संविधियो का निर्वचन (Interpretation of statutes) वन-लाइनर नोट्स

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कानूनों का निर्वचन

INTERPRETATION OF STATUTES

जब दण्ड कानूनों का कठोर अर्थान्वयन किया जाता है, तो इसका किसको लाभ मिलता है?

अभियुक्त को

निर्वचन का सामान्य सिद्धान्त क्या है?

कानून को सम्पूर्ण रूप से पढ़ा जाना चाहिए

अर्थान्वयन अमान्य से मान्य करना अच्छा है (अर्थान्वयन साहचर्येण ज्ञायते)

Noscitur a socitis का अर्थ क्या है?

साहचर्य से जानना

एक्स विस्सेरिबस एक्टस (Ex visceribus actus) का क्या अर्थ है?

 

कानून का निर्वचन अधिनियम के चारों कोनों के बीच ही किया जाना चाहिए

रिष्टि का नियम/अनिष्ट परिहार नियम/सप्रयोजन अर्थान्वयन किस दशा में लागू किया जाता है?

जब कानून के दो अर्थ निकलते हों

निर्वचन का प्रथम सिद्धान्त क्या है?

शाब्दिक (व्याकरणिक) निर्वचन

सर्वाधिक सुरक्षित नियम किस नियम/सिद्धान्त को कहा जाता है?

शाब्दिक निर्वचन को

भविष्यलक्षी प्रत्यादेश का सिद्धान्त (Prospective overruling) किस वाद में प्रतिपादित किया गया था?

गोलक नाथ बनाम पंजाब राज्य

अधिनियम का सार महत्वपूर्ण होता है उसका बाह्य स्वरूप नहीं, किस सिद्धान्त से सम्बन्धित है?

आभासी विधायन से

रिष्टि के नियम का प्रतिपादन सर्वप्रथम कब किया गया था?

हेडले के मामले में

शाब्दिक या व्याकरणिक निर्वचन (litera legis/litera scripta) के सम्बन्ध में क्या न्यायालय को, साम्या, न्याय शुद्धअन्तःकरण के सिद्धान्तों को दृष्टिगत रखते हुए, विधि की भाषा में सुधार, संशोधन या परिवर्तन करने का अधिकार है?

 

नहीं

क्या दाण्डिक विधि के अर्थान्वयन के सम्बन्ध में, दाण्डिक विधान के संदर्भ में अधिकारिता तथा प्रक्रिया के कानून को उदारता से निर्वचन करना चाहियेI

नहीं

जब किसी कानून के एक से अधिक उपबन्ध एक दूसरे के विरुद्ध हो तो न्यायालय उन उपबन्धों का निर्वचन इस प्रकार करने का प्रयास करता है जिससे, यदि सम्भव हो तो, सभी उपबन्धों में सामंजस्य बना रहे एवं कोई उपबन्ध प्रभावहीन हो जाए। यह किस निर्वचन का आधार है?

समन्वयपूर्ण अर्थान्वयन

संशोधन (Amendment) से क्या तात्पर्य है?

संशोधन में संविधि के क्षेत्र में परिवर्तन होता है। इसके उपबंधों का कम या ज्यादा किया जाता है अर्थात् घटाया या जोड़ा जाता है

जब किसी उपबन्ध के दो निर्वाचन सम्भव हो तब न्यायालय को ऐसा अर्थान्वयन करना चाहिये जो उस प्रयोजनार्थ अनुकूल हो, जिसके लिये संविधि का निर्माण किया गया है, कि ऐसा अर्थ ग्रहण करना चाहिये जिससे कि संविधि के प्रयोजन की पूर्ति में रास्ते में रोड़ा अटके, निर्वचन के किस सिद्धान्त से सम्बंधित है?

अमान्य से मान्य करना अच्छा है

(ut res megis valeat quam pareat) से

यदि किसी उपबंध के एक से अधिक अर्थ निकलते हैं तो उस अर्थ को स्वीकार करना चाहिये जो प्रयुक्त शब्दों को प्रभावी बनाये, जबकि निष्प्रभावी बनाने वाले अर्थ को अस्वीकार कर देना चाहिये, निर्वचन के किस सिद्धान्त से सम्बंधित है?

अमान्य से मान्य करना अच्छा है (ut res megis valeat quam pareat) सिद्धान्त से

दोनों अर्थान्वयनों में से जिससे विधायिका के उद्देश्यों की प्राप्ति हो, उसे स्वीकार किया जाना चाहिये, जबकि जिससे उद्देश्यों की प्राप्ति हो उसे अस्वीकार किया जाना चाहिये, निर्वचन के किस सिद्धान्त से सम्बंधित है?

अमान्य से मान्य करना अच्छा है

(ut res megis valeat quam pareat)

जब किसी कानून की भाषा संदिग्ध होने के कारण एक से अधिक अर्थ निकलते हों तो न्यायालय क्या लागू करेगा?

अमान्य से मान्य करना अच्छा है

कर कानून का निर्वचन किस प्रकार करना चाहिये?

कठोरता पूर्वक करना चाहिये

क्या आदेशात्मक संविधियों के निर्देशों का सारवान रूप से अनुपालन कर लेना पर्याप्त होता है?

नहीं

क्या भारत में विधायिका अपने मूलभूत विधायन सम्बन्धी कार्यों को प्रत्यायोजित कर सकती है?

नहीं

क्या हितप्रद संविधियों का कठोर अर्थान्वयन किया जा सकता है?

नहीं

संविधान के निर्वचन में उच्चतम न्यायालय ने किन सिद्धान्तों की चर्चा की है?

सार और मर्म का सिद्धान्त

आभासी विधायन का सिद्धान्त

भविष्यलक्षी प्रत्यादेश का सिद्धान्त

उपचार हेतु जो प्रयोजनप्रद अर्थान्वयन किया जाता है, उसका किससे सम्बन्ध है?

रिष्टि नियम

क्या निरसन का मान्य या अमान्य करना न्यायपालिका के कर्तव्य का ही भाग है?

नहीं

संहिताकारी कानून का क्या तात्पर्य होता है?

किसी विशिष्ट विषय-वस्तु पर सम्पूर्ण कानून की विस्तारपूर्वक अभिव्यक्ति करना, जिसमें पूर्ववर्ती सभी विधिक प्रावधानों एवं विषयों से सम्बन्धित सामान्य कानून के नियमों को सम्मिलित करने का प्रयास प्ररूपकार द्वारा किया जाता है

"एक वस्तु का स्पष्ट उल्लेख दूसरे का अपवर्जन करता है" कौन से सूत्र पर आधारित है?

expressio unius personae vel rei est exclusio alterius

भारत अन्य देशों में नैसर्गिक न्याय के कौन से सूत्र मान्यता प्राप्त कर चुके हैं?

कोई भी व्यक्ति स्वयं अपने मामले में निर्णायक नहीं हो सकता

(nemo judex in causa sua)

दूसरे पक्ष को भी सुनने का अवसर दो

(audi alteram partem)

अधिनियम का सार महत्त्वपूर्ण है उसका बाह्य स्वरूप नहीं, कथन है-

सत्य

 

जहाँ किसी केन्द्रीय अधिनियम का किसी विशिष्ट दिन को प्रवर्तन में आना अभिव्यक्त नहीं है वहाँ वह उस दिन को प्रवर्तन में आयेगा जिस दिन को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त होती है, कथन है-

सत्य

 

यदि विधान प्रत्यक्ष रूप से नहीं बनाया जा सकता तो वह अप्रत्यक्ष रूप से भी नहीं बनाया जा सकता, कथन है-

सत्य

 

उच्चतम न्यायालय द्वारा कौन से मामले में पंथ निरपेक्षता को संविधान की मूल संरचना का अंग माना गया था?

एस० आर० बोम्मई बनाम भारत संघ

भारत के संविधान की उद्देशिका के मूल पाठ का उद्देश्य क्या है?

व्यक्ति की गरिमा, राष्ट्र की एकता और अखण्डता को बनाये रखना

किसका उदार अर्थान्वयन नहीं किया जा सकता है?

असामर्थ्यकारी संविधियों का

निर्देशात्मक संविधि के सम्बन्ध में कौन सा कथन गलत है?

निर्देशात्मक संविधियों की अनुपालना नहीं करने की दशा में केवल अनियमितता होती है बल्कि संविधियां अकृत या शून्य हो जाती हैं

एजुस्डेम जेनेरिस (Ejusdem generis) का अर्थ क्या है?

समान वर्ग या प्रकार का

यदि किसी विधान जिसका साधारण उद्देश्य किसी विशिष्ट कोटि के व्यक्तियों को लाभ पहुँचाता है, जिसमें कोई उपबन्ध अस्पष्ट है जिससे उसके दो अर्थ निकलते हो जिनमें से एक उस हित की रक्षा करेगा और दूसरा उसे नष्ट करेगा तो वह अर्थ जो हित की रक्षा करे ठीक अर्थ है। उच्चतम न्यायालय ने इस हितप्रद अर्थान्वयन की व्याख्या किस मामले में की है?

