
190. निम्नलिखित नियम सड़कों पर गश्त लगाने को शासित करते हैं:-
(1) साधारणतया सिविल पुलिस को इस काम में लगाया जावेगा, विशेष परिस्थितियों में सशक्त और सवार पुलिस का भी उपयोग किया जा सकता है, ग्राम चौकीदारों का प्रयोग नहीं किया जा सकेगा।
(2) जब सड़कों पर नियमित गश्त करने के लिये कान्सटेबिल फालतू किये जा सकते हों। हर भाने का भारसाधक अधिकारी प्रतिदिन एक सांकेतिक शब्द चुनेगा और उस दिन की जनरल डायरी के प्रारम्भ में उसे अभिलिखित करेगा। वह कागज की परची पर अपने हस्ताक्षरों के ऊपर उस शब्द को लिखेगा, जिसे वह गश्त करने वाले को दे देगा, उस थाने का भारसाधक जहाँ यह कागज दिया जाये, उसे जनरल डायरी की उस प्रति के साथ संलग्न करेगा जिसे वह मुख्यालय को भेजे। बन्दियों और खजानों के मार्ग रक्षण के सिवाय गश्ती दल को ले जाने के लिये किसी सार्वजनिक कर्तव्य का भी लाभउठाया जा सकता है। गश्ती दल को बाहर भेजे जाने का समय बदलते रहना चाहिये और उन्हें उस समय और उन अवसरों पर जब वे सबसे अधिक उपयोगी हो सकें, उदाहरणार्थ मूल्यवान वस्तुओं से युक्त गाड़ियों के साथ जाया जा सकता है। गश्ती दल को देखना चाहिये कि सड़कों के किनारे व्यवस्था बनी रहती है तथा उन्हें यात्रियों को सुरक्षा की निगरानी करना चाहिये। थाने या जिलों की सीमाओं पर कोई ध्यान न दिया जावे। दो थानों के बीच की सड़क पर गश्त करना, उन धानों की पुलिस का ही कार्य है, चाहे वह एक ही जिले में हो या भिन्न जिलों में।
(3) सड़क के गश्त करने के लिये रात्रि में कर्त्तव्य पर नियोजित कान्सटेबिल भालों या बन्दूकों से सशस्त्र हो सकते हैं।
191. गश्ती दल को सड़क के किनारे वृक्षों को क्षति, सड़कों पर अतिक्रमण को रोकने और उनकी रिपोर्ट करना चाहिये। यदि सड़क के किनारे तार की लाइन हो, गश्ती दल को उसकी देख-परख तथा खम्भों या तारों को हुई किसी हानि की रिपोर्ट करना चाहिये, ऐसी रिपोर्ट तार घर को तुरन्त भेज देना चाहिये।
192. यह सुनिश्चित करने के लिये पुलिस को टेलीग्राम के ताँबे के तारों की चोरी की पर्याप्त रूप से तत्परता से सूचना मिल जावे, तारघर के साथ यह व्यवस्था की गई है कि वह लाइनमैन जो तार चोरी चाले के पश्चात् टूट की मरम्मत को भेजा जावे, यदि संभव हो, अपने साथ पुलिस अधिकारी को भी ले जावे। जिला या रेलवे पुलिस के ऐसे अधिकारी की, जिससे ऐसे अवसर पर लाइनमैन के साथ जाने को निवेदन किया जावे, ऐसे निवेदन का पालन करना चाहिये और यदि चोरी उसकी अधिकारिता के भीतर न हुई हो, तो उसे चोर का पता लगाने के लिया गया आवश्यक पग उठाना चाहिये और संबंधित थाने को संसूचित कर देना चाहिये।
193. जिला पुलिस और रेलवे पुलिस के अधिकारियों से यह आशा की जाती है कि वह इस प्रकार के अपराधों का दमन करने और उनका पता लगाने में एक दूसरे को और तार विभाग सहयोग प्रदान करेंगे। 'यदि उनके अतिरिक्त अन्यया रूप से चोरी की कोई सूचना थाने के भारसाधक अधिकारी से प्राप्त हो जाये तो उसे लाइनमैन से सुनने की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं हैं। अपितु उसे तत्काल मौके पर जाना चाहिये, उस कार्य में अपराधियों पर निगरानी रखने की दृष्टि से, तार को चोरी हो जाने के बाद कुछ दिनों तक तार लाइन की निगरानी करने के लिये विशेष उपाय किये जाने आहिये। जिन पड़ोसी थानों में से होकर तार लाइन आगे बढ़ती है उनको सूचित कर देना चाहिये।
194. कस्बों में गश्त लगाने का कार्य, "फेरों की पद्धति" के द्वारा किया जाना चाहिये जिसकी आवश्यक विशेषताएँ यह हैं कि प्रत्येक सिपाही को 6 में से दो रातों को विश्राम मिल जाये, फेरे में कम से कम एक व्यक्ति दिन में और दो रात्रि को (दस बजे से प्रातः छः बजे तक) कर्त्तव्य पर रहें और किसी सिपाही को रात्रि में एक समय में 4 घण्टे से अधिक कार्य न करना पड़े।
