
तीसरा भाग
आन्तरिक प्रशासन
अध्याय 29
नियुक्ति
396. पुलिस बल में निम्नलिखित निकाय अन्तर्विष्ट रहते हैं:-
1. सिविल, सशस्त्र और सवार प्रान्तीय पुलिस -
1861 के अधिनियम क्रमांक पाँच के अधीन नियुक्त और भर्ती की गई। आगरा में 1873 के अधिनियम क्रमांक सोलह के अधीन और अवध में 1876 के अधिनियम क्रमांक अठारह के अधीन नियुक्त। 1861 के अधिनियम क्रमांक पाँच के अधीन भर्ती नहीं किये गये
2. सरकारी रेलवे पुलिस
3. गाँव के चौकीदार
397. पुलिस बल के निम्नलिखित राजपत्रित अधिकारी हैं:-
(1) महानिरीक्षक
(2) उप महानिरीक्षक
(3) अधीक्षक
(4) सहायक अधीक्षक
(5) उप अधीक्षक
398. बात के निम्मलिखित अराजपत्रित अधिकारी हैं:-
(1) निरीक्षक
(2) उप-निरीक्षक
(3) प्रधान कान्सटेबिल
(4) कान्सटेबिल
399. अधीक्षक और उससे उच्च पद के अधिकारी परिषद् सहित गवर्नर द्वारा नियुक्त किये जाते
400. सहायक अधीक्षक भारत में भारत सरकार द्वारा आयोजित प्रतियोगिता के परिणाम अनुसार सरकार द्वारा परिवीक्षा पर साधारणतया नियुक्त किये जाते हैं। वे परिषद् सहित गर्वनर द्वारा सम्पुष्ट किये जाते हैं। (देखिये अध्याय पैंतीस)
401. जिला पुलिस अधीक्षक की नियुक्ति (चाहे वह सीधी भर्ती या निरीक्षक की पंक्ति से पदोन्नति के द्वारा हो) के नियम सरकारी अधिसूचना क्रमांक ओ०-337/दो-444-40. दिनांक 4 मई, 1942 में अन्तर्विष्ट हैं।
402. सीधे भर्ती के किये गये उप-अधीक्षक प्रथम भर्ती और 220/- रु० मासिक प्राप्त करेंगे। विभागीय परीक्षा और संपुष्टि के विभागीय नियमों के अध्याधीन रहते हुये, वे तत्समय प्रवृत्त वेतनमान के समय अनुसार वृद्धियाँ पाने के अधिकारी होंगे। पदोन्नति द्वारा नियुक्त उपअधीक्षक का प्रथम नियुक्ति पर वेतन पदोन्नत के समय उनके निरीक्षक पद के वेतन पर निर्भर करेगा और मूलभूत नियमों के अनुसार निर्धारित किया जायेगा।
403. रिजर्व निरीक्षक के पद के लिए नियुक्तियाँ साधारणतया उप-महानिरीक्षक द्वारा उप-निरीक्षकों में से चयन करके की जाती है। (देखिये अध्याय तोस)। अभियोजक और मण्डल निरीक्षक के पंक्ति की नियुक्तियाँ उप-महानिरीक्षक द्वारा, महानिरीक्षक द्वारा आमन्त्रित समिति द्वारा चुने हुये उप-निरीक्षकों में से पदोन्नति द्वारा की जाती है। (देखिये अध्याय तीस)।
सारवान रूप से उनकी नियुक्ति की जाने के दिनांक से समस्त निरीक्षक दो वर्ष के लिये परिवीक्षा पर रहेंगे।
404. परिवीक्षा की अवधि के दौरान या उसकी समाप्ति पर पुलिस बल से मुक्त किये गये ब्रिटिश सेना के अधिकारियों को, निकटतम सैनिक प्राधिकारी को आवेदन करना चाहिये, यदि अपने देश को वापस लौटने के लिए इच्छुक हों।
405. (विलुप्त) ।
406. (क) सिविल पुलिस उप निरीक्षकों की नियुक्ति उप-महानिरीक्षक द्वारा अभ्यर्थियों की उस सूची में से की जाती है, जो पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय को कैडिट परीक्षा में अर्ह हो जाते हैं। अवर अधिकारियों की स्थानापन्न (आफिसिएटिंग) नियुक्तियाँ पुलिस मैन्युअल के पैरा 191 के अधीन पुलिस अधीक्षक द्वारा की जाती है।
