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मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 (MADHYA PRADESH VISHESH NYAYALAYA ADHINIYAM, 2011) |
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[अधिनियम संख्या 08 वर्ष 2012] (M.P. Act No. 8 of 2012) |
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प्रस्तावना (PREAMBLE) |
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इस अधिनियम का संक्षिप्त परिचय क्या है? |
मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011। (Madhya pradesh Vishesh Nyayalaya Adhiniyam, 2011) |
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मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 का अधिनियम संख्यांक क्या है? |
अधिनियम संख्या 08 वर्ष 2012 (M.P. Act No. 8 of 2012) |
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मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 का विषय क्या है? |
विशेष प्रकार के अपराधों के शीघ्र निपटारे और उनमें शामिल संपत्तियों की ज़ब्ती हेतु विशेष न्यायालयों के गठन तथा संबंधित एवं आनुषंगिक मामलों के लिए प्रावधान। |
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मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 किसके द्वारा अधिनियमित किया गया? |
भारत गणराज्य के 62वें वर्ष में मध्य प्रदेश विधानमंडल द्वारा। |
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अध्याय-I (CHAPTER-I) |
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प्रारंभिक (PRELIMINARY) |
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धारा 1 का विषय क्या है? |
संक्षिप्त शीर्षक, विस्तार और प्रारंभ। (Short title, extent and commencement) |
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इस अधिनियम का संक्षिप्त शीर्षक क्या है? |
मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011। |
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मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 का विस्तार किस क्षेत्र तक है? |
यह मध्य प्रदेश राज्य के पूरे क्षेत्र में लागू होगा। |
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मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 कब लागू होगा? |
उस तिथि से जो राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा नियुक्त करे। |
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मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 के प्रारंभ की तिथि कौन नियुक्त करती है? |
राज्य सरकार। |
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राज्य सरकार अधिनियम के प्रारंभ की तिथि किस माध्यम से नियुक्त करती है? |
अधिसूचना द्वारा। |
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धारा 2 का विषय क्या है? |
परिभाषाएँ। (Definitions) |
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धारा 2(1)(क) का विषय क्या है? |
"अधिनियम" (Act) की परिभाषा। |
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धारा 2(1)(क) के अनुसार "अधिनियम" से क्या तात्पर्य है? |
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (1988 का 49)। |
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धारा 2(1)(ख) का विषय क्या है? |
"अधिकृत अधिकारी" (authorised officer) की परिभाषा। |
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धारा 2(1)(ख) के अनुसार "अधिकृत अधिकारी" से क्या तात्पर्य है? |
उच्च न्यायिक सेवा से संबंधित किसी भी सेवारत अधिकारी से है जो सत्र न्यायाधीश/अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश है या रह चुका है। |
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धारा 2(1)(ख) के अनुसार अधिकृत अधिकारी किस सेवा से संबंधित होना चाहिए? |
उच्च न्यायिक सेवा से। |
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धारा 2(1)(ख) के अनुसार अधिकृत अधिकारी की क्या न्यायिक स्थिति होनी चाहिए? |
वह सत्र न्यायाधीश/अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश है या रह चुका है। |
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धारा 2(1)(ग) का विषय क्या है? |
"संहिता" (Code) की परिभाषा। |
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धारा 2(1)(ग) के अनुसार "संहिता" से क्या तात्पर्य है? |
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023)। |
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धारा 2(1)(घ) का विषय क्या है? |
"घोषणा" (declaration) की परिभाषा। |
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धारा 2(1)(घ) के अनुसार किसी अपराध के संबंध में "घोषणा" से क्या तात्पर्य है? |
ऐसे अपराध के संबंध में धारा 5 के तहत की गई घोषणा। |
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धारा 2(1)(ङ) में "अपराध" का विषय क्या है? | |
"अपराध" (Offence) की परिभाषा। |
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धारा 2(1) (ङ) के अनुसार "अपराध" से क्या तात्पर्य है? |
आपराधिक दुराचार के ऐसे अपराध से जिस पर अधिनियम की धारा 13(1)(ई) लागू होती है। |
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धारा 2(1)(च) का विषय क्या है? |
"विशेष न्यायालय" (Special Court) की परिभाषा। |
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धारा 2(1)(च) के अनुसार "विशेष न्यायालय" से क्या तात्पर्य है? |
धारा 3 के अधीन स्थापित विशेष न्यायालय। |
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धारा 2(2) का विषय क्या है? |
अप्रिभाषित शब्दों और अभिव्यक्तियों का अर्थ। |
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धारा 2(2) के अनुसार ऐसे शब्दों और अभिव्यक्तियों का क्या अर्थ होगा जो मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 में परिभाषित नहीं हैं परंतु संहिता या अधिनियम में परिभाषित हैं? |
उनका वही अर्थ होगा जो दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) या मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 में उन्हें क्रमशः दिया गया है। |
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धारा 2(2) किन शब्दों और अभिव्यक्तियों पर लागू होती है? |
जो यहाँ प्रयुक्त हैं, परिभाषित नहीं हैं, परंतु दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) या मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 में परिभाषित हैं। |
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अध्याय-II (CHAPTER-II) |
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विशेष न्यायालयों की स्थापना (ESTABLISHMENT OF SPECIAL COURTS) |
