पैरा 283 से 300अध्याय 22 UP पुलिस रेगुलेशन

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ध्याय 22

अभिलेख और गोपनीय दस्तावेज

283. थाने पर रखे जाने वाले रजिस्टर और वहाँ से भेजे जाने वाले प्रविवरणों और उनकी सूची प्रथम और द्वितीय परिशिष्ट में मिलेगी।

284. धार्तों को पुलिस गजट और क्रिमिनल इन्टेलीजेन्स गजट प्रदान किया जाता है। पूरे पांच वर्ष की जिल्दें रखी जावें और जो पुराने दिनांकों के हों, नष्ट कर दिये जावें।

285. अधीक्षक के कार्यालय में वार्षिक रूप से निम्नलिखित सूची जिला मजिस्ट्रेट द्वारा दी गई सूचना से तैयार की जावेगी और वर्ष की समाप्ति तक थाने की फाइल में रखी जाने के लिए यह प्रत्येक थाने को भेज दी जावेगी-

() उन व्यक्तियों की सूची में निवास कर रहे हों और जिन्हें नाम से आयुध अधिनियम के किसी उपबन्ध में छूट दी गई हो, उन व्यक्तियों की सूची के साथ जो आयुध अधिनियम के अधीन अनुज्ञात हों और थाने को सीमाओं के भीतर निवास या अनुज्ञप्ति व्यापार कर रहे हों। अन्य जिलों की सीमा पर स्थित थानों को उस जिले के पड़ोसी थाने के निवासी विमुक्त व्यक्तियों को सूची भी प्रदान की जाये।

() मण्डल की सीमाओं के भीतर आबकारी या अफीम के अधीन अनुज्ञप्ति धारण करने वाले और अनुज्ञापित व्यापार करने वाले सभी व्यक्तियों की सूची।

() मण्डल की सीमाओं के भीतर सभी सार्वजनिक फेरियों की अनुज्ञार्कि व्यक्तियों के नाम के सहित सूची।

286. प्रत्येक थाने में कार्यालय की फाइल में निम्नलिखित सूचियां भी रखी जायें-

(1) सभी सरकार सम्पत्ति की।

(2) निर्देश के लिये सभी अधिनियमों और पुस्तकों की।

(3) कान्सटेबिलों के ग्रामीण फेरों की।

(4) थाने में बनाये रखे जाने वाले रजिस्टरों की।

(5) ग्रामीण पुलिस के द्वारा रिपोर्ट देने के दिनांक की।

(6) थाने से संलग्न अधिकारियों और सिपाहियों की उनके पदस्थ होने के दिनांक सहित।

(7) उन अधिकारियों की जिनके द्वारा 31 दिसम्बर से थाने का निरीक्षण किया गया है, दिनांक सहित।

(8) मण्डल को लागू किये गये, उस पर विस्तार किये गये, अधिनियमों के अंर्शा की सूची (पैरा 338)

(9) वेतन, पारितोषिक और भत्तों की प्राप्तियां और विवरण को दर्शाने वाली सूची।

(10) क वर्ग की हिस्ट्री-शीट।

(11) ख वर्ग की हिस्ट्री-शोट।

(12) छुट्टी के आवेदन-पत्र।

(13) पारितोषिक आवेदन-पत्र।

(14) ग्राम चौकीदारों के लिए सदाचरण के भत्ते।

(15) मण्डल के निवासियों को जो मण्डल के भीतर या बाहर सिद्धदोप ठहराये गये हों।

(16) राजपत्रित अधिकारियों द्वारा पर्यवेक्षित मामले।

(17) सर्पदंश अन्य और वन पशुओं द्वारा मृत्यु के मामले

(18) मोटर, ड्रीकिल्स एक्ट के अधीन मामले।

(20) ग्राप्त चौकीदार की सूची।

सूची (7) में यह दर्शया जावे कि निरीक्षण विशेष वार्षिक था या आकस्मिक। जन्न कभी कोई निरीक्षण किया जावे, सूची में तत्काल प्रविष्टि कर ली जावे। एक वर्ष की सूची दूसरे वर्ष के लिए निर्देश हेतु रखी जावे।

287. हर थाने में सहज गोचर स्था पर सार्वजनिक सूचनाओं और उद्घोषणाओं के लिए एक नोटिस बोर्ड लगाया जावेगा।

