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अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 (THE BANNING OF UNREGULATED DEPOSIT SCHEMES ACT, 2019) |
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(2019 का अधिनियम संख्यांक 21) (ACT NO. 21 OF 2019) |
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इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम क्या है? |
अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019। |
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अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 का अधिनियम संख्यांक क्या है? |
2019 का अधिनियम संख्यांक 21। |
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अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 को राष्ट्रपति की स्वीकृति/अधिनियमन की तिथि क्या है? |
31 जुलाई, 2019। |
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अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 का विषय क्या है? |
कारबार के सामान्य अनुक्रम में लिए गए निक्षेपों से भिन्न अविनियमित निक्षेप स्कीमों पर पाबंदी हेतु व्यापक तंत्र का उपबंध करना। |
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अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 का एक उद्देश्य क्या है? |
निक्षेपकर्ताओं के हितों की संरक्षा करना। |
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अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 किस वर्ष में संसद् द्वारा अधिनियमित किया गया? |
भारत गणराज्य के सत्तरवें वर्ष में। |
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अध्याय 1 (CHAPTER-I) |
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प्रारंभिक (PRELIMINARY) |
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अध्याय 1 का विषय क्या है? |
प्रारंभिक (preliminary) |
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धारा 1 का विषय क्या है? |
संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ। (Short title, extent and commencement) |
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अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 का विस्तार कहाँ तक है? |
जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय संपूर्ण भारत पर। |
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अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 कब से प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा? |
21 फरवरी, 2019 को। |
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धारा 2 का विषय क्या है?
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परिभाषाएं (Definitions) |
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धारा 2(1) का विषय क्या है? |
"समुचित सरकार" (appropriate Government) की परिभाषा। |
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धारा 2(1) के अंतर्गत "समुचित सरकार" से क्या तात्पर्य है? |
संबंधित मामलों के अनुसार केन्द्रीय सरकार, संघ राज्यक्षेत्र की सरकार या राज्य सरकार। |
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धारा 2(1) के अंतर्गत विधान-मंडल रहित संघ राज्यक्षेत्र से संबंधित मामलों में "समुचित सरकार" कौन है? |
केन्द्रीय सरकार। |
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धारा 2(1) के अंतर्गत पुडुचेरी संघ राज्यक्षेत्र से संबंधित मामलों में "समुचित सरकार" कौन है? |
उस संघ राज्यक्षेत्र की सरकार। |
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धारा 2(1) के अंतर्गत दिल्ली संघ राज्यक्षेत्र से संबंधित मामलों में "समुचित सरकार" कौन है? |
उस संघ राज्यक्षेत्र की सरकार। |
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धारा 2(1) के अंतर्गत राज्य से संबंधित मामलों में "समुचित सरकार" कौन है? |
राज्य सरकार। |
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धारा 2(2) का विषय क्या है? |
"कंपनी" (company) की परिभाषा। |
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धारा 2(2) के अंतर्गत "कंपनी" का क्या अर्थ होगा? |
वही अर्थ, जो कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2 के खंड (20) में उसका है। |
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धारा 2(3) का विषय क्या है? |
"सक्षम प्राधिकारी" (Competent Authority) की परिभाषा। |
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धारा 2(3) के अंतर्गत "सक्षम प्राधिकारी" से क्या अभिप्रेत है? |
धारा 7 के अधीन समुचित सरकार द्वारा नियुक्त प्राधिकारी। |
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धारा 2(4) का विषय क्या है? |
"निक्षेप" (deposit) की परिभाषा। |
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धारा 2(4) के अंतर्गत "निक्षेप" से क्या अभिप्रेत है? |
निक्षेप लेने वाले द्वारा ब्याज, बोनस, लाभ या अन्य लाभ सहित या बिना, वापस करने के वचन के साथ अग्रिम, ऋण या अन्य रूप में प्राप्त धनराशि। |
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धारा 2(4) के अंतर्गत क्या "निक्षेप" में वापस करने के वचन के साथ प्राप्त धन शामिल है? |
हाँ, चाहे नकद, वस्तु रूप में या विनिर्दिष्ट सेवा के रूप में हो। |
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धारा 2(4) के अंतर्गत क्या "निक्षेप" में विनिर्दिष्ट अवधि के पश्चात् या अन्यथा लौटाई जाने वाली रकम शामिल है? |
हाँ। |
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धारा 2(4) के अंतर्गत क्या अनुसूचित बैंक, सहकारी बैंक या अन्य बैंककारी कंपनी से ऋण के रूप में प्राप्त रकम "निक्षेप" है? |
नहीं। |
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धारा 2(4) के अंतर्गत बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 5 में परिभाषित बैंक से ऋण रूप में प्राप्त रकम का क्या दर्जा है? |
वह "निक्षेप" नहीं है। |
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धारा 2(4) के अंतर्गत क्या लोक वित्तीय संस्थाओं, रजिस्ट्रीकृत गैर-बैंककारी वित्तीय कंपनी, क्षेत्रीय वित्तीय संस्थाओं या बीमा कंपनियों से ऋण/वित्तीय सहायता के रूप में प्राप्त रकम "निक्षेप" है? |
नहीं। |
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धारा 2(4) के अंतर्गत भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45झ(च) में परिभाषित और RBI में रजिस्ट्रीकृत गैर-बैंककारी वित्तीय कंपनी से प्राप्त रकम का क्या दर्जा है? |
वह "निक्षेप" नहीं है। |
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धारा 2(4) के अंतर्गत क्या माल की पूर्ति, भाड़े पर देने या सेवाएं प्रदान करने हेतु प्राप्त संदाय, अग्रिम या भागतः संदाय "निक्षेप" है? |
नहीं, यदि वह वास्तविक कारबार संबंधी हो। |
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धारा 2(4) के अंतर्गत माल या सेवाओं के वास्तव में उपलब्ध न कराने की दशा में प्रतिसंदेय संदाय का क्या स्वरूप है? |
वह कारबार संबंधी अपवर्जन के अंतर्गत आता है। |
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धारा 2(4) के अंतर्गत क्या स्थावर संपत्ति के प्रतिफल संबंधी करार/ठहराव के अधीन प्राप्त अग्रिम "निक्षेप" है? |
नहीं, यदि वह करार के अनुसार संपत्ति के विरुद्ध समायोजित किया जाता है। |
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धारा 2(4) के अंतर्गत क्या माल की पूर्ति या सेवाएं प्रदान करने की संविदा के पालन हेतु जमा प्रतिभूति या डीलरशिप "निक्षेप" है? |
नहीं। |
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धारा 2(4) के अंतर्गत क्या दीर्घकालीन परियोजनाओं के अधीन पूंजी माल की पूर्ति हेतु अग्रिम "निक्षेप" है? |
नहीं। |
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धारा 2(4) के अंतर्गत मद (i) से (iv) के अधीन प्राप्त रकम कब "निक्षेप" समझी जाएगी? |
प्रतिदेय होने की तारीख से पन्द्रह दिन की समाप्ति पर। |
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धारा 2(4) के अंतर्गत यदि आवश्यक अनुज्ञा या अनुमोदन प्राप्त न होने के कारण रकम प्रतिदेय हो जाए तो उसका क्या दर्जा होगा? |
उसे "निक्षेप" समझा जाएगा। |
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धारा 2(4) के अंतर्गत स्पष्टीकरण के अनुसार कंपनी की बाबत "निक्षेप" का अर्थ क्या होगा? |
वही, जो कंपनी अधिनियम, 2013 में है। |
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धारा 2(4) के अंतर्गत RBI अधिनियम, 1934 के अधीन रजिस्ट्रीकृत गैर-बैंककारी वित्तीय कंपनी की बाबत "निक्षेप" का अर्थ क्या होगा? |
वही, जो RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45झ(खख) में है। |
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धारा 2(4) के अंतर्गत "भागीदार" और "फर्म" पदों के अर्थ किस अधिनियम से लिए जाएंगे? |
भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 से। |
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धारा 2(4) के अंतर्गत सीमित दायित्व भागीदारी की बाबत "भागीदार" का अर्थ किस प्रावधान से लिया जाएगा? |
सीमित दायित्व भागीदारी अधिनियम, 2008 की धारा 2(1)(थ) से। |
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धारा 2(4) के अंतर्गत "नातेदार" पद का अर्थ किस अधिनियम से लिया जाएगा? |
कंपनी अधिनियम, 2013 से। |
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धारा 2(5) का विषय क्या है? |
"निक्षेपकर्ता" (depositor) की परिभाषा। |
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धारा 2(5) के अंतर्गत "निक्षेपकर्ता" से क्या अभिप्रेत है? |
ऐसा व्यक्ति, जो अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के अधीन कोई निक्षेप करता है। |
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धारा 2(6) का विषय क्या है? |
"निक्षेप लेने वाले" (deposit taker) की परिभाषा। |
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धारा 2(6) के अंतर्गत "निक्षेप लेने वाले" से क्या अभिप्रेत है? |
निक्षेप प्राप्त करने वाला या उसकी याचना करने वाला- कोई भी व्यष्टि या व्यष्टियों का समूह; कोई स्वत्वधारी समुत्थान; कोई भागीदारी फर्म (चाहे रजिस्ट्रीकृत हो या नहीं); सीमित दायित्व भागीदारी अधिनियम, 2008 के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोई सीमित 2009 का 6 दायित्व भागीदारी; कोई कंपनी; व्यक्तियों का कोई संगम; कोई न्यास (जो भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 के उपबंधों के अधीन शासित कोई प्राइवेट न्यास है या कोई पब्लिक न्यास है, चाहे रजिस्ट्रीकृत हो या नहीं);(1882 का 2) कोई सहकारी सोसाइटी या कोई बहुराज्यिक सहकारी सोसाइटी; या कोई अन्य ठहराव, किसी भी प्रकृति का हो, अभिप्रेत है, |
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धारा 2(6) के अंतर्गत "निक्षेप लेने वाले" में शामिल नहीं है? |
संसद् या किसी राज्य विधान-मंडल के किसी अधिनियम के अधीन निगमित कोई निगम; बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 में यथापरिभाषित कोई बैंककारी कंपनी, कोई तत्स्थानी नया बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, कोई समनुषंगी बैंक, कोई क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, कोई सहकारी बैंक या कोई बहुराज्यिक सहकारी बैंक; (1949 का 10) |
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धारा 2(7) का विषय क्या है? |
"अभिहित न्यायालय" (Designated Court) की परिभाषा। |
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धारा 2(7) के अंतर्गत "अभिहित न्यायालय" से क्या अभिप्रेत है? |
धारा 8 के अधीन समुचित सरकार द्वारा गठित अभिहित न्यायालय। |
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धारा 2(8) का विषय क्या है? |
"बीमाकर्ता" (insurer) की परिभाषा। |
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धारा 2(8) के अंतर्गत "बीमाकर्ता" का क्या अर्थ होगा? |
वही अर्थ, जो बीमा अधिनियम, 1938 की धारा 2 के खंड (9) में है। |
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धारा 2(8) के अंतर्गत "बीमाकर्ता" की परिभाषा किस अधिनियम की किस धारा से ली गई है? |
बीमा अधिनियम, 1938 की धारा 2 के खंड (9) से। |
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धारा 2(9) का विषय क्या है? |
"अधिसूचना" (notification) की परिभाषा। |
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धारा 2(9) के अंतर्गत "अधिसूचना" से क्या अभिप्रेत है? |
राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना। |
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धारा 2(10) का विषय क्या है? |
"व्यक्ति" (person) की परिभाषा। |
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धारा 2(10) के अंतर्गत "व्यक्ति" के अंतर्गत कौन-कौन आते हैं? |
व्यष्टि, हिन्दू अविभक्त कुटुंब, कंपनी, न्यास, भागीदारी फर्म, सीमित दायित्व भागीदारी, व्यक्तियों का संगम, सहकारी सोसाइटी तथा कृत्रिम विधिक व्यक्ति। |
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धारा 2(11) का विषय क्या है? |
"विहित" (prescribed) की परिभाषा। |
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धारा 2(11) के अंतर्गत "विहित" से क्या अभिप्रेत है? |
अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के अधीन केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा विहित। |
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धारा 2(11) के अंतर्गत "विहित" शब्द में नियम किसके द्वारा बनाए गए होने चाहिए? |
यथास्थिति, केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा। |
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धारा 2(12) का विषय क्या है? |
"संपत्ति" (property) की परिभाषा। |
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धारा 2(12) के अंतर्गत "संपत्ति" से क्या अभिप्रेत है? |
हर भांति की कोई भी संपत्ति या आस्ति। |
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धारा 2(12) के अंतर्गत "संपत्ति" में शामिल है- |
जड़ हो या चेतन, जंगम हो या स्थावर, मूर्त या अमूर्त और इसके अंतर्गत ऐसी संपत्ति या आस्ति, जहां-कहीं भी स्थित हो, में हक या हित दर्शाने वाले विलेख और लिखित भी हैं |
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धारा 2(13) का विषय क्या है? |
"लोक वित्तीय संस्था" (public financial institution) की परिभाषा। |
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धारा 2(13) के अंतर्गत "लोक वित्तीय संस्था" का क्या अर्थ होगा? |
वही अर्थ, जो कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2 के खंड (72) में है। |
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धारा 2(14) का विषय क्या है? |
"विनियमित निक्षेप स्कीम" (Regulated Deposit Scheme) की परिभाषा। |
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धारा 2(14) के अंतर्गत "विनियमित निक्षेप स्कीम" से क्या अभिप्रेत है? |
पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट स्कीम। |
