Prevention of Food Adulteration Act, 1954 One Liner Notes

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

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खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954

(THE PREVENTION OF FOOD ADULTERATION ACT, 1954)

(1954 का अधिनियम संख्यांक 37)

(Act No. 37 of 1954)

 

इस अधिनियम का नाम क्या है?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954

(The prevention of food adulteration act, 1954)

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम का अधिनियम संख्यांक क्या है?

1954 का अधिनियम संख्यांक 37

(Act No. 37 of 1954)

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 को राष्ट्रपति की स्वीकृति/अधिनियमित होने की तिथि क्या है?

29 सितम्बर, 1954

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 का उद्देश्य क्या है?

खाद्य के अपमिश्रण के निवारणार्थ उपबन्ध बनाना।

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 किसके द्वारा अधिनियमित किया गया है?

संसद् द्वारा।

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 भारत गणराज्य के किस वर्ष में अधिनियमित किया गया?

भारत गणराज्य के पाँचवें वर्ष में।

 

प्रारम्भिक

(Preliminary)

धारा 1 का विषय क्या है?

संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ।

(Short title, extent and commencement)

धारा 1(1) के अनुसार इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम क्या है?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954

धारा 1(2) के अनुसार खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 का विस्तार कहाँ तक है?

सम्पूर्ण भारत पर।

धारा 1(3) के अनुसार खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 कब प्रवृत्त होगा?

उस तारीख को जिसे केन्द्रीय सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे।

धारा 1(3) के अनुसार अधिनियम के प्रवर्तन की तारीख कौन नियत करेगा?

केन्द्रीय सरकार।

धारा 1(3) के अनुसार अधिनियम के प्रवर्तन की तारीख किस माध्यम से नियत की जाएगी?

शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा।

धारा 2 का विषय क्या है?

परिभाषाएं

(Definitions)

धारा 2(i) का विषय क्या है?

"अपद्रव्य" (adulterant) की परिभाषा।

धारा 2(i) के अनुसार "अपद्रव्य" से क्या अभिप्रेत है?

कोई ऐसी सामग्री जिसके उपयोग अपमिश्रण के प्रयोजनों के लिए किया जाता है या किया जा सकता है।

धारा 2(iक) का विषय क्या है?

"अपमिश्रित"(adulterated) की परिभाषा।

धारा 2(iक) के अनुसार कोई खाद्य पदार्थ कब अपमिश्रित समझा जाएगा?

जब वह धारा 2(i) में वर्णित किसी भी परिस्थिति को पूरा करता हो।

धारा 2(iक)(क) के अनुसार खाद्य पदार्थ कब अपमिश्रित समझा जाएगा?

जब विक्रेता द्वारा विक्रीत पदार्थ ऐसा स्वरूप, तत्त्व या क्वालिटी का हो जैसा क्रेता द्वारा मांगा गया है और वह उसके लिए हानिकर हो।

धारा 2(iक)(क) के अनुसार यदि विक्रीत खाद्य पदार्थ तात्पर्यित या व्यपदिष्ट स्वरूप, तत्त्व या क्वालिटी का न हो तो क्या वह अपमिश्रित होगा?

हाँ।

धारा 2(iक)(ख) के अनुसार खाद्य पदार्थ कब अपमिश्रित समझा जाएगा?

जब उसमें कोई अन्य चीज हो जो उसके स्वरूप, तत्त्व या क्वालिटी को हानिकर रूप से प्रभावित करती हो।

धारा 2(iक)(ख) के अनुसार यदि खाद्य पदार्थ इस प्रकार प्रसंस्कृत हो कि उसका हानिकर प्रभाव पड़े तो क्या वह अपमिश्रित होगा?

हाँ।

धारा 2(iक)(ग) के अनुसार खाद्य पदार्थ कब अपमिश्रित समझा जाएगा?

जब उसके स्थान पर पूर्णतः या भागतः कोई घटिया या अपेक्षाकृत सस्ती चीज प्रतिस्थापित की गई हो जिससे उसके स्वरूप, तत्त्व या क्वालिटी पर हानिकर प्रभाव पड़ता हो।

धारा 2(iक)(ग) के अनुसार प्रतिस्थापित की गई वस्तु कैसी होनी चाहिए?

घटिया या अपेक्षाकृत सस्ती।

धारा 2(iक)(घ) के अनुसार खाद्य पदार्थ कब अपमिश्रित समझा जाएगा?

जब उसके किसी घटक को पूर्णतः या भागतः निकाल लिया गया हो जिससे उसके स्वरूप, तत्त्व या क्वालिटी पर हानिकर प्रभाव पड़ता हो।

धारा 2(iक)(घ) के अनुसार किसके निकाल लेने से खाद्य पदार्थ अपमिश्रित हो सकता है?

उसके किसी घटक के पूर्णतः या भागतः निकाल लेने से।

धारा 2(iक)(ङ) के अनुसार खाद्य पदार्थ कब अपमिश्रित समझा जाएगा?

जब उसे अस्वच्छ परिस्थितियों में बनाया, पैदा किया या रखा गया हो जिससे वह संदूषित या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो गया हो।

धारा 2(iक)(ङ) के अनुसार किन परिस्थितियों में बनाया, पैदा किया या रखा गया खाद्य पदार्थ अपमिश्रित होगा?

अस्वच्छ परिस्थितियों में।

धारा 2(iक)(ङ) के अनुसार अस्वच्छ परिस्थितियों का परिणाम क्या होना चाहिए?

खाद्य पदार्थ संदूषित या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो गया हो।

धारा 2(iक)(च) के अनुसार खाद्य पदार्थ कब अपमिश्रित समझा जाएगा?

जब वह पूर्णतः या भागतः गंदे, दूषित, सड़े-गले या रुग्ण पशुजन्य या वनस्पतिजन्य तत्त्व से बना हो।

धारा 2(iक)(च) के अनुसार यदि खाद्य पदार्थ कीटग्रस्त हो तो क्या वह अपमिश्रित होगा?

हाँ।

धारा 2(iक)(च) के अनुसार यदि खाद्य पदार्थ अन्यथा मानव उपयोग के अनुपयुक्त हो तो क्या वह अपमिश्रित होगा?

हाँ।

धारा 2(iक)(छ) के अनुसार खाद्य पदार्थ कब अपमिश्रित समझा जाएगा?

जब वह रुग्ण पशु से अभिप्राप्त हो।

धारा 2(iक)(ज) के अनुसार खाद्य पदार्थ कब अपमिश्रित समझा जाएगा?

जब उसमें कोई ऐसा विषैला या अन्य संघटक अन्तर्विष्ट हो जो उसे स्वास्थ्य के लिए हानिकर बना देता हो।

धारा 2(iक)(ज) के अनुसार खाद्य पदार्थ में किस प्रकार का संघटक होने पर वह अपमिश्रित होगा?

विषैला या अन्य ऐसा संघटक जो उसे स्वास्थ्य के लिए हानिकर बना दे।

धारा 2(iक)(झ) के अनुसार खाद्य पदार्थ कब अपमिश्रित समझा जाएगा?

जब उसका आधान पूर्णतः या भागतः किसी ऐसे विषैले या हानिकारक तत्त्व से बना हो जो उसकी अन्तर्वस्तुओं को स्वास्थ्य के लिए हानिकर बना देता हो।

धारा 2(iक)(झ) के अनुसार आधान किस प्रकार के तत्त्व से बना होने पर खाद्य पदार्थ अपमिश्रित होगा?

किसी विषैले या हानिकारक तत्त्व से।

धारा 2(iक)(ञ) के अनुसार खाद्य पदार्थ कब अपमिश्रित समझा जाएगा?

जब उसमें उसके लिए विहित से भिन्न कोई रंजक द्रव्य विद्यमान हो।

धारा 2(iक)(ञ) के अनुसार यदि विहित रंजक द्रव्य मान्य भिन्नता की विहित सीमा के भीतर न हो तो क्या खाद्य पदार्थ अपमिश्रित होगा?

हाँ।

धारा 2(iक)(ञ) के अनुसार रंजक द्रव्य की मात्रा किस सीमा के भीतर होनी चाहिए?

मान्य भिन्नता की विहित सीमा के भीतर।

धारा 2(iक)(ट) के अनुसार खाद्य पदार्थ कब अपमिश्रित समझा जाएगा?

जब उसमें कोई प्रतिषिद्ध परिरक्षी हो।

धारा 2(iक)(ट) के अनुसार यदि अनुज्ञात परिरक्षी विहित सीमा से अधिक हो तो क्या खाद्य पदार्थ अपमिश्रित होगा?

हाँ।

धारा 2(iक)(ट) के अनुसार परिरक्षी की मात्रा किस सीमा के भीतर होनी चाहिए?

विहित सीमा के भीतर।

धारा 2(iक)(ठ) के अनुसार खाद्य पदार्थ कब अपमिश्रित समझा जाएगा?

जब उसकी क्वालिटी या शुद्धता विहित मान से कम हो या उसके घटक मान्य भिन्नता की विहित सीमा के भीतर हों और वह स्वास्थ्य के लिए हानिकर बन जाता हो।

धारा 2(iक)(ठ) के अनुसार खाद्य पदार्थ की क्वालिटी किस मान से कम होने पर वह अपमिश्रित होगा?

विहित मान से कम होने पर।

धारा 2(iक)(ठ) के अनुसार घटकों का परिमाण किस सीमा के भीतर होना चाहिए?

मान्य भिन्नता की विहित सीमा के भीतर।

धारा 2(iक)(ठ) के अनुसार स्वास्थ्य के लिए हानिकर बनने पर क्या खाद्य पदार्थ अपमिश्रित होगा?

हाँ।

धारा 2(iक)(ड) के अनुसार खाद्य पदार्थ कब अपमिश्रित समझा जाएगा?

जब उसकी क्वालिटी या शुद्धता विहित मान से कम हो या उसके घटक मान्य भिन्नता की विहित सीमा के भीतर हों, यद्यपि वह स्वास्थ्य के लिए हानिकर हो।

धारा 2(iक)(ड) के अनुसार यदि खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए हानिकर न हो, तब भी वह कब अपमिश्रित होगा?

जब उसकी क्वालिटी या शुद्धता विहित मान से कम हो या उसके घटक मान्य भिन्नता की विहित सीमा के भीतर हों।

धारा 2(iक)(ड) के परन्तुक के अनुसार प्राथमिक खाद्य पदार्थ कब अपमिश्रित नहीं समझा जाएगा?

जब उसकी क्वालिटी या शुद्धता में कमी अथवा घटकों की मात्रा में भिन्नता केवल प्राकृतिक कारणों से हो और मानवीय नियंत्रण के बाहर हो।

धारा 2(iक)(ड) के परन्तुक के अनुसार प्राथमिक खाद्य पदार्थ में कमी का कारण क्या होना चाहिए?

केवल प्राकृतिक कारण।

धारा 2(iक)(ड) के परन्तुक के अनुसार प्राथमिक खाद्य पदार्थ में कमी किसके बाहर होनी चाहिए?

मानवीय नियंत्रण के बाहर।

धारा 2 स्पष्टीकरण (i) के अनुसार दो या अधिक प्राथमिक खाद्य पदार्थों के मिश्रण से बना खाद्य पदार्थ कब अपमिश्रित नहीं समझा जाएगा?

जब वह ऐसे नाम से भंडार में रखा जाए, विक्रय या वितरण किया जाए जिससे उसके संघटकों का द्योतक हो तथा वह स्वास्थ्य के लिए हानिकर हो।

धारा 2 स्पष्टीकरण (i)(क) के अनुसार मिश्रित खाद्य पदार्थ किस नाम से भंडार में रखा, विक्रय या वितरित किया जाना चाहिए?

ऐसे नाम से जिससे उसके संघटकों का द्योतक होता हो।

धारा 2 स्पष्टीकरण (i)(ख) के अनुसार मिश्रित खाद्य पदार्थ के अपमिश्रित न माने जाने की दूसरी शर्त क्या है?

वह स्वास्थ्य के लिए हानिकर हो।

धारा 2(ii) का विषय क्या है?

केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला (Central Food Laboratory) की परिभाषा।

धारा 2(ii) के अनुसार "केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला" से क्या अभिप्रेत है?

धारा 4 के अधीन स्थापित या विनिर्दिष्ट कोई प्रयोगशाला या संस्थान।

धारा 2(iii) का विषय क्या है?

"समिति" (Committee) की परिभाषा।

धारा 2(iii) के अनुसार "समिति" से क्या अभिप्रेत है?

धारा 3 के अधीन गठित केन्द्रीय खाद्य मानक समिति।

धारा 2(iv) का विषय क्या है?

"केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक" (Director of the Central Food Laboratory) की परिभाषा।

धारा 2(iv) के अनुसार "केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक" से क्या अभिप्रेत है?

केन्द्रीय सरकार द्वारा शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक के रूप में नियुक्त व्यक्ति।

धारा 2(iv) के अनुसार केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक की नियुक्ति कौन करता है?

केन्द्रीय सरकार।

धारा 2(iv) के अनुसार केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक की नियुक्ति किस माध्यम से की जाती है?

शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा।

धारा 2(iv) के अनुसार "केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक" की परिभाषा में और कौन सम्मिलित है?

केन्द्रीय सरकार द्वारा उसी रीति से नियुक्त वह व्यक्ति जो खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के अधीन निदेशक के सभी या किसी कृत्य का पालन करने के लिए नियुक्त किया गया हो।

धारा 2(iv) के अनुसार निदेशक के कृत्यों का पालन करने के लिए नियुक्त व्यक्ति की नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है?

केन्द्रीय सरकार द्वारा।

धारा 2(iv) के अनुसार निदेशक के कृत्यों का पालन करने वाले व्यक्ति की नियुक्ति किस रीति से की जाती है?

शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा।

धारा 2(iv) के परन्तुक के अनुसार किस व्यक्ति को केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक नियुक्त नहीं किया जाएगा?

जिसका किसी खाद्य पदार्थ के विनिर्माण, आयात या विक्रय में किसी प्रकार का वित्तीय हित हो।

धारा 2(iv) के परन्तुक के अनुसार निदेशक नियुक्ति के लिए कौन-सी अयोग्यता निर्धारित है?

किसी खाद्य पदार्थ के विनिर्माण, आयात या विक्रय में वित्तीय हित होना।

धारा 2(v) का विषय क्या है?

"खाद्य" (food) की परिभाषा।

धारा 2(v) के अनुसार "खाद्य" से क्या अभिप्रेत है?

औषधि और जल से भिन्न ऐसा कोई पदार्थ जो खाद्य या पेय के रूप में मानव उपभोग के लिए उपयोग में लाया जाता है।

धारा 2(v) के अनुसार "खाद्य" की परिभाषा से कौन-सी वस्तुएँ अपवर्जित हैं?

औषधि और जल।

धारा 2(v) के अनुसार कोई पदार्थ "खाद्य" कब माना जाएगा?

जब वह खाद्य या पेय के रूप में मानव उपभोग के लिए उपयोग में लाया जाता हो।

धारा 2(v)(क) के अनुसार "खाद्य" में कौन-सा पदार्थ सम्मिलित है?

ऐसा कोई पदार्थ जो मानवखाद्य की रचना या निर्माण में सामान्यतः मिश्रित होता है या उपयोग में लाया जाता है।

धारा 2(v)(क) के अनुसार कौन-सा पदार्थ मानवखाद्य की रचना या निर्माण में सामान्यतः मिश्रित या उपयोग में लाया जाता है?

ऐसा कोई पदार्थ जो मानवखाद्य की रचना या निर्माण में सामान्यतः मिश्रित होता है या उपयोग में लाया जाता है।

धारा 2(v)(ख) के अनुसार "खाद्य" में कौन-से पदार्थ सम्मिलित हैं?

वासक या स्वादवर्धक द्रव्य।

धारा 2(v)(ग) के अनुसार "खाद्य" में कौन-सा अन्य पदार्थ सम्मिलित है?

ऐसा अन्य पदार्थ जिसे केन्द्रीय सरकार अधिसूचना द्वारा खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के प्रयोजनों के लिए खाद्य घोषित करे।

धारा 2(v)(ग) के अनुसार किसी अन्य पदार्थ को "खाद्य" घोषित करने की शक्ति किसके पास है?

केन्द्रीय सरकार के पास।

धारा 2(v)(ग) के अनुसार किसी अन्य पदार्थ को "खाद्य" किस माध्यम से घोषित किया जाता है?

राजपत्र में अधिसूचना द्वारा।

धारा 2(v)(ग) के अनुसार केन्द्रीय सरकार किसी पदार्थ को "खाद्य" घोषित करते समय किन बातों का ध्यान रखती है?

उसके उपयोग, स्वरूप, उसकी अन्तर्वस्तु और उसकी क्वालिटी का।

धारा 2(vi) का विषय क्या है?

"खाद्य (स्वास्थ्य) प्राधिकारी" (Food (Health) Authority) की परिभाषा।

धारा 2(vi) के अनुसार "खाद्य (स्वास्थ्य) प्राधिकारी" से क्या अभिप्रेत है?

किसी राज्य में चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवा निदेशक या स्वास्थ्य प्रशासन का भारसाधक मुख्य अधिकारी, चाहे वह किसी भी पदनाम से ज्ञात हो।

धारा 2(vi) के अनुसार किसी राज्य में "खाद्य (स्वास्थ्य) प्राधिकारी" कौन होता है?

चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवा निदेशक या स्वास्थ्य प्रशासन का भारसाधक मुख्य अधिकारी।

धारा 2(vi) के अनुसार क्या पदनाम भिन्न होने पर भी अधिकारी "खाद्य (स्वास्थ्य) प्राधिकारी" हो सकता है?

हाँ, चाहे वह किसी भी पदनाम से ज्ञात हो।

धारा 2(vi) के अनुसार "खाद्य (स्वास्थ्य) प्राधिकारी" की परिभाषा में और कौन सम्मिलित है?

ऐसा अधिकारी जिसे केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के अधीन शक्तियों के प्रयोग और कर्तव्यों के पालन के लिए सशक्त करे।

धारा 2(vi) के अनुसार "खाद्य (स्वास्थ्य) प्राधिकारी" की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए अधिकारी को कौन सशक्त कर सकता है?

केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार।

धारा 2(vi) के अनुसार अधिकारी को किस माध्यम से सशक्त किया जाता है?

राजपत्र में अधिसूचना द्वारा।

धारा 2(vi) के अनुसार अधिकारी को किस उद्देश्य से सशक्त किया जाता है?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के अधीन खाद्य (स्वास्थ्य) प्राधिकारी की शक्तियों का प्रयोग करने और उसके कर्तव्यों का पालन करने के लिए।

धारा 2(vi) के अनुसार अधिसूचना में क्या विनिर्दिष्ट किया जा सकता है?

वह स्थानीय क्षेत्र जिसके संबंध में अधिकारी को सशक्त किया जाता है।

धारा 2(vii) का विषय क्या है?

