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खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 (THE FOOD SAFETY AND STANDARDS ACT, 2006) |
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अधिनियम 34, 2006 (ACT NO. 34 OF 2006) |
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इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम है क्या? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 (The Food Safety and Standards Act, 2006) |
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खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 किस संख्या का है? |
अधिनियम संख्या 34, 2006। (Act No. 34 Of 2006) |
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खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 कब राजपत्र में प्रकाशित हुआ? |
23 अगस्त 2006 को। |
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खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 कब सहमति प्राप्त हुआ? |
23 अगस्त 2006 को। |
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खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 कब प्रारंभ हुआ? |
23 अगस्त 2006 को। |
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खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 का उद्देश्य क्या है? |
खाद्य पदार्थों से संबंधित कानूनों का समेकन और विज्ञान आधारित मानक निर्धारित करना। |
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खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 का प्रमुख उद्देश्य क्या है? |
निर्माण, भंडारण, वितरण, बिक्री और आयात का विनियमन। |
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खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 का लक्ष्य क्या है? |
मानव उपभोग हेतु सुरक्षित और पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करना। |
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खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत किस प्राधिकरण की स्थापना की गई है? |
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण। |
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खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 किसके द्वारा अधिनियमित किया गया है? |
संसद द्वारा। |
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खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 भारत गणराज्य के किस वर्ष में अधिनियमित किया गया है? |
सत्तावनवें वर्ष में। |
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अध्याय-I (CHAPTER-I) |
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प्रारंभिक (Preliminary) |
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अध्याय I का विषय क्या है? |
प्रारंभिक। (Preliminary) |
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धारा 1 का विषय क्या है? |
संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ। (Short title, extent and commencement) |
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धारा 1(1) के अनुसार अधिनियम का संक्षिप्त नाम क्या है? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006। |
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धारा 1(2) के अनुसार अधिनियम का विस्तार कहाँ तक है? |
पूरे भारत में। |
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धारा 1(3) के अनुसार अधिनियम कब लागू होगा? |
केंद्र सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना से निर्धारित तिथि से। |
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धारा 1(3) के अनुसार क्या विभिन्न प्रावधानों के लिए अलग-अलग तिथियां निर्धारित की जा सकती हैं? |
हाँ। |
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धारा 1(3) के अनुसार प्रारंभ का संदर्भ कैसे समझा जाएगा? |
संबंधित प्रावधान के लागू होने की तिथि के रूप में। |
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धारा 2 का विषय क्या है? |
संघ द्वारा नियंत्रण की उपयुक्तता के संबंध में घोषणा। (Declaration as to expediency of control by the Union) |
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धारा 2 के अनुसार क्या घोषित किया गया है? |
जनहित में संघ द्वारा खाद्य उद्योग को नियंत्रण में लेना आवश्यक है। |
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धारा 2 के अनुसार यह घोषणा किस आधार पर है? |
जनहित में। |
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धारा 2 के अनुसार किस उद्योग को नियंत्रण में लेने की बात कही गई है? |
खाद्य उद्योग। |
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धारा 3 का विषय क्या है? |
परिभाषाएँ। (Definitions) |
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धारा 3(1)(a) का विषय क्या है? |
"मिलावट" की परिभाषा। (Adulterant) |
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धारा 3(1)(a) के अनुसार "मिलावट" से क्या तात्पर्य है? |
ऐसी सामग्री जिसका उपयोग भोजन को असुरक्षित, निम्न गुणवत्ता वाला, गलत ब्रांड वाला या बाहरी पदार्थ युक्त बनाने के लिए किया जाता है या किया जा सकता है। |
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धारा 3(1)(b) का विषय क्या है? |
"विज्ञापन" की परिभाषा। (Advertisement) |
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धारा 3(1)(b) के अनुसार "विज्ञापन" से क्या तात्पर्य है? |
प्रकाश, ध्वनि, धुआं, गैस, प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, इंटरनेट या वेबसाइट के माध्यम से किया गया श्रव्य या दृश्य प्रचार, प्रस्तुतिकरण या घोषणा। |
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धारा 3(1)(b) के अनुसार "विज्ञापन" में क्या शामिल है? |
सूचना, परिपत्र, लेबल, रैपर, चालान या अन्य दस्तावेज। |
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धारा 3(1)(c) का विषय क्या है? |
"अध्यक्ष" की परिभाषा। (Chairperson) |
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धारा 3(1)(c) के अनुसार "अध्यक्ष" से क्या तात्पर्य है? |
खाद्य प्राधिकरण के अध्यक्ष से। |
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धारा 3(1)(d) का विषय क्या है? |
"दावा" की परिभाषा। (claim) |
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धारा 3(1)(d) के अनुसार "दावा" से क्या तात्पर्य है? |
ऐसा प्रतिनिधित्व जो खाद्य पदार्थ के गुणों के बारे में बताता, सुझाव देता या संकेत देता है। |
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धारा 3(1)(d) के अनुसार "दावा" किन गुणों से संबंधित हो सकता है? |
उत्पत्ति, पोषण गुण, प्रकृति, प्रसंस्करण, संरचना या अन्य गुण। |
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धारा 3(1)(e) का विषय क्या है? |
"खाद्य सुरक्षा आयुक्त" की परिभाषा। (Commissioner of Food Safety) |
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धारा 3(1)(e) के अनुसार "खाद्य सुरक्षा आयुक्त" कौन है? |
धारा 30 के तहत नियुक्त खाद्य सुरक्षा आयुक्त। |
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धारा 3(1)(f) का विषय क्या है? |
"उपभोक्ता" की परिभाषा। (consumer) |
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धारा 3(1)(f) के अनुसार "उपभोक्ता" कौन है? |
व्यक्ति या परिवार जो अपनी व्यक्तिगत आवश्यकताओं हेतु भोजन खरीदते और प्राप्त करते हैं। |
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धारा 3(1)(h) का विषय क्या है? |
"नामित अधिकारी" की परिभाषा। (Designated Officer) |
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धारा 3(1)(h) के अनुसार "नामित अधिकारी" कौन है? |
धारा 36 के तहत नियुक्त अधिकारी। |
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धारा 3(1)(i) का विषय क्या है? |
"बाहरी पदार्थ" की परिभाषा। (extraneous matter) |
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धारा 3(1)(i) के अनुसार "बाहरी पदार्थ" से क्या तात्पर्य है? |
खाद्य पदार्थ में निहित ऐसा पदार्थ जो कच्चे माल, पैकेजिंग या प्रक्रिया से आया हो या मिलाया गया हो। |
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धारा 3(1)(i) के अनुसार बाहरी पदार्थ की शर्त क्या है? |
वह खाद्य पदार्थ को असुरक्षित नहीं बनाता। |
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धारा 3(1)(j) का विषय क्या है? |
"खाद्य पदार्थ" की परिभाषा। (Food) |
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धारा 3(1)(j) के अनुसार "खाद्य पदार्थ" से क्या तात्पर्य है? |
कोई भी पदार्थ जो मानव उपभोग के लिए अभिप्रेत हो। |
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धारा 3(1)(j) के अनुसार खाद्य पदार्थ किस रूप में हो सकता है? |
प्रसंस्कृत, आंशिक रूप से प्रसंस्कृत या अप्रसंस्कृत। |
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धारा 3(1)(j) के अनुसार खाद्य पदार्थ में क्या-क्या शामिल है? |
प्राथमिक खाद्य, आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य, शिशु आहार, पैकेटबंद जल, मादक पेय, च्युइंग गम और निर्माण में प्रयुक्त पानी। |
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धारा 3(1)(j) के अनुसार खाद्य पदार्थ में क्या शामिल नहीं है? |
पशु चारा, जीवित पशु, कटाई से पहले पौधे, दवाएं, औषधीय उत्पाद, सौंदर्य प्रसाधन, मादक या मनोरोगी पदार्थ। |
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धारा 3(1)(j) के अनुसार जीवित पशु कब शामिल होंगे? |
जब उन्हें मानव उपभोग हेतु तैयार या प्रसंस्कृत किया गया हो। |
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धारा 3(1)(j) के परन्तु का विषय क्या है? |
अन्य वस्तुओं को खाद्य पदार्थ घोषित करने की शक्ति। |
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धारा 3(1)(j) के परन्तु के अनुसार यह शक्ति किसे है? |
केंद्र सरकार को। |
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धारा 3(1)(j) के परन्तु के अनुसार यह घोषणा कैसे की जाएगी? |
आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा। |
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धारा 3(1)(j) के परन्तु के अनुसार किन बातों को ध्यान में रखा जाएगा? |
उपयोग, प्रकृति, पदार्थ या गुणवत्ता। |
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धारा 3(1)(k) का विषय क्या है? |
"खाद्य योज्य" की परिभाषा। (food additive) |
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धारा 3(1)(k) के अनुसार "खाद्य योज्य" से क्या तात्पर्य है? |
ऐसा पदार्थ जो स्वयं भोजन नहीं है पर तकनीकी उद्देश्य से भोजन में मिलाया जाता है। |
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धारा 3(1)(k) के अनुसार खाद्य योज्य का उपयोग किस उद्देश्य से होता है? |
निर्माण, प्रसंस्करण, तैयारी, उपचार, पैकिंग, पैकेजिंग, परिवहन या भंडारण हेतु। |
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धारा 3(1)(k) के अनुसार खाद्य योज्य का प्रभाव क्या होता है? |
वह भोजन का घटक बनता है या उसकी विशेषताओं को प्रभावित करता है। |
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धारा 3(1)(k) के अनुसार खाद्य योज्य में क्या शामिल नहीं है? |
संदूषक या पोषण सुधार हेतु मिलाए गए पदार्थ। |
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धारा 3(1)(l) का विषय क्या है? |
"खाद्य विश्लेषक" की परिभाषा। (Food Analyst) |
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धारा 3(1)(l) के अनुसार "खाद्य विश्लेषक" कौन है? |
धारा 45 के तहत नियुक्त विश्लेषक। |
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धारा 3(1)(m) का विषय क्या है? |
"खाद्य प्राधिकरण" की परिभाषा। (Food Authority) |
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धारा 3(1)(m) के अनुसार "खाद्य प्राधिकरण" क्या है? |
धारा 4 के तहत स्थापित भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण। |
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धारा 3(1)(n) का विषय क्या है? |
"खाद्य व्यवसाय" की परिभाषा। (food business) |
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धारा 3(1)(n) के अनुसार "खाद्य व्यवसाय" से क्या तात्पर्य है? |
खाद्य से संबंधित गतिविधियां करने वाला कोई भी उपक्रम। |
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धारा 3(1)(n) के अनुसार यह उपक्रम कैसा हो सकता है? |
लाभ के लिए या बिना लाभ के, सार्वजनिक या निजी। |
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धारा 3(1)(n) के अनुसार खाद्य व्यवसाय में कौन-कौन सी गतिविधियां शामिल हैं? |
निर्माण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण, परिवहन, वितरण, आयात, खाद्य सेवाएं, खानपान सेवाएं और बिक्री। |
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धारा 3(1)(o) का विषय क्या है? |
"खाद्य व्यवसाय संचालक" की परिभाषा। (food business operator) |
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धारा 3(1)(o) के अनुसार "खाद्य व्यवसाय संचालक" कौन है? |
वह व्यक्ति जो खाद्य व्यवसाय चलाता है या उसका स्वामी है। |
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धारा 3(1)(o) के अनुसार खाद्य व्यवसाय संचालक का दायित्व क्या है? |
अधिनियम, नियमों और विनियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करना। |
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धारा 3(1)(p) का विषय क्या है? |
"खाद्य प्रयोगशाला" की परिभाषा। (food laboratory) |
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धारा 3(1)(p) के अनुसार "खाद्य प्रयोगशाला" क्या है? |
केंद्र/राज्य सरकार या अन्य एजेंसी द्वारा स्थापित और मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला। |
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धारा 3(1)(p) के अनुसार खाद्य प्रयोगशाला को किससे मान्यता प्राप्त होनी चाहिए? |
राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड या समकक्ष एजेंसी और खाद्य प्राधिकरण से। |
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धारा 3(1)(p) के अनुसार खाद्य प्राधिकरण द्वारा मान्यता किस धारा के तहत होती है? |
धारा 43 के तहत। |
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धारा 3(1)(q) का विषय क्या है? |
"खाद्य सुरक्षा" की परिभाषा। (food safety) |
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धारा 3(1)(q) के अनुसार "खाद्य सुरक्षा" का क्या अर्थ है? |
भोजन का अपने इच्छित उपयोग के अनुसार मानव उपभोग के लिए स्वीकार्य होना सुनिश्चित करना। |
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धारा 3(1)(r) का विषय क्या है? |
"खाद्य सुरक्षा लेखापरीक्षा" की परिभाषा। (food safety audit) |
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धारा 3(1)(r) के अनुसार "खाद्य सुरक्षा लेखापरीक्षा" से क्या अभिप्रेत है? |
खाद्य सुरक्षा उपायों की व्यवस्थित और स्वतंत्र जांच। |
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धारा 3(1)(r) के अनुसार इसका उद्देश्य क्या है? |
यह निर्धारित करना कि उपाय और परिणाम खाद्य सुरक्षा उद्देश्यों व दावों को पूरा करते हैं या नहीं। |
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धारा 3(1)(s) का विषय क्या है? |
"खाद्य सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली" की परिभाषा। (Food Safety Management System) |
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धारा 3(1)(s) के अनुसार "खाद्य सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली" क्या है? |
अच्छी विनिर्माण, स्वच्छता, जोखिम विश्लेषण और अन्य विनियमित प्रथाओं को अपनाना। |
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धारा 3(1)(t) का विषय क्या है? |
"खाद्य सुरक्षा अधिकारी" की परिभाषा। (Food Safety Officer) |
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धारा 3(1)(t) के अनुसार "खाद्य सुरक्षा अधिकारी" कौन है? |
धारा 37 के तहत नियुक्त अधिकारी। |
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धारा 3(1)(u) का विषय क्या है? |
"खतरा" की परिभाषा। (hazard) |
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धारा 3(1)(u) के अनुसार "खतरा" से क्या अभिप्रेत है? |
भोजन में मौजूद जैविक, रासायनिक या भौतिक कारक जिससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। |
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धारा 3(1)(v) का विषय क्या है? |
"आयात" की परिभाषा। (import) |
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धारा 3(1)(v) के अनुसार "आयात" से क्या अभिप्रेत है? |
भूमि, समुद्र या वायु मार्ग से भारत में खाद्य पदार्थ लाना। |
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धारा 3(1)(w) का विषय क्या है? |
"सुधार नोटिस" की परिभाषा। (improvement notice) |
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धारा 3(1)(w) के अनुसार "सुधार नोटिस" क्या है? |
धारा 32 के तहत जारी किया गया नोटिस। |
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धारा 3(1)(x) का विषय क्या है? |
"शिशु आहार" और "शिशु दूध विकल्प" की परिभाषा। (infant food) |
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धारा 3(1)(x) के अनुसार इनका अर्थ कहाँ से लिया जाएगा? |
शिशु दूध विकल्प, फीडिंग बोतलें और शिशु आहार अधिनियम, 1992 की धारा 2(1)(एफ) और (जी) से। |
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धारा 3(1)(y) का विषय क्या है? |
"घटक" की परिभाषा। (ingredient) |
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धारा 3(1)(y) के अनुसार "घटक" से क्या अभिप्रेत है? |
खाद्य निर्माण या तैयारी में प्रयुक्त कोई भी पदार्थ। |
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धारा 3(1)(y) के अनुसार घटक में क्या शामिल है? |
खाद्य योज्य पदार्थ। |
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धारा 3(1)(y) के अनुसार घटक कहाँ मौजूद होता है? |
अंतिम उत्पाद में, संभवतः संशोधित रूप में। |
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धारा 3(1)(z) का विषय क्या है? |
"लेबल" की परिभाषा। (label) |
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धारा 3(1)(z) के अनुसार "लेबल" से क्या अभिप्रेत है? |
खाद्य पैकेज पर अंकित या संलग्न कोई भी वर्णनात्मक सामग्री। |
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धारा 3(1)(z) के अनुसार लेबल किन रूपों में हो सकता है? |
लिखित, मुद्रित, चिह्नित, ग्राफिक, उभरा हुआ, छिद्रित या अंकित। |
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धारा 3(1)(z) के अनुसार लेबल में क्या शामिल है? |
उत्पाद के साथ संलग्न सामग्री। |
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धारा 3(1)(za) का विषय क्या है? |
"लाइसेंस" की परिभाषा। (licence) |
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धारा 3(1)(za) के अनुसार "लाइसेंस" से क्या तात्पर्य है? |
धारा 31 के तहत प्रदान किया गया लाइसेंस। |
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धारा 3(1)(zb) का विषय क्या है? |
"स्थानीय क्षेत्र" की परिभाषा। (local area) |
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धारा 3(1)(zb) के अनुसार "स्थानीय क्षेत्र" क्या है? |
खाद्य सुरक्षा आयुक्त द्वारा अधिसूचित कोई भी शहरी या ग्रामीण क्षेत्र। |
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धारा 3(1)(zc) का विषय क्या है? |
"विनिर्माण" की परिभाषा। (manufacture) |
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धारा 3(1)(zc) के अनुसार "विनिर्माण" से क्या तात्पर्य है? |
वह प्रक्रिया जिससे अवयव खाद्य पदार्थ में परिवर्तित होते हैं। |
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धारा 3(1)(zc) के अनुसार इसमें क्या शामिल है? |
निर्माण से संबंधित उप-प्रक्रियाएं, आकस्मिक या सहायक प्रक्रियाएं। |
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धारा 3(1)(zd) का विषय क्या है? |
"निर्माता" की परिभाषा। (manufacturer) |
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धारा 3(1)(zd) के अनुसार "निर्माता" कौन है? |
खाद्य पदार्थ के निर्माण के व्यवसाय में लगा व्यक्ति। |
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धारा 3(1)(zd) के अनुसार निर्माता में कौन शामिल है? |
वह व्यक्ति जो पदार्थ प्राप्त कर उसे पैक या लेबल कर बिक्री हेतु प्रस्तुत करता है। |
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धारा 3(1)(ze) का विषय क्या है? |
"सदस्य" की परिभाषा। (Member) |
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धारा 3(1)(ze) के अनुसार "सदस्य" में क्या शामिल है? |
अंशकालिक सदस्य और खाद्य प्राधिकरण के अध्यक्ष। |
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धारा 3(1)(zf) का विषय क्या है? |
"गलत लेबल वाला भोजन" की परिभाषा। (misbranded food) |
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धारा 3(1)(zf)(a) के अनुसार गलत लेबल वाला भोजन कब होता है? |
जब भोजन झूठे, भ्रामक या छलपूर्ण दावों के साथ प्रस्तुत या प्रचारित किया गया हो। |
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धारा 3(1)(zf)(a)(i) के अनुसार यह कैसे किया जा सकता है? |
पैकेज लेबल या विज्ञापन के माध्यम से। |
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धारा 3(1)(zf)(a)(ii) के अनुसार गलत लेबल कब होता है? |
जब भोजन किसी अन्य खाद्य पदार्थ के नाम से बेचा जाए। |
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धारा 3(1)(zf)(a)(iii) के अनुसार गलत लेबल कब होता है? |
जब काल्पनिक व्यक्ति या कंपनी के नाम से निर्माता दर्शाया जाए। |
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धारा 3(1)(zf)(b) के अनुसार गलत लेबल कब होता है? |
जब सीलबंद पैकेज में बेची वस्तु में भ्रामक तत्व हों। |
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धारा 3(1)(zf)(b)(i) के अनुसार क्या स्थिति गलत लेबल है? |
जब वस्तु किसी अन्य खाद्य की नकल या समान हो और सही रूप से लेबल न हो। |
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धारा 3(1)(zf)(b)(ii) के अनुसार क्या स्थिति गलत लेबल है? |
जब पैकेज पर अंकित कथन या चिह्न भ्रामक हो। |
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धारा 3(1)(zf)(b)(iii) के अनुसार क्या स्थिति गलत लेबल है? |
जब वस्तु को गलत स्थान या देश का उत्पाद बताया जाए। |
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धारा 3(1)(zf)(c) के अनुसार गलत लेबल कब होता है? |
जब पैकेज में निहित वस्तु के संबंध में आवश्यक जानकारी न हो। |
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धारा 3(1)(zf)(c)(i) के अनुसार क्या स्थिति गलत लेबल है? |
कृत्रिम स्वाद, रंग या परिरक्षक होने पर घोषणा न होना। |
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धारा 3(1)(zf)(c)(ii) के अनुसार क्या स्थिति गलत लेबल है? |
विशेष आहार उपयोग हेतु आवश्यक जानकारी का अभाव। |
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धारा 3(1)(zf)(c)(iii) के अनुसार क्या स्थिति गलत लेबल है? |
निर्धारित परिवर्तनशीलता की सीमा का सही उल्लेख न होना। |
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धारा 3(1)(zh) का विषय क्या है? |
"पैकेज" की परिभाषा। (package) |
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धारा 3(1)(zh) के अनुसार "पैकेज" से क्या तात्पर्य है? |
पूर्व-पैक किए गए बॉक्स, बोतल, डिब्बा, टिन, बैरल, केस, थैली, पात्र, बोरी, बैग, रैपर या अन्य वस्तुएं जिनमें खाद्य पदार्थ पैक किया जाता है। |
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धारा 3(1)(zi) का विषय क्या है? |
"परिसर" की परिभाषा। (premises) |
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धारा 3(1)(zi) के अनुसार "परिसर" में क्या शामिल है? |
दुकान, स्टॉल, होटल, रेस्तरां, एयरलाइन सेवाएं, खाद्य कैंटीन, स्थान, वाहन या पोत। |
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धारा 3(1)(zi) के अनुसार परिसर में किन गतिविधियों का होना आवश्यक है? |
जहां खाद्य पदार्थ बेचे, निर्मित या बिक्री हेतु संग्रहीत किए जाते हैं। |
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धारा 3(1)(zj) का विषय क्या है? |
"निर्धारित" की परिभाषा। (prescribed) |
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धारा 3(1)(zj) के अनुसार "निर्धारित" का क्या अर्थ है? |
केंद्र या राज्य सरकार द्वारा नियमों के तहत निर्धारित। |
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धारा 3(1)(zk) का विषय क्या है? |
"प्राथमिक खाद्य" की परिभाषा। (primary food) |
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धारा 3(1)(zk) के अनुसार "प्राथमिक खाद्य" क्या है? |
कृषि, बागवानी, पशुपालन, दुग्ध या मत्स्यपालन का प्राकृतिक उत्पाद। |
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धारा 3(1)(zk) के अनुसार यह उत्पाद कैसे प्राप्त होता है? |
उगाने, पालन, खेती, कटाई, संग्रह या पकड़ने से। |
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धारा 3(1)(zk) के अनुसार यह उत्पाद किसके अतिरिक्त अन्य व्यक्ति द्वारा प्राप्त होता है? |
किसान या मछुआरे के अलावा अन्य व्यक्ति द्वारा। |
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धारा 3(1)(zl) का विषय क्या है? |
"निषेध आदेश" की परिभाषा। (prohibition order) |
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धारा 3(1)(zl) के अनुसार "निषेध आदेश" क्या है? |
धारा 33 के अंतर्गत जारी आदेश। |
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धारा 3(1)(zm) का विषय क्या है? |
"जोखिम" की परिभाषा। (risk) |
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धारा 3(1)(zm) के अनुसार "जोखिम" से क्या तात्पर्य है? |
खाद्य खतरे से उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव की संभावना और उसकी गंभीरता। |
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धारा 3(1)(zn) का विषय क्या है? |
"जोखिम विश्लेषण" की परिभाषा। (risk analysis) |
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धारा 3(1)(zn) के अनुसार "जोखिम विश्लेषण" से क्या अभिप्रेत है? |
ऐसी प्रक्रिया जिसमें जोखिम मूल्यांकन, जोखिम प्रबंधन और जोखिम संचार शामिल होते हैं। |
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धारा 3(1)(zo) का विषय क्या है? |
"जोखिम मूल्यांकन" की परिभाषा। (risk assessment) |
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धारा 3(1)(zo) के अनुसार "जोखिम मूल्यांकन" से क्या अभिप्रेत है? |
वैज्ञानिक आधार पर की जाने वाली प्रक्रिया। |
