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अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 (The Probation of Offenders Act, 1958) |
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1958 का अधिनियम संख्यांक 20 ((ACT NO. 20 OF 1958) |
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अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 का संक्षिप्त नाम क्या है? |
अपराधी परिवीक्षा अधिनियम 1958 |
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अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 का अधिनियम संख्यांक क्या है? |
1958 का अधिनियम संख्यांक 20 |
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संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ (Short title, extent and commencement) किस धारा से सम्बंधित है? |
धारा 1 |
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अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 को राष्ट्रपति की स्वीकृति कब मिली? |
16 मई, 1958 |
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अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 का विस्तार कहाँ तक है? |
सम्पूर्ण भारत में |
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अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 किसी राज्य में कब प्रवृत्त होगा? |
उस तारीख को जिसे वह राज्य सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे, और राज्य के विभिन्न भागों के लिए विभिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी |
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अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 को संसद द्वारा किस वर्ष पारित किया गया? |
1958 |
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किस केस में सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिगों को परिवीक्षा पर रिहाई, मुद्दे पर निर्णय दिया? |
रतन लाल बनाम पंजाब राज्य |
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क्या अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 जम्मू और कश्मीर में प्रारंभ में लागू था? |
नहीं (2019 के अधिनियम सं० 34 की धारा 95 और पांचवी अनुसूची द्वारा (31-10-2019 से) "जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय" शब्दों का लोप किया गया) |
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अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 का प्रमुख उद्देश्य क्या है? |
अपराधियों को परिवीक्षा पर या सम्यक् भर्त्सना के पश्चात् छोड़ दिए जाने के लिए और इससे संबद्ध बातों के लिए उपबंध करना |
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किस केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बलात्कार जैसे अपराधों में परिवीक्षा नहीं दी जा सकती? |
फूल सिंह बनाम हरियाणा राज्य |
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अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 को किस प्रकार का कानून माना जाता है? |
सुधारात्मक |
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किस केस में “बलात्कार में परिवीक्षा का निषेध” बात को दोहराया गया? |
देवकी बनाम हरियाणा राज्य |
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अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 के तहत पहली बार अपराध करने वालों को रिहा करने के पीछे विचार क्या है? |
पुनर्वास और सुधार |
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अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 में कितनी धाराएं है? |
19 |
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संहिता (Code) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(क) |
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अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 धारा 2(क) में संहिता से क्या तात्पर्य है? |
संहिता " से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 अभिप्रेत है |
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परिवीक्षा अधिकारी (Probation Officer) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(ख) |
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अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा 2(ख) में “परिवीक्षा अधिकारी” से क्या तात्पर्य है? |
कोई ऐसा व्यक्ति जिसे सरकार द्वारा इस उद्देश्य के लिए नियुक्त किया गया हो |
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परिवीक्षा अधिकारी की नियुक्ति कौन करता है? |
राज्य सरकार |
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किस केस में कोर्ट ने परिवीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट को विचार योग्य माना लेकिन बाध्यकारी नहीं? |
राज्य बनाम गुरुचरण सिंह |
