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उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम, 1970 (THE UTTAR PRADESH CONTROL OF GOONDAS ACT, 1970) |
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[उ०प्र० अधिनियम संख्या 8, 1971] [U. P. Act No. 8 of 1971] |
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उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम को उत्तर प्रदेश विधान सभा द्वारा कब स्वीकृत किया गया? |
15 दिसम्बर, 1970 |
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उत्तर प्रदेश विधान परिषद् ने उक्त अधिनियम को किस तिथि को स्वीकृति प्रदान की? |
24 दिसम्बर, 1970 |
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यह अधिनियम भारत के संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत राष्ट्रपति की स्वीकृति से पारित हुआ? |
अनुच्छेद 201 |
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राष्ट्रपति द्वारा इस अधिनियम को स्वीकृति कब प्रदान की गई? |
13 जनवरी, 1971 |
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उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम, 1970 का प्रकाशन उत्तर प्रदेशीय सरकारी असाधारण गजट में कब हुआ? |
18 जनवरी, 1971 |
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उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम, 1970 का मुख्य उद्देश्य क्या है? |
सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने हेतु गुंडों पर नियंत्रण करना |
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अधिनियम |
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संक्षिप्त शीर्ष नाम तथा प्रसार, (Short Title and Extent) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 1 |
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धारा 1 की उपधारा (1) के अनुसार इस अधिनियम का संक्षिप्त शीर्षनाम क्या है? |
उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम, 1970 |
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उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम, 1970 की धारा 1 का संबंध किस विषय से है? |
संक्षिप्त शीर्षनाम तथा प्रसार |
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धारा 1 की उपधारा (2) के अनुसार इस अधिनियम का प्रसार कहाँ तक है? |
सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश में |
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परिभाषा, (Definition) खंड अधिनियम की किस धारा में वर्णित है? |
धारा 2 |
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धारा 2 में प्रयुक्त वाक्यांश “जब तक कि प्रसंग द्वारा अन्यथा अपेक्षित न हो” का तात्पर्य क्या है? |
संदर्भ के अनुसार परिभाषाओं में परिवर्तन संभव है |
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"जिला मजिस्ट्रेट" (District Magistrate) अधिनियम की किस धारा में वर्णित है? |
धारा 2(क) |
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धारा 2(क) के अनुसार “जिला मजिस्ट्रेट” की परिभाषा में किसे सम्मिलित किया गया है? |
राज्य सरकार द्वारा तदर्थ अधिकृत अपर जिला मजिस्ट्रेट |
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उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम, 1970 में “जिला मजिस्ट्रेट” शब्द का प्रयोग किस अर्थ में किया गया है? |
परिभाषा खंड में निर्दिष्ट विस्तृत अर्थ में |
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कौन-सा कथन सही है? |
राज्य सरकार द्वारा तदर्थ अधिकृत अपर जिला मजिस्ट्रेट जिला मजिस्ट्रेट के अंतर्गत आएगा |
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धारा 2(क) के अनुसार अपर जिला मजिस्ट्रेट को “जिला मजिस्ट्रेट” की श्रेणी में कब माना जाएगा? |
जब उसे राज्य सरकार द्वारा तदर्थ रूप से अधिकृत किया गया हो |
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"गुण्डा" (Goonda) अधिनियम की किस धारा में वर्णित है? |
धारा 2(ख) |
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धारा 2(ख) के अनुसार “गुण्डा” शब्द का तात्पर्य किससे है? |
ऐसे व्यक्ति से जो अधिनियम में वर्णित श्रेणियों में आता हो |
