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पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 (THE ENVIRONMENT (PROTECTION) ACT, 1986) |
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(1986 का अधिनियम संख्यांक 29) (No. 29 OF 1986) |
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इस अधिनियम का विषय क्या है? |
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 (the environment (protection) act, 1986) |
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पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 का अधिनियम संख्यांक क्या है? |
1986 का अधिनियम संख्यांक 29। (No. 29 OF 1986) |
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पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 को राष्ट्रपति की स्वीकृति कब प्राप्त हुई? |
23 मई, 1986। [23rd May, 1986] |
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पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 का उद्देश्य क्या है? |
पर्यावरण के संरक्षण और सुधार तथा उनसे संबंधित विषयों का उपबंध करना। |
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पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 का संबंध किस संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन से है? |
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय पर्यावरण सम्मेलन, स्टाकहोम, जून 1972 से। |
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संयुक्त राष्ट्र का मानवीय पर्यावरण सम्मेलन कब आयोजित हुआ था? |
जून, 1972 में। |
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संयुक्त राष्ट्र का मानवीय पर्यावरण सम्मेलन कहाँ आयोजित हुआ था? |
स्टाकहोम में। |
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क्या भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मानवीय पर्यावरण सम्मेलन, स्टाकहोम (1972) में भाग लिया था? |
हाँ। |
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संयुक्त राष्ट्र के मानवीय पर्यावरण सम्मेलन, स्टाकहोम (1972) में क्या विनिश्चय किया गया था? |
मानवीय पर्यावरण के संरक्षण और सुधार के लिए समुचित कदम उठाए जाएँ। |
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पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अनुसार स्टाकहोम सम्मेलन के निर्णयों को किस सीमा तक लागू करना आवश्यक समझा गया? |
जहाँ तक उनका संबंध पर्यावरण संरक्षण और सुधार तथा मानवों, अन्य जीवित प्राणियों, पादपों और संपत्ति को होने वाले परिसंकट के निवारण से है। |
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पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अनुसार पर्यावरण संरक्षण के उपाय किनके परिसंकट के निवारण से संबंधित हैं? |
मानवों, अन्य जीवित प्राणियों, पादपों और संपत्ति के। |
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पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 भारत गणराज्य के किस वर्ष में संसद द्वारा अधिनियमित किया गया? |
भारत गणराज्य के सैंतीसवें वर्ष में। |
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अध्याय-1 (Chapter-1) |
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प्रारंभिक (Preliminary) |
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अध्याय 1 का विषय क्या है? |
प्रारंभिक। (Preliminary) |
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धारा 1 का विषय क्या है? |
संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ। (Short title, extent and commencement) |
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धारा 1(1) के अनुसार इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम क्या है? |
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986। |
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धारा 1(2) के अनुसार पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 का विस्तार कहाँ तक है? |
सम्पूर्ण भारत पर। |
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धारा 1(3) के अनुसार पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 कब प्रवृत्त होगा? |
उस तारीख को जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे। |
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धारा 1(3) के अनुसार पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की प्रवर्तन तिथि कौन नियत करेगा? |
केन्द्रीय सरकार। |
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धारा 1(3) के अनुसार अधिनियम की प्रवर्तन तिथि किस माध्यम से नियत की जाएगी? |
राजपत्र में अधिसूचना द्वारा। |
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धारा 1(3) के अनुसार क्या पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकती हैं? |
हाँ। |
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धारा 1(3) के अनुसार क्या भिन्न-भिन्न क्षेत्रों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकती हैं? |
हाँ। |
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धारा 2 का विषय क्या है? |
परिभाषाएं। (Definitions) |
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धारा 2(क) का विषय क्या है? |
पर्यावरण। (Environment) |
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धारा 2(क) के अनुसार "पर्यावरण" के अंतर्गत क्या-क्या हैं? |
जल, वायु और भूमि। |
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धारा 2(क) के अनुसार "पर्यावरण" में किस प्रकार का अंतर संबंध सम्मिलित है? |
जल, वायु और भूमि तथा मानवों, अन्य जीवित प्राणियों, पादपों, सूक्ष्मजीव और संपत्ति के बीच विद्यमान अंतर संबंध। |
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धारा 2(क) के अनुसार "पर्यावरण" किन-किन के बीच विद्यमान अंतर संबंध को सम्मिलित करता है? |
जल, वायु और भूमि तथा मानवों, अन्य जीवित प्राणियों, पादपों, सूक्ष्मजीव और संपत्ति के बीच। |
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धारा 2(ख) का विषय क्या है? |
पर्यावरण प्रदूषक। (Environmental pollutant) |
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धारा 2(ख) के अनुसार "पर्यावरण प्रदूषक" से क्या अभिप्रेत है? |
ऐसा ठोस, द्रव या गैसीय पदार्थ जो ऐसी सांद्रता में विद्यमान है जो पर्यावरण के लिए क्षतिकर हो सकता है या जिसका क्षतिकर होना संभाव्य है। |
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धारा 2(ख) के अनुसार पर्यावरण प्रदूषक किस-किस रूप में हो सकता है? |
ठोस, द्रव या गैसीय पदार्थ। |
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धारा 2(ख) के अनुसार कोई पदार्थ "पर्यावरण प्रदूषक" कब माना जाएगा? |
जब वह ऐसी सांद्रता में विद्यमान हो जो पर्यावरण के लिए क्षतिकर हो सकती है या जिसका क्षतिकर होना संभाव्य हो। |
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धारा 2(ख) के अनुसार पर्यावरण प्रदूषक की पहचान का आधार क्या है? |
उसका ऐसी सांद्रता में विद्यमान होना जो पर्यावरण के लिए क्षतिकर हो सकता है या जिसका क्षतिकर होना संभाव्य हो। |
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धारा 2(ग) का विषय क्या है? |
पर्यावरण प्रदूषण। (Environmental pollution) |
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धारा 2(ग) के अनुसार "पर्यावरण प्रदूषण" से क्या अभिप्रेत है? |
पर्यावरण में पर्यावरण प्रदूषकों का विद्यमान होना। |
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धारा 2(ग) के अनुसार पर्यावरण प्रदूषण किसके विद्यमान होने से होता है? |
पर्यावरण में पर्यावरण प्रदूषकों के विद्यमान होने से। |
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धारा 2(घ) का विषय क्या है? |
हथालना। (Handling) |
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धारा 2(घ) के अनुसार किसी पदार्थ के संबंध में "हथालना" से क्या अभिप्रेत है? |
किसी पदार्थ का विनिर्माण, प्रसंस्करण, अभिक्रियान्वयन, पैकेज, भंडारकरण, परिवहन, उपयोग, संग्रहण, विनाश, संपरिवर्तन, विक्रय के लिए प्रस्थापना, अंतरण या वैसी ही संक्रिया। |
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धारा 2(घ) के अनुसार क्या किसी पदार्थ का विनिर्माण "हथालना" में सम्मिलित है? |
हाँ। |
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धारा 2(घ) के अनुसार क्या किसी पदार्थ का प्रसंस्करण "हथालना" में सम्मिलित है? |
हाँ। |
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धारा 2(घ) के अनुसार क्या किसी पदार्थ का अभिक्रियान्वयन "हथालना" में सम्मिलित है? |
हाँ। |
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धारा 2(घ) के अनुसार क्या किसी पदार्थ का पैकेज "हथालना" में सम्मिलित है? |
हाँ। |