(ख) पुलिस सशस्त्र - सशस्त्र पुलिस में उप-निरीक्षक की पंक्ति पर स्थायी नियुक्तियाँ उप-महानिरीक्षक द्वारा उनकी सूची में से की जाती हैं जो अपने को पैरा 448 के अधीन विहित परीक्षा में अर्ह बना लेते हों, अधीक्षक स्थानापन्न या अस्थायी रिक्तियों में पदोन्नत कर सकता है।
(ग) सवार पुलिस- सवार पुलिस के उपनिरीक्षकों की स्थायी और स्थानापन्न पदोन्नतियाँ प्रान्तीय सूची से वरिष्ठता के अनुसार उप-महानिरीक्षक द्वारा की जाती है।
407. सिविल और सशस्त्र पुलिस में प्रधान कानरटेबिल पुलिस अधीक्षक द्वारा जिला बल के कान्सटेबिलों की पदोन्न कर नियुक्त किये जाते हैं।
408. सवार पुलिस के कान्सटेबिल परिवीक्षा पर पुलिस अधीक्षक द्वारा या तो बाहरी अभ्यर्थियों की भर्ती के द्वारा या पद पुलिस के सिपाहियों को (उनके स्वयं के निवेदन पर) स्थानान्तरित कर नियुक्त किया जाता है बाहरी अभ्यर्थियों को भर्ती एक सितम्बर से तीस सितम्बर के बीच की, जावेगी। पद से सवार शाखा में स्थानान्तर उसी महीने में किये जायेंगे। पद पुलिस से अन्तरित किये गये सिपाहियों को सम्मिलित करते हुये, सभी स्वार पुलिस के रंगरूट, अनुदेशों के विहित पाठ्यक्रम में भाग लेंगे। पैरा 84 को उपबन्धों के अध्याधीन रहते हुये उन्हें पुलिस अधीक्षक द्वारा दो वर्ष के पश्चात् संपुष्ट किया जाती है।
सवार पुलिस के अभ्यर्थियों के पद हेतु पुलिस के रंगरूटों के लिये अपेक्षित आयु, ऊँचाई और सीने के माप के होना चाहिये।
बाहरी अभ्यर्थियों की, उनके भर्ती किये जाने के पहले, सिविल सर्जन द्वारा चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त पारित किया जाना चाहिए। चिकित्सा प्रमाण-पत्र को कोरा प्रारूप क्रमांक 29, जो उनके साथ भेजा जावे, उसके ऊपर "केवल सवार पुलिस के लिए" अंकित होना चाहिये।
409. सशस्त्र और सिविल पुलिस के लिये कान्सटेबिलों की भर्ती अधीक्षक द्वारा की जावेगी। कोई व्यक्ति, जो 18 वर्ष से कम और 23 वर्ष की आयु से अधिक का न हो, भर्ती किया जा सकता है | या पुनः भर्ती किया जा सकता है)। अनुसूचित जातियों के अभ्यर्थियों के मामलों में, आयु की ऊपरी सीमा अपेक्षाकृत 5 वर्ष अधिक होगी। अनुमोदित चरित्र और योग्यता वाले चौकीदार 30 वर्ष की आयु तक प्रादेशिक पुलिस में प्रारूपित किए जा सकेंगे। सेवानिवृत्त सैनिक कान्सटेबिलों के रूप में भर्ती किये आ सकेंगे। उन्हें 35 वर्ष से अधिक आयु का म होना चाहिये। अपनी नियुक्ति के पश्चात्, वे पुलिस बल के सदस्य के रूप में, इस विषय में सामान्य नियमों के अध्याधीन रहते हुये अपनी सैनिक पेंशन के अतिरिक्त वेतन प्राप्त करेगा। भर्ती को सैनिक लेखाओं के नियन्त्रक को अधिसूचित किया जायेगा।
पूर्व सैनिक, जो रिजर्व अधिकारी या पेन्वान भोगी न हो. सिविल और सवार दोनों ही पुलिस में साधारण रंगरूटों की भांति भर्ती किये जा सकेंगे, परन्तु यह कि उन्हें 35 वर्ष से अधिक की आयु का नहीं होना चाहिये।
