पैरा 527 से 533 अध्याय 35 UP पुलिस रेगुलेशन

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

चौथा भाग

प्रशिक्षण

अध्याय 35

राजपत्रित अधिकारियों, निरीक्षकों और रिजर्व उप-निरीक्षकों का प्रशिक्षण

527. समस्त पुलिस अधिकारियों से, प्रथम बार नियुक्त किये जाने पर व्यायाम (ड्रिल) सीखने की ओर सिवाय लोक अभियोजक और सहायक लोक अभियोजक के, उनसे उनकी पूरी सेवाकाल में जानकारी रखने की धारणा की जाती है।

रिजर्व निरीक्षक और वरिष्ठ पंक्ति के सभी अन्य अधिकारियों को बल की सभी शाखाओं के लिये विहित की गई ड्रिल में प्रवीण होना चाहिए।

528. परिवीक्षाधीन सहायक पुलिस अधीक्षक को सोलह मास की अवधि के लिए प्रान्तीय पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में अनुदेशों के एक पाठ्यक्रम का अध्ययन करना होता है।

उनके प्रशिक्षण, अनुदेशों के विषयों, परीक्षाओं, जिले में व्यवहारिक प्रशिक्षण, सम्पुष्टि और सेवामुक्ति के लिए नियम प्रान्तीय पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय मैन्युजल भाग दो में दिये गये हैं।

उनके द्वारा महाविद्यालय छोड़ने के पश्चात् जिले में सहायक पुलिस अधीक्षक का व्यवहारिक

प्रशिक्षण निम्नलिखित रीति से क्रियान्वित किया जाना चाहिए-

(1) कार्यालय का कार्य () अंग्रेजी  - अंग्रेजी कार्यालय के सम्बन्ध में जिला पुलिस के मुख्य लिपिक, लेखपाल और पुलिस अधीक्षक के सभी कर्तव्यों में अधिकारियों को अनुदेश दिये जायेंगे। इसमें, पत्र-व्यवहार संचालित करने की रीति, विशेष रिपोटों का प्रारूप बनाना, लेखा रखना, पेन्शन के कागजों, वेतन बिलों, अन्य सदृश्य दस्तावेजों को तैयार करना, अंग्रेजी में अपराध रजिस्टर बनाये रखना तथा आपराधिक और अन्य विवरणियों को संकलित तथा प्रस्तुत करना, सम्मिलित होगा। इस शाखा में अपने प्रशिक्षण को पूरा करने के लिए, अधिकारियों को बारी-बारी से मुख्य लिपिक और लेखपाल के वास्तविक प्रभार में ऐसी समयावधि के लिए, जैसी अधीक्षक आवश्यक समझे रखा जावेगा।

() भाषायें  - अधिकारियों से, पुलिस डायरियों और रिपोर्टों से व्यवहार करने, अधीक्षक की सूचना और आदेशों के लिए हिन्दी के कागजों को तैयार करना और थानों को जारी करने के लिए पत्रों, आदेशों, वर्णात्मक नामावलियों और सदस्य कागजों के अनुवाद करने की, अपेक्षा की जावेगी।

(2) रिजर्व निरीक्षकों के कर्तव्य  - रिजर्व निरीक्षक के कर्तव्यों के बारे में अधिकारियों को पूरी तरह अनुदेशित किया जायेगा। उन्हें गोला बारूद के भण्डार की, शस्त्रों के बारे में, कर्तव्यों और अन्य रजिस्टरों को बनाये रखना, रिजर्व के दैनिक कर्तव्यों का बाँटना और व्यायाम तथा बन्दूक चालन में अनुदेशों का अधीक्षण करना, मार्गरक्षक दल को कार्यभार मुक्त करना और गारद का निरीक्षण करना, सीखना चाहिए। अपने अनुदेशों को पूर्ण करने के लिए उन्हें रिजर्व निरीक्षक के कर्तव्यों में वास्तविक प्रभार में ऐसी समयावधि के लिए, जो अधीक्षक आवश्यक समझे, रखा जायेगा।

(3) अन्वेषण  - अधिकारियों को चुने हुए अन्वेषणकर्ता अधिकारियों के साथ रहने और अधीक्षक के देखने के लिए टीपों और डायरियाँ तैयार करने को प्रतिनियुक्त किया जायेगा। तत्पश्चात् वे अपने आप दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 172 और इन विनियमों के अध्याय दस के द्वारा अपेक्षित रीति से डायरी प्रस्तुत करते हुए, क्षुद्र मामलों का अन्वेषण करेंगे। अन्त में अधिकारियों को बीस दिन के लिए नंगर के पुलिस थाने के वास्तविक प्रभार में रखा जावेगा। यदि थाने में उनके लिए कोई स्थान न हो, उनसे प्रतिदिन नौ घन्टे उपस्थिति रहने की, उपस्थिति के घन्टे अधीक्षक द्वारा नियत किये जाते हुए, अपेक्षा की जायेगी। शिविर लगाने के मौसम के दौरान वे किसी महत्वपूर्ण ग्रामीण पुलिस थाने के निकट 10 दिन के लिए शिविर लगायेंगे और उस समयावधि के लिए उसका प्रभार धारण करेंगे।

