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प्रशासनिक विधि ADMINISTRATIVE LAW |
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किसने प्रशासनिक विधि को इस रूप में परिभाषित किया है कि- "यह प्रशासन से सम्बंधित विधि है। यह प्रशासनिक प्राधिकरणों के संगठन, शक्तियों और कर्त्तव्यों को निर्धारित करता है"? |
सर आइवर जेनिंग्स |
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"प्रशासनिक विधि प्रशासनिक संस्थाओं की शक्तियों तथा प्रक्रियाओं खासतौर पर प्रशासनिक कार्यों के न्यायिक निरीक्षण सम्बन्धी विधि है।" यह "प्रशासनिक विधि" की परिभाषा में से किसने दी है? |
के.सी. डेविस |
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प्रशासनिक विधि का सम्बंध, संरचना पर नहीं अपितु कार्यों पर बल दते हुए, प्रशासनिक अधिकारियों की शक्तियों के संचालन तथा नियंत्रण से है।' यह परिभाषा दी है- |
वेड ने |
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ड्रायएडमिनिस्ट्रेटिव को कहा गया है ? |
विधि शासन का विरोधी |
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'जस्टिस एण्ड मिनिस्ट्रेटिव लॉ' पुस्तक के रचयिता कौन थे? |
प्रो. राब्सन |
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प्रत्यायोजित विधान होता है? |
कार्यपालिका विधान |
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“The Law of constitution” पुस्तक के रचयिता कौन थे? |
डायसी |
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प्रशासनिक विधि के स्रोत में कौन नहीं हैं- |
वाद रिपोर्टर |
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प्रभाव के आधार पर प्रत्यायोजन विधान को कितने प्रकार के होते हैं ? |
दो |
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किस मामलें में यह कहा गया कि, शक्तियाँ राज्य के किसी एक विभाग को सौंपी जाती हैं, वे शक्तियाँ उसी विभाग द्वारा किसी दूसरे विभाग के कार्यक्षेत्र में अतिक्रमण किये बिना प्रयुक्त की जानी चाहिए। |
फील्ड बनाम क्लार्क |
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किस मामलें में यह कहा गया कि, विधान बनाने के लिए कोई महत्वपूर्ण विषय या गौण विषयों की कोई रेखा नहीं है जो विधान मण्डल को विशिष्ट विषयों पर विधान बनाने को जोर देती है। |
वैगमैन बनाम साउथार्ड |
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विषय-वस्तु के आधार पर प्रत्यायोजन विधान है- |
अधीनस्थविधान,सशर्त प्रत्यायोजन विधान, व्याख्यात्मक विधान |
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फ्रांस के किस प्रसिद्द विधिशास्त्री ने ड्राई एडमिनिस्ट्रटिव के सिद्धांतो को भिन्न तरीके से प्रतिपादित किया? |
वेलिस |
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किस वाद में अमरीकी न्यायालय ने प्रत्यायोजित विधान को असंवैधानिक एवं अवैध बताया है? |
पोल्ट्री कारपोरेशन बनाम संयुक्त राज्य अमेरिका, पनामा रिफाइनरी कम्पनी बनाम रेन कार्टर बनाम मैकार्टर कोल कम्पनी |
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प्रत्यायोजित विधान को अमेरिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा किस मामलें में मान्यता प्राप्त हुई? |
याकुस बनाम संयुक्त राष्ट्र संघ |
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प्रत्यायोजित विधायन एवं सशर्त विधायन में अन्तर बताने वाला वाद है- |
हमदर्द दवाखाना बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया |
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उच्चतम न्यायालय ने प्रत्यायोजित विधान के सम्बन्ध में सिद्धान्त प्रतिपादित किये- |
प्रत्यायोजित विधान की शक्ति पर यह प्रतिबंध है कि आवश्यक विधायी शक्ति को प्रत्यायोजित नहीं किया जा सकता |
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प्रत्यायोजित विधान का वर्गीकरण होता है- |
सामान्य, असामान्य, हेनरी अष्टम खण्ड, न्यायिक पुनर्विलोकन का अपर्वजन करने वाला |
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सर्वप्रथम प्रत्यायोजन विधायन का प्रकाशन होना आवश्यक है यह किस वाद में कहा गया ? |
हारला बनाम राजस्थान राज्य |
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किस मामलें में विधायिका द्वारा कंकाल विधायन द्वारा प्रत्यायोजित विधायन को मान्य किया गया ? |
हरिशंकर बागला बनाम म.प्र. राज्य |