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धारा 2(घ) के अनुसार क्या किसी पदार्थ का भंडारकरण "हथालना" में सम्मिलित है? |
हाँ। |
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धारा 2(घ) के अनुसार क्या किसी पदार्थ का परिवहन "हथालना" में सम्मिलित है? |
हाँ। |
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धारा 2(घ) के अनुसार क्या किसी पदार्थ का उपयोग "हथालना" में सम्मिलित है? |
हाँ। |
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धारा 2(घ) के अनुसार क्या किसी पदार्थ का संग्रहण "हथालना" में सम्मिलित है? |
हाँ। |
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धारा 2(घ) के अनुसार क्या किसी पदार्थ का विनाश "हथालना" में सम्मिलित है? |
हाँ। |
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धारा 2(घ) के अनुसार क्या किसी पदार्थ का संपरिवर्तन "हथालना" में सम्मिलित है? |
हाँ। |
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धारा 2(घ) के अनुसार क्या किसी पदार्थ का विक्रय के लिए प्रस्थापना "हथालना" में सम्मिलित है? |
हाँ। |
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धारा 2(घ) के अनुसार क्या किसी पदार्थ का अंतरण "हथालना" में सम्मिलित है? |
हाँ। |
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धारा 2(घ) के अनुसार "हथालना" में उपर्युक्त क्रियाओं के अतिरिक्त क्या सम्मिलित है? |
वैसी ही संक्रिया। |
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धारा 2(ङ) का विषय क्या है? |
परिसंकटमय पदार्थ। (Hazardous substance) |
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धारा 2(ङ) के अनुसार "परिसंकटमय पदार्थ" से क्या अभिप्रेत है? |
ऐसा पदार्थ या निर्मिति जो अपने रासायनिक या भौतिक-रासायनिक गुणों के या हथालने के कारण मानवों, अन्य जीवित प्राणियों, पादपों, सूक्ष्मजीव, संपत्ति या पर्यावरण को अपहानि कारित कर सकती है। |
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धारा 2(ङ) के अनुसार कौन-सा पदार्थ "परिसंकटमय पदार्थ" कहलाता है? |
ऐसा पदार्थ या निर्मिति जो अपने रासायनिक या भौतिक-रासायनिक गुणों के या हथालने के कारण अपहानि कारित कर सकती है। |
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धारा 2(ङ) के अनुसार परिसंकटमय पदार्थ अपहानि किसके कारण कारित कर सकता है? |
अपने रासायनिक या भौतिक-रासायनिक गुणों के या हथालने के कारण। |
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धारा 2(ङ) के अनुसार परिसंकटमय पदार्थ किन-किन को अपहानि कारित कर सकता है? |
मानवों, अन्य जीवित प्राणियों, पादपों, सूक्ष्मजीव, संपत्ति या पर्यावरण को। |
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धारा 2(च) का विषय क्या है? |
अधिष्ठाता। Occupier |
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धारा 2(च) के अनुसार किसी कारखाने या परिसर के संबंध में "अधिष्ठाता" से क्या अभिप्रेत है? |
ऐसा व्यक्ति जिसका कारखाने या परिसर के कामकाज पर नियंत्रण है। |
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धारा 2(च) के अनुसार किसी कारखाने या परिसर के कामकाज पर नियंत्रण रखने वाला व्यक्ति क्या कहलाता है? |
अधिष्ठाता। |
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धारा 2(च) के अनुसार किसी पदार्थ के संबंध में "अधिष्ठाता" के अंतर्गत कौन आता है? |
वह व्यक्ति जिसके कब्जे में वह पदार्थ है। |
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धारा 2(च) के अनुसार किसी पदार्थ के कब्जे में रहने वाला व्यक्ति क्या कहलाता है? |
अधिष्ठाता। |
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धारा 2(छ) का विषय क्या है? |
विहित। (Prescribed) |
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धारा 2(छ) के अनुसार "विहित" से क्या अभिप्रेत है? |
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित। |
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अध्याय-2 (Chapter-2) |
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केन्द्रीय सरकार की साधारण शक्तियां (General powers of the central government) |
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अध्याय 2 का विषय क्या है? |
केन्द्रीय सरकार की साधारण शक्तियां। (General powers of the central government) |
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धारा 3 का विषय क्या है? |
केन्द्रीय सरकार की पर्यावरण के संरक्षण और सुधार के लिए उपाय करने की शक्ति। (Power of central government to take measures to protect and improve environment) |
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धारा 3(1) के अनुसार केन्द्रीय सरकार को किन उद्देश्यों के लिए उपाय करने की शक्ति होगी? |
पर्यावरण के संरक्षण, उसकी क्वालिटी में सुधार तथा पर्यावरण प्रदूषण के निवारण, नियंत्रण और उपशमन के लिए। |
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धारा 3(1) के अनुसार केन्द्रीय सरकार को उपाय करने की शक्ति किसके अधीन रहेगी? |
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के उपबंधों के अधीन। |
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धारा 3(1) के अनुसार केन्द्रीय सरकार ऐसे कौन-से उपाय कर सकेगी? |
जो वह पर्यावरण के संरक्षण, उसकी क्वालिटी में सुधार तथा पर्यावरण प्रदूषण के निवारण, नियंत्रण और उपशमन के लिए आवश्यक समझे। |
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धारा 3(2)(i) के अनुसार केन्द्रीय सरकार किनकी कार्रवाइयों का समन्वय कर सकेगी? |
राज्य सरकारों, अधिकारियों और अन्य प्राधिकरणों की कार्रवाइयों का। |
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धारा 3(2)(i)(क) के अनुसार किन कार्रवाइयों का समन्वय किया जा सकेगा? |
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन की गई कार्रवाइयों का। |
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धारा 3(2)(i)(ख) के अनुसार किन कार्रवाइयों का समन्वय किया जा सकेगा? |
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के उद्देश्यों से संबंधित तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन की गई कार्रवाइयों का। |
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धारा 3(2)(ii) के अनुसार केन्द्रीय सरकार किस कार्यक्रम की योजना बनाएगी और उसका निष्पादन करेगी? |
पर्यावरण प्रदूषण के निवारण, नियंत्रण और उपशमन के लिए राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम का। |
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धारा 3(2)(iii) के अनुसार केन्द्रीय सरकार क्या अधिकथित करेगी? |
पर्यावरण के विभिन्न आयामों के संबंध में उसकी क्वालिटी के लिए मानक। |
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धारा 3(2)(iv) के अनुसार केन्द्रीय सरकार क्या अधिकथित करेगी? |
विभिन्न स्रोतों से पर्यावरण प्रदूषकों के उत्सर्जन या निस्सारण के मानक। |
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धारा 3(2)(iv) के परन्तुक के अनुसार क्या भिन्न-भिन्न स्रोतों के लिए भिन्न-भिन्न उत्सर्जन या निस्सारण मानक अधिकथित किए जा सकते हैं? |
हाँ। |
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धारा 3(2)(iv) के परन्तुक के अनुसार भिन्न-भिन्न मानक निर्धारित करने का आधार क्या होगा? |
उत्सर्जन या निस्सारण की क्वालिटी या सम्मिश्रण। |
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धारा 3(2)(v) के अनुसार केन्द्रीय सरकार किन क्षेत्रों का निर्बन्धन कर सकेगी? |
ऐसे क्षेत्रों का जहाँ कोई उद्योग, संक्रियाएँ या प्रसंस्करण अथवा उनके वर्ग नहीं चलाए जाएँगे या रक्षोपायों के अधीन चलाए जाएँगे। |
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धारा 3(2)(vi) के अनुसार केन्द्रीय सरकार क्या अधिकथित कर सकेगी? |
पर्यावरण प्रदूषण उत्पन्न करने वाली दुर्घटनाओं के निवारण के लिए प्रक्रिया और रक्षोपाय तथा उनके लिए उपचारी उपाय। |
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धारा 3(2)(vii) के अनुसार केन्द्रीय सरकार किसके लिए प्रक्रिया और रक्षोपाय अधिकथित कर सकेगी? |
परिसंकटमय पदार्थों को हथालने के लिए। |
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धारा 3(2)(viii) के अनुसार केन्द्रीय सरकार किसकी परीक्षा कर सकेगी? |
ऐसी विनिर्माण प्रक्रियाओं, सामग्री और पदार्थों की जिनसे पर्यावरण प्रदूषण होने की संभावना है। |
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धारा 3(2)(ix) के अनुसार केन्द्रीय सरकार क्या कर सकेगी? |
पर्यावरण प्रदूषण की समस्याओं के संबंध में अन्वेषण और अनुसंधान करना तथा प्रायोजित करना। |
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धारा 3(2)(x) के अनुसार केन्द्रीय सरकार किनका निरीक्षण कर सकेगी? |
परिसर, संयंत्र, उपस्कर, मशीनरी, विनिर्माण या अन्य प्रक्रिया, सामग्री या पदार्थों का। |
