पैरा 196 से 214 अध्याय 18 UP पुलिस रेगुलेशन

पैरा 196 से 214 अध्याय 18 UP पुलिस रेगुलेशन

Free Online Judiciary Coaching Classes Free Online Judiciary Coaching Classes

अध्याय 18

विशेष गारद और अतिरिक्त पुलिस

196. गारदों और अनुरक्षण (मार्ग रक्षा) के बारे में सामान्य अनुदेशों के लिये अध्याय "गारद और अनुरक्षण के नियम 1928" को निर्देशित किया जावे |

197. रिजर्व लाइनों से गश्ती दल- हर रात रिजर्व लाइनों से एक गश्ती दल, लाइनों से तैनात मुख्यालय के सभी पुलिस गार्डों का दौरा करेगा: बशर्ते कि पुलिस अधीक्षक, उप-महानिरीक्षक की मंज़ूरी से, निर्देश दे सके कि लाइनों से दूर स्थित किसी भी गार्ड का रात में नहीं, बल्कि बार-बार या कभी-कभार दौरा किया जाए। यह गश्ती दल अपने मार्ग पर या उसके आस-पास स्थित सभी सार्वजनिक भवनों का दौरा करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे सुरक्षित हैं।

198. अन्य विभागों से गार्डों की आपूर्ति हेतु अनुरोध-सरकार के अन्य विभागों के अधिकारियों से गार्डों की आपूर्ति हेतु प्राप्त अनुरोधों पर, रिजर्व बल को अनावश्यक रूप से कम किए बिना आपूर्ति की जा सकती है। गार्डों की संख्या अधीक्षक द्वारा विभागीय नियमों के अनुसार निर्धारित की जानी चाहिए, यदि वे मामले पर लागू होते हैं, या यदि कोई नियम न हों, तो अपने विवेक से निर्धारित की जानी चाहिए।

प्रत्येक मामले में अधीक्षक के लिए यह निर्धारित करना आवश्यक है, या संदेह होने पर महानिरीक्षक से यह पता लगाना आवश्यक है कि गार्ड से शुल्क लिया जाएगा या नहीं। अधीक्षक को निम्नलिखित निर्देशों का पालन करना होगा:

() सिंचाई विभाग जैसे वाणिज्यिक विभागों को छोड़कर स्थानीय सरकार के अन्य विभागों को आपूर्ति किये जाने वाले गार्डों के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए।

वर्तमान में सरकार द्वारा वाणिज्यिक के रूप में मान्यता प्राप्त केन्द्रीय और राज्य विभागों और उपक्रमों की सूची वित्तीय पुस्तिका, खंड V, भाग I के परिशिष्ट IX के अनुलग्नक में दी गई है।

() भारत सरकार ने-

(1) उत्तर प्रदेश में कोष भेजने के लिये पुलिस मार्गरक्षी दल के यात्रा और अन्य आनुषंगिक व्ययों के प्रभार के लिए और

(2) करेन्सी कार्यालय, कानपुर, अफीम और सर्वे विभाग को प्रदाय किए गए पुलिस गारद के वेतन, पर्यवेक्षण व्यय और भविष्य निधि अंशदान के कारण प्रभार के लिये, दायित्वाधीन 'होना स्वीकार कर लिया है।

किसी अनुदेश, प्रतिकूल अनुदेश के अभाव में, यह मान लिया जाना चाहिये कि केन्द्रीय सरकार के विभागों, उदाहरणार्थ डाक विभाग को प्रदाय किये गये गारदों के लिए उपरोक्त पद () (2) के अनुसार प्रभार धन लिया जावेगा।

199. निजी मनोरंजन के लिए भी गारद प्रदान की जा सकती है, किन्तु आफिस मैन्युअल के पैरा 158 में दी गई दरों पर उसके लिये भुगतान लिया जावेगा।