पुलिस महानिरीक्षक न्यूनतम अधिकतम आयु सीमा में डील देने की शक्तियों का प्रयोग केवल तभी करेगा, जबकि अधिसूचना क्रमांक 1129 (5)/दो-175-39, दिनांक 4 जुलाई, 1941 के अधीन उचित व्यवहार या जनहित में ऐसा करना आवश्यक समझा जावे।
उन जिलों में जहाँ भर्ती कम हो, अधीक्षक, कर्मचारी मण्डल के भर्ती अधिकारी को रिजर्व अधिकारियों के अतिरिक्त सेवा निवृत्तों या पूर्व सैनिकों के लिये आवेदन कर सकेगा। भारतीय सेना के रिजर्व अधिकारी और भारतीय क्षेत्रीय बल के किसी सदस्य को पुलिस बल की किसी भी शाखा में भर्ती न किया जावे और पुलिस बल के किसी सदस्य को (लिपिकीय कर्मचारी मण्डल को सम्मिलित करते हुये) अनुज्ञा नहीं होगी कि वह भारतीय क्षेत्रीय बल में या भारतीय सहायक बल में सम्मिलित हो।
410. उत्तर प्रदेश पुलिस में उसके कान्सटेबिल के रूप में भर्ती हो जाने पर निम्नलिखित वर्गों के पूर्व सैनिक, सिपाही के वेतन को उत्समय के मान के अनुसार वेतन वृद्धियाँ प्राप्त करने के लिये सैनिक के रूप में की गई पूर्व सेवा काल की गणना कराने के अधिकारी होंगे:-
(1) भारतीय सशत्र बल को लड़ाकू यूनिट के पूर्व सैनिक, और
(2) पूर्व आई०एस०एफ० और नान- आई०एस०एफ० की लड़ाकू यूनिट के पूर्व सैनिक।
परन्तु यह कि सेना के पेन्शनर या कृपा धन भोगी व्यक्ति की सेना की सेवा वेतन की वृद्धि के लिये नहीं गिनी जावेगी। यदि वह अपनी पेन्शन लेना रखे या जब तक कि वह सेना की सेवा के मुक्ति-काल के उपलक्ष में प्राप्त किया गया लाभांश (बोनस) या सेवा का कृपात् धन छत्तीस से अधिक न होने वाली मासिक अंशिकाओं में न लौटा दे।
ऐसे पूर्व सैनिक के वेतन के निर्धारण का प्रश्न, उनके द्वारा पूर्ण से लाभांश और सेवा का कृपात् धन लौटा देने के पश्चात् हो विचारा जायेगा। तथापि उन्हें पुनरावृत्त वेतन भूतलक्षी प्रज्ञाव से अर्थात् पुलिस बल में उनके भर्ती के दिनांक से आबंटित किया जावेगा।
अलड़ाकू सेवाओं की कोटि में आने वाली सेना सेनाओं के बारे में भारत के आर्मी रेगुलेशन्स की द्वितीय जिल्द का अट्ठाईसवां परिशिष्ट देखा जावे। उस परिशिष्ट में वर्णित न की गई इकाईयों की सेवाओं के सिपाहियों के मामले, भर्ती के समय, पुलिस महानिरीक्षक को निर्देशित किये जावें, जब तक कि वे पूर्व में अधिसूचित दृष्टान्तों द्वारा शासित न होते हों।
भारतीय सेना के वे रिजर्व सेवक, जिनकी सैनिक सेवायें नियमों के अधीन पेन्शन योग्य श्री और इसके पूर्व कि उन्होंने अपनी सैनिक सेवाओं के बाबत पेन्शन अर्जित की हो, रिजर्व से मुक्ति के पश्चात् उत्तर प्रदेश की पुलिस सेवा में नियुक्त कर दिये जावें, कि क्या उनकी सैनिक सेवायें रिजर्व के वर्षों के अतिरिक्त सेवा में गिनी जावें या केवल रिजर्व की सेवा ही. पुलिस बल में वेतन वृद्धि के लिए यदि कोई हो तो, वर्षों के साथ पूरी सेवा और रिजर्व के रूप में उसकी आधी सेना की गणना महानिरीक्षक के विवेक पर इस शर्त के अध्याधीन, अनुज्ञेय रहेगी कि वे अपनी सैनिक सेवाओं के बदले में प्राप्त किये गये किसी कृपात् धन को लौटा दें।