महादेव लाल बनाम महाप्रशासक पश्चिम बंगाल, AIR 1960 SC 936

निर्देशात्मक संविधियों के उपबंधों का यथावत पालना करना अनिवार्य नहीं होता है, क्योंकि अनुपालन करना वैकल्पिक या विवेकाधीन होता है, निर्देशात्मक संविधि (directory statute) के सम्बन्ध में क्या यह कथन सत्य है?

हाँ

ऐसी संविधियां व्यक्तिगत हितों को समर्थित करती हैं, निर्देशात्मक संविधि (directory statute) के सम्बन्ध में क्या यह कथन सत्य है

हाँ

निर्देशात्मक संविधियों का अनुपालन नहीं करने से दण्ड या शास्ति का प्रावधान नहीं होता है, निर्देशात्मक संविधि (directory statute) के सम्बन्ध में क्या यह कथन सत्य है?

हाँ

जब भाषा संदिग्ध हो, तब क्या निर्वचन के बाह्य सहायकों का प्रयोग किया जाता है?

हाँ

जब अन्य आंतरिक सहायक अर्थ स्पष्ट करने में असफल हो जाते हैं, तब क्या निर्वचन के बाह्य सहायकों का प्रयोग किया जाता है?

हाँ

जब न्यायालयों द्वारा शब्दों का अर्थान्वयन करने में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिये ऐसे सहायकों की मदद ली जाती है जो कानून के शरीर से परे हैं, तब क्या निर्वचन के बाह्य सहायकों का प्रयोग किया जाता है?

हाँ

कानून में प्रयुक्त शब्दों को कुछ रूपान्तरित कर सही अर्थ में जाना जाता है, इसे क्या कहा जाता है?

स्वर्णिम नियम

जब दो या दो से अधिक ऐसे शब्द जिनकें अर्थ सदृश हो, एक साथ प्रयोग किये जाएं तो उन्हें उनके सजातीय अर्थ में समझा जाना चाहिए। यह किस नियम से सम्बन्धित है?

अर्थान्वयन साहयचर्येण ज्ञायते

यदि केन्द्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा निर्मित कानून में अन्तर हैं, क्योंकि संविधान से प्रदत्त किसी अन्य विधायिका के क्षेत्र को आनुषंगिक रूप से स्पर्श कर लिया गया है तो कौन से सिद्धान्त में इसका उपचार उपलब्ध होगा?

सार और मर्म का सिद्धान्त

संविधियों का अर्थान्वयन करने का अधिकार किसको प्राप्त नहीं है?

जाति पंचायतों को

निर्वचन के सहयोगी कौन-कौन होते हैं?

आंतरिक सहयोगी और बाह्य सहयोगी

कम्पनी एक विधिक व्यक्ति है, किस मामले में प्रतिपादित किया गया था?

बंगाल इम्युनिटी कम्पनी लि० बनाम बिहार राज्य इत्यादि,

AIR 1955 SC 661

किसी प्रकरण के निर्णय उल्टे जा सकते हैं, किस मामले में प्रतिपादित किया गया था?

बंगाल इम्युनिटी कम्पनी लि० बनाम बिहार राज्य इत्यादि,

AIR 1955 SC 661

यदि किसी संविधि का कोई भाग असंवैधानिक है तो उसे अवैध घोषित किया जा सकता है, किस मामले में प्रतिपादित किया गया था?

बंगाल इम्युनिटी कम्पनी लि० बनाम बिहार राज्य इत्यादि,

AIR 1955 SC 661

निर्वचन के आंतरिक सहयोगी कौन होते हैं?

संविधि के भीतर की विषय-वस्तु

"विशेष अधिनियमति सामान्य अधिनियमित पर अधिभावी प्रभाव रखती हैं" कौन से सूत्र पर आधारित है?

generalia specialibus non-derogent

दण्ड कानून का क्या प्रभाव होता है?

भविष्यलक्षी

कठोर अर्थान्वयन किस कानून का किया जाता है?

दण्ड कानून

कर कानून

धनीय भार अधिरोपित करने वाले कानून

विधान-मण्डल/संसद द्वारा कार्यपालिका को अपनी विधायी शक्ति प्रत्यायोजित करने का क्या कारण हैं?

विधायिका के पास समय की कमी

विधायिका के पास तकनीकी ज्ञान की कमी

विधि की प्रायोगिकता का परीक्षण

"निर्वचन" (Interpretation) को, प्रचलित भाषा में किस नाम से सम्बोधित किया जाता है?

अर्थान्वय

भारत में प्रत्यायोजित विधान पर नियन्त्रण के बारे में क्या यह कथन सही है, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय अपने आदेश या रिट द्वारा प्रत्यायोजित विधान को शून्य, निष्प्रभावी शक्ति के बाहर (ultra vires) घोषित कर सकती हैं?

हाँ

भारत में प्रत्यायोजित विधान पर नियन्त्रण के बारे में क्या यह कथन सही है, विधायिका को अधिकार प्राप्त है कि वह प्रत्यायोजित विधान को निरसित, स्वीकृत या अस्वीकृत कर सकती हैं। लेकिन विधायिका को समयाभाव के कारण प्रत्यायोजित विधान पर विचार करने का अवसर नहीं मिलता है?

हाँ

भारत में प्रत्यायोजित विधान पर नियन्त्रण के बारे में क्या यह कथन सही है, कुछ हद तक, प्रत्यायोजित विधान के दोषों और त्रुटियों पर लोकमत, विशेषज्ञों की राय और मिडिया के प्रसार-प्रचार द्वारा भी नियन्त्रण रखा जा सकता है?

हाँ

"साहचर्य से अर्थ जानना" कौन से सूत्र पर आधारित है?

noscitur a sociis

निर्वचन के क्षेत्र में विदेशी निर्णय की सहायता कब ली जा सकती है?

जब विदेशी निर्णय, भारत के वर्तमान कानून के विरुद्ध हो

जब विदेश का न्यायिक प्रशासन और विधिक व्यवस्था भारत के समरूप हो

जब विदेशी निर्णय अन्तर्राष्ट्रीय विधि ओर प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्तों के विरुद्ध हो

उस केन्द्रीय अधिनियम का क्या नाम है, जिसमें शब्दों, वाक्यों, खण्डों को परिभाषित किया गया है?

साधारण खण्ड अधिनियम, 1897

शब्दों का उनका साधारण एवं स्वाभाविक अर्थ प्रदान किया जाये, किस निर्वचन का सामान्य सिद्धान्त है?

व्याकरणिक निर्वचन

दाण्डिक विधि की व्याख्या की कठोरता सर्वाधिक इस बात पर निर्भर करती है कि वह कानून कितना कठोर है।" यह सूत्र किसके द्वारा प्रतिप्रादित किया गया था?

मैक्सवैल

'अवधि' के संदर्भ में, संविधियों को कितने वर्गों में विभक्त किया जा सकता है?

अस्थायी एवं स्थायी विधि

कौन सा नियम अधिनियम के सारी अस्पष्टता/समस्याओं को समाधान करती है?

स्वर्णिम नियम

निर्वचन के आन्तरिक सहयोगी नहीं है-

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

निर्वचन के बाह्य सहयोगी हैं-

पाठ्य-पुस्तकें

वसीयत का निर्वचन करते समय किस नियम को दृष्टिगत नहीं रखा जाना चाहिये?

वसीयत स्टाम्पयुक्त रजिस्टर्ड होनी आवश्यक है

जब किसी भी उपबन्ध के एक से अधिक अर्थ प्रतीत होते हैं तो वह जो सन्तुलित एवं विवेकी है, प्रभावी होगा, कौन से निर्वचन सम्बन्धित है?

स्वर्णिम नियम

क्या न्यायालयों को संविधियों में कमियों की पूर्ति करने का अधिकार नहीं है?

नहीं, न्यायालयों का कार्य संविधियों में कमियों की पूर्ति करना नहीं है, बल्कि उनका निर्वचन करना है

न्यायालय का कार्यक्षेत्र विधि का अर्थान्वयन करना है कि विधि का निर्माण करना, क्या यह कथन सत्य है?

हाँ

जैसी भी विधि हैं, न्यायाधीशों को उसके अनुरूप ही निर्वचन करना चाहिये, क्या वे अपेक्षाकृत बेहतर विधि की रचना नहीं कर सकते?

नहीं

आज्ञापक उपबंध किसे कहते हैं?

ऐसा विधिक उपबंध जिसकी पालना करनी आबद्धकारी हो

संविधान के निर्वचन के लिए सामान्य नियम क्या है?

वही है जो अन्य कानूनों के लिए है

संविधान का अर्थान्वयन किस प्रकार किया जाना चाहिए?

जिससे अधिकतम सम्भावित हित प्राप्त किया जा सके

आधारभूत ढांचे का सिद्धान्त किस मामले में प्रतिपादित किया गया था?

केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य

सजाति अर्थान्वयन (ejusdem generis) का सूत्र किस नियम से सम्बन्धित है?

शाब्दिक अर्थान्वयन

क्या उदार निर्वचन (liberal interpretation) के सम्बन्ध में, संविधि के आशय/उद्देश्य/प्रयोजन/लोकहित पर ही अधिक ध्यान दिया जाता है। जबकि इसके शब्दों और भाषा को कोई महत्व नहीं दिया जाता है?