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धारा 3(2)(x) के अनुसार निरीक्षण के पश्चात् केन्द्रीय सरकार किसे निदेश दे सकेगी? |
प्राधिकरणों, अधिकारियों या व्यक्तियों को। |
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धारा 3(2)(x) के अनुसार निदेश किस प्रयोजन के लिए दिए जा सकेंगे? |
पर्यावरण प्रदूषण के निवारण, नियंत्रण और उपशमन के लिए आवश्यक कार्रवाई करने हेतु। |
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धारा 3(2)(xi) के अनुसार केन्द्रीय सरकार क्या स्थापित या मान्यता दे सकेगी? |
पर्यावरण प्रयोगशालाओं और संस्थाओं को। |
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धारा 3(2)(xii) के अनुसार केन्द्रीय सरकार क्या एकत्र और प्रसारित कर सकेगी? |
पर्यावरण प्रदूषण से संबंधित विषयों की जानकारी। |
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धारा 3(2)(xiii) के अनुसार केन्द्रीय सरकार क्या तैयार कर सकेगी? |
पर्यावरण प्रदूषण के निवारण, नियंत्रण और उपशमन से संबंधित निर्देशिकाएँ, संहिताएँ या पथप्रदर्शिकाएँ। |
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धारा 3(2)(xiv) के अनुसार केन्द्रीय सरकार किन अन्य विषयों पर उपाय कर सकेगी? |
ऐसे विषय जिनको वह पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के प्रभावपूर्ण कार्यान्वयन के लिए आवश्यक या समीचीन समझे। |
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धारा 3(3) के अनुसार केन्द्रीय सरकार प्राधिकरण का गठन किस माध्यम से कर सकेगी? |
राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा। |
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धारा 3(3) के अनुसार प्राधिकरण का गठन किस प्रयोजन के लिए किया जा सकेगा? |
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अधीन केन्द्रीय सरकार की शक्तियों और कृत्यों के प्रयोग एवं निर्वहन तथा धारा 3(2) में निर्दिष्ट विषयों पर उपाय करने के लिए। |
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धारा 3(3) के अनुसार प्राधिकरण को धारा 5 के अधीन कौन-सी शक्ति भी सौंपी जा सकती है? |
निदेश देने की शक्ति। |
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धारा 3(3) के अनुसार गठित प्राधिकरण किसके अधीक्षण और नियंत्रण के अधीन रहेगा? |
केन्द्रीय सरकार के अधीक्षण और नियंत्रण के अधीन। |
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धारा 3(3) के अनुसार गठित प्राधिकरण अपनी शक्तियों का प्रयोग किसके अधीन रहते हुए करेगा? |
राजपत्र में प्रकाशित आदेश के उपबंधों के अधीन रहते हुए। |
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धारा 3(3) के अनुसार गठित प्राधिकरण शक्तियों का प्रयोग किस प्रकार करेगा? |
मानो उसे पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 द्वारा उन शक्तियों का प्रयोग, कृत्यों का निर्वहन या उपाय करने के लिए सशक्त किया गया हो। |
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धारा 4 का विषय क्या है? |
अधिकारियों की नियुक्ति तथा उनकी शक्तियां और कृत्य। (Appointment of officers and their powers and functions) |
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धारा 4(1) के अनुसार केन्द्रीय सरकार पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के प्रयोजनों के लिए क्या कर सकेगी? |
ऐसे पदाभिधानों सहित अधिकारियों की नियुक्ति कर सकेगी तथा उन्हें पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अधीन शक्तियां और कृत्य सौंप सकेगी। |
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धारा 4(1) के अनुसार केन्द्रीय सरकार अधिकारियों की नियुक्ति किसके अधीन करेगी? |
धारा 3 की उपधारा (3) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना। |
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धारा 4(1) के अनुसार केन्द्रीय सरकार नियुक्त अधिकारियों को क्या सौंप सकेगी? |
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अधीन ऐसी शक्तियां और कृत्य जो वह ठीक समझे। |
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धारा 4(1) के अनुसार अधिकारियों की नियुक्ति किस प्रयोजन के लिए की जाएगी? |
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के प्रयोजनों के लिए। |
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धारा 4(2) के अनुसार उपधारा (1) के अधीन नियुक्त अधिकारी किसके साधारण नियंत्रण और निदेशन के अधीन होंगे? |
केन्द्रीय सरकार के। |
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धारा 4(2) के अनुसार यदि केन्द्रीय सरकार निदेश दे तो उपधारा (1) के अधीन नियुक्त अधिकारी किसके साधारण नियंत्रण और निदेशन के अधीन होंगे? |
धारा 3 की उपधारा (3) के अधीन गठित प्राधिकरण या प्राधिकरणों, यदि कोई हों, अथवा किसी अन्य प्राधिकरण या अधिकारी के। |
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धारा 5 का विषय क्या है? |
निदेश देने की शक्ति। (Power to give directions) |
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धारा 5 के अनुसार केन्द्रीय सरकार किसे निदेश दे सकेगी? |
किसी व्यक्ति, अधिकारी या प्राधिकरण को। |
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धारा 5 के अनुसार केन्द्रीय सरकार किस प्रयोजन से निदेश दे सकेगी? |
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अधीन अपनी शक्तियों के प्रयोग और अपने कृत्यों के निर्वहन में। |
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धारा 5 के अनुसार निदेश देने की शक्ति किसके अधीन रहेगी? |
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के उपबंधों के अधीन। |
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धारा 5 के अनुसार निदेश देने की शक्ति पर किसी अन्य विधि का क्या प्रभाव होगा? |
किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी केन्द्रीय सरकार निदेश दे सकेगी। |
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धारा 5 के अनुसार निदेश प्राप्त व्यक्ति, अधिकारी या प्राधिकरण का क्या दायित्व होगा? |
ऐसे निदेशों का अनुपालन करना। |
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धारा 5 के स्पष्टीकरण के अनुसार निदेश देने की शक्ति में क्या सम्मिलित है? |
किसी उद्योग, संक्रिया या प्रक्रिया को बन्द करने, उसका प्रतिषेध या विनियमन करने की शक्ति। |
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धारा 5 के स्पष्टीकरण के अनुसार केन्द्रीय सरकार किसके बन्द, प्रतिषेध या विनियमन का निदेश दे सकती है? |
किसी उद्योग, संक्रिया या प्रक्रिया का। |
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धारा 5 के स्पष्टीकरण के अनुसार निदेश देने की शक्ति में और क्या सम्मिलित है? |
विद्युत्, जल या किसी अन्य सेवा के प्रदाय को रोकने या विनियमन करने की शक्ति। |
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धारा 5 के स्पष्टीकरण के अनुसार केन्द्रीय सरकार किन सेवाओं के प्रदाय को रोकने या विनियमित करने का निदेश दे सकती है? |
विद्युत्, जल या किसी अन्य सेवा के प्रदाय को। |
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धारा 5क का विषय क्या है? |
राष्ट्रीय हरित अधिकरण को अपील। (Appeal to the National Green Tribunal) |
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धारा 5क के अनुसार धारा 5 के अधीन जारी निदेशों से व्यथित व्यक्ति किसके समक्ष अपील फाइल कर सकेगा? |
राष्ट्रीय हरित अधिकरण के समक्ष। |
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धारा 5क के अनुसार राष्ट्रीय हरित अधिकरण किस अधिनियम की धारा 3 के अधीन स्थापित है? |
राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 की धारा 3 के अधीन। |
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धारा 5क के अनुसार अपील किसके उपबंधों के अनुसार फाइल की जाएगी? |
राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के उपबंधों के अनुसार। |
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धारा 5क के अनुसार किन निदेशों के विरुद्ध अपील की जा सकती है? |
धारा 5 के अधीन जारी निदेशों के विरुद्ध। |
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धारा 5क के अनुसार अपील करने का अधिकार किसे है? |
ऐसा व्यक्ति जो धारा 5 के अधीन जारी निदेशों से व्यथित है। |
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धारा 6 का विषय क्या है? |
पर्यावरण प्रदूषण का विनियमन करने के लिए नियम। (Rules to regulate environmental pollution) |
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धारा 6(1) के अनुसार केन्द्रीय सरकार किस माध्यम से नियम बना सकेगी? |
राजपत्र में अधिसूचना द्वारा। |
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धारा 6(1) के अनुसार केन्द्रीय सरकार किन विषयों की बाबत नियम बना सकेगी? |
धारा 3 में निर्दिष्ट सभी या किन्हीं विषयों की बाबत। |