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क्या कोई महिला भी परिवीक्षा अधिकारी नियुक्त हो सकती है? |
यदि सरकार चाहें |
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परिवीक्षा अधिकारी की भूमिका को कोर्ट ने किस महत्वपूर्ण केस में बताया? |
किशोर बनाम महाराष्ट्र राज्य |
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विहित (Prescribed) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(ग) |
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अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा 2(ग) में "विहित" शब्द का क्या अर्थ है? |
इस अधिनियम या नियमों द्वारा निर्दिष्ट |
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ऐसे शब्दों और पदों के, जो इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं किन्तु परिभाषित नहीं हैं और दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898 (1898 का 5) में परिभाषित हैं, वे ही अर्थ होंगे जो उस संहिता में क्रमशः उनके हैं, किस धारा से सम्बंधित है? |
धारा 2(घ) |
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कतिपय अपराधियों को भर्त्सना के पश्चात् छोड़ देने की न्यायालय की शक्ति (Power of Court to Release Certain Offenders After Admonition) किस धारा से सम्बंधित है? |
धारा 3 |
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अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा 3 किस विषय से संबंधित है? |
अपराधी को भर्त्सना के बाद रिहा करने की शक्ति |
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धारा 3 के अंतर्गत अपराधी को किसके बाद छोड़ा जाता है? |
भर्त्सना (Admonition) देने के बाद |
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धारा 3 का लाभ किस प्रकार के अपराधों में दिया जा सकता है? |
वे अपराध जिनकी सजा दो वर्ष या उससे कम हो |
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क्या धारा 3 के अंतर्गत दोषी व्यक्ति को कारावास की सजा दी जाती है? |
नहीं |
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धारा 3 का लाभ देने से पहले न्यायालय को किस बात का ध्यान रखना होता है? |
अपराध की प्रकृति और अपराधी का चरित्र |
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धारा 3 का प्रयोग तभी हो सकता है जब अपराध दया योग्य हो किस केस में कहा गया? |
अब्दुल राशिद बनाम राज्य मध्य प्रदेश |
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क्या धारा 3 के तहत दी गई रिहाई दोषसिद्धि (Conviction) को समाप्त कर देती है? |
नहीं |
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किस न्यायालय को धारा 3 के तहत भर्त्सना देने की शक्ति है? |
कोई भी सक्षम आपराधिक न्यायालय |
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किस केस में पहली बार अपराध करने के आधार पर धारा 3 लागू की गई? |
अशोक कुमार बनाम बिहार राज्य |
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क्या धारा 3 के तहत किसी भी उम्र के व्यक्ति को रिहा किया जा सकता है? |
हां, उम्र पर कोई पाबंदी नहीं |
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कतिपय अपराधियों को सदाचरण की परिवीक्षा पर छोड़ने की न्यायालय की शक्ति (Power of Court to Release Certain Offenders on Probation of Good Conduct) किस धारा से सम्बंधित है? |
धारा 4 |
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धारा 4 के तहत न्यायालय किसे सदाचरण की परिवीक्षा पर छोड़ सकता है? |
वे अपराधी जिनके अपराध मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय नहीं है |
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धारा 4 के तहत परिवीक्षा की अवधि अधिकतम कितनी हो सकती है? |
3 वर्ष |
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न्यायालय धारा 4 के अंतर्गत परिवीक्षा की अवधि तय करते समय किन बातों को ध्यान में रखता है |
अपराधी का चरित्र और अपराध की प्रकृति |
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किस केस में न्यायालय ने धारा 4 के संबंध में स्पष्ट किया कि, परिवीक्षा के दौरान अपराधी की निगरानी आवश्यक है? |
रामप्रसाद बनाम उत्तर प्रदेश राज्य |
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क्या धारा 4 के तहत दी गई परिवीक्षा के आदेश से दोषसिद्धि (conviction) समाप्त हो जाती है? |
नहीं, दोषसिद्धि बनी रहती है |
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धारा 4 के तहत परिवीक्षा पर छोड़े गए अपराधी को किसका पालन करना होता है? |
परिवीक्षा अधिकारी के निर्देश और न्यायालय के नियम |
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क्या धारा 4 के तहत अपराधी को परिवीक्षा पर छोड़ने के लिए अभियोजन पक्ष की अनुमति आवश्यक होती है? |
नहीं |
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न्यायालय किसी अपराधी के ऐसे छोड़ दिए जाने का निदेश कब तक नहीं देगा? |