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प्रत्यायोजित विधायन से संबन्धित वाद भारत संघ बनाम नरेन्द्र कुमार किस सम्बन्ध में था? |
प्रकाशन समुचित रीति से होना चाहिए |
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भारत में प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्तों का विकास हुआ। |
26 जून 1950 |
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Audi alter partem के अन्तर्गत कौन-सा अधिकार प्रतिलक्षित है? |
साक्ष्यों एवं तर्कों को प्रस्तुत करने का अधिकार, मौखिक सुनवाई का अधिकार, दूसरे पक्ष को सुनवाई का अवसर देना |
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नैसर्गिक न्याय के नियमों में कठोर अनुपालन की अनिवार्यता है? |
न्यायिक निर्णयों पर |
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"दूसरे पक्ष की भी सुनो" के नियम के अतिक्रमण का प्रशासनिक कृत्य पर क्या असर पड़ता है? |
अकृत तथा शून्य |
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कौन प्राकृतिक/नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतो का अपवाद नहीं है? |
अधिदिष्ट विरुद्ध नियम |
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किस वाद में यह कहा गया कि, प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्तों के लिए कोई कठोर सूत्र नहीं है - |
भारत संघ बनाम पी.के.राय |
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प्राकृतिक न्याय के नियम के प्रयोग का विकल्प से संबंधित वाद है- |
आर.एस. दास बनाम भारत संघ |
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न केवल न्याय किया जाए बल्कि स्पष्टतः तथा निःसन्देह न्याय किया जाना दिखना चाहिए से संबंधित वाद है- |
आर. बनाम ससेक्स जस्टिसेज |
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'दूसरे पक्ष को भी सुनो" का नियम सुनवाई के युक्तियुक्त अवसर दिये जाने की अपेक्षा करता है यह सुनवाई होनी चाहिए-- |
लिखित या मौखिक |
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व्यक्ति को न्यायालय के समक्ष लाना- |
बंदी प्रत्यक्षीकरण |
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प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्त के क्या अपवाद है? |
विधिक प्रावधानों द्वारा वर्जन संवैधानिक प्रावधानों द्वारा वर्जन विधायी कार्य द्वारा वर्जन लोकहित में वर्जन |
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नैसर्गिक न्याय के सिद्धान्त क्या है?
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कोई भी व्यक्ति अपने खुद के वाद में न्यायाधीश नहीं हो सकता है। कोई भी व्यक्ति बगैर सुनवाई के अपराधी (या दोषी) नहीं ठहराया जा सकता है। |
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किस वाद में, सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्धारित किया कि नैसर्गिक न्याय के सिद्धान्त प्रशासनिक कार्यवाहियों में अनुप्रयोज्य हैं? |
ए.के. क्रेपक बनाम भारत संघ |
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प्रशासनिक अधिकरण की स्थापना 42वें संविधान संशोधन द्वारा अनुच्छेद को जोड़ी गई। |
अनुच्छेद 323-A तथा 323-B |
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प्रशासनिक न्यायाधिकरण के अन्तर्गत व्यक्ति को प्राप्त होता है-- |
शीघ्र न्याय ,त्वरित न्याय |
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केन्द्रीय जांच आयोग की नियुक्ति किस सन् में हुई ? |
1963 |
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प्रशासनिक न्यायाधिकरण का कार्य होता है - |
अर्द्ध न्यायिक |
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केन्द्रीय सतर्कता आयोग का गठन 1974 में किस कमेटी के प्रस्ताव पर किया गया ? |
सन्थानन कमेटी |
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प्रशासनिक अधिकरण से संबन्धित अधिनियम पारित हुआ |
सन् 1985 |
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न्यायिक सक्रियता को किसके द्वारा शुरू किया गया ? |
पी. एन. भगवती |
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केन्द्रीय सरकार के कर्मचारियों के भर्ती एवं सेवा शर्तों सम्बन्धी विवादों के लिए केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण की स्थापना की गई- |
प्रशासनिक न्यायाधिकरण अधिनियम, 1985 द्वारा |