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धारा 6(1) के अनुसार नियम बनाने की शक्ति किसके अधीन रहेगी? |
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के उपबंधों के अधीन। |
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धारा 6(2)(क) के अनुसार नियम किन मानकों के लिए उपबंध कर सकेंगे? |
विभिन्न क्षेत्रों और प्रयोजनों के लिए वायु, जल या मृदा की क्वालिटी के मानकों के लिए। |
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धारा 6(2)(ख) के अनुसार नियम किन सीमाओं के लिए उपबंध कर सकेंगे? |
भिन्न-भिन्न क्षेत्रों के लिए विभिन्न पर्यावरण प्रदूषकों, जिनके अंतर्गत शोर भी है, की सांद्रता की अधिकतम अनुज्ञेय सीमा के लिए। |
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धारा 6(2)(ग) के अनुसार नियम किसके लिए प्रक्रिया और रक्षोपाय का उपबंध कर सकेंगे? |
परिसंकटमय पदार्थों के हथालने के लिए। |
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धारा 6(2)(घ) के अनुसार नियम किस पर प्रतिषेध और निर्बन्धन का उपबंध कर सकेंगे? |
भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में परिसंकटमय पदार्थों के हथालने पर। |
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धारा 6(2)(ङ) के अनुसार नियम किस पर प्रतिषेध और निर्बन्धन का उपबंध कर सकेंगे? |
भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में प्रक्रिया और संक्रियाएं चलाने वाले उद्योगों के अवस्थान पर। |
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धारा 6(2)(च) के अनुसार नियम किसके लिए प्रक्रिया और रक्षोपाय का उपबंध कर सकेंगे? |
ऐसी दुर्घटनाओं के निवारण के लिए जिनसे पर्यावरण प्रदूषण हो सकता है तथा ऐसी दुर्घटनाओं के लिए उपचारी उपायों का उपबंध करने हेतु। |
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अध्याय-3 (Chapter-3) |
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पर्यावरण प्रदूषण का निवारण, नियंत्रण और उपशमन (Prevention, control, and abatement of environmental Pollution) |
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अध्याय 3 का विषय क्या है? |
पर्यावरण प्रदूषण का निवारण, नियंत्रण और उपशमन। (Prevention, control, and abatement of environmental Pollution) |
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धारा 7 का विषय क्या है? |
उद्योग चलाने, संक्रिया, आदि करने वाले व्यक्तियों द्वारा मानकों से अधिक पर्यावरण प्रदूषकों का उत्सर्जन या निस्सारण न होने देना। (Persons carrying on industry operation, etc, not to Allow emission or discharge of environmental pollutants In excess of the standards) |
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धारा 7 के अनुसार किन व्यक्तियों पर यह धारा लागू होती है? |
ऐसे व्यक्ति पर जो कोई उद्योग चलाता है या कोई संक्रिया या प्रक्रिया करता है। |
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धारा 7 के अनुसार कोई व्यक्ति किस सीमा से अधिक पर्यावरण प्रदूषकों का उत्सर्जन या निस्सारण नहीं करेगा? |
विहित मानकों से अधिक। |
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धारा 7 के अनुसार कौन-से मानकों से अधिक पर्यावरण प्रदूषकों का उत्सर्जन या निस्सारण वर्जित है? |
विहित किए गए मानकों से अधिक। |
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धारा 7 के अनुसार कोई व्यक्ति किस कार्य की अनुज्ञा नहीं देगा? |
विहित मानकों से अधिक किसी पर्यावरण प्रदूषक के उत्सर्जन या निस्सारण की। |
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धारा 8 का विषय क्या है? |
परिसंकटमय पदार्थों को हथालने वाले व्यक्तियों द्वारा प्रक्रिया संबंधी रक्षोपायों का पालन किया जाना। (Persons handling hazardous substances to comply with Procedural safeguards) |
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धारा 8 के अनुसार कोई व्यक्ति परिसंकटमय पदार्थ को किस प्रकार हथालेगा? |
विहित प्रक्रिया के अनुसार और विहित रक्षोपायों का अनुपालन करने के पश्चात्। |
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धारा 8 के अनुसार परिसंकटमय पदार्थों को हथालने के लिए क्या आवश्यक है? |
विहित प्रक्रिया का पालन तथा विहित रक्षोपायों का अनुपालन। |
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धारा 8 के अनुसार कोई व्यक्ति परिसंकटमय पदार्थ को कब हथाल सकता है? |
विहित प्रक्रिया के अनुसार और विहित रक्षोपायों का अनुपालन करने के पश्चात्। |
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धारा 8 के अनुसार कोई व्यक्ति परिसंकटमय पदार्थ को कब हथालने देगा? |
विहित प्रक्रिया के अनुसार और विहित रक्षोपायों का अनुपालन करने के पश्चात्। |
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धारा 8 के अनुसार विहित प्रक्रिया और रक्षोपायों का पालन किए बिना परिसंकटमय पदार्थ को हथालना या हथालने देना कैसा है? |
निषिद्ध है। |
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धारा 9 का विषय क्या है? |
कुछ मामलों में प्राधिकरणों और अभिकरणों को जानकारी का दिया जाना। (Furnishing of information to authorities and agencies in Certain cases) |
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धारा 9(1) के अनुसार यह धारा कब लागू होती है? |
जब किसी दुर्घटना या अन्य अप्रत्याशित कार्य या घटना के कारण किसी पर्यावरण प्रदूषक का निस्सारण विहित मानकों से अधिक होता है या होने की आशंका होती है। |
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धारा 9(1) के अनुसार निस्सारण के लिए उत्तरदायी व्यक्ति का क्या दायित्व है? |
निस्सारण के परिणामस्वरूप हुए पर्यावरण प्रदूषण का निवारण करना या उसे कम करना। |
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धारा 9(1) के अनुसार उस स्थान के भारसाधक व्यक्ति का क्या दायित्व है जहाँ निस्सारण होता है या होने की आशंका है? |
निस्सारण के परिणामस्वरूप हुए पर्यावरण प्रदूषण का निवारण करना या उसे कम करना। |
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धारा 9(1)(क) के अनुसार उत्तरदायी व्यक्ति या भारसाधक व्यक्ति किसकी जानकारी तुरन्त देगा? |
ऐसी घटना के तथ्य की या ऐसी घटना होने की आशंका की। |
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धारा 9(1)(क) के अनुसार जानकारी किसे दी जाएगी? |
ऐसे प्राधिकरणों या अभिकरणों को जो विहित किए जाएँ। |
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धारा 9(1)(ख) के अनुसार उत्तरदायी व्यक्ति या भारसाधक व्यक्ति किसके लिए आबद्ध होगा? |
यदि अपेक्षा की जाए तो सभी सहायता देने के लिए। |
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धारा 9(2) के अनुसार सूचना प्राप्त होने पर प्राधिकरण या अभिकरण क्या करेंगे? |
यावत्साध्य शीघ्र ऐसे उपचारी उपाय कराएंगे जो पर्यावरण प्रदूषण का निवारण करने या उसे कम करने के लिए आवश्यक हैं। |
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धारा 9(2) के अनुसार सूचना किस प्रकार प्राप्त हो सकती है? |
धारा 9(1) के अधीन जानकारी द्वारा या अन्यथा। |
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धारा 9(2) के अनुसार उपचारी उपाय किस प्रयोजन के लिए किए जाएंगे? |
पर्यावरण प्रदूषण का निवारण करने या उसे कम करने के लिए। |
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धारा 9(3) के अनुसार उपचारी उपाय करने में उपगत व्यय किससे वसूल किए जा सकेंगे? |
संबंधित व्यक्ति से। |
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धारा 9(3) के अनुसार उपगत व्यय किस प्रकार वसूल किए जा सकेंगे? |
भू-राजस्व की बकाया या लोक मांग के रूप में। |
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धारा 9(3) के अनुसार उपगत व्यय किसके सहित वसूल किए जा सकेंगे? |
सरकार द्वारा आदेश से नियत उचित दर के ब्याज सहित। |
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धारा 9(3) के अनुसार ब्याज किस अवधि के लिए देय होगा? |
व्ययों की मांग की तारीख से उनके संदाय की तारीख तक। |
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धारा 10 का विषय क्या है? |
प्रवेश और निरीक्षण की शक्तियां। (Powers of entry and inspection) |
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धारा 10(1) के अनुसार किसे प्रवेश और निरीक्षण का अधिकार होगा? |
केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त सशक्त किसी व्यक्ति को। |
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धारा 10(1) के अनुसार सशक्त व्यक्ति कब किसी स्थान में प्रवेश कर सकेगा? |
सभी युक्तियुक्त समयों पर। |
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धारा 10(1) के अनुसार सशक्त व्यक्ति किसके साथ प्रवेश कर सकेगा? |
ऐसी सहायता के साथ जिसे वह आवश्यक समझे। |