जब तक उसका समाधान नहीं हो जाता कि अपराधी या उसके प्रतिभू का, यदि कोई हो, नियत निवास स्थान या उस स्थान में नियमित उपजीविका है, जिस पर वह न्यायालय अधिकारिता का प्रयोग करता है या जिसमें अपराधी के उस कालावधि के दौरान रहने की संभाव्यता है जिसके लिए वह बंधपत्र देता है |
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अधीन कोई आदेश करने से पूर्व न्यायालय क्या करेगा? |
संबंधित परिवीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट पर यदि कोई हो, विचार करेगा |
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किस मामले में न्यायालय ने अपराधी की पहली अपराध करने की स्थिति के आधार पर धारा 4 लागू की? |
सुधीर कुमार बनाम पंजाब राज्य |
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धारा 4 के तहत परिवीक्षा अधिकारी की भूमिका क्या है? |
अपराधी की निगरानी और मार्गदर्शन करना |
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धारा 4 के अंतर्गत परिवीक्षा की अवधि समाप्त होने पर क्या होता है? |
पर्यवेक्षण आदेश करने वाला न्यायालय आदेश के निबंधनों और शर्तों को अपराधी को समझाएगा और प्रत्येक अपराधी, प्रतिभू, यदि कोई हो, और संबंधित परिवीक्षा अधिकारी को तुरन्त पर्यवेक्षण आदेश की एक प्रति देगा |
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क्या धारा 4 का आदेश केवल दंडनीय अपराधों के लिए ही लागू होता है? |
हाँ |
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किस केस में न्यायालय ने धारा 4 के अंतर्गत परिवीक्षा के दौरान अपराधी की सुधारात्मक गतिविधियाँ आवश्यक हैं बात पर जोर दिया? |
किरण कुमारी बनाम महाराष्ट्र राज्य |
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क्या धारा 4 के तहत परिवीक्षा का उल्लंघन होने पर अदालत पुनः दंडित कर सकती है? |
हाँ |
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छोड़े गए अपराधियों से प्रतिकर और खर्च देने की अपेक्षा करने की न्यायालय की शक्ति (Power of Court to Require Released Offenders to Pay Compensation and Costs) किस धारा से सम्बंधित है? |
धारा 5 |
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धारा 5 के अंतर्गत न्यायालय किससे प्रतिकर या खर्च की अपेक्षा कर सकता है? |
छोड़े गए अपराधी से |
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प्रतिकर या खर्च का संबंध किस प्रकार के खर्च से हो सकता है? |
किसी व्यक्ति की हुई हानि या क्षति, कार्यवाहियों के खर्चे |
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धारा 5 के अनुसार न्यायालय प्रतिकर की राशि किस आधार पर तय करता है? |
जितने न्यायालय युक्तियुक्त समझता है |
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अपराधी से परिवीक्षा खर्च वसूलने का आदेश न्यायालय ने किस मामले में धारा 5 के अंतर्गत दिया? |
राम सिंह बनाम राज्य उत्तर प्रदेश |
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क्या धारा 5 के तहत प्रतिकर का भुगतान अनिवार्य है? |
हाँ |
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क्या धारा 5 के तहत वसूली गई राशि का उपयोग कहा जाता है? |
किसी व्यक्ति की हुई हानि या क्षति, और कार्यवाहियों के खर्चे की पूर्ति के लिए |
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क्या धारा 5 का आदेश केवल उन अपराधियों पर लगाया जा सकता है जिन्हें धारा 3 या 4 के तहत छोड़ा गया हो? |
हाँ |
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प्रतिकर की राशि तय करते समय अपराधी की आर्थिक स्थिति का विचार करना चाहिए, किस फैसले में न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया? |
सुनील कुमार बनाम राज्य महाराष्ट्र |
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क्या धारा 5 के तहत प्रतिकर की मांग न्यायालय द्वारा स्वतः की जा सकती है? |
हाँ |
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धारा 5 के अनुसार प्रतिकर और खर्च की राशि अपराधी से कब वसूली जा सकती है? |
परिवीक्षा के दौरान, |
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प्रतिकर की राशि न्यायालय के विवेकाधिकार पर निर्भर करती है किस मामले में न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया? |
रघुवीर बनाम केंद्र सरकार |
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इक्कीस वर्ष से कम आयु वाले अपराधियों के कारावास पर निर्बंन्धन (Restrictions on Imprisonment of Offenders Under Twenty-One Years of Age) किस धारा से सम्बंधित है? |
धारा 6 |
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अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा 6 का मुख्य उद्देश्य क्या है? |
21 वर्ष से कम आयु के अपराधियों के कारावास पर रोक लगाना |
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क्या धारा 6 के तहत सभी प्रकार के अपराधियों को कारावास से बचाया जा सकता है? |