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धारा 3(1)(zo) के अनुसार प्रक्रिया के चरण क्या हैं? |
खतरे की पहचान, खतरे का लक्षण वर्णन, जोखिम मूल्यांकन और जोखिम लक्षण वर्णन। |
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धारा 3(1)(zp) का विषय क्या है? |
"जोखिम संचार" की परिभाषा। (risk communication) |
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धारा 3(1)(zp) के अनुसार "जोखिम संचार" से क्या अभिप्रेत है? |
जोखिमों और संबंधित कारकों के बारे में सूचनाओं और विचारों का संवादात्मक आदान-प्रदान। |
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धारा 3(1)(zp) के अनुसार किनके बीच आदान-प्रदान होता है? |
जोखिम मूल्यांकनकर्ता, प्रबंधक, उपभोक्ता, उद्योग, शैक्षणिक समुदाय और अन्य पक्षों के बीच। |
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धारा 3(1)(zp) के अनुसार इसमें क्या शामिल है? |
जोखिम मूल्यांकन निष्कर्षों की व्याख्या और प्रबंधन निर्णयों का आधार। |
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धारा 3(1)(zq) का विषय क्या है? |
"जोखिम प्रबंधन" की परिभाषा। (risk management) |
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धारा 3(1)(zq) के अनुसार "जोखिम प्रबंधन" से क्या अभिप्रेत है? |
नीतिगत विकल्पों का मूल्यांकन करने की प्रक्रिया। |
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धारा 3(1)(zq) के अनुसार इसमें क्या विचार किया जाता है? |
जोखिम मूल्यांकन और अन्य कारक। |
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धारा 3(1)(zq) के अनुसार इसका उद्देश्य क्या है? |
उपभोक्ता स्वास्थ्य की सुरक्षा और निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देना। |
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धारा 3(1)(zq) के अनुसार इसमें क्या किया जाता है? |
हितधारकों से परामर्श और नियंत्रण विकल्पों का चयन। |
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धारा 3(1)(zr) का विषय क्या है? |
"बिक्री" की परिभाषा। (sale) |
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धारा 3(1)(zr) के अनुसार "बिक्री" से क्या अभिप्रेत है? |
खाद्य पदार्थ का नकद, क्रेडिट या विनिमय द्वारा लेन-देन। |
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धारा 3(1)(zr) के अनुसार बिक्री किन रूपों में हो सकती है? |
थोक या खुदरा, मानव उपभोग, उपयोग या विश्लेषण हेतु। |
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धारा 3(1)(zr) के अनुसार बिक्री में क्या शामिल है? |
बिक्री का समझौता, प्रस्ताव, प्रदर्शन, कब्जे में रखना और प्रयास। |
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धारा 3(1)(zs) का विषय क्या है? |
"नमूना" की परिभाषा। (sample) |
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धारा 3(1)(zs) के अनुसार "नमूना" से क्या अभिप्रेत है? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 या नियमों के तहत लिया गया खाद्य पदार्थ का नमूना। |
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धारा 3(1)(zt) का विषय क्या है? |
"नियमों द्वारा निर्दिष्ट" की परिभाषा। (specified by regulations) |
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धारा 3(1)(zt) के अनुसार "नियमों द्वारा निर्दिष्ट" का क्या अर्थ है? |
खाद्य प्राधिकरण द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा निर्दिष्ट। |
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धारा 3(1)(zu) का विषय क्या है? |
"मानक" की परिभाषा। (standard) |
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धारा 3(1)(zu) के अनुसार "मानक" से क्या अभिप्रेत है? |
खाद्य प्राधिकरण द्वारा अधिसूचित मानक। |
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धारा 3(1)(zv) का विषय क्या है? |
"राज्य सरकार" की परिभाषा (केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में)। (State Government) |
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धारा 3(1)(zv) के अनुसार केंद्र शासित प्रदेश में "राज्य सरकार" कौन है? |
राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 239 के तहत नियुक्त प्रशासक। |
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धारा 3(1)(zw) का विषय क्या है? |
"पदार्थ" की परिभाषा। (substance) |
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धारा 3(1)(zw) के अनुसार "पदार्थ" में क्या शामिल है? |
कोई भी प्राकृतिक या कृत्रिम पदार्थ, चाहे ठोस, तरल, गैस या वाष्प रूप में हो। |
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धारा 3(1)(zx) का विषय क्या है? |
"निम्न-स्तरीय" की परिभाषा। (sub-standard) |
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धारा 3(1)(zx) के अनुसार खाद्य पदार्थ कब निम्न-स्तरीय माना जाएगा? |
जब वह निर्दिष्ट मानकों को पूरा न करे पर असुरक्षित न हो। |
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धारा 3(1)(zy) का विषय क्या है? |
"ट्रिब्यूनल" की परिभाषा। (Tribunal) |
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धारा 3(1)(zy) के अनुसार "ट्रिब्यूनल" क्या है? |
धारा 70 के तहत स्थापित खाद्य सुरक्षा अपीलीय ट्रिब्यूनल। |
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धारा 3(1)(zz) का विषय क्या है? |
"असुरक्षित भोजन" की परिभाषा। (unsafe food) |
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धारा 3(1)(zz) के अनुसार "असुरक्षित भोजन" से क्या अभिप्रेत है? |
ऐसा खाद्य पदार्थ जिसकी प्रकृति, पदार्थ या गुणवत्ता स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो। |
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धारा 3(1)(zz)(i) के अनुसार भोजन कब असुरक्षित है? |
जब वस्तु या उसका पैकेज विषैले या हानिकारक पदार्थों से बना हो। |
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धारा 3(1)(zz)(ii) के अनुसार भोजन कब असुरक्षित है? |
जब वह गंदे, सड़े, विघटित या रोगग्रस्त पशु या वनस्पति पदार्थ से बना हो। |
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धारा 3(1)(zz)(iii) के अनुसार भोजन कब असुरक्षित है? |
अस्वच्छ प्रसंस्करण या हानिकारक पदार्थ की उपस्थिति के कारण। |
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धारा 3(1)(zz)(iv) के अनुसार भोजन कब असुरक्षित है? |
निम्न या सस्ते पदार्थ के प्रतिस्थापन के कारण। |
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धारा 3(1)(zz)(v) के अनुसार भोजन कब असुरक्षित है? |
अनधिकृत पदार्थ मिलाने के कारण। |
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धारा 3(1)(zz)(vi) के अनुसार भोजन कब असुरक्षित है? |
किसी घटक को पूर्णतः या आंशिक रूप से अलग करने के कारण। |
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धारा 3(1)(zz)(vii) के अनुसार भोजन कब असुरक्षित है? |
रंग, स्वाद, लेप या पॉलिश द्वारा वास्तविक स्थिति छिपाने के कारण। |
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धारा 3(1)(zz)(viii) के अनुसार भोजन कब असुरक्षित है? |
निर्दिष्ट रंग या परिरक्षक के अलावा अन्य के होने पर। |
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धारा 3(1)(zz)(ix) के अनुसार भोजन कब असुरक्षित है? |
कृमि, घुन या कीड़ों से संक्रमित होने पर। |
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धारा 3(1)(zz)(x) के अनुसार भोजन कब असुरक्षित है? |
अस्वच्छ परिस्थितियों में तैयार, पैक या रखे जाने पर। |
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धारा 3(1)(zz)(xi) के अनुसार भोजन कब असुरक्षित है? |
गलत ब्रांडिंग, निम्न गुणवत्ता या बाहरी पदार्थों के कारण। |
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धारा 3(1)(zz)(xii) के अनुसार भोजन कब असुरक्षित है? |
निर्धारित सीमा से अधिक कीटनाशक या दूषित पदार्थ होने पर। |
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अध्याय-II (CHAPTER-II) |
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भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FOOD SAFETY AND STANDARDS AUTHORITY OF INDIA) |
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अध्याय II का विषय क्या है? |
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण। (Food Safety and Standards Authority of India) |
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धारा 4 का विषय क्या है? |
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की स्थापना। (Establishment of Food Safety and Standards Authority of India) |
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धारा 4(1) के अनुसार प्राधिकरण की स्थापना कौन करेगा? |
केंद्र सरकार। |
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धारा 4(1) के अनुसार स्थापना किस माध्यम से होगी? |
अधिसूचना द्वारा। |
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धारा 4(1) के अनुसार स्थापित निकाय का नाम क्या होगा? |
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण। |
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धारा 4(1) के अनुसार प्राधिकरण क्या करेगा? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग और सौंपे गए कार्यों का निष्पादन। |
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धारा 4(2) के अनुसार खाद्य प्राधिकरण का स्वरूप क्या है? |
निगमित निकाय। |
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धारा 4(2) के अनुसार खाद्य प्राधिकरण की विशेषताएं क्या हैं? |
शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुहर। |
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धारा 4(2) के अनुसार खाद्य प्राधिकरण को क्या अधिकार हैं? |
संपत्ति प्राप्त करना, रखना, निपटान करना और अनुबंध करना। |
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धारा 4(2) के अनुसार खाद्य प्राधिकरण की वाद संबंधी स्थिति क्या है? |
अपने नाम से मुकदमा कर सकता है या उस पर मुकदमा किया जा सकता है। |
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धारा 4(3) के अनुसार खाद्य प्राधिकरण का मुख्यालय कहाँ होगा? |
दिल्ली में। |
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धारा 4(4) के अनुसार खाद्य प्राधिकरण क्या स्थापित कर सकता है? |
भारत में अन्य स्थानों पर कार्यालय। |
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धारा 5 का विषय क्या है? |
खाद्य प्राधिकरण की संरचना और अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति। (Composition of Food Authority and qualifications for appointment of its Chairperson and other Members) |
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धारा 5(1) के अनुसार खाद्य प्राधिकरण में कौन शामिल होगा? |
एक अध्यक्ष और बाईस सदस्य। |
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धारा 5(1) के अनुसार सदस्यों में महिलाओं का अनुपात क्या होगा? |
एक तिहाई महिलाएं। |
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धारा 5(1)(a) का विषय क्या है? |
केंद्र सरकार के पदेन सदस्य। |
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धारा 5(1)(a) के अनुसार कितने सदस्य होंगे? |
सात सदस्य। |
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धारा 5(1)(a) के अनुसार उनकी न्यूनतम पद-स्तर क्या है? |
संयुक्त सचिव के पद से नीचे नहीं। |
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धारा 5(1)(a) के अनुसार ये सदस्य किन मंत्रालयों/विभागों का प्रतिनिधित्व करेंगे? |
कृषि, व्यापार, उपभोक्ता मामले, खाद्य प्रसंस्करण, स्वास्थ्य, विधायी मामले, लघु उद्योग। |
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धारा 5(1)(a) के अनुसार ये सदस्य किस प्रकार के सदस्य होंगे? |
पदेन सदस्य। |
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धारा 5(1)(b) का विषय क्या है? |
खाद्य उद्योग के प्रतिनिधि। |
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धारा 5(1)(b) के अनुसार कितने प्रतिनिधि होंगे? |
दो प्रतिनिधि। |
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धारा 5(1)(b) के अनुसार उनमें से एक किससे होगा? |
लघु उद्योग से। |
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धारा 5(1)(c) का विषय क्या है? |
उपभोक्ता संगठनों के प्रतिनिधि। |
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धारा 5(1)(c) के अनुसार कितने प्रतिनिधि होंगे? |
दो प्रतिनिधि। |
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धारा 5(1)(d) का विषय क्या है? |
विशेषज्ञ सदस्य। |
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धारा 5(1)(d) के अनुसार कितने सदस्य होंगे? |
तीन प्रख्यात खाद्य प्रौद्योगिकीविद् या वैज्ञानिक। |
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धारा 5(1)(e) का विषय क्या है? |
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि। |
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धारा 5(1)(e) के अनुसार कितने सदस्य होंगे? |
पांच सदस्य। |
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धारा 5(1)(e) के अनुसार नियुक्ति कैसे होगी? |
प्रत्येक तीन वर्ष में बारी-बारी से। |
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धारा 5(1)(f) का विषय क्या है? |
किसानों के प्रतिनिधि। |
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धारा 5(1)(f) के अनुसार कितने सदस्य होंगे? |
दो व्यक्ति। |
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धारा 5(1)(g) का विषय क्या है? |
खुदरा विक्रेताओं के प्रतिनिधि। |
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धारा 5(1)(g) के अनुसार कितने सदस्य होंगे? |
एक व्यक्ति। |
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धारा 5(2) के अनुसार नियुक्ति का आधार क्या होगा? |
उच्च योग्यता, व्यापक विशेषज्ञता और भौगोलिक प्रतिनिधित्व। |
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धारा 5(3) के अनुसार अध्यक्ष की नियुक्ति कौन करेगा? |
केंद्र सरकार। |
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धारा 5(3) के अनुसार अध्यक्ष किनमें से चुना जाएगा? |
खाद्य विज्ञान के विशेषज्ञ या प्रशासनिक अनुभव वाले व्यक्ति। |
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धारा 5(3) के अनुसार अध्यक्ष का पद-स्तर क्या होना चाहिए? |
भारत सरकार के सचिव के पद से कम नहीं। |
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धारा 5(4) के अनुसार नियुक्ति कैसे की जाएगी? |
चयन समिति की सिफारिश पर। |
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धारा 5(5) के अनुसार अध्यक्ष क्या नहीं करेगा? |
कोई अन्य पद का भार नहीं संभालेगा। |
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धारा 6 का विषय क्या है? |
खाद्य प्राधिकरण के अध्यक्ष और सदस्यों के चयन हेतु चयन समिति। (Selection Committee for selection of Chairperson and Members of Food Authority) |
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धारा 6(1) के अनुसार चयन समिति का गठन कौन करेगा? |
केंद्र सरकार। |
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धारा 6(1) के अनुसार चयन समिति का उद्देश्य क्या है? |
अध्यक्ष और पदेन सदस्यों के अलावा अन्य सदस्यों का चयन। |
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धारा 6(1)(a) के अनुसार चयन समिति का अध्यक्ष कौन होगा? |
मंत्रिमंडल सचिव। |
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धारा 6(1)(b) के अनुसार संयोजक-सदस्य कौन होगा? |
प्रशासनिक मंत्रालय/विभाग का प्रभारी सचिव। |
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धारा 6(1)(c) के अनुसार सदस्य कौन होंगे? |
खाद्य प्रसंस्करण, विधायी और कार्मिक विभागों के प्रभारी सचिव। |
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धारा 6(1)(d) के अनुसार सदस्य कौन होगा? |
सार्वजनिक उद्यम चयन बोर्ड का अध्यक्ष। |
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धारा 6(1)(e) के अनुसार सदस्य कौन होगा? |
केंद्र सरकार द्वारा नामित प्रतिष्ठित खाद्य प्रौद्योगिकीविद्। |
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धारा 6(1) के स्पष्टीकरण के अनुसार किसे नामित किया जाएगा? |
राष्ट्रीय अनुसंधान/तकनीकी संस्था के निदेशक या प्रमुख को। |
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धारा 6(2) के अनुसार चयन समिति को संदर्भ कब भेजा जाएगा? |
रिक्ति होने के दो माह के भीतर या सेवानिवृत्ति से तीन माह पूर्व। |
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धारा 6(3) के अनुसार चयन समिति चयन कब तक पूरा करेगी? |
संदर्भ प्राप्ति से दो महीने के भीतर। |
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धारा 6(4) के अनुसार चयन समिति क्या सुझाएगी? |
प्रत्येक रिक्ति के लिए दो नामों का पैनल। |
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धारा 6(5) के अनुसार चयन से पूर्व क्या सुनिश्चित किया जाएगा? |
उम्मीदवार का कोई प्रतिकूल वित्तीय या अन्य हित न हो। |
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धारा 6(6) के अनुसार नियुक्ति कब अमान्य नहीं होगी? |
चयन समिति में रिक्ति होने पर भी। |
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धारा 7 का विषय क्या है? |
खाद्य प्राधिकरण के अध्यक्ष और सदस्यों के कार्यकाल, वेतन, भत्ते और सेवा की अन्य शर्तें। (Term of office, salary, allowances and other conditions of service of Chairperson and Members of Food Authority) |
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धारा 7(1) के अनुसार किन सदस्यों का कार्यकाल निर्धारित है? |
अध्यक्ष और पदेन सदस्यों के अतिरिक्त अन्य सदस्य। |
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धारा 7(1) के अनुसार कार्यकाल कितनी अवधि का है? |
तीन वर्ष। |
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धारा 7(1) के अनुसार पुनर्नियुक्ति की अवधि क्या है? |
अतिरिक्त तीन वर्ष के लिए। |
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धारा 7(1) के परन्तु के अनुसार अध्यक्ष की अधिकतम आयु क्या है? |
पैंसठ वर्ष। |
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धारा 7(1)(a) के अनुसार अध्यक्ष की आयु सीमा क्या है? |
65 वर्ष। |
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धारा 7(1)(b) के अनुसार सदस्य की आयु सीमा क्या है? |
62 वर्ष। |
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धारा 7(2) के अनुसार वेतन, भत्ते और सेवा शर्तें कौन निर्धारित करेगा? |
केंद्र सरकार। |
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धारा 7(3) के अनुसार शपथ कौन लेगा? |
अध्यक्ष और प्रत्येक सदस्य। |
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धारा 7(3) के अनुसार शपथ किस प्रकार होगी? |
निर्धारित प्रारूप, तरीके और प्राधिकारी के समक्ष। |
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धारा 7(3) के अनुसार शपथ कब ली जाएगी? |
पद ग्रहण करने से पहले। |
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धारा 7(4) के अनुसार अध्यक्ष या सदस्य क्या कर सकता है? |
पद का त्याग कर सकता है। |
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धारा 7(4)(a) के अनुसार त्यागपत्र कैसे दिया जाएगा? |
केंद्र सरकार को तीन महीने का लिखित नोटिस देकर। |
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धारा 7(4)(b) के अनुसार हटाया जाना कैसे होगा? |
धारा 8 के प्रावधानों के अनुसार। |
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धारा 7(5) के अनुसार पद छोड़ने के बाद क्या निषेध है? |
खाद्य प्राधिकरण या राज्य प्राधिकरण के समक्ष किसी का प्रतिनिधित्व नहीं करेगा। |
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धारा 8 का विषय क्या है? |
खाद्य प्राधिकरण के अध्यक्ष और सदस्यों को हटाना। (Removal of Chairperson and Members of Food Authority) |
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धारा 8(1) के अनुसार हटाने की शक्ति किसे है? |
केंद्र सरकार को। |
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धारा 8(1) के अनुसार हटाना किस माध्यम से होगा? |
आदेश द्वारा। |
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धारा 8(1) के अनुसार किन्हें हटाया जा सकता है? |
अध्यक्ष या अन्य सदस्य। |
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धारा 8(1)(a) के अनुसार हटाने का आधार क्या है? |
दिवालिया घोषित होना। |
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धारा 8(1)(b) के अनुसार हटाने का आधार क्या है? |
नैतिक पतन से जुड़े अपराध में दोषसिद्धि। |
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धारा 8(1)(c) के अनुसार हटाने का आधार क्या है? |
शारीरिक या मानसिक अक्षमता। |
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धारा 8(1)(d) के अनुसार हटाने का आधार क्या है? |
वित्तीय या अन्य हित जो कार्यों को प्रभावित करें। |
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धारा 8(1)(e) के अनुसार हटाने का आधार क्या है? |
पद का दुरुपयोग जिससे जनहित प्रभावित हो। |
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धारा 8(2) का विषय क्या है? |
सुनवाई का अवसर। |
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धारा 8(2) के अनुसार सुनवाई कब आवश्यक है? |
खंड (घ) और (ङ) के मामलों में। |
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धारा 8(2) के अनुसार क्या दिया जाएगा? |
उचित सुनवाई का अवसर। |
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धारा 9 का विषय क्या है? |
खाद्य प्राधिकरण के अधिकारी और अन्य कर्मचारी। (Officers and other employees of Food Authority) |
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धारा 9(1) के अनुसार खाद्य प्राधिकरण में कौन-सा अधिकारी होगा? |
एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी। |
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धारा 9(1) के अनुसार मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पद-स्तर क्या होगा? |
भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव से कम नहीं। |
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धारा 9(1) के अनुसार मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति कौन करेगा? |
केंद्र सरकार। |
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धारा 9(1) के अनुसार मुख्य कार्यकारी अधिकारी की भूमिका क्या है? |
प्राधिकरण का सदस्य-सचिव। |
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धारा 9(2) के अनुसार अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों का निर्धारण कौन करेगा? |
खाद्य प्राधिकरण। |
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धारा 9(2) के अनुसार यह निर्धारण किसकी स्वीकृति से होगा? |
केंद्र सरकार की स्वीकृति से। |
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धारा 9(2) के अनुसार क्या निर्धारित किया जाएगा? |
अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या, प्रकृति और श्रेणियां। |
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धारा 9(3) के अनुसार वेतन और भत्ते कौन निर्धारित करेगा? |
खाद्य प्राधिकरण। |
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धारा 9(3) के अनुसार यह निर्धारण किसके माध्यम से होगा? |
विनियमों के माध्यम से। |
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धारा 9(3) के अनुसार यह निर्धारण किसकी स्वीकृति से होगा? |
केंद्र सरकार की स्वीकृति से। |
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धारा 10 का विषय क्या है? |
मुख्य कार्यकारी अधिकारी के कार्य। (Functions of the Chief Executive Officer) |
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धारा 10(1) के अनुसार मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्या है? |
खाद्य प्राधिकरण का कानूनी प्रतिनिधि। |
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धारा 10(1)(a) के अनुसार मुख्य कार्यकारी अधिकारी का कार्य क्या है? |
खाद्य प्राधिकरण का दैनिक प्रशासन। |
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धारा 10(1)(b) के अनुसार मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्या करेगा? |
केंद्रीय सलाहकार समिति के परामर्श से कार्य कार्यक्रमों के प्रस्ताव तैयार करेगा। |
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धारा 10(1)(c) के अनुसार मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्या करेगा? |
कार्य कार्यक्रमों और निर्णयों को लागू करेगा। |
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धारा 10(1)(d) के अनुसार मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्या सुनिश्चित करेगा? |
वैज्ञानिक समिति और पैनलों को सहायता प्रदान करना। |
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धारा 10(1)(e) के अनुसार मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्या सुनिश्चित करेगा? |
उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं के अनुसार कार्यों का निष्पादन। |
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धारा 10(1)(f) के अनुसार मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्या करेगा? |
राजस्व-व्यय विवरण तैयार करना और बजट लागू करना। |
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धारा 10(1)(g) के अनुसार मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्या करेगा? |
केंद्र सरकार से संपर्क और संवाद बनाए रखना। |
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धारा 10(2) के अनुसार मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्या प्रस्तुत करेगा? |
सामान्य रिपोर्ट, कार्य योजनाएँ, वार्षिक खाते और बजट। |
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धारा 10(2) के अनुसार यह प्रस्तुति कब होगी? |
प्रत्येक वर्ष। |
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धारा 10(3) के अनुसार मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्या करेगा? |
रिपोर्ट और कार्यक्रमों को केंद्र व राज्य सरकारों को भेजेगा और प्रकाशित करेगा। |
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धारा 10(4) के अनुसार मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्या करेगा? |
सभी वित्तीय व्ययों को अनुमोदित करेगा और केंद्र सरकार को रिपोर्ट देगा। |
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धारा 10(5) के अनुसार मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्या करेगा? |
खाद्य सुरक्षा आयुक्त की शक्तियों का प्रयोग करेगा। |
