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भारतीय आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम, 1908 (THE INDIAN CRIMINAL LAW AMENDMENT ACT, 1908) |
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अधिनियम संख्या 14, 1908 (ACT NO. 14 OF 1908) |
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इस अधिनियम का नाम क्या है? |
भारतीय आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम, 1908 (The Indian Criminal Law Amendment Act, 1908) |
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भारतीय आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम, 1908 का अधिनियम संख्या क्या है? |
अधिनियम संख्या 14, 1908 (Act No. 14 Of 1908) |
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भारतीय आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम, 1908 कब पारित हुआ? |
11 दिसंबर, 1908 [11th December, 1908.] |
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भारतीय आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम, 1908 का प्रमुख उद्देश्य क्या है? |
कुछ अपराधों के शीघ्र निपटारे तथा सार्वजनिक शांति के लिए हानिकारक संगठनों पर प्रतिबंध लगाने के लिए प्रावधान करना। |
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भारतीय आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम, 1908 किन संगठनों पर प्रतिबंध लगाने के लिए बनाया गया है? |
सार्वजनिक शांति के लिए हानिकारक संगठनों पर। |
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भारतीय आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम, 1908 में किस प्रकार के अपराधों के निपटारे का प्रावधान किया गया है? |
कुछ अपराधों के शीघ्र निपटारे का। |
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प्रस्तावना के अनुसार भारतीय आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम, 1908 को बनाने की आवश्यकता क्यों हुई? |
क्योंकि कुछ अपराधों के शीघ्र निपटारे तथा सार्वजनिक शांति के लिए हानिकारक संगठनों पर प्रतिबंध लगाने के लिए प्रावधान करना आवश्यक था। |
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धारा 1 का विषय क्या है? |
संक्षिप्त नाम एवं विस्तार। (Short title and extent) |
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धारा 1(1) के अनुसार इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम क्या है? |
भारतीय आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम, 1908। |
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धारा 1(2) के अनुसार भारतीय आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम, 1908 किन राज्यों पर लागू होता है? |
भारत के सभी राज्यों पर, सिवाय उन क्षेत्रों के जो 1 नवम्बर, 1956 से ठीक पहले भाग 'बी' राज्यों में सम्मिलित थे। |
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धारा 1(2) के अनुसार भारतीय आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम, 1908 से कौन-से क्षेत्र अपवर्जित हैं? |
वे क्षेत्र जो 1 नवम्बर, 1956 से ठीक पहले भाग 'बी' राज्यों में सम्मिलित थे। |
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धारा 1(3) के अनुसार भारतीय आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम, 1908 किन क्षेत्रों पर लागू होता है? |
असम तथा वे क्षेत्र जो 1 नवम्बर, 1956 से ठीक पहले पश्चिम बंगाल राज्य में सम्मिलित थे। |
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धारा 1(3) के अनुसार किसी राज्य में भारतीय आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम, 1908 को लागू करने की शक्ति किसके पास है? |
राज्य सरकार के पास। |
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धारा 1(3) के अनुसार राज्य सरकार भारतीय आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम, 1908 को किस माध्यम से लागू कर सकती है? |
राजपत्र में अधिसूचना द्वारा। |
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धारा 1(3) के अनुसार राज्य सरकार भारतीय आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम, 1908 को किस सीमा तक लागू कर सकती है? |
पूर्णतः अथवा इसके किसी भाग को। |
