मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम वन लाइनर नोट्स

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

 

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मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004

(THE Madhya Pradesh Cow Slaughter Prohibition Act, 2004)

[क्रमांक 6 सन् 2004]

(No.6 of 2004)

 

इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम क्या है?

मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004

(Madhya Pradesh Cow Slaughter Prohibition Act)

मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 का    अधिनियम क्रमांक क्या है?

क्रमांक 6 सन् 2004

मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 का  उद्देश्य क्या है?

जनसाधारण के हित में, सांप्रदायिक सद्भाव और शांति बनाए रखने हेतु गौवंश वध का प्रतिषेध तथा उसके परिरक्षण और संरक्षण के लिए उपबंध करना।

मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 किसके द्वारा अधिनियमित किया गया है?

मध्यप्रदेश विधान-मण्डल द्वारा।

मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 भारत गणराज्य के किस वर्ष में अधिनियमित किया गया है?

पचपनवें वर्ष में।

मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 का उद्देश्य क्या है?

गौवंश वध का प्रतिषेध, परिरक्षण, संरक्षण तथा संसक्त या आनुषंगिक मामलों का विनियमन।

मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 को राज्यपाल की अनुमति कब प्राप्त हुई?

26 मार्च, 2004 को।

मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 का प्रथम प्रकाशन कब हुआ?

29 मार्च, 2004 को।

मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 किस राजपत्र में प्रकाशित हुआ?

मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण) में।

मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 के उद्देश्य में कौन-से तत्व शामिल हैं?

जनहित, सांप्रदायिक सद्भाव और शांति बनाए रखना।

धारा 1 का विषय क्या है?

संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ।

( short title, extent and commencement)

धारा 1(1) के अनुसार अधिनियम का संक्षिप्त नाम क्या है?

मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004

धारा 1(2) के अनुसार अधिनियम का विस्तार कहाँ तक है?

संपूर्ण मध्यप्रदेश राज्य पर।

धारा 1(3) के अनुसार अधिनियम कब प्रवृत्त होगा?

मध्यप्रदेश राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से।

धारा 2 का विषय क्या है?

परिभाषाएं।

(Definitions)

धारा 2(क) का विषय क्या है?

"गौ-मांस" की परिभाषा।

(beef)

धारा 2(क) के अनुसार "गौ-मांस" से क्या अभिप्रेत है?

गौवंश का मांस जिसका वध इस अधिनियम के अधीन प्रतिषिद्ध है।

धारा 2(ख) का विषय क्या है?

"गौवंश" की परिभाषा।

(cow progeny)

धारा 2(ख) के अनुसार "गौवंश" में क्या शामिल है?

गाय, सांड, बैल और गाय के बछड़े।

धारा 2(ग) का विषय क्या है?

"सक्षम प्राधिकारी" की परिभाषा।

(Competent Authority)

धारा 2(ग) के अनुसार "सक्षम प्राधिकारी" कौन है?

राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना से नियुक्त व्यक्ति।

धारा 2(ग) के अनुसार सक्षम प्राधिकारी किस प्रयोजन हेतु नियुक्त होता है?

विनिर्दिष्ट कृत्यों का निर्वहन करने के लिए।

धारा 2(ग) के अनुसार सक्षम प्राधिकारी कहाँ कार्य करता है?

किसी स्थानीय क्षेत्र में।

धारा 2(घ) का विषय क्या है?

"संस्था" की परिभाषा।

(Institution)

धारा 2(घ) के अनुसार "संस्था" क्या है?

रजिस्ट्रीकृत पूर्त संस्था जो गौवंश के संरक्षण आदि के लिए स्थापित हो।

धारा 2(घ) के अनुसार संस्था किन उद्देश्यों के लिए स्थापित होती है?

गौवंश को रखना, प्रजनन, भरण-पोषण तथा अशक्त, बूढ़े, रोगी गौवंश का संरक्षण, देखभाल, प्रबंध और उपचार।

धारा 2(घ) के अनुसार संस्था का स्वरूप क्या होना चाहिए?

