मध्य प्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम वन-लाइनर नोट्स

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

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मध्य प्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010

(THE MADHYA PRADESH LOK SEWAON KE PRADAN KI GUARANTEE ADHINIYAM, 2010)

[अधिनियम संख्या 24 वर्ष 2010]

[Act No. 24 of 2010]

 

इस अधिनियम का संक्षिप्त परिचय क्या है? 

मध्य प्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010

(The Madhya Pradesh Lok Sewaon Ke Pradan Ki Guarantee Adhiniyam, 2010)

मध्य प्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010 का अधिनियम संख्यांक क्या है?

अधिनियम संख्या 24 वर्ष 2010

(Act No. 24 of 2010)

प्रस्तावना के अनुसार अधिनियम का उद्देश्य क्या है?

राज्य की जनता को निर्धारित समय सीमा के भीतर सेवाएं प्रदान करना।

प्रस्तावना के अनुसार यह अधिनियम किसके लिए बनाया गया है?

राज्य की जनता के लिए।

प्रस्तावना के अनुसार सेवाएं किस प्रकार प्रदान की जानी हैं?

निर्धारित समय सीमा के भीतर।

प्रस्तावना के अनुसार यह अधिनियम किसके द्वारा अधिनियमित किया जाता है?

मध्य प्रदेश विधानमंडल द्वारा।

प्रस्तावना के अनुसार यह अधिनियम भारत गणराज्य के किस वर्ष में अधिनियमित किया जाता है?

भारत गणराज्य के इकसठवें वर्ष में।

धारा 1 का विषय क्या है?

संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ।

(Short title, extent and commencement)

धारा 1(1) के अधीन अधिनियम का संक्षिप्त नाम क्या है?

मध्य प्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी विधेयक, 2010

धारा 1(2) के अधीन अधिनियम का विस्तार कहाँ तक है?

मध्य प्रदेश के पूरे क्षेत्र में।

धारा 1(2) के अधीन क्या यह अधिनियम सम्पूर्ण मध्य प्रदेश में लागू होगा?

हाँ।

धारा 1(3) के अधीन अधिनियम कब लागू होगा?

उस तिथि से जो राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा नियुक्त करे।

धारा 1(3) के अधीन प्रारंभ की तिथि किस माध्यम से नियुक्त की जाएगी?

आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा।

धारा 2 का विषय क्या है?

परिभाषाएँ।

(Definitions)

धारा 2(क) का विषय क्या है?

"पदाभिहित अधिकारी" (designated officer) की परिभाषा।

धारा 2(क) के अधीन "पदाभिहित अधिकारी" से क्या तात्पर्य है?

धारा 3 के अंतर्गत सेवा प्रदान करने के लिए अधिसूचित अधिकारी।

धारा 2(ख) का विषय क्या है?

"पात्र व्यक्ति" (eligible person) की परिभाषा।

धारा 2(ख) के अधीन "पात्र व्यक्ति" से क्या तात्पर्य है?

ऐसे व्यक्ति से जो अधिसूचित सेवाओं के लिए पात्र है।

धारा 2(ख) के अधीन पात्र व्यक्ति किसके लिए पात्र होता है?

अधिसूचित सेवाओं के लिए।

धारा 2(ग) का विषय क्या है?

"प्रथम अपील अधिकारी" (first appeal officer) की परिभाषा।

धारा 2(ग) के अधीन "प्रथम अपील अधिकारी" से क्या तात्पर्य है?

ऐसे अधिकारी से जिसे धारा 3 के अंतर्गत अधिसूचित किया गया हो।

धारा 2(ग) के अधीन प्रथम अपील अधिकारी किस धारा के अंतर्गत अधिसूचित होता है?

धारा 3 के अंतर्गत।

धारा 2(घ) का विषय क्या है?

"निर्धारित" (prescribed) की परिभाषा।

धारा 2(घ) के अधीन "निर्धारित" से क्या तात्पर्य है?

मध्य प्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010 के अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित।

धारा 2(ई) का विषय क्या है?

"सेवा का अधिकार" (right to service) की परिभाषा।

धारा 2(ई) के अधीन "सेवा का अधिकार" से क्या अभिप्रेत है?

धारा 4 के अंतर्गत निर्धारित समय सीमा के भीतर सेवा प्राप्त करने का अधिकार।

धारा 2(ङ) का विषय क्या है?

"सेवा" (service) की परिभाषा।

धारा 2(ङ) के अधीन "सेवा" से क्या तात्पर्य है?