नहीं, सिर्फ इक्कीस वर्ष से कम आयु वाला कोई व्यक्ति कारावास से (किन्तु आजीवन कारावास से नहीं) दण्डनीय कोई अपराध करने का दोषी पाया जाता है |
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क्या धारा 6 के तहत 21 वर्ष से कम आयु वाले अपराधी को जेल भेजना पूरी तरह निषिद्ध है? |
नहीं, |
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धारा 6 के तहत कारावास पर रोक लगाने का उद्देश्य क्या है? |
नाबालिगों के सुधार और पुनर्वास को प्रोत्साहित करना |
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नाबालिगों के मामले में सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाए, किस मामले में अदालत ने धारा 6 के तहत निर्णय सुनाया? |
रमेश बनाम राज्य महाराष्ट्र |
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क्या न्यायालय अपराधी को कारावास का कोई दंड दे सकता है? |
हाँ, परन्तु वह वैसा करने के अपने कारणों को अभिलिखित करेगा |
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धारा 6 के अंतर्गत कारावास से बचाए गए नाबालिग अपराधी की निगरानी किसके द्वारा की जाती है? |
परिवीक्षा अधिकारी |
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क्या धारा 6 के तहत किसी नाबालिग अपराधी को परिवीक्षा पर छोड़ने से पहले उसकी सहमति आवश्यक है? |
नहीं |
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परिवीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट का गोपनीय होगा (Report of Probation Officer to Be Confidential) किस धारा से सम्बंधित है? |
धारा 7 |
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अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा 7 का मुख्य विषय क्या है? |
परिवीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट गोपनीय मानी जाएगी |
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क्या धारा 7 के तहत परिवीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट का खुलासा अपराधी को किया जा सकता है? |
न्यायालय यदि ठीक समझता है, तो उसका सार अपराधी को संसूचित कर सकेगा और उसे ऐसा साक्ष्य पेश करने का अवसर दे सकेगा जैसा रिपोर्ट में कथित विषय से सुसंगत हो |
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धारा 7 के अनुसार परिवीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट को किसके लिए गोपनीय रखा जाता है? |
न्यायालय और परिवीक्षा अधिकारी तक ही सीमित |
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क्या धारा 7 के तहत परिवीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जा सकता है? |
नहीं, रिपोर्ट पूरी तरह गोपनीय रहती है |
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धारा 7 के तहत गोपनीयता बनाए रखने का उद्देश्य क्या है? |
अपराधी के पुनर्वास को सुविधाजनक बनाना |
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धारा 7 के तहत गोपनीय रिपोर्ट का उल्लंघन करने पर क्या कार्रवाई हो सकती है? |
कानूनी कार्यवाही |
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क्या धारा 7 के तहत परिवीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट न्यायालय के बाहर किसी अन्य संस्था को दी जा सकती है? |
नहीं |
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क्या धारा 7 की गोपनीयता की धारा अपराधी के पुनर्वास में सहायक मानी जाती है? |
हाँ |
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धारा 7 के तहत रिपोर्ट के गोपनीय होने के बावजूद न्यायालय किस स्थिति में इसे खोल सकता है? |
जब न्यायालय उचित समझे |
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परिवीक्षा की शर्तों में फेरफार (Variation of Conditions of Probation) किस धारा से सम्बंधित है? |
धारा 8 |
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अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा 8 का मुख्य उद्देश्य क्या है? |
परिवीक्षा की शर्तों में बदलाव करने की न्यायालय की शक्ति |
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धारा 8 के अनुसार परिवीक्षा की शर्तों में फेरफार किसके द्वारा किया जाता है? |
न्यायालय |
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धारा 8 के अनुसार परिवीक्षा की शर्तों में फेरफार का आवेदन किसके द्वारा किया जाता है? |
परिवीक्षा अधिकारी द्वारा |
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परिवीक्षा की शर्तों में बदलाव करने के लिए कौन सी प्रक्रिया अपनाई जाती है? |
बंधपत्र में वर्णित प्रतिभू या प्रतिभुओं को सुनवाई अवसर के बाद निर्णय |
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परिवीक्षा की शर्तों में बदलाव तभी किया जा सकता है जब वह सुधारात्मक हो किस मामले में न्यायालय ने धारा 8 के अंतर्गत कहा? |
रवि शर्मा बनाम राज्य पंजाब |
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धारा 8 के अंतर्गत परिवीक्षा की शर्तों में बदलाव क्यों किया जाता है? |