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अध्याय II का विषय क्या है? |
विशेष न्यायालयों की स्थापना (establishment of special courts) |
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धारा 3 का विषय क्या है? |
विशेष न्यायालयों की स्थापना (establishment of special courts) |
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धारा 3(1) के अनुसार राज्य सरकार विशेष न्यायालयों की स्थापना किस उद्देश्य से करेगी? |
अपराध के शीघ्र निपटारे के उद्देश्य से। |
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धारा 3(1) के अनुसार विशेष न्यायालयों की स्थापना कौन करेगा? |
राज्य सरकार। |
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धारा 3(1) के अनुसार राज्य सरकार कितने न्यायालयों की स्थापना करेगी? |
उतने न्यायालय जितने विशेष न्यायालय कहलाने के लिए पर्याप्त समझे जाएं। |
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धारा 3(1) के अनुसार स्थापित न्यायालय क्या कहलाएंगे? |
विशेष न्यायालय। |
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धारा 3(2) के अनुसार विशेष न्यायालय की अध्यक्षता कौन करेगा? |
राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय की सहमति से नामित न्यायाधीश। |
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धारा 3(2) के अनुसार विशेष न्यायालय के न्यायाधीश का नामांकन कौन करेगा? |
राज्य सरकार। |
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धारा 3(2) के अनुसार विशेष न्यायालय के न्यायाधीश के नामांकन के लिए किसकी सहमति आवश्यक है? |
उच्च न्यायालय की। |
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धारा 3(3) के अनुसार विशेष न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नामांकन के लिए व्यक्ति कब योग्य नहीं होगा? |
जब तक कि वह उच्च न्यायिक सेवा का सदस्य न हो और राज्य में सत्र न्यायाधीश/अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश न हो या रह चुका हो। |
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धारा 3(3) के अनुसार विशेष न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नामांकन हेतु व्यक्ति किस सेवा का सदस्य होना चाहिए? |
उच्च न्यायिक सेवा का। |
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धारा 3(3) के अनुसार विशेष न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नामांकन हेतु व्यक्ति की क्या न्यायिक स्थिति होनी चाहिए? |
वह राज्य में सत्र न्यायाधीश/अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हो या रह चुका हो। |
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धारा 4 का विषय क्या है? |
विशेष न्यायालयों द्वारा मामलों का संज्ञान (Cognizance of cases by Special Courts) |
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धारा 4 के अनुसार विशेष न्यायालय किन मामलों का संज्ञान लेगा? |
जो धारा 10 के तहत उसके समक्ष दायर किए गए हों या उसे हस्तांतरित किए गए हों। |
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धारा 5 का विषय क्या है? |
इस अधिनियम के अंतर्गत निपटाए जाने वाले मामलों की घोषणा (Declaration of cases to be dealt with under this Act) |
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धारा 5(1) के अनुसार घोषणा कौन करेगा? |
राज्य सरकार। |
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धारा 5(1) के अनुसार राज्य सरकार घोषणा कब करेगी? |
जब उसे प्रथम दृष्टया साक्ष्य के आधार पर विश्वास करने का कारण हो कि कथित अपराध किए जाने के संबंध में उचित आधार मौजूद हैं। |
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धारा 5(1) के अनुसार राज्य सरकार का विश्वास किस आधार पर होना चाहिए? |
प्रथम दृष्टया साक्ष्य के आधार पर। |
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धारा 5(1) के अनुसार कथित अपराध किस व्यक्ति द्वारा किया गया होना चाहिए? |
ऐसे व्यक्ति द्वारा जिसने मध्य प्रदेश राज्य में लोक पद धारण किया है या कर रहा है तथा अधिनियम की धारा 2(सी) के अर्थ में लोक सेवक है या रहा है। |
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धारा 5(1) के अनुसार संबंधित व्यक्ति ने कहाँ लोक पद धारण किया होना चाहिए? |
मध्य प्रदेश राज्य में। |
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धारा 5(1) के अनुसार संबंधित व्यक्ति की लोक पद संबंधी स्थिति क्या होनी चाहिए? |
उसने लोक पद धारण किया है या कर रहा है। |
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धारा 5(1) के अनुसार संबंधित व्यक्ति किस अधिनियम की धारा 2(सी) के अर्थ में लोक सेवक होना चाहिए? |
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 2(सी) के अर्थ में। |
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धारा 6 का विषय क्या है? |
घोषणा का प्रभाव (Effect of declaration) |
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धारा 6(1) के अनुसार घोषणा किए जाने पर अपराध के संबंध में अभियोग कहाँ चलाया जाएगा? |
केवल विशेष न्यायालय में। |
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धारा 6(1) के अनुसार अपराध के संबंध में अभियोग किस न्यायालय में ही चलाया जाएगा? |
विशेष न्यायालय में ही। |
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धारा 6(1) का प्रभाव किन कानूनों के होते हुए भी लागू होगा? |
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) या किसी अन्य कानून में किसी भी बात के होते हुए भी। |
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धारा 6(2) कब लागू होती है? |
जब धारा 5 के तहत की गई घोषणा ऐसे अपराध से संबंधित हो जिसके संबंध में पहले ही अभियोग शुरू किया जा चुका हो। |
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धारा 6(2) के अनुसार कार्यवाही कहाँ लंबित होनी चाहिए? |
विशेष न्यायालय के अलावा किसी अन्य न्यायालय में। |
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धारा 6(2) के अनुसार लंबित कार्यवाही का क्या होगा? |
वह विशेष न्यायालय में स्थानांतरित हो जाएगी। |
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धारा 6(2) के अनुसार लंबित कार्यवाही किस प्रयोजन के लिए विशेष न्यायालय में स्थानांतरित होगी? |
मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 के अनुसार अपराध के परीक्षण के लिए। |
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धारा 7 का विषय क्या है? |
अपराधों के परीक्षण के संबंध में विशेष न्यायालय का क्षेत्राधिकार (Jurisdiction of Special Court as to trial of offences) |
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धारा 7 के अनुसार धारा 5 के तहत घोषित अपराध के संबंध में किसी व्यक्ति पर मुकदमा चलाने का अधिकार किसके पास होगा? |
