पैरा 520 से 526 अध्याय 34 UP पुलिस रेगुलेशन

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 34

स्थानान्तरण

520. राजपत्रित अधिकारियों के स्थानांतरण राज्य सरकार द्वारा किये जाते हैं।

(2. शा.आ.सं. 2971/द्वितीय-ए-615/1960, दिनांक 8.12.60 द्वारा प्रतिस्थापित )

शासनादेश द्वारा पुलिस महानिरीक्षक को राज्य के भीतर बिना भत्ते वाले पदों पर सभी उप-पुलिस अधीक्षकों का स्थानांतरण करने के लिये प्राधिकृत किया गया है।

पुलिस महानिरीक्षक, राज्य के भीतर किसी भी अराजपत्रित अधिकारी का स्थानांतरण कर सकता है। रेंज (परिक्षेत्र) का पुलिस उप-महानिरीक्षक किसी अराजपत्रित अधिकारी का स्थानांतरण अपने परिक्षेत्र के अन्दर कर सकता है।

ऐसे स्थानांतरण न किये जाने चाहिये जिनके फलस्वरूप अधिकारियों को अपने घरों से दूर रहना पड़े, सिवाय ऐसी स्थिति में, जबकि उनके अवांछनीय सम्पर्कों को समाप्त करना या उनके, ऐसे क्षेत्रों से जहाँ उनकी सत्यनिष्ठा संदिग्ध हो, दूर हटा लेना आवश्यक हो। कान्सटेबिल से उच्चतर कोटि के अधिकारियों को सामान्यता उन जिलों में न रहने देना चाहिए जहाँ उनका निवास स्थान हो या जहाँ उनकी भू-सम्पत्ति हो, मूल निवास स्थान के जिले से निकटवर्ती जिलों में तैनाती यथासम्भव न की जानी चाहिये। कान्सटेबिलों को भी उक्त प्रकार के जिलों में यथासम्भव कम से कम संख्या में रखना चाहिये।

निरीक्षकों, उप-निरीक्षकों तथा सहायक उप-निरीक्षकों को किसी एक जिले में 6 वर्ष तथा किसी एक थाने पर 3 वर्ष से अधिक नहीं रहने देना चाहिये। हेड कान्सटेबिलों को किसी खास जिले में 10 वर्ष और किसी खास थाने में 5 वर्ष से अधिक नहीं रहने देना चाहिये। तराई क्षेत्र में (जिसमें तराई और भावर स्थान भी सम्मिलित हैं) निरीक्षकों, उप-निरीक्षकों, सहायक उप-निरीक्षकों, हेड कान्सटेबिलों तथा कान्सटेबिलों को 5 वर्ष से अधिक न रखा जाए। सामान्यतया किसी भी अधिकारी को उसी जिले से दुबारा और किसी भी दशा में उसकी पिछड़ी नियुक्ति के पाँच वर्ष की अवधि के समाप्ति के पूर्व, नियुक्त नहीं किया जाना चाहिये।

521. महानिरीक्षक, बिना सरकार की मंजूरी के

(क) (1) विदेशी सेवा के भारतीय राज्य में सेवा के अतिरिक्त प्रान्त के भीतर, और

(2) प्रादेशिक सरकार के अन्य विभाग, को किसी ऐसे सरकारी सेवक की जिसे वह बिना सरकार को निर्देशित किए, नियुक्त अथवा प्रशासन के साधारण क्रम में स्थानान्तरित कर सकता है और इस प्रकार रिक्त हुए किसी स्थान को जब आवश्यक हो, पदोन्नति या भर्ती के द्वारा भर सकता है, स्थानान्तरित कर सकता है।

(ख) और पद (क) के निर्बन्धनों के अध्याधीन रहते हुए किसी सरकारी सेवक को प्रान्त के बाहर स्थाई रूप से दो वर्ष से अधिक न होने वाली समयावधि के लिये स्थानान्तरित कर सकता है और ऐसे अस्थाई स्थानान्तरण की समयावधि में दो वर्ष से अधिक न होने वाली समयावधि का विस्तार कर सकता है।

522. जिले से स्थानान्तरण प्रस्तावित करते समय पुलिस अधीक्षक को स्थानान्तरित किये जाने वाले अधिकारी की चरित्र और सेवा नामावली भेजना चाहिए।

सम्बधित अधीक्षक की सहमति से, प्रधान कान्सटेबिलों, कान्सटेबिलों की पारस्परिक अदला-बदली की व्यवस्था की जा सकती है। प्रस्तावित अदला-बदलियों की उप-महानिरीक्षकों को रिपोर्ट की जावेगी। ऐसे स्थानान्तरणों के अवसर पर यात्रा भत्ते भुगतान योग्य न होंगे।

