
|
अपकृत्य विधि (LAW OF TORT) |
|
|
|
|
|
अपकृत्य क्या है? |
अपकृत्य वह कार्य या चूक है जिससे किसी दूसरे व्यक्ति को चोट या हानि पहुँचती है और यह एक दीवानी अपराध है जिसके लिए न्यायालय दायित्व निर्धारित करते हैं । अपकृत्यों के संदर्भ में, "चोट" किसी भी कानूनी अधिकार के उल्लंघन को दर्शाती है , जबकि "हानि" किसी व्यक्ति को होने वाली हानि या नुकसान को दर्शाती है। |
|
“अपकृत्य का दायित्व एक ऐसे कर्त्तव्य के उल्लंघन से उद्भूत होता है जिसे प्राथमिक रूप से विधि द्वारा सुनिश्चित किया जाता है और जो जन-साधारण के प्रति होता है तथा इस उल्लंघन का निवारण अनिर्धारित नुकसानी के लिए कार्यवाही द्वारा किया जाता है”, किसने कहा- |
विनफील्ड
|
|
“अपकृत्य एक सिविल दोष है जिसके लिए उपचार अनिर्धारित नुकसानी के लिए कॉमन विधि के अन्तर्गत कार्यवाही है और जो निरपेक्ष रूप से न तो संविदा भंग है, न न्यास-भंग है तथा न किसी अन्य साम्यिक का उल्लंघन है”, यह कथन किसका है? |
सॉमण्ड |
|
फ्रेजर के अनुसार अपकृत्य क्या है? |
"अपकृत्य किसी व्यक्ति के वैयक्तिक अधिकार का सामान्य रूप से उल्लंघन है जिससे उसे क्षतिपूर्ति का वाद लाने का अधिकार मिलता है।" |
|
“अपकृत्य संविदा से भिन्न एक ऐसा कार्य है जो या तो किसी व्यक्ति के पूर्ण अधिकार का अतिक्रमण करता है या किसी व्यक्ति के सापेक्ष अधिकार का अतिक्रमण करता है और उसे क्षति पहुँचाता है या किसी लोक अधिकार की इस प्रकार अवहेलना करता है जिससे किसी व्यक्ति को सामान्य व्यक्ति की अपेक्षा हानि पहुँचती है और जिसके परिणामस्वरूप वह क्षतिकर्ता के विरुद्ध क्षतिपूर्ति के लिए वाद लाने का हकदार हो जाता है", यह परिभाषा किसकी है? |
अण्डरहिल |
|
अपकृत्य के तत्व है - |
(i)अपकृत्य एक सिविल दोष है।, (ii) इसका उपचार अनिर्धारित नुकसानी का वाद लाना है। (iii) यह संविदा-भंग, न्यास-भंग एवं साम्यिक-दायित्वों से भिन्न है। (iv) अपकृत्यपूर्ण दायित्व विधि द्वारा पूर्व निश्चित कर्त्तव्य-भंग से उत्पन्न होता है। (v) विधिक कर्त्तव्य अथवा दायित्व व्यक्तियों के प्रति होते हैं। (vi) ऐसे विधिक कर्तव्यों अथवा दायित्वों के उल्लंघन के लिए नुकसानी (क्षतिपूर्ति) का वाद लाने का अधिकार मिल जाता है। |
|
अपकृत्य विधि से सम्बन्धित 'कबूतरखाने का सिद्धान्त' (पिजन होल थ्योरी) को किसने प्रतिपादित किया है? |
सामण्ड |
|
दोषपूर्ण कार्य करने के समय दोषकर्ता की मानसिक दशा- |
अपकृत्य से सम्बन्धित दायित्व में सुसंगत नहीं होती हैI |
|
"अपकृत्यों की विधि ऐसे नियमों के समूह से निर्मित है जिनसे विनिर्दिष्ट क्षतियों की संस्थापना की गई है। अपकृत्यों के लिए दायित्व का कोई सामान्य सिद्धान्त नहीं है।" यह मत प्रतिपादित किया है-
|
सामण्ड ने |
|
दुष्कृति उत्पन्न होती है- |
विधि द्वारा अधिरोपित कर्तव्य भंग से |
|
अपकृत्य के लिए उचित उपचार की कार्यवाही है- |
अपरिनिर्धारित नुकसानी |
|
किसने अपनी पुस्तक का नाम "लॉ ऑफ टॉर्ट" रखा है? |
विनफील्ड |
|
किसने कहा है कि "अपकृत्य असंख्य हैं, न कि सीमित या संहिताबद्ध"? |
लॉर्ड काम्डेन |
|
"अपकृत्यपूर्ण दायित्व मूलतः विधि द्वारा निर्धारित कर्तव्य भंग करने से उत्पन्न होता है। यह कर्तव्य व्यक्तियों के प्रति सामान्य रूप से होता है और इसके उल्लंघन का उपचार अपरिनिर्धारित क्षतिपूर्ति की कार्यवाही द्वारा किया जा सकता है।" यह परिभाषा दी गई है- |
विनफील्ड द्वारा |
|
दुष्कृति एक निजी नागरिक अधिकार का हनन है। पति और पत्नी के बीच के कर्तव्य का भंग होना- |
एक दुष्कृति नहीं है
|
|
"केवल कार्य किसी को अपराधी नहीं बनाता यदि उसका मन भी अपराधी न हो" यह सूत्र स्थापित किया था - |
कॉमन लॉ अदालतों ने (निर्णयज अदालतों ने)
|
|
"यह अपकृत्य की विधि है न कि अपकृत्यों की विधि" इस सिद्धान्त के समर्थक थे- |
विनफील्ड
|
|
"अपकृत्य, संविदा भंग, न्यास भंग तथा अन्य साम्यिक अधिकारों से स्वतन्त्र, एक दीवानी अपराध है, जिसका उचित उपचार अनिर्धारित क्षतिपूर्ति के लिए कार्यवाही करना है।" अपकृत्य की यह परिभाषा दी है一 |
सामण्ड ने |
|
अपकृत्य एक है - |
दीवानी दोष
|
|
अपकृत्य उल्लंघन है- |
व्यक्तिबन्धी अधिकार का |
|
अपराध के आवश्यक तत्व हैं- |
आपराधिक मनःस्थिति, दोषपूर्ण कार्य तथा विधि द्वारा विहित दण्ड |
|
अपकृत्य की महत्वपूर्ण विशेषता है कि यह हनन है- |
वैयक्तिक अधिकार का |
|
"अपकृत्य एक सिविल दोष है जो मात्र संविदा भंग अथवा न्याय भंग नहीं होता" अपकृत्य की यह परिभाषा दी है- |
सामण्ड ने |
|
"अपकृत्य विधि द्वारा निर्धारित कर्तव्य का उल्लंघन है। जिससे क्षति होती है और जिसके विरुद्ध उपचार का विधि द्वारा प्रावधान किया जाता है।" यह कथन है- |
पोलाक का
|
|
प्रख्यात निबन्ध 'डिटर्मिनिंग रेशियो डेसीडेन्डयी ऑफ ए केस' के लेखक हैं?
|
गुडहार्ट |
|
जब प्रतिवादी का कार्य अपकृत्य और संविदा के भंग में आता है तो प्रतिवादी पर वाद लाया जा सकता है- |
या तो अपकृत्य में या संविदा भंग में
|
|
भारत में अपकृत्य विधि का आधार है?
|
इंग्लैण्ड की सामान्य विधि
|
|
अपकृत्यात्मक दायित्व ऐसे कर्तव्य के भंग होने से उत्पन्न होता है जो- |
विधि द्वारा निर्धारित किया गया था |
|
"अपकृत्यों की विधि ऐसे नियमों के समूह से निर्मित है जिनसे विनिर्दिष्ट क्षतियों की संस्थापना की गयी है। अपकृत्यों के दायित्व के लिए कोई सामान्य सिद्धान्त नहीं है" यह प्रतिपादित किया है - |
सामण्ड
|
|
सांविधानिक अपकृत्य की अवधारणा किस निर्णय में पैदा हुई?
|
कस्तूरी लाल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य |
|
परिसीमा अवधि अधिनियम की कौन सी धारा अपकृत्य को परिभाषित करती है? |
धारा-2 (m)
|
|
"अपकृत्य का अर्थ है कि एक सिविल (दीवानी) अपकार" यह परिभाषा दी गई है- |
परिसीमा अधिनियम, 1963 में |
|
कौन-सा वाद ब्रिटिशकालीन भारत में अपकृत्य के लिए सरकार के दायित्व के प्रश्न पर प्रमुख वाद है?