विशेष न्यायालय के पास। |
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धारा 7 के अनुसार विशेष न्यायालय किन व्यक्तियों पर मुकदमा चला सकता है? |
किसी भी व्यक्ति पर, चाहे वह मुख्य अपराधी, षड्यंत्रकारी या सहायक अपराधी हो। |
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धारा 7 के अनुसार मुख्य अपराधी, षड्यंत्रकारी, सहायक अपराधी पर मुकदमा चलाने का अधिकार किसके पास होगा? |
विशेष न्यायालय के पास। |
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धारा 7 के अनुसार किन व्यक्तियों पर एक ही मुकदमे में संयुक्त रूप से मुकदमा चलाया जा सकता है? |
मुख्य अपराधी, षड्यंत्रकारी और सहायक अपराधी सहित सभी पर। |
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धारा 8 का विषय क्या है? |
विशेष न्यायालयों की प्रक्रिया एवं शक्तियां (Procedure and powers of Special Courts) |
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धारा 8(1) के अनुसार विशेष न्यायालय मामलों की सुनवाई में किस प्रक्रिया का पालन करेगा? |
मजिस्ट्रेट के समक्ष वारंट मामलों की सुनवाई के लिए दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का। |
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धारा 8(1) के अनुसार विशेष न्यायालय किन मामलों की सुनवाई हेतु दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) द्वारा निर्धारित प्रक्रिया अपनाएगा? |
मजिस्ट्रेट के समक्ष वारंट मामलों की सुनवाई की प्रक्रिया। |
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धारा 8(2) के अनुसार दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) और मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 के प्रावधान कब विशेष न्यायालय के समक्ष कार्यवाही पर लागू होंगे? |
जहां तक वे मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 के प्रावधानों के साथ असंगत नहीं हैं। |
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धारा 8(2) के अनुसार इस मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 में स्पष्ट रूप से दिए गए प्रावधानों के अतिरिक्त कौन-से प्रावधान लागू होंगे? |
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) और मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 के प्रावधान। |
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धारा 8(2) के अनुसार दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) और मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 के प्रावधान किस पर लागू होंगे? |
विशेष न्यायालय के समक्ष कार्यवाही पर। |
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धारा 8(2) के अनुसार विशेष न्यायालय के समक्ष अभियोजन चलाने वाले व्यक्ति को क्या माना जाएगा? |
लोक अभियोजक। |
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धारा 8(2) के अनुसार विशेष न्यायालय के समक्ष अभियोजन चलाने वाले व्यक्ति को किस प्रयोजन के लिए लोक अभियोजक माना जाएगा? |
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) और मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 के उक्त प्रावधानों के प्रयोजन के लिए। |
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धारा 8(3) के अनुसार विशेष न्यायालय दोषी ठहराए गए व्यक्ति पर कौन-सी सजा सुना सकता है? |
उस अपराध के दंड के लिए कानून द्वारा अधिकृत कोई भी सजा। |
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धारा 8(3) के अनुसार विशेष न्यायालय किस व्यक्ति पर सजा सुना सकता है? |
अपने द्वारा दोषी ठहराए गए किसी व्यक्ति पर। |
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धारा 8(3) के अनुसार सजा किस अपराध के लिए सुनाई जा सकती है? |
उस अपराध के लिए जिसके लिए व्यक्ति दोषी ठहराया गया है। |
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धारा 9 का विषय क्या है? |
विशेष न्यायालयों के आदेशों के विरुद्ध अपील (Appeal against orders of Special Courts) |
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धारा 9(1) के अनुसार विशेष न्यायालय के किसके विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील की जा सकेगी? |
किसी निर्णय और सजा के विरुद्ध। |
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धारा 9(1) के अनुसार विशेष न्यायालय के निर्णय और सजा के विरुद्ध अपील कहाँ की जा सकेगी? |
उच्च न्यायालय में। |
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धारा 9(1) के अनुसार अपील किन आधारों पर की जा सकेगी? |
तथ्यों और विधि दोनों के आधार पर। |
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धारा 9(1) का प्रावधान किसके होते हुए भी लागू होगा? |
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) में किसी बात के होते हुए भी। |
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धारा 9(2) के अनुसार उपर्युक्त के सिवा विशेष न्यायालय के किसके विरुद्ध अपील या पुनरीक्षण नहीं होगा? |
किसी निर्णय, सजा या आदेश के विरुद्ध। |
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धारा 9(2) के अनुसार विशेष न्यायालय के निर्णय, सजा या आदेश के विरुद्ध कहाँ अपील या पुनरीक्षण नहीं होगा? |
किसी न्यायालय में। |
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धारा 9(3) के अनुसार इस धारा के अंतर्गत अपील कितनी अवधि के भीतर प्रस्तुत की जाएगी? |
विशेष न्यायालय के निर्णय एवं सजा की तिथि से तीस दिनों की अवधि के भीतर। |
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धारा 9(3) के अनुसार अपील की अवधि किस तिथि से गणना की जाएगी? |
विशेष न्यायालय के निर्णय एवं सजा की तिथि से। |
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धारा 9(3) के अनुसार प्रत्येक अपील किस धारा के अंतर्गत प्रस्तुत की जाएगी? |
धारा 9 के अंतर्गत। |
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धारा 9(3) के परंतुक का विषय क्या है? |
विलंबित अपील पर उच्च न्यायालय की शक्ति। |
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धारा 9(3) के परंतुक के अनुसार उच्च न्यायालय विलंब के बाद भी अपील पर कब विचार कर सकता है? |
जब वह लिखित रूप में दर्ज कारणों से संतुष्ट हो कि अपीलकर्ता के पास समय के भीतर अपील न करने का पर्याप्त कारण था। |
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धारा 9(3) के परंतुक के अनुसार उच्च न्यायालय की संतुष्टि किस प्रकार की होनी चाहिए? |
लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से। |
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धारा 9(3) के परंतुक के अनुसार अपीलकर्ता के पास क्या होना चाहिए था? |
तीस दिनों की अवधि के भीतर अपील न करने का पर्याप्त कारण। |