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धारा 10(6) के अनुसार मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पास क्या होगा? |
अधिकारियों और कर्मचारियों पर प्रशासनिक नियंत्रण। |
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धारा 11 का विषय क्या है? |
केंद्रीय सलाहकार समिति। (Central Advisory Committee) |
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धारा 11(1) के अनुसार केंद्रीय सलाहकार समिति की स्थापना कौन करेगा? |
खाद्य प्राधिकरण। |
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धारा 11(1) के अनुसार स्थापना किस माध्यम से होगी? |
अधिसूचना द्वारा। |
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धारा 11(1) के अनुसार समिति का नाम क्या होगा? |
केंद्रीय सलाहकार समिति। |
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धारा 11(2) के अनुसार समिति में किनका प्रतिनिधित्व होगा? |
खाद्य उद्योग, कृषि, उपभोक्ता, अनुसंधान निकाय, खाद्य प्रयोगशालाएं और खाद्य सुरक्षा आयुक्त। |
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धारा 11(2) के अनुसार प्रत्येक क्षेत्र से कितने सदस्य होंगे? |
दो-दो सदस्य। |
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धारा 11(2) के अनुसार पदेन सदस्य कौन होगा? |
वैज्ञानिक समिति का अध्यक्ष। |
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धारा 11(3) के अनुसार किन्हें बैठकों में आमंत्रित किया जाएगा? |
विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के प्रतिनिधि, सरकारी संस्थान और किसान संगठन। |
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धारा 11(4) के अनुसार समिति का पदेन अध्यक्ष कौन होगा? |
मुख्य कार्यकारी अधिकारी। |
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धारा 11(5) के अनुसार समिति किन नियमों का पालन करेगी? |
विनियमों द्वारा निर्दिष्ट कार्यप्रणाली के नियम। |
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धारा 12 का विषय क्या है? |
केंद्रीय सलाहकार समिति के कार्य। (Functions of Central Advisory Committee) |
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धारा 12(1) के अनुसार केंद्रीय सलाहकार समिति का मुख्य कार्य क्या है? |
खाद्य प्राधिकरण और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग सुनिश्चित करना। |
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धारा 12(2) के अनुसार केंद्रीय सलाहकार समिति किसे सलाह देती है? |
खाद्य प्राधिकरण को। |
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धारा 12(2)(a) के अनुसार किस विषय पर सलाह दी जाएगी? |
कर्तव्यों के निर्वहन और कार्य कार्यक्रम प्रस्ताव तैयार करने पर। |
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धारा 12(2)(b) के अनुसार किस विषय पर सलाह दी जाएगी? |
कार्य की प्राथमिकता निर्धारण पर। |
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धारा 12(2)(c) के अनुसार किस विषय पर सलाह दी जाएगी? |
संभावित जोखिमों की पहचान पर। |
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धारा 12(2)(d) के अनुसार किस विषय पर सलाह दी जाएगी? |
ज्ञान के एकत्रीकरण पर। |
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धारा 12(2)(e) के अनुसार किस विषय पर सलाह दी जाएगी? |
अन्य कार्य जो विनियमों द्वारा निर्दिष्ट हों। |
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धारा 12(5) के अनुसार बैठक कब होगी? |
अध्यक्ष के निमंत्रण पर या एक तिहाई सदस्यों के अनुरोध पर। |
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धारा 12(5) के अनुसार बैठक की न्यूनतम आवृत्ति क्या है? |
वर्ष में कम से कम तीन बार। |
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धारा 13 का विषय क्या है? |
वैज्ञानिक पैनल। (Scientific Panels) |
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धारा 13(1) के अनुसार वैज्ञानिक पैनल का गठन कौन करेगा? |
खाद्य प्राधिकरण। |
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धारा 13(1) के अनुसार वैज्ञानिक पैनलों में कौन शामिल होंगे? |
स्वतंत्र वैज्ञानिक विशेषज्ञ। |
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धारा 13(2) के अनुसार वैज्ञानिक पैनल किन्हें आमंत्रित करेगा? |
संबंधित उद्योग और उपभोक्ता प्रतिनिधियों को। |
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धारा 13(3) के अनुसार खाद्य प्राधिकरण क्या कर सकता है? |
आवश्यकतानुसार अतिरिक्त वैज्ञानिक पैनल स्थापित कर सकता है। |
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धारा 13(3)(a) के अनुसार एक पैनल किस विषय पर होगा? |
खाद्य योजक, स्वाद, प्रसंस्करण सहायक और संपर्क सामग्री। |
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धारा 13(3)(b) के अनुसार एक पैनल किस विषय पर होगा? |
कीटनाशकों और एंटीबायोटिक अवशेष। |
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धारा 13(3)(c) के अनुसार एक पैनल किस विषय पर होगा? |
आनुवंशिक रूप से संशोधित जीव और खाद्य। |
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धारा 13(3)(d) के अनुसार एक पैनल किस विषय पर होगा? |
कार्यात्मक खाद्य और पोषक उत्पाद। |
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धारा 13(3)(e) के अनुसार एक पैनल किस विषय पर होगा? |
जैविक खतरे। |
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धारा 13(3)(f) के अनुसार एक पैनल किस विषय पर होगा? |
खाद्य श्रृंखला में संदूषक। |
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धारा 13(3)(g) के अनुसार एक पैनल किस विषय पर होगा? |
लेबलिंग। |
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धारा 13(3)(h) के अनुसार एक पैनल किस विषय पर होगा? |
नमूना और विश्लेषण विधि। |
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धारा 13(4) के अनुसार वैज्ञानिक पैनलों का पुनर्गठन कौन कर सकता है? |
खाद्य प्राधिकरण। |
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धारा 13(4) के अनुसार पुनर्गठन कैसे किया जा सकता है? |
सदस्य जोड़कर, हटाकर या नाम बदलकर। |
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धारा 14 का विषय क्या है? |
वैज्ञानिक समिति। (Scientific Committee) |
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धारा 14(1) के अनुसार वैज्ञानिक समिति का गठन कौन करेगा? |
खाद्य प्राधिकरण। |
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धारा 14(1) के अनुसार समिति में कौन शामिल होंगे? |
वैज्ञानिक पैनलों के अध्यक्ष और छह स्वतंत्र वैज्ञानिक विशेषज्ञ। |
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धारा 14(1) के अनुसार स्वतंत्र विशेषज्ञों की शर्त क्या है? |
वे किसी भी वैज्ञानिक पैनल से संबंधित या संबद्ध नहीं होंगे। |
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धारा 14(2) के अनुसार वैज्ञानिक समिति का कार्य क्या है? |
खाद्य प्राधिकरण को वैज्ञानिक राय प्रदान करना। |
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धारा 14(2) के अनुसार समिति को क्या शक्ति है? |
आवश्यकता होने पर सार्वजनिक सुनवाई आयोजित करना। |
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धारा 14(3) के अनुसार वैज्ञानिक समिति क्या सुनिश्चित करेगी? |
वैज्ञानिक राय प्रक्रिया में एकरूपता। |
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धारा 14(3) के अनुसार समिति किसके लिए जिम्मेदार है? |
समन्वय, कार्य प्रक्रियाओं का अपनाना और सामंजस्य। |
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धारा 14(4) के अनुसार समिति किन मामलों पर राय देगी? |
बहुक्षेत्रीय मुद्दों और ऐसे मुद्दों पर जो किसी पैनल के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। |
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धारा 14(5) के अनुसार समिति क्या कर सकती है? |
कार्य समूहों का गठन। |
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धारा 14(5) के अनुसार कार्य समूहों का उपयोग किस लिए होगा? |
वैज्ञानिक राय स्थापित करने में विशेषज्ञता के लिए। |
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धारा 15 का विषय क्या है? |
वैज्ञानिक समिति और वैज्ञानिक पैनल की प्रक्रिया। (Procedure for Scientific Committee and Scientific Panel) |
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धारा 15(1) के अनुसार नियुक्ति किसकी होगी? |
वैज्ञानिक समिति के स्वतंत्र सदस्य और वैज्ञानिक पैनल के सदस्य। |
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धारा 15(1) के अनुसार नियुक्ति कौन करेगा? |
खाद्य प्राधिकरण। |
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धारा 15(1) के अनुसार नियुक्ति की अवधि क्या है? |
तीन वर्ष। |
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धारा 15(1) के अनुसार क्या अवधि का नवीनीकरण संभव है? |
हाँ, नवीनीकरण किया जा सकता है। |
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धारा 15(1) के अनुसार रिक्ति सूचना कहाँ प्रकाशित होगी? |
प्रमुख वैज्ञानिक प्रकाशनों और खाद्य प्राधिकरण की वेबसाइट पर। |
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धारा 15(1) के अनुसार सूचना का उद्देश्य क्या है? |
रुचि की अभिव्यक्ति आमंत्रित करना। |
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धारा 15(2) के अनुसार अध्यक्ष का चयन कैसे होगा? |
अपने-अपने सदस्यों में से चुनाव द्वारा। |
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धारा 15(3) के अनुसार निर्णय कैसे होंगे? |
सदस्यों के बहुमत से। |
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धारा 15(3) के अनुसार क्या दर्ज किया जाएगा? |
सदस्यों के विचार। |
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धारा 15(4) के अनुसार प्रक्रिया किसके द्वारा निर्धारित होगी? |
विनियमों द्वारा। |
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धारा 15(5) के अनुसार प्रक्रियाएं किन विषयों से संबंधित होंगी? |
निर्दिष्ट बिंदुओं से। |
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धारा 15(5)(a) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
सदस्य कितनी बार सेवा कर सकता है। |
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धारा 15(5)(b) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
प्रत्येक पैनल में सदस्यों की संख्या। |
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धारा 15(5)(c) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
सदस्यों के खर्चों की प्रतिपूर्ति। |
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धारा 15(5)(d) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
कार्यों और राय के लिए अनुरोध की प्रक्रिया। |
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धारा 15(5)(e) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
कार्य समूहों का गठन और बाहरी विशेषज्ञों का समावेश। |
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धारा 15(5)(f) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
बैठकों में पर्यवेक्षकों को आमंत्रित करने की संभावना। |
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धारा 15(5)(g) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
सार्वजनिक सुनवाई आयोजित करने की संभावना। |
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धारा 15(5)(h) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
बैठक की संख्या, सूचना, एजेंडा आदि। |
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धारा 16 का विषय क्या है? |
खाद्य प्राधिकरण के कर्तव्य एवं कार्य। (Duties and functions of Food Authority) |
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धारा 16(1) के अनुसार खाद्य प्राधिकरण का कर्तव्य क्या है? |
खाद्य पदार्थों के निर्माण, प्रसंस्करण, वितरण, बिक्री और आयात का विनियमन और निगरानी। |
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धारा 16(2) के अनुसार खाद्य प्राधिकरण क्या कर सकता है? |
विनियमों द्वारा निर्दिष्ट विषयों का निर्धारण। |
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धारा 16(2)(a) के अनुसार क्या निर्धारित किया जाएगा? |
खाद्य मानक, दिशानिर्देश और उनके क्रियान्वयन की प्रणाली। |
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धारा 16(2)(b) के अनुसार क्या निर्धारित किया जाएगा? |
योजकों, संदूषकों, अवशेषों, धातुओं, दवाओं और विकिरण की सीमाएं। |
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धारा 16(2)(c) के अनुसार क्या निर्धारित किया जाएगा? |
खाद्य सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली के प्रमाणन निकायों की मान्यता के दिशानिर्देश। |
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धारा 16(2)(d) के अनुसार क्या निर्धारित किया जाएगा? |
आयातित खाद्य पदार्थों के गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रिया और प्रवर्तन। |
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धारा 16(2)(e) के अनुसार क्या निर्धारित किया जाएगा? |
प्रयोगशालाओं के प्रत्यायन की प्रक्रिया और अधिसूचना। |
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धारा 16(2)(f) के अनुसार क्या निर्धारित किया जाएगा? |
प्रवर्तन अधिकारियों के बीच नमूना लेने, विश्लेषण और सूचना आदान-प्रदान की विधि। |
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धारा 16(2)(g) के अनुसार क्या किया जाएगा? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रवर्तन और प्रशासन का सर्वेक्षण। |
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धारा 16(2)(h) के अनुसार क्या निर्धारित किया जाएगा? |
स्वास्थ्य, पोषण, विशेष आहार उपयोग और श्रेणी प्रणाली से संबंधित लेबलिंग मानक। |
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धारा 16(2)(i) के अनुसार क्या निर्धारित किया जाएगा? |
जोखिम विश्लेषण, मूल्यांकन, संचार और प्रबंधन की प्रक्रिया। |
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धारा 16(5)(a) के अनुसार क्या कार्य है? |
केंद्र और राज्य सरकारों को वैज्ञानिक सलाह और तकनीकी सहायता देना। |
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धारा 16(5)(b) के अनुसार क्या कार्य है? |
प्रासंगिक वैज्ञानिक और तकनीकी डेटा की खोज करना, एकत्र करना, संकलित करना, विश्लेषण करना और सारांशित करना, विशेष रूप से इससे संबंधित- i. खाद्य पदार्थों का सेवन और खाद्य पदार्थों के सेवन से संबंधित जोखिमों के प्रति व्यक्तियों का जोखिम ii. जैविक जोखिम की घटना और व्यापकता iii. खाद्य पदार्थों में संदूषक iv. विभिन्न संदूषकों के अवशेष v. उभरते जोखिमों की पहचान; और vi. त्वरित चेतावनी प्रणाली की शुरुआत; |
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धारा 16(5)(c) के अनुसार क्या किया जाएगा? |
जोखिम मूल्यांकन पद्धतियों के विकास हेतु दिशा-निर्देश जारी और निगरानी। |
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धारा 16(5)(c) के अनुसार किसे संदेश भेजा जाएगा? |
केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को। |
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धारा 16(5)(d) के अनुसार क्या किया जाएगा? |
संकट प्रबंधन में वैज्ञानिक व तकनीकी सहायता प्रदान करना। |
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धारा 16(5)(d) के अनुसार क्या तैयार किया जाएगा? |
सामान्य संकट प्रबंधन योजना। |
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धारा 16(5)(e) के अनुसार उद्देश्य क्या है? |
समन्वय, सूचना आदान-प्रदान और सर्वोत्तम प्रथाओं का साझा करना। |
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धारा 16(5)(f) के अनुसार क्या किया जाएगा? |
केंद्र व राज्य सरकारों को अंतर्राष्ट्रीय सहयोग हेतु सहायता देना। |
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धारा 16(5)(g) के अनुसार क्या सुनिश्चित किया जाएगा? |
जनता को त्वरित, विश्वसनीय और व्यापक जानकारी। |
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धारा 16(5)(h) के अनुसार क्या किया जाएगा? |
खाद्य व्यवसाय से जुड़े व्यक्तियों को प्रशिक्षण प्रदान करना। |
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धारा 16(5)(i) के अनुसार क्या किया जाएगा? |
केंद्र सरकार द्वारा सौंपे गए अन्य कार्य। |
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धारा 16(5)(j) के अनुसार क्या किया जाएगा? |
अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी मानकों के विकास में योगदान। |
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धारा 16(5)(k) के अनुसार क्या किया जाएगा? |
खाद्य उपायों की समतुल्यता पर सहमति विकसित करना। |
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धारा 16(5)(l) के अनुसार क्या किया जाएगा? |
खाद्य मानकों पर अंतर्राष्ट्रीय कार्यों का समन्वय बढ़ाना। |
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धारा 16(5)(m) के अनुसार क्या किया जाएगा? |
अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू मानकों में एकरूपता बढ़ाना। |
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धारा 16(5)(n) के अनुसार क्या किया जाएगा? |
खाद्य सुरक्षा और मानकों पर जागरूकता बढ़ाना। |
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धारा 16(4) के अनुसार क्या सार्वजनिक किया जाएगा? |
वैज्ञानिक राय, हित घोषणाएं, अध्ययन परिणाम और वार्षिक रिपोर्ट। |
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धारा 16(4)(a) के अनुसार क्या प्रकाशित होगा? |
वैज्ञानिक समिति और पैनलों की राय। |
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धारा 16(4)(b) के अनुसार क्या प्रकाशित होगा? |
सदस्यों और अधिकारियों की हित घोषणाएं। |
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धारा 16(4)(c) के अनुसार क्या प्रकाशित होगा? |
वैज्ञानिक अध्ययनों के परिणाम। |
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धारा 16(4)(d) के अनुसार क्या प्रकाशित होगा? |
गतिविधियों की वार्षिक रिपोर्ट। |
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धारा 16(5) के अनुसार खाद्य प्राधिकरण क्या कर सकता है? |
खाद्य सुरक्षा आयुक्त को निर्देश दे सकता है। |
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धारा 16(5) के अनुसार आयुक्त क्या करेगा? |
उन निर्देशों से बाध्य रहेगा। |
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धारा 16(6) के अनुसार क्या निषिद्ध है? |
गोपनीय जानकारी का खुलासा। |
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धारा 16(6) के अनुसार अपवाद क्या है? |
सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा हेतु आवश्यक होने पर। |
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धारा 17 का विषय क्या है? |
खाद्य प्राधिकरण की कार्यवाही। (Proceedings of Food Authority) |
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धारा 17(1) के अनुसार खाद्य प्राधिकरण की बैठक कहाँ होगी? |
मुख्यालय या उसके किसी भी कार्यालय में। |
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धारा 17(1) के अनुसार बैठक का समय कौन निर्धारित करेगा? |
अध्यक्ष। |
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धारा 17(1) के अनुसार बैठक की प्रक्रिया कैसे होगी? |
विनियमों द्वारा निर्दिष्ट प्रक्रिया नियमों के अनुसार। |
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धारा 17(1) के अनुसार क्या शामिल होगा? |
कोरम सहित कार्य संचालन। |
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धारा 17(2) के अनुसार अध्यक्ष की अनुपस्थिति में कौन अध्यक्षता करेगा? |
अध्यक्ष द्वारा नामित सदस्य या उपस्थित सदस्यों द्वारा चुना गया सदस्य। |
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धारा 17(3) के अनुसार निर्णय कैसे होंगे? |
उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से। |
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धारा 17(3) के अनुसार मतों की समानता पर क्या होगा? |
अध्यक्ष या अध्यक्षता करने वाला व्यक्ति निर्णायक मत देगा। |
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धारा 17(4) के अनुसार आदेश और निर्णय कौन प्रमाणित करेगा? |
मुख्य कार्यकारी अधिकारी। |
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धारा 17(5) के अनुसार मुख्य कार्यकारी अधिकारी की भूमिका क्या है? |
बैठकों में भाग लेना, परंतु मतदान का अधिकार नहीं। |
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धारा 17(6) के अनुसार किसे बैठकों में आमंत्रित किया जा सकता है? |
वैज्ञानिक समिति के अध्यक्ष को। |
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धारा 17(6) के अनुसार उन्हें क्या अधिकार नहीं होगा? |
मतदान का अधिकार। |
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धारा 17(7) के अनुसार कार्यवाही कब अमान्य नहीं होगी? |
गठन में रिक्ति या दोष होने पर भी। |
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अध्याय-III (CHAPTER-III) |
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खाद्य सुरक्षा के सामान्य सिद्धांत (GENERAL PRINCIPLES OF FOOD SAFETY) |
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अध्याय III का विषय क्या है? |
खाद्य सुरक्षा के सामान्य सिद्धांत। (General Principles Of Food Safety) |
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धारा 18 का विषय क्या है? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रशासन में पालन किए जाने वाले सामान्य सिद्धांत। (General principles to be followed in administration of Act) |
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धारा 18 के अनुसार किन पर ये सिद्धांत लागू होते हैं? |
केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, खाद्य प्राधिकरण और अन्य एजेंसियां। |
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धारा 18(1)(a) के अनुसार क्या सुनिश्चित किया जाएगा? |
मानव जीवन, स्वास्थ्य और उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा तथा निष्पक्ष व्यापार। |
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धारा 18(1)(b) के अनुसार जोखिम प्रबंधन कैसे किया जाएगा? |
जोखिम मूल्यांकन के परिणामों और अन्य प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखकर। |
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धारा 18(1)(c) के अनुसार कब अस्थायी उपाय अपनाए जा सकते हैं? |
जब स्वास्थ्य जोखिम की संभावना हो और वैज्ञानिक अनिश्चितता बनी रहे। |
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धारा 18(1)(d) के अनुसार उपाय कैसे होंगे? |
आनुपातिक और न्यूनतम व्यापार प्रतिबंध वाले। |
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धारा 18(1)(d) के अनुसार किन बातों का ध्यान रखा जाएगा? |
तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता तथा अन्य प्रासंगिक कारक। |
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धारा 18(1)(e) के अनुसार उपायों की समीक्षा कब होगी? |
उचित समयावधि के भीतर। |
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धारा 18(1)(e) के अनुसार समीक्षा किस पर निर्भर करेगी? |
जोखिम की प्रकृति और वैज्ञानिक जानकारी पर। |
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धारा 18(1)(f) के अनुसार कब सूचना दी जाएगी? |
जब खाद्य पदार्थ से स्वास्थ्य जोखिम का संदेह हो। |
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धारा 18(1)(f) के अनुसार किसे सूचना दी जाएगी? |
आम जनता को। |
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धारा 18(1)(f) के अनुसार सूचना में क्या शामिल होगा? |
खाद्य पदार्थ, जोखिम और निवारक उपायों की जानकारी। |
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धारा 18(1)(g) के अनुसार कब अनुमान लगाया जाएगा? |
जब किसी बैच/लॉट का खाद्य अनुपालन में विफल हो। |
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धारा 18(1)(g) के अनुसार क्या माना जाएगा? |
पूरे बैच/लॉट के सभी खाद्य पदार्थ अनुपालन में विफल हैं, जब तक विपरीत सिद्ध न हो। |
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धारा 18(2)(a) के अनुसार क्या विचार किया जाएगा? |
देश में प्रचलित प्रथाएं और स्थितियां। |
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धारा 18(2)(a)(i) के अनुसार किन बातों को शामिल किया जाएगा? |
कृषि पद्धतियां, प्रबंधन, भंडारण और परिवहन की स्थितियां। |
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धारा 18(2)(a)(ii) के अनुसार क्या विचार किया जाएगा? |
अंतर्राष्ट्रीय मानक और प्रथाएं। |
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धारा 18(2)(a) के अनुसार अपवाद क्या है? |
जब इन्हें अपनाना उद्देश्यों हेतु उपयुक्त न हो या वैज्ञानिक औचित्य न हो। |
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धारा 18(2)(b) के अनुसार खाद्य मानक कैसे निर्धारित होंगे? |
जोखिम विश्लेषण के आधार पर। |
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धारा 18(2)(b) के अनुसार अपवाद क्या है? |
जब जोखिम विश्लेषण उपयुक्त न हो। |
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धारा 18(2)(c) के अनुसार जोखिम मूल्यांकन कैसे होगा? |
वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित, स्वतंत्र, वस्तुनिष्ठ और पारदर्शी। |
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धारा 18(2)(d) के अनुसार क्या सुनिश्चित किया जाएगा? |
खुली और पारदर्शी सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया। |
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धारा 18(2)(d) के अनुसार किन्हें शामिल किया जाएगा? |
प्रत्यक्ष या प्रतिनिधि निकाय, पंचायतों सहित। |
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धारा 18(2)(d) के अनुसार अपवाद क्या है? |
अत्यावश्यक स्थिति में परामर्श से छूट। |
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धारा 18(2)(d) के परन्तु के अनुसार ऐसे नियम कितने समय तक लागू रहेंगे? |
अधिकतम छह महीने। |
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धारा 18(2)(e) के अनुसार क्या सुनिश्चित किया जाएगा? |
उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा। |
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धारा 18(2)(e) के अनुसार उद्देश्य क्या है? |
उपभोक्ताओं को सूचित विकल्प का आधार देना। |
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धारा 18(2)(f) के अनुसार क्या सुनिश्चित किया जाएगा? |
रोकथाम। |
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धारा 18(2)(f)(i) के अनुसार किसकी रोकथाम होगी? |
धोखाधड़ीपूर्ण, भ्रामक या अनुचित व्यापार प्रथाएं। |
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धारा 18(2)(f)(ii) के अनुसार किसकी रोकथाम होगी? |
