
89. घाम चौकीदार एक ग्राम सेवक होता है, जिसका मुख्य कर्तव्य अपने प्रभार के गाँवों को देखना और रक्षा करना है। उससे अपेक्षा की जाती है कि वह ग्राम के मुखिया से रिपोर्ट ले जाए, उसे अपराधियों का पता लगाने में सहायता पहुँचाए और विधि द्वारा प्राधिकृत गिरफ्तारियाँ करें। वह अपने कर्तव्यों के सम्यक् पालन के लिए जिला मजिस्ट्रेट के प्रति उत्तरदायी है। मुखियों से सम्बन्धी नियम गवर्नमेंट आर्डर पुस्तिका में है।
90. ग्राम चौकीदारों द्वारा भूमि में खेती किए जाने का प्रतिषेध (मनाही) नहीं है, उन्हें उन गाँवों में से, जिनके लिये वह उत्तरदायी है, एक में रहना चाहिए। उन्हें कान्सटेबिलों के बल के सदस्यों द्वारा दासता के कर्तव्यों में नियोजित नहीं किया जाना चाहिए।
91. जन्म और मरण की रिपोर्ट देने के प्रयोजन के लिए चौकीदार को अपने थाने पर मास में दो बार नियत दिनांकों को हाजिर होना चाहिए। (देखिए पच्चीसवाँ अध्याय) इन दिनांकों में से एक पर उन्हें उनका वेतन दिया जावे।
92. प्रत्येक ग्राम के पुलिस वाले को अपराध अभिलेख पुस्तक (लकड़ी का बना हुआ) हाजिरी के लिए तख्ता और जन्म तथा मृत्यु का छपा हुआ रजिस्टर दिया जाना चाहिए. वह इन दोनों की उसे प्रदाय की गई चमड़े की पेटी में रखेगा और जब थाने जाये, अपने साथ ले जायेंगा।
भिलेख पुस्तक थाना लेखक द्वारा अपराधों की घटना की रिपोटों या उन रिपोटों के लिये जो चौकीदार करना चाहे, और उसके परितोपण, दण्ड और अच्छी सेवाओं के लिखने के लिये, परितोषण, दण्ड और अच्छी तथा बुरी सेवाओं सम्बन्धी प्रविष्टियाँ थाने के भारसाधक अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित की जानी चाहिए। हिस्ट्रीशीट के चौकीदार के फेरों में होने वाले सभी व्यक्तियों की सूची इस अभिलेख पुस्तक में प्रविष्ट की जावेगी और उनके घर से अनुपस्थित रहने की सभी रिपोर्ट उसमें अंकित की जायेंगी।
93. कान्सटेबिलों के बल के सदस्यों द्वारा, ऐसी अपेक्षा किए जाने पर ग्राम पुलिस को उन्हें मार्गरक्षण में सहायता देना चाहिए।
94. भ्रमण पर रहने वाले अधिकारियों के शिविरों को देखने और उनकी रक्षा करने के लिए ग्राम पुलिस को प्रदाय किए जाने को निम्नलिखित नियम सीमित करते हैं :-
(1) स्वरीकार किए गए चौकीदारों की संख्या दो से कम न होगी। बडे शिविरों के लिए वह संख्या बढ़ाई जा सकती है, परन्तु वह छः से अधिक न होगी।
(2) इस कर्तव्य पर कोई चौकीदार एक सप्ताह में दो दिन से या एक रात से अधिक सेवा नहीं करेगा।
(3) शिविरों के पड़ोस से चौकीदारों को इस प्रकार चुना जाये कि जहाँ तक हो सके कम से कम गाँव बिना चौकीदार के छोड़े जावें।
(4) उन चौकीदारों को देय विशेष भत्ता, ग्राम भ्रमण करने वाले अधिकारियों के शिविरों पर अपने गश्त की जगह छोड़कर पहरा देते हैं या मार्गरक्षण करते हैं, सम्बन्धित भ्रमण करने वाले अधिकारी द्वारा तत्परता से भुगताया जावे। थाना अधिकारियों को, अधीक्षक को, इस सम्बन्ध में भ्रमण करने वाले अधिकारियों द्वारा की गई असावधानियों के किसी दृष्टान्त की रिपोर्ट करना चाहिए।