कथन असत्य हैI

प्रत्यायोजित विधायन पर भारत के उच्चतम न्यायालय का सर्वप्रथम प्रकरण कौन सा है?

इन रि दिल्ली लॉज मामला,

AIR 1951 SC 352

वसीयत/इच्छा-पत्र (Will) का निर्वचन करते समय किस नियम को दृष्टिगत रखा जायेगा?

वसीयत का अर्थान्वयन सम्पूर्ण वसीयत के सभी उपबन्धों को महत्व देते हुए किया जाना चाहिये

वसीयतकर्ता का वास्तविक आशय क्या था

वसीयत के विषयों और उद्देश्यों का अर्थ खोजना चाहियेI

"जब किसी अभिव्यक्ति के अर्थ में कोई संदिग्धता हो तो उसका अर्थ सुनिश्चित करते समय समान विषय-वस्तु से सम्बन्धित पूर्व की किसी संविधि में प्रयुक्त कोई विशिष्ट अभिव्यक्ति से निदेश या संकेत प्राप्त किया जा सकता है।" कौन से सूत्र पर आधारित है?

Statutes in pari materia

प्रत्यायोजित विधायन की शक्ति प्राप्त हो जाने पर किसके द्वारा प्रत्यायोजित विधान निर्मित किया जा सकता है?

सरकार

प्रशासनिक अधिकारीगण

प्राधिकरण

क्या भारत में प्रत्यायोजित विधान पर कार्यपालिका का प्रभावी नियन्त्रण है?

नहीं

क्या भारत में प्रत्यायोजित विधान पर न्यायपालिका का प्रभावी नियन्त्रण है?

हाँ

क्या भारत की विधायिका अपने आधारभूत कार्यों को कार्यपालिका को प्रत्यायोजित करने में सक्षम है?

नहीं

क्या मूल अधिनियम का प्रत्यायोजित खण्ड वैध होना चाहिये तथा प्रत्यायोजित विधायन भी प्रत्यायोजित खण्ड संविधान के अनुकूल होना चाहिये?

हाँ

क्या न्यायालय द्वारा संविधान के किसी उपबंध को असंवैधानिक घोषित किया जा सकता है?

जी नहीं

"जब तक किसी अपराध के बारे में पहले से ही कोई विधि अस्तित्व में नहीं हो तो उस अपराध को दण्डनीय नहीं माना जा सकता है" कौन से सूत्र पर आधारित है?

nallum crimen sine lege, nulla pone sine lege

"तत्कालीन व्याख्या सर्वोत्तम एवं प्रभावी होती है" कौन से सूत्र पर आधारित है?

contemporanea expositio optima et fortissima in leg

यदि किसी संविधि की भाषा से एक से अधिक अर्थ निकलते हों तो कौन से प्रवर्तन/प्रभाव वाला अर्थान्वयन किया जाना चाहिये?

जब तक कि किसी संविधि में विनिर्दिष्टतः/आवश्यक विवक्षित रूप से भूतलक्षी प्रभाव देने का उपबंधित नहीं किया गया हो तब तक उसे भविष्यलक्षी प्रवर्तन होने वाली संविधि ही माना जाना चाहिये

न्याय हित में, न्यायालयों को सशक्त किया गया हैं कि वे कानून में रह गयी कमियों की पूर्ति कर सकते हैं, क्या कर-कानून के निर्वचन के सिद्धान्त के संदर्भ में, यह कथन सत्य है?

नहीं

क्या करारोपण कानून का अर्थान्वयन ऐसे कानून की शब्दावली के अनुरूप अक्षरशः किया जाना चाहिये?

हाँ

क्या यदि कानून की भाषा स्पष्ट हो तो परिणामों की परवाह करते हुए शब्दों को प्रभाव देना चाहिये?

हाँ

जब किसी संविधि के दो उपबंधों में सामंजस्य हो तो उनका अर्थान्वयन कौन से नियम से किया जायेगा?

स्वर्णिम नियम अर्थान्वयन

किस कानून का प्रभाव भूतलक्षी हो सकता है?

प्रक्रिया सम्बन्धी कानून

प्रत्यायोजित विधायन के द्वारा निर्मित किये जा सकते हैं:

नियम

विनियम

आदेश, स्कीम एवं अधिसूचना

यदि राजस्थान राज्य में शब्दों, वाक्य और खण्डों को परिभाषित करने वाला कोई अधिनियम हैं तो उसका नाम क्या है?

राजस्थान साधारण खण्ड अधिनियम, 1955

संविधान के निर्वचन के सम्बन्ध में इस बात को दृष्टिगत रखना चाहिये कि, संविधान का प्रत्येक शब्द संवैधानिक हैं क्या यह कथन सत्य है?

हाँ

संविधान के निर्वचन के सम्बन्ध में इस बात को दृष्टिगत रखना चाहिये कि, संविधान के शब्दों की परिधि के भीतर, इसके उपबन्धों का अर्थान्वयन सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों को मूर्तरूप देने के लिये इनमें आये परिवर्तन को दृष्टिगत रखते हुए करना चाहिये क्या यह कथन सत्य है?

हाँ

संविधान के निर्वचन के सम्बन्ध में इस बात को दृष्टिगत रखना चाहिये कि, मूल अधिकारों और विधायी प्रविष्टियों का अर्थान्वयन इनके अधिकारधारीगण के पक्ष में, विस्तृत और उदार दृष्टिकोण अपनाते हुए करना चाहिये क्या यह कथन सत्य है?

हाँ

हैडन के प्रकरण में अर्थान्वयन के कौन से नियम को प्रतिपादित किया गया है?

रिष्टि नियम अथवा दोष परिहार नियम

संसद या विधान-मण्डल द्वारा कार्यपालिका को अपनी विधायी शक्ति प्रत्यायोजित करना क्या कहलाता है?

प्रत्यायोजित विधान

निर्वचन के आन्तरिक सहयोगी कौन है?

उद्देशिका

परिभाषा

परन्तुक

विधायिका द्वारा निर्मित संविधियों का:

भूतलक्षी और भविष्यलक्षी प्रभाव होता है

संविधान का निर्वचन करते समय इस बात को ध्यान में रखना चाहिये कि: समाजवादी लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना के लिये नीति-निदेशक तत्वों के अनुरूप ही निर्वचन करना चाहिये, जिससे कि मूल अधिकारों अन्य अधिकारों के बीच टकराव हो, क्या यह कथन सत्य है?

हाँ

संविधान का निर्वचन करते समय इस बात को ध्यान में रखना चाहिये कि यद्यपि नीति-निर्देशक तत्वों को महत्व दिया जाना चाहिये, तथापि ऐसा करने से मूल अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिये, क्या यह कथन सत्य है?

हाँ

संविधान का निर्वचन करते समय इस बात को ध्यान में रखना चाहिये कि मूल अधिकार न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय हैं, जबकि नीति निर्देशक तत्व प्रवर्तनीय नहीं हैं, क्या यह कथन सत्य है?

हाँ

सजाति अर्थान्वयन (ejusdem generis) की आवश्यक शर्तें क्या हैं?

संविधि में विशिष्ट शब्दों के समूह का प्रगणन किया जाता है

सामान्य शब्द विशिष्ट शब्दों का अनुसरण करते हैं

विधायिका का आशय सामान्य शब्दों को व्यापक अर्थ प्रदान करने का नहीं हो

यद्यपि संविधान के शब्दों का निर्वचन समान सिद्धान्तों के अनुसार किया जाना चाहिये जो साधारण संविधियों पर लागू किये जाते हैं, फिर भी इस बात को सदैव याद रखना चाहिये, कि संविधान एक ऐसी विरचना है जिसके अन्तर्गत समस्त विधियों का निर्माण किया जाता है, किस मामले में कहा गया?

ए० के० गोपालन बनाम मद्रास राज्य,

ए० आई० आर० 1950 उच्चतम न्यायालय 27

पूर्व निर्णयानुसरण (stare decisis) का क्या अभिप्राय है?

पूर्व निर्णयों का आबद्धकारी प्रभाव

सारवान विधि (उदाहरणार्थ भारतीय न्याय संहिता, 2023) के सम्बन्ध में, कौन सा कथन गलत हो सकता है?

सामान्यतः इसका भूतलक्षी प्रवर्तन हो सकता है

कोई भी व्यक्ति विधि के ऊपर नहीं है" किस अनुच्छेद में निहित है?

अनुच्छेद 14

संविधान का "मूल ढाँचा" के सिद्धान्त का प्रतिपादन सर्वप्रथम किस मामले में किया गया था?

केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य

उच्चतम न्यायालय द्वारा अपने किस निर्णय में यह अभिनिर्धारित किया गया कि आयकर अधिनियम, 1922 तथा असम कृषि आयकर अधिनियम, 1939 साम्य विषय-वस्तु के होने से धारा 19 को निर्वाचित करने के लिये पूर्व की धारा 22 से सहायता प्राप्त की जा सकती हैं।

असम राज्य बनाम पी० बड्डुआ,

AIR 1969 SC 831

संविधियों के साधारण नियम के अनुसार, न्यायालयों को संविधियों की निर्वचन शाब्दिक/व्याकरणिक निर्वचन से करनी चाहिये। लेकिन, किन परिस्थितियों में निर्वचन के "स्वर्णिम नियम" को प्रयुक्त किया जा सकता है?

