
अध्याय 31
पारितोषिक
464. इनाम चार प्रकार के होते हैं-
(क) अपराधियों की गिरफ्तारी और दोषसिद्धि की परिणामजनक सूचनाओं के लिए घोषित इनाम।
(ख) अच्छी सेवा के निश्चित कार्यों, वीरता, प्रशिक्षण में विशेष गुण सम्पन्न कार्य और वार्षिक शस्त्रचालन में अच्छे अंक प्राप्त करना, बन्दूक चालन प्रतियोगिता के लिये इनाम।
1(ग) पारितोषिक जो गांव के चौकीदारों/स्पेशल पुलिस फोर्स के पोर्टरों को उत्कृष्ट सेवाओं के लिये और विशेष सेवाओं के लिये दिये जाते हैं।
(घ) उत्तर प्रदेश विभाग के उल्लिखित विभागों और न्यायालयों, निजी संवादों, या व्यक्तियों द्वारा भुगतान किये गये इनाम। पद (क) और (ख) के इनाम उसी अनुदान से भुगतान किए जाते हैं और प्राइवेट व्यक्तियों तथा पुलिस बल केअराजपत्रित अधिकारियों को दिए जा सकते हैं। पद (क) के, परन्तु पद (ख) के नहीं, इनाम चौकीदारों को भी दिये जा सकते हैं। अनुदान प्रान्तीय होता है, किन्तु प्रान्तीय रिजर्व के लिये उपबन्ध कर दिये जाने के पश्चात्, वह महानिरीक्षक द्वारा विभाजित और उप महानिरीक्षक द्वारा प्रशासित किया जाता है, जो विशेष मामलों में, बड़े इनाम देने को रक्षित रखते हुए, जिलों और खण्डों के बीच उसे आवंटित कर देता है। प्रत्येक जिले या खण्ड को आबंटित की गई धनराशि वह अधिकतम राशि मानी जानी चाहिए, जो औसत दशाओं में व्यय की जा सकती है और कोई अतिरिक्त अनुदान नहीं दिया जावेगा, जब तक कि यह न दर्शा दिया जाये कि विशेष परिस्थितियों ने, उदाहरणार्थ असाधारण महत्व के किसी मामले में, धनराशि को अपर्याप्त बना दिया है। पुलिस अधीक्षक व्यय पर सतर्क दृष्टि रखेगा और उसे विशेष गुण सम्पन्न मामलों में ही इनाम भुगतान चाहिए। उन्हें रेन्ज के उप-महानिरीक्षक की बचत के आधिक्य की सम्भावित राशि से अधिक से अधिक 15 जनवरी से आवश्यक किये जाने वाले किसी समायोजन को करने में समर्थ बनाने के लिये सूचित करना चाहिए।
उप-महानिरीक्षक बचत का पुनर्विनियोग करने के लिए अधिकृत है।
(1. शा०आ०सं० 4316/आ-7-922 (31)/77 दिनांक 24-11-70)
अपराध अन्येषण विभाग के पद (क) और (ख) के इनाम के लिए प्रान्तीय अनुदान से पृथक् होता है। अपराध अन्वेषण विभाग के उप महानिरीक्षक उसके बारे में प्रान्तीय अनुदान के सम्बन्ध में रेन्त के उप-महानिरीक्षक की भाँति ही शक्तियों का प्रयोग करता है।
465. पद (क) के इनाम विनिर्दिष्ट सीमाओं तक निम्नलिखित अधिकारियों द्वारा दिए जा सकते [ पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रत्येक अपराधी के लिये 250/- रु० तक।
महानिरीक्षक या उप-महानिरीक्षक अपराध अनुसंधान विभाग द्वारा प्रत्येक अपराधों के लिये 2000/- रु० तक। सचिव गृह (पुलिस) विभाग द्वारा प्रत्येक अपराधी के लिये 5000/- रु० तक। इस श्रेणी में इनाम, साधारणतया गिरफ्तारी और दोपसिद्धि दोनों के लिये ही न कि अकेले गिरफ्तारी के लिये प्रस्तावित किये जाना चाहिये, किन्तु यह अधिकारी जी उसे, देने का प्रस्ताव करने को सशक्त हो, घोषणा के शब्दों का अवधारण कर सकता है। उस मामले में जिसमें घोषणा गिरफ्तारी और दोषसिद्धि के लिये हो, वह पूरे इनाम या उसके किसी भाग को केवल गिरफ्तारी के लिए, या तो (1) गिरफ्तारी के तुरन्त पश्चात् या विचारणा के दौरान या पूर्व, यदि कार्यवाही का संरक्षित किया जाना संभाव्य हो, उसका समाधान हो जायें कि विचारण से जो भी विदित हो, वह गिरफ्तारी कराने वाले पुलिस अधिकारी या अन्य किसी व्यक्ति के कार्य के गुण को प्रभावित नहीं कर सकेंगा, या (2) विचारण के पश्चात् जब गिरफ्तारी करने वाले पुलिस अधिकारी वा अन्य कोई व्यक्ति के दीप के न होते हुए, दोरसिद्धि न हुई हो, भुगतान किये जाने का आदेश दे सकेगा। किसी अपराधों को " मुर्दा या जीवित" पकड़ने के लिये इनाम प्रस्तावित नहीं किये जाने चाहिए।
नोट- अपराधियों को गिरफ्तार कराने तथा दण्डित कराने के लिए सूचना देने पर पुरस्कार दिये जाने की व्यवस्था। उपरोक्त मैटर इसी पुस्तक के पेज नम्बर 439 पर देखें।
466. (ख) श्रेणो के इनाम, पुलिस अधीक्षक द्वारा अपने प्राधिकार में प्रत्येक घटना के लिए 100 रुपयों की सीमा तक और उप-महानिरीक्षक को मंजूरी से 1,000 रुपये तक भुगताए जा सकते हैं। लम्बी राशियों के लिए उप-महानिरीक्षक के माध्यम से महानिरीक्षक की मन्जुरी प्राप्त कर ली जानी चाहिये। इस श्रेणी को इनाम देने के लिये निम्न सिद्धान्त लागू होंगे-(1) निरीक्षक को और उप-निरीक्षकों को दिये गये इनाम छुद्र नहीं होना चाहिए, 10 रुपये से
कम का इनाम उप-निरीक्षकों की दिया जाना उसका मान घटाने वाला है। इनाम की नाप को वेतन से यान्त्रिक रूप से आनुपातिक नहीं होना चाहिए और उसका मुख्य श्रेय किसी कान्नाटेबिल या अवर अधिकारी से सम्बन्धित हो, उसे इनाम का परिणाम मिलना चाहिये। उच्चतर पंक्ति के अधिकारियों द्वारा सम्पन्न किये गये अच्छे कार्यों का उनको चरित्र नामावली में अच्छी प्रविष्टियों द्वारा मान्यता दी जावेगी, किन्तु साधारण मामलों में अल्पतम ही धन में दिया जाये। अपने अधीनस्थों के व्यय पर अपनी प्रवृत्ति पर निगरानी रखो जाकर उसका दमन किया जाये
(2) लोक अभियोजक और सहायक लोक अभियोजक को इनाम तब तक नहीं दिया जाना चाहिये जब तक कि कोई मामला विशेष रूप से कठिन या जटिल म रहा हो और अभियोजन अधिकारी को इनाम देने के लिये यह पर्याप्त कारण नहीं है कि अन्वेषणकर्ता कर्मचारी मण्डल द्वारा भली प्रकार तैयार किए गए मामले का परिणाम न्यायालय में सफल अन्त निकला। परीक्षा आपत्तियों को न्यूनतम करने के लिए, अधिकारियों को, आबकारी और जुये के मामलों के सिवाय रेन्ज उप-महानिरीक्षक की मन्त्री के बिना इनाम नहीं दिया जाना चाहिये।
(3) दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 109 के अधीन गिरफ्तारियों के परिणाम में होने वाली चुश्त गिरफ्तारियों उचित रूप से पुरस्कृत की जा सकेंगी, परन्तु साधारणतया दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 110 के मामले में कोई इनाम नहीं दिया जाना चाहिए। यदि अन्वेषणकर्ता अधिकारी इस धारा के अधीन मामलों का अभियोजन करने में खर्चे जेब से व्यय करे, तो भरपाई की दृष्टि से मामला उप-महानिरीक्षक के ज्ञान में लाया जाना चाहिए।