धारा 3 के अंतर्गत अधिसूचित किसी भी सेवा से।

धारा 2(च) का विषय क्या है?

"द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी" (second appellate authority) की परिभाषा।

धारा 2(च) के अधीन "द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी" से क्या तात्पर्य है?

ऐसे अधिकारी से जिसे धारा 3 के अंतर्गत अधिसूचित किया गया हो।

धारा 2(छ) का विषय क्या है?

"राज्य सरकार" (State Government) की परिभाषा।

धारा 2(छ) के अधीन "राज्य सरकार" से क्या तात्पर्य है?

मध्य प्रदेश सरकार से।

धारा 2(ज) का विषय क्या है?

"निर्धारित समय सीमा" (stipulated time limit) की परिभाषा।

धारा 2(ज) के अधीन "निर्धारित समय सीमा" से क्या तात्पर्य है?

नामित अधिकारी द्वारा सेवा प्रदान करने या धारा 3 के तहत अधिसूचित प्रथम अपील अधिकारी द्वारा अपील पर निर्णय लेने के लिए अधिकतम समय।

धारा 2(ज) के अधीन निर्धारित समय सीमा किन कार्यों के लिए है?

सेवा प्रदान करने या अपील पर निर्णय लेने के लिए।

धारा 2(ज) के अधीन सेवा प्रदान करने हेतु निर्धारित समय सीमा किसके लिए है?

नामित अधिकारी के लिए।

धारा 3 का विषय क्या है?

सेवाओं की अधिसूचना, नामित अधिकारी, प्रथम अपील अधिकारी, द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी और निर्धारित समय सीमा

(Notification of services, designated officers, first appeal officers, second appellate authority and stipulated time limits)

धारा 3 के अधीन अधिसूचना जारी करने की शक्ति किसे प्राप्त है?

राज्य सरकार को।

धारा 3 के अधीन राज्य सरकार कब अधिसूचना जारी कर सकती है?

समय-समय पर।

धारा 3 के अधीन किन सेवाओं को अधिसूचित किया जा सकता है?

उन सेवाओं को जिन पर मध्य प्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010 लागू होगा।

धारा 3 के अधीन किन अधिकारियों को अधिसूचित किया जा सकता है?

नामित अधिकारी, प्रथम अपील अधिकारी और द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी।

धारा 3 के अधीन क्या निर्धारित समय सीमाओं को भी अधिसूचित किया जा सकता है?

हाँ।

धारा 3 के अधीन राज्य सरकार किन-किन बातों को अधिसूचित कर सकती है?

सेवाएं, नामित अधिकारी, प्रथम अपील अधिकारी, द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी और निर्धारित समय सीमाएं।

धारा 4 का विषय क्या है?

निर्धारित समय सीमा के भीतर सेवा प्राप्त करने का अधिकार

(Right to obtain service within stipulated time limit)

धारा 4 के अधीन सेवा प्रदान करने का दायित्व किसका है?

नामित अधिकारी का।

धारा 4 के अधीन कौन-सी सेवा प्रदान की जाएगी?

धारा 3 के तहत अधिसूचित सेवा।

धारा 4 के अधीन सेवा किसे प्रदान की जाएगी?

सेवा प्राप्त करने के पात्र व्यक्ति को।

धारा 5 का विषय क्या है?

निर्धारित समय सीमा के भीतर सेवा प्रदान करना

(Providing service in stipulated time limit)

धारा 5(1) के अधीन निर्धारित समय सीमा कब प्रारंभ होगी?

अधिसूचित सेवा के लिए आवश्यक आवेदन प्रस्तुत किए जाने की तिथि से।

धारा 5(1) के अधीन आवेदन किसे प्रस्तुत किया जा सकता है?

नामित अधिकारी या उसके अधीनस्थ ऐसे व्यक्ति को जो आवेदन प्राप्त करने के लिए अधिकृत हो।

धारा 5(2) के अधीन आवेदन प्राप्त होने पर नामित अधिकारी क्या करेगा?

निर्धारित समय सीमा के भीतर तामील प्रदान करेगा या आवेदन को अस्वीकार करेगा।

धारा 5(2) के अधीन नामित अधिकारी के पास आवेदन प्राप्त होने पर कौन-कौन से विकल्प हैं?

तामील प्रदान करना या आवेदन अस्वीकार करना।

धारा 5(2) के अधीन तामील या अस्वीकृति कब की जाएगी?

निर्धारित समय सीमा के भीतर।

धारा 5(2) के अधीन आवेदन अस्वीकार होने की स्थिति में क्या आवश्यक है?