तत्समय प्रवृत्त अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत पूर्त संस्था।

धारा 2(ङ) का विषय क्या है?

"वध" की परिभाषा।

(slaughter)

धारा 2(ङ) के अनुसार "वध" से क्या अभिप्रेत है?

किसी भी पद्धति से हत्या करना।

धारा 2(ङ) के अनुसार वध में और क्या सम्मिलित है?

अंगहीन करना या ऐसी शारीरिक चोट पहुंचाना जिससे सामान्यतः मृत्यु हो जाए।

धारा 2(ङ) के अनुसार वध में कौन-सा आशय शामिल है?

अप्राकृतिक मृत्यु कारित करने के आशय से किया गया कृत्य।

धारा 2(ङक) का विषय क्या है?

"परिवहन" की परिभाषा।

(transport)

धारा 2(ङक) के अनुसार "परिवहन" से क्या अभिप्रेत है?

गौवंश को एक स्थान से दूसरे स्थान पर यान द्वारा या पैदल ले जाना।

धारा 2(ङक) के अनुसार कौन-सा परिवहन अपवाद है?

वास्तविक कृषि या आनुषंगिक प्रयोजनों के लिए किया गया परिवहन।

धारा 2(ङख) का विषय क्या है?

"परिवाहक" की परिभाषा।

(transporter)

धारा 2(ङख) के अनुसार "परिवाहक" कौन है?

गौवंश या गौमांस के परिवहन से संबंधित निर्दिष्ट व्यक्ति।

धारा 2(ङख)(एक) के अनुसार परिवाहक कौन है?

यान का स्वामी, यदि बुकिंग उसके अनुदेश से या जानकारी में हुई हो।

धारा 2(ङख)(दो) के अनुसार परिवाहक कौन है?

यान का प्रभारी और उसका सहायक।

धारा 2(ङख)(तीन) के अनुसार परिवाहक कौन है?

परिवहन कम्पनी का प्रभारी, यदि बुकिंग उसके अनुदेश से या जानकारी में हुई हो।

धारा 2(ङख)(चार) के अनुसार परिवाहक कौन है?

परिवहन फर्म का भागीदार, यदि बुकिंग उसके अनुदेश से या जानकारी में हुई हो।

धारा 2(च) का विषय क्या है?

"पशु चिकित्सा अधिकारी" की परिभाषा।

(Veterinary Officer)

धारा 2(च) के अनुसार "पशु चिकित्सा अधिकारी" कौन है?

धारा 3 के अधीन नियुक्त पशु चिकित्सक।

धारा 2(छ) का विषय क्या है?

"यान" की परिभाषा।

(vehicle)

धारा 2(छ) के अनुसार "यान" से क्या अभिप्रेत है?

भूमि, जल या वायु मार्ग से उपयोग में लाए गए यांत्रिकी या हस्तचलित वाहन।

धारा 3 का विषय क्या है?

पशु चिकित्सा अधिकारी की नियुक्ति।

(Appointment of Veterinary Officer)

धारा 3 के अनुसार पशु चिकित्सा अधिकारी की नियुक्ति कौन करता है?

आयुक्त-सह-संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं, मध्यप्रदेश।

धारा 3 के अनुसार नियुक्ति किस माध्यम से की जाती है?

सामान्य या विशेष आदेश द्वारा।

धारा 3 के अनुसार किसे नियुक्त किया जा सकता है?

किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को।

धारा 3 के अनुसार नियुक्ति किस क्षेत्र के लिए की जाती है?

आदेश में विनिर्दिष्ट स्थानीय क्षेत्र के लिए।

धारा 4 का विषय क्या है?

गौवंश के वध का प्रतिषेध।

(Prohibition of slaughter of cow progeny)

धारा 4 के अनुसार किसका वध निषिद्ध है?

किसी गौवंश का।

धारा 4 के अनुसार वध किसके द्वारा निषिद्ध है?

कोई भी व्यक्ति।

धारा 4 के अनुसार वध किन साधनों से निषिद्ध है?

किन्हीं भी साधनों से।

धारा 4 के अनुसार व्यक्ति क्या नहीं करेगा?