जब संविधि में अर्थ आधारित त्रुटि हो, या

जब संविधि के मूल पाठ से ऐसा अयुक्तियुक्त, असंगत या अर्थहीन परिणाम निकले, या

जब कोई असंगति, निरर्थकता, अस्पष्टता, अयुक्तियुक्तता या अन्याय होता हो या अमुक प्रावधान के एक से अधिक अर्थ निकलते हो

विधि के निरसन का क्या तात्पर्य है?

वह विधि अस्तित्व में नहीं रही

सामंजस्यपूर्ण/समन्वयपूर्ण अर्थान्वयन (Harmo-nious Construction) कौन से प्रसिद्ध सूत्र पर आधारित हैं?

विधायिका का आशय स्वयं को ही खण्डित करने का नहीं है

प्रत्यायोजित विधायन किस किस्म का विधायन है?

कार्यपालिकीय विधायन

भारत में संविधान के अधीन, संविधियों का निर्वचन कौन कर सकता है?

सक्षम न्यायालय

संशोधनकारी कानून में विधायिका द्वारा पूर्व अथवा वर्तमान कानून में कोई उपबंध-

जोड़ा या निकाला जा सकता है

परिवर्तित या परिवर्धित किया जा सकता है

सौजन्यपूर्ण/समन्वयपूर्ण अर्थान्वयन के सम्बन्ध में, संविधि का अर्थान्वयन इस प्रकार से किया जाना चाहिये कि यथासम्भव सभी उपबंधों में सामंजस्य बना रहे उनमें परस्पर टकराव हो क्या यह कथन सत्य है?

हाँ

सौजन्यपूर्ण/समन्वयपूर्ण अर्थान्वयन के सम्बन्ध में, संविधि का अर्थान्वयन इस प्रकार से करना चाहिये कि कोई भी उपबंध निरर्थक अथवा प्रभावहीन हो क्या यह कथन सत्य है?

हाँ

सौजन्यपूर्ण/समन्वयपूर्ण अर्थान्वयन के सम्बन्ध में, संविधि के प्रत्येक उपबंध को इस रूप में पढ़ा जाना चाहिये कि विभिन्न उपबंध एक दूसरे पर निर्भर हैं क्या यह कथन सत्य है?

हाँ

सौजन्यपूर्ण/समन्वयपूर्ण अर्थान्वयन के सम्बन्ध में संविधि का अर्थान्वयन करते समय इस बात को दृष्टिगत रखना चाहिये कि समरूप अभिव्यक्तियां समान अर्थ रखती है क्या यह कथन सत्य है?

नहीं

संविधान की उद्देशिका उसके निर्माताओं के आशय की कुंजी है-

सत्य है

जब संविधान के शब्द संदिग्ध हो या एक से अधिक अर्थ देने वाले हो तब अर्थान्वयन के प्रयोजनार्थ उद्देशिका के प्रति निर्देश किया जा सकता है-

सत्य है

जब संविधान के अनुच्छेदों की भाषा स्पष्ट और असंदिग्ध हो तब उद्देशिका की आङ ले कर अनुच्छेदों की शब्दावली पर कोई मुलम्मा नहीं चढ़ाया जा सकता है-

सत्य है

कर विधि का निर्वचन किस विधि की तरह होता है?

श्रम विधि की तरह

"न्यायाधीशों का कार्य विधि की घोषणा करना है कि विधि की रचना", कौन-से सिद्धान्त पर आधारित है?

casus omisus

क्या भारत में अध्यादेश भी सविधि की परिधि में आते हैं?

हाँ

प्रक्रियात्मक विधि के सन्दर्भ में कौन-सा कथन सत्य है?

प्रक्रियात्मक विधि, सारवान विधि को प्रवृत्त करती है

इसका भूतलक्षी प्रवर्तन हो सकता है

निर्वचन की सीमाओं के सम्बन्ध में न्यायालय संविधियों के किसी भी उपबंध में परिवर्तन, आधुनिकीकरण या सुधार नहीं कर सकता है क्या यह कथन सत्य है?

हाँ

निर्वचन की सीमाओं के सम्बन्ध में क्या न्यायालय विधायिका के तीसरे सदन के रूप में कार्य नहीं कर सकता है क्या यह कथन सत्य है?

हाँ

न्यायालय विधायिका की दोषपूर्ण अभिव्यक्ति का सुधार नहीं कर सकता है क्या यह कथन सत्य है?

हाँ

निर्वचन की सीमाओं के सम्बन्ध में, कौन सा कथन गलत है?

निर्वचन के माध्यम से, जन कल्याण को दृष्टिगत रखते हुए, न्यायाधीश विधि की पुनः रचना कर सकता है

सौजन्यपूर्ण निर्वचन या समन्वयपूर्ण अर्थान्वयन (Harmonious construction) के सम्बन्ध में जब किसी संविधि के दो या अधिक उपबंधों में सामंजस्य नहीं हो क्या  तब समन्वयपूर्ण अर्थान्वयन किया जाता है?

हाँ

सौजन्यपूर्ण निर्वचन या समन्वयपूर्ण अर्थान्वयन (Harmonious construction) के सम्बन्ध में क्या इसे सुसंगत बनाने के प्रयोजनार्थ संविधि के एक उपबंध का अर्थ उसी संविधि के दूसरे उपबंध के संदर्भ में अर्थान्वयन किया जाना चाहिये?

हाँ

सौजन्यपूर्ण निर्वचन या समन्वयपूर्ण अर्थान्वयन (Harmonious construction) के सम्बन्ध में क्या किसी संविधि में विभिन्न प्रावधानों का सही अर्थान्वयन करने के लिये उस संविधि को समग्रतः पढ़ा जाना चाहिए?

हाँ

"संसद द्वारा निर्मित विधियों और राज्य के विधान-मण्डलों द्वारा निर्मित विधियों में असंगति होने की दशा में संसद द्वारा निर्मित विधि अभिभावी होगी" के सूत्र के आधार पर न्यायालयों द्वारा कौन-सा सिद्धान्त स्थापित किया गया है?

ग्रहण या आच्छादन का सिद्धान्त

संविधियों के निर्वचन से सम्बन्धित उपधारणाएं कौन सी हैं?

न्यायालयों की स्थापित अधिकारिता को वंचित करने, नवीन सृष्टि करने एवं विस्तारित करने के विरुद्ध उपधारणा,

अन्तर्राष्ट्रीय विधि के अतिक्रमण के विरुद्ध उपधारणा,

कानून द्वारा राज्य क्षेत्रातीत प्रवर्तन के विरुद्ध उपधारणा

संशोधन विधि किसे कहते हैं?

ऐसी विधि जो किसी विधि के विद्यमान उपबन्धों को परिवर्तित, उपान्तरित, प्रतिस्थापित, जोड़ने, घटाने, हटाने या लोपित करने का प्रभाव रखती है

कौन से लीडिंग केस में भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा यह अभिनिर्णीत किया गया कि मूल अधिकार सहित संविधान के किसी भी प्रावधान का संशोधन संसद द्वारा भारत के संविधान के अनुच्छेद 368 के द्वारा प्रदत्त संशोधन की शक्ति के अधीन किया जा सकता है, परन्तु ऐसे संशोधन "संविधान के मौलिक ढांचे" (basic structure of the Constitution) को स्पर्श या प्रभावित नहीं कर सकते हैं?

केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य,

ए० आई० आर० 1973 SC 1461

'Delegatus non potest delegare' का क्या अभिप्राय है?

प्रत्यायोजित शक्ति को आगे और प्रत्यायोजित नहीं किया जा सकता है

दाण्डिक विधि के सम्बन्ध में क्या  दाण्डिक अपराध को अभियुक्त के विरुद्ध साबित करने का भार लोक अभियोजक पर होता है?

हाँ

 

दाण्डिक विधि के सम्बन्ध में क्या  सन्देह का लाभ अभियुक्त को दिया जाता है?

हाँ

दाण्डिक विधि के सम्बन्ध में क्या  इसका अर्थान्वयन कठोरता से किया जाना चाहिये और शब्दावली की अक्षरशः व्याख्या की जानी चाहिये?

हाँ

दाण्डिक विधि के सम्बन्ध में क्या  दाण्डिक विधि भूतलक्षी होकर, भविष्यलक्षी होनी चाहिये?

हाँ

संहिताकारक विधि का क्या अभिप्राय है?

ऐसी विधि जो किसी विशिष्ट विषय-वस्तु पर सम्पूर्ण विधिक प्रावधानों की विस्तारपूर्वक अभिव्यक्ति करती हैं

निर्वचन करने का उद्देश्य क्या होता है?

विधायिका का आशय ज्ञात करना

संविधि का निर्वचन किसे कहते हैं?

संविधि के शब्दों को उनका स्वाभाविक और साधारण अर्थ दिया जाना

विधान-मण्डल/संसद द्वारा कार्यपालिका को अपनी विधायी शक्ति प्रत्यायोजित करने के सम्बन्ध में कौन-सा कारण नहीं है?

