पैरा 428 से 463 ख अध्याय 30 UP पुलिस रेगुलेशन

पैरा 428 से 463 ख अध्याय 30 UP पुलिस रेगुलेशन

अध्याय 30

पदोन्नतियाँ

428. दल के राजपत्रित पदों पर पदोन्नतियाँ परिषद् सहित गर्वनर द्वारा की जाती हैं। महानिरीक्षक विशेषतया सरकार द्वारा चुना गया अधिकारी होता है। उप महानिरीक्ष के पद पर पदोन्नत्तियां अधीक्षक के पद के अधिकारियों में से चयन द्वारा की जाती है। शेष से सम्बन्धित उपबन्धों, जी नीचे पाये जायेंगे, के अध्याधीन रहते हुये सहायक अधीक्षक की अधीक्षक के पद पर पदोन्नति वरिष्ठता द्वारा की जाती है, परन्तु यह कि कोई अधिकारी उक्त पंक्ति पर पदोन्नत नहीं किया जावेगा, जब तक कि उसकी सेवा अनुमोदित न हो चुकी हो और जब तक कि वह कनिष्ठ अधिकारियों की परीक्षा में उत्तीर्ण और प्रारूप क्रमांक 528 (आठ) में प्रमाण-पत्र प्राप्त न कर चुका हो। सहायक अधीक्षकू और अधोक्षक नियतकालिक वेतन वृद्धि सेवा के पहले से 26 वर्ष तक तत्समय के मान के अनुसार, सहायक अधीक्षक कनिष्ठ और अधीक्षक वरिष्ठ मात्त में रहते हुए, प्राप्त करते हैं। कनिष्ठ मान में रहने वाले अधिकारों जब वरिष्ठ मान में कार्य कर रहे हों, वही वेतन प्राप्त करेंगे, जो उस काल की सेवा वाला वरिष्ठ मान का अधिकारी प्राप्त करता है, परन्तु यह कि जिसके सेवा काल के लिए कोई बरिष्ठ मान विहित न किया गया हो, वरिष्ठ मान में विहित न्यूनतम दर पर चेतन निकालेगा।

कनिष्ठ में नवीं साल की सेवा के पश्चात् और वरिष्ठ मान में सत्रहवें वर्ष की सेवा के पश्चात् दक्षता अवरोध प्रवर्त होते हैं। कोई अधिकारी जी वरिष्ठ मान के लिये उपयुक्त नहीं समझा जावे, उसकी नियुक्ति की प्रथम अवरोध पार करने की अनुमति नहीं दी जावेगी और कोई अधिकारी, जो प्रथम श्रेणी के जिले का प्रभार ग्रहण करने वाले के लिए उपयुक्त न समझा जावे, उसे द्वितीय अवरोध पार करने की अनुमति नहीं दी जावेगी। उच्चतर वेतन पर पुलिस अधीक्षकों के पदों पर सीमित संख्या में नियुक्तियां चयन द्वारा की जाती हैं।

भारतीय पुलिस अधिकारियों की ज्येष्ठता, जो सारवान रूप से वरिष्ठ पदों पर नियुक्त किये जाते हैं. भारत सरकार के गृह विभाग के अधिसूचना क्रमांक एक 41/26 पुलिस, दिनांक 18 फरवरी, 1930 द्वारा जारी किये गये इन्डियन पुलिस (रेगुलेशन आफ सीनियर्टी रूल्स, 1930 द्वारा शासित होती है।

429. भारतीय पुलिस के अधिकारियों के लिये, जो सितम्बर 1894 के पश्चात् नियुक्त किये गये थे और जो निरीक्षक की पंक्ति से पढ़ीन्नत नहीं हुये थे, ज्येष्ठता निम्न नियमों द्वारा अवधारित की जाती

एक जून, 1903 और 3 अप्रैल, 1918 के बीच नियुक्त किये गये अधिकारियों के लिए-

(1) अधीक्षक का पद प्राप्त करने पर सरवान रूप से वे सेवा में उनकी नियुक्ति के आदेश के अनुसार पद क्रम सूची में रखे जायेंगे, न कि उनके द्वारा विभागीय परीक्षा में उत्तीर्ण होने में सफलता के दिनांक से, परन्तु यह कि सेक्रेट्री आफ स्टेट द्वारा उसी वर्ष में लियुक्त किये गये अधिकारी आनुपातिक रूप से उस क्रम में रखे जावेंगे, जिसमें वे प्रतियोगिता परीक्षा में पास हुये हों।

3 अप्रैल, 1915 के पश्चात् नियुक्त किये गये अधिकारियों के लिए-

(2) सहायक पुलिस अधीक्षक अपनी मूल ज्येष्ठता विभागीय परीक्षा के उत्तीर्ण होने के दिनांक की सापेक्षता के बिना धारण करेंगे, किन्तु वह अधिकारी, जो अपनी नियुक्ति के दिनांक से दो वर्ष के भीतर इन विभागीय परीक्षाओं में उत्तीर्ण होने में विफल हो जायें, सेवा से मुक्त कर दिये जाने के दायित्वाधीन होंगे। विशेष मामलों में स्थानीय सरकार, विभागीय पट्रीक्षा के किसी अंश में उत्तीर्ण होने के लिये किसी अधिकारी को छूट दे आकती है या उस अमवावधि में विस्तार कर सकती है. जिसमें उक्त परीक्षा में उत्तीर्ण हुआ जावे। ऐसे मामलों में स्थानीय सरकार अपने विवेका अनुसार ऐमी वृद्धि विधारित

(1. 1986. (1) एस०एल०आर० 631 इला० हरिओम प्रकाश अग्रवाल बनाम भारत सरकार.

2. 1986 (1) एस०एल०आर० 481 पंजाब: दिलीप सिंह बनाम पंजाब राज्य.

3. 1986 (1) एस०एल०आर० 500 सु०को०: अरुण कुमार चटर्जी बनामनएस०ई० रेलवे,)

कर सकती हैं, जिसके लिये वह अधिकारी परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर पात्र होता, या इस तथ्य को कि वह परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हुआ है, सापेक्ष न मान कर ऐसी वृद्धियाँ मंजूर कर सकती है।

1919-20 की पुनः रचना योजना के अधीन अथवा प्रथम नवम्बर, 1912 की प्रेस विज्ञप्ति के अधीन नियुक्त किये गये अधिकारी आयु के अनुसार, विभागीय परीक्षा में उत्तीर्ण होने के दिनांक को सापेक्ष न मानते हुए, वर्गीकृत किये जायेंगे।

430. प्रथम नियुक्ति पर उप अधीक्षक की ज्येष्ठता नियुक्ति के दिनांक के अनुसार होगी। एक हो दिनांक को दो या अधिक उप अधीक्षकों के नियुक्त किये जाने की दशा में उनकी ज्येष्ठता का क्रम परिषद् सहित गवर्नर द्वारा अवधारित किया जावेगा।

इस समय तीन वेतनमान हैं- नामतया (1) 1913 के पूर्व का, (2) 1913 के उपरान्त का तथा (3) 1939 में एक दक्षता अवरोध सहित पहली दशा में पुनरावृत्त, और अंतिम दो दशाओं में दो दक्षता अवरोध सहित। पुलिस उप अधीक्षक उस काल के वेतनमान में जिसमें वे नियुक्त किये गये हों, नियतकालिक वेतन वृद्धि प्राप्त करते हैं। उच्चतर वेतन की सीमित संख्या के पदों पर पदोन्नति चयन के द्वारा होती है और उन विशेष गुण सम्पन्न पुलिस उप अधीक्षकों में से जो 1913 के पूर्व के वेतनमान में ही, की जावेगी। भारतीय पुलिस के लिये पुलिस उप अधीक्षक की नियुक्ति चयन द्वारा की जाती

431. चयन के वगों के लिये स्थायी अथवा अस्थायी रूप से पदोन्नत पुलिस अधीक्षक या उप अधीक्षक उन वर्गों में उनकी अपेक्षा ज्येष्ठ समझे जायेंगे, जिन्हें उन्होंने अधिक्रमित किया हो।

432. प्रान्तीय पुलिस बल के अधिकारियों का वेतन, जो नवम्बर 1912 के पश्चात् भारतीय पुलिस के लिये पदोन्नत किये गये हाँ, या उस सेवा के संवर्ग में लाये गये पदों पर प्रभारी रहे हों, गृह विभाग (पुलिस) की अधिसूचना क्रम क्रमांक एफ-113 तीन/24, दिनांक 20 मार्च, 1928 में पुनः उद्धृत किये गये परिषद् सहित सेक्रेट्री आफ स्टेट के संकल्प से किये गये निम्नलिखित नियमों के द्वारा विनियमित होता है:-

