पैरा 43 से 64 अध्याय 5 UP पुलिस रेगुलेशन

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 5

उपनिरीक्षक और सिविल पुलिस के अवर (अधीनस्थ) अधिकारी

थाने का भारसाधक अधिकारी

43. थाने का भारसाधक अधिकारी एक उपनिरीक्षक होता है। अपने प्रभार की सीमाओं के भीतर वह पुलिस प्रशासन को संचालित करता है और बल की सभी शाखाओं पर प्राधिकार रखता है। वह अपने अधीनस्थों की दक्षता, उनके कर्तव्यों के समुचित पालन के लिये और उनके द्वारा तैयार किये गये सभी रजिस्टरों, अभिलेखों, विवरणों और रिपोर्ट की शुद्धता के लिये उत्तरदायी है। वह थाने में रहने वाले सभी सरकारी धन और मूल्यवान सम्पत्ति की सुरक्षित अभिरक्षा के लिये और अपनी लेखा पुस्तिका को शुद्ध रूप से बनाये रखने के लिये उत्तरदायी है। उसे चाहिए कि वे उन्हें उनके काम के लिये अनुदेश दे, दे, उन्हें अपने नियन्त्रण में रखे और अनुशासन बनाये रखें।

44. उसे अपने प्रभार की पूर्ण रूप से स्थानीय जानकारी प्राप्त कर लेना चाहिए और उनके भीतर के सभी प्रधान व्यक्तियों से सुपरिचित हो जाना बाहिए। उसे ग्राम के मुखिया से विनद्धता से व्यवहार करना चाहिए और उनकी हार्दिक सहायता प्राप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए। उसे ग्राम चौकीदारों के प्रति विचारशील होना और उसे सूचना देने के लिये उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिदये। उसे बुरे चरित्र वालों पर, उन्हें थाने के भीतर या बाहर अपराध करने से रोकने के लिए कड़ी दृष्टि रखना चाहिये। वह अपने वरिष्ठों और अन्य थानों के भारसाधक अधिकारियों को, यदि उपलब्ध हों तो, टेलीफोन और तार और उत्तर प्रदेश पुलिस टेलीग्राफिक कोड का प्रयोग करते हुये, महत्वपूर्ण सूचना को तत्परता से फैलाने के लिये, तत्परता से आसूचना देगा।

45. उसे विहित प्रारूप में एक गोपनीय नोट बुक रखना चाहिये और उसमें ऐसी उपयोगी जानकारी, उदाहरणार्थ उन व्यक्तियों का नाम जो गुप्त आसूचना देंगे, अधीनस्थों और अन्य के मामले में गोपनीय अभियुक्तियाँ अभिलिखित करेगा जो किसी शासकीय अभिलेख में स्थान नाप सकें। वह इस नोट बुक को अपने उत्तराधिकारी को सौंप देगा।

46. वह पैरा 546 के द्वारा विहित की गई सीमा तक अपने अधीनस्थों को व्यायाम (ड्रिल) करायेगा।

वह नियतकालिक रूप से कान्स्टेबिलों का परीक्षण उसकी गश्तों और कर्तव्यों के बारे में परीक्षा लंगा जैसा कि "कान्स्टेबिलों के प्रशिक्षण के लिये मार्गदर्शन" में निर्धारित किया गया है। सप्ताह में एक बार वह अपने मुख्यालय पर या उसके निकट तैनात पुलिस तहसीन गारद को यदि कोई हो, को सम्मिलित करते हुये, की सज्जा का निरीक्षण करेगा और किसी न्यूनता की रिपोर्ट करेगा। यह नियतकालिक रूप से अपना यह समाधान करेगा कि बल की सभी शाखाओं के उसके सभी अधीनस्थों के पास जो साप्ताहिक सज्जा निरीक्षण में उपस्थित नहीं हो सकते, उनकी समुचित वर्दी और मज्जा है।