जैसा अवसर द्वारा अपेक्षित हो, भारसाधक अधिकारी सूचनाओं को हटायेगा या नवीनीकृत करेगा। यदि थाने के मण्डल के सीमा के भीतर किसी स्थान में सार्वजनिक जुआ अधिनियम की धारा 13 और 17 के सिवाय सार्वजनिक जुआ अधिनियम के किसी अन्य उपबन्ध का विस्तार कर दिया गया हो, नोटिस बोर्ड पर उस पृथान की चतुर्सी सीमायें बताते हुये एक सूचना पत्र लगाया जायेगा और जब वह पढ़े जाने योग्य न रहे, उसका नवीनीकरण किया जावेगा।

288. थाने के मण्डल के भीतर सभी गांवों की स्थिति और चारों ओर की सीमाओं का एक नक्शा धाने की कार्यालय की दीवाल पर लटकाया जाना चाहिये। यदि थाने के मण्डल में कोई क़स्बा या मगर, किसी कस्बे या नगर का भाग अन्तर्विष्ट हो, तो एक नक्शा मोहल्लों और फेरों की जगहों को दशनि वाला होना चाहिये।

टीप- यह नक्शे उनके अतिरिक्त हैं, जो सेंध लगाने के मामलों के वर्गीकरण के लिए रख जाते

289. थाने पर रखे जाने वाले प्रारूपों (फार्मों) की एक सूची पृथक से प्रकाशित की गई है। थानों को प्रारूप तभी प्रदाय किए जावें जब कि हस्तगत भण्डार कम हो गया हो, न कि शासकीय मुद्रणालय से प्राप्त होने पर नियम के रूप में।

290. पैरा 9 के द्वारा मजिस्ट्रेट के निरीक्षण के लिये विहित की गई खाली पुस्तक के अतिरिक्त केवल विभागीय अधिकारियों के उपयोग के लिये प्रत्येक थाने में प्रत्येक प्राधिकृत छपे हुए प्रारूप (क्रमांक 35 और 35-) में रखी जावेगी और विस्तृत तथा आकस्मिक दोनों ही निरीक्षणों के लिए उपयोग की जावेगी। राजपत्रित पुलिस अधिकारियों के द्वारा किये निरीक्षणों की टीपें पुलिस अधीक्षक द्वारा जिला मजिस्ट्रेट को अग्रेषित की जावेंगी।

291. जनरल केस डायरियों की सभी खाली जिल्दों पर, जव वे शासकीय वे द्रीय मुद्रणालय से प्राप्त हों, उसके अभिलेखागार में संग्रह किये जाने के पहले उनके प्रत्येक पृष्ठ पर अधीक्षण कार्यालय की मोहरें अंकित की जावे और प्राप्त की गई जिल्दों की संख्या, रजिस्टर और प्रारूपों की भण्डार पुस्तक में (मैनुअल मिस्लैन्युअस फार्म नम्बर 33-बार) प्रविष्ट की जावे। इस बात की सावधानी बरती जानी चाहिये कि उसमें से कोई पृष्ठ बाहर न निकाले जावें। डायरियों की खाली जिल्हें सुरक्षित अभिरक्षा में रखी जाना चाहिये। जनरल और केस डायरी निम्नलिखित रौति से रखी जानी चाहिये:-

(1) थाने या चौकी को दुबारा से जारी की गई जिल्द का क्रमांक और छपाई का वर्ष निर्गमित करने वाले रजिस्टर को दर्शाना चाहिये।

(2) जारी करने के समय डायरी के प्रत्येक पृष्ठ पर जिले या धाने या चौकी के नाम, जिसको वह विशेष जिल्द जारी की गई हो, की ओर जारी करने की दिनांक की मोहर लगाई जावेगी।

(3) उपयोग में आने वाली रबड़ की मोहरें ताले और चाबी के अधीन रखी जाना चाहिए ताकि उनका पुलिस के उस राजपत्रित अधिकारी के, जो रबड़ की मोहरों को सुरक्षित अभिरक्षा के लिये उत्तरदायी होगा, विनिर्दिष्ट आदेश के बिना अभिलेखागार में रखी गई, खुली जिल्दों पर उपयोग न किया जा सके।

(4) खाली जिल्दों के भण्डार की मास में एक बार किसी पुलिस, विभाग के अधिकारी के द्वारा जो राजपत्रित अधिकारी से कम की पंक्ति का न हो, जाँच की जाना चाहिये और उसके द्वारा रजिस्टर की प्रविष्टियों पर हस्ताक्षर किये जाना चाहिये।