नियम 1928

(1) इन नियम में :-

() "प्रान्तीय सेवा", से प्रान्तीय पुलिस सेवा अभिप्रेत है।

() पदोन्नत अधिकारियों में निम्नलिखित सम्मिलित होंगे :

() कोई अधिकारी जो प्रान्तीय पुलिस से भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नत किया गया हो, और

() प्रान्तीय सेवा का ऐसा अधिकारी, जो भारतीय पुलिस सेवा के संवर्ग पर लाये गये पद पर प्रभारी रूप में कार्यरत हो।

() "वास्तविक वेतन" से अभिप्राय उस सेवा के संवर्ग में अपनी सरवान स्थिति के कारण, प्रान्तीय सेवा का कोई अधिकारी समय मान में, या प्रान्तीय सेवा के चयन वर्ग में, जैसी स्थिति हो, वेतन प्राप्त करने के अधिकारी हों, वेतन से होगा।

() "मान लिए गये वेतन" से अभिप्राय उस वेतन से है जो प्रान्तीय नेवा के चयन वर्ग का कोई अधिकारी इस सेवा के तत्समय के'मात में प्राप्त कर रहा होता, यदि वह चयन वर्ग में पदोन्नत न किया जाता

() "कनिष्ठ समयमान" और "वरिष्ठ समयमान" से अभिप्राय भारतीय पुलिस सेवा के क्रमशः कनिष्ठ समयमान और वरिष्ठ समयमान से है।

(2) () कनिष्ठ समयमान में नियुक्त किए गये किसी अधिकारी का प्रारम्भिक आधार वेतन, उसकी पदोन्नति के प्रत्येक अवसर पर उसके वास्तविक वेतन के कनिष्ठ समयमान के प्रक्रम के ठीक आगे नियत किया जावेगा, यदि वह चयन किए गये संवर्ग में न हो अथवा उसका मान लिया गया वेतन, यदि वह उस वर्ग का हो, या और यदि उसका वास्तविक या मान लिया गया वेतन, जैसी स्थिति हो, कनिष्ठ समयमान के अधिकतम के बराबर या उससे अच्छा हो तो उस मान के अधिकतम पर, नियत किया जायेगा। वरिष्ठ समयमान पर होने वाले पद पर पदोन्नत्ति द्वारा नियुक्त किये गये किसी अधिकारी का प्रारम्भिक आधार वेतन, ऐसी पदोन्नति के प्रत्येक अवसर पर, वरिष्ठ समयमान के उस प्रक्रम पर कनिष्ठ समयमान के उस प्रक्रम के अनुरूप जिस पर वह इस नियम के अधीन नियत किया जाता, यदि वह अधिकारी उस समयमान के पद पर नियुक्त किया गया होता, नियत किया जायेगा और दोनों में से किसी भी दशा में तत्पश्चात् वह यथास्थिति निम्न या वरिष्ठ समयमान में वृद्धियाँ प्राप्त करेगा।

परन्तु यह कि इस प्रकार गणित किया गया अधिकारी का आधार वेतन, किसी भी समय उस वेतन से अधिक न होगा, जो वह यथास्थिति कनिष्ठ या वरिष्ठ, समयमान में प्राप्त कर रहा होता, यदि प्रान्तीय सेवा में, यदि कोई हो, तो उसकी अराजपत्रित सरकारी सेवा के अद्धांश सहित उसकी कुल सेवायें भारतीय पुलिस सेवा में रही होतीं।

() यदि और जब तक पद () के अनुसार किसी पदोन्नत अधिकारी का गणित किया गया आधार वेतन, उसके पदोन्नत समय के वास्तविक वेतन से कम हो, वह न्यूनतम के बराबर राशि का व्यक्तिगत वेतन प्राप्त करेगा।

() यदि और जब तक कि वरिष्ठ समयमान में पद धारण करने वाले पदोन्नत अधिकारी के पद () के अधर्थान किसी व्यक्तिगत वेतन के तहत, आधार वेतन के बराबर उसकी पदोन्नति के दिनांक को 175 रुपये मासिक से अधिक नहीं होती है वह, पद () के परन्तुक में वर्णित सीमा के अध्याधीन रहते हुये, न्यूनता की राशि के बराबर व्यक्तिगत वेतन प्राप्त करेंगे।

() यदि और जब तक कि इस नियम के पूर्वोक्त पदों के अधीन गणित पदोन्नत अधिकारी का वेतन, जो भारतीय पुलिस के संवर्ग के लाये गये पद पर प्रभारी के रूप में पूर्व में कार्य कर चुका हो, उस वेतन से कम हो, जो कि वह अंतिम बार प्रभारी के रूप में प्राप्त कर रहा था, वह न्यूनता के बराबर वेतन प्राप्त करेगा।

(3) यदि पदोन्नत अधिकारी का वास्तविक या माना गया वेतन बढ़ाया जाता है, जबकि वह भारतीय पुलिस के संवर्ग पर लाये गये पद पर प्रभारी के रूप में कार्यरत हो, उसका वेतन इन नियमों के अनुसरण में इस प्रकार पुनः गणित किया जावेगा मानो कि वह वृद्धि के दिन पदोन्नत हुआ है।

(4) भारतीय पुलिस के समयमान में वेतन वृद्धियाँ पदोन्नत अधिकारी को इस मान के किसी भौ क्रम में एक वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर ही अनुदत्त की जावेंगी, किन्तु वेतन की कोई दी हुई दर एक वर्ष की गणना करने में उस दर पर प्रभारी सेवा की समयावधि का खण्ड हिसाब में गिना जावेगा।

(5) यह नियम 8 नवम्बर, 1927 के बाद पदोन्नत किये गये सभी अधिकारियों पर लागू होंगे, किन्तु उसके पूर्व के अधिकारी व्यक्ति अपने वेतन को 8 नवम्बर, 1927 को पुनरावृत्त किये जाने हेतु चुनाव कर सकते हैं।

नियम जो पूर्व में लागू थे

प्रान्तीय से भारतीय पुलिस सेवा में 7 अप्रैल, 1921 (30 अप्रैल 1921, नियम (2) की दशा में) और 8 नवम्बर, 1927 के बीच पदोन्नत अधिकारियों के मामले में शासित करने वाले निम्नलिखित नियम निर्देश के लिये पुनः उद्धृत किये जाते हैं:-

(1) प्रान्तीय पुलिस सेवा से पदोन्नत किसी अधिकारी का प्रारम्भिक वेतन, उसकी पदोन्नति के प्रत्येक अवसर पर, प्रान्तीय पुलिस सेवा में उसके वर्तमान वेतन के प्रक्रम में ठीक आगे, भारतीय पुलिस सेवा के लिए निम्न समय मान के वेतन पर नियत किया जावेगा। जैसा ही वह ज्येष्ठ पद धारण करता है, वह ज्येष्ठ मान के तद्नुरूप प्रक्रम में बढ़ जावेगा।

(2) जब प्रान्तीय पुलिस सेवा का कोई अधिकारी, उस सेवा में निम्न राजकीय पुलिस समयमान के अधिकतम के बराबर या उच्चतर वेतन प्राप्त करता हो, और राजकीय सेवा पद या श्रेष्ठ पद पर पदोन्नत हो जावे, वह उस वेतन से जिसे वह प्रान्तीय सेवा में प्राप्त कर रहा था, 175 रुपये से अधिक के प्रक्रम में उच्चतम समयमान में, या यदि ऐसा कोई प्रक्रम न हो तो उस सेवा में उसके कुल वेतन और 175 रुपये के ठीक उपरोक्त मान में लाया जावेगा, परन्तु यह कि प्रान्तीय सेवा से इस प्रकार पदोन्नत कोई अधिकारी उससे अधिक प्राप्त नहीं कर सकेगा, जो राजपत्रित पंक्ति पर सेवा के वर्षों की समान संख्या वाले भारतीय पुलिस सेवा का कोई अधिकारी श्रेष्ठतम समयमान के अधीन प्राप्त करने का पात्र होता।