नौकरशाही की दक्षता का परीक्षण

संविधान के निर्वचन के सम्बन्ध में कौन-सा कथन गलत है?

संवैधानिक सिद्धान्तों को सर्वोच्च मान्यता देने के प्रयोजन से उसकी शब्दावली को तोड़ा-मरोड़ा जा सकता हैI

क्या संविधान के निर्वचन के सम्बन्ध में संविधान का संकुचित या पांडित्यपूर्ण निर्वचन नहीं किया जाना चाहिये, बल्कि न्यायालयों द्वारा व्यापक ओर उदारवादी दृष्टिकोण रखना चाहिये?

हाँ

क्या संविधान के निर्वचन के सम्बन्ध में संविधान एक जीवन्त विधि होने के कारण लचीलापन एवं अनुकूलीकरण इसकी जीवन्तता के मुख्य आधार हैं?

हाँ

क्या संविधान के निर्वचन के सम्बन्ध में यदि संविधान के उपबंधों के एक से अधिक युक्तियुक्त अर्थ निकलते हों तो ऐसे अर्थ वाले अर्थान्वयन को स्वीकार किया जाना चाहिये जिससे संविधान की सार्थकता सुनिश्चित हो?

हाँ

क्या संविधान के निर्वचन के सम्बन्ध में संविधान निर्माताओं के आशय को संविधान में प्रयुक्त उपबंधों की शब्दावली में ही ढूंढ़ना चाहिए?

हाँ

नागरिक विधि एवं अन्तर्राष्ट्रीय विधि के मध्य विरोधाभास या असंगति हो तो न्यायालयों द्वारा कौन सी विधि प्रवृत्त की जानी चाहिये?

नागरिक विधि

"विधि निकट के हेतुक पर ध्यान देती हैं, दूर के हेतुक पर नहीं" कौन से सूत्र पर आधारित हैं?

In jure non remota causa sed proxima spectatur

निर्वचन के प्रकार हैं:

शाब्दिक निर्वचन

(litra legis)

उद्देश्यपूर्ण या तार्किक निर्वचन

(sententia legis)

"तथ्यों का ज्ञान नहीं होना तो क्षम्य हैं लेकिन कानून के ज्ञान से अनभिज्ञा होना क्षम्य नहीं है" कौन से सूत्र पर आधारित है?

"Ignorantia facti excusat, ignorantia juris non excusat"

न्यायिक पूर्वनिर्णयों का:

भूतलक्षी प्रभाव होता है

संविधियों के निर्वचन के "बाह्य सहयोगी" कौन हैं?

शब्द-कोश

पाठ्ध-पुस्तकें

इतिहास ऐतिहासिक पृष्ठिभूमि

निर्वचन का मुख्य सिद्धान्त क्या है?

शाब्दिक या व्याकरणिक निर्वचन

कौन सी विधियों का निर्वचन किया जा सकता है?

अधिनियम एवं अध्यादेश

नियम, उप-नियम विनियम

उपविधि, अधिसूचना, आदेश, जिसे विधिक शक्तियां प्रदत्त हों

'ढंग' (method) के साधन में संविधियों को कितने वर्गों में विभक्त किया जा सकता है?

आज्ञापक,

आदेशात्मक या बाध्यकर, एवं

निदेशात्मक या अनुमतिबोधक विधि

"जिसे किसी कानून, विनियमन या अनुबंध में स्पष्ट रूप से संबोधित या प्रावधानित नहीं किया गया है।, बल्कि उनका निर्वचन करना है" कौन से सूत्र पर आधारित हैं?

casus omissus

"आभासी विधान" (Colourble Legislation) के सिद्धान्त से क्या तात्पर्य है?

यदि विधायिका ऐसी परवर्ती विषय-वस्तु पर किसी विधान का निर्माण करती हैं जो उसकी विधायी शक्ति से बाहर है तो अपनी संवैधानिक शक्तियों का अतिक्रमण करके, प्रत्यक्ष, परोक्ष, छद्म अथवा गुप्त तरीके से भी ऐसा नहीं कर सकती हैं

"कानून का निर्वचन संविधि के चारों कोनों के बीच (ex visceribus actus) ही किया जाना चाहिये" के सम्बन्ध में, कौन सा कथन सत्य है?

 

संविधि के किसी भी उपबंध का एकाकीपन में अर्थान्वयन नहीं करना चाहिये

 

विधायिका की किसी विशिष्ट अभिव्यक्ति का निर्वचन उसके संदर्भ से पृथक करके नहीं किया जाना चाहिये एवं इसके समग्र भागों से प्राप्त विधायिका के आशय को महत्व देना चाहिये क्या यह कथन सत्य है?

हाँ

संविधि के उद्देश्य अथवा आत्मा को महत्व देना चाहिये, लेकिन उसे संविधि में उपबंधित भाषा में ढूंढ़ना चाहिये क्या यह कथन सत्य है?

हाँ

भविष्यलक्षी प्रत्यादेश/भविष्यगामी विनिर्णय का 1 सिद्धान्त कौन से मामले में प्राधिकारिक रूप से उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित किया गया था?

आई० सी० गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य,

ए० आई० आर० 1967 SC 1643

उच्चतम न्यायालय द्वारा कौन से मामले मे यह अभिनिर्धारित किया गया था कि संसद मूल अधिकारों में परिवर्तन नहीं कर सकती है?

आई० सी० गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य,

ए० आई० आर० 1967 SC 1643

"भूतलक्षी प्रवर्तन के विरुद्ध अवधारणा" किस किस्म की संविधियों पर लागू नहीं होती हैं?

साक्ष्य अथवा प्रक्रिया सम्बन्धी संविधियों पर लागू नहीं होती हैं, जब तक कि ऐसा स्पष्ट संकेत हो कि विधायिका का ऐसा आशय नहीं था

..............ऐसा कानून है जो विशिष्ट विषय-वस्तु पर सम्पूर्ण विधिक उपबंधों का एक स्थान पर, आवश्यकता होने पर गौण संशोधन एवं सुधार के रूप में, एक संविधि में एकत्रित करना है-

समेकनकारी कानून

क्या किसी संविधि को संक्षिप्त नाम देना और संविधि की उद्देशिका उल्लेखित करना आवश्यक है?

जी हाँ, आवश्यक है

क्या न्यायालयों को संविधियों की कमियों की पूर्ति करने का अधिकार है?

नहीं

किस न्याय निर्णय में किसमें यह मार्गदर्शन दिया गया है कि प्रत्यायोजित शक्ति को आगे और प्रत्यायोजन नहीं किया जा सकता है?

सम्राट बनाम बनवारीलाल शर्मा,

1945 AC 14 (24) PC

न्यायालयों द्वारा संविधान का अर्थान्वयन करते समय कौन-कौन से सिद्धान्तों को दृष्टिगत रखना चाहिये?

आभासी विधान, ग्रहण(आच्छादन);

सार और मर्म, एवं पृथक्करण के सिद्धान्त

विवक्षित शक्तियों, विवक्षित प्रतिषेध एवं आनुषंगिक या प्रासंगिक शक्तियों के सिद्धान्त

दखलकृत क्षेत्र, राज्यक्षेत्रीय सम्बन्धः एवं भविष्यलक्षी प्रत्यादेश के सिद्धान्त

किसी संविधि/अधिनियम की उद्देशिका (preamble) का क्या अभिप्राय है?

संविधि/अधिनियम के प्रमुख उद्देश्यों का वर्णन

विधायिका के मस्तिष्क को खोलने की चाबी

निर्वचन की आंतरिक सहयोगी है, बशर्ते कि संविधि/अधिनियम की भाषा अस्पष्ट संदिग्ध हो

कर विधि के कठोर निर्वचन का नियम किस किस्म का है?

अनुल्लंघनीय नियम

आदेशात्मक संविधि (mandatory statute) के सम्बन्ध में कौन सा कथन सही हैं?

आदेशात्मक संविधियों के उपबंधों की यथावत् पालना अनिवार्य हैं, क्योंकि अनुपालना करने हेतु विधिक बाध्यता है

अनुपालना नहीं करने की दशा में सामान्यतः दण्ड  या शास्ति का प्रावधान होता है

ऐसी संविधियों के उल्लंघन करने से अन्याय और बिधि-विरुद्धता होती है

पूर्व निर्णयानुसरण (stare decisis) का अभिप्राय है:

पूर्ण निर्णयों का आबद्धकारी प्रभाव

किस न्याय निर्णय में अभिनिर्धारित किया गया है कि प्रत्यायोजित विधान-शक्ति का धारणकर्ता व्यक्ति या निकाय अपनी इस शक्ति को आगे और उप-प्रत्यायोजित करता है तो यह कृत्य उसकी प्राधिकार की सीमा का उल्लंघन होने के परिणामस्वरूप अविधिमान्य होगा?

बेनेट कोलमेन बनाम भारत संघ,

AIR 1973 SC 106

कौन से लीडिंग केस में यह प्रतिपादित किया गया था कि संसद को मूल अधिकारों में कमी करने का कोई अधिकार नहीं है?

मिनर्वा मिल्स लि० बनाम भारत संघ

रिष्टि के नियम का प्रतिपादन सन् 1584 में हैडन के प्रकरण में कहाँ पर किया गया था?