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धारा 1(3) के अनुसार राज्य सरकार भारतीय आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम, 1908 को किन क्षेत्रों में लागू कर सकती है? |
अपने प्रशासन के अधीन उन क्षेत्रों में जिन पर भारतीय आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम, 1908 लागू किया जा सकता है। |
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भाग-I (PART-I) |
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विशेष प्रक्रिया (SPECIAL PROCEDURE) |
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भारतीय आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम, 1908 के भाग 1 को किस अधिनियम द्वारा निरसित किया गया? |
भारतीय आपराधिक विधि संशोधन निरसन अधिनियम, 1922। |
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भारतीय आपराधिक विधि संशोधन निरसन अधिनियम, 1922 की किस धारा द्वारा भाग 1 निरसित किया गया? |
धारा 3 द्वारा। |
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भारतीय आपराधिक विधि संशोधन निरसन अधिनियम, 1922 का अधिनियम संख्या क्या है? |
अधिनियम संख्या 5, 1922। |
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भारतीय आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम, 1908 के भाग 1 के अंतर्गत किन किन धाराओं को निरसित किया गया? |
धारा 2 से धारा 14 तक सभी धाराओं को जिनमे ये दोनों भी शामिल हैं |
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भाग-II (PART-II) |
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गैरकानूनी संगठन (UNLAWFUL ASSOCIATIONS) |
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धारा 15 का विषय क्या है? |
परिभाषाएँ। (Definitions) |
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धारा 15(1) के अनुसार "संघ" से क्या अभिप्रेत है? |
व्यक्तियों का कोई संयोजन या समूह, चाहे वह किसी विशिष्ट नाम से जाना जाता हो या नहीं। |
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धारा 15(1) के अनुसार क्या किसी विशिष्ट नाम के बिना व्यक्तियों का समूह भी "संघ" कहलाता है? |
हाँ। |
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धारा 15(2) के अनुसार "गैरकानूनी संगठन" से क्या अभिप्रेत है? |
ऐसा संगठन जो धारा 15(2)(क) या धारा 15(2)(ख) के अंतर्गत आता हो। |
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धारा 15(2)(क) के अनुसार कौन-सा संगठन "गैरकानूनी संगठन" है? |
जो व्यक्तियों को हिंसा या धमकी के कृत्य करने के लिए प्रोत्साहित या सहायता करता है अथवा जिसके सदस्य आदतन ऐसे कृत्य करते हैं। |
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धारा 15(2)(क) के अनुसार क्या हिंसा या धमकी के कृत्यों को प्रोत्साहित करने वाला संगठन "गैरकानूनी संगठन" है? |
हाँ। |
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धारा 15(2)(क) के अनुसार क्या हिंसा या धमकी के कृत्यों में आदतन संलग्न सदस्यों वाला संगठन "गैरकानूनी संगठन" है? |
हाँ। |
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धारा 15(2)(ख) के अनुसार कौन-सा संगठन "गैरकानूनी संगठन" है? |
जिसे राज्य सरकार भारतीय आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम, 1908 के अधीन गैरकानूनी घोषित करे। |
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धारा 16 का विषय क्या है? |
संघ को गैरकानूनी घोषित करने की शक्ति। (Power to declare association unlawful) |
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धारा 16(1) के अनुसार किसी संघ को गैरकानूनी घोषित करने की शक्ति किसके पास है? |
राज्य सरकार के पास। |
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धारा 16(1) के अनुसार राज्य सरकार किसी संघ को किस माध्यम से गैरकानूनी घोषित कर सकती है? |
आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा। |
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धारा 16(1) के अनुसार राज्य सरकार कब किसी संघ को गैरकानूनी घोषित कर सकती है? |
जब उसकी राय में वह संघ कानून के प्रशासन या कानून एवं व्यवस्था के रखरखाव में हस्तक्षेप करता है, हस्तक्षेप करने का उद्देश्य रखता है, अथवा सार्वजनिक शांति के लिए खतरा है। |