(3) उसकी प्रान्तीय पुलिस सेवा में वेतन की किसी वृद्धि पर (चाहे प्रान्तीय पुलिस सेवा के उक्त समयमान वेतन की पुनरावृत्ति के या प्रान्तीय पुलिस सेवा समयमान के या प्रान्तीय पुलिस सेवा के चयन वर्ग पर पदोन्नति के परिणामस्वरूप) जब वह भारतीय पुलिस सेवा के पद पर प्रभारी के रूप में कार्यरत हो. ऐसा अधिकारी हाइ नियमों के नियम (1) और (2) में निर्धारित सिद्धान्तों के अनुसार पुनः गणना की गई भारतीय पुलिस के समयमान में, प्रान्तीय पुलिस सेवा में बढ़े हुये वेतन के आधार पर और ऐसी वृद्धि की दिनांक के प्रभाव से वेतन प्राप्त करने का पात्र होगा

(4) भारतीय पुलिस सेवा के वेतन के समयमान में वेतन वृद्धि, प्रान्तीय पुलिस सेवा से भारतीय पुलिस पद को धारण करने वाले को केवल उसके द्वारा उस मान के किसी प्रक्रम में एक वर्ष की सेवा पूर्ण कर लेने पर ही अनुदत्त किया जायेगा, किन्तु किसी दिये हुए वेतन की दर पर वर्ष की सेवा की गणना करने के प्रयोजन के लिये वेतन को उस दर पर प्रभारी के रूप में कार्य करने की समयावधि का खण्ड हिसाब में गिना जावेगा।

433. पुलिस महानिरीक्षक द्वारा सभी राजपत्रित अधिकारियों की गोपनीय व्यक्तिगत फाइलें बनाये रखी जाती हैं और उन पर तब विचार किया जाता है जब दक्षता अवरोध के परे या उन पदों पर जिन पर पदोन्नति चयन द्वारा की जाती है, राजपत्रित अधिकारी की पदोन्नति के लिये उपयुक्तता के सम्बन्ध में प्रश्न उत्पन्न होता है। अधिकारियों की अपनी व्यक्तिगत फाइलें देखने की अनुज्ञा नहीं है, परन्तु, गवर्नमेंट आर्डर की पुस्तिका में निर्धारित सिद्धान्तों का अनुसरण करते हुये महानिरीक्षक अपने अधीन सेवारत प्रत्येक राजपत्रित अधिकारी को नियतकालिक रूप से अधिकारी की व्यक्तिगत फाइल में प्रविष्ट की गई अभियुक्ति को, जो उन त्रुटियों के बारे में हो, जो महानिरीक्षक के अभिमत में () सुधारे जाने योग्य हों, और () अधिकारी को भावी पदोन्नति से वंचित करना सम्भाव्य संसूचित करेगा।.

434. निरीक्षकों की तरक्की वेतन वृद्धि के समयमान की स्थिति द्वारा शासित होती है (देखिये पैरा 463-)। दक्षता अवरोध के परे वेतन वृद्धि के निकाल के लिए मूलभूत नियम 25 के अधीन मन्जूरी देने के लिए सशक्त प्राधिकारी उप-महानिरीक्षक होता है। वार्षिक वेतन वृद्धि के विधारण के लिये मूलभूत नियम 24 के अधीन अधीक्षक द्वारा आदेश किये जा सकेंगे।

435. रिजर्व निरीक्षक की पंक्ति के लिये पदोन्नति निम्न रीति से की जाती है:-

() परिवीक्षाधीन उप-निरीक्षक को सम्मिलित करते हुये शाखा के उप-निरीक्षक की, जिसका रिजर्व निरीक्षक के पद के लिये उपयुक्त होना सम्भावित हो, रिवर्ज निरीक्षक की पंक्ति के लिये प्रशिक्षण हेतु अधीक्षक सिफारिश कर सकता है। जब सशस्त्र शाखा से कोई उपयुक्त उप-निरीक्षक उपलब्ध न हो, सिविल पुलिस के उपयुक्त उप-निरीक्षक की ऐसी सिफारिश की जाती है। इस प्रकार सिफारिश किये गए प्रत्येक उप-निरीक्षक का पहले उनके उप-महानिरीक्षक द्वारा परीक्षण और साक्षात्कार किया जावेगा। उप-महानिरीक्षक तब उनके, राज्य की चयन समिति के समक्ष उपस्थित होने के लिए मनोनीत करेगा, जिन्हें वह रिजर्व शाखा के लिए उपयुक्त समझे। राज्य चयन समिति द्वारा चयन किए गए उप-निरीक्षक प्रशिक्षण के ऐसे पाठ्यक्रम का अध्ययन करेगा, जैसा पुलिस महानिरीक्षक विहित करे।

() प्रशिक्षण के इस पाठ्यक्रम की सफलतापूर्वक समाप्ति पर, उसे रिजर्व निरीक्षक की पंक्ति पर पदोन्नत करने के लिए अनुमोदित रिजर्व उप-निरीक्षक की प्रान्तीय सूची में रखा जावेगा। इस सूची में ज्येष्ठता प्रान्तीय सूची में सम्मिलित किए जाने के चयन के दिनांक से अवधारित की जावेगी। उसी दिनांक पर चयन किए गए व्यक्तियों में सापेक्ष ज्येष्ठता अंतिम परीक्षा के द्वारा प्रकट होने वाले गुण के क्रम से नियत की जावेगी। दो या अधिक अभ्यर्थियों द्वारा बराबर अंक प्राप्त करने की दशा में उनके बीच ज्येष्ठता उनके उप-निरीक्षक के रूप में ज्येष्ठता के आधार पर अवधारित की जावेगी।

() रिजर्व उप-निरीक्षक की प्रान्तीय सूची में वे उप-निरीक्षक भी सम्मिलित होंगे, जो । अप्रैल, 1948 के पूर्व निरीक्षक के रूप में नियुक्त किए जाने के लिए अनुमोदित किए गए थे या जो 1 अप्रैल, 1948 के पूर्व सार्जेन्द्र कहलाते थे।

() रिजर्व निरीक्षक की पंक्ति पर पदोन्नति मुख्यालय के उप-महानिरीक्षक द्वारा सूची में ज्येष्ठता से की जावेगी, परन्तु यह कि :-

(1) अवर सेवारत अधिकारी को छोड़ा जा सकेगा या बारी-बारी से हट कर भी किसी विशेष अच्छे को पदोन्नत किया जा सकेगा, और

(2) चार मास की अवधि से अधिक की न होने वाली अस्थाई रिक्तियाँ रेन्ज के उप-महानिरीक्षक द्वारा, स्थानीय रूप से ज्येष्ठता की सापेक्षता के बिना सम्बन्धित जिले या रेन्ज के किसी अधिकारी को, जिनका नाम सूची में हो, या जहाँ, ऐसा अधिकारी उपलब्ध न हो, उस उप-निरीक्षक की पदोन्नति द्वारा, जिसका नाम अनुमोदित सूची में न हो, भरी जा सकेगी।

() मुख्यालय का पुलिस उप-महानिरीक्षक सूची से किसी भी नाम को हटाए जाने का आदेश किसी भी समय कर सकेगा, यदि उसके अभिमत में, अपने द्वारा अनुमोदित किया गया अधिकारी उसमें रखे जाने के लिए अनुपयुक्त हो, हटाए जाने का ऐसा आदेश, पैरा 508 में सम्मिलित किसी बात के होते हुए भी अन्तिम होगा।

436. लोक अभियोजक और मण्डल निरीक्षक के पद के लिए पदोन्नति प्रान्तीय आधार पर की जाती है।

प्रान्तीय महानिरीक्षक उन उप-निरीक्षकों की चार सूचियाँ बनाये रखवायेगा जो :-

(1) लोक अभियोजक ।

(2) मण्डल निरीक्षक ।

(3) अपराध अन्वेषण विभाग के निरीक्षक।

(4) केन्द्रीय अन्वेषण एजेन्सी, सरकारी रेलवे पुलिस में निरीक्षक के पद पर पदोन्नत किए जाने के लिए योग्य हों।

इन सूचियों में से किसी एक या अधिक में उप-निरीक्षकों के नामों को सम्मिलित करने के लिए मनोनयन प्रथन मामले में जिले और अपराध अन्वेषण विभाग की शाखाओं के पुलिस अधीक्षकों द्वारा और सरकारी रेलवे पुलिस के खण्ड (सेक्शन) अधिकारियों द्वारा किया जावेगा।

पुलिस अधीक्षक सूची क्रमांक तीन और चार के लिये अपने जिले में पदस्थ उप-निरीक्षक के नामों को, उनके अभिमत में उरपराध अन्वेषण विभाग या अपराध अन्वेषण एजेन्सी के विशेष कार्यों के लिये योग्यता रखते हैं, नामों को सम्मिलित करने के लिए मनोनीत कर सकेगा।

सूची क्रमांक 2 में सम्मिलित करने के लिए मनोनीत कोई उप-निरीक्षक सूची क्रमांक तीन या चार या दोनों में सम्मिलित किए जाने के लिए मनोनीतले किये जा सकेंगे, यदि उस अधिकारी के अभिमत में, जो उसको मनोनीत करे, वह अपराध अन्वेषण विभाग या अपराध अन्वेषण एजेन्सी में से किसी में निरीक्षक की पंक्ति पर पदोन्नत किये जाने के लिये उपयुक्त हो।

437. निरीक्षक सिविल पुलिस को कोटि में पदोन्नति निम्न रीति से की जाती है-

() ऐसे उप-निरीक्षक सिविल पुलिस जिन्होंने इस रूप से चयन के वर्ष की पहली अप्रैल को 10 वर्ष अन्यून सेवा की हो, निरीक्षक के पद पर पदोन्नति पाने के पत्र होंगे, रेन्ज का पुलिस उप-महानिरीक्षक पुलिस मुख्यालय को प्रति वर्ष निम्नलिखित सूची भेजेगा-

1. 1979 (2) एस०एल०आर० 395.