(4) किसी अधिकारी को "सामान्य अच्छे कार्य" के लिए ही नहीं, परन्तु विशेष कार्य या विशेष कौशल के लिए जैसे अच्छी गिरफ्तारी, अच्छी खोज या किसी विशेष अवसर पर अच्छी सेवा के लिए हो इनाम दिया जाना चाहिये। वार्षिक अस्त्र चालन और बन्दूक चालन प्रतियोगिता में निशानेबाजों में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिये नकद इनाम भी स्वीकार है। जब कभी किसी मामले, का पत्ता लगे, इनाम नियत परिपाटी के रूप में नहीं दिया जाना चाहिए। या न वे साधारण कर्तव्यों के कुशल या निर्वहन यथा अच्छी भर्ती के लिए रिजर्व निरीक्षकों या प्रशिक्षणाधीन रंगरूटों को नियंत परिपाटी के अनुसार, प्रशिक्षण के लिए इनाम नहीं दिया जाना चाहिये, ऐसे इनाम उन्हीं रंगरूटों को दिया जाना चाहिये जो प्रशिक्षण के दौरान विशेष अभिरुचि और असाधारण कुशाग्रता और दक्षता दशायें।
(5) प्रशिक्षण में रंगरूटों को दैनिक परिपाटी में इनाम नहीं देना चाहिये। ऐसे इनाम न केवल ऐसे रंगरूटों को दिया जाना चाहिये जो प्रशिक्षण काल में विशेष योग्यता और अलौकिक तीव्र बुद्धि और दक्षता प्रदर्शन करते हों।
467. वर्ग (ग) के इनाम प्रान्तीय अनुदान से, जिससे जिलों को वार्षिक आवंटन किया जाता है, भुगताये जाते हैं। दोनों शीर्षों (1) गुण सम्पन्न सेवा और (2) विशेष सेवाओं, के अधीन चौकीदारों 'को अनुदत्त इनामों के वितरण पृथक् से बनाये रखे जाना चाहिये। नियत कर्तव्यों के तत्काल और स्फूर्तिमुक्त कार्य सम्पन्नता के लिए चौकीदारों की इनाम देने की आवश्यकता पर दृष्टिक्षेप नहीं किया जाना चाहिए।
शीर्ष (1) के अधीन अच्छे सेवा के विशिष्ट कार्य या ऐसो वरीयता आयेगी, जिसके सदृश्य कार्यों के लिए पुलिस बल के सदस्य के पद (ख) के इनाम पाते, शीर्ष (2) के अधीन सामान्य अच्छे कार्य, जन्म और मरण की अच्छी रिपोर्ट देना, दुश्चरित्रों की गतिविधियों को तत्काल रिपोर्ट देता, हिस्ट्री-शोट के व्यक्तियों और अपराधी जन जातियों के सदस्यों की निगरानी, विशेष रेलगाड़ियों की रक्षा करना, मेलों और उत्सवों में सड़कों की निगरानी करना, आयेंगे। पुलिस अधीक्षक एक अवसर पर एक व्यक्ति के लिए किसी भी शीर्ष के अधीन अधिकतम 20 रुपये की राशि तक इनाम मंजूर करने के लिए सशक है। इससे अधिक बड़े व्यक्तिगत इनामों के लिए उप-महानिरीक्षक की मंजूरी प्राप्त की जानी चाहिए।
प्राप्तकर्ताओं की तुरन्त भुगतान किया जावे और यदि राजपत्रित अधिकारी द्वारा या उसकी उपस्थिति में भुगतान न किया जावे, तो उनके थाने के परिदर्शन करने वाले प्रथम राजपत्रित अधिकारी उनसे यह निश्चय कर लेना चाहिये कि उन्होंने धन प्राप्त कर लिया है, शीर्ष (2) के अधीन इनाम मुक्त रूप से दिए जायें। जिले के आबंटन को पूर्ण रूप से व्यय किया जावे और इसके किसी भाग को बचत के रूप में अन्य शीर्यों को अन्तरित न किया जावे। चौकीदारों को इनाम देने के लिये अतिरिक्त अनुदान के आवेदन पत्रों पर सहानुभूति से विचार किया जायेगा।
468. वर्ग (क), (ख) या (ग) का कोई इनाम पुलिस अधीक्षक के लिखित आदेश के बिना नहीं भुगताये जायेंगे। अधीक्षक का प्रवाचक विहित्त रूप में इनाम का रजिस्टर बनाये रखेगा। यह इनाम नामावली से रजिस्टर के स्तम्भ 1 से 5 भरेगा और उस रजिस्टर को पुलिस अधीक्षक के पास पेश करेगा, जो प्रविष्टियों को इनाम नामावली से तुलना करेगा और उस पर हस्ताक्षर करेगा। मास में दो या तीन बार रजिस्टर लेखपाल को सौंपा जावेगा जो उस दिन तक के आद्योपान्त इनामों के लिये जो बिल तैयारी के दिनांक तक मन्जूर किये गये हों, इनाम देयक (बिल) तैयार करेगा। रजिस्टर के अन्तिम स्तम्भ में वह बिल का नम्बर और दिनांक, निकाली गई राशि और उपलब्ध सवभष अंकित करेगा।