|
पी० एण्ड ओ० स्टीम नेवीगेशन कं० बनाम सेक्रेटरी ऑफ स्टेट |
|
अपकृत्य विधि- |
असंहिताबद्ध विधि है |
|
अपकृत्य 'मूलतः विधि द्वारा निर्धारित कर्तव्य का भंग है; यह कर्तव्य जनसामान्य के प्रति है अपरिनिर्धारित नुकसानी कार्यवाई इसके भंग का प्रतितोष है।" यह परिभाषा है- |
विनफील्ड की |
|
यह सैद्धान्तिक विवाद कि यह "अपकृत्य विधि" है, अथवा "अपकृत्यों की विधि", किन लेखकों के विचारों के कारण अस्तित्व में था- |
विनफील्ड और सामण्ड |
|
अपकृत्य की महत्वपूर्ण विशेषता है कि यह हनन है- |
वैयक्तिक अधिकार का |
|
अपकृत्य विधि किन हितों/अधिकारों को संरक्षण प्रदान नहीं करती? |
संविदा करने का अधिकार |
|
जब कोई कृत्य अपराध और अपकृत्य दोनों होता है, वहाँ- |
आपराधिक और सिविल दोनों प्रकार की कार्यवाहियाँ की जा सकती हैं |
|
विनफील्ड के अनुसार, अपकृत्य में दायित्व उत्पन्न होता है-
|
सर्वसाधारण व्यक्तिों के प्रति मूलतः विधि द्वारा निर्धारित विधिक कर्तव्य के भंग से |
|
संयुक्त अपकृत्यकर्ता का दायित्व - |
संयुक्त तथा पृथक् पृथक् है |
|
खुशरो एस० गाँधी बनाम एन० ए० गुजदर, ए० आई० आर० 1970 एस० सी० 1468, किस पर एक वाद है? |
संयुक्त अपकृत्यकर्ताओं के सम्बन्ध में समझौता एवं सन्तुष्टि
|
|
'सामान्य अभिकल्पना' आवश्यक है- |
संयुक्त अपकृत्यकर्ताओं के लिए |
|
एक स्वतन्त्र ठेकेदार के अपकृत्यों के लिए-
|
नियोजक सिद्धान्ततः नियोजक प्रतिनिधिक रूप में उत्तरदायी नहीं होता |
|
स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया बनाम श्यामा देवी का वाद सम्बन्धित है- |
प्रतिनिधिक दायित्व से |
|
"संयुक्त अपकृत्यकर्ताओं द्वारा आपस में अंशदान नहीं होगा" नियम की समाप्ति कैसे हुई? |
विधायी अधिनियम से |
|
संयुक्त अपकृत्यकर्ताओं के मामले में में से कौन-सा परिणाम सही है? |
एक की निर्मुक्ति से सभी की निर्मुक्ति हो जाती है |
|
सेवक के दोषपूर्ण कार्य के लिए मालिक के दायित्व का कारण है- |
मालिक और सेवक का सम्बन्ध |
|
एक स्वतन्त्र ठेकेदार द्वारा किये अपकृत्य के लिये -
|
नियोजक सिद्धान्ततः प्रतिनिधिक रूप से उत्तरदायी नहीं होता है |
|
मर्सी डाक्स एण्ड हार्बर बोर्ड बनाम कागिन्स एण्ड ग्रिफिथस, (1946) 2 आल० आई० आर० 345 (एच० एल०) एक वाद है- |
मालिक और सेवक सम्बन्ध |
|
सम्पूर्ण दायित्व का तर्काधार यह है कि परिसंकटमय कार्य करने वाले व्यक्ति- |
दायी हैं चाहे उन्होंने कोई दोष न भी किया हो |
|
एक स्वतन्त्र ठेकेदार के अपकृत्यों के लिए-
|
सिद्धान्ततः नियोजक प्रतिनिधिक रूप में उत्तरदायी नहीं होता है |
|
"कॉमन लॉ के अन्तर्गत यह नियम था कि यदि संयुक्त क्षतिकर्ताओं के प्रति वाद लाया गया है और उनमें से एक क्षतिकर्ता ने सम्पूर्ण क्षतिपूर्ति की राशि का भुगतान किया है, तो वह दूसरे संयुक्त क्षतिकर्ताओं से अंशदान नहीं प्राप्त कर सकता था"। |
मैरीवेदर बनाम निक्सन में |
|
दोषपूर्ण कृत्य कारित करने में संयुक्त दुष्कृतिकर्ता वे व्यक्ति होते हैं जो - |
सहायता करते हैं, निदेश देते हैं, दोषपूर्ण अवैध षड्यन्त्र को अग्रसर करने में कारित करते हैं |
|
संयुक्त अपकृत्यकर्ता संयुक्त और पृथक् रूप से दायी हैं, इसका अर्थ है- |
प्रत्येक दायी है मानो वह कार्य प्रत्येक ने अकेले किया है |
|
संयुक्त अपकर्ता के आपस में दायित्व के सम्बन्ध में मैरीवेदर बनाम निक्सन के वाद में प्रतिपादित सिद्धान्त को किस उच्च न्यायालय में लागू किया है? |
मद्रास |
|
मेरीवेदर बनाम निक्सन का वाद सम्बन्धित है- |
किसी दोषपूर्ण कार्य से कार्यवाही का अधिकार उत्पन्न नहीं होता |
|
संयुक्त दायित्व से कौन-सी सम्बन्धित है? |
जब कोई व्यक्ति किसी को कोई कार्य करने के लिए नियुक्त करता है जो अपकृत्य बन जाए।, सेवक को स्वामी कोई कार्य करने के लिए नियुक्त करता है जो अपकृत्य हो।, दो या अधिक व्यक्ति अपकृत्य कारित करने के लिए संयुक्त रूप से कार्य करे। |
|
किस वाद में पूर्ण दायित्व का सिद्धान्त प्रतिपादित किया गया है? |
एम० सी० मेहता बनाम भारत संघ |
|
ओलियम गैस रिसाव वाद के विधायी परिणामस्वरूप भारतीय संसद ने एक विधि का अधिनियमन किया था। वह कौन-सा विधान था?
|
लोक दायित्व बीमा अधिनियम, 1991 |
|
कठोर दायित्व का नियम वहाँ लागू होता है जहाँ क्षति कारित होती हैं- |
खतरनाक वस्तुओं के पलायन से |
|
कठोर दायित्व के अपकृत्य हैं, जिनमें- |
प्रतिवादी को आशय या उपेक्षा को सिद्ध करने की कोई आवश्यकता नहीं होती है |
|
रायलैण्ड्स बनाम फ्लैचर के नियम में उत्तरदायित्व के आधार के रूप में किसको धारित किया गया है? |
कठोर दायित्व |
|
रायलैण्ड्स बनाम फ्लैचर का नियम उस समय लागू नहीं होता जब बच निकलने का कारक है- |
दैवकृत |
|
कठोर दायित्व के सिद्धान्त पर प्रमुख वाद है? |
रायलैण्ड्स बनाम फ्लेचर |
|
पूर्ण दायित्व के सिद्धान्त को औद्योगिक क्षतियों तक विस्तृत किया गया- |
न्यायमूर्ति पी० एन० भगवती द्वारा |
|
अन्तर्निहितः खतरनाक अथवा अत्यन्त जोखिम वाले उद्यमों में उत्पन्न क्षति के मामलों में दायित्व- |
आत्यान्तिक होता है |
|
न्यायाधीशों में से कौन अपकृत्य में पूर्ण दायित्व के सिद्धान्त के विकास का प्रतीक माना जाता है? |
न्यायमूर्ति पी० एन० भगवती |
|
प्रतिवादी की जमीन पर उगे एक वृक्ष की शाखा राजमार्ग के ऊपर जमीन से 10 मीटर की ऊँचाई पर लटकी है। जब वादी की गाड़ी राजमार्ग पर जा रही थी तब वृक्ष की एक शाखा अचानक वादी की गाड़ी पर गिर पड़ी यदि वादी न्यूसेन्स के आधार पर गाड़ी को नुकसान पहुँचाने के लिए प्रतिवादी के विरुद्ध वाद लाता है तब उपरोक्त वाद में - |
प्रतिवादी कठोर दायित्व के सिद्धान्त के अधीन दायी है |
|
दोषरहित दायित्व का सिद्धान्त उच्चतम न्यायालय ने अभिनिर्धारित किया है- |
एम० सी० मेहता बनाम भारत संघ के वाद में |
|
जिस न्यायाधीश ने एक्सर्चकर चैम्बर न्यायालय में "रायलैण्ड बनाम फ्लैचर का नियम" प्रतिपादित किया था, उसका नाम है- |
न्यायमूर्ति ब्लैकबर्न |
|
किस वाद में उच्चतम न्यायालय ने यह अभिनिर्धारित किया कि जहाँ कोई उद्योग किसी संकटपूर्ण या अत्यन्त खतरनाक कार्य में लिप्त हो और दुर्घटना के कारण किसी को कोई नुकसान कारित हो तो उद्योग उन सभी के नुकसानी की भरपाई करेगा जो इस दुर्घटना से प्रभावित हुए हों? |
एम० सी० मेहता बनाम भारत संघ |
|
कौन-सा अपकृत्य कठोर दायित्व का अपकृत्य है? |
एक अपकृत्य जिसमें प्रतिवादी के आशय या उपेक्षा को सिद्ध करने की कोई आवश्यकता नहीं है |
|
रायलैण्ड बनाम फ्लैचर वाद में प्रतिपादित कठोर दायित्व के सिद्धान्त को उच्चतम न्यायालय ने किस वाद में स्वीकारा है? |
एस० सी० मेहता बनाम भारत संघ |
|
किसी भूमि के अधिभोगी या स्वामी को कठोर दायित्व के आधार पर दायी ठहराने के लिए कतिपय आवश्यक शर्तें हैं- |
अपनी भूमि पर खतरनाक बस्तु रखना, भूमि का अस्वाभाविक उपयोग, वस्तु का उसके नियन्त्रण से बाहर हो जाना |
|
एम० सी० मेहता बनाम भारत संघ (श्री राम फूड्स एण्ड फर्टिलाइजर्स) सम्बन्धित है- |