असुरक्षित, दूषित या निम्न गुणवत्ता वाला भोजन। |
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धारा 18(3) के अनुसार किन पर अधिनियम लागू नहीं होगा? |
किसान या मछुआरे के खेत स्तर के उत्पादों पर। |
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अध्याय-IV (CHAPTER-IV) |
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खाद्य पदार्थों से संबंधित सामान्य प्रावधान (GENERAL POVISIONS AS TO ARTICLES OF FOOD) |
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अध्याय IV का विषय क्या है? |
खाद्य पदार्थों से संबंधित सामान्य प्रावधान। (General Povisions as to Articles of Food) |
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धारा 19 का विषय क्या है? |
खाद्य योज्य या प्रसंस्करण सहायक का उपयोग। (Use of food additive or processing aid) |
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धारा 19 के अनुसार खाद्य योज्य या प्रसंस्करण सहायक कब मिलाया जा सकता है? |
जब वह अधिनियम और विनियमों के अनुरूप हो। |
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धारा 19 के अनुसार क्या निषिद्ध है? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और विनियमों के विरुद्ध योज्य या प्रसंस्करण सहायक का उपयोग। |
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धारा 19 के स्पष्टीकरण के अनुसार "प्रसंस्करण सहायक" क्या है? |
ऐसा पदार्थ जो तकनीकी उद्देश्य हेतु प्रसंस्करण में प्रयुक्त होता है। |
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धारा 19 के स्पष्टीकरण के अनुसार क्या इसमें उपकरण शामिल हैं? |
नहीं। |
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धारा 19 के स्पष्टीकरण के अनुसार इसका उपभोग कैसे होता है? |
स्वयं खाद्य के रूप में उपभोग नहीं किया जाता। |
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धारा 19 के स्पष्टीकरण के अनुसार इसका उपयोग किसमें होता है? |
कच्चे माल, खाद्य पदार्थ या उसके अवयवों के प्रसंस्करण में। |
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धारा 19 के स्पष्टीकरण के अनुसार इसका परिणाम क्या हो सकता है? |
अंतिम उत्पाद में अनजाने में अवशेष या व्युत्पन्न पदार्थ मौजूद होना। |
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धारा 20 का विषय क्या है? |
संदूषक, प्राकृतिक विषैले पदार्थ, भारी धातुएँ आदि। (Contaminants, naturally occurring toxic substances, heavy metals, etc.) |
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धारा 20 के अनुसार खाद्य पदार्थ में क्या नहीं होना चाहिए? |
संदूषक, विषैले पदार्थ, हार्मोन या भारी धातुएँ। |
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धारा 20 के अनुसार इन पदार्थों की मात्रा कैसी होनी चाहिए? |
नियमों द्वारा निर्दिष्ट मात्रा से अधिक नहीं। |
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धारा 21 का विषय क्या है? |
कीटनाशक, पशु चिकित्सा दवाओं के अवशेष, एंटीबायोटिक अवशेष और सूक्ष्मजीवों की संख्या। (Pesticides, veterinary drugs residues, antibiotic residues and microbiological counts) |
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धारा 21(1) के अनुसार किन पदार्थों की मात्रा सीमित है? |
कीटनाशक, पेस्टिसाइड, पशु चिकित्सा दवाएं, एंटीबायोटिक, विलायक अवशेष, औषधीय पदार्थ और सूक्ष्मजीव। |
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धारा 21(1) के अनुसार सीमा क्या है? |
नियमों द्वारा निर्दिष्ट सहनशीलता सीमा से अधिक नहीं। |
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धारा 21(2) के अनुसार क्या निषिद्ध है? |
खाद्य पदार्थों पर सीधे कीटनाशक का प्रयोग। |
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धारा 21(2) के अनुसार अपवाद क्या है? |
कीटनाशक अधिनियम, 1968 के तहत अनुमोदित धूमनकारी पदार्थ। |
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धारा 21 के स्पष्टीकरण का विषय क्या है? |
"कीटनाशक अवशेष" और "पशु चिकित्सा दवाओं के अवशेष" की परिभाषा। |
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धारा 21 स्पष्टीकरण (1) के अनुसार "कीटनाशक अवशेष" क्या है? |
भोजन में कीटनाशक उपयोग से उत्पन्न पदार्थ। |
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धारा 21 स्पष्टीकरण (1) के अनुसार इसमें क्या शामिल है? |
व्युत्पन्न पदार्थ, मेटाबोलाइट्स, प्रतिक्रिया उत्पाद और अशुद्धियाँ। |
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धारा 21 स्पष्टीकरण (1) के अनुसार और क्या शामिल है? |
पर्यावरण से आने वाले अवशेष। |
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धारा 21 स्पष्टीकरण (2) के अनुसार "पशु चिकित्सा दवाओं के अवशेष" क्या है? |
खाद्य पशु उत्पादों में मूल यौगिक या मेटाबोलाइट्स। |
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धारा 21 स्पष्टीकरण (2) के अनुसार इसमें क्या शामिल है? |
संबद्ध अशुद्धियों के अवशेष। |
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धारा 22 का विषय क्या है? |
आनुवंशिक रूप से संशोधित, जैविक, कार्यात्मक आदि खाद्य पदार्थों का विनियमन। (Genetically modified foods, organic foods, functional foods, proprietary foods, etc.) |
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धारा 22 के अनुसार क्या निषिद्ध है? |
निर्दिष्ट खाद्य पदार्थों का निर्माण, वितरण, बिक्री या आयात। |
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धारा 22 के अनुसार किन खाद्य पदार्थों पर यह लागू है? |
नवीन, आनुवंशिक रूप से संशोधित, विकिरणित, जैविक, विशेष आहार, कार्यात्मक, न्यूट्रास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य पूरक और स्वामित्व वाले खाद्य पदार्थ। |
|
धारा 22 के अनुसार अपवाद क्या है? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और विनियमों में अन्यथा प्रावधान होने पर। |
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धारा 22 के अनुसार केंद्र सरकार क्या कर सकती है? |
अन्य खाद्य पदार्थों को अधिसूचित कर सकती है। |
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धारा 22 स्पष्टीकरण (1)(a) के अनुसार ऐसे खाद्य पदार्थ क्या हैं? |
विशेष शारीरिक या रोग संबंधी आवश्यकताओं के लिए तैयार खाद्य पदार्थ। |
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धारा 22 स्पष्टीकरण (1)(a) के अनुसार उनकी संरचना कैसी होगी? |
सामान्य खाद्य पदार्थों से भिन्न। |
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धारा 22 स्पष्टीकरण (1)(a) के अनुसार इनमें क्या शामिल हो सकता है? |
विभिन्न तत्व। |
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धारा 22 स्पष्टीकरण (1)(a)(i) के अनुसार क्या शामिल है? |
पौधे या उनके अर्क। |
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धारा 22 स्पष्टीकरण (1)(a)(ii) के अनुसार क्या शामिल है? |
खनिज, विटामिन, प्रोटीन, धातुएँ, अमीनो अम्ल या एंजाइम। |
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धारा 22 स्पष्टीकरण (1)(a)(iii) के अनुसार क्या शामिल है? |
पशु मूल के पदार्थ। |
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धारा 22 स्पष्टीकरण (1)(a)(iv) के अनुसार क्या शामिल है? |
आहार पूरक के रूप में प्रयुक्त पदार्थ। |
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धारा 22 स्पष्टीकरण (1)(b)(i) के अनुसार ऐसे उत्पाद की प्रकृति क्या है? |
पारंपरिक खाद्य के रूप में उपयोग हेतु प्रस्तुत नहीं किया जाता। |
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धारा 22 स्पष्टीकरण (1)(b)(i) के अनुसार उत्पाद किन रूपों में हो सकता है? |
पाउडर, दाने, गोलियां, कैप्सूल, तरल, जेली आदि। |
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धारा 22 स्पष्टीकरण (1)(b)(i) के अनुसार क्या निषिद्ध है? |
पैरेंटरल रूप। |
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धारा 22 स्पष्टीकरण (1)(b)(i) के अनुसार सेवन कैसे होता है? |
मौखिक सेवन। |
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धारा 22 स्पष्टीकरण (1)(b)(ii) के अनुसार क्या शामिल नहीं है? |
औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 की औषधियाँ। |
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धारा 22 स्पष्टीकरण (1)(b)(iii) के अनुसार क्या निषिद्ध है? |
रोग ठीक करने या कम करने का दावा। |
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धारा 22 स्पष्टीकरण (1)(b)(iii) के अनुसार अपवाद क्या है? |
कुछ स्वास्थ्य लाभ या प्रचार दावे। |
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धारा 22 स्पष्टीकरण (1)(b)(iv) के अनुसार क्या शामिल नहीं है? |
मादक औषधि या मनोरोगी पदार्थ। |
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धारा 22 स्पष्टीकरण (1)(b)(iv) के अनुसार किन अधिनियमों का संदर्भ है? |
NDPS Act, 1985 और Drugs Rules, 1945 की अनुसूचियां। |
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धारा 22 स्पष्टीकरण (2) के अनुसार GM खाद्य क्या है? |
जैव प्रौद्योगिकी से प्राप्त संशोधित जीवों से बने या उनसे उत्पादित खाद्य। |
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धारा 22 स्पष्टीकरण (3) के अनुसार जैविक खाद्य क्या है? |
निर्दिष्ट जैविक मानकों के अनुसार उत्पादित खाद्य। |
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धारा 22 स्पष्टीकरण (4) के अनुसार ऐसे खाद्य क्या हैं? |
जिनके लिए मानक निर्धारित नहीं हैं पर असुरक्षित नहीं हैं। |
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धारा 22 स्पष्टीकरण (4) के परन्तु के अनुसार क्या शर्त है? |
निषिद्ध पदार्थ शामिल नहीं होना चाहिए। |
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धारा 23 का विषय क्या है? |
खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग और लेबलिंग। (Packaging and labelling of foods) |
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धारा 23(1) के अनुसार क्या निषिद्ध है? |
बिना निर्धारित चिह्न और लेबल वाले पैकेटबंद खाद्य का निर्माण, वितरण, बिक्री या प्रदर्शन। |
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धारा 23(1) के अनुसार यह निषेध किन कार्यों पर लागू है? |
निर्माण, वितरण, बिक्री, प्रदर्शन तथा एजेंट/दलाल को भेजना। |
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धारा 23(1) के अनुसार लेबल कैसे होना चाहिए? |
नियमों द्वारा निर्दिष्ट तरीके से। |
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धारा 23(1) के परन्तु के अनुसार लेबल पर क्या नहीं होना चाहिए? |
भ्रामक, गलत या औषधीय/चिकित्सीय दावे। |
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धारा 23(1) के परन्तु के अनुसार किन बातों में भ्रामकता निषिद्ध है? |
मात्रा, पोषण मूल्य और मूल स्थान। |
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धारा 23(2) के अनुसार जिम्मेदारी किसकी है? |
खाद्य व्यवसाय संचालक की। |
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धारा 23(2) के अनुसार क्या सुनिश्चित किया जाएगा? |
लेबलिंग और प्रस्तुति उपभोक्ताओं को गुमराह न करे। |
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धारा 23(2) के अनुसार प्रस्तुति में क्या शामिल है? |
आकार, रूप, पैकेजिंग, व्यवस्था, प्रदर्शन और जानकारी। |
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धारा 24 का विषय क्या है? |
विज्ञापन पर प्रतिबंध और अनुचित व्यापार प्रथाओं पर रोक। (Restrictions of advertisement and prohibition as to unfair trade practices) |
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धारा 24(1) के अनुसार क्या निषिद्ध है? |
भ्रामक या छलपूर्ण खाद्य पदार्थों का विज्ञापन। |
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धारा 24(1) के अनुसार और क्या निषिद्ध है? |
अधिनियम, नियमों या विनियमों का उल्लंघन करने वाला विज्ञापन। |
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धारा 24(2) के अनुसार क्या निषिद्ध है? |
अनुचित या भ्रामक व्यापार प्रथाओं में संलग्न होना। |
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धारा 24(2) के अनुसार यह निषेध किन उद्देश्यों के लिए है? |
बिक्री, आपूर्ति, उपयोग और उपभोग को बढ़ावा देने हेतु। |
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धारा 24(2) के अनुसार अनुचित प्रथा में क्या शामिल है? |
मौखिक, लिखित या दृश्य प्रस्तुति द्वारा भ्रामक बयान। |
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धारा 24(2)(a) के अनुसार क्या निषिद्ध है? |
खाद्य को गलत रूप से मानक, गुणवत्ता, मात्रा या श्रेणी का बताना। |
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धारा 24(2)(b) के अनुसार क्या निषिद्ध है? |
आवश्यकता या उपयोगिता के संबंध में भ्रामक बयान। |
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धारा 24(2)(c) के अनुसार क्या निषिद्ध है? |
बिना वैज्ञानिक औचित्य के प्रभावकारिता की गारंटी देना। |
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धारा 24(2)(c) के परन्तु के अनुसार प्रमाण का भार किस पर है? |
बचाव उठाने वाले व्यक्ति पर। |
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अध्याय-V (CHAPTER-V) |
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खाद्य पदार्थों के आयात से संबंधित प्रावधान (PROVISIONS RELATING TO IMPORT) |
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अध्याय V का विषय क्या है? |
खाद्य पदार्थों के आयात से संबंधित प्रावधान। (Provisions Relating To Import) |
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धारा 25 का विषय क्या है? |
खाद्य पदार्थों के आयात पर नियंत्रण। (All imports of articles of food to be subject to this Act) |
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धारा 25 के अनुसार सभी आयात किसके अधीन होंगे? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अधीन। |
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धारा 25(1) के अनुसार क्या निषिद्ध है? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के विरुद्ध खाद्य पदार्थों का आयात। |
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धारा 25(1)(i) के अनुसार किन खाद्य पदार्थों का आयात निषिद्ध है? |
असुरक्षित, गलत लेबल वाला, निम्न गुणवत्ता या बाहरी पदार्थ युक्त भोजन। |
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धारा 25(1)(ii) के अनुसार क्या शर्त है? |
लाइसेंस आवश्यक होने पर लाइसेंस की शर्तों के अनुसार आयात। |
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धारा 25(1)(iii) के अनुसार क्या निषिद्ध है? |
अधिनियम, नियम, विनियम या अन्य अधिनियम के उल्लंघन में आयात। |
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धारा 25(2) के अनुसार केंद्र सरकार क्या करेगी? |
आयात को विनियमित करते समय खाद्य प्राधिकरण के मानकों का पालन। |
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धारा 25(2) के अनुसार यह किस अधिनियम के तहत होगा? |
विदेशी व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992। |
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अध्याय-VI (CHAPTER-VI) |
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खाद्य सुरक्षा के संबंध में विशेष उत्तरदायित्व (SPECIAL RESPONSIBILITIES AS TO FOOD SAFETY) |
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अध्याय VI का विषय क्या है? |
खाद्य सुरक्षा के संबंध में विशेष उत्तरदायित्व। (Special Responsibilities as to Food Safety) |
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धारा 26 का विषय क्या है? |
खाद्य व्यवसाय संचालक की जिम्मेदारियाँ। (Responsibilities of the Food business operator) |
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धारा 26(1) के अनुसार खाद्य व्यवसाय संचालक का कर्तव्य क्या है? |
सभी चरणों में खाद्य पदार्थों को अधिनियम व नियमों के अनुरूप रखना। |
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धारा 26(1) के अनुसार यह कर्तव्य किन चरणों पर लागू है? |
उत्पादन, प्रसंस्करण, आयात, वितरण और बिक्री। |
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धारा 26(2) के अनुसार क्या निषिद्ध है? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के विरुद्ध खाद्य पदार्थ का निर्माण, भंडारण, बिक्री या वितरण। |
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धारा 26(2) के अनुसार क्या निषिद्ध है? |
कोई भी खाद्य व्यवसाय संचालक स्वयं या अपनी ओर से किसी भी व्यक्ति के माध्यम से किसी भी खाद्य पदार्थ का निर्माण, भंडारण, बिक्री या वितरण नहीं करेगा। i. जो असुरक्षित है; या ii. जो गलत लेबल वाला हो, घटिया गुणवत्ता का हो या उसमें बाहरी पदार्थ मिला हो; या iii. जिसके लिए लाइसेंस आवश्यक है, सिवाय लाइसेंस की शर्तों के अनुसार; या iv. जो खाद्य प्राधिकरण या केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा जन स्वास्थ्य के हित में फिलहाल प्रतिबंधित है; या v. खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के किसी अन्य प्रावधान या इसके अंतर्गत बनाए गए किसी नियम या विनियम के उल्लंघन में। |
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धारा 26(3) के अनुसार क्या निषिद्ध है? |
संक्रामक या छूत की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को रोजगार देना। |
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धारा 26(4) के अनुसार विक्रेता को क्या देना आवश्यक है? |
खाद्य की प्रकृति और गुणवत्ता की लिखित गारंटी। |
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धारा 26(4) के अनुसार गारंटी किस रूप में होगी? |
नियमों द्वारा निर्दिष्ट प्रारूप में। |
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धारा 26(4) के परन्तु के अनुसार क्या गारंटी मानी जाएगी? |
बिल, कैश मेमो या इनवॉइस। |
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धारा 26(5) के अनुसार कब सभी खाद्य असुरक्षित माने जाएंगे? |
जब एक ही खेप/समूह में असुरक्षित खाद्य पाया जाए। |
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धारा 26(5) के अनुसार अपवाद क्या है? |
विस्तृत मूल्यांकन में शेष खाद्य सुरक्षित पाए जाएं। |
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धारा 26(5) के परन्तु के अनुसार क्या अधिकार सुरक्षित है? |
बाजार में बिक्री रोकने या खाद्य वापस लेने का अधिकार। |
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धारा 27 का विषय क्या है? |
निर्माताओं, पैकरों, थोक विक्रेताओं, वितरकों और विक्रेताओं की देयता। (Liability of manufacturers, packers, wholesalers, distributors and sellers) |
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धारा 27(1) के अनुसार कौन उत्तरदायी होगा? |
खाद्य पदार्थ का निर्माता या पैकर। |
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धारा 27(1) के अनुसार उत्तरदायित्व कब उत्पन्न होगा? |
जब खाद्य अधिनियम, नियमों और विनियमों की आवश्यकताओं को पूरा न करे। |
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धारा 27(2) के अनुसार कौन उत्तरदायी होगा? |
थोक विक्रेता या वितरक। |
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धारा 27(2)(a) के अनुसार उत्तरदायित्व कब होगा? |
समाप्ति तिथि के बाद आपूर्ति करने पर। |
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धारा 27(2)(b) के अनुसार उत्तरदायित्व कब होगा? |
निर्माता के सुरक्षा निर्देशों का उल्लंघन करने पर। |
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धारा 27(2)(c) के अनुसार उत्तरदायित्व कब होगा? |
असुरक्षित या गलत लेबल वाले खाद्य पर। |
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धारा 27(2)(d) के अनुसार उत्तरदायित्व कब होगा? |
निर्माता की पहचान न होने पर। |
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धारा 27(2)(e) के अनुसार उत्तरदायित्व कब होगा? |
अधिनियम, नियमों या विनियमों के उल्लंघन में संग्रहण या संभाल पर। |
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धारा 27(2)(f) के अनुसार उत्तरदायित्व कब होगा? |
असुरक्षित होने का ज्ञान होते हुए भी प्राप्त करने पर। |
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धारा 27(3) के अनुसार कौन उत्तरदायी होगा? |
विक्रेता। |
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धारा 27(3)(a) के अनुसार उत्तरदायित्व कब होगा? |
समाप्ति तिथि के बाद बिक्री पर। |
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धारा 27(3)(b) के अनुसार उत्तरदायित्व कब होगा? |
अस्वच्छ परिस्थितियों में संभालने या रखने पर। |
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धारा 27(3)(c) के अनुसार उत्तरदायित्व कब होगा? |
गलत लेबल लगे खाद्य पर। |
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धारा 27(3)(d) के अनुसार उत्तरदायित्व कब होगा? |
निर्माता या वितरक की पहचान न होने पर। |
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धारा 27(3)(e) के अनुसार उत्तरदायित्व कब होगा? |
असुरक्षित होने का ज्ञान होते हुए भी प्राप्त करने पर। |
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धारा 28 का विषय क्या है? |
खाद्य पदार्थों को वापस मंगाने की प्रक्रियाएँ। (Food recall procedures) |
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धारा 28(1) के अनुसार कब वापसी की प्रक्रिया शुरू होगी? |
जब खाद्य अधिनियम, नियम या विनियमों का अनुपालन न करे। |
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धारा 28(1) के अनुसार किसे कार्रवाई करनी होगी? |
खाद्य व्यवसाय संचालक। |
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धारा 28(1) के अनुसार क्या किया जाएगा? |
खाद्य पदार्थ को बाजार और उपभोक्ताओं से वापस लेना। |
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धारा 28(1) के अनुसार और क्या आवश्यक है? |
वापसी के कारण बताना और सक्षम अधिकारियों को सूचित करना। |
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धारा 28(2) के अनुसार कब सूचना दी जाएगी? |
जब खाद्य असुरक्षित होने की आशंका हो। |
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धारा 28(2) के अनुसार किसे सूचना दी जाएगी? |
सक्षम अधिकारियों को। |
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धारा 28(2) के अनुसार और क्या किया जाएगा? |
अधिकारियों के साथ सहयोग। |
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धारा 28(3) के अनुसार क्या जानकारी दी जाएगी? |
जोखिम रोकने हेतु उठाए गए कदमों की जानकारी। |
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धारा 28(3) के अनुसार क्या निषिद्ध है? |
अधिकारियों के साथ सहयोग से रोकना या हतोत्साहित करना। |
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धारा 28(4) के अनुसार क्या पालन करना होगा? |
खाद्य प्राधिकरण द्वारा निर्दिष्ट वापसी प्रक्रियाओं के दिशानिर्देश। |
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अध्याय-VII (CHAPTER-VII) |
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अधिनियम का प्रवर्तन (ENFORCEMENT OF THE ACT) |
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धारा 29 का विषय क्या है? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रवर्तन के लिए जिम्मेदार प्राधिकारी। (Authorities responsible for enforcement of Act) |
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धारा 29(1) के अनुसार प्रवर्तन के लिए कौन जिम्मेदार हैं? |
खाद्य प्राधिकरण और राज्य खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण। |
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धारा 29(2) के अनुसार क्या किया जाएगा? |
निगरानी और सत्यापन। |
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धारा 29(2) के अनुसार उद्देश्य क्या है? |
खाद्य व्यवसाय संचालकों द्वारा कानून का पालन सुनिश्चित करना। |
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धारा 29(3) के अनुसार अधिकारियों का कर्तव्य क्या है? |
नियंत्रण प्रणाली और निगरानी गतिविधियों को बनाए रखना। |
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धारा 29(3) के अनुसार इसमें क्या शामिल है? |
सार्वजनिक संचार, खाद्य सुरक्षा निगरानी और अन्य गतिविधियां। |
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धारा 29(4) के अनुसार खाद्य सुरक्षा अधिकारी क्या करेंगे? |
अपने क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों का प्रवर्तन। |
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धारा 29(4) के अनुसार यह कब लागू होगा? |
जब किसी अन्य प्राधिकरण पर कर्तव्य नहीं डाला गया हो। |
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धारा 29(5) के अनुसार क्या निर्धारित किया जाएगा? |
कौन से अधिकारी प्रवर्तन करेंगे। |
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धारा 29(5) के अनुसार किसके द्वारा निर्धारित किया जाएगा? |
विनियमों द्वारा। |
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धारा 29(5) के अनुसार क्या प्रावधान हो सकता है? |
प्राधिकरणों के बीच सहायता और सूचना का आदान-प्रदान। |
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धारा 29(6) के अनुसार किन्हें समान शक्तियां प्राप्त हैं? |
खाद्य सुरक्षा आयुक्त और नामित अधिकारी। |
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धारा 29(6) के अनुसार वे क्या पालन करेंगे? |
खाद्य सुरक्षा अधिकारी के समान प्रक्रिया। |
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धारा 30 का विषय क्या है? |
राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्त। (Commissioner of Food Safety of the State) |
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धारा 30(1) के अनुसार खाद्य सुरक्षा आयुक्त की नियुक्ति कौन करेगा? |
राज्य सरकार। |
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धारा 30(1) के अनुसार नियुक्ति का उद्देश्य क्या है? |
खाद्य सुरक्षा मानकों और आवश्यकताओं का कुशल कार्यान्वयन। |
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धारा 30(2) के अनुसार खाद्य सुरक्षा आयुक्त क्या करेगा? |
निर्दिष्ट कार्यों का निर्वहन। |
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धारा 30(2)(a) के अनुसार क्या शक्ति है? |
जनहित में खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण, वितरण या बिक्री पर प्रतिबंध लगाना। |
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धारा 30(2)(a) के अनुसार प्रतिबंध की अवधि क्या है? |
अधिकतम एक वर्ष। |
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धारा 30(2)(b) के अनुसार क्या कार्य है? |
औद्योगिक इकाइयों का सर्वेक्षण करना। |