469: उन इनामों की दशा में, जिनके लिये उप-महानिरीक्षक या उच्चतर प्राधिकारी की मन्जूरी अपेक्षित हो, इनाम रजिस्टर से एक संक्षेप प्रारूप नं० 227 में दो प्रतियों में मन्जूर करने वाले प्राधिकारी को अग्रेषित किया जावेगा। यदि आवेदन मन्जूर हो जावे, मन्जूर करने वाले प्राधिकारी द्वारा सम्यक् रूप से हस्ताक्षरित एक प्रति जिले को लौटा दी जावेगी और मूल रूप में उस आकस्मिक विल के, जिसमें कोषालय से इनाम की धनराशि निकाली गई हो, संलग्न कर दी जावेगी। अधीक्षक सब डिवीजन के भारसाधक, सहायक या उप-अधीक्षक से, न्यायालयों से और निरीक्षकों और थानेदारों से इनाम के लिये सिफारिशें प्राप्त करेगा। ऐसी सिफारिशों के साथ केस डायरी या अन्य कागजात रहना चाहिए और अधीक्षक को, इसके पूर्व कि वह इनाम रजिस्टर में किसी प्रविष्टि को चिन्हित करे, उसे अपना यह समाधान कर लेना चाहिए कि इनाम औचित्यपूर्ण है। प्रत्येक मामले में मन्जूर किये गये कुल इनाम अधीक्षक द्वारा इनाम रजिस्टर में शब्दों में लिखे जाने चाहिए।
470. वर्ग (घ) सभी इनाम चरित्र नामावली प्रविष्टियाँ करने में समर्थ बनाने, और अभिलेख तथा वार्षिक प्रविवरण के प्रयोजनों के लिये इनाम रजिस्टर में दर्शाये जाने चाहिये, परन्तु अधीक्षक को इन्हें अपने हाथ से प्रविष्ट करने की आवश्यकता नहीं है। अन्य विभागों द्वारा दिये गये वर्ग (घ) के इनाम पुलिस अधीक्षक को विवरण के लिये भेजे जाने चाहिए। धनराशि को रोकड़ में जमा किया जाना चाहिए और तब साधारण रीति से वितरण किया जावे।
पुलिस अधीक्षक को भेजी गई धनराशि लेखाओं से उक्त प्रयोजन के लिये आकस्मिक धन के रूप में होता है और कोषालय में निक्षेपित किये जाने की आवश्यकता नहीं है, परन्तु यह प्राप्त होने के दिनांक से एक माह के अन्दर वितरित कर दिया जावे। न्यायालय द्वारा पुलिस को मन्जूर किये गये इनामों की दशा में, हाईकोर्ट जनरल रूल्स (क्रिमिनल) 1911 के अध्याय नी नियम 7 यह अपेक्षा करती है कि न्यायालय उसे "पुलिस से प्राप्तियाँ" के रूप में कोषालय में निक्षेप कर दें और पुलिस अधीक्षक को धन वापस लौटाने का प्रमाणक अनुदत्त करने की व्यवस्था करें जो जमा होने के सत्यापन के पश्चात् कोषालय द्वारा ग्रहण और सम्मानित किया जावेगा। ऐसे इनाम भी पुलिस अधीक्षक द्वारा उनकी प्राप्ति के दिनांक से एक मास के भीतर वित्तरित कर दिये जाना चाहिये।
टीप- (1) भारतीय आयुध अधिनियम, 1959 का 54वाँ के अधीन मामलों में न्यायालय द्वारा पुलिस या अन्य व्यक्तियों को भुगताये गये इनामों की दशा में, मन्जूर करने वाला न्यायालय अपेक्षित धनराशि का एक बिल तैयार करेगा, और कोषालय को प्रस्तुत करेगा तथा "पुलिस से प्राप्तियों" से अन्तरण द्वारा शीर्ष "27-एडमिनिस्ट्रेशन आफ जस्टिस क्रिमिनल कोर्ट्स रिवार्ड्स अन्डर दि आर्म्स एक्ट" में नामे और रक्षिं "उन्नीस पुलिस मिस्लेनिअस अदर मिस्लेनिअस