आत्यान्तिक दायित्व से |
|
कठोर दायित्व के लिए आवश्यक है- |
भूमि का खतरनाक वस्तु को लाना, खतरनाक वस्तु की भूमि की सीमा से बाहर निकलना, भूमि का अस्वाभाविक उपयोग |
|
स्नायुविक आघात से सम्बन्धित विधि को किस वाद में नया आयाम दिया गया है? |
हैमबुक बनाम स्टोक्स ब्रदर्स |
|
कठोर दायित्व का सिद्धान्त यह अपेक्षा करता है कि- |
प्रतिवादी के उत्तरदायी होने के लिये यह आवश्यक नहीं है कि उसने साशय या उपेक्षापूर्वक कार्य किया हो |
|
व्यापक विनाश कारित करने वाली परमाणु त्रासदी के मामले में प्रतिवादी का दायित्व किस सिद्धान्त से शासित होगा? |
आत्यान्तिक दायित्व |
|
'कठोर दायित्व' का सिद्धान्त सर्वप्रथम वाद में प्रतिपादित किया गया- |
रायलैण्ड बनाम पलैचर |
|
'पूर्ण दायित्व' का नियम वाद में प्रतिपादित किया गया- |
एम० सी० मेहता (श्री राम फूड एण्ड फर्टीलाइजर कं०) बनाम भारत संघ, (1987) आई० एस० सी० 395 |
|
रायलेण्ड्स बनाम फ्लेचर के नियम के अन्तर्गत दायित्व का वर्णन करते हुए किसने 'पूर्ण' के स्थान पर 'कठोर' शब्द को वरीयता दी है? |
विनफील्ड ने |
|
भारत की अपकृत्य विधि में आत्यन्तिक दायित्व का सिद्धान्त लागू होता है जब क्षति-
|
परिसंकटमय या अन्तर्निहिततः खतरनाक सामग्री के क्रियाकलाप या छूट निकलने से होती है |
|
अपकृत्य विधि में कठोर दायित्व का अर्थ है- |
किसी भी खतरनाक कार्यकलाप के लिए दायित्व |
|
अपकृत्य में 'पूर्ण दायित्व' की अवधारणा का अर्थ यह है कि- |
प्रतिवादी के आशय को सिद्ध करने की आवश्यकता के बिना किसी अपकार के लिए उस पर दायित्त्व अधिरोपित किया जाता है |
|
रायलैण्ड्स बनाम फ्लेचर का वाद किस न्यायालय द्वारा तथा किस वर्ष में निर्मित हुआ था? |
हाउस ऑफ लॉर्डस द्वारा सन् 1868 में |
|
कठोर दायित्व का सिद्धान्त यह अपेक्षा करता है कि- |
प्रतिवादी के उत्तरदायी होने के लिए आवश्यक नहीं है कि उसने साशय या उपेक्षापूर्वक कार्य किया है |
|
व्यापक विनाशकारिक परमाणु त्रासदी के मामले में प्रतिवादी का दायित्व किस सिद्धान्त से शासित होगा? |
आत्यन्तिक दायित्व |
|
राइलैण्ड्स बनाम फ्लेचर के नियम में उत्तरदायित्व के आधार में किसको रखा गया है? |
कठोर दायित्व |
|
कठोर दायित्व का सिद्धान्त यह अपेक्षा करता है कि- |
प्रतिवादी को उत्तरदायी होने के कारण यह आवश्यक नहीं है कि उसने साशय या उपेक्षापूर्ण कार्य किया हो |
|
कठोर दायित्व के अपकृत्य वे अपकृत्य हैं, जिनमें- |
प्रतिवादी के आशय या उपेक्षा को सिद्ध करने की कोई आवश्यकता नहीं होती है |
|
विद्यावती बनाम राजस्थान राज्य का वाद सम्बन्धित है- |
शासकीय कर्मचारियों के कृत्यों के लिए सरकार के दायित्व से |
|
अपने कर्मचारी द्वारा किए गए कार्य के लिए अपकृत्य की कार्यवाही के लिए राज्य का प्रतिनिधिक दायित्व है यदि कार्य- |
विधि द्वरा प्रदत्त शक्ति का जान-बूझकर या घोर उपेक्षापूर्ण दुरुपयोग है |
|
प्रतिनिधिक दायित्व के लिए यह आवश्यक है कि- |
स्वामी और सेवक का सम्बन्ध हो।, नियोजक के अनुक्रम में कारित अपकृत्य। कार्य करने के तरीके पर स्वामी का नियन्त्रण हो। |
|
अपकृत्य विधि में कौन-सा सूत्र प्रतिनिधिक दायित्व का आधार है? |
दूसरे के द्वारा कराया हुआ कार्य स्वयं किया हुआ समझा जायेगा |
|
प्रतिनिधिक दायित्व के अन्तर्गत - |
एक व्यक्ति अपने नौकर के कृत्यों के लिए तभी दायी होगा जब वे उसके सेवाकाल के दौरान किये गये हों |
|
किस परिस्थिति में एक व्यक्ति एक सेवक नहीं माना जाएगा? |
जब वह मालिक के लिए सेवाओं के लिए संविदा के अधीन कार्य करता है |
|
कौन-सा अभिकथन सही नहीं है? |
पिता अपने पुत्र द्वारा किए गए अपकृत्य के लिए सदैव उत्तरदायी होता है |
|
प्रतिनिधिक दायित्व का अर्थ है- |
अन्य व्यक्ति के दोषपूर्ण कार्य के लिए दायित्व जिसमें स्वयं भाग न लिया गया हो |
|
मानहानि- |
आपराधिक और सिविल दोष दोनों हैं |
|
अपकृत्य में विद्वेष का तत्व - |
मानहानि के अपकृत्य में आवश्यक है |
|
मोसोपाफ बनाम एम० जी० पिक्वर्स लि० किस अपकृत्य पर एक निदर्शक वाद है? |
मानहानि |
|
कौन-सा एक संवर्ग मानहानि के वाद में प्राप्य विनिर्दिष्ट प्रतिरक्षाओं को सही रूप में इंगित करता है? |
विशेषाधिकार, सत्यता, उचित टीका टिप्पणी |
|
मानहानि के वाद में कौन-सा बचाव दायित्व समाप्त नहीं कर देता? |
क्षमायाचना |
|
"कैसिडी बनाम डैली मिरर न्यूजपेपर्स लिमिटेड" का वाद सम्बन्धित है- |
मानहानि से |
|
मानहानि के अपकृत्य में कौन-सा बचाव उचित टिप्पणी का आवश्यक तत्व है? |
जिस विषय पर टिप्पणी की जा रही है, वह लोकहित का होना चाहिए।, यह तथ्य का एक दावा होना चाहिए।, इसमें विचारों की अभिव्यक्ति होनी चाहिए।, टिप्पणी उचित (न्यायोचित) होनी चाहिए। नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर संके तित |
|
मृतक व्यक्ति की मानहानि- |
दुष्कृति में वादयोग्य नहीं है |
|
एक मानहानि की कार्यवाही में कौन-सा बचाव का साधन नहीं होगा? |
आवश्यकता |
|
मानहानि के दीवानी वाद में कौन-सा बचाव उपलब्ध नहीं है? |
लोकहित |
|
एक मजिस्ट्रेट 'A' अपने वरिष्ठ अधिकारी को दी गई रिपोर्ट में सद्भाव से लोकहित में 'Z' के चरित्र पर लांछन लगाता है। 'Z' द्वारा वाद लाए जाने पर सर्वाधिक उपयुक्त प्रतिवाद होगा - |
आत्यन्तिकविशेषाधिकार |
|
अपमान वचन स्वतः ही वाद योग्य नहीं होता - |
मानद पर ग्रहण करने का आरोप |
|
अपकृत्य में मानहानि के लिए प्रमुख तत्व कौन-सा है? |
विद्वेष, कथन मानहानि कारक है, कथन प्रकाशित होता है |
|
किस वाद में उच्चतम न्यायालय ने "राज्य के सम्प्रभु कृत्य" के सिद्धान्त को नहीं माना? |
राजस्थान राज्य बनाम विद्यावती (1962) |
|
"सम्प्रभु तथा गैर सम्प्रभु कृत्यों के मध्य प्राचीन विभेद का अब राज्य के उत्तरदायित्व को निर्धारित करने के लिए अवलम्ब नहीं लिया जाता है।" |
नरेन्द्र राव एण्ड कम्पनी बनाम आन्ध्र प्रदेश राज्य |
|
तीसरे पक्ष की सम्पत्ति के सम्बन्ध में कार्य करते हुए, उसके कर्मचारियों द्वारा राज्य के सम्प्रभु के कार्य चाहे असावधानीपूर्वक किये जायें, दुष्कृति विधि में राज्य का प्रतिनिधिमूलक दायित्व नहीं है- |
क्योंकि, कर्मचारियों द्वारा असावधानीपूर्वक किया गया कार्य राज्य के सम्प्रभु कार्य का ही भाग है |
|
कौन-सा वाद अपने कर्मचारियों द्वारा किये गये अपकृत्यात्मक कार्यों के लिए राज्य के दायित्व से सम्बन्धित नहीं है? |
स्टेट ऑफ वेस्ट बंगाल बनाम भारत संघ |
|
किस वाद में सर्वप्रथम प्रभुत्वसम्पन्न और गैर-प्रभुत्वसम्पन्न कार्य के बीच अन्तर किया गया? |
पेनिनसुलर एण्ड ओरियण्टल स्कीम नेविगेशन कम्पनी बनाम सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इण्डिया |
|
कौन-सा वाद दुष्कृति में सरकार के दायित्व से सम्बन्धित नहीं है? |
कृष्ण बस सर्विस बनाम मंगली |
|
किस वाद में प्रथम वाद 'सम्प्रभु' और 'गैर-सम्प्रभु' कार्य में अन्तर किया गया था? |
पी० एण्ड ओ० स्टीम नेविगेशन कम्पनी बनाम सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इण्डिया |