"स्थानीय क्षेत्र" (local area) की परिभाषा।

धारा 2(vii) के अनुसार "स्थानीय क्षेत्र" से क्या अभिप्रेत है?

कोई नगरीय या ग्राम्य क्षेत्र।

धारा 2(vii) के अनुसार "स्थानीय क्षेत्र" किस प्रकार का क्षेत्र हो सकता है?

नगरीय या ग्राम्य क्षेत्र।

धारा 2(vii) के अनुसार किसी क्षेत्र को "स्थानीय क्षेत्र" कौन घोषित कर सकता है?

केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार।

धारा 2(vii) के अनुसार किसी क्षेत्र को "स्थानीय क्षेत्र" किस माध्यम से घोषित किया जाता है?

शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा।

धारा 2(vii) के अनुसार किसी क्षेत्र को "स्थानीय क्षेत्र" किस प्रयोजन के लिए घोषित किया जाता है?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के प्रयोजनों के लिए।

धारा 2(viii) का विषय क्या है?

"स्थानीय प्राधिकारी" (local authority) की परिभाषा।

धारा 2(viii) के अनुसार "स्थानीय प्राधिकारी" से क्या अभिप्रेत है?

स्थानीय क्षेत्र के प्रकार के अनुसार इस धारा में विनिर्दिष्ट प्राधिकारी।

धारा 2(viii)(1) के अनुसार यदि स्थानीय क्षेत्र नगरपालिका है तो "स्थानीय प्राधिकारी" कौन होगा?

नगरपालिका बोर्ड या नगरपालिका निगम।

धारा 2(viii)(1)(क) के अनुसार नगरपालिका क्षेत्र का स्थानीय प्राधिकारी कौन है?

नगरपालिका बोर्ड या नगरपालिका निगम।

धारा 2(viii)(1)(ख) के अनुसार यदि स्थानीय क्षेत्र छावनी है तो "स्थानीय प्राधिकारी" कौन होगा?

छावनी प्राधिकारी।

धारा 2(viii)(1)(ग) के अनुसार यदि स्थानीय क्षेत्र अधिसूचित क्षेत्र है तो "स्थानीय प्राधिकारी" कौन होगा?

अधिसूचित क्षेत्र समिति।

धारा 2(viii)(2) के अनुसार अन्य स्थानीय क्षेत्र की दशा में "स्थानीय प्राधिकारी" कौन होगा?

ऐसा प्राधिकारी जो केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के अधीन विहित किया जाए।

धारा 2(viii)(2) के अनुसार अन्य स्थानीय क्षेत्र के लिए प्राधिकारी कौन विहित करेगा?

केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार।

धारा 2(viiiक) का विषय क्या है?

"स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी" (Local (Health) Authority) की परिभाषा।

धारा 2(viiiक) के अनुसार किसी स्थानीय क्षेत्र के संबंध में "स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी" से क्या अभिप्रेत है?

ऐसा अधिकारी जिसे केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार उस क्षेत्र में स्वास्थ्य प्रशासन का भारसाधक नियुक्त करे।

धारा 2(viiiक) के अनुसार "स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी" की नियुक्ति कौन कर सकता है?

केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार।

धारा 2(viiiक) के अनुसार "स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी" की नियुक्ति किस माध्यम से की जाती है?

राजपत्र में अधिसूचना द्वारा।

धारा 2(viiiक) के अनुसार नियुक्त अधिकारी किसका भारसाधक होता है?

स्वास्थ्य प्रशासन का।

धारा 2(viiiक) के अनुसार नियुक्त अधिकारी किस क्षेत्र के संबंध में नियुक्त किया जाता है?

अधिसूचना में विनिर्दिष्ट स्थानीय क्षेत्र के संबंध में।

धारा 2(viiiक) के अनुसार अधिकारी किस पदनाम से नियुक्त किया जाता है?

ऐसे पदनाम से जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए।

धारा 2(viiiख) का विषय क्या है?

"विनिर्माण" (manufacture) की परिभाषा।

धारा 2(viiiख) के अनुसार "विनिर्माण" के अन्तर्गत क्या सम्मिलित है?

किसी खाद्य पदार्थ के विनिर्माण की प्रासंगिक या आनुषंगिक कोई प्रक्रिया।

धारा 2(ix) का विषय क्या है?

"मिथ्या छाप वाला" (misbranded) की परिभाषा।

धारा 2(ix) के अनुसार कोई खाद्य पदार्थ कब मिथ्या छाप वाला समझा जाएगा?

जब वह धारा 2(ix) में वर्णित किसी भी परिस्थिति को पूरा करता हो।

धारा 2(ix)(क) के अनुसार खाद्य पदार्थ कब मिथ्या छाप वाला समझा जाएगा?

जब वह किसी अन्य खाद्य पदार्थ की नकल हो, उसके स्थान पर प्रतिस्थापित हो या उससे इस प्रकार मिलता-जुलता हो कि धोखा हो जाए।

धारा 2(ix)(क) के अनुसार यदि खाद्य पदार्थ का असली रूप स्पष्ट और सहजदृश्य रूप से लेबल द्वारा उपदर्शित न किया गया हो तो क्या वह मिथ्या छाप वाला होगा?

हाँ।

धारा 2(ix)(क) के अनुसार असली रूप का लेबल कैसा होना चाहिए?

स्पष्ट और सहजदृश्य।

धारा 2(ix)(ख) के अनुसार खाद्य पदार्थ कब मिथ्या छाप वाला समझा जाएगा?

जब उसे मिथ्या रूप से किसी स्थान या देश की उपज कहा जाए।

धारा 2(ix)(ग) के अनुसार खाद्य पदार्थ कब मिथ्या छाप वाला समझा जाएगा?

जब वह ऐसे नाम से विक्रीत किया जाए जो किसी अन्य खाद्य पदार्थ का हो।

धारा 2(ix)(घ) के अनुसार खाद्य पदार्थ कब मिथ्या छाप वाला समझा जाएगा?

जब उसे इस प्रकार रंजित, वासित, विलेपित, चूर्णकृत या पालिशकृत किया गया हो कि उसके खराब होने की बात छिप जाए।

धारा 2(ix)(घ) के अनुसार यदि खाद्य पदार्थ वास्तव में जितना है उससे अधिक अच्छा और मूल्यवान प्रदर्शित किया जाए तो क्या वह मिथ्या छाप वाला होगा?

हाँ।

धारा 2(ix)(ङ) के अनुसार खाद्य पदार्थ कब मिथ्या छाप वाला समझा जाएगा?

जब उसके लेबल पर या अन्यथा उसके बारे में मिथ्या दावे किए जाएँ।

धारा 2(ix)(च) के अनुसार मोहरबन्द या तैयार पैकेजों में विक्रय किए जाने वाले खाद्य पदार्थ कब मिथ्या छाप वाले होंगे?

जब पैकेज की अन्तर्वस्तुओं का सहजदृश्य और सही कथन मान्य भिन्नताओं के भीतर पैकेज पर किया गया हो।

धारा 2(ix)(च) के अनुसार पैकेज किसके द्वारा या किसके कहने पर मोहरबन्द या तैयार होना चाहिए?

विनिर्माता या उत्पादक द्वारा या उसके कहने पर।

धारा 2(ix)(च) के अनुसार पैकेज पर किसका नाम और पता होना चाहिए?

विनिर्माता या उत्पादक का।

धारा 2(ix)(छ) के अनुसार खाद्य पदार्थ कब मिथ्या छाप वाला समझा जाएगा?

जब पैकेज या उसके लेबल में संघटकों या तत्वों के बारे में कोई मिथ्या या भुलावा देने वाला कथन, डिजाइन या अभिलक्षण हो।

धारा 2(ix)(छ) के अनुसार यदि पैकेज अपनी अन्तर्वस्तुओं के बारे में धोखा देने वाला हो तो क्या खाद्य पदार्थ मिथ्या छाप वाला होगा?

हाँ।

धारा 2(ix)(ज) के अनुसार खाद्य पदार्थ कब मिथ्या छाप वाला समझा जाएगा?

जब पैकेज या उसके लेबल में विनिर्माता या उत्पादक के रूप में किसी कल्पित व्यक्ति या कम्पनी का नाम हो।

धारा 2(ix)(झ) के अनुसार विशेष आहार के रूप में उपयोग हेतु खाद्य पदार्थ कब मिथ्या छाप वाला समझा जाएगा?

जब उसके लेबल पर विहित जानकारी दी गई हो जिससे उसके गुणों के बारे में क्रेता को पर्याप्त सूचना मिल सके।

धारा 2(ix)(झ) के अनुसार विशेष आहार संबंधी लेबल में किनके बारे में जानकारी दी जानी चाहिए?

विटामिन, खनिज या अन्य आहार तत्त्वों के बारे में।

धारा 2(ix)(ञ) के अनुसार खाद्य पदार्थ कब मिथ्या छाप वाला समझा जाएगा?

जब उसमें कृत्रिम वासक, कृत्रिम रंजक या रासायनिक परिरक्षी घोषणात्मक लेबल के बिना या खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 अथवा नियमों की अपेक्षाओं के उल्लंघन में अन्तर्विष्ट हो।

धारा 2(ix)(ञ) के अनुसार कृत्रिम वासक, कृत्रिम रंजक या रासायनिक परिरक्षी होने पर किस प्रकार का लेबल आवश्यक है?

उस तथ्य का कथन करने वाला घोषणात्मक लेबल।

धारा 2(ix)(ट) के अनुसार खाद्य पदार्थ कब मिथ्या छाप वाला समझा जाएगा?

जब उस पर खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 या उसके अधीन बनाए गए नियमों की अपेक्षाओं के अनुसार लेबल लगाया गया हो।

धारा 2(x) का विषय क्या है?

"पैकेज" (package) की परिभाषा।

धारा 2(x) के अनुसार "पैकेज" से क्या अभिप्रेत है?

ऐसी वस्तु जिसमें खाद्य पदार्थ रखा या पैक किया जाता है।

धारा 2(x) के अनुसार "पैकेज" के अन्तर्गत कौन-कौन सी वस्तुएँ आती हैं?

बक्सा, बोतल, संदूकची, टिन, बैरल, डिब्बा, पात्र, बोरी, थैला, रैपर या कोई अन्य वस्तु।

धारा 2(xi) का विषय क्या है?

"परिसर" (premises) की परिभाषा।

धारा 2(xi) के अनुसार "परिसर" से क्या अभिप्रेत है?

कोई ऐसी दुकान, स्टाल या स्थान।

धारा 2(xi) के अनुसार "परिसर" में कौन-कौन से स्थान सम्मिलित हैं?

दुकान, स्टाल या अन्य स्थान।

धारा 2(xi) के अनुसार कौन-सा स्थान "परिसर" कहलाता है?

जहाँ कोई खाद्य पदार्थ विक्रीत किया जाता है।

धारा 2(xi) के अनुसार कौन-सा स्थान "परिसर" कहलाता है?

जहाँ कोई खाद्य पदार्थ विक्रय के लिए विनिर्मित किया जाता है।

धारा 2(xi) के अनुसार कौन-सा स्थान "परिसर" कहलाता है?

जहाँ कोई खाद्य पदार्थ विक्रय के लिए भंडार में रखा जाता है।

धारा 2(xi) का विषय क्या है?

"विहित" (prescribed) की परिभाषा।

धारा 2 के अनुसार "विहित" से क्या अभिप्रेत है?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित।

धारा 2(xiiक) का विषय क्या है?

"प्राथमिक खाद्य" (primary food) की परिभाषा।

धारा 2(xiiक) के अनुसार "प्राथमिक खाद्य" से क्या अभिप्रेत है?

ऐसा कोई खाद्य पदार्थ जो प्राकृतिक रूप में कृषि या बागवानी की उपज है।

धारा 2(xiiक) के अनुसार "प्राथमिक खाद्य" किस रूप में होता है?

प्राकृतिक रूप में।

धारा 2(xiiक) के अनुसार "प्राथमिक खाद्य" किसकी उपज होता है?

कृषि या बागवानी की उपज।

धारा 2(xiii) का विषय क्या है?

"विक्रय" (sale) की परिभाषा।

धारा 2(xiii) के अनुसार "विक्रय" से क्या अभिप्रेत है?

मानव उपभोग, उपयोग या विश्लेषण के लिए किसी खाद्य पदार्थ का विक्रय।

धारा 2(xiii) के अनुसार खाद्य पदार्थ का विक्रय किन प्रयोजनों के लिए हो सकता है?

मानव उपभोग, उपयोग या विश्लेषण के लिए।

धारा 2(xiii) के अनुसार क्या नकद पर किया गया विक्रय "विक्रय" के अन्तर्गत आता है?

हाँ।

धारा 2(xiii) के अनुसार क्या उधार पर किया गया विक्रय "विक्रय" के अन्तर्गत आता है?

हाँ।

धारा 2(xiii) के अनुसार क्या विनिमय के रूप में किया गया विक्रय "विक्रय" के अन्तर्गत आता है?

हाँ।

धारा 2(xiii) के अनुसार क्या थोक में किया गया विक्रय "विक्रय" के अन्तर्गत आता है?

हाँ।

धारा 2(xiii) के अनुसार क्या फुटकर में किया गया विक्रय "विक्रय" के अन्तर्गत आता है?

हाँ।

धारा 2(xiii) के अनुसार क्या किसी खाद्य पदार्थ के विक्रय के लिए करार करना "विक्रय" के अन्तर्गत आता है?

हाँ।

धारा 2(xiii) के अनुसार क्या किसी खाद्य पदार्थ के विक्रय के लिए प्रस्थापना करना "विक्रय" के अन्तर्गत आता है?

हाँ।

धारा 2(xiii) के अनुसार क्या किसी खाद्य पदार्थ को विक्रय के लिए अभिदर्शित करना "विक्रय" के अन्तर्गत आता है?

हाँ।

धारा 2(xiii) के अनुसार क्या किसी खाद्य पदार्थ को विक्रय के लिए कब्जे में रखना "विक्रय" के अन्तर्गत आता है?

हाँ।

धारा 2(xiii) के अनुसार क्या किसी खाद्य पदार्थ को विक्रीत करने का प्रयत्न भी "विक्रय" के अन्तर्गत आता है?

हाँ।

धारा 2(xiv) का विषय क्या है?

"नमूने" (sample) की परिभाषा।

धारा 2(xiv) के अनुसार "नमूने" से क्या अभिप्रेत है?

किसी खाद्य पदार्थ का नमूना।

धारा 2(xiv) के अनुसार "नमूने" के अन्तर्गत कौन-सा खाद्य पदार्थ का नमूना आता है?

जो खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम के उपबंधों के अधीन लिया गया हो।

धारा 2(xv) का विषय क्या है?

"अस्वास्थ्यकर" (unwholesome) और "हानिकर" (noxious) शब्दों की परिभाषा।

धारा 2(xv) के अनुसार "अस्वास्थ्यकर" शब्द का क्या अभिप्रेत है?

कि खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए अपहानिकर है।

धारा 2(xv) के अनुसार "हानिकर" शब्द का क्या अभिप्रेत है?

कि खाद्य पदार्थ मानव उपयोग के विरुद्ध है।

धारा 2(xv) के अनुसार "अस्वास्थ्यकर" और "हानिकर" शब्द किसके संबंध में प्रयुक्त होते हैं?

किसी खाद्य पदार्थ के संबंध में।

धारा 2(क) का विषय क्या है?

अर्थान्वयन का नियम (Rule of construction) की परिभाषा।

धारा 2(क) के अनुसार किसी ऐसी विधि के प्रति निर्देश का क्या अर्थ होगा जो जम्मू-कश्मीर राज्य में प्रवृत्त न हो?

उस राज्य में प्रवृत्त तत्स्थानी विधि के प्रति निर्देश, यदि कोई हो।

धारा 2(क) के अनुसार तत्स्थानी विधि का निर्देश किस राज्य के संबंध में माना जाएगा?

जम्मू-कश्मीर राज्य के संबंध में।

धारा 2(क) के अनुसार विधि के प्रति निर्देश का अर्थ कब तत्स्थानी विधि के प्रति निर्देश माना जाएगा?

जब निर्देशित विधि जम्मू-कश्मीर राज्य में प्रवृत्त हो।

 

केन्द्रीय खाद्य मानक समिति और केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला

धारा 3 का विषय क्या है?

केन्द्रीय खाद्य मानक समिति।

(The Central Committee for Food Standards)

धारा 3(1) के अनुसार केन्द्रीय खाद्य मानक समिति का गठन कौन करेगा?

केन्द्रीय सरकार।

धारा 3(1) के अनुसार केन्द्रीय खाद्य मानक समिति का गठन कब किया जाएगा?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के प्रारंभ के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र।

धारा 3(1) के अनुसार समिति का गठन किस उद्देश्य से किया जाएगा?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के प्रशासन से पैदा होने वाले मामलों पर केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकारों को सलाह देने के लिए।

धारा 3(1) के अनुसार समिति का एक अन्य कर्तव्य क्या है?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के अधीन उसे सौंपे गए अन्य कृत्यों का पालन करना।

धारा 3(1) के अनुसार इस समिति का नाम क्या होगा?

केन्द्रीय खाद्य मानक समिति।

धारा 3(2) के अनुसार समिति किनसे मिलकर बनेगी?

धारा 3(2) में विनिर्दिष्ट सदस्यों से।

धारा 3(2)(क) के अनुसार समिति का पदेन अध्यक्ष कौन होगा?

स्वास्थ्य-सेवा-महानिदेशक।

धारा 3(2)(ख) के अनुसार समिति का पदेन सदस्य कौन होगा?

केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक।

धारा 3(2)(ख) के अनुसार यदि एक से अधिक केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशालाएँ स्थापित हों तो पदेन सदस्य कौन होंगे?

उन सभी केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशालाओं के निदेशक।

धारा 3(2)(ग) के अनुसार केन्द्रीय सरकार कितने विशेषज्ञ नामनिर्दिष्ट करेगी?

दो विशेषज्ञ।

धारा 3(2)(घ) के अनुसार केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय का कितने प्रतिनिधि समिति में होगा?

एक प्रतिनिधि।

धारा 3(2)(घ) के अनुसार केन्द्रीय कृषि विभाग का कितने प्रतिनिधि समिति में होगा?

एक प्रतिनिधि।

धारा 3(2)(घ) के अनुसार केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय का कितने प्रतिनिधि समिति में होगा?

एक प्रतिनिधि।

धारा 3(2)(घ) के अनुसार केन्द्रीय रक्षा मंत्रालय का कितने प्रतिनिधि समिति में होगा?

एक प्रतिनिधि।

धारा 3(2)(घ) के अनुसार केन्द्रीय उद्योग और पूर्ति मंत्रालय का कितने प्रतिनिधि समिति में होगा?

एक प्रतिनिधि।

धारा 3(2)(घ) के अनुसार केन्द्रीय रेल मंत्रालय का कितने प्रतिनिधि समिति में होगा?

एक प्रतिनिधि।

धारा 3(2)(घ) के अनुसार उपखंड (घ) के प्रतिनिधियों को कौन नामनिर्दिष्ट करेगा?