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धारा 9(3) के परंतुक के अनुसार पर्याप्त कारण किससे संबंधित होना चाहिए? |
उक्त तीस दिनों की अवधि के भीतर अपील न करने से। |
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धारा 10 का विषय क्या है? |
मामलों का स्थानांतरण (Transfer of cases) |
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धारा 10 के अनुसार मामलों को एक विशेष न्यायालय से दूसरे विशेष न्यायालय में स्थानांतरित करने की शक्ति किसके पास होगी? |
उच्च न्यायालय के पास। |
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धारा 10 के अनुसार मामले कहाँ से कहाँ स्थानांतरित किए जा सकते हैं? |
एक विशेष न्यायालय से दूसरे विशेष न्यायालय में। |
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धारा 10 का प्रावधान किसके बावजूद लागू होगा? |
मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 के प्रावधानों के बावजूद। |
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धारा 10 के अनुसार मामलों के स्थानांतरण के संबंध में उच्च न्यायालय के लिए क्या खुला रहेगा? |
एक विशेष न्यायालय से दूसरे विशेष न्यायालय में मामलों को स्थानांतरित करना। |
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धारा 11 का विषय क्या है? |
विशेष न्यायालय किसी मुकदमे की सुनवाई स्थगित करने के लिए बाध्य नहीं है (Special Court not bound to adjourn a trial) |
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धारा 11(1) के अनुसार विशेष न्यायालय किसी मुकदमे को कब स्थगित नहीं करेगा? |
किसी भी उद्देश्य से, जब तक कि ऐसा स्थगन उसकी राय में न्याय के हित में आवश्यक न हो। |
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धारा 11(1) के अनुसार विशेष न्यायालय किसी मुकदमे को कब स्थगित कर सकता है? |
जब उसकी राय में ऐसा स्थगन न्याय के हित में आवश्यक हो। |
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धारा 11(1) के अनुसार स्थगन के कारण किस प्रकार दर्ज किए जाएंगे? |
लिखित रूप में। |
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धारा 11(1) के अनुसार स्थगन के कारण कब दर्ज किए जाएंगे? |
जब मुकदमे का स्थगन किया जाए। |
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धारा 11(1) के अनुसार स्थगन की आवश्यकता किसके हित में होनी चाहिए? |
न्याय के हित में। |
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धारा 11(2) के अनुसार विशेष न्यायालय मामले की सुनवाई कब तक निपटाने का प्रयास करेगा? |
उसके अभिरक्षा या स्थानांतरण की तिथि से एक वर्ष की अवधि के भीतर। |
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धारा 11(2) के अनुसार एक वर्ष की अवधि की गणना किस तिथि से की जाएगी? |
मामले की अभिरक्षा या स्थानांतरण की तिथि से। |
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धारा 11(2) के अनुसार विशेष न्यायालय क्या करने का प्रयास करेगा? |
मामले की सुनवाई निपटाने का। |
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धारा 12 का विषय क्या है? |
पीठासीन न्यायाधीश अपने पूर्ववर्ती द्वारा दर्ज किए गए साक्ष्यों पर कार्रवाई कर सकता है (Presiding Judge may act on evidence recorded by his predecessor) |
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धारा 12 के अनुसार विशेष न्यायालय का न्यायाधीश किन साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई कर सकता है? |
अपने पूर्ववर्ती न्यायाधीशों द्वारा दर्ज किए गए साक्ष्यों के आधार पर। |
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धारा 12 के अनुसार विशेष न्यायालय का न्यायाधीश किन मिश्रित साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई कर सकता है? |
आंशिक रूप से पूर्ववर्ती न्यायाधीशों द्वारा दर्ज किए गए और आंशिक रूप से स्वयं द्वारा दर्ज किए गए साक्ष्यों के आधार पर। |
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धारा 12 के अनुसार विशेष न्यायालय का न्यायाधीश किसके द्वारा दर्ज साक्ष्यों पर कार्रवाई कर सकता है? |
अपने पूर्ववर्ती न्यायाधीशों द्वारा दर्ज साक्ष्यों पर। |
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धारा 12 के अनुसार विशेष न्यायालय का न्यायाधीश स्वयं द्वारा दर्ज साक्ष्यों का किस रूप में उपयोग कर सकता है? |
पूर्ववर्ती न्यायाधीशों द्वारा दर्ज साक्ष्यों के साथ आंशिक रूप से आधार बनाकर। |
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अध्याय-III |
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संपत्ति की ज़ब्ती (CONFISCATION OF PROPERTY) |
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अध्याय III का विषय क्या है? |
संपत्ति की ज़ब्ती (confiscation of property) |
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धारा 13 का विषय क्या है? |
संपत्ति की ज़ब्ती (confiscation of property) |
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धारा 13(1) के अनुसार राज्य सरकार लोक अभियोजक को कब अधिकृत कर सकती है? |
जब उसे प्रथम दृष्टया साक्ष्य के आधार पर विश्वास करने का कारण हो कि किसी व्यक्ति ने अपराध किया है। |
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धारा 13(1) के अनुसार राज्य सरकार का विश्वास किस आधार पर होना चाहिए? |
प्रथम दृष्टया साक्ष्य के आधार पर। |
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धारा 13(1) के अनुसार संबंधित व्यक्ति की क्या स्थिति होनी चाहिए? |
उसने सार्वजनिक पद धारण किया है या कर रहा है और वह लोक सेवक है या रहा है। |
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धारा 13(1) के अनुसार संबंधित व्यक्ति ने क्या किया होना चाहिए? |
अपराध किया होना चाहिए। |
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धारा 13(1) के अनुसार राज्य सरकार किसे अधिकृत कर सकती है? |
लोक अभियोजक को। |
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धारा 13(1) के अनुसार लोक अभियोजक को किसके समक्ष आवेदन करने हेतु अधिकृत किया जा सकता है? |
अधिकृत अधिकारी को। |
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धारा 13(1) के अनुसार आवेदन किस उद्देश्य से किया जाएगा? |
मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 के तहत धन और अन्य संपत्ति की ज़ब्ती के लिए। |
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धारा 13(1) के अनुसार किस धन और संपत्ति की ज़ब्ती हेतु आवेदन किया जाएगा? |
जिसके बारे में राज्य सरकार का मानना है कि उक्त व्यक्ति ने अपराध के माध्यम से प्राप्त की है। |
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धारा 13(1) के अनुसार क्या लोक अभियोजक को अधिकृत करने के लिए विशेष न्यायालय द्वारा अपराध का संज्ञान लिया जाना आवश्यक है? |