523. अन्य जिले के लिये किसी अधीनस्थ अधिकारी के स्थानान्तरण का आदेश प्राप्त करने पर अधीक्षक, दस दिन के भीतर उसे अपने कर्तव्य से भारमुक्त करने की व्यवस्था करेगा।

स्थानान्तरित अधिकारी कार्य ग्रहण काल प्राप्त करने के अधिकारी हैं, परंतु अधीक्षक स्थानान्तर के आदेश के अधीन किसी अधिकारी के लिए अवकाश स्वीकार नहीं कर सकेगा।

अन्य जिले से स्थानान्तर पर आया हुआ कोई निरीक्षक नये जिले में आगमन के दिनांक से प्रभार ग्रहण करने के प्रमाण-पत्र पर हस्ताक्षर करने का अधिकारी होगा। यदि भारमुक्त होने वाला अधिकारी मुख्यालय पर उपस्थित न हो सके तो प्रभार प्रमाण-पत्र पर उसकी ओर से पुलिस अधीक्षक या उसकी अनुपस्थिति में सहायक पुलिस अधीक्षक या उप-पुलिस अधीक्षक द्वारा हस्ताक्षर किये जाना चाहिये। इसका प्रमाण यह होगा कि भारसाधक अधिकारी को लौटा दिया गया मान लिया जावेगा और स्थायी नवागन्तुक को कार्यग्रहण का समय या अवकाश या मुक्ति उस दिन से गिनी जावेगी जिस दिन भारमुक्त करने वाला अधिकारी प्रभार ग्रहण करता है।

524. पुलिस अधीक्षक अपने जिले के भीतर निरीक्षकों को या उससे निम्न पंक्ति के सभी अधिकारियों का स्थानान्तर कर सकता है। निरीक्षकों और थाने के भारसाधक अधिकारियों की दशा में, उसे आदेश प्राप्त कर लेना चाहिये। यदि जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक किसी अधिकारी को स्थानान्तरित करने के लिए एकमत होने में असमर्थ रहें, मामले को निर्णय के लिए रेन्ज के उप-महानिरीक्षक के पास निर्देशित कर दिया जाना चाहिए।

परन्तु यह कि उस जिले में जहाँ कलेक्टर/उपायुक्त, डिवीजन का भारसाधक कलेक्टर/उपायुक्त हो, इस उप-पैरा के अधीन उसके कर्तव्य जिला मजिस्ट्रेट (कार्यपालिका) द्वारा प्रयोग किये जायेंगे।

थाने के भारसाधक अधिकारी साधारणतया, उसके प्रभार में कम से कम दो वर्ष तक रहेंगे। थानों में अधीनस्थ अधिकारियों का बिना अच्छे कारणों के स्थानान्तरित नहीं किया जाना चाहिये। थाने के कर्तव्यों के लिए दायित्वाधीन कोई अधिकारी को उस कर्तव्य से एक वर्ष से अधिक समय अवधि के लिए, सिवाय कुमायूं के जहाँ थाने के कर्तव्यों से प्रधान कान्सटेबिल को एक बार में दो वर्ष तक के लिये वापस लेना अनुज्ञेय है, को वापस नहीं लेना चाहिये।

525. दो वर्ष से कम की सेवा वाले कान्सटेबिलों को पुलिस अधीक्षक के द्वारा सशस्त्र पुलिस से सिविल पुलिस में या इसके विपरीत स्थानान्तरित किया जा सकता है। फूट पुंलिस के कान्सटेबिलों को सवार पुलिस में उनके स्वयं के निवेदन पर स्थानान्तरित किया जा सकता है। दो वर्ष से अधिक और दस वर्ष से कम की सेवा वाले सिविल पुलिस के कान्सटेबिल को सशस्त्र पुलिस में वा इसके विपरीत, अधीक्षक द्वारा एक वर्ष में छः मास से अधिक की न होने वाली समयावधि के लिए स्थानान्तरित किया जा सकता है। दो वर्ष से अधिक की सेवा वाले सभी सशस्त्र पुलिस के कान्सटेबिलों को और सिविल पुलिस को दो वर्ष से अधिक और दस वर्ष से कम की सेवा वाले कान्सटेबिलों को बल की किसी अन्य शाखा में, उप-महानिरीक्षक की अनुज्ञा से, किसी भी समयावधि के लिए स्थानान्तरित किया जा सकता

है। अन्य सभी दशाओं में बल की एक शाखा से दूसरी शाखा में या अन्य प्रान्तों की पुलिस सेवा से उत्तर प्रदेश पुलिस में पुलिस अधिकारियों के स्थानान्तर के लिए महानिरीक्षक की मंजूरी अपेक्षित होगी।

526. उनकी स्वयं की सहमति के सिवाय, ग्राम चौकीदारों को स्थानान्तरित नहीं किया जा सकेगा।

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