|
कस्तुरीलाल रलियाराम जैन बनाम स्टेट ऑफ यू० पी० का सम्बन्ध है- |
राज्य के दायित्व से |
|
सही उत्तर बताइये- भारत में राज्य का दायित्व विनियमित होता है- |
भारत के संविधान के अनुच्छेद 300 द्वारा |
|
सेना का एक चालक सेना का ट्रक चला रहा था। इस ट्रक से सेना के जवान घर जाने के लिए अपनी रेलगाड़ी के लिए स्टेशन जा रहे थे। उतावलेपन तथा उपेक्षापूर्वक ट्रक चलाने के कारण ट्रक ने एक पैदल यात्री को टक्कर मार दी जिससे उसकी मृत्यु हो गई। कौन-सा एक सही है? |
इस मामले में भारत सरकार पर प्रतिनिधिक दायित्व अधिरोपित होगा |
|
राज्य के सेवकों के कृत्यों के लिए दुष्कृति में राज्य के दायित्व के सन्दर्भ में सम्प्रभु एवं असम्प्रभु कार्यों के मध्य भिन्नता सर्वप्रथम किस वाद में दर्शायी गई थी? |
पी० एण्ड ओ० स्टीम नेवीगेशन कं० बनाम सेक्रेटरी ऑफ स्टेट |
|
एक व्यापारी का उर्वरक परेषण जो अधिकारियों द्वारा अधिग्रहण किया गया था, अप्रयोज्य था जब उर्वरक उसे वापस किया गया। व्यापारी ने अधिकारियों के उपेक्षा के कृत्य के लिए राज्य से प्रतिकर का दावा किया- |
चूँकि अब प्रभुसत्ता जनता में निहित है, राज्य प्रतिनिधिक दायित्व से किसी भी उन्मुक्ति का प्रतिवाद नहीं ले सकता और राज्य भी उत्तरदायी है |
|
बिना हानि के क्षति का क्या अर्थ है? |
केवल विधिक क्षति के रूप में हानि |
|
"यूबी जस ईबी रैमेडियम" से अभिप्रेत है कि - |
यदि अधिकार है तो उपचार है |
|
बिना क्षति के हानि से सम्बन्धित नहीं है- |
भीम सिंह बनाम जम्मू एण्ड कश्मीर राज्य |
|
बिना क्षति के हानि का अर्थ है- |
विधिक अधिकार का उल्लंघन किये बिना हानि पहुँचाना |
|
कौन-सा वाद 'बिना क्षति के हानि' सिद्धान्त से सम्बन्धित नहीं है? |
म्यूनिसिपल कार्पोरेशन, ऑफ आगरा बनाम अशर्फीलाल |
|
स्वतः अनुयोज्य अपकृत्य वे हैं जिनमें - |
वादी वाद ला सकता है यद्यपि उसे कोई वास्तविक हानि नहीं उठानी पड़ी है |
|
ऐशबी बनाम ह्वाइट का वाद सम्बन्धित है- |
बिना हानि के क्षति से |
|
बिना क्षति के विधिक अधिकार का अतिक्रमण" का कौन-सा उदाहरण है? |
दूसरों की भूमि पर अतिचार |
|
'ऐशबी बनाम ह्वाइट' का वाद निर्णित किया - |
होल्ट सी० जे० ने |
|
"जोखिम की जानकारी में जोखिम की स्वीकृति आवश्यक रूप से समविष्ट नहीं है।" यह सिद्धान्त सर्वप्रथम किस वाद में अधिकथित किया गया - |
थॉमस बनाम क्वार्टर मेन |
|
जब तक किसी के अधिकारों का उल्लंघन न हुआ हो, अपकृत्य विधि में वाद नहीं लाया जा सकता चाहे भले ही हानि कारित हुई हो। यह अभिव्यक्त किया - |
इन्जूरिया नलियस परसोना |
|
"जहाँ अधिकार है, वहाँ उपचार भी है" सूत्र से सम्बन्धित है- |
एशबी बनाम ह्वाइट |
|
ब्रैडफोर्ड कॉर्पोरेशन बनाम पिकिल्स का वाद किससे सम्बन्धित है? |
बिना क्षति के हानि |
|
"जहाँ अधिकार है वहाँ उपचार भी है" का अर्थ है- |
प्रत्येक दोष के लिए सदैव उपचार उपलब्ध है |
|
अपकृत्य में सहभागी के सिद्धान्त के पीछे यह विचार है कि जहाँ प्रत्येक पक्षकार समान रूप से दोषी हैं वहीं विधि उस पक्षकार का पक्ष लेती है- |
जिसकी क्षति हुई और जो असहाय है |
|
बिना हानि के क्षति का अर्थ है- |
बिना हानि पहुँचाये विधिक अधिकार का उल्लंघन |
|
'बिना क्षति के हानि' सूत्र किस वाद में लागू नहीं होता? |
मारजेटी बनाम विलियम |
|
'बिना हानि के क्षति' के सिद्धान्त के प्रमुख वाद का नाम है- |
ऐशवी बनाम ह्वाइट |
|
कभी ऐसा होता है कि किसी व्यक्ति के अधिकार का उल्लंघन हो जाता है, लेकिन उसे कोई क्षति नहीं होती। किस सूत्र द्वारा हम इसको प्रदर्शित कर सकते हैं? |
इन्जूरिया साइन डैमनो |
|
भारत में 'बिना हानि के क्षति' का सूत्र लागू किया गया- |
म्यूनिसिपल बोर्ड ऑफ आगरा बनाम अशरफी लाल |
|
कौन-सा वाद 'बिना हानि के क्षति' सूत्र से सम्बन्धित नहीं है? |
चेसमोर बनाम रिचर्ड्स |
|
कौन-सा कथन सही है? अवैध परिरोध के अपकृत्य के लिए- |
वादी को किसी भी दिशा में जाने सक अवरुद्ध किया जाना चाहिए |
|
अवैध परिरोधों में से एक है- |
बन्दी प्रत्यक्षीकरण |
|
अवैध परिरोध के शिकार व्यक्ति को प्राप्त होने वाले उपचारों को कौन-सा एक सही रूप में परिलक्षित करता है? |
आत्म सहायता, बन्दी प्रत्यक्षीकरण नुकसानी के लिए कार्यवाही |
|
'X' को किसी भी विधिसम्मत आधार के बिना एक मिनट के लिए निरुद्ध किया जाता है- |
यह एक अप्राधिकृत बन्दीकरण था |
|
'A' ने अवैध रूप से 'B' को एक कमरे में बन्द कर - दिया। 'B' के पास एक दूसरी चाभी है जिससे वह कमरे के भीतर के द्वारा खोल सकता है। 'B' को स्मरण नहीं रहता कि उसके पास चाभी है। परिणामस्वरूप वह दो घण्टे तक बन्द रहता है। वाद में 'A' वापस आता है और कमरा खोलता है। 'A' - |
दायी है क्योंकि उसका कार्य विधि विरुद्ध है |
|
अवैध परिरोध की दशा में- |
स्वतन्त्रता को भागतः सीमित करके दोष गठित किया जा सकता है |
|
प्राइवेट न्यूसेन्स, व्यक्ति के किस अधिकार की बाबत क्षति है? |
सम्पत्ति का उपभोग |
|
'अ' के वृक्षों और झाड़ियों को 'ब' की कम्पनी से निकली भाप के कारण क्षति पहुँचती है। 'अ' द्वारा 'ब' के विरुद्ध कार्यवाही में 'ब' यह तर्क देता है कि उस स्थान के निवासी उसकी कम्पनी के कार्य से लाभान्वित होते हैं। इस मामले में -
|
'ब' न्यूसेन्स के लिए उत्तरदायी होगा तथा उसका तर्क बचाव हेतु स्वीकार नहीं किया जायेगा |
|
प्राइवेट न्यूसेन्स के मामले में पीड़ित व्यक्ति को प्राप्त होने वाले उपचारों को कौन-सा एक ठीक-ठीक बताता है? |
नुकसानी के लिए कार्रवाई, व्यादेश, उपशमन |
|
प्रतिवादी ने एक भवन का निर्माण किया जिसके कारण वादी के घर के भूतल पर दो खिड़कियों से आने वाला प्रकाश घट गया। वाद में उनमें सदा बिजली के प्रकाश को आवश्यकता पड़ने लगी। नुकसानी की कार्यवाही का आधार हो सकता है - |
प्राइवेट न्यूसेन्स |
|
एक मोहल्ले में एक कसाईघर है। 'X' ने उस मोहल्ले में एक आवासीय मकान लिया। वह कसाई घर 'X' के लिए न्यूसेन्स बन जाता है। 'X' क्षतिपूर्ति के लिए वाद करता है- |
कसाई घर की यह कहने की अनुमति होगी कि 'X' को इस खतरे का पूर्व ज्ञान था |
|
हालीवुड सिल्वर फाक्स फार्म लिमिटेड बनाम इमेट का वाद सुसंगत है- |
उपताप में |
|
न्यूसेन्स में प्रतिवादी 'अप्रायिकतः संवेदनशीलवादी' के प्रतिदायी है- |
केवल व्यक्तिगत क्षति के वादों में, केवल सम्पत्ति की क्षति के वादों में, व्यक्तिगत क्षति और सम्पत्ति की क्षति दोनों के वादों में, उपरोक्त में से कोई नहीं |
|
लोक न्यूसेन्स में कार्यवाही का व्यक्तिगत अधिकार होता है- |
जब नुकसान का सबूत होता है |
|
प्रतिवादी ने एक मकान के तहखाने में कागज के डिब्बों का विनिर्माण प्रारम्भ किया। मकान का ऊपरी भाग वादी के अभियोग में था। प्रतिवादी के कारोबार के लिए गर्म और शुष्क वायु की आवश्यकता थी और उसने तहनुसार तहखाने को गर्म किया। इससे वादी की मन्जिल का तापमान बढ़ गया और उससे वादी द्वारा भण्डारकृत भूरा कागज सूख गया और उसकी मूल्य घट गया। प्रतिवादी- |
