
97. जब कभी किसी संज्ञेय अपराध की इत्तिला थाने के भारसाधक अधिकारी को दी जावे, संज्ञेय अपराधों की रिपोर्ट चेक रसीद पुस्त (पुलिस प्रारूप क्र० 341) में तीन प्रतियों में तत्काल लेखबद्ध की जावेगी। किसी भी कारण से, यह पग उठाने में, प्रारम्भिक अन्वेषण के द्वारा सही तथ्य सुनिश्चित करने के लिये, विलम्ब नहीं किया जायेगा। यदि वह असत्य प्रतीत होती हो, रिपोर्ट को तत्त्तकाल अभिलिखित किया जावे। यदि रिपोर्ट मौखिक की जावे उससे पूछे गये प्रश्नों के उत्तर सहित रिपोर्ट करने वाले व्यक्ति के ही ठीक-ठीक शब्द लिखे जावें और उसे पढ़कर सुना दी जावे। उसे तीनों पत्तों पर हस्ताक्षर करना चाहिये और यदि वह लिख न सकता हो तो उसके अंगूठे का चिह्न उस पर ले लिया जावे। यदि रिपोर्ट लिखित में की जावे तो उसकी वैसी ही प्रतिलिपि कर ली जाना चाहिये, किन्तु उसे लाने वाले के हस्ताक्षर या अंगूठे के चिह्न लेने की आवश्यकता नहीं है। सभी मामलों में धानों के भारसाधक अधिकारी को तीनों भागों में से प्रत्येक पर हस्ताक्षर करना चाहिए और हर एक पर थाने की मोहर लगा देना चाहिए। तीसरी प्रति पुस्तक में लगी रहेगी दूसरी प्रति मौखिक रिपोर्ट या लिखित रिपोर्ट लाने वाले का दे दी जावे और मूल प्रति, मूल रिपोर्ट को, (यदि कोई हो) संलग्न करते हुए अधिकारिता रखने वाले मजिस्ट्रेट को पुलिस अधीक्षक के माध्यम से भेज दी जावे।
जब तक कि वे मुख्यालय को विशेष या जनरल डायरी में संलग्न कर न भेजी जावें, प्रथम सूचना में विलम्ब करने का अभ्यास दण्ड प्रक्रिया संहिता के विरुद्ध है और उसका प्रतिषेध (मनाही) किया जाता है।
यदि सब डिवीजन का भारसाधक कोई सहायक या उप पुलिस अधीक्षक हो जो जिला मुख्यालय के अलावा किसी अन्य स्थान पर पदस्थ हो ते मूल लेख उसके द्वारा मजिस्ट्रेट को भेजी जावे।
98. यह आवयक है कि रजिस्टरों और डायरियों में सभी रिपोर्ट और जाँचें स्पष्ट और सुवाच्य लिखी जानी चाहिये। यह दस्तावेज बाद में न्यायालय में प्रमाणित कराने पड़ सकते हैं और अधिक विलम्ब और कठिनाई उपस्थित हो सकती है, यदि मूल लेख स्पष्ट और निर्विवाद न हो।
99. ज्यों ही रिपोर्ट प्रथम सूचना पुस्तक में लिख लौ जावे, जनरल डायरी में रिपोर्ट का सार संक्षेप रूप में लिखा जायेगा। प्रथम इत्तिला रिपोर्ट और जनरल डायरी में प्रविष्टियाँ तत्काल की जानी चाहिये, चाहे रिपोर्ट रात को ही प्राप्त हुई हो, ग्राम अपराध नोट बुक, अपराध रजिस्टर और सम्पत्ति का रजिस्टर 24 घण्टे के भीतर लिख लिया जावे, यदि रिपोर्ट के परिणामस्वरूप इन रजिस्टरों में प्रविष्टियाँ की जानी हों।
100. यदि थाने का भारसाधक अधिकारी किसी संज्ञेय अपराध की सूचना प्राप्त करे जब वह थाना गृह से बाहर हो और तत्काल अन्वेषण प्रारम्भ कर देने की इच्छा करे और रिपोर्ट करने बालो की उपस्थिति मुक्त न कर सके, उसे रिपोर्ट को लेखबद्ध कर लेना चाहिये और उस पर उसके करने वाले द्वारा हस्ताक्षर या अंगूठा लगवाने के पश्चात् उसे थाने को लिखित रिपोर्ट के रूप में व्यवहार किये जाने के लिये भेज देना चाहिये।
101. जब कभी निम्नलिखित में से किसी प्रकार की घटना की रिपोर्ट प्राप्त हो
(1) डकैती,
(2) महत्वहीन मामलों यथा कान की बाली छीन लेना के सिवाय लूट,
(3) पुलिस के द्वारा यातना देने,
(4) पुलिस की अभिरक्षा से बचकर निकल जाना,
(5) कूट रचित करेन्सी नोट बनाना,
(6) कूटकृत सिक्कों का संनिर्माण,
(7) लोक निधि के गम्भीर व्यपहरण (खयानत), नोटों, पत्रों से हुँडियों की चोरी को सम्मिलित करते हुए,
(8) बध, बलवा, सेंधमारी और चोरी, विभिन्न वर्गों, सम्प्रदायों और राजनैतिक गुटों के बीच प्रशान्ति भंग होने के महत्वपूर्ण मामले, विशेष लोक हित के अन्य मामले,
रिपोर्ट को प्रति तत्काल पुलिस अधीक्षक, जिला मजिस्ट्रेट सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट और मण्डल निरीक्षक को लाल रंग के लिफाफे में डाक या व्यक्ति द्वारा, भेजने के रीति अधिक तेज हो, से भेजी जावेगी, टेलीफोन और तार जहाँ उपलब्ध हों या निकट के तारघर से पुलिस टेलीग्राफिक कोड का भी, जिसकी प्रति हर थाने को प्रदाय की गई है, अधीक्षक को शीघ्र सूचना देने के लिये उपयोग किया जावे।
101-ए. सभी महत्वपूर्ण मामलों में और उस श्रेणी के मामलों में जिसमें वे उन्हें रिपोर्ट भेजे जाने की अपेक्षा करें, पुलिस अधीक्षक और जिला मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट की प्रति भेजी जानी चाहिए।
102. जब किसी असंज्ञेय अपराध की रिपोर्ट की जावे, संज्ञेय अपराधों के लिए चेक रसीद पुस्तक (पुलिस प्रारूप क्रं० 347) में रिपोर्ट के महत्वूर्ण भाग अभिलिखित किए जावें। दोनों प्रतियों में से प्रत्येक पर सूचना देने वाले से हस्ताक्षर करने या अपना अंगूठा चिह्न लगाने की अपेक्षा की जावे। मूल पुस्तक में बनाये रखते हुए, दूसरी पर्त उसको दे दी जावे। रिपोर्ट का सार जनरल डायरी में लिखा जावे और यदि रिपोर्ट लिखित में, हो तो उसकी अन्तर्विष्ट करने वाले कागज की डायरी से संलग्न कर दिया जावे। सूचना देने वाले को मजिस्ट्रेट के पास जाने को निर्देशित कर दिया जावे जैसा दण्ड प्रक्रिया की धारा 155 द्वारा अपेक्षित है।
103. दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 154 और 155 (1) के द्वारा थाने के भारसाधक अधिकारी पर अपराध की चाहे संज्ञेय, हो या असंज्ञेय, सही रिपोर्ट लिखने का दायित्व प्रवर्तनीय होगा, और उसे अभिलिखित की गई दोनों प्रकार की रिपोर्ट पर प्रतिहस्ताक्षर करना चाहिये