राष्ट्रपति की विशेष गाड़ी और उन विशेष गाड़ियों के जिसमें प्रधानमंत्री यात्रा कर रहे हों, के लिए जब रेलवे लाइन की रक्षा करने को ग्राम चौकीदार को प्रतिनियुक्त किया जावे या जब उन्हें अन्य कर्त्तव्य पर नियोजित किया जावे जो राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के परिदर्शन से सम्बन्धित हों उन्हें, उनके वेतन के अतिरिक्त ग्राम चौकीदारों को दिये जाने वाले पुरस्कार अनुदान में से छः आना प्रतिदिन की दर से भुगताए जायेंगे, यदि उनके स्थान पर किसी अन्य को न लगाया गया हो।
पुलिस महानिरीक्षक (वेतन को सम्मिलित करते हुए) प्रतिदिन के लिए एक रुपया से अधिक न होने वाले दैनिक भत्ते पर राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के परिदर्शन सम्बन्धी कर्त्तव्यों पर चौकीदार के प्रतिनियुक्त किए जाने पर जबकि उसके परिणाम में उन्हें अपने ग्रामों से छः दिन से अधिक के लिये अनुपस्थित रहना पड़े, चौकीदार के अस्थायी पद का सृजन कर सकता है। ऐसे मामलों में विचार करना अधीक्षक का काम होगा कि स्थानापन्न नियुक्तियाँ की जावें और यदि वह स्थानापन्न नियोजन को आवश्यक समझे तो उसे महानिरीक्षक के कार्यालय से पूर्व मन्जूरी प्राप्त कर लेना चाहिये। स्थानापन्न व्यक्तियो को चौकीदारों के मामले में दिया जाने वाला साधारण वेतन दिया जाएगा, जबकि स्थायो चौकीदारों को जो प्रतिनियुक्ति पर हों, वेतन और परितोषण को सम्मिलित करते हुए एक रुपया प्रतिदिन की दर से, बजट के "ग्राम पुलिस के अधीनस्थ चौकीदार," शीर्ष (मद) से भुगताया जावेगा।
95. ग्राम चौकीदारों को संज्ञेय अपराधों की लिखित रिपोर्ट करने और चोरी गई संपत्ति की सूची बनाने के लिये छपे हुये क्र० 44 में प्रारूप प्रदाय किये जाने चाहिये और उन्हें अनुदेशित किया जावे कि वे उस व्यक्ति किया जावे कि वे उस व्यक्ति को दे दें, जो उसे उपयोग करने के लिए मांगे और परिवाद द्वारा ऐसा करने की अपेक्षा की जावे जो उसके भरे जाने और परिवादी द्वारा हस्ताक्षरित किए जाने के पश्चात् वह उसे ले कर थाने में दे दे। ग्राम चौकीदारों को सदैव यूह स्पष्ट कर दिया जाना चाहिये कि परिवादियों को लिखित में रिपोर्ट करने को विवश न किया जाए। जब कभी कोई चौकीदार थाने में लिखित रिपोर्ट लाये, उसे परिवादी को चेक रसीद की दूसरी प्रति ले जाकर देना चाहिये।
96. (1) ग्राम चौकीदार जिला मजिस्ट्रेट द्वारा नार्थ वेस्टर्न प्राविन्सेज विलेज एण्ड रोड पुलिस ऐक्ट, 1873 (1873 का सोलहवाँ अधिनियम) की धारा 3 से 6 के, या अवध लाज ऐक्ट (1876 का अठारहवाँ अधिनियम) की धारा 29 से 32 के अधीन नियुक्त किया जाते हैं। वे वर्ष 1873 के सोलहवें अधिनियम की धारा 10 या वर्ष 1876 के अठारहवें अधिनियम की धारा 36 के अधीन पदच्युत किए जा सकते हैं। वे वर्ष 1873 के सोलहवें अधिनियम की धारा 11 या वर्ष 1876 के अठारहवें अधिनियम की धारा 37 के अधीन अभियोजन के लिये भी दायित्वाधीन होंगे।
(2) चौकीदारों की सच्चरित्रता के लिये दिये गये परितोषण और भत्ते अनुशासनात्मक उपाय के रूप में वापस लिये जा सकते हैं। [देखिये पैरा 476 (5)]।
96-ए. पैरा 501 से अन्तर्विष्ट उपबन्ध ग्राम चौकीदारों पर लागू होंगे, यदि शासन के अलावा भी उनके विरुद्ध कोई सिविल या आपराधिक कार्यवाही संस्थापित की गई हो।