2. 1980 (1) एस०एल०आर० 46 इला०,

3. 1980 (2) एस०एल०आर०सु०को०

4. 1981 (1) एस०एल० आर०.

5. 1981 (1) एस०एल०आर० सु०को०

(1) पुलिस मुख्यालय द्वारा निर्धारित प्रपत्र में सिविल पुलिस के उन उप-निरीक्षकों की सूची जो ज्येष्ठता क्रमानुसार निरीक्षक के रूप में स्थानापन्न रूप में पदोन्नति पाने के लिये उपयुक्त समझे जाएँ।

(2) सिविल पुलिस के उन उप-निरीक्षकों की संक्षिप्त कारणों सहित, सूची जो स्थानापन्न रूप से पदोन्नत्ति पाने के योग्य न समझे जाय।

वैभागिक चयन समिति तत्पश्वात् सिविल पुलिस के उन उप-निरीक्षकों को ज्येष्ठता क्रमानुसार अंतिम समेकित सूची तैयार करायेगी जो स्थानापन्न रूप से पदोन्नति पाने के लिये उपयुक्त समझे जांय इस अन्तिम समकित सूची में से, शासनादेश द्वारा यथा गठित वैभागिक चयन समिति द्वारा स्थानापन्न रूम में पदोन्नति पाने के लिये स्वीकृत किये जाने के निमित्त अपेक्षित निरीक्षकों की संख्या के चौगुने लोगों को साक्षात्कार के लिये बुलाया जायेगा, समिति द्वारा किया गय्य मूल्यांकन योग्यता के आधार पर चयन के द्वारा किया जायेगा, अनुमोदित उम्मीदवारों की सूची तैयार की जायेगी जिसमें चयन किये गये उम्मीदवारों को उनकी ज्येष्ठता के क्रमानुसार रखा जायेगा जिन लोगों का नाम इसके पूर्व वर्ष की अनुमोदित सूची में होगा उनका स्थान परवर्ती वर्ष की अनुमोदित सूची के लोगों के ऊपर होगा।

() मौलिक रिक्तियां होने पर पैरा '' के अधीन तैयार की गई अनुमोदित सूची में रखे गये उम्मीदवारों में से उपयुक्तर्ता के आधार पर नियुक्ति की जायेगी। अवक्रमित (Passedover) उम्मीदवारों के दावों पर परवर्ती चयन में विचार किया जायेगा। यह चयन वैभागिक चयन समिति द्वारा किया जायेगा और मीलिक रिक्तियों की पूर्ति के लिए उम्मीदवारों का कोई अतिरिक्त साक्षात्कार नहीं किया जायेगा।

() मौलिक नियुक्ति के लिये चयन किये गये उम्मीदवारों को पुलिस विनियमावली के पैरा 403 (3) के उपबन्धों के अनुसार दो वर्ष तक परिवीक्षाधीन रखा जायेगा। पुलिस निरीक्षक के पद पर अस्थायी या स्थानापन्न रूप में उन्होंने जो सेवा की हो उसकी गणना परियोक्षा काल के लिये की जायेगी।

438. महानिरीक्षक वार्षिक रूप से लोक अभियोजक और मण्डल निरीक्षक पंक्ति पर स्थायी पदोन्नति के लिए अनुमोदित अधिकारियों की प्रान्तीय सूची में सम्मिलित किये जाने वाले नामों की कुल संख्या का अवधारण करेगा, और इस सूची में भरे जाने के लिए अपेक्षित उप-निरीक्षकों की संख्या चयन करने के लिये और स्थाई पदोन्नति के प्रयोजन के लिए उनके ज्येष्ठता के क्रम का अवधारण करने के लिए एक समिति संयोजित करेगा।।

439. (1) निरीक्षण के अपने वार्षिक दौरे में रेंज के सभी उप-महानिरीक्षकों को, यह सुनिश्चित करने के लिये कि निरीक्षक की पंक्ति पर भारसाधक या स्थाई रूप से पदोन्नति के लिये अनुमोदित सभी उप-निरीक्षकों ने वर्ष में किस रीति से कार्य किया है तथा वह सामान्य ख्याति, जो उन्होंने धारण की हैं, जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक से उनके बारे में पूछताछ करते हुए, उनसे उन थानों के निरीक्षण करते हुये, जहाँ वे पदस्थ हों, जब सम्भव हो; व्यक्तिशः साक्षात करके, पग उठायेगा। अप्रैल में भ्रमण के मौसम की समाप्ति पर प्रत्येक रेन्ज का उप-महानिरीक्षक प्रत्येक अधिकारी के लिए अपना अभिमत यह स्पष्ट वर्णन करते हुये कि क्या वह उसके नाम को अनुमोदित सूची में रखने की या उसमें से निकाल देने की अनुशंसा करता है, अभिलिखित बाद वाली दशा में, उसे अपनी अनुशंसा के कारण देना चाहिए।

परन्तु यह उन जिलों में जहां कलेक्टर/उप-आयुक्त, डिवीजन का भारसाधक कलेक्टर/उप-आयुक्त हो, इस पैरा के अधीन उसके कार्य अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (कार्यपालक) द्वारा प्रयोग किये जावेंगे।

(2) अपराध अन्वेषण विभाग का उप-महानिरीक्षक और रेलवे पुलिस के सहायक महानिरीक्षक इसी प्रकार प्रत्येक वर्ष के अप्रैल में क्रमशः उनके प्रभार में रहने वाले उप-निरीक्षकों के बारे में, जो अनुमोदित सूची में हों. परीक्षण और रिपोर्ट करेंगे।

(3) पैरा (1) और (2) के अधीन तैयार की गई रिपोर्ट, पैरा 438 में महानिरीक्षक द्वारा संयोजित की गई समिति के समक्ष रखी जावेगी और यदि समिति सूची में से किसी नाम को निकाल देने की अनुशंसा से सहमत हो जावे, यह अनुमोदित सूची में से प्रश्नगत अधिकारी के नाम को निकाल दिये जाने का आदेश देगी।

(4) जब किसी उप या सहायक महानिरीक्षक ने अनुमोदित सूची में से किसी नाम के निकाले जाने की अनुशंसा की हो, प्रश्नाधीन अधिकारी का पदोन्नति के लिए तब तक वह विचार न किया जावे जब तक कि समिति संयोजित न हो और अनुशंसा पर की जाने वाली कार्यवाही के लिये निर्णय न ले लें। उन अस्थाई रिक्तियों में, जिन पर वह अधिकारी, जिनके नाम को निकाले जाने की अनुशंसा की गई है, अन्यथा पदोन्नत कर दिया जाता, समिति के निर्णय लम्बित रहने तक उस उप-निरीक्षक की, जिसका नाम अनुमोदित सूची में ठीक  पश्चात् हो, पदोन्नति द्वारा पूर्ति की जावेगी।

440. [विलुप्त)

441. उप-निरीक्षकों को आगे बताया जाना वृद्धि से समयमान द्वार विनियमित किया जाता है (पैरा 463 देखिये)। अधीक्षक मूलभूत नियम 24 के अधीन वृद्धि रोक लेने और मूलभूत नियम 25 के अधीन दक्षता अवरोध के परे निकलने की मंजूरी देने के लिये प्राधिकृत है।

दक्षता अवरोध के ऊपर आगे बढ़ने की योग्यता पुलिस अधीक्षक द्वारा अवधारित की जावेगी, जिससे यह प्रमाणित करने की अपेक्षा की जावेगी की उप-निरीक्षक:-