रिसीप्ट्स" में तद्नुरूप जमा के द्वारा धन प्राप्त करेगा। तत्पश्चात् पुलिस अधीक्षक न्यायालय से वापसी का प्रमाणक प्रस्तुत करेगा, जो कोषालय द्वारा जमा होने के सत्यापन के पश्चात् स्वीकार और सम्मानित किया जावेगा। इस प्रकार इनाम दिये गये व्यक्तियों में वितरण करने के लिये कोषालय से निकाली हुई धनाशि "29-पुलिस डिस्ट्रिक्ट एक्जीक्यूटिव फोर्स रिवार्ड्स" पर प्रभारित की जावेगी। पुलिस अधीक्षक इनामों का, उनकी प्राप्ति से एक माह के भीतर वितरण करेगा, और देखेगा कि पुलिस के प्राप्तकर्ताओं को चरित्र नामावली में इनामों के तथ्य प्रविष्ट किये गये हैं। इस टीप में अभिव्यक्ति "पुलिस अधीक्षक, में, कुमाऊँ डिवीजन में राजस्व पुलिस को भुगतान योग्य इनामों के सम्बन्ध में, नैनीताल, गढ़वाल और अल्मोड़ा के उप आयुक्त सम्मिलित होंगे।
(2) सार्वजनिक जुआ अधिनियम के अधीन अपराधों की दोपसिद्धि पर जुर्माने की वसूली से प्राप्त धन शीर्ष "इक्कीस ऐडमिनिस्ट्रेशन आफ जस्टिस जनरल फीस, फाइन्स और फोरफीचर मजिस्ट्रेट फाइन्स और फोरफीचर्स" में प्रादेशिक राजस्व में जमा किया जावेगा। ऐसे मामलों में अच्छी सेवाओं के लिये पुलिस अधिकारियों को कोई इनाम पुलिस बजट शीर्ष 92 से भुगतान किये जायेंगे।
471, पुलिस अधिकारियों को प्राइवेट व्यक्तियों या कम्पनियों से नीचे इनाम प्राप्त नहीं करना चाहिए। इन साधनों से प्राप्त इनाम तथा पुलिस अधिकारियों की सेवाओं के लिये भुगतान किया गया धन और वे सभी इनाम, समपहरण, शास्तियाँ या उन इनामों समपहरण और शास्तियाँ के वे भाग, जो विधि के अनुसार सूचना देने वाले को, जब सूचना किसी पुलिस अधिकारी द्वारा दी गई हो भुगतान योग्य हो शीर्ष "उन्नीस पुलिस मिस्लेनिअस अदर मिस्लेनिअस रिसोप्ट्स" में जमा करने के लिये कोषालय में पुलिस अधीक्षक द्वारा भुगतान दिये जायें।
जब धन कोषालय में जमा कर दिया जावे, तो उसके समान राशि पुलिस बजट के शीर्ष "23 पुलिस नान प्लान बी डिस्ट्रिक्ट एक्जीक्यूटिव फोर्स (ए) डिस्ट्रिक्ट पुलिस रिवार्ड्स" से निकालो जाकर सम्बन्धित पुलिस अधिकारियों और सिपाहियों में वितरण की जा सकेगी। निक्षेप के समय बिना पूर्ति की गई शर्तों पर निक्षेपित किये गये इनामों के, उदाहरणार्थ जब कोई प्राइवेट व्यक्ति या कम्पनी चोर की गिरफ्तारी या चोरी गई वस्तु की पुनः प्राप्ति के लिये इनाम का प्रस्ताव करे, मामले में भी इसी प्रक्रिया का अनुसरण किया जावेगा। (1) उस शर्त की पूर्ति न होने, जब जनता के किसी सदस्य द्वारा कोई इनाम सशर्त रूप से निक्षेप किया गया हो या (2) जनता को प्रदाय की गई पुलिस के अतिरिक्त व्यय भार के मामले में वापसी के कारण प्रभार शीर्ष "उन्नीस पुलिस-डिडक्ट-रिफन्ड्स" में नामे डाले जावेंगे। प्रभारी की ऐसी सभी मदों के जाम किये जाने के समर्थन में बिल के नगद भुगतान करने के पूर्व कोषालय अधिकारी द्वारा सत्यापन किया जावेगा। यदि प्रदेश में कोई शासक, राजकुमार या अन्य कोई विशिष्ट परिदर्शक, किसी अराजपत्रित पुलिस अधिकारी को धन के रूप में न होने वाला उपहार, कोई उपहार देने की इच्छा करे, संबंधित अधिकारी को उपहार में दी गई वस्तु ग्रहण कर लेना चाहिये, परन्तु तत्काल पश्चात् उसे अपने पुलिस अधीक्षक को सौंप देना चाहिये जो मामले को पुलिस महानिरीक्षक को निर्देशित करेगा। पुलिस महानिरीक्षक उस वस्तु को संबंधित अधिकारी द्वारा रखे जाने की मंजूरी देगा, जब तक कि पर्याप्त कारण से (यथा उसके अत्यधिक मूल्य) वह उसके पास रखे जाने को अस्वीकार करने के कारण न देखें। बाद वाली दशा में, मामले को सरकार को आवेश के लिये निर्देशित किया जाये।