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धारा 2(15) का विषय क्या है? |
"विनियामक" (Regulator) की परिभाषा। |
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धारा 2(15) के अंतर्गत "विनियामक" से क्या अभिप्रेत है? |
पहली अनुसूची के स्तंभ (2) में विनिर्दिष्ट विनियामक। |
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धारा 2(16) का विषय क्या है? |
"अनुसूची" (Schedule) की परिभाषा। |
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धारा 2(17) का विषय क्या है? |
"अविनियमित निक्षेप स्कीम" (Unregulated Deposit Scheme) की परिभाषा। |
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धारा 2(17) के अंतर्गत “अविनियमित निक्षेप स्कीम” से क्या अभिप्रेत है? |
ऐसी स्कीम या ठहराव, जिसके अधीन निक्षेप लेने वाले द्वारा कारबार के माध्यम से निक्षेप स्वीकार या उनकी याचना की जाती है और जो विनियमित निक्षेप स्कीम नहीं है। |
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धारा 2(17) के अंतर्गत “अविनियमित निक्षेप स्कीम” में निक्षेप किसके द्वारा स्वीकार या याचना किए जाते हैं? |
निक्षेप लेने वाले द्वारा। |
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धारा 2(17) के अंतर्गत क्या कारबार के माध्यम से निक्षेप स्वीकार करने वाली प्रत्येक स्कीम “अविनियमित निक्षेप स्कीम” है? |
नहीं, यदि वह पहली अनुसूची के स्तंभ (3) के अधीन विनिर्दिष्ट विनियमित निक्षेप स्कीम है। |
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धारा 2(17) के अंतर्गत “अविनियमित निक्षेप स्कीम” को किस आधार पर विनियमित निक्षेप स्कीम से पृथक किया जाता है? |
पहली अनुसूची के स्तंभ (3) के अधीन विनिर्दिष्ट न होने के आधार पर। |
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अध्याय 2 (CHAPTER-II) |
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अविनियमित निक्षेप स्कीमों पर पाबंदी (BANNING OF UNREGULATED DEPOSIT SCHEMES) |
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अध्याय 2 का विषय क्या है? |
अविनियमित निक्षेप स्कीमों पर पाबंदी। (banning of unregulated deposit schemes) |
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धारा 3 का विषय क्या है? |
अविनियमित निक्षेप स्कीमों पर पाबंदी। (Banning of Unregulated Deposit Schemes) |
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धारा 3 के अंतर्गत अविनियमित निक्षेप स्कीमों पर पाबंदी कब से प्रभावी होगी? |
अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के प्रारंभ की तारीख से। |
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धारा 3 के अंतर्गत क्या कोई भी निक्षेप लेने वाला, किसी अविनियमित निक्षेप स्कीम के अनुसरण में निक्षेपों में भाग लेने या नामांकन करने या उसे स्वीकार करने की याचना करने वाला कोई भी विज्ञापन प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः प्रोन्नत कर सकता है? |
नहीं। |
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धारा 3(ख) के अधीन प्रतिबंधित विज्ञापन किससे संबंधित है? |
अविनियमित निक्षेप स्कीम के अनुसरण में निक्षेपों में भाग लेने, नामांकन करने या स्वीकार करने की याचना करने वाला विज्ञापन। |
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धारा 4 का विषय क्या है? |
विनियमित निक्षेप स्कीमों में कपटपूर्ण व्यतिक्रम। (Fraudulent default in Regulated Deposit Schemes) |
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धारा 4 के अंतर्गत क्या कोई निक्षेप लेने वाला विनियमित निक्षेप स्कीम के अनुसरण में निक्षेप स्वीकार करते समय कपटपूर्ण व्यतिक्रम कर सकता है? |
नहीं। |
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धारा 4 के अधीन कपटपूर्ण व्यतिक्रम किन मामलों में निषिद्ध है? |
निक्षेप की परिपक्वता पर प्रतिसंदाय या वापसी में अथवा वचन में दी गई विनिर्दिष्ट सेवा देने में। |
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धारा 5 का विषय क्या है? |
अविनियमित जमा स्कीमों के संबंध में सदोष उत्प्रेरण। (Wrongful inducement in relation to Unregulated Deposit Scheme) |
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धारा 5 के अंतर्गत क्या कोई व्यक्ति अविनियमित निक्षेप स्कीम में विनिधान करने हेतु मिथ्या, प्रवंचक या भ्रामक कथन कर सकता है? |
नहीं। |
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धारा 5 के अधीन प्रतिबंध किस पर लागू होता है? |
किसी भी व्यक्ति पर, चाहे किसी भी नाम से ज्ञात हो। |
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धारा 5 के अंतर्गत किस प्रयोजन हेतु मिथ्या, प्रवंचक या भ्रामक कथन करना निषिद्ध है? |
किसी अन्य व्यक्ति को अविनियमित निक्षेप स्कीम में विनिधान करने या उसका सदस्य अथवा सहभागी बनने के लिए उत्प्रेरित करने हेतु। |
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धारा 5 के अंतर्गत क्या कोई व्यक्ति जानते हुए ऐसा कथन, वचन या भविष्यवाणी कर सकता है जिसके सारवान् तथ्य मिथ्या, प्रवंचक या भ्रामक हों? |
नहीं। |
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धारा 5 के अंतर्गत धारा 5 के अधीन कौन-सा आचरण निषिद्ध है? |
जानते हुए मिथ्या, प्रवंचक या भ्रामक कथन, वचन या भविष्यवाणी करना। |
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धारा 5 के अंतर्गत क्या जानबूझकर कोई सारवान् तथ्य छिपाना धारा 5 के अधीन निषिद्ध है? |
हाँ। |
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धारा 5 में निषिद्ध कथन, वचन या भविष्यवाणी की विशेषता क्या है? |
उसके सारवान् तथ्य मिथ्या, प्रवंचक या भ्रामक हों। |
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धारा 5 के अंतर्गत अविनियमित निक्षेप स्कीम का सदस्य अथवा सहभागी बनने हेतु उत्प्रेरण के लिए क्या निषिद्ध है? |
मिथ्या, प्रवंचक या भ्रामक कथन करना या सारवान् तथ्य छिपाना। |
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धारा 6 का विषय क्या है? |
कतिपय स्कीम का अविनियमित निक्षेप स्कीम होना। (Certain scheme to be Unregulated Deposit Scheme) |
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धारा 6 के अंतर्गत किन स्कीमों को अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के अधीन अविनियमित निक्षेप स्कीम समझा जाएगा? |
इनामी चिट और धन परिचालन स्कीम (पाबंदी) अधिनियम, 1978 के अधीन पाबंद की गई इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम। |
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अध्याय 3 (CHAPTER-III) |
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प्राधिकारी (AUTHORITIES) |
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अध्याय 3 का विषय क्या है? |
प्राधिकारी। (authorities) |
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धारा 7 का विषय क्या है? |
सक्षम प्राधिकारी। (Competent Authority) |
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धारा 7(1) के अधीन सक्षम प्राधिकारी की नियुक्ति कौन करेगा? |
समुचित सरकार। |
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अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के प्रयोजनों के लिए सक्षम प्राधिकारी के रूप में किस स्तर के अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे? |
उस सरकार के सचिव की पंक्ति से अनिम्न एक या अधिक अधिकारी। |
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धारा 7(2) के अधीन सक्षम प्राधिकारी की सहायता हेतु अन्य अधिकारियों को कौन नियुक्त कर सकेगी? |
समुचित सरकार, अधिसूचना द्वारा। । |
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धारा 7(2) के अधीन नियुक्त अधिकारी कौन होंगे? |
ऐसे अधिकारी, जिन्हें समुचित सरकार ठीक समझे। |
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धारा 7(3) के अधीन सक्षम प्राधिकारी या नियुक्त अधिकारियों को विश्वास करने का कारण कब माना जाएगा? |
जब विहित सूचना और विशिष्टियों के आधार पर यह विश्वास हो कि निक्षेप लेने वाला धारा 3 के उल्लंघन में निक्षेपों की याचना कर रहा है। |
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धारा 7(3) के अधीन विश्वास करने के कारण का क्या किया जाएगा? |
उसे लेखबद्ध किया जाएगा। |
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धारा 7(3) के अधीन अनंतिम कुर्की कौन कर सकेगा? |
सक्षम प्राधिकारी या धारा 7(2) के अधीन नियुक्त अधिकारी। |
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धारा 7(3) के अधीन अनंतिम कुर्की किस माध्यम से की जाएगी? |
लिखित आदेश द्वारा। |
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धारा 7(3) के अधीन कुर्की कब से प्रभावी होगी? |
आदेश की तारीख से। |
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धारा 7(3) के अधीन कुर्की किस रीति में की जाएगी? |
ऐसी रीति में, जो विहित की जाए। |
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धारा 7(3) के अधीन किन वस्तुओं को अनंतिम रूप से कुर्क किया जा सकता है? |
निक्षेप लेने वाले द्वारा धारित निक्षेप तथा उसके नाम से या उसकी ओर से अन्य व्यक्ति के नाम से अर्जित धन या अन्य संपत्ति। |
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धारा 7(3) के अधीन क्या निक्षेप लेने वाले की ओर से अन्य व्यक्ति के नाम से अर्जित संपत्ति भी कुर्क की जा सकती है? |
हाँ। |
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धारा 7(4) के अधीन सक्षम प्राधिकारी को शक्तियां किसके समान प्राप्त होंगी? |
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अधीन सिविल न्यायालय के समान। |
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धारा 7(4) के अधीन सक्षम प्राधिकारी को प्रकटन और निरीक्षण की शक्ति होगी? |
हाँ। |
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धारा 7(4) के अधीन क्या सक्षम प्राधिकारी किसी व्यक्ति को हाजिर करा सकता है और उसकी शपथ पर परीक्षा कर सकता है? |
हाँ। |
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क्या रिपोर्ट करने वाली सत्ता के अधिकारी को भी धारा 7(4)(ख) के अधीन हाजिर कराया जा सकता है? |
हाँ। |
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धारा 7(4) के अधीन अभिलेखों को पेश करने के लिए किसे विवश किया जा सकता है? |
संबंधित व्यक्तियों को। |
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धारा 7(4) के अधीन क्या सक्षम प्राधिकारी शपथ-पत्रों पर साक्ष्य प्राप्त कर सकता है? |
हाँ। |
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धारा 7(4) के अधीन क्या सक्षम प्राधिकारी साक्षियों और दस्तावेजों की परीक्षा हेतु कमीशन निकाल सकता है? |
हाँ। |
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धारा 7(4)(च) के अधीन सक्षम प्राधिकारी को किन अन्य विषयों पर शक्ति होगी? |
ऐसे विषय, जो विहित किए जाएं। |
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धारा 7(5) के अधीन सक्षम प्राधिकारी को क्या शक्ति होगी? |
किसी व्यक्ति को समन करने की शक्ति। |
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धारा 7(5) के अधीन किस व्यक्ति को समन किया जा सकता है? |
जिसकी हाजिरी साक्ष्य देने या दस्तावेज पेश करने हेतु आवश्यक समझी जाए। |
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धारा 7(5) के अधीन समन किस प्रयोजन हेतु किया जा सकता है? |
अन्वेषण या कार्यवाही के दौरान साक्ष्य देने या दस्तावेज पेश करने हेतु। |
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धारा 7(6) के अधीन समन किए गए व्यक्तियों का क्या दायित्व है? |
स्वयं या प्राधिकृत अभिकर्ता के माध्यम से उपस्थित होना। |
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धारा 7(6) के अधीन क्या समन किए गए व्यक्ति प्राधिकृत अभिकर्ता के माध्यम से उपस्थित हो सकते हैं? |
हाँ, जैसा अधिकारी निदेश दे। |
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धारा 7(6) के अधीन समन किए गए व्यक्ति किस बात के लिए आबद्ध होंगे? |
सत्य कथन करने और अपेक्षित दस्तावेज पेश करने के लिए। |
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धारा 7(7) के अधीन धारा 7(4) और (5) की कार्यवाहियों का क्या स्वरूप होगा? |
न्यायिक कार्यवाही। |
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धारा 7(7) के अधीन कार्यवाहियां किन धाराओं के प्रयोजनार्थ न्यायिक कार्यवाही समझी जाएंगी? |
भारतीय दंड संहिता की धारा 193 और धारा 228 (भारतीय न्याय संहिता की धारा 229 और धारा 267) के प्रयोजनार्थ। |
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धारा 7(8) के अधीन अभिलेखों को कितनी अवधि तक परिबद्ध या प्रतिधारित किया जा सकता है? |
ऐसी अवधि तक, जो अधिकारी उचित समझे। |
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धारा 7(8) के अधीन अभिलेखों की परिबद्धता या प्रतिधारण किसके अध्यधीन होगी? |
केंद्रीय सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अध्यधीन। |
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क्या धारा 7(2) में निर्दिष्ट अधिकारी बिना कारण लेखबद्ध किए अभिलेख परिबद्ध कर सकता है? |
नहीं। |
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धारा 7(8) के प्रथम परंतु के अधीन अभिलेख परिबद्ध करने से पूर्व क्या आवश्यक है? |
परिबद्ध करने के कारणों को लेखबद्ध करना। |
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धारा 7(8)(ख) के अधीन तीन मास से अधिक प्रतिधारण के लिए क्या आवश्यक है? |
सक्षम प्राधिकारी का पूर्व अनुमोदन। |
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धारा 8 का विषय क्या है? |
अभिहित न्यायालय। (Designated Court) |
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धारा 8(1) के अधीन अभिहित न्यायालय का गठन कौन कर सकेगी? |
समुचित सरकार। |
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धारा 8 के अधीन अभिहित न्यायालय का गठन किसकी सहमति से किया जाएगा? |
संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति की सहमति से। |
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धारा 8 के अधीन अभिहित न्यायालय का गठन किस माध्यम से किया जाएगा? |
अधिसूचना द्वारा। |
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धारा 8(1) के अधीन अभिहित न्यायालय किनके लिए गठित किए जा सकते हैं? |
ऐसे क्षेत्र या क्षेत्रों के लिए अथवा ऐसे मामले या मामलों के लिए, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं। |
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धारा 8 के अधीन क्या समुचित सरकार एक या अधिक अभिहित न्यायालयों का गठन कर सकती है? |
हाँ। |
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धारा 8 के अधीन अभिहित न्यायालयों के रूप में गठित न्यायालयों के पीठासीन न्यायाधीश की न्यूनतम पंक्ति क्या होगी? |
जिला और सेशन न्यायाधीश या अपर जिला और सेशन न्यायाधीश की पंक्ति से अनिम्न। |
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धारा 8 के अधीन अभिहित न्यायालय का पीठासीन न्यायाधीश किस स्तर का होगा? |