इंग्लैण्ड

शीर्षक के सम्बन्ध में कौन सा कथन सही हैं?

लघु शीर्षक में किसी अधिनियम की पहचान के लिये इसका नाम मात्र होता है जिसके अन्त में इसे पारित करने का वर्ष भी जोड़ा जाता है,

दीर्घ शीर्षक में ऐसे अधिनियम के पश्चात् इसके उद्देश्यों की सामान्य जानकारी दी जाती हैं

प्रत्यायोजित विधान में किसके द्वारा अपनी विधायी शक्ति कार्यपालिका को प्रत्यायोजित की जाती हैं?

संसद, या

विधान सभा, या

विधान मण्डल

जहाँ वसीयतकर्ता का आशय एक निरपेक्ष सम्पदा का अनुदान करने का है, वहाँ उस सम्पत्ति के स्वामी द्वारा लगाया गया यह प्रतिबंध कि उस सम्पत्ति का विदेशीकरण नहीं किया जायेगा, हालांकि इसको प्रतिकूलता के आधार पर निरसित किया जा सकता है, परन्तु जब प्रतिबन्ध ही वसीयतकर्ता की प्राथमिक शर्त है और जो वसीयत की पूर्णता का द्योतक है तो सम्पत्ति के स्वामी की इच्छा को वेधता का प्रभाव दिया जायेगा। उच्चतम न्यायालय द्वारा उपरोक्त मार्गदर्शन कौन से मामले में दिया गया था?

राज बजरंग बहादुर सिंह बनाम ठकुराइन भक्तराज कौर, 1953 S.C.R. 232

कौन से कानून/संविधि को भूतलक्षी प्रभाव नहीं दिया जा सकता है?

दाण्डिक और कर कानून

क्या व्यावृत्ति खण्ड संविधियों के निर्वचन के "आंतरिक सहयोगी" हैं?

हाँ

क्या अनुसूची संविधियों के निर्वचन के "आंतरिक सहयोगी" हैं?

हाँ

क्या विधायी इतिहास संविधियों के निर्वचन के "आंतरिक सहयोगी" हैं?

नहीं

संविधि किसे कहते हैं?

विधायिका द्वारा निर्मित लिखित कानून

कर विधि और दाण्डिक विधि से सम्बन्धित कौन सी आधारभूत बात है?

भविष्यलक्षी होनी चाहिये

प्राचीन विलेखों/दस्तावेजों के निर्वचन के सम्बन्ध में,  कौन सा कथन गलत हैं?

निर्वचन करते समय वर्तमान शब्दावली के अर्थों में अर्थान्वयन किया जाना चाहिये

सम्पूर्ण विधि को एक साथ पढ़ना, समरूप अभिव्यक्तियों का समान अर्थ होना, अमान्य से मान्य करने का अर्थान्वयन करना बेहतर, स्वर्णित नियम, एवं रिष्टि या अनिष्ट परिहार नियम क्या कहलाता है?

संविधि के तार्किक निर्वचन सिद्धान्त/नियम

समन्वयपूर्ण/सामंजस्यपूर्ण अर्थान्वयन; सजाति अर्थान्वयन, साहचर्णेय ज्ञायते अर्थान्वयन, तत्कालीन व्याख्या, एवं एक वस्तु का स्पष्ट उल्लेख दूरी का अपवर्जन क्या कहलाता है?

संविधि के तार्किक निर्वचन सिद्धान्त/नियम

हितपद निर्वचन, न्यायालय द्वारा कमियों की पूर्ति नहीं किया जाना, परिणामों पर विचार नहीं करना, उपबंधों को अलग अलग नहीं करना, एवं न्यायाधीश का कार्य विधि का निर्वचन करना/घोषणा करना है, कानून का निर्माण करना नहीं क्या कहलाता है?

संविधि के तार्किक निर्वचन सिद्धान्त/नियम

रिष्टि के नियम के सम्बन्ध में यह निष्कर्ष दिया गया कि सामान्य रूप से सभी संविधियों के निर्वचन के लिये किस बात पर विचार करना चाहिये?

विधि की अधिनियमिति के पूर्व सामान्य विधि क्या थी?

वह रिष्टि (mischief) या दोष (defect) क्या था, जिसके लिये सामान्य विधि में कोई उपबन्ध नहीं था?

संसद ने क्या उपचार संकल्पित किये?

उपचार का वास्तविक कारण?

अवधि के संदर्भ में संविधियों का वर्गीकरण है:

स्थायी और अस्थायी विधि

किसी कृत्य या लोप स्वयं से उस समय तक अपराध गठित नहीं होता है जब तक कि उसे सदोष आशय (mens rea) कारित नहीं किया गया हो, ऐसा आशय क्या कहलाता है?

दुराशय

(mens rea)

 

किसी अपराध के गठित होने के लिये कार्य (या लोप) और आपराधिक आशय दोनों के साथ-साथ मौजूद होने अनिवार्य है, ऐसा आशय क्या कहलाता है?

दुराशय

(mens rea)

संविधियों के निर्वचन के "आंतरिक सहयोगी' कौन हैं?

संक्षिप्त नाम और विस्तृत नाम उद्देशिका, पार्श्व टिप्पणी, परिभाषा निर्वाचन खण्ड एवं स्पष्टीकरण परन्तुक, अपवाद एवं अनुसूची

भूतलक्षी विधि के सम्बन्ध में से कौन से कथन सत्य है?

सामान्यतः नई विधि भूतलक्षी प्रभाव वाली हो कर भविष्यलक्षी प्रभाव वाली होती है

अगर किसी विधि को भूतलक्षी प्रभाव दिया जाना हो तो उस संविधि में ऐसे आशय के स्पष्टतः उपबंधित किया जाना चाहिये

दाण्डिक विधियों का कभी भी भूतलक्षी प्रवर्तन नहीं हो सकता है

विधान का कौन सा प्रत्यायोजन प्रतिषिद्ध है?

किसी अधिनियम के प्रवर्तन की निर्धारित अवधि से परे उस अवधि का विस्तार करने की शक्ति का प्रत्यायोजन

निरसन (Repeal) के सम्बन्ध में, कौन सा कथन सही है?

निरसन में संविधि का सम्पूर्ण अस्तित्व ही समाप्त हो जाता है

सामान्यतः न्यायपालिका को निरसन में हस्तक्षेप या पुनर्विलोकन करने का अधिकार नहीं है

कुछ अस्थायी संविधियां निर्धारित अवधि की समाप्ति पर स्वतः निरसित हो जाती है

कौन से न्याय निर्णय में यह अभिनिर्णीत किया गया कि विशेष अधिनियमिति, सामान्य अधिनियमिति पर अधिभावी प्रभाव रखती है?

राजकोट म्युनिसिपल कॉरपोरेशन बनाम गुजरात राज्य,

ए० आई० आर० 1997 गुजरात 46

संविधान को किसका दर्जा दिया जाता है?

मूल विधि/मूलभूत दस्तावेज

क्या न्यायालयों को संविधियों में कमियों की पूर्ति करने का अधिकार है?

नहीं

कौन से कानून का भूतलक्षी प्रवर्तन होगा?

परिसीमा से सम्बन्धित कानून

प्रक्रिया से सम्बन्धित कानून

घोषणात्मक कानून

क्या नागरिक विधि अन्तर्राष्ट्रीय विधि के मध्य विरोधाभास होने पर न्यायालयों को अन्तर्राष्ट्रीय विधि लागू करनी चाहिये?

नहीं

"न्यायाधीश को संसद की अपीलीय न्यायालय के रूप में कार्य नहीं करना चाहिये" किसका उद्धरण है?

न्यायधीश विल्स

भारत के संविधान के बुनियादी ढांचे में सम्मिलित हैं:

संसदीय प्रणाली

पंथ निरपेक्षता

न्यायिक पुनर्विलोकन

मूल अधिकारों का उच्चतम और उच्च न्यायालयों द्वारा प्रवर्तन

किसी अधिनियम के कितने शीर्षक होते हैं?

लघु शीर्षक

दीर्घ शीर्षक

दाण्डिक विधि और कर विधि के सम्बन्ध में कैसा अर्थान्वयन किया जाना चाहिये?

कठोर अर्थान्वयन

नैसर्गिक न्याय के सिद्धान्तों के अनुसार, किस तत्व का होना आवश्यक है?

प्रभावित व्यक्ति को सूचना देना

प्रभावित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देना

निष्पक्ष न्यायाधिकरण होना

यह कौन से विधिवेत्ता का उद्धरण है कि "न्यायाधीश विधि का निर्माण नहीं कर सकते, चाहे विधि कितनी ही न्यायपूर्ण, असुविधाजनक या कठोर ही क्यों हो।"

लार्ड ब्लेकबर्न

निर्वचन के बाह्य सहयोगी के रूप में सहायक होते हैं:

शब्द कोष

"किसी संविधि की भाषा संदिग्ध होने के परिणामस्वरूप यदि उसके एक से अधिक अर्थ निकलते हैं तो उस अर्थ को स्वीकार करना चाहिये जो प्रयुक्त शब्दों को निष्प्रभावी नहीं बना कर उन शब्दों को निष्प्रभावी बना कर उन शब्दों को प्रभावी बनाये, अर्थात् अमान्य से मान्य करना अच्छा है।" कौन से सूत्र पर आधारित हैं?

ut res megis valeat quam pareat

सम्पूर्ण विलेख/दस्तावेज को एक साथ पूर्ण इकाई मान कर पढ़ना चाहिये; एवं इसके रचयिता के आशय का इसके उपबंधों से साधारण स्वाभाविक अर्थ ग्रहण किया जाना चाहिये, विलेखों/दस्तावेजों के निर्वचन के प्रमुख सिद्धान्त के रूप में क्या यह कथन सत्य है?