कोई भी व्यक्ति, किन्हीं भी साधनों से, किसी गौवंश का तो वध करेगा, वध करवाएगा और तो उन्हें वध के लिए देगा और ही उन्हें वध के लिए दिलवाएगा।

धारा 5 का विषय क्या है?

गौमांस रखने और उसके परिवहन का प्रतिषेध।

(Prohibition on possession and transport of beef)

धारा 5 के अनुसार कोई भी व्यक्ति किसको अपने कब्जे में नहीं रखेगा या उसका परिवहन नहीं करेगा?

मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 के उल्लंघन में वध किए गए गौवंश का गौमांस।

धारा 6 का विषय क्या है?

वध के लिए गौवंश के परिवहन पर प्रतिषेध।

(Prohibition on transport of cow progeny for slaughter)

धारा 6 के अनुसार किसका परिवहन निषिद्ध है?

गौवंश का।

धारा 6 के अनुसार निषेध किस उद्देश्य से है?

वध के प्रयोजन के लिए।

धारा 6 के अनुसार निषेध किन परिस्थितियों में लागू होता है?

जब यह ज्ञात हो कि उसका वध किया जाएगा या वध की संभावना हो।

धारा 6 के अनुसार निषेध किस पर लागू होता है?

कोई भी व्यक्ति, जिसमें परिवाहक भी सम्मिलित है।

धारा 6 के अनुसार परिवहन कहाँ-कहाँ निषिद्ध है?

राज्य के भीतर या राज्य के बाहर।

धारा 6 के अनुसार परिवहन किसके द्वारा निषिद्ध है?

स्वयं, एजेंट, नौकर या उसके निमित्त कार्य करने वाले अन्य व्यक्ति द्वारा।

धारा 6 के अनुसार व्यक्ति क्या नहीं करेगा?

गौवंश का परिवहन नहीं करेगा।

धारा 6 के अनुसार व्यक्ति क्या नहीं देगा?

गौवंश को परिवहन के लिए नहीं देगा।

धारा 6 के अनुसार व्यक्ति क्या नहीं करवाएगा?

गौवंश का परिवहन नहीं करवाएगा।

धारा 6-क का विषय क्या है?

गौवंश के निर्यात का प्रतिषेध और अनुज्ञापत्र का मंजूर किया जाना।

(Prohibation of export of cow progeny and grant of permit)

धारा 6-क(1) के अनुसार क्या निषिद्ध है?

 अनुज्ञापत्र के बिना गौवंश का निर्यात।

धारा 6-क(1) के अनुसार निर्यात किसके द्वारा निषिद्ध है?

कोई भी व्यक्ति, जिसमें परिवाहक भी सम्मिलित है।

धारा 6-क(1) के अनुसार निर्यात किस स्थान से किस स्थान तक निषिद्ध है?

राज्य के किसी स्थान से राज्य के बाहर।

धारा 6-क(1) के अनुसार निर्यात किसके द्वारा किया जाना निषिद्ध है?

स्वयं, एजेंट, नौकर या अन्य व्यक्ति द्वारा।

धारा 6-क(2) के अनुसार अनुज्ञापत्र कौन मंजूर कर सकता है?

सक्षम प्राधिकारी।

धारा 6-क(2) के अनुसार अनुज्ञापत्र किस प्रयोजन हेतु दिया जा सकता है?

कृषिक, डेयरी उद्योग, पशु मेले या अन्य समान प्रयोजन जो वध से भिन्न हों।

धारा 6-क(2) के अनुसार अनुज्ञापत्र कितने समय में दिया जाएगा?

आवेदन प्रस्तुत किए जाने के सात दिन के भीतर।

धारा 6-क(3) के अनुसार अपील कौन कर सकता है?

अनुज्ञापत्र की वांछा करने वाला व्यथित व्यक्ति।

धारा 6-क(3) के अनुसार अपील किसके समक्ष की जाती है?

संभागीय आयुक्त के समक्ष।

धारा 6-क(3) के अनुसार अपील की समय-सीमा क्या है?

आदेश की प्राप्ति की तारीख से तीस दिन के भीतर।

धारा 6-क(3) के अनुसार संभागीय आयुक्त क्या कर सकता है?