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भारतीय दण्ड संहिता (भारतीय न्याय संहिता 2023) के किन अध्यायों के अंतर्गत दण्डनीय अपराध अभ्यासतः करने वाला व्यक्ति “गुण्डा” माना जाएगा? |
अभ्यासतः भारतीय दण्ड संहिता की धारा 153 या धारा 153-ख 294 या उक्त संहिता के अध्याय 15, अध्याय 16, अध्याय 17 या अध्याय 22 के अधीन (भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 192 या धारा 197, 296 या उक्त संहिता के अध्याय 16, अध्याय 5 (81 से 87 धाराओं के सिवाय), अध्याय 6, अध्याय 17 या अध्याय 19 के अधीन) |
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कौन-सा व्यक्ति “गुण्डा” माना जाएगा, भले ही वह गिरोह का सदस्य न हो? |
जो अभ्यासतः स्वयं अपराध करता हो |
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स्त्री तथा लड़की अनैतिक व्यापार दमन अधिनियम, 1956 के अंतर्गत किस स्थिति में व्यक्ति “गुण्डा” माना जाएगा? |
स्त्री तथा लड़की अनैतिक व्यापार दमन अधिनियम, 1956 के अंतर्गत सिद्धदोष ठहराए जाने पर |
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किन अधिनियमों के अंतर्गत कम से कम तीन बार सिद्धदोष होने पर व्यक्ति “गुण्डा” माना जाएगा? |
संयुक्त प्रान्त आबकारी अधिनियम, 1910 या सार्वजनिक द्यूत अधिनियम, 1867 या आयुध अधिनियम, 1959 की धारा 25, धारा 27 या धारा 29 के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के लिए |
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यदि किसी व्यक्ति की सामान्य ख्याति जनसमुदाय के लिए खतरनाक और दुःसाहसिक हो, तो वह किस श्रेणी में आएगा? |
गुण्डा |
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जो व्यक्ति अभ्यासतः स्त्रियों या लड़कियों के प्रति अशिष्ट उक्ति कहता है या छेड़खानी करता है, वह— |
गुण्डा माना जाएगा |
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जो दलाल (टाउट) है- |
गुण्डा माना जाएगा |
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किसी व्यक्ति को अपने लिये या किसी अन्य व्यक्ति के लिये किसी प्रकार का परितोषण किसी लोक सेवक या सरकार या संसद या राज्य विधान मण्डल के सदस्य को भ्रष्ट या अवैध साधनों द्वारा केन्द्रीय या राज्य सरकार, संसद या राज्य विधान मण्डल, किसी स्थानीय प्राधिकारी, निगम, सरकारी कम्पनी या लोक सेवक से कुछ करने या कुछ करने से प्रविरत रहने या किसी व्यक्ति के प्रति अनुग्रह करने को उत्पेरित करने के लिए किसी व्यक्ति का उपकार या अपकार करने का प्रयत्न करने को उत्प्रेरित करने के लिए प्रतिग्रहीत करता है या अभिप्राप्त करता है या प्रतिग्रहीत करने को सहमत होता है या अभिप्राप्त करने का प्रयत्न करता है- |
धारा 2(ख) (6) के स्पष्टीकरण (क) के अनुसार “दलाल (टाउट)” होता है|
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विधि व्यवसाय में हितबद्ध किसी विधि व्यवसायी द्वारा प्रस्तावित किसी पारिश्रमिक के प्रतिफल स्वरूप उस व्यवसाय में किसी विधि व्यवसायी का नियोजन प्राप्त करता है या उसको प्राप्त करने के लिए किसी विधि व्यवसायी से या विधि व्यवसाय हितबद्ध किसी व्यक्ति से, उनमें से किसी के द्वारा प्रस्तावित किसी पारिश्रमिक के प्रतिफल स्वरूप प्रस्ताव करता है- |
धारा 2(ख) (6) के स्पष्टीकरण (ख) के अनुसार “दलाल (टाउट)” होता है|
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खण्ड (क) या (ख) में उल्लेखित प्रयोजनों के लिए सिविल दाण्डिक या राजस्व न्यायालयों के अहातों में राजस्व या अन्य कार्यालयों, आवासिक कालोनी या निवास स्थानों या उपर्युक्त स्थानों या रेल या बस स्टेशनों, उतरने के स्थानों ठहरने के स्थानों या अन्य लोक समागम स्थलों के आस-पास आता-जाता है; |
धारा 2(ख) (6) के स्पष्टीकरण (ग) के अनुसार “दलाल (टाउट)” होता है| |
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“गृह अपग्राही” की सही परिभाषा क्या है? |
जो किसी भवन का, जिसके अन्तर्गत भवन से सम्बद्ध भूमि, बाग, गैराज या बाह्यगृह भी है, अप्राधिकृत कब्जा लेता है या लेने का प्रयत्न करता है या उसके लेने में सहायता देता है या उसके लिए दुष्प्रेरित करता है या भवन में विधिपूर्वक प्रवेश करने के उपरान्त उस पर अविधिपूर्वक कब्जा बनाये रखता है |
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गुण्डों का बहिष्कासन आदि, (Externment, Etc. of Goondas) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 3 |