411. (1) कोई रंगरूट भर्ती नहीं किया जावेगा, जिसके सोने की नाप फुले हुये रूप में 34 इंच से कम हो और फुलाये जाने पर न्यूनतम 2 इंच की वृद्धि न होती हो और जिसकी ऊँचाई 5 फीट 6 इंच से कम हो। इस नियम के लिये निम्नलिखित अपवाद हैं:-
(क) ऐसा रंगरूट जिसकी आयु 18 और 20 वर्ष के बीच हो और जिसमें बढ़ने के लक्षण प्रकट होते हों, भर्ती किया जा सकता है, यदि उसकी ऊँचाई 5 फीट 5 इंच से कम न हो और फुलाये जाने पर सीना 32 इंच से कम और फुलाये जाने पर न्यूनतम 2 इंच की वृद्धि होने वाला न ही, परन्तु यह कि सिविल सर्जन यह प्रमाणित करे कि उसकी आयु 20 से कम है और यह सम्भावना है कि वह मानक माप प्राप्त कर लेगा।
(ख) पहाड़ी व्यक्ति के मामले में ऊँचाई 5 फीट 4 इंच से कम न होनी चाहिये।
(ग) जन-जाति अभ्यर्थियों के मामलों में सोने की माप फुलाई हुई दशा में 34 इंच से कम और फुलाये जाने पर 2 इंच से कम वृद्धि की न हो और ऊँचाई 5 फोट 3 इंच से कम न होनी चाहिए।
टीप- (1) जहाँ तक संभव हो सके, कान्सटेबिल के रूप में लम्बे और सुगठित व्यक्ति पुलिस में भर्ती किये जाने बाहिये, क्योंकि उनके दक्षतापूर्ण कर्त्तव्य पालन के लिये शारीरिक गठन और व्यक्तित्व महत्वपूर्ण बातें हैं।
(2) झुको हुई टांगों वाले व्यक्तियों को, झुकाव को यात्रा पर ध्यान दिये बिना, भर्ती नहीं किये जाना चाहिये, परन्तु तनिक से टेढ़ेपन को औसत रूप में माना जावे और उसका परिणाम अनावश्यक अस्वीकृति न हो।
412. इसके पूर्व की कोई अभ्यर्थी सिविल सर्जन के पास चिकित्सकीय परीक्षण के लिये भेजा जावे, रिजर्व निरीक्षक के सामने शुद्ध रूप में उसकी ऊंचाई और सीने की माप से ली जानी चाहिये। अभ्यर्थी के हाथ ऊँचे किये जाकर उसके नंगे सीने की गोलाई में नापा जावे।
जिले के सिविल सर्जन द्वारा हस्ताक्षरित प्रारूप क्रमांक 29 में चिकित्सकीय प्रमाण-पत्र के बिना कोई अभ्यर्थी भर्ती नहीं किया जावेगा। भर्ती किये जाने के पूर्व प्रत्येक अभ्यर्थी की निम्नलिखित प्रारूप में एक करार पर हस्ताक्षर करना चाहिये :-
मैं…………………………………….आत्मज.......…………………...............................निवासी ग्राम...........................थाना ……………………………….. जिला…………………………………करते हुये यह करार करता हूँ कि उत्तर प्रदेश पुलिस बल में भर्ती कर लिए जाने पर मैं बल में सम्मिलित होने के दिनांक से दो वर्ष तक उक्त उत्तर प्रदेश पुलिस की सेवा करूंगा जब तक कि मुझे ऐसी सेवा से, मुक्त या पदच्युत या उसके लिये सिविल सर्जन द्वारा अक्षम प्रमाणित न कर दिया जाये। यदि में उक्त दो वर्ष के पूर्व पद त्याग करूँ तो मैं निम्नलिखित दरों से गणित की जाने वाली धनराशि के समपहृत किये जाने की प्रतिज्ञा करार करता हूँ :-
(क) तीन मास की सेवा तक के लिये सेवा के पूर्ण किये गये मासों के लिए प्रति मास एक रुपया
(ख) तीन मास से अधिक किन्तु 6 मास से कम की सेवा के लिये अधिकतम 10/- रुपये के अध्याधीन रहते हुए पूर्ण किये गये सेवा काल के लिये दो रुपये मासिक।