केन्द्रीय सरकार।

धारा 3(2)(ङ) के अनुसार प्रत्येक राज्य सरकार समिति में कितने प्रतिनिधि नामनिर्दिष्ट करेगी?

एक प्रतिनिधि।

धारा 3(2)(च) के अनुसार संघ राज्यक्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने के लिए कितने प्रतिनिधि नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे?

दो प्रतिनिधि।

धारा 3(2)(च) के अनुसार संघ राज्यक्षेत्रों के प्रतिनिधियों को कौन नामनिर्दिष्ट करेगा?

केन्द्रीय सरकार।

धारा 3(2)(छ) के अनुसार कृषि के हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए कितने प्रतिनिधि नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे?

एक प्रतिनिधि।

धारा 3(2)(छ) के अनुसार वाणिज्य के हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए कितने प्रतिनिधि नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे?

एक प्रतिनिधि।

धारा 3(2)(छ) के अनुसार उद्योग के हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए कितने प्रतिनिधि नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे?

एक प्रतिनिधि।

धारा 3(2)(छ) के अनुसार कृषि, वाणिज्य और उद्योग के प्रतिनिधियों को कौन नामनिर्दिष्ट करेगा?

केन्द्रीय सरकार।

धारा 3(2)(छछ) के अनुसार उपभोक्ताओं के हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए कितने प्रतिनिधि नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे?

पाँच प्रतिनिधि।

धारा 3(2)(छछ) के अनुसार उपभोक्ता प्रतिनिधियों में से एक किस क्षेत्र से होगा?

होटल उद्योग से।

धारा 3(2)(छछ) के अनुसार उपभोक्ताओं के हितों के प्रतिनिधियों को कौन नामनिर्दिष्ट करेगा?

केन्द्रीय सरकार।

धारा 3(2)(ज) के अनुसार चिकित्सा वृत्ति का प्रतिनिधि कौन नामनिर्दिष्ट करेगा?

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद्।

धारा 3(2)(ज) के अनुसार चिकित्सा वृत्ति का कितने प्रतिनिधि समिति में होगा?

एक प्रतिनिधि।

धारा 3(2)(झ) के अनुसार भारतीय मानक संस्थान का प्रतिनिधि कौन नामनिर्दिष्ट करेगा?

भारतीय मानक संस्थान।

धारा 3(2)(झ) के अनुसार भारतीय मानक संस्थान कितने प्रतिनिधि नामनिर्दिष्ट करेगा?

एक प्रतिनिधि।

धारा 3(3) के अनुसार किन खण्डों में निर्दिष्ट सदस्यों का कार्यकाल निर्धारित किया गया है?

धारा 3(2) खण्ड (), (), (), (), (), (छछ), () और () में निर्दिष्ट सदस्यों का।

धारा 3(3) के अनुसार इन सदस्यों का कार्यकाल कितना होगा?

तीन वर्ष।

धारा 3(3) के अनुसार सदस्य कब तक पद धारण करेंगे?

जब तक उनका स्थान त्यागपत्र, मृत्यु या अन्यथा पहले रिक्त हो जाए।

धारा 3(3) के अनुसार क्या ये सदस्य पुनर्नामनिर्देशन के पात्र होंगे?

हाँ।

धारा 3(3) के अनुसार सदस्य का स्थान किन कारणों से पूर्व में रिक्त हो सकता है?

त्यागपत्र, मृत्यु या अन्यथा।

धारा 3(4) के अनुसार क्या समिति में रिक्तता होने पर उसके कृत्य प्रभावित होंगे?

नहीं।

धारा 3(4) के अनुसार समिति में रिक्तता होने पर भी क्या किया जा सकेगा?

उसके कृत्य किए जा सकेंगे।

धारा 3(5) के अनुसार उपसमितियां नियुक्त करने की शक्ति किसके पास है?

समिति के पास।

धारा 3(5) के अनुसार समिति कितनी उपसमितियां नियुक्त कर सकेगी?

जितनी वह ठीक समझे।

धारा 3(5) के अनुसार क्या उपसमितियों में समिति के सदस्य न होने वाले व्यक्तियों को भी नियुक्त किया जा सकता है?

हाँ।

धारा 3(5) के अनुसार समिति के सदस्य न होने वाले व्यक्तियों को किस उद्देश्य से नियुक्त किया जा सकता है?

ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन करने के लिए जो समिति द्वारा प्रत्यायोजित किए जाएं।

धारा 3(5) के अनुसार उपसमितियों को शक्तियां और कर्तव्य कौन प्रत्यायोजित करेगा?

समिति।

धारा 3(5) के अनुसार प्रत्यायोजन किन शर्तों के अधीन हो सकता है?

ऐसी शर्तों के अधीन जिन्हें समिति अधिरोपित करे।

धारा 3(6) के अनुसार उपविधियां बनाने की शक्ति किसके पास है?

समिति के पास।

धारा 3(6) के अनुसार समिति उपविधियां किन उद्देश्यों के लिए बना सकेगी?

अपनी प्रक्रिया के विनियमन तथा अपने कामकाज के संव्यवहार के लिए।

धारा 3(6) के अनुसार उपविधियां किसके पूर्वानुमोदन के अधीन बनाई जाएंगी?

केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन के अधीन।

धारा 3(क) का विषय क्या है?

सचिव और अन्य कर्मचारिवृन्द की नियुक्ति।

(Appointment of Secretary and other staff)

धारा 3(क)(1) के अनुसार समिति का सचिव कौन नियुक्त करेगा?

केन्द्रीय सरकार।

धारा 3(क)(1) के अनुसार सचिव किसके नियंत्रण और निदेश के अधीन कार्य करेगा?

समिति के।

धारा 3(क)(1) के अनुसार सचिव कौन-सी शक्तियों का प्रयोग करेगा?

जो विहित की जाएं या समिति द्वारा प्रत्यायोजित की जाएं।

धारा 3(क)(1) के अनुसार सचिव कौन-से कर्तव्यों का पालन करेगा?

जो विहित किए जाएं या समिति द्वारा प्रत्यायोजित किए जाएं।

धारा 3(क)(2) के अनुसार समिति के लिए लिपिकीय और अन्य कर्मचारी कौन उपलब्ध कराएगा?

केन्द्रीय सरकार।

धारा 3(क)(2) के अनुसार समिति को कितने लिपिकीय और अन्य कर्मचारी दिए जाएंगे?

जितने केन्द्रीय सरकार आवश्यक समझे।

धारा 4 का विषय क्या है?

केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला।

(Central Food Laboratory)

धारा 4(1) के अनुसार केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला स्थापित करने की शक्ति किसके पास है?

केन्द्रीय सरकार के पास।

धारा 4(1) के अनुसार केन्द्रीय सरकार कितनी केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशालाएँ स्थापित कर सकती है?

एक या अधिक।

धारा 4(1) के अनुसार केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशालाओं की स्थापना किस माध्यम से की जाएगी?

राजपत्र में अधिसूचना द्वारा।

धारा 4(1) के अनुसार केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशालाओं की स्थापना किस उद्देश्य से की जाएगी?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 या इसके अधीन बनाए गए नियमों द्वारा सौंपे गए कृत्यों के निष्पादन के लिए।

धारा 4(1) के परन्तुक के अनुसार केन्द्रीय सरकार किसे केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला के रूप में विनिर्दिष्ट कर सकती है?

किसी प्रयोगशाला या संस्थान को।

धारा 4(1) के परन्तुक के अनुसार किसी प्रयोगशाला या संस्थान को केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला किस माध्यम से विनिर्दिष्ट किया जाएगा?

राजपत्र में अधिसूचना द्वारा।

धारा 4(1) के परन्तुक के अनुसार किसी प्रयोगशाला या संस्थान को किस प्रयोजन के लिए केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला के रूप में विनिर्दिष्ट किया जा सकता है?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के प्रयोजनों के लिए।

धारा 4(2) के अनुसार केन्द्रीय सरकार नियम बनाने से पूर्व किससे परामर्श करेगी?

समिति से।

धारा 4(2)(क) के अनुसार नियमों द्वारा क्या विहित किया जा सकता है?

केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला के कृत्य।

धारा 4(2)(क) के अनुसार नियमों द्वारा और क्या विहित किया जा सकता है?

वह स्थानीय क्षेत्र या वे स्थानीय क्षेत्र जिनके भीतर केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला अपने कृत्यों का निष्पादन करेगी।

धारा 4(2)(ख) के अनुसार नियमों द्वारा किस प्रक्रिया का उपबंध किया जाएगा?

विश्लेषण या परख के लिए केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला को खाद्य पदार्थों के नमूने भेजने की प्रक्रिया।

धारा 4(2)(ख) के अनुसार नियमों द्वारा प्रयोगशाला की किन बातों का उपबंध किया जाएगा?

उसकी रिपोर्टों के प्रारूप का।

धारा 4(2)(ख) के अनुसार नियमों द्वारा रिपोर्टों के संबंध में क्या विहित किया जाएगा?

उनके संबंध में देय फीसें।

धारा 4(2)(ग) के अनुसार नियमों द्वारा किन अन्य बातों का उपबंध किया जा सकता है?

ऐसी अन्य बातें जो केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला को अपने कृत्यों का पालन करने में समर्थ बनाने के लिए आवश्यक या समीचीन हों।

 

खाद्य के बारे में साधारण उपबन्ध

धारा 5 का विषय क्या है?

कतिपय खाद्य पदार्थों के आयात का प्रतिषेध।

(Prohibition of Import of certain articles of food)

धारा 5 के अनुसार भारत में किन खाद्य पदार्थों का आयात प्रतिषिद्ध है?

धारा 5 में विनिर्दिष्ट खाद्य पदार्थों का।

धारा 5 के अनुसार भारत में आयात कौन नहीं करेगा?

कोई व्यक्ति।

धारा 5(i) के अनुसार किस प्रकार के खाद्य का आयात प्रतिषिद्ध है?

अपमिश्रित खाद्य का।

धारा 5(ii) के अनुसार किस प्रकार के खाद्य का आयात प्रतिषिद्ध है?

मिथ्या छाप वाले खाद्य का।

धारा 5(iii) के अनुसार अनुज्ञप्ति विहित होने पर खाद्य पदार्थ का आयात कब किया जा सकता है?

अनुज्ञप्ति की शर्तों के अनुसरण में।

धारा 5(iii) के अनुसार किस खाद्य पदार्थ के आयात के लिए अनुज्ञप्ति आवश्यक हो सकती है?

ऐसे खाद्य पदार्थ के लिए जिसके आयात हेतु अनुज्ञप्ति विहित की गई हो।

धारा 5(iv) के अनुसार किस प्रकार का खाद्य पदार्थ भारत में आयात नहीं किया जा सकता?

ऐसा खाद्य पदार्थ जिसका आयात खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के किसी उपबन्ध या तद्धीन बनाए गए किसी नियम के उल्लंघन में हो।

धारा 5(iv) के अनुसार खाद्य पदार्थ का आयात किनके उल्लंघन में प्रतिषिद्ध है?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के किसी उपबन्ध या तद्धीन बनाए गए किसी नियम के उल्लंघन में।

धारा 6 का विषय क्या है?

सागर सीमाशुल्क और सीमाशुल्क अधिकारियों की शक्तियों से सम्बद्ध विधि का लागू होना।

(Application of law relating to sea customs and powers of Customs Officers)

धारा 6(1) के अनुसार यह धारा किन खाद्य पदार्थों पर लागू होती है?

उन खाद्य पदार्थों पर जिनका आयात धारा 5 के अधीन प्रतिषिद्ध है।

धारा 6(1) के अनुसार सागर सीमाशुल्क से संबंधित तत्समय प्रवृत्त विधि किन खाद्य पदार्थों पर लागू होगी?

धारा 5 के अधीन प्रतिषिद्ध आयात वाले खाद्य पदार्थों पर।

धारा 6(1) के अनुसार सागर सीमाशुल्क से संबंधित विधि का प्रयोग किस धारा के उपबंधों के अधीन होगा?

धारा 16 के उपबंधों के अधीन।

धारा 6(1) के अनुसार यह विधि किन मालों से संबंधित है?

ऐसे माल जिनका आयात सागर सीमाशुल्क अधिनियम, 1878 की धारा 18 द्वारा प्रतिषिद्ध है।

धारा 6(1) के अनुसार इस धारा में किस अधिनियम की धारा 18 का उल्लेख है?

सागर सीमाशुल्क अधिनियम, 1878 की धारा 18

धारा 6(1) के अनुसार सीमाशुल्क अधिकारियों की शक्तियाँ किन खाद्य पदार्थों के संबंध में लागू होंगी?

धारा 5 के अधीन प्रतिषिद्ध आयात वाले खाद्य पदार्थों के संबंध में।

धारा 6(1) के अनुसार सीमाशुल्क अधिकारियों की शक्तियाँ कैसी होंगी?

वही जो तत्समय पूर्वोक्त माल के संबंध में हैं।

धारा 6(1) के अनुसार सीमाशुल्क आयुक्त एवं अन्य सशक्त अधिकारियों की शक्तियाँ किनके समान होंगी?

पूर्वोक्त माल के संबंध में उनकी तत्समय विद्यमान शक्तियों के समान।

धारा 6(1) के अनुसार सीमाशुल्क आयुक्त एवं अन्य अधिकारी किस अधिनियम के अधीन सशक्त होते हैं?

सागर सीमाशुल्क अधिनियम, 1878 के अधीन।

धारा 6(1) के अनुसार सीमाशुल्क आयुक्त एवं अन्य अधिकारियों को किस उद्देश्य से सशक्त किया जाता है?

सीमाशुल्क अधिकारियों पर अधिरोपित कर्तव्यों के पालन के लिए।

धारा 6(2) के अनुसार आयात पैकेज को निरुद्ध करने की शक्ति किसके पास है?

सीमाशुल्क आयुक्त या केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत सरकार के किसी अधिकारी के पास।

धारा 6(2) के अनुसार आयात पैकेज कब निरुद्ध किया जा सकता है?

जब उसके भीतर ऐसे खाद्य पदार्थ के होने का संदेह हो जिसका आयात धारा 5 के अधीन प्रतिषिद्ध है।

धारा 6(2) के अनुसार किस प्रकार के खाद्य पदार्थ के संदेह पर आयात पैकेज निरुद्ध किया जा सकता है?

ऐसे खाद्य पदार्थ के, जिसका आयात धारा 5 के अधीन प्रतिषिद्ध है।

धारा 6(2) के अनुसार आयात पैकेज के निरोध की रिपोर्ट किसे की जाएगी?

केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक को।

धारा 6(2) के अनुसार निरोध की रिपोर्ट कब की जाएगी?

तत्काल।

धारा 6(2) के अनुसार केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक की अपेक्षा पर क्या भेजा जाएगा?

आयात पैकेज या उसमें पाए गए सन्देहजनक खाद्य पदार्थ का नमूना।

धारा 6(2) के अनुसार आयात पैकेज या नमूना कहाँ भेजा जाएगा?

केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला को।

धारा 6(2) के अनुसार सन्देहजनक खाद्य पदार्थ का क्या भेजा जा सकता है?

उसका नमूना।

धारा 7 का विषय क्या है?

कतिपय खाद्य पदार्थों के विनिर्माण, विक्रय आदि का प्रतिषेध।

(Prohibition of manufacture, sale, etc., of certain articles of food)

धारा 7 के अनुसार यह धारा किसके कार्यों का प्रतिषेध करती है?

विक्रयार्थ विनिर्माण, भंडारकरण, विक्रय और वितरण का।

धारा 7 के अनुसार प्रतिषिद्ध कार्य कौन नहीं करेगा?

कोई व्यक्ति स्वयं या अपने निमित्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा।

धारा 7 के अनुसार कोई व्यक्ति किन कार्यों के लिए उत्तरदायी होगा?

स्वयं या अपने निमित्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किए गए विनिर्माण, भंडारकरण, विक्रय या वितरण के लिए।

धारा 7(i) के अनुसार किस प्रकार के खाद्य का विक्रयार्थ विनिर्माण, भंडारकरण, विक्रय या वितरण प्रतिषिद्ध है?

अपमिश्रित खाद्य का।

धारा 7(ii) के अनुसार किस प्रकार के खाद्य का विक्रयार्थ विनिर्माण, भंडारकरण, विक्रय या वितरण प्रतिषिद्ध है?

मिथ्या छाप वाले खाद्य का।

धारा 7(iii) के अनुसार अनुज्ञप्ति विहित होने पर खाद्य पदार्थ का विक्रय कब किया जा सकता है?

अनुज्ञप्ति की शर्तों के अनुसार।

धारा 7(iii) के अनुसार किस खाद्य पदार्थ के विक्रय के लिए अनुज्ञप्ति आवश्यक हो सकती है?

ऐसे खाद्य पदार्थ के जिसके विक्रय के लिए अनुज्ञप्ति विहित की गई हो।

धारा 7(iv) के अनुसार किस खाद्य पदार्थ का विक्रयार्थ विनिर्माण, भंडारकरण, विक्रय या वितरण प्रतिषिद्ध है?

ऐसा खाद्य पदार्थ जिसका विक्रय सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में खाद्य (स्वास्थ्य) प्राधिकारी द्वारा प्रतिषिद्ध किया गया हो।

धारा 7(iv) के अनुसार खाद्य पदार्थ के विक्रय का प्रतिषेध कौन कर सकता है?

खाद्य (स्वास्थ्य) प्राधिकारी।

धारा 7(iv) के अनुसार खाद्य पदार्थ का विक्रय किस हित में प्रतिषिद्ध किया जा सकता है?

सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में।

धारा 7(v) के अनुसार किस प्रकार के खाद्य पदार्थ का विनिर्माण, भंडारकरण, विक्रय या वितरण प्रतिषिद्ध है?

ऐसा खाद्य पदार्थ जो खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के किसी उपबन्ध या तद्धीन बनाए गए नियमों के उल्लंघन में हो।

धारा 7(vi) के अनुसार किसका विनिर्माण, भंडारकरण, विक्रय या वितरण प्रतिषिद्ध है?

अपद्रव्य का।

धारा 7 के स्पष्टीकरण के अनुसार कब यह समझा जाएगा कि किसी व्यक्ति ने ऐसे खाद्य का भंडारकरण किया है?

जब वह अपमिश्रित खाद्य, मिथ्या छाप वाला खाद्य अथवा खण्ड (iii), (iv) या (v) में निर्दिष्ट खाद्य पदार्थ का किसी खाद्य पदार्थ के विक्रयार्थ विनिर्माण के लिए भंडारकरण करता है।

धारा 7 के स्पष्टीकरण के अनुसार किस उद्देश्य से किया गया भंडारकरण इस धारा के अधीन भंडारकरण माना जाएगा?

विक्रयार्थ किसी खाद्य पदार्थ के विनिर्माण के लिए।

 

खाद्य विश्लेषण

धारा 8 का विषय क्या है?