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धारा 3(1)(क) के अंतर्गत कार्यवाही करने से पूर्व जिला मजिस्ट्रेट को सर्वप्रथम किस बात से संतुष्ट होना आवश्यक है? |
व्यक्ति गुण्डा हो |
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धारा 3(1)(ख) के अनुसार मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति को लिखित नोटिस द्वारा उसके संबंध में उसके विरूद्ध सारवान आरोपों की सामान्य प्रकृति की सूचना देगा और उसको उनके विरूद्ध स्पष्टीकरण देने का समुचित अवसर देगा- |
जब व्यक्ति की गतिविधियाँ जान या संपत्ति के लिए संत्रास उत्पन्न करती हों |
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कौन-सी स्थिति धारा 3(1)(ख) के अंतर्गत आती है जिसके में संबंध मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति को लिखित नोटिस द्वारा उसके संबंध में उसके विरूद्ध सारवान आरोपों की सामान्य प्रकृति की सूचना देगा और उसको उनके विरूद्ध स्पष्टीकरण देने का समुचित अवसर देगा? |
जिले या उसके किसी भाग में उसकी गतिविधियां या कार्य व्यक्तियों की जान या सम्पत्तियों के लिये संत्रास, संकट या अपहानि करते है या करने के लिये आयोजित है, या व्यक्ति धारा 2(ख)(1) से (3) में निर्दिष्ट अपराध करने में लगा हो या लगने वाला हो |
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धारा 3(1)(ग) के अनुसार साक्षियों के संबंध में कौन-सी बात आवश्यक है जिसके में संबंध मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति को लिखित नोटिस द्वारा उसके संबंध में उसके विरूद्ध सारवान आरोपों की सामान्य प्रकृति की सूचना देगा और उसको उनके विरूद्ध स्पष्टीकरण देने का समुचित अवसर देगा? |
साक्षी भय के कारण साक्ष्य देने को तैयार न हों |
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धारा 3(1) के अंतर्गत व्यक्ति को क्या प्रदान किया जाना अनिवार्य है? |
लिखित नोटिस और स्पष्टीकरण का अवसर |
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धारा 3(2) के अनुसार संबंधित व्यक्ति को कौन-सा अधिकार प्राप्त है? |
अपने पसंद के वकील से परामर्श और प्रतिरक्षा |
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धारा 3(2) के अंतर्गत व्यक्ति को साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर कब नहीं दिया जा सकता? |
जब प्रार्थना विलम्ब या परेशान करने के उद्देश्य से हो |
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धारा 3(3)(क) के अनुसार बहिष्कासन की अधिकतम अवधि क्या हो सकती है? |
छः माह से अधिक नहीं |
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धारा 3(3)(ख) (1) के अंतर्गत जिला मजिस्ट्रेट कौन-सा निर्देश दे सकता है? |
गतिविधियों की सूचना देने या उपस्थित होने का |
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धारा 3(3)(ख) (2) के अंतर्गत कौन-सा आदेश दिया जा सकता है? |
व्यक्ति को किसी वस्तु को रखने या प्रयोग करने से प्रतिबंधित करने का |
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धारा 3(3)(ख) (3) के अंतर्गत कौन-सा आदेश दिया जा सकता है? |
अन्यथा ऐसी रीति से, जैसा आदेश में निर्दिष्ट किया जाय, आचरण करने का तब तक के लिये आदेश कर सकता है तक कि छः माह से अनधिक ऐसी अवधि, जो आदेश में निर्दिष्ट की जाये, समाप्त न हो जाये। |
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अस्थायी अवधि के लिए वापस लौटने की अनुज्ञा, (Permission to Return Temporarily) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 4 |
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धारा 4 के अंतर्गत अस्थायी रूप से वापस लौटने की अनुज्ञा कौन दे सकता है? |
जिला मजिस्ट्रेट |
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धारा 4 के अंतर्गत अनुज्ञा किस व्यक्ति को दी जा सकती है? |
जिसके विरुद्ध धारा 3(3)(क) के अंतर्गत आदेश पारित किया गया हो |
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धारा 4 के अंतर्गत प्रवेश या वापसी की अनुज्ञा किस अवधि के लिए दी जाती है? |
अस्थायी अवधि के लिए |
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धारा 4 के अनुसार अस्थायी अनुज्ञा किस आधार पर दी जाती है? |
जिला मजिस्ट्रेट द्वारा निर्दिष्ट शर्तों पर |
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धारा 4 के अनुसार दी गई अस्थायी अनुज्ञा के संबंध में जिला मजिस्ट्रेट की क्या शक्ति है? |