कारणों को लिखित रूप में दर्ज करना।

धारा 5(2) के अधीन आवेदन अस्वीकृति की स्थिति में किसे सूचित किया जाएगा?

आवेदक को।

धारा 6 का विषय क्या है?

अपील

(Appeal)

धारा 6(1) के अधीन कौन अपील कर सकता है?

वह व्यक्ति जिसका आवेदन धारा 5(2) के तहत अस्वीकृत किया गया हो या जिसे निर्धारित समय सीमा के भीतर सेवा प्रदान की गई हो।

धारा 6(1) के अधीन प्रथम अपील किसके समक्ष की जाएगी?

प्रथम अपील अधिकारी के समक्ष।

धारा 6(1) के अधीन अपील कब की जा सकती है?

आवेदन की अस्वीकृति की तिथि या निर्धारित समय सीमा की समाप्ति से तीस दिनों के भीतर।

धारा 6(1) के अधीन अपील की समय-सीमा क्या है?

तीस दिन।

धारा 6(1) के परंतुक के अधीन क्या प्रथम अपील अधिकारी तीस दिन के बाद भी अपील स्वीकार कर सकता है?

हाँ।

धारा 6(1) के परंतुक के अधीन विलंबित अपील कब स्वीकार की जा सकती है?

जब प्रथम अपील अधिकारी संतुष्ट हो कि अपीलकर्ता पर्याप्त कारण से समय पर अपील दाखिल करने में असमर्थ था।

धारा 6(2) के अधीन प्रथम अपील अधिकारी क्या आदेश दे सकता है?

नामित अधिकारी को निर्दिष्ट अवधि के भीतर सेवा प्रदान करने का आदेश या अपील को अस्वीकार।

धारा 6(3) के अधीन द्वितीय अपील किसके समक्ष की जाएगी?

द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष।

धारा 6(3) के अधीन द्वितीय अपील किसके विरुद्ध की जाएगी?

प्रथम अपील अधिकारी के निर्णय के विरुद्ध।

धारा 6(3) के अधीन द्वितीय अपील कब की जा सकेगी?

निर्णय की तिथि से 60 दिनों के भीतर।

धारा 6(3) के अधीन द्वितीय अपील की समय-सीमा क्या है?

60 दिन।

धारा 6(3) के परंतुक के अधीन विलंबित द्वितीय अपील कब स्वीकार की जा सकती है?

जब द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी संतुष्ट हो कि अपीलकर्ता पर्याप्त कारण से समय पर अपील दाखिल करने में असमर्थ था।

धारा 6(4)(क) के अधीन द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी क्या आदेश दे सकता है?

नामित अधिकारी को निर्दिष्ट अवधि के भीतर सेवा प्रदान करने का आदेश या अपील को अस्वीकार।

धारा 6(4)(क) के अधीन सेवा प्रदान करने की अवधि कौन निर्दिष्ट करेगा?

द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी।

धारा 6(4)(ख) के अधीन तामील प्रदान करने के आदेश के साथ क्या किया जा सकता है?

धारा 7 के अनुसार दंड लगाया जा सकता है।

धारा 6(5)(क) के अधीन यदि नामित अधिकारी धारा 5(1) का अनुपालन नहीं करता तो आवेदक क्या कर सकता है?

सीधे प्रथम अपील अधिकारी को आवेदन प्रस्तुत कर सकता है।

धारा 6(5)(क) के अधीन धारा 5(1) के गैर-अनुपालन से पीड़ित व्यक्ति कौन है?

आवेदक।

धारा 6(5)(क) के अधीन ऐसे आवेदन का निपटारा कैसे किया जाएगा?

प्रथम अपील के तरीके से।

धारा 6(5)(ख) के अधीन यदि नामित अधिकारी धारा 6(2) के आदेश का पालन नहीं करता तो आवेदक क्या कर सकता है?

सीधे द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी को आवेदन प्रस्तुत कर सकता है।

धारा 6(5)(ख) के अधीन कौन-से आदेश के गैर-अनुपालन पर द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी को आवेदन किया जा सकता है?

धारा 6(2) के अधीन सेवा प्रदान करने के आदेश के गैर-अनुपालन पर।

धारा 6(5)(ख) के अधीन ऐसे आवेदन का निपटारा कैसे किया जाएगा?

द्वितीय अपील के तरीके से।

धारा 6(6) के अधीन अपील का निर्णय करते समय किन अधिकारियों को सिविल न्यायालय की शक्तियाँ प्राप्त होंगी?