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धारा 10(1)(क) के अनुसार सशक्त व्यक्ति किस प्रयोजन से प्रवेश कर सकेगा? |
उसे सौंपे गए केन्द्रीय सरकार के कृत्यों में से किसी का पालन करने के लिए। |
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धारा 10(1)(ख) के अनुसार सशक्त व्यक्ति किस बात का अवधारण करने के लिए प्रवेश कर सकेगा? |
क्या कृत्यों का पालन किया जाना है, किस रीति से किया जाना है तथा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 नियमों, सूचना, आदेश, निदेश या प्राधिकार का पालन किया जा रहा है या किया गया है। |
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धारा 10(1)(ग) के अनुसार सशक्त व्यक्ति किनकी जांच या परीक्षा कर सकेगा? |
उपस्कर, औद्योगिक संयंत्र, अभिलेख, रजिस्टर, दस्तावेज या किसी अन्य सारवान् पदार्थ की। |
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धारा 10(1)(ग) के अनुसार सशक्त व्यक्ति कब किसी भवन की तलाशी ले सकेगा? |
जब उसे विश्वास करने का कारण हो कि वहाँ पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 या नियमों के अधीन कोई अपराध किया गया है, किया जा रहा है या किया जाने वाला है। |
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धारा 10(1)(ग) के अनुसार सशक्त व्यक्ति किन वस्तुओं का अभिग्रहण कर सकेगा? |
उपस्कर, औद्योगिक संयंत्र, अभिलेख, रजिस्टर, दस्तावेज या अन्य सारवान् पदार्थ का। |
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धारा 10(1)(ग) के अनुसार अभिग्रहण कब किया जा सकेगा? |
जब उससे अपराध का साक्ष्य मिलने का विश्वास हो या पर्यावरण प्रदूषण का निवारण अथवा उपशमन करने के लिए अभिग्रहण आवश्यक हो। |
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धारा 10(2) के अनुसार किन व्यक्तियों पर सहायता देने का दायित्व है? |
उद्योग चलाने वाले, संक्रिया या प्रक्रिया करने वाले अथवा परिसंकटमय पदार्थ हथालने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर। |
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धारा 10(2) के अनुसार सहायता किसे दी जाएगी? |
धारा 10(1) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा सशक्त व्यक्ति को। |
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धारा 10(2) के अनुसार सहायता न देने का परिणाम क्या होगा? |
युक्तियुक्त कारण या प्रतिहेतु के बिना सहायता न देने वाला व्यक्ति पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अधीन अपराध का दोषी होगा। |
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धारा 10(3) के अनुसार कौन व्यक्ति अपराध का दोषी होगा? |
जो केन्द्रीय सरकार द्वारा सशक्त व्यक्ति को उसके कृत्यों के निर्वहन में जानबूझकर विलम्ब करेगा या बाधा पहुँचाएगा। |
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धारा 10(3) के अनुसार किस कार्य को अपराध माना गया है? |
सशक्त व्यक्ति के कृत्यों के निर्वहन में जानबूझकर विलम्ब करना या बाधा पहुँचाना। |
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धारा 10(4) के अनुसार इस धारा के अधीन तलाशी या अभिग्रहण पर किस संहिता के उपबंध लागू होंगे? |
दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) के उपबंध, जहाँ तक हो सके। |
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धारा 10(4) के अनुसार दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) के उपबंध किस प्रकार लागू होंगे? |
जैसे वे दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 94 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 97) के अधीन जारी वारंट के प्राधिकार से की गई तलाशी या अभिग्रहण पर लागू होते हैं। |
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धारा 11 का विषय क्या है? |
नमूने लेने की शक्ति और उसके संबंध में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया। (Power to take sample and procedure to be followed in Connection therewith) |
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धारा 11(1) के अनुसार विश्लेषण के प्रयोजन के लिए नमूने लेने की शक्ति किसे होगी? |
केन्द्रीय सरकार या उसके द्वारा इस निमित्त सशक्त किसी अधिकारी को। |
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धारा 11(1) के अनुसार नमूने कहाँ से लिए जा सकते हैं? |
किसी कारखाने, परिसर या अन्य स्थान से। |
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धारा 11(1) के अनुसार किन पदार्थों के नमूने लिए जा सकते हैं? |
वायु, जल, मृदा या अन्य पदार्थ के। |
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धारा 11(1) के अनुसार नमूने किस रीति से लिए जाएंगे? |
विहित रीति से। |
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धारा 11(2) के अनुसार नमूने के विश्लेषण का परिणाम विधिक कार्यवाही में कब ग्राह्य होगा? |
जब धारा 11 (3) और (4) के उपबंधों का अनुपालन किया गया हो। |
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धारा 11(3)(क) के अनुसार नमूना लेने वाला व्यक्ति किसकी सूचना तुरन्त तामील करेगा? |
विश्लेषण कराने के अपने आशय की सूचना। |
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धारा 11(3)(क) के अनुसार सूचना किसे तामील की जाएगी? |
अधिष्ठाता, उसके अभिकर्ता या उस स्थान के भारसाधक व्यक्ति को। |
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धारा 11(3)(क) के अनुसार सूचना किस प्ररूप में दी जाएगी? |
विहित प्ररूप में। |
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धारा 11(3)(ख) के अनुसार नमूना किसकी उपस्थिति में लिया जाएगा? |
अधिष्ठाता, उसके अभिकर्ता या उस स्थान के भारसाधक व्यक्ति की उपस्थिति में। |
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धारा 11(3)(ग) के अनुसार नमूने के आधान के संबंध में क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी? |
नमूने को चिह्नित और सील बन्द आधान या आधानों में रखा जाएगा। |
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धारा 11(3)(ग) के अनुसार चिह्नित और सील बन्द आधान पर कौन हस्ताक्षर करेंगे? |
नमूना लेने वाला व्यक्ति तथा अधिष्ठाता, उसका अभिकर्ता या भारसाधक व्यक्ति। |
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धारा 11(3)(घ) के अनुसार नमूना किसे भेजा जाएगा? |
धारा 12 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित या मान्यताप्राप्त प्रयोगशाला को। |
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धारा 11(3)(घ) के अनुसार नमूना कब भेजा जाएगा? |
अविलम्ब। |
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धारा 11(4)(क) के अनुसार यदि अधिष्ठाता, उसका अभिकर्ता या भारसाधक व्यक्ति जानबूझकर अनुपस्थित रहे तो क्या किया जाएगा? |
नमूना चिह्नित और सील बन्द आधान या आधानों में रखा जाएगा तथा उन पर केवल नमूना लेने वाला व्यक्ति हस्ताक्षर करेगा। |
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धारा 11(4)(ख) के अनुसार यदि अधिष्ठाता, उसका अभिकर्ता या भारसाधक व्यक्ति हस्ताक्षर करने से इंकार करे तो चिह्नित और सील बन्द आधान पर कौन हस्ताक्षर करेगा? |
नमूना लेने वाला व्यक्ति। |
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धारा 11(4) के अनुसार ऐसी स्थिति में नमूना कहाँ भेजा जाएगा? |
धारा 12 के अधीन स्थापित या मान्यताप्राप्त प्रयोगशाला को विश्लेषण के लिए। |
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धारा 11(4) के अनुसार नमूना लेने वाला व्यक्ति सरकारी विश्लेषक को किस बात की लिखित जानकारी देगा? |
अधिष्ठाता, उसके अभिकर्ता या भारसाधक व्यक्ति के जानबूझकर अनुपस्थित रहने अथवा आधान या आधानों पर हस्ताक्षर करने से इंकार करने की। |
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धारा 11(4) के अनुसार सरकारी विश्लेषक किस धारा के अधीन नियुक्त या मान्यताप्राप्त होता है? |
धारा 13 के अधीन। |
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धारा 12 का विषय क्या है? |
पर्यावरण प्रयोगशालाएं। (Environmental laboratories) |
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धारा 12(1) के अनुसार केन्द्रीय सरकार पर्यावरण प्रयोगशालाओं की स्थापना किस माध्यम से कर सकेगी? |
राजपत्र में अधिसूचना द्वारा। |
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धारा 12(1)(क) के अनुसार केन्द्रीय सरकार क्या स्थापित कर सकेगी? |
एक या अधिक पर्यावरण प्रयोगशालाएं। |
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धारा 12(1)(ख) के अनुसार केन्द्रीय सरकार किन्हें पर्यावरण प्रयोगशालाओं के रूप में मान्यता दे सकेगी? |
एक या अधिक प्रयोगशालाओं या संस्थानों को। |
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धारा 12(1)(ख) के अनुसार प्रयोगशालाओं या संस्थानों को किस प्रयोजन के लिए पर्यावरण प्रयोगशालाओं के रूप में मान्यता दी जा सकेगी? |
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अधीन पर्यावरण प्रयोगशाला को सौंपे गए कृत्य करने के लिए। |