दायी नहीं है क्योंकि वादी एक अत्यन्त नाजूक वस्तु का व्यापार कर रहा था |
|
"उपताप से तात्पर्य, किसी व्यक्ति द्वारा भूमि के प्रयोग अथवा उपभोग अथवा उससे सम्बन्धित अधिकार को विधि विरुद्ध तरीके से क्षति अथवा असुविधा कारित करना है।" उपताप की यह परिभाषा दी है- |
पोलक ने |
|
'प्राइवेट उपताप' का आवश्यक तत्व नहीं है? |
वादी की ओर से त्रुटि का अभाव |
|
प्रतिवादी की भूमि पर उगने वाले एक वृक्ष की शाखा भूमि से 30 फुट की ऊँचाई पर राजमार्ग पर झुलती थी। अच्छे मौसम में वह शाखा टूट कर वादी के वाहन पर गिर गई। वाहन राजमार्ग से जा रहा था। वादी ने प्रतिवादी के विरुद्ध वाहन को नुकसान पहुँचाने के लिए न्यूसेन्स के आधार पर वाद संस्थित किया। कौन-सा निष्कर्ष सही है? |
प्रतिवादी न्यूसेन्स के लिए दायी नहीं है |
|
'ख' की कम्पनी से निकली भाप के कारण 'क' के वृक्षों और झाड़ियों को क्षति पहुँचती है। 'क' द्वारा 'ख' के विरुद्ध कार्यवाही में 'ख' यह तर्क देता है कि उस स्थान के निवासी उसकी कम्पनी के कार्य से लाभान्वित होते हैं। इस मामले में- |
इस प्रकार की क्षति चूँकि सम्पत्ति की क्षति थी अतएव 'ख' न्यूसेन्स के लिए उत्तरदायी होगा और उसका तर्क बचाव हेतु अमान्य होगा |
|
आलू की कमी थी और प्रतिवादी की दुकान के बाहर लम्बी लाइनें लगती थीं। प्रतिवादी के पास फल और सब्जी बेचने का लाइसेंस था और वह प्रति राशन कार्ड केवल 1 किलो आलू बेचता था। लाइनें राजमार्ग तक पहुँच जाती थीं। और पड़ोस की दुकानों को बाधा पहुँचती थी। पड़ोस के दुकानदारों ने प्रतिवादी के विरुद्ध न्यूसेन्स की कार्रवाई की। कौन-सा एक विनिश्चय सही होगा? |
प्रतिवादी न्यूसेन्स के लिए दायी नहीं है |
|
'A' अपनी संगीत प्रणाली को नीचे सुर में बजा रहा है। उसका पड़ोसी 'B' संगीत की ध्वनि सहन नहीं कर सकता क्योंकि उसे हृदय रोग है। 'B' को परिणामस्वरूप हृदयं आघात हो जाता है। 'B', 'A' के विरुद्ध न्यूसेन्स का वाद लाता है। 'A' - |
दायी नहीं है क्योंकि कोई भी दूसरे की स्वतन्त्रता इस आधार पर सीमित नहीं कर सकता कि उसकी अपनी विशेष परिस्थिति है |
|
राजमार्गों में रुकावट डालना एक न्यूसेन्स (उपताप) है- |
चाहे रुकावट पूर्ण या आंशिक हो |
|
उपताप का तात्पर्य किसी व्यक्ति द्वारा भूमि के प्रयोग अथवा उपयोग अथवा उससे सम्बद्ध या उससे सम्बन्धित किसी अधिकार के साथ विधि विरुद्ध हस्तक्षेप है। उपताप की यह परिभाषा दी है- |
विनफील्ड ने |
|
उपताप के अपकृत्य का कार्यवाही में वादी को प्रतिवादी के विरुद्ध किन बातों को सिद्ध करना होता है- |
यह आवश्यक नहीं है कि हस्तक्षेप अयुक्तियुक्त है, |
|
उपताप के विरुद्ध कार्यवाही में कौन-सा प्रभावी प्रतिरक्षा का आधार है? |
सांविधिक प्राधिकार |
|
वादी की केवल एक आँख थी। उसे प्रतिवादियों द्वारा नियोजित किया गया था। वह ऐसी दशाओं में काम कर रहा था, जिसमें आँख को क्षति पहुँचने का जोखिम था। किन्तु क्षति की सम्भावना इतनी नहीं थी कि प्रतिवादियों को एक सामान्य दो आँख वाले कर्मकार को काले चश्मे प्रदान करने की आवश्यकता हो। कार्य करते समय वादी को आँख में क्षति पहुँची। प्रतिवादी- |
दायी है क्योंकि वादी के कार्य की प्रकृति ऐसी थी जिसमें आँख की क्षति सम्भाव्य थी |
|
प्रतिवादियों ने जो नगर निगम के कर्मचारी थे सड़क में एक मेनहोल खोला और संध्या समय उसे खुला ही छोड़ दिया किन्तु उस पर केन्वास की झोपड़ी बना दी। कोई व्यक्ति वहाँ नहीं था। चेतावनी स्वरूप यहां प्रकाश की व्यवस्था की गई थी। वादी एक आठ वर्ष का बालक था। उसने झोपड़ी का एक प्रकाश लेम्प उठा लिया और उससे खेलने लगा। खेलते हुए उसका पैर मैनहोल में पड़ गया ओर वह छेद में गिरा। गिरते ही भयानक धमाका हुआ और वादी जल गया। प्रतिवादीगण - |
दायी हैं, क्योंकि क्षति खतरे से ज्ञात स्त्रोत से हुई है यद्यपि घटनाओं का क्रम ऐसा था जिसका पूर्वाभास नहीं हो सकता था |
|
वादी एक महिला है जो रेस्तारां गई थी। वहाँ छत का पंखा गिरने से उसे क्षति पहुँची। पंखा गिरने का कारण था उसकी लटकने वाली छड़ की धातु में प्रच्छन्न दोष। प्रतिवादी के विरुद्ध कार्रवाई में वह - |
दायी है, क्योंकि क्षति का पूर्वाभास हो सकता था |
|
पूर्व चिन्तन का जो मार्गदर्शक सिद्धान्त वेगन मांड के वाद में, अपकृत्य में दायित्व के अवधारण के लिए अधिकथित किया गया, उसका भारत में अनुसरण किस एक वाद में किया गया? |
वीरन बनाम कृष्णमूर्ति |
|
रेल प्राधिकारियों की, उपेक्षा के कारण एक भयानक ट्रेन दुर्घटना घटी दूरदर्शन पर इस दुर्घटना का समाचार सुनकर और देखकर इस ट्रेन के एक यात्री की माता को गम्भीर आघात हुआ जिससे उसे हृदयाघात हुआ। इस आघात के लिए माता ने रेल प्राधिकारियों से नुकसानी की माँग की। कौन-सा एक कथन सही है? रेल प्राधिकारी दायी नहीं है, क्योंकि वादी- |
को कारित आघात और दुर्घटना के बीच समय और स्थानिक प्रत्यक्ष सम्बन्ध नहीं था |
|
'अ' ने एक सार्वजनिक मार्ग पर एक खाई खोद रखी थी। 'ब' शाम को अपनी साइकिल पर सवार होकर जा रहा था। वह उस खाई को अंधेरा होने के कारण नहीं देख पाया और खाई में गिरकर चोटग्रस्त हो गया। उस पर कोई रोशनी, खतरे का संकेत, सावधानी की सूचना या अवरोध नहीं लगाया गया था। साइकिल सवार भी अपनी साइकिल में सामने लाइट लगाये हुए नहीं था। इस मामले में – |
चूँकि 'अ' की असावधानी के कारण दुर्घटना हुई, अतएव वह दायित्वाधीन है |
|
एक बच्चा सड़क पर खेल रहा था और एक टैक्सी उसके ऊपर निकलने ही वाली थी। ड्राइवर ने ब्रेक लगाकर टैक्सी को तुरन्त रोक दिया। बालक को हल्की क्षति पहुँची। बालक की माता 100 मीटर दूर अपने घर से सब देख रही था। उसे स्वाभाविक आघात पहुँचा- |
दायी नहीं है क्योंकि उसका माता के प्रति सावधानी बरतने का कोई कर्तव्य नहीं था |
|
बरसात और तेज हवा से एक दिन विद्युत खम्भे से एक तार टूट गया मोहन को वह तार नहीं दिखा और उसने उस पर से अपनी साइकिल चलाई जिससे करण्ट लगने से उसकी मृत्यु हो गई। उसकी विधवा ने विद्युत् बोर्ड के विरुद्ध नुकसानी का वाद दाखिल किया। कौन दायी है? |
बोर्ड दायी है और दायित्व का आधार ऐसी कार्रवाई के मात्र प्रकृति में ही अन्तर्निहित खतरा है जिसका पूर्वानुमान लगाया जा सकता था |
|
अपकृत्य कार्य के फलस्वरूप किस सीमा तक दायित्व होगा इसके लिए प्रिवी कौन्सिल ने पूर्वानुमान का मापदण्ड अपनाया? |
बेगनमाउण्ड नं० 1 वाद में |
|
'परिणामों की दूरस्थता' निश्चित करने के लिए 'युक्तियुक्त पूर्वानुमान' का मापदण्ड किसमें अभिनिर्धारित किया गया था? |
बैंगन माउण्ड (नं०1) के वाद में |
|
प्रतिवादी के स्वामित्वाधीन भवन की, जो राजमार्ग के पास था, खिड़कियों के पल्ले एक हवाई हमले में शुक्रवार को टूट गए। उसके वाद आने वाले बृहस्पतिवार को खिड़की से काँच के गिरने से वादी को क्षति पहुँची। तब एक प्रतिवादी ने मरम्मत नहीं की थी। इस मामले में- |
प्रतिवादी न्यूसेन्स के लिए दायी है |
|
दिल्ली नगर निगम बनाम सुभागवंती में उच्चतम न्यायालय ने कौन-सा सिद्धान्त लागू किया? |