(1) थाने का प्रभार ग्रहण करने के लिये उपयुक्त है, या

(2) पूर्णतया अक्षम अभियोजक अधिकारी, या

(3) अपराध अन्वेषण विभाग की अन्वेषण शाखा में नियुक्त किये जाने के लिए उपयुक्त, या

(4) दीर्घ रिजर्व में वरिष्ठ सशस्त्र पुलिस उप-निरीक्षक का पद ग्रहण करने के लिए उपयुक्त, या

(5) सैनिक पुलिस में प्लाटून को कमान्ड करने के लिए उपयुक्त है।

442. जब किसी अधिकारी की पदोन्नति उप-महानिरीक्षक की सहमति की अपेक्षा रखती हो, उस अधिकारी तथा किसी ऐसे अधिकारी की जिसका अधिक्रमण किया जाना प्रस्तावित हो, चरित्र पत्रावलियाँ अधिक्रमण के कारण देते हुए, टिप्पणियाँ सहित उप-महानिरीक्षक को भेजी जावें।

443. [विलुप्त]

444. सिविल, सशस्त्र और सवार पुलिस के सभी उप-निरीक्षकों की प्रारूप 116 में सूची प्रत्येक वर्ष की पहली सितम्बर को रेंज के उप-महानिरीक्षक को निम्नलिखित अतिरिक्त जानकारी के साथ प्रस्तुत की जावेगी

() वर्तमान वेतन (1 सितम्बर को)

() अगली वेतन वृद्धि का दिनांक।

सूची की एक दूसरी प्रति, पुलिस मुख्यालय, इलाहाबाद को भेजो जावेगी।

2[445. () कोई ऐसा कान्सटेबिल या हेड फान्सटेबिल जिसकी आयु 40 वर्ष से अधिक हो और जिसकी सेवा तीन वर्ष से कम हो, उप-निरीक्षक सिविल पुलिस की कोटि में पदोन्नति हेतु चयन के लिये नामित नहीं किया जायेगा। यह आयु सीमा जिस वर्ष में चयन होगा उसकी पहली जनवरी को अनुमन्य होगी।

कान्सटेबिल के लिये जो विभाग में तीन वर्ष की सेवा कर चुके हैं, शैक्षिक योग्यता इण्टरमीडिएट तथा समकक्ष होनी चाहिये अथवा हेड कान्सटेबिल सिविल पुलिस कोर्स पास होना चाहिये। हेड कान्स्टेबिल सिविल पुलिस फोर्स पास कान्सटेबिल के लिये पशैक्षिक योग्यता का कोई प्रतिबंध नहीं होगा, साथ ही हेड कान्सटेबिल के लिये भी शैक्षिक योग्यता का प्रतिबंध नहीं होगा।

(1. क्लेम पेटिशन 134 एफ०/111/77/2

2. श०सं० 4256/आठ-2-1200 (55)-76. दि० 31-8-77 और शा०आर०सं० 628/अत-7-922 (30)-71 दि० 8-10-75.)

नोट- शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल से इण्टरमीडिएट करने के आदेश केवल उन अभ्यर्थियों पर लागू होंगे जो शासनादेश के जारी होने के पश्चात् पुलिस विभाग में आते हैं।।

() पुलिस ट्रेनिंग कालेज, मुरादाबाद में उप-निरीक्षक सिविल पुलिस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिये कान्सटेबिलों और हेड कान्सटेबिलों का चयन करने की प्रक्रिया निम्न होगी :-

(1) प्रत्येक वर्ष जनवरी में एक नोटिस जारी की जानी चाहिये जिसमें (चयन की) पात्रता के नियम दिये गये हों और पात्र उम्मीदवारों को आमंत्रित किया गया हो कि यदि वे चाहते हों कि चयन के लिये उनका विचार किया जाये तो वे उसके लिये आवेदन करें, इस नोटिस का व्यापक विचार किया जाना चाहिये और उन लोगों के पास भी भेजी जाय जो प्रतिनियुक्ति, अवकाश आदि पर गये हों, यह सुनिश्चित करना जिला पुलिस अधीक्षक यूनिटों के प्रभारियों का कत्र्तव्य होगा कि नोटिस की सूचना उन सभी स्थानों को भेजी जाय जहां उनके आदमी उस समय कार्य कर रहे हों। आवेदन पत्र प्रस्तुत करने के लिये 6 सप्ताह का समय दिया जाना चाहिये। इस प्रकार प्राप्त आवेदनों की पुलिस अधीक्षक यूनिट प्रभारियों के कार्यालय में उनकी छँटाई के लिये परिनिरीक्षा करनी चाहिये जो निर्धारित नियमावली के अधीन चयन के पात्र नहीं हैं।

(2) तत्पश्चात् उन सभी पात्र उम्मीदवारों का जो विचार किये जाने के लिये रहें, निम्न रीति से प्रारंभिक परीक्षण किया जाना चाहिये :-

() 50 अंकों का एक प्रश्न-पत्र जिसके तीन भाग होंगे, केन्द्रीय रूप से तैयार किया जायेगा-तीन प्रश्न विधिंक, तीन पुलिस संबंधी प्रक्रिया और तीन निबंध सामान्य ज्ञान के होंगे। निबंध लेखन संबंधी प्रश्न अनिवार्य होना चाहिये और प्रत्येक उम्मीदवार को प्रश्न-पत्र के दो भागों में से किन्हीं दो प्रश्नों का व तीसरे भाग से एक प्रश्न का उत्तर देना चाहिये अर्थात् प्रत्येक उम्मीदवार को प्रश्न-पत्र में से कुल 5 प्रश्नों का उत्तर देना चाहिये। अनिवार्य प्रश्न 10 अंकों का और शेष प्रश्नों में प्रत्येक आठ-आठ अंकों के होने चाहिये।

() प्रारम्भिक परीक्षायें सभी जिलों में एक निश्चित दिनांक को पुलिस मुख्यालय द्वारा किये गये प्रबंध के अधीन होना चाहिये। उत्तर पुस्तिकायें संबंधित पुलिस उप-महा-निरीक्षक को भेजी जानी चाहिये, जो उनकी जाँच तीन पुलिस अधीक्षकों के एक मंडल (बोर्ड) द्वारा करायेंगे। अर्हता प्राप्त करने का स्तर अधिकतम अंकों को 50 प्रतिशत नियत किया जाना चाहिये।

() एक मुण्डल को, जिसमें रेंज पुलिस उप-महानिरीक्षकों, रेंज पुलिस उप-महानिरीक्षक द्वारा नामित पी०ए०सी० का एक कमांडेंट तथा संबंधित स्थानीय पुलिस अधीक्षक होंगे। तत्पश्चात् प्रत्येक जिले का दौरा करना चाहिये और उन सभी पात्र उम्मीदवारों को चरित्र पंजियों की सावधानी से परिनिरीक्षले करनी चाहिये जिन्होंने लिखित परीक्षा में अर्हता प्राप्त की हो। शारीरिक दृष्टि से अयोग्य व्यक्तियों की छंटाई करने के उद्देश्य से ऐसे सभी उम्मीदवारों की एक साधारण ड्रिल तथा शारीरिक प्रशिक्षण की परीक्षा भी ली जानी चाहिये। मण्डल को उम्मीदवारों की चरित्रपंजी और ड्रिल तथा शारीरिक प्रशिक्षण परीक्षण में प्रदर्शित उनके कौशल आधार पर पुलिस महानिरीक्षक द्वारा यथानिधर्धारित निश्चित मापदंड के अनुसार प्रत्येक उम्मीदवार को अंक प्रदिष्ट करने चाहिये।

() इस प्रकार लिखित परीक्षा, चरित्रपंजी की परिनिरीक्षा तथा शारीरिक परीक्षा के परिणामस्वरूप चयन किये गये उम्मीदवार अंतिम चयन के लिये किये जाने वाले केन्द्रीय परीक्षण के वास्ते रेंज के नामित व्यक्ति समझे जाने चाहिये।

(3) रेंज के सभी नामित व्यक्तियों को तत्पश्चात् लिखित परीक्षा में बैठना चाहिये जिसमें (1) विधि, तथा (2) पुलिस संबंधी प्रक्रिया और (3) निबंध तथा सामान्य ज्ञान के 50-50 अंकों वाले तीन प्रश्न-पत्र होंगे। ये प्रश्न भी केन्द्रीय रूप से तैयार किये गये होंगे और उसर पुस्तिकायें पुलिस उप-महानिरीक्षक, मुख्यालय को भेजी जायेंगी, जो इसकी जाँच कई पुलिस अधीक्षकों के ऐसे मण्डल द्वारा करायेंगे जिनकी संख्या उम्मीदवारों के संख्या पर निर्भर करेगी। इस परीक्षा में अर्हता प्राप्त करने अंक अलग-अलग प्रश्न-पत्रों में 30 प्रतिशत तथा कुल मिलाकर 40 प्रतिशत होंगे और इस संबंध में एक सूची योग्यता क्रम से तैयार की जायेगी।