अभिलेख मंगा सकता है, परीक्षण कर सकता है और उचित आदेश पारित कर सकता है।

धारा 6-क(3) के अनुसार संभागीय आयुक्त का आदेश क्या होगा?

अंतिम होगा।

धारा 6-क(3) के अनुसार क्या आदेश न्यायालय में चुनौती योग्य है?

सिविल न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा।

धारा 6-ख का विषय क्या है?

मध्यप्रदेश से होकर गौवंश के परिवहन का प्रतिषेध और अभिवहन अनुज्ञापत्र का दिया जाना।

( Prohibition of transporting cow progeny via Madhya Pradesh and grant of transit permit)

धारा 6-ख के अनुसार क्या निषिद्ध है?

मध्यप्रदेश राज्य से होकर गौवंश का परिवहन।

धारा 6-ख के अनुसार निषेध किस पर लागू होता है?

कोई भी व्यक्ति, जिसमें परिवाहक भी सम्मिलित है।

धारा 6-ख के अनुसार किन परिस्थितियों में परिवहन किया जा सकता है?

जब सक्षम प्राधिकारी से अभिवहन अनुज्ञापत्र प्राप्त किया गया हो।

धारा 6-ख के अनुसार अभिवहन अनुज्ञापत्र किससे प्राप्त किया जाता है?

सक्षम प्राधिकारी से।

धारा 6-ख के अनुसार अभिवहन अनुज्ञापत्र कब आवश्यक है?

जब एक राज्य से दूसरे राज्य को मध्यप्रदेश से होकर गौवंश का परिवहन किया जाए।

धारा 7 का विषय क्या है?

संस्थाओं का सुदृढ़ीकरण।

(Strengthening of institutions)

धारा 7 के अनुसार सुदृढ़ीकरण का दायित्व किसका है?

राज्य सरकार का।

धारा 7 के अनुसार किन संस्थाओं का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा?

जो गौवंश कल्याण में लगी हुई हों।

धारा 7 के अनुसार राज्य सरकार क्या करेगी?

सुदृढ़ीकरण के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।

धारा 8 का विषय क्या है?

प्रभारों का उद्ग्रहण।

(Levy of charges)

धारा 8 के अनुसार प्रभार कौन उद्ग्रहित कर सकता है?

संस्था का भारसाधक व्यक्ति।

धारा 8 के अनुसार प्रभार किससे उद्ग्रहित किए जाएंगे?

गौवंश के स्वामियों से।

धारा 8 के अनुसार प्रभार किस प्रयोजन के लिए होंगे?

अशक्त, बूढ़े और रोगी गौवंश की देखभाल और भरण-पोषण के लिए।

धारा 9 का विषय क्या है?

शास्ति।

(Penalties)

धारा 9(1) का विषय क्या है?

धारा 4 के उल्लंघन के लिए दण्ड।

धारा 9(1) के अनुसार दण्ड कब लागू होता है?

जब कोई धारा 4 का उल्लंघन, उसका प्रयास या दुष्प्रेरण करता है।

धारा 9(1) के अनुसार न्यूनतम कारावास क्या है?

एक वर्ष।

धारा 9(1) के अनुसार अधिकतम कारावास क्या है?

सात वर्ष।

धारा 9(1) के अनुसार न्यूनतम जुर्माना क्या है?

पांच हजार रुपये।

धारा 9(2) का विषय क्या है?

धारा 5, 6, 6- और 6- के उल्लंघन के लिए दण्ड।

धारा 9(2) के अनुसार दण्ड कब लागू होता है?

जब कोई धारा 5, 6, 6- या 6- का उल्लंघन, उसका प्रयास या दुष्प्रेरण करता है।

धारा 9(2) के अनुसार न्यूनतम कारावास क्या है?

छह मास।

धारा 9(2) के अनुसार अधिकतम कारावास क्या है?

तीन वर्ष।

धारा 9(2) के अनुसार न्यूनतम जुर्माना क्या है?

पांच हजार रुपये।

धारा 10 का विषय क्या है?