200. जिला और नगर पालिका बोर्ड तथा अधिसूचित क्षेत्र नियम के तौर पर मेलों आदि के अवसरों पर, जो संस्थापित लो कर्त्तव्यों के स्वरूप के होते हैं विशेष पुलिस सुरक्षा के लिये कोई प्रभार देने के लिए दायित्वाधीन नहीं है। जिला प्रदर्शनी में कर्तव्यों पर प्रतिनियुक्त पुलिस, पुलिस एक्ट की धारा 13 के अधीन प्रदाय किए जाते हैं और उसी धारा के अधीन प्रदर्शनी के प्राधिकारियों से वसूली की जाती है। इन प्रभार धनों के बारे में विस्तृत नियम आफिस मैनुअल के चौदहवें अध्याय में पाये जायेंगे।

201. निजी संगठनों या व्यक्तियों से जो किसी मेले या संगठन करते हों आफिस मैनुअल में दी गई दर के अनुसार प्रभार धन लिया जाना चाहिये।

202. रेलवे को सुरक्षा प्रदाय करने और उसके लिये वसूली करने के विस्तृत नियम आफिस मैनुअल के पैरा 157 में विस्तार से दिये गये हैं।

स्टेट बैंक आफ इण्डिया के अभिकर्ता की अपेक्षा पर पुलिस द्वारा मार्ग रक्षा दल प्रदाय करने के नियम, सिवाय उसके जबकि कोषालय अधिकारी यह प्रमाणित करे कि भेजी जाने वाली रकम सरकारी लेखे की है, आफिस मैनुअल के पैरा 157 में पाये जायेंगे। गृह मार्ग रक्षा दल 1861 के पाँचवें अधिनियम की धारा 13 के अधीन प्रदाय किये जाते हैं।

203. इन विनियमों के पैरा 72 और 79 में यथाउपबन्धित के सिवाय काई अर्दली पुलिस अधीक्षक द्वारा उप महानिरीक्षक की मंजूरी के बिना न तो सेवा योजन में लगाया जायेगा और न प्रदाय किया जायेगा। 9

राजपत्रित अधिकारियों और रिजर्व इन्स्पेक्टर द्वारा उपयोग और पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में सेवा के लिये अर्दली चपरासियों का एक पृथक् कर्मचारी मण्डल रखा जाता है।

204. जब भ्रमण पर हो, डिवीजन के कमिश्नर, पुलिस महानिरीक्षक और उपमहानिरीक्षक को एक हेड कान्सटेबिलों और तीन कान्सटेबिलों की एक गारद उपलब्ध कराई जावेगी। जब वे निरीक्षण के लिये उनके भ्रमण के दौरान ऐसे स्थान पर परिदर्शन करें तो इलाहाबाद और लखनऊ के छोड़कर अत्य स्थानों पर इसी प्रकार की गारद उच्च न्यायालय के सम्माननीय न्यायाधीश अथवा राजस्व मण्डल के सदस्य को, जुडीशियल मेम्बर के अतिरिक्त, ऐसी गारद उपलब्ध कराई जावे।

ऐसी गारद उस जिले के पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रदाय की जावेगी जहाँ ऐसे अधिकारी परिदर्शन करें। यदि आवश्यक हो तो पुलिस अधीक्षक उप-महानिरीक्षक को अपनी रेंज के रिजर्व से जहाँ ऐसे दाबों की पूर्ति के लिये उपलब्ध हो, सहायता के लिये आवेदन करेगा।

205. सब डिवीजन का भारसाधक हर एक ज्वाइन्ट मजिस्ट्रेट और असिस्टेन्ट मजिस्ट्रेट और डिप्टी मजिस्ट्रेट व्यवस्था बनाये रखने के लिए भ्रमण पर अपने शिविर में रिजर्व लाइन द्वारा प्रतिनियुक्त सिविल पुलिस का एक कान्सटेबिल रखेगा। करवी (बाँदा) और ललितपुर (झाँसी) सब डिवीजनों के भारसाधक जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक और ज्वाइन्ट मजिस्ट्रेट को अपने निवास स्थान पर एक हेड कान्सटेबिल और तीन कान्सटेबिलों की एक सशस्त्र पुलिस गारद रखने की स्वीकृति है, वह इस गारद या इसके किसी भाग को भ्रमण पर जाते समय अपने शिविरों की रक्षा और व्यवस्था बनाये रखने के लिये अपने साथ ले जा सकते हैं