स्वयं प्रमाण |
|
' A' अपने शिशु पुत्र 'C' की देखभाल के लिए एक शल्यचिकित्सक 'B' को नियोजित करता है। 'B' की उपेक्षा के कारण ` C' को क्षति पहुँचती है- |
'A' और 'C' दोनों 'B' के विरुद्ध अपकृत्य में वाद ला सकते हैं |
|
'A' को 'B' ने अपने कारखाने में नियोजित किया। नियोजन के दौरान उसे 'C' के द्वारा विनिर्मित हथौड़े का प्रयोग करना पड़ता था। 'A' के कार्य प्रबन्धक 'D' ने यह पाया कि हथौड़ा दोषपूर्ण था, किन्तु उसने कहा कि वह उसका प्रयोग करता रहे। हथौड़े में दोष के कारण 'A' को क्षति पहुँची। 'A' द्वारा नुकसानी के लिए कार्रवाई में:- |
'C' जो विनिर्माता है दायी नहीं है, क्योंकि 'D' की जानकारी होने से विनिर्माता द्वारा की गई उपेक्षा और वादी की क्षति के बीच हेतुक श्रृंखला की गई |
|
'A' शहर में व्यस्त सड़क पर उपेक्षापूर्ण ढंग से 50 किमी० प्रति घण्टा की रफ्तार से अपनी कार चला रहा था। उसने 'B' को टक्कर मारकर उसे क्षति पहुंचाई। इन तथ्यों पर भारत के उच्चतम न्यायालय ने यह स्थापित 'किया कि 'A', 'B' की क्षतिपूर्ति करने के लिए दायी है। इसका अर्थ यह है कि उच्चतम न्यायालय ने यह विधि अभिकथित की है कि क्षतिग्रस्त पक्षकार उन सब मामलों में क्षतिपूर्ति का हकदार है जहाँ- |
उपेक्षा के कारण दूसरे को नुकसान कारित होता है |
|
'B' द्वारा चलाए जा रहे चिकित्सालय में एक रोगी को, लाया गया। रोगी की शल्य चिकित्सा की जाती है। ऑक्सीजन पूर्ति करने वाली मशीन दोषपूर्ण होने के कारण रोगी की शल्य चिकित्सा मेज पर मृत्यु हो गई।तब- |
'B' दायी होगा, क्योंकि चिकित्सालय स्टाफ चिकित्सालय उपकरणों को समुचित दशा में रखने के लिए उपेक्षावान था |
|
डोनोघ बनाम स्टीवेन्सन मामले में हाउस ऑफ लाईस ने निर्णय किया कि - |
उपेक्षा एक सुभिन्न अपकृत्य है |
|
योगदायी उपेक्षा से सम्बन्धित किस वाद में न्यायालय ने सर्वप्रथम एक सिद्धान्त को लागू किया था और जिसे 'अन्तिम अवसर का नियम' के नाम से जाना गया? |
डेषिस बनाम मान |
|
कौन-सा अपकृत्य की कार्यवाही में बचाव नहीं हो सकता? |
जो जानता है उसे क्षति नहीं होती |
|
अपकृत्य विधि में कौन-सा सामान्य बचाव नहीं है? |
वालेण्टी नॉन फिट इन्जूरिया |
|
अपकृत्य में दैवकृत का बचाव (प्रतिवाद) - |
अब निरर्थक हो गया है, क्योंकि इसका प्रयोजन अब 'हानि के पूर्वानुमान की अवधारणा' से पूरा किया जाता है |
|
अपकृत्य में कौन सामान्य बचाव नहीं है? |
भूल |
|
'बचाव-कार्यों के मामलों' में सम्मति का प्रतिवाद लागू न होने के सिद्धान्त पर निदर्शक वाद है - |
हेन्स बनाम हारब्रुड |
|
सहमति से किये गये कार्य का बचाव किस परिस्थिति में मिलेगा? |
जहां वादी ने स्वेच्छा से क्षति पहुँचाने के लिए सहमति दे दी थी |
|
"सहमति से उठाई गई क्षति" सूत्र के लागू होने के लिए क्या आवश्यक नहीं है? |
जोखिम का मात्र ज्ञान ही पर्याप्त है |
|
किस वाद में अभिनिर्धारित किया गया कि खतरे का आभास (ज्ञान) जोखिम उठाने की सहमति नहीं है? |
स्मिथ बनाम बेकर |
|
'सम्मति' ऐसे बचावकर्ता के दावे के विरुद्ध कोई प्रतिवाद नहीं बन सकती है जिसको प्रतिवादी की उपेक्षा से उत्पन्न जोखिम से किसी का बचाव करते हुए क्षति पहुँची है। इस सिद्धान्त पर निदर्शक वाद है- |
हेन्स बनाम हारवुड |
|
कम्पनी अपने निदेशकों द्वारा अपनी नौकरी के दौरान किये गये कार्यों के लिए उत्तरदायी होती है। यह कथन- |
पूर्णतया सत्य है |
|
जब असाधारण प्राकृतिक शक्तियाँ कार्यरत होती हैं जिससे वादी को भारी क्षति होती है तो प्रतिवादी अपनेबचाव का तर्क ले सकता है- |
दैवकृत का |
|
कौन-सा अपरिहार्य दुर्घटना के बचाव से सम्बन्धित है? |
रामलिंगा नाडार बनाम नारायन रेड्डियार |
|
कौन-सा एक वाद अपकृत्य में आवश्यकता के प्रतिवाद से सम्बन्धित है? |
किर्क बनाम ग्रेगरी |
|
मेट्रोपोलिटन एसायलम डिस्ट्रिक मैनेजर्स बनाम हिल किस बचास (प्रतवाद) का एक निदर्शक वाद है? |
सांविधिक प्राधिकार के |
|
दैवकृत के प्रतिवाद पर कौन-सा निदर्शक वाद है? |
निकोल्स बनाम मार्सलैण्ड |
|
"अतिचारी को हटाने में बल प्रयोग के औचित्य के लिए वादी का सम्पत्ति में वास्तविक कब्जा या कब्जा करने का अधिकार होना आवश्यक है।" सम्पत्ति की निजी (प्राइवेट) प्रतिरक्षा के सम्बन्ध में इस सिद्धान्त का अधिकथन किया गया है- |
होम्स बनाम बैगी के वाद में |
|
'स्वेच्छा से क्षति स्वीकार करने' के नियम की परिभाषा के रूप में कौन-सा सही नहीं है? |
जोखिम का ज्ञान होना मांत्र ही सहमति है |
|
एक कोहरे वाली रात्रि में 'A' ने अपना स्कूटर 'B' के गैरेज में रख दिया। उसे वहाँ पर पाकर 'B' ने उसे गैरेंज से उठाकर सड़क के किनारे रख दिया। यहाँ - |
'B' ने कोई अपकृत्य नहीं किया क्योंकि उसने अपनी सम्पत्ति के संरक्षण के लिए कार्य किया |
|
'बाधा' के वाद में एक अच्छा बचाव है- |
सम्पत्ति का युक्तियुक्त प्रयोग, उसे रोकने के लिए उचित सावधानी और कौशल का प्रयोग, वह दान की शर्तों के अनुसार है, उपरोक्त में से कोई नहीं |
|
दैवकृत का प्रतिवाद - |
कठोर दायित्वों के सभी अपकृत्यों में प्रयोज्य है |
|
यह तर्क कि अपकृत्य के रूप में परिवादित परिणाम न तो प्रतिवादी द्वारा आशयित थे और न ही उनका पूर्वानुमान लगाना और युक्तियुक्त सावधानी और कौशल के प्रयोग से टालना सम्भव था, कौन-सा प्रतिवाद है? |
अपरिहार्य दुर्घटना का प्रतिवाद |
|
किसमें 'स्वेच्छा से स्वीकृति क्षति' की प्रतिरक्षा उपलब्ध नहीं होगी? |
संविदा के अधीन विधिसम्मत कार्य करते समय क्षति कारित होती है |
|
'दैविक कृत्य' के प्रतिवाद का आवश्यक तत्व है - |
प्राकृतिक शक्तियों का अकस्मात् परिचालन जिसका कोई मानव मस्तिष्क अनुमान न कर सके |
|
स्टेनले बनाम पॉवेल का वाद सम्बन्धित है इस प्रतिरक्षा से- |
अवश्यम्भावी दुर्घटना |
|
अपकृत्य के लिये कौन-कौन से पर्याप्त प्रतिरक्षण हैं
|
स्वेच्छा से स्वीकृत कार्य से क्षति नहीं होती, दैवी कृत्य |
|
अपकृत्य के कुछ निश्चित कृत्यों (कार्यों) में कौन पर्याप्त (बचाव) प्रतिरक्षा है - |
सहमति से किये गये कृत्य, दैवकृत |
|
कौन-सा प्रतिवाद अपकृत्य में विशिष्ट प्रतिवाद माना जाता है? |
अंशदायी असावधानी |
|
ज्ञान का अर्थ सहमति नहीं होता, व्यक्त किया जाता है-- |
साइन्टाई नॉन फिट इन्जूरिया |
|
'A' ने अपनी भूमि पर एक पेड़ लगाया। उसी शाखाएँ 'B' की भूमि पर लटक रही हैं। 'B' के अनुसार 'B' हकदार है- |
अपनी भूमि पर रहते हुए बाहर लटकने वाली शाखाओं की छंटनी करने का और 'A' को सूचना देने का |
|
यह सिद्धान्त कि "खतरे का मात्र ज्ञान खतरा स्वीकार करने की सहमति नहीं है, अभिनिर्धारित किया गया था- |
स्मिथ बनाम बेकर |
|
भूल- |
अपकृत्य में दायित्व से छूट का एक स्पष्ट आधार है |
|
मेट्रोपोलिटन एसायलम डिस्ट्रिक्ट मैनेज़र बनाम हिल. जिस प्रतिवाद के सम्बन्ध में एक निदर्शक वाद है, वह है- |
सांविधिक प्राधिकार |
|
किस मामले में, 'स्वेच्छा से स्वीकृत क्षति' की प्रतिरक्षा उपलब्ध नहीं होगी? |