यदि न्यायालय की यह राय है कि अपराधी द्वारा दिए गए किसी बंधपत्र की शर्तों में फेरफार करना उस अपराधी और जनता के हितों में समीचीन या आवश्यक है |
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क्या धारा 8 के तहत परिवीक्षा की शर्तों में फेरफार करने के लिए अपराधी की सहमति आवश्यक है? |
नहीं |
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धारा 8 के अनुसार यदि परिवीक्षा की शर्तों में बदलाव किया जाता है तो उसका प्रभाव क्या होता है? |
बदलाव तुरंत लागू हो जाता है |
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यदि कोई प्रतिभू उपधारा (1) के अधीन किए जाने के लिए प्रस्थापित किसी फेरफार के लिए सहमत होने से इन्कार करता है तो उस परिस्थिति में क्या होगा? |
न्यायालय अपराधी से नया बंधपत्र देने की अपेक्षा कर सकेगा |
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अपराधी यदि नया बंधपत्र देने करने से इन्कार करेगा या उसमें असफल होगा तो उस परिस्थिति में क्या होगा? |
न्यायालय उसे उस अपराध के लिए दण्डित कर सकेगा, जिसका वह दोषी पाया गया था। |
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परिवीक्षा अधिकारी द्वारा किए गए आवेदन पर समाधान हो जाता है कि अपराधी का आचरण ऐसा रहा है कि उसे और आगे पर्यवेक्षणाधीन रखना अनावश्यक हो गया है तो न्यायालय उस परिस्थिति में क्या करेगा? |
वह उसके द्वारा दिए गए बंधपत्र को उन्मोचित कर सकेगा |
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धारा 8 के अनुसार, न्यायालय परिवीक्षा की शर्तों में बदलाव कब कर सकता है? |
जब न्यायालय को अपराधी के सुधार में बाधा नजर आए |
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धारा 8 के तहत परिवीक्षा की शर्तों में फेरफार के दौरान कौन-कौन से कारक ध्यान में लिए जाते हैं? |
अपराधी का व्यवहार, अपराध की प्रकृति, परिवीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट |
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क्या धारा 8 के अंतर्गत परिवीक्षा की शर्तों में फेरफार करने का अधिकार केवल न्यायालय को है? |
हाँ |
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क्या धारा 8 के तहत परिवीक्षा की शर्तों में फेरफार करते समय न्यायालय दोषी की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखता है? |
हाँ |
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धारा 8 के अंतर्गत परिवीक्षा की शर्तों में फेरफार करने का अधिकार किसे नहीं दिया गया है? |
पुलिस अधिकारी |
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बंधपत्र की शर्तों के अनुपालन में अपराधी के असफल होने की दशा में प्रक्रिया (Procedure in Case of Offender Failing to Observe Conditions of Bond) किस धारा से सम्बंधित है? |
धारा 9 |
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अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा 9 का मुख्य विषय क्या है? |
बंधपत्र की शर्तों का पालन न करने पर प्रक्रिया |
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धारा 9 के अंतर्गत यदि अपराधी बंधपत्र की शर्तों का पालन करने में विफल रहता है, तो न्यायालय क्या कर सकता है? |
उसकी गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी कर सकेगा या यदि ठीक समझता है तो उसके या प्रतिभूओं के, यदि कोई हों, नाम समन निकाल सकेगा |
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बंधपत्र की शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में सबसे पहली कार्रवाई क्या होनी चाहिए? |
परिवीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट न्यायालय को प्रस्तुत करना |
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क्या धारा 9 के अनुसार बंधपत्र की शर्तों के उल्लंघन पर अपराधी को तुरंत गिरफ्तार किया जा सकता है? |
नहीं, उससे मामले की समाप्ति तक के लिए अभिरक्षा में प्रतिप्रेषित कर सकेगा या उस तारीख को जो वह सुनवाई के लिए नियत करे उपस्थित होने के लिए उसे प्रतिभू के सहित या बिना जमानत मंजूर कर सकेगा। |
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धारा 9 के अनुसार, न्यायालय बंधपत्र की शर्तों के उल्लंघन के मामले में कौन सी प्रक्रिया अपनाता है? |
न्यायालय में सुनवाई और आदेश देना |
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धारा 9 के तहत बंधपत्र की शर्तों का पालन न करने पर अपराधी की गिरफ्तारी किसके आदेश से होती है? |
न्यायालय के आदेश से |
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यदि मामले की सुनवाई के पश्चात् न्यायालय का समाधान हो जाता है कि अपराधी अपने द्वारा दिए गए बंधपत्र की शर्तों में से किसी का अनुपालन करने में असफल हुआ है तो वह क्या करेगा? |
उसे मूल अपराध के लिए दंडित कर सकेगा; जहां असफलता प्रथम बार होती है वहां बंधपत्र के प्रवृत्त रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना उस पर पचास रुपए से अनधिक की शास्ति अधिरोपित कर सकेगा |