(5) राजपत्रित अधिकारी से न्यूनतम पंक्ति के न होने वाले पुलिस विभाग के अधिकारी के स्पष्ट आदेश के बिना कोई जिल्द जारी नहीं की जाना चाहिये। माँग के लिए प्रारूप उसके जारी किये जाने के पहले एक राजपत्रित पुलिस अधिकारी के प्रति हस्ताक्षर किये जाने की अपेक्षा रखता है।

(6) आपातकालीन स्थितियों से उपयोग किये जाने के लिये, प्रत्येक थाने को प्रत्येक डायरी की एक ही फालतू जिल्द रखने की अनुमति दी गई है। जब वह प्रयोग में लाई जावे, जनरल डायरी में इस आशय की प्रतिविष्ट जिल्द का क्रमांक और उसकी छपाई का वर्ष देते हुए की जाये। चौकी के मामले में, किसी फालतू प्रति जारी किये जाने की आवश्यकता नहीं है

(7) प्रत्येक अन्वेणकर्ता अधिकारी की केस डायरी की एक पृथक जिल्द जारी की जायें और उसके स्थानान्तर की दशा में वह उसके उत्तराधिकारी को दे दी जानी चाहिए तथा उसके प्रमाण-पत्र में डायरी के प्रयोग किये जा चुके और बिना प्रयोग किये गये पृष्ठों की संख्या अंकित रहना चाहिये।

(8) अपने आकस्मिक निरीक्षणों के दौरान मण्डल अधिकारियों को जाँच करना चाहिये कि धानों में एक प्रकार की एक से अधिक फालतू जिल्द नहीं रखी जाती और यह प्रमाणित करना चाहिये कि उसका दुरुपयोग नहीं किया जा रहा है।

(9) मण्डल अधिकारियों को यह भी निश्चित कर लेना चाहिए कि पेशी क्लर्क इस बात की जाँच करते हैं कि उनके द्वारा जनरल डायरी केस डायरी अनुक्रमांक के अनुसार प्राप्त की जाती है।

(10) डायरियों में उपरिलेखन करने की अनुमति नहीं है। डायरी में खींची गई पंक्ति पर एक से अधिक पंक्तियाँ न लिखी जावें। खिंची हुई रेखा का जो भाग बिना प्रयोग का रह जावे, उसके एक सिरे से दूसरे सिरे तक आड़ी रेखा खींच देना चाहिए।

(11) जब कभी अभिलेखागार में खाली पृष्ठों सहित कोई जनरल डायरी या केस डायरी जमा की जावे, ऐसे प्रत्येक पृष्ठ को किसी राजपत्रित अधिकारी के हस्ताक्षरों के अधीन रद्द कर दिया जावे, ताकि उसका उपयोग न किया जा सके। ऐसे खाली पृष्ठों को अन्तर्विष्ट करने वाली जिल्द थाने/चौकी में न रखी जावे, जब तक कि उनकी न्यायालय में मामलों के विचारण के लिये अपेक्षा न हो। ऐसे मामलों में ऐसी जिल्दें मण्डल अधिकारी को प्रस्तुत की जावें, जो यथास्थिति जनरल केस डायरी के बिना प्रयोग किये गये पृष्ठों को रद्द कर दें।

292. इसके पूर्व कि जनरल केस डायरी की जिल्दें पुलिस (प्रारूप क्रमांक 217 ओर 34) वितरण के लिये अधीक्षक के कार्यालय के बाहर जावें, पृष्ठों को सावधानीपूर्वक यह देखने के लिये कि शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय के द्वारा कोई अशुद्धि नहीं की गई है और प्रत्येक जिल्द के प्रारम्भऔर अन्त में उसमें अन्तर्विष्ट पृष्ठों की संख्या और पाई गई कोई अशुद्धि को दर्शाते हुये एक टोप अंकित की जाना चाहिए। इस प्रविष्टि पर पुलिस अधीक्षक या अन्य किसी राजपत्रित अधिकारी के हस्ताक्षर किये जाना चाहिये।

293. जब केस डायरी को कोई जिल्द उपयोग में लाई जावे उसकी सूची के रूप में प्रारूप क्रमांक 280 जोड़ दिया जावे।

