अधिकारी। |
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धारा 2(च) के अंतर्गत किस अधिकारी को "किराया नियंत्रण प्राधिकरण" कहा गया है? |
धारा 28 के तहत नियुक्त अधिकारी। |
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धारा 2(च) के अंतर्गत "किराया नियंत्रण प्राधिकरण" की नियुक्ति किस धारा के तहत की जाती है? |
धारा 28 के तहत। |
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धारा 2(छ) का विषय क्या है? |
"निरस्त अधिनियम" (repealed Act) |
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धारा 2(छ) का विषय क्या है? |
"निरस्त अधिनियम" की परिभाषा। |
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धारा 2(छ) के अंतर्गत "निरस्त अधिनियम" से क्या तात्पर्य है? |
मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1955 (1955 का 23वाँ अधिनियम)। |
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धारा 2(छ) के अंतर्गत किस अधिनियम को "निरस्त अधिनियम" कहा गया है? |
मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1955 (1955 का 23वाँ अधिनियम)। |
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धारा 2(छ) के अंतर्गत मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1955 का अधिनियम क्रमांक क्या है? |
1955 का 23वाँ अधिनियम। |
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धारा 2(छ) के अंतर्गत मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1955 को किस धारा के तहत निरस्त किया गया था? |
धारा 51 के तहत। |
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धारा 2(ज) का विषय क्या है? |
"मानक किराया" (standard rent) |
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धारा 2(ज) के अंतर्गत किसी आवास के संबंध में "मानक किराया" से क्या तात्पर्य है? |
धारा 7 में निर्दिष्ट मानक किराया या जहाँ धारा 8 के तहत मानक किराया बढ़ाया गया है, वहाँ ऐसा बढ़ा हुआ किराया। |
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धारा 2(ज) के अंतर्गत "मानक किराया" किस धारा में निर्दिष्ट है? |
धारा 7 में। |
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धारा 2(ज) के अंतर्गत यदि धारा 8 के तहत मानक किराया बढ़ाया गया हो, तो "मानक किराया" क्या होगा? |
धारा 8 के तहत बढ़ाया गया किराया। |
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धारा 2(ज) के अंतर्गत क्या धारा 8 के तहत बढ़ा हुआ मानक किराया भी "मानक किराया" की परिभाषा में शामिल है? |
हाँ, धारा 8 के तहत बढ़ाया गया किराया भी "मानक किराया" है। |
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धारा 2(ज) के अंतर्गत किसी आवास का "मानक किराया" किन धाराओं से निर्धारित होता है? |
धारा 7 में निर्दिष्ट मानक किराया तथा धारा 8 के तहत बढ़ाया गया मानक किराया। |
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धारा 2(झ) का विषय क्या है? |
“किरायेदार” (Tenant) |
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धारा 2(झ) के अंतर्गत "किरायेदार" से क्या तात्पर्य है? |
वह व्यक्ति जिसके द्वारा या जिसके खाते या ओर से किसी आवास का किराया देय है या किसी स्पष्ट या निहित अनुबंध के अभाव में देय होता। |
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धारा 2(झ) के अंतर्गत किस व्यक्ति को "किरायेदार" माना जाता है? |
वह व्यक्ति जिसके द्वारा या जिसके खाते या ओर से किसी आवास का किराया देय है या देय होता। |
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धारा 2(झ) के अंतर्गत यदि कोई स्पष्ट या निहित अनुबंध न हो तो "किरायेदार" कौन होगा? |
वह व्यक्ति जिसके द्वारा या जिसके खाते या ओर से किसी आवास का किराया देय होता। |
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धारा 2(झ) के अंतर्गत क्या उप-किरायेदार के रूप में आवास पर कब्जा करने वाला व्यक्ति "किरायेदार" में शामिल है? |
हाँ, उप-किरायेदार के रूप में आवास पर कब्जा करने वाला कोई भी व्यक्ति शामिल है। |
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धारा 2(झ) के अंतर्गत क्या किरायेदारी समाप्त होने के बाद भी कब्जे में रहने वाला व्यक्ति "किरायेदार" में शामिल है? |
हाँ, यदि वह मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के प्रारंभ होने से पहले या बाद में अपनी किरायेदारी समाप्त होने के बाद भी कब्जे में रहता है। |
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धारा 2(झ) के अंतर्गत क्या मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के प्रारंभ होने से पहले किरायेदारी समाप्त होने के बाद कब्जे में रहने वाला व्यक्ति "किरायेदार" है? |
हाँ, वह "किरायेदार" में शामिल है। |
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धारा 2(झ) के अंतर्गत क्या मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के प्रारंभ होने के बाद किरायेदारी समाप्त होने के बाद कब्जे में रहने वाला व्यक्ति "किरायेदार" है? |
हाँ, वह "किरायेदार" में शामिल है। |
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धारा 2(झ) के अंतर्गत क्या प्रत्येक कब्जाधारी व्यक्ति "किरायेदार" माना जाएगा? |
नहीं, केवल वे व्यक्ति जो परिभाषा के अंतर्गत आते हैं। |
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धारा 2(झ) के अंतर्गत किस व्यक्ति को "किरायेदार" की परिभाषा से बाहर रखा गया है? |
वह व्यक्ति जिसके विरुद्ध बेदखली का कोई आदेश या डिक्री जारी की गई हो। |
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धारा 2(झ) के अंतर्गत क्या बेदखली के आदेश या डिक्री से प्रभावित व्यक्ति "किरायेदार" माना जाएगा? |
नहीं, उसके विरुद्ध बेदखली का आदेश या डिक्री जारी होने पर वह "किरायेदार" में शामिल नहीं होगा। |
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धारा 3 का विषय क्या है? |
यह अधिनियम कुछ आवासों पर लागू नहीं होगा। (Act not to apply to certain accommodations) |
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धारा 3(1) के अंतर्गत मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 की कोई बात किन आवासों पर लागू नहीं होगी? |
धारा 3(1) में निर्दिष्ट आवासों पर। |
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धारा 3(1)(क) के अंतर्गत क्या सरकार की संपत्ति वाला आवास मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के अधीन आता है? |
नहीं, सरकार की संपत्ति वाला आवास मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 पर लागू नहीं होगा। |
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धारा 3(1)(क) के अंतर्गत किस प्रकार का आवास मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 से बाहर रखा गया है? |
वह आवास जो सरकार की संपत्ति है। |
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धारा 3(1)(ख) के अंतर्गत क्या स्थानीय प्राधिकरण की संपत्ति वाला प्रत्येक आवास मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 से बाहर है? |
नहीं, केवल वह आवास जिसका उपयोग विशेष रूप से गैर-आवासीय उद्देश्यों के लिए किया जाता है। |
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धारा 3(1)(ख) के अंतर्गत किस स्थानीय प्राधिकरण के आवास पर मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 लागू नहीं होगा? |
ऐसा आवास जो स्थानीय प्राधिकरण की संपत्ति हो और जिसका उपयोग विशेष रूप से गैर-आवासीय उद्देश्यों के लिए किया जाता हो। |
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धारा 3(2) के अंतर्गत सरकार किस माध्यम से छूट प्रदान कर सकती है? |
अधिसूचना द्वारा। |
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धारा 3(2) के अंतर्गत सरकार किसे मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के सभी या किसी भी प्रावधान से छूट दे सकती है? |
ऐसे आवास को जो किसी शैक्षणिक, धार्मिक या धर्मार्थ संस्था अथवा किसी नर्सिंग या प्रसूति गृह के स्वामित्व में हो। |
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धारा 3(2) के अंतर्गत शैक्षणिक, धार्मिक या धर्मार्थ संस्था के स्वामित्व वाले आवास को छूट देने की क्या शर्त है? |
उसकी संपूर्ण आय उस संस्था के लिए उपयोग की जाती हो। |
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धारा 3(2) के अंतर्गत नर्सिंग होम के स्वामित्व वाले आवास को छूट देने की क्या शर्त है? |
उसकी संपूर्ण आय उस नर्सिंग होम के लिए उपयोग की जाती हो। |
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धारा 3(2) के अंतर्गत प्रसूति गृह के स्वामित्व वाले आवास को छूट देने की क्या शर्त है? |
उसकी संपूर्ण आय उस प्रसूति गृह के लिए उपयोग की जाती हो। |
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धारा 3(2) के अंतर्गत क्या सरकार मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के केवल कुछ प्रावधानों से भी छूट दे सकती है? |
हाँ, सरकार सभी या किसी भी प्रावधान से छूट दे सकती है। |
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अध्याय-II (CHAPTER-II) |
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किराया संबंधी प्रावधान (Provisions Regarding Rent) |
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धारा 4 का विषय क्या है? |
अध्याय II के प्रावधान निर्दिष्ट अवधि के लिए कुछ आवासों पर लागू नहीं होंगे। (Provisions of the Chapter not to apply to certain accommodations for specified period) |
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धारा 4 के अंतर्गत अध्याय II के प्रावधान किन आवासों पर लागू नहीं होंगे? |
ऐसे आवास या उसके किसी भाग पर जिसका निर्माण मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के प्रारंभ होने से पहले या बाद में पूरा हुआ हो, निर्दिष्ट अवधि तक। |
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धारा 4 के अंतर्गत क्या अध्याय II के प्रावधान निर्माण पूर्ण होने से पहले बने आवासों पर भी लागू नहीं हो सकते हैं? |
हाँ, यदि उनका निर्माण मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के प्रारंभ होने से पहले पूरा हुआ हो। |
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धारा 4 के अंतर्गत क्या अध्याय II के प्रावधान इस अधिनियम के प्रारंभ होने के बाद निर्मित आवासों पर भी लागू नहीं हो सकते हैं? |
हाँ, यदि उनका निर्माण मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के प्रारंभ होने के बाद पूरा हुआ हो। |
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धारा 4 के अंतर्गत अध्याय II के प्रावधान कितनी अवधि तक लागू नहीं होंगे? |
संबंधित स्थानीय प्राधिकरण को निर्माण पूर्ण होने की सूचना दिए जाने की तारीख से पाँच वर्ष की अवधि तक। |
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धारा 4 के अंतर्गत पाँच वर्ष की अवधि की गणना किस तिथि से की जाएगी? |
जिस तिथि को संबंधित स्थानीय प्राधिकरण को निर्माण पूर्ण होने की सूचना दी गई थी। |
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धारा 4 के अंतर्गत निर्माण पूर्ण होने की सूचना किसे दी जानी चाहिए? |
संबंधित स्थानीय प्राधिकरण को। |
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धारा 4 के अंतर्गत क्या यह छूट आवास के किसी भाग पर भी लागू होती है? |
हाँ, आवास के किसी भाग पर भी लागू होती है। |
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धारा 5 का विषय क्या है? |
मानक किराए से अधिक किराया वसूल नहीं किया जा सकता। (Rent in excess of standard rent not recoverable) |
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धारा 5(1) के अंतर्गत क्या किसी किरायेदार को मानक किराए से अधिक राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी ठहराया जा सकता है? |
नहीं, किसी भी समझौते के विपरीत होने पर भी वह मानक किराए से अधिक भुगतान के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। |
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धारा 5(1) के अंतर्गत किरायेदार किसके लिए अपने मकान मालिक को मानक किराए से अधिक राशि देने के लिए उत्तरदायी नहीं होगा? |
किसी भी आवास पर कब्जा करने के लिए। |
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धारा 5(1) के अंतर्गत क्या विपरीत समझौते का अस्तित्व मानक किराए से अधिक किराया वसूलने की अनुमति देता है? |
नहीं, इसके विपरीत किसी भी समझौते के बावजूद मानक किराए से अधिक किराया देय नहीं होगा। |
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धारा 5(1) के अंतर्गत किरायेदार अधिकतम किस राशि के भुगतान के लिए उत्तरदायी है? |
संबंधित आवास के मानक किराए तक। |
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धारा 5(2) के अंतर्गत मानक किराए से अधिक किराए के भुगतान के लिए किया गया समझौता कैसे माना जाएगा? |
मानो वह केवल मानक किराए के भुगतान के लिए किया गया समझौता हो। |
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धारा 5(2) के अंतर्गत क्या मानक किराए से अधिक किराए के भुगतान का समझौता वैध रूप से लागू रहेगा? |
नहीं, उसे केवल मानक किराए के भुगतान के समझौते के रूप में समझा जाएगा। |
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धारा 5(2) के अंतर्गत मानक किराए से अधिक भुगतान संबंधी समझौते का विधिक प्रभाव क्या होगा? |
उसे केवल मानक किराए के भुगतान के लिए किया गया समझौता माना जाएगा। |
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धारा 6 का विषय क्या है? |
गैरकानूनी शुल्क न तो दावा किए जाएंगे और न ही प्राप्त किए जाएंगे। (Unlawful charges not to be claimed or received) |
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धारा 6(1) के अंतर्गत क्या कोई व्यक्ति मानक किराए से अधिक किराया मांग सकता है? |
नहीं, मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अधीन रहते हुए कोई भी व्यक्ति मानक किराए से अधिक किराया नहीं मांगेगा। |
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धारा 6(1) के अंतर्गत क्या कोई व्यक्ति मानक किराए से अधिक किराया प्राप्त कर सकता है? |
नहीं, कोई भी व्यक्ति मानक किराए से अधिक किराया प्राप्त नहीं करेगा। |
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धारा 6(1) के अंतर्गत क्या विपरीत समझौता होने पर भी मानक किराए से अधिक किराया मांगा या प्राप्त किया जा सकता है? |
नहीं, इसके विपरीत कोई समझौता होने पर भी नहीं। |
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धारा 6(2) के अंतर्गत किरायेदारी या उप-किरायेदारी के अनुदान, नवीनीकरण या निरंतरता के बदले कौन-से कार्य निषिद्ध हैं? |
धारा 6 (2) में वर्णित कार्य निषिद्ध हैं। |
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धारा 6(2)(क) के अंतर्गत क्या किराए के अतिरिक्त राशि प्रीमियम या पगड़ी के रूप में प्राप्त या दावा की जा सकती है? |
नहीं। |
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धारा 6(2)(क) के अंतर्गत क्या किराए के अतिरिक्त किसी भी राशि को प्रीमियम या पगड़ी के रूप में प्राप्त करना निषिद्ध है? |
हाँ, यह निषिद्ध है। |
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धारा 6(2)(क) के अंतर्गत क्या किराए के अतिरिक्त नकद या वस्तु के रूप में किसी भी प्रकार का प्रतिफल प्राप्त करना निषिद्ध है? |
हाँ, किसी भी प्रकार का प्रतिफल प्राप्त करना या दावा करना निषिद्ध है। |
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धारा 6(2)(ख) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण की पूर्व अनुमति के बिना अग्रिम किराए के रूप में कितनी राशि से अधिक का दावा या प्राप्त नहीं किया जा सकता? |
किसी भी आवास के एक महीने के किराए से अधिक की राशि। |
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धारा 6(2)(ख) के अंतर्गत एक महीने के किराए से अधिक अग्रिम किराया लेने के लिए किसकी पूर्व अनुमति आवश्यक है? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण की। |
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धारा 6(3) के अंतर्गत क्या किरायेदार अपने किरायेदारी या उप-किरायेदारी के त्याग, हस्तांतरण या आवंटन के बदले भुगतान मांग सकता है? |
नहीं, ऐसा करना वैध नहीं होगा। |
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धारा 6(3) के अंतर्गत क्या किरायेदार की ओर से कार्य करने वाला या कार्य करने का दावा करने वाला अन्य व्यक्ति भुगतान मांग या प्राप्त कर सकता है? |
नहीं, ऐसा करना वैध नहीं होगा। |
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धारा 6(3) के अंतर्गत किसके बदले भुगतान मांगना या प्राप्त करना अवैध है? |
किरायेदारी या उप-किरायेदारी के त्याग, हस्तांतरण या आवंटन के बदले। |
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धारा 6(4) के अंतर्गत इस धारा के प्रावधान किस प्रकार के भुगतान पर लागू नहीं होंगे? |
ऐसे भुगतान पर जो मकान मालिक की भूमि पर आवास के पूरे या आंशिक निर्माण के वित्तपोषण हेतु किए गए समझौते के तहत किया गया हो। |
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धारा 6(4) के अंतर्गत वित्तपोषण संबंधी समझौते की आवश्यक शर्त क्या है? |
मकान मालिक आवास के पूरा होने पर उस व्यक्ति या उसके परिवार के किसी सदस्य के उपयोग के लिए उसे किराए पर देगा। |
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धारा 6(4) के परन्तुक के अनुसार वित्तपोषण हेतु किया गया भुगतान किस सीमा से अधिक नहीं हो सकता? |
उस आवास के पूरे या आंशिक हिस्से के लिए पाँच वर्ष की अवधि के लिए तय किए गए किराए की राशि से अधिक नहीं। |
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धारा 6(5) के अंतर्गत उपधारा (4) के तहत किया गया भुगतान किस रूप में माना जाएगा? |
किरायेदारी के प्रारंभ से संबंधित अवधि के लिए अग्रिम किराया भुगतान के रूप में। |
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धारा 6(5) के अंतर्गत उपधारा (4) का भुगतान कब से अग्रिम किराया माना जाएगा? |
किरायेदारी के प्रारंभ से उस अवधि के लिए जिससे वह संबंधित है। |
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धारा 7 का विषय क्या है? |
मानक किराया। (Standard rent) |
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धारा 7 के अंतर्गत किसी आवास का "मानक किराया" किसके अनुसार निर्धारित होता है? |
धारा 7 में वर्णित परिस्थितियों के अनुसार। |
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धारा 7(1) के अंतर्गत यदि निरस्त अधिनियम के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा उचित वार्षिक किराया या उचित किराया निर्धारित किया गया हो, तो मानक किराया क्या होगा? |
वही उचित वार्षिक किराया या उचित किराया। |
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धारा 7(1) के अंतर्गत यदि निरस्त अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले तत्कालीन लागू अधिनियम के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा उचित वार्षिक किराया या उचित किराया निर्धारित किया गया हो, तो मानक किराया क्या होगा? |
वही उचित वार्षिक किराया या उचित किराया। |
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धारा 7(1) के अंतर्गत मानक किराया निर्धारित करने के लिए किस प्राधिकारी द्वारा निर्धारित उचित किराया मान्य होगा? |
सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित उचित वार्षिक किराया या उचित किराया। |
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धारा 7(2)(i) के अंतर्गत यदि आवास 1 जनवरी, 1948 को या उससे पहले किराए पर दिया गया था और उचित वार्षिक किराया निर्धारित नहीं है, तो मानक किराया किस आधार पर होगा? |
नगरपालिका मूल्यांकन रजिस्टर में दर्शाए गए किराए या 1 जनवरी, 1948 को प्राप्त किराए में से जो कम हो। |
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धारा 7(2)(i) के अंतर्गत 1 जनवरी, 1948 को या उससे पहले किराए पर दिए गए आवास के लिए कौन-सी कम राशि मानक किराए का आधार होगी? |
नगरपालिका मूल्यांकन रजिस्टर में दर्शाया गया किराया या 1 जनवरी, 1948 को प्राप्त किराया, जो भी कम हो। |
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धारा 7(2)(ii) के अंतर्गत यदि आवास 1 जनवरी, 1948 को या उससे पहले किराए पर नहीं दिया गया था, तो मानक किराया किस आधार पर होगा? |
नगरपालिका मूल्यांकन रजिस्टर में दर्शाया गया किराया या 1 जनवरी, 1948 को प्राप्त किया जा सकने वाला किराया, जो भी कम हो। |
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धारा 7(2)(क) के अंतर्गत आवासीय आवास तथा शैक्षिक प्रयोजनों के लिए उपयोग किए जाने वाले आवास के मामले में कितनी वृद्धि अनुमेय है? |
ऐसे किराए का पैंतीस प्रतिशत। |
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धारा 7(2)(ख) के अंतर्गत अन्य आवासों के मामले में कितनी वृद्धि अनुमेय है? |
ऐसे किराए का सत्तर प्रतिशत। |
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धारा 7(2)(ग) के अंतर्गत यदि किरायेदार नगरपालिका कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं है और 1 जनवरी, 1948 के बाद नगरपालिका कर में वृद्धि हुई है, तो कितनी राशि बढ़ाई जाएगी? |
ऐसी वृद्धि के बराबर राशि। |
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धारा 7(2)(ग) के अंतर्गत नगरपालिका कर में वृद्धि के बराबर राशि जोड़ने की शर्त क्या है? |
किरायेदार नगरपालिका कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी न हो तथा 1 जनवरी, 1948 के बाद नगरपालिका कर में वृद्धि हुई हो। |
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धारा 7(2) के परन्तुक के अनुसार खंड (क) और (ख) में निर्दिष्ट वृद्धि कब अनुमेय होगी? |
जब आवास को अच्छी और रहने योग्य स्थिति में रखा गया हो। |
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धारा 7(2) के परन्तुक के अनुसार क्या अच्छी और रहने योग्य स्थिति में न रखे गए आवास पर 35% या 70% की वृद्धि अनुमेय होगी? |
नहीं। |
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धारा 7(3) कब लागू होता है? |
जब आवास धारा 7 के खंड (1) या (2) के अंतर्गत नहीं आता हो। |
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धारा 7(3)(क) के अंतर्गत यदि आवास का नगरपालिका मूल्यांकन अलग से किया गया है, तो मानक किराया कैसे निर्धारित होगा? |
मूल्यांकन के अनुसार वार्षिक किराया तथा उस पर पंद्रह प्रतिशत अतिरिक्त। |
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धारा 7(3)(क) के अंतर्गत पृथक नगरपालिका मूल्यांकन वाले आवास पर कितना अतिरिक्त जोड़ा जाएगा? |
पंद्रह प्रतिशत। |
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धारा 7(3)(ख) के अंतर्गत यदि केवल आवास के एक भाग का नगरपालिका मूल्यांकन किया गया है, तो मानक किराया कैसे निर्धारित होगा? |
पूरे आवास के वार्षिक किराए की आनुपातिक राशि तथा उस पर पंद्रह प्रतिशत अतिरिक्त के आधार पर। |
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धारा 7(3)(ख) के अंतर्गत आंशिक नगरपालिका मूल्यांकन होने पर कितना अतिरिक्त जोड़ा जाएगा? |
पंद्रह प्रतिशत। |
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धारा 7(3)(ग) कब लागू होगा? |
जब आवास का नगरपालिका मूल्यांकन नहीं किया गया हो। |
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धारा 7(3)(ग)(i) के अंतर्गत नगरपालिका मूल्यांकन न होने पर वार्षिक किराया किस आधार पर गणना किया जाएगा? |
जिस किराए पर आवास पहली बार किराए पर दिया गया था या यदि किराए पर नहीं दिया गया तो जिस राशि पर निर्माण पूर्ण होने के तुरंत बाद किराए पर दिया जा सकता था। |
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धारा 7(3)(ग)(i) के अंतर्गत यदि आवास कभी किराए पर नहीं दिया गया हो तो वार्षिक किराया किस आधार पर निर्धारित होगा? |
जिस राशि पर उसे निर्माण पूरा होने के तुरंत बाद किराए पर दिया जा सकता था। |
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धारा 7(3)(ग)(ii) के अंतर्गत वार्षिक किराया का वैकल्पिक आधार क्या है? |
निर्माण की वास्तविक लागत तथा निर्माण प्रारंभ होने की तिथि पर भूमि के बाजार मूल्य के कुल का 6¾ प्रतिशत वार्षिक भुगतान। |
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धारा 7(3)(ग)(ii) के अंतर्गत 6¾ प्रतिशत की गणना किन राशियों के योग पर की जाती है? |
निर्माण की वास्तविक लागत तथा निर्माण प्रारंभ होने की तिथि पर भूमि के बाजार मूल्य के योग पर। |
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धारा 7(3)(ग) के अंतर्गत अंतिम रूप से कौन-सी राशि मानक किराया होगी? |
उपखंड (i) और (ii) के अनुसार प्राप्त राशियों में से जो कम हो। |
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धारा 8 का विषय क्या है? |
कुछ मामलों में मानक किराए में वैध वृद्धि और अन्य शुल्कों की वसूली। (Lawful increase of standard rent in certain cases and recovery of other charges) |
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धारा 8(1) के अंतर्गत मकान मालिक कब मानक किराए में वैध वृद्धि कर सकता है? |
जब उसने आवास में आवश्यक या सामान्य सजावट अथवा किरायेदारी योग्य मरम्मत से भिन्न सुधार, परिवर्धन या संरचनात्मक परिवर्तन पर व्यय किया हो और उसकी लागत किराया निर्धारण में सम्मिलित न की गई हो। |
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धारा 8(1) के अंतर्गत अधिनियम लागू होने से पहले किए गए सुधार, परिवर्धन या संरचनात्मक परिवर्तन के लिए किसकी सहमति अपेक्षित है? |
किरायेदार की सहमति से या उसके बिना भी। |
|