206. यदि निर्देश करने के लिये समय, अधीक्षक की पुलिस एक्ट (1861 का पाँचवाँ) की धारा 13 के अधीन अतिरिक्त गारद प्रदाय करने के लिये, सिवाय तब कि जब कोई छोटी गारद बहुत ही थोड़े समय के लिये अपेक्षित हो, जिला मजिस्ट्रेट से परामर्श कर लेना चाहिये।

प्रदाय की गई गारद पर्याप्त रूप से इतनी बड़ी होनी चाहिये कि वह अपने कत्र्तव्य की दक्षता से पालन करने में और सिपाहियों को बिना कोई कठिनाई पहुँचाये, समर्थ हो सके। दिन और रात के कार्य के लिये गारद में चार सिपाहियों से कम का समावेश नहीं होना चाहिये। रेंज के उप-महानिरीक्षक की * मंजूरी के बिना, निजी व्यक्तियों को प्रदाय की गई गारद के लिये आग्नेय शस्त्र प्रदाय न किये जावें।

207. (1) जब जिला मजिस्ट्रेट का यह अभिमत हो कि उसके अधिकारिता के किसी क्षेत्र में, जो उपद्रवी भयानक स्थिति में हो, पुलिस ऐक्ट (1861 का पाँचवाँ) अधिनियम की धारा 15 के अधीन अतिरिक्त पुलिस आरोपित की जावे, उसे घटना के घटित होने के पश्चात् यथासंभव शीघ्र अपना प्रस्ताव सरकार को एक साथ डिवीजन के कमिश्नर और पुलिस के महानिरीक्षक के माध्यम से, प्रस्तुत करना चाहिये, जिसमें पुलिस अधीक्षक का लिखित दृष्टिकोण का भी समावेश होगा। विलम्ब से चलने के लिये प्रारंभिक प्रकरण में अर्द्ध शासकीय पत्र व्यवहार का प्रयोग किया जा सकता है तथा जिला मजिस्ट्रेट को, निवासियों के उस वर्ग के बारे में जानकारी प्राप्त न होने के करण हुये विलम्ब से, जिनसे वह अतिरिक्त पुलिस का व्यय वसूल करना चाहता हो, अपने प्रस्ताव को स्थगित नहीं करना चाहिये, प्रारंभिक प्रस्ताव में सदैव ही विनिर्दिष्ट किये जावें :-

(1) बल्कि अब आरोपित करने के कारण,

(2) प्रस्तावित शक्ति और नियोजित की जाने वाली पुलिस की श्रेणी,

(3) यह कालावधि जिससे अतिरिक्त पुलिस आरोपित की जाना है,

(4) उन आनुषंगिक व्ययों के (यदि कोई हो) स्थूल अनुमान के साथ अनुशंसा की गई आरोपित अतिरिक्त पुलिस के अनुमानित (विस्तृत नहीं) व्यय, जिनकी अतिरिक्त पुलिस के व्यय के निर्धारण और वसूली में अन्तर्वलित होने की संभावना हो,

(5) सामान्यतया निवासियों या निवासियों का वर्ग जो व्यय उठायेंगे और व्यय भुगताने में उनकी सामर्थ्य, और

(6) वह क्षेत्र जहाँ अतिहिक्त पुलिस आरोपित होना हो।

पुलिस एक्ट (1861 का पाचवा) अधिनियम की धाराए 15 के अधीन अतिरिक्त पुलिस के लिए आवेदन अग्रेषित करते हुये (आफिस आर्डर्स का पैरा 154) आयुक्त को यह विचार करना चाहिये कि क्या अपेक्षित राशि निर्धारितियों पर अधिक कठोरता से दबाव डाले बिना, वसूल की जा सकती है।