जिला और सेशन न्यायाधीश या अपर जिला और सेशन न्यायाधीश की पंक्ति से अनिम्न न्यायाधीश। |
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धारा 8 के अधीन क्या अभिहित न्यायालय से भिन्न किसी न्यायालय को अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के लागू विषयों पर अधिकारिता होगी? |
नहीं। |
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धारा 8(2) के अधीन किन विषयों पर अन्य न्यायालय की अधिकारिता नहीं होगी? |
ऐसे विषयों पर, जिनको अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के उपबंध लागू होते हैं। |
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धारा 8 के अधीन क्या अभिहित न्यायालय अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के अधीन अपराध के विचारण के दौरान अन्य अपराध का भी विचारण कर सकता है? |
हाँ। |
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धारा 8 के अधीन अभिहित न्यायालय किन अन्य अपराधों का विचारण कर सकता है? |
ऐसे अपराधों का, जिनके लिए अभियुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023) के अधीन उसी विचारण में आरोपित किया जा सके। |
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धारा 8(3) के अधीन अतिरिक्त विचारण की शक्ति कब प्रयोग की जा सकती है? |
अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के अधीन किसी अपराध का विचारण करते समय। |
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अध्याय 4 (CHAPTER IV) |
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निक्षेप लेने वालों पर सूचना (INFORMATION ON DEPOSIT TAKERS) |
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अध्याय 4 का विषय क्या है? |
निक्षेप लेने वालों पर सूचना। (information on deposit takers) |
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धारा 9 का विषय क्या है? |
केंद्रीय डाटाबेस। (Central database) |
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धारा 9(1) के अधीन केंद्रीय सरकार क्या कर सकेगी? |
किसी प्राधिकारी को पदाभिहित कर सकेगी। |
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धारा 9(1) के अधीन पदाभिहित प्राधिकारी कैसा हो सकता है? |
चाहे विद्यमान हो या जिसका गठन किया जाना हो। |
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धारा 9(1) के अधीन पदाभिहित प्राधिकारी का कार्य क्या होगा? |
भारत में प्रचालन कर रहे निक्षेप लेने वालों पर सूचना हेतु आनलाइन डाटाबेस सृजित, अनुरक्षित और प्रचालित करना। |
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धारा 9(1) के अधीन केंद्रीय डाटाबेस किसके संबंध में सूचना के लिए होगा? |
भारत में प्रचालन कर रहे निक्षेप लेने वालों पर। |
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धारा 9(1) के अधीन केंद्रीय डाटाबेस को कौन सृजित, अनुरक्षित और प्रचालित करेगा? |
धारा 9(1) के अधीन पदाभिहित प्राधिकारी। |
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धारा 9(2) के अधीन पदाभिहित प्राधिकारी किससे सूचना साझा करने की अपेक्षा कर सकेगा? |
किसी विनियामक या सक्षम प्राधिकारी से। |
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धारा 9(2) के अधीन कौन-सी सूचना साझा करने की अपेक्षा की जा सकती है? |
निक्षेप लेने वालों पर ऐसी सूचना, जो विहित की जाए। |
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क्या धारा 9(2) के अधीन सूचना साझा करने की अपेक्षा विहित सूचना तक सीमित है? |
हाँ। |
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धारा 10 का विषय क्या है? |
निक्षेप लेने वाले के द्वारा कारबार की सूचना। (Information of business by deposit taker) |
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धारा 10(1) के अधीन सूचना देने का दायित्व किसका है? |
प्रत्येक निक्षेप लेने वाले का। |
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धारा 10(1) किन निक्षेप लेने वालों पर लागू होती है? |
जो अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के प्रारंभ पर या उसके पश्चात् अपना कारबार प्रारंभ करता है या चलाता है। |
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धारा 10(1) के अधीन निक्षेप लेने वाला किसके बारे में सूचना देगा? |
अपने कारबार के बारे में। |
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धारा 10(1) के अधीन सूचना किसे दी जाएगी? |
धारा 9(1) में निर्दिष्ट प्राधिकारी को। |
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धारा 10(1) के अधीन सूचना किस रूप और रीति में दी जाएगी? |
ऐसे रूप और रीति में, जो विहित की जाए। |
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धारा 10(1) के अधीन सूचना किस समय के भीतर दी जाएगी? |
ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए। |
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धारा 10(2) के अधीन सक्षम प्राधिकारी कब निदेश दे सकेगा? |
जब उसके पास यह विश्वास करने का कारण हो कि अविनियमित निक्षेप स्कीम के अनुसरण में निक्षेपों की याचना या स्वीकृति की जा रही है। |
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धारा 10(2) के अधीन सक्षम प्राधिकारी किसे निदेश दे सकेगा? |
किसी निक्षेप लेने वाले को। |
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धारा 10(2) के अधीन सक्षम प्राधिकारी क्या मांग सकता है? |
प्राप्त निक्षेपों के संबंध में या संबद्ध विवरण, सूचना या विशिष्टियां। |
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धारा 10(2) के अधीन मांगी जाने वाली विवरण, सूचना या विशिष्टियां कैसी होंगी? |
जो सक्षम प्राधिकारी आवश्यक समझे। |
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धारा 10(2) के स्पष्टीकरण के अनुसार धारा 10(1) के अधीन सूचना की अपेक्षा किन पर लागू होती है? |
धारा 2(4) में परिभाषित निक्षेपों को स्वीकार करने या याचना करने वाले निक्षेप लेने वालों पर। |
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धारा 10(2) के अधीन क्या धारा 10(1) की सूचना अपेक्षा धारा 2(4) में परिभाषित निक्षेप स्वीकार करने वाले निक्षेप लेने वालों पर लागू होती है? |
हाँ। |
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धारा 10(2) के अधीन क्या धारा 10(1) की सूचना अपेक्षा निक्षेपों की याचना करने वाले निक्षेप लेने वालों पर भी लागू होती है? |
हाँ। |
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धारा 10(2) के स्पष्टीकरण के अनुसार कंपनी पर धारा 10(1) की सूचना अपेक्षा कब लागू होगी? |
जब कंपनी कंपनी अधिनियम, 2013 के अध्याय 5 के अधीन निक्षेप स्वीकार करती है। |
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धारा 10(2) के अधीन क्या कंपनी अधिनियम, 2013 के अध्याय 5 के अधीन निक्षेप स्वीकार करने वाली कंपनी पर धारा 10(1) लागू होती है? |
हाँ। |
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धारा 11 का विषय क्या है? |
सूचना का साझा किया जाना। (Information to be shared) |
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धारा 11(1) के अधीन सक्षम प्राधिकारी क्या साझा करेगा? |
धारा 29 के अधीन प्राप्त समस्त सूचना। |
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धारा 11(1) के अधीन सक्षम प्राधिकारी सूचना किसके साथ साझा करेगा? |
केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो और धारा 9 के अधीन पदाभिहित प्राधिकारी के साथ। |
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धारा 11(1) के अधीन धारा 9 का पदाभिहित प्राधिकारी किसके द्वारा पदाभिहित किया जाता है? |
केन्द्रीय सरकार द्वारा। |
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धारा 11(2) के अधीन सूचना या दस्तावेज साझा करने का दायित्व किन पर है? |
समुचित सरकार, विनियामक, आय-कर प्राधिकारी तथा अन्य अन्वेषण अभिकरण। |
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धारा 11(2) के अधीन कौन-सा अन्य अन्वेषण अभिकरण सूचना साझा करेगा? |
जो अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के अधीन पुलिस या केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा अन्वेषण किए गए अपराध की बाबत सूचना या दस्तावेज रखता हो। |
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धारा 11(2) के अधीन सूचना या दस्तावेज किसके साथ साझा किए जाएंगे? |
पुलिस अथवा केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो के साथ। |
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धारा 11(2) के अधीन क्या आय-कर प्राधिकारी को सूचना या दस्तावेज साझा करने होंगे? |
हाँ। |
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धारा 11(2) के अधीन क्या विनियामक को सूचना या दस्तावेज साझा करने होंगे? |
हाँ। |
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धारा 11(3) के अधीन सूचना देने का दायित्व किसका है? |
बैंककारी कंपनी, तत्स्थानी नए बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, समनुषंगी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, सहकारी बैंक या बहुराज्यिक सहकारी बैंक के प्रधान अधिकारी का। |
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धारा 11(3) के अधीन प्रधान अधिकारी को सूचना देने का दायित्व कब उत्पन्न होता है? |
जब उसके पास यह विश्वास करने का कारण हो कि कोई मुवक्किल निक्षेप लेने वाला है और अधिनियम के उल्लंघन में कार्य कर रहा है। |
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धारा 11(3) के अधीन प्रधान अधिकारी किसकी सूचना देगा? |
ऐसे मुवक्किल की, जो निक्षेप लेने वाला है और अधिनियम के उल्लंघन में कार्य कर रहा है। |
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धारा 11(3) के अधीन सूचना किसे दी जाएगी? |
सक्षम प्राधिकारी को। |
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धारा 11(3) के अधीन सूचना कब दी जाएगी? |
तुरंत। |
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धारा 11(3) के अधीन क्या बैंककारी कंपनी के प्रधान अधिकारी को अधिनियम के उल्लंघन में कार्यरत निक्षेप लेने वाले मुवक्किल की सूचना देनी होगी? |
हाँ। |
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धारा 11(3) के अधीन क्या भारतीय स्टेट बैंक के प्रधान अधिकारी को ऐसी सूचना तुरंत सक्षम प्राधिकारी को देनी होगी? |
हाँ। |
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धारा 11(3) के अधीन क्या सहकारी बैंक या बहुराज्यिक सहकारी बैंक के प्रधान अधिकारी पर भी धारा 11(3) लागू होती है? |
हाँ। |
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अध्याय 5 (CHAPTER-V) |
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निक्षेपकर्ताओं को वापस करना (RESTITUTION TO DEPOSITORS) |
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अध्याय 5 का विषय क्या है? |
निक्षेपकर्ताओं को वापस करना। (restitution to depositors) |
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धारा 12 का विषय क्या है? |
निक्षेपकर्ताओं के दावों की पूर्विकता। (Priority of depositors’ claim) |
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धारा 12 के अधीन निक्षेपकर्ताओं को देय रकम के संदाय को किस पर पूर्विकता दी जाएगी? |
अन्य सभी ऋणों और समुचित सरकार अथवा स्थानीय प्राधिकारी को संदेय सभी राजस्वों, करों, उपकरों तथा अन्य दरों पर। |
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धारा 12 के अधीन पूर्विकता किस रकम के संदाय को दी जाएगी? |
निक्षेप लेने वाले से निक्षेपकर्ताओं को देय किसी भी रकम के संदाय को। |
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धारा 12 के अधीन क्या निक्षेपकर्ताओं के दावों को अन्य सभी ऋणों पर पूर्विकता प्राप्त होगी? |
हाँ। |
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धारा 12 के अधीन क्या निक्षेपकर्ताओं के दावों को समुचित सरकार अथवा स्थानीय प्राधिकारी को संदेय राजस्वों, करों, उपकरों तथा अन्य दरों पर पूर्विकता प्राप्त होगी? |
हाँ। |
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धारा 12 के अधीन पूर्विकता का नियम किन अधिनियमों के उपबंधों के अधीन अपवादित है? |
वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन अधिनियम, 2002 और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016। |
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धारा 12 के अधीन क्या SARFAESI अधिनियम, 2002 या दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 में उपबंधित स्थिति में धारा 12 की पूर्विकता सीमित हो सकती है? |
हाँ। |
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धारा 13 का विषय क्या है? |
कुर्की को अधिमान। (Precedence of attachment) |
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धारा 13(1) के अधीन सक्षम प्राधिकारी की अनंतिम कुर्की को किस पर अधिमानता और पूर्विकता दी जाएगी? |
अन्य ऋणों, राजस्वों, करों, उपकरों तथा अन्य दरों के प्रतिसंदाय हेतु की गई अन्य कुर्कियों पर। |
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धारा 13(1) के अधीन अनंतिम कुर्की को अधिमानता किस सीमा तक दी जाएगी? |
निक्षेपकर्ताओं के दावों की सीमा तक। |
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धारा 13(1) के अधीन अनंतिम कुर्की के आदेश को किसकी कुर्की पर पूर्विकता प्राप्त होगी? |
किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा संपत्ति कुर्क करने हेतु की गई अन्य कुर्की पर। |
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धारा 13(1) के अधीन पूर्विकता का नियम किन अधिनियमों के अधीन अपवादित है? |
वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन अधिनियम, 2002 और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016। |
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क्या सक्षम प्राधिकारी की अनंतिम कुर्की को समुचित सरकार अथवा स्थानीय प्राधिकारी को संदेय देयों से संबंधित कुर्कियों पर भी अधिमानता प्राप्त होगी? |
हाँ। |
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धारा 13(2)(क) के अधीन कुर्की कब तक जारी रहेगी? |
जब तक अभिहित न्यायालय धारा 15(3) या 15(5) के अधीन आदेश पारित न कर दे। |
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धारा 13(2)(ख) के अधीन कुर्क किया गया धन या संपत्ति किसमें निहित होगी? |
सक्षम प्राधिकारी में। |
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धारा 13(2)(ख) के अधीन किनका कुर्क किया गया धन या संपत्ति सक्षम प्राधिकारी में निहित होगी? |
निक्षेप लेने वाले और आदेश में उल्लिखित व्यक्तियों का। |
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धारा 13(2)(ख) के अधीन कुर्क की गई संपत्ति कितनी अवधि तक सक्षम प्राधिकारी में निहित रहेगी? |
अभिहित न्यायालय के अग्रिम आदेश तक। |
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धारा 13(3) के अधीन सक्षम प्राधिकारी किस प्रयोजन हेतु खाता खोलेगा? |
अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के अधीन वसूल किए गए धन को जमा करने या व्यौहार करने हेतु। |