अपराधों का संज्ञेय तथा अजमानतीय होना।

(offences to be cognizable and non-bailable.)

धारा 10 के अनुसार यह प्रावधान किसके होते हुए भी लागू है?

दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973/भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023  में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी।

धारा 11 का विषय क्या है?

प्रवेश, निरीक्षण, तलाशी तथा अभिग्रहण की शक्ति।

(Power of entry, inspection, search and seizure)

धारा 11(1) के अनुसार शक्ति किसे प्राप्त है?

सक्षम प्राधिकारी या उसके द्वारा लिखित में प्राधिकृत व्यक्ति को।

धारा 11(1) के अनुसार प्रवेश कहाँ किया जा सकता है?

अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर किसी भी परिसर में।

धारा 11(1) के अनुसार प्रवेश कब किया जा सकता है?

जब अपराध किए जाने, किए जा रहे होने या किए जाने की संभावना का विश्वास हो।

धारा 11(1) के अनुसार प्राधिकारी क्या कर सकता है?

परिसर में प्रवेश, निरीक्षण और आवश्यक कार्रवाई।

धारा 11(2) का विषय क्या है?

अधिभोगी का दायित्व।

धारा 11(2) के अनुसार अधिभोगी क्या करेगा?

प्रवेश की अनुमति देगा।

धारा 11(2) के अनुसार अधिभोगी किसे अनुमति देगा?

सक्षम प्राधिकारी या प्राधिकृत व्यक्ति को।

धारा 11(2) के अनुसार अधिभोगी का अन्य दायित्व क्या है?

पूछे गए प्रश्नों का सत्य उत्तर देना।

धारा 11(3) का विषय क्या है?

तलाशी, रोक एवं अभिग्रहण की शक्ति।

धारा 11(3) के अनुसार यह शक्ति किसे है?

हेड कांस्टेबल या उससे उच्च पद के पुलिस अधिकारी या प्राधिकृत व्यक्ति को।

धारा 11(3) के अनुसार यह शक्ति किन धाराओं के अनुपालन हेतु है?

धारा 4, 5, 6, 6- और 6-ख।

धारा 11(3)(क) के अनुसार अधिकारी क्या कर सकता है?

यान को रोक, प्रवेश और तलाशी ले सकता है।

धारा 11(3)(क) के अनुसार किस यान पर यह लागू है?

गौवंश या गौमांस के निर्यात हेतु उपयोग में लाए गए या आशयित यान पर।

धारा 11(3)(ख) के अनुसार क्या अभिग्रहण किया जा सकता है?

गौवंश और यान।

धारा 11(3)(ख) के अनुसार अभिगृहीत वस्तुओं का क्या किया जाएगा?

न्यायालय में प्रस्तुत कर सुरक्षित अभिरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

धारा 11(4) का विषय क्या है?

दण्ड प्रक्रिया संहिता / भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता का अनुप्रयोग।

धारा 11(4) के अनुसार कौन-सी धारा लागू होगी?

दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 100/ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 97

धारा 11(4) के अनुसार यह अनुप्रयोग कैसे होगा?

जहां तक हो सके।

धारा 11(5) का विषय क्या है?

अभिग्रहण और अधिहरण की शक्ति।

धारा 11(5) के अनुसार अभिग्रहण की शक्ति किसे है?

पुलिस को।

धारा 11(5) के अनुसार क्या अभिग्रहित किया जा सकता है?

यान, गौवंश और गौमांस।

धारा 11(5) के अनुसार अधिहरण कौन करेगा?

जिला मजिस्ट्रेट।

धारा 11(5) के अनुसार अधिहरण किस रीति से होगा?

विहित रीति से।

धारा 11(5) के परन्तु के अनुसार अधिहरण का आदेश कब नहीं किया जाएगा?

जब तक न्यायालय को विहित प्ररूप में संसूचना भेज दी जाए।

धारा 11(5) के परन्तु के अनुसार संसूचना किसके द्वारा भेजी जाएगी?

कलेक्टर द्वारा।

धारा 11(5) के परन्तु के अनुसार संसूचना किसे भेजी जाएगी?