नहीं, चाहे विशेष न्यायालय ने अपराध का संज्ञान लिया हो या नहीं। |
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धारा 13(2)(क) के अनुसार आवेदन के साथ क्या संलग्न होगा? |
एक या एक से अधिक शपथपत्र। |
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धारा 13(2)(क) के अनुसार शपथपत्रों में क्या उल्लेख होगा? |
उन आधारों का जिन पर यह विश्वास आधारित है कि उक्त व्यक्ति ने अपराध किया है। |
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धारा 13(2)(क) के अनुसार शपथपत्रों में और क्या उल्लेख होगा? |
अपराध के माध्यम से प्राप्त की गई धनराशि और अन्य संपत्ति के अनुमानित मूल्य का। |
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धारा 13(2)(ख) के अनुसार आवेदन में क्या शामिल होगा? |
ऐसे धन और अन्य संपत्ति के वर्तमान स्थान के बारे में उपलब्ध कोई भी जानकारी। |
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धारा 13(2)(ख) के अनुसार आवेदन में अन्य कौन-से विवरण दिए जा सकते हैं? |
संदर्भ के लिए प्रासंगिक समझे जाने वाले अन्य विवरण। |
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धारा 14 का विषय क्या है? |
ज़ब्ती के लिए नोटिस (Notice for confiscation) |
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धारा 14(1) के अनुसार अधिकृत अधिकारी नोटिस कब जारी करेगा? |
धारा 13 के तहत आवेदन प्राप्त होने पर। |
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धारा 14(1) के अनुसार नोटिस कौन जारी करेगा? |
अधिकृत अधिकारी। |
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धारा 14(1) के अनुसार नोटिस किसे जारी किया जाएगा? |
उस व्यक्ति को जिसके संबंध में आवेदन किया गया है। |
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धारा 14(1) के अनुसार जिसके संबंध में आवेदन किया गया है उसे क्या कहा जाएगा? |
प्रभावित व्यक्ति। |
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धारा 14(1) के अनुसार नोटिस में प्रभावित व्यक्ति को क्या करने के लिए कहा जाएगा? |
नोटिस में निर्दिष्ट समय के भीतर अपनी आय, कमाई या परिसंपत्तियों के स्रोत का उल्लेख करने के लिए। |
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धारा 14(1) के अनुसार नोटिस में निर्दिष्ट समय सामान्यतः कितना होगा? |
तीस दिनों से कम नहीं होगा। |
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धारा 14(1) के अनुसार प्रभावित व्यक्ति को किन स्रोतों का उल्लेख करना होगा? |
अपनी आय, कमाई या परिसंपत्तियों के स्रोत का। |
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धारा 14(1) के अनुसार प्रभावित व्यक्ति को किस धन या संपत्ति के अर्जन के स्रोत बताने होंगे? |
जिससे या जिसके माध्यम से उसने ऐसा धन या संपत्ति अर्जित की है। |
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धारा 14(1) के अनुसार प्रभावित व्यक्ति को किन साक्ष्यों का उल्लेख करना होगा? |
उन साक्ष्यों का जिन पर वह निर्भर करता है। |
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धारा 14(1) के अनुसार प्रभावित व्यक्ति को और क्या प्रस्तुत करना होगा? |
अन्य प्रासंगिक जानकारी और विवरण। |
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धारा 14(1) के अनुसार प्रभावित व्यक्ति को कौन-सा कारण बताना होगा? |
ऐसा धन या संपत्ति या दोनों अपराध के माध्यम से अर्जित घोषित क्यों नहीं किए जाएँ और राज्य सरकार द्वारा जब्त क्यों नहीं किए जाएँ। |
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धारा 14(1) के अनुसार धन या संपत्ति को किस आधार पर घोषित करने का प्रश्न उठता है? |
अपराध के माध्यम से अर्जित होने के आधार पर। |
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धारा 14(2) के अनुसार नोटिस की प्रति किसी अन्य व्यक्ति को कब तामील की जाएगी? |
जब नोटिस में किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रभावित व्यक्ति की ओर से धारित धन या संपत्ति या दोनों का उल्लेख हो। |
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धारा 14(2) के अनुसार नोटिस की प्रति किसे भी तामील की जाएगी? |
उस अन्य व्यक्ति को जो प्रभावित व्यक्ति की ओर से धन या संपत्ति धारित करता है। |
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धारा 14(3) के अनुसार प्रभावित व्यक्ति या राज्य सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी के समक्ष अभिलेख में लाए गए क्या विशेष न्यायालय के समक्ष उपलब्ध होंगे? |
साक्ष्य, सूचना एवं विवरण। |
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धारा 14(3) के अनुसार अभिलेख में लाए गए साक्ष्य, सूचना एवं विवरण किस प्रयोजन के लिए उपलब्ध होंगे? |
विशेष न्यायालय के समक्ष मुकदमे में खंडन के लिए। |
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धारा 14(3) के परंतुक के अनुसार खंडन किस तक सीमित रहेगा? |
मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 के अंतर्गत विशेष न्यायालय द्वारा अपराधी के दोष निर्धारण एवं न्यायनिर्णय के लिए चलाए जाने वाले मुकदमे तक। |
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धारा 14(3) के अनुसार खंडन किस मुकदमे में उपलब्ध होगा? |
विशेष न्यायालय के समक्ष मुकदमे में। |
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धारा 15 का विषय क्या है? |
कुछ मामलों में संपत्ति की ज़ब्ती (Confiscation of property in certain cases) |
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धारा 15(1) के अनुसार अधिकृत अधिकारी निष्कर्ष दर्ज करने से पूर्व किन बातों पर विचार करेगा? |
धारा 14 के तहत दिए गए स्पष्टीकरण और उसके समक्ष उपलब्ध सामग्री पर। |
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धारा 15(1) के अनुसार अधिकृत अधिकारी किसे सुनवाई का उचित अवसर देगा? |
प्रभावित व्यक्ति को। |
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धारा 15(1) के अनुसार यदि प्रभावित व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से धन या संपत्ति रखता है तो किसे भी सुनवाई का अवसर दिया जाएगा? |
उस अन्य व्यक्ति को भी। |
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धारा 15(1) के अनुसार अधिकृत अधिकारी किस बात का निष्कर्ष दर्ज कर सकता है? |
कि प्रश्नगत सभी या कोई धन या संपत्ति अवैध रूप से अर्जित की गई है या नहीं। |
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धारा 15(2) कब लागू होती है? |
जब अधिकृत अधिकारी यह निर्दिष्ट करे कि कारण बताओ नोटिस में निर्दिष्ट कुछ धन या संपत्ति अपराध के माध्यम से अर्जित किए गए हैं पर उनकी विशेष पहचान संभव नहीं है। |
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धारा 15(2) के अनुसार अधिकृत अधिकारी के लिए क्या वैध होगा? |