(4) रेकर कैडेट के लिये जितनी रिक्तियाँ आरक्षित हों उसके लगभग दौगुने उम्मीदवारों को ऊपर निर्दिष्ट सूची में से नियमतः योग्यतांनुसार साक्षात्कार के लिये बुलाया जाना चाहिये। चयन मंडल को, जिसमें दो पुलिस उप महानिरीक्षक और पुलिस महानिरीक्षक द्वारा नामित एक अधीक्षक होंगे, इन उम्मीदवारों का साक्षात्कार करना चाहिये। साक्षात्कार के, जिसमें सेवा अभिलेख सम्मिलित होगा, 150 अंक होने चाहिये और उसमें अर्हता प्राप्त करने के लिये न्यूनतम अंक 40 प्रतिशत होने चाहिए। मण्डल को पहले की तरह चरित्र पंजियों की परिनिरीक्षा करना तथा अंक प्रदिष्ट करना चाहिये। तत्पश्चात् उम्मीदवार द्वारा साक्षात्कार तथा लिखित परीक्षा में प्राप्त अंकों को जोड़कर अंतिम योग्यता सूची तैयार की जानी चाहिये।

446. [विलुप्त]

447. सशस्त्र पुलिस के उप-निरीक्षक प्लाटून कमाण्डर के पद के लिए भर्ती निम्नलिखित रीति से की जावेगी :-

() सशस्त्र पुलिस के उप-निरीक्षक/प्लाटून कमाण्डर के संयुक्त संवर्ग के ७० प्रतिशत स्थाई तथा और अस्थाई दोनों प्रकार के पद सिपाहियों की पंक्ति से चयन द्वारा भरे जायेंगे।

() सशस्त्र पुलिस के उपनिरीक्षक प्लाटून कमाण्डर के संयुक्त संवर्ग में अवशेष 20 प्रतिशत स्थाई या अस्थाई दोनों पद सीधी भर्ती द्वारा भरे जावेंगे।

() वर्ग के लिए, रेंज पुलिस के उप-महानिरीक्षक, प्रान्तीय सशस्त्र कान्सटेबुलरी के उप-महानिरीक्षक और रेलवे पुलिस की दशा में मुख्यालय के उप-महानिरीक्षक समय-समय पर, जैसा महानिरीक्षक द्वारा अपेक्षित किया जाये, विनिर्दिष्ट की गई अनुसार सशस्त्र पुलिस के प्रधान कान्स्रटेबिलों की संख्या मनोनीत करेंगे।

() वर्ग के लिये अभ्यर्थियों को अपेक्षित संख्या को चयन महानिरीक्षक, प्रान्तीय सशस्त्र कान्सटेबुलरी के उप महानिरीक्षक और महानिरीक्षक द्वारा मनोनीति एक उप-महानिरीक्षक को समावेश करने वाली एक समिति द्वारा किया जायेगा।

448. (1) पैरा 447 के अधीन मनोनीत या चयन किये गये अभ्यर्थी प्रान्तीय सशस्त्र कान्सटेबुलरी में एक मास का अभ्यास प्रशिक्षण को सम्मिलित करते हुए, सशस्त्र प्रशिक्षण केन्द्र, सीतापुर के सात मास की अवधि के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में भाग लेंगे।

 

(2) उपरोक्त उपपैरा में प्रशिक्षण लेने के पूर्व, पैरा 447 () के अधीन चयन किये गये अभ्यर्थी सशस्त्र पुलिस प्रशिक्षण केन्द्र, सीतापुर में दो मास के सफलतापूर्वक प्रारम्भिक प्रशिक्षण में भाग लेंगे।

448-. सापेक्ष ज्येष्ठता, उप-निरीक्षक का सशस्त्र पुलिस पाठ्यक्रम में उत्तीर्ण होने के दिनांक से और सिपाहियों के लिये उसी पाठ्यक्रम में उत्तीर्ण होकर उप-निरीक्षक सशस्त्र पुलिस पाठ्यक्रम को अन्तरिम परीक्षा में उनकी स्थिति के द्वारा शासित होगी, उस परीक्षा में समान अंक प्राप्त करने वाले दो सिपाहियों के बीच (एक) सीधे भर्ती किये गये अभ्यर्थियों के ऊपर पदोन्नति अभ्यर्थियों को ज्येष्ठता प्राप्त होगी और (दो) यदि दोनों सिपाही सीधे ही भर्ती किये गये हों तो आयु अवधारित करने वाला तत्व होगा और कैडेटों को श्रेणी में होने वालों की दशा में वह तत्व सेवा की लम्बाई होगा।

449. सवार सेना के सिवाय, प्रधान आरक्षकों के पद पर पदोन्नतियाँ उप-महानिरीक्षक के सामान्य नियन्त्रण के अधीन रहते हुए, पुलिस अधीक्षक द्वारा की जाती है।

पुलिस की सभी शाखाओं में प्रधान कान्स्टेबिलों की उन्नति वृद्धि के समयमान द्वारा विनियमित की जाती है। (देखिये पैरा 463-)। वेतन वृद्धि रोकने के लिए मूलभूत नियम 24 के अधीन सशक्त प्राधिकारी अधीक्षक है।

समस्त प्रधान कान्सटेबिल जो 1 अप्रैल, 1945 पर इस रूप में स्थायी पद धारण करते थे, यदि वे वर्ग को उन्नति की अपेक्षा अधिक चेतन प्राप्त कर रहे होते, वर्ग वेतन के अनुरूप समयमान के प्रक्रम में पुनः वेतन नियत कराने के लिए अधिकारी होंगे, इसलिए कि पदोन्नतियाँ नामानुसार नामावली पत्र पर उस समय तक के लिये दे दी जानी चाहिये जब तक कि सभी प्रधान, कान्सटेबिलं अधिकतम समयमान के अधिकतम तक नहीं पहुँच जाते।

450. सिविल और सशस्त्र पुलिस के प्रधान कान्सटेबिलों के पदों पर स्थायी पदोन्नति पुलिस अधीक्षक द्वारा (पुलिस के उप-महानिरीक्षक के नियन्त्रण के अध्याधीन रहते हुये) उन कान्सटेबिलों में से, जो पैरा 454 के अधीन योग्य हो या पैरा 455 के अधीन चुना जा चुका हो, की जाती है।

इन पैरों के अधीन प्रधान कान्सटेबिलों के पद पर पदोन्नति किए गये सशक्त या सिविल पुलिस के कान्सटेबिल एक वर्ष के लिए परिवीक्षा पर राहेंगे, परिवीक्षा अवधि की समाप्ति के तत्काल बाद पुलिस अधीक्षक द्वारा उनकी नियुक्तियाँ संपुष्ट की जा सकेंगी, यदि उनका कार्य संतोषप्रद पाया जावे दूसरी ओर, पुलिस अधीक्षक परिवीक्षाधीन प्रधान कान्सटेबिल को कान्सटेबिल के मूल पद पर वापस कर देगा, यदि इस अवधि में उसका कार्य असन्तीजनक पाया जाये तथापि वापस करने का आदेश पारित करने के पहले, उसे सम्बन्धित प्रधान कान्सटेबिल को लेखीय में उन विनिर्दिष्ट शिकायतों और आधारों को, जिन पर उसको मूल पद पर वापस किया जाना प्रस्तावित हो, प्रदाय किया जाना चाहिए, और उससे यह कारण पूछना चाहिये कि उसे मूल पद पर वापस क्यों न कर दिया जावे, और उसके स्पष्टीकरण पर सम्यक रूप से ध्यान देना चाहिये।

यदि किसी कारण से, जिसे लेखीय में अभिलिखित किया जावे, पुलिस अधीक्षक का यह अभिमत ही कि प्रश्नाधीन प्रधान कॉन्सटेबिल तब तक भी संपुष्ट किये जाने के लिए उपयुक्त नहीं है, इस बात की सावधानी अपनाते हुए कि स्थगने के कारण उसे संसूचित कर दिये जायें, वह उसकी परिवीक्षा में एक वर्ष से अधिक न होने वाली अवधि का विस्तार कर सकता है। इस बात पर और ध्यान दिया जावे कि ऐसे मामलों में संपुष्टि का आदेश जब वास्तव में पारित किया जावे, उस दिनांक से प्रभावशील होगा, जब परिवीक्षा को विस्तार की गई अवधि समाप्त हो जावे।