धारा 8(1) के अंतर्गत अधिनियम लागू होने के बाद किए गए सुधार, परिवर्धन या संरचनात्मक परिवर्तन के लिए किसकी लिखित सहमति आवश्यक है? |
किरायेदार या किराया नियंत्रण प्राधिकरण की लिखित सहमति। |
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धारा 8(1) के अंतर्गत किस प्रकार के व्यय के आधार पर मानक किराए में वृद्धि की जा सकती है? |
सुधार, परिवर्धन या संरचनात्मक परिवर्तन पर किए गए व्यय के आधार पर। |
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धारा 8(1) के अंतर्गत क्या आवश्यक या सामान्य सजावट अथवा किरायेदारी योग्य मरम्मत पर किए गए व्यय के आधार पर मानक किराए में वृद्धि की जा सकती है? |
नहीं। |
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धारा 8(1) के अंतर्गत मानक किराए में वृद्धि की अतिरिक्त शर्त क्या है? |
सुधार, परिवर्धन या संरचनात्मक परिवर्तन की लागत को आवास का किराया निर्धारित करते समय ध्यान में न रखा गया हो। |
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धारा 8(1) के अंतर्गत मानक किराए में प्रति वर्ष अधिकतम कितनी वैध वृद्धि की जा सकती है? |
उस समय देय किराए के दस प्रतिशत से अधिक नहीं। |
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धारा 8(1) के अंतर्गत वैध वृद्धि की गणना किस आधार पर की जाती है? |
उस समय देय किराए के आधार पर। |
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धारा 8(2) के अंतर्गत यदि मकान मालिक बिजली या पानी के उपयोग का शुल्क अदा करता है तो वह क्या कर सकता है? |
वह किरायेदार से भुगतान की गई राशि वसूल कर सकता है। |
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धारा 8(2) के अंतर्गत यदि मकान मालिक स्थानीय प्राधिकरण द्वारा लगाया गया ऐसा शुल्क अदा करता है जो सामान्यतः किरायेदार द्वारा देय होता है, तो क्या वह उसकी वसूली कर सकता है? |
हाँ, वह भुगतान की गई राशि किरायेदार से वसूल कर सकता है। |
|
धारा 8(2) के अंतर्गत मकान मालिक किन शुल्कों की वसूली किरायेदार से कर सकता है? |
आवास में उपयोग की गई बिजली, पानी तथा स्थानीय प्राधिकरण द्वारा लगाए गए ऐसे अन्य शुल्क जो सामान्यतः किरायेदार द्वारा देय हों। |
|
धारा 8(2) के अंतर्गत क्या मकान मालिक धारा 7 के अतिरिक्त प्रावधानों से हटकर भवन या भूमि पर लगाए गए कर की राशि किराए में वृद्धि या अन्य माध्यम से वसूल सकता है? |
नहीं। |
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धारा 8(2) के अंतर्गत भवन या भूमि पर लगाए गए कर की राशि किरायेदार से वसूलने पर क्या प्रतिबंध है? |
धारा 7 के प्रावधानों के अतिरिक्त उसे किराए में वृद्धि या किसी अन्य माध्यम से नहीं वसूला जा सकता। |
|
धारा 8(2) के परन्तुक के अनुसार क्या स्पष्ट या निहित समझौते के तहत किरायेदार का कर भुगतान का दायित्व प्रभावित होगा? |
नहीं, वह दायित्व अप्रभावित रहेगा। |
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धारा 8(2) के परन्तुक के अनुसार किस प्रकार के समझौते के अंतर्गत किरायेदार समय-समय पर उपर्युक्त कर की राशि का भुगतान करने के लिए बाध्य हो सकता है? |
स्पष्ट या निहित समझौते के अंतर्गत। |
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धारा 9 का विषय क्या है? |
किराया वृद्धि की सूचना। (Notice of increase of rent) |
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धारा 9(1) के अंतर्गत यदि मकान मालिक किराया बढ़ाना चाहता है तो उसे क्या करना होगा? |
किरायेदार को किराया बढ़ाने के अपने इरादे की सूचना देनी होगी। |
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धारा 9(1) के अंतर्गत किराया वृद्धि से पूर्व किसे सूचना देना आवश्यक है? |
किरायेदार को। |
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धारा 9(1) के अंतर्गत किराया वृद्धि की सूचना किस विषय में दी जाती है? |
किराया बढ़ाने के मकान मालिक के इरादे के संबंध में। |
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धारा 9(1) के अंतर्गत वैध किराया वृद्धि कब देय और वसूली योग्य होगी? |
केवल उस किरायेदारी की अवधि के लिए जो सूचना दिए जाने की तारीख से तीस दिन बाद समाप्त होती है। |
|
धारा 9(1) के अंतर्गत क्या प्रत्येक किराया वृद्धि तुरंत देय हो जाती है? |
नहीं, वह सूचना दिए जाने की तारीख से तीस दिन बाद समाप्त होने वाली किरायेदारी की अवधि के लिए ही देय और वसूली योग्य होती है। |
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धारा 9(1) के अंतर्गत किराया वृद्धि कब वैध मानी जाएगी? |
जब वह मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के तहत वैध हो। |
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धारा 9(2) के अंतर्गत प्रत्येक नोटिस किस रूप में होना चाहिए? |
लिखित रूप में। |
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धारा 9(2) के अंतर्गत प्रत्येक नोटिस पर किसके हस्ताक्षर होने चाहिए? |
मकान मालिक या उसकी ओर से हस्ताक्षरित होना चाहिए। |
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धारा 9(2) के अंतर्गत नोटिस किरायेदार को किस प्रकार भेजा जा सकता है? |
पावती सहित पंजीकृत डाक द्वारा। |
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धारा 9(2) के अंतर्गत क्या नोटिस व्यक्तिगत रूप से भी दिया जा सकता है? |
हाँ, किरायेदार को उसके निवास पर व्यक्तिगत रूप से दिया जा सकता है। |
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धारा 9(2) के अंतर्गत यदि किरायेदार उपलब्ध न हो तो नोटिस किसे दिया जा सकता है? |
उसके परिवार के किसी सदस्य या नौकर को। |
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धारा 9(2) के अंतर्गत यदि व्यक्तिगत रूप से नोटिस देना व्यावहारिक न हो तो क्या किया जाएगा? |
नोटिस आवास के किसी प्रमुख भाग पर चिपकाया जाएगा। |
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धारा 9(2) के अंतर्गत आवास के किसी प्रमुख भाग पर नोटिस कब चिपकाया जा सकता है? |
जब व्यक्तिगत रूप से देना या दिलाना व्यावहारिक न हो। |
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धारा 10 का विषय क्या है? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण को मानक किराया आदि निर्धारित करने का अधिकार। (Rent Controlling Authority to fix standard rent, etc.) |
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धारा 10(1) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण किसके आवेदन पर कार्यवाही कर सकता है? |
मकान मालिक या किरायेदार द्वारा निर्धारित तरीके से किए गए आवेदन पर। |
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धारा 10(1) के अंतर्गत आवेदन किस प्रकार किया जाना चाहिए? |
निर्धारित तरीके से। |
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धारा 10(1)(i) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण क्या निर्धारित कर सकता है? |
धारा 7 के प्रावधानों के अनुसार मानक किराया। |
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धारा 10(1)(ii) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण क्या निर्धारित कर सकता है? |
धारा 8 में उल्लिखित वृद्धि, यदि कोई हो। |
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धारा 10(2) के अंतर्गत मानक किराया या वैध वृद्धि निर्धारित करते समय किराया नियंत्रण प्राधिकरण किन बातों को ध्यान में रखेगा? |
धारा 7 या धारा 8 के प्रावधानों तथा मामले की परिस्थितियों को। |
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धारा 10(2) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण किस प्रकार की राशि निर्धारित करेगा? |
ऐसी राशि जो उसे उचित प्रतीत हो। |
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धारा 10(3) के अंतर्गत यदि आवास का कुछ भाग विधिपूर्वक उप-किराए पर दिया गया हो तो किराया नियंत्रण प्राधिकरण क्या कर सकता है? |
उप-किराए पर दिए गए हिस्से का मानक किराया भी निर्धारित कर सकता है। |
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धारा 10(3) के अंतर्गत क्या उप-किराए पर दिए गए भाग का मानक किराया पृथक रूप से निर्धारित किया जा सकता है? |
हाँ। |
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धारा 10(4) के अंतर्गत यदि धारा 7 के सिद्धांतों के आधार पर मानक किराया निर्धारित करना संभव न हो तो किराया नियंत्रण प्राधिकरण क्या करेगा? |
आवास की स्थिति, स्थान, दशा एवं उपलब्ध सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए उचित किराया निर्धारित करेगा। |
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धारा 10(4) के अंतर्गत उचित किराया निर्धारित करते समय किन कारकों पर विचार किया जाएगा? |
आवास की स्थिति, स्थान, दशा और उसमें उपलब्ध सुविधाएँ। |
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धारा 10(4) के अंतर्गत क्या समान या लगभग समान आवासों के मानक किराए को भी ध्यान में रखा जा सकता है? |
हाँ। |
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धारा 10(5) के अंतर्गत मानक किराया किस अवधि की किरायेदारी के लिए निर्धारित किया जाएगा? |
बारह महीने की किरायेदारी के लिए। |
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धारा 10(5) के परन्तुक के अनुसार यदि किरायेदारी माह-दर-माह या एक माह से कम अवधि की हो तो मानक किराया कैसे निर्धारित होगा? |
वार्षिक मानक किराए के उसी अनुपात में जिस अनुपात में किरायेदारी की अवधि बारह माह के अनुपात में हो। |
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धारा 10(5) के परन्तुक के अनुसार माह-दर-माह किरायेदारी का मानक किराया किस आधार पर होगा? |
वार्षिक मानक किराए के आनुपातिक आधार पर। |
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धारा 10(6) के अंतर्गत मानक किराया निर्धारित करते समय किराया नियंत्रण प्राधिकरण किस प्रकार के आवास का मानक किराया निर्धारित करेगा? |
बिना फर्नीचर वाले आवास का। |
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धारा 10(6) के अंतर्गत क्या किराया नियंत्रण प्राधिकरण मकान मालिक द्वारा उपलब्ध कराए गए फर्नीचर के लिए अतिरिक्त शुल्क निर्धारित कर सकता है? |
हाँ। |
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धारा 10(6) के अंतर्गत क्या मकान मालिक निर्धारित अतिरिक्त फर्नीचर शुल्क किरायेदार से वसूल सकता है? |
हाँ, ऐसा अतिरिक्त शुल्क वसूल करना वैध होगा। |
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धारा 10(7) के अंतर्गत मानक किराया निर्धारित करते समय किराया नियंत्रण प्राधिकरण को क्या निर्दिष्ट करना होगा? |
वह तिथि जिससे निर्धारित मानक किराया प्रभावी माना जाएगा। |
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धारा 10(7) के परन्तुक के अनुसार प्रभावी तिथि आवेदन की तिथि से कितने दिन पहले की नहीं हो सकती? |
मानक किराया निर्धारण के लिए आवेदन दाखिल करने की तिथि से तीस दिन पहले की नहीं। |
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धारा 10(7) के परन्तुक के अनुसार क्या प्रभावी तिथि आवेदन दाखिल करने की तिथि से तीस दिन से अधिक पूर्व निर्धारित की जा सकती है? |
नहीं। |
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धारा 11 का विषय क्या है? |
अंतरिम किराए का निर्धारण। (Fixation of interim rent) |
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धारा 11 के अंतर्गत अंतरिम किराया कब निर्धारित किया जा सकता है? |
जब धारा 10 के तहत मानक किराया तय करने या वैध वृद्धि निर्धारित करने के लिए आवेदन किया गया हो। |
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धारा 11 के अंतर्गत यदि धारा 10 के तहत आवेदन किया जाए तो किराया नियंत्रण प्राधिकरण क्या जारी करेगा? |
यथाशीघ्र एक अनंतिम आदेश। |
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धारा 11 के अंतर्गत अनंतिम आदेश कब जारी किया जाता है? |
आवेदन पर अंतिम निर्णय लंबित रहने तक। |
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धारा 11 के अंतर्गत अनंतिम आदेश में क्या निर्दिष्ट किया जाएगा? |
किरायेदार द्वारा मकान मालिक को भुगतान की जाने वाली अंतरिम किराया राशि या वैध वृद्धि। |
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धारा 11 के अंतर्गत अंतरिम किराया किसके द्वारा भुगतान किया जाएगा? |
किरायेदार द्वारा मकान मालिक को। |
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धारा 11 के अंतर्गत क्या किराया नियंत्रण प्राधिकरण अंतरिम वैध वृद्धि भी निर्दिष्ट कर सकता है? |
हाँ, अंतरिम वैध वृद्धि निर्दिष्ट कर सकता है। |
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धारा 11 के अंतर्गत अनंतिम आदेश में और क्या निर्धारित किया जाएगा? |
वह तिथि जिससे निर्दिष्ट अंतरिम किराया या वैध वृद्धि प्रभावी मानी जाएगी। |
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धारा 11 के अंतर्गत अंतरिम किराया या वैध वृद्धि की प्रभावी तिथि कौन निर्धारित करेगा? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण। |
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अध्याय-III (CHAPTER-III) |
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किरायेदारों को बेदखल करने पर नियंत्रण (Control of Eviction of Tenants) |
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धारा 11(ए) का विषय क्या है? |
कुछ प्रावधान मकान मालिकों की कुछ श्रेणियों पर लागू नहीं होंगे। (Certain provisions not to apply to certain categories of landlords) |
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धारा 11(ए) के अंतर्गत अध्याय III के प्रावधान किन मामलों में लागू नहीं होंगे? |
जहाँ वे अध्याय III-A में विशेष रूप से निर्धारित मामलों से संबंधित हों। |
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धारा 11(ए) के अंतर्गत अध्याय III के प्रावधान किस प्रकार के मकान मालिक पर लागू नहीं होंगे? |
धारा 23-J में परिभाषित मकान मालिक पर। |
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धारा 11(ए) के अंतर्गत किन मामलों में धारा 23-J में परिभाषित मकान मालिक को अध्याय III के प्रावधानों से अपवर्जित किया गया है? |
अध्याय III-A में विशेष रूप से निर्धारित मामलों में। |
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धारा 11(ए) को किस संशोधन अधिनियम द्वारा सम्मिलित किया गया? |
मध्य प्रदेश अधिनियम 7, 1985 द्वारा। |
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धारा 11(ए) किस तिथि से प्रभावी हुआ? |
16 जनवरी, 1985 से। |
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धारा 12 का विषय क्या है? |
किरायेदारों को बेदखल करने पर प्रतिबंध। (Restriction on eviction of tenants) |
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धारा 12(1) के अंतर्गत किसी किरायेदार के विरुद्ध बेदखली का वाद किन परिस्थितियों में दायर किया जा सकता है? |
केवल धारा 12 (1) में विनिर्दिष्ट एक या अधिक आधारों पर। |
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धारा 12(1) के अंतर्गत क्या किसी अन्य कानून या अनुबंध के विपरीत होने पर भी बेदखली का वाद प्रतिबंधित है? |
हाँ, धारा 12 (1) में निर्दिष्ट आधारों को छोड़कर। |
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धारा 12(1)(क) के अंतर्गत किराए के बकाए के आधार पर बेदखली कब की जा सकती है? |
जब किरायेदार नोटिस की तामील की तारीख से दो माह के भीतर किराए की पूरी बकाया राशि का भुगतान या जमा करने की पेशकश न करे। |
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धारा 12(1)(क) के अंतर्गत किराए के बकाए की मांग का नोटिस किसके द्वारा दिया जाता है? |
मकान मालिक द्वारा। |
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धारा 12(1)(क) के अंतर्गत किरायेदार को बकाया किराया चुकाने या जमा करने की पेशकश करने के लिए कितनी अवधि प्राप्त होती है? |
नोटिस की तामील की तारीख से दो माह। |
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धारा 12(1)(ख) के अंतर्गत यदि किरायेदार ने अवैध रूप से पूरे या आंशिक आवास को उप-किराए पर दिया हो तो क्या बेदखली का आधार बनता है? |
हाँ। |
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धारा 12(1)(ख) के अंतर्गत क्या आवास का अवैध हस्तांतरण बेदखली का आधार है? |
हाँ। |
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धारा 12(1)(ख) के अंतर्गत क्या किसी अन्य प्रतिफल के बदले आवास का कब्जा छोड़ना बेदखली का आधार है? |
हाँ। |
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धारा 12(1)(ख) के अंतर्गत क्या यह आधार अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले या बाद की गई कार्रवाई पर भी लागू होता है? |
हाँ। |
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धारा 12(1)(ग) के अंतर्गत उपद्रव करना क्या बेदखली का आधार है? |
हाँ। |
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धारा 12(1)(ग) के अंतर्गत क्या किरायेदार द्वारा किराए के उद्देश्य के विपरीत कार्य करना बेदखली का आधार है? |
हाँ। |
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धारा 12(1)(ग) के अंतर्गत क्या मकान मालिक के हितों पर प्रतिकूल एवं पर्याप्त प्रभाव डालने वाला कार्य बेदखली का आधार है? |
हाँ। |
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धारा 12(1)(ग) के अंतर्गत उपद्रव करने वाला कौन हो सकता है? |
किरायेदार या उसके साथ रहने वाला कोई भी व्यक्ति। |
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धारा 12(1)(ग) के परन्तुक के अनुसार क्या किरायेदार द्वारा आवास के एक भाग का कार्यालय के रूप में उपयोग किरायेदारी के उद्देश्य के विपरीत माना जाएगा? |
नहीं। |
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धारा 12(1)(घ) के अंतर्गत आवास का लगातार कितनी अवधि तक उपयोग न होना बेदखली का आधार है? |
लगातार छह माह की अवधि तक। |
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धारा 12(1)(घ) के अंतर्गत छह माह की अवधि किस समय से संबंधित होनी चाहिए? |
कब्जा वापस लेने के वाद की तिथि से ठीक पूर्व की अवधि। |
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धारा 12(1)(घ) के अंतर्गत यदि आवास उस प्रयोजन के लिए उपयोग नहीं किया गया जिसके लिए किराए पर दिया गया था तो क्या बेदखली का आधार बनता है? |
हाँ। |
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धारा 12(1)(ङ) के अंतर्गत आवासीय आवास की सद्भावनापूर्ण आवश्यकता किसके लिए हो सकती है? |
मकान मालिक, उसके परिवार के किसी सदस्य या ऐसे व्यक्ति के लिए जिसके लाभ के लिए आवास रखा गया है। |
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धारा 12(1)(ङ) के अंतर्गत क्या मकान मालिक का आवास का स्वामी होना आवश्यक है? |
हाँ, स्वयं या अपने परिवार के सदस्य के निवास हेतु आवश्यकता के मामले में। |
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धारा 12(1)(ङ) के अंतर्गत सद्भावनापूर्ण आवश्यकता के साथ कौन-सी अतिरिक्त शर्त आवश्यक है? |
संबंधित शहर या कस्बे में कोई अन्य यथोचित उपयुक्त आवासीय आवास उपलब्ध न हो। |
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धारा 12(1)(ङ) के अंतर्गत यह प्रावधान किस संशोधन द्वारा पुनः सम्मिलित किया गया? |
मध्य प्रदेश अधिनियम 7, 1985 द्वारा। |
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धारा 12(1)(च) के अंतर्गत गैर-आवासीय आवास की सद्भावनापूर्ण आवश्यकता किन उद्देश्यों के लिए हो सकती है? |
मकान मालिक के व्यवसाय या उसके वयस्क पुत्र अथवा अविवाहित पुत्री के व्यवसाय को प्रारंभ या जारी रखने के लिए, अथवा ऐसे व्यक्ति के लिए जिसके लाभ के लिए आवास रखा गया है। |
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धारा 12(1)(च) के अंतर्गत क्या मकान मालिक के वयस्क पुत्र के व्यवसाय के लिए आवश्यकता बेदखली का आधार है? |
हाँ। |
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धारा 12(1)(च) के अंतर्गत क्या मकान मालिक की अविवाहित पुत्री के व्यवसाय के लिए आवश्यकता बेदखली का आधार है? |
हाँ। |
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धारा 12(1)(च) के अंतर्गत कौन-सी अतिरिक्त शर्त आवश्यक है? |
संबंधित शहर या कस्बे में कोई अन्य यथोचित उपयुक्त गैर-आवासीय आवास उपलब्ध न हो। |
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धारा 12(1)(छ) के अंतर्गत यदि आवास असुरक्षित या मानव निवास के लिए अनुपयुक्त हो गया हो तो क्या बेदखली का आधार बनता है? |
हाँ, यदि मरम्मत बिना खाली कराए संभव न हो। |
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धारा 12(1)(छ) के अंतर्गत मरम्मत के लिए क्या शर्त आवश्यक है? |
आवास खाली किए बिना मरम्मत कार्य संभव न हो। |
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धारा 12(1)(ज) के अंतर्गत निर्माण, पुनर्निर्माण या महत्वपूर्ण परिवर्धन/परिवर्तन हेतु वास्तविक आवश्यकता क्या बेदखली का आधार है? |
हाँ। |
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धारा 12(1)(ज) के अंतर्गत क्या निर्माण या पुनर्निर्माण आवास खाली किए बिना संभव नहीं होना चाहिए? |
हाँ। |
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धारा 12(1)(झ) के अंतर्गत यदि किरायेदार ने अपने निवास हेतु उपयुक्त आवास का निर्माण कर लिया हो तो क्या बेदखली का आधार बनता है? |
हाँ। |
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धारा 12(1)(झ) के अंतर्गत क्या उपयुक्त आवास पर खाली कब्जा प्राप्त करना बेदखली का आधार है? |
हाँ। |
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धारा 12(1)(झ) के अंतर्गत क्या उपयुक्त आवास का आवंटन प्राप्त होना बेदखली का आधार है? |
हाँ। |
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धारा 12(1)(ञ) के अंतर्गत सेवा या रोजगार के कारण दिए गए आवास के मामले में बेदखली का आधार क्या है? |
किरायेदार द्वारा ऐसी सेवा या रोजगार छोड़ देना। |
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धारा 12(1)(ञ) के अंतर्गत क्या यह आधार अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले या बाद में सेवा छोड़ने पर भी लागू होता है? |
हाँ। |
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धारा 12(1)(ट) के अंतर्गत क्या आवास को पर्याप्त क्षति पहुँचाना बेदखली का आधार है? |
हाँ। |
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धारा 12(1)(ट) के अंतर्गत क्या आवास को पर्याप्त क्षति पहुँचाने की अनुमति देना भी बेदखली का आधार है? |
हाँ। |
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धारा 12(1)(ठ) के अंतर्गत यदि किरायेदार मकान खाली करने का लिखित नोटिस देकर मकान मालिक को हानि की स्थिति में डाल दे तो क्या बेदखली का आधार बनता है? |
हाँ। |
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धारा 12(1)(ठ) के अंतर्गत मकान मालिक द्वारा कौन-सी कार्रवाई किए जाने पर यह आधार लागू होता है? |
आवास बेचने का अनुबंध करने या ऐसा अन्य कदम उठाने पर जिससे कब्जा न मिलने पर उसके हितों को गंभीर हानि हो। |
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धारा 12(1)(ड) के अंतर्गत मकान मालिक की लिखित अनुमति के बिना भौतिक परिवर्तन करना क्या बेदखली का आधार है? |
हाँ। |
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धारा 12(1)(ड) के अंतर्गत किस प्रकार का निर्माण कार्य बेदखली का आधार है? |
ऐसा निर्माण जिससे मकान मालिक के हितों को हानि पहुँचे या संपत्ति के मूल्य में पर्याप्त कमी आने की संभावना हो। |
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धारा 12(1)(ढ) के अंतर्गत यदि आवास खुली भूमि हो तो बेदखली का आधार क्या है? |
मकान मालिक को उस पर घर बनाने के लिए उसकी आवश्यकता होना। |
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धारा 12(1)(ण) के अंतर्गत क्या किरायेदार द्वारा बिना लिखित अनुमति अतिरिक्त हिस्से पर कब्जा करना बेदखली का आधार है? |
हाँ। |
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धारा 12(1)(ण) के अंतर्गत अतिरिक्त कब्जे के बावजूद बेदखली की शर्त क्या है? |
मकान मालिक के लिखित नोटिस के बावजूद उस हिस्से को खाली न करना। |
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धारा 12(1)(त) के अंतर्गत भवन का अनैतिक या अवैध उद्देश्यों के लिए उपयोग करने के अपराध में दोषसिद्धि क्या बेदखली का आधार है? |
हाँ। |
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धारा 12(1)(त) के अंतर्गत किस कानून के अधीन दोषसिद्धि प्रासंगिक है? |
वर्तमान में लागू किसी भी कानून के अधीन। |
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धारा 12(2) के अंतर्गत क्या बेदखली का आदेश धारा 15 में निर्दिष्ट प्रत्येक उप-किरायेदार पर बाध्यकारी होगा? |
नहीं, जब तक उसे कार्यवाही में पक्षकार न बनाया जाए और आदेश उस पर बाध्यकारी न बनाया जाए। |
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धारा 12(2) के अंतर्गत किस उप-किरायेदार को विशेष संरक्षण प्राप्त है? |
जिसने धारा 15 के प्रावधानों के अनुसार मकान मालिक को अपनी उप-किरायेदारी की सूचना दी हो। |
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धारा 12(2) के अंतर्गत उप-किरायेदार पर बेदखली का आदेश बाध्यकारी होने के लिए क्या आवश्यक है? |
उसे कार्यवाही में पक्षकार बनाया जाए और बेदखली का आदेश उस पर बाध्यकारी बनाया जाए। |
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धारा 12(3) के अंतर्गत धारा 12(1)(क) के आधार पर बेदखली का आदेश कब नहीं दिया जाएगा? |
जब किरायेदार धारा 13 के अनुसार भुगतान या जमा कर देता है। |
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धारा 12(3) के अंतर्गत किरायेदार को किस धारा के अनुसार भुगतान या जमा करना आवश्यक है? |