इस पद्धति के अनुसार फेरों का कर्तव्य वितरण का एक उदाहरण निम्नलिखित तालिका में दिया गया है जिसमें स्थानीय अपेक्षाओं के अनुसार फेर बदल किया जा सकता है-
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6-8, |
8-10 |
10-1 |
1-4 |
4-6 |
6-8 |
8-10 |
10-2 |
2-6 |
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पहला |
क |
ख |
ग |
घ |
क |
ख |
गघ |
ड. ख |
कख |
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दूसरा |
ग |
ग |
ड |
च |
ग |
घ |
ड.च |
कख |
गघ |
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तीसरा |
ड |
च |
क |
ख |
ड |
च |
कख |
गघ |
ड.च |
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चौथा इत्यादि |
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6-8 |
8-11 |
11-2 |
2-5 |
5-8 |
8-10 |
10-2 |
2-6 |
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पहला |
कख |
ग |
घ |
ड |
च |
गघ |
ड.च |
कख |
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दूसरा |
गघ |
ड |
च |
क |
ख |
ड.च |
कख |
गघ |
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तीसरा |
ड.च |
क |
ख |
ग |
घ |
कख |
गघ |
ड.च |
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चौथा इत्यादि |
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टीप- (1) रात्रि में फेरे के कर्त्तव्य पर रहने वाले सिपाहियों को निरन्तर चलते रहना चाहिये और उन स्थानों पर विशेष ध्यान देना चाहिये जहाँ सेंध लगाये जा सकने की संभावना हो। दिन के दौरान कर्त्तव्यों पर तैनात सिपाहियों में से आधे को थाने या चौकी पर उपस्थित रहना चाहिये। कर्त्तव्य से निवृत्त सभी सिपाहियों को रात्रि में उपस्थित रहना चाहिये।
(2) जहाँ बल यथेष्ट रूप से बड़ा हो फेरों को मण्डल में व्यवस्थित करना कर चाहिये, हर मंडल किसी उप-निरीक्षक या हेड कान्सटेबिल के प्रभार में हो। यदि चौकीदारों को निगरानी और पहरे के लिये काम में लिया जावे, उसके परिवेक्षण के कर्तव्य का पालन कान्सटेबिल द्वारा किया जावे। इस अधिकारी को विशेष गश्ती दल के साथ यह देखने को कि क्या फेरे पर तैनात सिपाही अपना कार्य उचित रूप से कर रहे हैं और चोरों को पता लगाने के लिये, चक्कर लगाना चाहिये। यह विशेष दल कभी-कभी लाभ के लिये सादा वस्त्र पहन सकता है। कस्बे में फेरे पर और रात्रि के विशेष गश्त पर तैनात सिपाहियों को भाले, सोटे, उपलब्ध कराया जाना चाहिये।
(3) गश्त पर तैनात कान्सटेबिलों को रात्रि में रजिस्ट्रीकृत बुरे चरित्र वालों की चौकसी करने के लिये उत्तरदायी बनाया जाना चाहिये।
195. रात्रि की गश्त के पूरक विकल्प के रूप में, कस्बों और नगरों में नाकाबन्दी के लिये टुकड़ी पदस्थ की जा सकती है :-
(1) रजिस्ट्रीकृत बुरे चाल चलन वालों के मकानों और मकानों तक के रास्तों की निगरानी के * लिये (पैरा 236 से तुलनार करें)।
(2) अपराध के स्थल की ओर से आने या उस ओर जाने वाले अपराधियों के रोकने के लिये, साधारणतया दो सिपाही एक टुकड़ी बना लेंगे, किन्तु विशेष परिस्थितियों में उदाहरणार्थ यदि खतरनाक अपराधियों की मिलने की संभावना हो, इस संख्या को बढ़ा दी जावे। उन्हें घूमना-फिरना या आवास नहीं करना चाहिये, अपितु वे भली प्रकार छुपे रहें। नाकेबन्दी के हर सदस्य को बारीबारी से पहरा देना चाहिये और शेष को सोना चाहिये । यदि कोई बुरें चरित्र वाला व्यक्ति जिसके घर की नाकाबन्दी की गई हो; अपना घर रात्रि में छोड़े, टुकड़ों को साधारणतया उसका पीछा नहीं करना चाहिये। नाकाबन्दी की पद्धति का उपयोग बुरे चरित्र वालों का, जिनके बारे में अस्थायी रूप से सक्रिय होने का संदेह हो तथा उन क्षेत्रों में जहाँ डकैती और सेंध लगाना व्यापक हो, नियंत्रण के लिये काम में लायी जाती है।