किसी भी समय अनुज्ञा निरस्त करने की |
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धारा 4 के अंतर्गत दी गई अनुज्ञा किस क्षेत्र से संबंधित होती है? |
उस क्षेत्र से जहाँ से व्यक्ति को हटाया गया था |
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आदेश की अवधि में बढोत्तरी, (Extension of Period of Order) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 5 |
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धारा 5 के अंतर्गत धारा 3 के अधीन दिए गए आदेश की अवधि बढ़ाने की शक्ति किसे है? |
जिला मजिस्ट्रेट |
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धारा 5 के अनुसार आदेश की अवधि बढ़ाने से पहले किसे अवसर दिया जाना आवश्यक है? |
सम्बद्ध व्यक्ति को |
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धारा 5 के अंतर्गत आदेश की अवधि बढ़ाने से इंकार करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट को क्या करना होगा? |
कारणों को अभिलिखित करना होगा |
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धारा 5 के अनुसार बढ़ाई गई अवधि कुल मिलाकर अधिकतम कितनी हो सकती है? |
दो वर्ष |
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अपील, (Appeal) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 6 |
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धारा 6 के अनुसार धारा 3, 4 या 5 के अधीन दिए गए आदेश के विरुद्ध अपील किसके पास की जाती है? |
आयुक्त |
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धारा 6 के अंतर्गत अपील आदेश की तिथि से कितने दिनों के भीतर की जानी चाहिए? |
पन्द्रह दिन |
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धारा 6 के अनुसार अपील कौन कर सकता है? |
आदेश से क्षुब्ध व्यक्ति |
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धारा 6 की उपधारा (2) के अनुसार अपीलार्थी या उसके वकील को किसका अधिकार नहीं है? |
किसी ऐसे अभिलेख का, जो धारा 3 के अधीन हुई जांच, यदि कोई हुई हो, उसे प्रकट न किया गया हो, निरीक्षण करने या उसके संबंध में सूचना देने का अधिकार न होगा। |
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आदेश की, परिष्कार सहित अथवा रहित, पुष्टि कर सकता है या उसे रद्द कर सकता है, और अपील का निस्तारण होने तक आदेश के प्रवर्तन को, ऐसी शर्तों पर, यदि कोई हो, जिन्हें वह उचित समझे, स्थगित कर सकता है- |
आयुक्त |
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कतिपय प्रयोजनों के लिये मुचलके, (Recognizance for Certain Purposes) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 7 |
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धारा 7 के अंतर्गत प्रतिभुओं सहित या रहित, बंधपत्र निष्पादित करने की अपेक्षा करने की शक्ति किस प्राधिकारी को है? |
जिला मजिस्ट्रेट या आयुक्त |
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धारा 7(1)(क) के अनुसार मुचलका लेने का उद्देश्य क्या है? |
व्यक्ति की उपस्थिति सुनिश्चित करना |
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धारा 7(1)(ख) के अंतर्गत मुचलका किस बात को सुनिश्चित करने हेतु लिया जा सकता है? |
धारा 3, 4, 5 या 6 के आदेशों के अनुपालन का |
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धारा 7 के अंतर्गत लिए गए बंधपत्रों पर किस संहिता के उपबंध लागू होते हैं? |
दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) |
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धारा 7(2)(क) के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट नोटिस जारी करते समय क्या जारी कर सकता है? |
गिरफ्तारी का वारंट |
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धारा 7(2)(क) के अंतर्गत जारी वारंट पर दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) की कौन-सी धाराएँ लागू होती हैं? |
दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की {धारा 71}(भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की {धारा 73) के अनुसार पृष्ठांकित निदेश दिया गया हो, जारी कर सकता है और दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की {धारायें 70 से 85 और 87 से 89 तक} (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की {धारायें 72 से 85, 87, 88, और 90 से 92 तक} के उपबंध जहां तक हो सके, ऐसे वारंट के संबंध में उसी प्रकार लागू होगें मानो जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय हो |