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यदि अधिरोपित शास्ति ऐसी कालावधि के भीतर जैसी न्यायालय नियत करे संदत्त नहीं की जाती है तो न्यायालय क्या करेगा? |
अपराधी को मूल अपराध के लिए दंडित कर सकेगा। |
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धारा 9 के तहत बंधपत्र की शर्तों के उल्लंघन के बाद अपराधी को जेल भेजने से पहले न्यायालय किसका पक्ष सुनता है? |
अपराधी और पक्षकार दोनों |
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धारा 9 के तहत बंधपत्र की शर्तों का पालन न करने पर न्यायालय क्या कर सकता है? |
अपराधी को जेल भेज सकता है |
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क्या धारा 9 के तहत बंधपत्र की शर्तों का उल्लंघन मामूली अपराध माना जाता है? |
नहीं |
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धारा 9 के अंतर्गत बंधपत्र की शर्तों के उल्लंघन पर न्यायालय का निर्णय किस आधार पर निर्भर करता है? |
शर्तों के उल्लंघन का प्रकार और गंभीरता |
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धारा 9 के अनुसार यदि अपराधी बंधपत्र की शर्तों का पालन करता है तो क्या होता है? |
परिवीक्षा समाप्त हो जाती है |
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प्रतिभुओं के बारे में उपबंध (Provision as to Sureties) किस धारा से सम्बंधित है? |
धारा 10 |
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धारा 10 के अनुसार प्रतिभु (Surety) का क्या अर्थ है? |
वह व्यक्ति जो अपराधी को न्यायालय में उपस्थित कराने की जिम्मेदारी लेता है |
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अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा 10 के अनुसार प्रतिभु की भूमिका क्या है? |
अपराधी की न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित करना |
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क्या प्रतिभु अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो सकता है? |
जब न्यायालय अनुमति दे |
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अधिनियम के अधीन आदेश देने के लिए साक्ष्य न्यायालय, अपील और पुनरीक्षण और अपीलें और पुनरीक्षण न्यायालयों की शक्तियां (Courts Competent to Make Order Under the Act, Appeal and Revision and Powers of Courts in Appeal and Revision) किस धारा से सम्बंधित है? |
धारा 11 |
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धारा 11 के अनुसार अपराधी परिवीक्षा अधिनियम के तहत अपील या पुनरीक्षण का आदेश कौन से न्यायलय द्वारा दिया जा सकेगा? |
अपराधी का विचारण और उसे कारावास से दंडित करने के लिए सशक्त किसी न्यायालय द्वारा, और उच्च न्यायालय, या किसी अन्य न्यायालय द्वारा |
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धारा 11 के अंतर्गत न्यायालय की पुनरीक्षण शक्ति किसके विरुद्ध होती है? |
धारा 3 या धारा 4 के अधीन कोई आदेश |
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क्या धारा 3 या धारा 4 के अधीन आदेशों के विरुद्ध अपील की कहाँ जा सकती है? |
वहां अपील उस न्यायालय को की जा सकेगी जिसको पूर्ववर्ती न्यायालय के दंडादेशों से अपील मामूली तौर पर की जाती है। |
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किस मामले में न्यायालय ने धारा 11 के संबंध में निर्णय दिया कि, पुनरीक्षण न्यायालय की विवेकाधिकार पर निर्भर है? |
गीता देवी बनाम राज्य उत्तर प्रदेश |
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धारा 11 के अंतर्गत न्यायालय की पुनरीक्षण शक्ति का उद्देश्य क्या है? |
आदेशों की समीक्षा कर न्याय सुनिश्चित करना |
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धारा 11 के अंतर्गत अपील और पुनरीक्षण के बीच क्या अंतर है? |
अपील आदेश को चुनौती देती है, पुनरीक्षण समीक्षा करता है |
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धारा 11 के तहत न्यायालय किस प्रकार के आदेश दे सकता है? |
परिवीक्षा पर छोड़ना या कारावास का आदेश देना, परन्तु उस अपराध में जितना दंड दिया जा सकता है उससे अधिक नहीं दिया जायेगा |
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दोषसिद्धि से संलग्न निरर्हता का हटाया जाना (Removal of Disqualification Attaching to Conviction) किस धारा से सम्बंधित है? |
धारा 12 |
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धारा 12 के अनुसार दोषसिद्धि से संलग्न निरर्हता का हटाया जाना से क्या अभिप्राय है? |
कोई व्यक्ति, जिसके संबंध में धारा 3 या धारा 4 के उपबंधों के अधीन कार्यवाही की जाती है, ऐसी विधि के अधीन किसी अपराध की दोषसिद्धि से संलग्न, यदि कोई हो, निरर्हता से ग्रस्त नहीं होगा |
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धारा 12 किन व्यक्तियो पर लागू नहीं होगी? |
किसी ऐसे व्यक्ति को जो धारा 4 के अधीन उसे छोड़ दिए जाने के बाद, तत्पश्चात् मूल अपराध के लिए दंडित किया जाता है। |