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धारा 16(1) के अनुसार यदि कोई संघ सार्वजनिक शांति के लिए खतरा हो तो राज्य सरकार क्या कर सकती है? |
उसे गैरकानूनी घोषित कर सकती है। |
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धारा 16(1) के अनुसार यदि कोई संघ कानून एवं व्यवस्था के रखरखाव में हस्तक्षेप करता है या उसका उद्देश्य हस्तक्षेप करना है तो राज्य सरकार क्या कर सकती है? |
उसे गैरकानूनी घोषित कर सकती है। |
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धारा 17 का विषय क्या है? |
दंड। (Penalties) |
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धारा 17(1) के अनुसार गैरकानूनी संगठन का सदस्य होने पर क्या दंड है? |
छह माह तक का कारावास या जुर्माना या दोनों। |
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धारा 17(1) के अनुसार गैरकानूनी संगठन की बैठकों में भाग लेने पर क्या दंड है? |
छह माह तक का कारावास या जुर्माना या दोनों। |
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धारा 17(1) के अनुसार गैरकानूनी संगठन के उद्देश्य से योगदान देने, प्राप्त करने या मांगने पर क्या दंड है? |
छह माह तक का कारावास या जुर्माना या दोनों। |
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धारा 17(1) के अनुसार गैरकानूनी संगठन के संचालन में किसी भी प्रकार से सहायता करने पर क्या दंड है? |
छह माह तक का कारावास या जुर्माना या दोनों। |
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धारा 17(1) के अनुसार अधिकतम कारावास की अवधि कितनी है? |
छह माह। |
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धारा 17(2) के अनुसार गैरकानूनी संगठन का प्रबंधन करने पर क्या दंड है? |
तीन वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों। |
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धारा 17(2) के अनुसार गैरकानूनी संगठन के प्रबंधन में सहायता करने पर क्या दंड है? |
तीन वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों। |
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धारा 17(2) के अनुसार गैरकानूनी संगठन की बैठक को बढ़ावा देने या बढ़ावा देने में सहायता करने पर क्या दंड है? |
तीन वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों। |
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धारा 17(2) के अनुसार गैरकानूनी संगठन के सदस्यों की बैठक को सदस्यों के रूप में बढ़ावा देने पर क्या दंड है? |
तीन वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों। |
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धारा 17(2) के अनुसार अधिकतम कारावास की अवधि कितनी है? |
तीन वर्ष। |
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धारा 17(3) के अनुसार उपधारा (1) के अधीन अपराध किस प्रकृति का है? |
संज्ञेय एवं गैर-जमानती। |
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धारा 17(3) के अनुसार उपधारा (1) के अधीन अपराध किसके द्वारा संज्ञेय होगा? |
पुलिस द्वारा। |
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धारा 17(3) के अनुसार दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) में किसी बात के होते हुए भी उपधारा (1) का अपराध कैसा होगा? |
गैर-जमानती। |
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धारा 17(क) का विषय क्या है? |
गैर-कानूनी संगठन के उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली जगहों को अधिसूचित करने और उनका कब्ज़ा लेने की शक्ति। (Power to notify and take possession of places used for the purposes of an unlawful association) |
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धारा 17(क)(1) के अनुसार किसी स्थान को अधिसूचित करने की शक्ति किसके पास है? |
राज्य सरकार के पास। |
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धारा 17(क)(1) के अनुसार राज्य सरकार किसी स्थान को किस माध्यम से अधिसूचित कर सकती है? |
आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा। |
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धारा 17(क)(1) के अनुसार राज्य सरकार किस प्रकार के स्थान को अधिसूचित कर सकती है? |
जो उसकी राय में गैरकानूनी संघ के प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त होता है। |
