
40. मण्डल निरीक्षक के प्रधान कर्तव्य, अन्वेषण का पर्यवेषण और अपराध का निवारण करना (रोकथाम करना), पुलिस मैण्डल में निवारक और अन्वेषण कार्यों में सामंजस्य रखना, इस प्रयोजन के लिये अन्य मण्डल निरीक्षकों के साथ सहयोग करना और यह देखना कि पुलिस, विशेषकर उसके अधीनस्थ थानेदार, अपने कर्तव्यों की ईमानदारी और दक्षता से पालन करते हैं, उसकी शक्ति, उसके कार्यालय से सम्बन्धित अनावश्यक लिपिकीय कामों या थाने के निरीक्षण में नष्ट नहीं होनी चाहिये।
वह अपने मण्डल के लिए एक अपराध रजिस्टर रखेगा और थानों के सीधे सभी संज्ञेय अपराधों की प्रथम इतला रिपोर्ट प्राप्त करेगा, किन्तु रजिस्टर में उसकी टिप्पणियां सुनियोजित और गम्भीर अपराधों के अन्वेषण और निवारण के लिए की गई कार्यवाही की सूची होना चाहिये और उसका रजिस्टर नगण्य अपराधों के विवरणों का दलदल नहीं होना चाहिये। वह अपने मण्डल के प्रत्येक थाने का वर्ष में एक बार, मण्डल निरीक्षकों द्वारा थानों के निरीक्षण के ज्ञापन के अनुदेशों का अनुसरण करते हुये, मुख्यतया अपराधों के निवारण और अन्वेषण के विषयों पर ध्यान देते हुये निरीक्षण करेगा। उसे सभी महत्त्वपूर्ण मामलों, घटनास्थल का परिदर्शन करना और अन्वेषण में मार्गदर्शन करना चाहिये और उसे स्वयं अन्वेषण का संचालन करने की अधीक्षक द्वारा प्रतिनियुक्त किया जा सकता है। जब कभी वह अन्वेषण में उपस्थित रहे, वह अपनी उपस्थिति के समय की केस डायरी पर केवल हस्ताक्षर ही नहीं करेगा, किन्तु उसे विस्तारपूर्वक उन अनुदेशों को अभिलिखित करना चाहिये जिन्हें मामले के भावी संचालन के लिये अन्वेषक अधिकारी को देना आवश्यक पाये।
मण्डल निरीक्षक अपने मण्डल का एक मासिक सर्वे तैयार करेगा जिसमें वह बतायेगा कि उसने उस होने में अपने मण्डल में अपराधों के निर्धारण और अन्वेषण के लिये क्या उपाय किये हैं और क्या कोई आगे कार्यवाही अपेक्षित है। यह सर्वे थानेदार द्वारा होना चाहिये और मण्डल निरीक्षक के माध्यम से पुलिस के अधीक्षक के पास जाना चाहिये।
निगरानी के बारे में उसके कर्तव्यों के, जिसके प्रति उसे विशेष ध्यान लगाना चाहिये विस्तृत विवरण पैरा 251 में दिये गये हैं। उसे लोगों से सुपरिचित होना चाहिये और मण्डल के हर भाग की स्थानीय जानकारी प्राप्त करना चाहिये ।।
41. मण्डल निरीक्षक के यह भी कर्तव्य होंगे-
(1). अधीक्षक को हर एक मण्डल में ऐसी घटना से सूचित करते रहना चाहिये। जिसे प्रशासन के हित में अधीक्षक या जिला मजिस्ट्रेट को जानना चाहिये, विशेषकर उसका यह कर्तव्य है कि वह सरकार के उपायों के प्रति विरोधी भावना और किसी आन्दोलन, आर्तक या अफवाह की जो यदि रोकी न जावे तो कष्टदायक हो सकती है, रिपोर्ट करें।
(2) पुलिस बल का उस समय नायकत्व (कमान) हाथ में लेना जब वह किसी दंगे का दमनः कर रहा हो या अन्यथा सक्रिय रूप से व्यवस्था बना रहा हो जबकि वह हाजिर ज्येष्ठ पुलिस अधिकारी हो।
(3) प्रारूप 3 में अपनी गतिविधियों के बारे में एक डायरी और उन सभी विषयों के बारे में, जिन्हें उसे अधीक्षक के ध्यान में लाना हो, किन्तु जिन्हें वह अपनी निरीक्षण रिपोर्ट में यथोचित रूप से वर्णित न कर सकता हो, अंकित करने के लिए एक गोपनीय नोट बुक भी बनाये रखेगा।
(4) आयुध और विस्फोटक अधिनियमों के अधीन अनुज्ञात (लीयसेन्स प्राप्त) दुकानों का निरीक्षण करना एक्सप्लोनिब्स मैनुअल (1908) के पृष्ठ 61-62 और इण्डियन आर्म्स रूल्स 1924 का पैरा 28 (4) देखें।
(5) अपने मण्डल की अधीनस्थ पुलिस के आचरण और उस रौति से जिसमें वे अपने कर्तव्य का पालन करते हैं, अधीक्षक को सूचित करना और विभागीय मामलों में ऐसी प्रारभ्मिक जांच करना जैसी अधीक्षक निर्देशित करे।
42. उन जिलों में, जिनमें, महानिरीक्षक के मत में थानों की संख्या मण्डल निरीक्षकों की संख्या के अनुपात में, उनके द्वारा पैरा 40 और 41 के द्वारा अपेक्षित नियन्त्रण रखने के लिये बहुत अधिक हो, मण्डल निरीक्षक को निम्न प्रकार से कुछ उत्तरदायित्वों से मुक्ति दे दी जावेगी
1) पैरा 101 में गिनाये गये वर्गों के अपराधों और ऐसे अन्य अपराधों की, जैसा पुलिस अधीक्षक निर्देशित करे, प्रथम इत्तिला रिपोर्ट प्राप्त करेगा और उसका अपराध रजिस्टर केवल इन्ही वर्गों के अपराधों के बारे में बनाये रखा जायेगा।
(2) हर एक मण्डल निरीक्षक से उसके मण्डल के सभी थानों का वार्षिक रूप से निरीक्षण किये जाने की अपेक्षा करने के आदेश, उस पर लागू न होंगे।
(3) निगरानी, निवारक कार्यवाहियों, अपने वरिष्ठ अधिकारियों को महत्वपूर्ण घटनाओं और आन्दोलनों [पैरा 41 (1) से सूचित रखने और उपरोक्त प्रथम वर्ग के, जिनके सम्बन्ध में उसे उत्तरदायी बनाया गया है, अपराधों का दमन करने में सामंजस्य बनाये रखने के लिये उसका उत्तरदायित्व बना रहेगा। इस प्रयोजनों के लिये, वह ग्रामों और थानों का भ्रमण और परिदर्शन करेगा। वह पैरा 41 (2) (3) और (4) से निरन्तर आबद्ध बना रहेगा अन्यथा उसका प्रधान कर्तव्य आपराधिक और विभागीय मामलों में अन्वेषण और जाँच तथा उसका पर्यवेक्षण करना और उन थानों का निरीक्षण करना होगा जिनके बारे में उसका पुलिस अधीक्षक समय समय पर निर्देशित करे।