पैरा 539 से 554 अध्याय 37 UP पुलिस रेगुलेशन

पैरा 539 से 554 अध्याय 37 UP पुलिस रेगुलेशन

अध्याय 37

प्रधान कान्सटेबिलों और कान्सटेबिलों का प्रशिक्षण

539. सिविल और सशस्त्र दोनों पुलिस के रंगरूटों को ऐसे स्थान और ऐसी रीति से प्रशिक्षण दिया जावेगा जैसा पुलिस महानिरीक्षक अवधारित करें और प्रशिक्षण की समाप्ति पर ऐसी परीक्षा में सम्मिलित होना पड़ेगा, जैसी कि महानिरीक्षक विहित करें।

540. कोई रंगरूट कान्सटेबिल, जो परीक्षा संचालित करने वाले अधिकारी के अभिमत में असाधारण प्रवीणता प्रकट करें, "एक्स" रंगरूट के रूप में विभूषित किया जायेगा। यह उसकी चरित्र नामावली में अभिलिखित किया जायेगा। उसे विशेष प्रशिक्षण दिया जावेगा और यदि वह सिविल पुलिस में प्रारूपित किया जावे तो उसे यथासम्भव शीघ्र प्रान्तीय पदोन्नति परीक्षा में सम्मिलित करने के लिए प्रोत्साहित किया जावेगा।

541. (1) रंगरूट उस दिन से परिवीक्षा पर रहेगा जब से वह किसी स्पष्ट स्थिति पर भार साधन करे। परिवीक्षा की अवधि, निम्नलिखित दशाओं के अतिरिक्त, दो वर्ष की होगी।

() वे, जो अपराध अन्वेषण विभाग में या जिला इन्टेलीजेन्स के कर्मचारी मण्डल में सीधे भरती किये गये हों, तीन वर्ष की समयावधि के लिए परिवीक्षा पर रहेंगे, तथा

() वे, जो सवार पुलिस में अन्तरित किये गये हों, पुलिस विनियमों के पैरा 34 के अधीन दिये गये निर्देशों के द्वारा शासित होंगे।

यदि परिवीक्षा की समयावधि की समाप्ति पर, आचरण और कार्य समाधान कारक रहा हो और यदि रंगरूट को उप-महानिरीक्षक के द्वारा बल में सेवा के लिए अनुमोदित कर दिया गया हो तो पुलिस अधीक्षक उसे उसकी नियुक्ति पर सम्पुष्ट कर देगा।

(2) किसी मामले में जिसमें परिवीक्षा की समयावधि के दौरान या उसकी समाप्ति पर पुलिस अधीक्षक का यह मत हो कि रंगरूट के अच्छे पुलिस अधिकारी बनने की सम्भावना नहीं है, वह उसकी सेवा से हटा सकेगा। तथापि, इसके पूर्व कि ऐसा किया जावे, रंगरूट को उन विनिर्दिष्ट शिकायतों और आधारों को प्रदाय किया जावे जिन पर उसे सेवामुक्त करना प्रस्ताविक हो और तब उससे यह कारण बताने को कहा जावे कि उसे क्यों न सेवामुक्त कर दिया जावे। रंगरूट को अपना अभ्यावेदन लिखित रूप में प्रस्तुत करना चाहिए और उस पर पुलिस अधीक्षक द्वारा, पदमुक्ति के आदेश पारित करने के पूर्व सम्यक् रूप से विचार किया जावेगा।

(3) उपरोक्त पैरा (2) के अधीन अधीक्षक द्वारा पारित किया गया प्रत्येक आदेश उप-महानिरीक्षक के नियन्त्रण के अध्याधीन रहते हुए, अन्तिम होगा।

542. लाइनों के स्कूलों में प्रशिक्षित अध्यापकों द्वारा विधि और नियमों में अनुदेश दिये जावेंगे। नियम के तौर पर एक उप-पुलिस अधीक्षक को स्कूल के प्रभार में रखा जावेगा, जिसका जब वह मुख्यालय पर हो, सप्ताह में कम से कम तीन बार परिदर्शन करना चाहिए। अनुभवी पुलिस अधिकारियों द्वारा व्यवहारपूर्ण व्याख्यानों के लिए बहुधा व्यवस्था की जावे। अधीक्षक को स्कूल के परिदर्शन करने का प्रत्येक अवसर लेना चाहिए। परिदर्शक अधिकारियों के लिए एक निरीक्षक पुस्तक रखी जानी चाहिए।