हाँ

संव्यवहार की प्रकृति को विलेख/दस्तावेज के सार और तत्व से जानना चाहिये, एवं विलेख/दस्तावेज के अधीन किये गये कृत्यों को इसकी व्याख्या में सहायक माना जायेगा, विलेखों/दस्तावेजों के निर्वचन के प्रमुख सिद्धान्त के रूप में क्या यह कथन सत्य है?

हाँ

यदि किसी अचल सम्पति के विलेख के शीर्षक और मुख्य विलेख के शब्दों में असंगति या विरोधाभास हो तो दोनों में से किसको प्राथमिकता दी जानी चाहिये?

मुख्य विलेख

विशेष अधिनियम, साधारण अधिनियम पर अधिभावी प्रभाव रखता है, विशेष अधिनियम और साधारण अधिनियम में विरोधाभास या विसंगति होने पर, क्या यह कथन सत्य है?

हाँ

विशेष उपबंधों और सामान्य उपबंधों में विसंगतियाँ या विरोधाभास हो तो विशेष उपबन्ध सामान्य उपबंधों को निरस्त कर देते हैं, क्या यह कथन सत्य है?

हाँ

जहाँ एक विशेष अधिनियम में ऐसे प्रावधान हैं जो एक पूर्ववर्ती साधारण अधिनियम की विसंगति में है, वहाँ उस साधारण अधिनियम के प्रावधानों को उस उत्तरवर्ती विशिष्ट अधिनियम के प्रावधानों के समक्ष झुकना चाहिये, क्या यह कथन सत्य है?

हाँ

भारतीय न्याय संहिता, 2023 में दुराशय (mens rea) को आवश्यक महत्व देते हुए, विभिन्त्र अपराधों को परिभाषित करते समय, विधिक प्रावधानों की भाषा में, किस शब्दावली का प्रयोग किया गया है?

जानबूझकर/स्वेच्छापूर्वक,

बेईमानीपूर्वक कपटपूर्वक/साशय,

उतावला या लापरवाही द्वारा

उच्चतम न्यायालय ने कौन से समादेश (ruling) में यह प्रतिपादित किया कि संविधान के अनुच्छेद 29 एवं 30 का अर्थान्वयन करते समय यह ध्यान में रखना चाहिये कि इसे एकाकीपन में नहीं पढ़ा जाय, उपबंधों को सम्मिलित करने का उद्देश्य पूर्ण हो, अर्थ और प्रयोजन को पूरा करने के लिये समन्वयपूर्ण रूप से पढ़ा जाये, और इसे प्रभावी बनाया जाये।

टी० एम० ए० फाउण्डेशन बनाम कर्नाटक राज्य, AIR 2003 SC 355

"न्यायालय को संविधियों में कमियों की पूर्ति करने का अधिकार नहीं है" (casus omissus) के सम्बन्ध में कौन सा कथन सही है?

न्यायालय संविधि के निर्वचन में उसका अर्थान्वयन तो कर सकते हैं, परन्तु निर्वचन से विधि की रचना नहीं कर सकते हैं,

न्यायालय को संविधि के किसी भी उपबंध का जोड़ तोड़ करने का अधिकार नहीं है

क्या न्यायिक निर्वचन के माध्यम से संविधि की कमियों की पूर्ति की जा सकती है?

नहीं

क्या न्यायालय तार्किक निर्वचन की आड़ ले कर संविधि की कमी की पूर्ति का अधिकार रखते हैं

नहीं

'उद्देश्य' के सन्दर्भ में, संविधियों का वर्गीकरण किस प्रकार है?

संहिताकारी, समेकनकारी, घोषणात्मक एवं समर्थकारी विधि,

उपचारी, अशक्तकारी, दाण्डिक एवं कर विधि,

संशोधनकारी, व्याख्यात्मक, विधिमान्यकारी निरसनकारी विधि

कर विधि के अर्थान्वयन के समय यदि संदेह की स्थिति उत्पन्न हो जाये तो इसका लाभ किसको दिया जायेगा?

करदाता और जनता को

दाण्डिक विधि का अर्थान्वयन करते समय किस बात को दृष्टिगत नहीं रखा जायेगा?

दाण्डिक विधि परिस्थितियों के अनुसार भूतलक्षी हो सकती हैं और भविष्यलक्षी भी हो सकती हैं

निर्वचन के स्वर्णिम नियम को प्रयुक्त किया जाता है ताकि:

संविधि के अवांछित परिणाम को रोका जा सके,

संविधि का परिणाम संतुलित, विवेकी न्यायसंगत और युक्तियुक्त हो सके,

संविधि के वास्तविक अभिप्राय एवं निर्वचन के परिणाम और प्रभाव को अधिक महत्व दिया जाता है

"संविधान प्रवृत्त होने से पूर्व की एवं पश्चात् की सभी विधियाँ जो संविधान के मूल अधिकारों से विपरीत या असंगत थी या हैं, वे सभी विधियाँ उस मात्रा तक शून्य होंगी" के सूत्र के आधार पर न्यायालयों द्वारा कौन सा सिद्धान्त स्थापित किया गया है?

ग्रहण या आच्छादन का सिद्धान्त

भविष्यलक्षी प्रत्यादेश (prospective overruling) के सम्बन्ध में कौन सा कथन गलत है? 

एक निर्णय द्वारा दूसरे निर्णय को भविष्य से प्रभावी/लागू किया जाना भविष्यलक्षी प्रत्यादेश कहा जाता है

क्या एक निर्णय द्वारा दूसरे निर्णय को भविष्य से निष्प्रभावी किया जाना भविष्यलक्षी प्रत्यादेश कहा जाता है?

हाँ

किस मामले में भविष्यलक्षी प्रत्यादेश का सिद्धान्त प्रतिपादित किया गया कि मूल अधिकारों को संशोधित करने में संसद सक्षम नहीं है?

उच्चतम न्यायालय द्वारा आई० सी० गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य,

ए० आई० आर० 1967 SC 1643

क्या भविष्यलक्षी प्रत्यादेश (prospective overruling) का सिद्धान्त केवल भविष्य से प्रवृत्त होगा, इसका भूतलक्षी प्रभाव नहीं होगा?

हाँ

संविधियों के निर्वचन सम्बन्धी कौन सी उपधारणा नहीं है?

विधि के निरसन/निलम्बन बाबत उपधारणा

संविधियों की वैधानिकता की उपधारणा, एवं संविधियों के शब्दों/भाषा के सामान्य अर्थान्वयन करने बाबत उपधारणा क्या संविधियों के निर्वचन सम्बन्धी उपधारणा है?

हाँ

विधि के परिवर्तन/संशोधन बाबत उपधारणा क्या संविधियों के निर्वचन सम्बन्धी उपधारणा है?

हाँ

विधि विहित अधिकारों की सुरक्षा बाबत उपधारणा क्या संविधियों के निर्वचन सम्बन्धी उपधारणा है?

हाँ

"आप जो कुछ प्रत्यक्ष रूप से नहीं कर सकते उसे अप्रत्यक्ष रूप से भी नहीं कर सकते" के सूत्र के आधार पर न्यायालयों द्वारा कौन सा सिद्धान्त स्थापित किया गया है?

आभासी विधान का सिद्धान्त

यह कौन से विधिवेत्ता का उद्धरण है कि "संहिताकारी कानून का तात्पर्य किसी विशिष्ट विषय-वस्तु पर सम्पूर्ण कानून की विस्तारपूर्वक अभिव्यक्ति करना होता हैं, जिसमें पूर्ववर्ती सभी विधिक प्रावधानों एवं विषयों से सम्बन्धित सामान्य कानून के नियमों को सम्मिलित करने का प्रयास प्ररूपकार द्वारा किया जाता है।

मैक्सवैल

अधिकारिता से सम्बन्धित कौन सी प्रमुख उपधारणाँ हैं?

कानून के राज्य क्षेत्रातीत प्रवर्तन के विरुद्ध उपधारणा

कानून द्वारा राज्य को प्रभावित करने के विरुद्ध उपधारणा

न्यायालय की स्थापित अधिकारिता को वंचित करने, नयी अधिकारिता की सृष्टि करने एवं विद्यमान अधिकारिता का विस्तार करने के विरुद्ध उपधारणा, किस उपधारणा से सम्बन्धित है?

अधिकारिता से सम्बन्धित प्रमुख उपधारणा

अन्तर्राष्ट्रीय विधि के उल्लंघन के विरुद्ध उपधारणा, किस उपधारणा से सम्बन्धित है?