(ग) छः मास से अधिक किन्तु एक वर्ष से अधिक न होने वाली सेवा के लिये, अधिकत्तम 25/- रुपये के अध्याधीन रहते हुए, पूर्ण किये गये, सेवा काल के लिये 3 रुपये मासिक ।
(घ) एक वर्ष के पश्चात् किन्तु 2 वर्ष के भीतर की सेवा के लिये, अधिकतम पचास रुपये के अध्याधीन रहते हुए, पूर्ण किए गए सेवा के लिए चार रुपये प्रतिमास।
413. भतों के लिए अभ्यर्थियों का, एक रजिस्टर प्रत्येक जिले में रखा जावेगा (प्रारूप क्रमांक 355)। जब कभी कोई अभ्यों सिविल सर्जन के पास परीक्षण के लिए भेजा जाये, स्तम्भ क्रमांक 8.. 13, 14, 15, 16 और 17 के सिवाय सभी स्तम्भ भरे जाकर रजिस्टर उसके साथ भेजा जावेगा। सिविल सर्जन स्तम्भ आठ और तेरह भरेगा। यदि अभ्यर्थी अक्षम घोषित कर दिया जावे, प्रविष्टि को लाल स्याही से काट देना चाहिए।
414. नामांकित किए जाने की आवश्यक शर्त के रूप में प्रत्येक अभ्यर्थी को, या तो उनको चेचक निकल चुकने की दशा के सिवाय टीका लगाये जाने का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना या सिविल सर्जन द्वारा टीका लगाये जाते के लिए अपने को प्रस्तुत करना होगा, पश्चात्वर्ती दशा में, यदि सिविल सर्जन तत्काल उक्त शल्य कार्य करने में समर्थ न हो. तो रंगरूट को उसके पास इस प्रयोजन के लिए प्रथम उपलब्ध अवसर पर भेजा जावेगा, ऐसे सभी रंगरूटों का पश्चात्वर्ती टीका लगाये जाने, का दिनांक दशांते हुए एक स्मरण-पत्र रखा जावेगा। अधीनस्थ पुलिस के किसी भी सदस्य से पुनः टीका लगवाये जाने के लिए प्रस्तुत होने की अपेक्षा की जा सकेगी, जब सिविल सर्जन ऐसा किया जाना आवश्यक समझे। (द्वितीय पद उन्हीं सिपाहियों पर लागू होगा जिनकी भर्ती या नियुक्ति दिनांक 18 जुलाई.. 1930 के बाद को गई हो)।
415. सभी रंगरूटों को, सभी शारीरिक अर्हताएँ धारण करना, चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त होना और अच्छे चरित्र का होना चाहिए। भर्ती के लिये अभ्यर्थी का चुनाव करने में पुलिस अधीक्षक उन्हें स्वीकार करेगा, जो पुलिस सेवा के लिए सबसे अधिक उपयुक्त पाये जायें। सिविल पुलिस के लिए अभ्यर्थी को आठवीं कक्षा (कनिष्ठ हाईस्कूल) या सरकार के अधीन सेवाओं में भर्ती के लिए, उसके समक्ष मान्यता प्राप्त परीक्षा में उत्तीर्ण होना चाहिये और सशस्त्र पुलिस के लिये अभ्यर्थी की छठी कक्षा या सरकार द्वारा मान्य समकक्ष परीक्षा में उत्तीर्ण होना चाहिए। सिविल और सशस्त्र दोनों हो पुलिस के लिये अभ्यर्थी को हिन्दी का काम चलाऊ ज्ञान भी होना चाहिए।
नेपाल के मूल निवासी की सम्मिलित करते हुए, कोई व्यक्ति जो भारत का नागरिक हो, राज्यपाल के नियम बनाने के नियन्त्रणाधीन सेवाओं और पदों की भर्ती के लिये असह्य होगा, परन्तु यह कि नेपाल के मूल निवास्नी की दशा में, इसके पूर्व कि उस व्यक्ति के भर्ती किए जाने का विचार किया जावे, पुलिस महानिरीक्षक के आदेश प्राप्त कर लिया जाना चाहिये। पुलिस महानिरीक्षक की रिपोर्ट भेजते समय, जाति, निवास इत्यादि के सम्यक् रूप से सत्यापित पूर्ण विवरण उसके मामले की सिफारिश किए जाने के कारण के साथ, सूचित किया जाना चाहिए।