(4) विभागीय मामले -  विभागीय दण्ड के मामलों में प्रारम्भिक जाँच करने के लिए अधिकारियों को प्रतिनियुक्त किया जावे।

(5) मामलों का अभियोजन  - पुलिस अधीक्षक की जानकारी और आदेश के लिए, विशेषकर उन मामलों में जिनमें अनियमिततायें या अवैधानिकतायें की गई हों, निर्णय किये जा चुके मामलों पर अपनी टीप अंकित करेगा, उनसे साक्ष्य का संक्षेप बनाने और निष्कर्ष लिखने की अपेक्षा की जायेगी। तत्पश्चात् वे किसी सक्षम अधिकारी के मार्गदर्शन में अभियोजन के लिए मामले तैयार करेंगे। वे बहुधा प्रक्रिया औश्र व्यवहार सीखने के लिए न्यायालयों में उपस्थित होंगे और उन्हें तीन महत्वपूर्ण मामलों में अभियोजन संचालित करना चाहिए।

(6) निरीक्षण  - अधीक्षण प्रशिक्षण के अधीन अधिकारियों में थानों के आयुध तथा गोला बारूद की दुकानों के निरीक्षण के समय अपने साथ चलने की अपेक्षा करेगा। बाद में अधिकारियों से निरावलम्बी रूप से निरीक्षण करने की, अपनी रिपोर्ट को अधीक्षक के आदेशों के लिए प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जानी चाहिए।

(7) पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय छोड़ने के पश्चात् और नीचे विहित किए प्रमाण-पत्र (क) से (ङ) के अनुदत्त किये जाने के पूर्व सहायक पुलिस अधीक्षक को प्रत्येक दशा में एक मास तक अपराध अन्वेषण विभाग और महानिरीक्षक के कार्यालय में संलग्न किया जाना चाहिए।

(8) व्यवहारिक कार्य के लिए कोई परीक्षा विहित नहीं की गई है, परन्तु इसके पूर्व कि कोई सहायक अधीक्षक जिले के किसी सब-डिवीजन का प्रभार धारण करने को या जिले के प्रभारी के रूप में पदधारण करने के लिए अर्ह हो, उससे पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय मैन्युअल, भाग दो में वर्णित किये गये "इन्फेन्टरी" और "इक्वीटेशन" प्रमाण-पत्र तथा अधीक्षक द्वारा हस्ताक्षरित इस रेन्ज के उप-महानिरीक्षक द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित इस आशय का प्रमाण-पत्र प्राप्त करने की अपेक्षा की जावेगी कि वह-

(क) जनरल और केस डायरियों पर उचित आदेश पारित,

(ख) वह बुद्धिमत्तापूर्वक किसी अन्वेषण का अघीक्षण,

(ग) दक्षतापूर्वक किसी पुलिस थाने का निरीक्षण,

(घ) पुलिस लेखपाल के कार्य का दक्षतापूर्वक अधीक्षण,

(ङ) पुलिस एक्ट की धारा 7 के अधीन विभागीय कार्यवाहियों का दक्षतापूर्वक संचालन कर सकता है।

उप-महानिरीक्षक, प्रमाण-पत्र पर प्रतिहस्ताक्षर करने के पहले सहायक अधीक्षक से प्रश्न करेगा और उसके कार्य का परीक्षण करेगा।

टीप  - उप-महानिरीक्षक को व्यावहारिक कार्य का (क) से (ङ) तक का प्रमाण-पत्र प्रतिहस्ताक्षरों को प्रस्तुत करते समय, पुलिस अधीक्षक प्रत्येक अधिकारी के सम्बन्ध में यह प्रमाणित करेगा कि उसने नगरीय पुलिस थाना का प्रभार 20 दिन तक और ग्रामीण थाने का प्रभार 10 दिन तक धारण किया है, और तीन महत्वपूर्ण मामलों में अभियोजन संचालित किया है।