अधिकारिता से सम्बन्धित प्रमुख उपधारणा

"यदि किसी अधिनियम का अवैध भाग उसके शेष भाग से (विधायिका के आशय को विफल किये बिना) पृथक् किया जा सकता है, तो केवल उसी भाग को पृथक् किया जायेगा जो असंवैधानिक हैं, जबकि अधिनियम का शेष भाग संवैधानिक बना रहेगा।" के सूत्र के आधार पर न्यायालयों द्वारा कौन सा सिद्धान्त स्थापित किया गया है?

पृथक्करण का सिद्धान्त

(Doctrine of Severability)

"नवीन विधि का प्रभाव भविष्यलक्षी होना चाहिए" कौनसे सूत्र पर आधारित है?

nova constitutio futuris forman imponere debet non praeteritis

"यदि विधि अधिनियमित करने वाली विधायिका के कार्यक्षेत्र में विधि का मर्म आता है तो इस आधार पर ही विधि को शून्य अथवा अवैध घोषित नहीं किया जायेगा कि वह दूसरी विधायिका के क्षेत्र को भी स्पर्श कर रहा है, जो अधिनियमन करने वाली विधायिका के क्षेत्र के बाहर है" के सूत्र के आधार पर न्यायालयों द्वारा कौन सा सिद्धान्त स्थापित किया गया है?

सार और मर्म का सिद्धान्त

संविधियों के निर्वचन के सिद्धान्त का क्या अभिप्राय है?

वह रीति, जिसके द्वारा न्यायालय किसी कानून के शब्दों या उपबंधों का अर्थ स्पष्ट करते हैं

अर्थान्वयन साहचर्णेय ज्ञायते (noscitur a sociis) का सूत्र किस नियम से सम्बन्धित है?

शाब्दिक अर्थान्वयन नियम

दाण्डिक विधि के कठोर निर्वचन के क्या आधार है?

जब तक कानून की भाषा स्पष्टतः अमुक कार्य या लोप को अपराध के रूप में अभिव्यक्त नहीं करती तब तक वह कार्य या लोप अपराध नहीं माना जायेगा एवं ही अभियुक्त को दण्डित किया जायेगा

अपराध के लिये प्रयुक्त शब्दों में कोई संदिग्धता हो तो उसका लाभ अभियुक्त को दिया जायेगा

क्या किसी संविधि के उद्देश्यों और कारणों का कथन (statement of objects and reasons) संविधि के उपबंधों का निर्वचन करने में सहायक सिद्ध हो सकता है?

सामान्यतः नहीं

लेकिन विधायिका का वास्तविक उद्देश्य ज्ञात करना समीचीन हो तो निर्वचन हेतु सहायक के रूप में प्रयुक्त किया जा सकता है

निर्वचन के बाह्य सहयोगी कौन होते हैं?

संविधि के शरीर से परे अन्य सहायक

मोटे तौर पर निर्वचन कितने प्रकार से किये जाते हैं?

शाब्दिक या व्याकरणमूलक निर्वचन

(Literal or grammatical interpretation)

तार्किक निर्वचन

(Logical interpretation)

विधायिका द्वारा संविधियों को प्रवृत्त किये जाने के समय को निर्धारित करने का अधिकार कार्यपालिका पर छोड़ दिया जाता है क्या कहलाता है?

सशर्त विधान

विधायिका द्वारा संविधियों को प्रवृत्त किये जाने के स्थान को निर्धारित करने का अधिकार कार्यपालिका पर छोड़ दिया जाता है क्या कहलाता है?

सशर्त विधान

ऐसी संविधियों की आवश्यकता समाप्त हो जाने के पश्चात् इनको वापिस ले लिया जाता है क्या कहलाता है?

सशर्त विधान

विधियों का समेकन किसे कहते हैं?

ऐसी विधि जिसमें किसी विशिष्ट विषय-वस्तु पर सम्पूर्ण विधिक उपबंधों को एक स्थान पर, एक संविधि में एकत्रित किया जाता है

क्या न्यायालय द्वारा किसी संविधि या उसके उपबंध को असंवैधानिक घोषित किया जा सकता है?

हाँ

क्या सामान्यतः नयी संविधि को भूतलक्षी प्रभाव दिया जाता है?

नहीं

क्या संविधान की उद्देशिका, संविधान के अभिन्न अंग के रूप में संशोधनीय हैं?

हाँ

"न्यायालय को संविधियों में कमियों की पूर्ति करने का अधिकार नहीं है", कौन से सिद्धान्त पर आधारित है?

casus omissus

संविधान में प्रयुक्त शब्द "संशोधन" का निर्वचन करते समय किस बात को दृष्टिगत नहीं रखना चाहिये?

इसके संशोधन का अर्थान्वयन शब्दकोषों आदि बाह्य स्रोत में ढूंढ़ना चाहिये क्योंकि संविधान का उपयोग सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों को मूर्त रूप देने के लिये इनमें आये परिवर्तन को दृष्टिगत रखते हुए किया जाता है

संविधियों के निर्वचन से सम्बन्धित उपधारणाएँ कौन सी हैं?

विधायिका द्वारा त्रुटि या कमी नहीं रखने की उपधारणा

विधायिका द्वारा शब्दों का दुरुपयोग नहीं करने की उपधारणा, एवं विधायिका द्वारा न्यायोचित कार्य करने की उपधारणा

विधायिका को विधियों, नियमों, विधिक सिद्धान्तों और न्यायिक निर्णयों का ज्ञान होने की उपधारणा

सजाति अर्थान्वयन का अर्थ "उसी प्रकार का" होता है कि अभिव्यक्ति कौन से सूत्र पर आधारित है?

ejusdem generis

सर्वोपरि खण्ड (non-obstente clause) उपबंधित करने का प्रयोजन होता है?

यह उपबन्ध अन्य किसी उपबन्ध पर अभिभावी होगा और अन्य उपबन्ध कोई परिणाम नहीं निकाल सकेगा

जब सर्वोपरि खण्ड एवं अन्य उपबन्धों के मध्य विरोध अथवा असंगति हो तो सर्वोपरि खण्ड अन्य उपबंधों पर अभिभावी रहेगा

नैसर्गिक न्याय के नियमों में से एक महत्वपूर्ण नियम यह भी है कि "दूसरे पक्ष को भी सुनवाई का अवसर दो" इस नियम का अपवाद कौन सा है?

वे मामले जिनकी विशेष परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए उनमें तुरन्त कार्यवाही की आवश्यकता होती हैं

किस मामले में कहा कि प्रारूप में प्रकाशन कराना अनिवार्य है?

हरला बनाम राजस्थान राज्य,

AIR 1951 SC 467; एवं

बी० के० श्रीनिवासन बनाम कर्नाटक राज्य,

AIR 1987 SC 1059

किसमें यह अभिनिर्णित किया गया कि जो प्रत्यायोजित विधान शक्ति के बाहर हैं उसे सम्बन्धित विधान-मण्डल के पटल पर रख देने मात्र से विधिमान्य नहीं बन जाता है?

श्री विजय लक्ष्मी राइस मिल्स बनाम आन्ध्र प्रदेश राज्य,

AIR 1976 SC 1471

कौन सा उपचारी विधि की परिधि में आता है?

भारतीय न्याय संहिता, 2023

रिष्टि के नियम का प्रतिपादन कौन से मामले में हुआ था?

हैडन का मामला (1584) 3 Co. Rep. 7a, p 7b: 76 ER 637

"यदि कोई संविधि, जिसका उद्देश्य किसी वर्ग के व्यक्तियों को लाभ पहुंचाना हैं, में कोई प्रावधान अस्पष्ट हैं या उसके दो अर्थ निकलते हैं तो जिन में से एक उस हित का रक्षक हो और दूसरा नाशक हो तो वह अर्थ मान्य होगा जो हित की रक्षा करे। " हितप्रद निर्वचन के बारे में ये विचार किसके द्वारा व्यक्त किये गये हैं?

मैक्सवैल

कार्यों की कार्यपालिका को प्रत्यायोजित नहीं कर सकती है।

इन रि दिल्ली लॉज मामला,

AIR 1951 SC 352

संविधान में उपबंधित "राज्य के नीति निर्देशक तत्वों की भूमिका" के बारे में   कथनों में से कौन सा कथन असत्य है?

चूंकि नीति निर्देशक तत्व न्यायालयों में प्रवर्तनीय नहीं हैं, उन्हें नजरअन्दाज किया जा सकता है

जब कोई संविधि सारतः संविधान से प्रदत्त विधायिका की शक्तियों के अन्तर्गत हैं जिसने उसे अधिनियमित किया है तब उसे केवल इस वजह से अविधिमान्य नहीं कहा जा सकता क्योंकि उसने संविधान से प्रदत्त किसी अन्य विधायिका के क्षेत्र को भी आनुषंगिक तौर पर स्पर्श कर लिया है क्या कहलाता है?

सार और मर्म (तत्व)" (Pith and Substance) का सिद्धान्त

'लोकनीति एक अनियंत्रित घोड़ा है और उसकी सवारी करना खतरनाक है' किसने कहा है?

न्यायाधीश बरो

"निर्वचन की कला एक उद्देश्य को दर्शाने की कला है" किसने कहा है?

एलेन

 

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