पैरा 328 से 337 अध्याय 26 UP पुलिस रेगुलेशन

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 26

अकाल के समय पुलिस अधिकारी को मार्ग दर्शन के लिए निर्देश

328. जब कलेक्टर अकाल के समय परीक्षा कार्य और निर्धन आवास खोले, वह प्रभावित क्षेत्र के प्रत्येक थानें में प्रयत्न करने के लिये पुलिस अधीक्षक को जिले के भीतर घूमने वालों की सहायता के लिये अकाल अग्रिम के रूप में एक धनराशि भेजेगा। हर थाने का भारसाधक अधिकारी अपने अग्रिम की पूर्ति उस अवशेष से करेगा, जिसे पुलिस अधीक्षक अपने पास सुरक्षित रखे और पुलिस अधीक्षक अपने अग्रिम की पूर्ति कलेक्टर से करेगा। थाने का भारसाधक अधिकारी अपने मण्डल के चौकीदार को, भुखमरों और घुमक्कड़ों को जो उन्हें मिले, जिनको वे निकटतम सहायता स्थल (निर्धन अकाल के समय पुलिस अधिकारी को मार्ग दर्शन के लिए निर्देश आवास, सहायता कार्य या थाना जैसी कि स्थिति हो) तक ले ले जाने या निर्देशित करने के लिए अनुदेश देगा। फेरों के कान्सटेचिलों द्वारा अनुरक्षण की पद्धति भी भुखमरे घुमक्कड़ों की ट्रक और जिला सड़क, अस्थायी विश्राम गृह और सराय और कस्बों और गांवों की गलियों और उप मागों जैसे सम्भावित स्थानों में खोज करने के लिए संगठित की जाना चाहिए, और उनको निकटतम सहायता स्थल मर भेज देना चाहिये। कान्सटेबिलों और चौकीदारों द्वारा कोई बाल प्रयोग नहीं किया जाना चाहिये। यदि घूमने वाला सहायता स्थल पर जाने से निषेध कर दे, तो उसे अकेला छोड़ दिया जाये। यदि यह चलने-फिरने के लिए बहुत दुर्बल हो, उसे सहायता दी जानी चाहिए या वहां ले जाना चाहिए, ले जाने और मार्ग में भोजन के व्यय अकाल अग्रिम से भुगतान किया जा सर्कता है और थाने के भारसाधक अधिकारी को बिना निर्देश किये, आपातकालीन मामलों में यह कान्सटेबिल या चौकीदार के द्वारा भी किया जा सकता है।

329. जब कि कोई घूमने वाला मुसीबत में थाने आये, उसे भोजन करा जाये यदि उसे भोजनं की आवश्यकता हो और उसे निकटतम निर्धन आवास या राहत कार्यों के लिए निर्देशित किया जाने या ले जाया जावे। यदि वह चलने में समर्थ होते हुये भी सहायता स्थल पर जाने से निषेध कर दे, उसे घूमने वाले की भाँति न खिलाया जावे, और उसे थाने तक भोजन प्राप्त करने के लिए आने और निर्धन आवासों से बचने के लिए प्रोत्साहित न किया जावे। निर्धन आवास तक यात्रा करने का व्यय अग्रिम भुगतान किया जा सकता है, यदि घूमने वाला चलने फिरने के लिए अत्यन्त दुर्बल हो। थाने पर दिया जाने वाला खाना इस प्रकार का होना चाहिये कि जैसा घूमने वाले की दशा देखते हुये थानेदार उपयुक्त समझे। दुर्बल व्यक्तियों को वह वस्तु दी जावे जो सरलता से पच सके। उन व्यक्तियों को जो अपनी स्वयं देखभाल करने के लिए समक्ष हो, भोजन या जैसा उन्हें सर्वोत्तम लगे, भोजन खरीदने के लिये धन दिया जा सकता है। भोजन का खर्चा या उसके बदले में दिया जाने वाला धन पुनरावृत्त अकाल संहिता उ०प्र० 1912 के पैरा 128 (क) के द्वारा विहित आश्रितों के भत्ते से अधिक न होगा।

330. थाने के प्रत्येक भारसाधक अधिकारी को पुलिस अधीक्षक को एक साप्ताहिक संक्षिप्त प्रारूप क्र० ३० छः भेजना चाहिये, इस प्रारूप को नारंगी कागज पर छपी हुई प्रतियां सरकारों केन्द्रीय मुद्रणालय से पुलिस अधीक्षक द्वारा प्राप्त की जा सकती है. जो उन्हें थानों को वितरित करेगा।