प्रथम अपील अधिकारी और द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी को।

धारा 6(6) के अधीन ये शक्तियाँ किसके समान होंगी?

सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अधीन मुकदमे की सुनवाई करते समय सिविल न्यायालय की शक्तियों के समान।

धारा 6(6)(क) के अधीन कौन-सी शक्ति प्राप्त होगी?

दस्तावेजों के उत्पादन और निरीक्षण की आवश्यकता की शक्ति।

धारा 6(6)(ख) के अधीन कौन-सी शक्ति प्राप्त होगी?

नामित अधिकारी और अपीलकर्ता को सुनवाई हेतु समन जारी करने की शक्ति।

धारा 6(6)(ग) के अधीन कौन-से अन्य मामलों पर शक्ति प्राप्त होगी?

ऐसे अन्य मामलों पर जो निर्धारित किए जा सकें।

धारा 7 का विषय क्या है?

दंड

(Penalty)

धारा 7(1)(क) के अधीन द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी कब जुर्माना लगा सकता है?

जब उसकी राय हो कि नामित अधिकारी पर्याप्त और उचित कारण के बिना सेवा प्रदान करने में विफल रहा है।

धारा 7(1)(क) के अधीन जुर्माना किस पर लगाया जा सकता है?

नामित अधिकारी पर।

धारा 7(1)(क) के अधीन जुर्माने की राशि क्या है?

500 रुपये से कम और 5000 रुपये से अधिक नहीं होगा।

 

धारा 7(1)(क) के अधीन किस प्रकार का जुर्माना लगाया जा सकता है?

एकमुश्त जुर्माना।

धारा 7(1)(ख) के अधीन द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी कब जुर्माना लगा सकता है?

जब उसकी राय हो कि नामित अधिकारी ने सेवा प्रदान करने में विलंब किया है।

धारा 7(1)(ख) के अधीन विलंब के लिए जुर्माना किस दर से लगाया जा सकता है?

250 रुपये प्रति दिन की दर से जुर्माना लगा सकता है, जो 5000 रुपये से अधिक नहीं होगा।

धारा 7(1) के परंतुक के अधीन दंड लगाने से पूर्व क्या आवश्यक है?

नामित अधिकारी को सुनवाई का उचित अवसर दिया जाना।

धारा 7(1) के परंतुक के अधीन सुनवाई का अवसर किसे दिया जाएगा?

नामित अधिकारी को।

धारा 7(2) के अधीन द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी कब प्रथम अपील अधिकारी पर जुर्माना लगा सकता है?

जब उसकी राय हो कि प्रथम अपील अधिकारी ने पर्याप्त और उचित कारण के बिना निर्धारित समय सीमा के भीतर अपील का निर्णय नहीं किया है।

धारा 7(2) के अधीन जुर्माना किस पर लगाया जा सकता है?

प्रथम अपील अधिकारी पर।

धारा 7(2) के अधीन जुर्माने की राशि क्या है?

जो 500 रुपये से कम और 5000 रुपये से अधिक नहीं होगा।

धारा 7(2) के परंतुक के अधीन दंड लगाने से पूर्व क्या आवश्यक है?

प्रथम अपील अधिकारी को सुनवाई का उचित अवसर दिया जाना।

धारा 7(3) के अधीन द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी क्या आदेश दे सकता है?

अपीलकर्ता को मुआवजे के रूप में राशि देने का आदेश।

धारा 7(3) के अधीन मुआवजा किस जुर्माने में से दिया जा सकता है?

धारा 7(1) या (2) या दोनों के तहत लगाए गए जुर्माने में से।

धारा 7(3) के अधीन मुआवजे की राशि कितनी हो सकती है?

लगाए गए जुर्माने से अधिक नहीं।

धारा 7(3) के अधीन मुआवजा किसे दिया जा सकता है?

अपीलकर्ता को।

धारा 7(4) के अधीन द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी कब अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है?

जब वह संतुष्ट हो कि नामित अधिकारी या प्रथम अपील अधिकारी पर्याप्त और उचित कारण के बिना अपने कर्तव्यों के निर्वहन में विफल रहा है।

धारा 7(4) के अधीन अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश किसके विरुद्ध की जा सकती है?

नामित अधिकारी या प्रथम अपील अधिकारी के विरुद्ध।

धारा 7(4) के अधीन कर्तव्यों का स्रोत क्या है?

मध्य प्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010 के तहत सौंपे गए कर्तव्य।

धारा 7(4) के अधीन अनुशासनात्मक कार्रवाई किसके तहत सिफारिश की जा सकती है?