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धारा 17(क) के स्पष्टीकरण के अनुसार "स्थान" में क्या-क्या सम्मिलित है? |
घर या इमारत, उसका कोई भाग, तम्बू अथवा पोत। |
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धारा 17(क) के स्पष्टीकरण के अनुसार क्या "स्थान" में तम्बू भी सम्मिलित है? |
हाँ। |
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धारा 17(क) के स्पष्टीकरण के अनुसार क्या "स्थान" में पोत भी सम्मिलित है? |
हाँ। |
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धारा 17(क)(2) के अनुसार अधिसूचित स्थान का कब्ज़ा कौन ले सकता है? |
जिला मजिस्ट्रेट, प्रेसीडेंसी नगर में पुलिस आयुक्त, अथवा उनके द्वारा लिखित रूप से अधिकृत अधिकारी। |
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धारा 17(क)(2) के अनुसार अधिसूचित स्थान से व्यक्तियों को बेदखल करने की शक्ति किसके पास है? |
जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस आयुक्त अथवा उनके द्वारा लिखित रूप से अधिकृत अधिकारी के पास। |
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धारा 17(क)(2) के अनुसार अधिसूचित स्थान का कब्ज़ा लेने के बाद किसे तत्काल सूचना दी जाएगी? |
राज्य सरकार को। |
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धारा 17(क)(2) के परन्तुक के अनुसार यदि अधिसूचित स्थान में महिलाओं या बच्चों द्वारा कब्जा किया गया अपार्टमेंट हो तो क्या सुविधा दी जाएगी? |
उन्हें कम से कम असुविधा के साथ स्थान खाली करने हेतु उचित समय और सुविधाएँ प्रदान की जाएँगी। |
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धारा 17(क)(3) के अनुसार अधिसूचित स्थान सरकार के कब्जे में कब तक माना जाएगा? |
जब तक उसके संबंध में धारा 17(क)(1) के अधीन अधिसूचना प्रभावी रहती है। |
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धारा 17(ख) का विषय क्या है? |
अधिसूचित स्थान पर पाई गई चल संपत्ति। (Movable property found in a notified place) |
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धारा 17(ख)(1) के अनुसार अधिसूचित स्थान पर पाई गई चल संपत्ति पर कब्ज़ा कौन लेगा? |
जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस आयुक्त या अधिसूचित स्थान पर कब्ज़ा लेने वाला अधिकारी। |
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धारा 17(ख)(1) के अनुसार चल संपत्ति की सूची कितने सम्मानित गवाहों की उपस्थिति में बनाई जाएगी? |
दो सम्मानित गवाहों की उपस्थिति में। |
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धारा 17(ख)(2) के अनुसार चल संपत्ति को सरकार के पक्ष में जब्त करने का आदेश कौन दे सकता है? |
जिला मजिस्ट्रेट या प्रेसीडेंसी नगर का पुलिस आयुक्त। |
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धारा 17(ख)(2) के अनुसार किन वस्तुओं को जब्त किया जा सकता है? |
जो अवैध संगठन के प्रयोजनों के लिए उपयोग की जाती हैं या उपयोग की जा सकती हैं। |
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धारा 17(ख)(3) के अनुसार जब्ती योग्य न होने वाली वस्तुओं का क्या किया जाएगा? |
उन्हें उस व्यक्ति को सौंप दिया जाएगा जो उनका कब्जा रखने का हकदार हो। |
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धारा 17(ख)(3) के अनुसार यदि कोई हकदार व्यक्ति न मिले तो वस्तुओं का निपटारा कौन करेगा? |
जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस आयुक्त। |
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धारा 17(ख)(4) के अनुसार जब्ती का प्रस्ताव प्रकाशित करने की शक्ति किसके पास है? |
जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस आयुक्त के पास। |
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धारा 17(ख)(4) के अनुसार जब्ती के विरुद्ध अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की समय-सीमा क्या है? |
पंद्रह दिनों के भीतर। |
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धारा 17(ख)(4) के अनुसार सूचना किस प्रकार प्रकाशित की जाएगी? |
दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898 की धारा 87 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 90) में उद्घोषणा के प्रकाशन के लिए निर्धारित रीति से। |
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धारा 17(ख)(5) के अनुसार यदि अभ्यावेदन स्वीकार कर लिया जाए तो संबंधित वस्तु का क्या किया जाएगा? |