लोक विश्लेषक।

(Public Analysts)

धारा 8 के अनुसार लोक विश्लेषक नियुक्त करने की शक्ति किसके पास है?

केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के पास।

धारा 8 के अनुसार लोक विश्लेषक की नियुक्ति किस माध्यम से की जाएगी?

शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा।

धारा 8 के अनुसार लोक विश्लेषक के रूप में किन व्यक्तियों को नियुक्त किया जा सकता है?

विहित अर्हताओं वाले ऐसे व्यक्तियों को जिन्हें केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार उचित समझे।

धारा 8 के अनुसार लोक विश्लेषक के लिए अर्हताएँ कैसी होनी चाहिए?

विहित अर्हताएँ।

धारा 8 के अनुसार लोक विश्लेषक किसके लिए नियुक्त किए जाएंगे?

ऐसे स्थानीय क्षेत्रों के लिए जो, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा उन्हें सौंपे जाएँ।

धारा 8 के अनुसार स्थानीय क्षेत्र कौन सौंपेगा?

यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार।

धारा 8 के प्रथम परन्तुक के अनुसार किस व्यक्ति को लोक विश्लेषक नियुक्त नहीं किया जाएगा?

जिसका किसी खाद्य पदार्थ के विनिर्माण, आयात या विक्रय में कोई वित्तीय हित हो।

धारा 8 के प्रथम परन्तुक के अनुसार लोक विश्लेषक की नियुक्ति के लिए कौन-सी अयोग्यता निर्धारित है?

किसी खाद्य पदार्थ के विनिर्माण, आयात या विक्रय में वित्तीय हित होना।

धारा 8 के द्वितीय परन्तुक के अनुसार क्या विभिन्न खाद्य पदार्थों के लिए अलग-अलग लोक विश्लेषक नियुक्त किए जा सकते हैं?

हाँ।

धारा 8 के द्वितीय परन्तुक के अनुसार विभिन्न लोक विश्लेषक किनके लिए नियुक्त किए जा सकते हैं?

विभिन्न खाद्य पदार्थों के लिए।

धारा 9 का विषय क्या है?

खाद्य निरीक्षक।

(Food Inspectors)

धारा 9(1) के अनुसार खाद्य निरीक्षक नियुक्त करने की शक्ति किसके पास है?

केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के पास।

धारा 9(1) के अनुसार खाद्य निरीक्षक की नियुक्ति किस माध्यम से की जाएगी?

शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा।

धारा 9(1) के अनुसार खाद्य निरीक्षक के रूप में किन व्यक्तियों को नियुक्त किया जा सकता है?

विहित अर्हताओं वाले ऐसे व्यक्तियों को जिन्हें केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार ठीक समझती है।

धारा 9(1) के अनुसार खाद्य निरीक्षक के लिए अर्हताएँ कैसी होनी चाहिए?

विहित अर्हताएँ।

धारा 9(1) के अनुसार खाद्य निरीक्षक किसके लिए नियुक्त किए जाएंगे?

ऐसे स्थानीय क्षेत्रों के लिए जो उन्हें, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा सौंपे जाएँ।

धारा 9(1) के अनुसार स्थानीय क्षेत्र कौन सौंपेगा?

यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार।

धारा 9(1) के परन्तुक का विषय क्या है?

खाद्य निरीक्षक की नियुक्ति पर प्रतिबन्ध।

धारा 9(1) के परन्तुक के अनुसार किस व्यक्ति को खाद्य निरीक्षक नियुक्त नहीं किया जाएगा?

जिसका किसी खाद्य पदार्थ के विनिर्माण, आयात या विक्रय में कोई वित्तीय हित हो।

धारा 9(1) के परन्तुक के अनुसार खाद्य निरीक्षक की नियुक्ति के लिए कौन-सी अयोग्यता निर्धारित है?

किसी खाद्य पदार्थ के विनिर्माण, आयात या विक्रय में वित्तीय हित होना।

धारा 9(2) का विषय क्या है?

खाद्य निरीक्षक का लोक सेवक होना एवं अधीनस्थता।

धारा 9(2) के अनुसार प्रत्येक खाद्य निरीक्षक क्या समझा जाएगा?

लोक सेवक।

धारा 9(2) के अनुसार प्रत्येक खाद्य निरीक्षक किस धारा के अर्थ में लोक सेवक समझा जाएगा?

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 21 [भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 2(28)] के अर्थ में।

धारा 9(2) के अनुसार खाद्य निरीक्षक किसके शासकीय रूप से अधीनस्थ होगा?

ऐसे प्राधिकारी के जिसे उसे नियुक्त करने वाली सरकार इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे।

धारा 9(2) के अनुसार खाद्य निरीक्षक का अधीनस्थ प्राधिकारी कौन विनिर्दिष्ट करेगा?

उसे नियुक्त करने वाली सरकार।

धारा 10 का विषय क्या है?

खाद्य निरीक्षकों की शक्तियां।

(Powers of Food Inspectors)

धारा 10(1) के अनुसार खाद्य निरीक्षक को क्या शक्तियां प्राप्त हैं?

धारा 10(1) में विनिर्दिष्ट शक्तियां।

धारा 10(1)(क) के अनुसार खाद्य निरीक्षक किस उद्देश्य से शक्ति का प्रयोग कर सकता है?

खाद्य पदार्थ के नमूने लेने के लिए।

धारा 10(1)(क) के अनुसार खाद्य निरीक्षक किन व्यक्तियों से खाद्य पदार्थ का नमूना ले सकता है?

उपखण्ड (i) और (ii) में विनिर्दिष्ट व्यक्तियों से।

धारा 10(1)(क)(i) के अनुसार खाद्य निरीक्षक किससे खाद्य पदार्थ का नमूना ले सकता है?

ऐसे पदार्थ का विक्रय करने वाले किसी व्यक्ति से।

धारा 10(1)(क)(i) के अनुसार खाद्य निरीक्षक किस पदार्थ का नमूना ले सकता है?

विक्रय किए जा रहे खाद्य पदार्थ का।

धारा 10(1)(क)(ii) के अनुसार खाद्य निरीक्षक किससे खाद्य पदार्थ का नमूना ले सकता है?

ऐसे व्यक्ति से जो खाद्य पदार्थ को किसी क्रेता या परेषिती के पास पहुँचाने, परिदान करने या परिदान के लिए तैयार करने में लगा हो।

धारा 10(1)(क)(ii) के अनुसार खाद्य पदार्थ को किसके पास पहुँचाने वाले व्यक्ति से नमूना लिया जा सकता है?

किसी क्रेता या परेषिती के पास पहुँचाने वाले व्यक्ति से।

धारा 10(1)(क)(ii) के अनुसार खाद्य पदार्थ को परिदान करने या परिदान के लिए तैयार करने वाले व्यक्ति से क्या लिया जा सकता है?

खाद्य पदार्थ का नमूना।

धारा 10(1)(क)(iii) के अनुसार खाद्य निरीक्षक किससे खाद्य पदार्थ का नमूना ले सकता है?

ऐसे परेषिती से जिसे वह खाद्य पदार्थ परिदत्त हो गया हो।

धारा 10(1)(ख) के अनुसार खाद्य निरीक्षक नमूने का क्या करेगा?

उसे विश्लेषणार्थ लोक विश्लेषक के पास भेजेगा।

धारा 10(1)(ख) के अनुसार नमूना किस लोक विश्लेषक के पास भेजा जाएगा?

उस स्थानीय क्षेत्र के लोक विश्लेषक के पास जिसके भीतर नमूना लिया गया है।

धारा 10(1)(ख) के अनुसार नमूना किस प्रयोजन से भेजा जाएगा?

विश्लेषणार्थ।

धारा 10(1)(ग) के अनुसार खाद्य निरीक्षक किसका विक्रय प्रतिषिद्ध कर सकता है?

किसी खाद्य पदार्थ का।

धारा 10(1)(ग) के अनुसार खाद्य पदार्थ का विक्रय किस हित में प्रतिषिद्ध किया जा सकता है?

सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में।

धारा 10(1)(ग) के अनुसार स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी का अनुमोदन कैसा होना चाहिए?

पूर्व अनुमोदन।

धारा 10(1)(ग) के अनुसार खाद्य (स्वास्थ्य) प्राधिकारी का अनुमोदन कैसा होना चाहिए?

पूर्व अनुमोदन।

धारा 10(1)(ग) के अनुसार खाद्य निरीक्षक किसके पूर्व अनुमोदन से विक्रय प्रतिषिद्ध कर सकता है?

सम्बन्धित स्थानीय क्षेत्र में अधिकारिता रखने वाले स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी या खाद्य (स्वास्थ्य) प्राधिकारी के पूर्व अनुमोदन से।

धारा 10(1) के स्पष्टीकरण के अनुसार "परेषिती" में कौन सम्मिलित नहीं है?

जो व्यक्ति किसी खाद्य पदार्थ को अपने ही उपभोग के लिए क्रय करता है या प्राप्त करता है।

धारा 10(2) के अनुसार खाद्य निरीक्षक किन स्थानों में प्रवेश कर सकता है?

जहाँ खाद्य पदार्थ या अपद्रव्य का विनिर्माण, भंडारण, प्रदर्शन या विक्रयार्थ अन्य खाद्य पदार्थ के विनिर्माण हेतु भंडारण किया जाता है।

धारा 10(2) के अनुसार खाद्य निरीक्षक ऐसे स्थान पर क्या कर सकता है?

प्रवेश, निरीक्षण तथा खाद्य पदार्थ या अपद्रव्य के नमूने ले सकता है।

धारा 10(2) के अनुसार खाद्य निरीक्षक किस उद्देश्य से नमूने ले सकता है?

विश्लेषण के लिए।

धारा 10(2) के परन्तुक के अनुसार किस खाद्य पदार्थ का नमूना नहीं लिया जाएगा?

ऐसे प्राथमिक खाद्य पदार्थ का जो ऐसे खाद्य के रूप में विक्रय के लिए आशयित हो।

धारा 10(3) के अनुसार नमूना लेने पर किसे मूल्य दिया जाएगा?

उस व्यक्ति को जिससे नमूना लिया गया है।

धारा 10(3) के अनुसार नमूने का मूल्य किस दर से दिया जाएगा?

जिस दर पर वह पदार्थ लोगों को प्रायः विक्रीत किया जाता है।

धारा 10(4) के अनुसार खाद्य निरीक्षक किसी पदार्थ का अभिग्रहण कब कर सकता है?

जब वह खाद्य के लिए आशयित पदार्थ उसे अपमिश्रित या मिथ्या छाप वाला प्रतीत हो।

धारा 10(4) के अनुसार अभिगृहीत पदार्थ का क्या किया जा सकता है?

उसे ले जाया जा सकता है या विक्रेता की सुरक्षित अभिरक्षा में रखा जा सकता है।

धारा 10(4) के अनुसार खाद्य निरीक्षक अभिगृहीत पदार्थ का नमूना किसे भेजेगा?

लोक विश्लेषक को।

धारा 10(4) के अनुसार अभिगृहीत पदार्थ का नमूना किस प्रयोजन से भेजा जाएगा?

विश्लेषण के लिए।

धारा 10(4) के परन्तुक के अनुसार विक्रेता की सुरक्षित अभिरक्षा में पदार्थ रखने पर खाद्य निरीक्षक क्या अपेक्षा कर सकता है?

पदार्थ के मूल्य के बराबर धनराशि के लिए एक या अधिक प्रतिभुओं सहित बन्धपत्र।

धारा 10(4) के परन्तुक के अनुसार बन्धपत्र किस धनराशि के लिए होगा?

पदार्थ के मूल्य के बराबर धनराशि के लिए।

धारा 10(4) के परन्तुक के अनुसार बन्धपत्र में कितने प्रतिभू हो सकते हैं?

एक या अधिक।

धारा 10(4) के परन्तुक के अनुसार क्या विक्रेता बन्धपत्र देने के लिए बाध्य होगा?

हाँ।

धारा 10(4क) के अनुसार अभिगृहीत खाद्य पदार्थ कब नष्ट कराया जा सकता है?

जब वह विनश्वर प्रकृति का हो और स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी का समाधान हो जाए कि वह मानव उपभोग के योग्य नहीं रहा।

धारा 10(4क) के अनुसार विनश्वर खाद्य पदार्थ को नष्ट कराने की शक्ति किसके पास है?

स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी के पास।

धारा 10(4क) के अनुसार खाद्य पदार्थ नष्ट कराने से पूर्व क्या दिया जाएगा?

विक्रेता को लिखित सूचना।

धारा 10(5) के अनुसार खाद्य निरीक्षक किस पैकेज को तोड़कर खोल सकता है?

ऐसे पैकेज को जिसमें कोई खाद्य पदार्थ अन्तर्विष्ट हो।

धारा 10(5) के अनुसार खाद्य निरीक्षक किन परिसरों के द्वार को तोड़कर खोल सकता है?

ऐसे परिसरों के द्वार को जहाँ कोई खाद्य पदार्थ विक्रयार्थ रखा हो।

धारा 10(5) के अनुसार पैकेज को तोड़कर खोलने की शक्ति कब प्रयोग की जाएगी?

जब पैकेज का स्वामी या उसका भारसाधक पैकेज खोलने से इन्कार करे।

धारा 10(5) के अनुसार द्वार को तोड़कर खोलने की शक्ति कब प्रयोग की जाएगी?

जब परिसर का अधिभोगी या वहाँ उपस्थित अन्य व्यक्ति द्वार खोलने से इन्कार करे।

धारा 10(5) के प्रथम परन्तुक के अनुसार पैकेज या द्वार तोड़कर खोलने से पूर्व क्या आवश्यक है?

पैकेज या द्वार खोलने के लिए कहना।

धारा 10(5) के प्रथम परन्तुक के अनुसार पैकेज या द्वार तोड़कर खोलने से पूर्व खाद्य निरीक्षक क्या अभिलिखित करेगा?

ऐसा करने के कारण।

धारा 10(5) के द्वितीय परन्तुक के अनुसार प्रवेश एवं निरीक्षण करते समय खाद्य निरीक्षक किस संहिता के उपबंधों का अनुसरण करेगा?

दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023) के उपबंधों का।

धारा 10(5) के द्वितीय परन्तुक के अनुसार किन उपबंधों का यावत्साध्य अनुसरण किया जाएगा?

तलाशी वारंट का निष्पादन करने वाले पुलिस अधिकारी द्वारा किसी स्थान की तलाशी या निरीक्षण से संबंधित उपबंधों का।

धारा 10(6) के अनुसार खाद्य निरीक्षक किस अपद्रव्य का अभिग्रहण कर सकता है?

ऐसा अपद्रव्य जो खाद्य पदार्थ के विनिर्माता, वितरक या व्यवहारी के कब्जे में या उसके अधिभोगाधीन परिसर में पाया जाए।

धारा 10(6) के अनुसार अपद्रव्य का अभिग्रहण कब किया जा सकता है?

जब उसके कब्जे का समाधानप्रद लेखा-जोखा खाद्य निरीक्षक को दिया जा सके।

धारा 10(6) के अनुसार खाद्य निरीक्षक किन लेखाबहियों एवं दस्तावेजों का अभिग्रहण कर सकता है?

जो उसके कब्जे या नियंत्रण में हों और खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के अधीन किसी अन्वेषण या कार्यवाही के लिए उपयोगी या सुसंगत हों।

धारा 10(6) के अनुसार लेखाबहियों एवं दस्तावेजों का अभिग्रहण किस उद्देश्य से किया जा सकता है?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के अधीन किसी अन्वेषण या कार्यवाही के लिए।

धारा 10(6) के अनुसार अभिगृहीत अपद्रव्य का क्या भेजा जा सकता है?

उसका एक नमूना।

धारा 10(6) के अनुसार अभिगृहीत अपद्रव्य का नमूना किसे भेजा जाएगा?

लोक विश्लेषक को।

धारा 10(6) के अनुसार अभिगृहीत अपद्रव्य का नमूना किस प्रयोजन से भेजा जाएगा?

विश्लेषण के लिए।

धारा 10(6) के परन्तुक के अनुसार खाद्य निरीक्षक लेखाबहियों या अन्य दस्तावेजों का अभिग्रहण किसके पूर्व अनुमोदन के बिना नहीं करेगा?

उस प्राधिकारी के पूर्व अनुमोदन के बिना जिसके वह शासकीय रूप से अधीनस्थ है।

धारा 10(6) के परन्तुक के अनुसार खाद्य निरीक्षक किस प्राधिकारी के अधीनस्थ होता है?

उस प्राधिकारी के जिसे उसे शासकीय रूप से अधीनस्थ किया गया है।

धारा 10(7) के अनुसार खाद्य निरीक्षक कार्यवाही करते समय क्या करेगा?

एक या अधिक व्यक्तियों को उपस्थित होने के लिए कहेगा।

धारा 10(7) के अनुसार किन उपधाराओं के अधीन कार्यवाही करने पर साक्षियों को बुलाया जाएगा?

धारा 10(1)(), उपधारा (2), उपधारा (4) तथा उपधारा (6) के अधीन।

धारा 10(7) के अनुसार उपस्थित व्यक्तियों से क्या कराया जाएगा?

उनके हस्ताक्षर कराए जाएंगे।

धारा 10(7क) के अनुसार अभिगृहीत लेखाबहियां या दस्तावेज कितने समय के भीतर लौटाए जाएंगे?

अभिग्रहण की तारीख से अधिकतम तीस दिन के भीतर।

धारा 10(7क) के अनुसार लेखाबहियां या दस्तावेज किसे लौटाए जाएंगे?

उस व्यक्ति को जिससे उनका अभिग्रहण किया गया था।

धारा 10(7क) के अनुसार लेखाबहियां या दस्तावेज लौटाने से पूर्व क्या किया जाएगा?

उस व्यक्ति द्वारा प्रमाणित उनकी प्रतियां या उद्धरण लिए जाएंगे।

धारा 10(7क) के अनुसार प्रतियां या उद्धरण किस रीति से प्रमाणित किए जाएंगे?

विहित रीति से।

धारा 10(7क) के परन्तुक के अनुसार यदि व्यक्ति प्रमाणित करने से इन्कार करे और उसके विरुद्ध अभियोजन चलाया जाए तो लेखाबहियां या दस्तावेज कब लौटाए जाएंगे?

जब न्यायालय द्वारा प्रमाणित उनकी प्रतियां या उद्धरण ले लिए गए हों।

धारा 10(7ख) के अनुसार अपद्रव्य अपमिश्रण के प्रयोजनों के लिए आशयित नहीं है, यह साबित करने का भार किस पर होगा?

उस व्यक्ति पर जिसके कब्जे से अपद्रव्य का अभिग्रहण किया गया था।

धारा 10(7ख) के अनुसार यह प्रमाण का भार कब उत्पन्न होता है?

जब धारा 10(6) के अधीन किसी अपद्रव्य का अभिग्रहण किया जाता है।

धारा 10(8) के अनुसार खाद्य निरीक्षक किस उद्देश्य से पुलिस अधिकारी की शक्तियों का प्रयोग कर सकता है?