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कौन सी रिट में नैसर्गिक न्याय के सिद्धान्त की ओर ध्यान दिया गया ? |
परमादेश |
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हीरा नाथ मिश्रा बनाम प्रिंसिपल राजेन्द्र मेडिकल राँची के मामलें में उच्चतम न्यायालय ने निर्णीत किया कि-- |
यह कठोर प्रकृति का नियम नहीं है, इसे विभिन्न परिस्थितियों में बदला जा सकता है |
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विबन्ध कितने प्रकार के हो सकते हैं- |
अभिलेख विबन्ध (Estoppel by record) विलेख विबन्ध (Estoppel by deed) आचरण विबन्ध (Estoppel by pais) |
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प्रशासनिक न्यायाधिकरणों के लिये आदेशात्मक (या अनिवार्य) प्रक्रिया सम्बन्धी अपेक्षा होनी चाहिए- |
कानूनी प्रतिनिधित्व ,प्रति-परीक्षा, युक्तियुक्त निर्णय |
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प्रशासनिक न्यायाधिकरण- |
अर्द्ध-न्यायिक कार्य करते हैं। |
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प्रशासनिक विधि में अध्ययन किया जाता हैं:- |
प्रशासनिक प्राधिकरणों का संगठन, शक्ति और कार्य। शासनिक प्राधिकरणों द्वारा अपनी शक्तियों और कार्यों का प्रयोग करते हुए उनके द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया। प्रशासनिक प्राधिकरणों की शक्तियों के नियंत्रण की विधि। प्रशासनिक प्राधिकरणों द्वारा अपने अधिकारों का उल्लंघन करने के मामलें में किसी व्यक्ति को उपलब्ध उपचार। |
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न्यायिक पुनर्विलोकन का जन्मदाता किस देश को माना जाता है ? |
अमेरिका |
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भारत में प्रशासनिक मामलों के न्यायिक पुनर्विलोकन की अवधारणा राज्य पर आधारित है- |
इंग्लैण्ड |
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न्यायिक पुनर्विलोकन का उद्भव किस वाद से हुआ ? |
मारबरी बनाम मेडिसन |
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न्यायिक पुनर्विलोकन का सिद्धान्त संविधान के किस अनुच्छेद से लिया गया है ? |
अनुच्छेद 13 |
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न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्ति संविधान के किस अनुच्छेद से लिया गया है |
अनु. 13 (i), (ii) |
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भारत में लोकप्रिय, लोकहित वाद की अवधारणा की शुरुआत हुई है - |
अमेरिका में |
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रिटों में से कौन-सा न्यायिक अथवा अर्द्धन्यायिक प्राधिकारी के विरुद्ध जारी किया जा सकता है? |
उत्प्रेषण |
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परमादेश का रिट वहाँ नहीं जारी किया जा सकता है जहाँ मौलिक अधिकार के द्वारा भंग होता है- |
प्राइवेट संस्थान |
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प्रशासनिक कार्यवाही का पुनर्विलोकन करने के लिये परमाधिकार रिट हैं- |
बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट, परमादेश रिट, अधिकार-पृच्छा रिट, उत्प्रेषण रिट तथा प्रतिषेध रिट |
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प्रतिषेध की रिट तब जारी की जा सकती है जबः |
अधिकारिता (या अधिकार क्षेत्र) की अनुपस्थिति या अधिकारिता का दुरूपयोग |
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उत्प्रेषण रिट का अनिवार्यतः अभिप्राय है - |
अभिलेख को देखने से प्रकट विधि की त्रुटि को सुधारा जा सकता है। |
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कौन सी रिट प्रक्रियात्मक रिट है ? |
बन्दी प्रत्यक्षीकरण |
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उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों को न्यायिक पुनर्विलोकन का अधिकार प्राप्त है- |
अनुच्छेद 32, 226 |
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रिटों द्वारा न्यायिक पुनर्विलोकन के मामलें में भारतीय न्यायालय की स्थिति है - |
बाध्य नहीं |
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अधिकार पृच्छा की याचिका सम्बन्धित है - |
किसी भी लोक पद पर अवैध कब्जाधारी पर |
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बन्दी प्रत्यक्षीकरण से संबन्धित वाद है- |