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धारा 30(2)(b) के अनुसार उद्देश्य क्या है? |
मानकों के अनुपालन की जांच। |
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धारा 30(2)(c) के अनुसार क्या कार्य है? |
प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना। |
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धारा 30(2)(d) के अनुसार क्या सुनिश्चित किया जाएगा? |
मानकों का कुशल और समान कार्यान्वयन। |
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धारा 30(2)(d) के अनुसार किन गुणों को सुनिश्चित किया जाएगा? |
निष्पक्षता, जवाबदेही, पारदर्शिता आदि। |
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धारा 30(2)(e) के अनुसार क्या शक्ति है? |
कारावास योग्य अपराधों के लिए अभियोजन की मंजूरी देना। |
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धारा 30(2)(f) के अनुसार क्या कार्य है? |
राज्य सरकार द्वारा निर्धारित अन्य कार्य। |
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धारा 30(3) के अनुसार आयुक्त क्या कर सकता है? |
अपनी शक्तियों और कार्यों का प्रत्यायोजन। |
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धारा 30(3) के अनुसार किन शक्तियों का प्रत्यायोजन नहीं होगा? |
नामित अधिकारी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी और विश्लेषक की नियुक्ति। |
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धारा 31 का विषय क्या है? |
खाद्य व्यवसाय का लाइसेंस और पंजीकरण। (Licensing and registration of food business) |
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धारा 31(1) के अनुसार क्या अनिवार्य है? |
खाद्य व्यवसाय के लिए लाइसेंस। |
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धारा 31(1) के अनुसार क्या निषिद्ध है? |
बिना लाइसेंस खाद्य व्यवसाय शुरू या संचालित करना। |
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धारा 31(2) के अनुसार किस पर अपवाद लागू है? |
लघु निर्माता या सूक्ष्म खाद्य व्यवसाय संचालक। |
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धारा 31(2) के अनुसार किन-किन को शामिल किया गया है? |
खुदरा विक्रेता, फेरीवाला, घुमंतू विक्रेता, अस्थायी स्टॉल धारक आदि। |
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धारा 31(2) के अनुसार इनका क्या कर्तव्य है? |
विनियमों के अनुसार पंजीकरण कराना। |
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धारा 31(2) के अनुसार क्या सुनिश्चित होना चाहिए? |
सुरक्षित भोजन और उपभोक्ता हित प्रभावित न हों। |
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धारा 31(3) के अनुसार लाइसेंस हेतु आवेदन किसे दिया जाएगा? |
नामित अधिकारी को। |
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धारा 31(3) के अनुसार आवेदन में क्या शामिल होगा? |
विवरण और शुल्क। |
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धारा 31(4) के अनुसार नामित अधिकारी क्या कर सकता है? |
लाइसेंस देना या अस्वीकार करना। |
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धारा 31(4) के अनुसार अस्वीकृति कब होगी? |
जन स्वास्थ्य के हित में आवश्यक होने पर। |
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धारा 31(4) के अनुसार क्या आवश्यक है? |
सुनवाई का अवसर और लिखित कारण। |
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धारा 31(4) के अनुसार क्या प्रदान किया जाएगा? |
आदेश की प्रति। |
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धारा 31(4) के परन्तु के अनुसार कब व्यवसाय शुरू किया जा सकता है? |
दो महीने में निर्णय न होने पर। |
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धारा 31(4) के परन्तु के अनुसार अधिकारी क्या कर सकता है? |
धारा 32 के तहत सुधार नोटिस जारी। |
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धारा 31(5) के अनुसार लाइसेंस का स्वरूप और शर्तें कौन निर्धारित करेगा? |
विनियम। |
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धारा 31(6) के अनुसार एक लाइसेंस किसके लिए हो सकता है? |
एक या अधिक खाद्य पदार्थ और एक ही क्षेत्र के कई परिसर। |
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धारा 31(7) के अनुसार कब अलग लाइसेंस आवश्यक होगा? |
जब विभिन्न परिसर अलग-अलग क्षेत्रों में हों। |
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धारा 31(8) के अनुसार अपील कहाँ की जाएगी? |
खाद्य सुरक्षा आयुक्त के समक्ष। |
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धारा 31(9) के अनुसार लाइसेंस की वैधता क्या है? |
विनियमों द्वारा निर्दिष्ट अवधि तक। |
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धारा 31(9) के परन्तु के अनुसार नवीनीकरण आवेदन पर क्या होगा? |
निर्णय तक लाइसेंस लागू रहेगा। |
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धारा 31(10) के अनुसार मृत्यु के बाद लाइसेंस कितने समय तक वैध रहेगा? |
तीन महीने या अधिक अवधि। |
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धारा 32 का विषय क्या है? |
सुधार संबंधी सूचनाएँ (Improvement Notice) |
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धारा 32(1) के अनुसार सुधार नोटिस कब जारी होगा? |
जब नामित अधिकारी को नियमों के उल्लंघन का आधार मिले। |
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धारा 32(1) के अनुसार नोटिस किसे दिया जाएगा? |
खाद्य व्यवसाय संचालक को। |
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धारा 32(1)(a) के अनुसार क्या बताया जाएगा? |
उल्लंघन का आधार। |
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धारा 32(1)(b) के अनुसार क्या उल्लेख होगा? |
अनुपालन में विफलता के कारण। |
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धारा 32(1)(c) के अनुसार क्या निर्दिष्ट होगा? |
सुधार के लिए आवश्यक उपाय। |
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धारा 32(1)(d) के अनुसार समय सीमा क्या है? |
कम से कम 14 दिन। |
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धारा 32(2) के अनुसार अनुपालन न करने पर क्या होगा? |
लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है। |
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धारा 32(3) के अनुसार आगे क्या कार्रवाई हो सकती है? |
लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। |
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धारा 32(3) के अनुसार क्या आवश्यक है? |
कारण बताने का अवसर देना। |
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धारा 32(3) के परन्तु के अनुसार क्या किया जा सकता है? |
जनहित में तुरंत निलंबन। |
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धारा 32(4) के अनुसार अपील कब की जा सकती है? |
सुधार नोटिस, प्रमाण पत्र से इनकार, या लाइसेंस निलंबन/रद्द पर। |
|
धारा 32(4) के अनुसार अपील कहाँ होगी? |
खाद्य सुरक्षा आयुक्त के समक्ष। |
|
धारा 32(4) के अनुसार निर्णय कैसा होगा? |
अंतिम। |
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धारा 32(5)(a) के अनुसार अपील की समय सीमा क्या है? |
15 दिन। |
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धारा 32(5)(b) के अनुसार सुधार नोटिस के मामले में समय सीमा क्या है? |
निर्दिष्ट अवधि या 15 दिन, जो पहले हो। |
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धारा 32(5) के स्पष्टीकरण के अनुसार क्या माना जाएगा? |
शिकायत दर्ज करना ही अपील। |
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धारा 33 का विषय क्या है? |
निषेध आदेश। (Prohibition orders) |
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धारा 33(1) के अनुसार निषेध आदेश कब जारी होगा? |
जब खाद्य व्यवसाय संचालक दोषी पाया जाए और स्वास्थ्य जोखिम हो। |
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धारा 33(1) के अनुसार आदेश कौन जारी करेगा? |
न्यायालय। |
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धारा 33(1) के अनुसार क्या आवश्यक है? |
संचालक को सुनवाई का अवसर। |
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धारा 33(1)(i) के अनुसार क्या प्रतिबंध लगाया जा सकता है? |
प्रक्रिया या उपचार के उपयोग पर। |
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धारा 33(1)(ii) के अनुसार क्या प्रतिबंध लगाया जा सकता है? |
परिसर या उपकरण के उपयोग पर (विशिष्ट व्यवसाय हेतु)। |
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धारा 33(1)(iii) के अनुसार क्या प्रतिबंध लगाया जा सकता है? |
किसी भी खाद्य व्यवसाय हेतु परिसर/उपकरण के उपयोग पर। |
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धारा 33(2) के अनुसार क्या अतिरिक्त प्रतिबंध लगाया जा सकता है? |
व्यवसाय प्रबंधन में भाग लेने पर प्रतिबंध। |
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धारा 33(3)(a) के अनुसार खाद्य सुरक्षा अधिकारी क्या करेगा? |
आदेश की प्रति देना। |
|
धारा 33(3)(b) के अनुसार क्या किया जाएगा? |
परिसर में आदेश की प्रति चिपकाना। |
|
धारा 33(3) के अनुसार उल्लंघन का दंड क्या है? |
अधिकतम 3 लाख रुपये जुर्माना। |
|
धारा 33(4) के अनुसार प्रमाण पत्र कब दिया जाएगा? |
संतुष्ट होने पर 7 दिनों के भीतर। |
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धारा 33(4) के अनुसार यदि संतुष्ट न हो तो क्या होगा? |
14 दिनों में निर्णय और कारण बताना। |
|
धारा 33(5) के अनुसार निषेध आदेश कब समाप्त होगा? |
न्यायालय के संतुष्ट होने पर (कम से कम 6 माह बाद आवेदन पर)। |
|
धारा 33(6) के अनुसार न्यायालय कब निर्देश देगा? |
परिस्थितियों और आचरण के आधार पर। |
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धारा 33(6)(a) के अनुसार आवेदन कब नहीं माना जाएगा? |
6 महीने के भीतर। |
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धारा 33(6)(b) के अनुसार कब विचार नहीं होगा? |
पूर्व आवेदन के 3 महीने के भीतर। |
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धारा 33 स्पष्टीकरण (i) के अनुसार किस पर समान लागू होगा? |
खाद्य व्यवसाय के प्रबंधक पर। |
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धारा 33 स्पष्टीकरण (ii) के अनुसार "प्रबंधक" कौन है? |
दैनिक संचालन का दायित्व रखने वाला व्यक्ति। |
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धारा 34 का विषय क्या है? |
आपातकालीन निषेध सूचनाएँ एवं आदेश। (Emergency prohibition notices and orders) |
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धारा 34(1) के अनुसार आपातकालीन निषेध नोटिस कब जारी होगा? |
जब स्वास्थ्य जोखिम की स्थिति हो। |
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धारा 34(1) के अनुसार नोटिस कौन जारी करेगा? |
नामित अधिकारी। |
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धारा 34(1) के अनुसार आगे क्या किया जाएगा? |
खाद्य सुरक्षा आयुक्त से निषेध आदेश हेतु आवेदन। |
|
धारा 34(2) के अनुसार आदेश कौन जारी करेगा? |
खाद्य सुरक्षा आयुक्त। |
|
धारा 34(2) के अनुसार शर्त क्या है? |
स्वास्थ्य जोखिम की स्थिति से संतुष्ट होना। |
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धारा 34(3) के अनुसार आवेदन से पहले क्या आवश्यक है? |
कम से कम एक दिन पहले सूचना देना। |
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धारा 34(4) के अनुसार आदेश के बाद क्या किया जाएगा? |
प्रति देना या परिसर में चिपकाना। |
|
धारा 34(4)(a) के अनुसार क्या करना होगा? |
आदेश की प्रति संचालक को देना। |
|
धारा 34(4)(b) के अनुसार क्या करना होगा? |
परिसर में आदेश चिपकाना। |
|
धारा 34(4) के अनुसार उल्लंघन का दंड क्या है? |
2 वर्ष तक कारावास और 2 लाख रुपये तक जुर्माना। |
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धारा 34(5) के अनुसार आदेश कब समाप्त होगा? |
जब सुधार का प्रमाण पत्र जारी हो जाए। |
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धारा 34(6) के अनुसार प्रमाण पत्र कब दिया जाएगा? |
आवेदन के 7 दिनों के भीतर। |
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धारा 34(6) के अनुसार असंतुष्ट होने पर क्या होगा? |
10 दिनों में कारण बताकर नोटिस देना। |
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धारा 35 का विषय क्या है? |
खाद्य विषाक्तता की सूचना। (Notification of food poisoning) |
|
धारा 35 के अनुसार सूचना देने का निर्देश कौन दे सकता है? |
खाद्य प्राधिकरण। |
|
धारा 35 के अनुसार किसे सूचना देनी होगी? |
पंजीकृत चिकित्सा चिकित्सकों को। |
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धारा 35 के अनुसार सूचना किसके बारे में होगी? |
खाद्य विषाक्तता की घटनाओं के बारे में। |
|
धारा 35 के अनुसार सूचना किसे दी जाएगी? |
निर्दिष्ट अधिकारी को। |
|
धारा 35 के अनुसार यह निर्देश कैसे दिया जाएगा? |
अधिसूचना द्वारा। |
|
धारा 36 का विषय क्या है? |
नामित अधिकारी। (Designated Officer) |
|
धारा 36(1) के अनुसार नामित अधिकारी की नियुक्ति कौन करेगा? |
खाद्य सुरक्षा आयुक्त। |
|
धारा 36(1) के अनुसार अधिकारी का पद क्या होगा? |
उप-विभागीय अधिकारी से नीचे नहीं। |
|
धारा 36(1) के अनुसार उसे क्या जिम्मेदारी दी जाएगी? |
निर्दिष्ट क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा प्रशासन का प्रभारी। |
|
धारा 36(2) के अनुसार प्रत्येक जिले में कितने नामित अधिकारी होंगे? |
एक। |
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धारा 36(3) के अनुसार नामित अधिकारी के कार्य क्या हैं? |
विभिन्न प्रशासनिक और प्रवर्तन कार्य। |
|
धारा 36(3)(a) के अनुसार क्या कार्य है? |
लाइसेंस जारी करना या रद्द करना। |
|
धारा 36(3)(b) के अनुसार क्या कार्य है? |
उल्लंघन करने वाले खाद्य की बिक्री रोकना। |
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धारा 36(3)(c) के अनुसार क्या कार्य है? |
रिपोर्ट और नमूने प्राप्त कर विश्लेषण कराना। |
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धारा 36(3)(d) के अनुसार क्या कार्य है? |
अभियोजन की मंजूरी हेतु सिफारिश करना। |
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धारा 36(3)(e) के अनुसार क्या कार्य है? |
जुर्माने वाले मामलों में मंजूरी या अभियोग चलाना। |
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धारा 36(3)(f) के अनुसार क्या कार्य है? |
निरीक्षण और कार्रवाई का रिकॉर्ड रखना। |
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धारा 36(3)(g) के अनुसार क्या कार्य है? |
उल्लंघन संबंधी शिकायतों की जांच कराना। |
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धारा 36(3)(h) के अनुसार क्या कार्य है? |
खाद्य सुरक्षा अधिकारी के विरुद्ध शिकायत की जांच। |
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धारा 36(3)(i) के अनुसार क्या कार्य है? |
आयुक्त द्वारा सौंपे गए अन्य कार्य करना। |
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धारा 37 का विषय क्या है? |
खाद्य सुरक्षा अधिकारी। (Food Safety Officer) |
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धारा 37(1) के अनुसार खाद्य सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति कौन करेगा? |
खाद्य सुरक्षा आयुक्त। |
|
धारा 37(1) के अनुसार नियुक्ति कैसे होगी? |
अधिसूचना द्वारा। |
|
धारा 37(1) के अनुसार किन व्यक्तियों को नियुक्त किया जाएगा? |
योग्यताधारी उपयुक्त व्यक्तियों को। |
|
धारा 37(1) के अनुसार योग्यताएँ कौन निर्धारित करेगा? |
केंद्र सरकार। |
|
धारा 37(1) के अनुसार नियुक्ति का क्षेत्र क्या होगा? |
निर्दिष्ट स्थानीय क्षेत्र। |
|
धारा 37(1) के अनुसार उद्देश्य क्या है? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 व नियमों के कार्यों का निष्पादन। |
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धारा 37(2) के अनुसार राज्य सरकार क्या कर सकती है? |
अपने अधिकारी को खाद्य सुरक्षा अधिकारी के रूप में अधिकृत करना। |
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धारा 37(2) के अनुसार शर्त क्या है? |
निर्धारित योग्यता होना। |
|
धारा 37(2) के अनुसार अधिकार क्षेत्र क्या होगा? |
निर्दिष्ट क्षेत्राधिकार। |
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धारा 38 का विषय क्या है? |
खाद्य सुरक्षा अधिकारी की शक्तियाँ। (Powers of Food Safety Officer) |
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धारा 38(1) के अनुसार खाद्य सुरक्षा अधिकारी क्या कर सकता है? |
नमूना लेना, जब्त करना और सुरक्षित रखना। |
|
धारा 38(1)(a)(i) के अनुसार नमूना किसका लिया जा सकता है? |
बिक्री हेतु या मानव उपभोग हेतु खाद्य पदार्थ का। |
|
धारा 38(1)(a)(ii) के अनुसार नमूना कहाँ से लिया जा सकता है? |
किसी परिसर में पाए गए खाद्य या पदार्थ से। |
|
धारा 38(1)(a) के अनुसार नमूना क्यों लिया जाता है? |
साक्ष्य के रूप में उपयोग हेतु। |
|
धारा 38(1)(b) के अनुसार क्या जब्त किया जा सकता है? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 का उल्लंघन करता हुआ खाद्य पदार्थ। |
|
धारा 38(1)(c) के अनुसार नमूने के बाद क्या किया जाएगा? |
खाद्य पदार्थ को सुरक्षित हिरासत में रखना। |
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धारा 38(1) के अनुसार नमूना कहाँ भेजा जाएगा? |
संबंधित क्षेत्र के खाद्य विश्लेषक के पास। |
|
धारा 38(1) के परन्तु के अनुसार क्या मांग की जा सकती है? |
वस्तु के मूल्य के बराबर बांड। |
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धारा 38(1) के परन्तु के अनुसार बांड में क्या शामिल होगा? |
एक या अधिक जमानतदार। |
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धारा 38(2) के अनुसार खाद्य सुरक्षा अधिकारी क्या कर सकता है? |
प्रवेश और निरीक्षण। |
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धारा 38(2) के अनुसार किन स्थानों में प्रवेश किया जा सकता है? |
निर्माण, भंडारण या बिक्री के स्थान। |
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धारा 38(2) के अनुसार क्या लिया जा सकता है? |
खाद्य पदार्थ या मिलावट के नमूने। |
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धारा 38(3) के अनुसार नमूने का मूल्य किसे दिया जाएगा? |
जिससे नमूना लिया गया है। |
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धारा 38(3) के अनुसार मूल्य कैसे निर्धारित होगा? |
बाजार में बिक्री दर के आधार पर। |
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धारा 38(4) के अनुसार नाशवान खाद्य के साथ क्या किया जा सकता है? |
उसे नष्ट किया जा सकता है। |
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धारा 38(4) के अनुसार शर्त क्या है? |
वह मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त हो। |
|
धारा 38(4) के अनुसार क्या आवश्यक है? |
खाद्य व्यवसाय संचालक को लिखित नोटिस। |
|
धारा 38(5) के अनुसार किन प्रावधानों का पालन किया जाएगा? |
दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973/ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के तलाशी संबंधी प्रावधान। |
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धारा 38(6) के अनुसार क्या जब्त किया जा सकता है? |
मिलावटी पदार्थ, लेखा-पुस्तकें और दस्तावेज। |
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धारा 38(6) के अनुसार कब जब्त किया जाएगा? |
जब संतोषजनक स्पष्टीकरण न दिया जाए। |
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धारा 38(6) के अनुसार नमूना कहाँ भेजा जाएगा? |
खाद्य विश्लेषक के पास। |
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धारा 38(6) के परन्तु के अनुसार क्या आवश्यक है? |
उच्च प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति। |
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धारा 38(7) के अनुसार कार्रवाई के समय क्या किया जाएगा? |
गवाह बुलाना और हस्ताक्षर लेना। |
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धारा 38(8) के अनुसार दस्तावेज कब लौटाए जाएंगे? |
30 दिनों के भीतर। |
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धारा 38(8) के अनुसार क्या शर्त है? |
प्रमाणित प्रतियां देना। |
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धारा 38(8) के परन्तु के अनुसार कब न्यायालय द्वारा लौटाए जाएंगे? |
जब प्रमाणन से इंकार और अभियोग हो। |
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धारा 38(9) के अनुसार प्रमाण का भार किस पर है? |
जिस व्यक्ति से मिलावट जब्त हुई है। |
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धारा 38(10) के अनुसार कौन दिशानिर्देश जारी करेगा? |
खाद्य सुरक्षा आयुक्त। |
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धारा 38(10) के अनुसार दिशानिर्देश की प्रकृति क्या है? |
बाध्यकारी। |
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धारा 38(10) के परन्तु के अनुसार क्या किया जा सकता है? |
अधिकारी की शक्तियाँ अस्थायी रूप से रद्द की जा सकती हैं। |
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धारा 39 का विषय क्या है? |
कुछ मामलों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी का दायित्व। (Liability of Food Safety Officer in certain cases) |
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धारा 39 के अनुसार कब अधिकारी दोषी होगा? |
जब वह शक्तियों का दुरुपयोग करे। |
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धारा 39(a) के अनुसार क्या दोष है? |
बिना उचित कारण के जब्ती करना। |
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धारा 39(a) के अनुसार और क्या तत्व है? |
किसी को परेशान करना। |
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धारा 39(b) के अनुसार क्या दोष है? |
बिना उचित विश्वास के हानि पहुँचाने वाला कार्य करना। |
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धारा 39 के अनुसार दंड क्या है? |
अधिकतम 1 लाख रुपये जुर्माना। |
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धारा 39 के परन्तु के अनुसार कब शिकायतकर्ता दोषी होगा? |
जब शिकायत झूठी सिद्ध हो। |
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धारा 39 के परन्तु के अनुसार शिकायतकर्ता पर दंड क्या है? |
50,000 से 1 लाख रुपये तक जुर्माना। |
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धारा 40 का विषय क्या है? |
क्रेता द्वारा खाद्य पदार्थ का विश्लेषण। (Purchaser may have food analysed) |
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धारा 40(1) के अनुसार कौन विश्लेषण करवा सकता है? |
खाद्य पदार्थ का कोई भी क्रेता। |
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धारा 40(1) के अनुसार विश्लेषण कौन करेगा? |
खाद्य विश्लेषक। |
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धारा 40(1) के अनुसार क्या आवश्यक है? |
निर्धारित शुल्क का भुगतान। |
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धारा 40(1) के अनुसार रिपोर्ट कब मिलेगी? |
विनियमों में निर्दिष्ट अवधि के भीतर। |
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धारा 40(1) के परन्तु के अनुसार क्या सूचना देनी होगी? |
खरीद के समय विक्रेता को विश्लेषण की सूचना। |
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धारा 40(1) के अनुसार कब शुल्क वापस मिलेगा? |
जब खाद्य खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अनुरूप न हो। |
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धारा 40(2) के अनुसार उल्लंघन मिलने पर क्या होगा? |
रिपोर्ट नामित अधिकारी को भेजी जाएगी। |
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धारा 41 का विषय क्या है? |
तलाशी, ज़ब्ती, जांच, अभियोजन और उनकी प्रक्रिया। (Power of search, seizure, investigation, prosecution and procedure thereof) |
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धारा 41(1) के अनुसार खाद्य सुरक्षा अधिकारी क्या कर सकता है? |
तलाशी लेना और खाद्य/मिलावटी पदार्थ जब्त करना। |
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धारा 41(1) के अनुसार कब कार्रवाई की जा सकती है? |
जब अपराध में शामिल होने का उचित संदेह हो। |
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धारा 41(1) के अनुसार बाद में क्या करना होगा? |
नामित अधिकारी को लिखित सूचना देना। |
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धारा 41(1) के परन्तु के अनुसार क्या नियम है? |
गवाह स्थानीय न होने पर भी तलाशी वैध होगी। |
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धारा 41(2) के अनुसार किन प्रावधानों का पालन होगा? |
दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973/ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के प्रावधान। |
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धारा 41(2) के अनुसार ये प्रावधान किन विषयों पर लागू होंगे? |
तलाशी, ज़ब्ती, समन, जांच और अभियोजन। |
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धारा 42 का विषय क्या है? |
अभियोग चलाने की प्रक्रिया। (Procedure for launching prosecution) |
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धारा 42(1) के अनुसार खाद्य सुरक्षा अधिकारी का कार्य क्या है? |
निरीक्षण, नमूना लेना और विश्लेषण हेतु भेजना। |
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धारा 42(2) के अनुसार खाद्य विश्लेषक क्या करेगा? |
नमूने का विश्लेषण। |
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धारा 42(2) के अनुसार रिपोर्ट कब भेजी जाएगी? |
14 दिनों के भीतर। |
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धारा 42(2) के अनुसार रिपोर्ट किसे भेजी जाएगी? |
नामित अधिकारी को। |
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धारा 42(2) के अनुसार रिपोर्ट की प्रति किसे जाएगी? |
खाद्य सुरक्षा आयुक्त को। |
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धारा 42(3) के अनुसार नामित अधिकारी क्या करेगा? |
रिपोर्ट की जांच और निर्णय। |
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धारा 42(3) के अनुसार निर्णय किस बारे में होगा? |
अपराध कारावास योग्य है या केवल जुर्माना योग्य। |
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धारा 42(3) के अनुसार कारावास योग्य मामलों में क्या होगा? |
14 दिनों में आयुक्त को सिफारिश। |
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धारा 42(4) के अनुसार निर्णय कौन करेगा? |
खाद्य सुरक्षा आयुक्त। |
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धारा 42(4) के अनुसार निर्णय किस आधार पर होगा? |
अपराध की गंभीरता। |
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धारा 42(4)(a) के अनुसार 3 वर्ष तक सजा वाले मामले कहाँ जाएंगे? |
सामान्य न्यायालय। |
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धारा 42(4)(b) के अनुसार 3 वर्ष से अधिक सजा वाले मामले कहाँ जाएंगे? |