वहन के खर्चे में हुआ कोई व्यय पृथक से दर्शाया जाना चाहिये। यह विवरण इस प्रकार भेजा जाना चाहिये कि रविवार को मुख्यालय पहुँच सकें। अधीक्षक उसी प्रारूप में कलेक्टर को प्रविवरण इस प्रकार प्रस्तुत करेगा कि वह उसके पास सोमवार को प्रातः पहुंच जाये और थानों को अग्रिम की पूर्ति के लिये धनराशि प्रेषित कर देगा। यदि धनराशि के आगमन के पूर्व अग्रिम प्राप्त हो जावे, भारसायक अधिकारी इस तथ्य को तत्काल रिपोर्ट करेगा और धनराशि को पूर्व अपेक्षा में धन की किसी अन्य राशि, जो उसके नियन्त्रण के अधीन हो, व्यय कर देगा। प्रारूप क्र० इ० छः की संक्षिप्त के साथ, खाने का भारसाधक अधिकारी को एक सूची सहायता दिए गए प्रत्येक पुरुप, महिला और बच्चों के नाम और निवास तथा उन प्रत्येक पर व्यय की गई धनराशि को दशति हुए भेजना चाहिये। यदि किसी व्यक्ति को सहायता न दी गई हो तो एक रिपोर्ट भेजी जानी चाहिए कि संक्षिप्त खाली है।

331. यदि कलेक्टर उचित समझे तो पुलिस को, सहायता कार्यों के लिए कोष की तिजोरी की रक्षा करने और वहाँ व्यवस्था बनाये रखने के लिए सेवायोजित किया जा सकता है, परन्तु नियम के तौर पर उन्हें पश्चात्वर्ती रीति से नहीं लगाया जावेगा। पुलिस को सफाई के करारों को प्रभावशील करने के लिए गश्त करने में उपयोग नहीं किया जावेगा।

332. यदि कलेक्टर से या उसके आदेश के अधीन कोई धन ग्राम की सहायता में सौंपे गये व्यक्तियों को वितरण करने के लिए प्राप्त हो, तो वह प्राप्तकत्र्ताओं के लिए रखा जाय और ज्यों ही वे आ पहुँचे उनमें वितरित कर दी जावे। यदि इस रीति से धन भेजा जावे। रसीद लेने और हिसाब रखने के लिए अनुदेश जारी किये, जायेंगे।

333. मृतक के धर्म के अनुसार पुलिस के द्वारा लावारिश लाशें गाड़ अथवा जला दी जावें। इसका व्यय थाने के आहत और अभियुक्त व्यक्तियों इत्यादि से परिवहन के लिये स्थायी अग्रिम से किया जावेगा, न कि अकाल के अग्रिम से।

334. यदि अकाल सहायता किसी भी थाने पर पुलिस के कर्तव्यों में गम्भीर वृद्धि कर देती है. थाने के भारसाधक अधिकारी को पुलिस अधीक्षक को कर्मचारी मण्डल में वृद्धि करने के लिए आबेदन करना चाहिये।

335. जब सहायता कार्य बन्द हो जावे, थाने का भारसाधक अधिकारी अकाल अग्रिम की अवशेष राशि को कोपालय या पुलिस अधीक्षक को भुगतान करके वापस लौटा देगा।

336. नियतकालिक रिपोर्ट थानों से पुलिस अधीक्षक को उसके द्वारा विहित तारीखों पर,

(1) मूल्य में सामान्य वृद्धि या भोजन की कमी के कारण से होने वाले अपराधों में वृद्धि।

(2) आवश्यकता पीड़ित  या भूखे  व्यक्तियों का घुमनः।

(3) पुलिस मंण्डल से व्यक्तियों का बाहर जाना या उसके भीतर आ जाना।

(4) मृत्यु दर की असाधारण वृद्धि।

(5) भूख से मरने या अत्यधिक कमी के कोई मामले।

(5) कमी के लक्षणों में कोई अवनति के सम्बन्ध में प्रस्तुत करना चाहिये।

पुलिस अधीक्षक नियतकालिक रूप से जिला मजिस्ट्रेट को आपने प्रभार में हीले वाले सम्पूर्ण क्षेत्रफल के बारे में ऐसी ही रिपोर्ट भेजेगा।

337. थाने का भारसाधक अधिकारी अकाल प्रशासन या किसी वृद्धि या अवनति या मुसीबत से सम्बन्ध किसी ऐसे महत्वपूर्ण तथ्य की रिपोर्ट भेजेगा जिसके बारे में उसका यह विचार हो कि जिला अधिकारियों को उसे जानना चाहिये, परन्तु वह उसे जानते नहीं। उसे अकाल सहायता के भारसाधक अधिकारी की, अपने मण्डल में सहायता कार्यों और निधन आवासी के स्थल के बारे में सूचना फैलाकर और व्यक्तियों को प्रोत्साहित करके, भय प्रस्तुत करके तथा उन सिद्धान्तों को, जिन पर अकाल सहायता प्रशासित की जा रही है, स्पष्ट करने और उबित ठहराते हुये, सहायता करेगा।

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