एक धार्मिक समारोह में नंगी तलवार से खेल-खेल में युद्ध करते समय क्षति कारित होती है |
|
वादों में से कौन-सा एक आवश्यकता 'के प्रतिवाद से सम्बन्धित है? |
किर्क बनाम ग्रेगरी |
|
अपकृत्य विधि के अन्तर्गत 'सहमति' का सामान्य प्रतिवाद जिस सूत्र में निहित है, वह है- |
स्वेच्छा से उठायी गई हानि के लिये किसी अन्य को उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता |
|
यह दलील कि अपकृत्य को जन्म देने वाला परिणाम न तो प्रतिवादी द्वारा आशयित था और न ही उनका पूर्वानुमान लगाना अथवा युक्तियुक्त सावधानी एवं कौशल के प्रयोग से टालना सम्भव था, किस प्रतिवाद के नाम से जानी जाती है- |
अपरिहार्य दुर्घटना का प्रतिवाद |
|
अपरिहार्य दुर्घटना के प्रतिवाद की सार्थकता - |
अतिचार के वाद में |
|
सामान्यतः दुष्कृति के अन्तर्गत की गई कार्रवाई में यह बचाव नहीं है- |
तथ्य को भूल |
|
अपकृत्यात्मक दायित्व - |
विधि द्वारा नियम किसी कर्तव्य के भंग से उत्पन्न होता है |
|
अपकृत्यों में से किसमें दायित्व 'दोष' पर आधारित नहीं होता है? |
अतिचार |
|
अपकृत्य के दायित्व का आधार है- |
विधिक अधिकार का अतिक्रमण |
|
'अ' ने अपनी कार सड़क के किनारे खड़ी की। 'अ' का घरेलू कुत्ता कार के अन्दर था। कुत्ता कभी खतरनाक नहीं था। 'ब' कार के पास से जा रहा था। कुत्ता भौंका और खिड़की का शीशा अचानक कुत्ते के पंजे से टूटकर वादी की आँख में लगा- |
अ' क्षतिपूर्ति के लिए उत्तरदायी नहीं है |
|
"संयुक्त अपकृत्यकर्ताओं द्वारा आपस में अंशदान नहीं होगा।" का नियम समाप्त कर दिया गया था- |
विधायी अधिनियम द्वारा |
|
अपकृत्यात्मक दायित्व ऐसे कर्तव्य के भंग होने से उत्पन्न होता है, जो कि- |
विधि द्वारा निर्धारित किया गया था |
|
द्वेष का तत्व- |
उपताप एवं द्वेषपूर्ण अभियोजन में आवश्यक एवं सुसंगत है |
|
अपकृत्य के दायित्व का आधार है- |
विधिक अधिकार का अतिक्रमण |
|
किसका कथन है कि "त्रुटि सभी अपकृत्यात्मक दायित्व का आधार है"- |
फ्रेजर |
|
अपने सेवक द्वारा किए गए अपकारों के लिये भारत में राज्य के दायित्व के सम्बन्ध में- |
दायित्व उसी प्रकार का है जो वर्ष 1858 से पूर्व ईस्ट इण्डिया कम्पनी का था |
|
अपकृत्य का दायित्व किसी व्यक्ति पर अधिरोपित किया जा सकता है- |
कृत्य के सामान्य एवं स्वाभाविक परिणामों के लिए, आशय युक्त दोनों के लिए, उस परिणामों के लिए जो अधिक दूरवर्ती न हों |
|
षड्यन्त्र के अपकृत्य में अपेक्षा है- |
दो या अधिक व्यक्तियों के बीच करार, किसी अवैध कार्य को करना या वैध कार्य को अवैध साधन से करना, किसी अन्य पक्षकार को परिणामिक नुकसान |
|
यदि संघ का उद्देश्य विधिसम्मत हितों को बढ़ाना नहीं रहा है बल्कि कसाई वादी को नुकसान पहुँचाता रहा हो, एक षड्यन्त्र का होना माना गया था- |
वनेन बनाम लीथम के वाद में |
|
जब एक से अधिक व्यक्ति एक समान षड्यन्त्र को आगे बढ़ा रहे हों, तथा उनमे से कोई एक गलत काम करता है, जो केवल निजी गलती में परिणित हो जाता है, तो दुष्कृति विधि में जिम्मेदारी निर्धारित की जायेगी - |
उन सभी पर |
|
कौन-सा कारक प्रतिवादी को षड्यन्त्र के अपकृत्य के लिए दायी ठहराए जाने के लिए महत्वपूर्ण है? |
साधन, आशय और कारित नुकसानी |
|
कौन-से एक वाद में प्रत्यक्षता का परीक्षण नुकसान की परोक्षता को निश्चित करने के लिए किया गया है? |
री पोलीमिस |
|
कौन-सा एक षड्यन्त्र के अपकृत्य के लिए वाद-हेतुक आधार है? |
सहमति और प्रत्यक्ष कार्य जो वादी को हानि पहुँचाए |
|
षड्यन्त्र के अपकृत्य में कौन-सा महत्वपूर्ण अवयव नहीं है? |
संयुक्त होकर कार्य करने वाले द्वारा अपनाया गया साधन |
|
'A' और 'B' पर व्यक्ति 'C' के बीच षड्यन्त्र का अपकृत्य किया जाता है जब- |
'A' और 'B' जानबूझकर 'C' को नुकसान पहुँचाते हैं, उनके कार्य से वास्तव में नुकसान होता है |
|
यह प्रश्न कि क्या प्रतिवादी ने वादी के प्रति अपने कर्तव्य का भंग किया है या नहीं इस पर निर्भर है कि क्या? |
उसने युक्तियुक्त मनुष्य के रूप में कार्य नहीं किया |
|
षड्यन्त्र की कार्यवाही में किस एक का प्रतिरक्षा के रूप में सफलतापूर्वक अभिवचन किया जा सकता है? |
अपने कारोबार की नीति के अनुकूल संयोजन किया गया |
|
जिस वाद में वादी एक फुटकर समाचार-पत्र अभिकर्ता था तथा उसका क्षतिपूर्ति का दावा किया कि उसके विरुद्ध षड्यन्त्र रचा गया था, असफल रहा था, वह वाद- |
सौरल बनाम स्मिथ का था |
|
षड्यन्त्र के अपकृत्य में संयोजन का प्रयोजन होना चाहिए- |
पीड़ित व्यक्ति के वैध अधिकार का अतिक्रमण |
|
षड्यन्त्र द्वारा दुष्प्रेरण का अपराध और आपराधिक षड्यन्त्र के अपराध में क्या आधारभूत अन्तर है? |
षड्यन्त्र की दशा में, केवल करार पर्याप्त है, जबकि षड्यन्त्र द्वारा दुष्प्रेरण की दशा में षड्यन्त्र के अनुसरण में कोई कार्य घटित होना चाहिए |
|
एक कार के मालिक X ने अपने मित्र Y को अपनी कार अपने दफ्तर तक चलाने को कहा। जैसे ही कार X के दफ्तर के पास पहुँची उसने ४ द्वारा उपेक्षापूर्वक कार चलाने की वजह से एक पैदल यात्री P को टक्कर मारी और वह गम्भीर रूप से घायल हो गया। P ने X के विरुद्ध नुकसानी का वाद दाखिल किया- |
X दायी है, क्योंकि Y उसकी देख-रेख और प्राधिकार में कार चला रहा था |
|
प्रतिवादी रेल कम्पनी की उपेक्षा के कारण वादी और उसके कुटुम्ब को गलत रेलवे स्टेशन पर उतरना पड़ा। उन्हें कोई वास सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। परिणामस्वरूप वादी को ठण्ड लग गई। वादी ने उसके उपचार में किए गए चिकित्सीय व्यय और कार्यालय में उसका जो वेतन काटा या उससे होने वाली हानि के लिए नुकसानी का दावा किया। नुकसानी का दावा सफल नहीं हो सकता। असफलता का आधार है- |
अयुक्तियुक्तता |
|
बटरफील्ड बनाम फारेस्टर का वाद सम्बन्धित है- |
योगदायी उपेक्षा से |
|
'क' ने लोक मार्ग पर एक खाई खोद रखी थी। 'ख' शाम को अपनी साइकिल पर सवार होकर जा रहा था। वह इस खाई को अन्धेरा होने के कारण नहीं देख पाया और खाई में गिरकर क्षतिग्रस्त हो गया। इस खाई पर कोई रोशनी, खतरे का संकेत, सावधानी की सूचना अथवा अवरोध नहीं लगाया गया था। साइकिल सवार भी अपनी सार्यकाल में सामने बत्ती नहीं जलाये था। इस मामले में- |
चूँकि 'क' की उपेक्षा के कारण दुर्घटना हुई अतएव वह दायित्वाधीन हैI |
|
'X' एक मछुआरिन ट्राम से उतरी। जब कण्डक्टर मछली की टोकरी उसके सिर पर रखने में उसकी सहायता कर रहा था तब एक मोटर साइकिल सवार 'Y' ट्राम के पास से निकला और तुरन्त ही उपेक्षापूर्वक 'Z' की कार से टकरा गया। '' की मृत्यु हो गई। 'X' ने 'Y' को नहीं देखा और न ही दुर्घटना देखी। दुर्घटना वहाँ से पन्द्रह गज दूर हुई थी किन्तु ट्राम के कारण वह देख नहीं पाई। किन्तु 'X' ने टकराने की आवाज सुनी थी और '' का ट्राम हट जाने के कारण उस स्थान पर पहुँची और उसने सड़क पर रक्त पड़ा देखा। फलस्वरूप उसे तन्त्रिका घात लगा और उसने एक बालक को जन्म दिया। तब वह आठ मास से गर्भवती थी। यदि वह 'Y' की उपेक्षा के लिए 'Y' के प्रतिनिधियों के विरुद्ध वाद लाती है- |