थानों के संगीनों सहित आग्नेयशस्त्र (फायर आर्म्स), कारतूस के थैले और भण्डार और अन्य हथियार स्वयं उसके प्रभार में रहेंगे। उन्हें केवल विनिर्दिष्ट (खास) कर्त्तव्य के लिये ही भण्डार के बाहर किया जायेगा और जब तत्काल उपयोग के लिये उनकी और आगे अपेक्षा न हो, भण्डार में लौटा दिये जायेंगे।

वह अपने सभी अधीनस्थों को ग्रामीण पुलिस को सम्मिलित करते हुये, पुलिस गजट, क्रिमिनल इन्टेलीजेन्स गजट और थाने पर प्राप्त अन्य ऐसी सूचनाओं से, जो उनसे सम्बन्धित हो, परिचित बनाये ग्खेगा।

47. जब वे फालतू किये जा सकें, यह अपने किसी अधीनस्थ को अपने कर्तव्य से चले जाने और थाना छोड़ने की अनुमति दे सकेगा परन्तु यदि वह किसी अधिकारी को रात भर अनुपस्थित रहने की अनुमति दे तो वह उसके कारणों को जनरल डायरी में अभिलिखित करेगा।

48. थाने पर अपती हाजिरी के बीच, यह स्वयं ही डाक को खोलेगा और सभी आदेश, संसूचनायें और वहाँ की या भेजी रिपोटों को प्राप्त करेगा, यह जनरल डाबरी पर हस्ताक्षर करेगा, वह दिन के लिये कर्तव्य (ड्यूटी) नियत करने की व्यवस्था करेगी और ऐसे निर्देश देगा जैसे अपेक्षित हाँ, वह नित्यप्रति मालखाने का निरीक्षण करेगा। वह नित्यप्रति लेखा पुस्तिकाओं की जाँच करेगा, उनकी तुलना जनरल डायरी की संगत प्रविष्टियों से करेगा और अवशेष धन का सत्यापन करेगा। उसकी अनुपस्थिति में किये गये धन के संव्यवहारों और की गई प्रविष्टियों को लौट आने पर उसक द्वारा जाँच, की जानी चाहिए और 'जाँच का परिणाम रोकड़ पर अंकित किया जावे। जब यह दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 157 के अधीन अन्वेषण करने के लिये किसी अधीनस्थ अधिकारी को प्रतिनियुक्त करे, धारा 173 के द्वारा अपेक्षित रिपोर्ट भेजने के पहले उसे यह देख लेना चाहिये कि अन्वेषण समुचित रूप से किया गया है।

49. "पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी पद की परिभाषा के लिये धारा 2 (ण) दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 देखिये। इस धाडा के आशयों के लिये, स्थानीय सरकार में पढ़े-लिखे हाजिर जेष्ठ कान्स्टेबिल को थाने का प्रभार ग्रहण करने के लिये सशक्त कर दिया है, जब कान्सटेबिल की पंक्ति से ऊपर का कोई अधिकारी थाने में हाजिर न हो, परन्तु वह अन्वेषण नहीं कर सकेगा।

थानेदारों के कर्तव्यों के प्रभार का लेना न देना जनरल डायरी में अभिलिखित किया जायेगा, प्रविष्टि दोनों अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित की जायेगी।

जब किसी धाने का अस्थायी भारसाधक अधिकारी प्रधान कान्सटेबिल ही, अत्यधिक तत्कालिक दशा के सिवाय उसे धारा 157 दण्ड प्रक्रिया संहिता के अधीन थाने के भारसाधक अधिकारी की शक्तियों का प्रयोग नहीं करना चाहिये।

50. जब थानेदार को कोई स्थायी परिवर्तन हो, प्रारूप क० 299 में मुक्त करने वाले अधिकारी द्वारा प्रभार का औपचारिक प्रमाण-पत्र अधीक्षक को भेजा जायेगा।

धाने की सभी सरकारी सम्पत्ति-आयुधों और गोला, बारूद को सम्मिलित करते हुये, सूची की एक प्रति प्रमाण-पत्र से संलग्न रहेगा और मुक्त किये गये अधिकारी को, अपनी पदावधि के भीतर होने वाली न्यूनतम या हानि का, स्पष्टीकरण देना चाहिए।