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धारा 12(2) के अनुसार केन्द्रीय सरकार किस माध्यम से नियम बना सकेगी? |
राजपत्र में अधिसूचना द्वारा। |
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धारा 12(2)(क) के अनुसार नियम किसके संबंध में बनाए जा सकेंगे? |
पर्यावरण प्रयोगशाला के कृत्यों के संबंध में। |
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धारा 12(2)(ख) के अनुसार नियम किन विषयों के संबंध में बनाए जा सकेंगे? |
विश्लेषण या परीक्षण के लिए वायु, जल, मृदा या अन्य पदार्थ के नमूने प्रयोगशाला को भेजने की प्रक्रिया, प्रयोगशाला की रिपोर्ट का प्ररूप तथा ऐसी रिपोर्ट के लिए संदेय फीस। |
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धारा 12(2)(ग) के अनुसार नियम किन अन्य विषयों के संबंध में बनाए जा सकेंगे? |
ऐसे विषय जो पर्यावरण प्रयोगशाला को अपने कृत्य करने के लिए समर्थ बनाने हेतु आवश्यक या समीचीन हों। |
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धारा 13 का विषय क्या है? |
सरकारी विश्लेषक। (Government analysts) |
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धारा 13 के अनुसार सरकारी विश्लेषक की नियुक्ति या मान्यता कौन करेगा? |
केन्द्रीय सरकार। |
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धारा 13 के अनुसार सरकारी विश्लेषक की नियुक्ति या मान्यता किस माध्यम से की जाएगी? |
राजपत्र में अधिसूचना द्वारा। |
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धारा 13 के अनुसार किन व्यक्तियों को सरकारी विश्लेषक नियुक्त या मान्यता दी जा सकेगी? |
ऐसे व्यक्तियों को जिन्हें केन्द्रीय सरकार ठीक समझे और जिनके पास विहित अर्हताएं हों। |
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धारा 13 के अनुसार सरकारी विश्लेषक की नियुक्ति या मान्यता किस प्रयोजन के लिए की जाएगी? |
धारा 12 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित या मान्यताप्राप्त पर्यावरण प्रयोगशाला को भेजे गए वायु, जल, मृदा या अन्य पदार्थ के नमूनों के विश्लेषण के लिए। |
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धारा 13 के अनुसार सरकारी विश्लेषक किन नमूनों का विश्लेषण करेगा? |
वायु, जल, मृदा या अन्य पदार्थ के नमूनों का। |
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धारा 13 के अनुसार नमूने किस प्रयोगशाला को भेजे गए होने चाहिए? |
धारा 12 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित या मान्यताप्राप्त पर्यावरण प्रयोगशाला को। |
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धारा 14 का विषय क्या है? |
सरकारी विश्लेषकों की रिपोर्ट। (Reports of government analysts) |
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धारा 14 के अनुसार सरकारी विश्लेषक द्वारा हस्ताक्षरित रिपोर्ट का क्या महत्व है? |
उसका पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अधीन किसी कार्यवाही में उसमें कथित तथ्यों के साक्ष्य के रूप में उपयोग किया जा सकेगा। |
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धारा 14 के अनुसार किस दस्तावेज का साक्ष्य के रूप में उपयोग किया जा सकेगा? |
ऐसी दस्तावेज का जिसका किसी सरकारी विश्लेषक द्वारा हस्ताक्षरित रिपोर्ट होना तात्पर्यत है। |
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धारा 14 के अनुसार सरकारी विश्लेषक की रिपोर्ट का उपयोग किस कार्यवाही में किया जा सकेगा? |
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अधीन किसी कार्यवाही में। |
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धारा 14 के अनुसार सरकारी विश्लेषक की रिपोर्ट किसके साक्ष्य के रूप में ग्राह्य होगी? |
उसमें कथित तथ्यों के साक्ष्य के रूप में। |
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धारा 15 का विषय क्या है? |
अधिनियमों तथा नियमों, आदेशों और निदेशों के उपबंधों के उल्लंघन के लिए शास्ति। (Penalty for contravention of the provisions of the act And the rules, orders and directions) |
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धारा 15(1) के अनुसार कौन दण्डनीय होगा? |
जो पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के उपबंधों, इसके अधीन बनाए गए नियमों, निकाले गए आदेशों या दिए गए निदेशों का पालन करने में असफल रहेगा या उनका उल्लंघन करेगा। |
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धारा 15(1) के अनुसार प्रथम असफलता या उल्लंघन के लिए अधिकतम कारावास कितना है? |
पांच वर्ष तक का। |
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धारा 15(1) के अनुसार प्रथम असफलता या उल्लंघन के लिए अधिकतम जुर्माना कितना है? |
एक लाख रुपए तक का। |
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धारा 15(1) के अनुसार यदि असफलता या उल्लंघन चालू रहता है तो अतिरिक्त जुर्माना कितना हो सकेगा? |
दोषसिद्धि के पश्चात् प्रत्येक दिन के लिए पांच हजार रुपए तक का। |
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धारा 15(1) के अनुसार अतिरिक्त जुर्माना कब से देय होगा? |
प्रथम असफलता या उल्लंघन के लिए दोषसिद्धि के पश्चात् प्रत्येक दिन के लिए, जब तक असफलता या उल्लंघन चालू रहे। |
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धारा 15(2) के अनुसार यदि असफलता या उल्लंघन दोषसिद्धि की तारीख के पश्चात् एक वर्ष से आगे भी चालू रहता है तो अधिकतम कारावास कितना होगा? |
सात वर्ष तक का। |
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धारा 15(2) के अनुसार सात वर्ष तक के कारावास का प्रावधान कब लागू होता है? |
जब धारा 15(1) में निर्दिष्ट असफलता या उल्लंघन दोषसिद्धि की तारीख के पश्चात् एक वर्ष की अवधि से आगे भी चालू रहे। |
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धारा 16 का विषय क्या है? |
कंपनियों द्वारा अपराध। (Offences by companies) |
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धारा 16(1) के अनुसार यदि पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया जाता है तो कौन दोषी समझे जाएंगे? |
कंपनी तथा प्रत्येक व्यक्ति जो अपराध के समय कंपनी के कारबार के संचालन के लिए सीधे भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था। |
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धारा 16(1) के अनुसार कंपनी के साथ कौन कार्यवाही और दंड का भागी होगा? |
प्रत्येक व्यक्ति जो अपराध के समय कंपनी के कारबार के संचालन के लिए सीधे भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था। |
|
धारा 16(1) के परन्तुक के अनुसार भारसाधक व्यक्ति कब दंड का भागी नहीं होगा? |
जब वह यह सिद्ध कर दे कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने अपराध के निवारण के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी। |
|
धारा 16(1) के अनुसार भारसाधक व्यक्ति कौन-से दो आधारों पर दायित्व से मुक्त हो सकता है? |
अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था अथवा उसने उसके निवारण के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी। |
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धारा 16(2) के अनुसार कंपनी का निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी कब दोषी समझा जाएगा? |
जब अपराध उसकी सहमति, मौनानुकूलता या उपेक्षा के कारण किया गया हो। |
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धारा 16(2) के अनुसार किन व्यक्तियों पर व्यक्तिगत दायित्व आरोपित किया जा सकता है? |
कंपनी के निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी पर। |
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धारा 16(2) के अनुसार निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी किस स्थिति में कार्यवाही और दंड का भागी होगा? |
जब अपराध उसकी सहमति, मौनानुकूलता या उपेक्षा के कारण किया गया हो। |
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धारा 16 के स्पष्टीकरण (क) के अनुसार "कंपनी" से क्या अभिप्रेत है? |
कोई निगमित निकाय तथा इसके अंतर्गत फर्म या व्यक्तियों का अन्य संगम। |
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धारा 16 के स्पष्टीकरण (ख) के अनुसार फर्म के संबंध में "निदेशक" से क्या अभिप्रेत है? |
उस फर्म का भागीदार। |
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धारा 17 का विषय क्या है? |
सरकारी विभागों द्वारा अपराध। (Offences by government departments) |
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धारा 17(1) के अनुसार यदि पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अधीन कोई अपराध सरकार के किसी विभाग द्वारा किया जाता है तो कौन दोषी समझा जाएगा? |
विभागाध्यक्ष। |
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धारा 17(1) के अनुसार विभाग द्वारा किए गए अपराध के लिए कौन कार्यवाही और दंड का भागी होगा? |