543. कान्सटेबिल "" और "" श्रेणियों के होते हैं। जून, 1941 तक "" श्रेणी में रिक्तियाँ अंशतः पूर्ण शिक्षित व्यक्तियों और अंशतः पूर्ण अशिक्षित या अर्द्ध शिक्षित में से व्यक्तियों, जिनके पास गुप्तचर के रूप में विशेष योग्यता या कुशल सेवा के लम्बे अभिलेख होते थे, मरी जाती थी, जून, 1941 के पश्चात् कान्सटेबिलों को "" श्रेणी में पदोन्नति प्राप्त करने के लिए ऐसी शैक्षिक परीक्षा में उत्तीर्ण होना चाहिए जैसी समय-समय पर महानिरीक्षक के द्वारा विहित की जावे। "" श्रेणी में वे सभी कान्सटेबिल आ जाते हैं जिनका "" श्रेणी में प्रवेश न हुआ हो।

लिपिकीय कर्तव्यों पर कान्सटेबिलों का नियोजन निम्नलिखित शर्तों के अध्याधीन है-

(1) कोई कान्सटेबिल इस प्रकार नियोजित नहीं किया जायेगा जब तक उसे कार्यपालक कर्तव्य, का कम से कम एक वर्ष का अनुभव न रहा हो, और

(2) तब तक जब तक कि योग्य व्यक्ति संख्या में उपलब्ध हों, कोई कान्सटेबिल इस प्रकार का नियोजित नहीं किया जायेगा, जब तक कि वह विहित परीक्षा में उत्तीर्ण न हो गया हो।

544. रिजर्व लाइन में ड्रिल रिजर्व निरीक्षक और सशस्त्र पुलिस के उप-निरीक्षक के अधीक्षण में सिखायी जायेगी।

सशस्त्र पुलिस और सिविल इमरजेन्सी रिजर्व के सभी अवर अधिकारियों और सिपाहियों तथा सभी रंगरूटों का स्क्वैड, प्लाटून और कम्पनी ड्रिल में, समीप और विस्तृत क्रम में, कम्पनी सेरीमोनियल में, गारदों कर्तव्यों में और पद सेना के आक्रमण के सामान्य सिद्धान्तों में और गोली चालन की दिशा में, अनुशासन और नियन्त्रण में और जहाँ तक ये सिद्धान्त पुलिस की कार्यवाही पर लागू होते हों, दंगों के दमन और अपराधियों के गिरोह का घेरा डालने में, अनुदेशित किया जावेगा।

सिविल और सशस्त्र पुलिस के सभी सिपाहियों से शारीरिक प्रशिक्षण में उपस्थित रहने की अपेक्षा की जाती है। तथापि पुलिस अधीक्षक/कमान्डेन्ट 45 वर्ष से अधिक आयु वाले व्यक्ति को शारीरिक प्रशिक्षण, औजारी के कार्य, अन्य ऐसे उद्योगों अभ्यासों से छूट दे सकता है जिन्हें प्रशिक्षणार्थी दक्षतापूर्वक सम्पन्न कर सकता।

545. सवार पुलिस के सिपाही और अधिकारी, इक्विटेशन, घुड़सवारी द्वप और सेरीमोनियल ड्रिल, गारद के कर्तव्य, तलवार और भाले के प्रयोग और युद्ध में घुड़सवार द्वारा कार्यवाही के समान्य सिद्धान्तों के बारे में, जहाँ तक वह पुलिस के लिए उपयोगी हों, अनुदेशित किये जावेंगे।

546. मण्डल निरीक्षक सिविल पुलिस के उप-निरीक्षक और प्रधान कान्सटेबिल को प्लाटून ड्रिल जानना चाहिए और उन्हें परेड संचालित करने में पुलिस की टुकड़ियों की कमान लेने में, सन्तरियों को पद पर लगाने और कार्य-भार मुक्त करने में और अपने सिपाहियों को प्लाटून ड्रिल, गारद के कर्तव्यों सड़क पर रेखायें डालने, वाहनों के पार्क करने और डन्डों तथा सीटियों के उपयोग का निरीक्षण करने में समर्थ होना चाहिए। सिविल पुलिस के कान्सटेबिलों की स्कवैड ड्रिल और ऊपर विनिर्दिष्ट किये गये व्यवहारिक कर्तव्यों को जानना चाहिए।

547. पुलिस अधीक्षक जब वह भ्रमण पर न हो, सप्ताह में कम से कम एक बार रिजर्व लाइन में होने वाले पुलिस बल के सामान्य प्रदर्शन को कमान्ड करेगा और मुख्यालय के पुलिस थाने पर सज्जा निरीक्षण में भी उपस्थित रहेगा। उन्हें लाइनों और थानों में दिये जाने वाले अनुदेशों के गुण की बहुधा परीक्षा करना चाहिए। उन्हें लाइन और मुख्यालय के पुलिस थाने में सहायक तथा उप-पुलिस अधीक्षकों को परेड में उपस्थित रहने के लिए दिन नियत करना चाहिए। गुरुवार ड्रिल के लिए अवकाश रहेगा।