विशेष न्यायालय। |
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धारा 42(4)(b) के अनुसार यदि विशेष न्यायालय न हो तो? |
सामान्य न्यायालय में सुनवाई। |
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धारा 42(5) के अनुसार आयुक्त क्या करेगा? |
निर्णय की सूचना देना। |
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धारा 42(5) के अनुसार सूचना किसे दी जाएगी? |
नामित अधिकारी और खाद्य सुरक्षा अधिकारी। |
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धारा 42(5) के अनुसार अभियोजन कौन चलाएगा? |
खाद्य सुरक्षा अधिकारी। |
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धारा 42(5) के अनुसार यदि नमूना धारा 40 के तहत हो तो सूचना किसे जाएगी? |
क्रेता को। |
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अध्याय-VIII (CHAPTER-VIII) |
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भोजन का विश्लेषण (ANALYSIS OF FOOD) |
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अध्याय VIII का विषय क्या है? |
भोजन का विश्लेषण। (Analysis of Food) |
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धारा 43 का विषय क्या है? |
प्रयोगशालाओं और अनुसंधान संस्थानों की मान्यता एवं प्रत्यायन। (Recognition and accreditation of laboratories, research institutions and referral food laboratory) |
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धारा 43(1) के अनुसार कौन अधिसूचना जारी करेगा? |
खाद्य प्राधिकरण। |
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धारा 43(1) के अनुसार किन्हें अधिसूचित किया जाएगा? |
मान्यता प्राप्त खाद्य प्रयोगशालाएं और अनुसंधान संस्थान। |
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धारा 43(1) के अनुसार मान्यता किसके द्वारा होगी? |
राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड या अन्य एजेंसी। |
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धारा 43(1) के अनुसार उद्देश्य क्या है? |
नमूनों का विश्लेषण। |
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धारा 43(2) के अनुसार क्या स्थापित या मान्यता दी जाएगी? |
संदर्भ (रेफरल) खाद्य प्रयोगशालाएं। |
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धारा 43(2) के अनुसार यह किस उद्देश्य से होगा? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत कार्यों के निष्पादन हेतु। |
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धारा 43(3) के अनुसार कौन नियम बनाएगा? |
खाद्य प्राधिकरण। |
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धारा 43(3)(a) के अनुसार क्या निर्धारित किया जाएगा? |
प्रयोगशालाओं के कार्य और क्षेत्राधिकार। |
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धारा 43(3)(b) के अनुसार क्या निर्धारित किया जाएगा? |
नमूना भेजने की प्रक्रिया, रिपोर्ट प्रारूप और शुल्क। |
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धारा 43(3)(c) के अनुसार क्या निर्धारित किया जाएगा? |
अन्य आवश्यक या उपयुक्त विषय। |
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धारा 44 का विषय क्या है? |
खाद्य सुरक्षा लेखापरीक्षा हेतु संगठन/एजेंसी की मान्यता। (Recognition of organisation or agency for food safety audit) |
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धारा 44 के अनुसार मान्यता कौन देगा? |
खाद्य प्राधिकरण। |
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धारा 44 के अनुसार किन्हें मान्यता दी जाएगी? |
संगठन या एजेंसी। |
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धारा 44 के अनुसार मान्यता का उद्देश्य क्या है? |
खाद्य सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली के अनुपालन की जांच। |
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धारा 44 के अनुसार और क्या उद्देश्य है? |
खाद्य सुरक्षा लेखापरीक्षा करना। |
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धारा 45 का विषय क्या है? |
खाद्य विश्लेषक। (Food Analysts) |
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धारा 45 के अनुसार खाद्य विश्लेषक की नियुक्ति कौन करेगा? |
खाद्य सुरक्षा आयुक्त। |
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धारा 45 के अनुसार नियुक्ति कैसे होगी? |
अधिसूचना द्वारा। |
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धारा 45 के अनुसार किन व्यक्तियों को नियुक्त किया जाएगा? |
योग्यताधारी उपयुक्त व्यक्तियों को। |
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धारा 45 के अनुसार योग्यताएँ कौन निर्धारित करेगा? |
केंद्र सरकार। |
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धारा 45 के अनुसार नियुक्ति किस क्षेत्र के लिए होगी? |
निर्दिष्ट स्थानीय क्षेत्र। |
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धारा 45 के परन्तु के अनुसार कौन नियुक्त नहीं होगा? |
जिसका खाद्य निर्माण/बिक्री में वित्तीय हित हो। |
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धारा 45 के अनुसार क्या संभव है? |
विभिन्न खाद्य पदार्थों के लिए अलग-अलग विश्लेषक नियुक्त करना। |
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धारा 46 का विषय क्या है? |
खाद्य विश्लेषक के कार्य। (Functions of Food Analyst) |
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धारा 46(1) के अनुसार खाद्य विश्लेषक क्या करेगा? |
नमूने की सील और चिन्हों की जांच। |
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धारा 46(1) के अनुसार क्या तुलना की जाएगी? |
कंटेनर की सील और नमूने के निशान। |
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धारा 46(1) के अनुसार यदि नमूना अनुपयुक्त हो तो क्या होगा? |
7 दिनों में नामित अधिकारी को सूचना। |
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धारा 46(1) के अनुसार आगे क्या अनुरोध किया जाएगा? |
नमूने का दूसरा भाग भेजने का। |
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धारा 46(2) के अनुसार खाद्य विश्लेषक क्या करेगा? |
प्राप्त नमूनों का विश्लेषण। |
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धारा 46(3) के अनुसार रिपोर्ट कब भेजी जाएगी? |
14 दिनों के भीतर। |
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धारा 46(3)(i) के अनुसार रिपोर्ट किसे भेजी जाएगी? |
नामित अधिकारी को (चार प्रतियां)। |
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धारा 46(3)(ii) के अनुसार धारा 40 के नमूने में रिपोर्ट किसे दी जाएगी? |
क्रेता और नामित अधिकारी को। |
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धारा 46(3) के अनुसार रिपोर्ट में क्या होगा? |
नमूना लेने और विश्लेषण की विधि। |
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धारा 46(3) के परन्तु के अनुसार देरी होने पर क्या होगा? |
कारण और समय बताकर सूचना देना। |
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धारा 46(4) के अनुसार अपील कहाँ की जाएगी? |
नामित अधिकारी के समक्ष। |
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धारा 46(4) के अनुसार आगे क्या हो सकता है? |
मामला रेफरल खाद्य प्रयोगशाला को भेजा जा सकता है। |
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धारा 47 का विषय क्या है? |
नमूनाकरण और विश्लेषण। (Sampling and analysis) |
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धारा 47(1)(a) के अनुसार क्या किया जाएगा? |
नमूना लेने की सूचना संबंधित व्यक्ति को देना। |
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धारा 47(1)(b) के अनुसार नमूना कैसे विभाजित होगा? |
चार भागों में। |
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धारा 47(1)(b) के अनुसार क्या किया जाएगा? |
प्रत्येक भाग को चिह्नित और सील किया जाएगा। |
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धारा 47(1)(b) के अनुसार हस्ताक्षर किसके लिए होंगे? |
जिससे नमूना लिया गया है। |
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धारा 47(1)(b) के परन्तु के अनुसार यदि व्यक्ति मना करे तो क्या होगा? |
गवाहों के हस्ताक्षर लिए जाएंगे। |
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धारा 47(1)(c)(i) के अनुसार एक भाग कहाँ भेजा जाएगा? |
खाद्य विश्लेषक को। |
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धारा 47(1)(c)(ii) के अनुसार दो भाग कहाँ भेजे जाएंगे? |
नामित अधिकारी के पास सुरक्षित रखने हेतु। |
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धारा 47(1)(c)(iii) के अनुसार शेष भाग कहाँ भेजा जा सकता है? |
मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में (अनुरोध पर)। |
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धारा 47(1) के परन्तु के अनुसार भिन्न रिपोर्ट होने पर क्या होगा? |
नमूना रेफरल प्रयोगशाला को भेजा जाएगा। |
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धारा 47(2) के अनुसार नमूना कब भेजा जाएगा? |
अगले कार्य दिवस तक। |
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धारा 47(3) के अनुसार नमूना खोने/क्षति पर क्या होगा? |
अन्य भाग विश्लेषण हेतु भेजा जाएगा। |
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धारा 47(4) के अनुसार जब्त सामग्री कब प्रस्तुत होगी? |
रिपोर्ट मिलने के 7 दिनों के भीतर। |
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धारा 47(4) के परन्तु के अनुसार क्या किया जा सकता है? |
आवेदन पर प्रस्तुत करने का आदेश। |
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धारा 47(5) के अनुसार आयातित खाद्य का नमूना कौन लेगा? |
अधिकृत अधिकारी। |
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धारा 47(5) के अनुसार रिपोर्ट कब दी जाएगी? |
5 दिनों के भीतर। |
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धारा 47(6) के अनुसार कौन प्रक्रिया का पालन करेंगे? |
नामित अधिकारी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, अधिकृत अधिकारी और खाद्य विश्लेषक। |
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अध्याय-IX (CHAPTER-IX) |
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अपराध और दंड (OFFENCES AND PENALTIES) |
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अध्याय 9 का विषय क्या है? |
अपराध और दंड। (Offences and Penalties) |
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धारा 48 का विषय क्या है? |
अपराधों से संबंधित सामान्य प्रावधान। (General provisions relating to offences) |
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धारा 48(1) के अनुसार खाद्य को हानिकारक बनाने के तरीके क्या हैं? |
मिलाना, उपयोग करना, अलग करना या प्रक्रिया करना। |
|
धारा 48(1)(a) के अनुसार क्या किया जाता है? |
भोजन में पदार्थ मिलाना। |
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धारा 48(1)(b) के अनुसार क्या किया जाता है? |
भोजन तैयार करने में पदार्थ का उपयोग। |
|
धारा 48(1)(c) के अनुसार क्या किया जाता है? |
भोजन से घटक हटाना। |
|
धारा 48(1)(d) के अनुसार क्या किया जाता है? |
भोजन को प्रक्रिया/उपचार देना। |
|
धारा 48(1) के अनुसार शर्त क्या है? |
बिक्री या उपभोग हेतु जानकारी होना। |
|
धारा 48(2) के अनुसार क्या निर्धारित किया जाता है? |
खाद्य असुरक्षित या हानिकारक है या नहीं। |
|
धारा 48(2)(a)(i) के अनुसार क्या देखा जाएगा? |
उपयोग की सामान्य स्थितियाँ और प्रबंधन। |
|
धारा 48(2)(a)(ii) के अनुसार क्या देखा जाएगा? |
उपभोक्ता को दी गई जानकारी और प्रभाव। |
|
धारा 48(2)(a)(iii) के अनुसार क्या देखा जाएगा? |
संचयी विषाक्त प्रभाव। |
|
धारा 48(2)(a)(iv) के अनुसार क्या देखा जाएगा? |
विशेष उपभोक्ता समूह की संवेदनशीलता। |
|
धारा 48(2)(a)(v) के अनुसार क्या देखा जाएगा? |
समान खाद्य के संचयी प्रभाव। |
|
धारा 48(2)(b) के अनुसार कब खाद्य असुरक्षित नहीं माना जाएगा? |
जब कमी प्राकृतिक कारणों से हो। |
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धारा 48 स्पष्टीकरण के अनुसार "चोट" का अर्थ क्या है? |
स्थायी या अस्थायी हानि। |
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धारा 48 स्पष्टीकरण के अनुसार "स्वास्थ्य के लिए हानिकारक" का अर्थ क्या है? |
चोट पहुँचाने वाला। |
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धारा 49 का विषय क्या है? |
दंड से संबंधित सामान्य प्रावधान। (General provisions relating to penalty) |
|
धारा 49 के अनुसार दंड निर्धारित कौन करेगा? |
निर्णय अधिकारी या न्यायाधिकरण। |
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धारा 49 के अनुसार किन बातों का ध्यान रखा जाएगा? |
अध्याय 9 के अंतर्गत दंड की मात्रा निर्धारित करते समय, निर्णय अधिकारी या न्यायाधिकरण, जैसा भी मामला हो, निम्नलिखित बातों का ध्यान रखेगा:- उल्लंघन के परिणामस्वरूप प्राप्त लाभ या अनुचित लाभ की राशि, जहाँ भी इसे मापा जा सके, उल्लंघन के परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति को हुई या होने की संभावना वाली हानि की राशि, उल्लंघन की पुनरावृत्ति प्रकृति, चाहे उल्लंघन उसकी जानकारी के बिना हुआ हो, और कोई अन्य प्रासंगिक कारक। |
|
धारा 50 का विषय क्या है? |
वांछित गुणवत्ता का भोजन न बेचने पर दंड। (Penalty for selling food not of the nature or substance or quality demanded) |
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धारा 50 के अनुसार कब दंड लगेगा? |
जब भोजन खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 या अपेक्षित गुणवत्ता के अनुरूप न हो। |
|
धारा 50 के अनुसार किस पर लागू होगा? |
खाद्य पदार्थ बेचने वाले व्यक्ति पर। |
|
धारा 50 के अनुसार अधिकतम जुर्माना कितना है? |
2 लाख रुपये। |
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धारा 50 के परन्तु के अनुसार किन पर विशेष प्रावधान है? |
धारा 31(2) के अंतर्गत आने वाले व्यक्ति। |
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धारा 50 के परन्तु के अनुसार उनका जुर्माना कितना है? |
25,000 रुपये तक। |
|
धारा 51 का विषय क्या है? |
घटिया (निम्न गुणवत्ता) भोजन के लिए जुर्माना। (Penalty for sub-standard food) |
|
धारा 51 के अनुसार कब दंड लगेगा? |
जब निम्न गुणवत्ता का भोजन बनाया, बेचा, वितरित या आयात किया जाए। |
|
धारा 51 के अनुसार यह किन कार्यों पर लागू है? |
निर्माण, भंडारण, बिक्री, वितरण और आयात। |
|
धारा 51 के अनुसार यह किसके लिए है? |
मानव उपभोग हेतु खाद्य पदार्थ। |
|
धारा 51 के अनुसार अधिकतम जुर्माना कितना है? |
5 लाख रुपये। |
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धारा 52 का विषय क्या है? |
गलत लेबल वाले खाद्य पदार्थों के लिए जुर्माना। (Penalty for misbranded food) |
|
धारा 52(1) के अनुसार कब दंड लगेगा? |
जब गलत लेबल वाला खाद्य पदार्थ बनाया, बेचा या आयात किया जाए। |
|
धारा 52(1) के अनुसार किन कार्यों पर लागू है? |
निर्माण, भंडारण, बिक्री, वितरण और आयात। |
|
धारा 52(1) के अनुसार अधिकतम जुर्माना कितना है? |
3 लाख रुपये। |
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धारा 52(2) के अनुसार कौन निर्देश दे सकता है? |
निर्णय अधिकारी। |
|
धारा 52(2) के अनुसार क्या निर्देश दिया जा सकता है? |
सुधारात्मक कार्रवाई करने का। |
|
धारा 52(2) के अनुसार पालन न करने पर क्या होगा? |
खाद्य पदार्थ नष्ट कर दिया जाएगा। |
|
धारा 53 का विषय क्या है? |
भ्रामक विज्ञापन के लिए दंड। (Penalty for misleading advertisement) |
|
धारा 53(1) के अनुसार कब दंड लगेगा? |
जब भ्रामक या गलत विज्ञापन किया जाए। |
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धारा 53(1)(a) के अनुसार क्या दोष है? |
खाद्य पदार्थ का गलत वर्णन। |
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धारा 53(1)(b) के अनुसार क्या दोष है? |
प्रकृति/गुणवत्ता के बारे में गुमराह करना या झूठी गारंटी देना। |
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धारा 53(1) के अनुसार अधिकतम जुर्माना कितना है? |
10 लाख रुपये। |
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धारा 53(2) के अनुसार क्या बात बचाव नहीं मानी जाएगी? |
लेबल में सही विवरण होने पर भी। |
|
धारा 54 का विषय क्या है? |
भोजन में बाहरी पदार्थ मिलाने पर दंड। (Penalty for food containing extraneous matter) |
|
धारा 54 के अनुसार कब दंड लगेगा? |
जब खाद्य पदार्थ में बाहरी पदार्थ मौजूद हों। |
|
धारा 54 के अनुसार किन कार्यों पर लागू है? |
निर्माण, भंडारण, बिक्री, वितरण और आयात। |
|
धारा 54 के अनुसार यह किसके लिए है? |
मानव उपभोग हेतु खाद्य पदार्थ। |
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धारा 54 के अनुसार अधिकतम जुर्माना कितना है? |
1 लाख रुपये। |
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धारा 55 का विषय क्या है? |
खाद्य सुरक्षा अधिकारी के निर्देशों का पालन न करने पर दंड। (Penalty for failure to comply with the directions of Food Safety Officer) |
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धारा 55 के अनुसार कब दंड लगेगा? |
जब निर्देशों का पालन न किया जाए। |
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धारा 55 के अनुसार किन पर लागू है? |
खाद्य व्यवसाय संचालक या आयातक। |
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धारा 55 के अनुसार शर्त क्या है? |
बिना उचित कारण अनुपालन में विफलता। |
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धारा 55 के अनुसार अधिकतम जुर्माना कितना है? |
2 लाख रुपये। |
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धारा 56 का विषय क्या है? |
अस्वच्छ/अस्वास्थ्यकर तरीके से खाद्य उत्पादन पर दंड। (Penalty for unhygienic or unsanitary processing or manufacturing of food) |
|
धारा 56 के अनुसार कब दंड लगेगा? |
जब अस्वच्छ या अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में खाद्य बनाया/प्रसंस्कृत किया जाए। |
|
धारा 56 के अनुसार यह किन कार्यों पर लागू है? |
निर्माण और प्रसंस्करण। |
|
धारा 56 के अनुसार यह किसके लिए है? |
मानव उपभोग हेतु खाद्य पदार्थ। |
|
धारा 56 के अनुसार अधिकतम जुर्माना कितना है? |
1 लाख रुपये। |
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धारा 57 का विषय क्या है? |
मिलावटी पदार्थ रखने पर दंड। (Penalty for possessing adulterant) |
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धारा 57(1) के अनुसार कब दंड लगेगा? |
जब मिलावटी पदार्थ का आयात, निर्माण, भंडारण, बिक्री या वितरण किया जाए। |
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धारा 57(1)(i) के अनुसार कब कम दंड होगा? |
जब मिलावट स्वास्थ्य के लिए हानिकारक न हो। |
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धारा 57(1)(i) के अनुसार अधिकतम जुर्माना कितना है? |
2 लाख रुपये। |
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धारा 57(1)(ii) के अनुसार कब अधिक दंड होगा? |
जब मिलावट स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो। |
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धारा 57(1)(ii) के अनुसार अधिकतम जुर्माना कितना है? |
10 लाख रुपये। |
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धारा 57(2) के अनुसार कौन-सा बचाव मान्य नहीं है? |
कि आरोपी किसी अन्य की ओर से पदार्थ रख रहा था। |
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धारा 58 का विषय क्या है? |
अन्य उल्लंघनों के लिए सामान्य दंड। (Penalty for contraventions for which no specific penalty is provided) |
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धारा 58 के अनुसार कब दंड लगेगा? |
जब उल्लंघन के लिए अलग से दंड निर्धारित न हो। |
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धारा 58 के अनुसार किन पर लागू है? |
अधिनियम, नियम या विनियम का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति पर। |
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धारा 58 के अनुसार अधिकतम जुर्माना कितना है? |
2 लाख रुपये। |
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धारा 59 का विषय क्या है? |
असुरक्षित भोजन के लिए दंड। (Punishment for unsafe food) |
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धारा 59 के अनुसार कब दंड लगेगा? |
जब असुरक्षित खाद्य का निर्माण, बिक्री, वितरण या आयात किया जाए। |
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धारा 59 के अनुसार यह किन कार्यों पर लागू है? |
निर्माण, भंडारण, बिक्री, वितरण और आयात। |
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धारा 59(i) के अनुसार बिना चोट के क्या दंड है? |
6 माह तक कारावास और 1 लाख तक जुर्माना। |
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धारा 59(ii) के अनुसार गैर-गंभीर चोट पर दंड क्या है? |
1 वर्ष तक कारावास और 3 लाख तक जुर्माना। |
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धारा 59(iii) के अनुसार गंभीर चोट पर दंड क्या है? |
6 वर्ष तक कारावास और 5 लाख तक जुर्माना। |
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धारा 59(iv) के अनुसार मृत्यु होने पर दंड क्या है? |
न्यूनतम 7 वर्ष से आजीवन कारावास और 10 लाख से अधिक जुर्माना। |
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धारा 60 का विषय क्या है? |
जब्त की गई वस्तुओं में छेड़छाड़ करने पर दंड। (Punishment for interfering with seized items) |
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धारा 60 के अनुसार कब दंड लगेगा? |
जब जब्त वस्तुओं को बिना अनुमति रखा, हटाया या छेड़छाड़ की जाए। |
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धारा 60 के अनुसार किन वस्तुओं पर लागू है? |
खाद्य पदार्थ, वाहन, उपकरण, पैकेजिंग, लेबल, विज्ञापन सामग्री आदि। |
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धारा 60 के अनुसार अनुमति किसकी आवश्यक है? |
खाद्य सुरक्षा अधिकारी की। |
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धारा 60 के अनुसार दंड क्या है? |
6 महीने तक कारावास और 2 लाख रुपये तक जुर्माना। |
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धारा 61 का विषय क्या है? |
झूठी सूचना देने पर दंड। (Punishment for false information) |
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धारा 61 के अनुसार कब दंड लगेगा? |
जब झूठी या भ्रामक जानकारी/दस्तावेज दिया जाए। |
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धारा 61 के अनुसार यह किस संदर्भ में है? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की किसी आवश्यकता या निर्देश के संबंध में। |
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धारा 61 के अनुसार दंड क्या है? |
3 महीने तक कारावास और 2 लाख रुपये तक जुर्माना। |
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धारा 62 का विषय क्या है? |
खाद्य सुरक्षा अधिकारी के कार्य में बाधा/रूप धारण पर दंड। (Punishment for obstructing or impersonating a Food Safety Officer) |
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धारा 62 के अनुसार कब दंड लगेगा? |
जब अधिकारी के कार्य में बाधा, विरोध, धमकी या हमला किया जाए। |
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धारा 62 के अनुसार और क्या अपराध है? |
अधिकारी का रूप धारण करना। |
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धारा 62 के अनुसार शर्त क्या है? |
बिना उचित कारण ऐसा करना। |
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धारा 62 के अनुसार दंड क्या है? |
3 महीने तक कारावास और 1 लाख रुपये तक जुर्माना। |
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धारा 63 का विषय क्या है? |
बिना लाइसेंस के खाद्य व्यवसाय चलाने पर दंड। (Punishment for carrying out a business without licence) |
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धारा 63 के अनुसार कब दंड लगेगा? |
जब बिना लाइसेंस खाद्य व्यवसाय किया जाए। |
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धारा 63 के अनुसार किन कार्यों पर लागू है? |
निर्माण, बिक्री, भंडारण, वितरण और आयात। |
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धारा 63 के अनुसार किन पर लागू है? |
खाद्य व्यवसाय संचालक (लाइसेंस आवश्यक होने पर)। |
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धारा 63 के अनुसार किन्हें छूट है? |
धारा 31(2) के अंतर्गत आने वाले व्यक्ति। |
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धारा 63 के अनुसार दंड क्या है? |
6 माह तक कारावास और 5 लाख रुपये तक जुर्माना। |
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धारा 64 का विषय क्या है? |
पुनरावर्ती (बार-बार) अपराधों के लिए दंड। (Punishment for subsequent offences) |
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धारा 64(1) के अनुसार कब लागू होगा? |
जब व्यक्ति पहले दोषी ठहराए जाने के बाद वही अपराध फिर करे। |
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धारा 64(1)(i) के अनुसार सजा क्या होगी? |
पहली सजा से दुगुनी (अधिकतम सीमा तक)। |
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धारा 64(1)(ii) के अनुसार अतिरिक्त दंड क्या है? |
निरंतर अपराध पर प्रतिदिन 1 लाख रुपये तक जुर्माना। |
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धारा 64(1)(iii) के अनुसार क्या अन्य कार्रवाई होगी? |
लाइसेंस रद्द किया जाएगा। |
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धारा 64(2) के अनुसार न्यायालय क्या कर सकता है? |
अपराधी का नाम, पता और अपराध प्रकाशित कराना। |
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धारा 64(2) के अनुसार खर्च कौन वहन करेगा? |
अपराधी। |
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धारा 64(2) के अनुसार खर्च की प्रकृति क्या होगी? |
जुर्माने की तरह वसूल किया जाएगा। |
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धारा 65 का विषय क्या है? |
उपभोक्ता को चोट या मृत्यु पर मुआवजा। (Compensation in case injury of death of consumer) |
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धारा 65(1) के अनुसार कब मुआवजा दिया जाएगा? |
जब खाद्य पदार्थ से चोट या मृत्यु हो। |
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धारा 65(1) के अनुसार मुआवजा कौन देगा? |
निर्णय अधिकारी या न्यायालय के आदेश से। |
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धारा 65(1)(a) के अनुसार मृत्यु पर न्यूनतम मुआवजा कितना है? |
5 लाख रुपये। |
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धारा 65(1)(b) के अनुसार गंभीर चोट पर मुआवजा कितना है? |
अधिकतम 3 लाख रुपये। |
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धारा 65(1)(c) के अनुसार अन्य चोट पर मुआवजा कितना है? |
