पैरा 534 से 538 अध्याय 36 UP पुलिस रेगुलेशन

Download Android App    Download iOS App
Note: 1. Use ORG Code: XLVPGR For IOS and Web APP. 2. To Download the PDF it is necessary to download the App. 3. You can Use Only Sigle Device to access the Courses on App

Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 36

उप-निरीक्षकों का प्रशिक्षण

534. सिविल पुलिस के उप-निरीक्षकों को प्रान्तीय पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय से होकर निकलना चाहिए। महाविद्यालयों में उनके प्रशिक्षण और जिले में उनके व्यवहारिक प्रशिक्षण के लिये उत्तर प्रदेश पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय पुस्तिका माग, तीन देखिये।

उस दिनांक से जिसको वे जिले में उप-निरीक्षक के रूप में पदस्थ किये जाते हैं, सिविल पुलिस उप-निरीक्षक दो वर्ष की समयावधि के लिये परिवीक्षा पर रहेंगे, जिसकी समाप्ति पर, यदि वह उन्हें स्थायी नियुक्ति के लिये उपयुक्त समझें, वे उप-महानिरीक्षक द्वारा सम्पुष्ट किये जा सकेंगे।

535. अपनी परिवीक्षा की समयावधि के दौरान उनसे पुलिस के कार्य की सभी शाखाओं में निम्नलिखित रीति से व्यवहारिक प्रशिक्षण के पाठ्‌यक्रम का अध्ययन करने की अपेक्षा की जावेगी-

(1) उन्हें मुख्यालय पर या उसके निकट के किसी थाने में संलग्न किया जावेगा, जहाँ वे-

(क) कर्तव्यों के वितरण, रिपोर्ट, जनरल डायरी और थाने के अन्य रजिस्टरों को तैयार करना, निगरानी और गश्त की विधि प्रारूपों की पूर्ति करना सम्मिलित करते हुये पुलिस के कार्य की परिपाटो सीखेंगे।

(ख) अन्वेषण, केस डायरी की तैयारी और मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट, थानेदारों के सामान्य कर्तव्यों में, परिवीक्षाधीन कम से कम छः अन्वेषणों में किसी सक्षम अधिकारी के साथ रहते हुये, अनुदेश प्राप्त करेंगे,

(ग) उन्हें सरल मामले निरावलम्ब रूप से अन्वेषण के लिये दिये जावें। इस समय-अवधि के दौरान वे उस नगर या मण्डल के, जहाँ वे पदस्थ किये जावें, प्रभारी निरीक्षक के विशेष अधीक्षण के अधीन रहेंगे, और वह अपने अधीनस्थ प्रत्येक परिवीक्षाधीन के बारे में नियतकालिक रिपोर्ट देगा।

(2) वे कुछ सप्ताह पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में व्यय करेंगे जहाँ वे पुलिस अधीक्षक के आदेशों के अधीन आदेशों के लिये डायरियों और उन कागजों के संक्षेप तैयार करते हुये कार्य करेंगे।

(3) वे कुछ सप्ताहों के लिये कार्यालयों में संलग्न रहेंगे जहाँ उन्हें अभियोजन के लिये भेजे गये मामलों में पुलिस के कागजों की परीक्षा करने और उस समयावधि के दौरान लोक अभियोजक के अधीक्षण के अधीन अभियोजन के लिये अनुदेशित किया जावेगा, उन्हें आपराधिक जन-जाति उप-निरीक्षक के कार्यों में भी अनुदेशित किया जावे।

(4) वे व्यायाम, निरीक्षण, गारदों को पदस्थ और कार्यभार मुक्त किये जाने, सड़कों पर रेखायें डालने, वाहनों को पार्क (खड़ा) करने और रिजर्व लाइन के अन्य प्रकीर्ण कर्तव्यों में अनुदेश प्राप्त करेंगे। द्रुप मुख्यालय पर रहने वाले परिवीक्षाधीन रहने वाले उप-निरीक्षकों को इक्वीटेशन में अपने को प्रवीण रखना चाहिये और सवारी के लिये स्कूल में नियतकालिक रूप से उपस्थित रहना चाहिए।

536. पुलिस अधीक्षक को हर परिवीक्षाधीन के लिये, उस थाने की जिसमें उपरोक्त पैरा 535 के नियम एक से प्रयोजन के लिये संलग्न किया जाना है और वे समयावधि जिनके लिये उसे कार्यालयों और लाइनों में नियम दो, तीन और चार के प्रयोजनों के लिये संलग्न किया जाना है नियत करते हुए, एक कार्यक्रम तैयार करेगा। कार्यक्रम इस प्रकार व्यवस्थित किया जावे कि एक ही समय में एक ही स्थान पर बहुत सारे परिवीक्षाधीन अनुदेश प्राप्त न करें। पैरा 535 में निर्धारित पाठ्यक्रम को उन पदोन्नत प्रधान कांस्टेबिलों की दशा में विलुप्त या छोटा किया जा सकता है, जिन्होंने पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में भेजे जाने के पूर्व अधीक्षक या लोक अभियोजक के कार्यालयों में सेवा को हो

व्यायाम सज्जा निरीक्षण और रिजर्ब लाइन में अन्य कर्तव्यों के बारे में उचित ज्ञान अर्जित कर लिया हो, और जो अधीक्षक के अभिमत में इनके सम्बंध में सक्षम हैं;

ज्यों ही पुलिस अधीक्षक को यह समाधान हो जावे कि परिवीक्षाधीन पैरा 535 में गिनाये गये सभी कर्तव्यों में पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित हो गया है, वह उसे किसी चुने हुये थानेदार के अधीन पैरा 50 के अधीन अधीनस्थ उप-निरीक्षक के साधारण कर्तव्यों को सम्पन्न करने के लिए पदस्थ कर देगा।