उसका निपटारा धारा 17ख(3) के अनुसार किया जाएगा। |
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धारा 17(ख)(6) के अनुसार यदि अभ्यावेदन अस्वीकार कर दिया जाए तो जिला मजिस्ट्रेट के निर्णय का मामला किसके पास भेजा जाएगा? |
जिला न्यायाधीश के पास। |
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धारा 17(ख)(6) के अनुसार यदि अभ्यावेदन अस्वीकार कर दिया जाए तो पुलिस आयुक्त के निर्णय का मामला किसके पास भेजा जाएगा? |
लघु वाद न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पास। |
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धारा 17(ख)(6) के अनुसार क्या जिला न्यायाधीश या मुख्य न्यायाधीश के निर्णय से पूर्व जब्ती की जाएगी? |
नहीं। |
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धारा 17(ख)(6) के अनुसार यदि जब्ती की पुष्टि न हो तो वस्तुओं का क्या किया जाएगा? |
उनका निपटारा धारा 17ख(3) के अनुसार किया जाएगा। |
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धारा 17(ख)(7) के अनुसार दावों की जांच के लिए किस संहिता की प्रक्रिया अपनाई जाएगी? |
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की। |
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धारा 17(ख)(7) के अनुसार जिला न्यायाधीश या लघु वाद न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का निर्णय कैसा होगा? |
अंतिम होगा। |
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धारा 17(ख)(8) के अनुसार यदि जब्त की गई वस्तु पशुधन या नाशवान प्रकृति की हो तो क्या किया जा सकता है? |
उसकी तत्काल बिक्री का आदेश दिया जा सकता है। |
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धारा 17(ख)(8) के अनुसार नाशवान वस्तुओं की बिक्री से प्राप्त राशि का निपटारा कैसे किया जाएगा? |
अन्य वस्तुओं के निपटान के लिए निर्धारित रीति से। |
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धारा 17(ग) का विषय क्या है? |
अधिसूचित स्थानों में अनाधिकृत प्रवेश। (Trespass upon notified places) |
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धारा 17(ग) के अनुसार अधिसूचित स्थान में प्रवेश करने के लिए किसकी अनुमति आवश्यक है? |
जिला मजिस्ट्रेट या उसके द्वारा इस संबंध में अधिकृत अधिकारी की। |
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धारा 17(ग) के अनुसार बिना अनुमति अधिसूचित स्थान में प्रवेश करने वाला व्यक्ति किस अपराध का दोषी माना जाएगा? |
आपराधिक अतिक्रमण का। |
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धारा 17(ग) के अनुसार बिना अनुमति अधिसूचित स्थान में रहने वाला व्यक्ति किस अपराध का दोषी माना जाएगा? |
आपराधिक अतिक्रमण का। |
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धारा 17(ग) के अनुसार अनुमति देने की शक्ति किसके पास है? |
जिला मजिस्ट्रेट या उसके द्वारा इस संबंध में अधिकृत अधिकारी के पास। |
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धारा 17(घ) का विषय क्या है? |
संपत्ति का त्याग। (The relinquishment of property) |
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धारा 17(घ) के अनुसार अधिसूचित स्थानों का कब्जा सरकार द्वारा छोड़ने को विनियमित करने की शक्ति किसके पास है? |
राज्य सरकार के पास। |
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धारा 17(घ) के अनुसार राज्य सरकार निर्देश कब जारी करेगी? |
धारा 17ए(1) के अधीन अधिसूचना रद्द करने से पहले। |
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धारा 17(घ) के अनुसार राज्य सरकार किस प्रकार के निर्देश जारी कर सकती है? |
सामान्य या विशेष निर्देश। |
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धारा 17(घ) के अनुसार राज्य सरकार के निर्देश किस विषय से संबंधित होंगे? |
अधिसूचित स्थानों के कब्जे को सरकार द्वारा छोड़ने (संपत्ति के त्याग) के विनियमन से। |
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धारा 17(ङ) का विषय क्या है? |
गैरकानूनी संगठन की निधियों को जब्त करने की शक्ति। (Power to forfeit funds of an unlawful association) |
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धारा 17(ङ)(1) के अनुसार गैरकानूनी संगठन की निधियों को जब्त करने की शक्ति किसके पास है? |