अधिकतम 1 लाख रुपये। |
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धारा 65(1) के अनुसार भुगतान की समय सीमा क्या है? |
अधिकतम 6 महीने के भीतर। |
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धारा 65(1) के अनुसार अंतरिम राहत कब दी जाएगी? |
30 दिनों के भीतर (मृत्यु के मामले में)। |
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धारा 65(2) के अनुसार क्या प्रकाशित किया जा सकता है? |
अपराधी का नाम, पता, अपराध और दंड। |
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धारा 65(2) के अनुसार खर्च कौन देगा? |
अपराधी। |
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धारा 65(3)(a) के अनुसार क्या कार्रवाई हो सकती है? |
लाइसेंस रद्द, उत्पाद वापस मंगाना, संपत्ति जब्त करना। |
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धारा 65(3)(b) के अनुसार क्या किया जा सकता है? |
निषेधाज्ञा जारी करना। |
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धारा 66 का विषय क्या है? |
कंपनियों द्वारा किए गए अपराध। (Offences by companies) |
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धारा 66(1) के अनुसार कौन दोषी होगा? |
कंपनी और उसके प्रभारी/उत्तरदायी व्यक्ति। |
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धारा 66(1) के अनुसार किस समय का व्यक्ति उत्तरदायी होगा? |
अपराध के समय व्यवसाय संचालन का प्रभारी। |
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धारा 66(1) के परन्तु के अनुसार कौन जिम्मेदार होगा? |
संबंधित शाखा/इकाई का प्रभारी व्यक्ति। |
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धारा 66(1) के अनुसार बचाव कब मिलेगा? |
जब अपराध जानकारी के बिना हुआ हो और सावधानी बरती गई हो। |
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धारा 66(2) के अनुसार किन पर अलग से दंड लगेगा? |
निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी। |
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धारा 66(2) के अनुसार कब दोषी होंगे? |
सहमति, मिलीभगत या लापरवाही होने पर। |
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धारा 66 स्पष्टीकरण(ए) के अनुसार "कंपनी" का अर्थ क्या है? |
निगमित निकाय, फर्म या व्यक्तियों का संघ। |
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धारा 66 स्पष्टीकरण(बी) के अनुसार "निदेशक" का अर्थ क्या है? |
फर्म में भागीदार। |
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धारा 67 का विषय क्या है? |
खाद्य पदार्थों के आयात से संबंधित उल्लंघनों पर अतिरिक्त दंड। (Penalty for contravention of provisions of this Act in case of import of articles of food to be in addition to penalties provided under any other Act) |
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धारा 67(1) के अनुसार कब दंड लगेगा? |
जब अधिनियम/नियमों के उल्लंघन में खाद्य आयात किया जाए। |
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धारा 67(1) के अनुसार दंड किसके अतिरिक्त होगा? |
विदेशी व्यापार अधिनियम 1992 और सीमा शुल्क अधिनियम 1962 के दंडों के अतिरिक्त। |
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धारा 67(1) के अनुसार क्या कार्रवाई होगी? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत भी कार्यवाही और दंड। |
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धारा 67(2) के अनुसार क्या किया जा सकता है? |
खाद्य पदार्थ नष्ट या आयातक को वापस किया जा सकता है। |
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धारा 67(2) के अनुसार यह किसकी अनुमति से होगा? |
सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से। |
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अध्याय-X (CHAPTER-X) |
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न्यायनिर्णय और खाद्य सुरक्षा अपीलीय न्यायाधिकरण (ADJUDICATION AND FOOD SAFETY APPELLATE TRIBUNAL) |
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अध्याय X का विषय क्या है? |
न्यायनिर्णय और खाद्य सुरक्षा अपीलीय न्यायाधिकरण। (Adjudication and Food Safety Appellate Tribunal) |
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धारा 68 का विषय क्या है? |
निर्णय (Adjudication) |
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धारा 68(1) के अनुसार निर्णय अधिकारी कौन होगा? |
अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट से कम रैंक का नहीं। |
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धारा 68(1) के अनुसार नियुक्ति कौन करेगा? |
राज्य सरकार। |
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धारा 68(2) के अनुसार निर्णय से पहले क्या दिया जाएगा? |
उचित सुनवाई का अवसर। |
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धारा 68(2) के अनुसार कब दंड लगाया जाएगा? |
उल्लंघन सिद्ध होने पर। |
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धारा 68(3) के अनुसार निर्णय अधिकारी के पास क्या शक्तियां होंगी? |
सिविल न्यायालय की शक्तियां। |
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धारा 68(3)(a) के अनुसार कार्यवाही क्या मानी जाएगी? |
न्यायिक कार्यवाही। |
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धारा 68(3)(b) के अनुसार क्या माना जाएगा? |
न्यायालय के समान। |
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धारा 68(4) के अनुसार दंड तय करते समय क्या ध्यान रखा जाएगा? |
धारा 49 के दिशा-निर्देश। |
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धारा 69 का विषय क्या है? |
अपराधों का समझौता करने की शक्ति। (Power to compound offences) |
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धारा 69(1) के अनुसार अधिकार किसे दिया जा सकता है? |
नामित अधिकारी को। |
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धारा 69(1) के अनुसार किनसे समझौता किया जा सकता है? |
छोटे निर्माता, विक्रेता, फेरीवाले आदि। |
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धारा 69(2) के अनुसार भुगतान पर क्या होगा? |
व्यक्ति रिहा होगा और आगे कार्यवाही नहीं होगी। |
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धारा 69(3) के अनुसार अधिकतम राशि कितनी है? |
1 लाख रुपये। |
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धारा 69 के अनुसार किस अपराध में समझौता नहीं होगा? |
कारावास योग्य अपराध। |
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धारा 70 का विषय क्या है? |
खाद्य सुरक्षा अपीलीय न्यायाधिकरण की स्थापना। (Establishment of Food Safety Appellate Tribunal) |
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धारा 70(1) के अनुसार न्यायाधिकरण कौन स्थापित करेगा? |
केंद्र या राज्य सरकार। |
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धारा 70(1) के अनुसार उद्देश्य क्या है? |
धारा 68 के निर्णयों पर अपील सुनना। |
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धारा 70(2) के अनुसार क्या निर्धारित किया जाएगा? |
क्षेत्राधिकार और मामले। |
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धारा 70(3) के अनुसार न्यायाधिकरण में कितने सदस्य होंगे? |
एक (पीठासीन अधिकारी)। |
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धारा 70(3) के अनुसार योग्यता क्या है? |
जिला न्यायाधीश होना या रह चुका होना। |
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धारा 70(4) के अनुसार सेवा शर्तें कौन निर्धारित करेगा? |
केंद्र सरकार। |
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धारा 70(5) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
अपील प्रक्रिया और शक्तियां। |
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धारा 71 का विषय क्या है? |
न्यायाधिकरण की प्रक्रिया एवं शक्तियाँ। (Procedure and powers of Tribunal) |
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धारा 71(1) के अनुसार न्यायाधिकरण किससे बाध्य नहीं होगा? |
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की प्रक्रिया से। |
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धारा 71(1) के अनुसार किस सिद्धांत का पालन करेगा? |
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत। |
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धारा 71(1) के अनुसार क्या शक्ति होगी? |
अपनी प्रक्रिया विनियमित करने की। |
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धारा 71(2) के अनुसार न्यायाधिकरण को किनके समान शक्तियां हैं? |
सिविल न्यायालय के समान। |
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धारा 71(2)(a) के अनुसार क्या शक्ति है? |
व्यक्ति को बुलाना और शपथ पर पूछताछ। |
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धारा 71(2)(b) के अनुसार क्या शक्ति है? |
दस्तावेज/इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख प्रस्तुत करवाना। |
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धारा 71(2)(c) के अनुसार क्या शक्ति है? |
शपथपत्र पर साक्ष्य लेना। |
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धारा 71(2)(d) के अनुसार क्या शक्ति है? |
आयोग जारी करना। |
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धारा 71(2)(e) के अनुसार क्या शक्ति है? |
अपने निर्णय की समीक्षा। |
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धारा 71(2)(f) के अनुसार क्या शक्ति है? |
आवेदन खारिज करना या एकतरफा निर्णय। |
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धारा 71(2)(g) के अनुसार क्या शक्ति है? |
अन्य निर्धारित मामले। |
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धारा 71(3) के अनुसार कार्यवाही क्या मानी जाएगी? |
न्यायिक कार्यवाही। |
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धारा 71(4) के अनुसार अपीलकर्ता क्या कर सकता है? |
स्वयं या वकील/अधिकारी द्वारा प्रतिनिधित्व। |
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धारा 71(5) के अनुसार कौन-सा अधिनियम लागू होगा? |
परिसीमा अधिनियम, 1963। |
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धारा 71(6) के अनुसार अपील कहाँ की जा सकती है? |
उच्च न्यायालय में। |
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धारा 71(6) के अनुसार समय सीमा क्या है? |
60 दिन। |
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धारा 71(6) के परन्तु के अनुसार क्या संभव है? |
पर्याप्त कारण होने पर अतिरिक्त समय मिल सकता है। |
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धारा 72 का विषय क्या है? |
दीवानी न्यायालय का क्षेत्राधिकार निषिद्ध। (Civil court not to have jurisdiction) |
|
धारा 72 के अनुसार किसे अधिकार नहीं होगा? |
दीवानी न्यायालय को। |
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धारा 72 के अनुसार किन मामलों में अधिकार नहीं होगा? |
जो निर्णय अधिकारी या न्यायाधिकरण के अधिकार क्षेत्र में हों। |
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धारा 72 के अनुसार क्या निषिद्ध है? |
किसी न्यायालय/प्राधिकरण द्वारा निषेधाज्ञा जारी करना। |
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धारा 72 के अनुसार यह किस पर लागू है? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत की गई कार्रवाई पर। |
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धारा 73 का विषय क्या है? |
न्यायालयों को संक्षिप्त सुनवाई की शक्ति। (Power of court to try cases summarily) |
|
धारा 73 के अनुसार किन मामलों की संक्षिप्त सुनवाई होगी? |
जो विशेष न्यायालय द्वारा विचारणीय नहीं हैं। |
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धारा 73 के अनुसार संक्षिप्त सुनवाई कौन करेगा? |
प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट या मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट। |
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धारा 73 के अनुसार किन प्रावधानों का पालन होगा? |
दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 262 से 265/ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 285 से 288 |
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धारा 73 के अनुसार अधिकतम सजा कितनी दी जा सकती है? |
1 वर्ष तक कारावास। |
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धारा 73 के अनुसार कब संक्षिप्त सुनवाई नहीं होगी? |
जब मामला गंभीर हो या 1 वर्ष से अधिक सजा संभव हो। |
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धारा 73 के अनुसार ऐसी स्थिति में क्या होगा? |
सामान्य प्रक्रिया से सुनवाई की जाएगी। |
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धारा 74 का विषय क्या है? |
विशेष न्यायालय और लोक अभियोजक। (Special courts and Public Prosecutor) |
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धारा 74(1) के अनुसार विशेष न्यायालय कौन स्थापित करेगा? |
केंद्र या राज्य सरकार। |
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धारा 74(1) के अनुसार स्थापना कब होगी? |
जब जनहित में आवश्यक समझा जाए। |
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धारा 74(1) के अनुसार किन मामलों के लिए विशेष न्यायालय होंगे? |
गंभीर चोट या मृत्यु से संबंधित अपराध। |
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धारा 74(1) के अनुसार सजा की सीमा क्या है? |
3 वर्ष से अधिक कारावास वाले अपराध। |
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धारा 74(1) के अनुसार किसकी सहमति आवश्यक है? |
उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की। |
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धारा 74(2) के अनुसार विशेष न्यायालय क्या कर सकता है? |
अन्य स्थान पर भी बैठ सकता है। |
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धारा 74(2) के अनुसार किसके आवेदन पर? |
लोक अभियोजक या स्वयं की पहल पर। |
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धारा 74(3) के अनुसार प्राथमिकता किसे मिलेगी? |
विशेष न्यायालय में चल रहे मामलों को। |
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धारा 74(4) के अनुसार लोक अभियोजक कौन नियुक्त करेगा? |
केंद्र या राज्य सरकार। |
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धारा 74(4) के अनुसार और कौन नियुक्त किए जा सकते हैं? |
अतिरिक्त या विशेष लोक अभियोजक। |
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धारा 74(5) के अनुसार योग्यता क्या है? |
कम से कम 7 वर्ष अधिवक्ता या संबंधित पद का अनुभव। |
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धारा 75 का विषय क्या है? |
मामलों को नियमित न्यायालयों में स्थानांतरित करने की शक्ति। (Power to transfer cases to regular courts) |
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धारा 75 के अनुसार कब स्थानांतरण होगा? |
जब विशेष न्यायालय को लगे कि मामला उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। |
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धारा 75 के अनुसार कौन स्थानांतरण करेगा? |
विशेष न्यायालय। |
|
धारा 75 के अनुसार मामला कहाँ भेजा जाएगा? |
सक्षम (अधिकार क्षेत्र वाले) न्यायालय को। |
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धारा 75 के अनुसार प्राप्त न्यायालय क्या करेगा? |
मामले की सुनवाई करेगा। |
|
धारा 75 के अनुसार कैसे माना जाएगा? |
मानो उसने स्वयं संज्ञान लिया हो। |
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धारा 76 का विषय क्या है? |
अपील। (Appeal) |
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धारा 76(1) के अनुसार अपील कौन कर सकता है? |
विशेष न्यायालय के निर्णय से पीड़ित व्यक्ति। |
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धारा 76(1) के अनुसार अपील कहाँ की जाएगी? |
उच्च न्यायालय में। |
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धारा 76(1) के अनुसार क्या शर्त है? |
निर्धारित शुल्क और जुर्माना/मुआवजा जमा करना। |
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धारा 76(1) के अनुसार समय सीमा क्या है? |
45 दिन। |
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धारा 76(1) के परन्तु के अनुसार क्या संभव है? |
पर्याप्त कारण होने पर देरी से अपील स्वीकार हो सकती है। |
|
धारा 76(2) के अनुसार अपील का निपटारा कौन करेगा? |
कम से कम दो न्यायाधीशों की पीठ। |
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धारा 77 का विषय क्या है? |
अभियोगों के लिए समय सीमा। (Time limit for prosecutions) |
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धारा 77 के अनुसार सामान्य समय सीमा क्या है? |
1 वर्ष के भीतर। |
|
धारा 77 के अनुसार इसके बाद क्या होगा? |
न्यायालय संज्ञान नहीं लेगा। |
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धारा 77 के परन्तु के अनुसार कौन अवधि बढ़ा सकता है? |
खाद्य सुरक्षा आयुक्त। |
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धारा 77 के परन्तु के अनुसार अधिकतम विस्तारित अवधि क्या है? |
3 वर्ष। |
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धारा 77 के परन्तु के अनुसार शर्त क्या है? |
लिखित कारण दर्ज करना। |
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धारा 78 का विषय क्या है? |
निर्माता आदि को पक्षकार बनाने की शक्ति। (Power of court to implead manufacturer, etc.) |
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धारा 78 के अनुसार कब लागू होगा? |
जब मुकदमे के दौरान अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आए। |
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धारा 78 के अनुसार किन व्यक्तियों को जोड़ा जा सकता है? |
आयातक, निर्माता, वितरक या व्यापारी। |
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धारा 78 के अनुसार किस आधार पर जोड़ा जाएगा? |
न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर। |
|
धारा 78 के अनुसार न्यायालय क्या कर सकता है? |
उनके विरुद्ध कार्यवाही शुरू कर सकता है। |
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धारा 78 के अनुसार कैसे माना जाएगा? |
मानो उनके विरुद्ध पहले से अभियोग चलाया गया हो। |
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धारा 79 का विषय क्या है? |
मजिस्ट्रेट की बढ़ी हुई सजा देने की शक्ति। (Magistrate’s power to impose enhanced punishment) |
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धारा 79 के अनुसार किन प्रावधानों के बावजूद यह लागू है? |
दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 29/ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 23 के बावजूद। |
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धारा 79 के अनुसार कौन सजा दे सकता है? |
सामान्य क्षेत्राधिकार वाला न्यायालय (मजिस्ट्रेट)। |
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धारा 79 के अनुसार क्या अधिकार है? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत अधिकृत सजा देना। |
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धारा 79 के अनुसार सीमा क्या है? |
6 वर्ष से अधिक कारावास नहीं दे सकता। |
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धारा 80 का विषय क्या है? |
अभियोजन में स्वीकार्य/अस्वीकार्य बचाव। (Defences which may or may not be allowed in prosecution under this Act) |
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धारा 80(a) का विषय क्या है? |
विज्ञापन प्रकाशन से संबंधित बचाव। |
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धारा 80(a)(1) के अनुसार कब बचाव उपलब्ध होगा? |
जब व्यक्ति विज्ञापन प्रकाशन के व्यवसाय में हो। |
|
धारा 80(a)(1) के अनुसार क्या साबित करना होगा? |
कि विज्ञापन सामान्य व्यवसाय के क्रम में प्रकाशित किया गया। |
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धारा 80(a)(1) के अनुसार यह किस अपराध से संबंधित है? |
विज्ञापन के प्रकाशन से संबंधित अपराध। |
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धारा 80(a)(2) का विषय क्या है? |
विज्ञापन बचाव के अपवाद। |
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धारा 80(a)(2) के अनुसार कब बचाव लागू नहीं होगा? |
जब व्यक्ति को पता होना चाहिए था कि विज्ञापन अपराध है। |
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धारा 80(a)(2)(b) के अनुसार कब बचाव नहीं मिलेगा? |
जब प्राधिकारी पहले ही लिखित सूचना दे चुका हो। |
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धारा 80(a)(2)(c) के अनुसार किसे बचाव नहीं मिलेगा? |
खाद्य व्यवसाय संचालक या उससे संबंधित व्यक्ति। |
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धारा 80(b) का विषय क्या है? |
उचित सावधानी (Due diligence) का बचाव। |
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धारा 80(b)(1) के अनुसार बचाव कब मिलेगा? |
जब सभी उचित सावधानियां और सतर्कता बरती गई हो। |
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धारा 80(b)(2)(ए) के अनुसार अपराध का कारण क्या हो सकता है? |
किसी अन्य व्यक्ति का कार्य/चूक या उसकी जानकारी पर निर्भरता। |
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धारा 80(b)(2)(b) के अनुसार क्या साबित करना होगा? |
उचित जांच की गई या उचित रूप से भरोसा किया गया। |
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धारा 80(b)(2)(c) के अनुसार क्या शर्त है? |
खाद्य पदार्थ का आयात उस व्यक्ति ने न किया हो। |
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धारा 80(b)(2)(d) के अनुसार बिक्री के मामले में क्या शर्त है? |
भोजन उसी या बिना उल्लंघन बदली स्थिति में बेचा गया हो। |
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धारा 80(b)(2)(e) के अनुसार क्या आवश्यक है? |
अपराध के बारे में जानकारी या संदेह न होना। |
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धारा 80(b)(3) के अनुसार "अन्य व्यक्ति" में कौन शामिल नहीं है? |
प्रतिवादी का कर्मचारी/एजेंट या कंपनी के निदेशक/कर्मचारी/एजेंट। |
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धारा 80(b)(4) का विषय क्या है? |
उचित सावधानी सिद्ध करने के अतिरिक्त तरीके। |
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धारा 80(b)(4)(a) के अनुसार क्या साबित करना होगा? |
खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम का अनुपालन। |
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धारा 80(b)(4)(b) के अनुसार क्या साबित करना होगा? |
गुणवत्ता आश्वासन/मानकों पर आधारित योजना का पालन। |
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धारा 80(b)(4)(b)(i) के अनुसार योजना किस पर आधारित होनी चाहिए? |
राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय मानकों/दिशानिर्देशों पर। |
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धारा 80(b)(4)(b)(ii) के अनुसार क्या आवश्यक है? |
योजना का दस्तावेजीकरण। |
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धारा 80(c) का विषय क्या है? |
गलत लेकिन उचित विश्वास का बचाव। |
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धारा 80(c) के अनुसार क्या बचाव मान्य नहीं है? |
गलत लेकिन उचित विश्वास। |
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धारा 80(d) का विषय क्या है? |
खाद्य पदार्थों के प्रबंधन का बचाव। |
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धारा 80(d) के अनुसार कब बचाव मिलेगा? |
जब असुरक्षित भोजन को तुरंत नष्ट/निपटान कर दिया जाए। |
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धारा 80(e) का विषय क्या है? |
भोजन की प्रकृति/गुणवत्ता से संबंधित बचाव। |
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धारा 80(e) के अनुसार क्या बचाव मान्य नहीं है? |
भोजन की गुणवत्ता/प्रकृति की जानकारी न होना। |
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धारा 80(e) के अनुसार क्या और बचाव मान्य नहीं है? |
खरीदार को नुकसान न होना। |
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अध्याय-XI (CHAPTER-XI) |
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वित्त, लेखा, लेखापरीक्षा और रिपोर्ट (FINANCE, ACCOUNTS, AUDIT AND REPORTS) |
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अध्याय XI का विषय क्या है? |
वित्त, लेखा, लेखापरीक्षा और रिपोर्ट। (Finance, Accounts, Audit and Reports) |
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धारा 81 का विषय क्या है? |
खाद्य प्राधिकरण का बजट। (Budget of Food Authority) |
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धारा 81(1) के अनुसार बजट कौन तैयार करेगा? |
खाद्य प्राधिकरण। |
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धारा 81(1) के अनुसार बजट कब तैयार होगा? |
प्रत्येक वित्तीय वर्ष में। |
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धारा 81(1) के अनुसार बजट किसके लिए होगा? |
अगले वित्तीय वर्ष के लिए। |
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धारा 81(1) के अनुसार बजट में क्या शामिल होगा? |
अनुमानित प्राप्तियां और व्यय। |
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धारा 81(1) के अनुसार बजट किसे भेजा जाएगा? |
केंद्र सरकार को। |
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धारा 81(2) के अनुसार वित्तीय विनियमन कौन अपनाएगा? |
खाद्य प्राधिकरण। |
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धारा 81(2) के अनुसार किसकी स्वीकृति आवश्यक है? |
केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति। |
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धारा 81(2) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
बजट तैयार करने और लागू करने की प्रक्रिया। |
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धारा 82 का विषय क्या है? |
खाद्य प्राधिकरण का वित्त। (Finances of the Food Authority) |
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धारा 82(1) के अनुसार धनराशि कौन देगा? |
केंद्र सरकार। |
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धारा 82(1) के अनुसार किस रूप में धन दिया जाएगा? |
अनुदान के रूप में। |
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धारा 82(1) के अनुसार राशि कैसे तय होगी? |
केंद्र सरकार के विवेक से। |
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धारा 82(2) के अनुसार शुल्क कौन निर्धारित करेगा? |
खाद्य प्राधिकरण। |
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धारा 82(2) के अनुसार किसकी सिफारिश पर? |