उस व्यक्ति का सही नाम और निवास-स्थान अभिनिश्चित करने के लिए जिससे नमूना लिया गया है या खाद्य पदार्थ अभिगृहीत किया गया है।

धारा 10(8) के अनुसार खाद्य निरीक्षक पुलिस अधिकारी की शक्तियों का प्रयोग किसके संबंध में कर सकता है?

उस व्यक्ति के संबंध में जिससे नमूना लिया गया है या खाद्य पदार्थ अभिगृहीत किया गया है।

धारा 10(8) के अनुसार खाद्य निरीक्षक किस धारा के अधीन पुलिस अधिकारी की शक्तियों का प्रयोग करेगा?

दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 39 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 42) के अधीन।

धारा 10(9) के अनुसार यह उपधारा किस पर लागू होती है?

ऐसे खाद्य निरीक्षक पर जो खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 या तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन शक्तियों का प्रयोग करता है।

धारा 10(9)(क) के अनुसार खाद्य निरीक्षक कब अपराध का दोषी होगा?

जब वह तंग करने के लिए और संदेह के किसी युक्तियुक्त आधार के बिना किसी खाद्य पदार्थ या अपद्रव्य का अभिग्रहण करेगा।

धारा 10(9)(क) के अनुसार किस प्रकार का अभिग्रहण दण्डनीय है?

तंग करने के लिए तथा युक्तियुक्त संदेह के आधार के बिना किया गया अभिग्रहण।

धारा 10(9)(ख) के अनुसार खाद्य निरीक्षक कब अपराध का दोषी होगा?

जब वह किसी व्यक्ति को क्षतिकर कोई अन्य कार्य यह विश्वास करने का कारण हुए बिना करेगा कि वह कार्य उसके कर्तव्य के निर्वहन के लिए आवश्यक है।

धारा 10(9)(ख) के अनुसार खाद्य निरीक्षक के लिए किस प्रकार का कार्य दण्डनीय है?

ऐसा क्षतिकर कार्य जिसके लिए उसे यह विश्वास करने का कारण हो कि वह उसके कर्तव्य के निर्वहन के लिए आवश्यक है।

धारा 10(9) के अनुसार ऐसे खाद्य निरीक्षक को किस प्रकार दण्डित किया जाएगा?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के अधीन अपराध का दोषी मानकर जुर्माने से।

धारा 10(9) के अनुसार न्यूनतम जुर्माना कितना है?

पाँच सौ रुपए।

धारा 10(9) के अनुसार अधिकतम जुर्माना कितना है?

एक हजार रुपए।

धारा 11 का विषय क्या है?

खाद्य निरीक्षकों द्वारा अनुसरणीय प्रक्रिया।

(Procedure to be followed by food Inspectors)

धारा 11(1) के अनुसार यह प्रक्रिया कब अपनाई जाएगी?

जब खाद्य निरीक्षक विश्लेषण के लिए खाद्य का नमूना लेता है।

धारा 11(1)(क) के अनुसार खाद्य निरीक्षक किस बात की लिखित सूचना देगा?

नमूने का विश्लेषण कराने के अपने आशय की।

धारा 11(1)(क) के अनुसार लिखित सूचना किसे दी जाएगी?

उस व्यक्ति को जिससे नमूना लिया गया है।

धारा 11(1)(क) के अनुसार लिखित सूचना और किसे दी जाएगी?

उस व्यक्ति को, यदि कोई हो, जिसका नाम, पता और अन्य विशिष्टियां धारा 14 के अधीन प्रकट की गई हैं।

धारा 11(1)(क) के अनुसार लिखित सूचना कब और कहाँ दी जाएगी?

उसी समय और वहीं।

धारा 11(1)(ख) के अनुसार विशेष मामलों को छोड़कर खाद्य निरीक्षक नमूने के कितने भाग करेगा?

तीन अलग-अलग भाग।

धारा 11(1)(ख) के अनुसार नमूने के प्रत्येक भाग के साथ क्या किया जाएगा?

उसे उसकी प्रकृति के अनुकूल रीति से चिह्नित और मुहरबन्द किया जाएगा या बाँधा जाएगा।

धारा 11(1)(ख) के अनुसार खाद्य निरीक्षक किसके हस्ताक्षर या अंगूठे की छाप लेगा?

उस व्यक्ति के जिससे नमूना लिया गया है।

धारा 11(1)(ख) के अनुसार हस्ताक्षर या अंगूठे की छाप किस प्रकार ली जाएगी?

ऐसे स्थान में और ऐसी रीति से जो विहित की जाए।

धारा 11(1)(ख) के परन्तुक के अनुसार यदि व्यक्ति हस्ताक्षर या अंगूठे की छाप लगाने से इन्कार करे तो खाद्य निरीक्षक क्या करेगा?

एक या अधिक साक्षियों को बुलाएगा।

धारा 11(1)(ख) के परन्तुक के अनुसार हस्ताक्षर या अंगूठे की छाप के स्थान पर किसके हस्ताक्षर या अंगूठे की छाप ली जाएगी?

साक्षी या साक्षियों के।

धारा 11(1)(ग)(i) के अनुसार नमूने का एक भाग किसे भेजा जाएगा?

लोक विश्लेषक को।

धारा 11(1)(ग)(i) के अनुसार नमूने का एक भाग किस प्रयोजन से भेजा जाएगा?

विश्लेषण के लिए।

धारा 11(1)(ग)(i) के अनुसार लोक विश्लेषक को नमूना भेजते समय किसे सूचना दी जाएगी?

स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी को।

धारा 11(1)(ग)(ii) के अनुसार नमूने के शेष कितने भाग स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी को भेजे जाएंगे?

दो भाग।

धारा 11(1)(ग)(ii) के अनुसार शेष दो भाग किस प्रयोजन के लिए स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी को भेजे जाएंगे?

धारा 11(2) तथा धारा 13 की उपधारा (2) और (2) के प्रयोजनों के लिए।

धारा 11(2) के अनुसार नमूने का दूसरा भाग कब भेजा जाएगा?

जब लोक विश्लेषक को भेजा गया भाग खो जाए या खराब हो जाए।

धारा 11(2) के अनुसार नमूने का दूसरा भाग किसे भेजा जाएगा?

लोक विश्लेषक को।

धारा 11(2) के अनुसार नमूने का दूसरा भाग कौन भेजेगा?

स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी।

धारा 11(2) के अनुसार नमूने का दूसरा भाग किसकी अध्यपेक्षा पर भेजा जाएगा?

लोक विश्लेषक या खाद्य निरीक्षक की अध्यपेक्षा पर।

धारा 11(2) के अनुसार दूसरा भाग किस प्रयोजन से भेजा जाएगा?

विश्लेषण के लिए।

धारा 11(3) के अनुसार यह उपधारा किन नमूनों पर लागू होती है?

धारा 10(1) या धारा 10(2) के अधीन लिए गए खाद्य पदार्थ या अपद्रव्य के नमूनों पर।

धारा 11(3) के अनुसार खाद्य निरीक्षक नमूना कब तक लोक विश्लेषक को भेजेगा?

ठीक बाद के कार्य दिवस तक।

धारा 11(3) के अनुसार नमूना किसके पास भेजा जाएगा?

संबंधित स्थानीय क्षेत्र के लोक विश्लेषक के पास।

धारा 11(3) के अनुसार नमूना किसके अनुसार भेजा जाएगा?

नमूनाकरण के लिए विहित नियमों के अनुसार।

धारा 11(4) के अनुसार धारा 10(4) के अधीन अभिगृहीत खाद्य पदार्थ कब मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा?

यथासंभव शीघ्रता से तथा लोक विश्लेषक की रिपोर्ट मिलने के सात दिन के भीतर।

धारा 11(4) के अनुसार यदि खाद्य पदार्थ धारा 10(4क) के अधीन नष्ट कर दिया गया हो तो क्या उसे प्रस्तुत किया जाएगा?

नहीं।

धारा 11(4) के अनुसार धारा 10(6) के अधीन अभिगृहीत अपद्रव्य कब प्रस्तुत किया जाएगा?

यथासंभव शीघ्रता से तथा लोक विश्लेषक की रिपोर्ट मिलने के सात दिन के भीतर।

धारा 11(4) के परन्तुक के अनुसार मजिस्ट्रेट खाद्य निरीक्षक को क्या निर्देश दे सकता है?

अभिगृहीत खाद्य पदार्थ को निर्दिष्ट समय के भीतर उसके समक्ष प्रस्तुत करने का।

धारा 11(4) के परन्तुक के अनुसार ऐसा निर्देश कब दिया जा सकता है?

जब अभिग्रहण से प्रभावित व्यक्ति मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन करे।

धारा 11(5)(क) के अनुसार यदि खाद्य पदार्थ अपमिश्रित या मिथ्या छाप वाला हो तो मजिस्ट्रेट क्या आदेश दे सकता है?

उसे समपहृत करने, नष्ट करने, विशेष प्रकार से व्ययन करने या शर्तों सहित स्वामी को लौटाने का।

धारा 11(5)(क)(i) के अनुसार खाद्य पदार्थ किसके पक्ष में समपहृत किया जा सकता है?

केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकारी के पक्ष में।

धारा 11(5)(क)(ii) के अनुसार खाद्य पदार्थ किसके खर्चे पर नष्ट किया जा सकता है?

स्वामी या उस व्यक्ति के खर्चे पर जिससे वह अभिगृहीत किया गया था।

धारा 11(5)(क)(ii) के अनुसार खाद्य पदार्थ किस उद्देश्य से नष्ट किया जाएगा?

ताकि उसका मानव खाद्य के रूप में उपयोग हो सके।

धारा 11(5)(क)(iii) के अनुसार खाद्य पदार्थ का व्ययन किस प्रकार किया जा सकता है?

इस प्रकार कि उसे प्रवंचक नाम से पुनः विक्रय या खाद्य के रूप में उपयोग किया जा सके।

धारा 11(5)(क)(iv) के अनुसार किन परिस्थितियों में खाद्य पदार्थ स्वामी को लौटाया जा सकता है?

जब उसे समुचित नाम से विक्रय किया जाना हो या पुनः प्रसंस्करण के बाद वह विहित मान के अनुरूप बनाया जा सके।

धारा 11(5)(क)(iv) के अनुसार पुनः प्रसंस्करण किसके पर्यवेक्षण में होगा?

आदेश में विनिर्दिष्ट अधिकारी के पर्यवेक्षण में।

धारा 11(5)(क)(iv) के अनुसार स्वामी को खाद्य पदार्थ लौटाने के लिए क्या आवश्यक हो सकता है?

प्रतिभुओं सहित या रहित बंधपत्र का निष्पादन।

धारा 11(5)(ख) के अनुसार अपद्रव्य कब समपहृत किया जा सकता है?

जब वह अपमिश्रण के प्रयोजन के लिए उपयोग योग्य प्रतीत हो तथा उसके कब्जे का समाधानप्रद लेखा-जोखा दिया जा सके।

धारा 11(5)(ख) के अनुसार अपद्रव्य किसके पक्ष में समपहृत किया जा सकता है?

केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकारी के पक्ष में।

धारा 11(6)(क) के अनुसार खाद्य पदार्थ कब लौटाया जाएगा?

जब मजिस्ट्रेट को प्रतीत हो कि वह अपमिश्रित नहीं है।

धारा 11(6)(ख) के अनुसार अपद्रव्य कब लौटाया जाएगा?

जब मजिस्ट्रेट को प्रतीत हो कि वह वास्तव में अपद्रव्य नहीं है।

धारा 11(6) के अनुसार प्रत्यावर्तन का हकदार कौन होगा?

वह व्यक्ति जिसके कब्जे से खाद्य पदार्थ या अपद्रव्य लिया गया था।

धारा 11(6) के अनुसार मजिस्ट्रेट प्रतिकर किस सीमा तक दिला सकता है?

वास्तविक हानि से अधिक नहीं।

धारा 11(6) के अनुसार प्रतिकर किस निधि से दिया जाएगा?

राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त निर्दिष्ट निधि से।

धारा 12 का विषय क्या है?

क्रेता द्वारा खाद्य का विश्लेषण कराया जा सकना।

(Purchaser may have food analysed)

धारा 12 के अनुसार खाद्य पदार्थ का विश्लेषण कौन करा सकता है?

ऐसा क्रेता जो खाद्य निरीक्षक हो या मान्यताप्राप्त उपभोक्ता संगम।

धारा 12 के अनुसार क्या मान्यताप्राप्त उपभोक्ता संगम विश्लेषण करा सकता है?

हाँ।

धारा 12 के अनुसार क्या क्रेता का मान्यताप्राप्त उपभोक्ता संगम का सदस्य होना आवश्यक है?

नहीं।

धारा 12 के अनुसार खाद्य पदार्थ का विश्लेषण कराने के लिए क्या देना होगा?

विहित फीस।

धारा 12 के अनुसार विहित फीस देकर क्रेता किससे खाद्य पदार्थ का विश्लेषण करा सकता है?

लोक विश्लेषक से।

धारा 12 के अनुसार विश्लेषण के उपरांत लोक विश्लेषक से क्या प्राप्त किया जा सकता है?

विश्लेषण की रिपोर्ट।

धारा 12 के अनुसार क्या खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 की कोई बात क्रेता को विश्लेषण कराने से रोकती है?

नहीं।

धारा 12 के प्रथम परन्तुक के अनुसार क्रेता या मान्यताप्राप्त उपभोक्ता संगम को विक्रेता को क्या सूचना देनी होगी?

खाद्य पदार्थ का विश्लेषण कराने के अपने आशय की सूचना।

धारा 12 के प्रथम परन्तुक के अनुसार यह सूचना कब दी जाएगी?

क्रय के समय।

धारा 12 के द्वितीय परन्तुक के अनुसार धारा 11 की कौन-सी उपधाराएँ लागू होंगी?

धारा 11 की उपधारा (1), उपधारा (2) और उपधारा (3)

धारा 12 के द्वितीय परन्तुक के अनुसार धारा 11 के उपबंध किस पर लागू होंगे?

ऐसे क्रेता या मान्यताप्राप्त उपभोक्ता संगम पर जो खाद्य पदार्थ का विश्लेषण कराना चाहता है।

धारा 12 के द्वितीय परन्तुक के अनुसार धारा 11 के उपबंध किस प्रकार लागू होंगे?

यावत्साध्य वैसे ही जैसे वे विश्लेषणार्थ नमूना लेने वाले खाद्य निरीक्षक पर लागू होते हैं।

धारा 12 के तृतीय परन्तुक के अनुसार क्रेता या मान्यताप्राप्त उपभोक्ता संगम फीस के प्रतिदाय का हकदार कब होगा?

जब लोक विश्लेषक की रिपोर्ट यह दर्शाए कि खाद्य पदार्थ अपमिश्रित है।

धारा 12 के तृतीय परन्तुक के अनुसार किस फीस का प्रतिदाय मिलेगा?

इस धारा के अधीन दी गई फीस का।

धारा 12 के स्पष्टीकरण के अनुसार "मान्यताप्राप्त उपभोक्ता संगम" से क्या अभिप्रेत है?

कंपनी अधिनियम, 1956 या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत स्वैच्छिक उपभोक्ता संगम।

धारा 12 के स्पष्टीकरण के अनुसार "मान्यताप्राप्त उपभोक्ता संगम" की परिभाषा किन धाराओं के प्रयोजनों के लिए है?

धारा 12 और धारा 20 के प्रयोजनों के लिए।

धारा 12 के स्पष्टीकरण के अनुसार मान्यताप्राप्त उपभोक्ता संगम किस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत हो सकता है?

कंपनी अधिनियम, 1956 या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन।

धारा 13 का विषय क्या है?

लोक विश्लेषक की रिपोर्ट।

(Report of Public analyst)

धारा 13(1) के अनुसार लोक विश्लेषक किसकी रिपोर्ट देगा?

विश्लेषण के लिए भेजे गए खाद्य पदार्थ के विश्लेषण के परिणाम की रिपोर्ट।

धारा 13(1) के अनुसार लोक विश्लेषक रिपोर्ट किसे देगा?

स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी को।

धारा 13(1) के अनुसार रिपोर्ट किस प्ररूप में दी जाएगी?

विहित प्ररूप में।

धारा 13(2) के अनुसार स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी कब कार्यवाही करेगा?

जब लोक विश्लेषक की रिपोर्ट यह दर्शाए कि खाद्य पदार्थ अपमिश्रित है।

धारा 13(2) के अनुसार स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी किसके विरुद्ध अभियोजन चलाएगा?

उस व्यक्ति के जिससे नमूना लिया गया था तथा उस व्यक्ति के जिसका नाम, पता और अन्य विशिष्टियां धारा 14 के अधीन प्रकट की गई हों।

धारा 13(2) के अनुसार अभियोजन चलाने के पश्चात् क्या भेजा जाएगा?

विश्लेषण की रिपोर्ट की एक प्रति।

धारा 13(2) के अनुसार रिपोर्ट की प्रति किसे भेजी जाएगी?

संबंधित व्यक्ति या व्यक्तियों को।

धारा 13(2) के अनुसार रिपोर्ट की प्रति किस रीति से भेजी जाएगी?

विहित रीति से।

धारा 13(2) के अनुसार संबंधित व्यक्ति न्यायालय में कब तक आवेदन कर सकता है?

रिपोर्ट की प्रति मिलने की तारीख से दस दिन के भीतर।

धारा 13(2) के अनुसार न्यायालय में आवेदन किस उद्देश्य से किया जाएगा?

केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला से नमूने का विश्लेषण कराने के लिए।

धारा 13(2क) के अनुसार न्यायालय किससे नमूने के भाग मंगाएगा?

स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी से।

धारा 13(2क) के अनुसार स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी कितने समय में नमूने के भाग भेजेगा?

अध्यपेक्षा प्राप्त होने से पाँच दिन के भीतर।

धारा 13(2ख) के अनुसार न्यायालय सबसे पहले क्या अभिनिश्चित करेगा?

कि चिह्न, मुहर या बंधन यथावत हैं तथा हस्ताक्षर या अंगूठे की छाप बिगड़ी नहीं है।

धारा 13(2ख) के अनुसार न्यायालय नमूने का एक भाग किसे भेजेगा?

केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक को।

धारा 13(2ख) के अनुसार न्यायालय नमूने पर क्या लगाएगा?

अपनी मुहर।

धारा 13(2ख) के अनुसार केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक कितने समय में प्रमाणपत्र भेजेगा?

नमूना प्राप्त होने की तारीख से एक माह के भीतर।

धारा 13(2ख) के अनुसार प्रमाणपत्र किसे भेजा जाएगा?

न्यायालय को।

धारा 13(2ख) के अनुसार प्रमाणपत्र किस प्ररूप में होगा?

विहित प्ररूप में।

धारा 13(2ख) के अनुसार प्रमाणपत्र में क्या विनिर्दिष्ट होगा?