धारा 13 के अनुसार। |
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धारा 12(3) के परन्तुक के अनुसार इस उपधारा का लाभ पुनः कब नहीं मिलेगा? |
जब एक बार लाभ प्राप्त करने के बाद किरायेदार लगातार तीन महीनों तक पुनः किराया देने में चूक करे। |
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धारा 12(3) के परन्तुक के अनुसार लगातार कितने महीनों तक किराया न देने पर किरायेदार लाभ से वंचित हो जाएगा? |
लगातार तीन महीनों तक। |
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धारा 12(4) के अंतर्गत हस्तांतरण द्वारा आवास प्राप्त करने वाले मकान मालिक द्वारा धारा 12(1)(ङ) या 12(1)(च) के आधार पर बेदखली का वाद कब दायर किया जा सकता है? |
अधिग्रहण की तारीख से एक वर्ष की अवधि बीत जाने के बाद। |
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धारा 12(4) के अंतर्गत हस्तांतरण द्वारा प्राप्त आवास के मामले में प्रतीक्षा अवधि कितनी है? |
एक वर्ष। |
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धारा 12(5) के अंतर्गत धारा 12(1)(ङ) के आधार पर बेदखली का आदेश होने पर मकान मालिक कब कब्जा प्राप्त कर सकता है? |
आदेश की तारीख से दो महीने की अवधि समाप्त होने के बाद। |
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धारा 12(5) के अंतर्गत क्या मकान मालिक आदेश की तारीख से दो महीने की अवधि समाप्त होने से पहले कब्जा प्राप्त कर सकता है? |
नहीं। |
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धारा 12(6)(क) के अंतर्गत धारा 12(1)(च) के आधार पर बेदखली का आदेश होने पर मकान मालिक कब तक कब्जा प्राप्त नहीं कर सकता? |
आदेश की तारीख से दो महीने की अवधि समाप्त होने से पहले। |
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धारा 12(6)(ख) के अंतर्गत किन शहरों में मुआवजा दिए बिना मकान मालिक कब्जा प्राप्त नहीं कर सकता? |
ग्वालियर (लश्कर एवं मोरार सहित), इंदौर, उज्जैन, रतलाम, भोपाल, जबलपुर, रायपुर, दुर्ग तथा राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य शहरों में। |
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धारा 12(6)(ख) के अंतर्गत निर्दिष्ट शहरों में कब्जा प्राप्त करने से पूर्व मकान मालिक को क्या करना आवश्यक है? |
किरायेदार को विधि अनुसार निर्धारित मुआवजा देना। |
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धारा 12(6)(ख)(i)(क) के अंतर्गत दस वर्षों तक व्यावसायिक उपयोग की स्थिति में मुआवजा कितना होगा? |
आवास के वार्षिक मानक किराए की राशि का दोगुना। |
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धारा 12(6)(ख)(i)(क) के अंतर्गत दोगुना वार्षिक मानक किराया कब देय होगा? |
जब बेदखल किए जा रहे किरायेदार ने वाद से ठीक पूर्व दस वर्षों तक आवास का व्यावसायिक या व्यावसायिक सहित अन्य प्रयोजन के लिए उपयोग किया हो। |
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धारा 12(6)(ख)(i)(ख) के अंतर्गत पूर्ववर्ती किरायेदार का व्यवसाय हस्तांतरण या उत्तराधिकार से प्राप्त करने वाले उत्तरवर्ती किरायेदार के मामले में मुआवजा कितना होगा? |
आवास के वार्षिक मानक किराए की राशि का दोगुना। |
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धारा 12(6)(ख)(ii) के अंतर्गत अन्य मामलों में मुआवजा कितना होगा? |
आवास के वार्षिक मानक किराए की राशि। |
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धारा 12(7) के अंतर्गत धारा 12(1)(ज) के आधार पर बेदखली का आदेश कब नहीं दिया जाएगा? |
जब तक न्यायालय प्रस्तावित पुनर्निर्माण संबंधी आवश्यक बातों से संतुष्ट न हो। |
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धारा 12(7) के अंतर्गत न्यायालय को प्रस्तावित पुनर्निर्माण के संबंध में किस बात से संतुष्ट होना चाहिए? |
कि वह किरायेदारी के मूल उद्देश्य को मौलिक रूप से नहीं बदलेगा या मौलिक परिवर्तन जनहित में है। |
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धारा 12(7) के अंतर्गत पुनर्निर्माण के लिए योजनाओं और अनुमानों के संबंध में क्या आवश्यक है? |
वे विधिवत तैयार किए गए हों। |
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धारा 12(7) के अंतर्गत पुनर्निर्माण हेतु धनराशि के संबंध में क्या आवश्यक है? |
आवश्यक धनराशि मकान मालिक के पास उपलब्ध हो। |
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धारा 12(8) के अंतर्गत धारा 12(1)(ञ) के आधार पर बेदखली का आदेश कब नहीं दिया जाएगा? |
जब मकान मालिक की सेवा या रोजगार में न रहने संबंधी विवाद सक्षम प्राधिकारी के समक्ष लंबित हो। |
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धारा 12(8) के अंतर्गत विवाद किसके समक्ष लंबित होना चाहिए? |
ऐसे विवाद का निर्णय करने के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष। |
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धारा 12(9) के अंतर्गत धारा 12(1)(ट) के आधार पर बेदखली का आदेश कब नहीं दिया जाएगा? |
जब किरायेदार न्यायालय द्वारा निर्दिष्ट समय में क्षति की मरम्मत कर दे या न्यायालय द्वारा निर्देशित मुआवजा अदा कर दे। |
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धारा 12(9) के अंतर्गत क्षति की मरम्मत किसकी संतुष्टि के अनुसार होनी चाहिए? |
न्यायालय की संतुष्टि के अनुसार। |
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धारा 12(10) के अंतर्गत धारा 12(1)(ड) के आधार पर बेदखली का आदेश कब नहीं दिया जाएगा? |
जब किरायेदार न्यायालय द्वारा निर्दिष्ट समय में आवास को उसकी मूल स्थिति में बहाल कर दे या न्यायालय द्वारा निर्देशित मुआवजा दे दे। |
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धारा 12(10) के अंतर्गत किरायेदार बेदखली से कैसे बच सकता है? |
आवास को उसकी मूल स्थिति में बहाल करके या न्यायालय निर्देशित मुआवजा देकर। |
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धारा 12(11) के अंतर्गत धारा 12(1)(ण) के आधार पर बेदखली का आदेश कब नहीं दिया जाएगा? |
जब किरायेदार न्यायालय द्वारा निर्दिष्ट समय में अतिरिक्त कब्जे वाले हिस्से को खाली कर दे और न्यायालय निर्देशित मुआवजा अदा कर दे। |
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धारा 12(11) के अंतर्गत अतिरिक्त कब्जे वाले हिस्से के संबंध में किरायेदार को क्या करना होगा? |
अपने लिए किराए पर न दिए गए आवास के हिस्से को खाली करना होगा। |
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धारा 13 का विषय क्या है? |
किरायेदार को बेदखली से सुरक्षा का लाभ कब मिल सकता है। (When tenant can get benefit of protection against eviction) |
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धारा 13(1) के अंतर्गत यह प्रावधान किन कार्यवाहियों पर लागू होता है? |
धारा 12 में निर्दिष्ट आधारों पर मकान मालिक द्वारा शुरू किए गए मुकदमे या अन्य कार्यवाही तथा बेदखली के आदेश या डिक्री के विरुद्ध किरायेदार द्वारा दायर अपील या अन्य कार्यवाही पर। |
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धारा 13(1) के अंतर्गत समन या अपील/अन्य कार्यवाही की सूचना की तामील के कितने समय के भीतर किरायेदार को राशि जमा या भुगतान करनी होगी? |
एक माह के भीतर। |
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धारा 13(1) के अंतर्गत क्या न्यायालय अतिरिक्त समय प्रदान कर सकता है? |
हाँ, इस संबंध में किए गए आवेदन पर अतिरिक्त समय प्रदान कर सकता है। |
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धारा 13(1) के अंतर्गत किरायेदार को किस दर से राशि जमा या भुगतान करनी होगी? |
जिस दर से किरायेदार किराया देता था उसी दर से। |
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धारा 13(1) के अंतर्गत प्रारंभिक जमा या भुगतान किस अवधि के लिए किया जाएगा? |
जिस अवधि के लिए किराया बकाया है, जिसमें जमा या भुगतान किए जाने वाले माह से पूर्व वाले माह के अंत तक की अवधि भी सम्मिलित है। |
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धारा 13(1) के अंतर्गत प्रारंभिक जमा के बाद किरायेदार को आगे क्या करना होगा? |
मुकदमे, अपील या कार्यवाही के निर्णय तक प्रत्येक आगामी माह की 15 तारीख तक उसी दर से किराए के बराबर राशि जमा या भुगतान करनी होगी। |
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धारा 13(1) के अंतर्गत प्रत्येक आगामी माह की राशि कब तक जमा या भुगतान करनी होगी? |
प्रत्येक आगामी माह की 15 तारीख तक। |
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धारा 13(2) के अंतर्गत यदि देय किराए की राशि के संबंध में विवाद हो तो कौन उचित अनंतिम किराया निर्धारित करेगा? |
न्यायालय। |
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धारा 13(2) के अंतर्गत अनंतिम किराया किसके निवेदन पर निर्धारित किया जा सकता है? |
मकान मालिक या किरायेदार के निवेदन पर। |
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धारा 13(2) के अंतर्गत किराए के विवाद का निवेदन कब उठाया जाना चाहिए? |
मुकदमे या कार्यवाही के दौरान यथाशीघ्र। |
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धारा 13(2) के अंतर्गत क्या न्यायालय बाद के चरण में किराए के विवाद संबंधी निवेदन पर विचार करेगा? |
नहीं, जब तक कि लिखित रूप में दर्ज कारण न हों। |
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धारा 13(2) के अंतर्गत अनंतिम किराया किस उद्देश्य से निर्धारित किया जाता है? |
धारा 13 (1) के अनुसार जमा या भुगतान की जाने वाली राशि निर्धारित करने के लिए। |
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धारा 13(3) के अंतर्गत यदि यह विवाद हो कि किराया किसे देय है तो न्यायालय क्या निर्देश दे सकता है? |
किरायेदार को देय राशि न्यायालय में जमा करने का निर्देश दे सकता है। |
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धारा 13(3) के अंतर्गत जमा की गई राशि कौन निकाल सकता है? |
न्यायालय द्वारा विवाद का निर्णय कर भुगतान का आदेश दिए जाने तक कोई भी व्यक्ति नहीं। |
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धारा 13(4) के अंतर्गत यदि न्यायालय को लगे कि उपधारा (3) का विवाद झूठे या तुच्छ आधार पर उठाया गया है तो वह क्या कर सकता है? |
बेदखली के विरुद्ध बचाव को खारिज कर मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ा सकता है। |
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धारा 13(4) के अंतर्गत बेदखली के विरुद्ध बचाव कब खारिज किया जा सकता है? |
जब विवाद झूठे या तुच्छ कारणों से उठाया गया हो। |
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धारा 13(5) के अंतर्गत यदि किरायेदार उपधारा (1) या (2) के अनुसार राशि जमा या भुगतान कर देता है तो क्या किराया चूक के आधार पर बेदखली का आदेश दिया जाएगा? |
नहीं। |
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धारा 13(5) के अंतर्गत उपधारा (1) या (2) का पालन करने पर न्यायालय क्या प्रदान कर सकता है? |
मकान मालिक को उचित लागत। |
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धारा 13(6) के अंतर्गत यदि किरायेदार आवश्यक राशि जमा या भुगतान करने में विफल रहता है तो न्यायालय क्या कर सकता है? |
बेदखली के विरुद्ध बचाव को खारिज कर मुकदमे, अपील या कार्यवाही की सुनवाई आगे बढ़ा सकता है। |
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धारा 13(6) के अंतर्गत बेदखली के विरुद्ध बचाव कब खारिज किया जा सकता है? |
जब किरायेदार इस धारा के अनुसार आवश्यक राशि जमा या भुगतान करने में विफल रहे। |
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धारा 14 का विषय क्या है? |
उप-किराए पर प्रतिबंध। (Restrictions on sub-letting) |
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धारा 14(1) के अंतर्गत क्या किरायेदार मकान मालिक की पूर्व लिखित सहमति के बिना आवास को उप-किराए पर दे सकता है? |
नहीं। |
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धारा 14(1) के अंतर्गत उप-किराए पर देने के लिए किसकी पूर्व लिखित सहमति आवश्यक है? |
मकान मालिक की। |
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धारा 14(1)(क) के अंतर्गत क्या किरायेदार संपूर्ण आवास को उप-किराए पर दे सकता है? |
नहीं, मकान मालिक की पूर्व लिखित सहमति के बिना नहीं। |
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धारा 14(1)(क) के अंतर्गत क्या किरायेदार आवास के किसी भाग को उप-किराए पर दे सकता है? |
नहीं, मकान मालिक की पूर्व लिखित सहमति के बिना नहीं। |
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धारा 14(1)(क) के अंतर्गत किस आवास को उप-किराए पर देने पर प्रतिबंध है? |
किरायेदार के रूप में धारित संपूर्ण आवास या उसका कोई भाग। |
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धारा 14(1)(ख) के अंतर्गत क्या किरायेदार अपनी किरायेदारी में अधिकारों का हस्तांतरण कर सकता है? |
नहीं, मकान मालिक की पूर्व लिखित सहमति के बिना नहीं। |
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धारा 14(1)(ख) के अंतर्गत क्या किरायेदार अपनी किरायेदारी या उसके किसी भाग में अपने अधिकार सौंप सकता है? |
नहीं, मकान मालिक की पूर्व लिखित सहमति के बिना नहीं। |
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धारा 14(2) के अंतर्गत क्या मकान मालिक उप-किराए की सहमति के बदले प्रीमियम या पगड़ी के रूप में राशि का दावा कर सकता है? |
नहीं। |
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धारा 14(2) के अंतर्गत क्या मकान मालिक उप-किराए की सहमति के बदले प्रीमियम या पगड़ी के रूप में राशि प्राप्त कर सकता है? |
नहीं। |
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धारा 14(2) के अंतर्गत क्या मकान मालिक उप-किराए की सहमति के बदले नकद या वस्तु के रूप में किसी प्रकार का प्रतिफल प्राप्त कर सकता है? |
नहीं। |
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धारा 14(2) के अंतर्गत उप-किराए की सहमति के बदले मकान मालिक द्वारा कौन-सा प्रतिफल लेना निषिद्ध है? |
प्रीमियम, पगड़ी या नकद अथवा वस्तु के रूप में किसी भी प्रकार का प्रतिफल। |
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धारा 15 का विषय क्या है? |
उप-किरायेदारी के सृजन और समाप्ति की सूचना। (Notice of creation and termination of sub-tenancy) |
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धारा 15(1) के अंतर्गत अधिनियम लागू होने के बाद उप-किरायेदारी किन परिस्थितियों में दी जा सकती है? |
मकान मालिक की पूर्व लिखित सहमति से। |
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धारा 15(1) के अंतर्गत उप-किरायेदारी के सृजन की सूचना कौन दे सकता है? |
किरायेदार या उप-किरायेदार। |
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धारा 15(1) के अंतर्गत उप-किरायेदारी के सृजन की सूचना किसे दी जाएगी? |
मकान मालिक को। |
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धारा 15(1) के अंतर्गत उप-किरायेदारी के सृजन की सूचना किस प्रकार दी जाएगी? |
निर्धारित तरीके से। |
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धारा 15(1) के अंतर्गत उप-किरायेदारी के सृजन की सूचना कितने समय के भीतर दी जा सकती है? |
उप-किरायेदारी की तिथि से एक महीने के भीतर। |
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धारा 15(1) के अंतर्गत उप-किरायेदारी की समाप्ति की सूचना कौन दे सकता है? |
किरायेदार या उप-किरायेदार। |
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धारा 15(1) के अंतर्गत उप-किरायेदारी की समाप्ति की सूचना कितने समय के भीतर दी जा सकती है? |
समाप्ति की तिथि से एक महीने के भीतर। |
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धारा 15(2) के अंतर्गत अधिनियम लागू होने से पहले वैध रूप से सृजित उप-किरायेदारी की सूचना कौन दे सकता है? |
किरायेदार या उप-किरायेदार। |
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धारा 15(2) के अंतर्गत अधिनियम लागू होने से पहले की उप-किरायेदारी के सृजन की सूचना किसे दी जाएगी? |
मकान मालिक को। |
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धारा 15(2) के अंतर्गत अधिनियम लागू होने से पहले की उप-किरायेदारी के सृजन की सूचना कितने समय के भीतर दी जा सकती है? |
मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के लागू होने के छह महीने के भीतर। |
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धारा 15(2) के अंतर्गत अधिनियम लागू होने से पहले की उप-किरायेदारी की समाप्ति की सूचना कितने समय के भीतर दी जा सकती है? |
उसकी समाप्ति के एक महीने के भीतर। |
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धारा 15(2) के अंतर्गत अधिनियम लागू होने से पहले की उप-किरायेदारी की सूचना किस प्रकार दी जाएगी? |
निर्धारित तरीके से। |
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धारा 15(3) के अंतर्गत यदि मकान मालिक यह दावा करे कि उप-किरायेदारी वैध नहीं थी, तो विवाद का निर्णय कौन करेगा? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण। |
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धारा 15(3) के अंतर्गत उप-किरायेदारी की वैधता के विवाद के संबंध में आवेदन किसके द्वारा किया जा सकता है? |
मकान मालिक या उप-किरायेदार द्वारा। |
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धारा 15(3) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण को आवेदन कितने समय के भीतर किया जाना चाहिए? |
मकान मालिक को उप-किरायेदारी की सूचना प्राप्त होने की तिथि से या किरायेदार अथवा उप-किरायेदार द्वारा सूचना जारी करने की तिथि से दो महीने के भीतर। |
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धारा 15(3) के अंतर्गत यदि उप-किरायेदारी की वैधता पर विवाद हो तो उसका निर्णय किस प्राधिकारी द्वारा किया जाएगा? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा। |
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धारा 16 का विषय क्या है? |
कुछ मामलों में उप-किरायेदार किरायेदार होगा। (Sub-tenant to be tenant in certain cases) |
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धारा 16(1) के अंतर्गत उप-किरायेदार को सीधे मकान मालिक का किरायेदार कब माना जाएगा? |
जब धारा 12 के तहत किरायेदार के विरुद्ध बेदखली का आदेश दिया गया हो, परंतु धारा 15 में निर्दिष्ट उप-किरायेदार के विरुद्ध नहीं, और मकान मालिक को उप-किरायेदारी की सूचना दे दी गई हो। |
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धारा 16(1) के अंतर्गत उप-किरायेदार को सीधे किरायेदार माने जाने की एक आवश्यक शर्त क्या है? |
मकान मालिक को उप-किरायेदारी की सूचना दी गई हो। |
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धारा 16(1) के अंतर्गत यदि बेदखली का आदेश केवल किरायेदार के विरुद्ध हो और उप-किरायेदार के विरुद्ध न हो, तो उप-किरायेदार की स्थिति क्या होगी? |
वह मकान मालिक के सीधे अधीन किरायेदार माना जाएगा। |
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धारा 16(1) के अंतर्गत उप-किरायेदार को सीधे किरायेदार किस तिथि से माना जाएगा? |
बेदखली के आदेश की तिथि से। |
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धारा 16(1) के अंतर्गत उप-किरायेदार किन शर्तों और नियमों पर किरायेदार माना जाएगा? |
उन्हीं शर्तों और नियमों पर जिन पर मूल किरायेदार किरायेदारी जारी रहने की स्थिति में मकान मालिक का किरायेदार होता। |
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धारा 16(2) के अंतर्गत यदि अधिनियम लागू होने से पहले किरायेदार का हित समाप्त हो गया हो, तो उप-किरायेदार कब सीधे किरायेदार माना जाएगा? |
यदि उसका हित समाप्त न हुआ हो और उप-किरायेदारी वैध रूप से दी गई हो, तो अधिनियम के लागू होने की तिथि से। |
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धारा 16(2) के अंतर्गत किस प्रकार के उप-किरायेदार को सीधे मकान मालिक का किरायेदार माना जाएगा? |
जिसे आवास पूर्ण या आंशिक रूप से वैध रूप से उप-किराए पर दिया गया हो और जिसका हित समाप्त न हुआ हो। |
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धारा 16(2) के अंतर्गत उप-किरायेदार को सीधे किरायेदार किसके अधीन माना जाएगा? |
मकान मालिक के अधीन। |
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धारा 16(2) के अंतर्गत उप-किरायेदार किन शर्तों पर मकान मालिक का किरायेदार माना जाएगा? |
उन्हीं शर्तों और नियमों पर जिन पर मूल किरायेदार, यदि उसकी किरायेदारी जारी रहती, तो मकान मालिक का किरायेदार होता। |
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धारा 17 का विषय क्या है? |
कब्जे और पुनः प्रवेश के लिए कब्जे की वसूली। (Recovery of possession for occupation and re-entry) |
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धारा 17 को किस अधिनियम द्वारा हटाया गया और पुनः सम्मिलित किया गया? |
मध्य प्रदेश अधिनियम 27, 1983 द्वारा हटाया गया तथा मध्य प्रदेश अधिनियम 7, 1985 द्वारा पुनः सम्मिलित किया गया। |
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धारा 17(1) के अंतर्गत यह प्रावधान धारा 12 की किन धाराओं के आधार पर प्राप्त कब्जे पर लागू होता है? |
धारा 12(1) के खंड (ङ) या खंड (च) के तहत प्राप्त कब्जे पर। |
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धारा 17(1) के अंतर्गत मकान मालिक किराया नियंत्रण प्राधिकरण की अनुमति के बिना आवास को कितनी अवधि तक पुनः किराए पर नहीं दे सकता? |
कब्जा प्राप्त करने की तारीख से दो वर्ष के भीतर। |
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धारा 17(1) के अंतर्गत पुनः किराए पर देने के लिए किसकी अनुमति आवश्यक है? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण की, निर्धारित तरीके से प्राप्त अनुमति। |
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धारा 17(1) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण अनुमति देते समय क्या निर्देश दे सकता है? |
मकान मालिक को बेदखल किरायेदार को आवास का कब्जा सौंपने का निर्देश दे सकता है। |
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धारा 17(2) के अंतर्गत यदि मकान मालिक स्वयं स्वामी है तो उसे कब्जा प्राप्त करने के कितने समय के भीतर आवास पर कब्जा करना चाहिए? |
कब्जा प्राप्त करने के दो महीने के भीतर। |
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धारा 17(2) के अंतर्गत यदि मकान मालिक या लाभार्थी व्यक्ति दो महीने के भीतर आवास पर कब्जा नहीं करता है, तो क्या किराया नियंत्रण प्राधिकरण हस्तक्षेप कर सकता है? |
हाँ। |
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धारा 17(2) के अंतर्गत यदि मकान मालिक दो वर्ष के भीतर किराया नियंत्रण प्राधिकरण की अनुमति के बिना किसी अन्य व्यक्ति को आवास पुनः किराए पर दे देता है, तो किराया नियंत्रण प्राधिकरण क्या कर सकता है? |
बेदखल किरायेदार के आवेदन पर मकान मालिक को कब्जा लौटाने या उचित मुआवजा देने का निर्देश दे सकता है। |
|
धारा 17(2) के अंतर्गत यदि आवास का कब्जा ऐसे कारणों से किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित किया जाए जो किराया नियंत्रण प्राधिकरण को सद्भावनापूर्ण न प्रतीत हों, तो क्या कार्रवाई की जा सकती है? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण कब्जा लौटाने या उचित मुआवजा देने का निर्देश दे सकता है। |
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धारा 17(2) के अंतर्गत बेदखल किरायेदार को आवेदन कब करना चाहिए? |
निर्धारित समय के भीतर। |
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धारा 17(2) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण मकान मालिक को कौन-से वैकल्पिक निर्देश दे सकता है? |
बेदखल किरायेदार को आवास का कब्जा देने या उचित मुआवजा देने का। |
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धारा 17(3) के अंतर्गत यदि मकान मालिक ने धारा 12 की उपधारा (7) के तहत मुआवजा दिया हो और बेदखल किरायेदार को पुनः कब्जा मिल जाए, तो क्या किरायेदार वह मुआवजा लौटाने के लिए उत्तरदायी होगा? |
नहीं। |
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धारा 17(3) के अंतर्गत पुनः कब्जा मिलने पर धारा 12(7) के तहत प्राप्त मुआवजे का क्या प्रभाव होगा? |
बेदखल किरायेदार उसे वापस करने के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। |
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धारा 17 की उपधाराएँ (4), (5) और (6) किस अधिनियम द्वारा हटाई गईं और पुनः जोड़ी गईं? |
मध्य प्रदेश अधिनियम 27, 1983 द्वारा हटाई गईं तथा मध्य प्रदेश अधिनियम 7, 1985 द्वारा पुनः जोड़ी गईं। |
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धारा 18 का विषय क्या है? |
मरम्मत और पुनर्निर्माण तथा पुनः प्रवेश के लिए कब्जे की पुनः प्राप्ति। (Recovery of possession for repairs and re-building and re-entry) |
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धारा 18(1) के अंतर्गत यह प्रावधान धारा 12 की किन धाराओं के आधार पर पारित आदेशों पर लागू होता है? |
धारा 12(1) के खंड (छ) या खंड (ज) में निर्दिष्ट आधारों पर। |
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धारा 18(1) के अंतर्गत आदेश पारित करते समय न्यायालय किरायेदार से क्या पूछेगा? |
क्या वह बेदखली के बाद आवास या उसके किसी भाग पर पुनः कब्जा करना चाहता है। |
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धारा 18(1) के अंतर्गत यदि किरायेदार पुनः कब्जा प्राप्त करना चाहता है तो न्यायालय क्या करेगा? |