विभागाध्यक्ष। |
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धारा 17(1) के परन्तुक के अनुसार विभागाध्यक्ष कब दंड का भागी नहीं होगा? |
जब वह यह सिद्ध कर दे कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी। |
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धारा 17(1) के अनुसार विभागाध्यक्ष किन दो आधारों पर दायित्व से मुक्त हो सकता है? |
अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था अथवा उसने उसके निवारण के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी। |
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धारा 17(2) के अनुसार विभागाध्यक्ष से भिन्न अधिकारी कब दोषी समझा जाएगा? |
जब यह सिद्ध हो जाए कि अपराध उसकी सहमति, मौनानुकूलता या उपेक्षा के कारण किया गया है। |
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धारा 17(2) के अनुसार विभागाध्यक्ष से भिन्न कौन-सा अधिकारी कार्यवाही और दंड का भागी होगा? |
वह अधिकारी जिसकी सहमति, मौनानुकूलता या उपेक्षा के कारण अपराध किया गया हो। |
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धारा 17(2) के अनुसार विभागाध्यक्ष से भिन्न अधिकारी पर व्यक्तिगत दायित्व कब आरोपित होगा? |
जब अपराध उसकी सहमति, मौनानुकूलता या उपेक्षा के कारण किया गया हो। |
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अध्याय-4 (Chapter-4) |
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प्रकीर्ण (Miscellaneous) |
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अध्याय 4 का विषय क्या है? |
प्रकीर्ण। (Miscellaneous) |
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धारा 18 का विषय क्या है? |
सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण। Protection of action taken in good faith |
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धारा 18 के अनुसार किस प्रकार की कार्रवाई के लिए संरक्षण प्रदान किया गया है? |
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 इसके अधीन बनाए गए नियमों, निकाले गए आदेशों या दिए गए निदेशों के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित कार्रवाई के लिए। |
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धारा 18 के अनुसार किनके विरुद्ध वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं होगी? |
सरकार, सरकार के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अधीन गठित किसी प्राधिकरण या ऐसे प्राधिकरण के किसी सदस्य, अधिकारी या अन्य कर्मचारी के विरुद्ध। |
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धारा 18 के अनुसार संरक्षण किन कार्यों के संबंध में उपलब्ध है? |
सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित कार्रवाई के संबंध में। |
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धारा 18 के अनुसार सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई किसके अनुसरण में होनी चाहिए? |
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, इसके अधीन बनाए गए नियमों, निकाले गए आदेशों या दिए गए निदेशों के अनुसरण में। |
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धारा 19 का विषय क्या है? |
अपराधों का संज्ञान। (Cognizance of offences) |
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धारा 19 के अनुसार पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अधीन अपराध का संज्ञान कौन करेगा? |
न्यायालय। |
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धारा 19 के अनुसार न्यायालय अपराध का संज्ञान किस आधार पर करेगा? |
परिवाद पर। |
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धारा 19(क) के अनुसार परिवाद कौन कर सकता है? |
केन्द्रीय सरकार या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई प्राधिकरण या अधिकारी। |
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धारा 19(ख) के अनुसार कोई अन्य व्यक्ति कब परिवाद कर सकता है? |
जब उसने अभिकथित अपराध की तथा परिवाद करने के अपने आशय की विहित रीति से कम से कम साठ दिन की सूचना केन्द्रीय सरकार या प्राधिकृत प्राधिकरण या अधिकारी को दे दी हो। |
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धारा 19(ख) के अनुसार परिवाद करने से पूर्व कितने दिन की सूचना देना आवश्यक है? |
कम से कम साठ दिन की। |
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धारा 19(ख) के अनुसार साठ दिन की सूचना किसे दी जाएगी? |
केन्द्रीय सरकार या उसके द्वारा प्राधिकृत प्राधिकरण या अधिकारी को। |
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धारा 19(ख) के अनुसार सूचना किन विषयों की दी जाएगी? |
अभिकथित अपराध की तथा परिवाद करने के अपने आशय की। |
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धारा 20 का विषय क्या है? |
जानकारी, रिपोर्ट या विवरणियां। (Information, reports or returns) |
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धारा 20 के अनुसार केन्द्रीय सरकार किस प्रयोजन से जानकारी, रिपोर्ट या विवरणियां मांग सकेगी? |
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अधीन अपने कृत्यों के संबंध में। |
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धारा 20 के अनुसार केन्द्रीय सरकार किनसे जानकारी, रिपोर्ट या विवरणियां मांग सकेगी? |
किसी व्यक्ति, अधिकारी, राज्य सरकार या अन्य प्राधिकरण से। |
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धारा 20 के अनुसार केन्द्रीय सरकार जानकारी, रिपोर्ट या विवरणियां किसे देने की अपेक्षा कर सकेगी? |
अपने को या किसी विहित प्राधिकरण या अधिकारी को। |
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धारा 20 के अनुसार केन्द्रीय सरकार किन-किन प्रकार की सूचनाएं मांग सकेगी? |
रिपोर्ट, विवरणियां, आंकड़े, लेखे और अन्य जानकारी। |
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धारा 20 के अनुसार जानकारी, रिपोर्ट या विवरणियां किस अवधि पर मांगी जा सकती हैं? |
समय-समय पर। |
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धारा 20 के अनुसार जानकारी, रिपोर्ट, विवरणियां, आंकड़े, लेखे और अन्य जानकारी देने के लिए कौन आबद्ध होगा? |
संबंधित व्यक्ति, अधिकारी, राज्य सरकार या अन्य प्राधिकरण। |
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धारा 21 का विषय क्या है? |
धारा 3 के अधीन गठित प्राधिकरण के सदस्यों, अधिकारियों और कर्मचारियों का लोक सेवक होना। (Members, officers and employees of the authority Constituted under section 3 to be public servants) |
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धारा 21 के अनुसार लोक सेवक कौन समझे जाएंगे? |
धारा 3 के अधीन गठित प्राधिकरण के सभी सदस्य, अधिकारी और अन्य कर्मचारी। |
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धारा 21 के अनुसार धारा 3 के अधीन गठित प्राधिकरण के सदस्य, अधिकारी और कर्मचारी कब लोक सेवक समझे जाएंगे? |
जब वे पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, इसके अधीन बनाए गए नियम, निकाले गए आदेश या दिए गए निदेश के अनुसरण में कार्य कर रहे हों या ऐसा कार्य करना तात्पर्यत हो। |
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धारा 21 के अनुसार धारा 3 के अधीन गठित प्राधिकरण के सदस्य, अधिकारी और कर्मचारी किस धारा के अर्थ में लोक सेवक समझे जाएंगे? |
भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 21 (भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 2(28) के अर्थ में। |
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धारा 21 के अनुसार किनके सभी सदस्य, अधिकारी और अन्य कर्मचारी लोक सेवक समझे जाएंगे? |
धारा 3 के अधीन गठित प्राधिकरण के। |
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धारा 22 का विषय क्या है? |
अधिकारिता का वर्जन। (Bar of jurisdiction) |
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धारा 22 के अनुसार किस न्यायालय की अधिकारिता वर्जित है? |
सिविल न्यायालय की। |
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धारा 22 के अनुसार सिविल न्यायालय किस संबंध में कोई वाद या कार्यवाही ग्रहण नहीं करेगा? |
केन्द्रीय सरकार या किसी अन्य प्राधिकरण या अधिकारी द्वारा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अधीन की गई किसी बात, कार्रवाई, निकाले गए आदेश या दिए गए निदेश के संबंध में। |
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धारा 22 के अनुसार केन्द्रीय सरकार द्वारा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अधीन की गई किन-किन बातों के संबंध में सिविल न्यायालय को अधिकारिता नहीं होगी? |
किसी बात, कार्रवाई, निकाले गए आदेश या दिए गए निदेश के संबंध में। |