सुनील बत्रा बनाम दिल्ली प्रशासन, कानू सन्याल बनाम जिला मजिस्ट्रेट दार्जिलिंग |
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प्रतिषेध रिट किसके द्वारा जारी की जाती है? |
अधीनस्थ न्यायालयों और न्यायाधिकरणों के विरुद्ध |
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उत्प्रेक्षा रिट द्वारा ठीक किया जा सकता है - |
प्रथम दृष्टया विधि की गलती को |
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परमादेश रिट प्रवर्तन के लिये निर्गत किया जाता है- |
आज्ञापक कर्तव्य को |
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कौन सी रिट उच्च न्यायालय द्वारा जारी की जा सकेगी? |
प्रतिषेध ,परमादेश ,उत्प्रेषण |
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कौन सी रिट केवल न्यायिक एवं न्यायिक-कल्प प्राधिकारियों के विरुद्ध जारी की जा सकती है- |
उत्प्रेषण |
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रेस जूडिकाटा का सिद्धान्त किस रिट पर लागू नही होता ? |
बंदी प्रत्यक्षीकरण |
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लोकस स्टेण्डी (Locus Standi) के सिद्धान्त का अर्थ है- |
याचिकाकर्ता का रिट याचिका प्रस्तुत करने का अधिकार |
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अधिकार पृच्छा की रिट जारी की जा सकती है- |
किसी लोक अधिकारी के विरुद्ध, जो लोक पद धारण कर रहा है। |
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किस आधार पर उत्प्रेषण-रिट जारी नहीं किया जा सकता है? |
अधिकारिता की उपयोग |
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किन आधारों पर उत्प्रेषण की याचिका जारी की जा सकती है? |
अधिकारिता की त्रुटि, अभिलेख में उसके देखने से ही प्रकट त्रुटि, प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन |
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बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका कब जारी की जाती है? |
निरोधन प्रथम दृष्टया अवैध हो। |
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परमादेश की याचिका के विरुद्ध नहीं की जा सकती- |
भारत का राष्ट्रपति |
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परमादेश की रिट जारी की जा सकती है |
प्राधिकारी को कार्य करने के लिए बाध्य करने हेतु |
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किसी लोक पद को हड़पने वाले किसी व्यक्ति को लोकपद से हटाने के लिये न्यायालय द्वारा जारी की जाने वाली समुचित रिट है :- |
अधिकार-पृच्छा |
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जब किसी अवर न्यायालय या अधिकरण को अपनी अधिकारिता का अतिक्रमण करने पर या नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध कार्य करने पर रिट प्रेषित किया जाता है तब उस रिट को कहते हैं- |
उत्प्रेषण |
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कौन व्यक्तिगत स्वतंत्रता की संरक्षा करता है? |
बन्दी प्रत्यक्षीकरण |
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बन्दी प्रत्यक्षीकरण की याचिका का अर्थ है :- |
किसी अवैध रूप से बन्दी बनाये गये व्यक्ति को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना |
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अवैध कैद के लिये कौन सी रिट जारी होती है? |
बन्दी प्रत्यक्षीकरण रिट |
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"अधिकार-पृच्छा" लेख जारी की जाती है:- |
किसी लोक पद को हड़पने वाले के विरुद्ध |
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उत्प्रेषण रिट द्वारा सही किया जा सकता है- |
प्रथम दृष्टया विधि की गलती को |
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उत्प्रेषण की याचिका जारी की जा सकती है- |
किसी न्यायिक अथवा अर्द्धन्यायिक अधिकारी के विपरीत |
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न्यायिक पुनर्विलोकन का अर्थ है :- |
व्यवस्थापिका द्वारा निर्मित एवं संशोधित किसी भी विधि को उच्चतम न्यायालय अधिकारातीत संविधान के रूप में घोषित कर सकता है |
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उच्चतम न्यायालय को संविधान के किस अनुच्छेद के अन्तर्गत अपने निर्णयों के पुनर्विलोकन की शक्ति प्राप्त है? |
अनुच्छेद 137 |
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राज्य के अपकृत्य दायित्व से संबद्ध प्रावधान संविधान के अनुच्छेद में है- |