उसके चुनाव के तथ्य को आदेश में दर्ज करेगा। |
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धारा 18(1) के अंतर्गत न्यायालय आदेश में कौन-सी तिथि निर्दिष्ट करेगा? |
वह तिथि जिस पर या उससे पहले किरायेदार कब्जा सौंप देगा ताकि मरम्मत, निर्माण या पुनर्निर्माण का कार्य प्रारंभ हो सके। |
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धारा 18(1) के अंतर्गत कब्जा किस उद्देश्य से सौंपा जाता है? |
मकान मालिक द्वारा मरम्मत, निर्माण या पुनर्निर्माण का कार्य प्रारंभ करने के लिए। |
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धारा 18(2) के अंतर्गत यदि किरायेदार निर्धारित तिथि तक कब्जा सौंप देता है तो मकान मालिक का क्या दायित्व है? |
कार्य पूर्ण होने पर एक माह के भीतर किरायेदार को आवास या उसके भाग का कब्जा वापस सौंपना। |
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धारा 18(2) के अंतर्गत मरम्मत, निर्माण या पुनर्निर्माण पूरा होने के कितने समय के भीतर कब्जा लौटाना होगा? |
कार्य पूरा होने के एक महीने के भीतर। |
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धारा 18(2) के अंतर्गत क्या मकान मालिक आवास के किसी भाग का भी कब्जा वापस सौंप सकता है? |
हाँ, आवास या उसके किसी भाग का कब्जा। |
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धारा 18(3) के अंतर्गत यदि मकान मालिक निर्धारित तिथि से एक महीने के भीतर कार्य प्रारंभ नहीं करता है तो न्यायालय क्या कर सकता है? |
किरायेदार के आवेदन पर कब्जा वापस दिलाने या उचित मुआवजा देने का आदेश दे सकता है। |
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धारा 18(3) के अंतर्गत यदि मकान मालिक उचित समय में मरम्मत, निर्माण या पुनर्निर्माण पूरा नहीं करता है तो न्यायालय क्या आदेश दे सकता है? |
किरायेदार को आवास या उसके किसी भाग का कब्जा दिलाने या उचित मुआवजा देने का। |
|
धारा 18(3) के अंतर्गत यदि मकान मालिक कार्य पूर्ण होने के बाद उपधारा (2) के अनुसार कब्जा वापस नहीं देता है तो न्यायालय क्या कर सकता है? |
किरायेदार के आवेदन पर कब्जा दिलाने या उचित मुआवजा देने का आदेश दे सकता है। |
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धारा 18(3) के अंतर्गत न्यायालय की कार्यवाही किसके आवेदन पर प्रारंभ होती है? |
किरायेदार द्वारा निर्धारित समय के भीतर किए गए आवेदन पर। |
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धारा 18(3) के अंतर्गत न्यायालय मकान मालिक को कौन-से वैकल्पिक निर्देश दे सकता है? |
किरायेदार को आवास या उसके किसी भाग का कब्जा दिलाने या न्यायालय द्वारा उचित समझा गया मुआवजा देने का। |
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धारा 19 का विषय क्या है? |
सीमित अवधि के लिए किरायेदारी के मामलों में कब्जे की वसूली। (Recovery of possession! in ease of tenancies for limited period) |
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धारा 19 के अंतर्गत यह प्रावधान कब लागू होता है? |
जब मकान मालिक को किसी विशेष अवधि के लिए आवास के पूरे या किसी भाग की आवश्यकता न हो और वह उसे निश्चित अवधि के लिए किराए पर दे। |
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धारा 19 के अंतर्गत सीमित अवधि की किरायेदारी देने से पूर्व मकान मालिक को किसकी अनुमति प्राप्त करनी होती है? |
कलेक्टर या धारा 39(1) के तहत अधिकृत अन्य अधिकारी की। |
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धारा 19 के अंतर्गत अनुमति किस प्रकार प्राप्त की जाती है? |
निर्धारित तरीके से। |
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धारा 19 के अंतर्गत सीमित अवधि की किरायेदारी किस रूप में निर्धारित की जानी चाहिए? |
मकान मालिक और किरायेदार के बीच लिखित रूप में। |
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धारा 19 के अंतर्गत सीमित अवधि की किरायेदारी किस प्रयोजन के लिए दी जाती है? |
निवास के रूप में। |
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धारा 19 के अंतर्गत क्या आवास का केवल कोई भाग भी सीमित अवधि के लिए किराए पर दिया जा सकता है? |
हाँ, पूरे आवास या उसके किसी भाग को। |
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धारा 19 के अंतर्गत यदि किरायेदार निर्धारित अवधि समाप्त होने पर आवास खाली नहीं करता है तो क्या परिणाम होगा? |
न्यायालय उसे बेदखल कर मकान मालिक को खाली कब्जा दिला सकता है। |
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धारा 19 के अंतर्गत क्या यह प्रावधान धारा 12(1) के बावजूद लागू होता है? |
हाँ, धारा 12(1) या किसी अन्य कानून में निहित किसी बात के बावजूद। |
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धारा 19 के अंतर्गत न्यायालय कब बेदखली का आदेश दे सकता है? |
जब मकान मालिक इस संबंध में निर्धारित समय के भीतर मुकदमा दायर करे। |
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धारा 19 के अंतर्गत बेदखली का आदेश किन व्यक्तियों के विरुद्ध दिया जा सकता है? |
किरायेदार तथा ऐसे आवास पर कब्जा करने वाले प्रत्येक अन्य व्यक्ति के विरुद्ध। |
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धारा 19 के अंतर्गत न्यायालय मकान मालिक को क्या राहत प्रदान कर सकता है? |
आवास या उसके किसी भाग का खाली कब्जा दिला सकता है। |
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धारा 20 का विषय क्या है? |
कुछ मामलों में कब्जे की वसूली के लिए विशेष प्रावधान। (Special provision for recovery of possession in certain cases) |
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धारा 20 के अंतर्गत यह विशेष प्रावधान किन मकान मालिकों पर लागू होता है? |
कंपनी, अन्य निगमित निकाय, स्थानीय प्राधिकरण या सार्वजनिक संस्था पर। |
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धारा 20 के अंतर्गत कंपनी, निगमित निकाय या स्थानीय प्राधिकरण के मामले में आवास किस प्रयोजन के लिए आवश्यक होना चाहिए? |
उसके कर्मचारियों के उपयोग के लिए। |
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धारा 20 के अंतर्गत सार्वजनिक संस्था के मामले में आवास किस प्रयोजन के लिए आवश्यक होना चाहिए? |
उसकी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए। |
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धारा 20 के अंतर्गत क्या यह प्रावधान धारा 12 के बावजूद लागू होता है? |
हाँ, धारा 12 या किसी अन्य कानून में निहित किसी भी बात के बावजूद। |
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धारा 20 के अंतर्गत न्यायालय किसके द्वारा दायर मुकदमे पर कब्जा दिला सकता है? |
ऐसे मकान मालिक द्वारा दायर मुकदमे पर। |
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धारा 20 के अंतर्गत न्यायालय किन व्यक्तियों को बेदखल कर सकता है? |
किरायेदार तथा उस आवास पर कब्जा करने वाले प्रत्येक अन्य व्यक्ति को। |
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धारा 20 के अंतर्गत न्यायालय किस स्थिति में मकान मालिक को आवास का खाली कब्जा दिला सकता है? |
जब वह उपधारा के किसी निर्दिष्ट आधार से संतुष्ट हो। |
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धारा 20(क) के अंतर्गत बेदखली का आधार क्या है? |
किरायेदार, जिसे निवास के रूप में आवास दिया गया था, अब मकान मालिक की सेवा या रोजगार में नहीं है। |
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धारा 20(क) के अंतर्गत क्या सेवा या रोजगार समाप्त हो जाने पर बेदखली का आधार उत्पन्न होता है? |
हाँ। |
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धारा 20(ख) के अंतर्गत बेदखली का आधार क्या है? |
किरायेदार ने आवास पर कब्जा करने की स्पष्ट या निहित शर्तों का उल्लंघन किया हो। |
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धारा 20(ख) के अंतर्गत क्या निहित शर्तों का उल्लंघन भी बेदखली का आधार है? |
हाँ। |
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धारा 20(ग) के अंतर्गत बेदखली का आधार क्या है? |
कोई अन्य व्यक्ति ऐसे आवास पर अनाधिकृत रूप से कब्जा कर रहा हो। |
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धारा 20(घ) के अंतर्गत सार्वजनिक संस्था के लिए बेदखली का आधार क्या है? |
संस्था को अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए आवास की वास्तविक आवश्यकता हो। |
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धारा 20 के स्पष्टीकरण के अनुसार "सार्वजनिक संस्था" में कौन-कौन सम्मिलित हैं? |
शैक्षणिक संस्था, पुस्तकालय, अस्पताल और धर्मार्थ औषधालय। |
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धारा 20 के स्पष्टीकरण के अनुसार क्या शैक्षणिक संस्था "सार्वजनिक संस्था" में सम्मिलित है? |
हाँ। |
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धारा 20 के स्पष्टीकरण के अनुसार क्या पुस्तकालय "सार्वजनिक संस्था" में सम्मिलित है? |
हाँ। |
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धारा 20 के स्पष्टीकरण के अनुसार क्या अस्पताल "सार्वजनिक संस्था" में सम्मिलित है? |
हाँ। |
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धारा 20 के स्पष्टीकरण के अनुसार क्या धर्मार्थ औषधालय "सार्वजनिक संस्था" में सम्मिलित है? |
हाँ। |
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धारा 21 का विषय क्या है? |
अतिरिक्त संरचनाओं के निर्माण की अनुमति। (Permission to construct additional structures) |
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धारा 21 के अंतर्गत मकान मालिक किस उद्देश्य से किराया नियंत्रण प्राधिकरण से अनुमति प्राप्त कर सकता है? |
किराएदार को दिए गए भवन में सुधार करने या अतिरिक्त ढांचा बनाने के लिए। |
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धारा 21 के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण के समक्ष आवेदन कब किया जा सकता है? |
जब किराएदार मकान मालिक को सुधार करने या अतिरिक्त ढांचा बनाने की अनुमति देने से इनकार कर दे। |
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धारा 21 के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण किसके आवेदन पर विचार करता है? |
मकान मालिक के आवेदन पर। |
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धारा 21 के अंतर्गत अनुमति देने से पूर्व किराया नियंत्रण प्राधिकरण को किस बात से संतुष्ट होना आवश्यक है? |
कि मकान मालिक कार्य प्रारंभ करने के लिए तैयार और इच्छुक है। |
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धारा 21 के अंतर्गत अनुमति देने की दूसरी आवश्यक शर्त क्या है? |
कि प्रस्तावित कार्य से किराएदार को किसी प्रकार की अनुचित कठिनाई नहीं होगी। |
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धारा 21 के अंतर्गत यदि प्रस्तावित कार्य से किराएदार को अनुचित कठिनाई नहीं होती है तो किराया नियंत्रण प्राधिकरण क्या कर सकता है? |
मकान मालिक को कार्य करने की अनुमति दे सकता है। |
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धारा 21 के अंतर्गत मकान मालिक को किस प्रकार के कार्य करने की अनुमति दी जा सकती है? |
भवन में सुधार करने या अतिरिक्त ढांचा बनाने की। |
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धारा 21 के अंतर्गत क्या किराया नियंत्रण प्राधिकरण अनुमति के अतिरिक्त अन्य आदेश भी पारित कर सकता है? |
हाँ, मामले की परिस्थितियों के अनुसार उचित समझे जाने वाले अन्य आदेश भी दे सकता है। |
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धारा 21 के अंतर्गत अन्य आदेश किस आधार पर दिए जा सकते हैं? |
मामले की परिस्थितियों के अनुसार जैसा किराया नियंत्रण प्राधिकरण उचित समझे। |
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धारा 22 का विषय क्या है? |
खाली भवन स्थलों के संबंध में विशेष प्रावधान। (Special provision regarding vacant building sites) |
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धारा 22 के अंतर्गत यह प्रावधान धारा 12 के बावजूद किन मामलों में लागू होता है? |
जब किराए पर दिया गया आवास ऐसी खाली भूमि से बना हो जिस पर भवन बनाना अनुमत हो। |
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धारा 22 के अंतर्गत खाली भूमि पर किस प्रकार का भवन बनाया जाना अनुमत हो सकता है? |
निवास के लिए या किसी अन्य उद्देश्य के लिए। |
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धारा 22 के अंतर्गत खाली भूमि पर भवन बनाने की अनुमति किन प्रावधानों के अधीन होनी चाहिए? |
भवन विनियमों या नगरपालिका उपनियमों के तहत। |
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धारा 22 के अंतर्गत मकान मालिक किराया नियंत्रण प्राधिकरण के पास कब आवेदन कर सकता है? |
जब वह समझौते द्वारा किरायेदार से भूमि का कब्जा प्राप्त करने में असमर्थ हो। |
|
धारा 22 के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण को किस बात से संतुष्ट होना आवश्यक है? |
कि मकान मालिक कार्य शुरू करने के लिए तैयार और इच्छुक है। |
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धारा 22 के अंतर्गत अनुमति देने की दूसरी आवश्यक शर्त क्या है? |
कि आवास के शेष भाग से खाली भूमि को अलग करने से किरायेदार को कोई अनुचित कठिनाई नहीं होगी। |
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धारा 22(क) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण क्या निर्देश दे सकता है? |
खाली भूमि के पृथक्करण का निर्देश दे सकता है। |
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धारा 22(ख) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण क्या आदेश दे सकता है? |
मकान मालिक को खाली भूमि का कब्जा सौंपने का। |
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धारा 22(ग) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण क्या निर्धारित कर सकता है? |
शेष आवास के संबंध में किरायेदार द्वारा देय किराया। |
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धारा 22(घ) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण और क्या आदेश दे सकता है? |
मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उचित समझा जाने वाला अन्य आदेश। |
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धारा 22 के अंतर्गत क्या शेष आवास के लिए पृथक किराया निर्धारित किया जा सकता है? |
हाँ, किराया नियंत्रण प्राधिकरण शेष आवास के संबंध में देय किराया निर्धारित कर सकता है। |
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धारा 23 का विषय क्या है? |
मकान मालिक को खाली कब्जा सौंपना। (Vacant possession to landlord) |
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धारा 23 के अंतर्गत यह प्रावधान किसके बावजूद लागू होता है? |
किसी अन्य कानून में निहित किसी भी बात के बावजूद। |
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धारा 23 के अंतर्गत यदि किसी आवास में किरायेदार का हित समाप्त हो जाता है और न्यायालय द्वारा कब्जा वापस लेने की डिक्री या आदेश पारित किया जाता है, तो उसका क्या प्रभाव होगा? |
धारा 16 के अधीन वह डिक्री या आदेश आवास पर कब्जा रखने वाले सभी व्यक्तियों पर बाध्यकारी होगा। |
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धारा 23 के अंतर्गत न्यायालय द्वारा पारित डिक्री या आदेश किस अधिनियम के तहत होना चाहिए? |
मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के तहत। |
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धारा 23 के अंतर्गत डिक्री या आदेश किन व्यक्तियों पर बाध्यकारी होगा? |
आवास पर कब्जा रखने वाले सभी व्यक्तियों पर। |
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धारा 23 के अंतर्गत डिक्री या आदेश के परिणामस्वरूप क्या किया जाएगा? |
सभी कब्जाधारियों को बेदखल करके मकान मालिक को आवास का खाली कब्जा दे दिया जाएगा। |
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धारा 23 के अंतर्गत मकान मालिक को किस प्रकार का कब्जा प्रदान किया जाएगा? |
आवास का खाली कब्जा। |
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धारा 23 के अंतर्गत यह प्रावधान किस धारा के अधीन है? |
धारा 16 के प्रावधानों के अधीन। |
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धारा 23 के परन्तुक के अनुसार यह धारा किन व्यक्तियों पर लागू नहीं होगी? |
ऐसे व्यक्ति पर जिसे उस आवास का स्वतंत्र अधिकार प्राप्त हो। |
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धारा 23 के परन्तुक के अनुसार क्या स्वतंत्र अधिकार रखने वाले व्यक्ति को इस धारा के तहत बेदखल किया जा सकता है? |
नहीं। |
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(अध्याय-III(ए)) (CHAPTER-III(A)) |
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वास्तविक आवश्यकता के आधार पर किरायेदारों को बेदखल करना (Eviction of tenants on Grounds of bonafide Requirement) (मध्य प्रदेश अधिनियम 27, 1983 द्वारा (16-8-1983 से प्रभावी) जोड़ा गया।) (Inserted by Madhya Pradesh Act 27 of 1983 (w.e.f. 16-8-1983)) |
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अध्याय III-ए किस अधिनियम द्वारा जोड़ा गया? |
मध्य प्रदेश अधिनियम 27, 1983 द्वारा। |
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अध्याय III-ए किस तिथि से प्रभावी हुआ? |
16 अगस्त, 1983 से। |
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धारा 23(क) का विषय क्या है? |
वास्तविक आवश्यकता के आधार पर किरायेदार को बेदखल करने का विशेष प्रावधान। (Special provision for eviction of tenant on ground of bonafide requirement) |
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धारा 23(क) के अंतर्गत मकान मालिक किस प्राधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकता है? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण के समक्ष। |
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धारा 23(क) के अंतर्गत आवेदन किस रूप में प्रस्तुत किया जाता है? |
शिकायत (Complaint) के रूप में। |
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धारा 23(क) के अंतर्गत आवेदन किस प्रकार हस्ताक्षरित और सत्यापित होना चाहिए? |
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की प्रथम अनुसूची के आदेश VI के नियम 14 और 15 में दिए गए तरीके से। |
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धारा 23(क) के अंतर्गत आवेदन का उद्देश्य क्या है? |
किरायेदार को मकान मालिक को आवास का कब्जा सौंपने का निर्देश दिलाना। |
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धारा 23(क) के अंतर्गत क्या यह प्रावधान किसी अन्य कानून या अनुबंध के विपरीत होने पर भी लागू होता है? |
हाँ, किसी अन्य कानून या अनुबंध में विपरीत प्रावधान होने पर भी। |
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धारा 23(क)(क) के अंतर्गत आवासीय प्रयोजनों के लिए किराए पर दी गई आवास संपत्ति की बेदखली का आधार क्या है? |
मकान मालिक, उसके परिवार के सदस्य या लाभार्थी व्यक्ति के निवास के लिए उसकी वास्तविक आवश्यकता तथा अन्य यथोचित उपयुक्त आवासीय आवास का अभाव। |
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धारा 23(क)(क) के अंतर्गत वास्तविक आवश्यकता किन व्यक्तियों के लिए हो सकती है? |
मकान मालिक, उसके परिवार के किसी सदस्य या ऐसे व्यक्ति के लिए जिसके लाभ के लिए आवास रखा गया है। |
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धारा 23(क)(क) के अंतर्गत अतिरिक्त आवश्यक शर्त क्या है? |
संबंधित शहर या कस्बे में अन्य यथोचित उपयुक्त आवासीय आवास उपलब्ध न हो। |
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धारा 23(क) के स्पष्टीकरण के अनुसार "आवासीय प्रयोजनों के लिए किराए पर दिया गया आवास" में क्या शामिल है? |
स्पष्टीकरण में वर्णित श्रेणियाँ। |
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धारा 23(क) के स्पष्टीकरण (i) के अनुसार क्या मकान मालिक की स्पष्ट सहमति के बिना गैर-आवासीय उपयोग किया गया आवास भी आवासीय प्रयोजनों के लिए किराए पर दिया गया आवास माना जाएगा? |
हाँ। |
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धारा 23(क) के स्पष्टीकरण (i) के अनुसार क्या पूर्ण या आंशिक गैर-आवासीय उपयोग इस परिभाषा को प्रभावित करता है? |
नहीं, मकान मालिक की स्पष्ट सहमति के बिना ऐसा उपयोग होने पर भी वह आवासीय प्रयोजनों के लिए किराए पर दिया गया आवास माना जाएगा। |
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धारा 23(क) के स्पष्टीकरण (ii) के अनुसार कौन-सा आवास "आवासीय प्रयोजनों के लिए किराए पर दिया गया आवास" माना जाएगा? |
वह आवास जिसे अनुबंध के किसी स्पष्ट प्रावधान के तहत गैर-आवासीय उद्देश्य के लिए किराए पर न दिया गया हो। |
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धारा 23(क)(ख) के अंतर्गत गैर-आवासीय आवास की बेदखली का आधार क्या है? |
मकान मालिक, उसके वयस्क पुत्र, अविवाहित पुत्री या लाभार्थी व्यक्ति के व्यवसाय के लिए उसकी वास्तविक आवश्यकता तथा अन्य यथोचित उपयुक्त गैर-आवासीय आवास का अभाव। |
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धारा 23(क)(ख) के अंतर्गत मकान मालिक किस उद्देश्य से गैर-आवासीय आवास की आवश्यकता दर्शा सकता है? |
अपना व्यवसाय प्रारंभ करने या जारी रखने के लिए। |
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धारा 23(क)(ख) के अंतर्गत क्या वयस्क पुत्र के व्यवसाय के लिए वास्तविक आवश्यकता बेदखली का आधार है? |
हाँ। |
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धारा 23(क)(ख) के अंतर्गत क्या अविवाहित पुत्री के व्यवसाय के लिए वास्तविक आवश्यकता बेदखली का आधार है? |
हाँ। |
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धारा 23(क)(ख) के अंतर्गत लाभार्थी व्यक्ति के लिए वास्तविक आवश्यकता होने पर क्या आवेदन किया जा सकता है? |
हाँ। |
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धारा 23(क)(ख) के अंतर्गत अतिरिक्त आवश्यक शर्त क्या है? |
संबंधित शहर या कस्बे में अन्य यथोचित उपयुक्त गैर-आवासीय आवास उपलब्ध न हो। |
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धारा 23(क) के परन्तुक के अनुसार हस्तांतरण द्वारा आवास प्राप्त करने वाला मकान मालिक बेदखली का आवेदन कब कर सकता है? |
अधिग्रहण की तारीख से एक वर्ष की अवधि बीत जाने के बाद। |
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धारा 23(क) के परन्तुक के अनुसार यदि एक वर्ष की अवधि पूरी न हुई हो तो क्या बेदखली का आवेदन ग्राह्य होगा? |
नहीं। |
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धारा 23(ख) का विषय क्या है? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण धारा 23-ए के तहत प्रत्येक आवेदन के संबंध में समन जारी करेगा। (Rent Controlling Authority to issue summons in relation to every application under Section 23-A) |
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धारा 23(ख)(1) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण किसे समन जारी करेगा? |
किरायेदार को। |
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धारा 23(ख)(1) के अंतर्गत समन किस प्रकार के आवेदन के संबंध में जारी किया जाएगा? |
धारा 23-ए में निर्दिष्ट प्रत्येक आवेदन के संबंध में। |
|
धारा 23(ख)(1) के अंतर्गत समन किस प्रारूप में जारी किया जाएगा? |
दूसरी अनुसूची में निर्दिष्ट प्रारूप में। |
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धारा 23(ख)(2) के अंतर्गत इस अध्याय की कार्यवाहियों में किन आदेशों के प्रावधान लागू होंगे? |
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की प्रथम अनुसूची के आदेश V और आदेश XVI के प्रावधान। |
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धारा 23(ख)(2) के अंतर्गत आदेश V मुख्यतः किससे संबंधित है? |
प्रतिवादी को समन जारी करने और उसकी तामील से। |
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धारा 23(ख)(2) के अंतर्गत आदेश XVI मुख्यतः किससे संबंधित है? |
साक्ष्य देने या दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए गवाहों को बुलाने और उनकी उपस्थिति से। |
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धारा 23(ख)(2) के अंतर्गत क्या सिविल प्रक्रिया संहिता के समन संबंधी प्रावधान इस अध्याय की जांच या कार्यवाही पर लागू होंगे? |
हाँ, यथावश्यक रूप से लागू होंगे। |
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धारा 23(ख)(2) के अंतर्गत किरायेदार या विरोधी पक्ष को समन जारी करने और तामील करने के लिए किन प्रावधानों का पालन किया जाएगा? |
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की प्रथम अनुसूची के आदेश V के प्रावधानों का। |
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धारा 23(ख)(2) के अंतर्गत गवाह को साक्ष्य देने या दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए समन जारी करने में किन प्रावधानों का पालन किया जाएगा? |
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की प्रथम अनुसूची के आदेश XVI के प्रावधानों का। |
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धारा 23(ग) का विषय क्या है? |
किरायेदार को कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़कर विरोध करने का अधिकार नहीं है। (Tenant not entitled to contest except under certain circumstances) |