अपने सर्वोत्तम निर्णय के अनुसार अपराध के माध्यम से अर्जित धन या संपत्ति को निर्दिष्ट करना। |
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धारा 15(2) के अनुसार अधिकृत अधिकारी किस आधार पर धन या संपत्ति निर्दिष्ट करेगा? |
अपने सर्वोत्तम निर्णय के अनुसार। |
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धारा 15(3) के अनुसार अधिकृत अधिकारी कब घोषणा करेगा? |
जब वह निष्कर्ष दर्ज करे कि कोई धन या संपत्ति अपराध के माध्यम से अर्जित किए गए हैं। |
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धारा 15(3) के अनुसार अधिकृत अधिकारी क्या घोषणा करेगा? |
ऐसा धन या संपत्ति सभी भारों से मुक्त होकर राज्य सरकार के पास जब्त कर लिए जाएंगे। |
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धारा 15(3) के अनुसार ज़ब्ती किसके अधीन होगी? |
मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 के प्रावधानों के अधीन। |
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धारा 15(3) के अनुसार जब्त धन या संपत्ति किसके पास निहित होगी? |
राज्य सरकार के पास। |
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धारा 15(3) के परंतुक के अनुसार संपत्ति कब जब्त नहीं की जाएगी? |
यदि जब्त की गई संपत्ति का बाजार मूल्य अधिकृत अधिकारी के पास जमा कर दिया जाए। |
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धारा 15(3) के परंतुक के अनुसार किस मूल्य के जमा होने पर संपत्ति जब्त नहीं होगी? |
जब्त की गई संपत्ति के बाजार मूल्य के। |
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धारा 15(4) के अनुसार यदि किसी कंपनी का शेयर राज्य सरकार को जब्त हो जाए तो कंपनी क्या करेगी? |
राज्य सरकार को ऐसे शेयर के अंतरिती के रूप में तुरंत पंजीकृत करेगी। |
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धारा 15(4) का प्रावधान किनके होते हुए भी लागू होगा? |
कंपनी अधिनियम, 1956 या कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में किसी बात के होते हुए भी। |
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धारा 15(4) के अनुसार राज्य सरकार को किस रूप में पंजीकृत किया जाएगा? |
ऐसे शेयर के अंतरिती के रूप में। |
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धारा 15(5) के अनुसार इस अध्याय के अंतर्गत ज़ब्ती की प्रत्येक कार्यवाही कब तक निपटा दी जाएगी? |
धारा 15 (1) के तहत नोटिस की तामील की तिथि से छह महीने की अवधि के भीतर। |
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धारा 15(5) के अनुसार छह माह की अवधि की गणना किस तिथि से होगी? |
धारा 15(1) के तहत नोटिस की तामील की तिथि से। |
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धारा 15(6) के अनुसार धारा 15 के तहत पारित ज़ब्ती का आदेश किसके अधीन रहते हुए अंतिम होगा? |
धारा 17 के तहत अपील में पारित आदेश के अधीन रहते हुए। |
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धारा 15(6) के अनुसार ज़ब्ती का आदेश कब अंतिम होगा? |
धारा 17 के तहत अपील में पारित आदेश के अधीन रहते हुए। |
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धारा 15(6) के अनुसार ज़ब्ती के आदेश पर कहाँ प्रश्न नहीं उठाया जाएगा? |
किसी भी न्यायालय में। |
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धारा 16 का विषय क्या है? |
हस्तांतरण शून्य और अमान्य होगा (Transfer to be null and void) |
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धारा 16 के अनुसार हस्तांतरण कब शून्य होगा? |
जब धारा 14 के तहत नोटिस जारी होने के बाद नोटिस में निर्दिष्ट धन या संपत्ति या दोनों का किसी भी माध्यम से हस्तांतरण किया जाए। |
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धारा 16 के अनुसार किस धन या संपत्ति का हस्तांतरण प्रासंगिक है? |
धारा 14 के नोटिस में निर्दिष्ट धन या संपत्ति या दोनों का। |
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धारा 16 के अनुसार ऐसा हस्तांतरण किस प्रयोजन के लिए शून्य होगा? |
मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 के तहत कार्यवाही के प्रयोजनों के लिए। |
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धारा 16 के अनुसार हस्तांतरित धन या संपत्ति का हस्तांतरण कब शून्य और अमान्य माना जाएगा? |
यदि ऐसे धन या संपत्ति या दोनों को बाद में धारा 15 के तहत राज्य सरकार द्वारा जब्त कर लिया जाए। |
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धारा 16 के अनुसार बाद की ज़ब्ती किस धारा के तहत होनी चाहिए? |
धारा 15 के तहत। |
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धारा 16 के अनुसार ज़ब्ती कौन करेगा? |
राज्य सरकार। |
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धारा 16 के अनुसार ज़ब्ती के बाद हस्तांतरण की स्थिति क्या होगी? |
वह शून्य और अमान्य माना जाएगा। |
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धारा 17 का विषय क्या है? |
अपील (Appeal) |
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धारा 17(1) के अनुसार इस अध्याय के अंतर्गत अधिकृत अधिकारी के आदेश से पीड़ित व्यक्ति कहाँ अपील कर सकता है? |
उच्च न्यायालय में। |
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धारा 17(1) के अनुसार अपील कौन कर सकता है? |
अध्याय lll के अंतर्गत अधिकृत अधिकारी के किसी आदेश से पीड़ित कोई व्यक्ति। |
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धारा 17(1) के अनुसार अपील कितनी अवधि के भीतर की जा सकती है? |
आदेश के पारित होने की तिथि से तीस दिनों के भीतर। |
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धारा 17(1) के अनुसार अपील की अवधि किस तिथि से गणना की जाएगी? |
अपील किए गए आदेश के पारित होने की तिथि से। |
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धारा 17(2) के अनुसार अपील पर उच्च न्यायालय किसे सुनवाई का अवसर देगा? |
ऐसे पक्षों को जिन्हें वह उचित समझे। |
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धारा 17(2) के अनुसार सुनवाई का अवसर देने के बाद उच्च न्यायालय क्या कर सकता है? |
ऐसा आदेश पारित कर सकता है जैसा वह उचित समझे। |
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धारा 17(2) के अनुसार अपील पर आदेश पारित करने की शक्ति किसके पास है? |
उच्च न्यायालय के पास। |
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धारा 17(3) के अनुसार उपधारा (1) के तहत दायर अपील का निपटारा कब तक किया जाएगा? |
अपील दायर किए जाने की तिथि से छह महीने की अवधि के भीतर। |
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धारा 17(3) के अनुसार छह माह की अवधि की गणना किस तिथि से होगी? |
अपील दायर किए जाने की तिथि से। |