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धारा 13(3) के अधीन खाता कहाँ खोला जाएगा? |
किसी अनुसूचित बैंक में। |
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धारा 13(3) के अधीन खोले गए खाते का उपयोग किसके अधीन होगा? |
अभिहित न्यायालय के अनुदेशों के अधीन। |
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क्या धारा 13(3) के अधीन खाते का उपयोग अभिहित न्यायालय के अनुदेशों के बिना किया जा सकता है? |
नहीं। |
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धारा 13(4) के अधीन सक्षम प्राधिकारी कुर्क की गई संपत्ति या धन का व्ययन या संक्रामण किसके अनुसार करेगा? |
धारा 15(3) या 15(5) के अधीन अभिहित न्यायालय के आदेश के अनुसार। |
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धारा 13(4) के अधीन क्या सक्षम प्राधिकारी कुर्क की गई संपत्ति या धन का व्ययन अभिहित न्यायालय के आदेश के बिना कर सकता है? |
नहीं। |
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धारा 13(5) के अधीन क्या सक्षम प्राधिकारी विनश्वर मदों या आस्तियों के तुरंत विक्रय का आदेश दे सकता है? |
हाँ, यदि वह समीचीन समझता है। |
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धारा 13(5) के अधीन तुरंत विक्रय किन वस्तुओं का किया जा सकता है? |
विनश्वर मदों या आस्तियों का। |
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धारा 13(5) के अधीन विक्रय के आगमों का उपयोग कैसे किया जाएगा? |
उसी रीति में, जो अन्य संपत्ति के लिए उपबंधित है। |
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धारा 14 का विषय क्या है? |
संपत्ति की कुर्की और विक्रय की पुष्टि के लिए आवेदन। (Application for confirmation of attachment and sale of property) |
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धारा 14(1) के अधीन आवेदन कौन करेगा? |
सक्षम प्राधिकारी। |
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धारा 14(1) के अधीन आवेदन किसके समक्ष किया जाएगा? |
अभिहित न्यायालय के समक्ष। |
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धारा 14(1) के अधीन आवेदन किस प्रयोजन के लिए किया जाएगा? |
अनंतिम कुर्की को आत्यंतिक करने तथा कुर्क संपत्ति के विक्रय की अनुज्ञा के लिए। |
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धारा 14(1) के अधीन आवेदन कब किया जाएगा? |
अनंतिम कुर्की के आदेश की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर। |
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धारा 14(1) के अधीन तीस दिन की अवधि अधिकतम कितनी बढ़ाई जा सकती है? |
साठ दिन तक। |
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धारा 14(1) के अधीन अवधि बढ़ाने के लिए क्या आवश्यक है? |
कारणों का लेखबद्ध किया जाना। |
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धारा 14(1) के अधीन विक्रय की अनुज्ञा किस प्रकार के विक्रय के लिए मांगी जाएगी? |
लोक नीलामी द्वारा या यदि आवश्यक हो, तो प्राइवेट विक्रय द्वारा। |
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धारा 14(1) के अधीन आवेदन किन विशिष्टियों के साथ किया जाएगा? |
ऐसी विशिष्टियों के साथ, जो विहित की जाएं। |
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क्या धारा 14(1) के अधीन कुर्क संपत्ति का विक्रय लोक नीलामी द्वारा किया जा सकता है? |
हाँ। |
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क्या धारा 14(1) के अधीन आवश्यक होने पर प्राइवेट विक्रय की अनुज्ञा ली जा सकती है? |
हाँ। |
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धारा 14(2) कब लागू होती है? |
जब धन या संपत्ति किसी अन्य राज्य या संघ राज्यक्षेत्र में अभिहित न्यायालय द्वारा मंजूर अनुज्ञा पर कुर्क की गई हो। |
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धारा 14(2) के अधीन कुर्की की पुष्टि के लिए आवेदन कहाँ फाइल किया जाएगा? |
उसी अभिहित न्यायालय में, जिसने अनुज्ञा मंजूर की है। |
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क्या अन्य राज्य या संघ राज्यक्षेत्र में की गई कुर्की की पुष्टि हेतु आवेदन उसी न्यायालय में फाइल होगा? |
हाँ। |
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धारा 15 का विषय क्या है? |
अभिहित न्यायालय द्वारा कुर्की की पुष्टि। (Confirmation of attachment by Designated Court) |
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धारा 15(1) के अधीन धारा 14 के आवेदन की प्राप्ति पर अभिहित न्यायालय क्या करेगा? |
नोटिस जारी करेगा। |
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धारा 15(1)(क) के अधीन नोटिस किसे जारी किया जाएगा? |
निक्षेप लेने वाले को। |
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धारा 15(1)(ख) के अधीन नोटिस किसे जारी किया जाएगा? |
ऐसे अन्य व्यक्ति को, जिसकी संपत्ति धारा 14 के अधीन कुर्क की गई है। |
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धारा 15(1) के अधीन नोटिस का उद्देश्य क्या है? |
हेतुक दर्शित करना कि कुर्की आदेश को क्यों न आत्यंतिक किया जाए और संपत्ति का विक्रय क्यों न किया जाए। |
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धारा 15(1) के अधीन हेतुक दर्शित करने की अवधि क्या है? |
नोटिस जारी किए जाने की तारीख से तीस दिन के भीतर। |
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धारा 15(1) के अधीन किन बातों पर हेतुक दर्शित करना होता है? |
कुर्की आदेश को आत्यंतिक करने और कुर्क संपत्ति के विक्रय के संबंध में। |
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धारा 15(2) के अधीन अभिहित न्यायालय किन व्यक्तियों को नोटिस जारी करेगा? |
संपत्ति में हित या हक का दावा करने वाले या ऐसा होने का प्रतिनिधित्व करने वाले अन्य सभी व्यक्तियों को। |
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धारा 15(2) के अधीन नोटिस किस प्रयोजन हेतु जारी किया जाएगा? |
संपत्ति की कुर्की पर आक्षेप करने हेतु। |
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धारा 15(2) के अधीन ऐसे व्यक्तियों को कब उपस्थित होने के लिए नोटिस दिया जाएगा? |
उसी तारीख को। |
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धारा 15(3) के अधीन अभिहित न्यायालय किस प्रक्रिया का अंगीकरण करेगा? |
ऐसी प्रक्रिया का, जो विहित की जाए। |
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धारा 15(3)(क) के अधीन अभिहित न्यायालय कौन-सा आदेश पारित कर सकता है? |
कुर्की के अनंतिम आदेश को आत्यंतिक करने वाला आदेश। |
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धारा 15(3)(ख) के अधीन अभिहित न्यायालय कौन-सा आदेश पारित कर सकता है? |
संपत्ति के किसी भाग को कुर्की से मुक्त करके उसमें फेरफार करने वाला आदेश। |
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धारा 15(3)(ग) के अधीन अभिहित न्यायालय कौन-सा आदेश पारित कर सकता है? |
कुर्की के अनंतिम आदेश को रद्द करने वाला आदेश। |
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धारा 15(3) के अधीन किन आदेशों की दशा में सक्षम प्राधिकारी को विक्रय का निदेश दिया जाएगा? |
खंड (क) या खंड (ख) के अधीन आदेश की दशा में। |
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धारा 15(3) के अधीन सक्षम प्राधिकारी को किस प्रकार के विक्रय का निदेश दिया जाएगा? |
लोक नीलामी द्वारा अथवा यदि आवश्यक हो, तो प्राइवेट विक्रय द्वारा। |
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धारा 15(3) के अधीन सक्षम प्राधिकारी को विक्रय के अतिरिक्त क्या करने का निदेश दिया जाएगा? |
विक्रय आगमों को वसूल करने का। |
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धारा 15(4) के अधीन अभिहित न्यायालय कब संपत्ति को कुर्की से मुक्त नहीं करेगा? |
जब तक उसका समाधान न हो जाए कि वैधानिक शर्तें पूर्ण हैं। |
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धारा 15(4)(क) के अधीन अभिहित न्यायालय को किस बात का समाधान होना आवश्यक है? |
निक्षेप लेने वाले या धारा 15 (1) में निर्दिष्ट व्यक्ति का संपत्ति में हित होना। |
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धारा 15(4)(ख) के अधीन अभिहित न्यायालय को किस बात का समाधान होना आवश्यक है? |
निक्षेपकर्ताओं के प्रतिसंदाय हेतु पर्याप्त रकम या संपत्ति बची रहना। |
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धारा 15(4) के अधीन क्या पर्याप्त रकम या संपत्ति शेष न रहने पर संपत्ति को कुर्की से मुक्त किया जा सकता है? |
नहीं। |
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धारा 15(5) के अधीन अभिहित न्यायालय क्या करेगा? |
ऐसे आदेश या निदेश जारी करेगा, जो निक्षेपकर्ताओं के बीच साम्यापूर्ण वितरण हेतु आवश्यक हों। |
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धारा 15(5) के अधीन साम्यापूर्ण वितरण किस धन का किया जाएगा? |
कुर्क किए गए या विक्रय से वसूल किए गए धन का। |
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धारा 15(6) के अधीन अभिहित न्यायालय कार्यवाहियां कब तक पूरी करने का प्रयास करेगा? |
आवेदन की प्राप्ति की तारीख से एक सौ अस्सी दिन के भीतर। |
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धारा 15(6) के अधीन एक सौ अस्सी दिन की अवधि किस तारीख से गिनी जाएगी? |
धारा 15(1) में निर्दिष्ट आवेदन की प्राप्ति की तारीख से। |
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धारा 16 का विषय क्या है? |
असद्भाविक अंतरितियों की संपत्ति की कुर्की। (Attachment of property of mala fide transferees) |
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धारा 16(1) के अधीन अभिहित न्यायालय कब कार्यवाही कर सकेगा? |
जब उसका समाधान हो जाए कि यह विश्वास करने का युक्तियुक्त कारण है कि निक्षेप लेने वाले ने संपत्ति का असद्भावपूर्वक और अनुरूप प्रतिफल के बिना अंतरण किया है। |
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धारा 16(1) के अधीन किस प्रकार के अंतरण पर कार्यवाही होगी? |
सद्भावपूर्वक अंतरण से भिन्न और अनुरूप प्रतिफल लिए बिना किए गए अंतरण पर। |
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धारा 16(1) के अधीन अभिहित न्यायालय किसे नोटिस जारी कर सकेगा? |
ऐसी संपत्ति के किसी अंतरिती को। |
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क्या धारा 16(1) के अधीन ऐसा अंतरिती भी नोटिस प्राप्त कर सकता है जिसने संपत्ति प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त न की हो? |
हाँ। |
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धारा 16(1) के अधीन नोटिस में अंतरिती से क्या अपेक्षा की जाएगी? |
विनिर्दिष्ट तारीख को उपस्थित होने और हेतुक दर्शित करने की। |
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धारा 16(1) के अधीन अंतरिती को किस बात पर हेतुक दर्शित करना होगा? |
उसकी उतनी संपत्ति, जो अंतरित संपत्ति के उचित मूल्य के बराबर है, कुर्क क्यों न की जाए। |
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धारा 16(1) के अधीन कुर्की की सीमा क्या होगी? |
अंतरित संपत्ति के उचित मूल्य के बराबर संपत्ति तक। |
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धारा 16(2) के अधीन अभिहित न्यायालय कुर्की का आदेश कब करेगा? |
जब अंतरिती उपस्थित न हो और हेतुक दर्शित न करे, या न्यायालय का समाधान हो जाए कि अंतरण सद्भावपूर्वक और अनुरूप प्रतिफल के लिए नहीं था। |
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धारा 16(2) के अधीन यदि अंतरिती विनिर्दिष्ट तारीख को उपस्थित नहीं होता और हेतुक दर्शित नहीं करता, तो क्या होगा? |
अभिहित न्यायालय उसकी संपत्ति की कुर्की का आदेश करेगा। |
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धारा 16(2) के अधीन अभिहित न्यायालय को किस बात का समाधान होना आवश्यक है? |
कि संपत्ति का अंतरण सद्भावपूर्वक नहीं था और अनुरूप प्रतिफल के लिए नहीं किया गया था। |
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धारा 16(2) के अधीन किस संपत्ति की कुर्की का आदेश किया जाएगा? |
अंतरिती की उतनी संपत्ति की, जो न्यायालय की राय में अंतरित संपत्ति के उचित मूल्य के बराबर है। |
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धारा 16(2) के अधीन कुर्की की मात्रा किस आधार पर निर्धारित होगी? |
अंतरित संपत्ति के उचित मूल्य के आधार पर। |
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धारा 17 का विषय क्या है? |
कुर्की के बदले संदाय। (Payment in lieu of attachment) |
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धारा 17(1) के अधीन आवेदन कौन कर सकता है? |
धारा 15(1) में निर्दिष्ट निक्षेप लेने वाला या व्यक्ति अथवा धारा 16 में निर्दिष्ट अंतरिती। |
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धारा 17(1) के अधीन आवेदन कब किया जा सकता है? |
कुर्की की पुष्टि से पहले किसी भी समय। |
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धारा 17(1) के अधीन आवेदन किसके समक्ष किया जाएगा? |
अभिहित न्यायालय के समक्ष। |
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धारा 17(1) के अधीन आवेदन किस प्रयोजन हेतु किया जाएगा? |
कुर्की के बदले का उचित मूल्य जमा करने की अनुज्ञा के लिए। |
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क्या धारा 17(1) के अधीन वह व्यक्ति आवेदन कर सकता है जिसकी संपत्ति कुर्क की ही जाने वाली है? |
हाँ। |
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क्या धारा 17(1) के अधीन वह व्यक्ति आवेदन कर सकता है जिसकी संपत्ति अनंतिम रूप से कुर्क कर दी गई है? |
हाँ। |
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धारा 17(1) के अधीन कुर्की के बदले क्या जमा करने की अनुज्ञा मांगी जा सकती है? |
कुर्की के बदले का उचित मूल्य। |
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धारा 17(2) के अधीन अभिहित न्यायालय कब लागत के मद्दे राशि के संदाय का आदेश दे सकेगा? |
धारा 17(1) के अधीन निक्षेप करने की अनुज्ञा देते समय। |
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धारा 17(2) के अधीन लागत के मद्दे राशि का आदेश किसके विरुद्ध दिया जा सकता है? |
निक्षेप लेने वाले, व्यक्ति या अंतरिती के विरुद्ध। |
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धारा 17(2) के अधीन लागत के मद्दे कितनी राशि का संदाय करने का आदेश दिया जा सकता है? |
ऐसी राशि का, जो लागू हो। |
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धारा 18 का विषय क्या है? |
अभिहित न्यायालय की शक्तियां। (Powers of Designated Court) |
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धारा 18(1)(क) के अधीन अभिहित न्यायालय को कौन-सी शक्ति प्राप्त है? |
निक्षेप लेने वाले के विभिन्न ऋणियों से देय शोध्यों के कथन का अनुमोदन करने की शक्ति। |
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धारा 18(1)(ख) के अधीन अभिहित न्यायालय को कौन-सी शक्ति प्राप्त है? |