विश्लेषण का परिणाम।

धारा 13(2ग) के अनुसार यदि दो भाग न्यायालय को भेजे गए हों तो शेष भाग का क्या किया जाएगा?

उसे स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी को वापस कर दिया जाएगा।

धारा 13(2ग) के अनुसार शेष भाग को कब नष्ट किया जाएगा?

न्यायालय द्वारा केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक का प्रमाणपत्र प्राप्त होने के बाद।

धारा 13(2ग) के परन्तुक के अनुसार यदि केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला को भेजा गया भाग खो जाए या खराब हो जाए तो न्यायालय क्या करेगा?

स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी से प्रतिधारित भाग मंगाएगा।

धारा 13(2ग) के परन्तुक के अनुसार प्रतिधारित भाग प्राप्त होने पर न्यायालय किस उपधारा के अनुसार कार्यवाही करेगा?

धारा 13(2) के अनुसार।

धारा 13(2घ) के अनुसार न्यायालय अभियोजन की कार्यवाही कब तक आगे नहीं बढ़ाएगा?

जब तक केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक का प्रमाणपत्र प्राप्त हो जाए।

धारा 13(2ङ) के अनुसार स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी कब नमूना दूसरे लोक विश्लेषक को भेजेगा?

जब उसकी राय में प्रथम लोक विश्लेषक की रिपोर्ट गलत हो।

धारा 13(2ङ) के अनुसार नमूने का भाग किसे भेजा जाएगा?

किसी अन्य लोक विश्लेषक को।

धारा 13(2ङ) के अनुसार यदि दूसरे लोक विश्लेषक की रिपोर्ट भी अपमिश्रण दर्शाए तो कौन-से उपबंध लागू होंगे?

धारा 13(2) से उपधारा (2) तक के उपबंध यावत्शक्य लागू होंगे।

धारा 13(3) के अनुसार केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक का प्रमाणपत्र किस रिपोर्ट को अतिष्ठित करेगा?

लोक विश्लेषक की धारा 13(1) के अधीन दी गई रिपोर्ट को।

धारा 13(3) के अनुसार प्रमाणपत्र किस उपधारा के अधीन दिया जाता है?

धारा 13(2) के अधीन।

धारा 13(4) के अनुसार यह उपधारा कब लागू होती है?

जब धारा 13(2) के अधीन प्राप्त केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक का प्रमाणपत्र किसी कार्यवाही में पेश किया जाता है।

धारा 13(4) के अनुसार प्रमाणपत्र प्रस्तुत होने पर किसे प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं होगा?

विश्लेषणार्थ लिए गए खाद्य के नमूने के किसी भाग को।

धारा 13(4) के अनुसार यह उपबंध किन कार्यवाहियों पर लागू होता है?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 अथवा भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 272 से 276 [भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 274 से 278] के अधीन कार्यवाहियों पर।

धारा 13(5) के अनुसार लोक विश्लेषक द्वारा हस्ताक्षरित रिपोर्ट कब साक्ष्य के रूप में प्रयुक्त की जा सकती है?

जब तक वह धारा 13(3) के अधीन अतिष्ठित हो गई हो।

धारा 13(5) के अनुसार केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक द्वारा हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र किस रूप में प्रयुक्त किया जा सकता है?

उसमें वर्णित तथ्यों के साक्ष्य के रूप में।

धारा 13(5) के अनुसार रिपोर्ट या प्रमाणपत्र किन कार्यवाहियों में साक्ष्य के रूप में प्रयुक्त किए जा सकते हैं?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 अथवा भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 272 से 276 [भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 274 से 278] के अधीन कार्यवाहियों में।

धारा 13(5) के परन्तुक के अनुसार केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक का प्रमाणपत्र कब अन्तिम और निश्चायक साक्ष्य होगा?

जब वह धारा 16(1) के परन्तुक में निर्दिष्ट खाद्य पदार्थ के नमूने से संबंधित हो।

धारा 13(5) के परन्तुक के अनुसार कौन-सा दस्तावेज अन्तिम और निश्चायक साक्ष्य होगा?

केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक द्वारा हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र।

धारा 13 के स्पष्टीकरण के अनुसार "केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक" में कौन सम्मिलित है?

वह अधिकारी जो इस धारा के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार से मान्यता प्राप्त किसी खाद्य प्रयोगशाला का उस समय भारसाधक हो।

धारा 13 के स्पष्टीकरण के अनुसार क्या अधिकारी का पदनाम भिन्न होने पर भी वह "केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक" में सम्मिलित होगा?

हाँ, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो।

धारा 13 के स्पष्टीकरण के अनुसार यह विस्तारित अर्थ किन धाराओं के प्रयोजनों के लिए है?

धारा 13 तथा धारा 16(1)() के प्रयोजनों के लिए।

धारा 13(4) का विषय क्या है?

केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला के प्रमाणपत्र का साक्ष्यात्मक प्रभाव।

धारा 13(4) के अनुसार यह उपधारा कब लागू होती है?

जब धारा 13(2) के अधीन प्राप्त केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक का प्रमाणपत्र किसी कार्यवाही में पेश किया जाता है।

धारा 13(4) के अनुसार प्रमाणपत्र प्रस्तुत होने पर किसे प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं होगा?

विश्लेषणार्थ लिए गए खाद्य के नमूने के किसी भाग को।

धारा 13(4) के अनुसार यह उपबंध किन कार्यवाहियों पर लागू होता है?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 अथवा भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 272 से 276 [भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 274 से 278] के अधीन कार्यवाहियों पर।

धारा 13(5) के अनुसार लोक विश्लेषक द्वारा हस्ताक्षरित रिपोर्ट कब साक्ष्य के रूप में प्रयुक्त की जा सकती है?

जब तक वह धारा 13(3) के अधीन अतिष्ठित हो गई हो।

धारा 13(5) के अनुसार केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक द्वारा हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र किस रूप में प्रयुक्त किया जा सकता है?

उसमें वर्णित तथ्यों के साक्ष्य के रूप में।

धारा 13(5) के अनुसार रिपोर्ट या प्रमाणपत्र किन कार्यवाहियों में साक्ष्य के रूप में प्रयुक्त किए जा सकते हैं?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 अथवा भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 272 से 276 [भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 274 से 278] के अधीन कार्यवाहियों में।

धारा 13(5) के परन्तुक के अनुसार केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक का प्रमाणपत्र कब अन्तिम और निश्चायक साक्ष्य होगा?

जब वह धारा 16(1) के परन्तुक में निर्दिष्ट खाद्य पदार्थ के नमूने से संबंधित हो।

धारा 13(5) के परन्तुक के अनुसार कौन-सा दस्तावेज अन्तिम और निश्चायक साक्ष्य होगा?

केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक द्वारा हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र।

धारा 13 के स्पष्टीकरण के अनुसार "केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक" में कौन सम्मिलित है?

वह अधिकारी जो इस धारा के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार से मान्यता प्राप्त किसी खाद्य प्रयोगशाला का उस समय भारसाधक हो।

धारा 13 के स्पष्टीकरण के अनुसार क्या अधिकारी का पदनाम भिन्न होने पर भी वह "केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक" में सम्मिलित होगा?

हाँ, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो।

धारा 13 के स्पष्टीकरण के अनुसार यह विस्तारित अर्थ किन धाराओं के प्रयोजनों के लिए है?

धारा 13 तथा धारा 16(1)() के प्रयोजनों के लिए।

धारा 14 का विषय क्या है?

विनिर्माताओं, वितरकों और व्यवहारियों द्वारा वारण्टी दिया जाना।

(Manufacturers, distributors and dealers to give warranty)

धारा 14 के अनुसार कौन विक्रेता को वारण्टी देने के लिए बाध्य है?

खाद्य पदार्थ का विनिर्माता, वितरक या व्यवहारी।

धारा 14 के अनुसार विनिर्माता, वितरक या व्यवहारी खाद्य पदार्थ कब विक्रय करेगा?

जब वह पदार्थ की प्रकृति और क्वालिटी के बारे में विहित प्ररूप में लिखित वारण्टी विक्रेता को दे दे।

धारा 14 के अनुसार वारण्टी किस विषय में दी जाएगी?

खाद्य पदार्थ की प्रकृति और क्वालिटी के बारे में।

धारा 14 के अनुसार वारण्टी किस प्ररूप में दी जाएगी?

विहित प्ररूप में लिखित रूप में।

धारा 14 के अनुसार वारण्टी किसे दी जाएगी?

विक्रेता को।

धारा 14 के परन्तुक के अनुसार कौन-सा दस्तावेज वारण्टी माना जाएगा?

खाद्य पदार्थ के विक्रय के संबंध में दिया गया बिल, कैश मेमो या बीजक।

धारा 14 के परन्तुक के अनुसार बिल, कैश मेमो या बीजक किसके द्वारा दिया जाना चाहिए?

विनिर्माता, वितरक या व्यवहारी द्वारा।

धारा 14 के परन्तुक के अनुसार बिल, कैश मेमो या बीजक किसे दिया जाना चाहिए?

विक्रेता को।

धारा 14 के स्पष्टीकरण के अनुसार "वितरक" शब्द के अन्तर्गत कौन सम्मिलित है?

कमीशन अभिकर्ता।

धारा 14 के स्पष्टीकरण के अनुसार "वितरक" का यह अर्थ किन धाराओं के प्रयोजनों के लिए है?

धारा 14, धारा 19(2) और धारा 20 के प्रयोजनों के लिए।

धारा 14क का विषय क्या है?

विक्रेता द्वारा उस व्यक्ति का नाम आदि प्रकट किया जाना जिससे खाद्य पदार्थ क्रय किया गया था।

धारा 14क के अनुसार खाद्य निरीक्षक की अपेक्षा पर जानकारी देने के लिए कौन बाध्य है?

प्रत्येक खाद्य पदार्थ का विक्रेता।

धारा 14क के अनुसार विक्रेता किसका नाम प्रकट करेगा?

उस व्यक्ति का जिससे उसने खाद्य पदार्थ क्रय किया।

धारा 14क के अनुसार विक्रेता किसका पता प्रकट करेगा?

उस व्यक्ति का जिससे उसने खाद्य पदार्थ क्रय किया।

धारा 14क के अनुसार विक्रेता कौन-सी अन्य जानकारी प्रकट करेगा?

उस व्यक्ति की अन्य विशिष्टियाँ जिससे उसने खाद्य पदार्थ क्रय किया।

धारा 14क के अनुसार यह जानकारी किसे प्रकट की जाएगी?

खाद्य निरीक्षक को।

धारा 14क के अनुसार विक्रेता यह जानकारी कब प्रकट करेगा?

जब खाद्य निरीक्षक द्वारा उससे इसकी अपेक्षा की जाए।

धारा 15 का विषय क्या है?

खाद्य विषाक्तता की अधिसूचना।

(Notification of food poisoning)

धारा 15 के अनुसार खाद्य विषाक्तता की अधिसूचना जारी करने की शक्ति किसके पास है?

केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के पास।

धारा 15 के अनुसार अधिसूचना किस माध्यम से जारी की जाएगी?

शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा।

धारा 15 के अनुसार अधिसूचना किन व्यक्तियों के संबंध में जारी की जा सकती है?

ऐसे चिकित्सा व्यवसायियों के संबंध में जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट स्थानीय क्षेत्र में अपनी वृत्ति कर रहे हों।

धारा 15 के अनुसार चिकित्सा व्यवसायियों से क्या अपेक्षा की जा सकती है?

कि वे अपने संज्ञान में आने वाली खाद्य विषाक्तता की घटनाओं की रिपोर्ट दें।

धारा 15 के अनुसार चिकित्सा व्यवसायी किन घटनाओं की रिपोर्ट देंगे?

अपने संज्ञान में आने वाली खाद्य विषाक्तता की घटनाओं की।

धारा 15 के अनुसार खाद्य विषाक्तता की रिपोर्ट किसे दी जाएगी?

अधिसूचना में विनिर्दिष्ट अधिकारी को।

धारा 15 के अनुसार चिकित्सा व्यवसायी किस स्थानीय क्षेत्र में अपनी वृत्ति कर रहे होने चाहिए?

अधिसूचना में विनिर्दिष्ट स्थानीय क्षेत्र में।

धारा 16 का विषय क्या है?

शास्तियां।

(Penalties)

धारा 16(1) के अनुसार यह उपधारा किन उपबंधों के अधीन है?

धारा 16(1) के उपबंधों के अधीन।

धारा 16(1)(क) के अनुसार कौन-से कार्य दण्डनीय हैं?

अपमिश्रित, मिथ्या छाप वाले अथवा प्रतिषिद्ध खाद्य पदार्थ का आयात, विक्रयार्थ विनिर्माण, भंडारकरण, विक्रय या वितरण।

धारा 16(1)(क)(i) के अनुसार किन खाद्य पदार्थों के संबंध में अपराध होता है?

धारा 2 के अनुसार अपमिश्रित, मिथ्या छाप वाले अथवा जिनका विक्रय खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 नियमों या खाद्य (स्वास्थ्य) प्राधिकारी के आदेश से प्रतिषिद्ध हो।

धारा 16(1)(क)(ii) के अनुसार किन खाद्य पदार्थों के संबंध में अपराध होता है?

खण्ड 16(i) से भिन्न ऐसे खाद्य पदार्थ जिनके संबंध में खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 या नियमों का उल्लंघन किया गया हो।

धारा 16(1)(ख) के अनुसार कौन-सा अपद्रव्य दण्डनीय है?

ऐसा अपद्रव्य जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है और जिसका आयात, विनिर्माण, भंडारण, विक्रय या वितरण किया जाए।

धारा 16(1)(ग) के अनुसार कौन-सा कार्य दण्डनीय है?

खाद्य निरीक्षक को विधिपूर्वक नमूना लेने से रोकना।

धारा 16(1)(घ) के अनुसार कौन-सा कार्य दण्डनीय है?

खाद्य निरीक्षक को खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के अधीन प्रदत्त किसी शक्ति के प्रयोग से रोकना।

धारा 16(1)(ङ) के अनुसार खाद्य पदार्थ का विनिर्माता कब दण्डनीय होगा?

जब वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने वाले अपद्रव्य को अपने कब्जे या अधिभोगाधीन परिसर में रखे।

धारा 16(1)(च) के अनुसार कौन-सा कार्य दण्डनीय है?

केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला निदेशक या लोक विश्लेषक की रिपोर्ट अथवा प्रमाणपत्र का विज्ञापन के लिए उपयोग करना।

धारा 16(1)(छ) के अनुसार कौन-सा कार्य दण्डनीय है?

विक्रय किए गए खाद्य पदार्थ के संबंध में मिथ्या वारंटी देना।

धारा 16(1) के अनुसार सामान्य दण्ड क्या है?

न्यूनतम छह माह से अधिकतम तीन वर्ष का कारावास तथा न्यूनतम एक हजार रुपए का जुर्माना।

धारा 16(1) के अनुसार यह दण्ड किसके अतिरिक्त है?

धारा 6 के अधीन दण्ड के अतिरिक्त।

धारा 16(1) के प्रथम परन्तुक (i) के अनुसार कम दण्ड कब दिया जा सकता है?

जब अपराध प्राथमिक खाद्य के प्राकृतिक कारणों से अपमिश्रित होने या धारा 2(ix)() के अर्थ में मिथ्या छाप वाले खाद्य से संबंधित हो।

धारा 16(1) के प्रथम परन्तुक (i) के अनुसार अपमिश्रण किस कारण से होना चाहिए?

मानवीय नियंत्रण के बाहर के कारणों से।

धारा 16(1) के प्रथम परन्तुक (ii) के अनुसार कम दण्ड कब दिया जा सकता है?

जब अपराध धारा 16(1)()(ii) के अधीन हो और धारा 23(1)(), 23(1)() या धारा 24(2)() के नियमों के उल्लंघन से संबंधित हो।

धारा 16(1) के प्रथम परन्तुक के अनुसार कम दण्ड देने के लिए न्यायालय को क्या करना होगा?

पर्याप्त एवं विशेष कारण निर्णय में अभिलिखित करने होंगे।

धारा 16(1) के प्रथम परन्तुक के अनुसार कम दण्ड कितना हो सकता है?

न्यूनतम तीन माह से अधिकतम दो वर्ष का कारावास तथा न्यूनतम पाँच सौ रुपए का जुर्माना।

धारा 16(1) के द्वितीय परन्तुक के अनुसार और कम दण्ड कब दिया जा सकता है?

जब अपराध धारा 16(1)()(ii) के अधीन हो तथा धारा 23(1)(), 23(1)() या धारा 24(2)() के अधीन बनाए गए नियमों के उल्लंघन से संबंधित हो।

धारा 16(1) के द्वितीय परन्तुक के अनुसार न्यायालय को कम दण्ड देने के लिए क्या करना होगा?

पर्याप्त एवं विशेष कारण निर्णय में अभिलिखित करने होंगे।

धारा 16(1) के द्वितीय परन्तुक के अनुसार दण्ड कितना हो सकता है?

अधिकतम तीन माह का कारावास तथा अधिकतम पाँच सौ रुपए का जुर्माना।

धारा 16(1क) के अनुसार यह उपधारा किन व्यक्तियों पर लागू होती है?

ऐसे व्यक्ति पर जो स्वयं या अपने निमित्त किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा कार्य करता है।

धारा 16(1क)(i) के अनुसार कौन-से खाद्य पदार्थ के संबंध में अपराध होता है?

धारा 2 के खण्ड () के उपखण्ड () से उपखण्ड () तक के अर्थ में अपमिश्रित खाद्य पदार्थ।

धारा 16(1क)(ii) के अनुसार कौन-सा अपद्रव्य इस उपधारा के अधीन आता है?

स्वास्थ्य के लिए हानिकारक अपद्रव्य।

धारा 16(1क) के अनुसार कौन-कौन से कार्य दण्डनीय हैं?

भारत में आयात करना, विक्रयार्थ विनिर्माण करना, भंडारकरण करना, विक्रय करना या वितरण करना।

धारा 16(1क) के अनुसार यह दण्ड किसके अतिरिक्त है?

धारा 6 के उपबंधों के अधीन दण्ड के अतिरिक्त।

धारा 16(1क) के अनुसार सामान्य दण्ड क्या है?

न्यूनतम एक वर्ष से अधिकतम छह वर्ष का कारावास तथा न्यूनतम दो हजार रुपए का जुर्माना।

धारा 16(1क) के परन्तुक का विषय क्या है?

मृत्यु या घोर उपहति की सम्भावना होने पर शास्ति।

धारा 16(1क) के परन्तुक के अनुसार कठोर दण्ड कब दिया जाएगा?

जब ऐसे खाद्य पदार्थ या अपद्रव्य के उपभोग से किसी व्यक्ति की मृत्यु या घोर उपहति होने की सम्भावना हो।

धारा 16(1क) के परन्तुक के अनुसार "घोर उपहति" किस धारा के अर्थ में होगी?