529. पदोत्रत द्वारा नियुक्त किये गये उप-अधीक्षक एक वर्ष तक परिवीक्षा पर रहेंगे और नियुक्ति पर जिले में पदस्थ किये जायेंगे। उनसे किसी प्रशिक्षण में भाग लेने या किसी परीक्षा में उत्तीर्ण होने की अपेक्षा नहीं की जायेगी, परन्तु उनसे पुलिस अधीक्षक द्वारा हस्ताक्षरित और उप-महानिरीक्षक द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित, इस आशय का प्रमाण-पत्र प्राप्त करने की अपेक्षा की जावेगी कि वे मुख्य लिपिक और लेखपाल के कार्यों का अधीक्षण कर सकते हैं, पुलिस की लेखा प्रणाली से भली प्रकार परिचित हैं और पुलिस एक्ट की धारा 7 के अधीन विभागीय कार्यवाहियों को दक्षतापूर्वक संचालित कर सकता है। रिजर्व निरीक्षक की पंक्ति से पदोत्रत हुए व्यक्तियों के अतिरिक्त, किसी अधिकारी द्वारा प्राप्त किया जाने वाले प्रमाण-पत्र में इस आशय का एक पद भी सम्मिलित रहेगा कि वे रिजर्व निरीक्षक के कार्य का दक्षतापूर्वक निरीक्षण कर सकते हैं।

सीधे नियुक्त उप-अधीक्षक के प्रशिक्षण और परीक्षा के नियम पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय मैन्युअल भाग दो में दिये गये हैं।

सीधे नियुक्त किये गये पुलिस उप-अधीक्षक का जिले में प्रशिक्षण वैसा ही होगा जैसा सहायक पुलिस अधीक्षक के लिए पैरा 528 में विहित किया गया है।

दोनों श्रेणियों के परिवीक्षाधीन उप-अधीक्षकों को रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक द्वारा जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से पुलिस महानिरीक्षक को अग्रेषित की जावेगी जो महानिरीक्षक से परामर्श करने के पश्चात् अपनी सिफारिश के साथ रिपोर्ट को सरकार के मुख्य सचिव के पास भेज देगा।

530. प्रत्येक रिजर्व निरीक्षक को व्यायाम और उन कर्तव्यों की जिनके लिए अध्याय 2 के अधीन रिजर्व निरीक्षक उत्तरदायी होता है, पूरी जानकारी होना चाहिए। सभी राजपत्रित अधिकारियों की अनुपस्थिति में मुख्यालय के पुलिस कार्यालय का प्रभार धारण कर सकने में अर्ह होने के लिए, रिजर्व निरीक्षक को अंग्रेजी की पूरी जानकारी होना चाहिए तथा उसे पत्र-व्यवहार और लेखा की पुलिस-प्रणाली से भी भली-भाँति परिचित होना चाहिए।

531. | विलुप्त

532. लोक अभियोजक के पद के लिए योग्यतायें निम्न प्रकार हैं-

(1) अन्वेषणकर्ता अधिकारी के रूप में दो वर्ष की सेवा,

(2) अंग्रेजी का भली प्रकार ज्ञान,

(3) इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भारतीय दण्ड संहिता, ताण्ड प्रक्रिया संहिता और साक्ष्य अधिनियम में प्रत्येक प्रश्न-पत्र में न्यूनतम 30 प्रतिशत अंक और कुल मिलाकर 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करते हुए विधि स्नातक परीक्षा में उत्तीर्ण होने का प्रमाण-पत्र,

(4) उत्तर प्रदेश के किसी विश्वविद्यालय से विधि की कोई उपाधि।

(क) सहायक पुलिस अभियोजक के रूप में नियुक्त किये जाने में वरीयता उन अधिकारियों को दी जायेगी जो उपरोक्त पद (1), (2) और (4) में विनिर्दिष्ट योग्यतायें रखते हैं।

(ख) यदि जिले में कोई ऐसा अधिकारी उपस्थित न हो, ऊपर (1) (2) और (3) में वर्णित योग्यतायें धारण करने वाला कोई अधिकारी नियुक्त किया जा सकता है।

(ग) यदि जिले में (क) या (ख) में निर्धारित योग्यतायें रखने वाला कोई अधिकारी उपलब्ध न हो तो अधीक्षक को चाहिये कि वह योग्य अधिकारी के लिये उप-महानिरीक्षक से निवेदन करे।

(घ) पुलिस अधीक्षक, परिवीक्षाधीन को सम्मिलित करते हुये, उप-निरीक्षकों को उपरोक्त नियम (3) में निर्देशित परीक्षा में सम्मिलित होने की अनुज्ञा देने के लिये सशक्त है।

533. मण्डल निरीक्षकों को प्रशिक्षण के किसी पाठ्यक्रम में भाग नहीं लेना होता और न उससे किसी परीक्षा में उत्तीर्ण होने की अपेक्षा की जाती है। उन्हें प्लाटून ड्रिल का ज्ञान रखना चाहिये, देखिये पैरा 596.

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