टीप- यह पुनरावृत्त पैरा 21 मार्च, 1959 से प्रभावशील हुआ समझा जावेगा।
पुलिस अधीक्षक द्वारा भर्ती किया जाना प्रारम्भ करने के पूर्व, चुनाव के समय और स्थान तथा अपेक्षित योग्यताओं का पूर्ण प्रचार तहसीलों, स्कूलों, महाविद्यालयों, पंचायतों इत्यादि के माध्यम से किया जाना चाहिए।
416. पुलिस अधीक्षक उस सिपाही को पुनः भर्ती करने के लिए प्राधिकृत्त है, जिसने किसी प्रान्त के पुलिस बल में उनकी नियुक्ति से त्याग पत्र दे दिया हो, परन्तु यह कि उनका पूर्व चरित्र और त्याग-पत्र देने के कारण अच्छे रहे हों। ऐसे मामलों में, पुलिस अधीक्षक, मूलभूत नियम क्रमांक 27 के अधीन, उस सीमा तक अग्रिम वेतन वृद्धि मन्जूर कर सकता है जो एक पुनः भर्ती किए गए सिपाही को उस प्रक्रम में लाने के लिए जिसमें वह उत्तर प्रदेश पुलिस में इस समय के वेतनमान में पहुँच गया होता, यदि उसको त्याग-पत्र देने से पहले की सेवायें मूलभूत नियम क्र० 22 के अधान गिन ली जाती, इस प्रकार एक मार्च, 1933 के पूर्व भर्ती किए गए सिपाही की सेवायें अवकाश के लिए मूलभूत नियम 65 (क) के अधीन नहीं गिनी जावेंगी। इसके पूर्व कि सिपाही पुनः भर्ती किया जाये, प्रथम भर्ती की भांति उसका चिकित्सकीय परीक्षण कराया जाना चाहिये और उस आदमी के मामले में जो 23 वर्ष से अधिक आयु का हो, महानिरीक्षक को मन्जूरी, पुनः भर्ती के लिये ली जानी चाहिए।
417. उन व्यक्तियों ने जिन्होंने सरकारी सेवाओं की अन्य शाखाओं का परित्याग कर दिया है, उस विभाग से, जिसके वे सेवायोजन में थे, बिना निर्देश किये भर्ती नहीं किया जाना चाहिये। किसी विभाग से दुराचरण के कारण पदच्युत कोई व्यक्ति भर्ती नहीं किया जा सकेगा। (गवर्नमेंट आर्डर्स मैनुअल देखें)।
418. ज्यों ही किसी व्यक्ति का नाम अभ्यर्थी के रजिस्टर में प्रविष्ट कर लिया जाता है और उसको सिविल सर्जन द्वारा पारित कर दिये जाने पर या उस सिपाही की दशा में, जो अभ्यर्थी के रूप में बिना रजिस्ट्रीकृत हुए भर्ती कर लिया गया हो, तत्काल पश्चात्, उसका चरित्र, पूर्व इतिहास और आयु प्रारूप क्रमांक 92 में सत्यापित की जानी चाहिये। यह प्रारूप भेजने के लिए लाइन मोहर्रिर द्वारा रिजर्व निरीक्षक या उप-निरीक्षक से न्यून न होने वाले पंक्ति के किसी अधिकारी की उपस्थिति में लिखा जाना चाहिए और इसके पूर्व कि रंगरूट भर्ती किया जाये, उस पर इन अधिकारियों और रंगरूट के हस्ताक्षर होना चाहिये। रंगरूट को यह चेतावनी दे दी जाये कि यदि उसके द्वारा अपने बारे में. दिये गये कोई लेखे का विवरण असत्य पाया गया, वह अपने को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 182 के अधीन अभियोजन के दायित्वाधीन बना लेगा। पुलिस अधीक्षक को सावधानीपूर्वक यह सुनिश्चित कर लेना चाहिये कि क्या वह व्यक्ति पूर्व में किसी सरकारी सेवा में रहा है और इस बिन्दु पर, परिणाम को प्रारूप में यथासम्भव अंग्रेजी में अंकित करते हुये, सत्यापित करमा चाहिए।