451. [विलुप्त]

452. (विलुप्त]

453. [विलुप्त)

454. निम्नलिखित कान्सटेबिल प्रधान कान्सटेबिल की पंक्ति पर पदोन्नति के लिए योग्य होंगे :

() सिविल पुलिस के वे कान्सटेबिल, जिन्होंने पहली जनवरी, 1941 के पहले, तत्समय प्रवृत नियमों के अनुसार अर्हता प्राप्त कर ली हो और पुलिस महानिरीक्षक द्वारा यथा विहित किये गये पाठ्यक्रम में उत्तीर्ण हों,

() सशस्त्र पुलिस के वे कान्सटेबिल जिन्होंने रेजीमेन्ट का व्यायाम (डिल) प्रमाण-पत्र पूर्व में ही प्राप्त कर लिया हो, और

() सिविल और सशस्त्र पुलिस के वे कान्सटेबिल जो पुलिस प्रशिक्षण शाला, सीतापुर में विहित प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में उत्तीर्ण हो चुके हों।

455. सिविल पुलिस के विशेष रूप से योग्य कान्सटेबिल के, जो पैरा 445 में विनिर्दिष्ट सैति से पदोन्नति के लिए अहंय होने में असमर्थ हो, रेन्ज के पुलिस महानिरीक्षक के अनुमोदन से प्रधान कान्सटेबिल के पद पर पदोन्नत किये जा सकते हैं, परन्तु यह कि जिले में इस प्रकार पदोन्नत किये गये प्रधान कान्सटेबिलों की कुल संख्या रक्षा प्रहरी कर्तव्य के लिये जिले में सिविल पुलिस के प्रचान कॉन्सटेबिल की स्वीकृत कुल संख्या के एक बार में 20 प्रतिशत से अधिक न होगी।

अपराध अन्वेषण विभाग की सिविल पुलिस के विशेष रूप से योग्य कान्सटेबिल, जो पैरा 474 में विनिर्दिष्ट रीति से पदोन्नति के लिए अहर्य होने में असमर्थ हों, अपराध अन्वेषण विभाग के पुलिस उप-महानिरीक्षक द्वारा प्रधान कान्सटेविल के पद पर पदोन्नत किये जा सकते हैं, परन्तु यह कि इस प्रकार अपराध अन्वेषण विभाग के पदोन्नत किये गये प्रधान कान्सटेबिलों की कुल संख्या अपराध अन्वेषण विभाग के लिए मन्जूर किये गये सिविल पुलिस के प्रधान कान्सटेबिलों की कुल संख्या के 50 प्रतिशत से अधिक न होगी।

सशस्त्र पुलिस के विशेष रूप से योग्य कान्सटेबिल, जो पैरा 454 में विनिर्दिष्ट रीति से प्रधान कान्सटेबिल के पद पर पदोन्नत के लिये अहर्य होने में असमर्थ हों, मुख्यालय के पुलिस महानिरीक्षक द्वारा प्रधान कान्सटेबिलों के पद पर पदोन्नत किये जा सकते हैं। परन्तु यह इस प्रकार पदोन्नत प्रधान कान्सटेबिलों की कुल संख्या, पुलिस बल के लिये मन्जूर किये सशक्त पुलिस के प्रधान कान्सटेबिलों की कुल संख्या के 2 प्रतिशत से अधिक न होगी।

456. सिविल और सशस्त्र पुलिस के कान्सटेबिलों को प्रधान कान्सटेबिलों के पदों पर पदोन्नति, पदोन्नति के लिये अहर्य कान्सटेबिलों की सूची में से ज्येष्ठता के द्वारा की जावेगी। इस प्रयोजन के लिये-

() उनके बीच जो विभिन्न सत्रों में पुलिस प्रशिक्षक शालाओं में अहर्य हुये हों, जिसमें वे अहर्य हों, उस सत्र के द्वारा,

() उनके बीच जो एक ही सत्र में अहह्य हुये हों, प्राप्त किये गये कुल अंकों के द्वारा:

(ग) उनके बीच जो एक ही सत्र में समान कुल अंकों के साथ अहर्य हुये हों, सेवा की लम्बाई द्वारा, ज्येष्ठता अवधारित की जावेगी।

457. पुलिस विनियमों के पैरा 454 () में विहित पाठ्यक्रम में असाधारण योग्यता प्रदर्शित करने वाले विद्यार्थी को परीक्षा मण्डल द्वारा "वाई" विद्यार्थी से विभूषित किया जावेगा. यह तथ्य उसकी चरित्र नामावली में अंकित किया जावेगा। यह द्रुतगामी पदोन्नति के लिये योग्य होगा।

458. पुलिस मुख्यालय, राज्य के सशस्त्र पुलिस के उन कान्सटेबिलों की सूची बनाये रखेगा, जो पैरा 86 में विहित प्रशिक्षण के अग्रिम पाठ्यक्रम उत्तीर्ण करने के दिनांक द्वारा अवधारित की जावेगी।

उसी पाठ्यक्रम उत्तीर्ण करने वालों की दशा में सापेक्ष ज्येष्ठता अन्तिम परीक्षा में प्राप्त होने वालों के अंकों के योग द्वारा, और उसी अन्तिम परीक्षा में समान अंक प्राप्त करने वालों की सवार पुलिस कान्स्टेबिल पर सेवा की लम्बाई द्वारा, अवधारित की जावेगी।

सवार पुलिस के प्रधान कान्सटेबिल की सभी रिक्तियों पर मुख्यालय के पुलिस उप महानिरीक्षक द्वारा ज्येष्ठता के क्रम से, उनमें से जो राज्य सूची में सम्मिलित हों, भर्ती की जावेगी। रेन्ज का पुलिस उप-महानिरीक्षक किसी ऐसे कान्सटेबिल के नाम को राज्य सूची से हटाये जाने की अनुशंसा कर सकता है, जो अपने पश्चात्वर्ती कार्य और आचरण से पदोन्नति के लिए अपने को अनुपयुक्त प्रमाणित करता है।

459. सवार पुलिस के उप-निरीक्षक की पंक्ति पर पदोन्नति के लिए अनुमोदित सवार पुलिस के प्रथान कान्सटेबिलों को एक सूची पुलिस मुख्यालय पर बनाई रखी जावेगी। प्रधान कान्सटेबिल के रूप में तीन वर्ष से कम की सेवा और 40 वर्ष से अधिक की आयु के न होने वाले प्रधान कान्सटेबिल इस सूची में सम्मिलित किये जाने के लिये मनोनीत किये जावेंगे। अपवादित मामलों में रेन्ज के पुलिस उप-महानिरीक्षक असाधारण गुण सम्पन्न 45 वर्ष तक की आयु के प्रधान कान्सटेबिलों को मनोनीत करेगा। वे, जो इस प्रकार मनोनीत किये जावें, पुलिस महानिरीक्षक द्वारा विहित की गई एक केन्द्रीय विभागीय परीक्षा में सम्मिलित होंगे। केवल वे ही, जो इस परीक्षा के परिणामस्वरूप चयन किये जावें, अनुमोदित सूची में लाये जायेंगे।

सवार पुलिस के उप-निरीक्षक की पंक्ति में समस्त रिक्तियाँ मुख्यालय के पुलिस उप-महानिरीक्षक द्वारा ज्येष्ठता के क्रम में उन प्रधान कान्सटेबिलों को पदोन्नत करते हुये, जिनके नाम अनुमोदित सूची में सम्मिलित हों, भरी जावेंगी। तीन वर्ष से कम की अवधि की अस्थाई, रिक्तियाँ, रेन्ज के पुलिस उप-महानिरीक्षक द्वारा, उसकी रेन्ज के किसी अनुमोदित अभ्यर्थी को पदोन्नत करके, भरी जावेगी।

रेन्ज के पुलिस उप-महानिरीक्षक किसी ऐसे प्रधान कान्सटेबिल के नाम को अनुमोदित सूची में से हटाये जाने की अनुशंसा कर सकता है, जो अपने पश्चात्वर्ती कार्य और आचरण से पदोन्नति के लिये अनुपयुक्त समझा जावे। तथापि ऐसे प्रधान कान्सटेबिल के बारे पुिनः अनुमोदित सूची में सम्मिलित किये जाने के लिए विचार किया जा सकता है, यदि वह इस प्रयोजन के लिये विहित केन्द्रीय विभागीय परीक्षा में पुनः सम्मिलित होने की सभी अर्हतायें धारण करता हो।