294. जनरल डायरी (पुलिस प्रारूप क्र० 217) थाने के भारसाधक अधिकारी के अधोक्षण में दो प्रतियों में लिखी जावेगी, जो उसमें की गई प्रविष्टियों के लिये उत्तरदायी होगा तथा उसमें, नित्य प्रति हस्ताक्षर करना चाहिये। "भारसाधक अधिकारी" में दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 2 () के अधीन अस्थायी रूप से भारसाधक अधिकारी रहता है। दूसरी प्रति थाने में रहेगी और मूल प्रति अधीक्षक को, सब डिवीजन के भारसाधक सहायक या उप पुलिस अधीक्षक व भेज दी जावेगी। डायरी पुलिस की कार्यवाही और उन्हें रिपोर्ट की गई घटनाओं का या जिनकी उन्हें सूचना मिले, डायरी एक पूर्ण, किन्तु संक्षिप्त अभिलेख होगा। निम्नलिखित पैरा में वर्णित अपवाद के सिवाय प्रथम इत्तिला रिपोर्ट, केस डायरी या पृथक रिपोर्ट में समावेश विवरणों को डायरी में लिखने की आवश्यकता नहीं है।

295. जनरल डायरी में निम्नलिखित मामले लिखे जावें :-

(1) प्रातः परेड की रिपोर्ट, किसी अधिकारी या सिपाही की अनुपस्थिति का कारण।

(2) भारसाधक अधिकारी द्वारा अवशेष धन का सत्यापन और मालखाने का निरीक्षण।

(3) दैनिक कर्त्तव्यों का विवरण और आकस्मिक अवकाश का अनुदान।

(4) कर्त्तव्यों, स्थानान्तरण और अवकाश पर पुलिस अधिकारियों का प्रस्थान और उनके आगमन ।

(5) सभी कत्र्तव्यों, यथा फेरे या कर्तव्य आदेशिकाओं की तामील, निरीक्षण और अन्वेषण के पालन को रिपोर्ट।

(6) थाने का प्रधान मोहर्रिर के कर्त्तव्यों के प्रभार का हस्तान्तरण।

(7) सन्तरियों को पदस्थ और पद मुक्त किया जाना जबकि उनको पैरा 59 के अनुसार उप-निरीक्षण या प्रधान कान्सटेबिल द्वारा पदस्थ या पदमुक्त किया जाना हो।

(8) मकद धन की प्राप्ति और वितरण।

(9) यह तथ्य कि पुलिस ने किन्हों सम्पत्ति पर कब्जा किया है, ऐसी सम्पत्ति के संक्षिप्त विवरण और उनके निपटारे के लिये किये गये कार्य के सहित।

(10) थाने पर की गई गिरफ्तारियों।

(11) बाहर जाने वाले बन्दियों के मामलों में उनको हथकड़ियाँ लगाने या न लगाने के कारणों के अभिकधन सहित बन्दियों का आगमन और प्रस्थान।

(12) थाने पर बन्दियों की जमानत स्वीकार करना।

(13) चैक रसीद (प्रारूप क्रमांक 341 या 347) क्रमांक सहित, थाने से उस गाँव का, जहां से अपराध, सूचित हुआ हो, अन्तर और दिशा और संज्ञेय अपराधों के मामले में उस गाँव से एक वर्ष में अद्यान्त रिपोर्ट किये गये अपराधों की संख्या, अपराधों की रिपोर्ट।

(14) उन सभी घटनाओं की रिपोर्ट, जिनकी रिपोर्ट के अधीन की जाती हो या जो पुलिस या मंजिस्ट्रेट के द्वारा किसी कार्यवाही की अपेक्षा रखती हों या जिसको जिला प्राधिकारियों को सूचित किया जाना चाहिये।

(15) रिपोर्ट पर की गई कार्यवाही।

(16) प्राप्त किये गये और कागजों के विवरण।

(17) राजपत्रित अधिकारियों और निरीक्षकों द्वारा थाने के निरीक्षण।

(18) प्रत्येक मास की पहली और सोलह तारीख को पुलिस द्वारा कब्जे में ली गई और निपटारे के विचाराधीन मालखाने में विद्यमान सम्पत्ति का विवरण।

(19) पहली और सोलह तारीख को लम्बित निर्देशों और आदेशों की सूची।

296. दिन के दौरान, उन घटनाओं को जिनका निर्देश करती हों, सभी प्रकार की रिपोर्ट तत्काल प्रविष्ट की जावे। निम्नलिखित घटनाओं की रिपोर्ट भी रात के दौरान तत्काल प्रविष्ट को जाय

() सभी अपराध और घटनायें जो भारसाधक अधिकारी द्वारा तत्काल कार्यवाही की जाने की अपेक्षा रखती हों।