उस पर लागू सेवा नियमों के तहत।

धारा 8 का विषय क्या है?

पुनरीक्षण

(Revision)

धारा 8 के अधीन पुनरीक्षण हेतु आवेदन कौन कर सकता है?

द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी के दंड संबंधी आदेश से व्यथित नामित अधिकारी या प्रथम अपील अधिकारी।

धारा 8 के अधीन पुनरीक्षण किस आदेश के विरुद्ध किया जा सकता है?

मध्य प्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010 के अंतर्गत दंड लगाने के संबंध में द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी के आदेश के विरुद्ध।

धारा 8 के अधीन पुनरीक्षण आवेदन किसके समक्ष किया जाएगा?

राज्य सरकार द्वारा नामित अधिकारी के समक्ष।

धारा 8 के अधीन पुनरीक्षण आवेदन कब किया जा सकता है?

आदेश की तिथि से 60 दिनों की अवधि के भीतर।

धारा 8 के अधीन पुनरीक्षण की समय-सीमा क्या है?

60 दिन।

धारा 8 के अधीन आवेदन का निपटारा कौन करेगा?

राज्य सरकार द्वारा नामित अधिकारी।

धारा 8 के अधीन आवेदन का निपटारा किसके अनुसार किया जाएगा?

निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार।

धारा 8 के परंतुक के अधीन क्या 60 दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद भी आवेदन पर विचार किया जा सकता है?

हाँ।

धारा 8 के परंतुक के अधीन विलंबित आवेदन कब विचारणीय होगा?

जब नामित अधिकारी संतुष्ट हो कि पर्याप्त कारण से आवेदन समय पर प्रस्तुत नहीं किया जा सका।

धारा 8 के परंतुक के अधीन विलंब-स्वीकार करने की शक्ति किसे है?

राज्य सरकार द्वारा नामित अधिकारी को।

धारा 9 का विषय क्या है?

सद्भावना से की गई कार्रवाई का संरक्षण

(Protection of action taken in good faith)

धारा 9 के अधीन संरक्षण किन कार्यों के लिए उपलब्ध है?

मध्य प्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010 या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के तहत सद्भावनापूर्वक किए गए या किए जाने के इरादे से किए गए कार्यों के लिए।

धारा 9 के अधीन किनके विरुद्ध मुकदमा, अभियोग या अन्य कानूनी कार्यवाही नहीं की जाएगी?

किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध।

धारा 9 के अधीन क्या सद्भावनापूर्वक किए जाने के इरादे से किए गए कार्यों के लिए भी संरक्षण उपलब्ध है?

हाँ।

धारा 9 के अधीन क्या सद्भावनापूर्वक किए गए कार्य के लिए किसी व्यक्ति के विरुद्ध अभियोग चलाया जा सकता है?

नहीं।

धारा 10 का विषय क्या है?

नियम बनाने की शक्तियाँ

(Powers to make rules)

धारा 10(1) के अधीन नियम बनाने की शक्ति किसे प्राप्त है?

राज्य सरकार को।

धारा 10(1) के अधीन राज्य सरकार किस माध्यम से नियम बना सकती है?

आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा।

धारा 10(1) के अधीन नियम किस प्रयोजन हेतु बनाए जाएंगे?

मध्य प्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010 के प्रावधानों को लागू करने के लिए।

धारा 10(2) के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियम कहाँ रखे जाएंगे?

राज्य विधानमंडल के समक्ष।

धारा 10(2) के अधीन कौन-से नियम राज्य विधानमंडल के समक्ष रखे जाएंगे?

मध्य प्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010 के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम।

धारा 11 का विषय क्या है?

कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति

(Power to remove difficulties)

धारा 11 के अधीन कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति किसे प्राप्त है?

राज्य सरकार को।

धारा 11 के अधीन राज्य सरकार कब कार्रवाई कर सकती है?

जब इस अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है।

धारा 11 के अधीन कठिनाई को किस माध्यम से दूर किया जा सकता है?

आदेश द्वारा।

धारा 11 के अधीन आदेश कैसा होना चाहिए?

मध्य प्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010 के प्रावधानों के अनुरूप।

धारा 11 के परंतुक के अधीन कठिनाई दूर करने का आदेश कब तक जारी किया जा सकता है?

मध्य प्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010 के लागू होने की तिथि से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति तक।

धारा 11 के परंतुक के अधीन क्या दो वर्ष की अवधि समाप्त होने के बाद आदेश जारी किया जा सकता है?

नहीं।

 

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