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धारा 22 के अनुसार सिविल न्यायालय की अधिकारिता किस शक्ति के अनुसरण में की गई कार्रवाई पर वर्जित है? |
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 द्वारा प्रदत्त किसी शक्ति के अनुसरण में की गई कार्रवाई पर। |
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धारा 23 का विषय क्या है? |
प्रत्यायोजन करने की शक्ति। (Powers to delegate) |
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धारा 23 के अनुसार प्रत्यायोजन करने की शक्ति किसके पास है? |
केन्द्रीय सरकार के पास। |
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धारा 23 के अनुसार केन्द्रीय सरकार प्रत्यायोजन किस माध्यम से कर सकेगी? |
राजपत्र में अधिसूचना द्वारा। |
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धारा 23 के अनुसार प्रत्यायोजन किनके अधीन किया जा सकेगा? |
अधिसूचना में विनिर्दिष्ट शर्तों और निर्बन्धनों के अधीन। |
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धारा 23 के अनुसार केन्द्रीय सरकार अपनी शक्तियां और कृत्य किन्हें प्रत्यायोजित कर सकेगी? |
किसी अधिकारी, राज्य सरकार या प्राधिकरण को। |
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धारा 23 के अनुसार प्रत्यायोजन किसके अधीन रहते हुए किया जाएगा? |
धारा 3 की उपधारा (3) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना। |
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धारा 23 के अनुसार केन्द्रीय सरकार किन शक्तियों का प्रत्यायोजन नहीं कर सकेगी? |
धारा 3 की उपधारा (3) के अधीन प्राधिकरण का गठन करने तथा धारा 25 के अधीन नियम बनाने की शक्ति का। |
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धारा 23 के अनुसार केन्द्रीय सरकार किन शक्तियों और कृत्यों का प्रत्यायोजन कर सकेगी? |
ऐसी शक्तियों और कृत्यों का जिन्हें वह आवश्यक या समीचीन समझे। |
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धारा 24 का विषय क्या है? |
अन्य विधियों का प्रभाव। (Effect of other laws) |
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धारा 24(1) के अनुसार पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 और इसके अधीन बनाए गए नियमों या निकाले गए आदेशों के उपबंध कब प्रभावी होंगे? |
धारा 24(2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 से भिन्न किसी अधिनियमिति में उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी। |
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धारा 24(1) के अनुसार पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के उपबंध किस पर अधिभावी प्रभाव रखते हैं? |
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 से भिन्न किसी अधिनियमिति में उससे असंगत किसी बात पर। |
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धारा 24(1) के अनुसार पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के साथ किनके उपबंध प्रभावी होंगे? |
इसके अधीन बनाए गए नियमों और निकाले गए आदेशों के उपबंध। |
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धारा 24(2) के अनुसार यदि कोई कार्य या लोप पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 तथा किसी अन्य अधिनियम दोनों के अधीन दण्डनीय हो तो अपराधी किस अधिनियम के अधीन दण्डित होगा? |
अन्य अधिनियम के अधीन। |
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धारा 24(2) के अनुसार यदि अपराध पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 तथा किसी अन्य अधिनियम दोनों के अधीन दण्डनीय हो तो क्या पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अधीन दण्ड दिया जाएगा? |
नहीं, अपराधी अन्य अधिनियम के अधीन दण्डित किया जाएगा। |
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धारा 25 का विषय क्या है? |
नियम बनाने की शक्ति। (Power to make rules) |
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धारा 25(1) के अनुसार नियम बनाने की शक्ति किसके पास है? |
केन्द्रीय सरकार के पास। |
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धारा 25(1) के अनुसार केन्द्रीय सरकार नियम किस प्रयोजन के लिए बनाएगी? |
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए। |
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धारा 25(1) के अनुसार केन्द्रीय सरकार नियम किस माध्यम से बनाएगी? |
राजपत्र में अधिसूचना द्वारा। |
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धारा 25(2)(क) के अनुसार नियम किन मानकों के संबंध में बनाए जा सकेंगे? |
वे मानक जिनसे अधिक पर्यावरण प्रदूषकों का धारा 7 के अधीन निस्सारण या उत्सर्जन नहीं किया जाएगा। |
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धारा 25(2)(ख) के अनुसार नियम किसके संबंध में बनाए जा सकेंगे? |
वह प्रक्रिया तथा रक्षोपाय जिनके अनुसार धारा 8 के अधीन परिसंकटमय पदार्थों को हथाला जाएगा या हथलवाया जाएगा। |
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धारा 25(2)(ग) के अनुसार नियम किनके संबंध में बनाए जा सकेंगे? |
वे प्राधिकरण या अभिकरण जिन्हें धारा 9(1) के अधीन विहित मानकों से अधिक पर्यावरण प्रदूषकों के निस्सारण या उसकी आशंका की सूचना दी जाएगी तथा जिन्हें सभी सहायता दी जाएगी। |
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धारा 25(2)(घ) के अनुसार नियम किसके संबंध में बनाए जा सकेंगे? |
वह रीति जिससे धारा 11(1) के अधीन वायु, जल, मृदा या अन्य पदार्थों के नमूने लिए जाएंगे। |
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धारा 25(2)(ङ) के अनुसार नियम किसके संबंध में बनाए जा सकेंगे? |
वह प्ररूप जिसमें धारा 11(3)(क) के अधीन नमूने के विश्लेषण कराने के आशय की सूचना दी जाएगी। |
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धारा 25(2)(च) के अनुसार नियम किन विषयों के संबंध में बनाए जा सकेंगे? |
पर्यावरण प्रयोगशालाओं के कृत्य, नमूने भेजने की प्रक्रिया, प्रयोगशाला रिपोर्ट का प्ररूप, रिपोर्ट की संदेय फीस तथा प्रयोगशालाओं को अपने कृत्य करने के लिए समर्थ बनाने वाले अन्य विषय। |
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धारा 25(2)(छ) के अनुसार नियम किसके संबंध में बनाए जा सकेंगे? |
धारा 13 के अधीन नियुक्त या मान्यताप्राप्त सरकारी विश्लेषक की अर्हताओं के संबंध में। |
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धारा 25(2)(ज) के अनुसार नियम किसके संबंध में बनाए जा सकेंगे? |
वह रीति जिससे धारा 19(ख) के अधीन अपराध की तथा परिवाद करने के आशय की सूचना दी जाएगी। |
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धारा 25(2)(झ) के अनुसार नियम किसके संबंध में बनाए जा सकेंगे? |
वह प्राधिकरण या अधिकारी जिसे धारा 20 के अधीन रिपोर्ट, विवरणियां, आंकड़े, लेखे और अन्य जानकारी दी जाएगी। |
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धारा 25(2)(ञ) के अनुसार नियम किन अन्य विषयों के संबंध में बनाए जा सकेंगे? |
ऐसे अन्य विषय जिनका विहित किया जाना अपेक्षित है या किया जाए। |
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धारा 26 का विषय क्या है? |
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अधीन बनाए गए नियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना। |
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धारा 26 के अनुसार पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम कब संसद् के समक्ष रखा जाएगा? |
बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र। |
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धारा 26 के अनुसार प्रत्येक नियम संसद् के किसके समक्ष रखा जाएगा? |
संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष। |
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धारा 26 के अनुसार नियम संसद् के समक्ष कुल कितने दिनों की अवधि के लिए रखा जाएगा? |
कुल तीस दिन की अवधि के लिए। |
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धारा 26 के अनुसार तीस दिन की अवधि किस प्रकार पूरी हो सकेगी? |
एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में। |
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धारा 26 के अनुसार दोनों सदन यदि नियम में परिवर्तन के लिए सहमत हो जाएं तो नियम किस रूप में प्रभावी होगा? |
परिवर्तित रूप में। |
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धारा 26 के अनुसार दोनों सदन यदि सहमत हो जाएं कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो उसका क्या प्रभाव होगा? |
वह निष्प्रभाव हो जाएगा। |
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धारा 26 के अनुसार नियम के परिवर्तित या निष्प्रभाव होने का पहले की गई कार्यवाही पर क्या प्रभाव पड़ेगा? |
उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। |
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