पैरा 73 से 78 अध्याय 7 UP पुलिस रेगुलेशन

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अध्याय 7

सशस्त्र प्रशिक्षण रिजर्व (आरक्षित)

73. सशस्त्र पुलिस को रिजर्व प्रत्येक जिले में बनाई रखी जाती है। उसकी शक्ति हर जिले के लिए नियत की जाती है।

74. सशस्त्र रिजर्व में सेवाएँ नामावली द्वारा समनुदेशित की जावें, जिससे हर सदस्य बारी-बारी से रिजर्व से होकर निकल जावे। सेवा काल दो मास से अधिक का नहीं होना चाहिए। रिजर्व को इकट्ठे मुक्त किया जावे, किन्तु विशेष कारणों से अधीक्षक किसी सिपाही को रिजर्व में दूसरे निरन्तर काल के लिए सेवा करने के आदेश दे सकता है।

75. पुलिस अधीक्षक अवकाश पर रहने वाले सिपाहियों को रिजर्व के लिए समनुदेशित कर सकता है, किन्तु ऐसे सिपाहियों का अनुपात रिजर्व के 11/85 से अधिक का नहीं होना चाहिए। रिजर्व के सिपाहियों को अवकाश तभी अनुदत्त किया जावेगा, जब उसकी बीमारी या विशेष रूप से अति आवश्यक किसी निजी मामले के कारण ही अति आवश्यक अपेक्षा होने पर अनुदत्त (मन्जूर) किया जा सकेगा।

इन रंगरूट की, जिनकी सेवाएँ एक वर्ष से कम की न हों, रिवर्ज के लिए समनुदेशित किए जा सकेंगे किन्तु ऐसे रंगरूटों का अनुपात उस वास्तविक अनुपात से अधिक का नहीं होना चाहिए जो एक वर्ष से कम की सेवा के न होने वाले रंगरूटों और सशस्त्र पुलिस की कुल मन्जूर की गई शक्ति में रहता है।

जब सशस्त्र पुलिस में रिक्त स्थानों की संख्या मन्जूर की गई शक्ति के 20 प्रतिशत से अधिक हो जावें, और एक वर्ष से कम की सेवा करने वाले रंगरूटों की संख्या एक वर्ष से अधिक सेवा करने वाले रंगरूटों की संख्या से बढ़ जावे, तो एक वर्ष से अधिक की सेवा करने वाले रंगरूटों के बारे में यह माना जावेगा कि वे रिजर्व में समनुदेशित किये जाने के लिए दक्ष कान्सटेबिल हैं। तब छः मास से अधिक की सेवा वाले रंगरूटों को इस पैरा के प्रथम पद में विनिर्दिष्ट किए गए अनुपात में, रिजर्व में पदस्थ किया जावे। इस पद के अधीन अपवाद के रूप में की गई व्यवस्था के लिए रेन्ज के उप महानिरीक्षक की मंजरी आवश्यक है।

76. जब सशस्त्र पुलिस किसी दूसरे जिले में विशेष कर्तव्य पर प्रतिनियुक्त की जावे, वे इस रिजर्व से प्रदाय किये जायें, जब तक कि वह अधिकारी जो प्रतिनियुक्ति का आदेश देता है, अन्यथा निर्देशित करे।

जिले के भीतर रिजर्व को डकैती के विशेष कत्र्तव्य पर, मेलों और दूसरे बड़े समूहों पर व्यवस्था बनाये रखने या प्रशांति के गंभीर गैंग को रोकने के लिए, नियोजित किया जा सकेगा। ऐसे कर्तव्यों पर रिजर्व की सेवा में नियोजित किये जाने की विस्तृत सूचना उप महानिरीक्षक को बिना विलम्ब के भेज दी जानी चाहिए। रिजर्व की सेवा नियोजन की अनुज्ञा विशेष अवसरों तक ही निबन्धित है, किन्तु मुख्यालय पर रात्रि को गश्त लगाने का कर्तव्य रिजर्व के एक भाग को सौंप दिए जाने में कोई आपत्ति नहीं है, इसे रिजर्व के साधारण प्रशिक्षण का अंग समझा जावे और उसकी रिपोर्ट उन महानिरीक्षक को किए जाने की कोई आवश्यकता नहीं है।

77. रिजर्व के सदस्यों को साधारण दिनचर्या के कर्तव्यों में उदाहरणार्थ गारद या मार्ग-रक्षण में नियोजित नहीं किया जाना चाहिए जब तक कि आवश्यकता तात्कालिक न हो और अपेक्षित पुलिस का अन्यथा उपबन्ध न फिया जा सके। जब सिथिल पुलिस उपलब्ध और सशस्त्र पुलिस के पूरक के रूप में सुरक्षित रूप से नियोजित की जा सकती हो, रिजर्व से माँग करने से बचना चाहिए। जब रिजर्व का कोई सदस्य दिनचर्या के कर्तव्य पर नियोजित किया जाये, अधीक्षक को तत्काल उप महानिरीक्षक के पास, कारणों को स्पष्ट करते हुये, विस्तृत रिपो भेजना चाहिए। यदि अधीक्षक मुख्यालय पर न हो, और उसके आदेश सिपाहियों को दिनचर्या के कर्तव्य पर भेजने के पूर्व प्राप्त न किए जा सके, इस रिपोर्ट को मुख्यालय पर रहने वाले ज्येष्ठ अधिकारी द्वारा तैयार की जाकर भेजना चाहिए, जिसे उसकी एक प्रति अधीक्षक को देना चाहिये।

78. सशस्त्र ट्रेनिंग रिजर्व की प्रशिक्षण के हर काल में व्यायाम, बन्दूक चालन निरीक्षण सशस्त्र पुलिस के सामान्य कर्तव्यों, प्रांरभिक विधि और लाइन स्कूल के पाठ्यक्रम के ऐसे अंश, जैसे अधीक्षक यथोचित समझे, पूर्ण पाठ्यक्रम से होकर निकाला जाये।

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