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धारा 23(ग)(1) के अंतर्गत समन प्राप्त करने वाला किरायेदार बेदखली की प्रार्थना का विरोध कब कर सकता है? |
जब वह समन की तामील की तारीख से पंद्रह दिनों के भीतर हलफनामे सहित आवेदन दाखिल कर किराया नियंत्रण प्राधिकरण से अनुमति प्राप्त कर ले। |
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धारा 23(ग)(1) के अंतर्गत बेदखली आवेदन का विरोध करने के लिए आवेदन कितने दिनों के भीतर दाखिल किया जाना चाहिए? |
समन की तामील की तारीख से पंद्रह दिनों के भीतर। |
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धारा 23(ग)(1) के अंतर्गत विरोध के आवेदन के साथ क्या संलग्न होना आवश्यक है? |
बेदखली आवेदन का विरोध करने के आधारों वाला हलफनामा। |
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धारा 23(ग)(1) के अंतर्गत विरोध करने के लिए किस प्राधिकारी की अनुमति आवश्यक है? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण की। |
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धारा 23(ग)(1) के अंतर्गत यदि किरायेदार समन के अनुसार उपस्थित नहीं होता है तो क्या परिणाम होगा? |
मकान मालिक के कथनों को स्वीकार किया हुआ माना जाएगा। |
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धारा 23(ग)(1) के अंतर्गत यदि किरायेदार बेदखली आवेदन का बचाव करने की अनुमति प्राप्त करने में विफल रहता है तो क्या परिणाम होगा? |
मकान मालिक के कथनों को स्वीकार किया हुआ माना जाएगा। |
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धारा 23(ग)(1) के अंतर्गत यदि बचाव की अनुमति अस्वीकार कर दी जाती है तो बेदखली आवेदन में मकान मालिक के कथनों का क्या प्रभाव होगा? |
उन्हें किरायेदार द्वारा स्वीकार किया हुआ माना जाएगा। |
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धारा 23(ग)(1) के अंतर्गत उपस्थिति न होने या अनुमति न मिलने की स्थिति में किराया नियंत्रण प्राधिकरण क्या आदेश पारित करेगा? |
किरायेदार को आवास से बेदखल करने का आदेश। |
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धारा 23(ग)(1) के परन्तुक के अनुसार किराया नियंत्रण प्राधिकरण देरी कब माफ कर सकता है? |
जब किरायेदार पर्याप्त कारण दर्शाए। |
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धारा 23(ग)(1) के परन्तुक के अनुसार क्या किराया नियंत्रण प्राधिकरण उपस्थिति या बचाव की अनुमति मांगने में हुई देरी को माफ कर सकता है? |
हाँ, पर्याप्त कारण होने पर। |
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धारा 23(ग)(1) के परन्तुक के अनुसार क्या किराया नियंत्रण प्राधिकरण एकतरफा आदेश को निरस्त कर सकता है? |
हाँ, पर्याप्त कारण होने पर। |
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धारा 23(ग)(2) के अंतर्गत बचाव की अनुमति के आवेदन पर किराया नियंत्रण प्राधिकरण कितने समय के भीतर निर्णय करेगा? |
आवेदन प्राप्त होने की तिथि से एक माह के भीतर। |
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धारा 23(ग)(2) के अंतर्गत किरायेदार को बचाव की अनुमति कब दी जाएगी? |
जब उसके हलफनामे सहित आवेदन में ऐसे तथ्य प्रकट हों जो मकान मालिक को धारा 23-ए के आधार पर कब्जा प्राप्त करने के आदेश से वंचित करते हों। |
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धारा 23(ग)(2) के अंतर्गत बचाव की अनुमति देने का आधार क्या है? |
हलफनामे सहित आवेदन में ऐसे तथ्य प्रकट होना जो धारा 23-ए के आधार पर मकान मालिक के दावे को निष्फल कर सकते हों। |
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धारा 23(घ) का विषय क्या है? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया तथा किरायेदार को विरोध करने की अनुमति प्रदान करना। (Procedure to be followed by Rent Controlling Authority or grant of leave to tenant to contest) |
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धारा 23(घ)(1) के अंतर्गत किरायेदार को विरोध करने की अनुमति मिलने पर किराया नियंत्रण प्राधिकरण क्या करेगा? |
यथाशीघ्र आवेदन की सुनवाई प्रारंभ करेगा। |
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धारा 23(घ)(1) के अंतर्गत विरोध की अनुमति दिए जाने के बाद आवेदन का निर्णय यथासंभव कितने समय के भीतर किया जाना चाहिए? |
विरोध की अनुमति देने के आदेश की तिथि से छह महीने के भीतर। |
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धारा 23(घ)(2) के अंतर्गत इस अध्याय की कार्यवाहियों की जांच करते समय किराया नियंत्रण प्राधिकरण किस प्रक्रिया का पालन करेगा? |
यथासंभव लघु वाद न्यायालय की कार्यप्रणाली और प्रक्रिया का। |
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धारा 23(घ)(2) के अंतर्गत लघु वाद न्यायालय की प्रक्रिया किस अधिनियम के अंतर्गत है? |
प्रांतीय लघु वाद न्यायालय अधिनियम, 1887 के अंतर्गत। |
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धारा 23(घ)(2) के अंतर्गत क्या लघु वाद न्यायालय की प्रक्रिया में साक्ष्य दर्ज करना भी सम्मिलित है? |
हाँ। |
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धारा 23(घ)(2) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण आवेदन की सुनवाई किस आधार पर करेगा? |
यथासंभव प्रतिदिन के आधार पर। |
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धारा 23(घ)(3) के अंतर्गत मकान मालिक की मांग के संबंध में कौन-सी उपधारणा लागू होती है? |
जब तक इसके विपरीत सिद्ध न हो जाए, यह माना जाएगा कि धारा 23-ए के खंड (क) या खंड (ख) के संदर्भ में मकान मालिक की मांग सद्भावनापूर्ण है। |
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धारा 23(घ)(3) के अंतर्गत सद्भावनापूर्ण मांग की उपधारणा किन प्रावधानों के संदर्भ में लागू होती है? |
धारा 23-ए के खंड (क) या खंड (ख) के संदर्भ में। |
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धारा 23(घ)(3) के अंतर्गत सद्भावनापूर्ण मांग की उपधारणा कब तक लागू रहेगी? |
जब तक इसके विपरीत सिद्ध न हो जाए। |
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धारा 23(घ)(3) को किस अधिनियम द्वारा प्रतिस्थापित किया गया? |
मध्य प्रदेश अधिनियम 7, 1985 द्वारा। |
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धारा 23(घ)(3) का प्रतिस्थापन किस तिथि से प्रभावी हुआ? |
16 जनवरी, 1985 से। |
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धारा 23(ङ) का विषय क्या है? |
उच्च न्यायालय द्वारा पुनरीक्षण। (Revision by High Court) |
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धारा 23(ङ)(1) के अंतर्गत क्या अध्याय III-ए के तहत किराया नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश के विरुद्ध अपील की जा सकती है? |
नहीं। |
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धारा 23(ङ)(1) के अंतर्गत अपील का निषेध किन धाराओं के बावजूद लागू होता है? |
धारा 31 या धारा 32 में किसी बात के होते हुए भी। |
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धारा 23(ङ)(1) के अंतर्गत किस प्राधिकारी के आदेश के विरुद्ध अपील नहीं होगी? |
अध्याय III-ए के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश के विरुद्ध। |
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धारा 23(ङ)(2) के अंतर्गत उच्च न्यायालय पुनरीक्षण की शक्ति किस प्रकार प्रयोग कर सकता है? |
स्वतः संज्ञान से या किसी पीड़ित व्यक्ति के आवेदन पर। |
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धारा 23(ङ)(2) के अंतर्गत उच्च न्यायालय किस उद्देश्य से अभिलेख मंगा सकता है? |
आदेश की वैधता, औचित्य, शुद्धता या कार्यवाही की नियमितता के संबंध में स्वयं को संतुष्ट करने के लिए। |
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धारा 23(ङ)(2) के अंतर्गत उच्च न्यायालय किस मामले का अभिलेख मंगा सकता है? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण के समक्ष लंबित या उसके द्वारा निपटाए गए मामले का। |
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धारा 23(ङ)(2) के अंतर्गत अभिलेख की जांच के पश्चात उच्च न्यायालय क्या कर सकता है? |
जैसा उचित समझे वैसा पुनरीक्षण आदेश पारित कर सकता है। |
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धारा 23(ङ)(2) के अंतर्गत पुनरीक्षण के निपटारे में उच्च न्यायालय सामान्यतः किस धारा के अंतर्गत प्रयोग की जाने वाली शक्तियों और प्रक्रिया का पालन करेगा? |
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 115 के अंतर्गत। |
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धारा 23(ङ)(2) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण की कार्यवाही को किसके समान माना जाएगा? |
उच्च न्यायालय के अधीनस्थ न्यायालय की कार्यवाही के समान। |
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धारा 23(ङ) के परन्तुक के अनुसार पीड़ित व्यक्ति द्वारा पुनरीक्षण आवेदन कितने समय के भीतर प्रस्तुत किया जाना चाहिए? |
आदेश की तिथि से नब्बे दिनों के भीतर। |
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धारा 23(ङ) के परन्तुक के अनुसार यदि पुनरीक्षण आवेदन नब्बे दिनों के बाद प्रस्तुत किया जाए तो क्या पीड़ित व्यक्ति के आवेदन पर पुनरीक्षण शक्ति का प्रयोग किया जाएगा? |
नहीं। |
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धारा 23(च) का विषय क्या है? |
ठहरने की अवधि। (Duration of stay) |
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धारा 23(च) के अंतर्गत बेदखली आदेश के संचालन पर रोक किसके द्वारा पारित आदेश पर लागू होती है? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण या उच्च न्यायालय द्वारा पारित बेदखली आदेश पर। |
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धारा 23(च) के अंतर्गत बेदखली आदेश के संचालन पर रोक की अधिकतम कुल अवधि कितनी हो सकती है? |
छह महीने। |
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धारा 23(च) के अंतर्गत क्या बेदखली आदेश के संचालन पर रोक कुल मिलाकर छह महीने से अधिक रह सकती है? |
नहीं। |
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धारा 23(च) के अंतर्गत ठहराव (Stay) की अवधि की अधिकतम सीमा क्या है? |
कुल मिलाकर छह महीने। |
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धारा 23(छ) का विषय क्या है? |
कब्जे और पुनः प्रवेश के लिए कब्जे की वसूली। (Recovery of possession for occupation and re-entry) |
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धारा 23(छ)(1) के अंतर्गत धारा 23-क के खंड (क) के आधार पर बेदखली का आदेश होने पर मकान मालिक कब कब्जा प्राप्त कर सकता है? |
आदेश की तारीख से दो महीने की अवधि समाप्त होने के बाद। |
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धारा 23(छ)(1) के अंतर्गत क्या मकान मालिक आदेश की तारीख से दो महीने पूरे होने से पहले कब्जा प्राप्त कर सकता है? |
नहीं। |
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धारा 23(छ)(2) के अंतर्गत धारा 23-क के खंड (ख) के आधार पर बेदखली का आदेश होने पर मकान मालिक कब तक कब्जा प्राप्त नहीं कर सकता? |
आदेश की तिथि से दो महीने की अवधि समाप्त होने से पहले। |
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धारा 23(छ)(2)(ख) के अंतर्गत किन शहरों में मुआवजा दिए बिना मकान मालिक कब्जा प्राप्त नहीं कर सकता? |
ग्वालियर (लश्कर एवं मोरार सहित), इंदौर, उज्जैन, रतलाम, भोपाल, जबलपुर, रायपुर, दुर्ग तथा राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य शहरों में। |
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धारा 23(छ)(2)(ख) के अंतर्गत निर्दिष्ट शहरों में कब्जा प्राप्त करने से पूर्व मकान मालिक को क्या करना आवश्यक है? |
किरायेदार को विधि अनुसार निर्धारित मुआवजा देना। |
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धारा 23(छ)(2)(ख)(i)(क) के अंतर्गत यदि बेदखल किया जा रहा किरायेदार आवेदन से ठीक पूर्व लगातार दस वर्षों तक आवास का व्यावसायिक उपयोग करता रहा हो, तो मुआवजा कितना होगा? |
वार्षिक मानक किराए की राशि का दोगुना। |
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धारा 23(छ)(2)(ख)(i)(ख) के अंतर्गत यदि उत्तरवर्ती किरायेदार ने अपने पूर्ववर्ती का व्यवसाय हस्तांतरण या विरासत से प्राप्त किया हो, तो मुआवजा कितना होगा? |
वार्षिक मानक किराए की राशि का दोगुना। |
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धारा 23(छ)(2)(ख)(ii) के अंतर्गत अन्य मामलों में मुआवजा कितना होगा? |
वार्षिक मानक किराए की राशि। |
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धारा 23(छ)(3) के अंतर्गत धारा 23-क के खंड (क) या खंड (ख) के आधार पर कब्जा प्राप्त करने वाला मकान मालिक किराया नियंत्रण प्राधिकरण की अनुमति के बिना आवास को कितनी अवधि तक पुनः किराए पर नहीं दे सकता? |
कब्जा प्राप्त करने की तारीख से दो वर्ष के भीतर। |
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धारा 23(छ)(3) के अंतर्गत पुनः किराए पर देने के लिए किसकी अनुमति आवश्यक है? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण की, निर्धारित तरीके से प्राप्त अनुमति। |
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धारा 23(छ)(3) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण अनुमति देते समय क्या निर्देश दे सकता है? |
मकान मालिक को बेदखल किए गए किरायेदार को आवास का कब्जा सौंपने का निर्देश। |
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धारा 23(छ)(4) के अंतर्गत यदि मकान मालिक या लाभार्थी व्यक्ति कब्जा प्राप्त करने के दो महीने के भीतर आवास पर कब्जा नहीं करता है, तो किराया नियंत्रण प्राधिकरण क्या कर सकता है? |
बेदखल किरायेदार के आवेदन पर कब्जा दिलाने या उचित मुआवजा देने का निर्देश दे सकता है। |
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धारा 23(छ)(4) के अंतर्गत यदि मकान मालिक दो वर्ष के भीतर बिना अनुमति किसी अन्य व्यक्ति को आवास पुनः किराए पर दे देता है, तो किराया नियंत्रण प्राधिकरण क्या कर सकता है? |
बेदखल किरायेदार को आवास का कब्जा दिलाने या उचित मुआवजा देने का निर्देश दे सकता है। |
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धारा 23(छ)(4) के अंतर्गत यदि आवास का कब्जा ऐसे कारणों से किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित किया जाए जो सद्भावनापूर्ण न प्रतीत हों, तो किराया नियंत्रण प्राधिकरण क्या कर सकता है? |
बेदखल किरायेदार को कब्जा दिलाने या उचित मुआवजा देने का निर्देश दे सकता है। |
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धारा 23(छ)(4) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण की कार्यवाही किसके आवेदन पर प्रारंभ होती है? |
बेदखल किरायेदार द्वारा निर्धारित समय के भीतर किए गए आवेदन पर। |
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धारा 23(छ)(5) के अंतर्गत यदि मकान मालिक ने उपधारा (2) के तहत मुआवजा दिया हो और बाद में बेदखल किरायेदार को उपधारा (3) या (4) के तहत कब्जा मिल जाए, तो क्या वह मुआवजा लौटाने के लिए उत्तरदायी होगा? |
नहीं। |
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धारा 23(छ)(5) के अंतर्गत पुनः कब्जा मिलने पर बेदखल किरायेदार पर मुआवजा लौटाने का दायित्व है या नहीं? |
नहीं, वह मुआवजा लौटाने के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। |
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धारा 23(ज) का विषय क्या है? |
बेदखली या पुनरीक्षण की कार्यवाही लंबित रहने के दौरान किराए की जमा राशि। (Deposit of rent pending proceedings for eviction or for revision) |
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धारा 23(ज) के अंतर्गत धारा 13 के प्रावधान किन आवेदनों पर यथावश्यक रूप से लागू होंगे? |
धारा 23(क) के तहत आवास के कब्जे की वसूली के लिए किए गए आवेदन पर। |
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धारा 23(ज) के अंतर्गत धारा 13 के प्रावधान किन पुनरीक्षण कार्यवाहियों पर यथावश्यक रूप से लागू होंगे? |
धारा 23(ङ) के तहत, धारा 23(ग) या धारा 23(घ) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण के अंतिम आदेश के विरुद्ध पुनरीक्षण कार्यवाही पर। |
|
धारा 23(ज) के अंतर्गत धारा 13 के प्रावधान किस प्रकार लागू होंगे? |
उसी प्रकार जैसे वे धारा 12 में निर्दिष्ट आधारों पर प्रारंभ किए गए मुकदमों या कार्यवाहियों पर लागू होते हैं। |
|
धारा 23(ज) के अंतर्गत धारा 23-ङ के पुनरीक्षण में कौन-से अंतिम आदेश सम्मिलित हैं? |
धारा 23(ग) या धारा 23(घ) के तहत किराया नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा दिए गए अंतिम आदेश। |
|
धारा 23(ज) के परन्तुक के अनुसार धारा 13 के प्रावधानों का लाभ किस स्थिति में उपलब्ध नहीं होगा? |
जब उसी आवास के संबंध में किसी न्यायालय में किरायेदार की बेदखली हेतु कोई मुकदमा या कार्यवाही लंबित हो। |
|
धारा 23(ज) के परन्तुक के अनुसार क्या उसी आवास के संबंध में बेदखली का कोई अन्य मुकदमा या कार्यवाही लंबित होने पर यह प्रावधान लागू होगा? |
नहीं। |
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धारा 23(झ) का विषय क्या है? |
झूठा और तुच्छ आवेदन आदि। (False and frivolous application etc) |
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धारा 23(झ) के अंतर्गत झूठा या निराधार आवेदन करने पर कौन उत्तरदायी हो सकता है? |
धारा 23-क के तहत आवेदन करने वाला मकान मालिक। |
|
धारा 23(झ) के अंतर्गत झूठे, निराधार या परेशान करने वाले आधारों पर आवेदन का बचाव करने की अनुमति मांगने वाला कौन उत्तरदायी हो सकता है? |
किरायेदार। |
|
धारा 23(झ) के अंतर्गत झूठे, निराधार या परेशान करने वाले आधारों पर स्थगन मांगने वाला कौन उत्तरदायी हो सकता है? |
किरायेदार। |
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धारा 23(झ) के अंतर्गत भारी मुआवजा किसके द्वारा निर्धारित किया जाएगा? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा। |
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धारा 23(झ) के अंतर्गत झूठा या निराधार आवेदन करने वाले मकान मालिक पर क्या दायित्व डाला जा सकता है? |
भारी मुआवजा देने का। |
|
धारा 23(झ) के अंतर्गत झूठे, निराधार या परेशान करने वाले आधारों पर बचाव की अनुमति या स्थगन मांगने वाले किरायेदार पर क्या दायित्व डाला जा सकता है? |
भारी मुआवजा देने का। |
|
धारा 23(झ) के अंतर्गत लगाया जाने वाला भारी मुआवजा अधिकतम कितना हो सकता है? |
एक बार में छह महीने के किराए से अधिक नहीं। |
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धारा 23(झ) के अंतर्गत क्या भारी मुआवजा छह महीने के किराए से अधिक निर्धारित किया जा सकता है? |
नहीं। |
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धारा 23(ञ) का विषय क्या है? |
अध्याय III-ए के प्रयोजनों के लिए मकान मालिक की परिभाषा। (Definition of landlord for the purposes of Chapter III-A) |
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धारा 23(ञ) किस अधिनियम द्वारा सम्मिलित की गई? |
मध्य प्रदेश अधिनियम 7, 1985 द्वारा। |
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धारा 23(ञ) किस तिथि से प्रभावी हुई? |
16 जनवरी, 1985 से। |
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धारा 23(ञ) के अनुसार यह परिभाषा किस अध्याय के प्रयोजनों के लिए लागू होती है? |
अध्याय III-ए के प्रयोजनों के लिए। |
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धारा 23(ञ) के अंतर्गत 'मकान मालिक' में कौन-कौन सम्मिलित हैं? |
धारा 23(ञ)(i) से (v) में वर्णित श्रेणियों के व्यक्ति। |
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धारा 23(ञ)(i) के अंतर्गत कौन-सा सेवानिवृत्त व्यक्ति 'मकान मालिक' की परिभाषा में शामिल है? |
किसी भी सरकार का सेवानिवृत्त कर्मचारी। |
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धारा 23(ञ)(i) के अंतर्गत क्या रक्षा सेवाओं का सेवानिवृत्त सदस्य 'मकान मालिक' की परिभाषा में शामिल है? |
हाँ। |
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धारा 23(ञ)(ii) के अंतर्गत कौन-सा सेवानिवृत्त कर्मचारी 'मकान मालिक' की परिभाषा में शामिल है? |
केंद्र या राज्य सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण वाली कंपनी का सेवानिवृत्त कर्मचारी। |
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धारा 23(ञ)(iii) के अंतर्गत कौन-सी महिला 'मकान मालिक' की परिभाषा में शामिल है? |
विधवा या तलाकशुदा पत्नी। |
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धारा 23(ञ)(iv) के अंतर्गत कौन-सा व्यक्ति 'मकान मालिक' की परिभाषा में शामिल है? |
शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्ति। |
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धारा 23(ञ)(v) के अंतर्गत कौन-सा सरकारी सेवक 'मकान मालिक' की परिभाषा में शामिल है? |
ऐसा सरकारी सेवक, जिसमें रक्षा सेवाओं का सदस्य भी शामिल है, जो अपनी सेवा शर्तों के अनुसार अपने घर वाले स्थान पर तैनाती होने पर सरकारी आवास का हकदार नहीं है या केवल दंडात्मक किराया देकर ही उसका हकदार है। |
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धारा 23(ञ)(v) के अंतर्गत क्या रक्षा सेवाओं का कार्यरत सदस्य भी शामिल हो सकता है? |
हाँ, यदि वह उक्त शर्तों को पूरा करता हो। |
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धारा 23(ञ)(v) के अंतर्गत अपने घर वाले स्थान पर तैनाती होने पर सरकारी आवास का अधिकार न होने वाला सरकारी सेवक क्या 'मकान मालिक' माना जाएगा? |
हाँ। |
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धारा 23(ञ)(v) के अंतर्गत यदि सरकारी सेवक को अपने घर वाले स्थान पर सरकारी आवास केवल दंडात्मक किराया चुकाने पर ही मिल सकता हो, तो क्या वह 'मकान मालिक' की परिभाषा में आएगा? |
हाँ। |
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अध्याय-IV (CHAPTER-IV) |
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किराया जमा करना (Deposit of Rent) |
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धारा 24 का विषय क्या है? |
किराया चुकाने पर रसीद दी जाएगी। (Receipt to be given for rent paid) |
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धारा 24(1) के अंतर्गत किरायेदार अनुबंध द्वारा निर्धारित समय के भीतर क्या करेगा? |
किराया अदा करेगा। |
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धारा 24(1) के अंतर्गत यदि कोई अनुबंध न हो तो किराया कब तक अदा किया जाएगा? |
जिस महीने के लिए किराया देय है उसके बाद वाले महीने की पंद्रहवीं तारीख तक। |
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धारा 24(1) के अंतर्गत अनुबंध के अभाव में किराया भुगतान की अंतिम तिथि क्या है? |
देय महीने के बाद वाले महीने की 15 तारीख। |
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धारा 24(2) के अंतर्गत किराया अदा करने वाले प्रत्येक किरायेदार को किस बात का अधिकार है? |
भुगतान की गई राशि की लिखित रसीद तुरंत प्राप्त करने का। |
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धारा 24(2) के अंतर्गत रसीद किसके द्वारा दी जाएगी? |
मकान मालिक या उसके अधिकृत प्रतिनिधि द्वारा। |
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धारा 24(2) के अंतर्गत रसीद पर किसके हस्ताक्षर होने चाहिए? |
मकान मालिक या उसके अधिकृत प्रतिनिधि के। |
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धारा 24(2) के अंतर्गत रसीद में किसका उल्लेख होना चाहिए? |
भुगतान की गई राशि का। |
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धारा 24(3) के अंतर्गत यदि मकान मालिक रसीद देने से इनकार करे या लापरवाही बरते तो किरायेदार किसके समक्ष आवेदन कर सकता है? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण के समक्ष। |
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धारा 24(3) के अंतर्गत रसीद न देने की स्थिति में आवेदन कितने समय के भीतर किया जाना चाहिए? |
भुगतान की तारीख से दो महीने के भीतर। |
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धारा 24(3) के अंतर्गत आवेदन पर आदेश पारित करने से पहले किसकी सुनवाई की जाएगी? |
मकान मालिक या उसके अधिकृत प्रतिनिधि की। |
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धारा 24(3) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण मकान मालिक या उसके अधिकृत प्रतिनिधि को क्या भुगतान करने का निर्देश दे सकता है? |
किरायेदार को क्षतिपूर्ति तथा आवेदन की लागत का भुगतान। |
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धारा 24(3) के अंतर्गत क्षतिपूर्ति की अधिकतम सीमा क्या है? |
किरायेदार द्वारा भुगतान किए गए किराए की राशि के दोगुने से अधिक नहीं। |
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धारा 24(3) के अंतर्गत क्या किराया नियंत्रण प्राधिकरण किरायेदार को भुगतान किए गए किराए के संबंध में प्रमाण पत्र भी जारी कर सकता है? |
हाँ। |
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धारा 24(3) के अंतर्गत जारी किया जाने वाला प्रमाण पत्र किस संबंध में होगा? |
किरायेदार द्वारा भुगतान किए गए किराए के संबंध में। |
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धारा 25 का विषय क्या है? |
किरायेदार द्वारा किराए का जमा। (Deposit of rent by tenant) |
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धारा 25(1) के अंतर्गत किरायेदार किराया नियंत्रण प्राधिकरण के पास किराया कब जमा कर सकता है? |