प्रत्येक परिवीक्षाधीन के लिये, एक प्रशिक्षण पत्र रखेगा जिस पर वह ऐसी सामग्री संग्रह करेगा जो किसी भी समय परिवीक्षाधीन की प्रगति और अंततः सम्पुष्टि के लिये उसकी उपयुक्तता के बारे में अभिमत बनाने को समर्थ बना सके। इस पत्र में उस निरीक्षक की, जिसके अधीक्षण में परिवीक्षाधीन प्रशिक्षित हुआ हो, रिपोर्ट का संक्षेप और परिवीक्षाधीन के अन्वेषण पर तथा उसके अन्य सभी काया और आचरण के बारे में अधीक्षक की टीपें प्रविष्ट की जानी चाहिए। अपने द्वारा जिले के निरीक्षण के समय, उप-महानिरीक्षक को प्रत्येक परिवीक्षाधीन को, जो छः मास से अधिक परिवीक्षा पर रह चुका हौ, उसके कार्यक्रम और प्रशिक्षण पत्र के साथ देखना चाहिए और अपना अभिमत प्रशिक्षणा पत्र पर अभिलिखित करना चाहिए।

537. (1) पुलिस उप-महानिरीक्षक, पैरा 534 के अधीन परिवीक्षा पर रखे गए किसी परिवीक्षाधीन की परिवीक्षा समयावधि में, व्यक्तिगत मामलों में एक वर्ष से अधिक न होने वाले कुल समय के लिए विस्तार कर सकेगा। ऐसा कोई विस्तार, ऐसा दिनांक विनिर्दिष्ट करेगा जहाँ तक विस्तार अनुदत्त किया गया है।

(2) परिवीक्षा की समयावधि के दौरान या उसकी समाप्ति पर या उसके सम्पुष्टि के आदेश पारित और प्रभावशील होने के पूर्व, किसी समय यह पाया जावे कि परिवीक्षाधीन ने उसको दिए गए अवसर का पर्याप्त लाभ नहीं उठाया है या अन्यथा रूप से समाधान करने में विफल रहा है, उप-महानिरीक्षक आदेश दे सकेगा-

(1) यदि वह सीधे नियुक्त किया गया हो, उसकी सेवामुक्ति के लिए, या

(2) यदि वह पदोन्नति द्वारा नियुक्त किया गया हो, उसकी अवनति के लिये,

परंतु यह कि सेवामुक्ति की दशा में, पुलिस उप-महानिरीक्षक द्वारा सेवामुक्ति का आदेश दिये जाने के पूर्व, उसे सेवामुक्ति के आधारों से सूचित किया जावेगा, पद मुक्ति के आदेश के विरुद्ध कारण बताने का एक अवसर दिया जावेगा और इस बारे में उसके स्पष्टीकरण पर, यदि कोई हो, तो सम्यक रूप से विचार किया जावेगा।

(3) उप-पैरा (2) के अधीन परिवीक्षा के दौरान या परिवीक्षा की समयावधि की समाप्ति पर या परिवीक्षा की विस्तार की गई समयावधि की समाप्ति पर, पदमुक्त किया गया कोई परिवीक्षा व्यक्ति, किसी क्षति पूर्ति के पाने का अधिकारी न होगा।

(4) परिवीक्षाधीन को अपनी नियुक्ति में परिवीक्षा की समयावधि की समाप्ति पर या परिवीक्षा की विस्तार की गई गमयावधि की समाप्ति पर सम्पुष्ट कर दिया जावेगा, यदि पुलिस उप-महानिरीक्षक उसे सम्पुष्टि के लिये उपयुक्त समझे और उसकी संनिष्ठा प्रमाणित कर दी जावे।

538. सिविल और सशस्त्र पुलिस के कैडेट जो परीक्षा मण्डल के अभिमत में अपनी अन्तिम परीक्षा में असाधारण विशिष्टता से उत्तीर्ण हों "जेट" कैडेट के रूप में वर्गीकृत किये जावेंगे। यह उनकी चरित्र नामावली में अभिलिखित किया जावेगा। परीक्षा मण्डल का अध्यक्ष पुलिस महानिरीक्षक को अपनी रिपोर्ट में इस विशिष्टता के लिए सिफारिश किये गये कैडेटों के नाम लिखेगा, पुलिस महानिरीक्षक के आदेश अन्तिम होंगे।

सिविल पुलिस के "जेड" वर्ग के अधिकारी को उसकी इच्छाओं का ध्यान रखते हुए बल की उस शाखा में जिसके लिए वह सबसे अधिक उपयुक्त प्रतीत होता हो, विशेष प्रशिक्षण दिया जावेगा। उसके बारे में, उसके उप-निरीक्षक रूप में सम्पुष्ट हो जाने पर निरीक्षक के पद पर हुत पदोन्नति के लिए विचार किया जावेगा।

सशस्त्र पुलिस का "जेड" क्लास अधिकारी साधारणतया किसी प्रशिक्षण केन्द्र में मुख्य निरीक्षक के या सैनिक पुलिस में प्लाटून कमान्डर के रूप में नियोजित किया जावेगा। उसके बारे में उप-निरीक्षक के रूप में सम्पुष्ट हो जाने पर रिजर्व निरीक्षक की पंक्ति पर द्वत पदोन्नति के लिए विचार किया जायेगा।

My Legal Consultants
Free Judiciary Coaching
Free Judiciary Notes
Free Judiciary Mock Tests
Bare Acts