अनुच्छेद 299 |
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अपकृत्यपूर्ण दायित्वों के लिए सम्प्रभु कार्यों के लिए भेद किस वाद में किया है? |
कस्तूरी लाल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, पेनिन्सुलर एण्ड ओरिएन्ट स्टीम नेविगेशन बनाम सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फार इंण्डिया |
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किस मामलें में यह अभिनिर्धारित किया गया कि प्रभुतासम्पन्न रीति से किये जाने वाले कार्यों के लिए राज्य का अपकृत्यात्मक दायित्व नही होता? |
राम गुलाम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य |
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ओमबुड्स सर्वप्रथम किस देश में एवं कब आया ? |
स्वीडेन, 1809 |
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ओमबुड्स मैन किस देश में नहीं है? |
अमेरिका |
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सर्वप्रथम भारत में ओमबुड्समैन का प्रस्ताव पारित कब हुआ था ? |
20 अगस्त 1969 |
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वर्तमान में भारत में लोकपाल विधेयक के अनुसार लोकपाल विधेयक किस पदाधिकारी की जांच कर सकता है ? |
प्रधानमंत्री |
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लोकपाल का कार्यकाल होता है- |
70 वर्ष |
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लोकपाल का कार्यकाल पद ग्रहण की उम्र से होता है। |
5 वर्ष |
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सर्वप्रथम भारत में ओम्बुडसमैन का सुझाव पहली बार 1902 में दिया गया। |
न्यायामूर्ति रंगनाथ मिश्र द्वारा |
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लार्ड हेवर्ट ने अपनी पुस्तक 'दी न्यू डेसपाटिज्म में लिखा- |
प्रत्यायोजित विधान के विपक्ष में बहुत गुरुतर तर्क दिये |
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हेनरी अष्टम खण्ड का अर्थ है - |
कार्यकारिणी को यह शक्ति प्राप्त है कि वह अधिनियम की धाराओं में स्वयमेव परिवर्तन कर सके |
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लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 किस तिथि का लागू हुआ ? |
18 दिसम्बर, 2013 |
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लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 में नियुक्ति की आयु क्या है? |
5 वर्ष |
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फैक्स समिति किससे संबन्धित है ? |
प्रशासनिक अधिकरण |
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प्रक्रियात्मक रिट है? |
बन्दी प्रत्यक्षीकरण |
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सभी भारतीय राज्यों के लोकायुक्त संस्था के कार्यकलापों के सम्बंध में में से क्या सहीं है? |
उन्हें सांविधिक निकाय का स्थान नहीं दिया गया हैं। |
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लोकपाल अथवा लोकायुक्त सक्षम है- |
प्रशासनिक कार्रवाई से सम्बंधित शिकायतों के परिवादों की जाँच करने में। |
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लोकपाल के अध्यक्ष की नियुक्ति, एक गठित चयन समिति की संस्तुति प्राप्त होने पर राष्ट्रपति द्वारा की जायेगी इस चयन समिति में होंगे- |
प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, लोक सभा में विपक्ष के नेता, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या उनके द्वारा नामित सर्वोच्च न्यायालय के कोई अन्य न्यायाधीश तथा एक प्रख्यात विधिवेत्ता, जिसे राष्ट्रपति नामित करता है। |
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प्रशासनिक कार्यवाही के न्यायिक पुनरावलोकन का अर्थ है- |
न्यायपालिका द्वारा प्रशासनिक कार्यवाही का पुनरावलोकन |
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प्रशासनिक विधि की सत्ता और कार्य विधियों से सम्बन्धित विधि है- |
प्रशासनिक प्राधिकारी |
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किस आधार पर प्रशासनिक कार्रवाई की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है? |
विवेक का दुरूपयोग दुराशय या गलत विश्वास असंगत विचार अयुक्ति-युक्तिता |