आस्तियों का मूल्य निर्धारित करने तथा निक्षेपकर्ताओं और उनके शोध्यों की सूची को अंतिम रूप देने की शक्ति। |
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धारा 18(1)(ख) के अधीन किसकी आस्तियों का मूल्य निर्धारित किया जाएगा? |
निक्षेप लेने वाले की आस्तियों का। |
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धारा 18(1)(ख) के अधीन किस सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा? |
निक्षेपकर्ताओं और उनके अपने-अपने शोध्यों की सूची को। |
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धारा 18(1)(ग) के अधीन अभिहित न्यायालय को कौन-सी शक्ति प्राप्त है? |
सक्षम प्राधिकारी को आस्तियों का कब्जा लेने, विक्रय, अंतरण, वसूली और विक्रय आगम जमा करने का निदेश देने की शक्ति। |
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धारा 18(1)(ग) के अधीन सक्षम प्राधिकारी को किसकी आस्तियों का कब्जा लेने का निदेश दिया जा सकता है? |
निक्षेप लेने वाले से संबंधित या उसके नियंत्रणाधीन सभी आस्तियों का। |
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धारा 18(1)(ग) के अधीन कुर्क की गई आस्तियों का विक्रय किस प्रकार किया जा सकता है? |
लोक नीलामी द्वारा या प्राइवेट विक्रय द्वारा। |
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धारा 18(1)(ग) के अधीन विक्रय की पद्धति किस आधार पर निर्धारित होगी? |
आस्तियों की प्रकृति पर निर्भर करते हुए। |
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धारा 18(1)(ग) के अधीन विक्रय आगम कहाँ जमा किए जाएंगे? |
सक्षम प्राधिकारी के बैंक खाते में। |
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धारा 18(1)(घ) के अधीन अभिहित न्यायालय को कौन-सी शक्ति प्राप्त है? |
आस्तियों को कब्जे में लेने और वसूल करने हेतु आवश्यक व्यय का अनुमोदन करने की शक्ति। |
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धारा 18(1)(घ) के अधीन आवश्यक व्यय किसके द्वारा उपगत किया जाएगा? |
सक्षम प्राधिकारी द्वारा। |
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धारा 18(1)(ङ) के अधीन अभिहित न्यायालय को कौन-सी शक्ति प्राप्त है? |
निक्षेपकर्ताओं को पूर्ण या आनुपतिक संदाय का आदेश पारित करने की शक्ति। |
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धारा 18(1)(ङ) के अधीन पूर्ण संदाय का आदेश कौन करेगा? |
अभिहित न्यायालय। |
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धारा 18(1)(ङ) के अधीन आनुपतिक संदाय का आदेश कब किया जाएगा? |
जब वसूल किया गया धन संपूर्ण निक्षेप दायित्व को पूरा करने के लिए पर्याप्त न हो। |
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धारा 18(1)(च) के अधीन अभिहित न्यायालय को कौन-सी शक्ति प्राप्त है? |
सदोष अभिलाभ या बचाई गई हानि के बराबर रकम वापस करने का निदेश देने की शक्ति। |
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धारा 18(1)(च) के अधीन निदेश किसे दिया जा सकता है? |
ऐसे व्यक्ति को जिसने उल्लंघनकारी संव्यवहार या क्रियाकलाप से लाभ लिया हो या हानि होने से बचा हो। |
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धारा 18(1)(च) के अधीन वापस कराई जाने वाली रकम कितनी होगी? |
सदोष अभिलाभ या बचाई गई हानि की रकम के बराबर। |
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धारा 18(1)(छ) के अधीन अभिहित न्यायालय को कौन-सी शक्ति प्राप्त है? |
ऐसा आदेश पारित करने की शक्ति, जो आस्तियों की वसूली, प्रतिसंदाय या आनुषंगिक विषयों हेतु उचित हो। |
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धारा 18(2) के अधीन आवेदन कौन कर सकता है? |
कुर्क की गई और सक्षम प्राधिकारी में निहित संपत्ति में हितबद्ध व्यक्ति। |
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धारा 18(2) के अधीन आदेश पारित करने से पूर्व किसे सुनवाई का अवसर दिया जाएगा? |
सक्षम प्राधिकारी को। |
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धारा 18(2) के अधीन अभिहित न्यायालय किस प्रकार का आदेश कर सकेगा? |
जो न्यायोचित और युक्तियुक्त समझे। |
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धारा 18(2)(क) के अधीन अभिहित न्यायालय किस प्रयोजन हेतु राशि उपलब्ध करा सकता है? |
आवेदक और उसके कुटुंब के भरण-पोषण तथा बचाव व्ययों हेतु। |
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धारा 18(2)(क) के अधीन बचाव व्ययों हेतु राशि कब उपलब्ध कराई जा सकती है? |
जब आवेदक के विरुद्ध अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के अधीन दांडिक कार्यवाहियां आरंभ की गई हों। |
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धारा 18(2)(क) के अधीन राशि किस संपत्ति से उपलब्ध कराई जा सकती है? |
कुर्क की गई और सक्षम प्राधिकारी में निहित संपत्ति से जिसमें आवेदक हित का दावा करता है। |
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धारा 18(2)(ख) के अधीन अभिहित न्यायालय क्या कर सकेगा? |
कुर्की से प्रभावित कारबार के हित का यथासाध्य सुरक्षोपाय। |
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क्या धारा 18 के स्पष्टीकरण के अनुसार धारा 18 में "निक्षेप लेने वाले" के अंतर्गत कौन सम्मिलित हैं? |
निदेशक, प्रवर्तक, प्रबंधक, सदस्य या अन्य व्यक्ति जिसकी संपत्ति कुर्क की गई है। |
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क्या धारा 18 के स्पष्टीकरण में "निक्षेप लेने वाले" में स्थापन का निदेशक सम्मिलित है? |
हाँ। |
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क्या धारा 18 के स्पष्टीकरण में "निक्षेप लेने वाले" में प्रवर्तक, प्रबंधक या सदस्य सम्मिलित हैं? |
हाँ। |
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क्या धारा 18 के स्पष्टीकरण में ऐसा अन्य व्यक्ति सम्मिलित है जिसकी संपत्ति अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के अधीन कुर्क की गई है? |
हाँ। |
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धारा 19 का विषय क्या है? |
उच्च न्यायालय को अपील। (Appeal to High Court) |
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धारा 19 के अधीन अपील कौन कर सकता है? |
कोई भी व्यक्ति, जिसके अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी भी है। |
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धारा 19 के अधीन अपील कब की जा सकती है? |
जब व्यक्ति अभिहित न्यायालय के अंतिम आदेश से व्यथित हो। |
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धारा 19 के अधीन किस आदेश के विरुद्ध अपील की जा सकती है? |
अध्याय 5 के अधीन अभिहित न्यायालय के अंतिम आदेश के विरुद्ध। |
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धारा 19 के अधीन अपील किस न्यायालय को की जाएगी? |
उच्च न्यायालय को। |
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धारा 19 के अधीन अपील की समय-सीमा क्या है? |
आदेश की तारीख से साठ दिन के भीतर। |
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क्या सक्षम प्राधिकारी धारा 19 के अधीन अपील कर सकता है? |
हाँ। |
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धारा 19 के परंतुक के अधीन क्या उच्च न्यायालय साठ दिन की अवधि के पश्चात् भी अपील ग्रहण कर सकता है? |
हाँ। |
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धारा 19 के परंतुक के अधीन विलंबित अपील कब ग्रहण की जा सकती है? |
जब उच्च न्यायालय का समाधान हो जाए कि पर्याप्त कारणों से समय पर अपील नहीं की जा सकी। |
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धारा 19 के परंतुक के अधीन विलंब-क्षमा हेतु क्या आवश्यक है? |
अपीलार्थी पर्याप्त कारणों से समय पर अपील करने से रोका गया हो। |
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धारा 19 के स्पष्टीकरण के अनुसार "उच्च न्यायालय" से क्या अभिप्रेत है? |
उस राज्य या संघ राज्यक्षेत्र का उच्च न्यायालय, जहां अभिहित न्यायालय स्थित है। |
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धारा 19 के स्पष्टीकरण के अनुसार उच्च न्यायालय का निर्धारण किस आधार पर होगा? |
अभिहित न्यायालय के स्थित राज्य या संघ राज्यक्षेत्र के आधार पर। |
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धारा 20 का विषय क्या है? |
उच्चतम न्यायालय की मामलों को अंतरित करने की शक्ति। (Power of Supreme Court to transfer cases) |
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धारा 20(1) के अधीन मामलों को अंतरित करने की शक्ति किसे प्राप्त है? |
उच्चतम न्यायालय को। |
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धारा 20(1) के अधीन उच्चतम न्यायालय कब शक्ति का प्रयोग कर सकेगा? |
जब उसे यह प्रतीत कराया जाए कि धारा 30 में निर्दिष्ट प्रकृति की किसी निक्षेप स्कीम या स्कीमों में कोई दोष है। |
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धारा 20(1) के अधीन दोष किस प्रकार की स्कीम में होना चाहिए? |
धारा 30 में निर्दिष्ट प्रकृति की निक्षेप स्कीम या निक्षेप स्कीमों में। |
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धारा 20(1) के अधीन उच्चतम न्यायालय क्या निदेश दे सकेगा? |
किसी विशिष्ट मामले को एक अभिहित न्यायालय से दूसरे अभिहित न्यायालय को अंतरित करने का। |
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धारा 20(1) के अधीन मामला किसके बीच अंतरित किया जा सकता है? |
एक अभिहित न्यायालय से दूसरे अभिहित न्यायालय को। |
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धारा 20(1) के अधीन अंतरित करने का निदेश किस माध्यम से दिया जाएगा? |
आदेश द्वारा। |
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धारा 20(2) के अधीन उच्चतम न्यायालय किनके आवेदन पर ही कार्रवाई कर सकेगा? |
सक्षम प्राधिकारी या किसी हितबद्ध पक्षकार के आवेदन पर। |
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क्या उच्चतम न्यायालय स्वप्रेरणा से धारा 20 के अधीन कार्रवाई कर सकता है? |
नहीं, केवल सक्षम प्राधिकारी या हितबद्ध पक्षकार के आवेदन पर। |
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धारा 20(2) के अधीन प्रत्येक आवेदन किससे समर्थित होगा? |
शपथपत्र द्वारा। |
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धारा 20(3) के अधीन प्रतिकर का आदेश कब दिया जा सकता है? |
जब आवेदन खारिज कर दिया जाए और उच्चतम न्यायालय की राय हो कि आवेदन तुच्छ या तंग करने वाला था। |
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धारा 20(3) के अधीन प्रतिकर किसे दिया जा सकता है? |
ऐसे व्यक्ति को, जिसने आवेदन का विरोध किया है। |
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धारा 20(3) के अधीन प्रतिकर का आदेश किसके विरुद्ध दिया जा सकता है? |
आवेदक के विरुद्ध। |
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धारा 20(3) के अधीन प्रतिकर की सीमा क्या है? |
पचास हजार रुपए से अनधिक। |
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धारा 20(3) के अधीन प्रतिकर की राशि कैसे निर्धारित होगी? |
ऐसी राशि, जो उच्चतम न्यायालय मामले की परिस्थितियों में उचित समझे। |
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अध्याय 6 (CHAPTER VI) |
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अपराध और दंड (OFFENCES AND PUNISHMENTS) |
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धारा 21 का विषय क्या है? |
धारा 3 का उल्लंघन करने के लिए दंड। (Punishment for contravention of section 3) |
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धारा 21(1) के अधीन कौन दंडनीय होगा? |
निक्षेप लेने वाला, जो धारा 3 के उल्लंघन में निक्षेप की याचना करता है। |
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धारा 21(1) के अधीन निक्षेप की याचना करने पर कितनी सजा है? |
एक वर्ष से कम नहीं होगी किंतु जो पांच वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो दो लाख रुपए से कम नहीं होगा किंतु जो दस लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा। |
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धारा 21(2) के अधीन कौन दंडनीय होगा? |
निक्षेप लेने वाला, जो धारा 3 के उल्लंघन में निक्षेप स्वीकार करता है। |
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धारा 21(2) के अधीन निक्षेप स्वीकार करने पर कितनी सजा है? |
दो वर्ष से कम नहीं होगी किंतु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो तीन लाख रुपए से कम नहीं होगा किंतु जो दस लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा। |
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धारा 21(3) के अधीन कौन दंडनीय होगा? |
निक्षेप लेने वाला, जो धारा 3 के उल्लंघन में निक्षेप स्वीकार करता है और प्रतिदाय या विनिर्दिष्ट सेवाओं के परिदान में कपटपूर्वक व्यक्तिक्रम करता है। |
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धारा 21(3) के अधीन कितनी सजा है? |
तीन वर्ष से कम नहीं होगी किंतु जो दस वर्ष तक की हो सकेगी और ऐसे जुर्माने से, जो पांच लाख रुपए से कम नहीं होगा किंतु जो अविनियमित निक्षेप स्कीम के ग्राहकों, सदस्यों या उसमें भाग लेने वाले व्यक्तियों से एकत्रित की गई सकल निधियों की रकम से दुगुनी रकम तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा। |
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धारा 21(3) के अधीन अधिकतम जुर्माना कितना हो सकता है? |
अविनियमित निक्षेप स्कीम के ग्राहकों, सदस्यों या भाग लेने वालों से एकत्रित सकल निधियों की रकम से दुगुनी रकम तक। |
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धारा 21(3) के अधीन कपटपूर्वक व्यक्तिक्रम किन मामलों में किया जाता है? |
निक्षेप के प्रतिदाय में या विनिर्दिष्ट सेवाओं के परिदान में। |
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धारा 21(3) के स्पष्टीकरण के अनुसार "कपटपूर्वक" पद का क्या अर्थ होगा? |
वही अर्थ, जो भारतीय दंड संहिता की धारा 25 (भारतीय न्याय संहिता की धारा 2(9) में है। |
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धारा 21 के स्पष्टीकरण के अनुसार "कपटपूर्वक" की परिभाषा किस विधि से ली गई है? |
भारतीय दंड संहिता की धारा 25 (भारतीय न्याय संहिता की धारा 2(9)) से। |
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धारा 21(3) के स्पष्टीकरण (ii) के अनुसार कौन-सा तथ्य कपटवचन के आशय को प्रदर्शित करने हेतु सुसंगत होगा? |
निक्षेप स्कीम के निबंधनों का पूर्ण रूप से असाध्य या अव्यवहार्य होना। |
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धारा 21(3) के अधीन क्या निक्षेप स्कीम के निबंधनों का पूर्ण रूप से असाध्य या अव्यवहार्य होना कपटवचन के आशय हेतु सुसंगत तथ्य है? |
हाँ। |
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धारा 22 का विषय क्या है? |
धारा 4 का उल्लंघन करने के लिए दंड। (Punishment for contravention of section 4) |
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धारा 22 के अधीन कौन दंडनीय होगा? |
निक्षेप लेने वाला, जो धारा 4 के उपबंधों का उल्लंघन करता है। |
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धारा 22 के अधीन कितनी सजा है? |