(2) अधिनियम की धारा 5 (3) सहपठित धारा 15 (2) के अधीन अतिरिक्त पुलिस का व्यय 15 (1) के अधीन जारी की गई उद्घोषणा के पूर्व के काल के सम्बन्ध में अतिरिक्त पुलिस का व्यय निवासियों से वसूल नहीं किया जा सकता, अपितु यह सरकार पर आयेगा। इसलिए यह आवश्यक है कि ज्यों ही अतिरिक्त पुलिस की आवश्यक प्रकट दिखाई दे प्रारंभिक अर्द्धशासकीय प्रस्ताव तत्काल प्रस्तुत कर दिये जावें।

(3) यह भी आवश्यक है कि अर्द्धशासकीय प्रस्ताव में इस बात की सावधानी अपनाई जावे कि उस क्षेत्र में जिसमें अतिरिक्त पुलिस आरोपित किया जाना है, वह सभी क्षेत्रफल सम्मिलित कर लिए जावें, जिनसे त्र्यय की वसूली सम्भाव्य हो क्योंकि अधिनियम की धारा 15 (1) के अधीन जारी की गई घोषणा से अधिक क्षेत्र आवश्यक हुआ तो प्रारंभिक रूप से अधिसूचित क्षेत्र के सम्बन्ध में अतिरिक्त पुलिस का व्यय एक तारीख से और अतिरिक्त क्षेत्र अधिसूचित होने पर उसके बारे में दूसरी तारीख किया जावेगा।

(4) यदि सरकार का यह समाधान हो जावे कि अतिरिक्त पुलिस का प्रस्ताव आवश्यक है तो वह (1861 का पाचवा) अधिनियम की धारा 15 (1) के अधीन उद्घोषणा जारी करेगी।

(5) ऊपर विचार किए गए प्रांरभिक अर्द्धशासकीय प्रस्ताव जिला मजिस्ट्रेट ने भेजा हो या न भेजे हो, उसे एक साथ डिवीजन के आयुक्त और पुलिस के महानिरीक्षक के माध्यम से औपचारिक प्रस्ताव यथासंभव शीघ्र भेज देना चाहिये। अपने औपचारिक प्रस्ताव में उसे उपरोक्त पैरा (1) में विनिर्दिष्ट सभी विषयों पर पूर्ण रूप से रिपोर्ट करना चाहिये, और इसके अतिरिक्त उसे छूट जिये जाने वाले निवासियों के वर्ग और उस क्षेत्र के बारे में, यदि कोई हो, जो मूल प्रस्ताव में सम्मिलित किया गया था; किन्तु बाद में ऐसा प्रतीत हुआ हो कि उसे निकाल दिया जावे, के बारे में अपनी अनुशंसा भी भेजेगा। व्यय के बारे में एक प्रारूप विवरण पत्र चार प्रतियों में भेजा जाना चाहिये, किन्तु यदि इस विवरण पत्र के पूर्ण होने से औपचारिक प्रस्ताव भेजने में विलम्ब हो, उन प्रस्तावों को इस रिपोर्ट के साथ प्रस्तुत कर देना चाहिये कि जितनी संभव हो सकेगा, व्यय के विवरण पीछे भेज दिये जायेंगे।

(6) जब कभी पुलिस एक्ट (1861 का पाचवों) अधिनियम की धारा 15 के अधीन आरोपित अतिरिक्त पुलिस के कार्य काल में विस्तार करना वांछनीय समझा जावे, प्रस्तावित विस्तार के कारणों और उसकी कालावधि सहित मजिस्ट्रेट द्वारा सरकार को संभाग के आयुक्त और पुलिस के महानिरीक्षक के माध्यम से एक रिपोर्ट एक साथ भेजी जानी चाहिये, इस प्रकार कि वह कालावधि समाप्त होने के एक मास पूर्व सरकार के पास पहुँचा जावे।

(7) अतिरिक्त पुलिस को बिना सरकार की मंजूरी के उस समय के पश्चात् जिसके लिये वह प्रारंभिक रूप से आरोपित की गई थी, न रोका जाये।

208. अन्य जिलों को कर्तव्य पर भेजे गये सभी बलों को प्रमाण-पत्र दिये जायें, और उन्हें यह अनुदेश भी जिया जावे कि यदि अपेक्षा में कोई अन्य स्थान वर्णित न किया गया हो तो वह रिजर्व लाइन में अपनी रिपोर्ट दें।