विचारण करने की अधिकारिता रखने वाले न्यायालय को।

धारा 11(6) का विषय क्या है?

न्यायालय की शक्ति का प्रतिबंध।

धारा 11(6) के अनुसार न्यायालय क्या नहीं करेगा?

अभिगृहीत वाहन, गौवंश और गौमांस के व्ययन, अभिरक्षा आदि के संबंध में आदेश नहीं करेगा।

धारा 11(6) के अनुसार यह प्रतिबंध कब लागू होता है?

कलेक्टर से संसूचना प्राप्त होने के पश्चात।

धारा 11(5) का ‘परन्तुक’ और धारा 11(6) कब अंतःस्थापित हुआ?

मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध (संशोधन) अधिनियम, 2024 द्वारा अंतःस्थापित

धारा 11-क का विषय क्या है?

अधिहरण के आदेश के विरुद्ध अपील।

(Appeal against order of confiscation)

धारा 11-क(1) के अनुसार अपील कौन कर सकता है?

अधिहरण आदेश से व्यथित व्यक्ति।

धारा 11-क(1) के अनुसार अपील किसके समक्ष की जाती है?

संभागीय आयुक्त (अपील प्राधिकारी) के समक्ष।

धारा 11-क(1) के अनुसार अपील की समय-सीमा क्या है?

आदेश की तारीख से तीस दिन के भीतर।

धारा 11-क(1) के अनुसार वैकल्पिक समय-सीमा क्या है?

आदेश की जानकारी होने की तारीख से तीस दिन के भीतर।

धारा 11-क(1) के अनुसार अपील किस रूप में की जाएगी?

लिखित में।

धारा 11-क(1) के अनुसार अपील के साथ क्या संलग्न होगा?

अधिहरण आदेश की प्रमाणित प्रति।

धारा 11-क(1) के अनुसार फीस कैसे देय होगी?

विहित रीति में।

धारा 11-क(1) के स्पष्टीकरण का विषय क्या है?

तीस दिन की अवधि की गणना।

धारा 11-क(1) के स्पष्टीकरण के अनुसार कौन-सा समय अपवर्जित होगा?

प्रमाणित प्रति प्राप्त करने में लगा समय।

धारा 11-क(2) के अनुसार अपील प्राधिकारी क्या करेगा?

अभिग्रहण अधिकारी और प्रभावित व्यक्तियों को सूचना देगा।

धारा 11-क(2) के अनुसार अपील प्राधिकारी क्या मंगाएगा?

मामले के अभिलेख।

धारा 11-क(2) के परन्तु के अनुसार औपचारिक सूचना कब आवश्यक नहीं है?

जब सुनवाई की तारीख अन्य रीति से सूचित की जा सके।

धारा 11-क(3) के अनुसार अपील प्राधिकारी क्या करेगा?

जिला कलेक्टर को लिखित सूचना भेजेगा।

धारा 11-क(4) के अनुसार अपील प्राधिकारी क्या कर सकता है?

अभिरक्षा या व्ययन हेतु अंतरिम आदेश पारित कर सकता है।

धारा 11-क(5) के अनुसार अपील प्राधिकारी क्या अनुमति दे सकता है?

पक्षकारों को विधि व्यवसायियों द्वारा प्रतिनिधित्व की अनुमति।

धारा 11-क(6) के अनुसार अपील प्राधिकारी क्या करेगा?

अभिलेख का परिशीलन और पक्षकारों की सुनवाई।

धारा 11-क(6) के अनुसार पक्षकार कैसे उपस्थित हो सकते हैं?

स्वयं, अभिकर्ता या विधि व्यवसायी के माध्यम से।

धारा 11-क(6) के अनुसार अंतिम आदेश क्या हो सकता है?

अधिहरण आदेश की पुष्टि, उलटना या उपांतरण।

धारा 11-क(6) के परन्तु के अनुसार अतिरिक्त जांच कौन कर सकता है?

अपील प्राधिकारी या जिला कलेक्टर।

धारा 11-क(6) के परन्तु के अनुसार क्या अनुमति दी जा सकती है?