सात वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसे जुर्माने से, जो पांच लाख रुपए से कम नहीं होगा किंतु जो पच्चीस करोड़ रुपए का उक्त धारा में निर्दिष्ट कफ्टपूर्वक व्यतिक्रम के द्वारा प्राप्त किए गए अभिलाभों की रकम से तीन गुना, इनमें से जो भी अधिक हों, तक का हो सकेगा, या दोनों से दंडनीय होगा। |
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धारा 23 का विषय क्या है? |
धारा 5 का उल्लंघन करने के लिए दंड। (Punishment for contravention of section 5) |
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धारा 23 के अधीन कौन दंडनीय होगा? |
कोई व्यक्ति, जो धारा 5 के उपबंधों का उल्लंघन करता है। |
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धारा 23 के अधीन कितनी सजा है? |
एक वर्ष से कम नहीं होगी किंतु जो पांच वर्ष तक की हो सकेगी और ऐसे जुर्माने से, जो दस लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा। |
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धारा 24 का विषय क्या है? |
पुनः अपराध करने वालों के लिए दंड। (Punishment for repeat offenders) |
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धारा 24 के अधीन पुनः अपराध करने वाला कौन माना जाएगा? |
वह व्यक्ति, जो अध्याय 6 के अधीन दंडनीय अपराध के लिए पूर्व में सिद्धदोष ठहराया गया हो और तत्पश्चात् किसी अपराध के लिए पुनः सिद्धदोष ठहराया जाए। |
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धारा 24 के अधीन कौन-सा अपराध अपवर्जित है? |
धारा 26 के अधीन अपराध। |
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क्या धारा 26 के अधीन अपराध के लिए पूर्व सिद्धदोष ठहराया गया व्यक्ति धारा 24 के अंतर्गत आएगा? |
नहीं। |
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धारा 24 के अधीन कितनी सजा है? |
पांच वर्ष से कम नहीं होगी किंतु जो दस वर्ष तक की हो सकेगी और ऐसे जुर्माने से, जो दस लाख रुपए से कम नहीं होगा किंतु जो पचास करोड़ रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा। |
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धारा 25 का विषय क्या है? |
व्यष्टियों से भिन्न निक्षेप लेने वालों द्वारा अपराध। (Offences by deposit takers other than individuals) |
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धारा 25(1) कब लागू होती है? |
जब अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के अधीन कोई अपराध व्यष्टि से भिन्न किसी निक्षेप लेने वाले द्वारा किया गया हो। |
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धारा 25(1) के अधीन कौन दोषी समझा जाएगा? |
अपराध के समय कारबार संचालन का प्रभारी या उत्तरदायी व्यक्ति तथा निक्षेप लेने वाला। |
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धारा 25(1) के अधीन कौन-सा व्यक्ति दायी होगा? |
जो अपराध के समय निक्षेप लेने वाले के कारबार के संचालन का प्रभारी था या उसके लिए उत्तरदायी था। |
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क्या धारा 25(1) के अधीन निक्षेप लेने वाला भी दोषी समझा जाएगा? |
हाँ। |
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धारा 25(1) के अधीन दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध क्या किया जाएगा? |
उनके विरुद्ध तद्नुसार कार्यवाही की जाएगी और दंडित किया जाएगा। |
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धारा 25(2) के अधीन कोई व्यक्ति दंड से कब बच सकता है? |
जब वह सिद्ध कर दे कि अपराध उसकी जानकारी के बिना हुआ था या उसने अपराध रोकने हेतु सभी सम्यक् तत्परता बरती थी। |
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क्या धारा 25(2) के अधीन जानकारी के अभाव का सिद्ध होना बचाव है? |
हाँ। |
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क्या धारा 25(2) के अधीन सभी सम्यक् तत्परता बरतना बचाव है? |
हाँ। |
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धारा 25(2) के अधीन किसे दंड का दायी नहीं बनाया जाएगा? |
ऐसे व्यक्ति को, जो निर्दोषता या सम्यक् तत्परता सिद्ध कर दे। |
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धारा 25(3) के अधीन धारा 25(1) के होते हुए भी कौन-सी स्थिति में व्यक्तिगत दायित्व उत्पन्न होगा? |
जब अपराध सहमति, मोनानुकूलता या उपेक्षा से किया गया हो। |
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धारा 25(3)(क) के अधीन अपराध कब माना जाएगा? |
जब वह निक्षेप लेने वाले की सहमति या मोनानुकूलता के साथ किया गया हो। |
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धारा 25(3)(ख) के अधीन अपराध कब माना जाएगा? |
जब वह निदेशक, प्रबंधक, सचिव, संप्रवर्तक, भागीदार, कर्मचारी या अन्य अधिकारी की उपेक्षा के कारण हुआ हो। |
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धारा 25(3) के अधीन किन व्यक्तियों को दोषी समझा जाएगा? |
निदेशक, प्रबंधक, सचिव, संप्रवर्तक, भागीदार, कर्मचारी या अन्य अधिकारी। |
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क्या निदेशक की उपेक्षा के कारण हुआ अपराध धारा 25(3) के अधीन दायित्व उत्पन्न करता है? |
हाँ। |
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क्या प्रबंधक, सचिव, संप्रवर्तक, भागीदार, कर्मचारी या अन्य अधिकारी की उपेक्षा धारा 25(3) के अधीन प्रासंगिक है? |
हाँ। |
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धारा 25(3) के अधीन दोषी व्यक्ति के विरुद्ध क्या होगा? |
उसके विरुद्ध तद्नुसार कार्यवाही की जाएगी और दंडित किया जाएगा। |
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धारा 26 का विषय क्या है? |
धारा 10 का उल्लंघन करने के लिए दंड। (Punishment for contravention of section 10) |
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धारा 26 के अधीन कौन दंडनीय होगा? |
वह व्यक्ति, जो धारा 10(1) के अधीन अपेक्षित संसूचना देने या धारा 10(2) के अधीन अपेक्षित विवरण, सूचना या विशिष्टियां प्रस्तुत करने में असफल रहता है। |
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धारा 26 के अधीन दंडनीय असफलता क्या है? |
धारा 10(1) के अधीन संसूचना न देना या धारा 10(2) के अधीन अपेक्षित विवरण, सूचना या विशिष्टियां प्रस्तुत न करना। |
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धारा 26 के अधीन क्या धारा 10(1) के अधीन अपेक्षित संसूचना देने में असफलता दंडनीय है? |
हाँ। |
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धारा 26 के अधीन क्या धारा 10(2) के अधीन अपेक्षित विवरण, सूचना या विशिष्टियां प्रस्तुत करने में असफलता दंडनीय है? |
हाँ। |
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धारा 26 के अधीन जुर्माना कितना है? |
पांच लाख रुपए तक। |
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धारा 27 का विषय क्या है? |
अपराधों का संज्ञान। (Cognizance of offences) |
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धारा 27 के अधीन धारा 4 के अपराध का संज्ञान कौन लेगा? |
अभिहित न्यायालय। |
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धारा 27 के अधीन अभिहित न्यायालय धारा 4 के अधीन दंडनीय अपराध का संज्ञान कब ले सकेगा? |
विनियामक द्वारा परिवाद किए जाने पर। |
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धारा 27 के अधीन क्या विनियामक के परिवाद के बिना अभिहित न्यायालय धारा 4 के अपराध का संज्ञान ले सकता है? |
नहीं। |
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धारा 27 का प्रारंभिक उपबंध किसके बावजूद लागू होता है? |
धारा 4 में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी। |
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धारा 27 के अधीन परंतुक के अधीन धारा 4 और धारा 27 के उपबंध किन पर लागू नहीं होंगे? |
ऐसे निक्षेप लेने वाले पर, जो कोई कंपनी है। |
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धारा 27 के अधीन क्या कंपनी रूपी निक्षेप लेने वाले पर धारा 4 और धारा 27 लागू होते हैं? |
नहीं। |
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अध्याय-7 (CHAPTER-VII) |
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अन्वेषण, तलाशी और अभिग्रहण (INVESTIGATION, SEARCH AND SEIZURE) |
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अध्याय 7 का विषय क्या है? |
अन्वेषण, तलाशी और अभिग्रहण। (investigation, search and seizure) |
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धारा 28 का विषय क्या है? |
अपराधों का संज्ञेय और अजमानतीय होना। (Offences to be cognizable and non-bailable) |
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धारा 28 किसके बावजूद लागू होती है? |
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी। |
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धारा 28 के अधीन कौन-से अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होंगे? |
अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के अधीन दंडनीय प्रत्येक अपराध। |
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धारा 28 के अधीन कौन-से अपराध अपवाद हैं? |
धारा 22 और धारा 26 के अधीन अपराध। |
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धारा 28 के अधीन क्या धारा 22 के अधीन अपराध संज्ञेय और अजमानतीय हैं? |
नहीं। |
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धारा 28 के अधीन क्या धारा 26 के अधीन अपराध संज्ञेय और अजमानतीय हैं? |
नहीं। |
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धारा 28 के अधीन क्या धारा 22 और 26 के अतिरिक्त अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के सभी अपराध संज्ञेय और अजमानतीय हैं? |
हाँ। |
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धारा 29 का विषय क्या है? |
सक्षम प्राधिकारी को अपराधों की सूचना का दिया जाना। (Competent Authority to be informed of offences) |
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धारा 29 के अधीन सूचना देने का दायित्व किसका है? |
पुलिस अधिकारी का। |
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धारा 29 के अधीन पुलिस अधिकारी कब सूचना देगा? |
अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के अधीन किसी अपराध के होने के बारे में सूचना अभिलिखित किए जाने पर। |
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धारा 29 के अधीन सूचना किसे दी जाएगी? |
सक्षम प्राधिकारी को। |
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धारा 29 के अधीन क्या पुलिस अधिकारी को अपराध की सूचना अभिलिखित होने पर सक्षम प्राधिकारी को सूचना देनी होगी? |
हाँ। |
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धारा 29 के अधीन किस प्रकार के अपराध की सूचना दी जाएगी? |
अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के अधीन किसी अपराध की। |
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धारा 30 का विषय क्या है? |
केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा अपराधों का अन्वेषण। (Investigation of offences by Central Bureau of Investigation) |
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धारा 30(1) के अधीन सूचना की प्राप्ति किस माध्यम से हो सकती है? |
धारा 29 के अधीन या अन्यथा। |
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धारा 30(1) के अधीन सक्षम प्राधिकारी कब कार्रवाई करेगा? |
जब उसके पास यह विश्वास करने का कारण हो कि अपराध निर्दिष्ट प्रकृति की निक्षेप स्कीम या स्कीमों से संबंधित है। |
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धारा 30(1)(क) के अधीन कौन-सी शर्त आवश्यक है? |
संलिप्त निक्षेपकर्ता, निक्षेप लेने वाले या अंतर्वलित संपत्तियां एक से अधिक राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों में या भारत से बाहर अवस्थित हों। |
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धारा 30(1)(क) के अधीन संलिप्त तत्व कौन-कौन हो सकते हैं? |
निक्षेपकर्ता, निक्षेप लेने वाले या अंतर्वलित संपत्तियां। |
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क्या धारा 30(1)(क) के अधीन निक्षेपकर्ता, निक्षेप लेने वाले या संपत्तियां भारत से बाहर भी अवस्थित हो सकती हैं? |
हाँ। |
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धारा 30(1)(ख) के अधीन दूसरी शर्त क्या है? |
अंतर्वलित रकम का कुल मूल्य इतना अधिक हो कि वह महत्वपूर्ण रूप से लोकहित को प्रभावित करे। |
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धारा 30(1) के अधीन सक्षम प्राधिकारी क्या करेगा? |
मामले को केन्द्रीय सरकार को निर्दिष्ट करेगा। |
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धारा 30(1) के अधीन मामला किस प्रयोजन हेतु केन्द्रीय सरकार को निर्दिष्ट किया जाएगा? |
केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा अन्वेषण कराए जाने हेतु। |
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धारा 30(2) के अधीन सक्षम प्राधिकारी के प्रतिनिर्देश को किसके समान माना जाएगा? |
दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन अधिनियम, 1946 की धारा 6 के अधीन राज्य सरकार की सहमति के समान। |
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धारा 30(3) के अधीन केन्द्रीय सरकार कब कार्रवाई कर सकेगी? |
धारा 30(1) के अधीन प्रतिनिर्देश की प्राप्ति पर। |
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धारा 30(3) के अधीन केन्द्रीय सरकार अन्वेषण किसे अंतरित कर सकेगी? |
केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो को। |
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धारा 30(3) के अधीन अन्वेषण का अंतरितकरण किस अधिनियम की किस धारा के अधीन होगा? |
दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन अधिनियम, 1946 की धारा 5 के अधीन। |
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धारा 31 का विषय क्या है? |
बिना वारंट के प्रवेश, तलाशी और अभिग्रहण करने की शक्ति। (Power to enter, search and seize without warrant) |
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धारा 31(1) के अधीन शक्ति किस अधिकारी को प्राप्त है? |
ऐसे पुलिस अधिकारी को, जो किसी पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी से निम्न पंक्ति का न हो। |
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धारा 31(1) के अधीन पुलिस अधिकारी कब कार्रवाई कर सकेगा? |
जब उसके पास यह विश्वास करने का कारण हो कि अपराध के अन्वेषण हेतु आवश्यक कोई चीज उसके थाना क्षेत्र में किसी स्थान पर पाई जा सकती है। |
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धारा 31(1) के अधीन लिखित प्राधिकार किस अधिकारी का होना चाहिए? |
पुलिस अधीक्षक से अनिम्न पंक्ति के अधिकारी का। |
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धारा 31(1) के अधीन तलाशी से पूर्व क्या अभिलिखित किया जाएगा? |
यथासंभव उस चीज के बारे में, जिसके लिए तलाशी ली जानी है। |