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 320 [भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 116] के अर्थ में।

धारा 16(1क) के परन्तुक के अनुसार मृत्यु या घोर उपहति की सम्भावना होने पर न्यूनतम कारावास कितना होगा?

तीन वर्ष।

धारा 16(1क) के परन्तुक के अनुसार मृत्यु या घोर उपहति की सम्भावना होने पर अधिकतम कारावास कितना हो सकता है?

आजीवन कारावास।

धारा 16(1क) के परन्तुक के अनुसार मृत्यु या घोर उपहति की सम्भावना होने पर न्यूनतम जुर्माना कितना होगा?

पाँच हजार रुपए।

धारा 16(1कक) के अनुसार यह उपधारा किस पर लागू होती है?

उस व्यक्ति पर जिसकी सुरक्षित अभिरक्षा में धारा 10(4) के अधीन खाद्य पदार्थ रखा गया है।

धारा 16(1कक) के अनुसार कौन-सा कार्य दण्डनीय है?

खाद्य पदार्थ को बिगाड़ना या उसमें किसी अन्य रीति से हस्तक्षेप करना।

धारा 16(1कक) के अनुसार न्यूनतम कारावास कितना है?

छह मास।

धारा 16(1कक) के अनुसार अधिकतम कारावास कितना है?

दो वर्ष।

धारा 16(1कक) के अनुसार न्यूनतम जुर्माना कितना है?

एक हजार रुपए।

धारा 16(1ख) के अनुसार यह उपधारा किस पर लागू होती है?

उस व्यक्ति पर जिसकी सुरक्षित अभिरक्षा में धारा 10(4) के अधीन खाद्य पदार्थ रखा गया है।

धारा 16(1ख) के अनुसार कौन-सा कार्य दण्डनीय है?

ऐसे खाद्य पदार्थ का विक्रय या वितरण करना जिसे मजिस्ट्रेट ने धारा 2()() के अर्थ में अपमिश्रित पाया हो।

धारा 16(1ख) के अनुसार कठोर शास्ति कब लागू होगी?

जब ऐसे खाद्य पदार्थ के उपभोग से किसी व्यक्ति की मृत्यु या घोर उपहति होने की सम्भावना हो।

धारा 16(1ख) के अनुसार "घोर उपहति" किस धारा के अर्थ में होगी?

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 320 [भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 116] के अर्थ में।

धारा 16(1ख) के अनुसार न्यूनतम कारावास कितना है?

तीन वर्ष।

धारा 16(1ख) के अनुसार अधिकतम कारावास कितना है?

आजीवन कारावास।

धारा 16(1ख) के अनुसार न्यूनतम जुर्माना कितना है?

पाँच हजार रुपए।

धारा 16(1ख) के अनुसार यह उपधारा किस उपधारा के होते हुए भी लागू होगी?

धारा 16(1कक) के होते हुए भी।

धारा 16(1ग) के अनुसार कौन-सा उल्लंघन दण्डनीय है?

धारा 14 या धारा 14 के उपबंधों का उल्लंघन।

धारा 16(1ग) के अनुसार अधिकतम कारावास कितना है?

छह मास।

धारा 16(1ग) के अनुसार न्यूनतम जुर्माना कितना है?

पाँच सौ रुपए।

धारा 16(1घ) के अनुसार न्यायालय अनुज्ञप्ति कब रद्द कर सकता है?

जब खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के अधीन सिद्धदोष व्यक्ति पुनः वैसा ही अपराध करे।

धारा 16(1घ) के अनुसार न्यायालय किस अनुज्ञप्ति को रद्द कर सकता है?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के अधीन दी गई अनुज्ञप्ति को।

धारा 16(1घ) के अनुसार अनुज्ञप्ति रद्द होने का प्रभाव क्या होगा?

वह खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 या नियमों के किसी उपबंध के होते हुए भी रद्द हो जाएगी।

धारा 16(2) के अनुसार न्यायालय किन परिस्थितियों में प्रकाशन का आदेश दे सकता है?

जब सिद्धदोष व्यक्ति पुनः वैसा ही अपराध करे।

धारा 16(2) के अनुसार किन विवरणों का प्रकाशन कराया जा सकता है?

अपराधी का नाम, निवास-स्थान, अपराध तथा अधिरोपित शास्ति।

धारा 16(2) के अनुसार प्रकाशन का व्यय कौन वहन करेगा?

अपराधी।

धारा 16(2) के अनुसार प्रकाशन किन माध्यमों से कराया जा सकता है?

न्यायालय द्वारा निर्दिष्ट समाचारपत्रों तथा अन्य रीति से।

धारा 16(2) के अनुसार प्रकाशन का व्यय किसका भाग माना जाएगा?

दोषसिद्धि पर होने वाले खर्च का।

धारा 16(2) के अनुसार प्रकाशन का व्यय किस प्रकार वसूल किया जाएगा?

जुर्माने की भाँति।

धारा 16(क) का विषय क्या है?

न्यायालय की मामलों का संक्षिप्त विचारण करने की शक्ति।

(Power of court to try cases summarily)

धारा 16(क) के अनुसार यह धारा किस संहिता में किसी बात के होते हुए भी लागू होती है?

दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023) में किसी बात के होते हुए भी।

धारा 16(क) के अनुसार किन अपराधों का संक्षेपतः विचारण किया जाएगा?

धारा 16 की उपधारा (1) के अधीन सभी अपराधों का।

धारा 16(क) के अनुसार संक्षिप्त विचारण कौन करेगा?

राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से सशक्त प्रथम वर्ग का न्यायिक मजिस्ट्रेट अथवा महानगर मजिस्ट्रेट।

धारा 16(क) के अनुसार प्रथम वर्ग के न्यायिक मजिस्ट्रेट को कौन विशेष रूप से सशक्त करेगा?

राज्य सरकार।

धारा 16(क) के अनुसार संक्षिप्त विचारण में दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की कौन-सी धाराएँ यावत्शक्य लागू होंगी?

धारा 262 से धारा 265 तक (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तत्स्थानी उपबंध)

धारा 16(क) के प्रथम परन्तुक के अनुसार संक्षिप्त विचारण में अधिकतम कितनी अवधि का कारावास दिया जा सकता है?

एक वर्ष तक का कारावास।

धारा 16(क) के द्वितीय परन्तुक के अनुसार मजिस्ट्रेट संक्षिप्त विचारण कब नहीं करेगा?

जब उसे प्रतीत हो कि एक वर्ष से अधिक कारावास का दण्डादेश देना पड़ सकता है या किसी अन्य कारण से संक्षिप्त विचारण करना अवांछनीय है।

धारा 16(क) के द्वितीय परन्तुक के अनुसार संक्षिप्त विचारण छोड़ने से पूर्व मजिस्ट्रेट क्या करेगा?

पक्षकारों को सुनेगा।

धारा 16(क) के द्वितीय परन्तुक के अनुसार संक्षिप्त विचारण छोड़ने पर मजिस्ट्रेट क्या अभिलिखित करेगा?

उस आशय का आदेश।

धारा 16(क) के द्वितीय परन्तुक के अनुसार संक्षिप्त विचारण छोड़ने के बाद मजिस्ट्रेट क्या करेगा?

जिसकी परीक्षा की जा चुकी हो ऐसे किसी भी साक्षी को पुनः बुलाएगा।

धारा 16(क) के द्वितीय परन्तुक के अनुसार इसके बाद मामले की सुनवाई किस प्रकार होगी?

दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023) द्वारा उपबंधित रीति से सुनने या पुनः सुनने के लिए अग्रसर होगा।

धारा 17 का विषय क्या है?

कम्पनियों द्वारा अपराध।

(Offences by companies)

धारा 17(1) के अनुसार यह धारा कब लागू होती है?

जब खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया हो।

धारा 17(1)(क)(i) के अनुसार कम्पनी के अपराध के लिए कौन दोषी समझा जाएगा?

धारा 17(2) के अधीन नामनिर्देशित उत्तरदायी व्यक्ति।

धारा 17(1)(क)(ii) के अनुसार यदि कोई उत्तरदायी व्यक्ति नामनिर्देशित न हो तो कौन दोषी समझा जाएगा?

प्रत्येक व्यक्ति जो अपराध के समय कम्पनी के कारबार के संचालन का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था।

धारा 17(1)(ख) के अनुसार कम्पनी के अपराध के लिए और कौन दोषी समझी जाएगी?

स्वयं कम्पनी।

धारा 17(1) के अनुसार दोषी समझे जाने वाले व्यक्ति किसके भागी होंगे?

अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने के।

धारा 17(1) के परन्तुक के अनुसार व्यक्ति दण्ड से कब बच सकता है?

जब वह सिद्ध कर दे कि अपराध उसकी जानकारी के बिना हुआ तथा उसने उसे रोकने के लिए सम्यक् तत्परता बरती थी।

धारा 17(2) के अनुसार कम्पनी किसे उत्तरदायी व्यक्ति के रूप में नामनिर्देशित कर सकती है?

अपने किसी निदेशक या मुख्यतः प्रबन्धकीय या पर्यवेक्षकीय हैसियत वाले प्रबन्धक को।

धारा 17(2) के अनुसार नामनिर्देशन किस माध्यम से किया जाएगा?

लिखित आदेश द्वारा।

धारा 17(2) के अनुसार उत्तरदायी व्यक्ति को किस उद्देश्य से प्राधिकृत किया जाएगा?

कम्पनी द्वारा अपराध का किया जाना रोकने के लिए आवश्यक या समीचीन शक्तियों एवं कार्यवाहियों के प्रयोग हेतु।

धारा 17(2) के अनुसार नामनिर्देशन की सूचना किसे दी जाएगी?

स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी को।

धारा 17(2) के अनुसार सूचना किस प्ररूप और रीति से दी जाएगी?

विहित प्ररूप एवं विहित रीति से।

धारा 17(2) के अनुसार नामनिर्देशन के साथ क्या संलग्न होगा?

नामनिर्देशित निदेशक या प्रबन्धक की लिखित सहमति।

धारा 17(2) के स्पष्टीकरण के अनुसार क्या विभिन्न स्थापनों, शाखाओं या यूनिटों के लिए अलग-अलग उत्तरदायी व्यक्ति नामनिर्देशित किए जा सकते हैं?

हाँ।

धारा 17(2) के स्पष्टीकरण के अनुसार नामनिर्देशित व्यक्ति किसके संबंध में उत्तरदायी माना जाएगा?

संबंधित स्थापन, शाखा या यूनिट के संबंध में।

धारा 17(3) के अनुसार उत्तरदायी व्यक्ति कब तक बना रहेगा?

जब तक धारा 17(3) के खण्ड (i), (ii) या (iii) में से कोई घटना पहले हो जाए।

धारा 17(3)(i) के अनुसार उत्तरदायी व्यक्ति का नामनिर्देशन कब समाप्त हो सकता है?

जब कम्पनी स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी को नामनिर्देशन रद्द करने की सूचना दे।

धारा 17(3)(ii) के अनुसार उत्तरदायी व्यक्ति का नामनिर्देशन कब समाप्त हो सकता है?

जब वह कम्पनी के निदेशक या प्रबन्धक के पद पर बना रहना छोड़ दे।

धारा 17(3)(iii) के अनुसार उत्तरदायी व्यक्ति का नामनिर्देशन कब समाप्त हो सकता है?

जब वह स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी से लिखित रूप में नामनिर्देशन रद्द करने का निवेदन करे।

धारा 17(3) के प्रथम परन्तुक के अनुसार पद छोड़ने पर उत्तरदायी व्यक्ति क्या करेगा?

स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी को इसकी सूचना देगा।

धारा 17(3) के द्वितीय परन्तुक के अनुसार स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी नामनिर्देशन को किस तिथि से पहले रद्द नहीं करेगा?

निवेदन किए जाने की तिथि से पहले की किसी तिथि से नहीं।

धारा 17(4) के अनुसार नामनिर्देशित व्यक्ति के अतिरिक्त अन्य अधिकारी कब दोषी होगा?

जब अपराध उसकी सहमति, मौनानुकूलता या उपेक्षा के कारण हुआ हो।

धारा 17(4) के अनुसार किन व्यक्तियों पर यह उपधारा लागू होती है?

निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी पर जो धारा 17(2) के अधीन नामनिर्देशित हो।

धारा 17(4) के अनुसार ऐसा अधिकारी किसका भागी होगा?

अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का।

धारा 17 के स्पष्टीकरण के अनुसार "कम्पनी" से क्या अभिप्रेत है?

कोई निगमित निकाय तथा इसके अंतर्गत फर्म या व्यक्तियों का अन्य संगम।

धारा 17 के स्पष्टीकरण के अनुसार फर्म के संबंध में "निदेशक" से क्या अभिप्रेत है?

फर्म का भागीदार।

धारा 17 के स्पष्टीकरण के अनुसार होटल उद्योग में लगी कम्पनी के संबंध में "प्रबन्धक" में कौन सम्मिलित है?

उसके होटल के खानपान विभाग का भारसाधक व्यक्ति।

धारा 18 का विषय क्या है?

सम्पत्ति का समपहरण।

(Forfeiture of property)

धारा 18 के अनुसार सम्पत्ति का समपहरण कब किया जाएगा?

जब कोई व्यक्ति खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम के किसी उपबंध के उल्लंघन के लिए सिद्धदोष किया गया हो।

धारा 18 के अनुसार कौन-सी सम्पत्ति सरकार को समपहृत की जाएगी?

वह खाद्य पदार्थ जिसके संबंध में उल्लंघन किया गया है।

धारा 18 के अनुसार समपहृत सम्पत्ति किसके पक्ष में जाएगी?

सरकार के पक्ष में।

धारा 18 के परन्तुक के अनुसार न्यायालय खाद्य पदार्थ को सरकार को समपहृत करने के स्थान पर कब वापस कर सकता है?

जब उसका समाधान हो जाए कि पुनः प्रसंस्करण के पश्चात् वह मानव उपभोग के लिए विहित मान के अनुरूप बनाया जा सकता है।

धारा 18 के परन्तुक के अनुसार खाद्य पदार्थ किसे वापस किया जा सकता है?

उसके स्वामी को।

धारा 18 के परन्तुक के अनुसार खाद्य पदार्थ किस शर्त पर स्वामी को लौटाया जाएगा?

उसके द्वारा प्रतिभुओं सहित या रहित बन्धपत्र निष्पादित करने पर।

धारा 18 के परन्तुक के अनुसार पुनः प्रसंस्करण किसके पर्यवेक्षण में किया जाएगा?

न्यायालय द्वारा आदेश में विनिर्दिष्ट अधिकारी के पर्यवेक्षण में।

धारा 18 के परन्तुक के अनुसार पुनः प्रसंस्करण के बाद खाद्य पदार्थ का विक्रय किसके अधीन होगा?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के अन्य उपबंधों के अधीन।

धारा 19 का विषय क्या है?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के अधीन अभियोजनों में अनुज्ञात किए जा सकने या किए जा सकने वाले प्रतिवाद।

(Defences which may or may not be allowed in prosecutions under this Act)

धारा 19(1) के अनुसार किस अपराध के अभियोजन में यह उपधारा लागू होती है?

अपमिश्रित या मिथ्या छाप वाले खाद्य पदार्थ के विक्रय से संबंधित अपराध के अभियोजन में।

धारा 19(1) के अनुसार कौन-सा प्रतिवाद स्वीकार नहीं किया जाएगा?

कि विक्रेता खाद्य की प्रकृति, तत्व या क्वालिटी से अनभिज्ञ था।

धारा 19(1) के अनुसार क्या यह प्रतिवाद स्वीकार होगा कि विक्रेता खाद्य की प्रकृति, तत्व या क्वालिटी से अनभिज्ञ था?

नहीं।

धारा 19(1) के अनुसार क्या यह प्रतिवाद स्वीकार होगा कि विश्लेषण के लिए क्रय किए जाने से विक्रय द्वारा प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा?

नहीं।

धारा 19(2) के अनुसार विक्रेता कब अपराधी नहीं समझा जाएगा?

जब वह धारा 19(2) के खण्ड () और () की शर्तें सिद्ध कर दे।

धारा 19(2)(क)(i) के अनुसार जहाँ विक्रय के लिए अनुज्ञप्ति विहित है, वहाँ खाद्य पदार्थ किससे क्रय किया होना चाहिए?

सम्यक् रूप से अनुज्ञप्त विनिर्माता, वितरक या व्यवहारी से।

धारा 19(2)(क)(ii) के अनुसार अन्य दशा में खाद्य पदार्थ किससे क्रय किया होना चाहिए?

किसी विनिर्माता, वितरक या व्यवहारी से।

धारा 19(2)(क) के अनुसार खाद्य पदार्थ का क्रय किसके साथ होना चाहिए?

विहित प्ररूप में लिखित वारंटी के साथ।

धारा 19(2)(ख) के अनुसार विक्रेता को खाद्य पदार्थ का भंडारण किस प्रकार करना चाहिए?

उचित रूप से भंडार में रखना चाहिए।

धारा 19(2)(ख) के अनुसार विक्रेता को खाद्य पदार्थ किस अवस्था में विक्रय करना चाहिए?

उसी अवस्था में जिसमें उसने उसे क्रय किया था।

धारा 19(3) के अनुसार किस व्यक्ति को सुनवाई पर उपस्थित होने का अधिकार होगा?

वह व्यक्ति जिसके द्वारा धारा 14 में निर्दिष्ट वारंटी दी गई अभिकथित है।

धारा 19(3) के अनुसार ऐसे व्यक्ति को और क्या अधिकार होगा?

साक्ष्य देने का अधिकार।

धारा 20 का विषय क्या है?

अपराधों का संज्ञान और विचारण।

(Cognizance and trial of offences)

धारा 20(1) के अनुसार यह उपधारा किन अपराधों पर लागू होती है?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के अधीन ऐसे अपराधों पर जो धारा 14 या धारा 14 के अधीन अपराध नहीं हैं।

धारा 20(1) के अनुसार अभियोजन किसके द्वारा या उसकी लिखित सम्मति से ही संस्थित किया जाएगा?

केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार अथवा उनके द्वारा साधारण या विशेष आदेश से प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा या उसकी लिखित सम्मति से।

धारा 20(1) के अनुसार क्या कोई अन्य व्यक्ति बिना प्राधिकरण या लिखित सम्मति के अभियोजन संस्थित कर सकता है?

नहीं।

धारा 20(1) के परन्तुक के अनुसार कौन अभियोजन संस्थित कर सकता है?

धारा 12 में निर्दिष्ट क्रेता या मान्यताप्राप्त उपभोक्ता संगम।

धारा 20(1) के परन्तुक के अनुसार क्रेता या मान्यताप्राप्त उपभोक्ता संगम किस शर्त पर अभियोजन संस्थित कर सकता है?

यदि वह परिवाद के साथ लोक विश्लेषक की रिपोर्ट की एक प्रति न्यायालय में प्रस्तुत करे।

धारा 20(1) के परन्तुक के अनुसार परिवाद के साथ क्या प्रस्तुत करना आवश्यक है?