शपथ-पत्र दाखिल करने और साक्ष्य देने की।

धारा 11-क(7) के अनुसार अपील प्राधिकारी क्या कर सकता है?

आवश्यक पारिणामिक आदेश पारित कर सकता है।

धारा 11-क(8) के अनुसार आदेश की प्रति किसे भेजी जाएगी?

जिला कलेक्टर को।

धारा 11-क(8) के अनुसार प्रेषण का उद्देश्य क्या है?

अनुपालन या समुचित आदेश पारित करने के लिए।

धारा 11-ख का विषय क्या है?

अपील प्राधिकारी के आदेश के विरुद्ध सेशन न्यायालय के समक्ष पुनरीक्षण।

(Revision before Court of sessions against order of Appellate Authority)

धारा 11-ख के अनुसार पुनरीक्षण का अधिकार किसे है?

अपील का कोई भी पक्षकार।

धारा 11-ख के अनुसार पुनरीक्षण कब किया जा सकता है?

जब पक्षकार अपील प्राधिकारी के अंतिम या पारिणामिक आदेश से व्यथित हो।

धारा 11-ख के अनुसार पुनरीक्षण किसके समक्ष किया जाता है?

सेशन न्यायालय के समक्ष।

धारा 11-ख के अनुसार कौन-सा सेशन न्यायालय सक्षम है?

जिसके सेशन खण्ड में अपील प्राधिकारी का मुख्यालय स्थित हो।

धारा 11-ख के अनुसार पुनरीक्षण की समय-सीमा क्या है?

आदेश के विरुद्ध तीस दिन के भीतर।

धारा 11-ख के स्पष्टीकरण के अनुसार कौन-सा समय अपवर्जित होगा?

प्रमाणित प्रति प्राप्त करने में लगा समय।

धारा 12 का विषय क्या है?

पुनर्वास।

(Rehabilitation)

धारा 12 के अनुसार पुनर्वास के लिए शक्ति किसे है?

राज्य सरकार को।

धारा 12 के अनुसार पुनर्वास किनके लिए होगा?

ऐसे व्यक्ति जो इससे प्रत्यक्षतः प्रभावित हों।

धारा 12 के अनुसार पुनर्वास किस माध्यम से किया जाएगा?

नियम बनाकर।

धारा 12-क का विषय क्या है?

अभिगृहीत गौवंश का पोषण।

(Maintenance of seized cow progeny)

धारा 12-क के अनुसार पोषण का दायित्व किसका है?

राज्य सरकार का।

धारा 12-क के अनुसार पोषण किनके लिए है?

अभिगृहीत गौवंश के लिए।

धारा 12-क के अनुसार पोषण हेतु क्या किया जाएगा?

खिलाने-पिलाने और पोषण के लिए आवश्यक कार्रवाई।

धारा 13 का विषय क्या है?

सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण।

(Protection of action taken in good faith)

धारा 13 के अनुसार संरक्षण किस प्रकार की कार्रवाई पर लागू होता है?

मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 या इसके अधीन नियमों के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या आशयित कार्रवाई।

धारा 13 के अनुसार किसके विरुद्ध कार्यवाही नहीं होगी?

किसी व्यक्ति के विरुद्ध।

धारा 13 के अनुसार कौन-सी कार्यवाहियां नहीं होंगी?

वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाहियां।

धारा 13-क का विषय क्या है?

सबूत का भार अभियुक्त पर होना।

(Burden of proof on accused)

धारा 13-क के अनुसार सबूत का भार किस पर है?

अभियुक्त पर।

धारा 13-क के अनुसार यह प्रावधान कब लागू होता है?

जब व्यक्ति मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 के अधीन अपराध के लिए अभियोजित हो।

धारा 13-क के अनुसार अभियोजन की शर्त क्या है?

अभियोजन द्वारा प्रथमदृष्ट्या साक्ष्य प्रस्तुत किया गया हो।

धारा 13-क के अनुसार अभियुक्त को क्या सिद्ध करना होगा?

उसने कोई अपराध कारित नहीं किया है।

धारा 14 का विषय क्या है?