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परिवीक्षा अधिकारी (Probation Officers) किस धारा से सम्बंधित है? |
धारा 13 |
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अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा 13 के अनुसार परिवीक्षा अधिकारी की नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है? |
राज्य सरकार द्वारा नियुक्त, या राज्य सरकार द्वारा उस रूप में मान्यताप्राप्त है अधिकारी |
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क्या वह व्यक्ति जो राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त मान्यताप्राप्त सोसाइटी द्वारा इस प्रयोजन के लिए उपलभ्य किया गया है, परिवीक्षा अधिकारी माना जायेगा? |
हाँ |
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किसी असाधारण मामले में कोई अन्य व्यक्ति कब परिवीक्षा अधिकारी माना जा सकेगा? |
जो न्यायालय की राय में उस मामले की विशेष परिस्थितियों में परिवीक्षा अधिकारी के रूप में कार्य करने के योग्य है |
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क्या जिला मजिस्ट्रेट भी परिवीक्षा अधिकारी नियुक्त कर सकता है? |
हाँ, किसी भी समय, पर्यवेक्षण आदेश में नामित किसी व्यक्ति के स्थान पर कोई परिवीक्षा अधिकारी नियुक्त कर सकेगा। |
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धारा 13 के अनुसार परिवीक्षा अधिकारी का मुख्य कार्य क्या है? |
दोषी की निगरानी और सुधार के लिए देखरेख करना |
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परिवीक्षा अधिकारी के कर्तव्य (Duties of Probation Officers) किस धारा से सम्बंधित है? |
धारा 14 |
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धारा 14 के अनुसार परिवीक्षा अधिकारी का मुख्य कर्तव्य क्या है? |
परिवीक्षाधीनों और अपने पर्यवेक्षण के अधीन रखे गए अन्य व्यक्तियों का पर्यवेक्षण करेगा |
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परिवीक्षा अधिकारी को दोषी की देखरेख करते समय क्या करना आवश्यक है? |
जहां आवश्यक हो उनके लिए उपयुक्त नियोजन ढूंढने का प्रयास करेगा जो धारा 4 के अधीन छोड़ दिए गए हैं, ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, सलाह और सहायता देगा ऐसे अन्य कर्तव्य करेगा जो विहित किए जाएं |
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किस मामले में न्यायालय ने धारा 14 के के संदर्भ में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि, परिवीक्षा अधिकारी की निगरानी दोषी सुधार के लिए आवश्यक है? |
रमेश कुमार बनाम राज्य उत्तर प्रदेश |
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धारा 14 के अनुसार परिवीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट किस आधार पर न्यायालय को प्रस्तुत की जाती है? |
व्यक्ति की परिस्थितियों या घर के माहौल की जांच उसके संबंध में कार्यवाही करने की सबसे उपयुक्त पद्धति अवधारित करने में न्यायालय की सहायता करने की दृष्टि से, न्यायालय के निदेशों के अनुसार करेगा और न्यायालय को रिपोर्ट देगा |
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परिवीक्षा अधिकारी के कर्तव्यों में दोषी के प्रति क्या अपेक्षाएँ शामिल हैं? |
दोषी को अपराध से दूर रखना, दोषी को पुनः समाज में समायोजित करना, दोषी के अच्छे आचरण के लिए प्रोत्साहित करना |
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धारा 14 के अंतर्गत परिवीक्षा अधिकारी दोषी से क्या अपेक्षा रखता है? |
नियमित रिपोर्टिंग, दोषी के परिवर्तित व्यवहार की जांच, दोषी के परिवार से संपर्क |
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क्या धारा 14 के अनुसार परिवीक्षा अधिकारी को दोषी के सुधार के लिए योजना बनानी होती है? |
हाँ |
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परिवीक्षा अधिकारियों का लोक सेवक होना (Probation Officers to be Public Servants) किस धारा से सम्बंधित है? |
धारा 15 |
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अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा 15 के अनुसार परिवीक्षा अधिकारियों का लोक सेवक होना, से क्या तात्पर्य है? |
इस अधिनियम के अनुसरण में नियुक्त प्रत्येक परिवीक्षा अधिकारी और प्रत्येक अन्य अधिकारी भारतीय न्याय संहिता 2023 धारा 2(28) के अर्थ में लोक सेवक समझे जाएंगे |
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धारा 15 के अनुसार परिवीक्षा अधिकारी का दर्जा क्या होता है? |
लोक सेवक |
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सद्भावपूर्वक की गई कार्यवाही के लिए संरक्षण (Protection of Action Taken in Good Faith) किस धारा से सम्बंधित है? |
धारा 16 |
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अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा 16 के अनुसार सद्भावपूर्वक की गई कार्यवाही के लिए क्या संरक्षण मिलता है? |
पूर्ण कानूनी संरक्षण |
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धारा 16 के अंतर्गत किस प्रकार की कार्यवाही को संरक्षण मिलता है? |