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धारा 17(3) के अनुसार अपील में पारित स्थगन आदेश कब तक प्रभावी रहेगा? |
अपील के निपटारे की निर्धारित अवधि तक। |
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धारा 17(3) के अनुसार अपील में पारित स्थगन आदेश किस अवधि से आगे लागू नहीं रहेगा? |
अपील के निपटारे की निर्धारित अवधि से आगे। |
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धारा 18 का विषय क्या है? |
कब्जा लेने की शक्ति (Power to take possession) |
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धारा 18(1) के अनुसार संबंधित अधिकृत अधिकारी आदेश कब देगा? |
जब मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 के अधीन राज्य सरकार द्वारा कोई धन या संपत्ति या दोनों जब्त कर लिए गए हों। |
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धारा 18(1) के अनुसार आदेश किसे दिया जाएगा? |
प्रभावित व्यक्ति तथा किसी अन्य व्यक्ति को जो धन या संपत्ति या दोनों के कब्जे में हो। |
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धारा 18(1) के अनुसार आदेश में क्या निर्देश दिया जाएगा? |
आदेश की तामील के तीस दिनों के भीतर कब्जा संबंधित अधिकृत अधिकारी या उसके विधिवत अधिकृत व्यक्ति को सौंपने का। |
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धारा 18(1) के अनुसार कब्जा किसे सौंपा जाएगा? |
संबंधित अधिकृत अधिकारी या उसके द्वारा विधिवत अधिकृत किसी व्यक्ति को। |
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धारा 18(1) के अनुसार कब्जा सौंपने की अवधि क्या है? |
आदेश की तामील के तीस दिनों के भीतर। |
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धारा 18(1) के परंतुक का विषय क्या है? |
प्रभावित व्यक्ति को संपत्ति पर कब्जा बनाए रखने की अनुमति। |
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धारा 18(1) के परंतुक के अनुसार अधिकृत अधिकारी प्रभावित व्यक्ति को कब संपत्ति पर कब्जा बनाए रखने की अनुमति दे सकता है? |
जब आवेदन पर वह संतुष्ट हो कि प्रभावित व्यक्ति प्रश्नगत संपत्ति में निवास कर रहा है। |
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धारा 18(1) के परंतुक के अनुसार प्रभावित व्यक्ति को किस शर्त पर संपत्ति पर कब्जा रखने की अनुमति दी जा सकती है? |
राज्य सरकार को बाजार किराया का भुगतान करने पर। |
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धारा 18(1) के परंतुक के अनुसार कब्जा रखने की अनुमति कितनी अवधि के लिए दी जा सकती है? |
निर्दिष्ट अवधि के लिए। |
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धारा 18(1) के परंतुक के अनुसार निर्दिष्ट अवधि के बाद व्यक्ति क्या करेगा? |
संपत्ति का खाली कब्जा सौंप देगा। |
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धारा 18(1) के परंतुक के अनुसार अधिकृत अधिकारी तत्काल बेदखल करने के बजाय क्या कर सकता है? |
प्रभावित व्यक्ति को निर्दिष्ट अवधि के लिए संपत्ति पर कब्जा करने की अनुमति दे सकता है। |
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धारा 18(2) के अनुसार अधिकृत अधिकारी कब संपत्ति पर कब्जा कर सकता है? |
जब कोई व्यक्ति उपधारा (1) के अधीन दिए गए आदेश का पालन करने से इनकार करे या उसमें विफल रहे। |
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धारा 18(2) के अनुसार कब्जा लेने के लिए अधिकृत अधिकारी क्या कर सकता है? |
आवश्यक बल का प्रयोग कर सकता है। |
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धारा 18(3) का विषय क्या है? |
कब्जा लेने हेतु पुलिस अधिकारी की सेवा की मांग। |
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धारा 18(3) के अनुसार अधिकृत अधिकारी किसकी सेवा की मांग कर सकता है? |
किसी पुलिस अधिकारी की। |
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धारा 18(3) के अनुसार पुलिस अधिकारी की सेवा किस उद्देश्य से मांगी जा सकती है? |
धारा 18(1) में निर्दिष्ट धन या संपत्ति या दोनों पर कब्जा लेने के उद्देश्य से। |
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धारा 19 का विषय क्या है? |
जब्त की गई धनराशि या संपत्ति की वापसी (Refund of confiscated money or property) |
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धारा 19 के अनुसार धन या संपत्ति या दोनों प्रभावित व्यक्ति को कब लौटाए जाएंगे? |
जब धारा 15 के तहत जारी ज़ब्ती आदेश को अपील में उच्च न्यायालय द्वारा संशोधित या रद्द कर दिया जाए, या प्रभावित व्यक्ति को विशेष न्यायालय द्वारा बरी कर दिया जाए। |
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धारा 19 के अनुसार ज़ब्ती आदेश का संशोधन या निरस्तीकरण कौन कर सकता है? |
उच्च न्यायालय। |
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धारा 19 के अनुसार कौन-सा ज़ब्ती आदेश प्रासंगिक है? |
धारा 15 के तहत जारी किया गया ज़ब्ती आदेश। |
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धारा 19 के अनुसार प्रभावित व्यक्ति को बरी कौन कर सकता है? |
विशेष न्यायालय। |
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धारा 19 के अनुसार यदि संपत्ति लौटाना संभव न हो तो क्या किया जाएगा? |
उस व्यक्ति को ज़ब्त की गई राशि सहित उसकी कीमत का भुगतान किया जाएगा। |
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धारा 19 के अनुसार संपत्ति लौटाना संभव न होने पर किसका भुगतान किया जाएगा? |
संपत्ति की कीमत तथा ज़ब्त की गई राशि का। |
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धारा 19 के अनुसार संपत्ति की कीमत के साथ क्या अतिरिक्त देय होगा? |
ज़ब्ती की तारीख से पाँच प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज। |
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धारा 19 के अनुसार ब्याज किस दर से देय होगा? |
पाँच प्रतिशत प्रति वर्ष। |
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धारा 19 के अनुसार ब्याज किस तिथि से देय होगा? |
ज़ब्ती की तारीख से। |
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अध्याय-IV |
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विविध (MISCELLANEOUS) |
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अध्याय IV का विषय क्या है? |
विविध (miscellaneous) |
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धारा 20 का विषय क्या है? |
विवरण में त्रुटि होने पर सूचना या आदेश अमान्य नहीं होगा (Notice or order not to be invalid for error in description) |
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धारा 20 के अनुसार मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 के अंतर्गत जारी या तामील की गई सूचना, घोषणा, पारित आदेश कब अमान्य नहीं मानी जाएगी? |
संपत्ति या व्यक्ति के विवरण में त्रुटि होने पर, यदि उसकी पहचान उल्लिखित विवरण से की जा सकती है। |