केंद्रीय सलाहकार समिति की। |
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धारा 82(2) के अनुसार किनसे शुल्क लिया जाएगा? |
लाइसेंस प्राप्त खाद्य व्यवसाय संचालक, प्रयोगशालाएं, लेखा परीक्षक। |
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धारा 82(2) के अनुसार शुल्क कौन वसूलेगा? |
खाद्य सुरक्षा आयुक्त। |
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धारा 83 का विषय क्या है? |
खाद्य प्राधिकरण के लेखा-जोखा एवं लेखापरीक्षा। (Accounts and audit of Food Authority) |
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धारा 83(1) के अनुसार खाते कौन रखेगा? |
खाद्य प्राधिकरण। |
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धारा 83(1) के अनुसार लेखा विवरण किस प्रारूप में बनेगा? |
केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित (CAG के परामर्श से)। |
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धारा 83(2) के अनुसार लेखापरीक्षा कौन करेगा? |
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) या उनके द्वारा नियुक्त व्यक्ति। |
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धारा 83(2) के अनुसार क्या अधिकार होंगे? |
सरकारी लेखापरीक्षा जैसे सभी अधिकार। |
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धारा 83(2) के अनुसार विशेष अधिकार क्या है? |
दस्तावेज मांगना और कार्यालय निरीक्षण। |
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धारा 83(3) के अनुसार लेखा रिपोर्ट किसे भेजी जाएगी? |
केंद्र सरकार को। |
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धारा 83(3) के अनुसार आगे क्या होगा? |
संसद के दोनों सदनों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। |
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धारा 84 का विषय क्या है? |
खाद्य प्राधिकरण की वार्षिक रिपोर्ट। (Annual report of Food Authority) |
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धारा 84(1) के अनुसार रिपोर्ट कौन तैयार करेगा? |
खाद्य प्राधिकरण। |
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धारा 84(1) के अनुसार रिपोर्ट कब तैयार होगी? |
वर्ष में एक बार। |
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धारा 84(1) के अनुसार रिपोर्ट में क्या होगा? |
पिछले वर्ष की गतिविधियों का सारांश। |
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धारा 84(1) के अनुसार रिपोर्ट किसे भेजी जाएगी? |
केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को। |
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धारा 84(2) के अनुसार रिपोर्ट का क्या होगा? |
संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी। |
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अध्याय-XII (CHAPTER-XII) |
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विविध (MISCELLANEOUS) |
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धारा 85 का विषय क्या है? |
केंद्र सरकार की निर्देश देने व रिपोर्ट मांगने की शक्ति। (Power of Central Government to issue directions to Food Authority and obtain reports and returns) |
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धारा 85(1) के अनुसार खाद्य प्राधिकरण किससे बाध्य होगा? |
केंद्र सरकार के निर्देशों से। |
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धारा 85(1) के अनुसार निर्देश किन मामलों में होंगे? |
नीतिगत मामलों में (तकनीकी/प्रशासनिक को छोड़कर)। |
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धारा 85(1) के अनुसार निर्देश कैसे दिए जाएंगे? |
लिखित रूप में। |
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धारा 85(1) के अनुसार क्या अवसर दिया जाएगा? |
प्राधिकरण को अपने विचार रखने का अवसर। |
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धारा 85(2) के अनुसार विवाद होने पर अंतिम निर्णय किसका होगा? |
केंद्र सरकार का। |
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धारा 85(3) के अनुसार क्या देना होगा? |
गतिविधियों से संबंधित जानकारी/रिपोर्ट। |
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धारा 86 का विषय क्या है? |
केंद्र सरकार की राज्य सरकारों को निर्देश देने की शक्ति। (Power of Central Government to give directions to State Governments) |
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धारा 86 के अनुसार कौन निर्देश देगा? |
केंद्र सरकार। |
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धारा 86 के अनुसार किसे निर्देश दिए जाएंगे? |
राज्य सरकार को। |
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धारा 86 के अनुसार किस उद्देश्य से निर्देश दिए जाएंगे? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों को लागू करने हेतु। |
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धारा 86 के अनुसार क्या बाध्यता है? |
राज्य सरकार को निर्देशों का पालन करना होगा। |
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धारा 87 का विषय क्या है? |
लोक सेवक का दर्जा। (Members, officers of Food Authority and Commissioner of Food Safety to be public servants) |
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धारा 87 के अनुसार किन्हें लोक सेवक माना जाएगा? |
खाद्य प्राधिकरण के सदस्य, अधिकारी और खाद्य सुरक्षा आयुक्त। |
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धारा 87 के अनुसार किन परिस्थितियों में? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्य करते समय। |
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धारा 87 के अनुसार किस अधिनियम के तहत? |
भारतीय दंड संहिता की धारा 21 भारतीय / न्याय संहिता 2023 की धारा के अंतर्गत। |
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धारा 88 का विषय क्या है? |
सद्भावनापूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण। (Protection of action taken in good faith) |
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धारा 88 के अनुसार किसे संरक्षण प्राप्त है? |
केंद्र सरकार, राज्य सरकार, खाद्य प्राधिकरण और अन्य निकाय। |
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धारा 88 के अनुसार किन व्यक्तियों को संरक्षण है? |
अधिकारी, सदस्य, कर्मचारी और अन्य अधिकृत व्यक्ति। |
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धारा 88 के अनुसार किस प्रकार के कार्य पर संरक्षण है? |
सद्भावनापूर्वक किए गए या किए जाने वाले कार्य। |
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धारा 88 के अनुसार क्या नहीं किया जा सकता? |
मुकदमा, अभियोग या अन्य कानूनी कार्यवाही। |
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धारा 89 का विषय क्या है? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 का अधिभावी (Overriding) प्रभाव। (Overriding effect of this Act over all other food related laws) |
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धारा 89 के अनुसार खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 किन पर प्रभावी होगा? |
अन्य सभी प्रचलित कानूनों और दस्तावेजों पर। |
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धारा 89 के अनुसार कब लागू होगा? |
जब अन्य कानून में इसके विपरीत प्रावधान हों। |
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धारा 89 का सार क्या है? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 को प्राथमिकता मिलेगी। |
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धारा 90 का विषय क्या है? |
कर्मचारियों का खाद्य प्राधिकरण में स्थानांतरण। (Transfer of existing employees of Central Government Agencies governing various foods related Acts or Orders to Food Authority) |
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धारा 90 के अनुसार कौन स्थानांतरित होंगे? |
केंद्रीय सरकारी एजेंसियों के खाद्य कानून से जुड़े कर्मचारी। |
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धारा 90 के अनुसार कब से लागू होगा? |
खाद्य प्राधिकरण की स्थापना की तिथि से। |
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धारा 90 के अनुसार सेवा शर्तें कैसी होंगी? |
पहले जैसी (वेतन, अवकाश, PF, पेंशन आदि सहित)। |
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धारा 90 के अनुसार कर्मचारी कब तक बने रहेंगे? |
जब तक वे विकल्प न चुनें या 6 माह की अवधि समाप्त न हो जाए। |
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धारा 90 के अनुसार क्या विकल्प है? |
कर्मचारी प्राधिकरण का कर्मचारी न रहने का विकल्प चुन सकता है। |
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धारा 91 का विषय क्या है? |
केंद्र सरकार की नियम बनाने की शक्ति। (Power of Central Government to make rules) |
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धारा 91(1) के अनुसार नियम कौन बनाएगा? |
केंद्र सरकार। |
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धारा 91(1) के अनुसार कैसे बनाए जाएंगे? |
राजपत्र में अधिसूचना द्वारा। |
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धारा 91(1) का उद्देश्य क्या है? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों को लागू करना। |
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धारा 91(2) का विषय क्या है? |
नियमों के अंतर्गत आने वाले विषय। |
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धारा 91(2)(a) के अनुसार क्या निर्धारित किया जा सकता है? |
सदस्यों का वेतन, सेवा शर्तें और शपथ का तरीका। |
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धारा 91(2)(b) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
खाद्य सुरक्षा अधिकारी की योग्यताएँ। |
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धारा 91(2)(c) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
जब्त दस्तावेजों के सार निकालने का तरीका। |
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धारा 91(2)(d) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
मामलों को न्यायालय में भेजने की प्रक्रिया और समय-सीमा। |
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धारा 91(2)(e) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
खाद्य विश्लेषकों की योग्यताएँ। |
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धारा 91(2)(f) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
नमूना भेजने और विश्लेषण की प्रक्रिया। |
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धारा 91(2)(g) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
मामलों के निर्णय की प्रक्रिया। |
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धारा 91(2)(h) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
पीठासीन अधिकारी की सेवा शर्तें और अपील प्रक्रिया। |
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धारा 91(2)(i) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
न्यायाधिकरण की प्रक्रिया और शक्तियां। |
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धारा 91(2)(j) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
उच्च न्यायालय में अपील शुल्क। |
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धारा 91(2)(k) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
बजट का प्रारूप और समय। |
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धारा 91(2)(l) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
लेखा प्रपत्र और विवरण। |
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धारा 91(2)(m) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
वार्षिक रिपोर्ट का प्रारूप और समय। |
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धारा 91(2)(n) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
अन्य आवश्यक विषय। |
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धारा 92 का विषय क्या है? |
खाद्य प्राधिकरण की विनियम (Regulations) बनाने की शक्ति। (Power of Food Authority to make regulations) |
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धारा 92(1) के अनुसार विनियम कौन बनाएगा? |
खाद्य प्राधिकरण। |
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धारा 92(1) के अनुसार किसकी स्वीकृति आवश्यक है? |
केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति। |
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धारा 92(1) के अनुसार कैसे बनाए जाएंगे? |
अधिसूचना द्वारा और पूर्व प्रकाशन के बाद। |
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धारा 92(2) का विषय क्या है? |
विनियमों के अंतर्गत आने वाले विषय। |
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धारा 92(2)(a) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
अधिकारियों/कर्मचारियों का वेतन और सेवा शर्तें। |
|
धारा 92(2)(b) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
केंद्रीय सलाहकार समिति की कार्यप्रणाली। |
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धारा 92(2)(c) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
केंद्रीय सलाहकार समिति के अन्य कार्य। |
|
धारा 92(2)(d) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
वैज्ञानिक समिति और पैनलों की प्रक्रिया। |
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धारा 92(2)(e) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
खाद्य मानक और दिशा-निर्देश। |
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धारा 92(2)(f) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
खाद्य प्राधिकरण की बैठकों की प्रक्रिया। |
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धारा 92(2)(g) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
आपातकालीन स्थिति में विनियम बनाना/संशोधन। |
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धारा 92(2) (आगे के विषय) का विषय क्या है? |
खाद्य प्राधिकरण द्वारा बनाए जाने वाले विनियमों के अतिरिक्त विषय। |
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धारा 92(2)(h) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
खाद्य योजकों (Additives) की सीमाएँ। |
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धारा 92(2)(i) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
संदूषक, विषैले पदार्थ और भारी धातुओं की सीमा। |
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धारा 92(2)(j) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
कीटनाशक व पशु चिकित्सा दवाओं के अवशेषों की सीमा। |
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धारा 92(2)(k) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग व लेबलिंग का तरीका। |
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धारा 92(2)(l) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
खाद्य गारंटी का प्रपत्र (धारा 26(4))। |
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धारा 92(2)(m) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
खाद्य पदार्थों की रिकॉल (वापसी) प्रक्रिया। |
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धारा 92(2)(n) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
खाद्य सुरक्षा अधिकारी के कार्य से संबंधित नियम। |
|
धारा 92(2)(o) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
पंजीकरण/लाइसेंस प्रक्रिया, शुल्क और रद्द करने की शर्तें। |
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धारा 92(2)(p) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
नामित अधिकारी का क्षेत्राधिकार। |
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धारा 92(2)(q) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
खाद्य विश्लेषण की प्रक्रिया और शुल्क। |
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धारा 92(2)(r) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
खाद्य प्रयोगशालाओं के कार्य और प्रक्रिया। |
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धारा 92(2)(s) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
अधिकारियों द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया (धारा 47)। |
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धारा 92(2)(t) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
बजट तैयार करने के वित्तीय नियम। |
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धारा 92(2)(u) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
Codex बैठकों में भागीदारी व प्रतिक्रिया के दिशा-निर्देश। |
|
धारा 92(2)(v) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
अन्य आवश्यक विषय। |
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धारा 93 का विषय क्या है? |
संसद के समक्ष नियम एवं विनियम प्रस्तुत करना। (Laying of rules and regulations before Parliament) |
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धारा 93 के अनुसार नियम/विनियम कब प्रस्तुत होंगे? |
बनाए जाने के तुरंत बाद। |
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धारा 93 के अनुसार कहाँ प्रस्तुत होंगे? |
संसद के दोनों सदनों के समक्ष। |
|
धारा 93 के अनुसार कितने समय के लिए रखे जाएंगे? |
कुल 30 दिन। |
|
धारा 93 के अनुसार यह अवधि कैसे हो सकती है? |
एक या अधिक सत्रों में। |
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धारा 93 के अनुसार संसद क्या कर सकती है? |
संशोधन या निरस्तीकरण। |
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धारा 93 के अनुसार संशोधन का प्रभाव क्या होगा? |
संशोधित रूप में लागू होगा। |
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धारा 93 के अनुसार निरस्तीकरण का प्रभाव क्या होगा? |
नियम/विनियम प्रभावहीन हो जाएगा। |
|
धारा 93 के अनुसार पूर्व कार्यों पर क्या प्रभाव होगा? |
कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। |
|
धारा 94 का विषय क्या है? |
राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति। (Power of State Government to make rules) |
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धारा 94(1) के अनुसार नियम कौन बनाएगा? |
राज्य सरकार। |
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धारा 94(1) के अनुसार किसकी स्वीकृति आवश्यक है? |
खाद्य प्राधिकरण की पूर्व स्वीकृति। |
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धारा 94(1) के अनुसार कैसे बनाए जाएंगे? |
आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा। |
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धारा 94(1) का उद्देश्य क्या है? |
राज्य सरकार व खाद्य सुरक्षा आयुक्त के कार्यों को पूरा करना। |
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धारा 94(2) का विषय क्या है? |
नियमों के अंतर्गत आने वाले विषय। |
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धारा 94(2)(a) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
खाद्य सुरक्षा आयुक्त के अतिरिक्त कार्य। |
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धारा 94(2)(b) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
अपराध की सूचना देने वालों को पुरस्कार देने की व्यवस्था। |
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धारा 94(2)(c) के अनुसार क्या निर्धारित होगा? |
अन्य आवश्यक विषय। |
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धारा 94(3) के अनुसार नियम कहाँ प्रस्तुत होंगे? |
राज्य विधानमंडल के समक्ष। |
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धारा 94(3) के अनुसार कब प्रस्तुत होंगे? |
बनाए जाने के तुरंत बाद। |
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धारा 95 का विषय क्या है? |
राज्य सरकार द्वारा पुरस्कार। (Reward by State Government) |
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धारा 95 के अनुसार अधिकार किसे दिया जा सकता है? |
खाद्य सुरक्षा आयुक्त को। |
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धारा 95 के अनुसार किसे पुरस्कार मिलेगा? |
अपराध का पता लगाने/अपराधी को पकड़ने में सहायता करने वाले व्यक्ति को। |
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धारा 95 के अनुसार भुगतान किससे होगा? |
राज्य सरकार द्वारा निर्धारित निधि से। |
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धारा 95 के अनुसार भुगतान कैसे होगा? |
निर्धारित तरीके से। |
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धारा 96 का विषय क्या है? |
जुर्माने की वसूली। (Recovery of penalty) |
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धारा 96 के अनुसार जुर्माना कैसे वसूला जाएगा? |
भू-राजस्व के बकाया के रूप में। |
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धारा 96 के अनुसार लाइसेंस पर क्या प्रभाव होगा? |
जुर्माना अदा होने तक निलंबित रहेगा। |
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धारा 97 का विषय क्या है? |
निरसन एवं बचत। (Repeal and savings) |
|
धारा 97(1) के अनुसार क्या होगा? |
द्वितीय अनुसूची के अधिनियम/आदेश निरस्त होंगे। |
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धारा 97(1) के अनुसार किन पर प्रभाव नहीं पड़ेगा? |
पूर्व कार्यवाही, अधिकार, दायित्व, दंड आदि पर। |
|
धारा 97(1)(i) के अनुसार क्या सुरक्षित रहेगा? |
पूर्व में किए गए कार्य/कार्रवाई। |
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धारा 97(1)(ii) के अनुसार क्या सुरक्षित रहेगा? |
अर्जित अधिकार/दायित्व। |
|
धारा 97(1)(iii) के अनुसार क्या सुरक्षित रहेगा? |
पहले लगाए गए दंड/जुर्माने। |
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धारा 97(1)(iv) के अनुसार क्या जारी रहेगा? |
जांच/कानूनी कार्यवाही। |
|
धारा 97(2) के अनुसार क्या होगा? |
राज्य के समान कानून निरस्त होंगे। |
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धारा 97(2) के अनुसार कौन-सा अधिनियम लागू होगा? |
सामान्य खंड अधिनियम, 1897। |
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धारा 97(3) के अनुसार लाइसेंस का क्या होगा? |
समाप्ति तक वैध रहेंगे। |
|
धारा 97(4) के अनुसार समय सीमा क्या है? |
3 वर्ष के बाद पुराने कानूनों के अपराधों पर संज्ञान नहीं। |
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धारा 98 का विषय क्या है? |
खाद्य मानकों के लिए संक्रमणकालीन प्रावधान। (Transitory provisions for food standards) |
|
धारा 98 के अनुसार पुराने मानकों का क्या होगा? |
नए मानक बनने तक लागू रहेंगे। |
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धारा 98 के अनुसार किनका उल्लेख है? |
द्वितीय अनुसूची के अधिनियम और आदेश। |
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धारा 98 के अनुसार कब तक लागू रहेंगे? |
जब तक नए मानक/नियम अधिनियम के तहत न बन जाएं। |
|
धारा 98 के अनुसार पुराने कार्यों का क्या होगा? |
उन्हें खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत किया हुआ माना जाएगा। |
|
धारा 98 के अनुसार पुराने कार्य कब समाप्त होंगे? |
जब नए प्रावधानों से निरस्त किए जाएं। |
|
धारा 99 का विषय क्या है? |
दूध और दूध उत्पाद आदेश, 1992 का रूपांतरण। (Milk and Milk Products Order, 1992 shall be deemed to be regulations made under this Act) |
|
धारा 99(1) के अनुसार क्या माना जाएगा? |
दूध और दूध उत्पाद आदेश, 1992 को विनियम माना जाएगा। |
|
धारा 99(1) के अनुसार किस अधिनियम के तहत? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत खाद्य प्राधिकरण द्वारा। |
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धारा 99(1) के अनुसार कब से लागू होगा? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 लागू होने की तिथि से। |
|
धारा 99(2) के अनुसार संशोधन कौन कर सकता है? |
खाद्य प्राधिकरण। |
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धारा 99(2) के अनुसार किसकी स्वीकृति आवश्यक है? |
केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति। |
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धारा 99(2) के अनुसार कैसे संशोधन होगा? |
अधिसूचना द्वारा और पूर्व प्रकाशन के बाद। |
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धारा 100 का विषय क्या है? |
शिशु दूध विकल्प अधिनियम, 1992 में संशोधन। (Amendments to the Infant Milk Substitutes, Feeding Bottles and Infant Foods (Regulation of Production, Supply and Distribution) Act, 1992) |
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धारा 100(a) के अनुसार क्या परिवर्तन होगा? |
"खाद्य मिलावट निवारण अधिनियम, 1954" को "खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006" से बदला जाएगा। |
|
धारा 100(b) के अनुसार क्या परिवर्तन होगा? |
"खाद्य निरीक्षक" को "खाद्य सुरक्षा अधिकारी" से बदला जाएगा। |
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धारा 100(c) के अनुसार क्या परिवर्तन होगा? |
सभी स्थानों पर "खाद्य निरीक्षक" → "खाद्य सुरक्षा अधिकारी"। |
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धारा 100(d) के अनुसार क्या संशोधन होगा? |
धारा 21(1)(क) में नामित अधिकारी/खाद्य सुरक्षा अधिकारी का उल्लेख। |
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धारा 101 का विषय क्या है? |
कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति। (Power to remove difficulties) |
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धारा 101(1) के अनुसार यह शक्ति किसके पास है? |
केंद्र सरकार। |
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धारा 101(1) के अनुसार कैसे प्रयोग होगी? |
राजपत्र में आदेश द्वारा। |
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धारा 101(1) के अनुसार उद्देश्य क्या है? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006के कार्यान्वयन में आई कठिनाइयों को दूर करना। |
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धारा 101(1) के अनुसार क्या शर्त है? |
प्रावधान खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अनुरूप हों। |
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धारा 101(1) के अनुसार समय सीमा क्या है? |
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 लागू होने से 3 वर्ष तक। |
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धारा 101(2) के अनुसार आदेश का क्या होगा? |
संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखा जाएगा। |
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