अधीनस्थ उप-निरीक्षक

51. पुलिस थाने को द्वितीय अधिकारी उप निरीक्षक होता है। उसके निम्नलिखित कर्तव्य हैं:-

(1) प्रातः परेड को समवेत करना।

(2) भारसाधक अधिकारी के निर्देश के अनुसार अधीनस्थों को कर्तव्य पर लगाना, उन्हें अनुदेश देना और यह देखना कि उनके द्वारा समुचित रूप से पालन किया जाता है।

(3) भारसाधक अधिकारी को अधीनस्थों द्वारा कर्तव्य पालन में हुई त्रुटियों और लोपों (न करने) को रिपोर्ट करना।

(4) भारसाधक अधिकारी द्वास उसे सौंपे गए मामलों में अन्वेषण करना और उसे अपने परिणाम की रिपोर्ट देना

(5) थानों के संलग्न पुलिस को व्यायाम कराना।

(6) भारसाधक अधिकारी के आदेश को पालन करना और देखना कि उसके आदेशों का अधीनस्थ पुलिस द्वारा पालन किया जाता है।

52. उस थाने पर कोई द्वितीय अधिकारी नहीं हो सकता जहाँ भारसाधक अधिकारी ही एक मात्र उप निरीक्षक है। जहाँ दो से अधिक उपनिरीक्षक हों, द्वितीय अधिकारी से कनिष्ठ होने वाले ऐसे उन्हें कर्तव्यों का पालन करेंगे जैसे भारसाधक अधिकारी द्वारा सौंपे जावें।

53. [विलुप्त]

54. [विलुप्त]

थाने का प्रधान लेखक

55. थाने का लेखक (मुहर्रिर), प्रधान कांस्टेबिल पुलिस थाने का कार्यालय लिपिक, रिकार्ड कोपर और लेखपाल होता है। उसके निम्नलिखित कत्र्तव्य हैं:

(1) जनरल डायरी और अपराधों की प्रथम इत्तिला रिपोर्ट लिखना (पैरा 294 से 296 और 98, 99 तथा 102 देखिये)।

(2) अंग्रेजी हिन्दी में रोकड़ (पुलिस प्रारूप क्र० 224) और दूसरी लेखा पुस्तकें बनाये रखने तथा खाने में होने वाले सभी सरकारी धन और मूल्यवान सम्पत्ति को सुरक्षित अभिरक्षा के लिये भारसाधक अधिकारी के साथ-साथ उत्तरदायी होना।

(3.) हर प्रातः भारसाधक अधिकारी के ध्यान में निष्पादन के लिये, लम्बित प्रत्येक आदेश को, लाना।

(4) जब वे नियतकालिक परिदर्शन करें, ग्राम चौकीदारों की उपस्थिति की उनके बोर्डों पर अभिलिखित करना और उनकी पुस्तकों में प्रविष्टियाँ करना जब प्रविष्टियाँ अपेक्षित हों।

(5) कान्सटेबिलों को पुलिस गजट और क्रिमिनल इन्टेलीजेन्स गजट की अधिसूचनाओं और ऐसे अन्य कागजों को जिन्हें भारसाधक अधिकारी चुने, जोर-जोर से पढ़ कर सुनाना।

(6) विवरणों, वेतन पत्रक और वेतन संक्षेप संकलित करना, रजिस्टर तैयार करना और अन्य लिपिकीय काम करना जो उसे भारसाधक अधिकारी द्वारा समनुदेशित किया जावे।

(7) सभी पुस्तकें और अभिलेख रखना।

(8) जहाँ द्वितीय अधिकारी न हो, सिवाय (4) के पैरा 51 में वर्णित कर्तव्यों का पालन करना।

(9) यदि ऐसा करने को अधीक्षक द्वारा विशेष रूप से प्राधिकृत कर दिया जावे, दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 को धारा 174 के अधीन मृत्यु समीक्षा करना।

56. थाने के संलग्न पढ़े लिखे अन्य पुलिस अधिकारी, थाना लेखक को उसके कर्त्तव्यों के पालन में ऐसी सहायता देंगे, जैसी भारसाधक अधिकारी निर्देशित करें।