अधिकारियों का लोक सेवक माना जाना।

(Officers exercising powers under this act deemed to be public servant)

धारा 14 के अनुसार किन्हें लोक सेवक समझा जाएगा?

सक्षम प्राधिकारी, पशु चिकित्सा अधिकारी तथा अन्य व्यक्ति जो इस अधिनियम के अधीन शक्तियों का प्रयोग करते हैं।

धारा 14 के अनुसार लोक सेवक की परिभाषा किसके अंतर्गत है?

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 21/ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 2(28) के अंतर्गत।

धारा 14 के अनुसार कौन-से अधिकारी शामिल हैं?

सभी सक्षम प्राधिकारी, पशु चिकित्सा अधिकारी और अन्य अधिकृत व्यक्ति।

धारा 15 का विषय क्या है?

अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव।

(Act to have overriding effect)

धारा 15 के अनुसार इस अधिनियम का प्रभाव किस पर प्रधान होगा?

अन्य विधियों या लिखतों में असंगत प्रावधानों पर।

धारा 15 के अनुसार यह प्रभाव कब लागू होगा?

जब अन्य विधि या लिखत में असंगति हो।

धारा 15 के अनुसार यह प्रावधान किसके होते हुए भी लागू है?

तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि या लिखत के होते हुए भी।

धारा 16 का विषय क्या है?

कठिनाई दूर करने की शक्ति।

(Power to remove difficulty)

धारा 16 के अनुसार यह शक्ति किसे है?

राज्य सरकार को।

धारा 16 के अनुसार शक्ति कब प्रयोग की जा सकती है?

जब अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कठिनाई उत्पन्न हो।

धारा 16 के अनुसार उपबंध या निदेश किस शर्त के अधीन होंगे?

वे अधिनियम के उपबंधों से असंगत हों।

धारा 16 के अनुसार उपबंध या निदेश का उद्देश्य क्या है?

कठिनाई को दूर करना।

धारा 17 का विषय क्या है?

नियम बनाने की शक्ति।

(Power to make rules)

धारा 17(1) के अनुसार नियम बनाने की शक्ति किसे है?

राज्य सरकार को।

धारा 17(1) के अनुसार नियम कब प्रभावी होंगे?

प्रकाशन की तारीख से या विनिर्दिष्ट अन्य तारीख से।

धारा 17(1) के अनुसार नियम किस उद्देश्य से बनाए जाते हैं?

अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए।

धारा 17(2) का विषय क्या है?

नियमों का विधानसभा के समक्ष रखा जाना।

धारा 17(2) के अनुसार नियम कब रखे जाएंगे?

प्रकाशित होने के पश्चात यथासंभव शीघ्र।

धारा 17(2) के अनुसार नियम कहाँ रखे जाएंगे?

विधानसभा के पटल पर।

धारा 18 का विषय क्या है?

निरसन तथा व्यावृत्ति।

(Repeal and saving)

धारा 18 के अनुसार किसका निरसन किया गया है?

मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अध्यादेश, 2004

धारा 18 के अनुसार निरसित अध्यादेश का क्रमांक क्या है?

क्रमांक 1 सन् 2004

धारा 18(1) के अनुसार निरसन किसे प्रभावित नहीं करेगा?

पूर्व प्रवर्तन या उसके अधीन की गई या भुगती गई किसी बात को।

धारा 18(2) के अनुसार निरसन किसे प्रभावित नहीं करेगा?

अपराध के संबंध में उपगत शास्ति, जप्ती या दण्ड को।

धारा 18(3)के अनुसार निरसन किसे प्रभावित नहीं करेगा?

शास्ति, जप्ती या दण्ड के संबंध में अन्वेषण, विधिक कार्यवाही या उपचार को।

धारा 18 के अनुसार अन्वेषण या कार्यवाही का क्या प्रभाव है?

उन्हें संस्थित, चालू या प्रवर्तित किया जा सकेगा।

धारा 18 के अनुसार शास्ति, जप्ती या दण्ड

कैसे अधिरोपित होंगे?

मानो यह अधिनियम पारित ही नहीं हुआ है।

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