राज्य सरकार के पास। |
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धारा 17(ङ)(1) के अनुसार राज्य सरकार किन संपत्तियों को जब्त घोषित कर सकती है? |
धन, प्रतिभूतियाँ या ऋण। |
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धारा 17(ङ)(1) के अनुसार राज्य सरकार कब जब्ती का आदेश दे सकती है? |
जब वह जाँच के बाद संतुष्ट हो जाए कि धन, प्रतिभूतियाँ या ऋण किसी गैरकानूनी संगठन के प्रयोजनों के लिए उपयोग किए जा रहे हैं या उपयोग करने का इरादा है। |
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धारा 17(ङ)(1) के अनुसार जब्ती किस माध्यम से घोषित की जाएगी? |
लिखित आदेश द्वारा। |
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धारा 17(ङ)(2) के अनुसार जब्ती आदेश की प्रति किसे दी जा सकती है? |
धन, प्रतिभूतियों या ऋणों की अभिरक्षा रखने वाले व्यक्ति को। |
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धारा 17(ङ)(2) के अनुसार आदेश की प्रति प्राप्त होने पर अभिरक्षक का क्या कर्तव्य है? |
राज्य सरकार के आदेशानुसार धन, प्रतिभूतियों या ऋणों का भुगतान या वितरण करना। |
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धारा 17(ङ)(2) के परन्तुक के अनुसार धन या प्रतिभूतियों की तलाशी और जब्ती के लिए किसे अधिकृत किया जा सकता है? |
राज्य सरकार द्वारा चयनित अधिकारी को। |
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धारा 17(ङ)(2) के परन्तुक के अनुसार अधिकृत अधिकारी को क्या अधिकार प्राप्त होंगे? |
परिसर में प्रवेश करने, तलाशी लेने तथा धन एवं प्रतिभूतियों को जब्त करने का। |
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धारा 17(ङ)(3) के अनुसार जब्ती आदेश से पूर्व राज्य सरकार क्या करेगी? |
संबंधित व्यक्ति को जब्ती के आशय की लिखित सूचना देगी। |
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धारा 17(ङ)(3) के अनुसार जब्ती के विरुद्ध आवेदन कितने दिनों के भीतर किया जा सकता है? |
पंद्रह दिनों के भीतर। |
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धारा 17(ङ)(3) के अनुसार आवेदन किसके समक्ष किया जाएगा? |
जिला न्यायाधीश या प्रेसीडेंसी नगर के लघु वाद न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष। |
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धारा 17(ङ)(3) के अनुसार आवेदन लंबित रहने तक क्या जब्ती का आदेश पारित किया जा सकता है? |
नहीं। |
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धारा 17(ङ)(4) के अनुसार दावों की जांच के लिए किस संहिता की प्रक्रिया अपनाई जाएगी? |
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की। |
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धारा 17(ङ)(4) के अनुसार जिला न्यायाधीश या मुख्य न्यायाधीश का निर्णय कैसा होगा? |
अंतिम होगा। |
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धारा 17(ङ)(5) के अनुसार राज्य सरकार किस प्रकार का निषेधाज्ञा आदेश जारी कर सकती है? |
धन, प्रतिभूति या ऋण के भुगतान, हस्तांतरण, सुपुर्दगी अथवा अन्य व्यवहार पर रोक लगाने का। |
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धारा 17(ङ)(5) के अनुसार निषेधाज्ञा किस माध्यम से जारी की जाएगी? |
लिखित आदेश द्वारा। |
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धारा 17(ङ)(6) के अनुसार जाँच अधिकारी को क्या अधिकार प्राप्त होंगे? |
परिसर में प्रवेश करने, पुस्तकों की जांच करने, धन एवं प्रतिभूतियों की तलाशी लेने तथा पूछताछ करने के। |
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धारा 17(ङ)(7) के अनुसार इस धारा के अधीन आदेश की प्रति किस प्रकार तामील की जाएगी? |
दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) में समन की तामील के लिए निर्धारित रीति से। |
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धारा 17(ङ)(8) के अनुसार यदि निषेधाज्ञा के बाद जब्ती का आदेश पारित हो तो वह कब से प्रभावी होगा? |
निषेधाज्ञा जारी होने की तिथि से। |
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धारा 17(ङ)(8) के अनुसार जब्ती प्रभावी होने पर संबंधित व्यक्ति का क्या दायित्व होगा? |
जब्त धन, प्रतिभूति या ऋण राज्य सरकार को सौंपना या भुगतान करना। |