वे दायी नहीं होंगे क्योंकि 'Y' का उसके प्रति सावधानी करतने का कोई कर्तव्य नहीं था वह उसके प्रति उपेक्षावान नहीं था |
|
प्रतिवादी ने हिम्पात और आँधी के परिणामस्वरूप अपने छप्पर और बर्फ नहीं हटाई और लोगों को उनके विद्यमान होने की चेतावनी भी नहीं दी। वादी, प्रतिवादी के परिसर के बाहर राजमार्ग पर खड़ा था। उसे उस बर्फ के गिरने से क्षति पहुँची। वादी ने नुकसानी का दावा किया- |
प्रतिवादी न्यूसेन्स और उपेक्षा दोनों के लिए दायी है क्योंकि उसने न्यूसेन्स का उपशमन नहीं किया |
|
किस एक में अधिष्ठाता उपेक्षा के लिए दायी है? |
एक चौकसी वाले कुत्ते को रखना जिसको मनुष्यों को काटने की आदत हैI |
|
'जब दो व्यक्ति उपेक्षा के लिए दोषी हों तब वह व्यक्ति हानि के लिए दायित्वाधीन ठहराया जाता है, जिसे सामान्य सावधानी बरतकर दुर्घटना को बचाने का अन्तिम अवसर प्राप्त था। इस नियम को अन्तिम अवसर का सिद्धान्त के नाम से जाना जाता है। यह सिद्धान्त किस वाद में प्रतिपादित किया गया - |
डेवीज बनाम मान |
|
योगदायी लापरवाही का अभिवचन स्वीकार किया जाता है? |
जबकि दोनों पक्षों ने लापरवाही में योगदान किया है |
|
कौन-सी दुर्घटना के मामले में स्वयं प्रमाण सूत्र को लागू करने के लिए महत्वपूर्ण है? |
दुर्घटना ऐसी हो जो प्रकृति के मामूली क्रम में उपेक्षा के बिना घटित हो सकती थी |
|
किसी नगर के मुख्य बाजार में घण्टाघर के गिर जाने के कारण कई व्यक्तियों की मृत्यु हो गई। घण्टाघर नगर निगम का था उसके अनन्य नियन्त्रण में था। घण्टाघर 80 वर्ष पुराना था। गिरे हुए भवन के ढाँचे का सामान्य जीवन इसमें प्रयुक्त गारे को ध्यान में रखते हुए चालीस या पैतालीस वर्ष हो सकता था। यदि कोई महिला, जिसके पति की मृत्यु घण्टाघर के गिर जाने के कारण हो गई है, नगर निगम के विरुद्ध नुकसानी का दावा करती है, तो कौन-सी सूक्ति लागू होती है |
स्वयं प्रमाण |
|
स्वयं प्रमाण का सिद्धान्त है- |
प्रतिवादी की स्पष्ट असावधानी जिसका वादी को सबूत देने की आवश्यकता नहीं है |
|
उपेक्षा के लिए नुकसानी के वाद में कौन-सी उचित प्रतिरक्षा नहीं है? |
अभिव्यक्त संविदा जहाँ कानून में प्रतिषेधं है |
|
एक प्रकरण में वादी एक मरीज की माँ थी जो अस्पताल में भर्ती थी। वादी ने अपने पुत्र के इलाज के लिए एक सर्जन से मिलना चाहा। सर्जन ने उसको एक छोटे कमरे में आमन्त्रित किया जिसका फर्श बहुत ही चिकना था। वह फर्श पर फिसल गई और उसे चोट लग गई। कौन दोषी है? |
अस्पताल का अधिकरण उसके लिए दायी है |
|
वादी एक अतिचारी प्रतिवादी के बगीचे में घुसता है और वहां प्रतिवादी द्वारा बिना सूचना के लगाई गई स्वचालित बन्दूक से घायल हो जाता है। वह चोटों की क्षतिपूर्ति का दावा प्रस्तुत करता है। दावा- |
सफल होता है, क्योंकि उसका अतिचार का कृत्य तथा उसके द्वारा उठाई गई हानि एक ही संव्यवहार के अंश नहीं थे |
|
डोनोघ बनाम स्टीवेन्सन में 'पड़ोसी' की परिभाषा किसने दी? |
लॉर्ड एटकिन |
|
कौन-सा वादी की योगदायी उपेक्षा के विषय से सम्बन्धित है? |
वटरफोल्ड बनाम फोरेस्टर |
|
किस वाद में लॉर्ड एटकिन ने उपेक्षा के अपकृत्य के लिए पड़ोसी की युक्तियुक्त सावधानी बरतने के उत्तरदायित्व के सिद्धान्त को प्रतिपादित किया? |
डोनोघ बनाम स्टीवेन्सन |
|
'अन्तिम अवसर' का सिद्धान्त किस वाद या बचाव में लागू होता है? |
योगदायी उपेक्षा |
|
रीड बनाम लॉयन्स किस पर एक प्रमुख वाद है? |
पलायन का अर्थ |
|
सूत्र 'स्वयं प्रमाण'- |
उपेक्षा के अपकृत्य में सिद्धि के भार से सम्बन्धित है |
|
परिस्थितियों में योगदायी उपेक्षा का प्रतिवाद मान्य नहीं होता है- |
घटना स्वयं प्रमाण का सिद्धान्त |
|
'अन्तिम अवसर का सिद्धान्त' किस वाद या बचाव में लागू होता है- |
योगदायी उपेक्षा |
|
लॉर्ड एटकिन ने उपेक्षा के अपकृत्य के लिए पड़ोसी का उचित सावधानी बरतने के उत्तरदायित्व के सिद्धान्त की प्रतिपादित किया - |
डोनोघ बनाम स्टीवेन्सन |
|
डेविस बनाम मान प्रकरण सम्बन्धित है- |
अंशदायी उपेक्षा |
|
'उपेक्षा' को एक पृथक् अपकृत्य भी माना जाता है। ऐसा किस वाद में अभिनिर्धारित किया गया? |
डोनाघ बनाम स्टीवेन्सन |
|
यह सिद्धान्त कि "जोखिम का मात्र ज्ञान जोखिम के प्रति सम्मति नहीं है" किस अग्रनिर्णय में निश्चित रूप से स्थापित हुआ था, वह था- |
स्मिथ बनाम चार्ल्स बेकर एण्ड सन्स |
|
सूत्र 'स्वयं प्रमाण'- |
उपेक्षा के अपकृत्य में सिद्धि के भार से सम्बन्धित है |
|
लॉर्ड एटकिन ने उपेक्षा के अपकृत्य के लिए पड़ोसी का उचित सावधानी बरतने के उत्तरदायित्व के सिद्धान्त की प्रतिपादित किया - |
डोनोघ बनाम स्टीवेन्सन |
|
यह सिद्धान्त कि "जोखिम का मात्र ज्ञान जोखिम के प्रति सम्मति नहीं है" जिस अग्रनिर्णय में निश्चित रूप से स्थापित हुआ था, वह था- |
स्मिथ बनाम चार्ल्स बेकर एण्ड सन्स |
|
प्रतिवादी के घर में चोरी हो गई। उसने पुलिस को सूचना दी कि वह वादी पर शक करता है। अतएव पुलिस ने वादी को गिरफ्तार कर लिया। प्रतिवादी ने एक परिवाद संस्तुत किया किन्तु मजिस्ट्रेट ने बाद में वादी को दोषमुक्त कर दिया क्योंकि अन्तिम रिपोर्ट में यह दर्शाया गया था कि वादी को चोरी से जोड़ने के लिए कोई साक्ष्य नहीं था। वादी ने द्वेषपूर्ण अभियोजन के आधार पर नुकसानी का वाद संस्थित किया, वाद में- |
वादी द्वेषपूर्ण अभियोजन के लिए नुकसानी का दावा करने का हकदार नहीं है |
|
दुर्भावनावश अभियोजन के लिए वाद में, वादी को यह सिद्ध करना पड़ता है कि- |
उसके विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही दुर्भावना से की गई थी जो बिना किसी कारण के थी तथा उससे उसे क्षति हुई थी |
|
अपकृत्य के किसी वाद के सभी सम्भव प्रयोजनों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रयोजन है- |
कि नुकसान के लिए प्रतिकर दिलाया जाए, य नुकसान के जारी रहने या पुनरावृत्ति का निवारण कराया जाए |
|
अपकृत्य के वादों में वास्तविक उपचार है- |
अपरिनिर्धारित क्षतिपूर्ति |
|
स्टैनले बनाम पॉवेल के वाद में- |
अवश्यम्भावी दुर्घटना का बचाव माना गया था |
|
अधिनियम के प्राधिकार का बचाव सफलतापूर्वक लिया गया था- |
ग्रीन बनाम चेलसिया वाटर वर्क्स के वाद में |
|
"सम्पत्ति ऐसे बचावकर्ता के दावे के विरुद्ध कोई प्रतिवाद नहीं हो सकती जिसको प्रतिवादी की उपेक्षा से उत्पन्न जोखिम से किसी का बचाव करते हुए क्षति पहुँची हो।" इस सिद्धान्त का निर्देशक वाद है- |
हेन्स बनाम हारवुड |
|
प्रतिवादी को 'सम्मत कार्य से क्षति नहीं होती', का प्रतिवाद उपलब्ध नहीं हुआ था- |
डैन बनाम हैमिल्टन |
|
'निकोलस बनाम मार्सलैण्ड' का वाद सम्बन्धित है- |
दैव कृत्य से |
|
यह तर्क कि 'अपकृत्य के रूप में परिवादित परिणाम न तो प्रतिवादी द्वारा आशयित थे और न ही उनका पूर्वानुमान लगाना और युक्तियुक्त ससावधानी और कौशल के प्रयोग से टालना सम्भव था, से सम्बन्धित है- |
अपरिहार्य दुर्घटना का प्रतिवाद |