लोक विश्लेषक की रिपोर्ट की एक प्रति।

धारा 20(2) के अनुसार खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के अधीन अपराधों का विचारण कौन करेगा?

महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग का न्यायिक मजिस्ट्रेट।

धारा 20(2) के अनुसार क्या प्रथम वर्ग के न्यायिक मजिस्ट्रेट से अवर न्यायालय विचारण कर सकता है?

नहीं।

धारा 20(3) के अनुसार कौन-सा अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होगा?

धारा 16(1कक) के अधीन दण्डनीय अपराध।

धारा 20(3) के अनुसार यह उपधारा किस संहिता में किसी बात के होते हुए भी लागू होती है?

दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023) में किसी बात के होते हुए भी।

धारा 20(क) का विषय क्या है?

विनिर्माता आदि को अभियोजित करने की न्यायालय की शक्ति।

(20A. Power of court to implead manufacturer, etc.)

धारा 20(क) के अनुसार यह धारा कब लागू होती है?

जब ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध विचारण चल रहा हो जो खाद्य पदार्थ का विनिर्माता, वितरक या व्यवहारी नहीं है।

धारा 20(क) के अनुसार न्यायालय किस आधार पर विनिर्माता, वितरक या व्यवहारी के विरुद्ध कार्यवाही कर सकता है?

अपने समक्ष प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर।

धारा 20(क) के अनुसार न्यायालय को किस बात का समाधान होना चाहिए?

कि विनिर्माता, वितरक या व्यवहारी भी उस अपराध से संबंधित है।

धारा 20(क) के अनुसार न्यायालय यह कार्यवाही किस प्रकार चला सकता है?

मानो उसके विरुद्ध धारा 20 के अधीन अभियोजन संस्थित किया गया हो।

धारा 20(क) के अनुसार यह शक्ति किन उपबंधों के होते हुए भी प्रयोग की जा सकती है?

दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 319(3) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 358(3)) तथा धारा 20 के उपबंधों के होते हुए भी।

धारा 20कक का विषय क्या है?

अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 तथा दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 360 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 401) का लागू होना।

[20AA. Application of the Probation of Offenders Act, 1958 and section 360 of the Code of Criminal Procedure, 1973(section 401 of the BNSS]

धारा 20कक के अनुसार किन विधियों का उल्लेख किया गया है?

अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 तथा दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 360 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 401)

धारा 20कक के अनुसार खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के अधीन दोषसिद्ध व्यक्ति पर अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 कब लागू होगा?

जब वह व्यक्ति अठारह वर्ष से कम आयु का हो।

धारा 21 का विषय क्या है?

मजिस्ट्रेट की वर्धित शास्तियां अधिरोपित करने की शक्ति।

(Magistrate’s power to impose enhanced penaltie)

धारा 21 के अनुसार यह धारा किस संहिता में किसी बात के होते हुए भी लागू होती है?

दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 29 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 23) में किसी बात के होते हुए भी।

धारा 21 के अनुसार किन मजिस्ट्रेटों को वर्धित शास्तियां अधिरोपित करने की शक्ति प्राप्त है?

महानगर मजिस्ट्रेट तथा प्रथम वर्ग के न्यायिक मजिस्ट्रेट को।

धारा 21 के अनुसार मजिस्ट्रेट कौन-सा दण्डादेश पारित कर सकता है?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 द्वारा प्राधिकृत कोई भी दण्डादेश।

धारा 21 के अनुसार मजिस्ट्रेट की यह शक्ति किस सीमा तक है?

वह दण्डादेश जो दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 29 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 23) के अधीन उसकी सामान्य शक्तियों से अधिक हो।

धारा 21 के अनुसार मजिस्ट्रेट कौन-से दण्डादेश पारित नहीं कर सकता?

आजीवन कारावास या छह वर्ष से अधिक की अवधि के कारावास का दण्डादेश।

धारा 22 का विषय क्या है?

सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण।

(Protection of action taken in good faith)

धारा 22 के अनुसार संरक्षण किस प्रकार की कार्रवाई के लिए प्रदान किया गया है?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित कार्रवाई के लिए।

धारा 22 के अनुसार किसके विरुद्ध वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं होगी?

किसी व्यक्ति के विरुद्ध।

धारा 22 के अनुसार किन कार्यवाहियों से संरक्षण प्रदान किया गया है?

वाद, अभियोजन तथा अन्य विधिक कार्यवाही से।

धारा 22 के अनुसार संरक्षण का आधार क्या है?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित कार्रवाई।

धारा 22(क) का विषय क्या है?

केन्द्रीय सरकार की निदेश देने की शक्ति।

(Power of Central Government to give directions)

धारा 22(क) के अनुसार निदेश देने की शक्ति किसके पास है?

केन्द्रीय सरकार के पास।

धारा 22(क) के अनुसार केन्द्रीय सरकार किस विषय में निदेश दे सकती है?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के सभी उपबंधों या उनमें से किसी के निष्पादन के संबंध में।

धारा 22(क) के अनुसार केन्द्रीय सरकार किसे निदेश दे सकती है?

राज्य सरकार को।

धारा 22(क) के अनुसार केन्द्रीय सरकार किस प्रकार के निदेश दे सकती है?

जैसे वह आवश्यक समझे।

धारा 22(क) के अनुसार राज्य सरकार का क्या दायित्व है?

केन्द्रीय सरकार द्वारा दिए गए निदेशों का अनुपालन करना।

धारा 23 का विषय क्या है?

केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति।

(Power of the Central Government to make rules)

धारा 23(1) के अनुसार नियम बनाने की शक्ति किसके पास है?

केन्द्रीय सरकार के पास।

धारा 23(1) के अनुसार केन्द्रीय सरकार नियम किससे परामर्श करके बनाएगी?

समिति से परामर्श करके।

धारा 23(1) के अनुसार नियम किस माध्यम से बनाए जाएंगे?

राजपत्र में अधिसूचना द्वारा पूर्व प्रकाशन के पश्चात्।

धारा 23(1) के अनुसार नियम किस उद्देश्य से बनाए जाएंगे?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए।

धारा 23(1) के परन्तुक के अनुसार समिति से पूर्व परामर्श कब आवश्यक नहीं होगा?

जब केन्द्रीय सरकार की राय में ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो जाएँ जिनमें बिना परामर्श के नियम बनाना आवश्यक हो।

धारा 23(1) के परन्तुक के अनुसार ऐसी दशा में समिति से परामर्श कब किया जाएगा?

नियम बनाए जाने के छह मास के भीतर।

धारा 23(1) के परन्तुक के अनुसार समिति किस विषय में सुझाव दे सकती है?

बनाए गए नियमों के संशोधन के संबंध में।

धारा 23(1) के परन्तुक के अनुसार केन्द्रीय सरकार समिति के सुझावों के संबंध में क्या करेगी?

उन सुझावों पर विचार करेगी।

धारा 23(1क) के अनुसार यह उपधारा किस शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना है?

नियम बनाने की पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर।

धारा 23(1क)(क) के अनुसार किन खाद्य पदार्थों के लिए अनुज्ञप्ति अपेक्षित की जा सकती है?

ऐसे खाद्य पदार्थ या खाद्य वर्ग जिनका आयात किया जाता है।

धारा 23(1क)(क) के अनुसार किसका प्ररूप और शर्तें विहित की जा सकती हैं?

आयात अनुज्ञप्ति का।

धारा 23(1क)(क) के अनुसार अनुज्ञप्ति देने के लिए किसे विहित किया जा सकता है?

सशक्त प्राधिकारी को।

धारा 23(1क)(क) के अनुसार अनुज्ञप्ति के लिए क्या विहित किया जा सकता है?

संदेय फीस।

धारा 23(1क)(क) के अनुसार अनुज्ञप्ति की शर्तों के पालन हेतु क्या निक्षेप कराया जा सकता है?

प्रतिभूति के रूप में राशि।

धारा 23(1क)(क) के अनुसार किन परिस्थितियों को विहित किया जा सकता है?

जिनमें अनुज्ञप्ति या प्रतिभूति रद्द या समपहृत की जा सके।

धारा 23(1क)(ख) के अनुसार किसका मानक परिनिश्चित किया जा सकता है?

खाद्य पदार्थ की क्वालिटी का।

धारा 23(1क)(ख) के अनुसार किसकी सीमाएँ नियत की जा सकती हैं?

अनुज्ञेय मान्य भिन्नता की सीमाएँ।

धारा 23(1क)(ग) के अनुसार किन खाद्य पदार्थों पर कठोर नियंत्रण अधिरोपित किया जा सकता है?

ऐसे खाद्य पदार्थ या खाद्य वर्ग जिन्हें केन्द्रीय सरकार अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे।

धारा 23(1क)(ग) के अनुसार विशेष उपबंधों में क्या सम्मिलित हो सकता है?

परिसरों का रजिस्ट्रीकरण, स्वच्छता तथा संबंधित व्यक्तियों की स्वच्छता।

धारा 23(1क)(घ) के अनुसार किसे निर्बन्धित किया जा सकता है?

खाद्य पदार्थ की पैकिंग, लेबल तथा पैकेज या लेबल के डिजाइन को।

धारा 23(1क)(घ) का उद्देश्य क्या है?

जनता या क्रेता को धोखे, भुलावे अथवा अपमिश्रण से बचाना।

धारा 23(1क)(ङ) के अनुसार किसकी अर्हताएँ, शक्तियाँ और कर्तव्य परिनिश्चित किए जा सकते हैं?

खाद्य निरीक्षकों और लोक विश्लेषकों के।

धारा 23(1क)(ङङ) के अनुसार किन प्रयोगशालाओं को परिनिश्चित किया जा सकता है?

वे प्रयोगशालाएँ जिनमें लोक विश्लेषक खाद्य पदार्थों या अपद्रव्यों का विश्लेषण करेंगे।

धारा 23(1क)(च) के अनुसार किसके विक्रय को प्रतिषिद्ध या विनियमित किया जा सकता है?

ऐसी वस्तु के जो खाद्य के रूप में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो।

धारा 23(1क)(च) के अनुसार किसके प्रयोग को निर्बन्धित किया जा सकता है?

किसी खाद्य पदार्थ के विनिर्माण में संघटक के रूप में प्रयुक्त वस्तु के।

धारा 23(1क)(च) के अनुसार किसे अनुज्ञप्ति द्वारा विनियमित किया जा सकता है?

खाद्य पदार्थ के विनिर्माण या विक्रय को।

धारा 23(1क)(छ) के अनुसार सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में किन शर्तों को परिनिश्चित किया जा सकता है?

खाद्य पदार्थ के विक्रय या विक्रयार्थ अनुज्ञप्ति की शर्तों को।

धारा 23(1क)(ज) के अनुसार क्या विनिर्दिष्ट किया जा सकता है?

विश्लेषण हेतु खाद्य नमूनों के आधानों को मुहरबन्द या बाँधने की रीति।

धारा 23(1क)(जज) के अनुसार क्या परिनिश्चित किया जा सकता है?

विश्लेषण की पद्धतियाँ।

धारा 23(1क)(झ) के अनुसार किसकी सूची और अधिकतम परिमाण विनिर्दिष्ट किए जा सकते हैं?

अनुज्ञेय परिरक्षियों की सूची और प्रत्येक परिरक्षी का अधिकतम परिमाण।

धारा 23(1क)(ञ) के अनुसार क्या विनिर्दिष्ट किया जा सकता है?

खाद्य पदार्थ में प्रयुक्त किए जाने वाले रंजक द्रव्य और उसकी अधिकतम मात्रा।

धारा 23(1क)(ट) के अनुसार किन्हें छूट प्रदान की जा सकती है?

किसी खाद्य पदार्थ या खाद्य पदार्थों के वर्ग को।

धारा 23(1क)(ठ) के अनुसार किसके विनिर्माण, परिवहन या विक्रय को प्रतिषिद्ध या विनियमित किया जा सकता है?

ऐसे खाद्य पदार्थ का जो अपमिश्रक के रूप में प्रयुक्त किया जाना ज्ञात है।

धारा 23(1क)(ड)(i) के अनुसार किसका परिवर्धन प्रतिषिद्ध या विनियमित किया जा सकता है?

किसी खाद्य पदार्थ में जल, अन्य तनुकारक या अपमिश्रक का।

धारा 23(1क)(ड)(ii) के अनुसार किसे प्रतिषिद्ध या विनियमित किया जा सकता है?

खाद्य पदार्थ से किसी संघटक को निकालना।

धारा 23(1क)(ड)(iii) के अनुसार किस खाद्य पदार्थ के विक्रय को प्रतिषिद्ध या विनियमित किया जा सकता है?

जिसमें परिवर्धन, निष्कासन या अन्य कृत्रिम व्यवहार किया गया हो।

धारा 23(1क)(ड)(iv) के अनुसार किस मिश्रण को प्रतिषिद्ध या विनियमित किया जा सकता है?

प्रकृति या स्वरूप में समान दो या अधिक खाद्य पदार्थों के मिश्रण को।

धारा 23(1क)(ढ) के अनुसार किन खाद्य पदार्थों को विनष्ट करने का उपबंध किया जा सकता है?

जो खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अनुरूप नहीं हैं।

धारा 23(2) के अनुसार केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम कब संसद् के समक्ष रखा जाएगा?

बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र।

धारा 23(2) के अनुसार नियम संसद् के किसके समक्ष रखा जाएगा?

संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष।

धारा 23(2) के अनुसार नियम कितनी अवधि के लिए संसद् के समक्ष रखा जाएगा?

तीस दिन की अवधि के लिए।

धारा 23(2) के अनुसार तीस दिन की अवधि किस प्रकार पूरी हो सकती है?

एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में।

धारा 23(2) के अनुसार यदि दोनों सदन नियम में परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएँ तो नियम किस रूप में प्रभावी होगा?

परिवर्तित रूप में।

धारा 23(2) के अनुसार यदि दोनों सदन सहमत हो जाएँ कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो उसका क्या प्रभाव होगा?

वह निष्प्रभाव हो जाएगा।

धारा 23(2) के अनुसार नियम के परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से पूर्व की गई कार्यवाही पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

उसकी विधिमान्यता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

धारा 24 का विषय क्या है?

राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति।

(Power of the State Government to make rules)

धारा 24(1) के अनुसार नियम बनाने की शक्ति किसके पास है?

राज्य सरकार के पास।

धारा 24(1) के अनुसार राज्य सरकार नियम किससे परामर्श करने के पश्चात् बनाएगी?

समिति से परामर्श करने के पश्चात्।

धारा 24(1) के अनुसार नियम बनाने की शर्त क्या है?

पूर्व प्रकाशन की शर्त के अधीन।

धारा 24(1) के अनुसार राज्य सरकार किन विषयों पर नियम बना सकती है?

जो धारा 23 के क्षेत्र के अन्तर्गत नहीं आते।

धारा 24(1) के अनुसार नियम किस उद्देश्य से बनाए जाएंगे?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के उपबंधों को प्रभावी करने के लिए।

धारा 24(2)(क) के अनुसार किनकी शक्तियाँ और कर्तव्य परिनिश्चित किए जा सकते हैं?

खाद्य (स्वास्थ्य) प्राधिकारी, स्थानीय प्राधिकारी तथा स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी की।

धारा 24(2)(ख) के अनुसार किन कार्यों के लिए अनुज्ञप्तियों के संबंध में नियम बनाए जा सकते हैं?

विक्रयार्थ विनिर्माण, भंडारकरण, विक्रय तथा वितरण के लिए।

धारा 24(2)(ख) के अनुसार किन बातों को विहित किया जा सकता है?

अनुज्ञप्ति का प्ररूप, आवेदन का प्ररूप, शर्तें, सशक्त प्राधिकारी, फीस, प्रतिभूति तथा अनुज्ञप्ति या प्रतिभूति के निलंबन, रद्दीकरण या समपहरण की परिस्थितियाँ।

धारा 24(2)(ग) के अनुसार किन बातों के लिए फीस विनिर्दिष्ट की जा सकती है?

खाद्य पदार्थ के विश्लेषण या खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के अधीन फीस विहित किए जाने योग्य अन्य बातों के लिए।

धारा 24(2)(घ) के अनुसार किसे जुर्माने की राशि दी जा सकती है?

स्थानीय प्राधिकारी को।

धारा 24(2)(ङ) के अनुसार राज्य सरकार या खाद्य (स्वास्थ्य) प्राधिकारी की शक्तियाँ किन्हें प्रत्यायोजित की जा सकती हैं?

अधीनस्थ प्राधिकारियों या स्थानीय प्राधिकारियों को।

धारा 24(3) के अनुसार नियम किसके समक्ष रखे जाएंगे?

संबंधित राज्य विधान-मंडल के समक्ष।

धारा 25 का विषय क्या है?

निरसन और व्यावृत्ति।

(Repeal and Saving)

धारा 25(1) के अनुसार किस विधि का निरसन होगा?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के प्रारम्भ से पूर्व किसी राज्य में प्रवृत्त खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 की तत्स्थानी विधि का।

धारा 25(1) के अनुसार तत्स्थानी विधि कब निरसित होगी?

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के प्रारम्भ पर।

धारा 25(1) के अनुसार यह उपधारा किन राज्यों पर लागू होती है?

उन राज्यों पर जिनमें खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 का विस्तार है।

धारा 25(2) के अनुसार निरसित तत्स्थानी विधि के अधीन बनाए गए कौन-से उपबंध प्रवृत्त बने रहेंगे?

खाद्य में अपमिश्रण के निवारण से संबंधित नियम, विनियम और उपविधियाँ।

धारा 25(2) के अनुसार पूर्ववर्ती नियम, विनियम और उपविधियाँ कब तक प्रवृत्त रहेंगी?

जब तक उन्हें खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा परिवर्तित, संशोधित या निरसित नहीं कर दिया जाता।

धारा 25(2) के अनुसार पूर्ववर्ती नियम, विनियम और उपविधियाँ कब प्रवृत्त नहीं रहेंगी?

जहाँ और जितनी सीमा तक वे खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के उपबंधों से असंगत या विरुद्ध हों।

धारा 25(3)(क) के अनुसार इस धारा में " खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के प्रारम्भ" से क्या अभिप्रेत है?

खाद्य अपमिश्रण निवारण (संशोधन) अधिनियम, 1971 का प्रारम्भ।

धारा 25(3)(ख) के अनुसार उपधारा (2) के उपबंध किस धारा पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेंगे?

साधारण खण्ड अधिनियम, 1897 की धारा 6 पर।

धारा 25(3)(ख) के अनुसार साधारण खण्ड अधिनियम, 1897 की धारा 6 किस निरसन पर भी लागू होगी?

जम्मू-कश्मीर राज्य में प्रवृत्त तत्स्थानी विधि के निरसन पर।

धारा 25(3)(ख) के अनुसार जम्मू-कश्मीर की तत्स्थानी विधि को किसके समान माना जाएगा?

मानो वह कोई अधिनियमिति हो।

 

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