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धारा 31(1) के अधीन प्राधिकृत अधिकारी किसे बना सकता है? |
अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी को। |
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धारा 31(1)(क) के अधीन कब प्रवेश और तलाशी ली जा सकती है? |
सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच। |
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धारा 31(1)(क) के अधीन किन स्थानों में प्रवेश और तलाशी ली जा सकती है? |
भवन, वाहन या स्थान में। |
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धारा 31(1)(क) के अधीन किन परिस्थितियों में तलाशी ली जाएगी? |
जब संदेह हो कि स्थान का उपयोग अधिनियम के उल्लंघन में निक्षेप लेने वाली स्कीम या ठहराव के संप्रवर्तन या संचालन हेतु हो रहा है। |
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धारा 31(1)(ख) के अधीन प्रतिरोध होने पर क्या किया जा सकता है? |
दरवाजा तोड़ना, बाधा हटाना, बल प्रयोग करना और आवश्यक सहायता लेना। |
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धारा 31(1)(ग) के अधीन क्या अभिग्रहित किया जा सकता है? |
तलाशी में पाए गए अभिलेख या संपत्ति। |
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धारा 31(1)(ग) के अधीन कौन-से अभिलेख या संपत्ति अभिग्रहित किए जा सकते हैं? |
जिनका उपयोग अधिनियम के उल्लंघन में निक्षेप लेने वाली स्कीम या ठहराव के संबंध में किया जा रहा हो या संदेह हो। |
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धारा 31(1)(घ) के अधीन किसे निरुद्ध और तलाशी ली जा सकती है? |
ऐसे व्यक्ति को, जिसके बारे में विश्वास हो कि उसने इस अधिनियम के अधीन अपराध किया है। |
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धारा 31(1)(घ) के अधीन व्यक्ति के साथ आगे क्या किया जा सकता है? |
उसे अभिरक्षा में लिया जा सकता है और अभिहित न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है। |
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धारा 31(1) के प्रथम परंतुक के अधीन लिखित प्राधिकार के बिना तलाशी कब ली जा सकती है? |
जब प्राधिकार लेने से साक्ष्य छिपने या अपराधी के भागने की संभावना हो। |
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धारा 31(1) के प्रथम परंतुक के अधीन बिना प्राधिकार के तलाशी से पूर्व क्या आवश्यक है? |
आधारों को लिखित में अभिलिखित करना। |
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धारा 31(1) के प्रथम परंतुक के अधीन बिना प्राधिकार के तलाशी कब ली जा सकती है? |
सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच किसी भी समय। |
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धारा 31(2) कब लागू होती है? |
जब अभिलेख या संपत्ति का अभिग्रहण करना व्यवहार्य न हो। |
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धारा 31(2) के अधीन प्राधिकृत अधिकारी क्या आदेश कर सकेगा? |
संपत्ति, खातों, निक्षेपों या मूल्यवान प्रतिभूतियों पर रोक लगाने का लिखित आदेश। |
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धारा 31(2) के अधीन रोक किसकी संपत्ति पर लगाई जा सकती है? |
ऐसे निक्षेप लेने वाले की, जिसके विरुद्ध शिकायत, विश्वसनीय सूचना या युक्तियुक्त संदेह हो। |
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धारा 31(2) के अधीन किस स्थिति में रोक लगाई जा सकती है? |
जब संदेह हो कि व्यक्ति अधिनियम के उल्लंघन में निक्षेप स्कीम या ठहराव के संप्रवर्तन या संचालन से जुड़ा है। |
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धारा 31(2) के अधीन आदेश का पालन किसके लिए आबद्धकार होगा? |
संबद्ध बैंक, वित्तीय या बाजार स्थापन के लिए। |
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धारा 31(2) के प्रथम परंतुक के अधीन बैंक या वित्तीय/बाजार स्थापन तीस दिन से अधिक रोक कब लगा सकेगा? |
जब अभिहित न्यायालय के आदेश से प्राधिकृत किया गया हो। |
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धारा 31(2) के द्वितीय परंतुक के अधीन रोकी गई संपत्ति का अभिग्रहण कब किया जा सकता है? |
जब उसका अभिग्रहण साध्य हो जाए। |
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धारा 31(2) के अधीन स्पष्टीकरण (i) के अनुसार "खातों पर रोक लगाने" का क्या अर्थ है? |
खाते में जमा या निकासी सहित किसी भी संव्यवहार को अनुज्ञात न करना। |
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धारा 31(2) के अधीन स्पष्टीकरण (ii) के अनुसार "संपत्ति पर रोक लगाने" का क्या अर्थ है? |
संपत्ति के अंतरण, परिवर्तन, व्ययन या संचलन को अनुज्ञात न करना। |
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धारा 31(3) के अधीन अधिकारी कब अभिहित न्यायालय को प्रति भेजेगा? |
सूचना प्राप्त करने, आधार अभिलिखित करने या आदेश करने के बहत्तर घंटे के भीतर। |
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धारा 31(3) के अधीन प्रति किस रूप में भेजी जाएगी? |
सीलबंद लिफाफे में। |
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धारा 31(3) के अधीन प्रति किसे भेजी जाएगी? |
अभिहित न्यायालय को। |
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धारा 31(3) के अधीन भवन, वाहन या स्थान का स्वामी या अधिभोगी प्रति कैसे प्राप्त करेगा? |
आवेदन पर अभिहित न्यायालय द्वारा निःशुल्क। |
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धारा 31(4) का विषय क्या है? |
तलाशी, अभिग्रहण और गिरफ्तारी की प्रक्रिया। |
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धारा 31(4) के अधीन तलाशी, अभिग्रहण और गिरफ्तारियां किसके अनुसार की जाएंगी? |
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023) के उपबंधों के अनुसार। |
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धारा 32 का विषय क्या है? |
अभिहित न्यायालय के समक्ष कार्यवाहियों पर दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023) का लागू होना। (Application of Code of Criminal Procedure, 1973 (Bhartiya Nagarik Suraksha Sanhita 2023) to proceedings before Designated Court) |
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धारा 32(1) के अधीन अभिहित न्यायालय क्या कर सकेगा? |
अभियुक्त को विचारण हेतु भेजे बिना अपराधों का संज्ञान ले सकेगा। |
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धारा 32(1) के अधीन अभिहित न्यायालय किन अपराधों का संज्ञान ले सकेगा? |
अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के अधीन अपराधों का। |
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क्या अभिहित न्यायालय अभियुक्त को विचारण हेतु भेजे बिना संज्ञान ले सकता है? |
हाँ। |
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धारा 32(2) का विषय क्या है? |
दंड प्रक्रिया संहिता/भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता का लागू होना। |
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धारा 32(2) किस अपवाद के अधीन है? |
धारा 31 में अन्यथा उपबंधित के सिवाय। |
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धारा 32(2)(क) के अधीन दंड प्रक्रिया संहिता/भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता किन पर लागू होगी? |
अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के अधीन की गई सभी गिरफ्तारियों, तलाशियों और अभिग्रहणों पर। |
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क्या दंड प्रक्रिया संहिता/भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता इस अधिनियम के अधीन की गई गिरफ्तारियों पर लागू होगी? |
हाँ। |
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क्या दंड प्रक्रिया संहिता/भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता इस अधिनियम के अधीन की गई तलाशियों और अभिग्रहणों पर लागू होगी? |
हाँ। |
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धारा 32(2)(ख) के अधीन दंड प्रक्रिया संहिता/भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता किन पर लागू होगी? |
अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के अधीन कार्यवाहियों पर। |
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धारा 32(2)(ख) के प्रयोजनों के लिए अभिहित न्यायालय को क्या समझा जाएगा? |
एक सत्र न्यायालय। |
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धारा 32(2)(ख) के प्रयोजनों के लिए अभिहित न्यायालय के समक्ष अभियोजन का संचालन करने वाले व्यक्तियों को क्या समझा जाएगा? |
लोक अभियोजक। |
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अध्याय 8 (CHAPTER VIII) |
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प्रकीर्ण (MISCELLANEOUS) |
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अध्याय 8 का विषय क्या है? |
प्रकीर्ण। (Miscellaneous) |
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धारा 33 का विषय क्या है? |
अविनियमित निक्षेप स्कीमों के विज्ञापन का प्रकाशन। (Publication of advertisement of Unregulated Deposit Scheme) |
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धारा 33 कब लागू होती है? |
जब किसी समाचारपत्र या अन्य प्रकाशन में अविनियमित निक्षेप स्कीम संबंधी कथन, सूचना या विज्ञापन अंतर्विष्ट हो। |
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धारा 33 के अधीन किस प्रकार के प्रकाशन सम्मिलित हैं? |
समाचारपत्र या किसी भी प्रकृति के अन्य प्रकाशन। |
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धारा 33 के अधीन कौन-सा कथन, सूचना या विज्ञापन प्रासंगिक है? |
जो अविनियमित निक्षेप स्कीम में निक्षेपों का संवर्धन, याचना या सदस्य बनने हेतु उत्प्रेरण करता हो। |
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क्या अविनियमित निक्षेप स्कीम में निक्षेपों का संवर्धन करने वाला विज्ञापन धारा 33 के अंतर्गत आता है? |
हाँ। |
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क्या निक्षेपों की याचना करने वाला विज्ञापन धारा 33 के अंतर्गत आता है? |
हाँ। |
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क्या किसी व्यक्ति को अविनियमित निक्षेप स्कीम का सदस्य बनने हेतु उत्प्रेरित करने वाला कथन धारा 33 के अंतर्गत आता है? |
हाँ। |
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धारा 33 के अधीन निदेश देने की शक्ति किसे है? |
समुचित सरकार को। |
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धारा 33 के अधीन समुचित सरकार किसे निदेश दे सकेगी? |
समाचारपत्र या प्रकाशन को। |
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धारा 33 के अधीन समाचारपत्र या प्रकाशन को क्या करने का निदेश दिया जा सकता है? |
कथन या विज्ञापन को पूर्ण और उचित रूप से वापस लेते हुए प्रकाशन करने का। |
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धारा 33 के अधीन वापसी का प्रकाशन किस प्रकार किया जाएगा? |
निःशुल्क रूप से। |
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धारा 33 के अधीन वापसी का प्रकाशन किस रीति में किया जाएगा? |
ऐसी रीति में, जो विहित की जाए। |
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धारा 33 के अधीन वापसी का प्रकाशन कहाँ किया जाएगा? |
उसी समाचारपत्र या प्रकाशन में उसी स्थान पर। |
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धारा 34 का विषय क्या है? |
अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव होना। (Act to have overriding effect) |
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धारा 34 के अधीन अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के उपबंधों का क्या प्रभाव होगा? |
तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी प्रभाव होगा। |
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धारा 34 किस अपवाद के अधीन है? |
अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 में अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबंधित होने के सिवाय। |
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धारा 34 के अधीन किस प्रकार की अन्य विधियां सम्मिलित हैं? |
राज्य या संघ राज्यक्षेत्र द्वारा बनाई गई विधियां भी। |
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क्या अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 को अन्य प्रवृत्त विधियों पर अध्यारोही प्रभाव प्राप्त है? |
हाँ। |
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क्या राज्य या संघ राज्यक्षेत्र द्वारा बनाई गई विधियों पर भी अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 का अध्यारोही प्रभाव होगा? |
हाँ। |
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धारा 35 का विषय क्या है? |
अन्य विधियों का लागू होना, वर्जित न होना। (Application of other laws not barred) |
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धारा 35 के अधीन अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के उपबंधों का स्वरूप क्या है? |
तत्समय प्रवृत्त अन्य विधियों के उपबंधों के अतिरिक्त। |
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क्या अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के उपबंध अन्य विधियों के अल्पीकरण में हैं? |
नहीं। |
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क्या अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के उपबंध अन्य प्रवृत्त विधियों के अतिरिक्त हैं? |
हाँ। |
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धारा 36 का विषय क्या है? |
सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण। (Protection of action taken in good faith) |
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धारा 36 के अधीन संरक्षण किसे प्राप्त है? |
समुचित सरकार, सक्षम प्राधिकारी या समुचित सरकार के किसी अधिकारी को। |
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धारा 36 के अधीन किस प्रकार के कार्य के लिए संरक्षण प्राप्त है? |
अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 या तदधीन बनाए गए नियमों के अधीन सद्भावपूर्वक किए गए या किए जाने के आशयित कार्य के लिए। |
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धारा 36 के अधीन किन कार्यवाहियों का वर्जन है? |
वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाहियां। |
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धारा 36 के अधीन वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाहियां किसके विरुद्ध नहीं लाई जाएंगी? |
समुचित सरकार, सक्षम प्राधिकारी या समुचित सरकार के किसी अधिकारी के विरुद्ध। |
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क्या सद्भावपूर्वक किए जाने के आशयित कार्य के लिए भी संरक्षण उपलब्ध है? |
हाँ। |
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क्या अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के अधीन सद्भावपूर्वक किए गए कार्य के लिए अभियोजन लाया जा सकता है? |
नहीं। |
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धारा 37 का विषय क्या है? |
केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति। (Power of Central Government to make rules) |
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धारा 37(1) के अधीन नियम बनाने की शक्ति किसे प्राप्त है? |
केन्द्रीय सरकार को। |
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धारा 37(1) के अधीन केन्द्रीय सरकार किस माध्यम से नियम बना सकेगी? |
अधिसूचना द्वारा। |
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धारा 37(1) के अधीन नियम किस प्रयोजन हेतु बनाए जाएंगे? |
अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के उपबंधों को क्रियान्वित करने के लिए। |
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धारा 37(2) किस बात को स्पष्ट करता है? |
विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना नियम बनाए जा सकते हैं। |
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धारा 37(2)(क) के अधीन किन विषयों पर नियम बनाए जा सकते हैं? |
धारा 7(3) के अधीन आदेश से पूर्व विचारणीय सूचना, अन्य विशिष्टियां तथा कुर्की की रीति। |
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धारा 37(2)(क) के अधीन किस धारा से संबंधित सूचना और विशिष्टियां विहित की जा सकती हैं? |
धारा 7(3) से संबंधित। |
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धारा 37(2)(ख) के अधीन किन विषयों पर नियम बनाए जा सकते हैं? |
धारा 9(2) के अधीन साझा की जाने वाली सूचना। |
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धारा 37(2)(ग) के अधीन किन विषयों पर नियम बनाए जा सकते हैं? |
धारा 10(1) के अधीन संसूचना का प्ररूप, रीति और समय। |
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धारा 37(2)(घ) के अधीन किन विषयों पर नियम बनाए जा सकते हैं? |
धारा 14(1) के अधीन आवेदन में अंतर्विष्ट विशिष्टियां। |
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धारा 37(2)(घ) के अधीन आवेदन कौन फाइल करेगा? |
सक्षम प्राधिकारी। |
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धारा 37(2)(ङ) के अधीन किन विषयों पर नियम बनाए जा सकते हैं? |
धारा 15(3) के अधीन आदेश से पूर्व अभिहित न्यायालय द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया। |
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धारा 37(2)(च) के अधीन किन विषयों पर नियम बनाए जा सकते हैं? |
धारा 31(1) के अधीन नियम। |
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धारा 37(2)(छ) के अधीन किन विषयों पर नियम बनाए जा सकते हैं? |
धारा 33 के अधीन विज्ञापन प्रकाशित करने की रीति। |
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धारा 37(2)(ज) के अधीन किन विषयों पर नियम बनाए जा सकते हैं? |
ऐसा अन्य विषय, जिसे विहित करना अपेक्षित हो या जो विहित किया जाए। |
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क्या धारा 37(2) के अधीन नियम सभी निर्दिष्ट विषयों या उनमें से किसी के लिए बनाए जा सकते हैं? |
हाँ। |
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धारा 38 का विषय क्या है? |
राज्य सरकार, आदि की नियम बनाने की शक्ति। (Power of State Government, etc., to make rules) |
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धारा 38(1) के अधीन नियम बनाने की शक्ति किसे प्राप्त है? |
यथास्थिति, राज्य सरकार या संघ राज्यक्षेत्र की सरकार को। |
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धारा 38(1) के अधीन नियम किसके परामर्श से बनाए जाएंगे? |
केन्द्रीय सरकार के परामर्श से। |
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धारा 38(1) के अधीन नियम किस माध्यम से बनाए जाएंगे? |
अधिसूचना द्वारा। |
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धारा 38(1) के अधीन नियम किस प्रयोजन हेतु बनाए जाएंगे? |
अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के उपबंधों को क्रियान्वित करने के लिए। |
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धारा 38(2) किस बात को स्पष्ट करता है? |
विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना नियम बनाए जा सकते हैं। |
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धारा 38(2)(क) के अधीन किन विषयों पर नियम बनाए जा सकते हैं? |
धारा 2(4)(ञ) के अधीन स्व-सहायता समूहों के लिए अधिकतम सीमा। |
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धारा 38(2)(ख) के अधीन किन विषयों पर नियम बनाए जा सकते हैं? |
धारा 2(4)(ट) के अधीन प्रयोजन और अधिकतम सीमा। |
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धारा 38(2)(ग) के अधीन किन विषयों पर नियम बनाए जा सकते हैं? |
धारा 7(3) के अधीन संपत्ति की अनंतिम कुर्की की रीति। |
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धारा 38(2)(ग) के अधीन अनंतिम कुर्की कौन करेगा? |
सक्षम प्राधिकारी। |
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धारा 38(2)(घ) के अधीन किन विषयों पर नियम बनाए जा सकते हैं? |
धारा 7(4)(च) के अधीन अन्य विषय। |
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धारा 38(2)(ङ) के अधीन किन विषयों पर नियम बनाए जा सकते हैं? |
धारा 7(8) के अधीन अभिलेखों को परिबद्ध करने और अभिरक्षा से संबंधित नियम। |
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धारा 38(2)(च) के अधीन किन विषयों पर नियम बनाए जा सकते हैं? |
ऐसा अन्य विषय, जिसे विहित करना अपेक्षित हो या जो विहित किया जाए। |
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क्या धारा 38(2) के अधीन नियम सभी निर्दिष्ट विषयों या उनमें से किसी के लिए बनाए जा सकते हैं? |
हाँ। |
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धारा 39 का विषय क्या है? |
नियमों का रखा जाना। (Laying of rules) |
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धारा 39(1) के अधीन कौन-से नियम संसद् के समक्ष रखे जाएंगे? |
अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा बनाए गए प्रत्येक नियम। |
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धारा 39(1) के अधीन नियम कब संसद् के समक्ष रखा जाएगा? |
उसके बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र। |
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धारा 39(1) के अधीन नियम संसद् के किन सदनों के समक्ष रखा जाएगा? |
संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष। |
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धारा 39(1) के अधीन नियम कितनी अवधि के लिए सदनों के समक्ष रखा जाएगा? |
कुल तीस दिन की अवधि के लिए। |
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क्या धारा 39(1) के अधीन तीस दिन की अवधि एक सत्र में या दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकती है? |
हाँ। |
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धारा 39(1) के अधीन यदि दोनों सदन नियम में परिवर्तन के लिए सहमत हो जाएं तो क्या होगा? |
नियम परिवर्तित रूप में प्रभावी होगा। |
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धारा 39(1) के अधीन यदि दोनों सदन सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो क्या होगा? |
नियम का कोई प्रभाव नहीं होगा। |
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धारा 39(1) के अधीन नियम में परिवर्तन या निष्प्रभावता का प्रभाव कब से होगा? |
तत्पश्चात्। |
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क्या धारा 39(1) के अधीन नियम के परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से पूर्व की गई बातों की विधिमान्यता प्रभावित होगी? |
नहीं। |
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धारा 39(1) के अधीन पूर्व की गई बातों की विधिमान्यता पर क्या प्रभाव पड़ेगा? |
कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। |
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धारा 39(2) का विषय क्या है? |
राज्य सरकार या संघ राज्यक्षेत्र सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का रखा जाना। |
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धारा 39(2) के अधीन कौन-से नियम विधान-मंडल के समक्ष रखे जाएंगे? |
राज्य सरकार या संघ राज्यक्षेत्र की सरकार द्वारा बनाए गए प्रत्येक नियम। |
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धारा 39(2) के अधीन नियम कब रखा जाएगा? |
उसके बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र। |
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धारा 39(2) के अधीन नियम किनके समक्ष रखा जाएगा? |
यथास्थिति राज्य विधान-मंडल या संघ राज्यक्षेत्र विधान-मंडल के समक्ष। |
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धारा 39(2) के अधीन दो सदनों वाले विधान-मंडल में नियम कहाँ रखा जाएगा? |
प्रत्येक सदन के समक्ष। |
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धारा 39(2) के अधीन एक सदन वाले विधान-मंडल में नियम कहाँ रखा जाएगा? |
उस एकमात्र सदन के समक्ष। |
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धारा 40 का विषय क्या है? |
पहली अनुसूची को संशोधित करने की शक्ति। (Power to amend First Schedule) |
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धारा 40(1) के अधीन पहली अनुसूची को संशोधित करने की शक्ति किसे प्राप्त है? |
केन्द्रीय सरकार को। |
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धारा 40(1) के अधीन केन्द्रीय सरकार किस माध्यम से पहली अनुसूची में संशोधन कर सकेगी? |
अधिसूचना द्वारा। |
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धारा 40(1) के अधीन केन्द्रीय सरकार किन बातों को ध्यान में रखकर संशोधन कर सकेगी? |
अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए। |
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धारा 40(1) के अधीन केन्द्रीय सरकार कब संशोधन कर सकेगी? |
जब वह ऐसा करना आवश्यक या समीचीन समझे। |
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धारा 40(1) के अधीन पहली अनुसूची में क्या जोड़ा या लोप किया जा सकता है? |
किसी स्कीम या ठहराव को। |
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धारा 40(1) के अधीन किसी स्कीम या ठहराव को जोड़ने का प्रभाव क्या होगा? |
वह स्कीम या ठहराव विनियमित निक्षेप स्कीम बन जाएगी। |
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धारा 40(1) के अधीन किसी स्कीम या ठहराव के लोप का प्रभाव क्या होगा? |
वह विनियमित निक्षेप स्कीम नहीं रहेगी। |
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धारा 40(1) के अधीन क्या केन्द्रीय सरकार पहली अनुसूची में किसी स्कीम या ठहराव को जोड़ सकती है? |
हाँ। |
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धारा 40(1) के अधीन क्या केन्द्रीय सरकार पहली अनुसूची से किसी स्कीम या ठहराव का लोप कर सकती है? |
हाँ। |
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धारा 40(2) के अधीन किसकी प्रति संसद् के समक्ष रखी जाएगी? |
धारा 40 के अधीन जारी प्रत्येक अधिसूचना की। |
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धारा 40(2) के अधीन अधिसूचना की प्रति कब रखी जाएगी? |
उसे जारी किए जाने के तुरंत पश्चात्। |
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धारा 40(2) के अधीन अधिसूचना की प्रति किनके समक्ष रखी जाएगी? |
संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष। |
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धारा 41 का विषय क्या है? |
कतिपय निक्षेपों को अधिनियम का लागू नहीं होना। (Act not to apply certain deposits) |
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धारा 41 के अधीन इस अधिनियम के उपबंध किन निक्षेपों को लागू नहीं होंगे? |
कारबार के सामान्य अनुक्रम में लिए गए निक्षेपों को। |
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धारा 41 के अधीन क्या कारबार के सामान्य अनुक्रम में लिए गए निक्षेपों पर यह अधिनियम लागू होगा? |
नहीं। |
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धारा 42 का विषय क्या है? |
कतिपय अधिनियमितियों का संशोधन। (Amendment to certain enactments) |
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धारा 42 के अधीन किन अधिनियमितियों का संशोधन किया जाएगा? |
दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट अधिनियमितियों का। |
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धारा 43 का विषय क्या है? |
कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति। (Power to remove difficulties) |
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धारा 43(1) के अधीन कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति किसे प्राप्त है? |
केंद्रीय सरकार को। |
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धारा 43(1) के अधीन केंद्रीय सरकार कब कार्रवाई कर सकेगी? |
यदि अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है। |
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धारा 43(1) के अधीन कठिनाई को किस माध्यम से दूर किया जाएगा? |
आदेश द्वारा। |
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धारा 43(1) के अधीन आदेश कैसा होना चाहिए? |
अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के उपबंधों से असंगत न हो। |
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धारा 43(1) के परंतुक के अधीन आदेश कब तक किया जा सकता है? |
अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम, 2019 के प्रारंभ से तीन वर्ष की अवधि की समाप्ति तक। |
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क्या धारा 43(1) के अधीन तीन वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् आदेश किया जा सकता है? |
नहीं। |
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धारा 43(2) का विषय क्या है? |
आदेश का संसद् के समक्ष रखा जाना। |
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धारा 43(2) के अधीन किसकी प्रति संसद् के समक्ष रखी जाएगी? |
धारा 43 के अधीन किए गए प्रत्येक आदेश की। |
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धारा 43(2) के अधीन आदेश कब संसद् के समक्ष रखा जाएगा? |
उसे किए जाने के तुरंत पश्चात्। |
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धारा 43(2) के अधीन आदेश किनके समक्ष रखा जाएगा? |
संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष। |
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धारा 44 का विषय क्या है? |
निरसन और व्यावृत्ति। (Repeal and saving) |
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धारा 44(1) के अधीन किसका निरसन किया जाता है? |
अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अध्यादेश, 2019 का। |
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क्या धारा 44(2) के अधीन निरसन के होते हुए भी अध्यादेश के अधीन किए गए कार्य संरक्षित रहेंगे? |
हाँ। |
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