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यदि कोई व्यक्ति धारा 7 के अंतर्गत अपेक्षित बंधपत्र निष्पादित करने में चूक करता है, तो क्या किया जा सकता है? |
उसे कारागार को सुपुर्द किया जा सकता है |
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बंधपत्र निष्पादित न करने की स्थिति में दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) की कौन-सी धाराएँ लागू होती हैं? |
दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारायें 119 से 121 तक, 123 और 124 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारायें 138 से 140 तक, 142 और 143 |
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धारा 7 के अंतर्गत निष्पादित सभी बंधपत्रों पर दण्ड प्रक्रिया संहिता1973 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की कौन-सी धाराएँ लागू होती हैं? |
दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारायें 445 से 447 तक (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारायें 490 से 493) तक |
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साक्ष्य की प्रकृति, (Nature of Evidence) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 8 |
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धारा 8 के अंतर्गत जिला मजिस्ट्रेट या आयुक्त किस प्रयोजन से साक्ष्य पर विचार कर सकता है? |
यह समाधान करने के लिए कि धारा 3 के अंतर्गत आदेश देने की आवश्यक शर्तें विद्यमान हैं या नहीं |
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धारा 8 के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट या आयुक्त किस प्रकार के साक्ष्य पर विचार कर सकता है? |
ऐसा कोई भी साक्ष्य जिसे वह प्रमाणक मूल्य का समझे |
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धारा 8 के अंतर्गत साक्ष्य पर विचार करते समय भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023) की स्थिति क्या है? |
लागू नहीं होता है |
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धारा 8 के अनुसार साक्ष्य पर विचार करने का अधिकार किसे प्राप्त है? |
जिला मजिस्ट्रेट या आयुक्त |
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आदेश का निरसन, (Rescission of Order) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 9 |
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धारा 9 के अंतर्गत धारा 3 के अधीन दिये गये आदेश का निरसन कौन कर सकता है? |
जिला मजिस्ट्रेट या आयुक्त |
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धारा 9 के अनुसार आदेश का निरसन किस समय किया जा सकता है? |
किसी भी समय |
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धारा 9 के अंतर्गत निरसन की शक्ति किन आदेशों पर लागू होती है? |
धारा 3 के अधीन दिये गये सभी आदेशों पर |
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धारा 3 से 6 के अधीन आदेशों का उल्लंघन करने के लिये दण्ड, (Punishment for Contravention of Orders Under Sections 3 to 6) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 10 |
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धारा 10 के अंतर्गत दण्ड का प्रावधान किन धाराओं के अधीन दिये गये आदेशों के उल्लंघन पर लागू होता है? |
धारा 3, 4, 5 तथा 6 |
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धारा 10 के अनुसार आदेशों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को किस प्रकार के कारावास से दण्डित किया जाता है? |
कठिन कारावांस से, जो तीन वर्ष तक का हो सकता है, परन्तु यह छः माह से कम नहीं होगा, दण्डित होगा और जुर्माना |
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बहिष्कारित गुण्डे द्वारा आदेश का उल्लंघन करते हुये पुनः प्रवेश आदि पर उसका बलपूर्व हटाया जाना, (Forcible Removal of Externed Goonda Re-Entering, Etc. in Contra-Vention of Order) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 11 |
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धारा 11 की कार्यवाही किन धाराओं के अधीन दिये गये आदेशों के उल्लंघन पर लागू होती है? |
धारा 3, 4, 5 तथा 6 |