() बन्दियों, धन और सम्पत्ति को आगमन और प्रस्थान।

() जब पैरा 59 के अधीन किसी अधिकारी द्वारा किया जाये तो सन्तरियों को पदस्थ और भार मुक किया जाना।

297. जब तक कि अधीक्षक डाक या जावक की अन्य रोति का कोई अधिक अच्छा समय विहित न करे, जनरल डायरी प्रत्येक दिन के लिये सूर्यास्त पर बन्द कर दो जावेगी और रात्रि के दौरान की गई प्रविष्टियाँ आगामी दिन का भाग रहेंगी |

298. जब कभी जनरल डायरी की कोई प्रविष्टि जिला या सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट के ध्यान में लाई जावे, अधीक्षक या तो डायरी को मूल रूप में या उसकी प्रति भेजेगा।

299. (1) जब कभी किसी न्यायालय द्वारा पुलिस अधीक्षक या उसके अधीनस्थ किसी पुलिस अधिकारों पर डायरी प्रस्तुत करने के लिये किसी आदेशिका की तामील की जावे या दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 172 में न आने वाली किसी दशा में न्यायालय से डायरी प्रस्तुत करने के लिये कोई आवेदन पत्र प्राप्त हो, पुलिस अधीक्षक डायरी को न्यायालय में प्रस्तुत किये जाने और उसके द्वारा निरीक्षण किये जाने की अनुज्ञा और उससे उत्पन्न होने वाली साक्ष्य दिये जाने की अनुमत्ति प्रदान करेगा, जब तक कि उसके अभिमत में उसका प्रकटीकरण जन-हित के प्रतिकूल न हो या उसको निर्धारित करने के लिए कोई उचित कारण विद्यमान न हो।

2.- () उच्चतर प्राधिकारियों से नामतः राज्यपाल, भारत सरकार के सचिव, भारत सरकार, या प्रान्तीय सरकार या जो ऐसे उच्चतर प्राधिकारियों से पत्र-व्यवहार का विषय बने हों, या

अन्य सरकारों से, चाहे विदेशी हों या संघीय, से बाहर निकलने वाली दस्तावेजों के सम्बन्ध में पुलिस अधीक्षक की सामान्य कार्यालयीन प्रणाली के माध्यम से, यथास्थिति भारत सरकार या प्रान्तीय सरकार की सहमति, न्यायालय में उन दस्तावेजों की प्रस्तुत करने के लिए सहमत होने या उन पर आधारित साक्ष्य की अनुमति देने के पूर्व, प्राप्त कर लेना चाहिये जब तक कि कागज प्रकाशन के लिये अभिप्रेत हों या औपचारिक या दिनचर्या के स्वरूप के न हों, जब उच्चतर प्राधिकारियों को निर्देश करने से मुक्त रहा जा सके।

() उपरोक्त नियम एक व दो () में विनिर्दिष्ट किये गये कागजों की दशा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को उन विषयों के पत्र व्यवहार को, जो सामान्यतया गोपनीय माने जाते है या जिसका प्रकटीकरण उसके अभिमत में जनहित के प्रतिकूल होगा या उन मामलों की जो किसी अन्य सम्बन्ध में सरकार या अन्य किसी पक्ष के बीच विवादाधीन हो या उसके बीच उनसे मतभेद उत्पन्न हो गया हो, प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं देगा।

3.- (1) उपरोक्त नियम एक या दो में वर्णित दस्तावेजों के बारे में शंका की दशा में, पुलिस अधीक्षक को सदैव से ही पुलिस महानिरीक्षक से आदेशों के लिये निर्देश करना चाहिये। यदि ऐसा विचार किया जावे कि दस्तावेज पेश करने की अनुज्ञा विधारित की जाना चाहिये, पुलिस अधीक्षक या तो सम्बन्धित दस्तावेजों के साथ स्वयं न्यायालय में उपस्थित होगा और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को धारा 123 या 124 के अधीन दिये गये विशेष अधिकारों का दावा करेगा या यह नोचे अंकित प्रारूप में एक आदेश जारी करेगा जो उस सरकारी अधिकारी द्वारा, जो दस्तावेज के साथ साक्ष्य देने के लिये न्यायालय में उपस्थित होने के लिये अपेक्षित किया गया हो, प्रस्तुत किया जावेगा और उसे यह स्पष्ट कर देना चाहिये के यह न्यायालय में दस्तावेज पेश करने को पा उनसे उत्पन्न साक्ष्य देने के लिए स्वतन्त्र नहीं है।