459-. सवार पुलिस के कान्सटेबिल और प्रधान कान्सटेबिल जबकि वे क्रमशः पैरा 458 और 459 के अधीन प्रधान कौन्सटेबिल और उप-निरीक्षक के पद पर पदोन्नत किये जावें, क्रमशः एक और दो वर्ष की परिवीक्षा पर रहेंगे, जिसके पश्चात् यदि उनका कार्य और आचरण समाधान करके पाया जावे, वे मुख्यालय के पुलिस उप महानिरीक्षक द्वारा संपुष्ट किये जा सकेंगे।

यदि पुलिस अधीक्षक का यह अभिमत हो कि किसी परिवीक्षाधीन को वापस कर देना चाहिये क्योंकि उसका कार्य असन्तोषजनक है, वह परिवीक्षाधीन को लेखीय में वह विनिर्दिष्ट शिकायतें और आधार, जिन पर वापसी प्रस्तावित है, प्रदाय करेगा और उसी के साथ उससे यह कारण बताने को कहेगा कि उसे वापस क्यों न कर दिया जावे। विनिर्दिष्ट शिकायतों के विवरण की, परिवीक्षाधीन के स्पष्टीकरण के साथ, एक प्रति जब रेन्ज के पुलिस उप महानिरीक्षक के माध्यम से आदेश के लिए मुख्यालय के उप-महानिरीक्षक को अग्रेषित कर दी जावेगी।

यदि किसी कारण से, जिसे लेखीय में अभिलिखित किया जावे, मुख्यालय का पुलिस उप-महानिरीक्षक का यह अभिमत हो कि कोई परिवीक्षाधीन सम्पुष्टि के लिए उपयुक्त नहीं है, वह परिवीक्षा को अवधि में एक वर्ष से अधिक की न होने वाली समयावधि का विस्तार कर सकता है। ऐसी कार्यवाही के कारण लेखीय में सम्बन्धित परिवीक्षाधीन को संसूचित किया जाना चाहिये। ऐसे मामलों में, जब सम्पुष्टि के आदेश वास्तव में पारित किये जायें, उस दिनांक से प्रभावशील होंगे, जिसको बढ़ाई हुई परिवीक्षा अवधि समाप्त हुई हो।

460. बल की सभी शाखाओं में कान्सटेबिल की उन्नति, बेतन वृद्धि, समयमान को शतों के द्वारा विनियमित की जाती है। (देखिये पैरा 463-) जिसमें सबसे ऊपर, पदों के निश्चित स्थानों का समावेश करने वाला एक चयन वर्ग होता है। चयन वर्ग के लिए पदोन्नत पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रमुख गुणोत्कृष्ट अभिलेख वाले "बी" श्रेणी के क्रान्सटेबिलों में से चयन करके, की जाएगी, जिनका चयन वर्ग सुरक्षित हो। मूलभूत नियम 24 के अधीन वेतन वृद्धि रोक लेने के लिये सशक्त प्राधिकारी अधीक्षक है। वे कान्सटेबिल की जो अशक्तता या क्षतिपूर्ति पेन्शन पर सेवानिवृत्त हुये हैं और तत्पश्चात् पुनः सेवायोजन में आ गये हैं, यदि उनकी पूर्व सेवा पेन्शन के लिये सिविल सर्विस रेगुलेशन के अनुच्छेद 514 और 519 के अधीन गिनी जावे तो ऐसी सेवा की वेतन वृद्धि भी गिना जाना चाहिये। उन भूतपूर्व सैनिकों के लिये जो भर्ती किये जायें और त्याग पत्र देने वाले, पुलिस अधिकारियों के लिये जी पुनः पुलिस में भर्ती किये जायें, पैरा 310 और 418 देखिये।

"" श्रेणी से "" श्रेणी में कान्सटेबिलों की पदोन्नति को विनियमित करने वाले नियमों के लिये पैरा 543 देखिये।

461. नाम युक्त नामावली प्रत्येक जिले, सरकारी रेल पुलिस खण्ड, अपराध अन्वेषण विभाग और पुलिस की अन्य प्रत्येक शाखा में प्रारूप क्रमांक 362 में रखे जायें। पदोन्नतियाँ अभियुकियों के स्तम्भ में प्रविष्ट की जायेंगी।

462. पदोन्नति-और पद पर वापसी की नामावलियां सभी पंक्तियों और सभी शाखाओं से सम्बन्धित प्रभारी और सारवान पदोन्नत्तियों के लिये विहित प्रारूप में पृथक-पृथक् बनाये रखो जायेंगी।

ये नामावलियां लेखपाल द्वारा बनायी रखी जावंगी, जो प्रथम तीन स्तम्भों में प्रविष्टि करेगा और जब कभी कोई पदोन्नति या पद पर वापसी सम्यक हो जाये, उचित नामावलियों को सभी आवश्यक कागजों और चरित्र नामावली के साथ अधीक्षक को प्रस्तुत करेगा। पुलिस अधीक्षक नामावली के स्तम्भ 4 और 5 की स्तम्भ 5 में किसी अधिक्रमित किये गये अधिकारी का नाम उनके अधिक्रमण के कारणों की एक संक्षिप्त टोप के साथ, वर्णन करते हुये, अपने हाथ से पूर्ति करेगा। किसी अधिकारी के अधिक्रमण के प्रथम अवसर से इस तथ्य को एक टीप और उसके कारण चरित्र नामावलों में अंकित किये जायेंगे।

463. सभी शाखाओं के उप-निरीक्षक, अपरे अधिकारी और कान्सटेबिलों की वेतन वृद्धियों से सम्बन्धित आदेश नामावली को अभियुक्तियों के स्तम्भ में पुलिस अधर्धाक्षक अधीक्षक द्वारा अंकित किये जाना चाहिये, जिसे उस प्रयोजन के लिये पुलिस अधीक्षक को प्रत्येक माह को दसवीं तारीख को प्रस्तुत किया जावेगा। जब कभी कोई वेतन वृद्धि रोक ली जावे, अधिकारियों की चरित्र नामावली में और साथ ही नामयुक्त नामावली में अभियुक्त के स्तम्भ में कारण सहित उनको प्रविष्टि की जावेगी। ऐसे किसी मामले में, जिसमें किसी अधिकारी की सेवा मूलभूत नियम 24 की अपेक्षाओं का समाधान करने वाली न मानी जावे, वेतन वृद्धि रोके जाने के आदेश में यह अवधि विनिर्दिष्ट की जाना चाहिए जिसके लिए रह रोकी गई है। एक समय में ऐसी अवधि एक गर्व से अधिक की न होना चाहिये।

यदि प्रत्येक वर्ष पुनः वेतन वृद्धि रोकना आवश्यक समझा जावे जो अधिकतम तीन वर्ष के अध्याधीन रहते हुये, प्रतिवर्ष पृथक आदेश पारित किये जावें। (विभागीय विचारण के अनुसरण में निश्चित दण्ड के रूप में वेतन वृद्धि रोकने की प्रक्रिया का उपचन्ध पैरा 482-क में किया गया है।)

1[463-. पुलिस एक्ट की धारा 2 के अधीन राज्यपाल ने यह निर्णय लिया है कि पुलिस एक्ट के अधीन भर्ती किए गए पुलिस दल की अधीनस्थ पंक्तियों की वेतन, अवकाश, पेन्शन, भत्ते, भविष्य निधि के बारे में सेवा की शर्तें और सेवा की अन्य वे शर्तें जिनके लिये इन विनियमों में विनिदिष्ट उपलब्ध न किया गया हो, गवर्नमेंट आफ इण्डिया एक्ट, 1935 की धारा 241 की उपधारा () के पैरा () के अधीन गवर्नर द्वारा और ऐसे नियमों के लम्बित रहने तक, गवर्नमेंट आफ इण्डिया (प्रारम्भ और संक्रमण उपबन्ध) आदेश, 1936 के पैरा 15 (2) के उपबन्धों के अनुसार और उक्त अधिनियम की धारा 276 में अन्तर्विष्ट प्रवर्तनीय नियमों के द्वारा विनियमित की जावेगी।

463-. अध्याय 21 30 में निहित सभी भर्तियों एवं पदोन्नति में अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जन जाति की नियुक्तियां समय-समय पर शासन द्वारा प्रदत्त आरक्षणों के अनुसार की जायेंगी

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