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धारा 11(1) के अंतर्गत किस स्थिति में व्यक्ति को उल्लंघनकर्ता माना जाएगा? |
आदेश के अनुसार जिले या उसके भाग से स्वयं को हटाने में चूक करने पर आदेश के प्रवर्तन काल में निषिद्ध क्षेत्र में पुनः प्रवेश करना |
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धारा 11(1) के अंतर्गत ऐसे उल्लंघन की स्थिति में कौन गिरफ्तार करा सकता है? |
जिला मजिस्ट्रेट |
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धारा 11(1) के अनुसार गिरफ्तार किये गये व्यक्ति को किस प्रकार हटाया जाता है? |
पुलिस की अभिरक्षा में आदेश में निर्दिष्ट क्षेत्र के बाहर हटाया जाता है |
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धारा 11(2) के अनुसार पुलिस अधिकारी जब उपधारा (1) में वर्णित कार्य या चूक के लिये युक्तियुक्त संदेह हो- |
बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकता है |
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धारा 11(2) के अंतर्गत बिना वारंट गिरफ्तार व्यक्ति को सबसे पहले कहाँ प्रस्तुत किया जाएगा? |
निकटतम मजिस्ट्रेट के पास |
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धारा 11(3) के अनुसार इस धारा के उपबंधों का धारा 10 से क्या संबंध है? |
धारा 10 के अतिरिक्त हैं और उसके प्रभाव को कम नहीं करते |
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अपराध का संज्ञान, (Cognizance of Offence) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 12 |
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धारा 12 के अनुसार मजिस्ट्रेट किस धारा के अधीन दण्डनीय अपराध का संज्ञान ले सकता है? |
धारा 10 |
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धारा 12 के अनुसार मजिस्ट्रेट धारा 10 के अधीन अपराध का संज्ञान किस आधार पर ले सकता है? |
किसी पुलिस अधिकारी द्वारा की गयी लिखित रिपोर्ट पर, या पुलिस अफसर से भिन्न किसी व्यक्ति से प्राप्त इत्तिला पर या अपने इस ज्ञान या संदेह पर कि ऐसा अपराध किया गया है |
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आदेशों के संबंध में अपवाद, (Savings as to Orders) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 13 |
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धारा 13 के अनुसार इस अधिनियम के अधीन प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करके दिये गये आदेश पर - |
किसी न्यायालय में आपत्ति नहीं की जाएगी |
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अधिनियम के अधीन किये गये कार्य के लिये संरक्षण, (Protection of Action taken Under the Act) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 14 |
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धारा 14(1) के अनुसार किसी व्यक्ति के विरुद्ध वाद या अभियोग कब नहीं किया जा सकता? |
जब कार्य इस अधिनियम या उसके अधीन दिये गये आदेश के अनुसरण में सद्भावना से किया गया हो |
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धारा 14(2) के अनुसार राज्य सरकार के विरुद्ध किस बात के लिये वाद नहीं किया जा सकता? |
इस अधिनियम के अनुसरण में सद्भावना से की गयी या की जाने वाली कार्रवाई से हुई या संभावित क्षति से सम्बंधित बात के लिये |
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नियम बनाने का अधिकार, (Power to Make Rules) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 15 |
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धारा 15(1) के अनुसार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिये नियम बनाने का अधिकार किसे है? |
राज्य सरकार |
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धारा 15(2) के अनुसार अधिनियम के अधीन बनाये गये नियमों को किसके समक्ष रखा जाना आवश्यक है? |
राज्य विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष |
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धारा 15(2) के अनुसार नियमों को विधान मंडल के समक्ष न्यूनतम कितनी अवधि के लिये रखा जाना आवश्यक है? |
चौदह दिन |
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निरसन, उत्तर प्रदेश अध्यादेश सं० 15, 1970, (Repeal U.P. Ordinance no. 15, 1970) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 16 |