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शक्ति पृथक्करण के सिद्धान्त को सुव्यवस्थित ढंग से निरुपित किया। |
मोन्टेस्क्यू |
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'विधि का शासन' से तात्पर्य है-
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विधि की सर्वोच्चता विधि के समक्ष समानता |
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किस शर्त में विवेकाधिकार की शक्ति के दुरुपयोग का अनुमान लगाया जा सकता है? |
अनुचित प्रयोजन के लिये दुराशय |
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प्रशासनिक विधि में के बारे में उल्लेख किया गया है: |
प्रशासनिक प्राधिकारियों की शक्तियों |
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विवेक के दुरुपयोग का अनुमान परिस्थितियों से लगाया जा सकता है- |
अधिकार का आभासी प्रयोग । दूसरे पक्ष को सुनने के अधिकार (ओडी आलर्टम पारटम) का पालन न करना । अप्रासंगिक विचार |
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किसमें प्रशासनिक विधि मुख्यतः शासकीय कार्यकलापों से सम्बंधित नहीं है? |
वैयक्तिक विधि |
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एसोसिएटेड प्रोविंसियल पिक्चर हाउस लि. बनाम वेडनेसबर्ग कार्पोरेशन, 1948 (के.बी.) में निर्दिष्ट वेडनेसबर्ग सिद्धांतों के सम्बंध में में से किसे तर्कहीन नहीं समझा जाता है? |
यह विधि द्वारा अनुमत है। |
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उच्चतम न्यायालय द्वारा 'इन द देहली लॉज एक्ट मामले में विशेष रूप से क्या घोषित किया गया था?
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विधानमंडल को अपने अनिवार्य प्रकार्यों का प्रत्यायोजन नहीं करना चाहिए। शक्तियों के अत्यधिक प्रत्यायोजन को न्यायालय द्वारा निरस्त किया जा सकता है। विधानमंडल को स्वयं प्रत्यायोजन अधिनियम में मानक निर्धारित करना चाहिए और विधायन में निर्दिष्ट नीति को कार्यान्वित करने के लिए नियम बनाने की शक्ति प्रतिनिधि के पास छोड़ देनी चाहिए। |
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किसी भी प्रकार के प्रशासनिक, विधायी, अर्द्ध-न्यायिक या न्यायिक कृत्यों के संबंध में एक लोक प्राधिकारी को जारी रिट को कहा जाता है : |
परमादेश |
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कौन दूसरे पक्ष की सुनवाई के सिद्धांत का आवश्यक घटक नहीं है? |
सकारण निर्णय सम्बंधित प्राधिकार की संतुष्टि पर आधारित होनी चाहिए। |
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लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 का में से कौन सा उद्देश्य है? |
लोक सेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच करना |
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किस केस में भारत के उच्चतम न्यायालय ने प्रशासनिक कार्रवाई के पुनरीक्षण के लिए विधि सम्मत प्रत्याशा का संदर्भ दिया है? |
केरल राज्य बनाम के.जी. माधवन पिल्लई |
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लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के अंतर्गत लोकायुक्त की स्थापना के सम्बन्ध में में से कौन-सा कथन सही है? |
प्रत्येक राज्य इस अधिनियम के आरंभ की तिथि से एक वर्ष के अंदर लोकायुक्त यदि पूर्व में स्थापित नहीं है तो विधानमंडल की विधि के द्वारा इसकी स्थापना करेगा। |
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लोकपाल का केसों में जांच करने का अधिकार क्षेत्र है-
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संसद सदस्य समूह 'ग' और 'घ' लोक सेवक केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित बोर्ड या कापेरिशन या कंपनी के कर्मचारी केंद्र सरकार द्वारा पूर्णतः या अंशतः वित्तपोषित सोसाइटी या एसोसिएशन या ट्रस्ट का कोई भी अधिकारी |
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जब न्याय की किसी अदालत में विवेक का प्रयोग किया जाता है, तो उसका आशय होता है विधि द्वारा मार्गदर्शित युक्तियुक्त विवेक वह कानून से नियंत्रित होना चाहिए, विनोदपूर्ण नहीं। उसे मनमानीपूर्ण, अस्पष्ट और सनकपूर्ण नहीं, बल्कि विधिक और नियमित होना चाहिए यह टिप्पणी किस मामलें में की गई थी :- |
रिलायंस एयरपोर्ट डेवलपर्स (प्रा.) लि. बनाम ऑथारिटी ऑफ इंडिया |
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किन परिस्थितियों में परमादेश रिट जारी किया जा सकता है?