472. मेले को निधि, से मेले में कर्त्तव्यरत पुलिस के रुकने के भत्ते के उपलक्ष में पुलिस अधिकारियों को भुगतान योग्य धन और निजी मनोरंजनों के लिये प्रदाय किये जाने के कारण वसूल किये गये धन के भाग को इनामं रजिस्टर में प्रविष्ट करने की आवा चुकता नहीं है और उसके बारे में आफिस मैन्युअल के पैरा 158 में निर्धारित रीति से व्यवहार किया जावे।
473. ज्योंही किसी ऐसे मामले में, स्थानीय से अधिक महत्व के होने वाले यां जिसमें यह कल्पना करने का कारण हो कि अपेक्षित व्यक्ति ने जिले का परित्याग कर दिया है, के मामले में जब कोई (क) श्रेणी का इनाम प्रस्तावित किया जावे, अपराध अन्वेषण विभाग की अपराध शाखा के पुलिस अधीक्षक को क्रिमिनल इन्वेस्टीगेशन गजट में प्रकाशन के लिए एक अधिसूचना भेजी जावेगी।
474. लिपिकीय कर्मचारी मण्डल के सदस्य इनाम प्राप्त करने के लिए प्राइवेट व्यक्तियों की रीति की भांति अहर्य है। उन्हें, उनके द्वारा अपने लिपिकीय कर्तव्य से साधारण क्रम में किये गये कार्यों के लिए कोई इनाम नहीं दिये जा सकते।
रिजर्व लाइन के अध्यापक पुलिस इनाम अनुदान से इनाम प्राप्त करने के लिये अर्ह नहीं है। असाधारण परिस्थितियों में अपवाद के रूप में किये गये अच्छे कार्यों के लिये महानिरीक्षक की मंजूरी से "मानदेय" के अनुदान के लिए फाइनेन्शियल हैंड बुक, जिल्द दो देखिये।
475. "क" श्रेणी का भत्ता प्राप्त करने वाले अशिक्षित कान्नस्टेबिल को एक अच्छे कार्य की पट्टी दी जावेगी। कान्सटेबिलों को अन्य अच्छे कार्यों की पट्टियाँ नहीं दी जायेंगी।
476. ग्राम चौकीदारों को सदाचरण की पट्टियों और भत्ते देने के लिए निम्नलिखित नियम शासित करते हैं-
(1) अपने कर्त्तव्य के निर्वाह में विशेष रूप से प्रशंसनीय आचरण के लिए ग्राम चौकीदार को अधीक्षक द्वारा एक अवसर पर एक या दो सदाचरण पट्टियाँ दी जा सकती हैं।
(2) ऐसी दो पट्टियाँ धारण करने वाला व्यक्ति अपने वेतन के अतिरिक्त आठ आने मासिक या भत्ता
प्राप्त करने के लिये अधिकारी होगा।
(3) अधिकतम भत्ता दो रुपये आठ आने हैं।
(4) सदाचरण पट्टियाँ वर्दी की बाई बाँह के अन्तिमं सिरें से तीन इंच ऊपर और एक दूसरे से चौथाई इंच दूर. धारण की जायेंगी। वे बाँह के चारों ओर चौड़े लाल रंग के वस्त्र की चौड़ी प्रत्येक आधा इंच होगी।
(5) दण्ड के रूप में सदाचरण की पट्टियाँ और भत्ते का समपहरण करने का आदेश दिया जा सकता है।
(6) सदाचरण पट्टियों और भत्तों के अनुदान के सभी अनुदान और उनको वापस लेने के सभी ..आदेश, चौकीदार की अपराध नोट बुक में, अंग्रेजी में किसी राजपत्रित अधिकारी द्वारा एक संक्षिप्त टीप बनाते और हस्ताक्षरित करते हुये, प्रविष्ट की जायेंगी।
(7) भत्तों पर कुल व्यय बजट के उपबंध से अधिक नहीं होना चाहिये।