जब किसी दूसरे जिले को विशेष कर्तव्य पर भेजा जाना हो, अच्छे सिपाही छाँटे जाना चाहिये।

स्थानान्तरण के सभी मामलों में प्रारूप क्रमांक 232 में अंतिम वेतन और प्रभार-पत्र तैयार किए

जायें और अग्रेषित कर दिए जावें।

209. दूसरे जिलों की पुलिस की मार्ग रक्षा में भेजे गए विचाराधीन बंदियों और पागलों के रेलवे भाड़े और भोजन पर व्यय किये जाने वाला धन स्थायी अग्रिम रूप से भुगतान किया जाना चाहिए और तत्पश्चात् उसकी पुनर्पूति "शव, आहत और अभियुक्यों के परिवहन" के अनुदान से कर ली जाये।

210. दोषसिद्ध व्यक्तियों पर जिनकी उपस्थिति न्यायालय द्वारा चाही जावे, किये जाने वाले व्ययों और प्रभारों के नियमों के लिये गवर्नमेंट आर्डर्स की पुस्तिका देखिये।

किसी बन्दी के परिवहन के व्यय के लिये न्यायालय द्वारा भुगतान किए गए धन को "प्रिजनर्स टेस्ट मनी एक्ट के अधीन प्राप्ति" शीर्ष में जमा किया जाये।

211. भारत के राज्यों के बाहर भेजे गये कैदियों के साथ जाने वाली पुलिस गारद तथा भेजे जाने वाले अनुरक्षकों की सहायता यथासम्भव स्थानीय एवं रेलवे पुलिस द्वारा की जानी चाहिए।

212. किसी भी पंक्ति के दो से अनधिक पुलिस अधिकारी किसी भी कैदी को ले जाने हेतु भारतीय रेलवे की किसी मालगाड़ी को असाधारण रूप से रोकने के लिए तथा उसके ब्रेक वैन में यात्रा करने के लिए प्राधिकृत हैं, यदि-

() कैदी के उन्मोचित (छुड़ा लिये जाने) कराने का खतरा है;

() कैदी की चिकित्सकीय देखभाल आवश्यक है जिसे कि स्थल पर प्राप्त नहीं किया जा सकता

() कैदी अन्धेरा होने से पूर्व हवालात में निरुद्ध नहीं किया जा सकता। यदि किसी यात्री गाड़ी की प्रतीक्षा की जाती है। पुलिस अधीक्षक को सम्बंधित अधिकारियों तथा व्यक्तियों पर इस बात का प्रभाव डालना चाहिए कि इन रियायतों का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

नोट- भारत में इस तरह की सुविधा का प्रचलन वर्तमान समय में व्यवहार के रूप में समाप्त कर दिया गया है।

213. प्राप्त हो सकने वाली इस सुविधा का उपयोग रेल के द्वारा कोष का मार्ग रक्षण करने के "समय किया जावे। ये सुविधाएँ रेलवे के 'कोचिंग टेरिफ' में पाई जावेंगी और भेजे जाने वाले कोष के भार के अनुसार एक या अधिक सिपाहियों के लिए निःशुल्क यात्रा के स्वरूप की है।

214. जेल प्राधिकारी जेल के बाहर चिकित्सालय को भेजे गये बन्दिशों और दो सिपाहियों की रक्षा के लिए उत्तरदायी है। एक केवल संकट काल में ही पुलिस गारद को इस प्रयोजन के लिये नियुक्त किया जावे, जबकि सिविल चिकित्सालय को भेजे जाने वाले बन्दियों की संख्या जेल कर्मचारी मण्डल को संख्या के 25 प्रतिशत से भी अधिक कम हो जाने से यह आवश्यक हो जावे, परिस्थितियों की रिपोर्ट तत्काल रेन्ज के उपमहानिरीक्षक को भेजी जावे।

Free Judiciary Coaching
Free Judiciary Notes
Free Judiciary Mock Tests
Bare Acts