548. बन्दूक चालन और रिवाल्वर का अभ्यास किसी राजपत्रित अधिकारी या रिजर्व निरीक्षक के समक्ष किया जाना चाहिए जो व्यक्तिगत रूप से इस बात के लिए भी उत्तरदायी होगा कि दुर्घटनाओं के प्रति और गणना के अभिलेखों की सत्यता के बारे में सभी सावधानियाँ अपना ली गई

549. प्रत्येक सोमवार को, रिजर्व लाइन की पूरी पुलिस अपनी सज्जा, आयुध, वर्दी, घोड़े, घोड़े का समान, नियुक्ति प्रमाण-पत्र और वर्दी और साजसज्जा पुस्तक के निरीक्षण के लिए परेड करेंगे। उनका निरीक्षण उपस्थित ज्येष्ठ राजपत्रित अधिकारी या रिजर्व निरीक्षक द्वारा किया जायेगा।

इन अवसरों पर, पुलिस राजपत्र में प्रकाशित उस जिले के लिए विहित नये विभागीय आदेश, पुलिस को प्रभावित करने वाली विधियों और नियमों में महत्वपूर्ण परिवर्तन और ऐसे ही अन्य विषयों को सिपाहियों को व्याख्या की जायेगी।

550. "आहत व्यक्तियों का प्रथम उपचार" में अनुदेश सहायक सर्जन या उप-सहायक सर्जन द्वारा परिवीक्षाधीन अधिकारियों और रंगरूटों को दिये जावेंगे। पुलिस बल के उप-सदस्यों को जिन्होनें "प्रथम उपचार" में प्रमाण-पत्र प्राप्त किया हो, अभ्यास द्वारा अपना ज्ञान बनाये रखना चाहिए और सभी थानों तथा लाइनों के निरीक्षण के समय उनका परीक्षण किया जाना चाहिए। जब रंगरूट प्रथम उपचार में अनुदेश प्राप्त न कर रहे हों या जब उनकी तुलना में नए रंगरूट अनुदेश प्राप्त कर रहे हों सहायक, सर्जन या उप-सहायक सर्जन को जिले के मुख्यालय में पदस्थ पुलिस को नवीनीकरण अनुदेश देने के लिए नियोजित किया जाना चाहिए।

551. सशस्त्र पुलिस के कान्सटेबिलों में से बिगुल बजाने वाले का चुनाव किया जाना चाहिए। प्रारम्भिक प्रशिक्षण लाइन में दिया जावेगा जिसके पश्चात् सिपाही को उप-महानिरीक्षक द्वारा आगामी प्रशिक्षण के लिए प्रतिनियुक्त किया जावेगा।

552. ड्रिल अनुदेशकों को जिन्होंने पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय, मुरादाबाद में निरीक्षण के पाठ्यक्रम में भाग लिया हो, प्रातः परेड के विसर्जन के पश्चात् निरीक्षण में अनुदेश देने के लिए दैनिक कक्षा लेना चाहिए। सशख पुलिस के सभी उप-निरीक्षक और प्रधान कान्सटेबिल, जो लाइन में उपलब्ध ही और निरीक्षण में प्रमाण-पत्र धारण न करते हों उन्हें इस कक्ष में तब तक उपस्थित रहना चाहिए जब तक वे पुलिस अधीक्षक के समाधान कारक योग्यता प्राप्त न कर लें।

553. जिले के रिजर्व लाइन के स्कूलों में नियोजित प्रशिक्षण अध्यापक, नियुक्ति के पश्चात् एक वर्ष तक परिवीक्षाधीन रहेंगे। इस समयावधि के दौरान या समाप्ति पर, किसी अध्यापक को, जिसका कार्य या आचरण असन्तोषजनक पाया जावे, किसी नगरपालिका या जिला बोर्ड के अधीन, उसके मूल घर लौटा दिया जावेगा। उन अध्यापकों को, जिनका परिवीक्षा में रहते हुए आचरण और कार्य समाधानकारक पाया जावे, पुलिस में स्थाई रूप से अन्तरित कर दिया जावेगा और वे पुलिस के लिपिकीय कर्मचारी मण्डल के लिए पेन्शन के और अन्य सामान्य नियमों के अध्याधीन रहेंगे। नगरपालिका या जिला बोर्ड में सेवा की गणना अवकाश के लिए की जावेगी, किन्तु पुलिस पेन्शन के लिये नहीं।

554. जब ऐसे अनुदेशों की कोई माँग हो, लाइन के स्कूलों में पदस्थ प्रशिक्षण अध्यापक, पुलिस अधिकारियों के बालकों को प्राथमिक शिक्षा देंगे।

कक्षायें प्रातः काल के प्रारम्भ में लगाई जावें जब कि अध्यापक रंगरूटों को अनुदेश देने में व्यस्त न हो। प्रत्येक अध्यापक 16 बच्चों से अधिक की कक्षा नहीं लेगा। इसके लिए कोई व्यय नहीं लिया जायेगा और चच्च्चों के अनुदेशन को रंगरूटों के अनुदेशन में किसी भी रीति से हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

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