419. ज्यों ही कोई अभ्यर्थी सिविल सर्जन द्वारा पारित कर दिया जावे, प्रोत्साहन का प्रारूप मुख्यालय पर किसी ज्येष्ठ राजपत्रित अधिकारी या मुख्यालय पर से सभी राजपत्रित अधिकारियों को अनुपस्थिति की दशा में पुलिस अधीक्षक के कार्यालय के भारसाधक अधिकारी की उपस्थिति में पढ़कर सुनाया जावेगा। इसके पश्चात् प्रारूप क्र० १० द्वारा विहित शपथ अभ्यर्थी द्वारा ली जावेगी और उसे प्रारूप क्र० 91 की एक प्रति दी जावेगी, जिसमें पुलिस कान्सटेबिल के कर्तव्य और उद्देश्य वर्णित किये गये हैं। उसके मूल्य में वृद्धि करने के लिये शपथ समारोह को यथासम्भव प्रभावोत्पादक बनाया जाना चाहिये।'
420. जिस अधिकारी की सेवानिवृत्ति के समय कठिनाई से बचने के लिये वह सभी सैनिक सेवा जिसकी पेन्शन के लिये गणना की जा सकें, भर्ती के समय सत्यापित र ली जानी चाहिये। आफिस मैत्युअल के अध्याय अट्ठाईस द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का सावधानीपूर्वक अनुसरण किया जाये।
421. शारीरिक प्रशिक्षण अनुदेशक यातायात पुलिस अर्दली, और अर्दली चपरासी, चिकित्सालय अर्दली, मोटर चालक, पुलिस लाइन के अध्यापक ग्रामीण पुलिस इत्यादि को सम्मिलित करते हुये सभी पंक्तियों के पुलिस अधिकारियों और सिपाहियों द्वारा पहनी जाने वाली वर्दी के बाबत विस्तृत अनुदेश इन विनियमों में पृथक छापे गये तृतीय परिशिष्ट में अन्तर्विष्ट हैं।
भर्ती पर हर एक रंगरूट बिना मूल्य के वर्दी विनियमों के पैरा 232 में वर्णित और उस पैरा में वर्णित शर्तों पर सजा के अतिरिक्त वस्तुएं पाने का अधिकारी है। वे सिपाही जो सेवा परित्याग करने के पश्चात् पुनः भर्ती किये जायें, इस सब्बा की जारी किये जाने के लिये पात्र नहीं है रंगरूट को वेतन का 57- रु० अधिक न होने वाला, ऑग्रम जो एक रुपये मासिक की अंशिकाओं के द्वारा वसूल योग्य होगा, स्वीकार किया जा सकता है।
421-एं. (1) सिविल पुलिस
(क) पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में उत्तीर्ण होने बाला प्रत्येक अधिकारी जिले में पदस्थ किये जाने पर 1500 रु० की साज-सामान का सामान्य भत्ता प्राप्त। करेगा।
(ख) प्रत्येक अधिकारी उप-निरीक्षक के रूप में अस्थायी रूप से पदोन्नत किये जाने या प्रभारी अधिकारों की क्षमता में कार्य करने पर, उप निरीक्षक की पंक्ति धारण करने पर कुल मिलाकर सात मास की अवधि के लिए सौ रुपये का साज-सामान भत्ता प्राप्त करेगा।
(2) सशस्त्र और सवार पुलिस-उप-निरीक्षक के रूप में पदोन्नत सभी अधिकारों जब में अस्थाई रूप से प्रदोन्नत किये गये हों या प्रभारी अधिकारों की क्षमता में हो, तो कुल मिलाकर सात मास की समयावधि के लिए 100 रुपये की साज-सामान भत्ता प्राप्त करेंगे, परन्तु यह कि कोई अधिकारी अपनी सेवा में उप-निरीक्षक के रूप में सिविल पुलिस में 150 रुपये, उप-निरीक्षक के रूप में सशस्त्र, सवार या सैनिक पुलिस में 100 रु० से अधिक भत्ता प्राप्त नहीं करेगा।