सद्भावपूर्वक और न्यायसंगत तरीके से की गई कार्यवाही |
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किस मामले में न्यायालय ने धारा 16 के के संदर्भ में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि, सद्भावपूर्वक की गई कार्यवाही को मुकदमे से सुरक्षा दी गई? |
राघवेंद्र सिंह बनाम राज्य राजस्थान |
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धारा 16 के अनुसार सद्भावपूर्वक कार्यवाही करने वाले व्यक्ति को क्या मिलता है? |
मुकदमे से संरक्षण |
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धारा 16 के तहत यदि कोई कार्यवाही कदाचार या अनियमितता के कारण की जाती है, तो क्या संरक्षण मिलेगा? |
नहीं मिलेगा |
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धारा 16 के अनुसार कौन सी कार्रवाई सद्भावपूर्वक कार्यवाही नहीं मानी जाएगी? |
जो घोर लापरवाही या दुराचार पर आधारित हो |
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धारा 16 के तहत संरक्षण किसके हित में बनाया गया है? |
न्यायिक अधिकारियों और परिवीक्षा अधिकारियों के लिए |
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धारा 16 के अनुसार किसे सद्भावपूर्वक कार्यवाही का संरक्षण मिलता है? |
परिवीक्षा अधिकारी |
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धारा 16 के तहत संरक्षण किस प्रकार की कार्यवाही के लिए नहीं मिलेगा? |
धोखाधड़ीपूर्ण कार्यवाही, अनुचित कार्यवाही |
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नियम बनाने की शक्ति (Power to Make Rules) किस धारा से सम्बंधित है? |
धारा 17 |
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अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा 17 के अनुसार नियम बनाने की शक्ति किसके पास है? |
राज्य सरकार |
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धारा 17 के अनुसार नियम किसके अनुमोदन पर बनाये जाते है? |
केन्द्रीय सरकार के |
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राज्य सरकार धारा 17 के अंतर्गत नियम क्यों बनाएगी? |
इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए, |
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राज्य सरकार धारा 17 के अंतर्गत नियम किस प्रकार बना सकेगी? |
शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी, और बनाए जाने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र राज्य विधान मंडल के समक्ष रखे जाएंगे |
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धारा 17 के अंतर्गत बनाए गए नियम किन उद्देश्यों के लिए बनाये जाते है? |
परिवीक्षा अधिकारियों की नियुक्ति, सेवा के निबंधन और शर्तें तथा क्षेत्र,कर्तव्य और उनके द्वारा रिपोर्टों का दिया जाना, पारिश्रमिक और व्ययों का अथवा किसी सोसाइटी को सहायिकी का संदाय, और कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या किया जाए |
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धारा 17 के अनुसार नियमों के विषय में क्या कहा गया है? |
नियम अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी बनाते हैं |
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क्या धारा 17 के अंतर्गत नियम बनाने का अधिकार न्यायालय को प्राप्त है? |
नहीं |
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कतिपय अधिनियमितियों के प्रवर्तन की व्यावृत्ति (Saving of Operation of Certain Enactments) किस धारा से सम्बंधित है? |
धारा 18 |
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धारा 18 के अनुसार अधिनियमितियों के प्रवर्तन की व्यावृत्ति किस प्रकार निर्धारित होती है? |
इस अधिनियम की कोई बात सुधार विद्यालय अधिनियम, की धारा 31, या भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1947 की धारा 5 की उपधारा (2), अथवा किशोर अपराधियों या बोर्स्टल स्कूलों से संबद्ध किसी राज्य में प्रवृत्त किसी विधि के उपबंधों को प्रभावित नहीं करेगी। |
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क्या धारा 18 के अंतर्गत अधिनियमितियों के प्रवर्तन का विस्तार अन्य कानूनों से प्रभावित होता है? |
हाँ, यदि अन्य कानून अधिनियम के प्रावधानों से मेल खाते हैं |
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धारा 18 के संदर्भ में किस मामले में न्यायालय ने कहा कि अधिनियमितियों का प्रवर्तन स्पष्ट और सीमित होना चाहिए? |
मोहन लाल बनाम राज्य राजस्थान |
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धारा 18 के अनुसार अधिनियमितियों के प्रवर्तन में न्यायालय की क्या भूमिका होती है? |
नियमों के अनुपालन की निगरानी और स्पष्टता प्रदान करना |
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संहिता की धारा 562 का कतिपय क्षेत्रों में लागू न होना (Section 562 of The Code Not to Apply in Certain Areas) किस धारा से सम्बंधित है? |
धारा 19 |