57. जब कोई प्रधान कान्सटेबिल थाने का भारसाधक हो (पैरा 49 देखिये) और उसे धारा 157 दण्ड प्रक्रिया संहिता के अधीन अन्वेषण करना हो वह अपने लिपिकीय कर्त्तव्यों को और यदि यह थाना छोड़े: थाने का प्रभार निकटतम जेष्ठ कान्सटेबिल या कान्सटेबिल का सौंप देगा और वह तब तक अपने काम को कार्यान्वित करता रहेगा तब तक कि उसे किसी उपनिरीक्षक द्वारा मुक्त न कर दिया जाये या काम समाप्त न हो जावे, अन्य किसी अवसर पर प्रधान कान्संटेबिल (अन्वेषक प्रधान कान्सटेबिल के सिवाय) अन्वेषण नहीं करेगा।

थाना लेखक के कर्तव्यों के प्रभार का लिया और दिया जाना जनरल डायरी में अभिलिखित किया जायेगा, प्रविष्टि मुक्त किये और मुक्त हुये अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित की जावेगी।

चौकी का भारसाधक प्रधान कान्सटेबिल

58. चौकी का प्रधान कान्सटेबिल अपने प्रसार में रहने वाले कान्सटेबिलों के व्यवस्थित आचरणों और अनुशासन के लिये उत्तरदायी है। वह उनका सूर्योदय और सूर्यास्त के समय निरीक्षण करेगा, वह उनको कर्तव्यों पर लगायेगा और यह देखेगा कि वे अपने कर्तव्य का उचित रूप से पालन करते हैं, वह थाने के भारसाधक अधिकारी के सम्पर्क में अविराम रूप से रहेगा और उसे तत्काल संज्ञेय अपराधों के घटित्त होने और अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं को रिपोर्ट करना और समयों के अन्तर से, जो अधीक्षक द्वारा नियत किये जावें, अपने अधीनस्थों के अनुशासन और उनके द्वारा कर्तव्य पालन के बारे में नियतकालिक रूप से रिपोर्ट करेगा। वह अन्वेषण नहीं कर सकता, किन्तु तब मृत्यु समोक्षों कर सकता है जब वह पुलिस अधीक्षक द्वारा ऐसा करने को विशेष रूप से प्राधिकृत कर दिया जावे।

59. प्रत्येक चौकी कार्यपरिधि और उस पर पुलिस के विशेष कर्तव्यों को अवधारणा भारसाधक अधिकारी द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश के अधीन, की जायेगी। गश्त की पद्धति विहित की जावेगी।

60. [विलुप्त]

कान्सटेबिल

61. सिविल पुलिस के कान्सटेबिल, विशेष अवसरों के सिवाय, आयुध धारण नहीं करेंगे। उनका मुख्य कर्तव्य अपराध का निवारण करना (रोकना) है।

उन्हें जनता के प्रति, जिसके वे सेवक हैं, विनम्र और विचारशील होना चाहिये।

हर एक कास्टेबिल उस समय के सिवाय जबकि उसके उपभोग की अपेक्षा न होने वाले किसी पता लगाने के काम पर नियुक्त किया जावे, वर्दी पहनेगा।

62. हर थाने पर रात और दिन में एक सन्तरी रहेगा, उसका कर्तव्य हवालात में वन्दियों, तिजोरी, मालखाने और थाने की सभी सम्पत्तियों की रक्षा करना होगा।