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धारा 20 के अनुसार किस प्रकार की त्रुटि प्रासंगिक है? |
उल्लिखित संपत्ति या व्यक्ति के विवरण में त्रुटि। |
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धारा 20 के अनुसार सूचना, घोषणा या आदेश के वैध रहने की क्या शर्त है? |
संपत्ति या व्यक्ति की पहचान उल्लिखित विवरण से की जा सकना। |
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धारा 21 का विषय क्या है? |
मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 किसी अन्य कानून के अतिरिक्त होगा (Act to be in addition to any other law) |
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धारा 21 के अनुसार इस अधिनियम के प्रावधान किसी अन्य कानून के संबंध में क्या होंगे? |
किसी अन्य कानून के अतिरिक्त होंगे, न कि उसके विपरीत। |
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धारा 21 के अनुसार इस अधिनियम में निहित कोई बात लोक सेवक को किससे छूट नहीं देगी? |
ऐसी कार्यवाही से जो इस अधिनियम के अलावा उसके विरुद्ध शुरू की जा सकती है। |
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धारा 21 के अनुसार किसके विरुद्ध कार्यवाही शुरू की जा सकती है? |
लोक सेवक के विरुद्ध। |
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धारा 21 के अनुसार लोक सेवक के विरुद्ध कार्यवाही किस आधार पर भी शुरू की जा सकती है? |
मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 के अलावा। |
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धारा 22 का विषय क्या है? |
अन्य कार्यवाही पर रोक (Bar to other proceeding) |
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धारा 22 के अनुसार किसके अलावा अन्य कार्यवाही पर रोक का प्रावधान है? |
धारा 9 और 17 में दिए गए प्रावधानों के अलावा। |
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धारा 22 का प्रावधान किसके बावजूद लागू होगा? |
किसी अन्य कानून में निहित किसी भी बात के बावजूद। |
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धारा 22 के अनुसार किसके संबंध में कोई मुकदमा या अन्य कानूनी कार्यवाही नहीं चलाई जा सकेगी? |
धारा 15 के तहत जब्त किए जाने वाले किसी भी धन या संपत्ति या दोनों के संबंध में। |
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धारा 22 के अनुसार कौन-सा धन या संपत्ति प्रासंगिक है? |
धारा 15 के तहत जब्त किए जाने वाले धन या संपत्ति या दोनों। |
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धारा 23 का विषय क्या है? |
सद्भावना से की गई कार्रवाई का संरक्षण (Protection of action taken in good faith) |
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धारा 23 के अनुसार किस प्रकार के कार्यों के लिए संरक्षण प्रदान किया गया है? |
मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 के अनुसरण में सद्भावनापूर्वक किए गए या किए जाने के इरादे से किए गए कार्यों के लिए। |
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धारा 23 के अनुसार किसके विरुद्ध मुकदमा, अभियोग या अन्य कानूनी कार्यवाही नहीं की जाएगी? |
किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध। |
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धारा 23 के अनुसार किन कार्यवाहियों पर रोक है? |
मुकदमा, अभियोग या अन्य कानूनी कार्यवाही। |
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धारा 23 के अनुसार कार्य किस प्रकार किया गया होना चाहिए? |
मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 के अनुसरण में सद्भावनापूर्वक या किए जाने के इरादे से। |
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धारा 24 का विषय क्या है? |
नियम बनाने की शक्ति (Power to make rules) |
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धारा 24(1) के अनुसार नियम बनाने की शक्ति किसके पास है? |
राज्य सरकार के पास। |
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धारा 24(1) के अनुसार राज्य सरकार किस प्रकार के नियम बना सकती है? |
ऐसे नियम जिन्हें वह मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक समझे। |
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धारा 24(2) के अनुसार उपधारा (1) के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम किसके समक्ष रखा जाएगा? |
राज्य विधान सभा के समक्ष। |
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धारा 25 का विषय क्या है? |
अधिभावी प्रभाव (Overriding effect) |
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धारा 25 के अनुसार असंगति की स्थिति में किसके प्रावधान प्रभावी होंगे? |
मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 के प्रावधान। |
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धारा 25 का प्रावधान किसके होते हुए भी लागू होगा? |
मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 या किसी अन्य कानून में किसी भी बात के होते हुए भी। |
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धारा 25 के अनुसार अधिभावी प्रभाव कब लागू होगा? |
किसी भी असंगति की स्थिति में। |
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धारा 26 का विषय क्या है? |
कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति (Power to remove difficulties) |
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धारा 26 के अनुसार कठिनाई उत्पन्न होने पर उसे दूर करने की शक्ति किसके पास है? |
राज्य सरकार के पास। |
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धारा 26 के अनुसार राज्य सरकार कठिनाई को किस माध्यम से दूर कर सकती है? |
आदेश द्वारा। |
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धारा 26 के अनुसार कठिनाई कब दूर की जा सकती है? |
जब मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 के प्रावधानों को लागू करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है। |
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धारा 26 के परंतुक का विषय क्या है? |
कठिनाई दूर करने की शक्ति की समय-सीमा। |
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धारा 26 के परंतुक के अनुसार ऐसा कोई आदेश कब जारी नहीं किया जाएगा? |
मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 के लागू होने की तिथि से दो वर्ष की अवधि समाप्त होने के बाद। |
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धारा 26 के अनुसार कठिनाई दूर करने की शक्ति की समय-सीमा क्या है? |
मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 के लागू होने की तिथि से दो वर्ष। |
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