जब मकान मालिक धारा 24 में निर्दिष्ट समय के भीतर किराया स्वीकार नहीं करता, रसीद देने से इनकार या उपेक्षा करता है, या किराया पाने वाले व्यक्ति के बारे में वास्तविक संदेह हो। |
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धारा 25(1) के अंतर्गत किराया किस प्रकार जमा किया जाएगा? |
निर्धारित तरीके से। |
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धारा 25(1) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण के पास जमा किया गया किराया किरायेदार को किस दायित्व से मुक्त करता है? |
मकान मालिक को किराया देने के दायित्व से पूर्ण रूप से मुक्त करता है। |
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धारा 25(1) के अंतर्गत यदि मकान मालिक रसीद देने से इनकार करता है तो क्या किरायेदार किराया जमा कर सकता है? |
हाँ। |
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धारा 25(1) के अंतर्गत यदि किराया देय व्यक्ति के संबंध में वास्तविक संदेह हो तो क्या किराया जमा किया जा सकता है? |
हाँ। |
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धारा 25(2) के अंतर्गत जमा राशि के साथ क्या संलग्न किया जाना आवश्यक है? |
किरायेदार द्वारा एक आवेदन पत्र। |
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धारा 25(2)(क) के अंतर्गत आवेदन में किसका विवरण देना आवश्यक है? |
जिस आवास के लिए किराया जमा किया गया है उसका विवरण तथा उसकी पहचान के लिए पर्याप्त जानकारी। |
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धारा 25(2)(ख) के अंतर्गत आवेदन में क्या अवधि बताई जाएगी? |
वह अवधि जिसके लिए किराया जमा किया गया है। |
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धारा 25(2)(ग) के अंतर्गत आवेदन में किन व्यक्तियों का नाम और पता देना आवश्यक है? |
मकान मालिक या किराए के हकदार होने का दावा करने वाले व्यक्ति या व्यक्तियों का। |
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धारा 25(2)(घ) के अंतर्गत आवेदन में क्या उल्लेख करना आवश्यक है? |
किराया जमा करने के कारण और परिस्थितियाँ। |
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धारा 25(2)(ङ) के अंतर्गत आवेदन में और कौन-सी जानकारी दी जा सकती है? |
अन्य ऐसे विवरण जो निर्धारित किए जाएँ। |
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धारा 25(3) के अंतर्गत किराया जमा होने पर किराया नियंत्रण प्राधिकरण क्या करेगा? |
आवेदन की एक या अधिक प्रतियाँ जमा की तिथि के उल्लेख सहित मकान मालिक या किराए के हकदार होने का दावा करने वाले व्यक्तियों को भेजेगा। |
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धारा 25(3) के अंतर्गत आवेदन की प्रतियाँ किसे भेजी जाएँगी? |
मकान मालिक या किराए के हकदार होने का दावा करने वाले व्यक्तियों को। |
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धारा 25(4) के अंतर्गत किराए की जमा राशि की निकासी के लिए आवेदन होने पर किराया नियंत्रण प्राधिकरण कब भुगतान का आदेश देगा? |
जब वह संतुष्ट हो कि आवेदक ही जमा किए गए किराए का हकदार है। |
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धारा 25(4) के अंतर्गत किराए की राशि का भुगतान किस प्रकार किया जाएगा? |
निर्धारित तरीके से आदेश देकर। |
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धारा 25(4) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा किराए का भुगतान होने पर वह किस दायित्व से मुक्त हो जाएगा? |
मकान मालिक को किराया भुगतान करने के सभी दायित्वों से पूर्णतः मुक्त हो जाएगा। |
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धारा 25(4) के परन्तुक के अनुसार किराए की जमा राशि का भुगतान आदेश पारित करने से पहले किसे सुनवाई का अवसर दिया जाएगा? |
धारा 25(2) के आवेदन में नामित सभी व्यक्तियों को जो किराए पर अधिकार का दावा करते हैं। |
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धारा 25(4) के परन्तुक के अनुसार क्या किराया नियंत्रण प्राधिकरण का भुगतान आदेश सक्षम न्यायालय द्वारा अधिकारों के निर्णय को प्रभावित करेगा? |
नहीं, ऐसा आदेश अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा। |
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धारा 25(5) के अंतर्गत झूठे विवरण की शिकायत कौन कर सकता है? |
मकान मालिक या किराए के हकदार होने का दावा करने वाला व्यक्ति या व्यक्ति। |
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धारा 25(5) के अंतर्गत ऐसी शिकायत कब तक की जा सकती है? |
जमा की सूचना प्राप्त होने के तीस दिनों की समाप्ति से पहले। |
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धारा 25(5) के अंतर्गत शिकायत किस विषय में हो सकती है? |
किराया जमा करने के कारणों और परिस्थितियों संबंधी विवरण असत्य होने के बारे में। |
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धारा 25(5) के अंतर्गत जुर्माना लगाने से पहले किसे सुनवाई का अवसर दिया जाएगा? |
किरायेदार को। |
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धारा 25(5) के अंतर्गत असत्य विवरण सिद्ध होने पर किरायेदार पर अधिकतम कितना जुर्माना लगाया जा सकता है? |
दो महीने के किराए के बराबर। |
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धारा 25(5) के अंतर्गत वसूले गए जुर्माने का एक भाग किसे मुआवजे के रूप में दिया जा सकता है? |
मकान मालिक को। |
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धारा 25(6) के अंतर्गत मकान मालिक पर जुर्माना कब लगाया जा सकता है? |
जब उसने बिना उचित कारण धारा 24 में निर्दिष्ट समय के भीतर दिए गए किराए को स्वीकार करने से इनकार किया हो। |
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धारा 25(6) के अंतर्गत मकान मालिक पर अधिकतम कितना जुर्माना लगाया जा सकता है? |
दो महीने के किराए के बराबर। |
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धारा 25(6) के अंतर्गत मकान मालिक पर जुर्माना लगाने से पहले किसे सुनवाई का अवसर दिया जाएगा? |
मकान मालिक को। |
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धारा 25(6) के अंतर्गत वसूले गए जुर्माने का एक भाग किसे मुआवजे के रूप में दिया जा सकता है? |
किरायेदार को। |
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धारा 26 का विषय क्या है? |
जमा करने की समय सीमा और जमा के लिए आवेदन में गलत जानकारी के परिणाम। (Time limit for making deposit and consequences of incorrect particulars in application for deposit) |
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धारा 26(1) के अंतर्गत धारा 25 के तहत जमा किया गया किराया कब वैध माना जाएगा? |
जब वह धारा 24 में किराए के भुगतान के लिए निर्दिष्ट समय के इक्कीस दिनों के भीतर जमा किया गया हो। |
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धारा 26(1) के अंतर्गत धारा 25 के तहत किराया कितने दिनों के भीतर जमा किया जाना चाहिए? |
धारा 24 में निर्दिष्ट समय के इक्कीस दिनों के भीतर। |
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धारा 26(1) के अंतर्गत यदि किराया निर्धारित इक्कीस दिनों के भीतर जमा नहीं किया जाता है तो उसका क्या प्रभाव होगा? |
वह धारा 25 के तहत वैध रूप से जमा किया हुआ नहीं माना जाएगा। |
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धारा 26(2) के अंतर्गत यदि किरायेदार जानबूझकर किराया जमा करने के आवेदन में झूठा बयान देता है तो जमा राशि का क्या प्रभाव होगा? |
वह वैध जमा राशि नहीं मानी जाएगी। |
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धारा 26(2) के अंतर्गत झूठे बयान के कारण जमा राशि कब तक अवैध मानी जाएगी? |
जब तक मकान मालिक आवास का कब्जा वापस लेने के लिए आवेदन दाखिल करने की तिथि से पहले जमा राशि वापस न ले ले। |
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धारा 26(2) के अंतर्गत किस परिस्थिति में झूठे बयान के बावजूद जमा राशि वैध न रहने का प्रभाव समाप्त हो सकता है? |
जब मकान मालिक कब्जा वापसी के आवेदन से पहले जमा राशि वापस ले ले। |
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धारा 26(3) के अंतर्गत यदि किराया उपधारा (1) में निर्दिष्ट समय के भीतर जमा किया गया हो और उपधारा (2) के कारण वैध जमा न रहे, तो उसे क्या माना जाएगा? |
मकान मालिक को किराए का भुगतान माना जाएगा। |
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धारा 26(3) के अंतर्गत ऐसी जमा राशि को किस प्रकार माना जाएगा? |
मानो जमा की गई राशि वैध रूप से प्रस्तुत की गई हो। |
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धारा 26(3) के अंतर्गत उपधारा (2) के कारण अवैध हुई जमा राशि का लाभ क्या है? |
उसे मकान मालिक को किया गया किराए का भुगतान माना जाएगा। |
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धारा 27 का विषय क्या है? |
किराया स्वीकार करने और जमा के रूप में किराए की ज़ब्ती के संबंध में बचत। (Saving as to acceptance of rent and forfeiture of rent in deposit) |
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धारा 27(1) के अंतर्गत धारा 25 के तहत जमा किए गए किराए की निकासी को किस बात की स्वीकृति नहीं माना जाएगा? |
किराए की दर, चूक की अवधि, देय राशि या किराया जमा करने के आवेदन में बताए गए अन्य तथ्यों की सत्यता की स्वीकृति नहीं माना जाएगा। |
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धारा 27(1) के अंतर्गत क्या जमा राशि की निकासी किराए की दर को स्वीकार करना मानी जाएगी? |
नहीं। |
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धारा 27(1) के अंतर्गत क्या जमा राशि की निकासी चूक की अवधि को स्वीकार करना मानी जाएगी? |
नहीं। |
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धारा 27(1) के अंतर्गत क्या जमा राशि की निकासी देय राशि को स्वीकार करना मानी जाएगी? |
नहीं। |
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धारा 27(1) के अंतर्गत क्या जमा राशि की निकासी किरायेदार के आवेदन में वर्णित अन्य तथ्यों की सत्यता की स्वीकृति मानी जाएगी? |
नहीं। |
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धारा 27(2) के अंतर्गत यदि जमा राशि पाँच वर्ष तक नहीं निकाली जाती है तो उसका क्या होगा? |
वह सरकार के पक्ष में जब्त कर ली जाएगी। |
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धारा 27(2) के अंतर्गत पाँच वर्ष की अवधि किस तिथि से गिनी जाएगी? |
जमा की सूचना जारी होने की तारीख से। |
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धारा 27(2) के अंतर्गत जमा राशि को सरकार के पक्ष में कौन जब्त करेगा? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण आदेश द्वारा। |
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धारा 27(2) के अंतर्गत किस स्थिति में जमा राशि सरकार के पक्ष में जब्त होगी? |
जब मकान मालिक या किराए की राशि प्राप्त करने के हकदार व्यक्ति द्वारा उसे पाँच वर्ष की समाप्ति से पहले न निकाला जाए। |
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धारा 27(3) के अंतर्गत ज़ब्ती का आदेश पारित करने से पहले किराया नियंत्रण प्राधिकरण क्या करेगा? |
मकान मालिक या किराया प्राप्त करने के हकदार व्यक्ति या व्यक्तियों को नोटिस भेजेगा। |
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धारा 27(3) के अंतर्गत नोटिस किस माध्यम से भेजा जाएगा? |
पंजीकृत डाक पावती द्वारा। |
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धारा 27(3) के अंतर्गत नोटिस किस पते पर भेजा जाएगा? |
अंतिम ज्ञात पते पर। |
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धारा 27(3) के अंतर्गत क्या किराया नियंत्रण प्राधिकरण अपने कार्यालय में भी नोटिस प्रकाशित करेगा? |
हाँ। |
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धारा 27(3) के अंतर्गत यदि किराए की राशि सौ रुपये से अधिक हो तो अतिरिक्त रूप से क्या किया जाएगा? |
नोटिस किसी स्थानीय समाचार पत्र में भी प्रकाशित किया जाएगा। |
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धारा 27(3) के अंतर्गत स्थानीय समाचार पत्र में नोटिस कब प्रकाशित किया जाएगा? |
जब किराए की राशि सौ रुपये से अधिक हो। |
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अध्याय-V (CHAPTER-V) |
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किराया नियंत्रण प्राधिकारियों की नियुक्ति, उनकी शक्तियां, कार्य और अपीलें (Appointment of Rent Controlling Authorities, their Powers, Functions and Appeals) |
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धारा 28 का विषय क्या है? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण की नियुक्ति। (Appointment of Rent Controlling Authority) |
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धारा 28(1) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण की नियुक्ति कौन करेगा? |
कलेक्टर। |
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धारा 28(1) के अंतर्गत कलेक्टर किराया नियंत्रण प्राधिकरण की नियुक्ति किसकी पूर्व स्वीकृति से करेगा? |
राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति से। |
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धारा 28(1) के अंतर्गत किस पद से नीचे के अधिकारी को किराया नियंत्रण प्राधिकरण नियुक्त नहीं किया जा सकता? |
उप कलेक्टर के पद से नीचे के अधिकारी को। |
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धारा 28(1) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण किस क्षेत्र के लिए नियुक्त किया जाएगा? |
उस क्षेत्र के लिए जिसके अधिकार क्षेत्र में यह अधिनियम लागू होता है। |
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धारा 28(2) के अंतर्गत कलेक्टर कितने अतिरिक्त किराया नियंत्रण प्राधिकरण नियुक्त कर सकता है? |
एक या एक से अधिक। |
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धारा 28(2) के अंतर्गत अतिरिक्त किराया नियंत्रण प्राधिकरण की नियुक्ति किसकी पूर्व स्वीकृति से की जाएगी? |
राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति से। |
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धारा 28(2) के अंतर्गत अतिरिक्त किराया नियंत्रण प्राधिकरण किन अधिकारियों में से नियुक्त किए जा सकते हैं? |
उप कलेक्टर के पद से नीचे न होने वाले अधिकारियों में से। |
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धारा 28(2) के अंतर्गत अतिरिक्त किराया नियंत्रण प्राधिकरण किसकी सहायता के लिए नियुक्त किए जा सकते हैं? |
धारा 29 (1) के तहत नियुक्त किराया नियंत्रण प्राधिकरण की सहायता के लिए। |
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धारा 28(2) के अंतर्गत अतिरिक्त किराया नियंत्रण प्राधिकरण की नियुक्ति का उद्देश्य क्या है? |
धारा 29 (1) के तहत नियुक्त किराया नियंत्रण प्राधिकरण की सहायता करना। |
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धारा 29 का विषय क्या है? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण की शक्तियाँ। (Powers of Rent Controlling Authority) |
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धारा 29(1) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण को किन शक्तियों के समान शक्तियाँ प्राप्त होंगी? |
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अधीन सिविल न्यायालय को प्राप्त शक्तियों के समान। |
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धारा 29(1)(क) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण किस संबंध में शक्ति रखता है? |
किसी व्यक्ति को तलब करने और शपथ पर उसकी परीक्षा करने की। |
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धारा 29(1)(ख) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण किस संबंध में शक्ति रखता है? |
दस्तावेजों की खोज और प्रस्तुति की अपेक्षा करने की। |
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धारा 29(1)(ग) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण को क्या शक्ति प्राप्त है? |
कमीशन जारी करने की। |
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धारा 29(1)(घ) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण को किस प्रकार के मामलों में शक्ति प्राप्त हो सकती है? |
ऐसे अन्य मामलों में जो विहित किए जाएँ। |
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धारा 29(1) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण के समक्ष कार्यवाही किस प्रकार की मानी जाएगी? |
न्यायिक कार्यवाही। |
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धारा 29(1) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण के समक्ष कार्यवाही भारतीय दंड संहिता, 1860 / भारतीय न्याय संहिता, 2023) की किन धाराओं के अर्थ में न्यायिक कार्यवाही मानी जाएगी? |
धारा 193 और धारा 228 /धारा 229 और धारा 267 के अर्थ में। |
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धारा 29(1) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण को दंड प्रक्रिया संहिता / भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के अर्थ में क्या माना जाएगा? |
सिविल न्यायालय। |
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धारा 29(1) के अंतर्गत दंड प्रक्रिया संहिता / भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की किन धाराओं के अर्थ में किराया नियंत्रण प्राधिकरण को सिविल न्यायालय माना जाएगा? |
धारा 480 और धारा 482 / धारा 526 और धारा 528 के अर्थ में। |
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धारा 29(2) के अंतर्गत जांच या कर्तव्य के निर्वहन के लिए किराया नियंत्रण प्राधिकरण क्या कर सकता है? |
धारा 29 (2) के अंतर्गत वर्णित कार्य कर सकता है। |
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धारा 29(2)(क) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण किसी आवास में कब प्रवेश कर निरीक्षण कर सकता है? |
कम से कम चौबीस घंटे पूर्व लिखित सूचना देने के बाद, सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच। |
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धारा 29(2)(क) के अंतर्गत निरीक्षण से पूर्व कितने समय की लिखित सूचना आवश्यक है? |
कम से कम चौबीस घंटे की। |
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धारा 29(2)(क) के अंतर्गत निरीक्षण किस समयावधि में किया जा सकता है? |
सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच। |
|
धारा 29(2)(ख) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण लिखित आदेश द्वारा क्या निर्देश दे सकता है? |
किसी व्यक्ति को जांच से संबंधित खाते, बही-खाते या अन्य दस्तावेज निरीक्षण हेतु प्रस्तुत करने का। |
|
धारा 29(2)(ख) के अंतर्गत किन अभिलेखों को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया जा सकता है? |
जांच से संबंधित सभी खाते, बही-खाते या अन्य दस्तावेज। |
|
धारा 29(2)(ख) के अंतर्गत दस्तावेज किस प्रकार प्रस्तुत किए जाएंगे? |
आदेश में निर्दिष्ट समय और स्थान पर निरीक्षण के लिए। |
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धारा 30 का विषय क्या है? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया। (Procedure to be followed by Rent Controlling Authority) |
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धारा 30(1) के अंतर्गत किसी व्यक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला आदेश पारित करने से पहले क्या आवश्यक है? |
उसे प्रस्तावित आदेश के विरुद्ध कारण बताने का उचित अवसर दिया जाना आवश्यक है। |
|
धारा 30(1) के अंतर्गत क्या बिना सुनवाई का अवसर दिए प्रतिकूल आदेश पारित किया जा सकता है? |
नहीं। |
|
धारा 30(1) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण को आदेश पारित करने से पहले किन बातों पर विचार करना आवश्यक है? |
संबंधित व्यक्ति की आपत्तियों तथा उनके समर्थन में प्रस्तुत साक्ष्यों पर। |
|
धारा 30(1) के अंतर्गत यदि कोई आपत्तियाँ प्रस्तुत की गई हों तो उन पर कौन विचार करेगा? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण। |
|
धारा 30(1) के अंतर्गत आपत्तियों के समर्थन में प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार कौन करेगा? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण। |
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धारा 30(2) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण किसी कार्यवाही में किस प्रश्न पर विचार करेगा? |
लागत (Costs) के प्रश्न पर। |
|
धारा 30(2) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण लागत किसके पक्ष में या विरुद्ध प्रदान कर सकता है? |
किसी भी पक्ष के पक्ष में या उसके विरुद्ध। |
|
धारा 30(2) के अंतर्गत लागत किस आधार पर प्रदान की जाएगी? |
जैसा किराया नियंत्रण प्राधिकरण उचित समझे। |
|
धारा 31 का विषय क्या है? |
जिला न्यायाधीश या अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के समक्ष अपील। (Appeal to District Judge or Additional District Judge) |
|
धारा 31(1) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण के प्रत्येक आदेश के विरुद्ध अपील कहाँ की जा सकती है? |
जिला न्यायाधीश या क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र वाले अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के समक्ष। |
|
धारा 31(1) के अंतर्गत अतिरिक्त जिला न्यायाधीश को इस धारा में किस नाम से संबोधित किया गया है? |
न्यायाधीश। |
|
धारा 31(1) के अंतर्गत अपीलीय न्यायालय का निर्णय कैसा होगा? |
अंतिम होगा। |
|
धारा 31(1) के अंतर्गत अपील किस आदेश के विरुद्ध की जा सकती है? |
मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा दिए गए प्रत्येक आदेश के विरुद्ध। |
|
धारा 31(2) के अंतर्गत अपील कितने समय के भीतर दायर की जानी चाहिए? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण के आदेश की तिथि से तीस दिनों के भीतर। |
|
धारा 31(2) के प्रथम परन्तुक के अनुसार तीस दिनों की अवधि की गणना करते समय किस अवधि को बाहर रखा जाएगा? |
आदेश की प्रति प्राप्त करने के लिए आवश्यक अवधि को। |
|
धारा 31(2) के द्वितीय परन्तुक के अनुसार क्या तीस दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद भी अपील स्वीकार की जा सकती है? |
हाँ, पर्याप्त कारण होने पर। |
|
धारा 31(2) के द्वितीय परन्तुक के अनुसार विलंब के बाद अपील स्वीकार करने का अधिकार किसे है? |
न्यायाधीश को। |
|
धारा 31(2) के द्वितीय परन्तुक के अनुसार विलंबित अपील स्वीकार करने के लिए क्या आवश्यक है? |
पर्याप्त कारण का होना। |
|
धारा 32 का विषय क्या है? |
दूसरी अपील। (Second appeal) |
|
धारा 32 के अंतर्गत दूसरी अपील किस आदेश के विरुद्ध की जा सकती है? |
धारा 31 के तहत प्रथम अपील में पारित आदेश के विरुद्ध। |
|
धारा 32 के अंतर्गत क्या दूसरी अपील किसी भी आधार पर की जा सकती है? |
नहीं, केवल धारा 32 में निर्दिष्ट आधारों पर ही। |
|
धारा 32(i) के अंतर्गत दूसरी अपील का पहला आधार क्या है? |
कि निर्णय कानून या कानून के समान बल रखने वाली प्रथा के विपरीत है। |
|
धारा 32(i) के अंतर्गत यदि निर्णय कानून के समान बल रखने वाली प्रथा के विपरीत हो तो क्या दूसरी अपील की जा सकती है? |
हाँ। |
|
धारा 32(ii) के अंतर्गत दूसरी अपील का आधार क्या है? |
कि निर्णय किसी महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दे का निर्धारण करने में विफल रहा है। |
|
धारा 32(ii) के अंतर्गत यदि निर्णय किसी महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न का निर्णय नहीं करता है तो क्या दूसरी अपील की जा सकती है? |
हाँ। |
|
धारा 32(iii) के अंतर्गत दूसरी अपील का आधार क्या है? |
मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 द्वारा निर्धारित प्रक्रिया में कोई महत्वपूर्ण त्रुटि या दोष होना जिससे निर्णय में त्रुटि या दोष उत्पन्न हो सकता है। |
|
धारा 32(iii) के अंतर्गत प्रक्रिया संबंधी त्रुटि किस प्रकार की होनी चाहिए? |
महत्वपूर्ण त्रुटि या दोष। |
|
धारा 32(iii) के अंतर्गत प्रक्रिया संबंधी त्रुटि का क्या प्रभाव होना चाहिए? |
उससे मामले के गुण-दोष के आधार पर निर्णय में त्रुटि या दोष उत्पन्न हो सकता हो। |
|
धारा 33 का विषय क्या है? |
आदेशों में संशोधन। (Amendment of orders) |
|
धारा 33 के अंतर्गत किन आदेशों में संशोधन किया जा सकता है? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण या न्यायाधीश द्वारा पारित किसी भी आदेश में। |
|
धारा 33 के अंतर्गत किस प्रकार की लिपिकीय त्रुटियाँ सुधारी जा सकती हैं? |
आदेश में विद्यमान लिपिकीय त्रुटियाँ। |
|
धारा 33 के अंतर्गत किस प्रकार की अंकगणितीय त्रुटियाँ सुधारी जा सकती हैं? |
आदेश में विद्यमान अंकगणितीय त्रुटियाँ। |
|
धारा 33 के अंतर्गत आकस्मिक चूक या गलती से उत्पन्न त्रुटियों का क्या किया जा सकता है? |
उन्हें सुधारा जा सकता है। |
|
धारा 33 के अंतर्गत त्रुटियों का संशोधन कब किया जा सकता है? |
किसी भी समय। |
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धारा 33 के अंतर्गत त्रुटियों का संशोधन किसके आवेदन पर किया जा सकता है? |
किसी भी पक्ष द्वारा इस संबंध में किए गए आवेदन पर। |
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धारा 33 के अंतर्गत क्या बिना आवेदन के भी त्रुटियों का संशोधन किया जा सकता है? |
हाँ, अन्यथा भी किया जा सकता है। |
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धारा 33 के अंतर्गत आदेश में त्रुटियों का संशोधन कौन कर सकता है? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण या न्यायाधीश। |