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वहाँ निश्चित रूप से कोई लोक कर्तव्य होना चाहिए। वहाँ कोई विशिष्ट माँग और अस्वीकार्य होना चाहिए। कर्तव्य प्रवर्तन के लिए स्पष्ट अधिकार होना चाहिए। उस अधिकार को याचिका की तारीख के दिन अस्तित्त्व में होना चाहिए। |
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किस मामलें में सर्वोच्च न्यायालय ने सुनिश्चित किया कि- 'यदि प्राधिकारी के पास बिना किसी सुनवाई के कार्रवाई करने का संविधिक अधिकार भी हो, तब भी बिना सुनवाई के कोई कार्रवाई करना मनमानीपूर्ण होगा और इसलिये वह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होगा? |
एच.एल. त्रेहान बनाम भारत संघ |
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प्रशासनिक विधि को विधिशास्त्र की एक अलग शाखा के रूप में विशेषकर भारत में किस शताब्दी के दौरान मान्यता मिली - |
20वीं शताब्दी |
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किस मामलें में उद्धरण लिया गया है? "प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्तों को विधि के उपबंधों के आलोक में पढ़ा जाना चाहिए।" |
उत्तर प्रदेश राज्य बनाम विजय कुमार त्रिपाठी |
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"प्रशासनिक प्रकृति की कार्यवाइयों को अभिखंडित करने के लिए उत्प्रेषण रिट जारी किया जा सकता है।" यह सिद्धांत किसमें दिया गया? |
ए.के. क्रैपक बनाम भारत संघ |
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लोकपाल के न्यायिक सदस्य की अर्हता में से कौन-सी है? |
उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश |
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"प्रशासनिक कानून प्रशासन से सम्बन्धित कानून है। यह संस्था, शक्ति और प्रशासनिक अधिकारियों के कर्तव्यों का निर्धारण करता है।" |
आइवर जेनिंग्स |
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संवैधानिक और प्रशासनिक कानून के बीच में समानता बताइये? |
दोनों संवैधानिक और प्रशासनिक कानून सार्वजनिक कानून हैं |
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प्रशासनिक कानून के तहत दस्तावेज/जानकारी पर रोक लगाने के लिए विशेषाधिकार किस धारा (साक्ष्य अधिनियम की) में अधिनियमित किया जाता है? |
धारा 129 |
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डायसी के अनुसार, कानून के शासन के अर्थ की चर्चा में से किसके अन्तर्गत की जा सकती है? |
कानून के समक्ष समानता |
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अपनी पुस्तक ऐड्मिनिस्ट्रेटिव लॉ में के.सी. डेविस ने 'कानून के शासन' के अर्थ दे दिये हैं- |
कानून के निश्चित नियम, विवेक का बहिष्कार |
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'सेपरेशन ऑफ पावर' के सिद्धांत को किसके द्वारा समझाया जा सकता है? |
एक ही व्यक्ति को सरकार के तीन अंगों में से एक से अधिक अंगों का हिस्सा नहीं होना चाहिये |
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आधुनिक राज्यों में कार्यकारी जिम्मेदारी को, अर्ध-विधायी, अर्द्ध-न्यायिक, मिनिस्टेरियल और विशुद्ध प्रशासनिक कार्य के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। यह अवलोकन न्यायिक वादों किस पर आधारित है? |
मेनका गाँधी बनाम भारतीय संघ |
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भारत में प्रत्यायोजित विधान (डेलीगेटेड लेजिस्लेशन) संविधान बनने की अवधि के पश्चात् भी तय हो सकता है। यह किस केस में तय किया गया? |
री. डेल्ही लॉज ऐक्ट, 1912 |
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उस कार्य को चुनिये जिसे प्रशासनिक नियम के तहत प्रत्यायोजित नहीं किया जा सकता है- |
पूर्वव्यापी प्रभाव देने के लिए शक्ति |
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प्रत्यायोजित विधान (डेलीगेटेड लेजिस्लेशन) की क्या कमी है? |