(2) पुलिस अधीक्षक को न्यायालय के पीठासीन अधिकारी से उन आधारों के बारे में, जिन पर दस्तावेज बुलाई गई हो, पत्र व्यवहार करने से बचना चाहिये। उसे न्यायालय के आदेशों को मानना चाहिये और उसे दस्तावेज के साथ न्यायालय में स्वयं उपस्थित होना चाहिये या अन्य किसी को उपस्थित रखने को व्यवस्था करना चाहिये और उपरोक्त उपनियम (1) में बताई गई रीति से कार्य करना और यदि चह विशेष अधिकार का दावा करे तो उसे आवश्यक प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना चाहिये।

आदेश का प्रारूप

न्यायालय...................................................से…………………….से सम्बन्धित कार्यालयीन फाइल को……………………………………… पर प्रस्तुत करने के लिए समन।

() मैं समन में वर्णित फाइल के साथ................को उपस्थित होने और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 123 या 124 के अधीन विशेषाधिकार का दावा करने के लिए निर्देशित करता हूँ।

() मैं उस फाइल से, जिसके लिए आदेश के अधीन विशेषाधिकार का दावा किया गया है, किसी साक्ष्य देने की अनुमति को विधारित करता हूँ।

मेरी ओर से न्यायालय को यह अभ्यावेदन किया जाना चाहिये कि ये फाइलें राज्य के अधिकारियों से सम्बन्धित अप्रकाशित………………….………….कार्यायलीत अभिलेख………………………. गोपनीय विषय जिनका प्रकटीकरण भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 123/124 के आशयों के लिए जनहित के विरुद्ध होगा, अन्तर्विष्ट करती है और उक्त अधिनियम की धारा 162 के दृष्टिकोण से फाइलें न्यायालय द्वारा निरीक्षण के किए जा संकने योग्य नहीं है।

दिनांक                                                                                                                                                        पुलिस अधीक्षक

300. पुलिस प्रक्रिया का यह सर्वमान्य सिद्धात है कि उन स्रोतों और अभिकर्ताओं का ज्ञान, जो गोपनीय सूचनायें प्रदान करते हैं, उन्हों अधिकारियों को होना चाहिये, जो उन्हें सेवायोजित करते हों या जिनके बारे में पुलिस दल के प्रधान विनिश्चय करें और गोपनीय अभिलेखों तथा दस्तावेजों की गोपनीयता बनाये रखने के लिए सभी पूर्वानिधानियों का प्रयोग किया जाना चाहिए।

इसलिए पुलिस बल का कोई सदस्य पुलिस महानिरीक्षक के सामान्य या विशेष आदेशों के सिवाय, बल के भीतर या बाहर के किसी व्यक्ति को सूचना का स्रोत या वह माध्यम, जिससे उसे सूचना प्राप्त हुई हो, न तो प्रकट करेगा और न उससे प्रकट करने की अपेक्षा की जावेगी।

पुलिस बल का कोई सदस्य, बल के बाहर के किसी व्यक्ति को किसी गोपनीय अभिलेख दस्तावेज या ऐसे दस्तावेजों से प्राप्त होने वाली किसी सूचना को पुलिस महानिरीक्षक के सामान्य या विशेष आदेशों के सिवाय संचारित नहीं करेगा।।

जब पुलिस बल के बाहर के किसी व्यक्ति को किसी गोपनीय सूचना का संचार करना आवश्यक हो, सूचना का स्रोत या वह माध्यम जिससे सूचना प्राप्त हुई हो, की अभिदर्शित करने से बचने के लिये अधिकतम सतर्कता अपनाई जाना चाहिये। रिपोटों को संक्षिप्त किया जाकर पदों में विभाजित किया जावे और किसी भी कारण से मूल रिपोर्ट या उस रिपोर्ट की प्रति को संचारित किया जाये।

टीप- गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया एक्ट की धारा 57 की उपधारा (1) में वर्णित अपराधों के करने में प्रवृत्त, या उनके करने या षड्यन्त्र रचने, उनके करने या करने की तैयारी करने वाले व्यक्तियों से सम्बन्धित गोपनीय सूचना का प्रकट या संसूचित किया जाना, ऐसे नियमों और अंदेशों से शासित होती है, जैसा कि सरकार उक्त अधिनियम की धारा 58 के प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये जारी करे।

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