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धारा 17(ङ)(9) के अनुसार राज्य सरकार के निर्देशों का पालन न करने पर राशि कैसे वसूल की जाएगी? |
भू-राजस्व के बकाया या जुर्माने के रूप में। |
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धारा 17(ङ)(10) के अनुसार "प्रतिभूति" में क्या सम्मिलित है? |
ऐसा दस्तावेज जिससे धन के भुगतान का दायित्व स्वीकार किया गया हो या धन प्राप्त करने का वैधानिक अधिकार प्राप्त होता हो। |
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धारा 17(ङ)(10) के अनुसार प्रतिभूति का बाजार मूल्य कौन निर्धारित करेगा? |
राज्य सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी या व्यक्ति। |
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धारा 17(ङ)(11) के अनुसार जाँच के दौरान प्राप्त सूचना का प्रकटीकरण कब किया जा सकता है? |
केवल कार्यवाही के प्रयोजनों के लिए आवश्यक सीमा तक अथवा राज्य सरकार की सहमति से। |
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धारा 17(ङ)(11) के अनुसार राज्य सरकार की सहमति के बिना जाँच के दौरान प्राप्त सूचना कौन प्रकट नहीं करेगा? |
सरकार का कोई अधिकारी। |
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धारा 17(च) का विषय क्या है? |
अधिकार क्षेत्र वर्जित। (Jurisdiction barred) |
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धारा 17(च) के अनुसार संपत्ति पर कब्जा लेने की प्रत्येक रिपोर्ट किस बात का निर्णायक प्रमाण होगी? |
कि उसमें विनिर्दिष्ट संपत्ति पर सरकार द्वारा कब्जा कर लिया गया है। |
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धारा 17(च) के अनुसार जब्ती की प्रत्येक घोषणा किस बात का निर्णायक प्रमाण होगी? |
कि उसमें विनिर्दिष्ट संपत्ति सरकार द्वारा जब्त कर ली गई है। |
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धारा 17(च) के अनुसार धारा 17क, 17ख, 17ग, 17घ तथा 17ङ के अधीन की गई कार्यवाहियों को कौन प्रश्नगत नहीं कर सकता? |
कोई भी न्यायालय। |
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धारा 17(च) के अनुसार न्यायालय में चुनौती देने के अपवाद कौन-से प्रावधान हैं? |
धारा 17ख तथा धारा 17ङ के प्रावधान। |
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धारा 17(च) के अनुसार धारा 17क, 17ख, 17ग, 17घ तथा 17ङ के अधीन सद्भावनापूर्वक किए गए या किए जाने वाले कार्यों के लिए किसके विरुद्ध दीवानी या आपराधिक कार्यवाही नहीं की जाएगी? |
किसी भी व्यक्ति, सरकार अथवा सरकार की ओर से या सरकार के प्राधिकार से कार्य करने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध। |
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धारा 17(च) के अनुसार सरकार द्वारा कब्जा की गई संपत्ति को हुई हानि या क्षति के संबंध में किस प्रकार की कार्यवाही वर्जित है? |
दीवानी तथा आपराधिक कार्यवाही। |
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धारा 17(च) के अनुसार सरकार द्वारा कब्जा या जब्ती का निर्णायक प्रमाण क्या होगा? |
संपत्ति पर कब्जा लेने की रिपोर्ट या जब्ती की घोषणा। |
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धारा 18 का विषय क्या है? |
संघ का बने रहना। (Continuance of association) |
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धारा 18 के अनुसार क्या केवल विघटन की औपचारिक कार्यवाही के कारण किसी संघ को अस्तित्वहीन माना जाएगा? |
नहीं। |
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धारा 18 के अनुसार क्या केवल स्वामित्व परिवर्तन की औपचारिक कार्यवाही के कारण किसी संघ को अस्तित्वहीन माना जाएगा? |
नहीं। |
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धारा 18 के अनुसार किसी संघ को कब तक जारी माना जाएगा? |
जब तक उसके उद्देश्यों के लिए उसके सदस्यों के बीच वास्तविक संयोजन बना रहता है। |
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धारा 18 के अनुसार संघ के बने रहने का आधार क्या है? |
उसके उद्देश्यों के लिए सदस्यों के बीच वास्तविक संयोजन का जारी रहना। |
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धारा 18 के अनुसार क्या औपचारिक विघटन या स्वामित्व परिवर्तन से संघ का अस्तित्व स्वतः समाप्त हो जाता है? |
नहीं। |
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