(3) प्रत्येक दशा में भत्ता पुलिस अधीक्षक द्वारा बजट शीर्ष "29-पुलिस-बी० डी० ३० एफ०- (क) डिस्ट्रिक पुलिस- काल्टेनजेन्सीज परचेज आप्फ यूनीफाम्स एण्ड एकाउन्ट मैहर्स" से सीधे कोषालय से निकाला जायेगा और सम्बन्धित अधिकारों को भुगतान दिया जावेगा। पुलिस अधीक्षक भुगतान का दिनांक और भुगताई गई राशि को (सम्बन्धित अधिकारी की) सेवा पुस्तक में उस दिनांक को जब वेतन और भते अंकित किये जाते हैं: अंकित करेगा।
(4) वायरलेस का रखरखाव करने वाले और थाने के अधिकारी (क) प्रत्येक कपरलेस मॅन्टीमेन्स और थाने का अधिकारी जो सिविल बीयरलेस तर विभाग में उप-निरीक्षक हो, 150 १० का मात्र सामान भत्ता प्राप्त करेगा, जब वह प्रशिक्षण का विहित पाठ्यक्रम पूरा करके किसी जिले में पदस्थ किया जाये।
(ख) प्रतीक मामले में देय भत्ता वायरलेस टेलीग्राफी सेक्शन के भारसाधक अधिकारी जिसका वर्तमान पदनाम प्रान्तीयू बाँबरलेस अधिकारों है, के द्वारा बाट शीर्ष 29-पुलिस-डिस्ट्रिक एक्जीक्यूटिव फोर्स (डी) वायरलेस टेलीग्राफ सेक्शन कन्टेजेन्सीज", से सीधा कोषालय से निकाला जायेगा और सम्बंधित अधिकारी को भुगतान कर दिया जावेगा। उक्त अधिकारी भुगतान के दिनांक और भुगताई गई राशि को सम्बन्धित अधिकारी को सेवा पुस्तिका में अंकित करेगा।
422 पुलिस अधीक्षक, किसी व्यक्ति को जी पूर्व में ही सरकारी सेवा में हो, उस अधिकारी को महमति के बिना, जिसका वह व्यक्ति अधीनस्थ हो, उसके नियंत्रक्षीधीन किसी पद पर नियुक्त नहीं करेगा। ऐसी सहमति तब भी आवश्यक होगी जब कोई व्यक्ति अपने पूर्व पद से त्याग-पत्र दे दे। सिविल सैनिक पेन्शन का कृपणत् धन भोगी व्यक्तियों की नियुक्ति के नियमों के लिए सिविल सर्विस रेगुलेशन का अध्याय इक्कीस विशेषतया आर्टिकल 501, 510-क और 526 देखिये।
423. भर्ती किये जाने के दिनांक को दशति हुए प्रारूप क्रमांक 25 में नियुक्ति का एक प्रमाण-पत्र कपड़े पर मढ़ाकर 1861 के पांचवें अधिनियम के अधीन पुलिस बल में भर्ती किये गये प्रत्येक व्यक्ति को दिये जायेंगे।
424. ज्येष्ठ सेवा के अधिकारियों द्वारा प्रथम नियुक्ति और पश्चात् के समय की अचल सम्पत्ति के स्वामित्व अर्जन की घोषणा के लिए गवर्नमेंट आर्डर्स पुस्तिका देखिए।
425. कर्मचारी मण्डल की नियुक्ति के नियमों के लिए आफिस मैन्युअल का अध्याय अट्ठर्वस देखिए।
426. उन मामलों के नियमों के लिये, जिनमें अस्थायी नियुक्तियों पर भारसाधक नियुक्तियाँ की जा सकें, के लिये आफिस मैन्युअल का अध्याय उन्नीस देखिये।
427. सिपाहियों के लिये, जिनके नाम भर्ती के लिये अभ्यर्थियों के रजिस्टरों में से (पैरा 13 देखिये) और जो अस्थाई रिक्तियों पर तब तक नियुक्त न हुई हों. बरोयता दावा रहेगा। यदि उनमें से कोई व्यक्ति उपलब्ध न हो, अन्य नियुक्त किये जा सकते हैं। पुलिस अधीक्षक को यथासम्भव कान्सटेबिल के रूप में अस्थायी रूप से नियुक्त सिपाहियों के लिए इस बात पर आग्रह करना चाहिये कि वे रंगरूटों के लिये अपेक्षित योग्यताएँ रखते हों। किसी व्यक्ति को स्थाई रिक्ति में कान्संटेबिल के रूप में अस्थाई रूप से कार्य करने के लिये नियुक्त नहीं किया जावेगा।