कर्तव्य पर लगाये गये कान्सटेबिलों को पीतल के चिह्न (टोकन) वितरण भारसाधक अधिकारी बारी-बारी से सन्तरी का कर्तव्य आबन्टित करेगा। सन्तरी का कर्तव्य (ड्यूटी) दिन में दो बार प्रातः और सन्ध्या को, वितरण की जावेगी। सन्तरी के कर्तव्यों की अवधि तीन घण्टे होगी। दिन के समय में और रात में भी सन्तरियों को उपनिरीक्षक या प्रधान कान्सटेबिल द्वारा पद पर लगाना और मुक्क करना चाहिये जब तक कि हवालात में कोई बन्दी और किसी मामले की महत्वपूर्ण सम्पत्ति न हो और मालखाने में 500 रु० से कम का धन हो। चाहे सन्तरियों को ज्येष्ठ अधिकारी द्वारा पदस्थ और मुक्त किया जावे या नहीं, मुक्त होने पर हर सन्तरी मुक्त करने वाले सन्तरी से चिह्न (टोकन) बदल लेगा। इस पद्धति के अधीन कत्र्तव्य पर रहने वाले सन्तरी के पास सदैव क्रमांक ? का टोकन रहेगा क्योंकि यह टोकन पहले सन्तरी को दिया जायेगा और फिर मुक्ति पर एक सन्तरी से दूसरे सन्तरी के पास जाता रहेगा। मुक्त करने वाला सन्तरी सदैव ही मुक्त किये जाने वाले सन्तरी की उपस्थिति में * तिजोरी के ताले की जाँच और हवालात में बन्दियों की गिनती करेगा। तिजोरी और हवालात की चाबियाँ थाने में उपस्थित ज्येष्ठ अधिकारी द्वारा रखी जावेंगी।

जब रात्रि में सन्तरियों को पदस्थ करना और मुक्त करना अधिकारी के लिये. आवश्यक हो, कर्तव्यों के वितरण की सन्ध्याकालीन रिपोर्ट को दर्शाता चाहिये कि कौन सा अधिकारी ऐसा करेगा।

जेब हवालात में बन्दियों को प्रवेश दिया जाना या उसमें से हटाया जाना हो, उपस्थित ज्येष्ठ अधिकारी उसे स्वर्य खोलेगा या अपनी उपस्थिति में खुलवायेगा।

हर दिन थाने में कर्तव्यों का वितरण न्यायिक रूप से किया जाना चाहिये ताकि हर आदमी बारी-बारी से दिन और रात में, कठोर और सरल काम अपने कर्तव्यों में पा सकें।

63. थाने के (वृत्त) फेरे जगहों में विभाजित किये जायेंगे, और हर फेरे की जगह के लिये एक या अधिक कान्सटेबिल नियुक्त किये जायेंगे। कोई कान्सटेबिल बाहर नहीं जावेगा जब तक कि वह किसी विशेष कर्तव्य से प्रभारित न हो, किन्तु जब भेजा जावे तो उसे यह अनुदेश दिया जाये कि वह निगरानी के अधीन व्यक्तियों फरार अपराधियों, घूमने वाली जन जातियों और हो रही घटनाओं के बारे में रास्ते में पुछताछ करे, थाने में लौटने पर उसे भारसाधक अधिकारी को रिपोर्ट देना चाहिये।

साधारणतया किसी कान्स्टेबिल को थाने या चौकी से लगातार तीन दिन और दो रातों से अधिक के लिये बाहर नहीं रहना चाहिये, उस अधिकारी को पहले परे न देखी जा सकने वाली घटनाओं के कारण की जाने वाली विस्तार के अपवाद के अध्याधीन रहते हुये, जो उसे बाहर भेजे, उसकी अनुपस्थिति का समय नियुक्त करना चाहिये।

64. जिला पुलिस के कान्स्टेबिल जब कर्तव्य पर हों, रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर प्रकट होने और बने रहने के अधिकारी होंगे। स्टेशन मास्टर की जिला पुलिस के उप कान्सटेबिल के हटने के लिये आदेश देने का कोई अधिकार नहीं है जो उसके रेलवे स्टेशन पर कर्त्तव्यस्थ हो। जिला पुलिस का सादा वस्त्रों वाला हर वह कान्सटेबिल जो रेलवे स्टेशन पर कत्र्तव्य पर भेजा जावे, अपने साथ उसको प्रतिनियुक्त करने वाले उपनिरीक्षक का सामान्य लिखित आदेश ले जायेगा और उसे स्टेशन मास्टर की, यदि अपेक्षा की जावे प्रस्तुत  करेगा।

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