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धारा 34 का विषय क्या है? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण जुर्माना वसूलने के लिए मजिस्ट्रेट की शक्तियों का प्रयोग करेगा। (Rent Controlling Authority to exercise powers of Magistrate for recovery of fine) |
|
धारा 34 के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा लगाया गया जुर्माना कब तक अदा किया जाएगा? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा निर्धारित समय के भीतर। |
|
धारा 34 के अंतर्गत जुर्माने के भुगतान की समय-सीमा कौन निर्धारित करता है? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण। |
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धारा 34 के अंतर्गत क्या किराया नियंत्रण प्राधिकरण जुर्माना जमा करने की समय-सीमा बढ़ा सकता है? |
हाँ, उचित और पर्याप्त कारण होने पर। |
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धारा 34 के अंतर्गत समय-सीमा बढ़ाने के लिए क्या आवश्यक है? |
उचित और पर्याप्त कारण। |
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धारा 34 के अंतर्गत जुर्माने का भुगतान न होने पर राशि किस प्रकार वसूल की जाएगी? |
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 / भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के प्रावधानों के अनुसार जुर्माने के रूप में। |
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धारा 34 के अंतर्गत वसूली के प्रयोजन से किराया नियंत्रण प्राधिकरण को क्या माना जाएगा? |
मजिस्ट्रेट। |
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धारा 34 के अंतर्गत जुर्माने की वसूली के लिए किराया नियंत्रण प्राधिकरण किस संहिता के अधीन मजिस्ट्रेट माना जाएगा? |
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 / भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के अधीन। |
|
धारा 35 का विषय क्या है? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण अन्य आदेशों के निष्पादन के लिए सिविल न्यायालय की शक्तियों का प्रयोग करेगा। (Rent Controlling Authority to exercise powers of Civil Court for execution of other order) |
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धारा 35 को किस अधिनियम द्वारा प्रतिस्थापित किया गया? |
मध्य प्रदेश अधिनियम 27, 1983 द्वारा। |
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धारा 35 का प्रतिस्थापन किस तिथि से प्रभावी हुआ? |
16 अगस्त, 1983 से। |
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धारा 35 के अंतर्गत धारा 34 में अन्यथा प्रावधान किए जाने के अतिरिक्त कौन-से आदेश निष्पादन योग्य होंगे? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा दिया गया आदेश, अध्याय 5 के अंतर्गत अपील में पारित आदेश तथा अध्याय III-ए के अंतर्गत पुनरीक्षण में पारित आदेश। |
|
धारा 35 के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा दिया गया आदेश किसके समान निष्पादन योग्य होगा? |
सिविल न्यायालय के निर्णय के समान। |
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धारा 35 के अंतर्गत अध्याय 5 के अंतर्गत अपील में पारित आदेश किसके समान निष्पादन योग्य होगा? |
सिविल न्यायालय के निर्णय के समान। |
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धारा 35 के अंतर्गत अध्याय III-ए के अंतर्गत पुनरीक्षण में पारित आदेश किसके समान निष्पादन योग्य होगा? |
सिविल न्यायालय के निर्णय के समान। |
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धारा 35 के अंतर्गत आदेशों के निष्पादन के प्रयोजन से किराया नियंत्रण प्राधिकरण को कौन-सी शक्तियाँ प्राप्त होंगी? |
सिविल न्यायालय की सभी शक्तियाँ। |
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धारा 35 के अंतर्गत आदेशों का निष्पादन कौन करेगा? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण। |
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धारा 36 का विषय क्या है? |
आदेश की अंतिम स्थिति। (Finality of order) |
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धारा 36 के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकारी द्वारा दिया गया प्रत्येक आदेश किसके अधीन अंतिम होगा? |
अपील में निर्णय के अधीन रहते हुए। |
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धारा 36 के अंतर्गत क्या किराया नियंत्रण प्राधिकारी का प्रत्येक आदेश अंतिम होता है? |
हाँ, मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 में अन्यथा स्पष्ट प्रावधान होने और अपील में निर्णय के अधीन रहते हुए। |
|
धारा 36 के अंतर्गत आदेश की अंतिमता पर क्या अपवाद है? |
जहाँ मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 में अन्यथा स्पष्ट रूप से प्रावधान किया गया हो। |
|
धारा 36 के अंतर्गत क्या अंतिम आदेश को किसी मूल वाद में चुनौती दी जा सकती है? |
नहीं। |
|
धारा 36 के अंतर्गत क्या अंतिम आदेश को किसी आवेदन में प्रश्नगत बनाया जा सकता है? |
नहीं। |
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धारा 36 के अंतर्गत क्या अंतिम आदेश को किसी निष्पादन कार्यवाही में प्रश्नगत बनाया जा सकता है? |
नहीं। |
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धारा 36 के अंतर्गत किन कार्यवाहियों में किराया नियंत्रण प्राधिकारी के अंतिम आदेश पर प्रश्न नहीं उठाया जाएगा? |
किसी भी मूल मुकदमे, आवेदन या निष्पादन कार्यवाही में। |
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अध्याय VI (CHAPTER VI) |
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मकान मालिकों के विशेष दायित्वों और दंडों से संबंधित प्रावधान (Provisions Regarding Special Obligations of Landlords and Penalties) |
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धारा 37 का विषय क्या है? |
मकान मालिक का यह कर्तव्य है कि वह आवास को अच्छी हालत में रखे। (Landlord's duty to keep accommodation in good repair) |
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धारा 37(1) के अंतर्गत प्रत्येक मकान मालिक का क्या कर्तव्य है? |
आवास को अच्छी और रहने योग्य स्थिति में रखना। |
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धारा 37(1) के अंतर्गत मकान मालिक आवास को किस स्थिति में रखने के लिए बाध्य है? |
अच्छी और रहने योग्य स्थिति में। |
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धारा 37(2) के अंतर्गत यदि मकान मालिक लिखित सूचना के बाद उचित समय में मरम्मत नहीं करता है तो किरायेदार क्या कर सकता है? |
स्वयं मरम्मत कर सकता है। |
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धारा 37(2) के अंतर्गत किरायेदार मरम्मत का खर्च कैसे समायोजित कर सकता है? |
किराए से काट सकता है या अन्यथा मकान मालिक से वसूल कर सकता है। |
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धारा 37(2) के अंतर्गत किरायेदार को स्वयं मरम्मत करने का अधिकार कब प्राप्त होता है? |
जब मकान मालिक लिखित सूचना के बाद उचित समय के भीतर मरम्मत करने में लापरवाही करे या विफल रहे। |
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धारा 37(2) के परन्तुक के अनुसार एक वर्ष में किराए से काटी या वसूल की जाने वाली राशि की अधिकतम सीमा क्या है? |
उस वर्ष के लिए देय किराए के बारहवें हिस्से से अधिक नहीं। |
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धारा 37(2) के परन्तुक के अनुसार क्या किरायेदार एक वर्ष में देय किराए के बारहवें हिस्से से अधिक मरम्मत व्यय काट सकता है? |
नहीं। |
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धारा 37(3) के अंतर्गत किरायेदार किराया नियंत्रण प्राधिकरण के समक्ष आवेदन कब कर सकता है? |
जब आवश्यक मरम्मत के बिना आवास में रहना या उसका उपयोग करना अनुचित असुविधा के साथ ही संभव हो और मकान मालिक लिखित सूचना के बाद भी मरम्मत न करे। |
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धारा 37(3) के अंतर्गत किरायेदार आवेदन के साथ क्या प्रस्तुत करेगा? |
मरम्मत कार्य की लागत का अनुमान। |
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धारा 37(3) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण आदेश देने से पहले किसे सुनवाई का अवसर देगा? |
मकान मालिक को। |
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धारा 37(3) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण किन बातों पर विचार करेगा? |
लागत के अनुमान पर तथा आवश्यक समझी जाने वाली जाँच पर। |
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धारा 37(3) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण किस प्रकार मरम्मत की अनुमति देता है? |
लिखित आदेश द्वारा। |
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धारा 37(3) के अंतर्गत अनुमति मिलने के बाद किरायेदार क्या कर सकता है? |
स्वयं मरम्मत कर सकता है और उसकी लागत किराए से काट सकता है या मकान मालिक से वसूल कर सकता है। |
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धारा 37(3) के अंतर्गत क्या मरम्मत की लागत आदेश में निर्दिष्ट राशि से अधिक वसूल की जा सकती है? |
नहीं। |
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धारा 37(3) के प्रथम परन्तुक के अनुसार एक वर्ष में किराए से काटी या वसूल की जाने वाली राशि की अधिकतम सीमा क्या है? |
उस वर्ष के लिए देय किराए के आधे से अधिक नहीं। |
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धारा 37(3) के प्रथम परन्तुक के अनुसार क्या किरायेदार एक वर्ष में देय किराए के आधे से अधिक मरम्मत व्यय काट सकता है? |
नहीं। |
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धारा 37(3) के द्वितीय परन्तुक के अनुसार यदि अतिरिक्त मरम्मत आवश्यक हो और किरायेदार अतिरिक्त लागत वहन करने को सहमत हो तो किराया नियंत्रण प्राधिकरण क्या कर सकता है? |
ऐसी अतिरिक्त मरम्मत करने की अनुमति दे सकता है। |
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धारा 37(3) के द्वितीय परन्तुक के अनुसार अतिरिक्त मरम्मत की अनुमति देने की एक शर्त क्या है? |
किरायेदार स्वयं अतिरिक्त लागत वहन करने के लिए सहमत हो। |
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धारा 38 का विषय क्या है? |
आवश्यक आपूर्ति या सेवा को बंद करना या रोकना। (Cutting off or withholding essential supply or service) |
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धारा 38(1) के अंतर्गत मकान मालिक बिना उचित और पर्याप्त कारण के क्या नहीं कर सकता? |
किरायेदार द्वारा किराए पर लिए गए आवास की आवश्यक आपूर्ति या सेवा को बाधित या रोक नहीं सकता। |
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धारा 38(1) के अंतर्गत क्या मकान मालिक अपनी ओर से कार्य करने वाले किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से भी आवश्यक आपूर्ति या सेवा बंद या रोक सकता है? |
नहीं। |
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धारा 38(1) के अंतर्गत आवश्यक आपूर्ति या सेवा को रोकने के लिए क्या उचित और पर्याप्त कारण आवश्यक है? |
हाँ। |
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धारा 38(2) के अंतर्गत यदि मकान मालिक उपधारा (1) का उल्लंघन करता है तो किरायेदार क्या कर सकता है? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण के समक्ष शिकायत सहित आवेदन कर सकता है। |
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धारा 38(2) के अंतर्गत शिकायत किस प्राधिकरण को की जाएगी? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण को। |
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धारा 38(3) के अंतर्गत यदि जांच में यह पाया जाए कि आवश्यक आपूर्ति या सेवा बिना उचित और पर्याप्त कारण के बंद या रोकी गई थी, तो किराया नियंत्रण प्राधिकरण क्या आदेश देगा? |
मकान मालिक को आपूर्ति या सेवा बहाल करने का निर्देश देगा। |
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धारा 38(3) के अंतर्गत आवश्यक आपूर्ति या सेवा की बहाली का निर्देश किसे दिया जाएगा? |
मकान मालिक को। |
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धारा 38(4) के अंतर्गत किराया नियंत्रण प्राधिकरण अधिकतम कितने रुपये तक मुआवजा देने का निर्देश दे सकता है? |
पचास रुपये से अधिक नहीं। |
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धारा 38(4)(क) के अंतर्गत यदि आवेदन तुच्छ या परेशान करने के उद्देश्य से किया गया हो तो मुआवजा कौन देगा? |
किरायेदार मकान मालिक को। |
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धारा 38(4)(ख) के अंतर्गत यदि मकान मालिक ने बिना उचित और पर्याप्त कारण के आवश्यक आपूर्ति या सेवा बंद या रोक दी हो तो मुआवजा कौन देगा? |
मकान मालिक किरायेदार को। |
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धारा 38 के स्पष्टीकरण-I के अनुसार "आवश्यक आपूर्ति या सेवा" में क्या-क्या शामिल हैं? |
पानी, बिजली, गलियारों और सीढ़ियों में रोशनी, स्वच्छता तथा सफाई सेवाएँ। |
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धारा 38 के स्पष्टीकरण-I के अनुसार क्या पानी आवश्यक आपूर्ति या सेवा में शामिल है? |
हाँ। |
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धारा 38 के स्पष्टीकरण-I के अनुसार क्या बिजली आवश्यक आपूर्ति या सेवा में शामिल है? |
हाँ। |
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धारा 38 के स्पष्टीकरण-I के अनुसार क्या गलियारों और सीढ़ियों में रोशनी आवश्यक आपूर्ति या सेवा में शामिल है? |
हाँ। |
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धारा 38 के स्पष्टीकरण-I के अनुसार क्या स्वच्छता और सफाई सेवाएँ आवश्यक आपूर्ति या सेवा में शामिल हैं? |
हाँ। |
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धारा 38 के स्पष्टीकरण-II के अनुसार आवश्यक आपूर्ति या सेवा को रोकना किन कृत्यों या चूकों को भी शामिल करता है? |
ऐसे कृत्य या चूक जिनके कारण स्थानीय प्राधिकरण या अन्य सक्षम प्राधिकरण द्वारा आवश्यक आपूर्ति या सेवा रोक दी जाती है। |
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धारा 38 के स्पष्टीकरण-II के अनुसार यदि मकान मालिक के कृत्य या चूक के कारण स्थानीय प्राधिकरण आवश्यक आपूर्ति रोक दे, तो क्या इसे आवश्यक आपूर्ति या सेवा को रोकना माना जाएगा? |
हाँ। |
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धारा 39 का विषय क्या है? |
किरायेदारी पर नियंत्रण। (Control of letting) |
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धारा 39(1) के अंतर्गत सामान्य या विशेष आदेश कौन जारी कर सकता है? |
कलेक्टर या उसके द्वारा अधिकृत उप कलेक्टर के पद से नीचे का न होने वाला अधिकारी। |
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धारा 39(1) के अंतर्गत इस अध्याय में अधिकृत अधिकारी किसे कहा गया है? |
कलेक्टर द्वारा इस संबंध में अधिकृत अधिकारी को। |
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धारा 39(1) के अंतर्गत कलेक्टर या अधिकृत अधिकारी किस आधार पर कार्यवाही कर सकता है? |
स्वयं की पहल पर या इस संबंध में किए गए आवेदन पर। |
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धारा 39(1) के अंतर्गत मकान मालिक से किसकी लिखित सूचना देने की मांग की जा सकती है? |
ऐसे आवास की जो रिक्त हो गया है या रिक्त होने की संभावना है। |
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धारा 39(1) के अंतर्गत लिखित सूचना किस समय के भीतर दी जानी चाहिए? |
आदेश में निर्दिष्ट समय के भीतर। |
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धारा 39(1) के अंतर्गत मकान मालिक को किस विषय में निर्देश दिया जा सकता है? |
आवास को किराए पर देने या न देने के संबंध में। |
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धारा 39(1) के अंतर्गत क्या मकान मालिक आदेश के विपरीत आवास किराए पर दे सकता है? |
नहीं। |
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धारा 39(2) के अंतर्गत रिक्त या रिक्त होने वाले आवास का आवंटन किनके अधिभोग हेतु किया जा सकता है? |
केंद्र या राज्य सरकार के अधीन लाभ के पद पर आसीन व्यक्ति या स्थानीय प्राधिकरण, मध्य प्रदेश विद्युत बोर्ड, मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अथवा अधिसूचित निगमित निकाय के कर्मचारी के लिए। |
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धारा 39(2) के अंतर्गत कलेक्टर या अधिकृत अधिकारी सूचना प्राप्त होने के कितने दिनों के भीतर आवंटन आदेश पारित कर सकता है? |
15 दिनों के भीतर। |
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धारा 39(2) के अंतर्गत आवंटन आदेश किस सूचना की प्राप्ति के बाद पारित किया जाता है? |
धारा 39(1) के तहत मकान मालिक द्वारा दी गई सूचना की प्राप्ति के बाद। |
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धारा 39(2) के अंतर्गत आवंटन आदेश में मकान मालिक को क्या निर्देश दिया जा सकता है? |
आवास का कब्जा आदेश में निर्दिष्ट व्यक्ति को सौंपने का। |
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धारा 39(2) के अंतर्गत यदि आवास रिक्त है तो मकान मालिक कब कब्जा सौंपेगा? |
तुरंत। |
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धारा 39(2) के अंतर्गत यदि आवास तत्काल रिक्त नहीं है तो मकान मालिक कब कब्जा सौंपेगा? |
जैसे ही वह रिक्त हो जाए। |
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धारा 39(2) के प्रथम परन्तुक के अनुसार यदि मकान मालिक स्वयं के निवास हेतु आवास की आवश्यकता बताता है और आवश्यकता वास्तविक पाई जाती है, तो क्या होगा? |
कलेक्टर या अधिकृत अधिकारी उसे आवास पर कब्जा करने की अनुमति देंगे। |
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धारा 39(2) के प्रथम परन्तुक के अंतर्गत स्वयं के रहने की आवश्यकता का उल्लेख मकान मालिक कहाँ करेगा? |
धारा 39(1) के तहत दी गई जानकारी में। |
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धारा 39(2) के प्रथम परन्तुक के अंतर्गत मकान मालिक को स्वयं कब्जा करने की अनुमति देने से पहले क्या आवश्यक है? |
उचित जांच के बाद वास्तविक आवश्यकता से संतुष्टि। |
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धारा 39(2) के द्वितीय परन्तुक के अनुसार आवंटन करते समय जहाँ तक संभव हो किसका ध्यान रखा जाएगा? |
मकान मालिक की इच्छाओं का। |
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धारा 39(2) के द्वितीय परन्तुक के अनुसार मकान मालिक की इच्छाओं का ध्यान विशेष रूप से किस संबंध में रखा जाएगा? |
उस व्यक्ति के प्रकार के संबंध में जिसे आवास आवंटित किया जाना है। |
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धारा 39(3) के अंतर्गत यदि निर्धारित अवधि में आवंटन आदेश पारित और तामील नहीं किया जाता है तो मकान मालिक क्या कर सकता है? |
रिक्त आवास किसी भी व्यक्ति को किराए पर दे सकता है। |
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धारा 39(3) के परन्तुक के अनुसार प्रथम परन्तुक वाले मामलों में किस अवधि को गणना से बाहर रखा जाएगा? |
जांच में व्यतीत अवधि को। |
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धारा 39(4) के अंतर्गत कलेक्टर या अधिकृत अधिकारी अधिनियम के अनुपालन को सुनिश्चित करने हेतु क्या कर सकता है? |
उचित कदम उठा सकता है या उठवा सकता है। |
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धारा 39(4) के अंतर्गत कलेक्टर या अधिकृत अधिकारी किस उद्देश्य से कार्यवाही कर सकता है? |
अधिनियम या नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने, उल्लंघन को रोकने या सुधारने तथा शक्तियों के प्रभावी प्रयोग के लिए। |
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धारा 39(4) के अंतर्गत क्या कलेक्टर या अधिकृत अधिकारी न्यूनतम बल का प्रयोग कर सकता है? |
हाँ। |
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धारा 39(4) के अंतर्गत क्या न्यूनतम बल में पुलिस बल भी शामिल हो सकता है? |
हाँ। |
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धारा 39(5)(क) के अंतर्गत किन आवासों पर यह धारा लागू नहीं होगी? |
आवासीय प्रयोजन के लिए उपयोग किए जाने वाले ऐसे आवास जिनका मासिक किराया पच्चीस रुपये से अधिक न हो। |
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धारा 39(5)(ख) के अंतर्गत किन गैर-आवासीय आवासों पर यह धारा लागू नहीं होगी? |
जिनका मासिक किराया पचास रुपये से अधिक न हो। |
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धारा 39(5)(ग) के अंतर्गत किन आवासों पर यह धारा लागू नहीं होगी? |
मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के अंतर्गत पारित आदेश के अनुसरण में मकान मालिक के अधिभोग हेतु रिक्त हुए आवास पर। |
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धारा 39(5)(घ) के अंतर्गत किन संस्थाओं के आवास इस धारा से बाहर हैं? |
स्थानीय प्राधिकरण, कंपनी या फर्म के ऐसे आवास जो वास्तव में केवल उनके अधिकारियों, कर्मचारियों और एजेंटों के रहने के लिए अभिप्रेत हों। |
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धारा 40 का विषय क्या है? |
आवास का आवंटन। (Allotment of accommodation) |
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धारा 40 के अंतर्गत धारा 39(2) के अधीन आवास का आवंटन कौन करेगा? |
कलेक्टर या अधिकृत अधिकारी। |
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धारा 40 के अंतर्गत अधिकृत अधिकारी का उल्लेख किस संशोधन द्वारा जोड़ा गया? |
मध्य प्रदेश अधिनियम 10, 1965 की धारा 5 द्वारा। |
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धारा 40 के अनुसार कलेक्टर या अधिकृत अधिकारी आवास का आवंटन किस आधार पर करेगा? |
यथासंभव धारा 40 में निर्दिष्ट सिद्धांतों के अनुसार। |
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धारा 40(1) के अंतर्गत आवास का आवंटन किस आधार पर किया जाएगा? |
प्राथमिकता क्रम के अनुसार। |
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धारा 40(1)(i) के अंतर्गत आवंटन में प्रथम प्राथमिकता किसे दी जाएगी? |
केंद्र या राज्य सरकार के अधीन लाभ के पद धारण करने वाले व्यक्ति को। |
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धारा 40(1)(ii) के अंतर्गत आवंटन में अगली प्राथमिकता किसे दी जाएगी? |
स्थानीय प्राधिकरण, मध्य प्रदेश विद्युत बोर्ड, मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड या राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य निगमित निकाय की सेवा में कार्यरत व्यक्ति को। |
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धारा 40(2) के अंतर्गत यदि आवास केंद्र या राज्य सरकार के लाभ के पदधारी द्वारा अधिग्रहित था, तो सामान्यतः उसे किसे आवंटित किया जाएगा? |
उसके उत्तराधिकारी को। |
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धारा 40(2) के परन्तुक के अनुसार क्या आवास पिछले कब्जेदार के उत्तराधिकारी के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति को भी आवंटित किया जा सकता है? |
हाँ। |
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धारा 40(2) के परन्तुक के अनुसार उत्तराधिकारी के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को आवंटन करने के लिए क्या आवश्यक है? |
कारणों को लिखित रूप में अभिलिखित करना। |
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धारा 40(ए) का विषय क्या है? |
आपातकाल के दौरान आवंटन का विशेष प्रावधान। (Special provision of allotment during emergency) |
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धारा 40(ए) किस अधिनियम द्वारा सम्मिलित की गई? |
मध्य प्रदेश अधिनियम 10, 1965 की धारा 5 द्वारा। |
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धारा 40(ए)(1) के अंतर्गत 'आपातकाल की घोषणा' से क्या अभिप्राय है? |
भारत के संविधान के अनुच्छेद 352 के खंड (1) के तहत जारी की गई घोषणा। |
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धारा 40(ए)(1) के अनुसार आपातकाल की घोषणा किस संवैधानिक प्रावधान के अंतर्गत जारी की जाती है? |
संविधान के अनुच्छेद 352(1) के अंतर्गत। |
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धारा 40(ए)(2) के अंतर्गत विशेष आवंटन का प्रावधान कब लागू होता है? |
जब आपातकाल की घोषणा लागू रहती है। |
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धारा 40(ए)(2)(i) के अंतर्गत किसके परिवार के सदस्यों को आवास आवंटित किया जा सकता है? |
संघ की नौसेना, सेना, वायु सेना या अन्य सशस्त्र बलों के सक्रिय सेवारत सदस्य के परिवार के सदस्यों को। |
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धारा 40(ए)(2)(ii) के अंतर्गत किस सरकारी कर्मचारी के परिवार के सदस्यों को आवास आवंटित किया जा सकता है? |
ऐसे सरकारी कर्मचारी के परिवार के सदस्यों को जो आपातकाल की अवधि में सशस्त्र बलों में सेवा ग्रहण करता है। |
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धारा 40(ए)(2) के अंतर्गत आवास किस स्थान पर आवंटित किया जा सकता है? |
सशस्त्र बलों के सदस्य या सरकारी कर्मचारी द्वारा निर्दिष्ट स्थान पर। |
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धारा 40(ए)(2) के अंतर्गत आवास का आवंटन कौन करेगा? |
उस क्षेत्र पर अधिकार रखने वाला कलेक्टर या अधिकृत अधिकारी। |
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धारा 40(ए)(2) के अंतर्गत आवास आवंटित करने की शर्त क्या है? |
आवास रिक्त हो या रिक्त होने की संभावना हो। |
