
277. दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 432 के अधीन (जुमांने के अतिरिक्त) इस संहिता के अधीन प्रदत्त आदेश के कारण भुगतान योग्य और जिसकी वसूली की रीति अन्यथा अभिव्यक्त रूप से उपबन्धित न की गई हो, इस प्रकार वसूल योग्य होना मानो यह जुर्माना हो।
278. जंगम सम्पत्ति की कुर्की और बिक्री के द्वारा जुमाने की वसूली के लिए वारन्ट का निष्पादन निम्नलिखित रोति से किया जावेगा-
(1) साधारणतया ऐसा वारन्ट उस थाने को लोकअभियोजक के माध्यम से निर्देशित किया जावेगा, जिसके मण्डल के भीतर अपराधी की सम्पत्ति स्थित हो और थानेदार द्वारा उसे अपने किसी भी अधीनस्थ पुलिस अधिकारी के नाम पृष्ठांकित कर सकेगा।
(2) दायित्वाधीन व्यक्ति से पहले जुर्माना अदा करने की मांग की जावेगी।
(3) यदि मांग किए जाने पर पुलिस अधिकारी को भुगतान कर दिया जावे, तो उसके द्वारा धन निकटतम कोषालय या उप कोषालय को भुगतान दिया जावेगा और वारन्ट न्यायालय को निष्पादन के पृष्ठांकन सहित लौटा दिया जावेगा।
(4) यदि भुगतान तत्काल न किया जावे, तो वारन्ट को ले जाने वाला पुलिस अधिकारी जुर्माने किये गये व्यक्ति की इतनी जंगम सम्पत्ति का जो जुर्माने के परिसमापन के लिए पर्याप्त हो, कुर्क कर लेगा। वह तब वारन्ट को मजिस्ट्रेट को इस पृष्ठांकन और टिप्पणी के साथ कि क्या किया गया है, लौटा देगा।
(5) यदि कुर्क की गई सम्पत्ति की बिक्री आवश्यक हो तो बिक्री पुलिस अधिकारी द्वारा नहीं अपतुि मजिस्ट्रेट के आदेशों के अधीन नाजिर या कुर्क अमीन द्वारा की जावेगी।
279. जब कोई धन पुलिस अधिकारी द्वारा कोषालय या उप-कोषालय को भुगतान किया गया हो उसे एक पास बुक (उच्च न्यायालय प्रारूप क्रमांक 3) के साथ और एक पृथक संक्षेप उसमें प्रविष्ट, हर प्रविष्टि के सम्बन्ध में दो प्रतियों में भेज दिया जावे।
कोषालय या उप-कोषालय का भारसाधक अधिकारी धन की प्राप्ति पर पास बुक और संक्षेप की एक प्रति पर हस्ताक्षर करेगा और उन्हें लौटा देगा।
इस प्रकार लौटाये गये संक्षेप को थाने का भारसाधक अधिकारी उस न्यायालय को जिसने भुगतान करने का आदेश दिया हो और यदि न्यायालय सेशन न्यायालय हो तो जिला मजिस्ट्रेट को अग्रेषित कर देगा।
थाने के भारसाधक अधिकारी के पास बुक का संक्षेप हो जाने पर मजिस्ट्रेट ऐसे अधिकारी को एक चेक रसीद (उच्च न्यायालय प्रारूप भाग सोलह क्रमांक 3) अग्रेषित करेगा। चेक रसीद अंग्रेजी या हिन्दी, उर्दू या दोनों में तैयार की जा सकती है, किन्तु किसी भी दशा में वह राशि और संख्या जो प्राप्त धन को दर्शाती हो, जिसके लिये रसीद जारी की गई हो, न्यायालय के पीठासीन अधिकारी स्वयं अपने हाथ से लिखी जाएगी और रसीद पर हस्ताक्षर करना चाहिये।
280. जब कोई पुलिस उस न्यायालय की जिसके द्वारा यह जारी किया गया हो स्थानीय सीमाओं के बाहर किसी समन का निष्पादन करे, वह प्रारूप 42 में एक शपथ-पत्र निकटतम मजिस्ट्रेट के सामने बनायेगा। शपथ-पत्र और समन की दूसरी प्रति उस न्यायालय को लौटा दी जावेगी जिसके द्वारा वह जारी किया गया था।
थानों के सभी भारसाधक अधिकारियों को शपथ-पत्र के छपे प्रारूप किया जायेंगे।
281. किसी असंज्ञेय अपराध के मामले में गिरफ्तारी का कोई वारन्ट किसी भी कारण से किसी भी पुलिस अधिकारी द्वारा 6 सप्ताह से अधिक न रखा जाये। जब कोई वारन्ट बिना निप्पादित किये हुये लौटाया तो न्यायालय को उसके निष्पादित न हो सकने के कारणों की पूरी रिपोर्ट दी जानी चाहिये।
282. अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के बाहर निवास कर रहे त्रुटिकर्ता के विरुद्ध स्थानीय निकायों के लिए, जिनकी ओर से वह वारन्ट जारी किया गया हो, मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किया गए बारन्ट के सिवाय, नगरपालिका, जिला बोर्ड, छावनी बोर्ड, अधिसूचित क्षेत्र या कस्बा क्षेत्र के करों की वसूली के लिये जारी किये गये वारन्टों का निष्पादन पुलिस का कर्तव्य नहीं है और सम्बन्धित स्थानीय निकाय के कर्मचारी मण्डल के किसी सदस्य द्वारा किया जाना चाहिये।
पुलिस तामील के लिए किसी भी प्रकार की अनियमित आदेशिकायें स्वीकार करने से इन्कार करेगी।