यहाँ मूल अधिनियम द्वारा दी गयी शक्तियों के दुरुपयोग करने का अवसर है और इस तरह कार्यकारी (executive) संसद की तुलना में अधिक शक्ति का आनन्द उठा सकती है। |
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प्रशासनिक कानून के तहत सशर्त विधान- |
सापेक्ष विधान (कन्टिन्जेन्ट लेजिस्लेशन) के रूप में भी जाना जाता है। कार्यकारिणी कोई नियम बनाने की शक्ति का उपयोग नहीं कर सकती क्योंकि नियम बनाने की शक्ति उसमें नहीं होती है |
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"प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत प्रशासनिक कार्रवाई के लिए एक प्रक्रियात्मक नियम है।" उपर्युक्त कथन को विचार करते हुए कौन-सा/से न्यायसंगत है/हैं? |
किसी भी व्यक्ति को अपने ही कारण में न्याय नहीं देना चाहिये |
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लगभग सभी लोकतांत्रिक देशों में अदालत प्रशासनिक कानून के तहत प्रत्यायोजित विधान की वैधता तय करती है और कुछ प्रमाण तय करती है, वक्तव्य किससे सम्बन्नित है? |
मूल अधिकारातीत प्रमाण (substantive ultra vires) प्रक्रियात्मक अधिकारातील प्रमाण (test of procedural ultra vires) |
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पक्षपाती के खिलाफ नियम के पालन पर चर्चा की जा सकती है: आर्थिक पूर्वाग्रह, व्यक्तिगत पूर्वाग्रह,विषय के रूप में पूर्वाग्रह व्यक्तिगत पूर्वाग्रह के तहत सर्वोच्च न्यायालय ने किस केस में फैसला किया है? |
ए. के. करइपाक बनाम भारतीय संघ |
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बन्दी प्रत्यक्षीकरण का शाब्दिक अर्थ है 'शरीर को प्रस्तुत करें', किस केस में बन्दी प्रत्यक्षीकरण नहीं जारी की जा सकेगी? |
ए. के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य, बातुलचंद्र बनाम पश्चिम बंगाल राज्य |
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अडि अल्टेरम पार्टेम की क्या मुख्य विशेषता है? |
नोटिस |
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परमादेश (Mandamus) की आवश्यक शर्त क्या है? |
सम्बन्धित लोक प्राधिकारी को अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिये |
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राज्य के संविदात्मक दायित्वों के सम्बन्ध में संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार एक अनुबन्ध को वैध बनाने के क्रम में, जिसमें सरकार एक पार्टी के रूप में है, किस शर्त को पूरा किया जाना चाहिये? |
किया गया अनुबन्ध राष्ट्रपति या सरकार की ओर से, जैसा सम्भव हो, क्रियान्वित हो |
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लोकपाल (Ombudsman) की योग्यता क्या है? |
लोकपाल कोई लाभ का पद धारण नहीं करेगा |
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न्यायिक पुनरीक्षण सर्वोच्च होना चाहिए न्यायालय ने कहा- |
"एल. चंद्र कुमार बनाम भारत संघ (1997)" |
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RTI के अधिकारों की रक्षा किससे संबंधित है? |
“मुख्य सूचना आयुक्त बनाम राज्य" |
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Nemo Judex in Causa Sua का अर्थ है— |
पक्षपात निषिद्ध है |
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प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन होने पर न्यायालय क्या कर सकता है? |
आदेश रद्द कर सकता है, कार्यपालिका को निर्देश दे सकता है, पीड़ित को राहत दे सकता है |
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प्रशासनिक विधि किससे संबंधित है? |
प्रशासनिक कार्य और नियंत्रण से |
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प्रशासनिक विधि का मुख्य उद्देश्य क्या है? |
सरकारी अधिकारियों के अधिकार और सीमाएँ निर्धारित करना |