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धारा 40(ए)(2) के अंतर्गत कलेक्टर या अधिकृत अधिकारी मकान मालिक को क्या निर्देश दे सकता है? |
आवंटित परिवार के सदस्यों को आवास का कब्जा देने का। |
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धारा 40(ए)(2) के अंतर्गत यदि आवास रिक्त हो तो मकान मालिक कब कब्जा देगा? |
तुरंत। |
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धारा 40(ए)(2) के अंतर्गत यदि आवास तत्काल रिक्त न हो तो मकान मालिक कब कब्जा देगा? |
जैसे ही आवास रिक्त हो जाएगा। |
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धारा 40(ए)(3) के अंतर्गत इस धारा के तहत आवंटित व्यक्ति की किरायेदारी कब समाप्त होगी? |
आपातकाल की घोषणा समाप्त होने की तारीख से एक वर्ष की अवधि समाप्त होने पर। |
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धारा 40(ए)(3) के अंतर्गत क्या आपातकाल समाप्त होने के तुरंत बाद किरायेदारी समाप्त हो जाती है? |
नहीं, वह आपातकाल समाप्त होने की तारीख से एक वर्ष बाद समाप्त होती है। |
|
धारा 41 का विषय क्या है? |
आवास आवंटित व्यक्ति द्वारा किराया अदा करने का दायित्व। (Liability of person allotted accommodation to pay rent) |
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धारा 41 के अंतर्गत किन व्यक्तियों पर यह प्रावधान लागू होता है? |
जिन्हें धारा 39(2) या धारा 40-ए के तहत आवास आवंटित किया गया हो। |
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धारा 41 के अनुसार धारा 39(2) या धारा 40(ए) के तहत आवास प्राप्त करने वाले व्यक्ति को क्या माना जाएगा? |
उस आवास के मकान मालिक का किरायेदार। |
|
धारा 41 के अनुसार आवंटित व्यक्ति कब से किराया देने के लिए उत्तरदायी होगा? |
आवास खाली करने की तारीख से। |
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धारा 41(क) के अंतर्गत यदि आवास रिक्त होने से पहले किसी किरायेदार के कब्जे में था, तो आवंटित व्यक्ति कौन-सा किराया देगा? |
पूर्व किरायेदार द्वारा देय किराया। |
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धारा 41(ख) के अंतर्गत यदि आवास पहले किसी किरायेदार के कब्जे में नहीं था, तो कौन-सा किराया देय होगा? |
धारा 7 के सिद्धांतों के अनुसार किराया नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा निर्धारित किराया। |
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धारा 41(ख) के अंतर्गत पूर्व किरायेदार न होने की स्थिति में किराया कौन निर्धारित करेगा? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण। |
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धारा 41 के परन्तुक के अनुसार यदि धारा 39(2) के प्रथम परन्तुक की कार्यवाही के परिणामस्वरूप आवास पंद्रह दिनों से अधिक समय तक खाली रहता है, तो आवंटित व्यक्ति कितने समय का किराया देने के लिए उत्तरदायी होगा? |
केवल पंद्रह दिनों का। |
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धारा 41 के परन्तुक के अनुसार क्या आवंटित व्यक्ति पंद्रह दिनों से अधिक खाली रहने की पूरी अवधि का किराया देगा? |
नहीं, केवल पंद्रह दिनों का किराया देगा। |
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धारा 42 का विषय क्या है? |
किरायेदारी की समाप्ति। (Termination of tenancy) |
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धारा 42 के अंतर्गत पद के कारण आवंटित आवास की किरायेदारी कब समाप्त होती है? |
जिस दिन संबंधित व्यक्ति स्थानांतरण, सेवानिवृत्ति या किसी अन्य कारण से उस पद पर बने रहना छोड़ देता है। |
|
धारा 42 के अंतर्गत किन कारणों से पद छोड़ने पर किरायेदारी समाप्त हो जाती है? |
स्थानांतरण, सेवानिवृत्ति या किसी अन्य कारण से। |
|
धारा 42 के अंतर्गत किरायेदारी समाप्त होने के बाद आवास कितने दिनों के भीतर खाली करना होगा? |
सात दिनों के भीतर। |
|
धारा 42 के अंतर्गत आवास खाली करने का दायित्व किस पर है? |
उस व्यक्ति पर जिसे पद के कारण आवास आवंटित किया गया था। |
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धारा 42 के परन्तुक के अनुसार आवास खाली करने की अवधि कौन बढ़ा सकता है? |
कलेक्टर या अधिकृत अधिकारी। |
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धारा 42 के परन्तुक के अनुसार अवधि बढ़ाने के लिए क्या आवश्यक है? |
कारणों को लिखित रूप में दर्ज करना। |
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धारा 42 के परन्तुक के अनुसार आवास खाली करने की अवधि अधिकतम कितनी बढ़ाई जा सकती है? |
अधिकतम चार महीने तक। |
|
धारा 42 के परन्तुक के अनुसार क्या आवास खाली करने की अवधि चार महीने से अधिक बढ़ाई जा सकती है? |
नहीं। |
|
धारा 43 का विषय क्या है? |
दंड। (Penalties) |
|
धारा 43(1) के अंतर्गत मानक किराए से अधिक किराया प्राप्त करने पर क्या दंड है? |
तीन माह तक का साधारण कारावास या मानक किराए से अधिक एक हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों। |
|
धारा 43(1) के अंतर्गत धारा 10 के अधीन निर्धारित किराए से अधिक किराया प्राप्त करने पर क्या दंड है? |
तीन माह तक का साधारण कारावास या मानक किराए से अधिक एक हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों। |
|
धारा 43(1) के अंतर्गत अधिकतम कारावास की अवधि कितनी है? |
तीन माह तक का साधारण कारावास। |
|
धारा 43(1) के अंतर्गत अधिकतम जुर्माना कितना हो सकता है? |
मानक किराए से अधिक एक हजार रुपये तक। |
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धारा 43(2) के अंतर्गत धारा 6(2) या 6(3) का उल्लंघन करने पर क्या दंड है? |
छह माह तक का साधारण कारावास या अवैध प्रभार की राशि या मूल्य से अधिक पाँच हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों। |
|
धारा 43(2) के अंतर्गत अधिकतम कारावास कितना है? |
छह माह तक का साधारण कारावास। |
|
धारा 43(2) के अंतर्गत अधिकतम जुर्माना कितना है? |
अवैध प्रभार की राशि या मूल्य से अधिक पाँच हजार रुपये तक। |
|
धारा 43(3) के अंतर्गत धारा 12(1)(ख) के उल्लंघन में उप-किराए पर देने, सौंपने या कब्ज़ा छोड़ने वाले किरायेदार को क्या दंड है? |
एक हजार रुपये तक का जुर्माना। |
|
धारा 43(3) के अंतर्गत क्या कारावास का प्रावधान है? |
नहीं, केवल एक हजार रुपये तक का जुर्माना। |
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धारा 43(3-क) का विषय किस उल्लंघन से संबंधित है? |
धारा 17(1) या 17(2) के उल्लंघन में पुनः किराए पर देने या हस्तांतरण से। |
|
धारा 43(3-क) के अंतर्गत धारा 17(1) या 17(2) का उल्लंघन करने वाले मकान मालिक को क्या दंड है? |
तीन माह तक का कारावास या एक हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों। |
|
धारा 43(3-क) किस अधिनियम द्वारा जोड़ी गई? |
मध्य प्रदेश अधिनियम 7, 1985 द्वारा। |
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धारा 43(3-क) कब से प्रभावी हुई? |
16 जनवरी, 1985 से। |
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धारा 43(4) के अंतर्गत धारा 23-जी(3) या 23-जी(4) के उल्लंघन में पुनः किराए पर देने या स्थानांतरण करने पर क्या दंड है? |
तीन माह तक का कारावास या एक हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों। |
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धारा 43(4) किस अधिनियम द्वारा प्रतिस्थापित की गई? |
मध्य प्रदेश अधिनियम 27, 1983 द्वारा। |
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धारा 43(4) का प्रतिस्थापन कब से प्रभावी हुआ? |
16 अगस्त, 1983 से। |
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धारा 43(5) के अंतर्गत धारा 38(1) का उल्लंघन करने वाले मकान मालिक को क्या दंड है? |
तीन माह तक का कारावास या एक हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों। |
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धारा 43(6) के अंतर्गत धारा 39(1), धारा 39(2) या धारा 40-ए(2) का उल्लंघन करने पर क्या दंड है? |
तीन माह तक का साधारण कारावास या एक हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों। |
|
धारा 43(6) के अंतर्गत धारा 39(1) के उल्लंघन पर अधिकतम कारावास कितना है? |
तीन माह तक का साधारण कारावास। |
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धारा 43(6) के अंतर्गत धारा 39(2) के उल्लंघन पर अधिकतम जुर्माना कितना है? |
एक हजार रुपये तक। |
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धारा 43(6) के अंतर्गत धारा 40-ए(2) के उल्लंघन पर क्या कारावास और जुर्माने दोनों का प्रावधान है? |
हाँ, तीन माह तक का साधारण कारावास या एक हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों। |
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धारा 44 का विषय क्या है? |
अपराधों का संज्ञान। (Cognizance of offences) |
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धारा 44(1) के अंतर्गत इस अधिनियम के अधीन दंडनीय अपराधों का विचारण कौन-सी न्यूनतम श्रेणी की अदालत कर सकती है? |
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट की अदालत। |
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धारा 44(1) के अंतर्गत क्या प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट से निचली अदालत इस अधिनियम के अपराधों का विचारण कर सकती है? |
नहीं। |
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धारा 44(2) के अंतर्गत इस अधिनियम के अधीन दंडनीय अपराध का संज्ञान लेने के लिए क्या शर्त है? |
अपराध के संबंध में शिकायत अपराध की तारीख से तीन महीने के भीतर की गई हो। |
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धारा 44(2) के अंतर्गत शिकायत कितने समय के भीतर की जानी चाहिए? |
अपराध घटित होने की तारीख से तीन महीने के भीतर। |
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धारा 44(2) के अंतर्गत यदि शिकायत तीन महीने के बाद की जाए तो क्या न्यायालय संज्ञान ले सकता है? |
नहीं। |
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धारा 44(3) के अंतर्गत दंड प्रक्रिया संहिता / भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की किस धारा के बावजूद विशेष प्रावधान किया गया है? |
धारा 32 / धारा 26 के बावजूद। |
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धारा 44(3) के अंतर्गत प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट इस अधिनियम के अधीन दोषसिद्ध व्यक्ति पर क्या दो हजार रुपये से अधिक का जुर्माना लगा सकता है? |
हाँ। |
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धारा 44(3) के अंतर्गत क्या प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट दो हजार रुपये से अधिक का दंड या जुर्माना लगाने के लिए सक्षम है? |
हाँ। |
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अध्याय-VII (CHAPTER-VII) |
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विविध (Miscellaneous) |
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धारा 45 का विषय क्या है? |
कुछ मामलों में सिविल न्यायालयों का अधिकार क्षेत्र वर्जित है। (Jurisdiction of Civil Courts barred in respect of certain matters) |
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धारा 45(1) के अंतर्गत सिविल न्यायालय का अधिकार क्षेत्र किन मामलों में वर्जित है? |
मानक किराया निर्धारण तथा ऐसे अन्य मामलों में जिन पर मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के तहत किराया नियंत्रण प्राधिकरण को निर्णय लेने का अधिकार है। |
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धारा 45(1) के अंतर्गत क्या सिविल न्यायालय मानक किराया निर्धारण संबंधी मुकदमे या कार्यवाही पर विचार कर सकता है? |
नहीं। |
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धारा 45(1) के अंतर्गत किन मामलों का निर्णय किराया नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा? |
ऐसे मामले जिन पर मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के तहत उसे निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त है। |
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धारा 45(1) के अंतर्गत क्या सिविल न्यायालय किराया नियंत्रण प्राधिकरण की कार्यवाही के संबंध में निषेधाज्ञा जारी कर सकता है? |
नहीं। |
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धारा 45(1) के अंतर्गत क्या कोई अन्य प्राधिकरण भी किराया नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा की गई या की जाने वाली कार्रवाई के संबंध में निषेधाज्ञा जारी कर सकता है? |
नहीं। |
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धारा 45(1) के अंतर्गत सिविल न्यायालय का अधिकार क्षेत्र किस अपवाद के अधीन है? |
जहाँ मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 में अन्यथा स्पष्ट रूप से प्रावधान किया गया हो। |
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धारा 45(2) के अंतर्गत क्या सिविल न्यायालय आवास के स्वामित्व से संबंधित विवाद का निर्णय कर सकता है? |
हाँ। |
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धारा 45(2) के अंतर्गत क्या सिविल न्यायालय यह निर्धारित कर सकता है कि आवास के किराए का हकदार कौन है? |
हाँ। |
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धारा 45(2) के अंतर्गत उपधारा (1) का प्रतिबंध किन मामलों पर लागू नहीं होता? |
आवास के स्वामित्व के प्रश्न तथा किराए के हकदार व्यक्ति या व्यक्तियों के संबंध में प्रश्नों पर। |
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धारा 46 का विषय क्या है? |
उल्लंघन के लिए उकसाना उल्लंघन के समान दंडनीय है। (Abetment of contravention punishable as contravention) |
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धारा 46 के अंतर्गत किसी आदेश का उल्लंघन करने का प्रयास करने वाले व्यक्ति के साथ क्या व्यवहार किया जाएगा? |
उसे उस आदेश का उल्लंघन करने वाला माना जाएगा। |
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धारा 46 के अंतर्गत किसी आदेश के उल्लंघन में सहायता करने वाले व्यक्ति के साथ क्या व्यवहार किया जाएगा? |
उसे उस आदेश का उल्लंघन करने वाला माना जाएगा। |
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धारा 46 के अंतर्गत क्या उल्लंघन का प्रयास भी उल्लंघन के समान माना जाता है? |
हाँ। |
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धारा 46 के अंतर्गत क्या उल्लंघन में सहायता करना भी उल्लंघन के समान माना जाता है? |
हाँ। |
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धारा 46 के अंतर्गत यह प्रावधान किन आदेशों पर लागू होता है? |
मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के अंतर्गत पारित या पारित माने जाने वाले किसी भी आदेश पर। |
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धारा 46 के अंतर्गत उल्लंघन का प्रयास करने या उसमें सहायता करने वाले व्यक्ति को किस श्रेणी में माना जाएगा? |
आदेश का उल्लंघन करने वाला व्यक्ति। |
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धारा 47 का विषय क्या है? |
कंपनी, फर्म आदि के मामले में उल्लंघन की देयता। (Liability of contravention in case of company, firm etc.) |
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धारा 47 के अंतर्गत यह प्रावधान किन संस्थाओं पर लागू होता है? |
कंपनी, साझेदारी फर्म या अन्य निगमित निकाय पर। |
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धारा 47 के अंतर्गत यदि कोई कंपनी, साझेदारी फर्म या अन्य निगमित निकाय इस अधिनियम के अंतर्गत जारी आदेश का उल्लंघन करता है, तो कौन दोषी माना जाएगा? |
उसका प्रत्येक निदेशक, साझेदार, प्रबंधक, सचिव, अन्य अधिकारी या एजेंट। |
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धारा 47 के अंतर्गत उल्लंघन किस प्रकार के आदेश का होना चाहिए? |
मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के अंतर्गत जारी किए गए या जारी किए गए माने जाने वाले आदेश का। |
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धारा 47 के अंतर्गत कंपनी के किस-किस पदाधिकारी को उल्लंघन का दोषी माना जा सकता है? |
निदेशक, प्रबंधक, सचिव, अन्य अधिकारी या एजेंट। |
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धारा 47 के अंतर्गत साझेदारी फर्म के किस व्यक्ति को उल्लंघन का दोषी माना जा सकता है? |
प्रत्येक साझेदार। |
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धारा 47 के अंतर्गत क्या एजेंट भी उल्लंघन का दोषी माना जा सकता है? |
हाँ। |
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धारा 47 के अंतर्गत कोई निदेशक, साझेदार, प्रबंधक, सचिव, अधिकारी या एजेंट स्वयं को दायित्व से कैसे मुक्त कर सकता है? |
यह सिद्ध करके कि उल्लंघन उसकी जानकारी के बिना हुआ या उसने उसे रोकने के लिए सभी उचित सावधानी बरती। |
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धारा 47 के अंतर्गत दायित्व से बचने के लिए प्रथम बचाव क्या है? |
उल्लंघन उसकी जानकारी के बिना हुआ था। |
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धारा 47 के अंतर्गत दायित्व से बचने के लिए दूसरा बचाव क्या है? |
उसने उल्लंघन को रोकने के लिए सभी उचित सावधानी बरती थी। |
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धारा 48 का विषय क्या है? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण लोक सेवक होगा। (Rent Controlling Authority to be public servant) |
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धारा 48 के अंतर्गत किन अधिकारियों को लोक सेवक माना जाएगा? |
कलेक्टर, किराया नियंत्रण प्राधिकरण तथा कलेक्टर द्वारा धारा 39(1) के अंतर्गत अधिकृत अधिकारी। |
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धारा 48 के अंतर्गत कलेक्टर द्वारा अधिकृत अधिकारी किस धारा के अंतर्गत अधिकृत होता है? |
धारा 39 की उपधारा (1) के अंतर्गत। |
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धारा 48 को किस अधिनियम द्वारा प्रतिस्थापित किया गया? |
मध्य प्रदेश अधिनियम 10, 1965 की धारा 9 द्वारा। |
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धारा 48 के अनुसार कलेक्टर को किस हैसियत से माना जाएगा? |
लोक सेवक। |
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धारा 48 के अनुसार किराया नियंत्रण प्राधिकरण को किस हैसियत से माना जाएगा? |
लोक सेवक। |
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धारा 48 के अनुसार धारा 39(1) के अंतर्गत अधिकृत अधिकारी को किस हैसियत से माना जाएगा? |
लोक सेवक। |
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धारा 48 के अनुसार भारतीय दंड संहिता, 1860 / भारतीय न्याय संहिता, 2023 की किस धारा के अर्थ में लोक सेवक माना जाएगा? |
धारा 21 / धारा 2(28) के अर्थ में। |
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धारा 49 का विषय क्या है? |
सद्भावना से की गई कार्रवाई का संरक्षण। (Protection of action taken in good faith) |
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धारा 49 के अंतर्गत किन अधिकारियों को सद्भावना से की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण प्राप्त है? |
कलेक्टर, किराया नियंत्रण प्राधिकरण तथा कलेक्टर द्वारा धारा 39(1) के अंतर्गत अधिकृत अधिकारी। |
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धारा 49 के अंतर्गत कलेक्टर द्वारा अधिकृत अधिकारी किस धारा के अंतर्गत अधिकृत होता है? |
धारा 39 की उपधारा (1) के अंतर्गत। |
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धारा 49 को किस अधिनियम द्वारा प्रतिस्थापित किया गया? |
मध्य प्रदेश अधिनियम 10, 1965 की धारा 10 द्वारा। |
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धारा 49 के अंतर्गत किस प्रकार के कार्यों के लिए संरक्षण प्रदान किया गया है? |
मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के अनुसरण में सद्भावपूर्वक किए गए या किए जाने के आशय से किए गए कार्यों के लिए। |
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धारा 49 के अंतर्गत क्या सद्भावपूर्वक किए जाने के आशय से किए गए कार्य भी संरक्षण प्राप्त करते हैं? |
हाँ। |
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धारा 49 के अंतर्गत संरक्षित अधिकारियों के विरुद्ध कौन-सी कानूनी कार्यवाही नहीं की जाएगी? |
मुकदमा, अभियोग या अन्य कानूनी कार्यवाही। |
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धारा 49 के अंतर्गत क्या कलेक्टर के विरुद्ध सद्भावपूर्वक किए गए कार्य के संबंध में मुकदमा चलाया जा सकता है? |
नहीं। |
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धारा 49 के अंतर्गत क्या किराया नियंत्रण प्राधिकरण के विरुद्ध सद्भावपूर्वक किए गए कार्य के संबंध में अभियोग चलाया जा सकता है? |
नहीं। |
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धारा 49 के अंतर्गत क्या धारा 39(1) के अंतर्गत अधिकृत अधिकारी के विरुद्ध सद्भावपूर्वक किए गए कार्य के संबंध में अन्य कानूनी कार्यवाही की जा सकती है? |
नहीं। |
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धारा 50 का विषय क्या है? |
नियम बनाने की शक्ति। (Power to make rules) |
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धारा 50(1) के अंतर्गत नियम बनाने की शक्ति किसके पास है? |
राज्य सरकार के पास। |
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धारा 50(1) के अंतर्गत राज्य सरकार नियम किस माध्यम से बनाएगी? |
राजपत्र में अधिसूचना द्वारा। |
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धारा 50(1) के अंतर्गत नियम किस उद्देश्य से बनाए जा सकते हैं? |
मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए। |
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धारा 50(2) के अनुसार क्या नियम बनाने की शक्ति केवल सूचीबद्ध विषयों तक सीमित है? |
नहीं, विशेष विषयों के अतिरिक्त भी नियम बनाए जा सकते हैं। |
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धारा 50(2)(क) के अंतर्गत नियम किन बातों के लिए बनाए जा सकते हैं? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण को आवेदन के प्रारूप, तरीके और अवधि के लिए। |
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धारा 50(2)(ख) के अंतर्गत नियम किस विषय पर बनाए जा सकते हैं? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा इस अधिनियम के तहत जांच करने की प्रक्रिया पर। |
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धारा 50(2)(ग) के अंतर्गत नियम किस विषय पर बनाए जा सकते हैं? |
किराया नियंत्रण प्राधिकरण में निहित की जाने वाली दीवानी न्यायालय की शक्तियों पर। |
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धारा 50(2)(घ) के अंतर्गत नियम किस विषय पर बनाए जा सकते हैं? |
मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1961 के अंतर्गत नोटिस तामील करने के तरीके पर। |
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धारा 50(2)(ङ) के अंतर्गत नियम किन अन्य विषयों पर बनाए जा सकते हैं? |
ऐसे किसी अन्य मामले पर जिसे निर्धारित किया जाना आवश्यक हो या निर्धारित किया जा सके। |
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धारा 50(3) के अंतर्गत इस धारा के अधीन बनाए गए सभी नियम कहाँ रखे जाएंगे? |
विधानसभा के पटल पर। |
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धारा 51 का विषय क्या है? |
निरसन एवं बचत। (Repeal and savings) |
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धारा 51 के शीर्षक में '52' के स्थान पर '51' किस अधिनियम द्वारा प्रतिस्थापित किया गया? |
मध्य प्रदेश अधिनियम 10, 1965 द्वारा। |
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धारा 51(1) के अंतर्गत कौन-सा अधिनियम निरस्त किया गया है? |
मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1955 (1955 का 23वाँ अधिनियम)। |
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धारा 51(1) के अनुसार मध्य प्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम, 1955 का क्या प्रभाव हुआ? |
उसे निरस्त कर दिया गया। |
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धारा 51(2) के अनुसार निरसन के बावजूद इस अधिनियम के प्रारंभ पर लंबित मुकदमों और कार्यवाहियों का क्या होगा? |
उन्हें निरस्त अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार जारी रखा जाएगा और उनका निपटारा किया जाएगा। |
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धारा 51(2) के अनुसार लंबित मुकदमों और कार्यवाहियों का निपटारा किस प्रकार किया जाएगा? |
मानो निरस्त अधिनियम लागू रहा हो और यह अधिनियम पारित न हुआ हो। |
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धारा 51(2) के अनुसार किन मंचों पर लंबित कार्यवाहियाँ इस बचत प्रावधान के अंतर्गत आती हैं? |
किसी भी न्यायालय या अन्य प्राधिकरण के समक्ष लंबित कार्यवाहियाँ। |
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धारा 51(2) के अनुसार निरस्त अधिनियम के अपील संबंधी प्रावधान किन मामलों में लागू रहेंगे? |
उन मुकदमों और कार्यवाहियों के संबंध में जिनका निपटारा किया जा चुका है। |
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धारा 51(2) के परन्तुक के अनुसार निरस्त अधिनियम की धारा 5(3) के अनुसार कौन-सा शुल्क नहीं काटा जाएगा? |
न्यायालय शुल्क। |
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धारा 51(2) के परन्तुक के अनुसार क्या न्यायालय निरस्त अधिनियम की धारा 5(3) के अनुसार न्यायालय शुल्क काटेगा? |
नहीं। |